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June 08, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

नई दिल्ली । देश में शुक्रवार का दिन राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, खेल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति, विश्व पर्यावरण दिवस के कार्यक्रमों, मानसून की दस्तक और खेल जगत में हुई बड़ी कार्रवाई तक कई घटनाएं राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र रहीं।

गुजरात दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी, हजारों करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात और दमन का दौरा करते हुए विकास परियोजनाओं की सौगात दी। सूरत में लगभग 1,800 करोड़ रुपये तथा दमन में करीब 2,970 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया। इस दौरान आयोजित जनसभा में प्रधानमंत्री ने विकास कार्यों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए विपक्षी दलों पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला।

तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़

तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जहां भाजपा से अलग हुए के. अन्नामलाई ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों से प्रेरित एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत की। उनके इस कदम को दक्षिण भारतीय राजनीति में नए समीकरणों के रूप में देखा जा रहा है।

कर्नाटक में विभागों का बंटवारा, असंतोष की चर्चाएं

कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन कर दिया। वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री खेमे के पास ही रहा, जबकि बेंगलुरु विकास मंत्रालय कृष्णा बायरे गौड़ा को सौंपा गया। विभागों के बंटवारे के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी की खबरें भी सामने आई हैं।

राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

18 जून को प्रस्तावित राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर विभिन्न दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस ने झारखंड में वरिष्ठ नेताओं भूपेश बघेल और अजय शर्मा को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। वहीं आंध्र प्रदेश में जनसेना पार्टी ने लिंगमनेनी रमेश को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

आरबीआई का बड़ा फैसला, रेपो रेट यथावत

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। इस निर्णय को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू मांग के संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत

केंद्र सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों को पूंजीगत लाभ कर से छूट देने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय वित्तीय बाजारों में नई पूंजी का प्रवाह संभव होगा।

विश्व पर्यावरण दिवस पर देशभर में अभियान

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देशभर में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। नई दिल्ली में 18 नए ‘नमो ऑक्सीजन पार्कों’ का उद्घाटन किया गया। सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल बताया।

मानसून की दस्तक, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

लंबे इंतजार के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश में प्रवेश कर लिया है। केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के कई क्षेत्रों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। केरल के कुछ जिलों में एहतियातन स्कूल और कॉलेज बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।

खेल जगत में बड़ी कार्रवाई

भारतीय कुश्ती महासंघ ने आयु संबंधी दस्तावेजों में अनियमितता पाए जाने पर अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप ट्रायल के विजेता दीपांशु सहित पांच पहलवानों को चार वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है। खेल जगत में इस कार्रवाई को अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

एनआईए की बड़ी कार्रवाई

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने कोलकाता में कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक शौकत मोल्ला को गिरफ्तार किया। मामले को लेकर जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई में जुटी हुई हैं।

हिमाचल में भूकंप के झटके

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली, लेकिन लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल रहा।

दिनभर की प्रमुख तस्वीर

05 जून 2026 का दिन देश में विकास, राजनीतिक गतिविधियों, आर्थिक निर्णयों, पर्यावरणीय जागरूकता, खेल अनुशासन और प्राकृतिक घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा। एक ओर सरकार ने विकास और निवेश को गति देने के संकेत दिए, वहीं पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक चुनौतियों ने भी देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

चेन्नई । तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब अन्नामलाई ने अपनी नई राजनीतिक राह चुन ली है। उन्होंने युवाओं और जनभागीदारी को केंद्र में रखते हुए "वी द लीडर्स" (We The Leaders) नामक एक नए जन आंदोलन की शुरुआत की है, जिसे जल्द ही एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल का स्वरूप दिए जाने की घोषणा की गई है।

गठबंधन की राजनीति बनी इस्तीफे की वजह

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई और भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के बीच तमिलनाडु की चुनावी रणनीति को लेकर लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। अन्नामलाई का मानना था कि भाजपा को राज्य में अपने संगठन और जनाधार के बल पर स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहिए तथा किसी बड़े क्षेत्रीय दल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

वहीं भाजपा नेतृत्व ने आगामी चुनावों को देखते हुए एआईएडीएमके के साथ पुनः गठबंधन का रास्ता चुना। इसी निर्णय के बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद और गहरे हो गए। बताया जाता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने अन्नामलाई को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देने और राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने इन सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया।

"वी द लीडर्स" से नई राजनीतिक पारी

भाजपा से अलग होने के कुछ ही समय बाद अन्नामलाई ने "वी द लीडर्स" आंदोलन की शुरुआत कर दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मंच नहीं बल्कि युवाओं, पेशेवरों और आम नागरिकों को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है।

अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शीघ्र ही एक पूर्ण राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत होगा और तमिलनाडु के स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर आगामी विधानसभा चुनाव तक सक्रिय रूप से भाग लेगा।

आईपीएस से राजनीति तक का सफर

राजनीति में आने से पहले के. अन्नामलाई कर्नाटक कैडर के एक चर्चित और लोकप्रिय आईपीएस अधिकारी रहे हैं। प्रशासनिक सेवा छोड़कर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और कम समय में तमिलनाडु भाजपा का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। आक्रामक शैली, जमीनी संपर्क और युवा वर्ग में लोकप्रियता के कारण उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

भाजपा के लिए चुनौती, विपक्ष के लिए नया समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई का भाजपा से अलग होना केवल एक नेता का इस्तीफा नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है। यदि उनकी नई पार्टी युवाओं और शहरी मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल होती है, तो राज्य की पारंपरिक राजनीतिक संरचना में बदलाव देखने को मिल सकता है।

भाजपा के लिए यह घटनाक्रम संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जबकि द्रविड़ राजनीति के बीच एक नए विकल्प की तलाश कर रहे मतदाताओं के लिए यह एक नया राजनीतिक प्रयोग साबित हो सकता है।

आगे क्या?

तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के लंबे राजनीतिक वर्चस्व के बीच के. अन्नामलाई की नई राजनीतिक पारी पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि "वी द लीडर्स" केवल एक आंदोलन बनकर रह जाता है या फिर तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरता है।

फिलहाल इतना तय है कि अन्नामलाई के इस फैसले ने दक्षिण भारतीय राजनीति में नई बहस और नए समीकरणों को जन्म दे दिया है।

 

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के एक हालिया बयान ने देश की राजनीतिक सरगर्मियों को तेज कर दिया है। राहुल गांधी ने दावा किया है कि देश की नौकरशाही और विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नियंत्रण पहले जैसा नहीं रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

संस्थाओं के भीतर से जानकारी मिलने का दावा

एक बंद कमरे में आयोजित आदिवासी पेशेवर सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें देश की विभिन्न संस्थाओं के भीतर से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि नौकरशाही, खुफिया एजेंसियों, चुनाव आयोग और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कुछ लोग अब सरकार के कामकाज को लेकर असंतोष व्यक्त कर रहे हैं।

राहुल गांधी के अनुसार, सरकारी तंत्र में कार्यरत अधिकारी अब स्वयं आगे आकर महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा कर रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही।

"आर्थिक सुनामी" की चेतावनी

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत निकट भविष्य में एक बड़े आर्थिक संकट या "आर्थिक सुनामी" का सामना कर सकता है। उनके अनुसार बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम जनता पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि जन असंतोष और आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ता है, तो सरकार कठोर प्रशासनिक कदम उठा सकती है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

भाजपा का पलटवार

राहुल गांधी के इन बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा नेताओं ने आरोपों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है।

भाजपा का कहना है कि देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही हैं और विपक्ष द्वारा बार-बार संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी से अपने दावों के समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने की भी मांग की है।

राजनीतिक माहौल गरमाया

राहुल गांधी के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब देश में कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस अपने चरम पर है। विपक्ष जहां आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा विकास, बुनियादी ढांचे और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

आगे क्या?

राहुल गांधी के दावों और भाजपा की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल राहुल गांधी के बयान ने राजनीतिक बहस को नया आयाम दे दिया है, जबकि देश की जनता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस पर टिकी है कि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं।

रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा होने जा रहा है, जिसके साथ ही संगठन में बड़े फेरबदल की संभावनाओं ने जोर पकड़ लिया है। आगामी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस आलाकमान संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है।

टी.एस. सिंहदेव ने जताई संगठन संभालने की इच्छा

सरगुजा अंचल के प्रभावशाली नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने पहली बार सार्वजनिक रूप से संगठन की कमान संभालने की इच्छा व्यक्त की है। हाल के दिनों में उनकी संगठनात्मक सक्रियता बढ़ी है और वे लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में दिखाई दे रहे हैं। सिंहदेव का मानना है कि कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी साफ-सुथरी छवि, प्रशासनिक अनुभव और प्रदेशभर में स्वीकार्यता उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।

दीपक बैज भी दावेदारी में बरकरार

वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल भले ही समाप्ति की ओर हो, लेकिन वे अभी भी अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं। बस्तर क्षेत्र के आदिवासी चेहरे के रूप में उनकी पहचान कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनकी पकड़ और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए उनके समर्थक नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में जल्दबाजी नहीं चाहते।

भूपेश बघेल का नाम भी चर्चा में

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल है। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन को एक आक्रामक और जनाधार वाले नेतृत्व की जरूरत है। बघेल समर्थकों का तर्क है कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।

हालांकि अभी तक बघेल की ओर से इस विषय पर कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस आलाकमान केवल प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर ही नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन के व्यापक फार्मूले पर भी विचार कर रहा है। चर्चा है कि नए अध्यक्ष के साथ दो कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हैं ताकि प्रदेश के विभिन्न सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।

यदि टी.एस. सिंहदेव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाता है, तो आदिवासी, ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर संतुलन साधने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

कार्यकारी अध्यक्ष पद के संभावित चेहरे

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता माने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि मुख्य अध्यक्ष पद किसी गैर-आदिवासी नेता को दिया जाता है तो आदिवासी समाज को संगठन में मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

इंद्रशाह मंडावी और लखेश्वर बघेल के नाम भी आदिवासी नेतृत्व के रूप में चर्चा में हैं। वहीं ओबीसी वर्ग से राम कुमार यादव का नाम तेजी से उभर रहा है।

अनुसूचित जाति वर्ग से पूर्व मंत्री शिव डहरिया की सक्रियता भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि संगठन में सामाजिक संतुलन स्थापित करने के लिए उन्हें भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

सचिन पायलट और आलाकमान की नजर

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट लगातार संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सभी संभावित नामों, क्षेत्रीय प्रभाव, सामाजिक समीकरणों और चुनावी रणनीति का विस्तृत अध्ययन कर रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व का लक्ष्य केवल नया अध्यक्ष चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संगठनात्मक ढांचा तैयार करना है जो 2028 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दे सके।

2028 की तैयारी का संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीसीसी अध्यक्ष का चयन केवल संगठनात्मक नियुक्ति नहीं होगा, बल्कि यह कांग्रेस की आगामी चुनावी रणनीति का आधार भी बनेगा। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक प्रभाव जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।

फिलहाल छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह संगठन की दिशा और भविष्य की राजनीति तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

  राजनांदगांव । जनपद पंचायत डोंगरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत मुरमुंदा में स्वच्छता त्यौहार का आयोजन किया गया। प्रत्येक शनिवार को ग्राम पंचायतों में आयोजित स्वच्छता त्यौहार के तहत ग्राम पंचायत मुरमुंदा के विभिन्न चौक-चौराहों की साफ-सफाई की गई और ग्रामीणों को नियमित सफाई के लाभ के बारे में बताया गया। ग्राम मुरमुन्दा का बड़े तालाब का यह स्थल प्रवासी पक्षियों का निवास स्थल है। पर्यावरण के संरक्षण के तहत ग्राम के बड़े तालाब में कचरा संग्रहण एवं श्रमदान कर साफ-सफाई की गई। एसडीएम डोंगरगढ़ श्री एम भार्गव ने ग्रामीणों को ग्रामसभा में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कचरा के चारों प्रकार के बारे में बताया एवं नियमित सफाई रखने कहा। उन्होंने ग्रामीणों से कचरा संग्रहण करने व यूजर चार्ज समय पर देने का आग्रह किया। इस अवसर पर एसडीएम डोंगरगढ़ श्री एम भार्गव, तहसीलदार श्री अमीय श्रीवास्तव, ग्राम पंचायत सरपंच, पंच, अतिरिक्त सीईओ जनपद पंचायत डोंगरगढ़, पटवारी, राजस्व निरीक्षक एवं स्वच्छ भारत मिशन से विकासखण्ड समन्वयक व संकुल समन्वयक, सचिव, रोजगार सहायक, महिला समूह की महिलाएं, स्वच्छाग्राही दीदी एवं ग्रामीणों ने स्वच्छता त्यौहार में हिस्सा लिया।

राजनांदगांव, । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय एवं एनएसीईआर के निर्देशानुसार बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) राजनांदगांव में “हमारी जमीन, हमारा भविष्य” थीम पर पर्यावरण जागरूकता एवं पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि

  1. अग्रणी जिला बैंक प्रबंधक श्री मुनीश शर्मा

  2. डीडीएम नाबार्ड श्री मनोज नायक

  3. निदेशक आरसेटी श्री अमित मिश्रा

इस अवसर पर अतिथियों ने संस्थान परिसर में फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

जल संरक्षण और ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर जोर

कार्यक्रम में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण, भूमिगत जल संरक्षण, ग्राउंड वाटर रिचार्ज तथा रेन वॉटर मैनेजमेंट की आवश्यकता पर विशेष जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि पर्यावरण संतुलन एवं भूजल स्तर सुधारने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए

मुख्य संदेश

  1. हर व्यक्ति प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा लगाए

  2. भूमिगत जल संरक्षण और ग्राउंड वाटर रिचार्ज को प्राथमिकता दी जाए।

  3. रेन वॉटर मैनेजमेंट को दैनिक जीवन और संस्थागत स्तर पर अपनाया जाए।

  4. पर्यावरण संरक्षण को एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि सतत जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का पौधरोपण अभियान नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को पौधरोपण और जल संरक्षण की सतत जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

अन्य उपस्थितजन

  1. संकाय सदस्य श्री ऋषभ मिश्रा

  2. श्री प्रेमचंद साहू
  3. सेलफोन रिपेयर के मास्टर ट्रेनर श्री प्रशांत मिश्रा

  4. संस्थान स्टाफ श्री इंद्रेश ठाकुर

  5. पशु सखी एवं मोबाइल रिपेयरिंग प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षार्थी

कार्यक्रम का उद्देश्य

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अधिक से अधिक पौधरोपण को प्रोत्साहित करना तथा जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना।

राजनांदगांव, । सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत टेड़ेसरा में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदनों का प्राप्त कर उनके त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। साथ ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी ग्रामीणों को प्रदान की गई।

शिविर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों को हर घर नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। विभागीय अधिकारियों ने पेयजल आपूर्ति, जल गुणवत्ता तथा जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्रामीणों को जागरूक किया।

कार्यक्रम के दौरान जल जीवन मिशन अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा ग्रामीणों से जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और निर्मित जल संरचनाओं के समुचित रखरखाव में सक्रिय सहयोग करने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षित एवं सतत पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

शिविर में यह भी बताया गया कि शासन की मंशा के अनुरूप विभिन्न योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।

शिविर में श्री संतोष अग्रवाल, डॉ. खिलेश्वर साहू सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

राजनांदगांव/ शौर्यपथ / विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, जिला राजनांदगांव द्वारा शंकरपुर मुक्तिधाम के समीप वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भाजपा के 'बारह साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के' अभियान के तहत किया गया।

भाजपा प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के निर्देश एवं भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत तथा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष विजय राय के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बड़ी संख्या में झाड़ीदार एवं फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष विजय राय ने स्वयं पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण एवं उनकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा मण्डल अध्यक्ष सुमित भाटिया, जिला महामंत्री दीपेश शेंडे, जिला उपाध्यक्ष मयंक डोंगरे, जिला मंत्री महेश महोबे एवं प्रवेश इलमकर, भाजयुमो के साकेत वैष्णव, जिला सहसंयोजक कृष्णा तिवारी, मण्डल अध्यक्ष करण कोसरे, शहर महामंत्री रवि बंजारे, दक्षिण मण्डल अध्यक्ष राजेश बोइर, प्रगेश पगारे, विकाश गजभीये तथा जिला सोशल मीडिया प्रभारी रोशन लाऊत्रे, जिला संयोजक महेश महोबे सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभापति श्याम शर्मा की जवाबतलबी और आयुक्त सुमित अग्रवाल के जवाबों ने खड़े किए सवाल — क्या महापौर और विभागीय प्रभारियों पर घट रहा है भरोसा? दुर्ग। लोकतांत्रिक संस्थाओं की…

राजनांदगांव, ।
सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी मंच साबित हो रहा है। इसी कड़ी में छुरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत बेलरगोंदी में आयोजित शिविर में ग्राम भोलापुर निवासी श्रीमती तिजकुंवर की लंबे समय से लंबित समस्या का मौके पर ही समाधान कर उन्हें उनकी भूमि की ऋण पुस्तिका प्रदान की गई।

श्रीमती तिजकुंवर के पति श्री राम चरण ने बताया कि ग्राम मातेखेड़ा स्थित उनकी पत्नी की भूमि का खाता विभाजन होने के बाद भी उन्हें ऋण पुस्तिका प्राप्त नहीं हुई थी। इसके अभाव में खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों की खरीदी, कृषि ऋण लेने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

सुशासन तिहार के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उन्होंने अपनी समस्या प्रशासन के समक्ष रखी और ऋण पुस्तिका जारी करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन प्राप्त होते ही राजस्व विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर त्वरित कार्रवाई की और शिविर में ही उन्हें ऋण पुस्तिका उपलब्ध करा दी।

ऋण पुस्तिका मिलने से अब श्रीमती तिजकुंवर को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। वे कृषि ऋण, खाद-बीज वितरण तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सुगमता से ले सकेंगी। इससे खेती-किसानी के कार्यों को नई गति मिलने के साथ उनकी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर श्रीमती तिजकुंवर ने राज्य शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है और अब वे बिना किसी बाधा के कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगी।

सुशासन तिहार 2026 के माध्यम से प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर नागरिकों की समस्याओं का समाधान कर रहा है, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद को नई मजबूती मिल रही है।

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