September 23, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    शौर्यपथ लेख । मीडिया किसी भी देश की छवि को राष्ट्रीय ही नही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाती है । मीडिया एक आईना की तरह होती है जो दुनिया को अपने देश की स्थिति चाहे अच्छी हो , गलत हो प्रसारित कर सत्ता पक्ष विपक्ष को उनके कार्यो को बता कर जनता को अवगत कराने का कार्य , उपलब्धि हो , असफलता हो सामने लाने का कार्य ही मीडिया का होता है । कहने का तातपर्य सच को सामने लाना वर्तमान स्थिति को सामने लाना , ज्वलंत मुद्दों को निष्पक्षता से रखना , देश की ज़रूरत को समझना , देश की वास्तविक हालत को सरकार के सामने रखना और प्रशासन की दबंगई , कुशल कार्य , उपलब्धि , भ्र्ष्टाचार पर खुलकर चर्चा करने का माध्यम मीडिया के रूप में स्थापित है । भारत मे भी मीडिया का अस्तित्व है किंतु विगत कुछ सालों से जितने आरोप सरकार पर लग रहे उतने आरोप मीडिया के पक्षपात पर भी लग रहे है । कहने को मीडिया देश का चौथा स्तंभ है किंतु इस चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठने लगे है । देश का अधिकतर मीडिया ग्रुप आज चाटुकारिता की आगोश में आकर आम जनता को ज्वलंत मुद्दों की बात ना बता कर , देश की वर्तमान हालत ना बता कर चाटुकारिता की भाषा बोल रहा है । भारतीय मीडिया की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे है किंतु मीडिया ग्रुप इन सबसे पर अपनी ही दुनिया मे मस्त है । सच्चाई को सामने लाने की बात तो बहुत दूर अब वही परोसा जा रहा है जो उनके आका चाहते है । पहले मीडिया तथ्यों के साथ सच्चाई सामने लाती थी और सम्मानित व शालीन भाषा जिसमे व्यंग कटाक्ष का मिश्रण होता था का प्रयोग किया जाता था किंतु वर्तमान में मीडिया आपसी रंजिश , झूठे आत्मसम्मान की बात करती नजर आ रही है । अब मीडिया सच तो नही बता रही वो जो भी बता रही उसे आपके जेहन में थोप रही ये बताने की कोशिश कर रही कि वो जो कह रही वहीं सच है । बातों की जलेबी बना कर , तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर किसी भी हद में जाकर अपने आका के तलुवे चाटने का पुरजोर प्रयास करती नजर आ रही है । अब पत्रकारिता स्वतंत्र नही रह गए इस चौथे स्तंभ को भी सरकार के सहारे की ज़रूरत हो गई है । वर्तमान समय की ही बात करे तो वर्तमान समय देश के लिए एक मुश्किल भरा समय है भारत की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है । देश मे भुखमरी चरम पर है , बेरोजगारी चरम पर है , महंगाई चरम पर है , स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है , शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है किन्तु देश की मीडिया एक एक्टर के हत्या या आत्महत्या पर व्यस्त है , देश की मीडिया धर्म पर व्यस्त है , देश की मीडिया पड़ोसी मुल्कों की हरकत और बर्बादी पर व्यस्त है , देश की मीडिया अपने आकाओं की गुलामी पर व्यस्त है , देश की मीडिया तथ्यहीन बातों पर व्यस्त है । अब मीडिया आईना दिखने की बजाए गुलामी की जिंदगी पर व्यस्त है अब वही दिखा रही है जो उनके आका चाहते है फिर चाहे वो गलत हो या सही उनसे कोई सरोकार नही । ज्वलंत मुद्दे अब चौथे स्तंभ में बेमानी हो गए है । उसकी जगह अब चाटुकारिता परोसी जा रही है । ऐसी चाटुकारिता जिससे उसका अस्तित्व बना रहे । आईना अब पत्रकारिता का पर्यायवाची नही रह गया अब तो झूठ और बेमानी ही मीडिया का दूसरा रूप बन गया है । गुलाम भारत मे भी मीडिया खुलकर अपनी बात रख लेता था । कई बड़े बड़े आंदोलन में गुलामी के समय मे भी मीडिया स्वतंत्र था किंतु आजाद भारत मे मीडिया अब गुलामो की जिंदगी जी रहा है । मीडिया की स्वतंत्रता अब दिखावा मात्र हो गई । अब अगर जिंदा रहना है तो जिसके पास ताकत है उसके महिमा को वर्णित करते हुए ही अस्तित्व में बने रहने का समय आ गया है अगर विरोध करोगे तो सत्ता की ताकत के आगे नेस्तनाबूद कर दिए जाने का खतरा बन गया है । मीडिया अब आईना ना होकर प्रायोजित फ़िल्म का रूप ले लिया है जिसमे स्क्रीप्ट भी पूर्वनियोजित होती है और फिल्मांकन भी पुर्नियोजित सिर्फ वही दिखाया जा रहा है जो सत्ता की ताकत दिखाना चाहती है । भले ही देश आजाद हो गया किन्तु मीडिया अब गुलाम हो गई और हो भी क्यो ना अगर आपने सच्चाई दिखाई तो आप ही नही दिखेंगे जब आप ही नही दिखेंगे तो सच्चाई कहा दिखेगी । सच्चाई और जिंदगी में किसी एक के चुना में अब जिंदगी चुनने की मजबूरी ही मीडिया के स्वतंत्रता के रास्ते मे सबसे बड़ी रुकावट है । वर्तमान समय मे यही रीति के तहत मीडिया अपना कार्य कर रही है सच्चाई अब मीडिया जगत में विलुप्त सी नजर आ रही है और चाटुकारिता अब बलवान हो गई जो जितनी ज्यादा चाटुकारिता करेगा वो उतना सफल होगा । निष्पक्षता और चाटुकारिता में अब चाटुकारिता की जीत हो गई । और देश के चौथे स्तंभ को अब सहारे के लिए चाटुकारिता का दामन थामना ज़रूरी हो गया । चौथा स्तम्भ अब कब अपने दम पर स्थापित होगा ये भविष्य के कालचक्र में लुप्त है किंतु वर्तमान में इसे स्थापित होने के लिए सहारे की ज़रूरत पड़ रही है बिना सहारे के अस्तित्व खतरे में पड़ने का जो अंदेशा है । अब तो छोटी मोटी सच्चाई जिससे आकाओं को कोई फर्क नही पड़ता ऐसी ही सच्चाई सामने आती है बाकी तो झूठ का पुलिंदा ही बांकी रह गया है । ( शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

    शौर्यपथ लेख । कृष्ण आनंद चौधरी पिजरे में कैद चिड़िया कितनी भी रंगीन हो, सुन्दर नहीं लगतीं… चाहे कोई कितनी भी कविताएं लिख लें उन पर। क्या होता है चरित्र? चरित्र गुलामी है, एक बंधन। वो शर्तों से तय होता है। चरित्र गैर कुदरती है। प्रकृति विरोधी। अप्राकृतिक। चरित्र है, किसी तथ्य पर थोपीं गई शर्तें। हवा का चरित्र क्या है? शांत, धीमे, तेज कि आंधी? गर्म, ठंडा या बर्फ? पानी का चरित्र क्या है? और मिट्टी का चरित्र? मूरत या ईंट? जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। कोने में, अपनी ही कुठाओं में दबी खामोश चरित्रशील औरत? या किसी खुले में अपने मन से ठहाके लगाकर हंसती चरित्रहीन औरत?… कौन सुंदर है? कौन है सुंदर? वो जो चाहे तो आगे बढ़कर चूम ले। बोल दे कि प्यार करती हूं? या वो, जो बस सोचती रहे असमंजस में और अपने मन का दमन किए रहे। दमित औरतें निसंदेह सुंदर नहीं होती, पर स्वतंत्र चरित्रहीन औरतें होती हैं खूबसूरत। सोचना, जब अपनी टांगे फैलाई तुमने अपने पुरुष के सामने। अगर वो केवल पुरुष के लिए था तो ही वो चरित्र है। लेकिन वो तुम्हारे अपने लिए था तो चरित्रहीनता। अपने लिए, अपने तन और मन के लिए खुल कर जीती औरते सुन्दर लगती है। तुम उसे चरित्रहीन ही पुकारोगे। बच्चे चरित्रहीन होते हैं… उनका सबकुछ बेबाक… आजाद होता है। वो हंसते हैं खुलकर, रोते हैं खुलकर, दुख सुख, खुशी गम… सब साफ सामने रख देते हैं। वो दमन नहीं करते अपना। चरित्र दमन है। पहले अपना, फिर अपनों का, फिर अपने समाज का। गौर करना, जो जितना चरित्रवान होता है, वो उतना ही दमित होता है, और फिर उतना ही बड़ा दमनकारी होता है। जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं। आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं। हां, चरित्रहीन औरते सुंदर होती हैं। वो, जिसका मन हो तो अपने पुरुष की हथेली अपने स्तनों तक खींच ले। वो, जिसका मन हो तो वो अपने पुरुष को अपनी बांहों में जोर से भींच ले। वो, जिसका मन करे तो रोटियां बेलते, नाच उठे। वो जिसका मन करे तो जोर से गा उठे। वो, जो चाहे तो खिलखिलाकर हंस सके। वो जो चाहे तो अपने प्रिये की गोद में धंस सके। वो, जो चाहे तो अपने सारे आवरण उतार फेंके। वो, जो चाहे तो सारे कपड़े लपेट ले। वो, जो चाहे तो अपने बच्चे को स्वतंत्रता से अपना स्तन खोल दूध पिला सके, उसे दुलरा सके। बच्चे को जन्म देते जब वो दर्द में चीखती है तो वो चरित्रहीनता है। आसपास की औरतें उसे चुप करातीं हैं। आवाज नहीं निकलाने की सलाह देती हैं। सारा दर्द खामोशी से सहने को कहती है। चरित्र का ये बंधन कबूल नहीं होना चाहिए। प्रसव पीड़ा… तकलीफ है, सृजन की तकलीफ… तो उससे धरती गूंजनी चाहिए। अपने पुरुष के साथ उसके मदमस्त खेल का दमन भी गैरकुरदती है। इसे भी मुक्त होना चाहिए, उसे भी चरित्रहीनता होना चाहिए। सुना है कभी किसी औरत को अपने परमानंद के क्षणों में एकदम खुलकर गाते? क्यों नहीं बोल पाती वो, अपने भावों को स्वरों में? क्योंकि ये उसे चरित्रहीना साबित करेगा। पर ऐसी औरतें ही भी बेहद सुन्दर लगती हैं। धरती की हर चीज का सुख लेते, अपने भीतर और बाहर हर चीज से खुलकर खुश होते…. प्यार में डूब सबकुछ से प्यार करती आजाद औरत। मुझे कुदरत पसंद हैं क्योंकि उसका कोई चरित्र नहीं। यह लेख इससे पहले "मेरा रंग " में प्रकाशित किया जा चुका है जिसे कृष्ण आनंद चौधरी ने लिखा है। वे वरिष्ट पत्रकार हैं।

    भोपाल । शौर्यपथ । ग्वालियर-चंबल संभाग में पूर्व सीएम कमलनाथ ने बीजेपी को जोर का झटका दिया है, ग्वालियर पूर्व से बीजेपी के उम्मीदवार रहे सतीश सिकरवार ने कमलनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. पूर्व सीएम कमलनाथ ने आज बीजेपी को बड़ा झटका दे दिया. उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में सेंधमारी की है. 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे सतीश सिकरवार ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. पूर्व सीएम कमलनाथ की मौजूदगी में सैकड़ों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. ये बीजेपी के लिए ग्वालियर-चंबल में बड़ा झटका माना जा रहा है.

    रायपुर / शौर्यपथ / कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के कुप्रबंधन के कारण देश का खजाना खाली हो गया है ।मोदी सरकार किसान सम्मान निधि का पैसा देने की स्थिति में नही है ।इसीलिए केंद्र बहाने बाजी कर आधे अधूरे किसानों के खाते में पैसे डाल रही है।पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा किसान सम्मान निधि के सम्बंध में दिए गए बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा एक तो मोदी सरकार ने किसानों के खातों में पैसा नही डाला ऊपर से रमन सिंह उसी के बचाव में गलत बयानी कर रहे हैं। केंद्र सरकार की नीयत छत्तीसगढ़ सहित देश भर के किसानों को किसान सम्मान निधि का पैसा देने की है ही नहीं ।मोदी सरकार की नीयत किसानों को किसान सम्मान निधि का पैसा देने की रहती तो पहली दूसरी क़िस्त के समय केंद्र सरकार के पास जो सूची है उसी के आधार पर किसानों को भुगतान कर दिया गया होता ।कोरोना काल मे फिर से आवेदन नही मंगवाया जाता ।कोरोना के समय लोगो को कम से बाहर निकलने के उद्देश्य से देश भर में दीगर कार्यो और योजनाओं के लिए पुराने आंकड़ो को आधार बनाया जा सकता है फिर किसान सम्मान निधि में क्यो नही ? जैसा दावा केंद्र सरकार कर रही है कि उसने राज्य के 27 लाख किसानों को पहली और अन्य क़िस्त का भुगतान किया था तो उसी आधार पर अब भी भुगतान किया जाना चाहिए किस आधार पर मात्र 2 लाख किसानों को भुगतान किया गया। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश की अर्थ व्यवस्था सम्भालने में बुरी तरह नाकाम साबित हुई है ।केंद्र सरकार अपनी योजनाओं को भी चलाने में असमर्थ साबित हो रही है ।राज्यो को जीएसटी की क्षति पूर्ति का पैसा देने में केंद्र पहले ही हाथ उठा चुका है ।अब किसानों को नाम मात्र का दिया जाने वाला किसान सम्मान निधि का पैसा देने में भी केंद्र हिला हवाला कर रहा है । मोदी सरकार की नीयत किसानों को पैसा देने की होती तो हर क़िस्त के बाद अलग अलग फार्म भरवाने बैंक रिकार्ड की जानकारी मंगवाने के नाम पर किसानों को परेशान नही किया जाता ।छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई जाने वाली राजीव गांधी किसान न्याय योजना में लगभग 19 लाख किसानों ने लाभ प्रप्त किया ।राज्य में समर्थन मूल्य पर लगभग इतने ही किसान धान बेचते है ।इन सबके आंकड़े सरकार के पास है जो केंद्र सरकार की भी जानकारी में है ।भाजपा सरकार चाहती तो इसी जानकारी के आधार पर कम से कम इतने किसानों को भुगतान कर सकती थी ।भाजपा सरकार किसान सम्मान निधि योजना चलाने में असमर्थ लग रही है इसी लिए वह राज्य सरकार पर आरोप लगा कर कुछ किसानों को ही भुगतान कर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि रमन सिंह सहित भाजपा के नेता दलीय प्रतिबद्धता के कारण केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे किसान विरोधी आचरण में उसके साथ खड़े नजर आते है और मोदी सरकार को खुश करने राज्य सरकार पर झूठे आरोप लगा कर बयान बाजी करते है ।जब केंद्र ने राज्य सरकार के द्वारा 2500 रु में धान खरीदी पर राज्य से चावल न लेने की धमकी दिया था तब भी भाजपा का एक भी नेता छत्तीसगढ़ के किसानों के समर्थन में सामने नही आया था सारे के सारे नेता केंद्र की किसान विरोधी नीति के साथ खड़े थे। छत्तीसगढ़ की जनता भाजपा के इस चरित्र को देख रही है 2018 के विधानसभा चुनाव का दोहराव 2023 में भी होगा।

    दुर्ग । शौर्यपथ । एनएसयूआई के जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छ:ग में स्कूल फीस नियामक आयोग बनाए जाने…

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग निगम में शायद ही कोई अधिकारी होगा जो आते ही लगातार विवादों में घिरा हो , प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभार सँभालने के बाद जल्द ही प्रभार में बदली , अमृत मिशन के कार्य से भी जल्दी ही प्रभार में बदली , बिना निविदा के ठेके देने और मनपसंद ठेकेदार को फायदा पहुँचाने में अग्रणी , सुखा राशन वितरण में कई सवालिया निशान , दुर्ग निगम में स्वयभू सर्वेसर्वा और सबसे ज्यादा जानकार समझने वाले प्रभारी ईई मोहन पूरी गोस्वामी यु तो निगम में ढेढ़ साल ही हुए है आये हुए किन्तु इन डेढ़ साल में पत्रकारों को लिफाफा बांटकर अपनी तरफ करने की पुरजोर कोशिश भी पिछली दीपावली में फेल हो गयी .
    शौर्यपथ संचार पत्र ने पिछले अंको में प्रकाशित किया था कि किस तरह बिना निविदा के कार्य को गोस्वामी द्वारा करने की अनुमति ठेकेदार को दे दी गयी ऐसा पहले भी हो चूका है इस बारे में ईई का कहना है कि अतिआवश्यक कार्य के कारण ठेका दिया गया . मामला चाहे जो भी हो किन्तु अब एक नया मामला सामने आया जिसमे निगम आयुक्त द्वारा ईई गोस्वामी को नोटिस जारी हुआ है जिसमे कार्य में लापरवाही की बात कड़े शब्दों में की गयी . उपरोक्त नोटिस के अनुसार ईई गोस्वामी द्वारा कई कार्यो के कार्यादेश जरी करने में 9 माह का समय बीत जाने के बाद भी कार्यादेश जारी नहीं करने के कारण पत्र प्रेषित किया गया और इस तरह कार्य की पुनरावृत्ति ना होने की बात कही गयी . एक तरफ ईई गोस्वामी मनपसंद ठेकेदारों को बिना निविदा कार्य सौप रहे है वही दूसरी तरफ जिनको ठेका मिला उन्हें कार्यादेश नहीं देकर ठेकेदारों को परेशान किया जा रहा है क्या ऐसे ईई पर महापौर और शहर विधायक मामले को संज्ञान में लेकर कोई सख्त कदम उठाएंगे या मौन रहेंगे ?

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) का संक्रमण निगम सीमाक्षेत्र में तेजी से फैल रहा है, जिसके कारण गत दिनों निगम के जनप्रतिनिधियों का कोरोना पाजिटीव पाये जाने के उपरांत निगम के कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों का भी टेस्ट कराया गया और आम नागरिकों को कोरोना संक्रमण न हो इस बात को ध्यान में रखते हुये निगम कार्यालय आम नागरिकों के लिये 29 अगस्त 2020 तक उसके उपरांत 6 सितंबर तक प्रतिबंधित किया गया था। जिसे अब बढा कर 12 सितंबर तक प्रतिबंधित किया गया हैै। साथ जिलाधीश के निर्देश पर कोरोना संक्रमण के बढते प्रकोप को देखते हुये घर घर सर्वे के लिये अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी गयी है।
    निगम आयुक्त चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि निगम क्षेत्र में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलने के साथ-साथ निगम का जनप्रतिनिधि एंव कर्मचारी संक्रमित पाये जाने के कारण (कोविड-19) के संक्रमण के रोकथाम एवं नियंत्रण के अलावा नागरिकों को केारोना संक्रमण से दूर रखने के दृष्टिगत रखते हुये निगम कार्यालय को 22 अगस्त से 29 अगस्त 2020 तक आम नागरिकों के आने जाने हेतु पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया था। जिसे 1 सितम्बर से 6 सितम्बर 2020 बढाया गया था चुकि कोरोना संक्रमण शहर में अब भी तेजी से फैल रहा हैए जिसे ध्यान में रखते हुये आम नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुये आम नागरिकों के लिये दिनांक 7 सितंबर से 12 सितंबर 2020 तक निगम कार्यालय आना-जाना प्रतिबंधित किया जाता है। अति आवश्यक सेवा से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये अपने वार्ड पार्षद से संपर्क करे, ताकि पार्षद भी निगम के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से दूरभाष (मोबाईल) में संपर्क कर समस्या का निराकरण करायेंगे। इसी प्रकार कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुये जिलाधीश के निर्देश पर घर-घर सर्वे करने अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गयी है, ताकि कोरोना संक्रमण की जानकारी मिल सके।
    आयुक्त श्री कौशिक ने नागरिकों से अपील की है कि अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकले, मॉस्क व सेनेटाईजर का उपयोग करे, बार बार साबुन से हाथ धोवें तथा सोसल डिस्टेंसिंग का पालन करे, इसके अलावा सर्दी, खासी या बुखार के लक्षण होने पर नजदिकी स्वास्थ्य केन्द्र या डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि सावधानी बरत कर ही हम कोरोना महामारी से लड सकते है। साथ ही उन्होंने नागरिकों से सर्वे टीम को सरदी खासीए बुखार या अन्य समस्या के संबंध में सही सही जानकारी देने की अपील की है, ताकि कोरोना संक्रमण की पहचान की जा सके एवं सही समय में उसका ईलाज कर कोरोना संक्रमण से बचा जा सके।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कल 8 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर जनता को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी अपने बधाई संदेश में कहा है कि आज का दिन अक्षरों की अलख जगाने, अक्षर ज्ञान की महत्ता बताने का दिन है। अक्षर ज्ञान के प्रकाश से अपने और समाज के जीवन में चेतना, सुख और समृद्धि की रोशनी फैलाने का दिन है।
    मुख्यमंत्री बघेल ने आव्हान किया है कि प्रदेश को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने के लिए हम सब अपना योगदान देने का संकल्प लें। सभी का योगदान प्रदेश के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वास्तव में अक्षर ज्ञान वह पहला द्वार है, जहां से ज्ञान के अनंत रास्ते खुलते हैं। साक्षरता से शिक्षा और शिक्षा से विकास का सीधा संबंध है। आज का दिन प्रदेश में साक्षरता के वर्तमान सोपान पर गर्व करने का है, तो शेष लक्ष्य प्राप्त करने के लिए संकल्प लेने का भी है। उन्होंने कहा है कि शत्-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आगे बढऩे के लिए व्यक्तिगत रूचि और सामूहिक प्रयासों की बड़ी आवश्यकता है। व्यापक जनभागीदारी से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    बिलासपुर / शौर्यपथ / उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी विकासखंड तखतपुर ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 330296 के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स सेवा सहकारी समिति, कुवां वि.खं. तखतपुर जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स सेवा सहकारी समिति कुवां विकासखंड तखतपुर का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 2628/682 वैधता दिनांक 25 मार्च 2021 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।
    इसी प्रकार उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक विकासखंड बिल्हा के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स बीज उत्पादक सहकारी समिति, हरदी विकासखंड बिल्हा ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 1108379 जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26 ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स बीज उत्पादक सहकारी समिति हरदी विकासखंड बिल्हा का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 2938/938 वैधता दिनांक 10 मई 2021 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।
    इसी प्रकार उप संचालक कृषि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपर कलेक्टर बिलासपुर द्वारा दिनांक 19 अगस्त एवं 20 अगस्त को जिले के टॉप 20 यूरिया विक्रेताओं के जांच प्रतिवेदन एवं उर्वरक निरीक्षक वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी तखतपुर के अनुशंसा के आधार पर मेसर्स अंसारी खाद भंडार मेन रोड तखतपुर, वि.खं. तखतपुर ढ्ढस्नरूस् ढ्ढष्ठ- 324483 जिला बिलासपुर (छ.ग.) को उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के तहत खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता बरतने का प्रथम दृष्टिया दोषी पाये जाये के फलस्वरूप कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण तथा उर्वरक आदेश 1985 का खण्ड 05 एवं खण्ड 35 का उल्लघन एवं अनियमितता पाये जाने के दोषी होने के फलस्वरूप एतद् द्वारा उर्वरक आदेश 1985 के खण्ड 26 एवं 26ए में प्रदत उर्वरक अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग करते हुए खण्ड 31 के तहत मेसर्स अंसारी खाद भंडार मेनरोड तखतपुर विकासखंड तखतपुर का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र क्रमांक 718/53 वैधता दिनांक 9 अप्रैल 2025 तक निलंबन किया जाता है। निलंबन अवधि में उर्वरक व्यवसाय पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगाा।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां उनके निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में जाति प्रमाण-पत्र जारी करने तथा निरस्त करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। बैठक में जनजातीय समुदाय के हित में भू-राजस्व की धाराओं में संशोधन करने के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य सलाहकार परिषद की उप समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। अचानकमार टाईगर रिजर्व में तीन ग्रामों तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा के विस्थापन प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। प्रत्येक विस्थापित परिवार को 10 लाख रूपए अथवा दो हेक्टेयर भूमि एवं 5000 वर्गफीट की बाड़ी, साथ ही पेयजल सहित सड़क की सुविधाएं के अलावा परिवार की सहमति से उपयुक्त स्थान पर जमीन भी दी जाएगी। इसी प्रकार क्षेत्र के कुल 19 गांवों के विस्थापन के लिए सहमति प्रदान की गई। छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद् की बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन पर राज्यपाल को भेजे जाने वाले प्रतिवेदन का अनुमोदन किया गया।
    मुख्यमंत्री ने वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की चर्चा में कहा कि वन क्षेत्रों में आरेंज क्षेत्रों का सर्वे कर राजस्व अभिलेखों को दुरूस्त कर लिया जाए। गांवों में राजस्व संबंधी दिक्कतों के निराकरण के लिए सभी अनुसूचित क्षेत्रों में बंदोबस्त त्रुटि सुधार के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसके तहत गांवों में शिविरों का आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि वन अधिकार मान्यता पत्र में व्यक्तिगत पट्टे और सामुदायिक पट्टे भी दिए जा रहे हैं। मुुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधि पात्र व्यक्तियों के आवेदन लेने के साथ इसे ग्राम सभा से पारित कर उन्हें वन भूमि का पट्टा देने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि विगत डेढ़ साल में सरकार द्वारा 40 हजार से अधिक व्यक्तिगत/सामुदायिक पट्टों का वितरण किया गया है। बस्तर से सरगुजा तक उन्होंने स्वयं बैठक लेकर इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने सलाहकार परिषद के सदस्यों को मसाहती ग्रामों के संबंध में अपने सुझाव विभागीय मंत्री और सचिव को भेजने कहा। बैठक में राजस्व, वन और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित कर इन मामलों के सबंध में निर्णय लिए जाए। सलाहकार परिषद की बैठक में सदस्यों द्वारा देश में पहली बार नगरीय क्षेत्रों में वन अधिकार पत्र प्रदान करने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
    बैठक में बताया गया कि जिला मुख्यालयों में स्थित छात्रावासों में स्वीकृत सीट से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते है। इच्छुक विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश के लिए शैक्षणिक सत्र 2020-21 से 21 नवीन छात्रावासों में 14 हजार 750 सीट की स्वीकृति दी गई है। विभाग द्वारा 161 आश्रम-छात्रावास भवन निर्माण की वित्तीय प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने परिषद् के सदस्यों से पुराने जर्जर छात्रावास एवं दर्ज संख्या के अनुसार अपर्याप्त क्षमता के भवनों के प्रस्ताव भी विभाग को भेजने कहा। जनजाति सलाहकार परिषद में विशेष पिछड़ी जनजाति के प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने पर सहमति प्रदान की गई। पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृति दिए जाने के लिए आय सीमा बढ़ाने के संबंध में भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। परिषद् के सदस्यों की मंशानुसार उन्हें अनुरोध पत्र भेजा जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय की बेहतरी के लिए पिछले डेढ़ साल में अनेक निर्णय लिए गए हैं। आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की दिशा में नवाचारी पहल की शुरूआत की गई है। वनांचल क्षेत्रों में एनीमिया और कुपोषण को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई। इसके बेहतर परिणाम मिले है। कोरोना संकट काल में भी कुपोषित बच्चों की संख्या में 13 प्रतिशत की कमी आयी। यह एक बड़ी उपलब्धि है। गांवों में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिीनिक योजना शुरू की गई इससे लोगों तक सीधे स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। बस्तर अंचल में मलेरिया मुक्ति के लिए भी अभियान चलाया गया है।

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