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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के प्रधान मंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़े तो ग्रीनलैंड डेनमार्क के साथ रहेगा। ट्रंप ने इसे “नील्सन के लिए बड़ी समस्या” करार देते हुए दोहराया कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का “मालिक” होना आवश्यक है।
ट्रंप का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों के कारण अमेरिका को ग्रीनलैंड केवल लीज पर नहीं बल्कि पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका “कठोर कदम”, यहां तक कि सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
इस पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने एक सुर में ट्रंप की मांगों को खारिज किया है। ग्रीनलैंड के प्रधान मंत्री ने स्पष्ट कहा कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और उसके भविष्य का फैसला केवल वहां के लोग करेंगे।” डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी कि इस तरह की बयानबाजी नाटो की एकता को कमजोर कर रही है और ट्रांसअटलांटिक संबंधों में गंभीर दरार पैदा कर सकती है।
तनाव के बीच डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की अमेरिकी विदेश मंत्री और उप-राष्ट्रपति से मुलाकात प्रस्तावित है, ताकि इस मुद्दे पर राजनयिक समाधान तलाशा जा सके। हालांकि, ट्रंप के रुख ने यूरोपीय सहयोगियों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।
रायपुर / शौर्यपथ।
प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितता सामने आने पर कोण्डागांव जिले की जनपद पंचायत बड़ेराजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चिचाड़ी के पंचायत सचिव श्री हीरामन मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
यह कार्रवाई कलेक्टर जनदर्शन में प्राप्त शिकायत के आधार पर गठित जांच दल की रिपोर्ट के बाद की गई। जांच प्रतिवेदन में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया, जिसके चलते पंचायत सचिव पर छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 एवं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1999 के तहत कार्रवाई की गई।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन के इस कदम से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सरकार गरीबों के आवास से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रायपुर ।
बदलते मीडिया परिदृश्य में प्रभावी, विश्वसनीय और समयबद्ध संचार आज जनसंपर्क की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। इसी चुनौती को अवसर में बदलने के उद्देश्य से जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के लिए आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का आज समापन हुआ। कार्यशाला के दूसरे दिन रणनीतिक संचार, प्रशासनिक भूमिका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यावहारिक उपयोग पर व्यापक और गहन मंथन किया गया।
कार्यशाला में जनसंपर्क विभाग के संचालनालय सहित प्रदेश के सभी जिला कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी शामिल हुए। विशेषज्ञों के साथ संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से अधिकारियों ने आधुनिक जनसंपर्क से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा ने जनसंपर्क अधिकारियों से मीडिया के साथ मजबूत और भरोसेमंद संबंध स्थापित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण समय की आवश्यकता के अनुरूप है और इससे अधिकारियों की पेशेवर दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आधुनिक तकनीकों और टूल्स के माध्यम से अधिकारी अपने दायित्वों का अधिक प्रभावी, तेज और सटीक ढंग से निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव भी दिया।
कार्यशाला के पहले सत्र में ‘आज की जनधारा’ के संपादक एवं जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त अपर संचालक श्री सुभाष मिश्रा ने RACE फार्मूला के माध्यम से जनसंपर्क में उभरते रुझानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि प्रभावी जनसंपर्क केवल सूचना प्रसारण नहीं, बल्कि—
Research (शोध)
Action (कार्य)
Communication (संचार)
Evaluation (मूल्यांकन)
की सतत प्रक्रिया है। इस मॉडल को अपनाकर जनसंपर्क को अधिक रणनीतिक और परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।
दूसरे सत्र में ‘समाचार पच्चीसा’ के संपादक एवं छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने ‘जनसंपर्क की चुनौतियाँ’ विषय पर विचार रखे।
उन्होंने बदलती मीडिया कार्यशैली, डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका, फेक न्यूज और त्वरित एवं तथ्यपरक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को मीडिया की अपेक्षाओं को समझते हुए विश्वसनीय, संतुलित और तथ्यपूर्ण जानकारी समय पर उपलब्ध करानी चाहिए।
तीसरे सत्र में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं लेखक श्री सुशील त्रिवेदी ने प्रशासन में जनसंपर्क अधिकारियों की भूमिका और आवश्यक गुणों पर मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी केवल सूचना वाहक नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी होते हैं। जनभावनाओं को समझकर उन्हें प्रशासन तक पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अंतिम सत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्री जोसेफ जॉन ने जनसंपर्क कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
उन्होंने—
बेहतर आउटपुट के लिए स्पष्ट प्रॉम्प्ट देने की तकनीक
जीरो शॉट से लेकर चेन-ऑफ-थॉट प्रॉम्प्टिंग
एआई हैलुसिनेशन की पहचान
Human-in-the-Loop की अनिवार्यता
पर प्रकाश डाला। साथ ही एआई टूल्स के माध्यम से त्वरित अनुसंधान, कंटेंट री-परपजिंग, तथ्य जांच, विचार मंथन और रोजमर्रा के जनसंपर्क कार्यों को सरल, तेज और प्रभावी बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
कार्यशाला में अपर संचालक श्री जवाहरलाल दरियो, श्री उमेश मिश्रा, श्री संजीव तिवारी, श्री आलोक देव, श्रीमती हर्षा पौराणिक और श्री संतोष मौर्य सहित संचालनालय एवं जिलों में पदस्थ जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित रहे।
सार - यह कार्यशाला रणनीतिक संचार और एआई के माध्यम से जनसंपर्क को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई, जिससे शासन और जनता के बीच संवाद और अधिक प्रभावी एवं भरोसेमंद बनेगा।
डबल इंजन सरकार में बस्तर के सर्वांगीण विकास का रोडमैप तय, तीन साल का एक्शन प्लान मिशन मोड में लागू होगा
रायपुर ।
छत्तीसगढ़ के विकास में दशकों से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व और सुरक्षाबलों के अदम्य साहस से नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाल हो रही है। अब सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि बस्तर अंचल में सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के जरिए जनता का विश्वास और अधिक मजबूत किया जाए। यह बात मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बस्तर के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूर्ण प्रतिबद्ध है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर बस्तर के सर्वांगीण, संतुलित और टिकाऊ विकास के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आगामी तीन वर्षों के लिए एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर उसे मिशन मोड में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने और सचिवों को नियमित रूप से बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेज गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो।
उन्होंने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने—
फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में सतही जल स्रोतों से स्थायी पेयजल समाधान
शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण
दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी
आधार कार्ड निर्माण के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज
सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पर्यटन विकास को लेकर मुख्यमंत्री श्री साय ने—
होम-स्टे को प्रोत्साहन
स्वदेश दर्शन योजना अंतर्गत चिन्हित स्थलों का विकास
बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर का निर्माण
युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने
पर जोर दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने की पहल की सराहना की।
बैठक में—
वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज संग्रहण व प्रसंस्करण
भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति
नवोदय और पीएमश्री स्कूलों का विस्तार
स्वास्थ्य अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेज
पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा
सिंचाई परियोजनाएं, आंगनबाड़ी–बालवाड़ी संचालन
ग्रामीण बस योजना, रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाओं
की विस्तार से समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता से जुड़े प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र विकास को नई गति मिल सके।
बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, श्री पी. दयानंद, डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सार - बस्तर अब हिंसा से विकास की ओर निर्णायक कदम बढ़ा चुका है और सरकार का स्पष्ट संदेश है—शांति, विश्वास और विकास के साथ बस्तर का नया भविष्य गढ़ा जाएगा।
रायपुर/शौर्यपथ / किसानों को ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था को फिर से बहाल करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन प्रक्रिया में जानबूझ कर बाधित किया जा रहा है, इस खरीफ सीजन के धान खरीदी को पूरा होने में अब एक पखवाड़ा से भी कम समय शेष बचा है, यही वो समय है जब बड़े किसानों का धान मंडी में आता है, ऐसे समय में ऑनलाइन टोकन बंद करना किसानों के साथ अन्याय है। यह सरकार धान की खरीदी को दुर्भावना पूर्वक नियंत्रित करने के लिए बहुत ही अव्यावहारिक शर्ते रोज रोज लागू कर रही है, पहले धान खरीदी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि उपार्जन केंद्र में प्रतिदिन काटे गए टोकन और वास्तविक खरीदी में ज्यादा से ज्यादा अंतर लाना है, मतलब जितना टोकन काटा गया है, उतना धान मत खरीदो। धान खरीदी में किसानों को धान बेचने से रोकने की कई तरह से कोशिश की गई है जिसका नतीजा है कि इस बार धान हर सोसाइटियों में अब तक कम खरीदा गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को चोर और तस्कर बता रही है, उनके घरों और खलिहानों में छापे मारे जा रहे हैं, किसानों के मेहनत से उपजाए धान को जप्त कर रही है हकीकत यह है कि प्रदेश में अभी भी करीब 5 लाख ऐसे किसान हैं, जिन्होंने एक बार भी धान नहीं बेचा है। अब अंतिम के 13 दिनों में धान की आवक तेज होगी, इसी को रोकने दुर्भावना पूर्वक किसान विरोधी षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। एक तरफ प्रतिदिन टोकन की मात्रा में यह सरकार कटौती कर रही है, एन आई सी के माध्यम से सोसाइटियों के प्रतिदिन खरीदी की मात्रा को घटाया जा रहा है, दूसरी तरफ सत्यापन के लिए अलग फार्मूला अपनाया जा रहा है ताकि किसानों को अपना पूरा धान बेचने से रोका जा सके। भौतिक सत्यापन के लिए अलग से ऐप बनाया गया है जिसकी ट्रेनिंग पटवारियों को दी जा चुकी है। बिना सत्यापन के किसी भी किसान का धान नहीं खरीदना है। पिछले साल की खरीदी के हिसाब से भौतिक सत्यापन करने का आदेश देकर दबाव बनाया जा रहा है, जिसका विरोध पटवारियों ने किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रकबा समर्पण के नाम पर धान कम खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के किसान जान चुके हैं कि ये डबल इंजन वाली भाजपा सरकार किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती। रायगढ़ जिला पटवारी संघ का ज्ञापन धान खरीदी को लेकर इस सरकार की मंशा को बेहद स्पष्ट करते हैं। पटवारियों ने बड़े ही स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों द्वारा सभी किसानों पर रकबा समर्पण हेतु अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, ये आरोप बेहद ही संगीन है और भाजपा सरकार के किसान विरोधी चेहरे को बेनकाब करने वाला है । कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि इस प्रकार के किसी भी आदेश को तुरंत ही रोका जाए, ऑनलाइन टोकन व्यवस्था पुनः शुरू करें तथा ऐसे किसान विरोधी मानसिकता वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
10 से 850% बढ़ोतरी से गरीब-किसान-व्यापारी त्रस्त, सरकार को भारी राजस्व नुकसान
रायपुर, 13 जनवरी 2026।
जमीन गाइडलाइन दरों में बेतहाशा वृद्धि और दावा–आपत्ति के बाद भी उसमें कोई सुधार नहीं करने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इसे सीधा-सीधा तानाशाही रवैया करार देते हुए कहा कि सरकार जनता की आवाज सुनने को तैयार नहीं है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार ने बिना सर्वे, बिना संवाद और बिना ज़मीनी हकीकत जाने प्रदेशभर में जमीन गाइडलाइन दरों में 10 प्रतिशत से लेकर 850 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी। इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस के साथ-साथ आम जनता, व्यापारी और किसान लगातार विरोध जता रहे हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से घबराकर सरकार ने गाइडलाइन दर वृद्धि पर 31 दिसंबर तक दावा–आपत्ति आमंत्रित करने और उसके बाद दरों में सुधार का आश्वासन दिया था। लेकिन दावा–आपत्ति की अवधि समाप्त होने के बाद भी सरकार ने मनमानी बढ़ोतरी पर कोई फैसला नहीं लिया, जो यह साबित करता है कि दावा–आपत्ति की प्रक्रिया सिर्फ जनता को गुमराह करने का जरिया थी।
उन्होंने कहा कि अब जनता सरकार की मंशा समझ चुकी है और एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि गाइडलाइन दरों में इस तानाशाही बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है—
गरीब परिवार घर बनाने के लिए जमीन नहीं खरीद पा रहे
किसान कृषि भूमि लेने में असमर्थ हैं
व्यापारी व्यावसायिक संस्थान खोलने से पीछे हट रहे हैं
जरूरतमंद लोग जमीन बेच भी नहीं पा रहे
उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री लगभग ठप होने से सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय—
5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री शुरू की गई
गाइडलाइन दरों में 30 प्रतिशत तक की छूट दी गई
इन्हीं फैसलों से प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में जान आई और कोरोना जैसे संकट के समय भी छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही।
धनंजय सिंह ठाकुर ने चेतावनी दी कि मौजूदा सरकार के निर्णय से—
बेरोजगारी बढ़ेगी
रियल एस्टेट सेक्टर में भारी गिरावट आएगी
प्रदेश की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी
उन्होंने सरकार से मांग की कि जमीन गाइडलाइन दर बढ़ोतरी के खिलाफ आई सभी दावा–आपत्तियों का तत्काल निराकरण किया जाए और बढ़ाई गई दरों को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा कांग्रेस और जनता का आंदोलन और तेज होगा।
रायपुर । शौर्यपथ
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर से बालोद प्रवास के दौरान पुरूर से झलमला–बालोद–मोहला–मानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर स्थित देवरानी-जेठानी नाले पर निर्माणाधीन 105 मीटर लंबे उच्च स्तरीय पुल के कार्य का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और उपयोग में लाई जा रही सामग्री की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की।
उप मुख्यमंत्री साव ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
श्री साव ने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पुल निर्माण कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए, ताकि क्षेत्रवासियों को शीघ्र ही सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही उन्होंने निर्माण स्थल के आसपास संकेतक बोर्ड और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निरीक्षण के बाद उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि नागरिकों को समय पर, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक बिना विलंब पहुंचे।
नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 का मूल उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस, अनुशासित और परिणामोन्मुख आर्थिक रोडमैप तैयार करना है। बजट में जहां एक ओर राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल आवंटन पर विशेष जोर दिखाई देता है।
राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद
वित्त मंत्री और उनकी टीम ने बजट 2026 में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार का मानना है कि संतुलित घाटा ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है और महंगाई पर नियंत्रण में सहायक होता है। बजट से जुड़े आधिकारिक आंकड़े और नीति विवरण पीआईबी (PIB) के माध्यम से सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे नीतिगत पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पूंजीगत व्यय पर जोर: इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ इंजन
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन माना गया है। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देकर सरकार रोजगार सृजन, निजी निवेश को प्रोत्साहन और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दृष्टिकोण मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को स्थायी गति देने में सहायक होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही: हर रुपये का डिजिटल हिसाब
डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करते हुए बजट में ‘हर रुपये का हिसाब’ सुनिश्चित करने की नीति अपनाई गई है। सरकारी योजनाओं और खर्चों की विस्तृत जानकारी बजट इंडिया पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे नागरिकों को यह पता चल सके कि करदाताओं का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा।
समावेशी विकास: मानव पूंजी पर निवेश
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को केंद्र में रखा गया है। सरकार का फोकस ऐसी मानव पूंजी तैयार करने पर है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बना सके। ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा भी बजट की प्राथमिकताओं में स्पष्ट झलकती है।
2047 का रोडमैप
वित्त मंत्रालय की टीम का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन + पूंजी निवेश + पारदर्शी शासन + समावेशी विकास—इन चार स्तंभों पर आधारित यह बजट भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 केवल एक साल का आय-व्यय विवरण नहीं, बल्कि आने वाले दो दशकों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ बनकर सामने आया है।
जनसंपर्क अधिकारियों की राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ
रायपुर।
मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि बदलते दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को एक्सक्लूजिव और प्रभावशाली स्टोरी तैयार कर उनके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों—प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया—का समन्वित उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में “जनसंपर्क की नई चुनौतियाँ” विषय पर आयोजित जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सूचना संप्रेषण के माध्यम तेजी से बदल रहे हैं और नई-नई तकनीकों के आगमन से जनसंपर्क के दायरे का भी विस्तार हुआ है। ऐसे में जनसंपर्क अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने कार्य को अधिक प्रमाणिक, प्रभावी और समयबद्ध बनाना होगा।
आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि एआई टेक्नोलॉजी के उपयोग से कम प्रयास में अधिक कार्य संभव है। फोटो और वीडियो एडिटिंग, कंटेंट प्रेजेंटेशन और सोशल मीडिया प्रबंधन जैसे कार्यों में एआई टूल्स जनसंपर्क को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे तकनीकी रूप से स्वयं को निरंतर अपडेट रखें, ताकि शासन की नीतियों और निर्णयों को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके।
उन्होंने पत्रकारिता स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को जनसंपर्क विभाग में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया।
उद्घाटन सत्र में अपर संचालक श्री जवाहरलाल दरियो, श्री संजीव तिवारी, श्री उमेश मिश्रा एवं श्री आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने कार्यशाला के उद्देश्य, दो दिवसीय सत्रों की रूपरेखा और प्रतिभागियों से अपेक्षाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को आधुनिक, सशक्त और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत “पाठक-अनुकूल लेखन: सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना” विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक श्री शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बातों की पहचान, सरल एवं सुबोध भाषा, प्रभावी हेडलाइन और सशक्त लीड पैराग्राफ लिखने के गुर बताए। साथ ही प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट की स्थिति में मीडिया से संतुलित एवं समयबद्ध संवाद पर विस्तार से चर्चा की।
द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक श्री विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट की भूमिका की जानकारी दी।
तीसरे सत्र में सोशल मीडिया एवं एआई टूल्स पर चर्चा हुई। डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ श्री राकेश साहू ने एआई आधारित डिजिटल टूल्स के माध्यम से फोटो और वीडियो एडिटिंग के व्यावहारिक उपयोग पर मार्गदर्शन दिया।
दिन के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक श्री लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन और आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपायों की जानकारी साझा की।
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रदेशभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों को बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप दक्ष बनाकर जनसंपर्क को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाना है।
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