August 09, 2026
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    PANKAJ CHANDRAKAR

    PANKAJ CHANDRAKAR

    जांजगीर -चांपा /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि गत करीब साढ़े 3 साल में छत्तीसगढ़ के समन्वित विकास के कार्य हुए। उन्होंने कहा कि इस अवधि में राज्य के किसानों, महिलाओं, ग्रामीणों, भूमिहीन खेतिहर मजदूरों, बेरोजगारों के कल्याण के साथ-साथ प्रशासनिक कसावट के क्षेत्र में भी शासन द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किए गए।

    मुख्यमंत्री  बघेल आज नगर पालिका सक्ती के बुधवारी बाजार स्थित दीनदयाल स्टेडियम में पूर्व मंत्री और छत्तीसगढ़ के स्वप्न दृष्टा स्वर्गीय  बिसाहू दास महंत की प्रतिमा का अनावरण और विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री  बघेल ने आज सक्ती में अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की। इनमें सक्ती में शासकीय महाविद्यालय की घोषणा सहित सतनामी समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपए की घोषणा की। वहीं विधायक  राम कुमार यादव की मांग पर नगर पंचायत चंद्रपुर में गौरवपथ, सहकारी बैंक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस चौकी की घोषणा की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, सांसद  ज्योत्सना महंत, विधायक  राम कुमार यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के स्वप्न दृष्टा स्वर्गीय  बिसाहू दास महंत द्वारा हसदेव बांगो परियोजना के निर्माण कराए जाने के कारण जांजगीर-चांपा और सक्ती क्षेत्र के किसान समृद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद किसानों को उनके धान की सही कीमत मिलने लगी है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य देने का काम किया। श्री बघेल ने बताया कि गत खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने किसानों से 98 लाख क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के साथ-साथ बेरोजगार युवकों के हित में भी पीएससी और व्यापम की परीक्षाओं में उम्मीदवारों का फीस माफी का निर्णय लिया। वही भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए राजीव गांधी भूमिहीन खेतिहर मजदूर न्याय योजना में प्रतिवर्ष 7 हजार रूपए की सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया।

    मुख्यमंत्री ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि रासायनिक खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। खेती नष्ट करने वाले रासायनिक खाद के स्थान पर वर्मी, गोबर खाद का अधिकतम उपयोग करें और उसका निर्माण कर खाद के लिए स्वयं आत्मनिर्भर बनें। प्रशासनिक कसावट के क्षेत्र में राज्य सरकार के कामकाज का उल्लेखनीय काम किए गए हैं।
    विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सक्ती को जिला बनाने पर यहां के लोग बहुत प्रसन्न हैं, यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री का स्वागत करने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सक्ती क्षेत्र से पलायन की अधिकता के कारण इस क्षेत्र में औद्योगिक संस्थान खोलने की जरूरत है। डॉ महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता का संरक्षण और संवर्धन हम सब का नैतिक दायित्व है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा यहां रहने वाले हर वर्ग के लोगों की भलाई के कार्य करने से ही हो सकती है।

    जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी और राजस्व मंत्री  जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि राजस्व से संबंधित कार्य के लिए सरकार द्वारा समय सीमा तय कर दी गई है। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा में प्रकरणों का निराकरण नहीं होने पर इसे संबंधित राजस्व अधिकारी की जवाबदारी मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा स्वयं मुख्यमंत्री और मेरे द्वारा की जा रही है।
    समारोह को छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ महंत रामसुंदर दास, विधायक श्री राम कुमार यादव, नगर पालिका सक्ती की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा जायसवाल ने भी संबोधित किया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने सक्ती को 226 करोड़ 26 लाख रुपए के 30 विभिन्न कार्यों की सौगात दी। इनमें 13 करोड़ 67 लाख 80 हजार रुपए के 11 विभिन्न कार्यों का लोकार्पण और 212 करोड़ 59 लाख रुपए की लागत के 19 कार्य का भूमिपूजन एवं शिलान्यास के कार्य शामिल हैं।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  बघेल को आदर्श गौठान जेठा का मॉडल, कलेक्टर  जितेंद्र कुमार शुक्ला, पुलिस अधीक्षक डॉ अभिषेक पल्लव द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इसके पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों ने मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल का सक्ती को जिला बनाए जाने पर गुलदस्ता और फूल मालाओं से उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  यनीता चंद्रा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  राघवेंद्र प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ श्रम कर्मकार कल्याण मंडल की सदस्य  मंजू सिंह, राज्य महिला आयोग की सदस्य  शक्तिकांता राठौर, शाकंभरी बोर्ड के अध्यक्ष  राम कुमार पटेल, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  सुभाष धुप्पड़, पुलिस महानिरीक्षक  आर एल डांगी सहित पूर्व विधायक सरोजा मनहरण राठौर, नगर पालिका जांजगीर-नैला के अध्यक्ष  भगवानदास गढेवाल, चांपा नगरपालिका अध्यक्ष  जय थवाईत, विवेक सिसोदिया,  गुलजार सिंह,  चौलेश्वर चन्द्राकर तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

    जांजगीर-चापा  /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शराबबंदी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि हम भी शराबबंदी के पक्ष में हैं। हम भी चाहते हैं कि शराब बंद होना चाहिए। मगर अचानक से कोई फैसला नहीं लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ना हो कि जैसे गुजरात में घर पहुंच सेवा है। बिहार में कानून बदलना पड़ा, विधानसभा में उन्होंने कल ही कानून पारित किया है तो इन सब चीज को देखते हुए हमें निर्णय लेना है।

    जांजगीर के सक्ती में कई विकासकार्यों और लोकार्पण के बाद सीएम ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान ये बयान दिया। सीएम ने कहा कि अचानक प्रकट हुए और रात 8 बजे से लॉकडाउन, आज से 500 रुपए के नोट बंद। हम इस तरह का काम नहीं करना चाहते। हम जनता को झटका नहीं देना चाहते हैं। हम जनता को विश्वास में लेकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमने लॉकडाउन भी किया तब व्यापारियों और नागरिकों से पूछकर किया था।

     

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कांकेर जिले में दुर्गकोंदल के पास घने जंगल में एक पेड़ गिरने से क्षतिग्रस्त हुई भानुप्रतापपुर से पखांजूर को जोड़ने वाली 132 केवी लाइन को दुरस्त कर बिजली सप्लाई रिकार्ड समय में बहाल कर दी गई है। मंगलवार को घने जंगल में इस बिजली लाईन पर एक पेड़ गिरने से ईएचवी कंडक्टर दो 33 केवी लाइन टूट गई थी। इससे 33/11 केवी के छह सबस्टेशन के करीब 29 हजार उपभोक्ता प्रभावित हुए थे।

    इस विद्युत लाईन के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलने पर विद्युत कंपनी के एमडी, ईडी और सभी वरिष्ठ अधिकारी तत्परता के साथ साईट पर पहुंचे और वहां दो नए टावर बनाने का काम तेजी प्रारंभ हुआ। अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात कार्य में जुटकर यह कार्य रिकार्ड समय में पूरा किया। आज शाम इस क्षतिग्रस्त विद्युत लाईन को सुधार कर बिजली सप्लाई बहाल कर दी गई है। जिससे प्रभावित उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।

    इस दौरान बिजली विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्र के उपभोक्ताओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया और संबंधित क्षेत्र में पूरी तरह अंधेरा नहीं होने दिया। बिजली की सप्लाई पूरी तरह से बाधित नहीं होने दी। इस दौरान लोड शेडिंग को 2-2 घंटे के लिए क्षेत्रों में घुमाया जाता रहा, क्योंकि बिजली की आपूर्ति 33 और 11 केवी लाइनों के माध्यम से की जा रही थी। इस क्षमता की ये बिजली लाईनें इस क्षेत्र के केवल आधे भार को पूरा कर सकने में सक्षम थीं।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ में बीते तीन साल में लोगों को आजीविका के लिए अनेक नए अवसर मिल रहे हैं। इस कड़ी में वन धन विकास केन्द्रों ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के उत्तरी इलाकों में भी देखने को मिल रही है। राज्य के आदिवासी बहुल जशपुर क्षेत्र में वनोपज के रूप में मिलने वाले झाड़ू फूल को उपयोग में लाकर महिलाओं ने आजीविका के साथ आर्थिक सुदृढ़ता के अवसर तलाश चुकी हैं। यहां महिलाएं झाड़ू फूल से झाड़ू का निर्माण कर आमदनी प्राप्त कर रही हैं।

    गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में तीन साल पहले सरकार गठन के बाद अनेक क्षेत्रों में नवाचार हुए। राज्य शासन के वन विभाग ने भी वन धन विकास केन्द्रों की स्थापना करने और इन केन्द्रों के माध्यम से ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों के रहवासियों के लिए रोजगार व आजीविका के नए अवसर दिलाने के लिए पहल की। वन धन योजना के तहत वनोपज झाड़ू फूल का मूल्य पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। ऐसे में जशपुर में कार्य कर रही अमर स्व-सहायता समूह की महिलाएं झाड़ू फूल से झाड़ू बनाकर संजीवनी केन्द्रों के माध्यम से विक्रय कर रही हैं। जानकारी के मुताबित समूह द्वारा अब तक 50 हजार रुपये का झाड़ू तैयार कर विक्रय किया जा चुका है। इससे होने वाली आमदनी से स्व-सहायता समूह की ये महिलाएं प्रोत्साहित हैं और बड़ी मात्रा में झाड़ू निर्माण करने के लिए तैयारी कर रही हैं।

    उल्लेखनीय है कि जशपुर जिला वन जैव विविधता की दृष्टि से काफी समृद्ध है। जिले के वन क्षेत्र में ईमारती काष्ठ, साल बीज, महुआ फूल, तेंदू पत्ता के अतिरिक्त उच्च गुणवत्ता के कई अन्य वनोपज भी पाये जाते हैं। यहां के वनों में वनोपज के रूप में झाड़ू फूल वृहद मात्रा में मिलता है। ऐसे में वन धन विकास केन्द्रों से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं फूल झाडू बना रही हैं। संग्रहित झाड़ू फूल के संवर्धन का कार्य ग्राम पोरतेंगा के वन धन समूह द्वारा किया जा रहा है, जिसके बाद अमर स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संग्रहित झाडू फूल से अच्छी गुणवत्ता का झाड़ू बनाया जा रहा है। उपभोक्ता यहां तैयार फूल झाड़ू को काफी पसंद कर रहे हैं। झाड़ू का विक्रय संजीवनी केंद्र के साथ ही जिले के सी-मार्ट के माध्यम से भी किया जाएगा।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ दिल का होना बहुत जरूरी है। हृदय की सेहत के प्रति लापरवाही बिल्कुल भी नहीं बरतना चाहिए। आधुनिक जीवन-शैली और अनियमित आहार-व्यवहार के कारण अब 30-40 साल की उम्र में ही लोगों को दिल के रोग होने लगे हैं। तम्बाकू सेवन, अस्वस्थ आहार, शारीरिक निष्क्रियता और शराब के सेवन से हृदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि इन कारकों पर नियंत्रण कर लिया जाए तो हृदय रोग से होने वाली 80 प्रतिशत मौतों को कम किया जा सकता है। हृदय से संबंधित बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वस्थ जीवन-शैली अपनाना बहुत जरूरी है।

    स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में एनपीसीडीसीएस के उप संचालक डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि देश में हर वर्ष 28 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हृदय रोगों के कारण होती है। कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना, धूम्रपान, शराब का सेवन, तनाव, अनुवांशिकता, मोटापा एवं उच्च रक्तचाप हृदय रोग के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि सीने में बेचैनी महसूस होना, कई दिनों तक अधिक कफ आना, सांस लेने में दिक्कत होना, सीने में दर्द के साथ अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना या सिर घूमना आदि हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं। इस तरह के लक्षण दिखाई देने या महसूस होने पर अपने नजदीकी चिकित्सा महाविद्यालय, जिला अस्पताल या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जाँच जरूर कराना चाहिए।

    तम्बाकू, शराब व इस तरह के अन्य मादक पदार्थों को त्यागकर संयमित जीवन-शैली, स्वस्थ आहार व योग को दिनचर्या में शामिल कर हृदय रोगों से काफी हद तक बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर शिविरों के माध्यम से हृदय रोग संबंधी जांच की जाती है। विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों, स्कूल-कालेजों आदि में नागरिकों को हृदय रोग और इससे बचाव के बारे में जागरूक किया जाता है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    राजभवन के आमंत्रण पर पहुंचे बच्चे

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संबोधित किए गए ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ कार्यक्रम को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने स्कूली विद्यार्थियों के साथ राजभवन के कांफ्रेंस हॉल में सुना। राजभवन ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आगामी परीक्षाओं को देखते हुए ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ के माध्यम से देश भर के विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों के सार्थक जवाब दिए और परीक्षा अवधि में तनाव प्रबंधन, पढ़ाई के तरीकों, सफलता और असफलता का द्वंद, अभिभावकों व शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप राजभवन सचिवालय द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए राज्यपाल सुश्री उइके के साथ परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम सुनने हेतु आवश्यक व्यवस्था की गई थी।
    संवाद कार्यक्रम में परीक्षा को लेकर होने वाले तनाव के संबंध में विद्यार्थियों द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब देते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि परीक्षा हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ये हमारे जीवन का एक पड़ाव मात्र है। हमें इससे डरने की नहीं बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। आप किसी भी अन्य विद्यार्थी की क्षमता और पढ़ाई से अपनी तुलना मत कीजिए। सभी की अपनी अलग-अलग क्षमता और विशेषता होती है।

    ऑनलाईन शिक्षण की सीमाओं तथा सोशल मीडिया के लत पर बोलते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि समस्या ऑनलाईन या आफलाईन माध्यम की नहीं बल्कि, हमारे मन की है। यदि हम अपने मन पर नियंत्रण रखें और अनुशासन का पालन करें तो आनलाईन शिक्षा ज्ञान का अथाह सागर है। ऑनलाईन हमें ज्ञान पाने के तो ऑॅॅफलाईन हमें उस ज्ञान को व्यवहार में लाने का अवसर देता है। तकनीक को हमें अवसर के रूप में देखना चाहिए न कि चुनौती के रूप में।

    प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा जिस प्रकार हम आजकल मोबाईल से जुडे़ रहते हैं। हमें जीवन में खुद से भी जुड़ना चाहिए। यह अपनी क्षमता को पहचानने और खुद को समझने का अवसर देता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस नीति में शिक्षा से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान किया गया है। यह नीति भारत के लाखों लोगों के परिश्रम का परिणाम है। इसमें उन विद्यार्थियों को भी अवसर दिया गया है जो अपनी पढ़ाई के विषयों में परिवर्तन करना चाहते हैं। इस नीति में ज्ञान के साथ कौशल को भी प्राथमिकता में रखा गया है।
    अभिभावकों की अपेक्षाओं और बच्चों पर अनावश्यक दबाव के संबंध में विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हर बच्चे का अपना विशेष सामर्थ्य होता है। अभिभावकों और शिक्षकों को उस सामर्थ्य को पहचानने की आवश्यकता है। बच्चों पर अपने अधूरे सपनों को न थोपें बल्कि उनके सपनों को पूरा करने में सहायता करें। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप जिस भी तरीके से पढ़ाई करने में सुविधा महसूस करते हैं, उसी तरीके से पढ़ाई करें। किसी भी अनावश्यक दबाव से दूर रहें।

    सफल होने और मोटिवेशन से जुड़े सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि मोटीवेशन के लिए कोई इंजेक्शन या फार्मूला नहीं होता है। आप किसी मोटिवेशन या सहानुभूति की तलाश न करें वह केवल कुछ पल की खुशी देता है। आप अपनी क्षमताओं को स्वयं पहचानें, स्वयं उस कारण को खोजें जो आपको आनंदित और मोटिवेटेड रखता है और उसी पर निरंतर कार्य करें और आगे बढे़ं। अपने चारों ओर लोगों को देखें कि वे किस तरह कड़ी मेहनत से अपने लक्ष्य केा पूरा करते हैं, उनसे प्रेरणा लें और अपनी क्षमता और कौशल को बढ़ाएं।
    अध्ययन के दौरान भूलने की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आप कक्षा में जो कुछ भी पढ़ते हैं, पूरी तन्मयता से पढ़ें। आप कक्षा में शारीरिक और मानसिक दोनों स्थिति में मौजूद रहें। यह आपको सीखने और याद रखने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि जो वर्तमान में पूरी तरह प्रस्तुत रहता है और सीखता है, वह निश्चय ही जीवन में सब कुछ प्राप्त करता है।
    प्रतियोगी परीक्षाओं और विषयों की तैयारी के संबंध में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आप जिस भी विषय की पढ़ाई कर रहे हैं उसमें महारत हासिल कर आत्मविश्वास से आगे बढ़ें। इससे आपको भविष्य में किसी भी परीक्षा के लिए अलग से तैयारी करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एथलीट खेल की तैयारी करता है न कि किसी प्रतियोगिता की। उन्होंने बच्चों से कहा कि आप सभी नई पीढ़ी के हैं, बेशक यहां चुनौतियां ज्यादा हैं परंतु अवसर भी ज्यादा हैं।

    ग्रामीण बालिकाओं के विकास पर बोलते हुए उन्हेांने कहा कि अब वह समय नहीं है जब बालिकाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता है। अब छात्राओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उनका सशक्तिकरण किया जा रहा है। आज महिलाओं को परिवार का ताकत माना जाता है। उन्होंने कहा कि हम जिस परिवेश में रहते हैं उसकी स्वच्छता बेहद आवश्यक है। उन्होंने ट्रिपल पी मूवमेंट प्रो, प्लेनेट, पीपुल पर जोर देते हुए कहा कि जितने ज्यादा लोग इससे जुड़ेंगे पर्यावरण को उतना अधिक लाभ होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बच्चों के टीकाकरण की तेजी को लेकर उनकी खूब सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप अपने ज्ञान को ज्यादा से ज्यादा बढ़ायें और ईर्ष्या करने की प्रवृत्ति से दूर रहें। जीवन में सफलता के लिए यह अति महत्वपूर्ण है।
    गौरतलब है कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ प्रधानमंत्री का संवाद कार्यक्रम पिछले 5 वर्षों से लगातार केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय और साक्षरता विभाग द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के समस्याओं के समाधान को लेकर चर्चा की जाती है। मुख्य तौर पर विद्यार्थियों में परीक्षा को लेकर होने वाला तनाव और अन्य समस्याओं के संबंध में प्रधानमंत्री श्री मोदी विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उनके समस्याओं का समाधान करते हैं।
    राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन उपरांत स्कूली विद्यार्थियों से बात की। उन्होंने विद्यार्थियों को आनंद और उत्साह के साथ परीक्षा में शामिल होने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संदेश को आत्मसात् करने को कहा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचारों का अनुकरण करने से विद्यार्थी निश्चित ही अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे और भय व तनाव मुक्त होकर जीवन की सभी परीक्षाओं में सफल होंगे। राज्यपाल सुश्री उइके ने विद्यार्थियों से कहा कि वे तकनीक व परंपरागत शिक्षा में समन्वय बनाएं। दोनों ही पद्धतियों की अपनी विशिष्टताएं हैं। तकनीक के माध्यम से ज्ञान के विपुल संसार से आपका परिचय होता है तथा देश-विदेश की जानकारियां आपको मिलती है, वहीं परंपरागत शिक्षा में विद्वत जनों के सहयोग से शिक्षा के साथ-साथ उनके अनुभव की भी सीख मिलती है। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि विद्यार्थी शिक्षा से विद्वता के साथ-साथ संस्कारवान बनते हैं। इस अवसर पर उन्होंने उदाहरण स्वरूप बच्चों को राजभवन की वेबसाईट का अवलोकन कराया तथा इसी प्रकार सभी संवैधानिक, गैर संवैधानिक निकायों की जानकारी व उनके अधिकारों के बारे में वेबसाईट के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने को कहा। राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री लेना ही विद्वान या सफलता का मानक नहीं है, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने परिवेश को स्वच्छ, सुंदर बनाने के साथ ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनना होगा। आप सभी वृक्ष लगाएं और उसका संरक्षण भी करें।
    राज्यपाल सुश्री उइके ने विद्यार्थियों को आगामी परीक्षा के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। राज्यपाल ने बच्चों के आग्रह पर उन्हें ऑटोग्राफ दिया और उनके राजभवन परिसर के भ्रमण की व्यवस्था की। ‘‘परीक्षा पे चर्चा’’ कार्यक्रम में केन्द्रीय विद्यालय रायपुर, नवोदय विद्यालय माना तथा राजभवन सचिवालय में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अध्ययनरत् बच्चे एवं अभिभावक शामिल हुए

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को नव संवत्सर, चैत्र नवरात्रि, गुड़ी पड़वा और चेट्रीचंड्र की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों के लिए सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 2 अप्रैल से हिन्दू नववर्ष, नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, इस दिन बैसाखी, गुड़ी पड़वा और चेट्रीचंड का पर्व भी मनाया जाएगा। चैत्र नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व है, जिसे छत्तीसगढ़ में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। माता भगवती छत्तीसगढ़ में मां शीतला, दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, गंगा मैया, बिलईमाता, चंद्रहासिनी देवी तथा अन्य स्वरूपों में विराजमान है। उन्होंने माता भगवती से प्रार्थना की है कि उनका आशीष प्रदेशवासियों पर बना रहे और प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर हो।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    छत्तीसगढ़ शासन ने जांजगीर-चांपा जिले के अंतर्गत राम वन गमन पथ का पर्यटन विकास कार्यों के लिए छह करोड़ 39 हजार रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृत कार्यों में विकासखण्ड नवागढ़ के अंतर्गत शिवरीनारायण में घाट विकास कार्य के लिए पांच करोड़ 39 लाख रूपए और विद्युतीकरण के लिए 45 लाख, घाट पर कियोस्क के निर्माण हेतु 30 लाख रूपए और सिगनेज कम्पोनेंट कार्य के लिए तीन लाख दो हजार रूपए स्वीकृत किए है। इसी तरह से शिवरीनारायण में लैण्ड स्केपिंग कार्य के लिए 14 लाख 91 हजार रूपए और घाट मार्ग में अन्य विकास कार्यों के लिए छह लाख 72 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है।

    जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से शिवरीनारायण में पर्यटन विकास के कार्यों को पूर्ण कराने के लिए मुख्य अभियंता मिनीमाता बांगो परियोजना जल संसाधन विभाग बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। अधिकारियों को योजना का कार्य स्वीकृत राशि एवं निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए है।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शनिवार दो अप्रैल को बस्तर प्रवास के दौरान बस्तरवासियों को 104 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात देंगे। वे नगर पंचायत बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में आयोजित सिरहा-गुनिया सम्मेलन में 70 करोड़ रुपए के 17 कार्यों का करेंगे लोकार्पण और लगभग 34 करोड़ 33 लाख रुपए के विकास कार्यों का करेंगे भूमिपूजन करेंगे। इसके साथ ही बस्तर नगर पंचायत क्षेत्र के 11 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र प्रदान करेंगे तथा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत यहां 151 नवविवाहित जोड़ों आर्शीवाद प्रदान करेंगे।

    मुख्यमंत्री बघेल यहां लगभग 3 करोड़ 4 लाख रुपए की लागत से कचनार से चोलनार तक निर्मित 4.9 किलोमीटर लंबी सड़क, लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से पाहुरबेल से उड़ियापाल तक निर्मित 4.5 किलोमीटर लंबी सड़क, लगभग 2 करोड़ 63 लाख रुपए की लागत से मंगनार से तोंगकोेंगेरा तक डामरीकृत 4 किलोमीटर लंबी सड़क, लगभग 2 करोड़ 22 लाख रुपए की गुड़िया से कालागुड़ा तक निर्मित 6.2 किलोमीटर लंबी सड़क, लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से नगरनार से नदीबोड़ना तक निर्मित 5 किलोमीटर लंबी सड़क, लगभग 1 करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से रायकोट से सोढ़ीपारा तक निर्मित 4.5 किलोमीटर लंबी सड़क, एक करोड़ 4 लाख रुपए की लागत से नानगुर मे निर्मित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवन, 55 लाख रुपए की लागत से घाट धनोरा मे निर्मित शासकीय हाईस्कूल भवनका लोकार्पण करेंगे।

    मुख्यमंत्री कार्यक्रम में 55 लाख रुपए की लागत से बाबू सेमरा मे निर्मित शासकीय हाईस्कूल भवन, एक करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से कोलचूर से घाट कवाली तक निर्मित 5.5 किलोमीटर लंबी सड़क, 5 करोड़ 37 लाख रुपए की लागत से नारायणपाल से कोरमेल तक निर्मित 13.5 किलोमीटर लंबी सड़क, एक करोड़ 56 लाख रुपए की लागत से बागमोहलई से राजा डोंगरी तक निर्मित 4.1 किलोमीटर लंबी सड़क, 20 करोड़ 67 लाख रुपए की लागत से डिलमिली से पखनार तक निर्मित 20.8 किलोमीटर लंबी सड़क के साथ ही 2 करोड़ 49 लाख रुपए की लागत के बस्तर विश्वविद्यालय में निर्मित ट्रांजिस्ट हॉस्टल व माता रुक्मणी सेवा संस्थान में एक करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से निर्मित हॉस्टल, 5 करोड़ 81 लाख रुपए की लागत से फरसागुड़ा से पखना कोंगेरा तक निर्मित 21 किलोमीटर लंबी सड़क, 15 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से बस्तर से कुम्हली तक निर्मित 23.28 किलोमीटर लंबी सड़क का लोकार्पण करेंगे।
    मुख्यमंत्री कार्यक्रम में जिन कार्यो का भूमिपूजन करेंगे, उनमें 2 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत केे जैतगिरी से डुरकाबेड़ा तक 4 किलोमीटर लंबी सड़क, एक करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से सोनपुर से बनियागांव तक 3 किलोमीटर लंबी सड़क, 2 करोड़ 33 लाख रुपए की लागत के बस्तर विश्वविद्यालय के अतिथि भवन, 5 करोड़ 47 लाख रुपए की लागत के सोरगांव से जामगांव तक 5.5 किलोमीटर लंबी सड़क, एक करोड़ 97 लाख रुपए की लागत के टेमरा से पुरुषपाल तक 1.7 किलोमीटर लंबी सड़क, 2 करोड़ 99 लाख रुपए की लागत के बोदरा से चोंडीघाट तक 4 किलोमीटर लंबी सड़क शामिल है।

    मुख्यमंत्री कार्यक्रम में 2 करोड़ 47 लाख रुपए की लागत के बागमोहलई से जामगुड़ा तक 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क, 5 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत के बुड़गीभाटा से चीतापुर तक 7 किलोमीटर लंबी सड़क, 4 करोड़ 59 लाख रुपए की लागत के मंडवा से ढोढरेपाल तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क, 3 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत के किलेपाल में नवीन आईटीआई भवन, एक करोड़ 65 लाख रुपए की लागत के कोलेंग से ओड़ीसा सीमा तक 8.6 किलोमीटर लंबी सड़क, 25 लाख रुपए की लागत के बेड़ा उमरगांव के कृषक प्रशिक्षण भवन, 15 लाख रुपए की लागत के कुम्हारपारा जगदलपुर के यूनानी औषधालय व 15 लाख रुपए की लागत के साकेत कॉलोनी जगदलपुर के होम्योपैथिक औषधालय का भूमिपूजन करेंगे।

    रायपुर /शौर्यपथ/

    काजू प्रोसेसिंग यूनिट में महिलाओं को मिल रहा काम

    राज्य में अब परम्परागत खेती से अलग कृषि क्षेत्र में अनेक नवाचार हो रहे हैं। इसी कड़ी का हिस्सा जशपुर में होने वाली काजू की खेती है। यहां जिले के करीब आठ हजार किसान काजू की खेती से जुड़े हैं और बेहतर आय प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह जिले में स्थापित काजू प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए भी रोजगार मिल रहा है, जिनसे महीने में लगभग 28-30 हजार रुपये तक आमदनी हो रही है। जशपुर काजू अपनी पौष्टिकता और स्वाद की वजह से विशेष पहचान बना रहा है, जिससे अब इसकी डिमांड राज्य के अन्य शहरों के साथ ही देश के दूसरे राज्यों में भी हो रही है। जशपुर काजू को बाजार तक पहुंचाने का माध्यम ट्राइफेड बन रहा है।

    काजू प्रोसेसिंग यूनिट में महिलाओं को मिल रहा काम
    छत्तीसगढ़ के उत्तरी क्षेत्र में मौसम मैदानी और दक्षिणी क्षेत्रों से अलग है। जशपुर में मौसम की अनुकूलता को देखते हुए जिला प्रशासन जशपुर में परम्परागत खेती से अलग बागवानी और उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित कर रही है। इस क्रम में जशपुर में चाय और काजू की खेती का नवाचार हुआ। जशपुर की आबोहवा काजू की खेती के लिए बेहद अनुकूल है, ऐसे में लगातार यहां काजू की खेती की ओर किसान आकर्षित हो रहे हैं। इसके लिए उद्यानिकी विभाग की ओर से किसानों को उन्नत किस्म के काजू के पौधे और उन्नत कृषि की तकनीकी जानकारी मुहैया कराई जा रही है। जिले में काजू की उत्पादकता को देखते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से यहां काजू प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित कर दिया गया है। काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगने के बाद से किसानों को फसल की तिगुनी-चौगुनी कीमत भी मिलने लगी है। मिली जानकारी के मुताबिक पहले किसान 30-40 रुपये प्रति किलो की दर से काजू का फल बेचते थे। अब जिले में ही प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने के बाद किसानों से काजू की फसल 80, 100 और 120 रुपये की दर से खरीदी जा रही है। प्रोसेसिंग प्लांट में काजू के प्रसंस्करण और पैकेजिंग के बाद इसे बाजार में भेजा जाता है।

    ट्राइफेड बना सेतू -
    लगभग 8 हजार किसान काजू की खेती से जुड़े -
    काजू की खेती और प्रसंस्करण के बाद बाजार में मिलने वाली कीमत को देखते हुए जिले में लगातार किसान काजू की फसल लेने लगे। जानकारी के मुताबिक जशपुर जिले के अंतर्गत दुलदुला में दो हजार किसान, कुनकुरी में दो हजार, कांसाबेल में एक हजार, पत्थलगांव में 800 और फरसाबहार में 500 किसान काजू की खेती कर रहे हैं। वहीं वन विभाग एवं उद्यानिकी विभाग की ओर से किए गए काजू प्लांटेशन से करीब डेढ़ हजार किसान जुड़कर खेती कर रहे हैं। इस तरह से लगभग आठ हजार किसान काजू की खेती से जुड़कर आय प्राप्त कर रहे हैं।
    ट्राइफेड बना सेतू -
    जशपुर के किसानों और बाजार के बीच ट्राइफेड सेतू की भूमिका निभा रहा है। प्रोसेसिंग प्लांट से प्रसंस्करण और पैकेजिंग के बाद निकलने वाले काजू के लिए बाजार उपलब्ध कराने का काम ट्राइफेड कर रहा है। वहीं प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगने वाले मेला और एग्जीबिशन समेत दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे देश के दूसरे राज्यों के विभिन्न शासकीय व गैर-शासकीय एग्जीबिशन में भी जशपुर काजू का स्टाल लगाया जाता है।

    संजीवनी केन्द्रों में भी जशपुर काजू -
    संजीवनी केन्द्रों में भी जशपुर काजू -
    जशपुर काजू की बढ़ती मांग को देखते हुए इसके मार्केटिंग पर भी खासा ध्यान दिया जा रहा है। राज्य शासन के जरिए भी लगातार अनेक माध्यमों से जशपुर काजू को प्रमोट किया जा रहा है। वन विभाग की ओर से संचालित संजीवनी केन्द्रों में काजू को जशपुर ब्रांड नेम से बेचा जा रहा है। वहीं अब इसे ऑनलाइन मार्केट प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराने की कवायद हो रही है।
    महिलाओं को मिल रहा रोजगार -
    जशपुर में काजू की खेती से जहां आठ हजार किसानों को बेहतर आय का जरिया मिला है। वहीं प्रोसेसिंग के काम में लगी स्व-सहायता समूह की दस महिलाओं को भी रोजगार मुहैया हो रहा है। प्रोसेसिंग और पैकेजिंग में रोजगार पाकर महिलाएं परिवार को आर्थिक मदद कर रही हैं। इससे उनमें नया आत्मविश्वास जागा है और परिवार में भी उनका सम्मान बढ़ गया है। इन महिलाओं ने बताया कि वर्ष में लगभग 7 से 8 माह काजू प्रोसेसिंग का कार्य करती हैं।

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