November 15, 2024
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

 रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने महाराष्ट्र के यवतमाल में हुए सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के मजदूरों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। राज्यपाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने इस हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

    रायपुर / शौर्यपथ / प्रदेश में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यो-सड़कों, भवनों एवं पुलों की गुणवत्ता को लोक निर्माण मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू काफी गंभीरता से ले रहे हैं। इसके लिए वे निर्माण कार्यो की लगातार समीक्षा के साथ ही स्थल निरीक्षण कर निर्माणाधीन कार्यो का जायजा भी ले रहे हैं। गृह मंत्री साहू ने आज रायपुर रेलवे स्टेशन से केन्द्री के मध्य एक्सप्रेस-वे के निर्माण-सुधार कार्यो का औचक निरीक्षण करने के बाद नवा रायपुर में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री निवास का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यो की गुणवत्ता जांच के बाद ही ठेकेदारों के अंतिम देयकों के भुगतान के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले माह की 26 तारीख को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान निर्माण कार्यो में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा जांच कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप लोक निर्माण मंत्री श्री साहू के निर्देश पर विभाग द्वारा सम्पादित छोटे-बड़े सभी कार्यो की शत-प्रतिशत गुणवत्ता एवं निर्माण कार्यो में लगने वाले मटेरियर्स की सही मात्रा की जांच के लिए बड़े पैमाने पर जांच दलों का गठन किया गया है।
गृह मंत्री साहू ने नवा रायपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन मुख्यमंत्री निवास का निरीक्षण किया और गुणवत्ता के साथ कार्यो में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यो में संलग्न श्रमिकों को कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों के साथ ही उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस अवसर पर सचिव लोक निर्माण श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी एवं प्रमुख अभियंता श्री विजय कुमार भतपहरी भी उपस्थित थे।
प्रमुख अभियंता भतपहरी ने बताया कि निर्माण कार्यो को त्वरित गति से पूरा करने के लिए इस महीने 986 करोड़ 97 लाख रूपए के लागत के 63 कार्यो के लिए ऑनलाईन निविदा आमंत्रित की गई है। इनमें 25 निविदा पुल कार्य के हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यो में गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने के साथ-साथ परफारमेंस गारंटी के अंतर्गत आने वाले मार्गो में पेच रिपेयर किए जाने के लिए 15 जून 2020 तक की तिथि नियत की गई हैै। मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि बरसात के पहले सड़कों के संधारण का कार्य पूर्ण कर लें, ताकि वर्षा ऋतु में मार्ग क्षतिग्रस्त न हो तथा यातायात भी बाधित न हो।

अवधेश टंडन की रिपोर्ट
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण रोकने के लिए पुलिस व प्रशासन कड़ी मेहनत कर रहा है। देशभर में 31 माई तक का लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है, देश के प्रधानमंत्री लोगों को अपने घरों में ही रहने की अपील कर रहे हैं, वहीं प्रशासन भी सख्त हिदायत दे रहे हैं, साथ ही तमाम हतकड़े अपना रहे हैं।।
लेकिन वहीं मालखरौदा थाना क्षेत्र में लोग लॉकडाउन मानने को तैयार नहीं है,लोग घर में रहने के बजाय इधर से उधर आ-जा रहे है। दिन में पुलिस कि मौजूदगी में भी लोग बेखौफ आना-जाना कर रहे हैं।।
*नहीं रहती पुलिस की मौजूदगी*
मालखरौदा पुलिस की मौजूदगी मुख्य चौक में कम ही रहती है,इसका फायदा उठाकर लोग बेवजह घुमते नजर आ रहे हैं, वहीं मालखरौदा थाना क्षेत्र में सुबह 7 बजे से ही लोगों का आवागमन शुरू हो जाता है।।
*जिले की सड़कों पर खूब वाहन दौड़ रहे है*
अभी तक जांजगीर चांपा जिले में कोविड-19 का कुल मरीज 12 पोजिटिव केस सामने आ चुके हैं, लेकिन फिर भी लोगों के द्वारा लॉकडाउन और धारा 144 का धज्जियां उड़ा रहे हैं इस पर अगर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो उसका खामियाजा पूरा जिले को उठाना पड़ सकता है,सुबह से शाम तक जिस तरह लोग बड़ी संख्या में इधर-उधर जा रहे है, इससे प्रशासन की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
*बेवजह घुमने वालो पर पुलिस नहीं कर रही कार्यवाही*
प्रशासन ने खाद्य सामग्री खरीदने, अस्पताल जाने सहित अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों को अनुमति दी गई है,लेकिन लोग बेवजह घुम रहे हैं, मालखरौदा पुलिस के द्वारा बेवजह घूमने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिससे इनके हौसले बुलंद हैं और बड़ी संख्या में बेवजह सड़कों पर अपनी गाड़ी दौड़ा रहे हैं।।

 दुर्ग / शौर्यपथ / पुलगांव थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बोरई स्थित क्वारांटाईन सेंटर से भाग कर गांव में घूमने ओर शराब के नशे में उत्पात मचाने वाले एक प्रवासी मजदूर को आज जेल भेज दिया गया। इस मामले में नगर पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रवासी मजदूर देवेन्द्र कुमार यादव गत दिवस सिहोर सेदुर्ग आया था, जिसे बोरई के क्वारांटाई सेंटर में रखा गया था, उक्त युवक इस सेंटर से भाग गया और पूरे गांव में घूम रहा था और शराब के नशे में उत्पाद मचा रहा था, ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करते हुए जेल भेज दिया।

   भिलाईनगर / शौर्यपथ / स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने के लिए नगर पालिक निगम भिलाई के महापौर देवेंद्र यादव एवं आयुक्त रघुवंशी के कुशल मार्गदर्शन में स्वच्छता के निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर सभी अधिकारियों ने कड़ी मेहनत की और शहर की जागरूकता जनता ने कचरा मुक्त शहरों में भिलाई नगर को आखिर सम्मिलित करा ही दिया तथा भिलाई ने 3 स्टार रेटिंग प्राप्त किया है! वर्ष 2019 में पूरे देश में 11 वां रैंक प्राप्त करने का गौरव भिलाई को हासिल हुआ था!
भिलाई शहर की जनता स्वच्छता के प्रति जागरूक है तभी भिलाई कचरा मुक्त शहर में शामिल हो सका है! स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि भिलाई शहर ने कचरा मुक्त शहर के मामले में 3 स्टार रेटिंग प्राप्त की है! निगम के महापौर यादव ने कहा कि भिलाई की जनता हमेशा स्वच्छता के प्रति जागरूक है, कचरा मुक्त शहर में शामिल होने में लोगों अपनी पूर्ण सहभागिता दिखाई है, संपूर्ण विश्वास है कि भिलाई शहर स्वच्छता में देश में प्रथम पायदान पर आएगा!
स्टार रेटिंग पर किया था फोकस स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत निगम प्रशासन ने स्टार रेटिंग एवं वाटर प्लस पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया था, ताकि स्वच्छ सर्वेक्षण के मापदंडों के अनुरूप सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक अंक प्राप्त किया जा सके। नालियों में कचरा रोकने जाली नालियों में कचरा को रोकने के लिए तथा सीधे जल स्रोतों में कचरा न मिले इसके लिए नालियों में जालियां लगाने का कार्य किया गया तथा जीवीपी पाइंट को समाप्त कर सौंदर्यीकरण करने का कार्य किया गया।   स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता निगम क्षेत्र में स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उददेश्य से दीवारों पर रंग रोगन कर चित्रों व स्लोगन के माध्यम से आम जनता को जागरूक करने का कार्य किया गया।
      दो पालियो में सफाई मार्केट क्षेत्र में सुबह व रात्रि दोनों पालियों में सफाई व कचरा कलेक्शन कार्य किया गया! मुख्य सड़कों सहित गली, मोहल्लों की सफाई व प्रतिबंधित प्लास्टिक मुक्त शहर बनाने झिल्ली, पन्नी, प्लास्टिक के कचरा का उठाव करने का कार्य किया गया। सुबह एवं रात्रिकालीन सफाई कार्यों की माॅनिटरिंग विभागीय अधिकारियों ने जिम्मेदारी के साथ किया। एसएलआरएम सेंटर में कचरो का बेहतर निष्पादन डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में सूखा कचरा अलग एवं गीला कचरा अलग को प्राथमिकता के तौर पर ध्यान दिया गया ! एसएलआरएम सेंटर में कचरो का पृथकीकरण, घनी आबादी वाले क्षेत्रों की सघन सफाई व डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के अन्तर्गत सभी पैरामीटर को ध्यान में रखते हुए कार्य संपादित किया गया। वार्ड वार अधिकारियों को जिम्मेदारी प्रत्येक वार्ड के लिए निगम के अधिकारी/कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी जो सुबह से अपने-अपने नियुक्त क्षेत्रों में और स्वच्छता के कार्यों को बेहतर करने गतिविधियों पर नजर रखते थे!
महापौर देवेंद्र यादव तथा आयुक्त रघुवंशी के नेतृत्व में सभी के अथक प्रयासों से निगम भिलाई आज कचरा मुक्त शहर के सूची में शामिल हो पाया है! इसमें बीएसपी प्रबंधन एवं शहरवासियों ने भी अहम भूमिका निभाई है!

शौर्यपथ


36 मरीज़ो का इलाज एम्स अस्पताल रायपुर में ज़ारी है,

ब्रेकिंग  छत्तीसगढ़ में Covid-19 के 5 नए मामले,प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 41 कोरोना
रायपुर: छत्तीसगढ़ में कोरोना को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है जानकारी के मुताबिक प्रदेश में कोरोना के 5 नए मामले सामने आए है जिसमे राजनांदगाव में 4 कोरोना पॉजिटिव और कोरबा जिले में1 मरीज पॉजिटिव मिला है। अब संक्रमितों की संख्या 41 हो गए है|

साथ ही 36 मरीज़ो का इलाज एम्स अस्पताल रायपुर में ज़ारी है,

रायपुर/शौर्यपथ

19 मई 2020। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी घोषित होने के बाद इसके संक्रमण से मानव जीवन के लिए संकट पैदा कर जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। ऐसे में दिन रात एक कर शहर से गांव और नदी, नालों, पहाड़ों का लांघ कर लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले कोरोना योद्धा बन ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक(आरएचओ) सही में हीरो की भूमिका निभा रहे हैं।
कोविड-19 को हराने के लिए 24 घंटे अपनी ड्यूटी निभा रहे आरएचओ फिल्‍ड में फाइटर बन कर वायरस के खिलाफ डट कर खड़े हुए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को समुदाय तक फैलने से रोकने के लिए घर-घर सर्वे, चेक पोस्‍ट में आने जाने वालों की जांच, प्रवासी मजदूरों के रैपी‍ड टेस्‍ट किट से सेम्‍पल लेने से लेकर जांच कराने में भी योगदान दे रहे हैं।
स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक कर्मचारी संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी हरीश सन्‍नाट ने बताया स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अंतर्गत राज्‍य के 28 जिलों के 752 प्राथमिक और 5127 उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों में 13,000 ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक कार्यकर्ता व अन्‍य कर्मचा‍री कार्यरत हैं। इनमें ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक महिला 4888 और पुरुष 3750, खंड प्र‍शिक्षण विस्‍तार अधिकारी160 और 2500 सुपरवाइजर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के मैदानी अमले के रुप में 20199 गांव या 10966 ग्राम पंचायतों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं पहुंचा रहे हैं।
वर्तमान में शासन स्तर पर रेड जोन, ऑरेन्ज जोन, और ग्रीन जोन के आधार पर लॉकडाउन में रियायत प्रदान की गई है जिससे अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के निवासी जो व्यवसाय, नौकरी, स्वास्थ्यगत, मजदूरी, शिक्षा आदि कारणों से गए थे। उनका छत्तीसगढ़ में आना प्रारंभ हो चुका है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के समक्ष नई चुनौतियां हैं।
प्रदेश में 17,000 क्‍वारेंटाइन सेंटर स्‍कूल, कॉलेज, सावर्जनिक भवनों, हास्‍टल में बनाए गए हैं। अलग-अलग जिलों में अस्‍थायी तौर पर क्‍वारेंटाइन सेंटरों में 14 दिनों के लिए ठहराये गए प्रवासी श्रमिकों की संख्‍या एक लाख तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग के मैदानी स्तर पर कार्यरत ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक स्थानीय प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर ऐसी आगंतुकों का मौका स्थल पर स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें शासन के दिशा निर्देश के अनुरूप संस्था, पंचायत स्तर पर, घर पर भी क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है। तथा उनका सतत फॉलोअप कर उनके स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी नियमित रूप से ली जा रही है। इसके साथ-साथ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकोंद्वारा स्वास्थ्य विभाग की अन्य सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में नियमित टीकाकरण, सर्विलांस कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, आपातकालीन सेवाएं, टी बी,  कुष्ठ कार्यक्रम,  एनसीडी कार्यक्रम के तहत 60 वर्ष के अधिक उम्र के मरीजों का सतत निगरानी फॉलोअप, गैर संचारी रोग से पीड़ित मरीजोंका फॉलोअप, मौसमी बीमारी के बचाव के लिए ग्रामों में संचालित नल-जल योजना की नियमित निगरानी, लू से बचाव के उपायों का प्रचार–प्रचार का कार्य किया जा रहा है।
राज्‍य कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (कोविड-19) के मीडिया प्रभारी डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया स्वास्थ्य विभाग का यह मैदानी अमला कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय कोरोना से बचाव कार्य में लगे हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धि अन्य गतिविधियां उच्च अधिकारियों के समय-समय पर मिलने निर्देशों का पालन भी करते हैं।कोरोना महामारी को हराने के लिए निश्चित रुप से हेल्‍थ डिपाटमेंट के ये मैदानी कैडर हॉटस्‍पॉट एरिया में कार्य करने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित व दक्ष हैं। सभी ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक अपने भूमिका का निर्वहन कर सुचारू रूप से स्‍वास्‍थ्‍य गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। डॉ त्रिपाठी ने कहा सही अर्थो में कोरोना वारियर्स की परिभाषा को चरितार्थ करते है इन चुनौती भरी कार्यो में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों की भूमिका सराहनीय है।

रायपुर/शौर्यपथ

19 मई 2020। कोरोना वायरस वैश्विक महामारी घोषित होने के बाद इसके संक्रमण से मानव जीवन के लिए संकट पैदा कर जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। ऐसे में दिन रात एक कर शहर से गांव और नदी, नालों, पहाड़ों का लांघ कर लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले कोरोना योद्धा बन ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक(आरएचओ) सही में हीरो की भूमिका निभा रहे हैं।
कोविड-19 को हराने के लिए 24 घंटे अपनी ड्यूटी निभा रहे आरएचओ फिल्‍ड में फाइटर बन कर वायरस के खिलाफ डट कर खड़े हुए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को समुदाय तक फैलने से रोकने के लिए घर-घर सर्वे, चेक पोस्‍ट में आने जाने वालों की जांच, प्रवासी मजदूरों के रैपी‍ड टेस्‍ट किट से सेम्‍पल लेने से लेकर जांच कराने में भी योगदान दे रहे हैं।
स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक कर्मचारी संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी हरीश सन्‍नाट ने बताया स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अंतर्गत राज्‍य के 28 जिलों के 752 प्राथमिक और 5127 उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों में 13,000 ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक कार्यकर्ता व अन्‍य कर्मचा‍री कार्यरत हैं। इनमें ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य संयोजक महिला 4888 और पुरुष 3750, खंड प्र‍शिक्षण विस्‍तार अधिकारी160 और 2500 सुपरवाइजर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के मैदानी अमले के रुप में 20199 गांव या 10966 ग्राम पंचायतों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं पहुंचा रहे हैं।
वर्तमान में शासन स्तर पर रेड जोन, ऑरेन्ज जोन, और ग्रीन जोन के आधार पर लॉकडाउन में रियायत प्रदान की गई है जिससे अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के निवासी जो व्यवसाय, नौकरी, स्वास्थ्यगत, मजदूरी, शिक्षा आदि कारणों से गए थे। उनका छत्तीसगढ़ में आना प्रारंभ हो चुका है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के समक्ष नई चुनौतियां हैं।
प्रदेश में 17,000 क्‍वारेंटाइन सेंटर स्‍कूल, कॉलेज, सावर्जनिक भवनों, हास्‍टल में बनाए गए हैं। अलग-अलग जिलों में अस्‍थायी तौर पर क्‍वारेंटाइन सेंटरों में 14 दिनों के लिए ठहराये गए प्रवासी श्रमिकों की संख्‍या एक लाख तक पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग के मैदानी स्तर पर कार्यरत ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक स्थानीय प्रशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर ऐसी आगंतुकों का मौका स्थल पर स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें शासन के दिशा निर्देश के अनुरूप संस्था, पंचायत स्तर पर, घर पर भी क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है। तथा उनका सतत फॉलोअप कर उनके स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी नियमित रूप से ली जा रही है। इसके साथ-साथ ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकोंद्वारा स्वास्थ्य विभाग की अन्य सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों में नियमित टीकाकरण, सर्विलांस कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, आपातकालीन सेवाएं, टी बी,  कुष्ठ कार्यक्रम,  एनसीडी कार्यक्रम के तहत 60 वर्ष के अधिक उम्र के मरीजों का सतत निगरानी फॉलोअप, गैर संचारी रोग से पीड़ित मरीजोंका फॉलोअप, मौसमी बीमारी के बचाव के लिए ग्रामों में संचालित नल-जल योजना की नियमित निगरानी, लू से बचाव के उपायों का प्रचार–प्रचार का कार्य किया जा रहा है।
राज्‍य कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (कोविड-19) के मीडिया प्रभारी डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने बताया स्वास्थ्य विभाग का यह मैदानी अमला कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय कोरोना से बचाव कार्य में लगे हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धि अन्य गतिविधियां उच्च अधिकारियों के समय-समय पर मिलने निर्देशों का पालन भी करते हैं।कोरोना महामारी को हराने के लिए निश्चित रुप से हेल्‍थ डिपाटमेंट के ये मैदानी कैडर हॉटस्‍पॉट एरिया में कार्य करने के लिए पूरी तरह से प्रशिक्षित व दक्ष हैं। सभी ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक अपने भूमिका का निर्वहन कर सुचारू रूप से स्‍वास्‍थ्‍य गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। डॉ त्रिपाठी ने कहा सही अर्थो में कोरोना वारियर्स की परिभाषा को चरितार्थ करते है इन चुनौती भरी कार्यो में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों की भूमिका सराहनीय है।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से पलकों पर बढ़ता है प्रतिवर्ष बोझ

   राजनांदगांव / शौर्यपथ / भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष परवेज अहमद पप्पू ने कहा कि कोरोना कॉल के दौरान बंद रही निजी स्कूलों ने अब छूट मिलने के बाद दो महीने में हुए नुकसान की भरपाई करने का नया तरीका निकाला है। निजी स्कूलों के संचालकों ने बुक डिपो संचालक के साथ मिलकर किताबों के दाम बढ़ा दिए हैं।
      प्राइवेट स्कूलों में पुस्तक कॉपी को लेकर भारी गहमागहमी का माहौल प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की पुस्तकें बहुत ही महंगी लॉक डाऊन की स्थिति में महंगी पुस्तकें और कॉपी से पालक हो रहे परेशान इस दौरान अभी पूरे भारत सहित छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के चलते छत्तीसगढ़ राज्य में सभी स्कूल व कॉलेज बंद है, राज्य सरकार के द्वारा शिक्षा विभाग के माध्यम से आदेश जारी करते हुए सभी स्कूलों मैं ऑनलाइन पढ़ाई करने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन इसी बीच पुस्तकें व कॉपी महंगी होने से पालकगण बहुत ही परेशान है, क्योंकि कोरोना वायरस के चलते लॉक डाउन का दंश लोग झेल रहे हैं। वहीं नर्सरी की किताबें 1400 रुपये की आ रही है, एक तरफ अभिभावक जीवन जीने संगर्ष कर रहा है। दूसरी ओर महंगी शिक्षा का बोझ, सरकार को गंभीरता से इस ओर ध्यान देना चाहिए और पालकों को मुनाफाखोर शिक्षा ववस्था से को विषम परिस्थितियों में बचाने की आवश्कता हैं।
     अहमद ने आगे बताया कि प्रतिवर्ष पुस्तकों में 10 से 12 प्रतिशत की वृद्धि कंपनी के द्वारा किया जाता है, जिसका बोझ पलकों पर पड़ता है। राजनांदगांव शहर की एक बुक डिपो से बात करने पर पता चला कि हर वर्ष पुस्तकों में वृद्धि पब्लिशर्स पुस्तक कंपनी की सांठगांठ से प्राइवेट स्कूलों को प्रति पुस्तक 25 प्रतिशत व बुक डिपो है। 10 से 15 प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों को जाता है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 400 की पुस्तक से प्राइवेट स्कूल को कमीशन के रूप में 160 मिलता है, जबकि उस पुस्तक की कास्ट लिया जाए तो उक्त पुस्तक की कीमत सिर्फ 200 रुपये होगा, लेकिन कमीशन की खेल बाजी में उक्त पुस्तक की कीमत बुक डिपो तक पहुंचते ही 400 रुपए का आंकड़ा पार कर जाता है। परवेज अहमद पप्पू ने इस विषय पर चिंता करते हुए शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों, बुक डिपो और पुस्तक कंपनी पर अंकुश लगाते हुए उचित कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

  दुर्ग / शौर्यपथ / इन दिनों कोरोना संकट के चलते कई राज्यों से मजदूर अपने घर की ओर पलायन कर रहे है। ऐसे में लाॅकडाउन के प्रथम दिवस से सेवा कर रही जन समर्पण सेवा संस्था ने मानवता की एक नई मिसाल पेश करने की कोशिश एवं पहल की है।
संस्था द्वारा जहां लॉकडाउन के प्रारंभ से मजदूरों एवं गरीब बस्तियों में भोजन वितरण एवं शासन प्रशासन के सहयोग से अपने घर जा रहे मजदूरों को निशुल्क भोजन के साथ साथ उनको उनके गन्तव्य स्थान एवं क्वांरटाईन सेन्टर तक पहुँचाने के कार्य कर रही है, तो वहीं अब संस्था ने नंगे पैर चल रहे मजदूरों, उनके बच्चों को नए जूते-चप्पल भी भेंट करना शुरू किया है।
संस्था के प्रमुख बंटी शर्मा ने बताया कि संस्था द्वारा प्रतिदिन जरूरतमन्दों एवं पैदल चल रहे मजदूरों के भोजन वितरण के समय यह बात सामने आई कि कई मजदूरों एवं उनके बच्चो के पैरों में जूते चप्पल नहीं है अगर हैं भी तो टूटे हुए रहते हैं जिन्हें पहनकर चलना भी मुश्किल होता है। कल रात्रि एवं आज दोपहर में यह परेशानी देख संस्था के सदस्यों ने तत्काल 30 नग नए चप्पलों की व्यवस्था की और बालोद, बिलासपुर एवं बेमेतरा जाने वाले मजदूरों को नयी चप्पल भेंट की और सभी मजदूरों को भोजन वितरण किया..
विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस के चलते इन दिनों नगर से रोजी रोटी, कमाने-खाने के लिए दूसरे राज्य या अन्य जिलों में गये मजदूरों का नगर में आना लगातार जारी है। ऐसे लोगों को क्वांरटाईन सेन्टर में रखा जा रहा है। बहार राज्य एवं अन्य जिलों से वापस आ रहे मजदूर, विद्यार्थियों को राज्य शासन के साथ साथ प्रतिदिन विभिन्न संगठनों द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है, जिसमें मजदूरों को विभिन्न संगठनों द्वारा भोजन देने के साथ साथ उन्हें उनके गन्तव्यं स्थान में पहुचाने से लेकर उन्हें जिले के क्वांरटाईन सेन्टर तक पहुँचाया जा रहा है..
दुर्ग जिले में जन समर्पण सेवा संस्था जोकि विगत 3 वर्षों से गरीब, असहाय एवं जरूरतमंदों को प्रतिदिन भोजन खिलाती आ रही, यह संस्था वर्तमान में विश्वव्यापी महामारी के बीच भी अपनी सेवा निरन्तर जारी रखी हुई है, विकट परिस्थिति को देखते हुए जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग सभी के सहयोग से इस संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को लॉकडाउन के प्रथम दिवस से निशुल्क भोजन वितरण कर रही हैं..
संस्था के प्रमुख बंटी शर्मा ने बताया कि जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग के युवा लॉकडाउन के दौरान भी मानव सेवा को अपना उद्देश्य बना कर पूरे दिन सेवा में लगे है, मानव सेवा को अपना उद्देश्य बनाये हुए ये युवा प्रतिदिन जरूरतमन्दों को निशुल्क भोजन वितरण कर रहे है, शहर में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में अन्य प्रदेश एवं अन्य जिलों में रोजी रोटी के लिए मेहनत मजदूरी करके जीवन यापन करने गए हुए मजदूर अब वापस आ रहे है, जिनको शासन प्रशासन के सहयोग से सभी मजदूरों को क्वांरटाईन सेन्टर या कोरोना महामारी का चेकअप करवा कर उनके गन्तव्य स्थान तक पहुँचाने के कार्य भी संस्था द्वारा किया जा रहा है. बंटी शर्मा ने बताया कि कल रात्रि एवं आज दोपहर ट्रक, या अन्य साधन से अपने गंतव्य स्थान को जा रहे मजदूर जो कि मिनीमाता चौक, राजनांदगांव टोल प्लाजा, अंजोरा चौक, धमधा नाका चौक में सैकड़ों मजदूर विश्राम करने या अन्य साधन को देखते है बैठे थे, जन समर्पण सेवा संस्था के युवा भोजन वितरण करते हुए उनके पास पहुँचे तो कुछ मजदूरों के पैर में चप्पल नही थी और कुछ की चप्पल टूट गयी थी, जिससे मजदूरों के पैर गर्म धूप में चलने से पैर में छाले आ गए थे जिसे देख संस्था के सदस्यों से तत्काल 30 जोड़ी चप्पल खरीद कर तत्काल जरूरतमन्दों को वितरण किया..
संस्था प्रकाश कश्यप ने बताया कि दुर्ग में आये हुए या अन्य प्रदेश जिलो में जा रहे प्रवासी मजदूरों को जिला प्रशासन एवं शासन का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, सभी अधिकारी देर रात्रि तक आम जनों को सहयोग कर रहे है..
दुर्ग जिले में कर्फ्यू के दौरान 53 दिनों से संस्था के सदस्यों की कोशिश रही कि ज्यादा से लोगों तक भोजन पहुंचाया जा सके। इन लॉकडाउन दिनों में जहां भी पके हुए भोजन की जरूरत होती थी सूचना मिलते साथ संस्था के सदस्य अपने वाहन से भोजन पहुँचाने पहुँचाने जाते है.
संस्था ईश्वर साहू ने कहा कि जन समर्पण सेवा संस्था, दुर्ग द्वारा जरूरतमन्दों को विगत 3 वर्षों से की जा रही प्रतिदिन की भोजन सेवा निरन्तर जारी रहेगी, जिसमें रात्रि में दुर्ग रेल्वे स्टेशन में जरूरतमन्दों को बैठाकर भोजन वितरण किया जा रहा है.
संस्था प्रमुख बंटी शर्मा ने आप नागरिकों से अनुरोध किया है कि प्रवासी मजदूरों को इस संकट की घड़ी में सहयोग करें, भोजन उपलब्ध कराने एवं आवागमन को सुगम बनाने हेतु नयी चप्पल दान करें..
भोजन सेवा में प्रतिदिन शिशु शुक्ला, आशीष मेश्राम, संजय सेन, प्रकाश कश्यप, राजेन्द्र ताम्रकार, ईश्वर साहू, राकेश मिश्रा, दीपक धर्मगुढी, आकाश राजपूत, शुभम सेन, शंकर राउत, पूनम नागरे, कमल नामदेव, नितेश यादव, शब्बीर खान, समीर खान, दुर्गेश यादव, रवि राजपूत, एवं अन्य संस्था के सदस्य सेवा दिए.

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