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June 03, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

डीज़ल मूल्य से किराया जोड़ने का कानून बनाने की मांग, अखिल भारतीय परमिट के दुरुपयोग पर होगी कार्रवाई

रायपुर,/ यात्री बसों में किराया वृद्धि की मांग को लेकर परिवहन विभाग ने सभी बस संचालकों की बैठक लेकर चर्चा की। विभाग ने बारी-बारी से सभी संचालकों से बात की और बस संचालन में आ रही कठिनाइयों की जानकारी ली।

बस संचालकों ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पिछली बार किराया वृद्धि वर्ष 2021 में की गई थी। डीजल की मूल्य में लगातार वृद्धि होने के कारण संचालकों ने मांग रखी कि यात्री किराया डीजल के मूल्य में कमी या वृद्धि के साथ घटने-बढ़ने का स्थायी कानून बनाया जाए।

परिवहन विभाग ने कहा कि अन्य राज्यों के दरों का तुलनात्मक अध्ययन कर नया किराया दर पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।

अखिल भारतीय पर्यटक परमिट पर सख्ती

बैठक में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट के संचालन पर भी चर्चा हुई। विभाग ने स्पष्ट किया कि अखिल भारतीय पर्यटक परमिट का स्टेज कैरिज के रूप में संचालन किए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बस संचालकों को दिए गए 10 अहम निर्देश

परिवहन विभाग ने बैठक में बस संचालकों को निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करने को कहा:

महिला एवं दिव्यांगजन आरक्षण

प्रत्येक स्टेज कैरिज में क्षमता का 25 प्रतिशत भाग महिला यात्रियों के लिए आरक्षित रहेगा तथा “महिलाओं के लिए आरक्षित” का बोर्ड स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। प्रत्येक बस में दिव्यांगजनों के लिए न्यूनतम 03 सीटें आरक्षित रखी जाएं और उनके चढ़ने-उतरने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

टिकट एवं रिकॉर्ड संधारण

प्रत्येक यात्री को पूर्व-मुद्रित टिकट जारी करना अनिवार्य होगा। टिकट में परमिट संख्या, परमिट प्रकार, वाहन क्रमांक, मार्ग, किराया, टिकट क्रमांक, जारी करने की तिथि तथा परिचालक का नाम एवं हस्ताक्षर अंकित रहेंगे। टिकट रिकॉर्ड न्यूनतम 02 वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा।

कर्मचारी पहचान-पत्र एवं यूनिफॉर्म

प्रत्येक चालक एवं परिचालक को पहचान-पत्र तथा यूनिफॉर्म जारी करना अनिवार्य होगा, जिसमें नाम, पता, फोटो, लाइसेंस, बैज क्रमांक, परमिट विवरण एवं वैधता अंकित रहेगी।

वाहन में जानकारी का प्रदर्शन

वाहन के बाहरी भाग पर वाहन स्वामी का नाम-पता, मोबाइल नंबर, परमिट संख्या एवं प्रकार, परमिट वैधता, रूट, सेवा विवरण, पुलिस तथा परिवहन हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट अंकित किए जाएं। वाहन के अंदर चालक, परिचालक, परिचय क्रमांक एवं हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएं।

अग्नि सुरक्षा एवं आपातकालीन निकास

सभी यात्री बसों, स्लीपर कोच तथा स्कूल बसों में आपातकालीन निकास द्वार, आपातकालीन खिड़कियां, रूफ एस्केप हैच, आपातकालीन हथौड़े, अग्निशामक यंत्र, आपातकालीन प्रकाश व्यवस्था तथा प्राथमिक उपचार पेटी कार्यशील स्थिति में रखना अनिवार्य होगा। वेल्डेड स्ट्रक्चर, अवैध पार्टिशन, अतिरिक्त सीट या अन्य अवरोध से आपातकालीन निकास बाधित करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम

AIS-119, AIS-063 एवं AIS-135 के प्रावधानों के अनुसार लागू श्रेणी के वाहनों में Fire Detection and Alarm System तथा Fire Detection and Suppression System कार्यशील स्थिति में स्थापित होना अनिवार्य होगा।

अवैध संरचनात्मक संशोधन पर प्रतिबंध

सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना वाहन में अवैध बॉडी मॉडिफिकेशन, चेसिस एक्सटेंशन, गैंगवे अवरोध, अनाधिकृत रूपांतरण अथवा अन्य संरचनात्मक संशोधन नहीं किया जाएगा।

परमिट शर्तों का अनुपालन

सभी परमिट धारक निर्धारित परमिट शर्तों, स्वीकृत मार्ग, समय-सारणी, यात्री क्षमता एवं सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय एवं मानवाधिकार आयोग के निर्देश

यात्री सुरक्षा, सड़क सुरक्षा एवं बस अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम संबंधी जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए।

नियमानुसार कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन पर संबंधित वाहन परमिट धारक के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम, 1988 एवं मोटरयान नियम, 1994 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें फिटनेस निलंबन, लाइसेंस निरस्तीकरण, वाहन जब्ती, दंडात्मक कार्रवाई तथा अभियोजन शामिल हो सकता है।

परिवहन विभाग ने कहा कि यात्री सुरक्षा सर्वोपरि है और नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

3.92 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सड़क से आवागमन होगा सुगम, ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ

रायपुर/वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ में 3 करोड़ 92 लाख रुपये की लागत से निर्मित गोतमा-कोतासुरा मार्ग का लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सरल, सुरक्षित और सुगम हो जाएगी तथा ग्रामीणों को आवागमन में बेहतर सुविधा मिलेगी।

बेहतर सड़क संपर्क से लोगों की आवाजाही होगी आसान

लोकार्पण अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होती हैं। बेहतर सड़क संपर्क से लोगों की आवाजाही आसान होती है, व्यापार और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधारभूत अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। विकास कार्यों का उद्देश्य केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को अधिक सुगम और समृद्ध बनाना है।

मार्ग के निर्माण से गांवों के लोगों को सीधे मिलेगा लाभ

वित्त मंत्री ने कहा कि गोतमा-कोतासुरा मार्ग के निर्माण से आसपास के गांवों के लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा और क्षेत्र के विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मार्ग सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

सुकमा में तीन जिलों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक: विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और जनकल्याणकारी योजनाओं की हुई व्यापक समीक्षा

मुख्यमंत्री का निर्देश : बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे शासन का वास्तविक लाभ, शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो सुनिश्चित

रायपुर / शौर्यपथ / शासन-प्रशासन की वास्तविक सफलता तभी है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और आम नागरिक को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भटकना न पड़े। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिला कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, राजस्व मामलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत अधोसंरचना और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बस्तर संभाग के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों सहित प्रत्येक गांव और प्रत्येक पात्र परिवार तक शासकीय योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनके माध्यम से लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है।

बैठक में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह, सीसीएफ श्री आलोक कुमार तिवारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे, जबकि अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

बस्तर मुन्ने और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान मिशन मोड में संचालित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर मुन्ने अभियान तथा मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शिविर आधारित सेवाओं के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का अधिकतम निराकरण किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर दो से तीन दिन तक लगातार शिविर आयोजित कर समाधान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और भरोसेमंद सेवाओं का वास्तविक अनुभव होना चाहिए।

लंबित राजस्व प्रकरणों के लिए विशेष अभियान, पुनर्वासित परिवारों को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने राजस्व विभाग के कार्यों को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अभिलेख सुधार जैसे प्रकरण सीधे नागरिकों के अधिकारों और जीवन से जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने समय-सीमा से बाहर तथा एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टा वितरण, पुनर्वासित परिवारों को शासकीय योजनाओं का लाभ, तथा अन्य राज्यों में रह रहे बस्तर मूल के परिवारों के पुनर्स्थापन पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा “बस्तर ब्रांड” से नया बाजार

मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों को वनोपज आधारित गतिविधियों के साथ झींगा पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित उद्यमों से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उन्होंने शबरी नदी क्षेत्र के तालाबों को विकसित कर झींगा पालन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए तथा महिला समूहों के उत्पादों को “बस्तर ब्रांड” के रूप में विकसित कर बाजार से जोड़ने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूह केवल आर्थिक इकाइयां नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की सशक्त धुरी बन सकती हैं।

पर्यटन, कृषि और आदिवासी उद्यमिता को नई गति

बैठक में सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स, जंगल सफारी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों को स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने आदिवासी समुदाय को धान प्रसंस्करण एवं मिलिंग गतिविधियों से जोड़कर स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के निर्देश दिए।

खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डीएपी उर्वरक की सीमित उपलब्धता को देखते हुए एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करने पर विशेष बल दिया।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन बनेगी जवाबदेह प्रशासन का सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को एक मजबूत, प्रभावी और भरोसेमंद मंच के रूप में विकसित कर रही है, जिससे आम नागरिक आसानी से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की उच्च स्तर पर निगरानी होगी, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी और शिकायतों का समयबद्ध समाधान संभव होगा। उन्होंने कहा कि सुशासन की असली पहचान संवेदनशील, जवाबदेह और परिणामोन्मुख प्रशासन है।

उन्होंने डीजल और पेट्रोल के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है और अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और नए आपराधिक कानूनों पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, बिहान योजना, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, स्वास्थ्य सेवाओं और ई-ऑफिस संचालन की समीक्षा की। आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण उपचार का वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की कमी वाले विषयों में एआई आधारित तकनीकों के उपयोग पर बल दिया तथा बीजापुर जिले की “शिक्षा मितान” पहल की सराहना की। उन्होंने स्कूलों में सीखने के स्तर को बेहतर बनाने, नवाचार आधारित शिक्षा पद्धतियों को बढ़ावा देने और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा, पुलिस व्यवस्था तथा देश में लागू नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रशिक्षण, व्यापक जनजागरूकता और कानूनों के प्रभावी प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। साथ ही नशा मुक्ति अभियान को और अधिक प्रभावी रूप से संचालित करने पर बल दिया।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी विभागों से बेहतर समन्वय, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण और जवाबदेह कार्यसंस्कृति के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि अधिकारियों के समर्पित एवं समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी और विकसित राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया जा सकता है।

संभाग आयुक्त दुर्ग का बड़ा प्रशासनिक फैसला, आचरण नियमों के उल्लंघन पर हुई कार्रवाई दुर्ग । शौर्यापथ। सुशासन तिहार के दौरान आम जनता के साथ कथित अभद्र व्यवहार और कर्तव्य…

विशेष लेख | शौर्यपथ

13 दिसंबर 2009 की सुबह पाकिस्तान के आर्थिक केंद्र कराची में हुई एक ऐसी घटना ने पूरे बैंकिंग तंत्र को झकझोर दिया, जिसे आज भी देश के इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे संगठित बैंक डकैतियों में गिना जाता है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी वास्तविक घटना थी जिसमें बैंक की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला व्यक्ति ही करोड़ों की लूट का मास्टरमाइंड निकला।

कराची स्थित Allied Bank Limited की मुख्य शाखा में हुई इस डकैती ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि किसी भी संस्थान के लिए सबसे बड़ा खतरा कई बार बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से होता है।

31 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा पर हाथ साफ

रविवार की सुबह बैंक बंद था। इसी अवसर का फायदा उठाते हुए सुरक्षा एजेंसी SPS में तैनात गार्ड शाहिद महमूद के नाम से कार्यरत व्यक्ति अपने 4-5 साथियों के साथ बैंक परिसर में पहुंचा। बैंक में पहले से मौजूद सुरक्षाकर्मियों और चौकीदारों को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया गया।

इसके बाद लुटेरों ने गैस कटर की मदद से बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में स्थित उस लॉकर को निशाना बनाया, जिसमें विदेशी मुद्रा रखी गई थी। लगभग तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में गिरोह करीब 31 करोड़ पाकिस्तानी रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा और नकदी लेकर फरार हो गया।

लूटी गई रकम में ब्रिटिश पाउंड, यूरो, अमेरिकी डॉलर और पाकिस्तानी मुद्रा शामिल थी। बिना गोली चले और बिना किसी बड़े संघर्ष के इतनी बड़ी रकम का गायब हो जाना पाकिस्तान के बैंकिंग इतिहास की सबसे सनसनीखेज घटनाओं में दर्ज हो गया।

जांच में खुला सबसे बड़ा राज

पुलिस जांच में सामने आया कि कथित सुरक्षा गार्ड का असली नाम हामिद अली था। उसने नौकरी पाने के लिए एक गुमशुदा व्यक्ति के राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाई थी।

यही नहीं, उसे बैंक की सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रॉन्ग रूम की संरचना और विदेशी मुद्रा रखने वाले लॉकर की पूरी जानकारी थी। यही जानकारी इस डकैती की सफलता का सबसे बड़ा कारण बनी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बैंक में मौजूद एक अन्य गार्ड इमरान ने भी मौके का फायदा उठाकर लूट की रकम का एक हिस्सा अपने पास छिपा लिया था और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की थी। बाद में उसे भी सह-आरोपी बनाया गया।

सिर्फ 6 दिन में पुलिस की बड़ी सफलता

कराची पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SIU) ने तेजी से कार्रवाई करते हुए डकैती के महज छह दिन बाद मुख्य आरोपी हामिद अली और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने लूटी गई रकम का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा बरामद कर लिया। हालांकि पूरी राशि कभी बरामद नहीं हो सकी और शेष रकम की तलाश में पुलिस ने विभिन्न प्रांतों में अभियान चलाया।

अदालत ने दिखाई सख्ती

मामले की सुनवाई आतंकवाद विरोधी अदालत (ATC) और बाद में उच्च न्यायिक मंचों पर हुई। मुख्य सरगना हामिद अली और उसके सहयोगियों को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालतों ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं को भी लगातार खारिज किया।

यह फैसला इस संदेश के रूप में देखा गया कि वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के प्रति न्यायपालिका किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी।

एक डकैती जिसने बदल दिए पूरे सिस्टम के नियम

इस घटना ने पाकिस्तान की बैंकिंग और निजी सुरक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। परिणामस्वरूप सरकार, पुलिस प्रशासन और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को व्यापक सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

सुरक्षा एजेंसी पर कार्रवाई

लापरवाही और बिना पर्याप्त सत्यापन के गार्ड नियुक्त करने के आरोप में SPS सुरक्षा एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया और उसके कार्यालय को सील कर दिया गया।

गार्डों का अनिवार्य सत्यापन

पूरे सिंध प्रांत में कार्यरत 60 हजार से अधिक निजी सुरक्षा गार्डों का बायोमेट्रिक और पुलिस सत्यापन शुरू किया गया। बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि बिना सरकारी अनुमति और जांच के किसी गार्ड की नियुक्ति नहीं की जाएगी।

CCTV व्यवस्था का आधुनिकीकरण

जांच में पता चला कि बैंक के सीसीटीवी कैमरों की गुणवत्ता इतनी कमजोर थी कि संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद सभी बैंकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले HD कैमरे, सुरक्षित डेटा बैकअप और आधुनिक निगरानी प्रणाली अनिवार्य कर दी गई।

सुरक्षा ऑडिट और जवाबदेही

बैंकों को नियमित सुरक्षा ऑडिट, थर्ड पार्टी मूल्यांकन और आपातकालीन परिस्थितियों में तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करने के निर्देश दिए गए। बैंक प्रबंधन की जवाबदेही भी पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर कर दी गई।

इतिहास का सबक

कराची की यह ऐतिहासिक बैंक डकैती केवल करोड़ों रुपये की चोरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा उदाहरण है जिसने यह साबित किया कि सुरक्षा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी अक्सर वही व्यक्ति हो सकता है जिस पर सबसे अधिक भरोसा किया जाता है।

2009 की इस घटना ने पाकिस्तान के बैंकिंग क्षेत्र को एक कठोर सबक दिया—सुरक्षा केवल हथियारों, ताले और कैमरों से नहीं आती, बल्कि सही सत्यापन, पारदर्शिता और जवाबदेही से सुनिश्चित होती है।

आज भी जब बैंकिंग सुरक्षा की चर्चा होती है, तो कराची की यह डकैती एक चेतावनी के रूप में याद की जाती है कि एक अंदरूनी साजिश किस तरह पूरे सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर सकती है और करोड़ों की संपत्ति को कुछ घंटों में गायब कर सकती है।

शौर्यपथ राशिफल। आज जून महीने के पहले दिन ग्रहों की चाल में हुए बदलाव का असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिल रहा है।…

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाले जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों के तहत बिलासपुर जिले में “मोर गांव, मोर तरिया” अभियान को तेजी से अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से न सिर्फ गांवों में जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक मजबूत नींव भी तैयार हो रही है। राज्य सराकर के जल संरक्षण अभियान को एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य, मस्तूरी में काम तेज
अभियान के तहत बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत मस्तूरी की ग्राम पंचायत बोहारडीह में नवीन तरिया (तालाब) निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन ने आने वाले मानसून को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत वर्षाकाल शुरू होने से पहले निर्माण कार्य को गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आगामी सीजन में वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सके।
जिले में 38 नवीन तालाबों को मिली मंजूरी
जल संकट के स्थाई समाधान के लिए जिले में व्यापक स्तर पर जल संरचनाओं का विस्तार किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत बिलासपुर जिले में कुल 38 नवीन तरिया (तालाब) निर्माण कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सभी स्वीकृत तालाबों का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि वर्षाकाल में पानी रोकने की मजबूत व्यवस्था विकसित हो। इन तालाबों के निर्माण से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, मवेशियों के लिए निस्तारी की सुविधा होगी और गर्मियों में होने वाले जल संकट से मुक्ति मिलेगी।
ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर मिल रहा रोजगार
“मोर गांव, मोर तरिया” अभियान दोहरे लाभ के साथ ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इन निर्माण कार्यों में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण श्रमिकों को नियोजित किया गया है। गांवों में तालाबों के रूप में स्थाई जल संपदा का निर्माण हो रहा है। श्रमिकों को अपने ही गांव में रोजगार मिलने से पलायन पर रोक लगी है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।
गुणवत्ता पर विशेष नजर
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सभी निर्माण स्थलों की सतत मॉनिटरिंग (निगरानी) की जा रही है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सभी कार्य तय समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा सकें।

  रायपुर / भारत सरकार और राज्य शासन के निर्देशानुसार छत्तीसगढ के कोरबा जिले में खरीफ वर्ष 2026 के लिए कृषकों को गुणवत्तायुक्त एवं पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के उप संचालक श्री डी.पी.एस. कंवर ने स्पष्ट किया है कि जिले में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण है और किसानों को किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत ने उर्वरकों के भंडारण और वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।

*जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उपयोग *

नील हरित काई एवं हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को नाइट्रोजन पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं तथा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उसकी उर्वरता शक्ति में वृद्धि करती हैं। कृषकों को हरी खाद के रूप में ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ तथा मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से वितरित किया जा रहा है। साथ ही जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र लखनपुर, कृषि महाविद्यालय कटघोरा, शासकीय उद्यान रोपणी पत्ताड़ी (कोरबा) एवं चिन्हांकित किसानों के खेतों में कराया जा रहा है।

नैनो उर्वरक लेना अनिवार्य नहीं, रहेगा पूर्णतः वैकल्पिक

वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर इस बार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। रासायनिक खादों के साथ-साथ जैविक और हरी खाद के संतुलित उपयोग पर जोर है। सहकारी समितियों में पिछले वर्ष की मांग के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया और 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा नैनो यूरिया/वैकल्पिक उर्वरकों और डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा नैनो डीएपी/एनपीके के माध्यम से दी जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी किसान को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।

आंकड़ों में खाद और बीज का भंडारण

कोरबा जिले की सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है।
सहकारी क्षेत्र के लिए 12 हजार 700 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित है। लक्ष्य के विरुद्ध 7 हजार 132.58 मीट्रिक टन (56.16 प्रतिशत) उर्वरक भंडारित किया जा चुका है। किसान अब तक 1 हजार 129.94 मीट्रिक टन खाद का उठाव कर चुके हैं, जबकि 6,002.64 मीट्रिक टन खाद अभी भी समितियों में शेष है। नैनो तरल उर्वरक का कोरबा जिले में कुल 11 हजार 886 लीटर (6 हजार 842 लीटर नैनो यूरिया और 5 हजार 44 लीटर नैनो डीएपी) का भंडारण किया गया था, जिसमें से 483.50 लीटर का वितरण हो चुका है और 11 हजार 402.50 लीटर स्टॉक में उपलब्ध है। इसके अलावा इच्छुक किसानों को हरी खाद के लिए ढैंचा बीज (8 किग्रा/एकड़) और मूंग बीज (4 किग्रा/एकड़) का वितरण भी किया जा रहा है।

28 को नोटिस, 58 बोरी यूरिया जब्त

किसानों को सही दाम और गुणवत्तापूर्ण खाद दिलाने के लिए उर्वरक निरीक्षकों की टीमें लगातार विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। 1 अप्रैल 2026 से अब तक 115 केंद्रों की जांच की जा चुकी है, जिसमें गड़बड़ियां सामने आई हैं। अनियमितता मिलने पर 28 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 8 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस/बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक केंद्र पर अवैध कार्रवाई करते हुए 58 बोरी यूरिया जब्त किया गया है। कृषि विभाग के अनुसार कलेक्टर के निर्देश पर यह निरीक्षण अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण में किसी भी प्रकार कीअनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेशए 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियमए 1955 के प्रावधानों के तहत कठोर प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

पुलिस थाने के बाहर हंगामा, सिर में चोट लगने का दावा; टीएमसी ने बीजेपी पर लगाया हमला कराने का आरोप, भाजपा ने कहा— ‘सहानुभूति पाने की कोशिश’

हुगली (पश्चिम बंगाल),। पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गई है। हुगली जिले के चंडीतला थाना परिसर के बाहर शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के घायल होने की घटना ने राज्य की राजनीतिक फिजा को और गर्म कर दिया है। घटना को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जबकि पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी अपने समर्थकों के साथ हाल ही में गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर चंडीतला पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। यहां उन्हें पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपना था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी दौरान पुलिस थाने के बाहर बड़ी संख्या में लोग और विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब कुछ लोगों ने सांसद को काले झंडे दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी, धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।


टीएमसी का आरोप: ‘सिर पर किया गया हमला’

घटना के बाद टीएमसी ने आरोप लगाया कि भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला किया। पार्टी के अनुसार, उनके सिर के पिछले हिस्से पर पत्थर, क्रिकेट गेंद या किसी भारी वस्तु से वार किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी और रक्तस्राव होने लगा।

घटना के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कल्याण बनर्जी सड़क पर बैठे और बाद में सिर पर कपड़ा लगाए दिखाई दिए। टीएमसी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए भाजपा समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया।

पार्टी का कहना है कि यह कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हमला था।


भाजपा का पलटवार: ‘राजनीतिक सहानुभूति बटोरने की कोशिश’

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि सांसद को कोई गंभीर चोट नहीं लगी और घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि यह पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देकर सहानुभूति हासिल करने का प्रयास है।

भाजपा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि जिस समय कल्याण बनर्जी सड़क पर गिरे हुए दिखाई दे रहे थे, उस समय वे मोबाइल फोन पर बातचीत भी कर रहे थे। भाजपा का कहना है कि इससे टीएमसी के गंभीर हमले के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।


अभिषेक बनर्जी प्रकरण के बाद बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता

यह घटना ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर क्षेत्र में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यक्रम के दौरान भी विरोध प्रदर्शन और कथित हमले की खबरें सामने आई थीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं पश्चिम बंगाल में बढ़ती राजनीतिक ध्रुवीकरण और तनावपूर्ण माहौल का संकेत हैं।


इलाके में सुरक्षा कड़ी

घटना के बाद चंडीतला और आसपास के क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। थाना परिसर और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है।


जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सांसद कल्याण बनर्जी को चोट किस परिस्थिति में लगी और क्या यह वास्तव में हमला था या झड़प के दौरान हुई कोई अन्य घटना। मामले की सच्चाई पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध वीडियो फुटेज के विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेगी।

मुख्य बिंदु

  • हुगली के चंडीतला थाना परिसर के बाहर हुआ विवाद।
  • टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के घायल होने का दावा।
  • टीएमसी ने भाजपा समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया।
  • भाजपा ने आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक नाटक बताया।
  • इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात।
  • मामले की जांच जारी, आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार।

(नोट: घटना को लेकर दोनों राजनीतिक दलों के दावे अलग-अलग हैं। स्वतंत्र जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के आरोपों की पुष्टि नहीं की जा सकती।)

राज्य के 19,978 ग्रामों और 195 नगरीय निकायों को किया गया पूर्णतः कवर, नागरिकों के अभूतपूर्व सहयोग के लिए आभार व्यक्त
       रायपुर / शौर्यपथ / जनगणना 2027 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण — मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना — का फील्ड कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। यह कार्य 01 मई 2026 से प्रारंभ होकर 30 मई 2026 को संपन्न हुआ। यह राष्ट्रीय महत्व का अभियान केवल आंकड़ों के संकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के भारत और छत्तीसगढ़ के विकास की ठोस आधारशिला तैयार करने वाला महत्वपूर्ण उपक्रम है।
जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से शासन को यह समझने में सहायता मिलती है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ किस प्रकार और कितनी प्रभावशीलता से पहुँच रहे हैं तथा भविष्य की योजनाओं और नीतियों का निर्माण अधिक सटीक एवं समावेशी ढंग से किया जा सके।
भारत की जनगणना 2027 का कार्य राज्य में दो चरणों में संपादित किया जा रहा है। प्रथम चरण के अंतर्गत मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना की गई, जबकि द्वितीय चरण — जनसंख्या गणना — फरवरी 2027 में संपादित की जाएगी। प्रथम चरण से प्राप्त जानकारी द्वितीय चरण के लिए आधार तैयार करती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मकान अथवा उसमें निवासरत परिवार गणना से वंचित न रह जाए।
प्रथम चरण के दौरान राज्य के सभी ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर भारत सरकार द्वारा अधिसूचित 33 प्रश्नों के आधार पर जानकारी संकलित की गई। इन प्रश्नों का संबंध मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से था। यह संपूर्ण जानकारी मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से संकलित कर भारत सरकार के सर्वर में सुरक्षित रूप से संरक्षित की गई है।
राज्य में यह कार्य सभी जिलों, तहसीलों, ग्रामों तथा नगरीय क्षेत्रों में शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपादित किया गया। इस दौरान राज्य का कोई भी क्षेत्र गणना कार्य से वंचित नहीं रहा। घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित करने की प्रक्रिया में नागरिकों का अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हुआ।
निदेशक, जनगणना कार्य, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा साझा की गई समस्त व्यक्तिगत जानकारी जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। संकलित आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्य से किया जाएगा तथा संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात भारत सरकार द्वारा नियमानुसार इन्हें जारी किया जाएगा।
राज्य में प्रथम चरण का कार्य 33 जिलों, 252 तहसीलों, 195 नगरीय निकायों तथा 19,978 ग्रामों में संपादित किया गया। इसके लिए 251 ग्रामीण चार्ज एवं 221 नगरीय चार्ज गठित किए गए तथा इनके अंतर्गत 48,754 मकानसूचीकरण गणना ब्लॉक बनाए गए।
इस व्यापक अभियान के संचालन हेतु राज्य में कुल 62,500 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई, जिनमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी (33 जिला कलेक्टर एवं 14 नगर निगम आयुक्त), 250 जिला स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 60 मास्टर ट्रेनर्स, 1,100 फील्ड ट्रेनर्स, 52,705 प्रगणक तथा 9,319 पर्यवेक्षक शामिल रहे।
निदेशक, जनगणना कार्य, छत्तीसगढ़ ने प्रथम चरण के सफल संचालन पर राज्य के सभी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले द्वितीय चरण — जनसंख्या गणना — में भी प्रदेशवासियों का इसी प्रकार सक्रिय एवं सकारात्मक सहयोग प्राप्त होगा।

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