
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / मोहला वनांचल के ग्राम मुनगाडीह में स्वतत्रंता दिवस के मौके पर आयोजित सादगी पूर्ण कार्यक्रम में शाला प्रबंधन समिति और माध्यमिक शाला, प्राथमिक शाला के शिक्षकों की उपस्थिति में शिक्षा सारथियों का सम्मान किया गया। गोटाटोला जोन के मीडिया प्रभारी शेख अफजल ने बताया की कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलों को बंद किया गया है। इस स्थिति में बच्चों को पढ़ाई से जोडऩे के लिए स्कूल शिक्षा विभाग पढ़ई तुंहर दुआर योजना ले के आई। इस योजना के माध्यम से बच्चों को ऑनलाइन वर्चुअल क्लास के माध्यम से पढ़ाई से जोड़ा जाना है लेकिन मोबाइल और नेटवर्क की समस्या के कारण कुछ बच्चे ऑनलाइन क्लास से जुड़ नहीं पा रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई से जोडऩे के लिए मोहल्ला क्लास की शुरुआत की गई। इस योजना के माध्यम से बच्चों को उनके घरों के आसपास पढ़े लिखे युवाओं द्वारा सुरक्षित और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पढ़ाई करवाना है। मोहला विकासखंड के ग्राम मुनगाडीह में भी मोहल्ला क्लास का संचालन किया किया जा रहा है।
मोहल्ला क्लास में शिक्षक सारथी के रूप में पिल्ले राम कुंजाम, मंजू सलाम, दामिनी कोवाची अपनी सहभागिता दे रहे है। ग्राम मुनगाडीह में आयोजित इस कार्यक्रम में शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला मुनगाडीह संकुल डुमरटोला की टीम, विकासखंड मोहला से श्रीमति सरोज सिंह, टीकम सिंह नायक, मुन्ना लाल मोंगरे, मोहन लाल कमरो, जितेंद्र कुमार सिन्हा, श्रीमती बेलास बाई कोरेटी (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता), धनेश कुमार कोवाची, रामसाय देशमुख, उत्तम कुमार और ग्राम के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। शिक्षा सारथियों के सम्मानित होने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी रोहित कुमार अम्बादे, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार देवांगन, बीआरसीसी खोमलाल वर्मा ने सभी शिक्षकों और शिक्षा सारथियों को बधाई देते हुए इसमें निहित उद्देश्य के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सारथियों के सम्मान से निश्चित तौर पर उनका मनोबल बढ़ेगा और वे लगन से अपने कार्य को बेहतर रूप से करेंगे क्योंकि कोरोना महामारी के दौर में शिक्षा सारथी ही बच्चो और पढ़ाई के बीच मे सेतु की तरह कार्य कर रहे है।
बीजापुर / शौर्यपथ / शासन की स्वरोजगार योजना से लाभान्वित होकर बीजापुर तहसील अंतर्गत ईटपाल निवासी प्रहलाद नाईक गांव में हाॅलर मिल स्थापित कर खेती-किसानी के साथ ही इसे आय का अतिरिक्त जरिया बना चुका है। प्रहलाद नाईक अपने गांव में हाॅलर मिल के माध्यम से ईटपाल, जैतालूर और मांझीगुड़ा के किसानों तथा ग्रामीणों की धान कुटाई सहित गेहूं, चावल, दाल, रागी इत्यादि की पिसाई का कार्य कर रहे हैं। प्रहलाद नाईक ने बताया कि परिवार के पास केवल ढाई एकड़ कृषि भूमि के मद्देनजर खेती-किसानी के अलावा गांव में ही स्वरोजगार अपनाने की सोच रहे थे। इस बीच वर्ष 2015-16 में अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के अधिकारी ने स्माॅल बिजनेस योजनान्तर्गत स्वरोजगार स्थापित करने की जानकारी देने के साथ ही बैंक के माध्यम से 6 प्रतिशत रियायती ब्याज दर पर3 लाख रूपए ऋण उपलब्ध कराये जाने के बारे में बताया। इस योजना के सम्बन्ध में परिवार के सदस्यों तथा मित्रों से चर्चा कर गांव में ही हाॅलर मिल स्थापित करने के लिए आवेदन पत्र जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति के कार्यालय में जमा कर दिया। इसके बाद उक्त प्रकरण पर 3 लाख रूपए ऋण की स्वीकृति दी गयी। इस ऋण राशि गांव में पूर्व से निर्मित शेड में ही हाॅलर मिल स्थापित किया।
प्रहलाद नाईक बताते हैं कि पहले लोग बीजापुर जाकर धान की मिलिंग और गेहूं, चावल, रागी की पिसाई का कार्य करवाते थे। लेकिन जब गांव में ही हाॅलर मिल लग गया तो ईटपाल, जैतालूर सहित मांझीगुड़ा के लोग धान की मिलिंग करवाने के साथ ही गेहूं, चावल, दाल, रागी की पिसाई करवा रहे हैं। जिससे उन्हे घर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध हुआ है। प्रहलाद नाईक बताते हैं इस काम से उन्हे हर महीने 5 से 6 हजार रूपए आमदनी होती है। त्यौहार तथा शादी-ब्याह के सीजन में ग्रामीण धान की मिलिंग तथा आटा-दाल पिसाई ज्यादा करवाते हैं तो आमदनी में भी इजाफा होता है। जिसके फलस्वरूप 3 लाख रूपए ऋण राशि में से अब तक एक लाख 56 हजार रूपए ऋण राशि अदा कर चुके हैं। प्रहलाद ने बताया कि अपने परिवार के ढाई एकड़ कृषि भूमि में धान की फसल लेने के साथ ही रबी सीजन के दौरान एक एकड़ रकबा में साग-सब्जी का उत्पादन करते हैं। जिससे 5 सदस्यीय परिवार का आसानी के साथ भरण-पोषण कर रहे हैं, वहीं बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं। प्रहलाद शासन की स्वरोजगार योजना से लाभान्वित होकर गांव घर में ही आय का जरिया मिलने से खुश है और इसके लिए सरकार को साधुवाद दिया।
सूरजपुर / शौर्यपथ / कलेक्टर रणबीर शर्मा के निर्देशन में अपर कलेक्टर एस.एन. मोटवानी से प्राप्त जानकारी अनुसार सर्प दंश से मृत हुए 13 व्यक्यिों के परिजनों व निकटतम वारिशों को राहत राशि करीब 52 लाख रूपये की स्वीकृती दी गई है। जिसमें तहसील रामानुजनगर से मृतिका लक्ष्मी आ. जयकरन निवासी रामपुर के परिजन उसके पिता जयकरन को, तहसील प्रतापपुर से मृतिका विफईया आ. स्व. अमृत निवासी सकलपुर के माता मलहारो को, निवासी बरबसपुर मृतिका स्व. कलेश्वरी के पति मुन्ना को, मृतिका स्व. मनमेत निवासी बरबसपुर के पुत्र रामेश्वर प्रसाद को, मृतक स्व. सीमाराम निवासी बड़वार के भाई रामलखन को, मृतिका स्व. किसमतिया निवासी धुमाडांड के पिता अर्जून प्रसाद को, मृतक स्व. समयलाल निवासी डाड़करवां के पत्नी रोशनी को, तहसील ओड़गी से मृतिका स्व. निराशो निवासी मसनकी के पिता पतराज को, मृतक स्व. दीपक निवासी पुतकी के पिता रामरतन को, तहसील भैयाथान से मृतक स्व. चमरूराम निवासी सुदामानगर के पत्नी फुलेश्वरी को, मृतिका स्व.सीमा पैकरा निवासी सोनपुर के पति पवन पैकरा को, तहसील प्रेमनगर से मृतक स्व. बालक राम निवासी महेशपुर के पत्नी बसंती बाई को, मृतक स्व. अभिशेक बंजारा निवासी बकिरमा के पिता ठाकुर सिंह बंजारा को चार-चार लाख रूपये आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत किया गया है। यह राशि आबंटन की प्रत्याशा में मांग संख्या 58 शीर्श 2245 प्राकृतिक आपदा राहत के अन्तर्गत वित्तीय वर्श 2019-20 में विकलनीय होगा।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन एवं राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के प्रयासों से प्रदेश में आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ई-कोर्ट के माध्यम से राजस्व विभाग के कार्यों का सरलीकरण कर राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण की सार्थक शुरूआत हुई है। अब प्रदेश के सभी जिलों में ई-कोर्ट के तहत राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है जिससे लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है।
इससे पहले राजस्व न्यायालय में दर्ज सभी प्रकरणों की जानकारी लेने के लिए जिला अथवा तहसील मुख्यालय आना पड़ता था। राजस्व ई-कोर्ट की शुरूआत होने से संबंधितों के लिए राजस्व न्यायालय में प्राप्त होने वाले सभी आवेदन ऑनलाइन दर्ज कर आवेदक को पावती मिल रही है। साथ ही पक्षकारों को उनके प्रकरणो में की जा रही कार्यवाही की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। विचारधीन प्रकरण एवं खसरा की जानकारी भी ई कोर्ट में उपलब्ध है। पक्षकारों को सुनवाई के बाद आगामी पेशी तारीख की एसएमएस या मैसेज के माध्यम से सूचना भी दी जा रही है। प्रत्येक न्यायालय की वाद सूची ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है।
राजस्व प्रशासन ने पारदर्शिता लाने एवं राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था प्रारंभ की गई है। राजस्व न्यायालयों में संधारित किए जाने वाले दायरा पंजी, वाद पंजी एवं अर्थदण्ड पंजी को ई-कोर्ट व्यवस्था के अंतर्गत ऑनलाईन किया गया है। ई-कोर्ट में विचाराधीन प्रकरणों से संबंधित भूमि की जानकारी ऑनलाईन उपलब्ध करायी गई है। आम जनता को भू अभिलेखों की दुरूस्ती हेतु ऑनलाईन आवेदन करने एवं आवेदन पर की गई कार्यवाही की वर्तमान स्थिति ऑनलाईन देखने की सुविधा पटवारी द्वारा संधारित नामांतरण पंजी को भी ऑनलाईन नामांतरण पंजी में परिवर्तित किया गया है। भू अभिलेखों तक लोगों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने हेतु एन्ड्राइड एप्प पर उपलब्ध कराया गया है। खसरा एवं बी-1 की डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रतिलिपि ऑनलाईन निःशुल्क कही से भी कभी भी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
राजस्व ई-कोर्ट के तहत राजस्व न्यायालय मे कलेक्टर से लेकर नायब तहसीलदार तक के सभी न्यायालय पंजीबद्ध हैं। प्रकरणो के पंजीयन से लेकर अंतिम निराकरण तक सारी कार्यवाही जैसे कि आदेश पत्र लिखना, साक्ष्य अंकित करना एवं अंतिम आदेश पारित करना आदि ऑनलाइन करने या अपलोड करने का प्रावधान है। राजस्व न्यायालय मे प्राप्त होने वाले सभी आवेदन ऑनलाइन दर्ज कर आवेदक को पावती प्रदाय करने की व्यवस्था की गई है। पक्षकारों को उनके प्रकरणो मे की जा रही कार्यवाही की अद्यतन जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है। विचारधीन प्रकरण एवं खसरा की जानकारी ई-कोर्ट में उपलब्ध है। पक्षकारों को सुनवाई पश्चात आगामी पेशी तारीख की एसएमएस या मैसेज के माध्यम से सूचना संप्रेषण का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक न्यायालय की वाद सूची भी ऑनलाइन उपलब्ध करने का प्रावधान कोर्ट में हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / राम वनगमन पर्यटन परिपथ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों को यथावत रखते हुए निर्माण विकास कार्य किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शोधपत्रों, अभिलेखों एवं मान्यता अनुसार भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से अधिकांश समय छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर व्यतीत किए थे। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, ऐतिहासिकता एवं प्रचीन मान्यताओं से पर्यटकों को परिचित कराने राम वनगमन परिपथ के विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। राम वनगमन पर्यटन परिपथ को विकसित करने के लिए प्रथम चरण में 9 स्थलों का चयन किया गया है। इन स्थलों में सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं।
राम वनगमन पर्यटन परिपथ के विकास का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों एवं आगन्तुकों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रथम चरण में चयनित 9 स्थानों पर कोई भी नया मंदिर निर्माण नहीं किया जा रहा है। अपितु इन स्थानों पर वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों, मंदिरों एवं अन्य धार्मिक संरचनाओं को यथावत् रखते हुए परिसर एवं आस-पास के स्थान में पर्यटक सुविधाओं के विकास का कार्य किया जाएगा। इससे पर्यटकों को इन क्षेत्रों में आकर्षित किया जा सकेगा। पर्यटक स्थानीय मान्यताओं, लोक-कला संस्कृति से परिचित हो सकेंगे इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे। पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि रामाराम जिला सुकमा में पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटरिया, गार्डन, पेयजल, दुकानें, यात्राी शेल्टर, ट्रेकिंग रूट, पार्किंग आदि अधोसंरचना का विकास प्रस्तावित है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्य शासन द्वारा नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान राज्य में विभिन्न राज्यों से प्रवासी श्रमिकों के गांवों में आने पर उन्हें ऐसे समय में बरसात के मौसम में भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके द्वारा काम की मांग किए जाने पर पौधारोपण, मुर्गी शेड, बकरी शेड, पक्का फर्श निर्माण, पंचायत भवन, धान चबूतरा निर्माण, गौठानों में वर्मी टांका एवं नाडेफ निर्माण, आगंनबाड़ी भवन निर्माण और प्रधानमंत्री आवास निर्माण के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य हितग्राही मूलक एवं आजीविका मूलक कार्यों में निरंतर रोजगार प्रदाय किए जा रहे हैं। कांकेर जिले में योजनांतर्गत 3 हजार 142 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
कोरोना महामारी काल में जहां जरूरतमंद परिवारों को काम की मांग के आधार पर रोजगार प्रदान किया जा रहा है। वहीं जिले के पंजीकृत दिव्यांगजनों को भी मनरेगा के तहत रोजगार प्रदान कर मदद की जा रही है। जिला पंचायत के सीईओ डॉ. संजय कन्नौजे ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक जिले में 2 हजार 108 परिवारों को 100 दिवस कार्य दिया जा चुका है। साथ ही जिले में एक वित्तीय वर्ष में गर्भवती माताओं को कम से कम 50 दिवस कार्य करने पर एक माह का मातृत्व भत्ता 5 हजार 910 रूपए प्रदान किया जा रहा है।
इस प्रकार कोरोना महामारी व बरसात के मौसम में भी जरूरतमंद लोगों और दिव्यांगजनों को काम की मांग करने पर निरंतर रोजगार प्रदाय किया जा रहा है, जिससें उन्हें आर्थिक मदद मिल रही है। वहीं दूसरी ओर गांव में परिसम्पतियों का निर्माण भी हो रहा है। ग्रामीणों के लिए गौठान और वहां मुर्गी शेड, बकरी शेड के निर्माण से आजीविका के नये आयाम विकसित हो रहे हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / महिलाओं को गौठानों से तरक्की की नई राह मिल गई है। कुछ महीनों तक रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से जूझ रही बिलासपुर जिले की ग्राम परसदा की महिलाओं पर यह कहावत सही साबित हो रही है। ग्राम परसदा की गौठान में जय मां लक्ष्मी स्व सहायता समूह की 10 महिलाएं जैविक खाद बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। शासन द्वारा समूह की 10 महिलाओं को वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षित होने के बाद अब ये महिलाएं खाद का उत्पादन कर रही हैं, जिससे उनके जीवन में आर्थिक समृद्धि आ रही है।
जय मां लक्ष्मी स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने 56 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाया और उसमें से 36 क्विंटल खाद की बिक्री भी कर ली है। खाद बेचने से उन्हें 33 हजार रूपये प्राप्त हुए हैं। खाद की खरीदी उद्यानिकी विभाग द्वारा की गई है। अब समूह की महिलाओं ने गोधन न्याय योजना के तहत गोबर से खाद बनाना शुरू कर दिया है। पूर्व में गोबर कम मात्रा में मिलने से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा था लेकिन अब गोधन न्याय योजना के लागू होने से पर्याप्त मात्रा में गोबर मिल रहा है। राज्य शासन की गोधन न्याय योजना से यहां की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य में इस योजना से और अधिक तरक्की करने की नयी आस उनमें जगी है। राज्य शासन को धन्यवाद देते हुए समूह की महिलाएं कहती है कि इन योजनाओं के चलते ही अब वे किसी पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी के जन्मदिवस 20 अगस्त को सद्भावना दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। सद्भावना दिवस पर प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में कोरोना संक्रमण के सुरक्षात्मक तरीके अपनाते हुए अधिकारी-कर्मचारी सद्भावना दिवस की शपथ लेंगे।
राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में सभी विभागों के सचिवों, अध्यक्ष राजस्व मंडल, समस्त विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त और कलेक्टरों को निर्देश जारी किए है कि वर्तमान में कोविड-19 महामारी के संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सुझाए गए विभिन्न दिशा-निर्देशों (सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनना इत्यादि सुरक्षात्मक उपाय) को अपनाकर और पब्लिक गैदरिंग से बचते हुए सद्भावना संबंधी शपथ अपने कार्यालय में ली जाए। निर्देश में यह भी कहा गया है कि सद्भावना दिवस मनाए जाने का उद्देश्य सभी धर्मों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों के बीच राष्ट्रीय एकीकरण की भावना जागृत करना और हिंसा के विचार को छोड़ते हुए लोगों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देना है।
रायपुर / शौर्यपथ / गोधन न्याय योजना ग्रामीणों के लिए आजीविका का साधन बनते जा रहा है। राज्य के विभिन्न गौठानों में स्व सहायता समूह की महिलाएं वर्मी खाद बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। वनांचल की महिलाएं भी इस योजना से लाभ ले रहीं है। सुकमा जिले की गांव दुब्बाटोटा गौठान की कमल स्व-सहायता समूह की 13 महिलाओं द्वारा गोबर में केंचुआ डालकर वर्मी खाद तैयार किया जा रहा है। समूह की महिलाएं बताती है कि गोबर से बने खाद से उन्हें आर्थिक लाभ मिलेगा। साथ ही जैविक खाद से किसानों को अच्छी फसल मिलेगी। महिलाओं ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा उन्हें जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी गोेधन न्याय योजना का क्रियान्वयन सुकमा जिले में सार्थक रूप से किया जा रहा है। योजना के तहत गौठान समितियों द्वारा गोबर क्रय किया जा रहा है। गोबर विक्रय करने वाले हितग्राहियों को सीधा उनके बैंक खातांे में भुगतान किया जा रहा है। खरीदे गए गोबर से वर्मी खाद तैयार करने की जिम्मेदारी महिला स्व सहायता समूहों को सौंपी गई हैं। सुकमा जिले में अब तक 13 हजार से भी अधिक पशुपालकों का पंजीयन गौठानो में किया जा चुका है। गौठान समितियों द्वारा 3 हजार 918 क्विंटल से भी अधिक गोबर क्रय किया गया है। जिले के कोंटा विकासखंड के ग्रामपंचायत दुब्बाटोटा गौठान में 250 क्विंटल से अधिक की गोबर खरीदी की गई ह,ै जिसमें विश्वास स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 45 क्विंटल गोबर बेचकर 9000 रुपए की आमदनी प्राप्त की है। अतिरिक्त आय कमाकर महिलाओं में खुशी है। उनका कहना है कि इस योजना से अब उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने में सहायता मिल रही है। पहले गोबर का उपयोग केवल घर लीपने और छेना बनाने में करते थे, योजना के फलस्वरूप अब गोबर से भी आय कमा रहे हैं।
गौरतलब है कि गोधन न्याय योजना का शुभारंभ हरेली पर्व 20 जुलाई 2020 को पूरे प्रदेश में किया गया था। शुभारंभ के बाद से ही पशुपालक गोबर का विक्रय करने गौठानों में पहुच रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल रहा है। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर विक्रय करने वाले हितग्राहियों को महीने में दो बार बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाना है। शासन की गोधन न्याय योजना ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए कल्याणकारी कदम साबित हो रहा है। गौठानों से जुड़कर ग्रामीण अंचल के लोग भी आत्मनिर्भर बन रहे है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री चलित संयंत्र पेयजल योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर एवं बस्तर संभाग में मोबाइल वाटर प्यूरीफायर संयंत्र के माध्यम से शुद्ध पेयजल प्रदाय हेतु 3 नग ट्रक मोबाइल वाटर ट्रीटमेंट यूनिट के लिए 6 करोड़ 29 लाख 13 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई है।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें नमन किया है। राज्यपाल ने कहा है कि स्वर्गीय श्री गांधी देश को उच्च तकनीक से परिपूर्ण करने की आकांक्षा रखते थे। उन्होंने सत्ता का विकेन्द्रीकरण करने के उद्देश्य से पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत बनाने के साथ ही देश में संचार क्रांति, कम्प्यूटर क्रांति और 18 वर्ष के युवाओं को मताधिकार देने जैसे अभिनव पहल की।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न और 21 वीं सदी के आधुनिक भारत के स्वप्न दृृष्टा स्वर्गीय श्री राजीव गांधी की जयंती पर राष्ट्र के नवनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया है। श्री बघेल ने उनकी जयंती की पूर्व संध्या पर आज यहां जारी अपने संदेश में कहा है कि श्री राजीव गांधी ने भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। उन्होंने अपने कार्याें से 21 वीं सदी के आधुनकि भारत की नींव रखी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री राजीव गांधी ने सत्ता के विक्रेन्द्रीयकरण के उद्देश्य से देश में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों को अधिकार संपन्न बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने देश में कम्प्यूटर और सूचना क्रांति की नींव रखी जिसके जरिए शासकीय काम-काज में पारदर्शिता और ई-प्रशासन के माध्यम से आमजन तक शासकीय योजनाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए युवाओं को 18 साल में मतदान का अधिकार दिलाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय श्री राजीव गांधी का यह दृष्टिकोण था कि ‘भारत मंे गरीबी उन्मूलन तथा आत्मनिर्भर भारत‘ निर्माण के लक्ष्य की प्राप्ति किसानों की आर्थिक दशा मंे सुधार के बिना संभव नहीं है। उनके बताए रास्ते पर चलते हुए राज्य सरकार ने गरीबों, किसानों, आदिवासियों सहित सभी वर्गों के लोगों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम और योजनाएं शुरु की हैं। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ शुरु की गयी है। इस योजना के माध्यम से 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ रुपए की राशि चार किश्तों में सीधे उनके खाते में डाली जा रही है। इस योजना की दूसरी किश्त 20 अगस्त को राजीव जी की जयंती पर दी जा रही है। राज्य सरकार ने किसानों की बेहतरी के लिए धान खरीदी, कर्जमाफी, सिंचाई कर की माफी जैसे कदम उठाए।
राज्य सरकार गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विशेष ध्यान दे रही है। ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सुराजी गांव योजना शुरू की है। गांवों में गौठानों में पशुधन संवर्धन के साथ साथ रोजगार मूलक गतिविधियां शुरू की गई है। इन गौठानों में गोबर खरीदी की ‘गोधन न्याय योजना’ संचालित की जा रही है। देश दुनिया में पहली बार दो रूपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। यही नहीं वनवासियों के द्वारा संग्रहित लघु वनोपजों की खरीदी व्यवस्था, व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार पत्रों का वितरण, ‘तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना जैसी कल्याणकारी योजनाएं प्रारंभ की गई है।
राजीव गांधी किसान योजना के 19 लाख किसानों को 1500 करोड़ रूपए की दूसरी किश्त
11.46 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा 232.81 करोड़ रूपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक
गोधन न्याय योजना: गोबर विक्रेताओं को मिलेगी 4 करोड़ 50 लाख रूपए का दूसरा भुगतान
श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए होंगे शामिल
रायपुर / शौर्यपथ / पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती 20 अगस्त पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के किसानों, तेंदूपत्ता संग्राहकों और गोबर विक्रेताओं के खाते में 1737.50 करोड़ रुपए की राशि का सीधे अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री इस राशि में से धान, गन्ना और मक्का उत्पादक 19 लाख किसानों को ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत 1500 करोड़ रूपए की दूसरी किश्त की राशि का आॅनलाईन अंतरण करेंगे। इसके अलावा गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को 4 करोड़ 50 लाख रूपए की राशि और तेंदूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2018 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में 232.81 करोड़ की राशि उनके खातों में अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में दोपहर 12.30 बजे आयोजित कार्यक्रम से सांसद श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ मंत्रीमंडल के सदस्य उपस्थित रहेंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रदेश के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ की आदान सहायता राशि दी जा रही है। जिसमें प्रथम किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि राजीव गांधी जी के शहादत दिवस 21 मई को प्रदान की गई थी वहीं इस योजना के तहत दूसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि 20 अगस्त को प्रदान की जा रही है। इस योजना से प्रदेश के धान, गन्ना और मक्का उत्पादक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में गोधन न्याय योजना के तहत दो रूपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। इस योजना में 20 जुलाई से 15 अगस्त तक 6 करोड़ 17 लाख रूपए मूल्य का 3 लाख क्विंटल से ज्यादा गोबर खरीदा जा चुका है। गोधन न्याय योजना का पहला भुगतान 5 अगस्त को एक करोड़ 65 लाख रूपए का किया जा चुका है। इस योजना के तहत 2 अगस्त से 15 अगस्त तक खरीदे गए सवा दो लाख क्विंटल गोबर की राशि 4 करोड़ 50 लाख रूपए का भुगतान विक्रेताओं को उनके खातों में किया जाएगा। प्रदेश के 4377 गौठानों में से 3205 क्रियाशील गौठान हैं, जहां गोबर खरीदी हो रही है। राज्य में 1 लाख 1919 पशुपालकों का पंजीयन किया गया है, इनमें से 63 हजार 942 पशुपालक योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। खरीदे गए गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार की जा रही है, जिसकी बिक्री 8 रुपए प्रति किलो की दर पर सहकारी समिति के माध्यम से की जाएगी।
इस अवसर पर प्रदेश के 114 विकासखण्डों के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2018 सीजन में 728 समितियों के 11 लाख 46 हजार 626 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 232 करोड़ 81 लाख रूपए की प्रोत्साहन पारिश्रमिक की राशि वितरित की जाएगी। मुख्यमंत्री बघेल यह राशि सीधे तेंदूपत्ता संग्राहकों के खाते में आर.टी.जी.एस. के जरिए अंतरित करेंगे। तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरित करने के लिए संबंधित जिलों में जिला स्तर पर और 114 विकासखण्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विकाखण्ड स्तर पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों में अधिकतम प्रोत्साहन पारिश्रमिक की राशि प्राप्त करने वाले 10 संग्राहक सदस्यों को सम्मानित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2018 सीजन में प्रदेश की 880 प्राथमिक वन समितियों द्वारा कुल 14.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया था। संग्रहण पारिश्रमिक की दर वर्ष 2018 में 2500 रूपए प्रति मानक बोरा थी। वर्ष 2018 में 11 लाख 98 हजार 673 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 371.15 करोड़ रूपए की राशि संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में वितरित की गई थी। इन 880 समितियों में से 854 समितियों के तेंदूपत्ता का निर्वर्तन निविदा के माध्यम से किया गया है। इनमें से 728 समितियां लाभ की स्थिति में रहीं। तेंदूपत्ता व्यापार से शुद्ध लाभ की 80 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में तेंदूपत्ता संग्राहकों को वितरण करने का प्रावधान राज्य शासन की नीति में है।
लाभ की स्थिति वाले 728 समितियों के 11 लाख 46 हजार 626 तेंदूपत्ता संग्राहकों को कुल 232.81 करोड़ रूपए की राशि प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में वितरित की जाएगी। ये समितियां प्रदेश के 114 विकासखण्डों के अंतर्गत स्थित है। जिन संग्राहकों के बैंक खातों का विवरण प्राप्त हो गया है, उनके खाते में यह राशि सीधे एक्सिस बैंक के माध्यम से आर.टी.जी.एस से भेजी जाएगी। प्रदेश में तेंदूपत्ता का संग्रहण पारिश्रमिक 2500 रुपए से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है, इसी प्रकार पर 7 के स्थान पर 31 लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था की गयी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए 454 स्टील ब्रिजों के निर्माण के लिए 1100 करोड़ रूपए की स्वीकृति देने का किया आग्रह
ग्रामीण क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, बस्तर संभाग में नक्सल चुनौतियों के कारण स्टील ब्रिज बनाना आसान
स्टील ब्रिज प्री फेब्रिकेटेड होते हैं और इनके निर्माण में लगता है कम समय
स्टील ब्रिजों का रख-रखाव और उन्नयन भी सुविधाजनक
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर उनसे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टीविटी के लिए 454 स्टील ब्रिजों के निर्माण हेतु 1100 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने तोमर को पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के चहंुमुखी विकास के लिए इन इलाकों में सड़कों के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से अच्छादित है और 76 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी वर्ग के लोग हैं। छत्तीसगढ़ का बड़ा भू-भाग दुर्गम है। जमीन की उत्पादकता वृद्धि, सम्पत्ति के निर्माण, रोजगार सृजन, कृषि उपज के नुकसान को कम करने और लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों मंे सड़कों का निर्माण अतिआवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि हमारा फोकस अधोसंरचना विकास के कार्यो पर है। राज्य में 33 हजार 622 किलोमीटर लंबी 7300 ग्रामीण सड़कों का 264 बड़े पुलों (एलएसबी) सहित निर्माण किया गया है, जिनमें 9 स्टील ब्रिज हैं। इसके अलावा 7737 किलोमीटर लंबी 1240 सड़कें 114 बड़े पुलों (एलएसबी) सहित निर्माणाधीन हैं। इन क्षेत्रों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वर्ष 2011 के पहले और उसके बाद भी बड़े पुलों का निर्माण नहीं कराया जा सका। राज्य सरकार द्वारा इन क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के कार्यो का गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने लगभग 1100 करोड़ रूपए की लागत के 454 बड़े पुलों (एलएसबी) को निर्माण के लिए चिन्हित किया है, जिनमें 250 स्टील ब्रिज शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सुदूर दक्षिण में स्थित संभाग है और नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। यह क्षेत्र दुर्गम भौगोलिक चुनौतियों और सघन वनों के साथ सीमावर्ती राज्यों से जुड़ा है। अब तक राज्य सरकार द्वारा बस्तर संभाग मंे 7228 किलोमीटर लंबी 1375 सड़कों का निर्माण किया गया है तथा 3009 किलोमीटर लंबी 692 सड़कें निर्माणाधीन हैं। इन क्षेत्रों में नक्सल गतिविधियों और निर्माण में लगने वाले लंबे समय के कारण बड़े पुलों (एलएसबी) का निर्माण व्यवहारिक (संभव) नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में स्टील ब्रिजों का बनाना ज्यादा आसान होगा, क्यांेकि स्टील ब्रिज प्री फेब्रिकेटेड होते हैं और इनके निर्माण में समय भी कम लगता है। इसके अलावा ऐसे ब्रिजों के रख-रखाव और उन्नयन में काफी कम समय लगता है। ऐसे ब्रिजों को आवश्यकतानुसार सड़क सम्पर्क के लिए दूसरे स्थान पर स्थापित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि ऐसे ब्रिजों के निर्माण से आदिवासी और ग्रामीण लोगों को न सिर्फ अच्छी सड़क कनेक्टीविटी मिलेगी, बल्कि राज्य सरकार को इसके माध्यम से उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और बेहतर सड़क कनेक्टीविटी के कारण उनकी बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और उचित मूल्य दुकानों तक पहंुच आसान बनाने में सहायता मिलेगी। इससे ग्रामीण और कृषि आय में बढ़ोतरी होगी, उत्पादकता बढ़ेगी, रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और गरीबी उन्मूलन के लिए सतत विकास का इको सिस्टम बनेगा।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में इन परिस्थितियों के मद्देनजर केन्द्रीय पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क कनेक्टीविटी के लिए 454 स्टील ब्रिजों के निर्माण के लिए 1100 करोड़ रूप्ए की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
