January 31, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

 

भिलाईनगर।
   शासन की मंशा के अनुरूप नागरिकों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई के सभागार कक्ष में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास आबंटन हेतु लॉटरी का आयोजन किया गया। लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 60 पात्र हितग्राहियों को आवास आबंटित कर लाभान्वित किया गया

लॉटरी कार्यक्रम में वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन, महापौर श्री नीरज पाल, सभापति श्री गिरवर बंटी साहू, आयुक्त श्री राजीव कुमार पाण्डेय, नेता प्रतिपक्ष श्री भोजराज सिन्हा, पार्षद श्री हरिओम तिवारी तथा अधीक्षण अभियंता सह नोडल अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों के नाम निकालकर आवास आबंटन किया गया।

नगर निगम क्षेत्र में निवास करने वाले ऐसे नागरिक जिनके पास देश के किसी भी भाग में स्वयं का पक्का मकान नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए पात्र नागरिकों द्वारा नगर निगम भिलाई के आवास शाखा में नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किए जाते हैं। प्राप्त आवेदनों की सक्षम स्तर पर स्वीकृति उपरांत आवास आबंटन हेतु लॉटरी आयोजित की जाती है।

आज आयोजित लॉटरी में जिन हितग्राहियों के नाम निकले, उन्हें लॉटरी पर्ची में अंकित ब्लॉक एवं मकान क्रमांक के अनुसार आवास आबंटित किया गया। आवास प्राप्त होने पर सभी हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन एवं नगर निगम प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

लॉटरी प्रक्रिया के दौरान उप अभियंता श्री दीपक देवांगन, आवास प्रभारी श्री विद्याधर देवांगन, सीएलटीसी श्रीमती किरण चतुर्वेदी, श्री जी. मोहन राव सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

दुर्ग / रायपुर।

    छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का कुख्यात गुटखा कारोबारी गुरमुख जुमनानी, जिसे प्रदेश में ‘गुटखा किंग’ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर कानून के शिकंजे में है। स्टेट जीएसटी (SGST) विभाग ने जनवरी 2026 की ताज़ा कार्रवाई में उस पर 317 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड पेनल्टी लगाई है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में जीएसटी चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई मानी जा रही है।

मीठी सुपारी की आड़ में जहर का कारोबार

जांच में सामने आया है कि गुरमुख जुमनानी ने ‘सितार’ ब्रांड के नाम से प्रतिबंधित तंबाकू युक्त गुटखे का बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और वितरण किया। सरकारी रिकॉर्ड में उन्होंने स्वयं को ‘मीठी सुपारी’ का कारोबारी दर्शाया, जिस पर मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि वास्तव में वे गुटखा बना रहे थे, जिस पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 204 प्रतिशत तक सेस लागू होता है। इसी टैक्स हेराफेरी के जरिए करोड़ों की चोरी को अंजाम दिया गया।

900 करोड़ से अधिक का अवैध कारोबार

SGST विभाग की जांच में यह भी उजागर हुआ है कि जुमनानी प्रतिदिन लगभग 25 लाख रुपये का अवैध गुटखा बाजार में खपा रहे थे। अनुमान है कि पिछले पांच वर्षों में करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक का गैरकानूनी कारोबार किया गया। इस पूरे नेटवर्क को ‘कोमल ट्रेडर्स’ जैसी फर्मों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।

फरारी, गिरफ्तारी और फैक्ट्री नेटवर्क

जून 2025 में जब जीएसटी विभाग ने उनकी अवैध फैक्ट्रियों पर छापा मारा, तब जुमनानी फरार हो गया था। करीब दो महीने की तलाश के बाद सितंबर 2025 में रायपुर से उसकी गिरफ्तारी हुई। जांच में यह भी सामने आया कि वह अधिकारियों से बचने के लिए बार-बार अपनी फैक्ट्रियों की लोकेशन बदलता रहा। दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर के गनियारी, मंकी, भानपुरी जैसे इलाकों में अवैध प्लांट संचालित किए जा रहे थे। कई फैक्ट्रियों में मजदूरों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराए जाने के भी प्रमाण मिले हैं।

परिवार भी जांच के घेरे में

रिपोर्ट्स के अनुसार, जुमनानी के बेटे सागर जुमनानी के नाम पर भी गोदाम संचालित थे, जहां गुटखा निर्माण के लिए कच्चा माल छिपाकर रखा जाता था। मामले में पारिवारिक संलिप्तता की जांच भी जारी है।

गुटखे के साथ नशे का धंधा भी

गुरमुख जुमनानी का नाम केवल गुटखा और टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है। अप्रैल 2023 में भिलाई पुलिस ने उसे नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में भी गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से ‘स्पाज-ट्रानकन प्लस’ (Spas-Trankan Plus) के करीब 1440 नशीले कैप्सूल बरामद किए गए थे। इस मामले में उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

कानून की सख्ती का बड़ा संदेश

317 करोड़ की पेनल्टी और लगातार सामने आ रहे काले कारनामों ने यह साफ कर दिया है कि गुरमुख जुमनानी केवल एक गुटखा कारोबारी नहीं, बल्कि टैक्स चोरी, अवैध तंबाकू और नशीली दवाओं के संगठित नेटवर्क का बड़ा चेहरा रहा है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में अवैध कारोबार और माफिया तंत्र के खिलाफ सरकार और एजेंसियों की सख्त मंशा का बड़ा संदेश मानी जा रही है।

संभल / लखनऊ।

   संभल में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायपालिका ने बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला आदेश दिया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने 13 जनवरी 2026 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी (वर्तमान में एएसपी), इंस्पेक्टर अनुज तोमर तथा 15–20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।

24 वर्षीय युवक को गोली लगने का आरोप

यह आदेश यामीन, निवासी खग्गू सराय अंजुमन, की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय उनका 24 वर्षीय बेटा आलम, जो बिस्कुट और रस बेचने घर से निकला था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से गोली मारी गई। गोली लगने से आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि युवक हिंसा में शामिल नहीं था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर फायरिंग की।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा—

“अब कोई बचाने नहीं आएगा। भाजपा का फॉर्मूला है—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो।”

पुलिस ने आदेश मानने से किया इनकार

वहीं, संभल पुलिस प्रशासन ने इस न्यायिक आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अदालत के आदेश को “अवैध” बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें पुलिस को क्लीन चिट दी जा चुकी है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी

हिंसा की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए थे। यह मामला प्रदेश भर में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा।

कानूनी और प्रशासनिक टकराव

इस प्रकरण में अब न्यायपालिका के आदेश और पुलिस प्रशासन के रुख के बीच स्पष्ट टकराव नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बनने की संभावना जता रहा है।

नई दिल्ली।
भारत–चीन संबंधों में तनाव के दौर के बीच राजनीतिक संवाद की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सन हैयान ने किया

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।

भाजपा की ओर से अरुण सिंह और विजय चौथाईवाले शामिल

भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।

भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।

RSS और अन्य दलों से भी मुलाकात

अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया ‘दोगलेपन’ का आरोप

इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।

राजनीतिक और कूटनीतिक मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नई दिल्ली/कोलकाता।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच चल रहा कानूनी टकराव अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच चुका है। 14 और 15 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने इस विवाद को संवैधानिक, प्रशासनिक और राजनीतिक संकट के रूप में स्थापित कर दिया है।


कलकत्ता हाई कोर्ट: TMC की याचिका खारिज, ED ने लगाए गंभीर आरोप

14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा को सुरक्षित रखा जाए।

हालांकि, ED के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। इस बयान के बाद न्यायमूर्ति सुभ्रा घोष ने TMC की याचिका को निपटा दिया।

इसी सुनवाई के दौरान ED ने अभूतपूर्व और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं I-PAC कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े अहम सबूत—एक लैपटॉप और एक ‘हरा फोल्डर’—अपने साथ ले गईं।

ED ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की। लेकिन, चूंकि इसी विषय पर ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी।


सुप्रीम कोर्ट: FIR पर रोक, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

15 जनवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया।

शीर्ष अदालत ने—

  • मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,

  • पश्चिम बंगाल सरकार,

  • पुलिस महानिदेशक (DGP) और

  • कोलकाता पुलिस कमिश्नर

को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC कार्यालय और उसके आसपास की सभी CCTV फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।


अदालत की कड़ी टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—

“केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का हस्तक्षेप अराजकता (lawlessness) की स्थिति पैदा कर सकता है।”

ED की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मामला केवल ‘दखल’ का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई ‘चोरी’ और ‘डकैती’ का है, क्योंकि वह सशस्त्र पुलिस बल के साथ जांच में बाधा डालने पहुंचीं।

वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी वहां पार्टी के गोपनीय और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए गई थीं और ED की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण व राजनीतिक रूप से प्रेरित है।


अब क्या तय करेगा सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट अब इस मूल प्रश्न पर विचार करेगा कि—

  • क्या किसी मुख्यमंत्री का छापेमारी स्थल पर पहुंचना,

  • और वहां से कथित रूप से दस्तावेज ले जाना,
    कानूनी रूप से “जांच में बाधा” और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।

मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।


राजनीतिक और संवैधानिक मायने

यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा, और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाली सुनवाई देश की राजनीति और संघीय ढांचे के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

27% ओबीसी आरक्षण सहित 28 सूत्रीय मांगों पर ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग का ज्ञापन

दुर्ग/पाटन।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

यह ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी महासभा श्री राधेश्याम साहू के निर्देशानुसार, माननीय तहसीलदार महोदय पाटन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ राज्य में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने सहित कुल 28 बिंदुओं पर आधारित मांगें रखी गईं।


जनकल्याणकारी योजनाओं में समानुपातिक हिस्सेदारी की मांग

ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र एवं राज्य शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं में उनकी जनसंख्या के अनुपात में समुचित हिस्सेदारी प्रदान की जाए, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार किया जा सके।


इनके नाम रहा संबोधित ज्ञापन

ज्ञापन की प्रतिलिपि—

  • माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार,

  • माननीय गृह मंत्री भारत सरकार,

  • माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तथा

  • महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़

के नाम भी प्रेषित की गई है।


कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित

इस अवसर पर ओबीसी महासभा जिला दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री भानु प्रताप यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे, जिनमें—

अधिवक्ता रेखराम साहू, ओमप्रकाश यादव, हीरालाल, राहुल यादव, दीपक कुमार यादव, पीताम्बर साहू, योगेश कुमार, चोवाराम, विजय मेश्राम, रमन साहू, शिवकुमार सोनवानी, नंदू वर्मा, सुरेश सिंगोर, वागेस वासा, शंकर, इंदा, हिमांशी नायक सहित अन्य कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर सतत संघर्ष

जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए महासभा का संघर्ष निरंतर और संगठित रूप से जारी रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन स्तर पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

बालोद / शौर्यपथ /
जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की तत्परता एवं मुश्तैदी से गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम कचांदुर में प्रस्तावित बाल विवाह को समय रहते रोक लिया गया।

इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार 12 जनवरी को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वर विशाल पिता राजकुमार के निवास स्थल पर पहुँचकर आवश्यक हस्तक्षेप किया गया। मौके पर उपस्थित राजकुमार एवं उनके परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए समझाइश दी गई।

समझाइश के उपरांत नाबालिक युवक राजकुमार (उम्र 19 वर्ष) एवं उनके माता-पिता द्वारा अपनी त्रुटि स्वीकार की गई तथा युवक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करने की सहमति व्यक्त की गई।

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्रवाई के माध्यम से जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में नियमानुसार पंचनामा भी तैयार किया गया

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में बाल विवाह रोकने हेतु सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई का कार्य निरंतर जारी है।

बालोद / शौर्यपथ /
बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डी स्थित धान खरीदी केन्द्र में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुव्यवस्थित एवं सुचारू रूप से जारी है। अब तक 1266 किसानों द्वारा कुल 53 हजार 144 क्विंटल 80 किलोग्राम धान की बिक्री की जा चुकी है, जिसके एवज में किसानों को 13 करोड़ 58 लाख 33 हजार रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है।

धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। निर्धारित अवधि के भीतर धान बिक्री से शेष रह गए किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं

इस संबंध में नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले ने जानकारी देते हुए बताया कि धान खरीदी केन्द्र डौण्डी के अंतर्गत शामिल गांवों के 907 किसानों द्वारा 315.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल का रकबा समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष कृषकों के धान की खरीदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध धान की आवक रोकने हेतु भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं

धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए राजस्व, खाद्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, साथ ही गठित निगरानी दल द्वारा धान खरीदी कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

पार्षद नदारद, बदबूदार व कीड़ेयुक्त पानी पीने को मजबूर जनता अब निगम प्रशासन के दर पर

दुर्ग | विशेष रिपोर्ट

लोकतंत्र में आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु माने जाने वाले जनप्रतिनिधि जब नदारद हो जाएं, तब समस्याएं केवल बढ़ती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं।

कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 का है, जहां की जनता बदबूदार, कीड़ेयुक्त और अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है।

नल से निकल रहा बदबूदार पानी, उबलाकर पीने को मजबूर लोग

वार्ड नंबर 28 में पिछले कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा है जिसमें—

तेज दुर्गंध है

कीड़े और गंदगी दिखाई दे रही है

जिसे सीधे पीना तो दूर, उपयोग में लाना भी खतरे से खाली नहीं

वार्डवासियों का कहना है कि मजबूरी में पानी को उबालकर, छानकर और अगले दिन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है।

पार्षद नदारद, जनता असहाय

इस गंभीर समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि— वार्ड की पार्षद आखिर कहां हैं?

वार्ड नंबर 28 की निर्वाचित पार्षद श्रीमती ममता राकेश सेन (भाजपा) हैं।

हालांकि उनका शासकीय निवास वार्ड में दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे वार्ड में नियमित रूप से निवास नहीं करतीं, जिससे आम जनता का उनसे संपर्क लगभग असंभव हो गया है।

वार्डवासियों का कहना है कि—

पार्षद वार्ड में दिखाई नहीं देतीं

शिकायत करने पर या तो पुराना बस स्टैंड स्थित कार्यालय जाने को कहा जाता है

या फिर अनिश्चित प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाता है

जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति, जनता को सीधे प्रशासन के भरोसे छोड़ा

स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—

“जब पार्षद उपलब्ध नहीं हैं, तो अब हम सीधे निगम प्रशासन के पास ही जाएंगे।”

यह कथन केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता पर जनता का अविश्वास दर्शाता है।

सोशल मीडिया में उठा मामला, जल विभाग सक्रिय लेकिन…

सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जल विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अब तक—

वार्ड में स्थायी समाधान नहीं हुआ

पार्षद की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई

यही कारण है कि वार्डवासियों की चिंता और बढ़ती जा रही है।

स्वास्थ्य संकट की आहट, प्रशासन की परीक्षा

यह मामला केवल पानी की आपूर्ति का नहीं, बल्कि—

जनस्वास्थ्य

लोकतांत्रिक जवाबदेही

और जनप्रतिनिधि की भूमिका का है

यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वार्ड में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी इंकार नहीं किया जा सकता।

अब सवाल सीधे प्रशासन से

क्या जल विभाग तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करेगा?

क्या वार्ड की जनता को अभी भी बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा?

और सबसे अहम—

क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?

निष्कर्ष

वार्ड नंबर 28 की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए चेतावनी है।

जनता ने वोट देकर प्रतिनिधि चुना है, अनुपस्थिति और मौन देखने के लिए नहीं।

अब देखना यह है कि— प्रशासन समय पर हस्तक्षेप करता है या नहीं,

और जनप्रतिनिधि जनता के बीच लौटते हैं या नहीं।

लेख - शरद पंसारी (संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में नक्सलवाद उन्मूलन और विकास की दिशा में पिछले दो वर्षों में ऐतिहासिक काम किए हैं। यह केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं है, बल्कि यह “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के त्रिकोणीय मॉडल का प्रतीक है, जिसने बस्तर को अबूझमाड़ और दुर्गम इलाकों में भी बदलाव की मिसाल बनाने में सक्षम किया है।


नक्सल समस्या में उल्लेखनीय कमी: निर्णायक चरण की ओर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।

  • सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।

  • नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।

  • सटीक आंकड़े:

    • आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली

    • गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली

    • निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली

इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।


सुरक्षा और सामरिक रणनीति: कोर एरिया में प्रभावी नियंत्रण

सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।

  • फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।

  • इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।

  • आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।

इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।


‘नियद नेल्लानार’ योजना: विकास का मॉडल और सामाजिक सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।

  • सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।

  • स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।


आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार: बस्तर की अर्थव्यवस्था में नवजीवन

बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।

  • वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।

  • स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।

  • पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।

  • कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।


मुख्यधारा में वापसी और लोकतंत्र में विश्वास

  • भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

  • राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।


ढांचागत क्रांति: कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार

  • सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।

  • स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।

  • शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।


निष्कर्ष: गोली का जवाब गोली से, विकास का रास्ता हर दरवाजे तक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।

मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

 

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