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June 01, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि
वन विभाग और विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता

रायपुर / विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई है।

गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ श्री वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह प्रमाणित हुआ है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है।

स्वस्थ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव

ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है। यह नदियों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।

विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में तीन यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है।

विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य

हर वर्ष 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल स्रोतों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि ऊदबिलाव के लिए प्रमुख खतरे हैं।

छत्तीसगढ़ में संरक्षण के लिए लगातार हो रहा शोध

छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके बाद राज्य शासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को ऊदबिलाव पर शोध और संरक्षण अध्ययन का दायित्व सौंपा गया। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के माध्यम से ऊदबिलाव की उपस्थिति, व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारी संकलित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता श्रीमती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है। अध्ययन से राज्य के विभिन्न जिलों में ऊदबिलाव की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

जनजागरूकता से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद

वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि अब स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण ऊदबिलाव के संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचना स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही है।

वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ

वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य अपशिष्ट न फैलाएं। जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही यह संभव है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोतों के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और आधारभूत संरचना विस्तार पर हुई सकारात्मक चर्चा
केंद्र-राज्य समन्वय से औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देने पर जोर

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित उनके कार्यालय में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, खनिज क्षेत्र के विस्तार तथा आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई।
बैठक में छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने, रेल एवं लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी के विस्तार तथा औद्योगिक गतिविधियों को और गति देने के विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन, कोयला गैसीकरण, सौर ऊर्जा विकास तथा खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी विशेष चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और केंद्र सरकार के सहयोग से ऊर्जा, खनन एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में राज्य नई संभावनाओं की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के प्रबंध संचालक रजत बंसल, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका आज लोक भवन में 'पीएम-जनमन' (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान) योजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा - जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं

नई दिल्ली / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ श्री चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्री शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इंस्पायर, विज्ञान ज्योति और किरण जैसी योजनाएं होंगी लागू, आर्सेनिक विषाक्तता और कैंसर रिसर्च पर विशेष फोकस

कोलकाता/नई दिल्ली, ।
केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच कोलकाता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया कि केंद्र की प्रमुख विज्ञान एवं नवाचार योजनाओं को राज्य में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा।

बैठक में विज्ञान शिक्षा, शोध, स्टार्टअप प्रोत्साहन, जैव प्रौद्योगिकी, नैदानिक अनुसंधान और महिला वैज्ञानिकों की भागीदारी बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।

विद्यार्थियों और महिलाओं के लिए बड़ी पहल

बैठक में निर्णय लिया गया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख योजनाएं —

  • INSPIRE
  • INSPIRE MANAK
  • विज्ञान ज्योति
  • किरण योजना
  • WISE कार्यक्रम

को पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल का वैज्ञानिक और शैक्षणिक ढांचा देश के सबसे मजबूत इकोसिस्टम में से एक है, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान योजनाओं से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को नई दिशा दी जा सकती है।


आर्सेनिक विषाक्तता पर होगा विशेष वैज्ञानिक अध्ययन

बैठक में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सामने आए आर्सेनिक विषाक्तता के मामलों को गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती मानते हुए CSIR संस्थानों के माध्यम से तत्काल वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करने का निर्णय लिया गया।

इस अध्ययन का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य प्रभावों की जांच करना और वैज्ञानिक समाधान विकसित करना होगा।


कैंसर और रोगाणुरोधी दवाओं पर संयुक्त रिसर्च

बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य के वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों, कैंसर अस्पतालों और AIIMS नेटवर्क को जोड़कर:

  • कैंसर दवाओं के परीक्षण,
  • रोगाणुरोधी (Antimicrobial) उपचार,
  • नैदानिक अनुसंधान (Clinical Research)

पर सहयोगात्मक शोध कार्य शुरू किए जाएंगे।

यह नेटवर्क चिकित्सा अनुसंधान और नई दवाओं के परीक्षण में पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।


विज्ञान आधारित क्षेत्रीय विकास का नया मॉडल

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों, मेडिकल नेटवर्क और शिक्षा जगत के समन्वय से पूर्वी भारत में विज्ञान आधारित विकास का नया मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे पश्चिम बंगाल का योगदान भारत की ज्ञान आधारित और नवाचार केंद्रित अर्थव्यवस्था में और मजबूत होगा।


जल्द होगी समन्वय बैठक

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और केंद्र सरकार के वैज्ञानिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रारंभिक समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री के साथ उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय समीक्षा बैठक होगी, जिसमें योजनाओं की प्रगति और नए सहयोग क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी।

प्रमुख संदेश

यह पहल केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की उस साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत विज्ञान, अनुसंधान, स्टार्टअप और तकनीक आधारित जनकल्याण को राज्य के विकास के केंद्र में रखा जाएगा।

  नई दिल्ली / एजेंसी / प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान दुर्घटना के कारण हुई दुखद मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
भारतीय लोगों की तरफ से प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि शोक संतप्त परिवारों को इस दुखद घड़ी को सहने की शक्ति मिले, साथ ही उन्होंने शेष सभी लापता लोगों के शीघ्र और सुरक्षित बाहर निकलने की भी कामना की।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
"चीन के शांक्सी प्रांत में एक खदान हादसे में लोगों की मौत से दुखी हूँ। भारत के लोगों की तरफ से, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन के लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। इस दुखद घड़ी में शोक संतप्त परिवारों को शक्ति मिले। सभी लापता लोगों की शीघ्र और सुरक्षित बरामदगी के लिए प्रार्थना करता हूं।"

By- नरेश देवांगन 

जगदलपुर, शौर्यपथ। बस्तर जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर लगाम कसने के लिए खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्त और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। संचालक खनिज एवं बस्तर कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण कर अवैध कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 36 वाहनों को जब्त किया है।

खनिज विभाग की इस सक्रियता को जिले में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और राजस्व संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभागीय टीम ने उपनपाल, देवड़ा, कोडेनार, बड़ेआमाबाल, कोरपाल, बेलगांव, धरमपुरा, जगदलपुर, कुम्हरावंड, पिपलावंड, बजावंड, बडांजी, तारापुर और बनियागांव सहित कई क्षेत्रों में लगातार निरीक्षण किया। जांच के दौरान अवैध रूप से रेत एवं चुना पत्थर का उत्खनन, परिवहन और भंडारण करते पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए सभी वाहनों को पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया गया है, वहीं चार भंडारणकर्ताओं के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनिज गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 एवं खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1967 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

खनिज विभाग की इस मुहिम से अवैध खनिज कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आम लोगों में प्रशासन की सक्रियता को लेकर सकारात्मक संदेश गया है। विभागीय अधिकारियों की सतर्कता और मैदान स्तर पर लगातार निगरानी से यह साफ संकेत मिला है कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस अभियान में खनि अधिकारी शिखर चेरपा, सहायक खनि अधिकारी जागृत गायकवाड, खनि निरीक्षक अंकित पुरी, अनि सिपाही डिकेश्वर खरे, नगर सैनिक विजय कश्यप, कृष्णा बघेल एवं सहदेव बघेल सहित जिला खनिज जांच उड़नदस्ता दल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के तीन विधायकों—मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम), पी. सत्यभामा (धरापुरम) और एस. जयकुमार (पेरुंदुरई)—ने अपने पद से इस्तीफा देकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का दामन थाम लिया है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता संतुलन बदलने वाला माना जा रहा है।

विश्वास मत से शुरू हुई राजनीतिक बगावत

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार ये तीनों विधायक उस बागी गुट का हिस्सा थे जिसने हाल ही में विधानसभा में हुए विश्वास मत के दौरान TVK सरकार के पक्ष में मतदान किया था। उस समय ही यह संकेत मिल गया था कि AIADMK के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। अब इन विधायकों का औपचारिक रूप से TVK में शामिल होना इस बगावत को खुला राजनीतिक संदेश बना चुका है।

इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने सचिवालय पहुंचकर TVK के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन से मुलाकात की तथा पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान TVK नेतृत्व ने इसे “जनता के विश्वास और विकास की राजनीति की जीत” बताया।

उपचुनाव में TVK को बड़ा फायदा?

इन तीन सीटों के खाली होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री विजय द्वारा पहले ही तिरुचि ईस्ट सीट छोड़ने के कारण अब राज्य में कुल चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना तय माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा माहौल TVK के पक्ष में दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता, युवा मतदाताओं का समर्थन और सरकार की आक्रामक राजनीतिक रणनीति TVK को उपचुनाव में मजबूत स्थिति में ला सकती है। यदि TVK इन सीटों पर जीत दर्ज करती है तो विधानसभा में उसकी स्थिति पहले से अधिक प्रभावशाली हो जाएगी और विपक्ष का दबाव और कमजोर पड़ सकता है।

AIADMK और DMK का तीखा हमला

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। AIADMK और DMK दोनों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है।

AIADMK नेताओं का कहना है कि सत्ता के दबाव और राजनीतिक प्रलोभन के जरिए विपक्षी विधायकों को तोड़ा जा रहा है। वहीं DMK ने भी सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप लगाया है।

हालांकि TVK ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के विधायक जनता के हित में और विकास की राजनीति से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

विजय की राजनीति का नया दौर

फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए मुख्यमंत्री विजय अब केवल लोकप्रिय चेहरा नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में स्थापित होते दिखाई दे रहे हैं। लगातार बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता और विपक्षी दलों में सेंध लगाने की रणनीति ने TVK को तेजी से मजबूत किया है।

आने वाले उपचुनाव अब केवल चार सीटों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, बल्कि यह तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत माने जा रहे हैं। यदि TVK यहां जीत दर्ज करती है तो राज्य की राजनीति में विजय का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है, जबकि AIADMK के लिए यह संकट और गहरा सकता है।

कोंडागांव, शौर्यपथ।  छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कोंडागांव जिला 2012 से जिला घोषित हो गया था जिसके बाद से अब तक जिले में सभी जिलेवासियों को शासन की सभी योजनाओं को पूरा किया जा रहा है । मगर एक तरफ ध्यान दिया जाए तो एक बड़ी बात सामने आती है देश एक कठनाई से गुजर रहा है जहाँ पेट्रोल व डीजल की किल्लत देखा जा रहा है।

वही अगर बात करे कोंडागांव की तो  

न्यायालय कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर जेल भेजती है जो कोंडागांव मुख्यालय से 60 से 50 किलोमीटर दूर पड़ता है जहाँ रोजना कैदियों को लाने में मशक्कत की जाती है अगर कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी एक जेल या उप जेल बन जाए तो पुलिस को राहत मिलेगी।

समस्या क्या है?

कोंडागांव को 2012 में जिला घोषित किया गया था

इसके बावजूद यहां अभी तक जिला जेल/उप-जेल नहीं है

कोर्ट (न्यायालय) से कैदियों को जगदलपुर या नारायणपुर भेजा जाता है

यह दूरी लगभग 50–60 किलोमीटर है

इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?

पुलिस को रोज कैदियों को ले जाने में अधिक मेहनत और संसाधन खर्च

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक बोझ

सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है (लंबी दूरी पर ट्रांजिट)

कैदियों और उनके परिजनों को असुविधा

अब देखने वाली बात होगी कि शौर्यपथ की इस खबर से जिला प्रशासन व शासन क्या कदम उठाएगी।

भिलाई / शौर्यपथ /
भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र स्थित एडवांस बर्न केयर यूनिट ने लगभग 50 प्रतिशत तक झुलसे एक मासूम बच्चे का सफल उपचार कर उसे नई जिंदगी दी।
गंभीर संक्रमण और सेप्टीसीमिया की स्थिति में भर्ती हुए बच्चे का उपचार आधुनिक सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और संवेदनशील देखभाल के साथ किया गया। इलाज के दौरान हाई प्रोटीन डाइट, विशेष ड्रेसिंग और दर्द नियंत्रण के साथ बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा गया।
बर्न यूनिट में बच्चे का जन्मदिन केक और सजावट के साथ मनाया गया, जिससे लंबे समय बाद उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
डॉ. उदय धाबर्डे ने बताया कि बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन पूरी टीम के समर्पण और निरंतर प्रयास से उसे स्वस्थ किया जा सका। अस्पताल से छुट्टी के समय परिजनों ने चिकित्सकीय टीम का भावुक होकर आभार व्यक्त किया।

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