September 17, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मुख्य सचिव विकासशील ने जुलाई की रैंकिंग में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिए प्रशंसा पत्र, विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालय भी सम्मानित

    रायपुर / शौर्यपथ / सरकारी कामकाज में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन लगातार डिजिटल कार्यप्रणाली को मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री विकासशील ने जुलाई माह में ई-ऑफिस के माध्यम से नस्तियों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा कार्यालयीन समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    ई-ऑफिस में विभागीय प्रदर्शन के आधार पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग को द्वितीय और ग्रामोद्योग विभाग को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। मुख्य सचिव ने सम्मानित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए अपेक्षा की कि ई-ऑफिस में इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन किया जाए।

    उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों को आई-गॉट (iGOT) पर प्रत्येक माह विभागीय आवश्यकता के अनुरूप कम से कम 3 से 4 कोर्स अनिवार्य रूप से करने के लिए भी प्रेरित किया। प्रदेश स्तर पर आई-गॉट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को भी प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।

    ई-ऑफिस रैंकिंग में इन अधिकारियों-कर्मचारियों का रहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

    संयुक्त सचिव से कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी की ई-ऑफिस रैंकिंग में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक प्रथम, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन द्वितीय तथा आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत तृतीय स्थान पर रहे।

    उप सचिव श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के श्री दूरदेशी राम सोन्टापर प्रथम, श्रम विभाग के श्री विपुल कुमार गुप्ता द्वितीय तथा सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-8 की श्रीमती ऋतु वर्मा तृतीय रहीं। अवर सचिव श्रेणी में गृह विभाग के श्री पूरन लाल साहू प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-1 के श्री कैलाश कुमार नेताम द्वितीय तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की श्रीमती दिव्या वैष्णव तृतीय रहीं।

    अनुभाग अधिकारी श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री वीरेन्द्र कुमार प्रथम, श्री जीवन लाल नेताम द्वितीय तथा वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के श्री योगेन्द्र कुमार साहू तृतीय स्थान पर रहे। सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के श्री मोहम्मद शाहिर अंसारी प्रथम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की श्रीमती प्रिया बागड़े द्वितीय तथा सामान्य प्रशासन विभाग कक्ष-4 के श्री जलेश राम तृतीय रहे।

    वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री मुकेश राम प्रधान प्रथम, अनुसूचित जाति विकास विभाग के श्री गौरव कुमार राय द्वितीय तथा श्रीमती अंजू दत्ता तृतीय स्थान पर रहीं। कनिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के श्री प्रभु सिंह राठिया प्रथम, खाद्य विभाग के श्री संदीप कुमार तारम द्वितीय तथा नगरीय प्रशासन विभाग के श्री उमेश यादव तृतीय रहे।

    सहायक ग्रेड-2 श्रेणी में आदिम जाति विकास विभाग के श्री शेष नारायण साहू प्रथम, डाटा एंट्री ऑपरेटर श्रेणी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की श्रीमती माया देवांगन द्वितीय तथा सहायक ग्रेड श्रेणी में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के श्री तरूण कुमार धृतलहरे तृतीय स्थान पर सम्मानित हुए।

    समयबद्ध उपस्थिति में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

    अटेंडेंस रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों में श्री अनिल तिर्की, सुश्री आराधना साहू, श्री आशिष कुमार शर्मा, श्री आशुतोष वर्मा, श्री अश्वनी कुमार भतपहरी, श्री भागेश कुमार ध्रुव, श्री भूपेन्द्र सिंह राजपूत, श्रीमती दिव्या वैष्णव, श्रीमती हेमिन बाघे, श्री किशोर कुमार, श्री लोक नारायण शर्मा, श्रीमती मंजूषा राजपूत, श्री मेलू राम ध्रुव, श्री मिर्जा मुस्कान बेग, श्री मुकेश कुमार शाकार, श्री नरेश कुमार बाघमार, श्री पवन कुमार साहू, श्रीमती पुष्पांजली गजभिये, श्री राज कुमार सोरी, श्री राजेश सिंह राणा, सुश्री राखी सिदार, श्री रमाकांत, सुश्री रूपाली तिवारी, श्री शिवचरण राठौर, श्रीमती सुधा शेंडे, श्री तरूण कुमार धृतलहरे और श्री विवेक सोनी शामिल रहे।

    तीन माह की रैंकिंग में भी विभागों ने बनाई जगह

    तीन माह की ई-ऑफिस रैंकिंग में आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त सचिव श्री भूपेन्द्र कुमार राजपूत प्रथम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव श्री सच्चिदानंद आलोक द्वितीय और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती जयश्री जैन तृतीय स्थान पर रहीं।

    तीन माह की अटेंडेंस रैंकिंग में उच्च शिक्षा विभाग के सहायक अनुभाग अधिकारी श्री लोक नारायण शर्मा प्रथम, सामान्य प्रशासन विभाग के भृत्य श्री राज कुमार सोरी द्वितीय तथा वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्री मेलू राम ध्रुव तृतीय स्थान पर रहे।

    तीन माह की विभागीय रैंकिंग में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रथम, गृह विभाग द्वितीय तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तृतीय स्थान पर रहा।

    विभागाध्यक्ष और जिला कार्यालय भी सम्मानित

    ई-ऑफिस रैंकिंग में विभागाध्यक्ष स्तर पर उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त सुश्री रीता यादव प्रथम, आदिम जाति विकास विभाग के आयुक्त श्री डी. राहुल वेंकट द्वितीय और उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक श्री जॉन तिग्गा तृतीय स्थान पर रहे। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सहायक ग्रेड-3 श्री वेद प्रकाश देवांगन चौथे तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री पीताम्बर प्रसाद पांचवें स्थान पर रहे।

    ई-ऑफिस जिला कार्यालय रैंकिंग में रायपुर की सहायक परियोजना अधिकारी सुश्री अनिता जैन प्रथम, सक्ती जिला कार्यालय की सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटर सुश्री नंदनी सोनी द्वितीय और रायपुर जिले के नोडल अधिकारी श्री पंकज कुमार शर्मा तृतीय स्थान पर रहे। सक्ती के ई-जिला तकनीकी प्रबंधक श्री तुलसी देवांगन चौथे तथा कबीरधाम के अधीक्षक श्री राजेन्द्र सिंह धुर्वे पांचवें स्थान पर रहे।

    आई-गॉट में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

    आई-गॉट रैंकिंग में आयुक्त कार्यालय बिलासपुर के चौकीदार श्री गौतम कुमार देवांगन प्रथम, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदाबाजार के व्याख्याता श्री प्रेम नारायण नायक द्वितीय तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय बालोद के आरक्षक श्री दिनेश कुमार तृतीय स्थान पर रहे।

    मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल कार्यप्रणाली और समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों का सम्मान अन्य कर्मचारियों को भी बेहतर कार्य के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने सभी विभागों से ई-ऑफिस और आई-गॉट सहित डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग करते हुए शासकीय कार्यों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा की।

    राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास से लेकर बाजार और अनुसंधान तक पर होगा फोकस

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल) क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत ग्रामोद्योग विभाग एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रदेश में टेक्निकल टेक्सटाइल उद्योग की संभावनाओं को चिन्हित करते हुए व्यापक और ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार, उद्यमिता और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाएं हैं, इसलिए शिक्षा, प्रशिक्षण और कौशल विकास को उद्योग की जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ाया जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करने में प्रदेश के शैक्षणिक एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों से आवश्यक सहयोग लेकर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को इस उभरते क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।

    एग्रो से मेडिकल और स्मार्ट टेक्सटाइल तक संभावनाओं पर मंथन

    बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास, बाजार विकास, अनुसंधान, नवाचार एवं विकास से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इस दौरान प्रदेश में तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के विभिन्न संभावित क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में एग्रो टेक्सटाइल, मेडिकल टेक्सटाइल, कंस्ट्रक्शन टेक्सटाइल, स्मार्ट टेक्सटाइल तथा स्पोर्ट्स, होम एवं क्लॉथ टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इन क्षेत्रों में प्रदेश की मौजूदा क्षमताओं, संभावित बाजार, तकनीकी आवश्यकताओं और कौशल विकास की जरूरतों पर भी चर्चा की।

    विशेषज्ञ संस्थानों के सहयोग से तैयार होगी रणनीति

    बैठक में ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा सहित उद्योग एवं वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा, एनआईटी, कौशल विकास, उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने तकनीकी वस्त्र क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों और संस्थागत क्षमताओं का बेहतर उपयोग करने पर अपने सुझाव दिए।

    सरकार का जोर ऐसी कार्ययोजना तैयार करने पर है, जिसके माध्यम से तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और बाजार को एक साथ जोड़कर छत्तीसगढ़ को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में नई पहचान दिलाई जा सके।

    स्वसहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी; किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय से सालाना आय पहुंची 2 से 2.5 लाख रुपये तक

    रायपुर / शौर्यपथ / सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत का जज्बा किसी भी परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है। मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी की श्रीमती सीता मरावी इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। कभी सीमित आमदनी में परिवार का भरण-पोषण करने वाली सीता मरावी ने स्वसहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह पकड़ी और आज ‘लखपति दीदी’ बनकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

    25 हजार से किराना दुकान, 50 हजार से शुरू किया मुर्गी व्यवसाय

    सीता मरावी वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं। समूह से प्राप्त सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। बैंक लोन, सीआईएफ एवं आरएफ के माध्यम से प्राप्त 25 हजार रुपये की राशि से उन्होंने गांव में किराना दुकान शुरू की। व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बाद समूह के संकुल से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त कर उन्होंने मुर्गी व्यवसाय भी प्रारंभ किया।

    दोनों व्यवसायों को उन्होंने मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया। इसका परिणाम यह रहा कि उनकी वार्षिक आय अब लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के साथ सीता के भीतर आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा भी पैदा की।

    समूह से मिला सहयोग बना जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

    सीता मरावी बताती हैं कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से मिले आर्थिक सहयोग, मार्गदर्शन और स्वरोजगार के अवसर ने उन्हें अपनी क्षमता पहचानने का मौका दिया। आज वह स्वयं आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

    सीता को महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि भी प्राप्त हो चुकी है। विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से मिले सहयोग को उन्होंने अपनी मेहनत और सूझबूझ के साथ जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की राह बनाई है।

    ‘मेहनत करें तो योजनाएं बनती हैं सहारा’

    सीता मरावी के लिए ‘लखपति दीदी’ बनना केवल आय बढ़ने की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान है। किराना दुकान और मुर्गी व्यवसाय के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि यदि महिलाओं को आर्थिक सहयोग, सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।

    अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव के लिए श्रीमती सीता मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि स्वसहायता समूह और शासन की योजनाओं से मिले सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिया, जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता में बदला।

    18वें स्थापना दिवस पर कैडेटों ने दिखाई प्रतिभा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक; पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया प्रतिभाओं का सम्मान

    रायपुर / शौर्यपथ / सैनिक स्कूल अंबिकापुर ने अपनी गौरवशाली यात्रा के 18 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर विद्यालय का 18वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में कैडेटों ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सैनिक स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर से हुई। पुष्पगुच्छ से स्वागत के बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया और विद्यालय की 18 वर्षों की यात्रा के प्रतीक रूप में अतिथियों ने केक काटकर स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुमार अग्रवाल सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    18 वर्षों की उपलब्धियों का प्रस्तुत हुआ रिपोर्ट कार्ड

    विद्यालय के प्राचार्य कर्नल राजेश बैंदा ने सत्र 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों, खेलकूद, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में कैडेटों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ कैडेटों के व्यक्तित्व विकास और नेतृत्व क्षमता निर्माण पर भी निरंतर जोर दिया है।

    समारोह में कैडेटों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। स्वागत गीत के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य, प्रेरणादायक मूक अभिनय, देशभक्ति से ओतप्रोत समूहगान और भगवान श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

    विद्यालय पत्रिका का विमोचन, ‘संस्कृत ऐप’ ने खींचा ध्यान

    मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल ने सत्र 2025-26 की विद्यालय पत्रिका का विमोचन किया। इस दौरान संस्कृत शिक्षक श्री सौरभ कुमार जैन के मार्गदर्शन में कैडेटों द्वारा तैयार किए गए अभिनव ‘संस्कृत ऐप’ का भी अवलोकन किया गया। अतिथियों ने कैडेटों की इस पहल की सराहना करते हुए इसे तकनीक के साथ शिक्षा और भारतीय भाषाओं को जोड़ने का सराहनीय प्रयास बताया।

    शिक्षा, खेल और सह-पाठ्यक्रम में चमके कैडेट

    समारोह में सत्र 2025-26 में शैक्षणिक, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले हाउस को ट्रॉफियां प्रदान की गईं।

    सर्वश्रेष्ठ सह-पाठ्यक्रम हाउस का सम्मान कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को मिला। खेलकूद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को सम्मानित किया गया। वहीं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन सिंह हाउस एवं तेजस हाउस को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक हाउस की ट्रॉफी प्रदान की गई।

    विद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, स्टाफ एवं जनरल कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य, कर्तव्यनिष्ठा और सैनिक स्कूल के विकास में योगदान के लिए कमेंडेशन प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    ‘अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं’

    मुख्य अतिथि मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सैनिक स्कूल अंबिकापुर की शैक्षणिक, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कैडेटों को अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने, निरंतर परिश्रम करने और समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल केवल विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि यहां ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण होता है, जिनमें अनुशासन, नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कैडेटों से इन मूल्यों को आत्मसात कर देश के गौरवशाली और जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।

    कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप-प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. पी. श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ सैनिक स्कूल अंबिकापुर के 18वें स्थापना दिवस समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर लौटे प्रतिभावान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य भेंट; CWSN विद्यार्थी नुकेश को राष्ट्रपति ने बांधी राखी, छात्राओं के सुवा नृत्य की हुई सराहना

    रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात और संवाद का यादगार अनुभव लेकर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रपति भवन की अपनी यात्रा, राष्ट्रपति से हुए आत्मीय संवाद और वहां मिले सम्मान के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। बच्चों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनकी यात्रा और राष्ट्रपति से मुलाकात के अनुभव जाने। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण रहा। राष्ट्रपति ने बेहद सहज और आत्मीय वातावरण में उनसे बातचीत की तथा उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए विशेष पलों की यादें भी मुख्यमंत्री के साथ साझा कीं।

    नुकेश को राष्ट्रपति ने खुद बांधी राखी

    रक्षाबंधन के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात का सबसे भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति का यह आत्मीय स्नेह नुकेश सहित वहां मौजूद सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया।

    राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। बच्चों के लिए यह मुलाकात केवल सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि अपने सपनों को नई ऊंचाई देने वाला प्रेरणादायी अनुभव भी बनी।

    राष्ट्रपति भवन में गूंजा छत्तीसगढ़ का सुवा नृत्य

    राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की मनमोहक झलक भी देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। लोकगीत, संगीत और पारंपरिक भाव-भंगिमाओं से सजी प्रस्तुति ने राष्ट्रपति भवन के वातावरण को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग से भर दिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं की प्रशंसा की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से गौरव का विषय है कि प्रदेश के बच्चों ने राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ-साथ उसकी सांस्कृतिक विरासत का भी परिचय कराया। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति हमारी पहचान और अमूल्य धरोहर है। जब नई पीढ़ी इसे आत्मसात कर राष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत करती है तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है।

    ‘बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं, अवसर मिलने की जरूरत’

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई दिशा देते हैं।

    उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मिले प्रोत्साहन और यात्रा के अनुभव को विद्यार्थी अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं।

    बस्तर से महासमुंद तक की प्रतिभाओं ने किया प्रतिनिधित्व

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर की राजवती पोयाम, सुकमा के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग की पायल राजानी, महासमुंद की रागनी साहू, रायपुर के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद के दुर्गेश साहू और डिगेश सेन शामिल रहे।

    इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा श्री चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे सपने बड़े रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, छत्तीसगढ़ तथा देश को गौरवान्वित करें।

    सर्व आदिवासी समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण पर दिया जोर, महिला आयोग ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बस्तर से सरगुजा तक के सामाजिक प्रतिनिधियों की आवाज समिति के सामने पहुंची। सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, राज्य महिला आयोग और राज्य फिल्म विकास निगम के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने सुझाव रखे।

    UCC समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह तथा सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े ने विभिन्न पक्षों को विस्तार से सुना। समिति की ओर से कहा गया कि संहिता तैयार करते समय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक विविधता और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखा जाएगा।

    आदिवासी समाज बोला—परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की हो सुरक्षा

    परिचर्चा में कंवर, गोंड, बैगा और उरांव सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं उसकी विशिष्ट पहचान हैं। इसलिए प्रस्तावित कानून में इन परंपराओं और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के संरक्षण का पर्याप्त प्रावधान होना चाहिए।

    प्रतिनिधियों ने इसके साथ ही विवाह पंजीयन, महिलाओं के संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक एवं वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर भी समिति के समक्ष अपने सुझाव दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि समानता के उद्देश्य के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक संस्थाओं की वास्तविकताओं को भी समझा जाए।

    महिला अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर

    राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सकारात्मक सामाजिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने तथा धर्म परिवर्तन पर रोक से जुड़े विषयों के संदर्भ में UCC की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

    राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विवाह एवं संपत्ति अधिकारों में समानता समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है।

    जनसंवाद के जरिए तैयार होगा प्रस्तावित प्रारूप

    संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का प्रावधान है। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में UCC समिति प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद कर रही है। प्रस्तावित संहिता के अंतर्गत विवाह एवं तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

    समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, कानूनविदों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। बस्तर से सरगुजा तक सामने आ रहे विभिन्न दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने की यह प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित UCC के प्रारूप को स्थानीय सामाजिक विविधता, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन के आधार पर तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

    संत गोबिंदराम शदाणी कन्या महाविद्यालय में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ समारोह, प्रतिभाशाली छात्राओं का हुआ सम्मान

    रायपुर / शौर्यपथ / संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 की नवप्रवेशित छात्राओं के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने छात्राओं को शिक्षा के साथ जीवन-मूल्यों, विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि के रूप में छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत है। यह यात्रा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक बनाने वाली होनी चाहिए।

    राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि इस महाविद्यालय में प्रवेश के साथ छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनी हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश प्रदान किया है। महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज की कल्पना भी अधूरी है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में उपलब्धियों के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। किसी एक क्षेत्र में सफलता न मिलने पर निराश होने के बजाय दूसरे अवसरों को तलाशते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

    तकनीक ज्ञान का साधन, विवेक का विकल्प नहीं

    राज्यपाल ने छात्राओं को सतत सीखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन स्वयं एक निरंतर चलने वाली पाठशाला है और व्यक्ति जीवनभर विद्यार्थी बना रहता है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी इंटरनेट युग की विद्यार्थी है और तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोल दिए हैं, लेकिन तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहना उचित नहीं है। इंटरनेट से व्यापक जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन वह मानव बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्थान नहीं ले सकता। ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से जीवन और समाज को बेहतर बनाने के लिए किया जाए।

    उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में केवल यह सवाल नहीं होना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने समाज, पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है, इसलिए अनावश्यक चिंताओं में इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए मेहनत और निरंतर प्रयास करने से भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

    शिक्षकों का आचरण विद्यार्थियों के लिए बने प्रेरणा

    श्री डेका ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का योगदान अमूल्य है और इसे धन से नहीं आंका जा सकता। शिक्षकों को अपने ज्ञान के साथ-साथ आचरण और व्यवहार से भी विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे छात्राएं प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ सकें।

    राज्यपाल ने छात्राओं से समाज के प्रति सकारात्मक सोच रखने और अपने स्तर पर छोटे-छोटे रचनात्मक योगदान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए ऐसे छोटे प्रयास जब सामूहिक रूप लेते हैं तो समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

    मेहनत और प्रतिभा के लिए छात्राओं का सम्मान

    दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका ने महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा से महाविद्यालय का नाम रोशन किया। सम्मान से छात्राओं का उत्साहवर्धन हुआ और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली।

    कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से उच्च शिक्षा को मिली नई दिशा; सेक्टर-18 में 40 एकड़ में बनेगा अत्याधुनिक संस्थान, 2-3 वर्षों में शुरू होगा पहला बैच

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता न पड़े, राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसरों के माध्यम से प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

    इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार उपस्थित रहे।

    40 एकड़ में आकार लेगा अत्याधुनिक कैंपस

    NMIMS का अत्याधुनिक कैंपस नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद ने 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाते हुए अब लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

    संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य है, लेकिन विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे काफी पहले मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद कैंपस में लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

    महानगरों की ओर पलायन कम होगा, प्रदेश में ही मिलेंगे बड़े अवसर

    NMIMS की स्थापना छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर लेकर आएगी। प्रबंधन, कौशल विकास और आधुनिक रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही प्रदेश में प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मुंबई, दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु जैसे बड़े शिक्षा केंद्रों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों से भी विद्यार्थी नवा रायपुर में अध्ययन के लिए आएंगे। इससे शहर में बहुआयामी और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होने की संभावना है।

    शिक्षा के साथ रोजगार, नवाचार और उद्यमिता को भी मिलेगी रफ्तार

    NMIMS की मौजूदगी का असर केवल कक्षाओं और डिग्री तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे। विद्यार्थी, शिक्षक, शोधकर्ता और उद्योग जगत एक-दूसरे से जुड़ेंगे, जिससे उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

    राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध, नवाचार और स्टार्टअप से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

    नवा रायपुर बनेगा एजुकेशन और नॉलेज हब

    राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी वाले शहर के साथ-साथ एजुकेशन एवं नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के नवा रायपुर आने से शहर का शैक्षणिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक वातावरण समृद्ध होगा। शिक्षा से जुड़ी आवास, परिवहन, खान-पान, सेवाओं और अन्य सहायक गतिविधियों में भी रोजगार एवं आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने वाला महत्वपूर्ण कदम है। लीज और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान हजारों युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ नवा रायपुर को देश के प्रमुख शिक्षा एवं ज्ञान केंद्रों में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    रोड शो में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेश और खनिज विकास को दिया बढ़ावा; केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योगों से अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने देश के महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करते हुए निवेशकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। खान मंत्रालय द्वारा रायपुर में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला को लेकर रोड शो आयोजित किया गया। इस श्रृंखला में नौ राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि तथा केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा को देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए कहा कि राज्य की खनिज क्षमता का तेजी से विकास करने के लिए अधिक निवेश, त्वरित परियोजना क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश को सुगम बनाने, प्रक्रियाओं को सरल करने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    खनिज सुरक्षा से आत्मनिर्भर भारत तक

    केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को भारत की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि इन खनिजों की खोज और विकास में तेजी लाने के साथ उद्योग एवं निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने खनिजों की पूरी मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर देते हुए इसे देश की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा।

    आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार का लाभ महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को मिल सकता है। इन खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक केंद्र विकसित होने, सतत अवसंरचना को मजबूती मिलने और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार एवं आर्थिक अवसर बढ़ने की संभावनाएं हैं। राज्य की बेहतर अवसंरचना, कुशल मानव संसाधन और संस्थागत सहयोग को उन्होंने दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल आधार बताया।

    20 ब्लॉकों में छत्तीसगढ़ के पांच ब्लॉक

    खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने बताया कि नीतिगत सुधार, पारदर्शी नीलामी और परियोजनाओं के तेज संचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र लगातार मजबूत हुआ है। अब तक पेश किए गए 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

    नीलामी की 8वीं श्रृंखला में शामिल 20 ब्लॉकों में 17 समग्र लाइसेंस और तीन खनन पट्टा ब्लॉक हैं। इनमें ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इनमें पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं, जिससे राज्य की रणनीतिक खनिज क्षेत्र में भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।

    खनन के साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर जोर

    खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप कदम ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज केवल खनन तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि इनके प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने केंद्र, राज्य और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग के माध्यम से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने तथा आत्मनिर्भर महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर जोर दिया।

    सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की खनिज क्षमता में संभावनाएं तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का उल्लेख किया।

    संभावित बोलीदाताओं को दी गई तकनीकी जानकारी

    रोड शो के तकनीकी सत्र में एनएमईडीटी के महानिदेशक श्री पंकज गर्ग ने समग्र लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति संबंधी योजना की जानकारी दी। इसके बाद एमईसीएल के एचओडी (अन्वेषण) श्री श्रीकांत शर्मा ने खनिज ब्लॉकों एवं उनकी संभावनाओं, एसबीआईकैप्स के सहायक उपाध्यक्ष श्री प्रतिन शर्मा ने नीलामी प्रक्रिया एवं निविदा दस्तावेज तथा एमएसटीसी के सहायक प्रबंधक श्री पुष्कर हजेला ने ई-नीलामी प्रक्रिया की जानकारी दी।

    कार्यक्रम में संभावित बोलीदाताओं के सवालों का समाधान भी किया गया। रोड शो का उद्देश्य खनिज अन्वेषण में तेजी, निजी क्षेत्र एवं निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना और महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना रहा।

    आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र संचालन पर समीक्षा

    रोड शो के बाद खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों एवं पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ समीक्षा बैठक हुई। इसमें आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र संचालन, परियोजनाओं की प्रगति और सामने आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई। केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारियों ने समयबद्ध समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

    यह पहल छत्तीसगढ़ को केवल खनिज उत्खनन के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और रणनीतिक खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकती है। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में निवेश बढ़ने से राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

    भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित लोहा चोरी के मामले को लेकर लगातार सवाल उठाने वाले वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की एक नई सोशल मीडिया पोस्ट ने दुर्ग जिले में एक बार फिर सनसनी पैदा कर दी है। इस बार विधायक ने देहदान और मानवता के नाम पर मृत शरीरों के कथित दुरुपयोग/बिक्री को लेकर बड़ा संकेत दिया है। हालांकि पोस्ट में संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    विधायक रिकेश सेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “भिलाई का एक यूट्यूबर जो सालों से देहदान के नाम से सैकड़ों लाशों को मेडिकल कॉलेजों को बेचता आया है! अब उसकी असलियत लाना जरूरी है!” विधायक की इस पोस्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि आखिर यह गंभीर आरोप किस व्यक्ति या संस्था की ओर इशारा कर रहा है?

    लोहा चोरी के बाद अब ‘देहदान’ का मुद्दा

    गौरतलब है कि भिलाई स्टील प्लांट से कथित लोहा चोरी के मामले में विधायक रिकेश सेन पहले भी सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सवाल उठाते रहे हैं। मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी और कई लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। इसी दौरान विधायक द्वारा कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों और स्वयंभू समाजसेवियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।

    अब इसी कड़ी में विधायक की ताजा पोस्ट ने मानवता और देहदान जैसे संवेदनशील विषय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

    सवाल बड़ा है, अब नाम का इंतजार

    यदि विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, किसी व्यक्ति पर मृत शरीरों की बिक्री जैसे गंभीर आरोपों की वास्तविकता जांच और ठोस दस्तावेजी प्रमाणों से ही स्पष्ट होगी।

    ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधायक रिकेश सेन इस पोस्ट के बाद किसके खिलाफ शिकायत, कौन से दस्तावेज या क्या प्रमाण सार्वजनिक करते हैं? क्या इस कथित मामले में पुलिस अथवा प्रशासन से शिकायत होगी? और सबसे बड़ा सवाल—विधायक के निशाने पर आखिर वह कौन है, जिसका नाम अभी तक सामने नहीं आया है?

    लोहा चोरी के आरोपों से लेकर अब देहदान के नाम पर कथित ‘मृत शरीरों के सौदे’ तक—वैशाली नगर विधायक की नई पोस्ट ने दुर्ग-भिलाई की सियासत और सामाजिक गलियारों में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। अब इंतजार है उस नाम और उन तथ्यों का, जिनके आधार पर यह गंभीर दावा किया गया है।

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