January 22, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

लेख - शरद पंसारी (संपादक - शौर्यपथ दैनिक समाचार पत्र )

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में नक्सलवाद उन्मूलन और विकास की दिशा में पिछले दो वर्षों में ऐतिहासिक काम किए हैं। यह केवल सुरक्षा अभियान का परिणाम नहीं है, बल्कि यह “विश्वास, विकास और सुरक्षा” के त्रिकोणीय मॉडल का प्रतीक है, जिसने बस्तर को अबूझमाड़ और दुर्गम इलाकों में भी बदलाव की मिसाल बनाने में सक्षम किया है।


नक्सल समस्या में उल्लेखनीय कमी: निर्णायक चरण की ओर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद उन्मूलन अब निर्णायक चरण में है और मार्च 2026 तक इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य है।

  • सुरक्षा शिविरों का विस्तार: दिसंबर 2023 से अब तक 65 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी उपस्थिति मजबूत हुई।

  • नक्सली नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई: प्रमुख माओवादी विचारकों और कमांडरों को निष्क्रिय कर उनके नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर किया गया।

  • सटीक आंकड़े:

    • आत्मसमर्पण: 2,386+ नक्सली

    • गिरफ्तार: 1,901+ नक्सली

    • निष्क्रिय/मारे गए: 505+ नक्सली

इन कदमों से नक्सलियों की कमांड और नियंत्रण प्रणाली टूट चुकी है और स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सरकारी पहलों का समर्थन कर रहे हैं।


सुरक्षा और सामरिक रणनीति: कोर एरिया में प्रभावी नियंत्रण

सरकार ने नक्सलियों के “कोर एरिया” (अबूझमाड़ और घोर जंगली इलाके) में सक्रिय रूप से अभियान चलाकर उनके गढ़ों को निशाना बनाया।

  • फॉरवर्ड लिंक कैंप: पिछले दो वर्षों में 50+ नए कैंप स्थापित, जिन्हें विकास केंद्र के रूप में विकसित किया गया।

  • इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन: अब मुठभेड़ें केवल गश्त पर नहीं होतीं, बल्कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन किए जाते हैं।

  • आधुनिक हथियार और तकनीक: ड्रोन, एन्टी-माइन वाहन, और अत्याधुनिक संचार उपकरणों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, हताहत दर में भारी कमी आई।

इन रणनीतियों के परिणामस्वरूप नक्सलियों के बीच भय और अविश्वास का माहौल उत्पन्न हुआ और कई कमांडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आए।


‘नियद नेल्लानार’ योजना: विकास का मॉडल और सामाजिक सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री की प्रमुख पहल ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना ने सुरक्षा शिविरों के आसपास के गांवों में शत-प्रतिशत विकास की दिशा में काम किया।

  • सुविधाओं का विस्तार: राशन दुकान, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल का मैदान, मुफ्त बिजली, पक्के आवास, स्वास्थ्य क्लिनिक और 25+ बुनियादी सुविधाओं का वितरण।

  • शिक्षा और स्वास्थ्य: बंद 300+ स्कूलों को पुनः खोला गया, और ‘छू लो आसमान’ जैसी कोचिंग संस्थाओं के माध्यम से IIT/NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध।

  • स्थानीय सहभागिता: ग्रामीण अब स्वयं सुरक्षा शिविरों की मांग करने लगे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विकास और सुरक्षा का मॉडल सफल हुआ है।


आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार: बस्तर की अर्थव्यवस्था में नवजीवन

बस्तर को केवल सुरक्षा के मोर्चे तक सीमित नहीं रखा गया; सरकार ने इसे स्थानीय उद्यमिता, वनोपज और पर्यटन से जोड़ा।

  • वनोपज आधारित समर्थन: इमली, महुआ, कोसा वनोपजों का MSP बढ़ाया गया और बिचौलियों को खत्म किया गया।

  • स्थानीय रोजगार: ‘बस्तर कैफे’ ब्रांड और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिला।

  • पर्यटन और इको-टूरिज्म: ‘बस्तर पांडुम’, ‘बस्तर ओलंपिक’ और सुरक्षित पर्यटन स्थलों से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।

  • कौशल विकास: आत्मसमर्पित नक्सलियों और युवाओं को ट्रैक्टर रिपेयरिंग, मोबाइल रिपेयरिंग, सोलर पंप तकनीशियन और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान।


मुख्यधारा में वापसी और लोकतंत्र में विश्वास

  • भरोसे का संकेत: 2025 में ‘लोन वर्राटू’ अभियान के तहत 2,000+ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई अब ‘बस्तर फाइटर्स’ के रूप में पुलिस और प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

  • राजनीतिक भागीदारी: ग्राम सभाओं और स्थानीय चुनावों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि, जो लोकतंत्र में विश्वास की बढ़ती दर को दर्शाती है।


ढांचागत क्रांति: कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे में सुधार

  • सड़कों और पुलों का निर्माण: इंद्रावती नदी पर नए पुल और ग्रामीण सड़कों का निर्माण, जिससे मानसून के दौरान भी बस्तर का संपर्क टूटने का खतरा नहीं।

  • स्वास्थ्य सेवाएं: ‘हाट बाजार क्लिनिक’ योजना के तहत जंगलों और दुर्गम इलाकों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध।

  • शिक्षा और कौशल: बच्चों के लिए गुणवत्ता शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मार्गदर्शन।


निष्कर्ष: गोली का जवाब गोली से, विकास का रास्ता हर दरवाजे तक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में दो वर्षों में सुरक्षा, विकास और विश्वास का त्रिकोणीय मॉडल सफल हुआ है। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और विकास की मुख्यधारा के प्रति स्थानीय लोगों के विश्वास ने बस्तर को 'लाल आतंक' से मुक्त कर 'हरी-भरी संस्कृति और तेजी से बढ़ते विकास' की पहचान दिलाई है।

मार्च 2026 तक बस्तर को पूर्ण नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य अब within reach है, और यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी सरकार ने बस्तर को न केवल सुरक्षित, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

 

दुर्ग । शौर्यपथ

जहाँ आम नागरिकों से एक-एक दस्तावेज के लिए नियमों और प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन कराया जाता है, वहीं दुर्ग तहसील कार्यालय परिसर के भीतर वर्षों से दो निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना किसी स्पष्ट वैधानिक अनुमति के संचालित होने का मामला सामने आया है। यह स्थिति न केवल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि एक बड़े संभावित घोटाले की ओर भी इशारा कर रही है।
तहसील परिसर में स्थित त्रिमूर्ति होटल और तहसील कार्यालय के अंदर संचालित वाहन पार्किंग से प्रतिदिन हजारों रुपये की वसूली की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रतिष्ठानों का ठेका किसे, कब और किन शर्तों पर दिया गया—इसकी स्पष्ट जानकारी स्वयं विभागीय अधिकारियों के पास भी उपलब्ध नहीं है।

ठेका कब और कैसे—कोई रिकॉर्ड नहीं
जब इस संबंध में तहसील के जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी मांगी गई, तो अलग-अलग और विरोधाभासी जवाब सामने आए। किसी अधिकारी ने कहा कि "सालों पहले ठेका हुआ था, उसके बाद कभी नया टेंडर नहीं हुआ", जबकि एक अन्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि त्रिमूर्ति होटल को नोटिस तो जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद की कार्रवाई से संबंधित कोई फाइल या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यानी नोटिस जारी हुआ, पर कार्रवाई का कोई ठोस प्रमाण नहीं।

सूत्रों और प्रशासन के बयान में टकराव
होटल प्रबंधन का दावा है कि "हर साल ठेका होता है", लेकिन विभागीय अधिकारी इस दावे को सिरे से नकार रहे हैं। यदि हर वर्ष ठेका हुआ है, तो उसके टेंडर दस्तावेज, अनुबंध, रसीदें और राजस्व रिकॉर्ड कहाँ हैं? और यदि ठेका नहीं हुआ, तो सरकारी परिसर के भीतर निजी होटल का संचालन आखिर किसके आदेश पर हो रहा है—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

पार्किंग से वसूली, शासन को शून्य लाभ
तहसील परिसर की पार्किंग में प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों से शुल्क वसूला जाता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस वसूली की राशि का कोई हिस्सा सरकारी खजाने में जमा हो रहा है या नहीं। न तो विधिवत रसीद दी जाती है, न ही ठेके या लेखा-जोखे का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह पैसा जा कहाँ रहा है।

प्रशासनिक संरक्षण या लापरवाही?
होटल, पार्किंग और एटीएम—तीनों निजी प्रतिष्ठान एक ही सरकारी तहसील परिसर के भीतर संचालित हो रहे हैं और किसी को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इन्हें अनुमति किसने दी। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण में चल रही एक समानांतर अर्थव्यवस्था की आशंका को भी जन्म देती है।

अब निगाहें तहसीलदार पर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तहसीलदार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे? क्या सभी टेंडर, अनुबंध और राजस्व वसूली की निष्पक्ष ऑडिट होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? क्योंकि यह साफ है कि तहसील परिसर में वर्षों से लाखों रुपये की कमाई हो रही है, जबकि सरकार को कोई स्पष्ट लाभ नहीं मिल रहा। यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की खुली लूट का गंभीर आरोप है।

नई दिल्ली / : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने जा रही है। वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। चुनाव की औपचारिक घोषणा अगले दिन, 20 जनवरी, को की जाएगी।

नामांकन प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रस्तावक के रूप में मौजूद रहेंगे। नितिन नबीन वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं और बिहार की बांकेपुर सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं। 46 वर्ष की आयु में वे भाजपा के इतिहास के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे।

भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन हेतु किसी भी व्यक्ति के पास कम से कम 15 वर्षों की सदस्यता और 12 वर्षों का सक्रिय कार्यकाल होना आवश्यक है। इसके अलावा, नामांकन के लिए कम से कम 5 राज्यों की प्रदेश परिषदों के 20 सदस्यों का संयुक्त प्रस्तावक होना अनिवार्य है।

वर्तमान में नितिन नबीन सबसे प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पूर्व में वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव के नाम चर्चा में रहे थे, लेकिन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद अन्य दावेदारों द्वारा नामांकन की संभावना कम है।

इस चुनाव में छत्तीसगढ़ की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश इकाइयों की सक्रिय भागीदारी होती है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 19 जनवरी को दिल्ली में होने वाली नामांकन प्रक्रिया में उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं और उनके कार्यकाल में भाजपा ने राज्य में सत्ता वापसी की थी। उनके अध्यक्ष बनने से राज्य भाजपा में उत्साह देखा जा रहा है।

चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ को नया प्रदेश प्रभारी मिलने की संभावना है, क्योंकि नितिन नबीन अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे।

कांकेर | नरहरपुर | 

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक अंतर्गत बागाबारी गांव से मानव तस्करी का एक गंभीर और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना में गांव के ही एक व्यक्ति ने विश्वासघात करते हुए दो महिलाओं और एक 11 वर्षीय बच्ची को धोखे से राजस्थान ले जाकर बेच दिया।

काम का झांसा, फिर तस्करी

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी ने पीड़ित महिलाओं और बच्ची को काम दिलाने के बहाने अपने साथ राजस्थान ले गया। भरोसे और जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उन्हें मानव तस्करी के जाल में फंसा दिया और वहां बेच दिया।

परिजनों की सतर्कता से खुला मामला

जब लंबे समय तक पीड़ितों से संपर्क नहीं हो सका, तब परिजनों और ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद नरहरपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांकेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक विशेष टीम राजस्थान रवाना की।

राजस्थान से सुरक्षित रेस्क्यू

छत्तीसगढ़ पुलिस ने राजस्थान पुलिस के सहयोग से दोनों महिलाओं और नाबालिग बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। सभी को सकुशल कांकेर लाया गया है, जहां उनका चिकित्सकीय परीक्षण और काउंसलिंग कराई जा रही है।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में शामिल मुख्य आरोपी (पीड़ोसी) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि —

  • क्या इस तस्करी के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है

  • क्या पहले भी ग्रामीण इलाकों से महिलाओं और बच्चों की तस्करी की गई है

  • राजस्थान में किन लोगों को पीड़ितों को सौंपा गया था

कानूनी धाराएं और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मानव तस्करी, धोखाधड़ी और नाबालिग के अपहरण से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

ग्रामीण इलाकों के लिए चेतावनी

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में परिचितों पर आंख मूंदकर भरोसा न करने और रोजगार के नाम पर बाहर ले जाने वालों की सघन जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

आजीवन कानूनी छूट, मतदाता सूची और नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल**

नई दिल्ली | 

भारतीय लोकतंत्र की निष्पक्षता की प्रहरी मानी जाने वाली संस्था भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक साथ कई अहम संवैधानिक सवालों पर सुनवाई चल रही है। जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में हुई सुनवाइयों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, जवाबदेही और निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

चुनाव आयुक्तों को ‘आजीवन कानूनी छूट’ पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

12–13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को दी गई आजीवन कानूनी छूट (Immunity) पर जवाब मांगा है।
याचिका में CEC एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें) अधिनियम 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान किए गए फैसलों के लिए सिविल और आपराधिक कार्रवाई से सुरक्षा दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान संविधान के समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और जवाबदेही के सिद्धांत के खिलाफ है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस धारा पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन इसकी संवैधानिक वैधता की गहन समीक्षा करने पर सहमति जताई है।

मतदाता सूची और नागरिकता जांच पर गंभीर सवाल

13 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सहित अन्य राज्यों में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)’ के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर सुनवाई की।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट पूछा कि —

“क्या कोई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय से पहले ही किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची से हटा सकता है?”

कोर्ट ने संकेत दिया कि मताधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की प्रशासनिक जल्दबाजी लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी न्यायिक जांच

सुप्रीम कोर्ट उस 2023 के कानून की भी समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाकर एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है।

याचिकाकर्ताओं और विपक्षी दलों का कहना है कि इससे निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है और कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ सकता है।

मार्च 2023 का ऐतिहासिक फैसला फिर चर्चा में

गौरतलब है कि मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक संसद कानून न बनाए, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति
प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की समिति द्वारा की जाए।
बाद में केंद्र सरकार ने कानून बनाकर CJI को इस समिति से बाहर कर दिया, जिसे अब फिर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी निष्पक्षता के भविष्य से जुड़ा अहम पड़ाव है।

नई दिल्ली | 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 13 जनवरी 2026 का दिन राजनयिक गतिविधियों, राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संवाद और सांस्कृतिक उत्सवों के संदेशों से भरपूर रहा। इस दिन उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से लेकर युवाओं के सशक्तिकरण और भारतीय परंपराओं के उत्सव तक कई अहम कार्यक्रमों में सहभागिता की।

फ्रांस के राष्ट्रपति के सलाहकार से अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार मिस्टर इमैनुएल बोने से मुलाकात की। इस दौरान भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच गहरे होते कूटनीतिक संबंधों का संकेत मानी जा रही है।

लोहड़ी पर देशवासियों को शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री ने लोहड़ी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समृद्धि, खुशहाली और एकता का संदेश दिया। उन्होंने इस पर्व को कृषि, प्रकृति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक बताया।

‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में युवाओं को संदेश

पीएम मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने युवाओं को विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए नेतृत्व, नवाचार और राष्ट्रसेवा पर जोर दिया।

संस्कृत सुभाषित से प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उच्च उद्देश्यों के लिए प्रेरित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आत्मविश्वास, परिश्रम और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने का संदेश निहित था।

भारत–जर्मनी संबंधों में नई ऊर्जा

इसी दिन जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा का समापन हुआ। इससे पहले 12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित पतंग उत्सव में भाग लिया था। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को लेकर सहमति बनी।


समग्र संदेश

13 जनवरी का दिन प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कार्यशैली को दर्शाता है, जहां एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त किया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं, संस्कृति और परंपराओं को भी समान महत्व दिया गया।

आज 14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस वर्ष संक्रांति पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना गया है। यह संयोग कई राशियों के लिए उन्नति, लाभ और नई शुरुआत के संकेत दे रहा है।

आज का राशिफल (14 जनवरी 2026)

मेष (Aries):
करियर में उन्नति के योग हैं। सूर्य का गोचर कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान और लाभ दिला सकता है।

वृषभ (Taurus):
आर्थिक लाभ संभव है, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। व्यापार विस्तार के लिए समय अनुकूल है।

मिथुन (Gemini):
प्रेम जीवन और करियर दोनों के लिए दिन शुभ है। नए अवसर मिल सकते हैं।

कर्क (Cancer):
मानसिक तनाव में कमी आएगी। करियर में सफलता मिलेगी। मित्र की सलाह लाभकारी साबित होगी।

सिंह (Leo):
आर्थिक लेन-देन में सतर्क रहें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। परिवार के साथ समय सुखद रहेगा।

कन्या (Virgo):
आय बढ़ाने के नए स्रोत मिल सकते हैं। पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा। सेहत का ध्यान रखें।

तुला (Libra):
लाभ के अवसर मिलेंगे। सुख-सुविधाओं पर खर्च संभव है। पैतृक मामलों में प्रगति होगी।

वृश्चिक (Scorpio):
वित्तीय स्थिति मजबूत रहेगी। दस्तावेजी कार्यों में सावधानी आवश्यक है। फिटनेस में सुधार होगा।

धनु (Sagittarius):
कार्यस्थल पर सामंजस्य बनाकर चलना होगा। विवादों और यात्राओं में सतर्कता रखें।

मकर (Capricorn):
मेहनत अधिक रहेगी, लेकिन सफलता के योग प्रबल हैं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और शुभ समाचार मिल सकता है।

कुंभ (Aquarius):
राजनीतिक या सामाजिक महत्वाकांक्षाएं पूरी हो सकती हैं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। यात्रा टालें।

मीन (Pisces):
कार्यस्थल पर सतर्क रहें। पुराने संपर्कों से लाभ मिलेगा। आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।


मकर संक्रांति विशेष दान

आज के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, घी और ऊनी वस्त्र का दान करना विशेष रूप से शुभ और पुण्यदायी माना गया है।

 शौर्यपथ धर्म / मकर संक्रांति 2026 का पर्व आज, 14 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शुभ मुहूर्त और विशेष योग

आज दोपहर 03:13 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। इसी के साथ पुण्यकाल प्रारंभ हो गया है।

  • पुण्य काल: 03:13 PM से 05:45 PM

  • महा पुण्य काल: 03:13 PM से 04:48 PM

  • विशेष संयोग: सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग

इन शुभ योगों में किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर प्रवेश करते हैं। यह पर्व पारिवारिक सौहार्द, मतभेदों को समाप्त करने और संबंधों में मधुरता लाने का संदेश देता है।

महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन ही देह त्याग का चयन किया था, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस काल में शरीर त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख है कि आज के दिन देवी संक्रांति ने असुर मकर का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय सुनिश्चित की थी।

वैज्ञानिक और स्वास्थ्य दृष्टिकोण

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी है। लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर को विटामिन D मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

आयुर्वेद के अनुसार, ठंड के मौसम में तिल और गुड़ का सेवन शरीर को गर्म रखता है और आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

दान का विशेष महत्व

शास्त्रों में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान हजार गुना फल देता है।

दान के लिए विशेष वस्तुएं:

  • तिल और गुड़

  • खिचड़ी

  • कंबल एवं ऊनी वस्त्र

  • पितरों के लिए तिल युक्त जल से तर्पण

आज पितृ तर्पण करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है।

पूजा विधि

आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल एवं काले तिल मिले जल से स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

नई दिल्ली। उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली समेत कई मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे ठिठुरन और बढ़ सकती है।

ताजा स्थिति

मौसम विभाग ने दिल्ली में शीतलहर और अत्यंत कम दृश्यता के चलते रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई है। लोगों को केवल आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से घने कोहरे की चादर में ढके हुए हैं। कोहरे के कारण रेल, सड़क और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि अनेक उड़ानें रद्द या विलंबित की गई हैं।

बारिश और बर्फबारी का अनुमान

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अनुमान जताया गया है।

तापमान में गिरावट

शीतलहर के चलते कई शहरों में न्यूनतम तापमान गिरकर 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

सावधानी की अपील

मौसम विभाग ने लोगों से वाहन चलाते समय फॉग लाइट के इस्तेमाल, धीमी गति बनाए रखने और ठंड से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनने की अपील की है। यात्रियों को उड़ान और ट्रेन की स्थिति जानने के लिए मौसम विभाग व संबंधित विभागों की आधिकारिक सूचनाएं देखने की सलाह दी गई है।

   भोपाल। जनवरी 2026 में भोपाल की एक जिला अदालत ने अभिनेता सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और उनकी बहनों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए करीब 16.62 एकड़ पुश्तैनी जमीन पर उनके मालिकाना हक को बरकरार रखा है। यह विवाद भोपाल के नयापुरा क्षेत्र की बेशकीमती जमीन से जुड़ा था, जो लगभग 25–26 वर्षों से न्यायालय में लंबित था।

यह मामला वर्ष 1998 में उस समय सामने आया था, जब अकील अहमद सहित कुछ स्थानीय निवासियों ने दावा किया था कि भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान ने वर्ष 1936 में यह जमीन उनके पूर्वजों को दान में दी थी।

चौदहवें अपर सत्र न्यायाधीश संजय अग्रवाल की अदालत ने विपक्षी पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि दान के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण या वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अदालत में पटौदी परिवार की ओर से पेश किए गए राजस्व अभिलेखों में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन लगातार नवाब परिवार के नाम पर दर्ज रही है। इसके अलावा, 1949 के भोपाल मर्जर एग्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज भी नवाब परिवार के स्वामित्व की पुष्टि करते हैं।

न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा दायर करने में अत्यधिक और अनुचित देरी हुई, जो उनके पक्ष को कमजोर बनाती है। इसी आधार पर अदालत ने दावा अस्वीकार कर दिया।

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