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June 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

पटना / शौर्यपथ / बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो घटक दलों में बढ़ती दूरियों के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने मंगलवार को कहा कि जद(यू) ने यह साफ कर एक “एहसान” किया कि दोनों दलों में कभी गठबंधन नहीं था. लोजपा ने एक बयान में कहा, “हम जनता दल (युनाइटेड) के इस बयान का स्वागत करते हैं कि उनका कभी लोजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं रहा. जद(यू) नेता केसी त्यागी त्ने हम पर एहसान किया है.” इसमें कहा गया कि पार्टी सिर्फ उन लोगों से हाथ मिलाएगी जो बिहार को देश का अग्रणी राज्य बनाने के पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के एजेंडे का समर्थन करेंगे.
त्यागी ने मंगलवार को कहा था कि कोई भी दल जो राज्य में राजग का घटक है उसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करना होगा. उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता यह घोषणा कर चुके हैं कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जद(यू) का हमेशा से बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन रहा है लेकिन लोजपा के साथ नहीं.
उनका यह बयान तब आया है जब लोजपा ने पासवान को यह तय करने के लिये अधिकृत किया है कि कुमार के नेतृत्व वाले जद(यू) के खिलाफ आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना है या नहीं. पार्टी ने पासवान को 143 विधानसभा क्षेत्रों के लिये उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिये भी अधिकृत किया है.

श्रीनगर / शौर्यपथ / जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने मंगलवार को कहा कि वो श्रीनगर का अपना सरकारी आवास अक्टूबर से पहले छोड़ देंगे. उन्होंने ट्विटर पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को लिखी अपनी चिट्ठी साझा की है, जो उन्होंने जुलाई में भेजी थी. उमर अब्दुल्ला ने अपने ट्वीट में कहा कि इसके लिए उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया है और अपनी मर्जी से सरकारी आवास खाली कर रहे हैं.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'मैं श्रीनगर में अपना सरकारी आवास अक्टूबर खत्म होने तक छोड़ दूंगा. यहां इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले साल मीडिया में जैसी खबरें चलाई गई थीं कि मुझे इसके लिए नोटिस मिला है, उसके उलट मैं अपनी मर्जी से आवास खाली कर रहा हूं.' इसके साथ ही उन्होंने जम्मू कश्मीर के हॉस्पिटैलिटी एंड प्रोटोकॉल के इंचार्ज ऑफ एस्टेट्स को भेजी गई चिट्ठी भी शेयर की है.
उमर अब्दुल्ला ने इस चिट्ठी में कहा है कि उन्हें श्रीनगर के गुपकर रोड के वीवीआईपी इलाके में 2002 में श्रीनगर का सांसद बनने के बाद यह आवास अलॉट किया गया था. उन्होंने कहा है कि उन्होंने परिसर और इससे जुड़े घरों को अक्टूबरस 2010 से जनवरी, 2015 तक अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास की तरह इस्तेमाल किया था. जब वो कार्यकाल मुक्त हुए तो 'नियमों के मुताबिक मैं श्रीनगर या फिर जम्मू में सरकारी आवास में रह सकता था और मैंने श्रीनगर में रहने को चुना.'
उन्होंने लिखा कि कुछ महीनों पहले पूर्व मुख्यमंत्रियों के अधिकारों को लेकर किए गए बदलाव के बाद अब मेरा यहां रहना अनाधिकृत हो गया है, क्योंकि सुरक्षा या फिर किसी और आधार पर मेरे अलॉटमेंट को रेगुलराइज़ करने की कोई कोशिश नहीं की गई है. यह मुझे अस्वीकार है. मेरे पास कभी ऐसी कोई सरकारी संपत्ति नहीं रही है, जो मुझे पद के हिसाब से न मिली हो और मेरा आगे भी ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है.

नई दिल्ली / शौर्यपथ / लॉकडाउन के समय प्‍लेन में यात्रा करने के लिए बुक की गई टिकटों की पूरी राशि यात्रियों को रिफंड करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में केंद्र से कहा है कि वह लॉकडाउन के दौरान यात्रा के लिए बुक किए गए हवाई टिकटों की पूर्ण वापसी पर याचिकाकर्ताओं के स्पष्टीकरण का जवाब दे.कोर्ट ने एयरलाइंस और अन्य पक्षकारों से लॉकडाउन के दौरान बुक किए गए टिकटों के पूर्ण वापसी के लिए केंद्र के प्रस्ताव का जवाब देने के लिए भी कहा है.ज्यादातर एयरलाइंस केंद्र के प्रस्ताव से सहमत हैं जबकि कुछ ने जवाब के लिए समय मांगा है.
याचिकाकर्ताओं में से एक ने मांग की है कि राहत उन सभी को दी जानी चाहिए जिनकी उड़ानें लॉकडाउन के कारण रद्द कर दी गई थीं. मामले में अपना पक्ष रखते हुए केंद्र ने स्पष्ट किया कि रिफंड केवल भारत से बुक किए गए टिकटों पर लागू होता है और यदि विदेशी एयरलाइंस विदेश से बुक करती हैं, तो भारत का अधिकार क्षेत्र नहीं है. मामले में अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि लॉकडाउन के दौरान बुक किए गए टिकटों के लिए एयरलाइनों द्वारा 15 दिन के भीतर पूरी राशि वापस दी जानी चाहिए और यदि कोई एयरलाइन वित्तीय संकट में है और ऐसा करने में असमर्थ है तो उसे 31 मार्च, 2021 तक यात्रियों की पसंद का यात्रा क्रेडिट शेल प्रदान किया जाना चाहिए.
घरेलू, अंतरराष्‍ट्रीय और विदेशी एयरलाइनों में लॉकडाउन के दौरान बुक किए गए टिकटों के लिए पूर्ण राशि वापस करने का प्रस्ताव दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में नागर विमानन के निदेशक ओके गुप्ता ने कहा कि घरेलू एयरलाइनों के लिए यदि टिकटों को सीधे एयरलाइन या एक एजेंट के माध्यम से लॉकडाउन अवधि दौरान 25 मार्च-3 मई के बीच में यात्रा करने के लिए बुक किया गया था तो ऐसे सभी मामलों में, एयरलाइंस द्वारा तुरंत पूरा रिफंड दिया जाएगा. केंद्र ने कहा कि क्रेडिट शेल के उपभोग में देरी होने पर यात्री को क्षतिपूर्ति देने के लिए इंसेन्टिव मैकेनिज्म होगा, जैसे 30 जून, 2020 तक टिकट रद्द होने की तारीख से, क्रेडिट शेल के मूल्य (पहले ली गई टिकट के मूल्य) में 0.5 फीसदी की वृद्धि होगी.

हलफनामे में आगे कहा गया है कि इसके बाद क्रेडिट शेल के मूल्य को मार्च 2021 तक प्रति माह अंकित मूल्य के 0.75 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा.क्रेडिट शेल ट्रांसफर भी किया जा सकेगा. यात्री क्रेडिट शेल किसी भी व्यक्ति को ट्रांसफर कर सकता है और एयरलाइंस इस तरह के ट्रांसफर का सम्मान करेगी. एयरलाइंस इस तरह के ट्रांसफर की सुविधा के लिए एक मैकेनिज्म तैयार करेगी, वहीं मार्च 2021 के अंत तक एयरलाइन क्रेडिट शेल धारक को नकद वापस कर देगी.केंद्र ने कहा कि यह समाधान व्यावहारिक है क्योंकि यह यात्रियों के साथ-साथ एयरलाइंस के हितों को संतुलित करता है. उसने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट से इसके कार्यान्वयन के लिए एक उपयुक्त आदेश पारित करने का आग्रह भी किया था.

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / क्रोध करना किसी भी व्यक्ति के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से अच्छा नहीं होता है। क्रोध करने से व्यक्ति को ना सिर्फ शारीरिक बल्कि आर्थिक हानि भी होती है। जीवन में छोटी-मोटी बात पर गुस्सा करना नॉर्मल बात है। लेकिन ऐसे लोग होते हैं जो अपने गुस्से पर कंट्रोल नहीं कर पाते और बीपी,शुगर और सिर चकराने आदि जैसे कई रोग खुद को लगा बैठते हैं। ऐसे में जरूरी है कि गुस्से को कंट्रोल करने के उपाय के साथ-साथ कुछ अन्य तरीके भी अपनाए जाएं, जिससे गुस्सा शांत हो सके। वर्कआउट, हेल्दी रूप से गुस्से को कम करने का सबसे अच्छा तरीका माना गया है। लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो बिना वर्कआउट के ही अपने गुस्से को शांत करना चाहते होंगे। तो आइए जानते हैं कैसे आसान उपाय अपनाकर आप अपने गुस्से पर काबू पा सकते हैं।
गहरी लंबी सांस-
जब कभी आपको गुस्सा आए तो तुरंत गहरी लंबी सांसे लें, कोई सीनरी या फोटो देखें, गाना सुनें, योगा करें या फिर कोई अच्छी किताब पढ़ लें।
मेडिसिन बॉल जमीन पर मारें-
मेडिसिन बॉल काफी एक्सप्लोसिव एक्सरसाइज होती है। इस वर्कआउट के एक-दो राउंड पूरा करते ही आप महसूस करेंगे कि आपका गुस्सा काफी शांत हो गया है।
शेयर करें फीलिंग-
अपने इमोशन को कभी भी कंट्रोल नहीं करना चाहिए। अपने गुस्से में कोई गलत फेसला करने से अच्छा है आप किसी ऐसे अपने से बात करें, जो आपको समझता हो। आप अच्छा महसूस करेंगे।
HIIT सर्किट एक्सरसाइज-
HIIT वर्कआउट सिस्टम का अभ्यास करने से आप अपने भीतर फील-गुड हार्मोन को पंप कर सकते हैं। इसे करने से भले ही आप तकनीकी रूप गुस्सा कर रहे हों लेकिन एंडोर्फिन नामक हार्मोन आपके भीतर रिलीज होता है, जो दिमाग को शांत करके आपके गुस्से को भी शांत करने में मदद करता है। HIIT सर्किट प्लान में आप इन एक्सरसाइज को शामिल कर सकते हैं जैसे-बैटल रोप, टो-टच, हाई नी,स्प्रिंट,पुश स्लेम/टायर, बट किक,जंप स्क्वाट ,माउंटेन क्लाइंबर्स आदि।
बॉक्सिंग क्लास-
अपने गुस्से को शांत करने के लिए सबसे पहले अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर एक ताकतवर पंच के साथ पंचिंग बैग पर वार करें, जो कि नेगेटिव एनर्जी को रिलीज करने और गुस्सा कम करने में मदद करेगा। ऐसा करते समय ध्यान रखें कि कहीं आप खुद को ही चोटिल न कर लें।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / मिष्टी दोई बंगाल की फेमस मिठाई है, जिसे उपवास या किसी त्यौहार जैसे खास उत्सव में बनाया जाता है। मि​ष्टी दोई, एक प्रकार का ​मीठा दही है, जिसे गाढ़े दूध में चाशनी मिलाकर बनाया जाता है। बंगाल का यह खास डेजर्ट खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। तो देर किस बात की आइए जानते हैं घर पर ही कैसे बनाया जाता है मिष्टी दोई।
मिष्टी दोई बनाने के लिए सामग्री-
-दूध - 750 मिलीलीटर
-चीनी- 7½ टेबल स्पून
-पानी - ¼ कप
-ताजा दही - ½ कप
-कटे हुए बादाम
- गार्निशिंग के लिए एल्युमिनियम फॉइल
मिष्टी दोई बनाने का आसान तरीका-
मिष्टी दोई बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में दूध गर्म करें। दूध को इतना उबालें, कि यह आधा रह जाए। अब एक दूसरे पैन में चीनी डालकर उसे धीमी आंच पर चलाते रहें। गैस को बार-बार बंद और चालू करते रहे, ऐसा तब तक दौहराए, जब तक कि ची​नी पिघलकर ब्राउन न हो जाए। अब गैस बंद कर, पानी मिलाकर उसे अलग रख लें। दूध आधा रह जाए तो इसमें तैयार चाशनी मिलाएं। दूध में चाशनी मिलाने के बाद गैस बंद कर दें। दूध को ठंडा होने के लिए रख दें।
अब ताजा दही मिलाकर अच्छे से मथे। ​इसके बाद इसे सर्व करने वाले बर्तन या मटको में डालें। इन मटको को एल्युमिनियम फॉइल से कवर करके 10-12 घंटे के लिए ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दें। उसेक बाद फॉइल हटाकर, इन्हें कटे हुए बादाम के साथ गार्निंश कर ठंडा- ठंडा मेहमानों को सर्व करें।

धर्म संसार / शौर्यपथ / महालक्ष्मी व्रत इस साल 10 सितंबर 2020 को रखा जाएगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी का व्रत रखने से धन, यश और तरक्की की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि गज लक्ष्मी यानी हाथी पर बैठी महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। अश्विन मास में कृष्ण अष्टमी की तिथि को महालक्ष्मी व्रत रखा जाता है।
महालक्ष्मी व्रत में किन बातों का रखें ध्यान-
मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के रूप श्रीगज लक्ष्मी, श्रीवीर लक्ष्मी, श्री विजय लक्ष्मी, श्री आदि लक्ष्मी मां, श्री धान्य लक्ष्मी, श्री संतान लक्ष्मी मां की पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत के दिन पूजा स्थल पर हल्दी से कमल बनाकर उस पर मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापना करें और मूर्ति के सामने श्रीयंत्र और सोने-चांदी के सिक्के रखें।
महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी के 8 रूपों की पूजा करने के साथ ही महालक्ष्मी मंत्र का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है। कहते हैं मंत्र का जाप करने से मां लक्ष्मी का साथ हमेशा बना रहता है।
माना जाता है कि मां लक्ष्मी की पूजा श्रीयंत्र के बिना अधूरी होती है। कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा करने से आर्थिक स्थिति सुधर जाती है।
माना जाता है कि मां लक्ष्मी पूजन में पानी से भरे कलश को पान के पत्तों से सजाने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही कलश के ऊपर नारियल रखना भी शुभ माना जाता है।
कलश के पास हल्दी से कमल बनाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। कहते हैं कि महालक्ष्मी व्रत में मां लक्ष्मी को सोने के गहनों से सजाने से भी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

दुर्ग / शौर्यपथ / वर्तमान में दुर्ग जिले में कोरोना संक्रमण एक विस्फोटक के रूप में सामने आया है . सारा शहर दहशत में है . प्रतिदिन मरीजो के मिलने की संख्या बढती जा रही है रिकवरी रेट भी कम होते जा रहा है . प्रशासन अपने स्तर पर लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है . जिलाधीश द्वारा प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा की जा रही है बावजूद इसके कोई ना कोई ऐसी घटना / वाक्य सामने आ रहा है जो व्यवस्था की लापरवाही पर आम इंसान को सोंचने पर मजबूर कर दे रहा है . यु तो प्रशासन का कहना है कि हर मरीज का ख़ास ध्यान रखा जा रहा है किन्तु वही दूसरी तरफ मरीज के परिजन परेशान दिखाई दे रहे है जिनके पास कम्युनिकेशन की व्यवस्था है और नार्मल स्थिति में है वो तो अपने परिजनों से चर्चा कर ले रहे है और वस्तुस्थिति के बारे में बता रहे है किन्तु ऐसे भी कई मरीज है जो गंभीर स्थिति में है और बात करने की हालत में नहीं है ऐसे मरीज के परिजन काफी परेशान हो रहे है कारण एक मात्र उन्हें अपनों की खबर नहीं मिल रही कि वो कैसे है अंदर किस दशा में है इलाज से क्या लाभ हो रहा है स्थिति कैसी है ऐसे ही एक मामले में शौर्यपथ समाचार पत्र को डोमन देवांगन से कुछ चौकाने वाले तथ्य पता चला है . डोमन देवांगन के अनुसार उनके पिता 1 सितम्बर से भर्ती है और उनके पास मोबाइल भी है किन्तु फिर भी उनकी बात नहीं हो पा रही है . दो तीन दिन पहले अस्पताल से देर रात सुचना मिली कि उनके पिता की हालत खराब है और वो चाहे तो किसी अन्य अस्पताल में ले जा सकते है . ऐसी सुचना मिलने के बाद डोमन सिंह को अस्पताल प्रबंधन से कोई जानकारी नहीं मिली ना कोई चर्चा हुई पिछले तीन दिनों से डोमन देवांगन मानसिक रूप से परेशानं है कि किस हाल में उनके पिता जी है . डोमन देवांगन के शब्दों में उनकी व्यथा कुछ इस प्रकार से शौर्यपथ समाचार पत्र से साँझा की गयी .


मेरा नाम डोमेन प्रसाद देवाँगन है पिताश्री रामकुमार देवाँगन उम्र 65 है जोकि उन्हें थोड़ी सी उनकी तबीयत खराब थी तो मैंने दुर्ग के सरकारी अस्पताल में उनकी जांच कारवाई कोविड-19 जांच कराने पर पता चला कि वाह नेगेटिव हैं परंतु उसी सुबह फिर से डॉक्टरों के कहने पर जांच करवाई तो वह रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई मेरे पिता श्री राम कुमार देवांगन जी को आज 8 दिन हो गए हैं तथा उनके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं मिल पा रही है मैंने हॉस्पिटल के नंबर पर कॉल लगाया परंतु वहां कोई निराकरण नहीं हुआ मेरे द्वारा प्रतिदिन कॉल किया जाता है परंतु वहां से कोई जवाब नहीं आता 6 तारीख शाम रात्रि 9:00 बजे शंकरा हॉस्पिटल से कॉल आया कि आपके पापा की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है आप उनको जहां ले जाना चाहे ले जा सकते हैं परंतु मेरे द्वारा उनको रिटर्न कॉल लगाया गया पर वह नहीं उठाए इतनी ही बात हुई थी मेरे द्वारा कॉल पर अब तक मैं प्रतिदिन उनको रोज कॉल कर रहा हूं फिर भी वहां फोन नहीं उठाया जाता . यहां तक मुझे यह भी जानकारी नहीं है कि वह कौन से वार्ड में है और कौन से आईसीयू में है .


क्या अस्पताल प्रबंधन को ऐसी व्यवस्था नहीं करनी चाहिए कि गंभीर मरीजो का हाल एक निश्चित समय पर उनके परिजन को बताते रहे ताकि परिजन जो मानसिक तकलीफ से गुजर रहे है तोड़ी राहत मिले क्या प्रशासन इस दिशा में कोई सार्थक कदम उठाएगा ?

धर्म संसार / शौर्यपथ / अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ऋषि विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इस दिन को विश्वकर्मा पूजा और विश्वकर्मा डे कहा जाता है। इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर (बुधवार) को मनाई जाएगी। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार मनाते हैं। इसलिए फैक्ट्रियों से लेकर कंपनियों तक में विश्वकर्मा पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु, ऋषि विश्वकर्मा और औजारों की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त-

चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर)- 11 बजकर 1 मिनट से।
चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर)- 7 बजकर 56 मिनट तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक।

ऐसे हुई थी भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु भगवान सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। कहते हैं कि धर्म की 'वस्तु' नामक स्त्री से जन्मे 'वास्तु' के सातवें पुत्र थे। जो शिल्पकार के जन्म थे। वास्तुदेव की 'अंगिरसी' नामक पत्नी से ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। माना जाता है कि अपने पिता की तरह ही ऋषि विश्वकर्मा भी वास्तुकला का आचार्य बनें। माना जाता है कि भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और भगवान शिव का त्रिशूल भी ऋषि विश्वकर्मा ने ही बनाया था। माना जाता है कि भगवान शिव के लिए लंका में सोने के महल का निर्माण भी विश्वकर्मा जी ने ही किया था। कहते हैं कि रावण ने महल की पूजा के दौरान इसे दक्षिणा के रूप में ले लिया था।

 

धर्म संसार / शौर्यपथ / धन की देवी लक्ष्मी जी को खुश करने के लिए मां की पूजा अर्चना की जाती है। दिवाली पर भी मां लक्ष्मी के आगमन के लिए महीने भर पहले से लोग घरों की साफ-सफाई शुरू कर देते हैं। मां लक्ष्मी अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन्हें धन और वैभव का वरदान देती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिस इंसान से माता लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होती, उन्हें धन का अभाव का सामना करना पड़ता है।

कुछ ऐसी मान्यताएं हैं जिनमें कहा गया है कि शाम या रात के वक्त इन कामों को करने से माता लक्ष्मी नाराज होती हैं। इसलिए हमें इन कामों को नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं इन कामों के बारे में:

1.ऐसा कहा जाता है कि शाम के वक्त या रात में दूध या दही को किसी को देना नहीं चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि शाम के समय आप इन्हें बाहर से खरीदकर घर में तो ला सकते हैं, लेकिन इन्हें घर से बाहर किसी को न दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं।

2. जिस तरह सुबह घर में पूजा करने से पहले साफ-सफाई करते हैं, उसी प्रकार शाम को भी घर में सूरज के अस्त होने से पहले झाड़ू जरूर लगाएं। घर में शाम को भी साफ-सफाई रखें। खासकर मुख्य द्वार पर कभी भी गंदगी न रहने दें।

3. रात को रसोईघर में साफ-सफाई करने के बाद ही सोना चाहिए। रात को घर में झूठे बर्तन बिल्कुल भी ना छोड़ें। इस बात का ध्यान रखें कि किचन पूरी तरह से साफ रहे।

4. मां लक्ष्मी की कृपा से ही हमें अन्न की भी प्राप्ति होी है। इसलिए कभी भी अन्न का अनादर न करें। इसके साथ ही कभी भी खाने को छोड़ना नहीं चाहिए, इससे मां लक्ष्मी नाराज होती हैं। जिससे जीवन में धन, वैभव में कमी आती है।

5. इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि जिस घर में महिलाओं का अपमान होता है, वहां लक्ष्मी जी वास नहीं करती हैं। इसलिए महिलाओं का हमेशा आदर करना चाहिए। इसके अलावा घर में शाम के समय मीठा बनाकर मां लक्ष्मी जी को भोग लगाना चाहिए।

 

एक ही बिल्टी पर कई कई ट्रीप मारने के चक्कर में ले रहे है लोगों की जान
आरटीओ और ट्राफिक कैसे लगाये इनके गति पर लगाम, हर महिना आने वाली लक्ष्मी ने बांध रखे हैं इनके हाथ
दोपहिया वाहनों पर घौंस जमा चालान काटने वाली पुलिस क्यों नही करती बड़े वाहनों पर कार्यवाही

भिलाई / शौर्याथ / तीन दिन के ही अंतरात में आज एक फिर हाईवा ने एक को कुचल कर मौत के घाट उतार दिया। अभी पिछले तीन दिन पहले ही अहिवारा रोड पर बागडूमर के पास एक हाईवा ने एक दम्मति को ठोकर मातरे हुए एक महिला को कुचल दिया था और आज दोपरह साढे 12 बजे बोरसी रोड में बोरसी तालाब के पास एक हाईवा ने अपने दो पहिया वाहन से जा रहे एक 16 वर्षीय किशोर को कुचल कर यमलोक पहुंचा दिया। हुडको निवासी मृतक अर्पित चांदू अपनी मां को बोरसी स्थित स्कूल छोड़कर घर लौट रहा था इसी दौरान सामने से अत्यधिक तेज गति में आ रहे हाईवा वाहन क्रमंाक सीजी 07 डी 7269 के चालक ने लापरवाही पूर्वक चलाते हुए कुचल दिया और उसके बाद गाड़ी को छोड़कर फरार हो गया। गंभीर घायल अवस्था में किशोर को जिला अस्पताल ले जाया गया। परीक्षण के पश्चात डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया । पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर वाहन जप्त कर लिया है।
हाईवा द्वारा लोगों को कुलचने का प्रमुख जिम्मेदारी आरटीओ विभाग और पुलिस विभाग
पिछले कई सालों का रिकार्ड देखा जाये तो सबसे अधिक लोगों की हाईवा से कुचलने पर मौत हो गई है। दुर्ग-भिलाई के शहरी एवं इससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों में हाईवा कुछ सालों से यमराज बन कर घूम रहे है और कुसमय लोगों को कुचल कर मौत के घाट उतार रहे हैं। इनके तेज गति पर आरटीओं और ट्राफिक पुलिस लगाम लगाने में असफल इसलिए है कि इन दोनों विभाग को इन हाईवा के संचालकों द्वारा हर माह लक्ष्मी प्राप्त हो जाती है, जिसके कारण इन दोनो विभागके हाथ बंधे हुए है,इसलिए आरटीओं और पुलिस वालें इन वाहनों पर लगाम नही लगा रहे है। लोग मरे तो मरे, इन दोनो विभाग को लोगों की जान की परवाह नही है बल्कि केवल इनको अपने मंथली से मतलब है। इसलिए सडक पर यमदूत बनकर दौड़ रही इन हाईवा में जीपीएस सिस्टम लगा है कि नही, और फिटनेस से लेकर बाकी किसी भी चीज पर आरटीओ द्वारा ध्यान नही दिया जा रहा है। जिले के जितने भी हाईवा है, उसमें से 95 प्रतिशत हाईवा केवल अवैध कारोंबार में लिप्त है, और ये एक बिल्टी पर दिन रात मुरम, रेती, गिट्टी से लेकर अन्य खनिजों को ढुलाई करते है इनके बिल्टी कोरा रहता है, इसमें न तो समय रहता है और ना तो तारीख। जब कोई घटना दुर्घटना हो जाता है तो उसमें समय व दिनांक डालकर थाने में उसको दिखा देते है। ये सभी कार्य हाईवा वालों द्वारा अधिकंातर अवैध खनिजों को जिस रास्ते से ढुलाई करते है, उन रास्ते में पढने वाले खनिज चौकी, पुलिस थाना और आरटीओं से पूरी सेटिंग के साथ धड़ल्ले से आपा धापी में ज्यादा ट्रीप लगाने और माल पहुंचाने के लिए अत्यंत ही तेज गति से हाईवा के ड्रायवर चलाते है, और रास्ते में कोई भी आये सीधे कुचलते हुए निकल लेते है।
देर रात तक ट्राफिक पुलिस बंद करे हाईवा और भारी वाहनों का परिचालन नही तो जाती रहेग ऐसे ही जान
जिले के पुलिस कप्तान बदलने के बाद लोगों की उम्मीद जागी थी कि इस व्यवस्था में कुछ सुधार होगा लेकिन इस मामले में कोई सुधार नही बल्कि और इनकी गतिविधियां और तेज हो गई है। पहले दिन में एक निश्चित समय तक हाईवा सहित भारी वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था लेकिन तत्कालीन एएसपी एस बी सिंह ने लोगों की जान की परवाह किये बिना फिर इन हाईवा और भारी वाहनों के किसी भी समय परिचालन की अनुमति दे दी थी, जिसका खामियाजा आज आम जनता भुगत रही है, और इनके कारण आज लोग इनकी चपेट में आकर मौत के मुंह में समा रहे है, किसी का जवान बेटा बेटी को किसी का माता पिता खो रहे है। हमारी सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग बनाया गया था लेकिन ये कुछ सालों से देखने में मिल रहा है कि ये आम लोगों की सुरक्षा छोडकर केवल अमीरों की जी हुजूरी करते है और कानूनी कार्यवाही भी उन्ही के हिसाब से करते है।

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