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दुर्ग / शौर्यपथ / नगर निगम सीमा क्षेेत्र के आम नागरिक एवं गणोशत्सव समिति गणेश विसर्जन ठगड़ाबांध, शिवनाथ नदी गुरुद्वारा, कसारीडीह शीतला तालाब, और उरला का बांधा तालाब में सुविधाजनक पूर्वक कर सकेगें। इन स्थानों पर नगर निगम दुर्ग द्वारा साफ-सफाई के साथ पहुॅच मार्ग को दुरुस्त कर लाईट और माईक की व्यवस्था की गई है।
उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी महापौर धीरज बाकलीवाल के निर्देशानुसार शहर में गणपति विसर्जन के लिए चार स्थानों पर तैयारी और व्यवस्था किया जा रहा है। इसके तहत् शिवनाथ नदी गुरुद्वारा रोज के गड्ढो को डस्ट से भर कर समतलीकरण किया जा रहा है वहीं कसारीडीह शीतला तालाब, ठगड़ाबांध, और उरला बांधा तालाब पार की साफ-सफाई करायी गई । इन जगहों पर पहुॅच मार्ग में पर्याप्त लाईट की व्यवस्था की जा रही है वहीं माईक और साफ-सफाई करायी गई ।
दुर्ग / शौर्यपथ / कलेक्टोरेट सभागार में आज हुई बैठक में छग चेंबर ऑफ कॉमर्स भिलाई ईकाई के पदाधिकारियों ने बाजारों को लेकर कई सुझाव दिए। कलेक्टर डॉ सुरेश्वर भूरे के साथ हुई बैठक में व्यापारियों की ओर से चेंबर के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। प्रदेश उपाध्यक्ष गार्गी शंकर मिश्रा ने बताया कि भिलाई चेम्बर द्वारा यह सुझाव प्रेषित किया गया कि सभी दुकाने सुबह 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुलने की अनुमति प्रदान की जाए।
इस मौके पर भिलाई चेंबर के संयोजक अजय भसीन ने अपनी बात प्रस्तुत करते हुए कहा कि रविवार दुकान बंद होने की वजह से शनिवार व सोमवार को बाजारों में अतिरिक्त भीड़ हो जाती है। इसलिए साप्ताहिक अवकाश गुमास्ता एक्ट के तहत ही हो। भिलाई के सभी बाजारों में साप्ताहिक अवकाश वाले दिन दुकाने बंद रहे यह सुनिश्चित किया जाए। मेडिकल स्टोर जो शाम 7 बजे बंद हो रहे है उन्हें भी रात्रि 9 बजे खोंलने की अनुमति दी जाए। पेट्रोल पंप को भी आवश्यक वस्तु के तहत रात्रि तक खोंलने कि अनुमति दी जाए। कलेक्टरेट में आयोजित बैठक में चेंबर की ओर से अश्वनी देवानी,नरेश वासवानी, रवि विजवानी, शंकर सचदेव व पदाधिकारी उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / संसदीय क्षेत्र के लिए सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में आज अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए। बैठक में सड़कों में दुर्घटनाओं को रोकने सहायक सड़कों पर रंबल स्ट्रिप बनाने, आवारा मवेशियों को सड़क से हटाने ड्राइव चलाने तथा स्ट्रीट लाइट की समस्या वाली सड़कों पर विशेष रूप से कार्य करने का निर्णय लिया गया। बैठक में सांसद विजय बघेल ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की वजह से बहुत सी अनमोल जाने जाती हैं लेकिन इंजीनियरिंग साइड से थोड़े से तकनीकी परिवर्तन कर बहुत सी दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं। इस संबंध में कार्य किया जाए।
सांसद विजय विजय बघेल उन्होंने कहा कि जहां पर जरूरत है वहां रंबल स्ट्रिप और संकेतक लगाए जाएं। जो ब्रेकर अनुपयुक्त हैं अथवा इंजीनियरिंग की दृष्टि से सही नहीं बने हैं उन्हें हटाने की और ठीक करने की कार्रवाई की जाए। बैठक में आवारा मवेशियों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं पर चर्चा की गई। सदस्यों ने कहा कि गौठानों के निर्माण हो जाने की वजह से पशुओं को यहां रखने में आसानी होगी। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिये कि इसके लिए लगातार ड्राइव चलाया जाए। भिलाई स्टील प्लांट एरिया की कुछ सड़कों पर और नगर की कुछ अन्य सड़कों में स्ट्रीट लाइट की समस्या की बात भी बैठक में रखी गई जिस पर अविलंब कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग में 4 ब्लैक स्पाट एवं 13 ग्रे स्पाट पर विशेष ध्यान देते हुए संकेतक बोर्ड, रंबल स्ट्रीप लगाने एवं अभियांत्रिकीय दोष दूर करने पर चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि यातायात की सुगमता को देखते हुए कार्य किया जाए। सड़क सुरक्षा समिति की सबसे अहम जिम्मेदारी सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है इसके लिए जिस तरह के भी तकनीकी निर्णय और कार्य किये जाने हैं उस पर कार्य किया जाए। बैठक में स्कूलों में भी सड़क सुरक्षा से संबंधित बातें बताने की बात सांसद ने कही। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि सिलेबस में यह शामिल है और बच्चों को इस संबंध में जागरूक करने लगातार विशेष रूप से पहल की जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि स्कूलों के सामने इमरजेंसी नंबर लिखवाये गये हैं। कुछ स्कूलों में यह कार्य बाकी है जिसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में ड्राइवरों के नेत्र परीक्षण एवं स्वास्थ्य परीक्षण नियमित रूप से कराने के निर्देश भी सीएमएचओ को दिये गये। बैठक में अवैध होर्डिंग एवं गलत स्थान पर लगाये गए होर्डिंग भी हटाने का निर्णय लिया गया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने ग्रामीण क्षेत्र में इस संबंध में हो रहे कार्यों की जानकारी दी। बैठक में विधायक विद्यारतन भसीन, दुर्ग महापौर धीरज बाकलीवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / महंगाई की मार को लेकर प्रदेश कांग्रेस की नेत्री वंदना राजपूत ने पीएम मोदी पर कडा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने मन की बात की 68 वी कड़ी में अपने विचार व्यक्त किए, मोदी जी ने मन की बात में एक बार भी बढ़ती हुईं महगांई के मुद्दे का जिक्र भी नहीं किया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते आर्थिक बदहाली से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं पर महगांई की मार बढ़ती जा रही हैं। देश में बढ़ती महगांई को रोकने में केंद्र सरकार पूरी तरह से विफल रही हैं।
मोदी जी ने 6 साल पहले से दस मिनट के भाषण में कितनी बार महगांई को कम करने की बात की है। जब से मोदी जी के हाथों में जनता ने केन्द्र की चाबी सौंपी है तब से महगांई बेलगाम होती चली जा रही हैं डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जनता के जेब पर डाका डाला है। डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों का असर आवश्यक दैनिक वस्तुओ पर पड़ा है। आज महगांई आसमान छू रही है। क्यो मोदी जी को मालूम नहीं है क्या? डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों के कारण परिवहन का किराया बढ़ेगा, जिसके कारण हर एक वस्तु महंगी हो जायेगी। बेलगाम महगांई चिंताजनक है लेकिन प्रधानमंत्री जी ने ना कभी इस पर चिन्ता की और ना बढ़ती हुये महगांई को रोकने आवश्यक कदम उठाए।
वंदना राजपूत ने कहा कि मोदी जी के मन की बात का आयोजन जब-जब होता है तब-तब महिलाओं को लगता है कि अब शायद मोदी जी महगांई के मुद्दे पर चर्चा करके महगांई से थोड़ा बहुत निजात दिलाएंगे लेकिन हर बार महिलाओं के हाथ निराशा लगती है। बढ़ती महगांई के कारण रसोई का बजट बिगड़ गया है। बेशक भारत की जनता बहुत सहनशील और भावनात्मक है लेकिन 80-90 रुपए लीटर के भाव का डीजल- पेट्रोल बेचकर कब तक मोदी जी जनता के भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे। प्रदेश प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कोरोना काल में लोगों की आमदनी कम हो गई हैं। पहले से ही बेरोजगारी की मार थी। कोरोना काल में जिसके पास रोजगार था वह भी छिन गया। आमदनी चव्वनी और खर्चा रूपया हो गया है, केन्द्र सरकार प्रमुख मुद्दे को छोड़ बाकी सभी विषयों पर बात करती हैं। केन्द्र सरकार अपनी जिममेदारियों से भाग रही है।
वंदना राजपूत ने कहा कि पिछले 6 साल में मंदी ने भारत की अर्थव्यवस्था की हालत खराब कर दी है। मंदी के इस दौर में पहले नरेन्द्र मोदी ने नोट बंदी की और फिर जीएसटी, रही-सही असर कोरोना ने पूरी कर दी। देश की जनता को भी 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज पर सवाल उठाने का अधिकार है आखिर उसका बड़ा लाभ कौन उठा रहा है। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार संघीय ढांचे और उसमें मुखिया की अपनी भूमिका को समझें। छह माह पुराने कोरोना ने आज पूरे भारत में पांव पसार लिया है, मोदी यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाते तो कोरोना के मरीजों की संख्या 35 लाख के पार नहीं होती।
नई दिल्ली / एजेंसी / भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. भारत के चहेते राष्ट्रपतियों में शुमार 84 साल के प्रणब मुखर्जी दिल्ली में आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल में भर्ती थे. उनकी ब्रेन सर्जरी हुई थी, जिसके बाद उनकी हालत नाजुक होने के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. उनके ब्रेन में एक थक्का बन गया था, जिसको निकालने के लिए ऑपरेशन किया गया था. आर्मी अस्पताल की ओर से जानकारी दी गई थी 10 अगस्त को पूर्व राष्ट्रपति की सर्जरी हुई थी, लेकिन उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं दिख रहा था. इसके साथ ही उनको कोरोनावायरस का संक्रमण भी था.
भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के जाने पर पूरे देश में शोक की लहर है. नेताओं से लेकर आम जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे रही है. राष्ट्रपति को महामहिम कहे जाने की रीति से ऐतराज करने वाले प्रणब मुखर्जी 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति थे. उनका राजनीतिक जीवन 40 सालों से भी ज्यादा लंबा रहा है. कांग्रेस पार्टी में रहते हुए उन्होंने विदेश से लेकर रक्षा, वित्त और वाणिज्य मंत्री तक की भूमिका निभाई. उन्होंने भारतीय राजनीति को बहुत लंबे समय तक, बहुत करीब से देखा, हम एक बार उनकी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर पर नजर डाल रहे हैं.
- प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर, 1935 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक छोटे से गांव मिराती के एक साधारण से परिवार में हुआ था. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी मां का नाम राजलक्ष्मी था. प्रणब मुखर्जी के पिता भी कांग्रेसी नेता थे और आजादी की लड़ाई में कई बार जेल गए.
- प्रणब मुखर्जी ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कोलकाता यूनिवर्सिटी इतिहास और राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन किया था और लॉ की पढ़ाई भी की थी. उन्होंने सबसे पहले बतौर कॉलेज टीचर अपना करियर शुरू किया लेकिन नेता पिता की संतान होने के चलते वो राजनीति से दूर नहीं रहे और 1969 में चुनकर राज्यसभा में आ गए. इस तरह उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई.
- उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मार्गदर्शन में काम किया. 1973-74 में उन्हें उद्योग, जहाजरानी व परिवहन से लेकर इस्पात व उद्योग उपमंत्री और वित्त राज्यमंत्री बनाया गया.
- 1982 में प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी के कैबिनेट में वित्तमंत्री बने. इसके बाद 2012 तक कांग्रेस में रहने के दौरान कांग्रेस की सरकारों के कार्यकालों में उन्होंने वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री जैसी अहम भूमिकाएं निभाईं. वो दो बार विदेश मंत्री बने- 1995 से 1996 तक फिर 2006 से 2009 तक. मुखर्जी 1991 से 1996 तक योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे.
- 2012 में उन्होंने 25 जुलाई को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और 2017 तक देश के राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवा देते रहे. संवैधानिक नियम के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव लडऩे से पहले उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
- पूर्व राष्ट्रपति ने कूटनीतिक स्तर पर भी अहम भूमिकाएं निभाईं. मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ्रीकी विकास बैंकों के संचालक मंडलों में रहे. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से लेकर गुटनिरपेक्ष विदेश मंत्रियों के सम्मेलन सहित कई सम्मेलनों में भारत का नेतृत्व किया.
- प्रणब मुखर्जी को 2019 में भारत सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था. इसके पहले 2008 में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा वो सर्वोत्तम सांसद और प्रशासक भी रह चुके थे. उन्हें दुनियाभर के विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट की उपाधियां मिली हुई थीं.
- भारत के सक्षम प्रशासक नेताओं में से एक माने जाने वाले प्रणब मुखर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था से लेकर एक देश के निर्माण जैसे विषयों पर कई किताबें लिखी हैं. "The Turbulent Years- 1980-1996Ó, ÒThe Coalition YearsÓ, ÒThe Dramatic DecadeÑ The Indira Gandhi Years, और 'Thoughts and Reflections " उनकी कुछ चर्चित किताबें हैं.
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए इसे राष्ट्र के लिए अपूरनीय क्षति बताया और इस दुख की घड़ी में परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने अपने शोक सन्देश में कहा है कि श्री प्रणब मुखर्जी ने अपने लंबे राजनैतिक जीवन में देश की उन्नति और समाज के हर वर्ग के हित के लिए कार्य करते हुए अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। उनका निधन राष्ट्रीय क्षति है, इस कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की यादें छत्तीसगढ़ से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने वर्ष 2007 में विदेश मंत्री रहते हुए राजधानी रायपुर में नवीन पासपोर्ट कार्यालय का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए वर्ष 2012 में 6 और 7 नवम्बर 2012 को दो दिवसीय यात्रा के दौरान राज्योत्सव कार्यक्रम में शामिल होने के साथ ही उन्होंने नए मंत्रालय परिसर का उद्घाटन, स्वामी विवेकानन्द हवाई अड्डा रायपुर में नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। श्री मुखर्जी अपनी इस यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिला नारायणपुर में जनजाति कल्याण विभाग के 500 सीटर छात्रावास और रामकृष्ण मिशन आश्रम के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के भवन की आधारशिला रखी। श्री मुखर्जी 26 जुलाई 2014 को पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के स्वर्ण जयंती दीक्षांत समारोह और 17 अप्रैल 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में भी शामिल हुए थे।
सेहत / शौर्यपथ / खुद को सेहतमंद बनाए रखने के लिए डॉक्टर हर व्यक्ति को मौसम के अनुसार अपनी डाइट रखने की सलाह देते हैं। मौसम और अपने क्षेत्र के अनुसार आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है। अगर आप भी सेहतमंद रहते हुए मानसून का मजा लेना चाहते हैं तो बदलते मौसम के साथ करें अपने आहार में भी ये जरूरी बदलाव।
सब्जियां-
बारिश के समय में हरी पत्तेदार सब्जियों को उगाने के लिए मिट्टी सही नहीं मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति को बेल पर लगने वाली सब्जियां जैसे लौकी, कद्दू, करेला, गिलका और जड़ वाली सब्जियां जैसे शकरकंद, सुरान, कोंफल, अरबी, आलू आदि सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
मोटे और छोटे अनाज-
मोटे और छोटे अनाज का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। बारिश के मौसम में आप दलिया, राजगीरा, मक्की,समा, कुट्टू या मंडुआ खा सकते हैं। हालांकि इस मौसम में मल्टीग्रेन ब्रेड या बिस्कुट का सेवन करने से बचें।
दालें-
इस मौसम में अक्सर लोग मांस-मछली का सेवन करने से परहेज करते हैं। ऐसे में प्रोटीन के साथ विटामिन, खनिज और फाइबर की कमी पूरी करने के लिए लोग दालों का सेवन कर सकते हैं। इस मौसम में व्यक्ति को डाइट में दो तरह की दालें जरूर शामिल करनी चाहिए- पहली, कुलिथ और दूसरी अल्साने । ये दोनों ही दालें त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं।
खास वस्तुएं-
हर मौसम का अपना एक खास फल होता है। गर्मियों में आम तो बारिश के मौसम में गहरी तली हुई भजिया। भजिया तलने के लिए फिल्टर्ड मूंगफली,सरसों, नारियल तेलों का प्रयोग करें। याद रखें भजिया फ्राई करने के बाद तेल का उपयोग दोबारा न करें। आहार में आवश्यक वसा के बिना, शरीर को विटामिन डी नहीं मिल सकता है। इसलिए बिना डरे और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पसंद के पकौड़े खाएं।
खेल /शौर्यपथ / पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान में कमेंटेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के कप्तान दिनेश कार्तिक यदि भारत की 2021 टी-20 विश्व कप टीम में अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं तो उन्हें बल्लेबाजी क्रम में ऊपर आना चाहिए। 19 सितंबर से शुरू हो रही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में केकेआर के कप्तान दिनेश कार्तिक को अंतरराष्ट्रीय वापसी के लिए कम से कम दो आईपीएल अच्छे खेलने होंगे।
इस बीच आकाश चोपड़ा से जब एक फैन ने पूछा कि क्या कार्तिक 2021 की विश्व कप टीम में शामिल होंगे? इस पर उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि वह निश्चित रूप से वापसी करेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें केकेआर के लिए बल्लेबाजी क्रम में ऊपर आना होगा। यदि वह नंबर पांच पर ही बल्लेबाजी करते रहे तो वह ज्यादा रन नहीं बना पाएंगे और उनकी दावेदारी कमजोर पड़ जाएगी।''
आकाश चोपड़ा ने कहा, ''विकेटकीपर के रूप में उन्होंने अच्छा परफॉर्म किया है, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि इस समय भारतीय टीम में केएल राहुल और ऋषभ पंत हैं। लिहाजा यदि कार्तिक 2021 की विश्व कप टीम में जगह बनाना चाहते हैं तो उन्हें दो आईपीएल अच्छे खेलने होंगे। मुझे लगता है कि उन्हें नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए टीम में वापसी का प्रयास करना चाहिए।''
पिछले दो सीजन से केकेआर कार्तिक के नेतृत्व में खेल रही है। 2018 में वह केकेआर को क्वॉलिफायर तक ले गए, लेकिन पिछले सीजन में वह टीम को प्लेऑफ तक नहीं ले जा पाए। गौतम गंभीर की विदाई के बाद से दिनेश कार्तिक के नेतृत्व में टीम का बहुत अच्छा समय नहीं गुजरा है। कोलकाता आईपीएल के अबतक दो खिताब गौतम गंभीर की कप्तानी में अपने नाम कर चुकी है। अब दिनेश कार्तिक की कोशिश होगी कि केकेआर अपना तीसरा खिताब जीते।
बता दें कि कोरोना वायरस महामारी की वजह आईपीएल का 13वां सीजन यूएई में खेला जाएगा और 10 नवंबर को फाइनल मैच होगा। हालांकि, अभी तक आईपीएल का शेड्यूल जारी नहीं किया गया, लेकिन यूएई पहुंची टीमों ने अपना क्वारंटाइन पीरियड पूरा कर लिया है और अब खिलाड़ी मैदान पर नेट प्रैक्टिस में जुटे हुए हैं। जहां सभी आईपीएल फ्रैंचाजीज की ट्रेनिंग मैदान पर शुरू हो चुकी है, वहीं चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामले मिलने के बाद टीम को 6 सितंबर तक क्वारंटाइन में रहना होगा।
मनोरंजन / शौर्यपथ / पॉप्युलर शो 'साथ निभाना साथिया' का एक फनी वीडियो 'रसोड़े में कौन था?' इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वहीं, अब इस सीरियल के दूसरे सीजन को लाने की तैयारी हो रही है। हालांकि, 'गोपी बहू' का रोल निभाने चुकीं, जिया मानेक का कहना है कि उन्हें दूसरे सीजन के लिए अप्रोच नहीं किया गया है। उन्होंने बताया है कि अगर 'बिग बॉस 13' फेम देवोलीना भट्टाचार्जी को इस शो में कास्ट किया जाता है तो उन्हें बहुत खुशी होगी। मालूम हो कि देवोलीना ने जिया मानेक को रिप्लेस किया था।
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान जिया मानेक ने कहा, 'मैंने गोपी बहू के सफर को तय किया है। जब देवोलीना ने इस शो को जॉइन किया था तो मुझे उनसे कोई नाराजगी नहीं थी, आखिरकार सभी अपना काम कर रहे हैं। मैं दूसरे सीजन के बारे में ज्यादा नहीं जानती हूं, लेकिन अगर वे देवोलीना को दोबारा कास्ट करते हैं तो मुझे उनके लिए बहुत खुशी होगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं पूरी लाइफ गोपी बहू नहीं बन सकती। एक्टर्स अलग-अलग तरह के रोल निभाना चाहते हैं क्योंकि हम खुद को सीमित नहीं रखना चाहते। अगर पूरी जिंदगी गोपी बहू का रोल करती रहंगी तो इससे मेरी ग्रोथ कैसे होगी।'
इससे पहले शो में कोकिला बेन का किरदार निभाने वाली रूपल पटेल ने दूसरे सीजन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि वह शायद इस शो का हिस्सा ना बनें। रूपल ने हाल ही में लेटस्टली से बात करते हुए कहा, 'मैंने इसके बारे में सुना लेकिन मैं इसके बारे में अभी कुछ कह नहीं सकती। अभी मैं 'ये रिश्ते हैं प्यार के' में मीनाक्षी का किरदार निभाकर खुश हूं, लेकिन मेरा प्यार रश्मि मैम के साथ हमेशा है'।
बता दें कि साथ निभाना साथिया की प्रोड्यूसर रश्मि ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, 'शो का नया सीजन कोकिला बेन और गोपी बहू के बिना अधूरा है। रश्मि के कमेंट पर रूपल ने कहा, मैं अभी पहले से शो कर रही हूं तो एक साथ 2 शो की शूटिंग मैं नहीं कर पाऊंगी। इसके अलावा मुझे अभी तक नए सीजन के लिए मेकर्स की तरफ से अप्रोच नहीं किया गया है'।
धर्म संसार /शौर्यपथ / पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. माना जाता है कि यदि पितर नाराज हो जाएं तो व्यक्ति का जीवन भी परेशानियों और तरह-तरह की समस्याओं में पड़ जाता है और खुशहाल जीवन खत्म हो जाता है. साथ ही घर में भी अशांती फैलती है और व्यापार और गृहस्थी में भी हानी होती है. ऐसे में पितरों को तृप्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना बेहद आवश्यक माना जाता है.
श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान और तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है.
2020 में कब है पितृ पक्ष
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं. इनकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन अमावस्या पर होता है. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक हर साल सितंबर के महीने में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है. आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है. इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर से शुरू हो कर 17 सितंबर को खत्म होगा.
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- चतुर्दशी का श्राद्ध, 17 सितंबर- अमावस का श्राद्ध.
पितृ पक्ष का महत्व
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाना बेहत जरूरी माना जाता है. माना जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है. वहीं ये भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से वो प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है. ये भी माना जाता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरो को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं. इस दौरान अगर पितरों का श्राद्ध न किया जाए तो उनकी आत्मा दुखी व नाराज हो जाती है.
पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध
दरअसल, दिवंगत परिजन की मृत्यु की तिथि में ही श्राद्ध किया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि आपके किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए. आमतौर पर इसी तरह से पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों का चयन किया जाता है:
- जिन परिजनों की अकाल मृत्यु या फिर किसी दुर्घटना या आत्महत्या का मामला है तो उनका श्राद्ध
चतुर्दशी के दिन किया जाता है.
- दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है.
- जिन पितरों के मरने की तिथि न मालूम हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए.
- यदि कोई महिला सुहागिन मृत्यु को प्राप्त हुई तो उनका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए.
- सन्यासी का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है.
श्राद्ध के नियम
- पितृ पक्ष के दौरान हर दिन तर्पण किया जाना चाहिए. पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है.
- इस दौरान पिंड दान भी करना चाहिए. श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं. पिंड को शरीर के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
- पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं करना चाहिए. हालांकि, देवताओं की नित्य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए.
- श्राद्ध के दौरान पाना खाने, तेल लगाने और संभोग की मनाही है.
- इस दौरान रंगीन फूलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है.
- इस दौरान नए वस्त्र, नया भवन, गहने या कीमती सामान को खरीदने से भी कई लोग परहेज करते हैं.
श्राद्ध कैसे करें?
- श्राद्ध की तिथि का चयन ऊपर दी गई जानकारी के मुताबिक करें.
- श्राद्ध करने के लिए आप अपने पुरोहित को बुला सकते हैं.
- श्राद्ध के दिन अच्छा खाना या फिर पितरों की पसंद का खाना बनाएं.
- खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करें.
- मान्यता के मुताबिक श्राद्ध के दिन स्मरण करने से पितर घर आते हैं और भोजन पाकर तृप्त हो जाते हैं.
- श्राद्ध के दिन पांच तरह की बलि बताई गई है: गौ (गाय) बलि, श्वान (कुत्ता) बलि, काक (कौवा) बलि, देवादि बलि, पिपीलिका (चींटी) बलि.
- बता दें, यहां बलि का मतलब किसी पशु या जीव की हत्या नहीं है बल्कि श्राद्ध के दिन इन सभी जानवरों को खाना खिलाया जाता है.
- तर्पण और पिंड दान के बाद पुरोहित या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.
- ब्राह्मण को सीधा या सीदा भी दिया जाता है. सीधा में चावल, दाल, चीनी, नमक, मसाले, कच्ची सब्जियां, तेल और मौसमी फल शामिल है.
- ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्यवाद दें और जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए माफी मांगे.
- इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठ कर भोजन करें.
- श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने और संभोग करने की मनाही होती है.
- इन दिनों में रंगीन फूलों का इस्तेमाल करना भी वर्जित होता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाना चाहिए,
- इस समय में कई लोग नए वस्त्र या सामान आदि भी नहीं खरीदते हैं.
श्राद्ध की तिथियां
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11 सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- च
कैसे मिलता है पितरों का आशीर्वाद, पढ़िए पूरी कथा
पितृ कभी भी अपनी संतानों को परेशान नहीं करना चाहते हैं, वे बहुत दयालु होते हैं। लेकिन संतानों की उपेक्षा से दुखी हो जाते हैं, क्योंकि संतान के द्वारा श्राद्धकर्म और पिंडदान आदि करने पर उन्हें तृप्ति मिलती है, और वे अपनी संतानों को धन-धान्य और खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं। पितृ ये नहीं चाहते कि उनकी संतानें उनको तृप्त करने के लिए बहुत कुछ करें, वे श्रद्धा भाव से किए गए श्राद्ध के खुशी के साथ स्वीकारते हैं। कहा भी गया है कि श्रद्धा के बिना श्राद्ध अधूरा होता है। इसी से जुड़ी है श्राद्ध पक्ष की पौराणिक कथा, जानते हैं कि कैसे श्रद्धा भाव से प्रसन्न होकर पितर देते हैं अपना आशीर्वाद...
पौराणिक कथा के अनुसार जोगे और भोगे नाम के दो भाई थे। दोनों अलग-अलग घरों में रहा करते थे। जोगे के पास धन की कोई कमी न थी, लेकिन भोगे निर्धन था। दोनों भाई एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। लेकिन जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, तो वहीं भोगे की पत्नी सुशील और शांत स्वाभाव की थी। जब पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की कोशिश की, लेकिन जोगे की पत्नी केवल अपनी शान दिखाने के लिए श्राद्ध का कार्यक्रम रखना चाहती थी। ताकि वह अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर दावत कर सके। जोगे की पत्नी से उसने कहा कि मुझे कोई परेशानी न हो इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं। लेकिन मैं सत्य कहती हूं, मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है, मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। हम दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगी।
दूसरे दिन भोगे की पत्नी सुबह आकर सारा कार्य करवाने लगी, उसने अनेक पकवान बनाए, फिर सभी काम निपटाने के बाद अपने घर वापस आ गई, क्योंकि उसे भी पितरों का तर्पण करना था। जब पितर भूमि पर उतरे जब वे जोगे के यहां गए तो देखा कि उसके ससुराल पक्ष के सभी लोग भोजन पर जुटे हुए हैं। वहां ये सब देखकर वे बहुत निराश हुए उसके बाद जोगे-भोगे के पितर भोगे के यहां गए, तो देखते हैं कि मात्र पितरों के नाम पर केवल 'अगियारी' दे दी गई है। पितर उसकी राख चाटते हैं, और भूखे ही नदी के तट पर पहुंच जाते हैं।
कुछ ही देर में सारे पितर अपने-अपने यहां का श्राद्ध ग्रहण करके इकट्ठे हो गए और बताने लगे कि उनकी संतानों ने किस-किस तरह से उनके लिए श्राद्धों के पकवान बनाए। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपना सारा कुछ बताया। उन्होंने सोचा कि अगर भोगे निर्धन न होता और श्राद्ध करने में समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा वापस नहीं आने पड़ता, क्योंकि भोगे के घर में तो खाने के लिए भी दो जून की रोटी नहीं थी। ये सारी बातें सोचकर पितरों को भोगे पर दया आ गई। अचानक से वे नाच-नाचकर गाने लगे कि भोगे के घर धन हो जाए, भोगे के घर धन हो जाए।
सांझ का समय हो चला था, लेकिन भोगे के घर में खाने को कुछ भी नहीं था। उसके बच्चे भूखे थे। बच्चों ने अपनी मां से कहा कि भूख लगी है। तब उन्हें टालने के लिए गुस्से से गरज कर भोगे की पत्नी ने कहा कि जाओ आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो उसमें जो भी मिल जाए आपस में बांटकर खा लेना। बच्चे जब वहां जाकर हौदी देखते हैं, तो वे दौड़े-दौड़े मां के पास जाकर कहते हैं कि मां हौदी तो मोहरों से भरी पड़ी है। आंगन में आकर भोगे की पत्नी ने यह सब कुछ देखती है, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता है।
इस तरह पितरों के आशीर्वाद से भोगे भी धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है, लेकिन वह इस बात का बिल्कुल अंहकार नहीं करता है, और अगले बरस पूरी श्रद्धा के साथ भोगे एवं उसकी पत्नी अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। भोगे की पत्नी पितरों के लिए 56 प्रकार के व्यंजन तैयार करती है, वे दोनों ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, अपने जेठ-जेठानी को बुलाकर सम्मान के साथ सोने और चांदी के बर्तनों में भोजन कराते हैं। इससे उनके पितर बहुत प्रसन्न होते हैं।
सपने में पितरों को देखने का क्या होता है मतलब
श्राद्ध पक्ष आरंभ होने वाले हैं जो 2 सितंबर से शुरु होकर 17 सितंबर तक चलेंगे, ये पूरे 16 दिन पितरों को समर्पित होते हैं। इस समय पितरों का श्राद्ध, पितृ तर्पण करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। तो आज हम जानेगें कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है। हम सभी सोते समय अच्छे और बुरे दोनों तरह के सपने देखते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का अपना एक मतलब होता है। कभी-कभी जो हमारे मस्तिष्क में चल रहा होता है, वही हमें सपने में दिखाई देता है। लेकिन कुछ सपने हमारी जिंदगी की घटनाओं से जुड़े होते हैं। स्वप्न शास्त्र कहता है कि सपनों में पितरों को देखना आपकी जिंदगी से जुड़े कई तरह के संकेत देता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि आपकी जिंदगी में क्या घटित होने वाला है, आइए जानते हैं कि सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है।
अगर कोई व्यक्ति सपने में अपने पितरों को हंसते-मुस्कुराते खुशहाल अवस्था में देखता है, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न हैं। ऐसे स्वप्न शुभफलदायक होते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने का अर्थ होता है कि व्यक्ति पर और परिवार पर पितरों की कृपा है। यह घर में सुख-समृद्धि आने के संकेत हैं।
अगर सपने में पितर खुशियां मनाते हुए मिठाई खा रहे हैं या फिर बांट रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आपके घर में खुशियां आने वाली हैं। इससे घर में मांगलिक कार्य होने के संकेत होते हैं। ऐसे सपने देखने का अर्थ होता है कि किसी के विवाह या फिर संतान के योग बन रहे हैं।
सपने में किसी के पितर दुखी या फिर नाराज दिखाई देते हैं, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न नहीं हैं। ऐसे सपने शुभ नहीं होते हैं। ज्यादातर ऐसे सपने पितृदोष लगने पर आते हैं। ऐसे में आपको अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए।
स्वप्न शास्त्र के अनुसार जब कोई व्यक्ति स्वप्न में देखता है कि उसके पितर उससे बातें कर रहें है, तो इसका अर्थ होता है, वे आपको कुछ बताना चाहते हैं या किसी आने वाली घटना से आपको आगाह कर रहे हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
