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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
भिलाई। छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग के सहयोग से 10 दिवसीय लोक वाद्य कार्यशाला शिविर संग्रहालय परिसर कुहुकी कला ग्राम मरोदा सेक्टर मैत्री बाग चौक के बाजू में 14 जून से 23 जून तक जारी है। विगत 23 वर्ष से जारी इस शिविर में छत्तीसगढ़ अंचल के दूर-दराज से आए कलाकार न सिर्फ अपनी कलाकृतियों और वाद्य यंत्रों का निर्माण कर रहे हैं बल्कि एक दूसरे की कला को सीख भी रहे हैं। वहीं आगंतुक भी अपनी आंखों के सामने बनते वाद्य यंत्र व कलाकृतियां देख मंत्रमुग्ध है। यहां चिकारा, खंजेरी, तंबूरा, गतका, तुरही, चरहे, चिटकुली, कुहुकी और रूंजु सहित तमाम शिल्प से आगंतुक रूबरू हो रहे हैं।
शिविर के संयोजक व प्रख्यात लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय ने बताया कि उनके यहां वर्ष 2003 से यह 10 दिवसीय शिविर हर वर्ष मानसून आगमन के पहले गर्मियों में लगता रहा है। शुरूआती 4 वर्ष उन्होंने स्वयं की पहल से कलाकारों/शिल्पकारों को बुलाकर ऐसा शिविर आयोजित किया था लेकिन बाद में छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग ने पहल की और तब से शिविर हर साल आयोजित हो रहा है।
रिखी ने बताया कि शिविर की वजह से शिल्पकारों को बाजार मिल रहा है, वहीं सभी को एक दूसरे की कला सीखने का अवसर भी मिल रहा है। इससे शिल्पकार अपनी-अपनी कला में निखार ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 14 जून से शुरू हुई कार्यशाला में रोजाना सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 7:30 बजे तक कार्य चलता है। पूरी तरह नि:शुल्क इस कार्यशाला में कलाप्रेमी पहुंच कर कलाकृतियां बनते हुए प्रत्यक्ष देख सकते हैं। वहीं समापन अवसर पर 23 जून की शाम रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा। उन्होंने बताया कि शिविर के व्यवस्थित संचालन के लिए टीम से भोजन व्यवस्था अन्नपूर्णा क्षत्रिय,भोज,जनसंपर्क में गायक कुलदीप सार्वा, अजय उमरे, दिनेश वर्मा, राजेश साहू,नवीन साहू, संजू,नेहा, जया और अनुराधा का विशिष्ट योगदान है।
तैयार हो रहे हैं परंपरागत व दुर्लभ वाद्य
शिविर में आसपास और दूर-दराज के अंचल के अलग-अलग गांव से पहुंचे शिल्पकार परंपरागत वाद्य यंत्र तैयार कर रहे हैं। कोलिहापुरी दुर्ग से आए मनहरण दास बंजारे चिकारा बजाने में प्रवीण है और खुद चिकारा बनाते भी हैं। ग्राम दहिकोंगा कोंडागांव से शिबू कश्यप बेल मेटल से तुरही बनाने का कार्य कर रहे हैं। बेल मेटल शिल्प को बनिया पारा कोंडागांव से शिबू कश्यप आकार दे रहे हैं। लौह शिल्प में ग्राम दहीकोंगा से रामदास, मिट्टी शिल्प में मरारपारा कोंडागांव से डमरु चक्रधारी, काष्ठ कला में दीपक तारम लोहारा, बिजेलाल, राजनांदगांव जिले से पन्ना लाल डोंगरगढ़ से, रुंझू के लिए गाड़ाडीह से नंद कुमार देवार, डोरे लाल, और तंबूरा निर्माण के लिए रामकुमार पाटिल रनचिरई से आकर यहां कार्यशाला में शामिल हुए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सुबह 6:30 बजे से 7:30 बजे तक सामूहिक योगाभ्यास किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में योग साधकों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों ने सहभागिता की। इस सत्र का संचालन नरेंद्र पटेल, शंभू प्रसाद कुशवाहा एवं शैली ने किया । उपस्थित साधकों को आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगाभ्यास कराया।
उद्घाटन सत्र में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन, भारत स्वाभिमान न्यास छत्तीसगढ़ के राज्य प्रभारी अनूप बंसल तथा पतंजलि युवा भारत छत्तीसगढ़ के राज्य प्रभारी एवं योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष जयंत भारती की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने योग को स्वस्थ एवं समृद्ध समाज के निर्माण का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार के आयुर्वेदाचार्य डॉ. सूर्या वैष्णव, थैरेपिस्ट मोहिनी साहू एवं डॉ. आशीष शर्मा का शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। पिछले पाँच दिनों से उन्होंने निस्वार्थ भाव से स्वास्थ्य परामर्श, प्राकृतिक चिकित्सा एवं आयुर्वेदिक मार्गदर्शन प्रदान कर अनेक लोगों को लाभान्वित किया।
कार्यक्रम के दौरान राजेंद्र पाटिल, बलविंदर सिंह, तिजऊ राम साहू, उद्धव राम साहू, अनामिका पुरी, प्रीति त्रिपाठी, सुधा सोनी और मनोरमा पाण्डेय सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सेवाओं की सराहना की गई, जिन्होंने शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपने उद्बोधन में जयंत भारती ने कहा कि योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि अधिक से अधिक युवाओं को योगासन भारत से जोड़ा जाए तथा उन्हें योगासन खेलों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कहा कि योग के प्रति जागरूक युवा ही स्वस्थ, सशक्त एवं संस्कारित भारत का निर्माण कर सकते हैं।
वहीं अनूप बंसल ने कार्यक्रम की सफलता के लिए विधायक रिकेश सेन का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग एवं सकारात्मक पहल के कारण यह विशाल योग शिविर आमजन तक पहुँच पाया। उन्होंने स्थानीय पार्षद स्मिता दोड़के के सतत सहयोग एवं जनसेवा भाव की भी सराहना की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी नागरिकों ने नियमित योगाभ्यास करने तथा अपने परिवार एवं समाज को भी योग से जोड़ने का संकल्प लिया। पाँच दिवसीय शिविर ने क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता, सकारात्मक जीवनशैली एवं योग संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। "करें योग – रहें निरोग" तथा "योग युक्त, नशा मुक्त एवं स्वस्थ भारत" के संदेश के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
// विधानसभा अध्यक्ष ने हल्बा समाज की मांग पर राजनांदगांव के रेवाडीह में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 10 लाख रूपए प्रदान करने की घोषणा की
// विधानसभा अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज केन्द्रीय कर्मचारी प्रकोष्ठ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह सह प्रथम सम्मेलन कार्यक्रम में हुए शामिल
राजनांदगांव । विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज राजनांदगांव स्थित पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज केन्द्रीय कर्मचारी प्रकोष्ठ के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह सह प्रथम सम्मेलन कार्यक्रम में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष्य डॉ. सिंह की उपस्थिति में नव निर्वाचित पदाधिकारियों ने शपथ लिया। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने हल्बा समाज की मांग पर राजनांदगांव के वार्ड क्रमांक 22 रेवाडीह में समाज के लिए उपलब्ध भूमि पर सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 10 लाख रूपए प्रदान करने की घोषणा की। विधानसभा अध्यक्ष्य डॉ. सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना के नवजागरण का उत्सव है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि हल्बा समाज छत्तीसगढ़ के सबसे संगठित और जागरूक आदिवासी समुदायों में से एक है, जिसकी पहचान केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भी समाज के लोग विकास की मुख्यधारा से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज की राष्ट्रीय महासभा की संगठनात्मक संरचना की सराहना की। यह संगठन आदिवासी समाज की सशक्त आवाज बनकर कार्य कर रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आदिवासी हल्बा समाज की वीरता और बलिदान की अनेक गाथाएं हैं। आदिवासी समाज ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रत्येक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश आदिवासी समाज सदियों से अपने जीवन में उतारकर चल रहा है, जो आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकार और विकास को नई दिशा मिली है। बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का विस्तार, वनधन विकास केंद्रों की स्थापना तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए संचालित योजनाएं आदिवासी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों से समाज के युवाओं को शिक्षा से जोडऩे, महिलाओं को सशक्त बनाने, सामाजिक एकता को मजबूत करने तथा समाज की गौरवशाली संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने कहा। उन्होंने कहा कि समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी परंपरा और प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने में है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा आदिवासी समाज राष्ट्रीय महासभा श्री मन्तूराम पवार, नवनियुक्त केन्द्रीय अध्यक्ष केन्द्रीय कर्मचारी प्रकोष्ठ श्री गोविंद राम चुरेन्द्र, पूर्व अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज केन्द्रीय कर्मचारी प्रकोष्ठ श्री पीआर नाईक, पूर्व अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज केन्द्रीय कर्मचारी प्रकोष्ठ श्री आरएस नायक ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर समाजसेवी श्री कोमल सिंह राजपूत, पूर्व अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज राष्ट्रीय महासभा श्री जीआर राना सहित समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।
दुर्ग, । शहर के विकास को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेने रविवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने दुर्ग पहुंचकर विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उनके साथ महापौर अलका बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, कलेक्टर अभिजीत सिंह, निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
उपमुख्यमंत्री ने प्रयास कन्या विद्यालय एवं छात्रावास के पीछे लगभग 12.14 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण एजेंसी को गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह परिसर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से युक्त एक महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होंगी।
पुराना बस स्टैंड स्थित इंदिरा मार्केट में प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना का निरीक्षण करते हुए उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
लगभग 17.35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना की निर्माण अवधि 18 माह निर्धारित की गई है। इसके पूर्ण होने पर शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में पार्किंग की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा तथा यातायात व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।
अमृत मिशन 2.0 के अंतर्गत उरला में निर्माणाधीन 47 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का भी उपमुख्यमंत्री ने निरीक्षण किया। लगभग 129.50 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल शहर की सीवरेज व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार ने उरला पटरीपार क्षेत्र में पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए नए फिल्टर प्लांट की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अधिकारियों को आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसी अधोसंरचना विकसित करना है जो आने वाले वर्षों तक नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने सभी अधिकारियों को गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
? 12.14 करोड़ की लागत से बन रहा नालंदा परिसर
? 17.35 करोड़ की मल्टीलेवल पार्किंग परियोजना को मिली गति
? 129.50 करोड़ का 47 एमएलडी एसटीपी निर्माणाधीन
? उरला पटरीपार क्षेत्र के लिए नए फिल्टर प्लांट की मांग
? उपमुख्यमंत्री ने गुणवत्ता और समय-सीमा पर दिए सख्त निर्देश
परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी केन्द्रों पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। प्रत्येक परीक्षा कक्ष में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, वहीं किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक अनियमितता को रोकने के लिए जैमर की व्यवस्था की गई थी। निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए सभी केन्द्रों में जनरेटर भी उपलब्ध कराए गए थे।
परीक्षा के सुचारू संचालन और सतत निगरानी के लिए प्रत्येक परीक्षा केन्द्र में कार्यपालिक दण्डाधिकारी (मैजिस्ट्रेट) तथा ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए थे। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों ने लगातार केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखी।
कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में परीक्षा की सभी तैयारियां पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार पूरी की गई थीं। कलेक्टर ने गोपनीयता, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापन, सुरक्षा जांच और प्रवेश संबंधी सभी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार सभी परीक्षा केन्द्रों में परीक्षा शांतिपूर्ण, अनुशासित और व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुई तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय या अनियमित घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री श्री साय सुबह 11:40 बजे रायपुर के पुलिस ग्राउंड हेलीपेड से हेलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर दोपहर 12:10 बजे पीटीएस हेलीपेड, राजनांदगांव पहुंचेंगे। इसके बाद वे 12:15 बजे कार से स्टेट हाई स्कूल राजनांदगांव के लिए प्रस्थान करेंगे और 12:20 बजे वहां पहुंचकर प्रगतिशील किसान सम्मेलन एवं लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री दोपहर 1:50 बजे स्टेट हाई स्कूल से रवाना होकर 2:00 बजे स्पीकर हाउस, राजनांदगांव पहुंचेंगे, जहां उनका समय आरक्षित रहेगा।
इसके बाद मुख्यमंत्री 2:30 बजे स्पीकर हाउस से रवाना होकर 2:40 बजे पीटीएस हेलीपेड पहुंचेंगे तथा 2:45 बजे हेलीकॉप्टर द्वारा रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
मुख्यमंत्री के इस दौरे को कृषि क्षेत्र और जिले के विकास कार्यों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां किसानों से संवाद के साथ कई विकास परियोजनाओं को नई गति मिलने की संभावना है।
युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अत्याधुनिक अध्ययन केंद्र : मुख्यमंत्री
24 घंटे अध्ययन सुविधा, डिजिटल लाइब्रेरी, 50 हजार पुस्तकों और स्मार्ट सुविधाओं से सुसज्जित होगा नालंदा परिसर
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के सलियाटोली ग्राम में निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। लगभग 4 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित हो रहे इस 250 सीटर अत्याधुनिक परिसर के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखते हुए कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। नालंदा परिसर युवाओं को अध्ययन, मार्गदर्शन और आत्मविकास के लिए एक आधुनिक एवं प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह परिसर जशपुर जिले के विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि नालंदा परिसर के निर्माण का प्लिंथ लेवल कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए निर्धारित समयावधि में परियोजना को पूर्ण करने के निर्देश दिए।
अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा नालंदा परिसर
निर्माणाधीन नालंदा परिसर को आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। परिसर में विद्यार्थियों के लिए 24 घंटे अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। यहां इंडोर एवं आउटडोर स्टडी जोन, ऑक्सी रीडिंग जोन, डिजिटल लाइब्रेरी, वाई-फाई जोन तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित 50 हजार से अधिक पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी।
परिसर को पर्यावरण अनुकूल स्वरूप प्रदान करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित प्रणाली विकसित की जाएगी तथा 50 से अधिक देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। युवाओं के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परिसर में यूथ टावर, स्पोर्ट्स कोर्ट, कैफेटेरिया, एटीएम और हेल्थ जोन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
इसके अतिरिक्त आरएफआईडी आधारित प्रवेश प्रणाली, बायोमेट्रिक पहचान व्यवस्था तथा आधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली जैसी स्मार्ट सुविधाएं इसे एक आधुनिक और तकनीक-सक्षम अध्ययन केंद्र का स्वरूप प्रदान करेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारपूर्ण शैक्षणिक केंद्र युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन हेतु हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
रायपुर 20 जून 2026/किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है।
किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर
कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया।
कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान श्री महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान श्री सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान श्री विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक श्री गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया।
औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।
सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है।
कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल श्री रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष श्री यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को मिला आधिकारिक प्रमाण-पत्र
रायपुर / पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में जशपुर वनमण्डल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार एवं रोपण का कार्य संपादित कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की राज्य प्रमुख श्रीमती सोनल राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया। वनमण्डल की ओर से यह प्रमाण-पत्र वनमण्डलाधिकारी श्री शशि कुमार ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वनमण्डल, वन विभाग तथा अभियान से जुड़े सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जशपुर में संचालित “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” अभियान जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब शासन, प्रशासन और समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जशपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।
जशपुर वनमण्डल द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी अभियान “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सीडबॉल प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और हरित आवरण में वृद्धि के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना है।
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें देखने को मिली व्यापक जनसहभागिता रही। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, महिला स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। हजारों लोगों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ और एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।
इस उपलब्धि ने जशपुर जिले को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। साथ ही यह सिद्ध किया है कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
फरसाबहार में मिली सफलता के बाद जिले के सभी विकासखंडों में होगा विस्तार
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो?
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ।
ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है।
बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।
डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम
जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।
बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही।
डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला।
260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षता
पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
“साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
रायपुर, / छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के सभी जिलों के लिए मुख्य अतिथियों का नामांकन पूर्व में किया गया था। विभाग द्वारा आज जारी संशोधित आदेश के अनुसार चार जिलों में मुख्य अतिथियों के नामांकन में आंशिक परिवर्तन किया गया है। राज्य के शेष जिलों में पूर्व आदेशानुसार नामांकित मुख्य अतिथि यथावत रहेंगे।
संशोधित आदेश के अनुसार मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद श्री देवेन्द्र प्रताप सिंह को नामांकित किया गया है। इसी प्रकार बेमेतरा जिले में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा तथा बीजापुर जिले में विधायक श्री नीलकंठ टेकाम मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों का आयोजन मुख्य अतिथियों के परामर्श तथा चिकित्सा शिक्षा (आयुष) विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।
तकनीक और जन-समन्वय से बदला राजस्व सेवाओं का चेहरा,एक पुरानी समस्या का नया समाधान
रायपुर /
प्रशासनिक व्यवस्था में किसी भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनके वारिसों के नाम जमीन ट्रांसफर करने यानी 'फौती नामांतरण' (Mutation) को एक बेहद जटिल प्रक्रिया माना जाता रहा है। ग्रामीण अंचलों में जानकारी के अभाव, बिचौलियों के जाल और लंबी कागजी औपचारिकता के कारण ये मामले दशकों तक अदालतों में लटके रहते हैं। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र का विकास भी प्रभावित होता है।
इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल जिले बस्तर ने सुशासन का एक ऐसा 'सक्रिय मॉडल' (Proactive Model) प्रस्तुत किया है, जो राज्य के अन्य जिलों के लिए एक मार्गदर्शक केस स्टडी बन सकता है।
'सक्रिय अभियान': एक क्रांतिकारी प्रशासनिक सोच
आमतौर पर राजस्व विभाग में यह परंपरा रही है कि जब पीड़ित परिवार आवेदन लेकर दफ्तर पहुंचता है, तब प्रक्रिया शुरू होती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इस 'रिएक्टिव' (प्रतिक्रियात्मक) रवैये को बदलकर 'प्रोएक्टिव' (सक्रिय) रुख अपनाया। प्रशासन ने तय किया कि वह खुद चलकर जनता के दरवाजे तक जाएगा।
इस विशेष अभियान के तहत मात्र चार महीनों के भीतर 12 जून 2026 तक संकलित आंकड़ों के अनुसार जिले के 611 गांवों से डेटा जुटाकर, लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर भूमि अभिलेखों (Land Records) को अपडेट कर दिया गया है।
प्रशासनिक तंत्र की रीढ़: जब 'त्रिमूर्ति' ने संभाला मोर्चा
इस 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' की सफलता केवल फाइलों या डिजिटल पोर्टल तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका असली श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली प्रशासनिक कड़ियों (ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी) के उस अनूठे तालमेल को जाता है, जिसने सेवा की पूरी परिभाषा ही बदल दी।
इस पूरे अभियान को एक सुव्यवस्थित पिरामिड की तरह संचालित किया गया। इसके शीर्ष पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार मार्गदर्शक की भूमिका में थे, जो हर हफ्ते कड़ाई से मॉनिटरिंग कर रहे थे और विधिक प्रक्रियाओं को समय-सीमा के भीतर अमली जामा पहनाकर अंतिम आदेश पारित कर रहे थे। इस शीर्ष नेतृत्व के ठीक नीचे, मैदानी अमले की 'त्रिमूर्ति' ने इस अभियान को संभाला।
डेटा का प्राथमिक स्रोत ग्राम सचिव ने अपने 'जन्म एवं मृत्यु पंजीयक' के दायित्व का निर्वहन करते हुए पिछले 04 वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की एक अचूक सूची (Line List) तैयार की। जिन मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र लंबित थे, वहां उन्होंने परिवारों को ये प्रमाणपत्र सुलभ कराए और जहां देरी हुई थी, वहां तहसीलदार से 'विलम्ब पंजीयन' की विशेष अनुमति दिलाकर नए प्रमाण पत्र जारी करवाए।
तकनीकी और विधिक सेतु के रूप में सचिव से सूची प्राप्त होते ही पटवारी ने छत्तीसगढ़ के डिजिटल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल 'भुइयां' पर उसका मिलान किया। इससे तत्काल 8,651 ऐसे मृत व्यक्तियों की पहचान हुई जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी। इसके बाद, पटवारी ने स्वयं आगे बढ़कर वारिसों से संपर्क कर आवेदन लिए तथा उनके विधिक उत्तराधिकार को तय करने वाला 'वंश वृक्ष' तैयार किया।
पारदर्शिता की जमीनी कसावट के लिए ग्रामीण भारत की सबसे पारंपरिक कड़ी कोटवार ने सोशल ऑडिट (सामाजिक सत्यापन) का जिम्मा संभाला। उन्होंने गांव-गांव जाकर मृतकों की सूची और पटवारी द्वारा तैयार किए गए वारिसों के 'वंश वृक्ष' का भौतिक सत्यापन किया। उनके इस जमीनी ज्ञान के कारण किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े या अपात्र दावों की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो गई।
बस्तर की तहसीलों में सुशासन का 'सेचुरेशन'
जिले की सभी 10 तहसीलों के कुल 639 गांवों में से 611 गांवों को इस मुहिम से जोड़कर पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया गया। मैदानी अमले द्वारा चिन्हित किए गए कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से रिकॉर्ड 8,241 मामलों में ऑनलाइन नामांतरण पंजी (MD सीरिज) के तहत विधिक प्रक्रिया इश्तेहार प्रकाशन व दावा-आपत्ति निराकरण पूर्ण कर आदेश पारित किए जा चुके हैं। अब पूरे जिले में महज 410 प्रकरण ही लंबित बचे हैं।
बस्तर जिले के इस विशेष अभियान के तहत सभी 10 तहसीलों में बेहतरीन समन्वय और तत्परता देखने को मिली है। आंकड़ों के लिहाज से तोकापाल तहसील इस पूरी मुहिम में सबसे आगे रही, जहां जिले में सर्वाधिक 1,553 मामले चिन्हित किए गए और रिकॉर्ड 1,454 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। वहीं बकावण्ड तहसील अपने 1,153 मामलों में से 1,142 को पूर्ण कर शत-प्रतिशत 'सेचुरेशन' (सौ फीसदी लक्ष्य) के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है, जहां अब केवल 11 मामले ही शेष हैं।
प्रशासनिक दक्षता के मामले में बस्तर तहसील ने भी 1,000 से अधिक मामलों की दहलीज को पार करते हुए अपने 1,087 प्रकरणों में से 1,019 का निराकरण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जिला मुख्यालय से जुड़ी जगदलपुर तहसील का प्रदर्शन बेहद अनुकरणीय रहा, जिसने अपने 1,061 मामलों में से 1,057 को निपटा लिया है और वहां अब महज 4 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह, भानपुरी तहसील ने मैदानी स्तर पर तीव्र प्रगति दिखाते हुए 1,018 संवेदनशील मामलों में से 959 का कार्य पूर्ण कर लिया है।
भौगोलिक और सामाजिक रूप से भिन्न अन्य क्षेत्रों में भी यह रफ्तार कायम रही। लोहण्डीगुड़ा तहसील अपने 805 मामलों में से 799 का निपटारा कर पूर्ण संतुष्टि की दहलीज पर खड़ी है, जहां सिर्फ 6 मामले बाकी हैं। करपावण्ड (565 में से 504 मामले) और नानगुर (544 में से 518 मामले) तहसीलों ने तय समय-सीमा के भीतर विधिक प्रक्रियाओं का त्वरित संपादन कर भू-अभिलेखों को अपडेट करने में सफलता पाई है।
अंतिम छोर पर स्थित दुर्गम और अंदरूनी इलाकों से घिरे दरभा अंचल ने अपनी चुनौतियों के बावजूद सराहनीय प्रयास किया और 484 आवश्यक मामलों में से 452 का निपटारा सुनिश्चित किया। वहीं, सीमित संसाधनों के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण पेश करते हुए बास्तानार तहसील ने भी अपने 381 चिन्हित मामलों में से 337 भू-स्वामियों के रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त कर दिए हैं।
बस्तर का यह प्रयोग केवल जमीन के कागजात दुरुस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव हैं। डिजिटल ट्रैकिंग (MD सीरिज) और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) प्रक्रिया के कारण बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई। समय-सीमा के भीतर आदेश पारित होने से आदिवासियों और किसानों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिली है। भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने से अब ये नए भू-स्वामी किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए तुरंत पात्र हो गए हैं।
इस अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक नीतियां संवेदनशील और परिणाम-मूलक (Result-Oriented) हों, तो सबसे कठिन सुधार भी संभव हैं। प्रथम चरण 04 वर्ष के लंबित मामले की इस अभूर्वपूर्व सफलता के बाद, बस्तर जिला प्रशासन अब इसके आगामी चरण की ओर कदम बढ़ा चुका है, जिसके तहत पिछले 10 वर्षों के लंबित मामलों का शत-प्रतिशत सेचुरेशन करने का लक्ष्य रखा गया है।
बस्तर का यह 'प्रोएक्टिव गवर्नेंस मॉडल' राज्य के उन सभी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए एक प्रकाश स्तंभ है, जहां राजस्व सुधारों को अमली जामा पहनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
योग फॉर हेल्दी एजिंग: स्वस्थ और सक्रिय जीवन की दिशा में एक कदम
साभार - • डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर
उप संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, / भारत में प्राचीन काल से ही योग हमारी जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। ऋषि-मुनियों, योगियों और संतों ने योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर, शांत मन और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। भारतीय ज्ञान परंपरा की यह अमूल्य धरोहर आज विश्वभर में स्वास्थ्य और कल्याण का पर्याय बन चुकी है। इसी विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की, जो आज विश्वव्यापी जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
वर्ष 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” (स्वस्थ एवं सक्रिय वृद्धावस्था के लिए योग) रखी गई है। यह थीम योग के माध्यम से जीवन के प्रत्येक चरण में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का संदेश देती है। योग न केवल रोगों से बचाव का प्रभावी माध्यम है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की आधारशिला भी है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में योग आज विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री का मानना है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है। योग व्यक्ति को स्वस्थ बनाकर परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का माध्यम बनता है इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर का मुख्य आयोजन कोलकाता में आयोजित किया जा रहा है जहां प्रधानमंत्री स्वयं योगाभ्यास का नेतृत्व करेंगे।
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह अंबिकापुर में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं योगाभ्यास में सहभागिता करेंगे और प्रदेशवासियों को नियमित योग अपनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। राज्य सरकार द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संवर्धन और जनजागरूकता अभियानों में योग को विशेष महत्व दे रही है।
प्राकृतिक संसाधनों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में योग का संदेश लोगों के जीवन से सहज रूप से जुड़ता है। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवनशैली योग के मूल सिद्धांतों को प्रतिबिंबित करती है। विद्यालयों, महाविद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और शासकीय संस्थानों में नियमित योग गतिविधियों के माध्यम से स्वस्थ समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के बीच योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास शरीर को निरोग, मन को शांत और जीवन को संतुलित बनाता है। यह व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि योग को केवल एक दिवस का आयोजन न मानकर दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग को अपनाना समय की आवश्यकता है। आइए, योग के माध्यम से स्वस्थ छत्तीसगढ़, विकसित भारत और समृद्ध विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।
रायपुर / स्मार्ट मीटर किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं, बल्कि भारत सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत पूरे देश में लागू की गई राष्ट्रीय पहल है। इसी योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित मानकों के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। राज्य सरकार इस केंद्रीय योजना का क्रियान्वयन करते हुए विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में देशभर में स्मार्ट मीटरिंग योजना लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी लाना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना तथा उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू करने का निर्णय पूर्ववर्ती सरकार वर्ष 2022 में लिया गया था। परियोजना के लिए टेंडर जारी होने और कार्यादेश दिए जाने के बाद फरवरी 2024 से स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ हुआ। वर्तमान में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पूर्व में जारी निविदाओं, अनुबंधों और कार्यादेशों के आधार पर ही परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य है, जिनमें से करीब 40 लाख मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को कई सुविधाएं मिल रही हैं। बिजली की खपत का आंकड़ा हर 30 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर बेहतर निगरानी रख सकते हैं। मीटर रीडर द्वारा गलत रीडिंग दर्ज होने की संभावना समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक होती है।
इसके अलावा स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत सहित अन्य तकनीकी आंकड़े वास्तविक समय में प्राप्त होते हैं। इससे विद्युत वितरण कंपनी को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने, ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव अथवा आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने में सुविधा मिलती है। इसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के रूप में मिलता है।
ऊर्जा विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना और उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
