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रायपुर । शौर्यपथ । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति रावणभाटा दूधाधारी मठ के अध्यक्ष मनोज वर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात कर दशहरा उत्सव में शामिल होने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस दौरान दशहरा उत्सव समिति के संयोजक सुशील ओझा एवं श्री सत्यनारायण नायक मौजूद थे।
रायपुर । शौर्यपथ । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम यहां राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में हसदेव अरण्य क्षेत्र सरगुजा से पदयात्रा कर रायपुर आए लोगों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले भी आदिवासियों के साथ खड़ी है। आज भी खड़ी है और आगे भी आदिवासियों के साथ खड़ी रहेगी।
मुख्य्मंत्री बघेल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लेमरू एलीफेंट रिजर्व के लिए 452 वर्ग किलोमीटर का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1995 वर्ग किलोमीटर करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि 1995 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में उस क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक के एरिया आ गए हैं। लेमरू एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर से कम नहीं होगा। हसदेव अरण्य क्षेत्र के लोगों से मिली सभी शिकायतों का जल्द परीक्षण कराया जाएगा।
वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने हसदेव अरण्य क्षेत्र से आए लोगों को बताया कि हाथी प्रोजेक्ट के अंतर्गत सेमरसोत, बादलखोल, तमोर पिंगला, अभ्यारण बनाए गए हैं। इसके अलावा लेमरू हाथी रिजर्व भी बनाया जाना है। पिछली सरकार ने वर्ष लेमरू हाथी रिजर्व के लिए 2007 में 452 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र तय किया था। वर्ष 2007 से 2018 तक इस पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। दिसम्बर 2018 में नई सरकार के गठन के बाद लेमरू एलीफेंट रिजर्व के लिए पुनः सर्वे कराया गया। एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्र 452 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1995 वर्ग किलोमीटर किया गया। इस पर मंत्रीमंडल की सैद्धांतिक सहमति भी बनी। उन्होंने कहा कि लेमरू एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्रफल 1995 वर्ग किलोमीटर करने के संबंध में भारत सरकार को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अनुमति मिलने की प्रत्याशा में प्रस्ताव भेजा गया है। वन मंत्री अकबर ने कहा कि जहां तक परसा कोल ब्लॉक के संबंध में ग्रामसभा से नियम विरूद्ध प्रस्ताव और इस कार्य से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई जांच का विषय है। जांच के बाद ही इस पर कार्रवाई करना संभव है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन भी उपस्थित थे।
टसर सिल्क और कॉटन के कपड़े से तैयार कराए गए हैं राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाले गमछे
छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र अंकित किए गए हैं गोदना चित्रकारी से
गमछे की डिजाईन में धान के कटोरे छत्तीसगढ़ को प्रदर्शित करने धान की बाली-हल जोतते किसान के साथ सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्र कला की छाप भी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ के राजकीय गमछे का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ द्वारा राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाले ये गमछे टसर सिल्क एवं कॉटन बुनकरों तथा गोदना हस्त शिल्पियों द्वारा तैयार कराए गए हैं। गमछे पर छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र गोदना चित्रकारी से अंकित किए गए हैं। गमछे की डिजाईन में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य को प्रदर्शित करने के लिए धान की बाली तथा हल जोतते किसान को प्रदर्शित किया गया है। सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्र कला की छाप गमछे के बार्डर में अंकित की गई है।
शासकीय आयोजनों में यह गमछा अतिथियों को भेंट किया जाएगा। गमछा तैयार करने के पारिश्रमिक के अलावा गमछे से होने वाली आय का 95 प्रतिशत हिस्सा बुनकरों तथा गोदना शिल्पकारों को दिया जाएगा।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव चन्द्रदेव राय, छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य उपस्थित थे।
टसर सिल्क गमछा : टसर सिल्क गमछे में बुनकर द्वारा ताने में फिलेचर सिल्क यार्न तथा बाने में डाभा टसर यार्न एवं घींचा यार्न का उपयोग किया गया है। गमछे की चौड़ाई 24 इंच तथा लंबाई 84 इंच है। इस टसर सिल्क गमछे की बुनाई सिवनी चांपा के बुनकरों द्वारा की गई है। गमछे की बुनाई के उपरांत उनमें सरगुजा की महिला गोदना शिल्पियों के द्वारा गोदना प्रिंट के माध्यम से डिजाइनों को उकेरा गया है। सिल्क गमछे में गोदना डिजाइन कार्य दो शिल्पियों द्वारा एक दिन में एक नग तैयार किया जाता है। एक सिल्क गमछे में गोदना कार्य हेतु प्रति नग 700 रूपए का पारिश्रमिक शिल्पियों को प्रदान किया जाता है। एक सिल्क गमछे का मूल्य 1,534 रूपये (जी.एस.टी. सहित) निर्धारित है। सिल्क गमछे की बुनाई मजदूरी 120 रूपए प्रति नग है।
कॉटन गमछा : कॉटन गमछे को भी राज्य के बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव के बुनकरों द्वारा हाथकरघों पर बुनाई के माध्यम से तैयार किया गया है। गमछे में ताने में 2/40 काउंट का कॉटन यार्न तथा बाने में 20 माउंट का कॉटन यार्न उपयोग किया गया है। गमछे की बुनाई के उपरांत इसमें भी राज्य की परपंरा को प्रदर्शित करते हुये डिजाइनों को स्क्रिन प्रिंट से तैयार कराया गया है। स्क्रिन प्रिंट का कार्य छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ से अनुबंधित प्रिंटिंग इकाई से कराया जा रहा है। इसकी भी चौड़ाई 24 इंच तथा लंबाई 84 इंच है। कॉटन गमछे का मूल्य 239 रूपए (जी.एस.टी. सहित) प्रति नग निर्धारित है। इन गमछों को राज्य के स्मृति चिन्ह के रूप में मान्यता दिये जाने से बुनाई के माध्यम से 300 बुनकरों को तथा 100 गोदना शिल्पियों को वर्ष भर का रोजगार प्राप्त होगा। कॉटन गमछे की बुनाई मजदूरी 60 रूपए प्रति नग है।
एसईसीएल द्वारा प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए की जाएगी प्रतिदिन 29 हजार 500 मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति
मुख्यमंत्री के आग्रह पर एसईसीएल के सीएमडी ने दी सहमति
रेल्वे द्वारा छत्तीसगढ़ को कोयले और चावल की सप्लाई के लिए आवश्यकतानुसार उपलब्ध कराए जाएंगे पर्याप्त संख्या में रेक
प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति में कोई बाधा नहीं
मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति एवं उपलब्धता की समीक्षा की
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों के लिए एसईसीएल द्वारा प्रतिदिन 29 हजार 500 मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। एसईसीएल के सीएमडी ने इसके लिए सहमति दी है। मुख्यमंत्री ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा के दौरान एसईसीएल के सीएमडी से कहा कि छत्तीसगढ़ की खदानों से कोयला निकालकर छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य राज्यों को कोयले की आपूर्ति की जाती है। चूंकि छत्तीसगढ़ से कोयले का उत्पादन किया जा रहा है, इसलिए एसईसीएल द्वारा प्राथमिकता के आधार पर छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को उनकी आवश्यकता के अनुसार अच्छी गुणवत्ता के कोयले की सप्लाई की जानी चाहिए।
बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कम्पनियों के अध्यक्ष एवं विशेष सचिव ऊर्जा अंकित आनंद, एसईसीएल के सीएमडी अंबिका प्रसाद पंडा और दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के जीएम श्री आलोक कुमार सहित राज्य विद्युत कम्पनियों के प्रबंध निदेशक उपस्थित थे। बैठक में एसईसीएल के सीएमडी ने छत्तीसगढ़ को प्रतिदिन प्रदेश के ताप विद्युत संयंत्रों की आवश्यकता के अनुरूप 29 हजार 500 मेट्रिक टन कोयले की सप्लाई की जाएगी। साथ ही अच्छी गुणवत्ता का कोयले की भी आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण कोयले की गुणवत्ता प्रभावित होती है। वर्तमान में एसईसीएल द्वारा छत्तीसगढ़ को 23 हजार 290 मेट्रिक टन कोयले की आपूर्ति की जा रही है। एसईसीएल के सीएमडी ने छत्तीसगढ़ के लिए इस मात्रा को बढ़ाकर 29 हजार 500 मेट्रिक टन करने की सहमति दी।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि रेल्वे द्वारा छत्तीसगढ़ को कोयले और चावल के लिए आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में रेल्वे रेक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जिस पर दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के जीएम ने इसके लिए सहमति दी।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कम्पनियों के अध्यक्ष एवं विशेष सचिव ऊर्जा श्री अंकित आनंद ने जानकारी दी कि वर्तमान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र कोरबा ईस्ट में 3.8 दिवस का कोयला उपलब्ध है। इसी तरह हसदेव ताप विद्युत संयंत्र में कोरबा वेस्ट में 3.2 दिवस का कोयला तथा मड़वा ताप विद्युत संयंत्र में 7 दिनों की आवश्यकता का कोयला उपलब्ध है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण मानक के अनुसार 5 दिनों की आवश्यकता से कम कोयले की उपलब्धता को क्रिटिकल स्थिति माना जाता है। अब कोयले की आपूर्ति बढ़ने से छत्तीसगढ़ के ताप विद्युत संयंत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कम्पनियों के अध्यक्ष एवं विशेष सचिव ऊर्जा श्री आनंद ने बैठक में बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश की बिजली की औसत डिमांड 3803 मेगावाट है, जिसके विरूद्ध बिजली की उपलब्धता 3810 मेगावाट है। प्रदेश में पीक समय में विद्युत की औसत डिमांड 4123 मेगावाट है, जिसके विरूद्ध बिजली कम्पनी द्वारा 4123 मेगावाट बिजली की औसत उपलब्धता बनाई रखी जा रही है। पीक समय में आवश्यकतानुसार 200 से 400 मेगावाट विद्युत क्रय लगातार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में एनटीपीसी की लारा (400 मेगावाट) एवं सीपत यूनिट (104 मेगावाट) तथा एनएसपीएल संयंत्र (25 मेगावाट) वार्षिक रखरखाव के कारण बंद है। इस कारण कुल 529 मेगावाट बिजली कम प्राप्त हो रही है। एनटीपीसी की लारा यूनिट 12 अक्टूबर से प्रारंभ होने की संभावना है। इस यूनिट के प्रारंभ होने पर एक्सचेंज से विद्युत क्रय की स्थिति लगभग नहीं रहेगी। एनटीपीसी सीपत संयंत्र 21 अक्टूबर तक प्रारंभ होने की संभावना है।
गौठानों के रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में धान कूटने, तेल पेरने की मशीनें लगेंगी: लोहारी और जूता बनाने के उद्यम भी होंगे प्रारंभ
गौठानों में रोजगारमूलक गतिविधियां प्रारंभ करने में ली जाएगी केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से मदद
गोधन न्याय योजना: मुख्यमंत्री द्वारा पशुपालकों-संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को कुल 7.36 करोड़ रूपए की राशि का अंतरण
गोबर खरीदी के एवज में पशुपालकों और संग्राहकों को 1.87 करोड़ रूपए की राशि का अंतरण
लाभांश की राशि के रूप में महिला स्व-सहायता समूहों को 2.14 तथा गौठान समितियों को 3.35 करोड़ रूपए की राशि का अंतरण
अब तक गोबर खरीदी के एवज में कुल 104.41 लाख रूपए की राशि का किया गया भुगतान
रायपुर /शौर्यपथ/
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना के अनुसार अब छत्तीसगढ़ के गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं। जल्द ही गोबर से बिजली उत्पादन कर अब छत्तीसगढ़ के गांव बिजली के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने कहा कि गोबर से बिजली बनाने की शुरूआत तीन गौठानों रायपुर, बेमेतरा और दुर्ग जिले के एक-एक गौठान से की गई है। इसका विस्तार सभी गौठानों में करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। श्री बघेल ने कहा कि अब प्रदेश में मिशन मोड में गोधन न्याय योजना का संचालन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री आज यहां अपने निवास कार्यालय में पशुपालकों, गोबर संग्राहकों को गोबर खरीदी, लाभांश के रूप में महिला स्व-सहायता समूहों तथा गौठान समितियों के खाते में कुल 7 करोड़ 36 लाख रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण करने के बाद कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, कृषि विभाग के विशेष सचिव एवं गोधन न्याय योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. एस. भारती दासन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने 16 सितम्बर से 30 सितम्बर तक खरीदे गए गोबर के एवज में पशुपालकों और गोबर संग्राहकों के खाते में एक करोड़ 87 लाख रूपए, लाभांश की राशि के रूप में महिला स्व-सहायता समूह को 2 करोड़ 14 लाख रूपए तथा गौठान समितियों को 3 करोड़ 35 लाख रूपए की राशि का अंतरण किया। गोबर खरीदी के एवज में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद अब तक 104 करोड़ 41 लाख रूपए, लाभांश राशि के रूप में महिला स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों को कुल 62 करोड़ 92 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया गया है। इसमें से महिला स्व-सहायता समूहों को अब तक 25 करोड़ 2 लाख रूपए और गौठान समितियों को 37 करोड़ 90 लाख रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। गोधन न्याय योजना से प्रदेश के 84 हजार 469 भूमिहीन लोग भी लाभान्वित हो रहे है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह अब वर्मी कम्पोस्ट बनाने तक सीमित नहीं रहेंगे। गौठानों में राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं की मदद से विभिन्न रोजगारमूलक गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी। गौठानों में धान कूटने, तेल पेराई की मशीनें लगाई जाएंगी और लोहारी तथा जूता निर्माण के उद्यम भी प्रारंभ किए जाएंगे। उन्हांेने कहा कि गौठानों में जैविक खाद बनाने, सामुदायिक बाड़ियों से सब्जियों, मशरूम का उत्पादन, मछली पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, पशु-पालन, गोबर का दीया, गमला, अगरबत्ती निर्माण और अन्य गतिविधियों में 09 हजार 211 स्व-सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इन गतिविधियों से 67 हजार से ज्यादा सदस्यों को आय हो रही है। स्व सहायता समूहों के सदस्यों ने इन गतिविधियों से अब तक 43 करोड़ 72 लाख रुपए की आय प्राप्त कर ली है। गोबर से जैविक खाद बनाने के साथ अब स्व-सहायता समूह बिजली बनाकर भी आय प्राप्त करेंगे। गौठानों में उत्पादित होने वाले बिजली सरकार द्वारा खरीदी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के मिशन मोड में संचालन के लिए गोधन न्याय मिशन का गठन किया जा रहा है। जिसके तहत गौठानों में जरूरी अधोसंरचनाओं का निर्माण तेजी से किया जाएगा। किसानों, पशुपालकों, स्व-सहायता समूहों और गौठान समितियों के आय में बढ़ोत्तरी के उपाय किए जाएंगे। गांवांे में बन रहे गौठान आने वाले समय में पूरे राज्य की ताकत बनेंगे।
कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि गोधन न्याय योजना का संचालन अब मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मिशन मोड में किया जाएगा। महिला स्व-सहायता समूह अब केवल वर्मी कम्पोस्ट बनाने तक सीमित नहीं रहेंगे। रूरल इंडस्ट्रियल पार्क योजना के तहत विभिन्न आयमूलक गतिविधियां चिन्हित कर गौठानों में प्रारंभ की जाएंगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गोधन न्याय योजना की सराहना की जा रही है। हर 15 दिन में गोबर खरीदी की राशि का भुगतान किया जा रहा है। इस योजना के संचालन के लिए कृषि विभाग को नोडल विभाग बनाया गया। इस योजना को और अधिक गति प्रदान करने के लिए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी इससे जोड़ा जाएगा।
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 250 गौठानों में कस्टम प्रोसेसिंग सेंटर प्रारंभ किए जाएंगे, इसके लिए प्रत्येक गौठान को 8 लाख रूपए की राशि दी जाएगी, इससे वहां मिनी राईस मिल सहित दाल, खाद्य तेल, मुर्रा, मसाला, तीखुर प्रोसेसिंग की इकाईयां लगाई जाएंगी। इसी तरह 2 हजार गौठान समितियों को विभिन्न उपकरणों की व्यवस्था के लिए 20-20 हजार रूपए की राशि दी जाएगी। उन्होंने बताया कि हरा चारा विकास के लिए 50 लाख रूपए की राशि रखी गई है। चयनित आदिवासी बहुल विकासखण्डों में 3-3 करोड़ रूपए की राशि से सेटेलाईट हेचरी विकसित की जाएगी। उन्हांेने बताया कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से प्रदेश के एक लाख 81 हजार से अधिक पशुपालक लाभान्वित हो रहे हैं। प्रदेश में 10 हजार 501 गौठानों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 7 हजार 460 गौठान निर्मित हो चुके हैं। गोधन न्याय योजना में अब तक 52 लाख 21 हजार क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है।
*जीवन के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने शिक्षा सर्वोपरि – बी.ई.ओ. सतीश प्रकाश सिंह*
*नगरी-धमतरी / अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Day of the Girl Child) हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है| अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नगरी में बालिका शिक्षा पर आधारित संगोष्ठी आयोजित की गयी | कार्यक्रम में विकासखंड शिक्षा अधिकारी नगरी सतीश प्रकाश सिंह ने उपस्थित बालिकाओं को शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि - सालों से चली आ रही बाल विवाह प्रथा,दहेज प्रथा और कन्या भ्रूण हत्या जैसी रुढ़िवादी प्रथाएं पूर्व में काफी प्रचलित हुआ करती थी, आधुनिक युग में बालिकाओं को उनके अधिकार देने और बालिका शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं | संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर, 2011 को इस प्रस्ताव को पारित किया और इसके लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना । इस प्रकार पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर, 2012 को मनाया गया | बी.ई.ओ. श्री सिंह ने बालिकाओ को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज सभी बालिकाएं स्कूल जाने लगी हैं, पढ़ाई पूरी कर अपने कैरियर का निर्माण कर रही है |समाज में बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है | इस अवसर पर बी.ई.ओ.सतीश प्रकाश सिंह ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मनाये जाने के उद्देश्यों को बताया तथा बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूक किया | बी.ई.ओ. सिंह ने शिक्षा के रास्ते पर चलकर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नामचीन और ऊँचा मुकाम हासिल करने वाली महिलाओं के आदर्शो को प्रस्तुत कर बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने को प्रेरित किया | कार्यक्रम में संस्था की प्राचार्य श्रीमती मीनाक्षी रामटेके, व्याख्याता अनीता सोम, व्याख्याता किरण साहू, संकुल शैक्षिक समन्वयक लोमश प्रसाद साहू, अन्य शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे |*
*कलेक्टर से किया शिकायत,कार्यवाही का भरोषा*
छत्तीशगढ़ टीचर्स असोसिएसन जिला धमतरी के जिलाध्यक्ष डॉक्टर भूषण लाल चंद्राकर ने विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी और प्राचार्य देवपुर द्वारा जांच के नाम पर फर्जीवाड़ा कर संगठन के खिलाफ षड्यंत्र करने की जांच कर ,,इन दोनों अधिकारियो पर कड़ी कार्यवाही करने का मांग किया है।
विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नगरी में वर्ष 2019 में हुए भारी आर्थिक अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत कर अधिकारियो पर कार्यवाही हेतु शिकायत की गई,,जिस पर जांच उपरांत जिलाधीश महोदय धमतरी और जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी द्वारा कार्यवाही की गई है,,,इसी कार्यवाही से सम्बंधित एक प्रकरण की जांच हेतु जिलाधीश महोदय धमतरी द्वारा, जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी को जांच हेतु निर्देशित किया गया है। जिसको संदर्भित करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी द्वारा विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी और प्राचार्य देवपुर को जांच अधिकारी नियुक्त कर ,उभय पक्षो का बयान लेकर तथ्यात्मक प्रतिवेदन देने का निर्देश जारी किया गया,,जिस पर विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी और प्राचार्य देवपुर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी के आदेश की अवहेलना कर बिना जांच किये ,मनमानी कर जांच प्रतिवेदन भेजा गया है,,इनके द्वारा किसी भी प्रकार से बयान ना लेकर दूषित मानसिकता के साथ कार्यवाही कर, प्राकृतिक न्याय के मार्गदर्शी सिद्धान्तों का किसी भी प्रकार से पालन नही किया गया है,,और गम्भीर विषय होने पर भी बिना जांच के प्रतिवेदन जमा किया गया है,,जिसके बाद जिला शिक्षा धमतरी द्वारा दिनांक 1.9.2021 को नोटिस जारी कर इस सम्बंध में पदाधिकारियों से जवाब मांगा है,,इस पर संगठन द्वारा 8.9.2021 को ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय धमतरी द्वारा मामले में 2019 में आवेदक पर की गईं कार्यवाही का कारण और किसके शिकायत पर कार्यवाही की गई है,इसकी जानकारी मांगी गयी है,,इसके बाद ही उक्त नोटिस का जवाब दिये जाने की जानकारी दी गई है,,इस हेतु समय सीमा पूर्व जानकारी के लिए निवेदन किया गया है,पर जानकारी अभी नही दिया गया है। 2014 -15 में प्रभारी विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी रहे श्री संतोष कुमार प्रजापति (वर्तमान में प्राचार्य देवपुर)के विरुद्ध अनियमितता की शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय धमतरी और मुख्यकार्यपालन अधिकारी धमतरी द्वारा जांच उपरान्त , इनके विरुद्ध गोपनीय चरित्रावली चेतावनी कार्यवाही का आदेश जारी किया गया था,,तब से आज पर्यंत इनके द्वारा संगठन और इनके पदाधिकारियों के विरुद्ध व्यक्तिगत दुर्भावना और द्वेष रखते हुए,, वर्तमान में जांच अधिकारी रहते हुए,,कूटरचना कर जांच प्रतिवेदन भेजा गया है,जो कि इनकी निष्ठा को उजागर करता है।जिस प्रकरण की जांच कर रहे हैं,उसमे आवेदक इनके कार्यकाल में स्थापना प्रभारी रहे हैं,और उस समय विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी रहते हुए गलत जानकारी और नियम बताकर अपने कार्यालय में कार्यरत कुछ कर्मचारियों को नियम विरुद्ध आर्थिक लाभ दिया गया है,,जिसमे लाखों रुपयों की शासन को आर्थिक नुकसान पहुचाया गया है,,जिसकी जांच आज पर्यंत लम्बित है और आहरण संवितरण अधिकारी होने के कारण आर्थिक अनियमितता के लिए ये जिम्मेदार है।पर आज पर्यंत कार्यवाही नही की गयीं है,और मामला के उजागर होने के भय से वर्तमान मामले को भी बिना जांच के वर्तमान विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी के साथ मिलकर फर्जीवाडा किया गया है।
जुलाई 2019 में ही संगठन द्वारा विकाशखण्ड नगरी के शिक्षकों से कई शालाओ के लघु मरम्मत कार्य हेतु आये धनराशि में से कई शालाओ के शिक्षकों से हजारों रुपये का राशि विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नगरी के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा वसूली किया गया जिस पर जिलाधीश महोदय धमतरी द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को कार्यवाही हेतु निर्देश देने पर ,जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी द्वारा श्री संतोष कुमार प्रजापति प्राचार्य देवपुर को ही जांच अधिकारी बना दिया गया,जिनके द्वारा केवल दो ही स्कूल का केश बुक का जांच एवं बयान लेकर,वसूली के आरोप को गलत बताकर ,शिक्षको के विरुद्ध प्रतिवेदन दिया गया हैं,, जबकि प्राचार्य महोदय के स्वयं के संस्था के लघु मरममत के प्रभारी शिक्षक द्वारा लिखित शिकायत संगठन को दिया गया है एवं कई अन्य शिक्षक का भी लिखित शिकायत दिया गया हैं जिसका उल्लेख करते हुए संगठन द्वारा शिकायत किया गया था,इस मामले को भी प्राचार्य द्वारा दुर्भावना और मामले को दबाने के उद्देश्य से जांच किया गया है, संगठन के पदाधिकारियों,विकाशखण्ड शिक्षा अधिकारी नगरी और कार्यालय सहित शिकायत में उल्लेखित स्कूल का जांच बयान नही किया गया,और इस प्रकार एक और दोष पूर्ण जांच कर कार्य को अंजाम दिया गया है।
इस प्रकार छत्तीशगढ़ टीचर्स असोसिएसन नगरी द्वारा किये गए शिकायत एवं संगठन संबंधित मामलों में वर्तमान प्राचार्य देवपुर को ही मामला जांच हेतु प्रेषित किया जाना भी जाँच का विषय है।छत्तीशगढ़ टीचर्स असोसिएसन विकाशखण्ड नगरी के समस्त पदाधिकारियों सहित जिला अध्यक्ष भूषण चंद्राकर ने ऐसे मामलों में कूट रचना करने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर कार्यवाही का मांग जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी से करने के लिए,, लगातार संगठन द्वारा समय लिया जा रहा है,पर उनके द्वारा इतने गंभीर मामले पर भी संगठन को समय नही दिया जा रहा है साथ ही मनमानी कार्यवाही को संरक्षण प्रदान किया जाना प्रतीत होता है,जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जांच के नियम कायदों को नही जानने वाले दूषित मानसिकता के साथ कार्य करने वाले अधिकारियों से जांच करवाकर मामला का लीपापोती करवाने का प्रयाश किया जाना निंदनीय है संगठन हमेशा निष्पक्ष न्याय का पक्षधर रहा है और न्याय व्यवस्था के लिए हर प्रकार के जांच के लिए तैयार है।अन्याय पूर्वक की गयी कार्यवाही पर संगठन द्वारा जल्द ही जिलाधीश महोदय धमतरी को ज्ञापन देकर फर्जीवाड़ा में शामिल अधिकारियों कर्मचारियों पर कार्यवाही कर निष्पक्ष जांच की मांग की गया,जिसमे पूरी सत्यता के साथ जांच कर कार्यवाही होना बताया।
*आरोपी के विरुद्ध भा.द.वि एवं पाक्सो एक्ट के तहत् की गई कार्यवाही, आरोपी गिरफ्तार*
*थाना कोतवाली पुलिस की कार्यवाही*
पुलिस अधीक्षक धमतरी श्री प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने गुम नाबालिग बालक-बालिकाओं की त्वरित पता तलाश कर दस्तयाबी पश्चात जांच के आधार पर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही करने एवं अपराधों पर अंकुश लगाने हेतु प्रभावी कार्यवाही करते हुए लंबित मामलों का निराकरण करने समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों को निर्देशित किये है।
इसी दरमियान दिनांक 26/08/2021 को प्रार्थी थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 26/08/2021 के सुबह करीबन 10:00 बजे उसकी नाबालिग पुत्री घर से निकली थी, जो वापस नहीं आई। आसपास मोहल्ले, रिश्तेदारों व सहेलियों से पता तलाश करने पर कोई पता नहीं चला। उक्त रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध धारा 363 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया ।
मामले की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक धमतरी श्री प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने अपहृत नाबालिग बालिका एवं अज्ञात आरोपी की जल्द से जल्द पतासाजी कर वैधानिक कार्यवाही करने थाना प्रभारी कोतवाली को निर्देशित किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता पॉल के मार्गदर्शन व उप पुलिस अधीक्षक श्री अरुण जोशी के पर्यवेक्षण में अपहृत नाबालिग बालिका व आरोपी की त्वरित पता तलाश की जा रही थी।
इसी दौरान मुखबिर सूचना पर तत्काल घेराबंदी कर बस स्टैंड धमतरी से अपहृत नाबालिग बालिका को लोकेश साहू के कब्जे से विधिवत बरामद कर पूछताछ किया गया। अपहृता अपने कथन में बतायी कि लोकेश साहू ने उसे शादी करने का प्रलोभन देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ भगाकर रायपुर ईंटा भट्टी ले गया और पत्नी बनाकर रखूंगा कहकर दबाव डालते हुए उसके मना करने के बावजूद जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाकर दुष्कर्म किया। विवेचना क्रम में पीड़ित नाबालिग बालिका के कथन, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट एवं उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर मामले में धारा 363, 376 भादवि एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 6 जोड़ते हुए *आरोपी लोकेश साहू पिता संतोष साहू उम्र 23 वर्ष साकिन बाल्मीकि चौक जालमपुर वार्ड धमतरी जिला धमतरी* को विधिवत गिरफ्तार कर वैधानिक कार्यवाही की गई है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक रिमांड हेतु माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
बालोद /शौर्यपथ/
कलेक्टर जनमेजय महोबे ने डौण्डीलोहारा के जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक ठाकुर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 13 अक्टूबर 2021 तक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कारण बताओ सूचना पत्र में कहा है कि ग्राम पंचायत भेड़ी-लो के सरपंच द्वारा पत्र के माध्यम से ग्राम पंचायत में सचिव के स्थानांतरण करने की मांग की गई थी, जिसे आपके द्वारा बिना परीक्षण किए अनुचित भाषाशैली के साथ इस कार्यालय को प्रेषित किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय रायपुर द्वारा पंचायतकर्मियों की सेवा-शर्तों हेतु जारी मार्गदर्शिका के कण्डिका-8 पर स्थानांतरण के संबंध में जारी निर्देश के विपरीत आपके द्वारा ग्राम पंचायत भेड़ी-लो के ग्राम पंचायत सचिव श्रीमती हेमलता मानिकपुरी को जनपद पंचायत डौण्डीलोहारा में संलग्न किया गया है। इसी प्रकार कार्यालय जिला पंचायत बालोद के पत्र द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बालोद को ग्राम पंचायत सचिवों के अवकाश एवं सेवा-निवृत्त के परिप्रेक्ष्य में जारी निर्देश का अनुचित उपयोग कर आपके द्वारा अनाधिकृत रूप से ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण किया गया है। आपका उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत है। अतएव उपरोक्त के संबंध में कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर लिखित स्पष्टीकरण 13 अक्टूबर 2021 तक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे। समयावधि में अथवा अनुपस्थिति की दशा में अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
