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भिलाई।
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी 16 जनवरी 2026 को डॉ. अंबेडकर नगर वार्ड में राज्य स्तरीय बौद्ध मेला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन संध्या 5 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बौद्ध अनुयायी शामिल होंगे।
इस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में श्री गजेन्द्र यादव (केबिनेट मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन) उपस्थित रहेंगे। वहीं प्रमुख अतिथि के रूप में मा. विजय बघेल (सांसद, दुर्ग लोकसभा), रिकेश सेन (विधायक, वैशाली नगर विधानसभा), अरविंद सिंह खुराना (अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग, दुर्ग), मा. इंद्रजीत सिंह (छोटू) समाजसेवी, अजीत वैद्य (पार्षद, शंकर नगर), मा. एम.डी. कावरे (संभाग आयुक्त, रायपुर), दिलीप वासनीकर (छत्तीसगढ़ जांच आयोग), रतनलाल डांगी (आईजी, रायपुर), मा. के.एन. कांडे (एमडी, अपेक्स बैंक छत्तीसगढ़), सुनील रामटेके (चेयरमैन, ऑल PSU एससी-एसटी फेडरेशन), मा. डॉ. उदय कुमार ढाबरडे (सीएमओ, सेक्टर-9 अस्पताल), मा. बालेश्वर चौरे (प्रदेश अध्यक्ष, ब्राइड एसोसिएशन), उमाकांत सुखदेवे (जल संसाधन विभाग), अरविंद चौहान (राजमार्ग विभाग), विनोद वासनिक (अध्यक्ष, भारतीय बौद्ध महासभा, भिलाई), मा. एस.आर. कांडे (ट्रस्टी, भारतीय बौद्ध महासभा), भोजराज गौरखेड़े (प्रदेश अध्यक्ष, दि बुद्धिस्ट सोसायटी), सी.एल. माहेश्वरी (राष्ट्रीय सलाहकार, दि बुद्धिस्ट सोसायटी), अनिल गजभिए (प्रदेश अध्यक्ष, पैंथर सेना) एवं मा. वर्षा बागड़े (अध्यक्ष, दि बुद्धिस्ट सोसायटी, भिलाई) विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य की जानकारी कार्यक्रम संयोजक मा. सुनील रामटेके द्वारा दी गई। इस अवसर पर आयोजित बैठक में योगेन्द्र (बबलू) चौरे (अध्यक्ष), जितेंद्र मडामे (कार्यकारी अध्यक्ष), सुनील श्यामकुंवर (उपाध्यक्ष), अविनाश अड़कने (कोषाध्यक्ष), संजय डहाट (सचिव), सेवक राम बागरे (संयुक्त सचिव) सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
आयोजकों ने सभी सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।
महोत्सव के अंतर्गत संध्या को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बुद्ध एवं भीम गीतों पर आधारित प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कव्वाल प्रकाश नाथ पाटनकर (नागपुर, महाराष्ट्र) एवं कव्वाल अजय कुमार (युवा प्रबोधनकार, टीवी एवं रेडियो सिंगर) अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस अवसर पर भोजन दानदाता के रूप में सुनंदा एवं राजकुमार खोबरागड़े सहयोग प्रदान करेंगे।
भिलाईनगर।
शासन की मंशा के अनुरूप नागरिकों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर पालिक निगम भिलाई के सभागार कक्ष में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास आबंटन हेतु लॉटरी का आयोजन किया गया। लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 60 पात्र हितग्राहियों को आवास आबंटित कर लाभान्वित किया गया।
लॉटरी कार्यक्रम में वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन, महापौर श्री नीरज पाल, सभापति श्री गिरवर बंटी साहू, आयुक्त श्री राजीव कुमार पाण्डेय, नेता प्रतिपक्ष श्री भोजराज सिन्हा, पार्षद श्री हरिओम तिवारी तथा अधीक्षण अभियंता सह नोडल अधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हितग्राहियों के नाम निकालकर आवास आबंटन किया गया।
नगर निगम क्षेत्र में निवास करने वाले ऐसे नागरिक जिनके पास देश के किसी भी भाग में स्वयं का पक्का मकान नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए पात्र नागरिकों द्वारा नगर निगम भिलाई के आवास शाखा में नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किए जाते हैं। प्राप्त आवेदनों की सक्षम स्तर पर स्वीकृति उपरांत आवास आबंटन हेतु लॉटरी आयोजित की जाती है।
आज आयोजित लॉटरी में जिन हितग्राहियों के नाम निकले, उन्हें लॉटरी पर्ची में अंकित ब्लॉक एवं मकान क्रमांक के अनुसार आवास आबंटित किया गया। आवास प्राप्त होने पर सभी हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शासन एवं नगर निगम प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
लॉटरी प्रक्रिया के दौरान उप अभियंता श्री दीपक देवांगन, आवास प्रभारी श्री विद्याधर देवांगन, सीएलटीसी श्रीमती किरण चतुर्वेदी, श्री जी. मोहन राव सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का कुख्यात गुटखा कारोबारी गुरमुख जुमनानी, जिसे प्रदेश में ‘गुटखा किंग’ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर कानून के शिकंजे में है। स्टेट जीएसटी (SGST) विभाग ने जनवरी 2026 की ताज़ा कार्रवाई में उस पर 317 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड पेनल्टी लगाई है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में जीएसटी चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई मानी जा रही है।
जांच में सामने आया है कि गुरमुख जुमनानी ने ‘सितार’ ब्रांड के नाम से प्रतिबंधित तंबाकू युक्त गुटखे का बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और वितरण किया। सरकारी रिकॉर्ड में उन्होंने स्वयं को ‘मीठी सुपारी’ का कारोबारी दर्शाया, जिस पर मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि वास्तव में वे गुटखा बना रहे थे, जिस पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 204 प्रतिशत तक सेस लागू होता है। इसी टैक्स हेराफेरी के जरिए करोड़ों की चोरी को अंजाम दिया गया।
SGST विभाग की जांच में यह भी उजागर हुआ है कि जुमनानी प्रतिदिन लगभग 25 लाख रुपये का अवैध गुटखा बाजार में खपा रहे थे। अनुमान है कि पिछले पांच वर्षों में करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक का गैरकानूनी कारोबार किया गया। इस पूरे नेटवर्क को ‘कोमल ट्रेडर्स’ जैसी फर्मों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।
जून 2025 में जब जीएसटी विभाग ने उनकी अवैध फैक्ट्रियों पर छापा मारा, तब जुमनानी फरार हो गया था। करीब दो महीने की तलाश के बाद सितंबर 2025 में रायपुर से उसकी गिरफ्तारी हुई। जांच में यह भी सामने आया कि वह अधिकारियों से बचने के लिए बार-बार अपनी फैक्ट्रियों की लोकेशन बदलता रहा। दुर्ग, राजनांदगांव, रायपुर के गनियारी, मंकी, भानपुरी जैसे इलाकों में अवैध प्लांट संचालित किए जा रहे थे। कई फैक्ट्रियों में मजदूरों से बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराए जाने के भी प्रमाण मिले हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जुमनानी के बेटे सागर जुमनानी के नाम पर भी गोदाम संचालित थे, जहां गुटखा निर्माण के लिए कच्चा माल छिपाकर रखा जाता था। मामले में पारिवारिक संलिप्तता की जांच भी जारी है।
गुरमुख जुमनानी का नाम केवल गुटखा और टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है। अप्रैल 2023 में भिलाई पुलिस ने उसे नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में भी गिरफ्तार किया था। उस समय उसके पास से ‘स्पाज-ट्रानकन प्लस’ (Spas-Trankan Plus) के करीब 1440 नशीले कैप्सूल बरामद किए गए थे। इस मामले में उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
317 करोड़ की पेनल्टी और लगातार सामने आ रहे काले कारनामों ने यह साफ कर दिया है कि गुरमुख जुमनानी केवल एक गुटखा कारोबारी नहीं, बल्कि टैक्स चोरी, अवैध तंबाकू और नशीली दवाओं के संगठित नेटवर्क का बड़ा चेहरा रहा है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में अवैध कारोबार और माफिया तंत्र के खिलाफ सरकार और एजेंसियों की सख्त मंशा का बड़ा संदेश मानी जा रही है।
संभल में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायपालिका ने बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला आदेश दिया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने 13 जनवरी 2026 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी (वर्तमान में एएसपी), इंस्पेक्टर अनुज तोमर तथा 15–20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
यह आदेश यामीन, निवासी खग्गू सराय अंजुमन, की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय उनका 24 वर्षीय बेटा आलम, जो बिस्कुट और रस बेचने घर से निकला था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से गोली मारी गई। गोली लगने से आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।
याचिका में दावा किया गया है कि युवक हिंसा में शामिल नहीं था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर फायरिंग की।
कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा—
“अब कोई बचाने नहीं आएगा। भाजपा का फॉर्मूला है—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो।”
वहीं, संभल पुलिस प्रशासन ने इस न्यायिक आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अदालत के आदेश को “अवैध” बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें पुलिस को क्लीन चिट दी जा चुकी है।
एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी।
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए थे। यह मामला प्रदेश भर में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा।
इस प्रकरण में अब न्यायपालिका के आदेश और पुलिस प्रशासन के रुख के बीच स्पष्ट टकराव नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बनने की संभावना जता रहा है।
चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।
भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।
भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।
अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।
इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
14 जनवरी 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पार्टी के संवेदनशील चुनावी डेटा को सुरक्षित रखा जाए।
हालांकि, ED के वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि छापेमारी के दौरान कोई भी डेटा या दस्तावेज जब्त नहीं किया गया। इस बयान के बाद न्यायमूर्ति सुभ्रा घोष ने TMC की याचिका को निपटा दिया।
इसी सुनवाई के दौरान ED ने अभूतपूर्व और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला तस्करी मामले की जांच के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं I-PAC कार्यालय पहुंचीं और जांच से जुड़े अहम सबूत—एक लैपटॉप और एक ‘हरा फोल्डर’—अपने साथ ले गईं।
ED ने इसे जांच में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताते हुए मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के खिलाफ CBI जांच की मांग की। लेकिन, चूंकि इसी विषय पर ED पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी थी, इसलिए हाई कोर्ट ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी।
15 जनवरी 2026 को मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए आया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया।
शीर्ष अदालत ने—
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी,
पश्चिम बंगाल सरकार,
पुलिस महानिदेशक (DGP) और
कोलकाता पुलिस कमिश्नर
को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक ED अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC कार्यालय और उसके आसपास की सभी CCTV फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि—
“केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का हस्तक्षेप अराजकता (lawlessness) की स्थिति पैदा कर सकता है।”
ED की ओर से अदालत में कहा गया कि यह मामला केवल ‘दखल’ का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई ‘चोरी’ और ‘डकैती’ का है, क्योंकि वह सशस्त्र पुलिस बल के साथ जांच में बाधा डालने पहुंचीं।
वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ममता बनर्जी वहां पार्टी के गोपनीय और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए गई थीं और ED की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण व राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मूल प्रश्न पर विचार करेगा कि—
क्या किसी मुख्यमंत्री का छापेमारी स्थल पर पहुंचना,
और वहां से कथित रूप से दस्तावेज ले जाना,
कानूनी रूप से “जांच में बाधा” और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है या नहीं।
मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
यह मामला केवल कानून तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा, और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाली सुनवाई देश की राजनीति और संघीय ढांचे के लिए दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।
दुर्ग/पाटन।
अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हितों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ओबीसी महासभा जिला इकाई दुर्ग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
यह ज्ञापन प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी महासभा श्री राधेश्याम साहू के निर्देशानुसार, माननीय तहसीलदार महोदय पाटन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ राज्य में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू करने सहित कुल 28 बिंदुओं पर आधारित मांगें रखी गईं।
ज्ञापन में यह प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र एवं राज्य शासन की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं में उनकी जनसंख्या के अनुपात में समुचित हिस्सेदारी प्रदान की जाए, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को साकार किया जा सके।
ज्ञापन की प्रतिलिपि—
माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार,
माननीय गृह मंत्री भारत सरकार,
माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन, तथा
महामहिम राज्यपाल छत्तीसगढ़
के नाम भी प्रेषित की गई है।
इस अवसर पर ओबीसी महासभा जिला दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री भानु प्रताप यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे, जिनमें—
अधिवक्ता रेखराम साहू, ओमप्रकाश यादव, हीरालाल, राहुल यादव, दीपक कुमार यादव, पीताम्बर साहू, योगेश कुमार, चोवाराम, विजय मेश्राम, रमन साहू, शिवकुमार सोनवानी, नंदू वर्मा, सुरेश सिंगोर, वागेस वासा, शंकर, इंदा, हिमांशी नायक सहित अन्य कार्यकर्ता एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं उन्हें उनका वास्तविक हक दिलाने के लिए महासभा का संघर्ष निरंतर और संगठित रूप से जारी रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शासन स्तर पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री समीर पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार 12 जनवरी को ग्राम कचांदुर में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वर विशाल पिता राजकुमार के निवास स्थल पर पहुँचकर आवश्यक हस्तक्षेप किया गया। मौके पर उपस्थित राजकुमार एवं उनके परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराते हुए समझाइश दी गई।
समझाइश के उपरांत नाबालिक युवक राजकुमार (उम्र 19 वर्ष) एवं उनके माता-पिता द्वारा अपनी त्रुटि स्वीकार की गई तथा युवक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात ही विवाह करने की सहमति व्यक्त की गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि इस कार्रवाई के माध्यम से जिले में बाल विवाह की रोकथाम सुनिश्चित की गई है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, उप सरपंच, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी में नियमानुसार पंचनामा भी तैयार किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में बाल विवाह रोकने हेतु सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई का कार्य निरंतर जारी है।
धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। निर्धारित अवधि के भीतर धान बिक्री से शेष रह गए किसानों का शत-प्रतिशत धान खरीदी सुनिश्चित करने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं।
इस संबंध में नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले ने जानकारी देते हुए बताया कि धान खरीदी केन्द्र डौण्डी के अंतर्गत शामिल गांवों के 907 किसानों द्वारा 315.48 हेक्टेयर क्षेत्रफल का रकबा समर्पित किया गया है। उन्होंने बताया कि शेष कृषकों के धान की खरीदी सुनिश्चित करने के साथ-साथ अवैध धान की आवक रोकने हेतु भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और सुचारू संचालन बनाए रखने के लिए राजस्व, खाद्य एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों, साथ ही गठित निगरानी दल द्वारा धान खरीदी कार्य की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।
पार्षद नदारद, बदबूदार व कीड़ेयुक्त पानी पीने को मजबूर जनता अब निगम प्रशासन के दर पर
दुर्ग | विशेष रिपोर्ट
लोकतंत्र में आम जनता और प्रशासन के बीच सेतु माने जाने वाले जनप्रतिनिधि जब नदारद हो जाएं, तब समस्याएं केवल बढ़ती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संकट का रूप ले लेती हैं।
कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों दुर्ग नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 का है, जहां की जनता बदबूदार, कीड़ेयुक्त और अस्वच्छ पानी पीने को मजबूर है।
नल से निकल रहा बदबूदार पानी, उबलाकर पीने को मजबूर लोग
वार्ड नंबर 28 में पिछले कई दिनों से नलों से ऐसा पानी आ रहा है जिसमें—
तेज दुर्गंध है
कीड़े और गंदगी दिखाई दे रही है
जिसे सीधे पीना तो दूर, उपयोग में लाना भी खतरे से खाली नहीं
वार्डवासियों का कहना है कि मजबूरी में पानी को उबालकर, छानकर और अगले दिन इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक भी है।
पार्षद नदारद, जनता असहाय
इस गंभीर समस्या के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि— वार्ड की पार्षद आखिर कहां हैं?
वार्ड नंबर 28 की निर्वाचित पार्षद श्रीमती ममता राकेश सेन (भाजपा) हैं।
हालांकि उनका शासकीय निवास वार्ड में दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वे वार्ड में नियमित रूप से निवास नहीं करतीं, जिससे आम जनता का उनसे संपर्क लगभग असंभव हो गया है।
वार्डवासियों का कहना है कि—
पार्षद वार्ड में दिखाई नहीं देतीं
शिकायत करने पर या तो पुराना बस स्टैंड स्थित कार्यालय जाने को कहा जाता है
या फिर अनिश्चित प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प रह जाता है
जनप्रतिनिधि की अनुपस्थिति, जनता को सीधे प्रशासन के भरोसे छोड़ा
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—
“जब पार्षद उपलब्ध नहीं हैं, तो अब हम सीधे निगम प्रशासन के पास ही जाएंगे।”
यह कथन केवल आक्रोश नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता पर जनता का अविश्वास दर्शाता है।
सोशल मीडिया में उठा मामला, जल विभाग सक्रिय लेकिन…
सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जल विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अब तक—
वार्ड में स्थायी समाधान नहीं हुआ
पार्षद की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई
यही कारण है कि वार्डवासियों की चिंता और बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य संकट की आहट, प्रशासन की परीक्षा
यह मामला केवल पानी की आपूर्ति का नहीं, बल्कि—
जनस्वास्थ्य
लोकतांत्रिक जवाबदेही
और जनप्रतिनिधि की भूमिका का है
यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो वार्ड में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा भी इंकार नहीं किया जा सकता।
अब सवाल सीधे प्रशासन से
क्या जल विभाग तत्काल शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करेगा?
क्या वार्ड की जनता को अभी भी बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ेगा?
और सबसे अहम—
क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता की पीड़ा के बीच अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
निष्कर्ष
वार्ड नंबर 28 की यह स्थिति नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों दोनों के लिए चेतावनी है।
जनता ने वोट देकर प्रतिनिधि चुना है, अनुपस्थिति और मौन देखने के लिए नहीं।
अब देखना यह है कि— प्रशासन समय पर हस्तक्षेप करता है या नहीं,
और जनप्रतिनिधि जनता के बीच लौटते हैं या नहीं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
