October 23, 2026
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    रायपुर

    रायपुर (6129)

    डब्ल्यूआरएस मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन; कहा—प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आचरण में उतारना ही सच्ची आराधना
    छत्तीसगढ़ से प्रभु श्रीराम का गहरा आत्मीय नाता, 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत किए अयोध्या धाम में दर्शन

       रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विजयादशमी केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश है। प्रभु श्रीराम का जीवन सिखाता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। उन्होंने कहा कि सही और गलत के बीच चुनाव करते समय सदैव सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री श्री साय राजधानी के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हजारों लोगों की उपस्थिति में धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया तथा प्रदेशवासियों को सुख, शांति और समृद्धि की शुभकामनाएं दीं।

    छत्तीसगढ़ से प्रभु श्रीराम का गहरा संबंध

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने माता सीता और लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में समय बिताया था। यही कारण है कि प्रदेश की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में प्रभु श्रीराम का विशेष स्थान है।

    उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, धैर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। रावण के पास अपार सैन्य शक्ति थी, लेकिन प्रभु श्रीराम ने सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों के बल पर विजय प्राप्त की। यह प्रसंग बताता है कि बाहुबल और संसाधनों से बड़ी शक्ति नैतिकता और सत्य की होती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी अधर्म का साथ देने के परिणामों का संदेश देता है। प्रभु श्रीराम की सच्ची आराधना तभी सार्थक है, जब हम उनके आदर्शों को आचरण में उतारें, कमजोरों की सहायता करें और अन्याय के विरुद्ध खड़े हों।

    आतंकवाद और माओवाद के विरुद्ध दृढ़ संकल्प

    मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। बस्तर सहित प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास, खुशहाली और विकास की रोशनी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

    श्रीरामलला दर्शन योजना से 49 हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और लंबे संकल्प की ऐतिहासिक सिद्धि थी। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना शुरू की है। इसके माध्यम से अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन का अवसर मिला है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

    समरस और समृद्ध छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपनाते हुए सत्य, न्याय, करुणा, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही शांतिपूर्ण, सुरक्षित, समरस और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है।

    कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा, जयंती भाई पटेल, सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

    गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के एसएनसीयू में चिकित्सकों ने बचाई जान, ऑक्सीजन सपोर्ट और रक्त चढ़ाकर किया उपचार

      रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने गंभीर अवस्था में भर्ती महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को लगभग दो माह के उपचार और विशेष देखभाल से नया जीवन दिया। समय से पहले जन्मे इस शिशु को सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी। लगातार चिकित्सकीय निगरानी, आवश्यक उपचार और पोषण प्रबंधन से उसका वजन बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 8 अक्टूबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल ग्राम चुकतीपानी निवासी श्रीमती गोमती के नवजात को जन्म के बाद गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया था। शिशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। सांस लेने में परेशानी के कारण उसे लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, जबकि गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके साथ ही शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, नियमित फीडिंग और कंगारू मदर केयर (केएमसी) के माध्यम से पोषण एवं विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई।

    लगभग दो माह तक चले उपचार के दौरान शिशु के स्वास्थ्य और वजन की लगातार निगरानी की गई। चिकित्सकीय टीम के प्रयासों से उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और वजन 900 ग्राम से बढ़कर 1.35 किलोग्राम पहुंच गया। इस सफलता से परिवार को बड़ी राहत मिली। दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के एक परिवार को जिला अस्पताल में ही गंभीर नवजात के उपचार की सुविधा मिलना शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता को भी रेखांकित करता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। जिला अस्पतालों में संचालित एसएनसीयू जैसी इकाइयां समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजातों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस मामले में भी विशेष देखभाल, नियमित निगरानी और समय पर उपचार से सकारात्मक परिणाम सामने आए।

    नवजात के उपचार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन तथा सिविल सर्जन डॉ. देवेन्द्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे शिशु का स्वस्थ होकर घर लौटना चिकित्सकीय टीम के समर्पण और नवजात देखभाल सेवाओं के महत्व का प्रेरक उदाहरण है।

    रायपुर / शौर्यपथ / राजधानी रायपुर में एक बार फिर धार्मिक आयोजन को लेकर प्रशासन और संतों के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। माँ मातंगी दिव्यधाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमासाईं महाराज ने रायपुर जिला प्रशासन पर धार्मिक आयोजनों की अनुमति देने में भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। महाराज ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनके प्रस्तावित 'दिव्य दरबार' को अनुमति नहीं मिली, तो वे अन्न त्याग कर हजारों भक्तों के साथ उसी स्थान पर धरने पर बैठ जाएंगे।

    24 अक्टूबर से होना है पांच दिवसीय आयोजन

    डॉ. प्रेमासाईं महाराज के तत्वावधान में आगामी 24 से 28 अक्टूबर तक रायपुर के गुढ़ियारी स्थित अवधपुरी मैदान में पांच दिवसीय भव्य 'दिव्य दरबार' का आयोजन प्रस्तावित है। इस बड़े धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से लगभग 35 से 40 हजार श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन की सभी तैयारियां की जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक हरी झंडी नहीं मिली है।

    'बागेश्वर धाम को अनुमति तो स्थानीय संतों से दूरी क्यों?'

    प्रशासनिक रवैये से नाराज महाराज ने सीधे तौर पर भेदभाव का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सवाल किया कि जब बागेश्वर धाम जैसे बड़े आयोजनों को रायपुर में दिव्य दरबार और प्रेत दरबार लगाने की तुरंत अनुमति मिल जाती है, तो स्थानीय संतों के आयोजनों को क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने साफ किया कि उनका यह विरोध किसी सरकार या मुख्यमंत्री से नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और दोहरे मापदंड के खिलाफ है।

    मांग पूरी न होने पर अनशन की चेतावनी

    महाराज ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे। अगर तय समय तक प्रशासन आयोजन की अनुमति जारी नहीं करता है, तो वे अपने हजारों अनुयायियों के साथ अवधपुरी मैदान में ही अन्न का त्याग कर अनशन (धरने) पर बैठ जाएंगे। इस चेतावनी के बाद अब राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

    रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन को लेकर गठित राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय समिति ने पुराने सर्किट हाउस में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों के साथ परामर्श बैठक की। समिति के सदस्यों ने विवाह-तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर प्रतिनिधियों के सुझाव सुने। इस दौरान पीपीटी के माध्यम से संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

    बैठक में रानी दुर्गावती जागृति महिला मंडल की प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज की रूढ़िगत परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासी समुदाय को समान नागरिक संहिता के दायरे से पृथक रखने का अनुरोध किया।

    दूसरे सत्र में मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, गोंडवाना और सतनामी समाज के प्रतिनिधियों ने विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन, संपत्ति, वसीयत और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों पर अपने विचार रखे।

    समिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और श्रीमती ज्योतिरानी सिंह शामिल हैं। समिति सदस्यों ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि प्राप्त विचारों और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण कर समावेशी, संतुलित और निष्पक्ष मसौदा तैयार करने की दिशा में विचार किया जाएगा।

    खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    रायपुर, / छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककलाओं जैसे पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की इस सांस्कृतिक थाती को मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से देश-विदेश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय का 70वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक योगदान का परिणाम बताया।

    राज्यपाल श्री डेका ने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को मानसिक शांति प्रदान करता है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प समाज के इतिहास व संस्कृति को अभिव्यक्त करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि कला के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए प्रतिभा के साथ-साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और समर्पण बहुत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने कला को आजीविका और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी बल दिया।

    सांसद श्री संतोष पांडे ने राजपरिवार के योगदान को बताया अनुकरणीय

    सांसद श्री संतोष पांडे ने कहा कि राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती द्वारा अपनी पुत्री की स्मृति में दिया गया दान अद्वितीय और अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जमीन दान करना भी कठिन है, लेकिन राजपरिवार की दूरदर्शी सोच ने खैरागढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने शिक्षा, कला-कौशल, परिश्रम और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करने का संदेश भी दिया।

    कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने दिया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में प्राध्यापक, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में चार नगर निगमों और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच एग्रीमेंट; हर बस में होंगे 6 कैमरे, मोबाइल एप से मिलेगी रूट की जानकारी

    बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में शहरी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में रविवार को चारों नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। विभाग नवंबर 2026 से बिलासपुर और भिलाई में शुरुआती तौर पर 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

    रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में 50-50 बसें

    योजना के प्रथम चरण में रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 और कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य है। इससे चारों शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नागरिकों को मिलेगा आधुनिक परिवहन का विकल्प : अरुण साव

    नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन व्यवस्था को लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाना आवश्यक है।

    हर बस में छह कैमरे, मोबाइल एप से मिलेगी रूट की जानकारी

    यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ई-बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। मोबाइल एप के माध्यम से बसों के रूट की जानकारी उपलब्ध कराने की भी योजना है। यात्रियों के लिए मोबाइल स्कैनर से भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा का भी उल्लेख किया गया है।

    ई-बस सेवा के संचालन के लिए चार्जिंग स्टेशन, डिपो और रखरखाव केंद्र जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन सुविधाओं के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की भी उम्मीद है।

    समय-सीमा में पूरी हों तैयारियां : सोनमणि बोरा

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने योजना के उद्देश्यों और संचालन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण जरूरी है। इसके लिए चार्जिंग व्यवस्था, डिपो, बस स्टॉप और रखरखाव केंद्रों का विकास, विभागों के बीच समन्वय और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करना महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज गांधी उपस्थित थे।

    महापौरों और निगम आयुक्तों ने भी लिया हिस्सा

    कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में रायपुर की महापौर मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और बीरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन शामिल हुए।

    इसके अलावा रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा, बिलासपुर के आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, कोरबा के आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, भिलाई की आयुक्त सुरुचि सिंह, दुर्ग की आयुक्त लीना कोसम, रिसाली की आयुक्त मोनिका वर्मा और भिलाई-चरोदा के आयुक्त दशरथ सिंह राजपूत भी मौजूद रहे।

    बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन

    कार्यक्रम के दौरान कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ चारों शहरों में संचालित होने वाली ई-बसों के रंग और कट-आउट का विमोचन किया गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता सुनील सिंह और सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील अग्रहरि सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
    नवंबर में बिलासपुर और भिलाई से प्रस्तावित शुरुआत के साथ अब इन शहरों में ई-बस सेवा के संचालन और जरूरी आधारभूत सुविधाओं को समय पर तैयार करना महत्वपूर्ण होगा। योजना का उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ नागरिकों को सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में चार नगर निगमों और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

    durg / छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत इन शहरों में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। नवंबर 2026 से भिलाई और बिलासपुर में शुरुआती तौर पर 20-20 ई-बसों का संचालन शुरू करने की योजना है। इस संबंध में रविवार को उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में चारों नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।

    रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में 50-50 बसें

    योजना के प्रथम चरण में रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 और कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग के अनुसार, नवंबर 2026 तक भिलाई और बिलासपुर में प्रतीकात्मक रूप से 20-20 बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी है। इससे शहरों में सार्वजनिक परिवहन के नए विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    प्रदूषण और ईंधन की खपत घटाने पर जोर

    नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित एग्रीमेंट हस्ताक्षर कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

    अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों तक बेहतर कनेक्टिविटी का लक्ष्य

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना जरूरी है। ई-बस सेवा से नागरिकों को बेहतर परिवहन विकल्प मिलेंगे और शहरों को आधुनिक बनाने में सहायता मिलेगी।

    उन्होंने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।

    अब संचालन शुरू होने का इंतजार

    चारों शहरों में ई-बस सेवा के लिए एग्रीमेंट होने के बाद अब निर्धारित समयसीमा में बसों का संचालन शुरू करना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। भिलाई और बिलासपुर में नवंबर से शुरुआती 20-20 बसें चलाने की तैयारी है, जबकि रायपुर और कोरबा में भी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार सेवा शुरू करने की दिशा में काम किया जाना है। ई-बसों के संचालन से शहरी परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने और नागरिकों को सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराने की उम्मीद है।

     

    रायपुर । छत्तीसगढ़ के जीएसटी प्रशासन में किए जा रहे तकनीकी नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। राज्य को जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व भी मिला है। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी की पहल से मिली इस जिम्मेदारी के जरिए प्रदेश के व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर मिलेगा।

    नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया। बैठक के दौरान राज्य में कर प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए अपनाए जा रहे नवाचारों को साझा किया गया। राजस्व सचिव ने इन पहलों पर तैयार प्रस्तुतीकरण केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष रखा। इसे देश के अन्य राज्यों के साथ भी साझा किया गया, ताकि वे छत्तीसगढ़ के अनुभवों से सीख लेकर अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी सुधार अपना सकें।

    मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स से मजबूत होगा कर प्रशासन

    छत्तीसगढ़ में जीएसटी प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए मशीन लर्निंग, ऑटोमेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनका उद्देश्य कर संबंधी आंकड़ों का बेहतर विश्लेषण, कर अनुपालन में सुधार और संभावित अनियमितताओं की समय पर पहचान करना है।

    तकनीक आधारित प्रक्रियाओं से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के साथ करदाताओं को अधिक सरल एवं सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य के इन नवाचारों को इससे पहले राष्ट्रीय समन्वय समिति की छठी बैठक में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

    12 प्रमुख राज्यों में छत्तीसगढ़ को प्रतिनिधित्व

    जीएसटी परिषद की स्टैंडिंग कमेटी फॉर ऑफिसर्स (लॉ कमेटी) में छत्तीसगढ़ को शामिल किया जाना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देश के 12 प्रमुख राज्यों में स्थान मिलने से जीएसटी कानूनों, नियमों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श में राज्य की भागीदारी मजबूत होगी।

    यह समिति कर कानूनों की व्याख्या, नियमों के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों और व्यापार-उद्योग से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण मंच है। यहां विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभवों और सुझावों को साझा करते हैं।

    व्यापारियों और उद्योगों की समस्याएं पहुंचेंगी राष्ट्रीय मंच तक

    लॉ कमेटी में प्रतिनिधित्व मिलने से छत्तीसगढ़ के व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, कर सलाहकारों और व्यापारिक संस्थाओं की समस्याओं एवं सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

    प्रदेश में जीएसटी के क्रियान्वयन के दौरान सामने आने वाली प्रक्रियागत जटिलताओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। इन विषयों पर विचार-विमर्श के बाद आवश्यक सुझाव जीएसटी परिषद तक पहुंचाए जा सकेंगे। इससे कर व्यवस्था को अधिक सरल, स्पष्ट और व्यापार अनुकूल बनाने के प्रयासों में छत्तीसगढ़ की भूमिका बढ़ेगी।

    तकनीक और व्यापार सुगमता पर सरकार का जोर

    वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार कर प्रशासन के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचारों और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। डेटा विश्लेषण, विभागीय निगरानी और कर अनुपालन की व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    जीएसटी प्रशासन में तकनीकी नवाचारों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना और लॉ कमेटी में प्रतिनिधित्व, छत्तीसगढ़ के लिए दो महत्वपूर्ण अवसर हैं। इनके माध्यम से राज्य अपने अनुभवों को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के साथ व्यापारियों और उद्योगों की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर उठाकर जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुविधाजनक बनाने में योगदान दे सकेगा।

    प्रदेश के 38 स्थानों पर विकसित होंगे ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’, तेलीबांधा भी सूची में शामिल; दुर्ग में महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त होगी जारी

    रायपुर, । राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है और न ही उसके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ होगी। प्रदेश के 38 स्थानों को ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें तेलीबांधा चौक भी शामिल है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रहेगा। इसे केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस विषय में किसी तरह का भ्रम न रखें।

    ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत होंगे कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है।

    दुर्ग को विकास कार्यों की सौगात, महतारी वंदन की 32वीं किस्त जारी होगी

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि वे दुर्ग में आयोजित ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त जारी की जाएगी। उन्होंने प्रदेश की सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस अवसर पर दुर्ग जिले को विभिन्न विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों की सौगात भी मिलेगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना के साथ छत्तीसगढ़ के प्रत्येक क्षेत्र और हर वर्ग के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

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