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पत्रकार कल्याण कोमुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल लोकवाणी की 22वीं कड़ी में आज जनता से हुए रू-ब-रू
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका
‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘ पर की बात
असम की तरह जशपुर जिले में दिखने लगे हैं चाय के बागान
महिला स्व-सहायता समूहों ने ई-कॉमर्स पर बेची 22 हजार 480 राखियां
कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत की कमी
अबूझमाड़ को बूझने की दिशा में राज्य सरकार ने की ठोस पहल: पहली बार मिलने लगा अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों को शासन की योजनाओं का लाभ
रायपुर/शौर्यपथ/ मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार देंगे। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा। मुख्यमंत्री आज प्रसारित मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 22 वीं कड़ी में जनता से ‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘ विषय पर बातचीत कर रहे थे। इस विषय पर यह लोकवाणी की दूसरी कड़ी है। मुख्यमंत्री की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी का प्रसारण आज आकाशवाणी के सभी केन्द्रों, एफ.एम. रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों में किया गया।
श्री बघेल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डीएमएफ एवं मनरेगा से इसमें काफी मदद की जा सकती है। स्थानीय मौसम, मिट्टी और विशेषता को देखते हुए जिस तरह बीजापुर में मिर्ची की खेती का सपना साकार हो रहा है। वैसे ही अन्य जिलों में भी वहां की विशेषता के अनुसार बहुत से काम हो रहे हैं और इसमें बहुत बढ़ोत्तरी करने की संभावना है। जिला प्रशासन की पहल से अब जशपुर जिले में असम की तरह चाय के बागान दिखने लगे हैं। अबूझमाड़ में लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके इसके लिए गांवों का सर्वे कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपने उद्बोधन की शुरूआत करते हुए प्रदेशवासियों को नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पर्व, भाई-दूज आदि त्यौहारों की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चारों कोनो में देवी माई के बड़े-बड़े मंदिर है। दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी दाई, डोंगरगढ़ में बम्लेश्वरी दाई, रतनपुर में महामाया दाई, चंद्रपुर में चंद्रहासिनी दाई बिराजी हैं। नारी शक्ति के रूप में हम बेटियों की पूजा करते हैं और हमारे यहां कन्या भोज कराने की भी परंपरा है। उन्होंने कहा कि बेटियों और नारियों के प्रति सम्मान भाव के कारण हमारे यहां वर्ष में दो बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। बेटियों और नारियों के प्रति सम्मान का यह भाव हमें पूरी जिंदगी निभाना है। यहीं सही मायने में छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा है। हमें अपनी परंपरा और संस्कृति की शिक्षा से अपने जीवन में उतारना है। राज्य सरकार ने दाई-दीदी के अधिकार और उनके मान-सम्मान को बढ़ाने का प्रयास किया है।
नरवा योजना में 30 हजार नालों में होंगे जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नरवा योजना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि नरवा योजना के तहत प्रदेश के 30 हजार नालों में जल संरक्षण और संवर्धन का कार्य करने की शुरूआत की गई है। जिससे किसानों को पानी की चिंता से छुटकारा मिले। लोकवाणी में कोरबा जिले के ग्राम लबेद के श्री टीकाराम राठिया ने बताया था कि उनके गांव के नाले पर बने बांध से अब लगभग साढ़े तीन सौ एकड़ में किसान धान और साग-सब्जी की खेती कर रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि लबेद गांव में 25 साल पहले मिट्टी का बांध बनाकर पानी रोका गया था। जिला प्रशासन ने अच्छी पहल करते हुए 2 करोड़ 34 लाख रूपए की लागत से इस बांध का वैज्ञानिक ढंग से पुनरोद्धार और नवनिर्माण का कार्य कराया, जिससे इस बांध की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो गई है। पहले जहां 210 एकड़ में पानी पहुंच पाता था, अब 419 एकड़ तक पानी पहुंच रहा है। लबेद और गिद्धकुंवारी के लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है। इस बांध से लगी 800 मीटर की अंडर ग्राउंड नगर बनाई गई है। जिससे पानी अंतिम छोर तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि लबेद जलाशय परियोजना की सफलता से अन्य जिलों के लोगों को प्रेरणा मिलेगी।
आईआईटी रूड़की के सहयोग से नारायणपुर जिले के 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार
श्री बघेल ने कहा कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्यवाही शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। लोकवाणी में अबूझमाड़ के नारायणपुर जिले के श्री सत्यनारायण ने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में राजस्व भूमि के सर्वे के बाद गांवों के लोगों की जमीन का पट्टा बन गया है। अब वे लोग धान बेच रहे हैं। भूमि का समतलीकरण किया गया है और उन्हें राज्य शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए ग्रामवासियों की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस संबंध में कहा कि अबूझमाड़ का मतलब ऐसा वन क्षेत्र जिसे बूझा नहीं जा सकता। जब हमारी सरकार आई मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए, जहां की आशाओं को समझने जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो। उन्होंने कहा कि जब जांच कराई गई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के 237 गांव और नारायणपुर विकासखंड के 9 गांव असर्वेक्षित हैं। जिसके कारण किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक ओरछा विकासखण्ड के चार तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 गांवों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर उन्हें र्भुइंयां साफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया है तथा छह अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आईआईटी रूड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रारंभिक अभिलेख अथवा मसाहती खसरा को आधार बनाकर कब्जेदार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाए। ओरछा विकासखण्ड से 1 हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से 1 हजार 842 ग्रामीणों ने विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन दिए हैं। इन आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है।
जशपुर जिले के कांसाबेल, बालाछापर और गुटरी गांव में 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार
श्री बघेल ने जशपुर जिले में चाय की खेती से ग्रामीणों को मिल रहे लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि असम की तरह अब जशपुर में भी चाय के बगान दिखने लगे हैं। इसके पीछे स्थानीय समुदाय की ताकत है। जशपुर जिले के चाय के बागान लोगों की आय का बड़ा जरिया बनेंगे। जशपुर विकासखण्ड के सारूडीह गांव मंे चाय की खेती हो रही है। लोकवाणी में जशपुर निवासी श्री अशोक तिर्की ने मुख्यमंत्री से जानना चाहा कि जशपुर में चाय की खेती सफल हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि संयुक्त वन प्रबंधन समिति सारूडीह के अंतर्गत स्व-सहायता समूह के अनुसूचित जनजाति के 16 परिवारों के सदस्यों से मिला जा सकता है, जिन्होंने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से 20 एकड़ क्षेत्र को चाय के बागान में बदल दिया है। यहां 20 एकड़ कृषि भूमि पर चाय का रोपण किया गया है। चाय रोपण के प्रबंधन एवं प्रसंस्करण में 2 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हैं। अब तो चाय रोपण से व्यापारिक स्तर पर ग्रीन टी एवं सी.टी.सी.टी का निर्माण किया जा रहा है। यहां निर्मित चाय की गुणवत्ता की जांच भी व्यावसायिक संस्थाओं से कराई गई है, जिसमें दोनों प्रकार की चाय को उत्तम गुणवत्ता का होना पाया गया है। इस चाय बागान में जैविक खेती को ही आधार बनाया गया है। इसके लिए हितग्राही परिवारों को उन्नत नस्ल का पशुधन भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनको अतिरिक्त लाभ हो रहा है। इसी तरह मनोरा ब्लॉक में कांसाबेल, जशपुर ब्लॉक में बालाछापर और गुटरी में भी 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार हो गए हैं।
डीएमएफ मद के सदुपयोग के चमत्कारिक नतीजे
कबीरधाम जिले के श्री बंसत यादव ने डीएमएफ मद से किए जा रहे कार्याे की सफलता के बारे में मुख्यमंत्री से जानना चाहा। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में डीएमएफ मद से शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। बाइक एम्बुलेंस तथा सुपोषण अभियान जैसे कामों में मदद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ की राशि वास्तव में उन क्षेत्रों की अमानत है, जहां खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षण, पोषण आदि गतिविधियों पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने डीएमएफ की राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए, जिससे इस राशि का उपयोग वास्तव में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के विकास में, पुनर्वास में हो सके। श्री बघेल ने कहा कि इस मद की राशि से कबीरधाम जिले में 100 से अधिक शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में द्वितीय एएनएम के रूप में 80 से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है। साथ ही डीएमएफ के माध्यम से बड़ी राशि अधोसंरचना विकास के लिए दी गई है। जिला अस्पताल को अपग्रेड किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और हेल्थ स्टाफ की नियुक्ति की गई है। वन क्षेत्रों में बाईक एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। कबीरधाम जिले में मातृत्व स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए मोटर बाइक एम्बुलेंस सेवा संचालित हो रही है। वन क्षेत्रों-जैसे दलदली, बोक्करखार, झलमला, कुकदूर, छीरपानी में इसका अच्छा असर हुआ है। इससे 2 हजार से अधिक गर्भवती माताओं को संस्थागत प्रसव कराने और उन्हें सुरक्षित घर छोड़ने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में डीएमएफ की राशि का उपयोग काफी कारगर साबित हुआ है। कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार अंडा और केला देने की शुरुआत की गई। 1 से 3 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्म भोजन दिया जा रहा है। जिले में 2019 के वजन तिहार के मुकाबले, वर्ष 2021 में कुपोषण की दर 19.56 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हो गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसी ही रिपोर्ट हर जिले से मिल रही है। जिसके कारण प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत की कमी आई है। हमें नई सोच और नए उपायों से छत्तीसगढ़ को पूर्णतः कुपोषण मुक्त राज्य बनाना है।
महिला समूहों का 13 करोड़ रूपए का कालातीत ऋण माफ
राजनांदगांव जिले के ग्राम मनगटा के प्रियंबिका स्व-सहायता समूह की सुश्री रामेश्वरी साहू ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वे स्वयं गौठान में वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण सहित विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी है। उनके गांव की 28 समूहों की 50 दीदियों ने रक्षा बंधन पर्व पर धान, बीज, गेहूं, चावल, बांस की राखियों का निर्माण किया था। ई-कॉमर्स पर लगभग दो लाख 30 हजार से अधिक राशि की 25 हजार से अधिक राखियों का देश-विदेश में ऑनलाईन व ऑफलाईन विक्रय किया गया। उन्होंने बताया कि हम लोगों द्वारा बनाई गई राखी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने अमेजान से मंगाकर आपको बांधी थी। उन्होंने कहा कि हम लोग द्वारा बनाई राखी पहनकर आपने हमारा मान-सम्मान बढ़ाया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाएं गए हैं। हमारी बहनों ने भी रोजगार मूलक कार्यों में दिलचस्पी दिखाई है। इसके साथ-साथ ही अपने गांव की सुरक्षा और कुरीतियों के खिलाफ जंग छेड़ने के साथ समूह की महिलाओं ने अनेक नवाचार किए हैं और अपने परिवार को स्वावलंबी बनाया है। तीजा-पोरा के अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा महिला कोष से लिए गए लगभग 13 करोड़ रूपए के कालातीत ऋण माफ किया गया। इससे अब वे नया ऋण ले सकेंगी। महिला कोष से महिला समूहों को दी जाने वाली राशि दो करोड़ रूपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रूपए कर दी गई है और ऋण सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया है। इससे महिला समूहों को अपने कारोबार के विस्तार में कोई समस्या नहीं होगी। राजनांदगांव जिले के महिला समूहों द्वारा बनाई गई लगभग 22 हजार 480 राखियों का विक्रय ई-कॉमर्स के माध्यम से हुआ है। वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री भी ई-कॉमर्स पर करने की व्यवस्था की गई है, इससे महिला समूहों को नया बाजार मिलेगा।
जिलों में जनसमस्या निवारण की सुविधाजनक प्रणाली विकसित करें
सूरजपुर जिले की सुश्री गुरूचंदा ठाकुर ने सूरजपुर जिले में जनसमस्याओं के निवारण के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभ किए गए जन संवाद कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी और गांव के अनेक लोगों की अनेक समस्याओं का समाधान इस नई व्यवस्था से हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि जिला स्तर पर की गई इस पहल का लाभ लोगों को मिल रहा है। आदिवासी अंचल और वन क्षेत्र होने के कारण आवागमन की दिक्कत भी है। जिसके कारण लोगों को सरकारी ऑफिस में पहुंचना कठिन होता है। सूरजपुर जिले में जन संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत कॉल सेंटर के माध्यम से जिला मुख्यालय में सभी विकासखण्ड मुख्यालयों की समस्याएं सुनी जाती हैं। फोन रिसीव किए जाते हैं और आवेदन की कापी व्हाट्सअप पर ली जाती है। ज्यादातर मामलों में 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान हो जाता है। कॉल सेंटर के माध्यम से राजस्व संबंधी सीमांकन, बटांकन, ऋण पुस्तिका, ऑनलाईन रिकार्ड आदि सारे काम हो रहे हैं। किसी को पेंशन में समस्या है, राशन कार्ड बनवाना है, नाम जुड़वाना है, सड़क, नाली, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन आदि की मांग है। पीडीएस दुकान, स्वास्थ्य केन्द्र के बारे में कुछ कहना है, जनपद में निर्माण संबंधी कार्यों के प्रस्ताव हों या भुगतान की समस्या। बिजली आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत है। ऐसे सभी मामले इस प्रणाली से हल हो रहे हैं। मुझे खुशी है कि इस व्यवस्था से संतुष्ट लोग फोन करके जानकारी भी दे रहे हैं। इसीलिए मैंने पूरे प्रदेश में जिला प्रशासन को खुली छूट दी है कि वे मौलिक तरीके से या स्थानीय जरूरतों और विशेषताओं के अनुसार जनसमस्या निवारण की अपनी प्रणाली विकसित करें। ऐसे नवाचारों का खूब स्वागत है।
बीजापुर जिले के किसान मिर्ची की खेती से प्रति एकड़ कमाएंगे डेढ़ लाख रूपए
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन उपलब्ध कराने और लोगों को आर्थिक मदद देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का लोकवाणी में उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के अनेक उपाए किए जा रहे हैं जिससे लोगों को आर्थिक मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लघु धान्य फसलें जिन्हें मिलेट्स कहा जाता है उनके उत्पादन और प्रसंस्करण की व्यवस्था, सिंचाई के लिए निःशुल्क पानी की व्यवस्था, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, पौनी-पसारी योजना जैसे अनेक कामों से गांव वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। हम हर समस्या का समाधान चाहते हैं।
बीजापुर जिले के चंदूर गांव के श्री देवर किष्टैया ने लोक वाणी में रिकॉर्ड किए गए संदेश के माध्यम से बताया कि गांव में बारहमासी रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण अनेक ग्रामीण नदी पार तेलंगाना मिर्ची के खेतों में मिर्ची तोड़ाई के लिए जाते थे, लेकिन बचत नहीं हो पाती थी। नई सरकार आने के बाद जिला प्रशासन द्वारा मिर्ची की खेती के लिए दिए गए सहयोग से अब चंदूर तथा पड़ोसी गांव कोत्तूर और तारलागुड़ा में मिर्ची की खेती की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा बीज खाद, पंप, नलकूप, ड्रिप सिस्टम, मल्चिंग, विद्युत एवं फेंसिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं निःशुल्क प्रदाय की गई है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजापुर जिले के चंदूर, तारलागुड़ा और कोत्तूर गांव में जिला प्रशासन द्वारा मिर्ची की खेती की जो पहल की गई है। इससे इन तीन गांवों में 155 एकड़ जमीन के स्वामी 78 किसान परिवारों को मिर्ची की खेती के लिए तैयार किया गया है। डीएमएफ एवं मनरेगा के माध्यम से खेतों की फेंसिंग, बीज, खाद, बोर, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग एवं विद्युत आदि प्रारंभिक व्यवस्था करके नर्सरी तैयार कर ली गई है। इस तरह जो लोग पहले मूंग की खेती करके प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपए कमाते थे, वे मिर्ची की खेती करके, एक से डेढ़ लाख रुपए तक प्रति एकड़ कमाएंगे। इसके अलावा मिर्ची तोड़ने के काम में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार, बेहतर रोजी और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे वे अपने गांव, अपने घर और अपने परिवार में रहते हुए काफी राशि बचा सकेंगे।
क्रमांक-3932/सोलंकी/केशरवानी
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एंकर
- लोकवाणी के सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार।
- साथियों, आज लोकवाणी की बाइसवीं कड़ी का प्रसारण हो रहा है। आज के प्रसारण का विषय है-‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह’ भाग-दो।
- इस विषय पर विभिन्न जिलों से हमें इतनी तथ्यात्मक जानकारी मिल रही है कि एक ही विषय पर दो कड़ियों का प्रसारण करने की योजना बनाई गई।
- विषय पूरी तरह स्पष्ट है कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समस्याओं को चिन्हित करना, उनके समाधान की तलाश करना, उन्हें लागू करना और जनता को राहत दिलाना, इन सब कामों में जिला प्रशासन की केन्द्रीय भूमिका है।
- इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी विभिन्न जिलों से आए विचारों से स्वयं रू-ब-रू होंगे, लोगों के विचार सुनेंगे और अपनी बात रखेंगे।
- हम आप सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं, जय जोहार।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- सब्बो सियान मन, दाई-दीदी, संगवारी अउ भतीजा-भतीजी मन ल, मोर डहर ले जय जोहार, जय सियाराम।
- 7 अक्टूबर ले नवरात्र सुरू हो गे हे। जम्मो मन देवी दाई के पूजापाठ म लगे हें। हमन अब्बड़ भाग मानी हरन के प्रदेस के चारो कोती देवी-दाई के बड़े-बड़े मंदिर हवय। अउ एकर आसीरवाद प्रदेस ल मिलत हे। दंतेवाड़ा म दंतेश्वरी दाई, डोंगरगढ़ म बम्लेश्वरी दाई, रतनपुर म महामाया दाई, चन्द्रपुर म चन्द्रहासिनी दाई बिराजे हे। चन्दखुरी रायपुर म कौशल्या दाई के प्राचीन मंदिर हे, जेखर पुनरोद्धार अउ विकास के काम करे गे हे। गांव-गांव, सहर-सहर म सीतला दाई अउ देवी के हर स्वरूप के मंदिर हवय। नवरात्रि म जंवारा बोय गे हे। जोत जलाए गे हे। नारी सक्ति के रूप म हमन बेटी मन के पूजा करथन अउ कन्या भोज कराए के घलो हमर परंपरा हे।
- ये अवसर म मोर अपील हे के बेटी मनके, नारी मनके सम्मान के भाव, बछर म दू बार नवरात्र म रखे के साथ ही, येला पूरा साल अउ पूरा जिनगी भर निभाना हे। इही सही मायने म छत्तीसगढ़ महतारी के सेवा हरे।
- हमर परंपरा अउ संस्कृति के सिक्षा ल सब्बो मन ल, अपन जिनगी म उतारना हे। दाई-दीदी के अधिकार अउ मान-सम्मान दे बर, समाज के बेवस्था ल हमर सरकार ह अउ मजबूत करे हे।
- नवरात्रि के बाद दसहरा तिहार आही। भगवान राम के जीत के तिहार। सत्य के जीत, न्याय के जीत के तिहार हे। अहंकार के प्रतीक रावण के अंत के तिहार हे।
- करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, भाई दूज, जम्मो तिहार के आप मन ल बधाई, अउ सुभकामना देवत हंव।
- मोर एकठन निवेदन हे, के आप मन सावधानी के साथ, कोरोना ले बचे के जम्मो सुरक्षा उपाय के साथ, मास्क पहिन के नाक, मुंह ढांक के, तिहार मनावव।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, सुराजी गांव योजना के अंतर्गत नरवा तथा गांव-गांव में उपलब्ध जल संसाधनों के बारे में जिला प्रशासन तथा स्थानीय जनता का ध्यान गया है। लोकवाणी की पिछली कड़ी में हमने दुर्ग जिले की सिपकोना नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार का किस्सा सुना था। इस बार कोरबा जिले के लबेद में बहने वाले नाले और मिट्टी के बांध के जीर्णोद्धार की बात हमारे श्रोताओं ने बताई है। आइए सुनते हैं, उनके विचार-
टीकाराम राठिया, जिला कोरबा
मुख्यमंत्री जी नमस्कार। मैं टीकाराम राठिया ग्राम-लबेद, जिला कोरबा से बोला थंव, आपके द्वारा हमर गांव के लबेद नाला बांध में पुराना किसान मन गांव के सियान मन, बांधे रिहिन हेे जेकर मरम्मत कार्य माने आपके शासन के माध्यम से होइसे ओमा गांव के किसान मन ला बहुत अच्छा पानी मिलत हे, जिंदा नाला है तो दो फसली खेती होथे मुख्यमंत्री महोदय जी, आपके सहयोग से जो हमर इहां के बांध बने हे, रकबा करीब-करीब साढ़े तीन सौ एकड़ में खेती होथे धान के अउ साग-भाजी के खेती होथे अउ किसान मन बहुत खुसहाल हे, किसान मन आप मन ला बहुत धन्यवाद देथे तो मुख्यमंत्री महोदय जी, आप ला नमस्कार हे, जय जोहार हे, जय छत्तीसगढ़ हे।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- टीकाराम जी, जय जोहार।
- 25 साल पहले जब कोरबा विकासखण्ड के लबेद गांव में मिट्टी का बांध बनाकर पानी रोका गया था, उस समय जिन लोगों ने इस स्थान को चिन्हित किया था, सबसे पहले मैं उनको साधुवाद देता हूं।
- उनकी सोच को आगे बढ़ाने का काम हमारी सरकार ने किया है। मैं कोरबा जिला प्रशासन को भी साधुवाद देता हूं कि उन्होंने इस मिट््टी के बांध के स्ट्रक्चर को ठीक किया, बांध पर वेस्टवीयर, स्लूज गेट लगाए और नहर प्रणाली को भी ठीक किया।
- 2 करोड़ 34 लाख रुपए की लागत से पुनरोद्धार और नवनिर्माण का कार्य कराया, जिसके कारण इस प्रणाली की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो गई। पहले जहां 210 एकड़ में पानी पहुंच पाता था वहीं अब 419 एकड़ तक पानी पहुंच रहा है।
- लबेद और गिद्धकुंवारी गांव के लोगों को इसका लाभ मिलने लगा है और सबसे खास बात यह है कि इस परियोजना के लिए न तो किसी किसान की जमीन ली गई और न ही वन भूमि से पेड़ काटे गए। 800 मीटर की अण्डरग्राउंड नहर बनाई गई। इस सुधार कार्य के कारण अब बांध और नहर का पानी बरबाद नहीं हो रहा है बल्कि अंतिम छोर तक पहुंच रहा है। इससे 419 एकड़ में किसानों को रबी और खरीफ दोनों मौसमों की फसल मिलने लगी है।
- वहीं वैज्ञानिक ढंग से जीर्णाेद्धार कार्य होने के कारण किसानों को नहरों के रखरखाव और व्यर्थ पानी बहने की चिंता से भी छुटकारा मिल गया। हमारी नरवा योजना का यही लाभ है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 30 हजार नालों को तकनीकी रूप से सुधारना है। लबेद जलाशय परियोजना की सफलता अन्य जिलों और गांवों में भी प्रेरणा का माध्यम बनेगी।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, अबूझमाड़ को लेकर बहुत सी बातें हम लंबे समय से सुनते आए हैं। लेकिन इसके तकनीकी पहलुओं पर हमारा ध्यान तब गया, जब नारायणपुर जिले के 246 गांवों का राजस्व सर्वेक्षण कराए जाने की बात कही गई। इससे संबंधित क्षेत्र में क्या प्रतिक्रिया हुई और इसका क्या लाभ होगा यह जानने की बहुत जिज्ञासा है। आइए सुनते हैं, नारायणपुर जिले के संबंधित क्षेत्र के एक श्रोता की जुबानी।
श्री सत्यनारायण, जिला नारायणपुर (गोंडी में)
माननीय मुख्यमंत्री जी, जय जोहार। मेरा नाम सत्य नारायण उसेण्डी है। मैं ग्राम कुरूशनार, जिला नारायणपुर का निवासी हूं। हम लोग पहले अपनी जिंदगी में रमे रहते थे और हमको सुख-दुःख का कोई मालूम नहीं रहता था, न ही समझ में आता था, लेकिन अब माननीय मुख्यमंत्री जी भूपेश बघेल की सरकार आने के बाद हमारे सर्वेक्षण की बात कही। सर्वेक्षण करने के बाद भी हमको पता नहीं चला कि हमको इससे क्या लाभ होगा ? हमको कोई जानकारी नहीं थी लेकिन सर्वे होने के बाद हम लोगों को अब पता चल रहा है कि हमारा पट्टा बन गया। पट्टे मिलने से धान खरीदी हो रही है। भूमि समतलीकरण किया जा रहा है इसके अलावा राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का भी लाभ हमें मिल रहा है। ये सब लाभ मिलने के कारण हम लोग भूपेश बघेल जी को धन्यवाद देना चाहते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- उसेण्डी जी, जय जोहार।
- अबूझमाड़ का मतलब था, ऐसा स्थान, ऐसा वन क्षेत्र, जिसे बूझा नहीं जा सका है।
- जब हम सरकार में आए तो मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए। जहां की आशाओं, आकांक्षाओं को समझने, जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो।
- राज्य के किसी अंचल के बारे में राज्य सरकार यह कहे कि वह क्षेत्र तो बूझा ही नहीं गया, इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती थी?
- मैंने जांच कराई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के कुल 237 ग्राम तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्राम अभी भी असर्वेक्षित हैं। सर्वेक्षण नहीं होने के कारण यहां के किसानों सहित विभिन्न वर्ग के लोगों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने मसाहती सर्वे कार्य को प्राथमिकता से कराने का निर्णय लिया है।
- अब तक ओरछा विकासखण्ड के 4 ग्रामों तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्रामों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर, उन्हें भुईंयां सॉफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया तथा 6 अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आई.आई.टी. रुड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है।
- हमने निर्णय लिया है कि राज्य शासन के निर्णय के अनुसार सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रारंभिक अभिलेख अथवा मसाहती खसरा को आधार मानकर कब्जेदार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाए।
- इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा विशेष शिविर लगाकर मनरेगा के तहत भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण, कृषि विभाग की राजीव गांधी किसान न्याय योजना, किसान सम्मान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना आदि का लाभ दिया जाएगा।
- उद्यानिकी विभाग के द्वारा मिनी बीज किट, नलकूप खनन, ड्रिप सिंचाई योजना, शेड नेट योजना आदि के प्रकरण भी तैयार किए जा रहे हैं। इन ग्रामों के हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवेदन लिया गया है। ओरछा विकासखण्ड से 1 हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से 1 हजार 842 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है।
- मैं कहना चाहता हूं कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्यवाही शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। हम यह कहकर अबूझमाड़ के लोगों को उनके वाजिब अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते कि अबूझमाड़ का सर्वेक्षण नहीं हुआ। जो काम इतने वर्षों तक नहीं हुआ, वह हम जल्दी से जल्दी कराके, वहां की जनता की सुख-सुविधा में भरपूर बढ़ोत्तरी करना चाहते हैं, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, आपकी प्रेरणा से प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की जलवायु और अन्य विशेषताओं के अनुसार खेती-किसानी कार्य को बल मिला है। इसके कारण यह भ्रम भी टूटा है कि छत्तीसगढ़ में धान के अलावा किसी अन्य तरह की खेती नहीं की जा सकती है। उदाहरण के लिए चाय के बागान तो परंपरागत रूप से छत्तीसगढ़ में नहीं होते थे, लेकिन अब जशपुर में चाय की खेती के बारे में जानकारी आ रही है। आइए सुनते हैं, कुछ श्रोताओं के विचार।
अशोक तिर्की, जिला जशपुर
प्रणाम। मैं अशोक तिर्की जिला जशपुर का निवासी हूं। जब से जशपुर में चाय की खेती के बारे में पता चला है तब से हमें बहुत खुशी हो रही है। मुख्यमंत्री जी, हमारा जशपुर जिला एक नए तरह के काम के लिए लोकप्रिय होने आगे बढ़ रहा है। हम जानना चाहते हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है और वास्तव में क्या जशपुर में चाय की खेती सफल होना संभव है? हम जानना चाहते हैं। मुख्यमंत्री जी।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- अशोक जी, धन्यवाद।
- बहुत अच्छी बात कही आपने। कोई भी व्यक्ति जशपुर जिले के जशपुर विकासखण्ड में सारूडीह नामक गांव में जाकर यह देख सकता है कि वहां किस तरह से चाय की खेती हो रही है।
- अब असम की तरह जशपुर जिले में भी चाय के बागान दिखने लगे हैं।
- फर्क सिर्फ इतना है कि हमारे जशपुर जिले के चाय बागान किसी कम्पनी की मिल्कियत नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्थानीय समुदाय की ताकत है।
- संयुक्त वन प्रबंधन समिति सारूडीह के अंतर्गत स्व-सहायता समूह के अनुसूचित जनजाति के 16 परिवारों के सदस्यों से मिला जा सकता है, जिन्होंने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से 20 एकड़ क्षेत्र को चाय के बागान में बदल दिया है। यहां 20 एकड़ कृषि भूमि पर चाय का रोपण किया गया है। चाय रोपण के प्रबंधन एवं प्रसंस्करण में 2 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हैं। अब तो चाय रोपण से व्यापारिक स्तर पर ग्रीन टी एवं सी.टी.सी.टी का निर्माण किया जा रहा है। यहां निर्मित चाय की गुणवत्ता की जांच भी व्यावसायिक संस्थाओं से कराई गई है, जिसमें दोनों प्रकार की चाय को उत्तम गुणवत्ता का होना पाया गया है। इस चाय बागान में जैविक खेती को ही आधार बनाया गया है। इसके लिए हितग्राही परिवारों को उन्नत नस्ल का पशुधन भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनको अतिरिक्त लाभ हो रहा है।
- मनोरा ब्लॉक में कांटाबेल, जशपुर ब्लॉक में बालाछापर और गुटरी में भी 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार हो गए हैं। इस तरह जशपुर जिले के चाय बागान लोगों की आय का बड़ा जरिया बनेंगे।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, ‘जिला खनिज न्यास’ जिसे डीएमएफ के रूप में जाना जाता है। डीएमएफ के बारे में पहले यह बताया गया था कि यह राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के पुनर्वास के काम आएगी लेकिन बाद में डीएमएफ के दुरुपयोग की कई कहानियां सामने आई थीं। आपने मुख्यमंत्री बनते ही डीएमएफ की राशि के सदुपयोग के लिए कार्ययोजना बनाई, जिसके कारण इसका उपयोग सही तरीके से होने लगा। कबीरधाम जिले में डीएमएफ की राशि के सदुपयोग से बहुत ही चमत्कारिक नतीजे आए हैं।
- आइए इस विषय पर सुनते हैं, कुछ विचार।
बसंत यादव, जिला कबीरधाम
- जय जोहार कका, मैं बसंत यादव, कवर्धा, जिला कबीरधाम निवासी हूं। कबीरधाम जिले में डीएमएफ मद से शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। बाइक एम्बुलेंस तथा सुपोषण अभियान जैसे कामों में मदद की जा रही है। यह कार्यप्रणाली कितनी सफल रही है, कृपया इसके बारे में जानकारी देने की कृपा करेंगे। धन्यवाद, मुख्यमंत्री जी।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- जय जोहार, बसंत बेटा।
- डीएमएफ की राशि वास्तव में उन क्षेत्रों की अमानत है, जहां खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षण, पोषण आदि गतिविधियों पर असर पड़ता है।
- जब मैं मुख्यमंत्री बना और मैंने इस बात की समीक्षा की। कि डीएमएफ की राशि के उपयोग के लिए क्या नियम हैं और इसका पालन किस तरह किया जा रहा है। तो मुझे बहुत निराशा हुई। मैंने यह तत्काल निर्देश दिया कि डीएमएफ की राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे इस राशि का उपयोग वास्तव में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के विकास में, पुनर्वास में हो सके।
- कबीरधाम जिले में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और शिक्षित युवाओं को सीधे रोजगार देने के लिए शाला संगवारी योजना शुरू की गई। इसके तहत 100 से अधिक शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है।
- ग्रामीण और वन क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों में द्वितीय एएनएम के रूप में 80 से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है। साथ ही डीएमएफ के माध्यम से बड़ी राशि अधोसंरचना विकास के लिए दी गई है।
- जिला अस्पताल को अपग्रेड किया जा रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और हेल्थ स्टाफ की नियुक्ति की गई है।
- बाइक एम्बुलेंस के रूप में एक बहुत ही अच्छा प्रयोग कबीरधाम जिले में किया गया है। जिले के वन क्षेत्रों में बाइक एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। जिले में मातृत्व स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए मोटर बाइक एम्बुलेंस सेवा संचालित हो रही है। वन क्षेत्रों-जैसे दलदली, बोक्करखार, झलमला, कुकदूर, छीरपानी में इसका अच्छा असर हुआ है। इससे 2 हजार से अधिक गर्भवती माताओं को संस्थागत प्रसव कराने और उन्हें सुरक्षित घर छोड़ने में मदद मिली है।
- मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में डीएमएफ की राशि का उपयोग काफी कारगर साबित हुआ है। कुपोषित बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार अंडा और केला देने की शुरुआत की गई। 1 से 3 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्रों में गर्म भोजन दिया जा रहा है।
- जिले में 2019 के वजन तिहार के मुकाबले, वर्ष 2021 में कुपोषण की दर 19.56 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हो गई है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसी ही रिपोर्ट हर जिले से मिल रही है। जिसके कारण प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या में 32 प्रतिशत की कमी आई है। हमें नई सोच और नए उपायों से छत्तीसगढ़ को पूर्णतः कुपोषण मुक्त राज्य बनाना है।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूह ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बन गए हैं। महिला स्व-सहायता समूहों ने न सिर्फ बहुत बड़े पैमाने पर महिलाओं को संगठित किया है बल्कि एक दूसरे का सहारा बनकर उन्होंने अपने आप में बड़ी शक्ति बना ली है, जिससे वे विभिन्न तरह की आजीविका के साधनों से जुड़ गई हैं। समूहों द्वारा निर्मित वस्तुओं को बाजार दिलाने के लिए नए-नए प्रयासों की जानकारी सामने आ रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म में अमेजन की चर्चा भी हुई थी। आइए सुनते हैं इस विषय पर कुछ विचार।
सुश्री रामेश्वरी साहू, जिला राजनांदगांव
- माननीय मुख्यमंत्री जी, जय बिहान। मेरा नाम रामेश्वरी साहू है। मैं राजनांदगांव जिले के ग्राम मनगटा की रहने वाली हूं। मैं प्रियंबिका स्व-सहायता समूह की सदस्य हूं। हम समूह के सदस्य गौठान में वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के साथ-साथ विभिन्न तरह की गतिविधियों से जुड़े हैं। जिला प्रशासन द्वारा हमारी आय बढ़ाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व के लिए हमारे जिले के 28 स्व-सहायता समूह की 50 दीदियों ने मिलकर प्राकृतिक सामग्री से हस्त निर्मित धान, बीज, गेहूं, चावल, बांस की राखियों का निर्माण किया। राजनांदगांव जिला प्रशासन द्वारा अन्तरराष्ट्रीय प्लेटफार्म ई-कामर्स पर राखी विक्रय के लिए सहयोग किया गया, जिससे लगभग 2 लाख 30 हजार से अधिक राशि की 25 हजार से अधिक राखियों का देश-विदेश मंे ऑनलाइन व ऑफलाइन विक्रय किया गया। इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। हमें समाचार पत्रों से जानकारी मिली है कि राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक जी ने अमेजन से ऑर्डर कर, हमारी राखी मुख्यमंत्री जी आपको बांधी थी, इससे हमें गर्व महसूस हुआ। हम लोग ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले हैं, आपने हमारे द्वारा बनाई गई राखी पहनकर हमारा मान- सम्मान बढ़ाया है, इससे हमें बहुत खुशी हुई। आपका बहुत-बहुत आभार, आपका धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- रामेश्वरी जी, आपको भी जय जोहार, जय बिहान।
- हमने छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
- मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी होती है कि हमारी बहनों ने एक ओर जहां बड़े पैमाने पर रोजगारमूलक कार्यों में दिलचस्पी दिखाई है, वहीं दूसरी ओर वे समाज सुधार के लिए भी आगे आईं हैं।
- महिला समूहों ने अपने गांव की सुरक्षा करने और कुरीतियों के खिलाफ जंग छेड़ने के साथ ही ऐसे अनेक नवाचार किए हैं, जिनसे उन्होंने अपने परिवार को स्वावलंबी बनाया है।
- गांवों के सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाकर महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे किसी से कम नहीं हैं।
- महिलाओं की इस दृढ़ इच्छा-शक्ति को देखते हुए हमने इस वर्ष तीजा, पोरा त्यौहार के अवसर पर यह घोषणा की है कि महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा महिला कोष से लिए गए कालातीत ऋण को माफ कर दिया जाएगा।
- बहुत से समूहों पर ये ऋण लंबे समय से बकाया होने के कारण इन्हें नया ऋण लेने में दिक्कत आ रही थी।
- अब हमारे नए निर्णय से महिला स्व-सहायता समूह लगभग 13 करोड़ रुपए के कालातीत ऋण के बोझ से मुक्त हो जाएंगे।
- पहले राज्य महिला कोष में महिला समूहों को देने वाले ऋण की राशि मात्र 2 करोड़ रुपए होती थी, जिससे अब बढ़ाकर 5 गुना अधिक अर्थात 10 करोड़ रुपए किया गया है।
- महिला स्व-सहायता समूहों को दिए जाने वाले ऋण की सीमा पहले मात्र 1 लाख रुपए थी, जिसे 2 गुना करते हुए 2 लाख रुपए कर दिया गया है।
- इस तरह महिला समूहों को अपना कारोबार फैलाने के लिए अब धन की कोई समस्या नहीं होगी।
- राजनांदगांव जिले में महिला स्व-सहायता समूहों के बनाए उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म ई-कामर्स पर बेचने की व्यवस्था की गई थी, जिसके कारण 22 हजार 480 राखियों का विक्रय ई-कामर्स के माध्यम से हुआ।
- इसी प्रकार गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गौठानों में बनाए जा रहे वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री भी ई-कामर्स पर बेचने की व्यवस्था की गई है।
- ऐसे प्रयासों से महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को नया बाजार मिलेगा।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, जन समस्याओं के निवारण के लिए जिला प्रशासन से एक नवाचार की जानकारी सूरजपुर जिले से भी मिली है। जनसंवाद जिला सूरजपुर की काफी चर्चा है, आइए लेते हैं, इस बारे में एक श्रोता की आवाज।
सुश्री गुरुचंदा ठाकुर, जिला सूरजपुर
- माननीय मुख्यमंत्री जी को प्रणाम करती हूं। मैं गुरुचंदा ठाकुर, ग्राम डुमरिया, जिला सूरजपुर से बोल रही हूं। जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से हमें अपनी बात प्रशासन को बताने व समस्याओं के समाधान में काफी मदद मिली है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि कॉल सेंटर में एक बार फोन करने के बाद हमारी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है और जिला प्रशासन का काम शुरू हो जाता है। पेंशन से लेकर बिजली तक, ऋण पुस्तिका से लेकर राशन तक अनेक समस्याओं का समाधान इस नई व्यवस्था से हुआ है। माननीय मुख्यमंत्री जी, ऐसे कार्यक्रमों के लिए हम आपको तहेदिल से धन्यवाद देते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- गुरुचंदा जी, आपको नमस्कार, सुदूर आदिवासी जिला सूरजपुर से आपने जो सवाल किया, इसके लिए धन्यवाद।
- आपने कॉल सेंटर से संबंधित प्रश्न किया, वह बहुत ही रोचक है।
- मुझे यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि जिला स्तर पर की गई इस पहल से लोगों को बहुत लाभ मिल रहा है। सूरजपुर जिला एक नवगठित जिला है, जो छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जिला होने के साथ ही उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश से भी जुड़ा है।
- सीमावर्ती जिला होने के कारण इसकी विशेष समस्याएं हैं और नवगठित जिला होने के कारण नए-पुराने की व्यवस्था में जो कुछ छूट गया था, वैसी समस्याएं भी हैं।
- आदिवासी अंचल, वन क्षेत्र होने के कारण आवागमन की दिक्कत भी है, जिसके कारण लोगों को सरकारी ऑफिस में पहुंचना एक समस्या है।
- हमने जनसंवाद के माध्यम से ऐसी योजना बनाई है, जिसमें जिला मुख्यालय में जिले के सभी विकासखण्ड मुख्यालयों की समस्याएं सुनी जाती हैं। जिला मुख्यालय में हर ब्लॉक के लिए एक-एक टेबल है, वहां दो-दो समन्वयक पदस्थ हैं। कॉल सेंटर के जरिए फोन रिसीव करते हैं और आवेदन की कापी वॉट्सएप से भी ली जाती है। इसके बाद समस्या के हल होते तक सारा काम जिला प्रशासन का है।
- ज्यादातर मामलों का समाधान 24 घंटे के भीतर हो जाता है। जैसा कि आपने कहा इस कॉल सेंटर के माध्यम से राजस्व संबंधी प्रकरण जैसे सीमांकन, बटांकन, ऋण पुस्तिका, ऑनलाइन रिकार्ड आदि सारे काम हो रहे हैं।
- किसी को पेंशन में समस्या है, राशन कार्ड बनवाना है, नाम जुड़वाना है, सड़क, नाली, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन आदि की मांग है। पीडीएस दुकान, स्वास्थ्य केन्द्र के बारे में कुछ कहना है, जनपद में निर्माण संबंधी कार्यों के प्रस्ताव हों या भुगतान की समस्या। बिजली आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत है। ऐसे सभी मामले इस प्रणाली से हल हो रहे हैं।
- मुझे खुशी है कि इस व्यवस्था से संतुष्ट लोग फोन करके जानकारी भी दे रहे हैं। इसीलिए मैंने पूरे प्रदेश में जिला प्रशासन को खुली छूट दी है कि वे मौलिक तरीके से या स्थानीय जरूरतों और विशेषताओं के अनुसार जनसमस्या निवारण की अपनी प्रणाली विकसित करें। ऐसे नवाचारों का खूब स्वागत है।
एंकर
- माननीय मुख्यमंत्री जी, आपकी सरकार ने पलायन की समस्या को दूर करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक मदद देने के उपाय किए हैं। जिसके कारण पलायन की दर में बहुत अंकुश लगा है। पहले जैसे बड़े पैमाने पर होने वाले पलायन की खबरें तो आनी ही बंद हो गई हैं। यह काम कैसे हुआ, इसके बहुत से उदाहरण हैं, अपने आप में काफी रोचक और महत्वपूर्ण है। आइए सुनते हैं बीजापुर में किए जा रहे प्रयास की एक बानगी।
देवर किष्टैया, जिला बीजापुर
- मुख्यमंत्री जी, जय जोहार। मैं देवर किष्टैया जिला बीजापुर के चंदूर गांव का निवासी हूं। बीजापुर में वन अंचल होने के कारण खेती और बारहमासी रोजगार के अवसर नहीं होते, इसे देखते हुए यहां पुरानी प्रथा रही है कि लोग पास ही नदी पार तेलंगाना में मिर्ची के खेतों में मिर्ची तोड़ाई का काम करने जाते थे।
- बाहर जाकर रहने के कारण हमारी कमाई का बड़ा हिस्सा वहीं खर्च हो जाता था। बचत कुछ नहीं होती थी। बीमार पड़ने पर परिवार से दूर रहने के कारण कोई मदद भी नहीं मिल पाती थी।
- इसे देखते हुए आपकी सरकार और जिला प्रशासन की पहल पर अब हमारे गांव चंदूर एवं पड़ोसी गांव कोत्तूर और तारलागुड़ा में मिर्ची की खेती की जा रही है। आपकी सरकार और जिला प्रशासन द्वारा बीज, खाद, पंप, नलकूप, ड्रिप सिस्टम, मल्ंिचग, विद्युत एवं फेंसिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं निःशुल्क प्रदाय की गई हैं। अब हम स्वयं के खेतों में मिर्ची की खेती करेंगे और पलायन से मुक्त होंगे। इससे हम किसान और गांव वाले लोग बहुत खुश हैं। मुख्यमंत्री जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।
माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब
- धन्यवाद देवर किष्टैया जी ।
- आपने बहुत बढ़िया विषय उठाया है।
- गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हमने तरह-तरह के उपाय किए हैं। खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के साथ ही, हमने ऐसे अनेक उपाय किए हैं, जिससे आप लोगों को ऐसी आर्थिक मदद मिले, जो पहले नहीं मिलती थी।
- राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लघु धान्य फसलें-जिन्हें मिलेट्स कहा जाता है, उनके उत्पादन और प्रसंस्करण की व्यवस्था, सिंचाई के लिए निःशुल्क पानी की व्यवस्था, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, पौनी-पसारी योजना जैसे अनेक कामों से गांवों वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
- लेकिन हम हर समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। जैसे ही यह बात ध्यान में आई कि बीजापुर जिले के चंदूर, तारलागुड़ा और कोत्तूर गांव के लोग मिर्ची तोड़ने और मिर्ची की खेती का काम बहुत अच्छे से करते हैं और इसमें रोजगार के लिए वे नदी पार करके दूसरे राज्य चले जाते हैं। तो बीजापुर जिला प्रशासन ने यह अध्ययन कराया कि मिर्ची की खेती हम छत्तीसगढ़ में, बस्तर में, बीजापुर में ही क्यों नहीं करा सकते ? क्योंकि मिर्ची की खेती के लिए जो जलवायु चाहिए वह तो यहां भी है।
- इस तरह इन तीन गांवों में 155 एकड़ जमीन के स्वामी 78 किसान परिवारों को तैयार किया गया।
- डीएमएफ एवं मनरेगा के माध्यम से खेतों की फेंसिंग, बीज, खाद, बोर, ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग एवं विद्युत आदि प्रारंभिक व्यवस्था करके नर्सरी तैयार कर ली गई है। इस तरह जो लोग पहले मूंग की खेती करके प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपए कमाते थे, वे मिर्ची की खेती करके, एक से डेढ़ लाख रुपए तक प्रति एकड़ कमाएंगे। इसके अलावा मिर्ची तोड़ने के काम में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार, बेहतर रोजी और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे वे अपने गांव, अपने घर और अपने परिवार में रहते हुए काफी राशि बचा सकेंगे।
- मैं बार-बार कहता हूं कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डीएमएफ एवं मनरेगा से इसमें काफी मदद की जा सकती है। स्थानीय मौसम, मिट्टी और विशेषता को देखते हुए जिस तरह बीजापुर में मिर्ची की खेती का सपना साकार हो रहा है। वैसे ही अन्य जिलों में भी वहां की विशेषता के अनुसार बहुत से काम हो रहे हैं और इसमें बहुत बढ़ोत्तरी करने की संभावना है।
- मैं चाहता हूं कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार दें। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा।
- धन्यवाद।
*विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में हुआ जागरूकता कार्यक्रम*
*रायपुर 9 अक्टूबर 2021।*
संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उनको जीवन कौशल के बारे में बताया गया । इस कार्यक्रम के माध्यम से संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों को जीवन के संघर्षों और जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के साथ साथ तनाव को कम करने के गुण भी बताए गए ।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिला नोडल अधिकारी डॉक्टर सृष्टि यदु ने बताया, ‘’ स्पर्श क्लीनिक की मनोविज्ञानी ममता गिरी गोस्वामी द्वारा संप्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों के साथ मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर चर्चा कर जीवन कौशल के बारे में बताया गया। साथ ही मन में आ रहे बदलाव से पूर्व मिलने वाले संकेतों के बारे में भी जानकारी दी गयी।
इस मौके पर ममता गिरी गोस्वामी ने कहा, “दुखी व्यक्ति व्यक्ति एकांत प्रिय होने लगता है, लोगों से कम बातचीत करता है और अपने आप में ही खोया रहता है, साथ ही वह संकेत भी देता है कि वह अपने जीवन को हानि पहुंचा सकता है। हमें इन संकेतों को समय रहते पहचाना होता है, ताकि हम उसे उचित परामर्श देकर एक नये जीवन की ओर अग्रसर कर सकें और वह आत्मघाती विचार त्याग कर अपने अमूल्य जीवन का सदुपयोग करे ।“
ममता गिरी गोस्वामी कहती है, ‘’इस अवसर पर किशोरों को जीवन कौशल के विषय में भी बताया गया कि किस प्रकार हम एक बेहतर जीवन जी सकते हैं । तनाव को कैसे कम करेंगे और आपसी मेलजोल के साथ हम कैसे अपने आसपास का वातावरण सुंदर कर सकते हैं । एक दूसरे की भावनाओं को समझने का प्रयास करें साथ ही मानसिक परिवर्तन क्या होता है मन: स्थिति का कैसे पता कर सकते हैं को भी किशोरों को बताया गया।“
ममता कहती है ‘’हमको जीवन में एक ऐसा मितानिन बनाना चाहिए जो हमारे मन में हो रही जिज्ञासाओं को शांत करें और हमें एक बेहतर जीवन जीने की कला सिखाएं, उन्होंने कहा आप सब लोग किशोर है अगर एक अच्छा जीवन जीना है तो हमको अपने जीवन में कुछ नियम बनाने होंगे वही नियम हमारे जीवन कौशल को बेहतर करेंगे ।‘’
*मनोरोगी को सरल और खुशनुमा माहौल की होती है जरूरत- डॉ.अविनाश*
*रायपुर 9 अक्टूबर 2021,* एनी (बदला हुआ नाम) को भूल जाने के साथ ही उदास रहना, खाना कम खाना, किसी कार्य में मन नहीं लगना, एकाग्रता की कमी, और नींद न आना जैसी समस्याओं से घिर गयी थी । इसके अतिरिक्त चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी काफी बढ़ गया था। इन सभी मानसिक समस्याओं के कारण एनी दो बार जीवन समाप्त करने का भी प्रयास कर चुकी थी। घर के सदस्य समझ नही पा रहे थे कि एनी को क्या हो गया है। परिवारजनों द्वारा काफी प्रयास करने के बाद भी एनी को कोई फायदा नहीं मिल रहा था।
इस बारे में एनी के पति बताते हैं, ‘’ ऐनी अच्छी गृहणी है लेकिन पिछले 1 वर्ष से उसके व्यवहार में बहुत अंतर आ गया था। हसमुख एनी अब घर के बाहर ही नहीं निकलती थी। वह उदास रहती, बातें भूल जाती है और कभी भी गुस्सा हो जाती थी। इस कारण से घर पर सभी परेशान थे। ऐसी ही एक परेशानी से जूझ रहे मेरे मित्र ने मुझे जिला अस्पताल पंडरी में स्पर्श क्लीनिक जा कर परामर्श लेने का सुझाव दिया। वहां पर स्टाफ द्वारा पूर्व में हुयी सभी घटनाओं के बारे में जानकारी मांगी गयी तत्पश्चात एनी की काउंसलिंग और उपचार शुरू किया गया जिसके परिणामस्वरूप एनी की तबियत में काफी सुधार देखने को मिला। इस तरह हमें स्पर्श क्लिनिक के माध्यम से उचित मार्गदर्शन मिल पाया।‘’
स्पर्श क्लीनिक के मनोचिकित्सक डॉ.अविनाश शुक्ला ने बताया:‘’जब एनी यहां आई तब हमने उसकी मानसिक जांच के साथ ही सुसाइड रिस्क एसेसमेंट(आत्महत्या जोखिम आकलन) भी किया। उसपर मानसिक दबाव बहुत ज्यादा था और वह लंबे समय से डिप्रेशन(अवसाद) से ग्रस्त थी। हमें साइकोसोशल इंटरवेंशन (मनोसामाजिक हस्तक्षेप) करना पड़ा। उच्च जोखिम होने के कारण रोगी के पति को पूरी प्रक्रिया से पहले ही अवगत कराया गया ताकि भविष्य में आत्मघात की कोशिश को रोका जा सके । साथ ही डिप्रेशन से उबरने के लिए एनी को दवाएं दीं गयीं और उसकी काउंसलिंग भी की गई ।‘’
निश्चित रूप से मानसिक स्वास्थ्य संपूर्ण स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है। इसमें रोगी के मन को समझना होता है और उसके अनुरूप ही व्यवहार करना होता है। मनोरोग से पीड़ित व्यक्ति को सामाजिक परिवेश में सम्मिलित रखना और उनको प्रोत्साहित करना उपचार के लिए आवश्यक होता है, डाक्टर शुक्ला ने बताया ।
स्पर्श क्लीनिक की साइकोलॉजिस्ट एवं परामर्शदाता ममता गिरी गोस्वामी कहती हैं:, ‘’ मनोरोगी को ठीक करने में परिवार का व्यवहार अनुकूल होना चाहिए। हमने जोखिम को कम करने के लिए सुरक्षित व्यवहार जैसे कार्य करने को कहा जिसमें नुकसान पहुंचाने वाली चीजों को मनोरोगी की पहुंच से दूर किया गया । सपोर्टिव परामर्श से परिवार और व्यक्ति दोनों को लाभ मिलता है। सपोर्टिव परामर्श का तात्पर्य लोगों को रोगी को खुशनुमा पलों को याद कराना और उसके मनोरंजन के साधन और उसके पसंद के विषय पर उसको केंद्रित करना अमूमन देखा गया है कि परामर्श पूर्व रोगी में एक अलग ही प्रकार की उथल-पुथल चलती है।‘’
ममता कहती है, एनी के विषय में जब उनसे विस्तार से चर्चा की तो पता चला कि उन्हें कुकिंग का बहुत ज्यादा शौक है उनकी उस पसंद को उनके परामर्श का सहारा बनाया गया| एनी को धीरे-धीरे एक सामान्य जीवन की तरफ लाने के प्रयास से अब वह ठीक हो गयी है।
एनी कहती हैं: ‘’ स्पर्श क्लिनिक आकर परामर्श मिलने से मेरे जीवन में बहुत परिवर्तन आया है। अब मुझे कुकिंग, मनोरंजन के साधन, पसंदीदा फिल्म, पसंदीदा स्थान पर घूमने के साथ साथ परिवार के साथ समय बिताने में आनंद आता है। समय रहते मै सामान्य जिंदगी की तरफ वापस आयी हूँ। उपचार के बाद मुझे अब एक नया जीवन प्राप्त हुआ है।“
Nagri। नगर के समाजसेवी सन्नी छाजेड़ ने धमतरी पुलिस विभाग के अधिकारियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि धमतरी पुलिस द्वारा लगातार चोरी के मामले हो या जुआ एवं सट्टा से जुड़े मामले, पुलिस विभाग द्वारा धमतरी एसपी के निर्देशन पर लगातार असामाजिक तत्वओं पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिसकी पूरे क्षेत्र में प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने धमतरी पुलिस विभाग को इस बात के लिए बधाई प्रेषित की है।
सहायक शिक्षक फेडरेशन ब्लॉक शाखा नगरी की ओर से सहायक शिक्षक संवेदना पुष्प राशि भेंट एवं नए विकास खंड शिक्षा अधिकारी का स्वागत सम्मान समारोह विकासखंड स्रोत समन्वयक कार्यालय के प्रशिक्षण हाल नगरी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सहायक शिक्षक फेडरेशन के मीडिया प्रभारी गजानंद सोन ने बताया कि इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छाया चित्र पर माल्यार्पण, पूजन के साथ वंदना गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों के द्वारा नए विकास खंड शिक्षा अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह का गुलाल, शाल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया। सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती माहेश्वरी ध्रुव का संगठन की ओर से साल एवं श्रीफल से सम्मानित किया गया एवं इस कार्यक्रम में स्वर्गीय श्री कोमल सोरी की धर्मपत्नी श्रीमती भूमिजा सोरी का शाल व श्रीफल के साथ सम्मानित करते हुए विकास खंड शिक्षा अधिकारी के कर कमलों से श्रीमती भूमिका सोनी जी को ₹30,000 हजार रू. का चेक प्रदान किया गया! कार्यक्रम के प्रथम वक्ता के रूप में श्रीमती ममता प्रजापति अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सहायक शिक्षक फेडरेशन के द्वारा संवेदना पुष्प राशि के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दिया गया। संगठन की ओर से शरीफ बेक मिर्जा अध्यक्ष एवं भागवत राम साहू सचिव ने सहायक शिक्षकों की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए संवेदना राशि पर संघ संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया उपाध्यक्ष प्रकाश चंद साहू एवं अंकेक्षक टिकेश्वर साहू ने संवेदना राशि व अन्य समस्याओं पर बातें रखी, गजानंद सोन मीडिया प्रभारी,प्रवक्ता ने संघ एवं संगठन को नए पेंशन सिस्टम को हटाकर पुरानी पेंशन बहाली पर ध्यान आकृष्ट कराया एवं सभी को एकजुट होकर झरने की बातें कहते हुए शोकाकुल परिवार को संवेदना व्यक्त किया गया। इसी क्रम में विकास खंड शिक्षा अधिकारी सतीश प्रकाश सिंह ने विकासखंड के अंतर्गत आने वाली समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझाने एवं निकट भविष्य में शिविर के माध्यम से सविँस बुक संधारण संबंधी जानकारी दिया गया, व शोकाकुल परिवार को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया गया ।सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती महेश्वरी ध्रुव की ओर से भी सभा को आश्वस्त किया गया कि आपके लिखित समस्याओं पर त्वरित निराकरण किया जाएगा। सोरी जी के सुपुत्र के द्वारा संविदा पुष्प राशि के माध्यम से सहयोग करने के लिए सहायक शिक्षक फेडरेशन का धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रांतीय संगठन मंत्री सुरेंद्र प्रजापति के द्वारा समस्त आगंतुको एवं समस्त सहायक शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेंद्र टांडेश संगठन मंत्री, टिकेश्वर साहू, अनिल साहू अंकेक्षक ,चंपेश्वर साहू कोषाध्यक्ष, श्री मति छनीता साहू ,राजेश सोम, देवी राम निषाद ,पुरानीक ध्रुव, टीकाराम कुंजाम, कमलेश चंद्राकर, नरेंद्र ध्रुव का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।इस कार्यक्रम में व्ही.के सरोज,रोहित देवांगन, नरेन्द्र साहू, बीरसिंग बंजारे, शैलेन्द्र चंचल चाडक्य, एवं अन्य सहायक शिक्षक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सचिव भागवत राम साहू द्वारा किया गया।
नगरी। ग्राम फरसियाँ के श्रद्धालु युवाओं की टोली मां बमलेश्वरी के दर्शन के लिए पैदल ही डोंगरगढ़ के लिए निकल पड़े। 06 अक्टूबर को प्रातः 6:00 बजे महामाई मंदिर, फरसिंया से प्रारंभ यह पदयात्रा अनुमान के अनुसार 10 अक्टूबर को, मां बमलेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ दर्शन के लिए पहुंच जाएगी। क्षेत्रवासीयों द्वारा पदयात्रा पर निकले श्रद्धालु युवक खोमेश्वर सोन फरसियां, ओमकार श्रीमाली, अक्षय नाग, शिवा शांडिल्य संबलपुर की सरहाना की जा रही है।
रायपुर/शौर्यपथ/प्रदेश में संचालित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन 28 और 29 अक्टूबर को रायपुर में किया जाएगा। राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता में पांच संभाग रायपुर, दुर्ग, बस्तर, बिलासपुर और सरगुजा के चयनित खिलाड़ी शामिल होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि खेल प्रतियोगिताएं कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए संचालित की जाए।
प्रतियोगिता पूर्व माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालक और बालिका वर्ग के लिए आयोजित होगी। पूर्व माध्यमिक स्तर पर बालक एवं बालिका वर्ग के लिए 100 मीटर, 200 मीटर की दौड़ और 100ग400 रिले रेस, कबड्डी, बैडमिंटन, शतरंज, खो-खो और सिर्फ बालिका वर्ग के लिए फुगड़ी की प्रतियोगिता होगी। इसी प्रकार उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालक और बालिका वर्ग के लिए 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर की दौड़ और 100ग400 रिले रेस, कबड्डी, बैडमिंटन, शतरंज, खो-खो, फुटबाल और व्हालीबॉल की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
आयुक्त लोक शिक्षण डॉ. कमलप्रीत सिंह ने राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता के संबंध में सभी संभागीय संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दें कि 22 अक्टूबर तक जिले की टीम बनाकर सूची संभागीय कार्यालय में प्रस्तुत करें। इसी प्रकार संभागीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन 24 से 26 अक्टूबर तक सम्पन्न कर चयन सूची लोक शिक्षण संचालनालय में प्रेषित की जाए। चयनित संभागीय दल 27 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक रायपुर में उपस्थित होना सुनिश्चित करे।
राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के सहायक संचालक क्रीडा श्री अनिल मिश्रा और सहायक जिला क्रीडा अधिकारी रायपुर श्री आई.पी. वर्मा को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
राहत आयुक्त ने कलेक्टरों को जारी किए दिशा-निर्देश
राज्य आपदा मोचन निधि से दी जाएगी अर्थिक अनुदान सहायता
रायपुर/शौर्यपथ/ राजस्व सचिव एवं राहत आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन सुश्री रीता शांडिल्य ने सभी जिला कलेक्टरों एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को कोविड-19 के कारण मृत व्यक्तियों के परिजनों, आश्रितों को राज्य आपदा विमोचन निधि से 50 हजार रूपए की आर्थिक अनुदान सहायता देने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी कलेक्टरों को कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुक्रम में भारत सरकार के गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन प्रभाग) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देश एवं परिपत्र के अनुक्रम में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक अनुदान सहायता देने के लिए समुचित कार्यवाही सुनिश्चित करें। राहत आयुक्त ने दिशा-निर्देशों के साथ उच्चतम न्यायालय के आदेशों की छायाप्रति तथा गृह मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर तथा संशोधन की छायाप्रति कलेक्टरों को भेजी है।
उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा 30 जून 2021 तथा 04 अक्टूबर 2021 को पारित आदेश में कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के परिजनों को आर्थिक अनुदान सहायता किस आधार पर दिया जाना है, इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया गया है। उक्त आदेशों की छायाप्रति तथा भारत सरकार, गृह मंत्रालय, रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा उच्चतम न्यायालय के 30 जून 2021 के निर्णय के पालन में 03 सितंबर 2021 को जारी सर्कुलर तथा तत्संबंध में 11 सितंबर 2021 में संशोधन की छायाप्रति भी जिला कलेक्टरों को पत्र के साथ भेजी गई है।
उच्चतम न्यायालय द्वारा 04 अक्टूबर 2021 को पारित निर्णय के अनुसार कोविड-19 के कारण मृत व्यक्ति के परिजन को 50 हजार रूपए अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा, जिसे आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के प्रावधान के अंतर्गत अनुग्रह भुगतान माना जाएगा तथा यह भुगतान भारत संघ, राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न परोपकारी योजनाओं के तहत इस संबंध में घोषित अथवा प्रदान की जाने वाली राशि से अतिरिक्त होगा।
उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार अनुग्रह सहायता राशि का भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि से किया जाएगा। मृतक के परिजनों को अनुग्रह सहायता राशि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा संवितरित की जाएगी। कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के परिजनों को अनुग्रह राशि दी जाएगी, जिसका जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जाएगा एवं इस संबंध में सूचना एक सप्ताह के भीतर प्रकाशित की जाएगी। ऐसी सूचना ग्राम पंचायत कार्यालय, तहसील, जनपद पंचायत कार्यालय, जिला पंचायत कार्यालय, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम कार्यालय तथा जिला कार्यालय में चस्पा कर प्रकाशित की जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन द्वारा (कोविङ-19 के कारण मृत्यु तथा तत्संबंध में प्रमाण-पत्र के साथ) आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों की अवधि में अनुग्रह सहायता राशि 50 हजार रूपए का भुगतान किया जाएगा।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा 11 सितंबर 2021 को जारी निर्देशों के अनुसार कोविड-19 से हुई मृत्यु के संबंध में मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु का कारण निर्णायक नहीं होगा तथा इस संबंध में ऐसे अन्य जांच एवं उपचार संबंधी दस्तावेज जिससे यह स्पष्ट होता है कि मृतक की मृत्यु कोविड-19 के कारण हुई है, ऐसी स्थिति में भी उसके परिजन को 50 हजार रूपए अनुग्रह राशि की पात्रता होगी। मृतक के परिजनों को 50 हजार रूपए की अनुग्रह सहायता से इस आधार पर इंकार नहीं किया जाएगा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र में मृत्यु का कारण ‘कोविड-19 के कारण मृत्यु‘ के रूप में नहीं किया गया है। मृत्यु के प्रमाणीकरण संबंधी शिकायत होने पर पीड़ित व्यक्ति जिला स्तर पर समिति से संपर्क कर सकता है। समिति में अतिरिक्त जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, विभागाध्यक्ष मेडिसिन (यदि मेडिकल कॉलेज जिले में स्थित है) और एक विषय विशेषज्ञ होंगे, जो आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण एवं सत्यापन पश्चात् कोविड-19 से मृत्यु के संबंध में अधिकारिक प्रमाण-पत्र जारी कर सकेंगे कि मृतक की मृत्यु का कारण कोविड-19 है।
सभी जिलों में इस प्रकार की समिति गठित की जाएगी तथा जिला स्तर पर उक्त समिति का पूर्ण पता और उससे संबंधित विवरण प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित एवं प्रसारित किया जाएगा। नगर निगम क्षेत्र में उसी प्रकार की एक समिति उपायुक्त नगर निगम (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य), मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष मेडिसिन (यदि मेडिकल कॉलेज स्थित है) तथा विषय-विशेषज्ञ की गठित की जाएगी तथा इस समिति का कार्यालय संबंधित नगर निगम कार्यालय होगा।
यदि समिति का निर्णय आवेदक (दावेदार) के पक्ष में नहीं है, तब इसका स्पष्ट कारण शिकायत निवारण समिति द्वारा अभिलिखित किया जाएगा। भविष्य में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु से प्रभावित परिवारों को भी अनुग्रह सहायता राशि प्रदान की जाएगी। कोविड-19 से मृत्यु के संबंध में सही कारण बताते हुए मृत्यु प्रमाण-पत्र, अधिकारिक प्रमाण-पत्र जारी करने के संबंध में 04 अक्टूबर 2021 को उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णयानुसार निर्देशित किया गया है- यदि मृतक की आरटीपीसीआर, मॉलिक्यूलर टेस्ट, आरएटी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई हो अथवा अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र में चिकित्सक द्वारा जांच के माध्यम से चिकित्सकीय रूप से कोविड-19 निर्धारित किया गया हो। परीक्षण की तारीख से कोविड-19 अथवा चिकित्सकीय रूप से कोविड-19 निर्धारित होने के 30 दिन के भीतर होने वाली मृत्यु को कोविड-19 के कारण होने वाली मृत्यु माना जाएगा, भले ही मृत्यु अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र के बाहर हुई हो। साथ-ही अस्पताल, रोगी सुविधा केन्द्र में कोविड-19 के ऐसे मामले जिनमें मरीज 30 दिनों से अधिक समय तक भर्ती रहा और बाद में उसकी मृत्यु हो गई, उन्हें भी कोविड-19 से मृत्यु माना जाएगा।
कोविड-19 के ऐसे मामले जो हल नहीं हुए हैं तथा ऐसे व्यक्तियों की मृत्यु अस्पताल अथवा घर में हुई हो और जहाँ फॉर्म-4 एवं 4 (ए) में मृत्यु के कारण का मेडिकल प्रमाण-पत्र (एमसीसीडी) पंजीकरण प्राधिकारी को जारी किया गया हो, उसे कोविड-19 से मृत्यु के रूप में माना जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु के कारण पर ध्यान दिए बिना यदि मृतक के परिवार का सदस्य उपरोक्त में दर्शित पात्रता मानदण्डों को पूरा करता है, तब उसे अनुग्रह सहायता राशि दी जाएगी। सभी संबंधित अस्पतालों द्वारा जहाँ रोगी को भर्ती कराया गया था तथा उपचार दिया गया था, मृतक के परिवार के सदस्य को उसके द्वारा मांगे जाने पर उपचार संबंधी सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। अस्पताल द्वारा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में शिकायत निवारण समिति द्वारा संबंधित अस्पताल से मरीज के उपचार से संबंधित ऐसे दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे, जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि मृतक के मृत्यु का कारण कोविङ-19 है।
कोविङ-19 पॉजिटिव पाए जाने के 30 दिनों के भीतर यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। उस स्थिति में भी परिवार के सदस्य को 50 हजार रुपए अनुग्रह सहायता राशि की पात्रता होगी। यदि कोविड-19 से मृत व्यक्ति के परिवार के सदस्य को अनुग्रह राशि प्राप्त नहीं होने के संबंध में यदि कोई शिकायत हो, तो वह अपनी शिकायत, शिकायत निवारण समिति के समक्ष दर्ज करा सकेगा तथा शिकायत निवारण समिति मृत व्यक्ति के चिकित्सा उपचार संबंधी दस्तावेजों की जाँच कर शिकायत प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर समुचित निर्णय लेगी। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला प्रशासन तथा शिकायत निवारण समिति को तकनीकी जटिलताओं को छोड़कर इस प्रकार कार्य करना चाहिए जिससे कोविड-19 से हुई मृत्यु के कारण प्रभावित परिवार को अनुग्रह सहायता राशि सुगमता से प्राप्त हो सके।
पहले से जारी मृत्यु प्रमाण-पत्र के मामले में यदि मृतक के परिवार का कोई भी सदस्य मृत्यु प्रमाण-पत्र में उल्लेखित मृत्यु के कारण से व्यथित है, वह मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने वाले और, या पंजीकरण प्राधिकारी से संपर्क करेगा तथा जॉच एवं चिकित्सा उपचार संबंधी आवश्यक दस्तावेजों के परीक्षण के उपरांत सक्षम, पंजीकरण अधिकारी मृत्यु प्रमाण-पत्र को संशोधित करेगा। यदि परिवार का सदस्य पंजीकरण प्राधिकारी के आदेश से व्यथित हो, तब वह शिकायत निवारण समिति के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करेगा। संबंधित प्रकरण में शिकायत निवारण समिति द्वारा दिए गए निर्देश के अनुरूप मृत्यु प्रमाण-पत्र को संशोधित करेगा।
कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के 4 अक्टूबर 2021 के निर्णय के अनुक्रम में भारत सरकार, गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन प्रभाग) तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देश, परिपत्र के अनुक्रम में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल आर्थिक अनुदान सहायता देने हेतु समुचित कार्यवाही शीघ्र किया जाना सुनिश्चित करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
