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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
राज्य गठन के बाद पहली बार एक साथ 21 सहायक संचालकों की नियुक्ति, CM साय ने सौंपे नियुक्ति पत्र; बोले—जनहित, पारदर्शिता और संवेदनशीलता को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
रायपुर । छत्तीसगढ़ के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को अब नई पीढ़ी के प्रोफेशनल टाउन प्लानर्स की ताकत मिलेगी। राज्य गठन के बाद पहली बार नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ 21 सहायक संचालकों (योजना) की नियुक्ति हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी नवचयनित अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहरों का विकास केवल आज की जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। भविष्य के छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब इन युवा टाउन प्लानर्स के कंधों पर है।
25 वर्षों में 17 नियुक्तियां, अब एक साथ 21 युवा अधिकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में कुल 17 सहायक संचालकों की नियुक्ति हुई थी, जबकि अब पहली बार एक साथ 21 युवा अधिकारियों को नियुक्ति दी गई है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसके तहत भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विभागों को पर्याप्त मानव संसाधन और प्रोफेशनल क्षमता से मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों के माता-पिता एवं परिजनों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षित और योग्य बनाकर उन्हें जिम्मेदार पद पर प्रदेश एवं जनता की सेवा करते देखना माता-पिता के लिए गर्व का क्षण होता है। इन युवाओं के जीवन में आज नई जिम्मेदारी की शुरुआत हुई है, जिसके साथ परिवार की अपेक्षाएं और प्रदेश की आशाएं भी जुड़ी हैं।
नक्शे बनाने तक सीमित नहीं है टाउन प्लानिंग
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गांवों से शहरों की ओर आबादी का विस्तार हो रहा है, नगरों की सीमाएं बढ़ रही हैं और प्रमुख सड़कों व शहरों के आसपास नई बसाहटें विकसित हो रही हैं। आने वाले वर्षों में यह गति और तेज होगी।
ऐसे में आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियां, सड़कें, सार्वजनिक स्थल, परिवहन, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं के लिए दीर्घकालीन एवं वैज्ञानिक योजना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि टाउन प्लानिंग केवल नक्शे बनाने या भू-उपयोग तय करने का काम नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और शहरों के भविष्य से है। अच्छी योजना शहर को व्यवस्थित बनाती है, नागरिक सुविधाओं को सुलभ करती है और अनियोजित विस्तार से पैदा होने वाली समस्याओं को रोकती है।
‘जनहित सर्वोपरि’—अधिकारियों को CM साय की नसीहत
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि शासकीय सेवा जनता की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। अधिकारियों द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय किसी न किसी रूप में आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है।
उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, निष्ठा, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ दायित्व निभाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आम नागरिक को अपने छोटे से छोटे काम के लिए अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नागरिक सुविधा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अधिकारियों का दायित्व है।
उन्होंने युवा अधिकारियों से अपनी तकनीकी शिक्षा, आधुनिक ज्ञान और नवाचार का उपयोग प्रदेश के बेहतर नियोजन में करने को कहा।
‘छत्तीसगढ़ अंजोर : विजन 2047’ से जुड़ी विकास की दिशा
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के विकास की स्पष्ट दिशा तय करते हुए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर : विजन 2047’ तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां आधुनिक अधोसंरचना, बेहतर नागरिक सुविधाएं और युवाओं के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों तथा विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसमें शासन-प्रशासन, युवाओं और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
ढाई साल में 15 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार और आगे बढ़ने के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में विभिन्न विभागों में 15 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दी गई हैं।
पुलिस विभाग में 7 हजार से अधिक और शिक्षा विभाग में 3 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बिजली विभाग में भी 1200 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया निरंतर जारी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए अवसर केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हैं। नई औद्योगिक विकास नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। रोजगार मेलों, निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से भी रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
‘जिस पारदर्शिता से नियुक्ति मिली, वही जनता तक पहुंचाएं’—ओ.पी. चौधरी
वित्त तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवचयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सुनियोजित शहरीकरण की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के विकास के साथ शहरी आबादी और शहरों का विस्तार स्वाभाविक है। इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं का पहले से आकलन कर आधुनिक एवं वैज्ञानिक टाउन प्लानिंग करना समय की आवश्यकता है।
श्री चौधरी ने कहा कि पहले नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक बार में तीन-चार सहायक संचालकों की नियुक्तियां होती थीं, लेकिन इस बार एक साथ 21 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। इससे विभाग की प्रोफेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उनकी भर्ती पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया से हुई है। अब उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि इसी पारदर्शिता और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का आधार बनाएं। नागरिक जब नक्शा स्वीकृति या किसी अन्य कार्य के लिए कार्यालय आए, तो उसे व्यवस्था में सरलता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।
नई पीढ़ी की ऊर्जा से विकास को मिलेगी नई गति—केदार कश्यप
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नवचयनित अधिकारियों एवं उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों की नियुक्ति प्रदेश के सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नई पीढ़ी के अधिकारियों का ज्ञान, ऊर्जा और आधुनिक दृष्टिकोण विभाग की कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवचयनित अधिकारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण सहभागी बनेंगे।
कार्यक्रम में विभागीय सचिव श्री अंकित आनंद, आयुक्त श्री अवनीश शरण सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नवचयनित सहायक संचालक एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।
युवाओं के सपनों को पंख, छत्तीसगढ़ के विकास को नई उड़ान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के युवाओं, रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के फैसलों से छत्तीसगढ़ में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों के साथ-साथ कौशल, निर्यात और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
500 करोड़ का ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ मंजूर
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के युवाओं को जॉब-सीकर से जॉब-क्रिएटर बनाने और छत्तीसगढ़ को स्टार्टअप, नवाचार एवं नई तकनीक आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी दी है।
मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों में ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तथा औपचारिक रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। मिशन का लक्ष्य युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी
प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने ‘छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30’ को मंजूरी प्रदान की है। नई नीति के माध्यम से प्रदेश में मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा।
ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों एवं निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। नीति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के निर्यात में गुणात्मक और मात्रात्मक वृद्धि लाते हुए प्रदेश को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों से और मजबूती से जोड़ना है।
नवा रायपुर में बनेगा नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। लगभग 200 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं छात्रावास सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
NSTI में प्रतिवर्ष 1,000 प्रशिक्षुओं को दीर्घकालिक पाठ्यक्रम तथा 3,000 प्रशिक्षुओं को अल्पकालीन कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। संस्थान की स्थापना से प्रदेश के युवाओं के लिए उन्नत कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही नवा रायपुर को देश में कौशल एवं तकनीकी शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष
मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के अधीन कार्यरत स्थायी एवं अस्थायी शासकीय सेवकों, निगम-मंडल एवं स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों तथा नगर सैनिकों को बड़ी राहत दी है। अब अन्य शासकीय सेवाओं एवं उच्च पदों के लिए आवेदन करने की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को अन्य सेवाओं और उच्च पदों पर आगे बढ़ने के लिए अधिक और समान अवसर मिल सकेंगे। इस संबंध में राज्य शासन द्वारा एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय परिसर
मंत्रिपरिषद ने दुर्ग जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण के लिए ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के समीप 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज उक्त भूमि के बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान है।
इस निर्णय से दुर्ग में आधुनिक एवं सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और जिले की न्यायिक अधोसंरचना को और मजबूती मिलेगी।
युवा, रोजगार, कौशल और विकास पर सरकार का फोकस
मंत्रिपरिषद के इन फैसलों से एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, स्टार्टअप और उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर निर्यात, तकनीकी शिक्षा और न्यायिक अधोसंरचना के क्षेत्र में भी विकास को गति मिलेगी। ये निर्णय छत्तीसगढ़ को कौशल, नवाचार, उद्योग और वैश्विक व्यापार के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
कोंडागांव, शौर्यपथ। कल पूरे देश में शिक्षक दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया और बनाया भी जाना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही इस देश का मूल आधार है शिक्षा के बिना जग अंधेरा है पर क्या आप किसी ने सोचा की हमारी शिक्षा व्यवस्था में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिनको उस कुर्सी में बैठने के लिए और बच्चों की जीवन को बचाने व सुरक्षित करने के लिए सरकार उनके ऊपर 100000 ₹150000 का खर्चा कर रही है पर वो सोचते हैं पर जब बच्चों की को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने और उन्हें न्याय दिलाने की बात आती है तब ये अपना दरवाज़ा बंद कर लेते है। कभी बहाना करते हैं कि सीट फुल हो गया, तो कभी बहाना करते हैं कि आपका यह कागज नहीं है। वो ऐसा ही मामला ग्राम कोरोबेड़ा का है। यहां के बच्चो के सिर्फ माँ बाप नहीं होने का सजा इन्हें मिल रहा है और ये सजा, ये अपनी किस्मत से नहीं भोग रहे है हमारे शिक्षकों की वजह से भोग रहे हैं, कभी उन बच्चों को आधार कार्ड के कारण स्कूल से निकाल दिया गया जब आधार कार्ड बन गया तो जिला कलेक्टर के आदेश को नजरअंदाज करते हुए उन बच्चों को फिर से गाँव भेज दिया गया। गाँव के हॉस्टल में जब जाकर वह बोले कि इन्हें यहां रख के ही पढ़ाना है तो वहां के टीचर बोले कि हमारे पास सीट फूल हो गया है। आप अपने घर से पैदल आ जाओ, जो कि उनका घर 4 km दूर है टीचर को यह शब्द बोलने से पहले ये सोचना चाहिए कि यह सिर्फ दूर नहीं बीच में जंगल है, नदी है, नाले हैं। और बच्चों की उम्र मात्र 5 -6 साल है, यह घटना न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर आवाज़ उठाती है। ये घटना यह भी बताती है कि बिना माँ बाप के बच्चों का जीना इस समाज में इस देश में कितना मुश्किल है जहां इन्हें हर कदम पर यह एहसास दिलाया जाता है कि तुम्हारे लिए कोई नहीं है तुम अकेले हो यही दुनिया का सबसे बड़ा हकीकत है कि जहां पूरे समाज को पूरे प्रशासन को इनका परिवार बनके इनके लिए काम करना था वह इन्हें गली गली भटकने पर मजबूर कर दिया गया।
जिला कलक्टर ने कोशिश भी किया। आदेश भी किया पर जो जवाबदार अधिकारी है, उन्हें कोई मतलब नहीं सिर्फ उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ लें, डॉ इंजीनियर कमिश्नर बन जाए।हमें गरीबों के बच्चों से क्या लेना है?इन्हें मानसिकता के साथ आज पुरा सिस्टम कार्य कर रहा है, यह मात्र सिर्फ दो बच्चों की कहानी नहीं है।यह उन तमाम जरूरतमंद, यह तमाम अनाथ तमाम गरीब और गरीबी से जूझ रहे उन बच्चों की कहानी है जो पढ़ना तो चाहते हैं, पर उन्हें मजबूर किया जाता है कि तुम्हारे लिए शिक्षा नहीं बनी है।और यही बच्चे जब शिक्षा से वंचित रह जाते हैं कोई गलत काम करते हैं नशा करते हैं या किसी और घटना को अंजाम दे देते हैं। तो यही प्रशासन अपने लाखों और करोड़ों की बिल्डिंग में बैठकर तक चर्चा करते हैं। ये हमारे क्षेत्र का हमारे जिले का लॉयन ऑर्डर कैसे बिगड़ रहा है कौन है यह है ये गुंडा कौन है यह नशेड़ी है, और उठाकर उसे जेल भेज दिया जाता है पर क्या उसकी आपबीती जानने का या उसे पहचानने का या किस कारण से आज उसका यह हालत हुई है इसके ऊपर कभी किसी ने सोचा है किसी ने चर्चा किया है इसका कारण भी यही समाज है यही प्रशासन है जब वो न समझ था तो स्कूल स्कूल घूम रहा था कि मुझे कोई पढ़ा लो उस समय कोई पढ़ाने वाला नही था और ना ही कोई सहारा देने वाला था हमें उन चीजों में भी विचार करना और सोचने की उतनी ही जरूरी है की हम प्रशासन के सबसे बड़े पद और प्रतिष्ठा में बैठकर। हमने उन नौजवान, वो अनाथ, उन गरीब जरूरतमंद बच्चों के लिए क्या किया है। कि आज वो बर्बादी के सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंच गये। वो नहीं पहुंचे, उन्हें हमारे सिस्टम ने हमारे समाज भी उतना ही जिम्मेदार है जितना उस बच्चे की मजबूरी जिम्मेदार थी ये हम सभी के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह है।क्या हमने अपने समाज के लिए अपने बच्चों के लिए क्या किया है?
अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत शिवपुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश सोमवार को सड़क पर दिखाई दिया। स्कूल और हॉस्टल की कथित बदहाली से नाराज 30 से अधिक छात्राएं सुबह करीब 8 बजे पैदल ही जिला मुख्यालय अंबिकापुर में कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ीं।
छात्राओं का कहना है कि स्कूल और हॉस्टल में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्होंने खुद प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला लिया।
एक महीने से बिजली की समस्या, पढ़ाई प्रभावित
छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायत स्कूल और हॉस्टल में बिजली व्यवस्था को लेकर है। उनका आरोप है कि करीब एक महीने से बिजली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मेस के खाने और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
छात्राओं ने हॉस्टल के मेस में गंदगी और खराब भोजन पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है और मेस की साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
इसके अलावा छात्राओं ने फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी की शिकायत की है। उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी शिकायत
छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्राचार्य के व्यवहार और कथित मनमानी को लेकर भी गंभीर शिकायतें प्रशासन के सामने रखी हैं। छात्राओं का कहना है कि कई समस्याओं के बावजूद उनकी शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया गया।
अधिकारियों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं रहीं अडिग
सुबह शिवपुर से अंबिकापुर के लिए निकली छात्राओं को रास्ते में प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने रोकने और समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें वापस लौटने के लिए समझाया, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं।
छात्राओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे कलेक्टर से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अपनी शिकायत रखना चाहती हैं।
बैठक छोड़कर छात्राओं से मिलने पहुंचे कलेक्टर
छात्राओं का जत्था जब लमगांव पहुंचा, तब सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत प्रशासनिक बैठक में मौजूद थे। छात्राओं की स्थिति की जानकारी मिलने पर उन्होंने बैठक बीच में रोककर स्वयं छात्राओं से मुलाकात की।
कलेक्टर ने छात्राओं से उनकी समस्याएं सुनीं और उनका शिकायती पत्र भी प्राप्त किया। उन्होंने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि हॉस्टल और स्कूल में सामने आई शिकायतों की जांच कराई जाएगी तथा यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह कि आखिर छात्राओं को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?
एकलव्य आवासीय विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के रहने और पढ़ने की व्यवस्था होती है। ऐसे में बिजली, भोजन, स्वच्छता और शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर छात्राओं का इस तरह पैदल कलेक्टर तक पहुंचना स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर के आश्वासन के बाद जांच में क्या सामने आता है और छात्राओं की शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।
बिलासपुर। लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गरिमामय वातावरण में हुआ। इस अवसर पर श्री कृष्ण राम महापात्र ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में नवीन दायित्व संभालने पर श्री कृष्ण राम महापात्र को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की गई। न्यायपालिका के इस महत्वपूर्ण दायित्व के साथ उनसे न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की अपेक्षा जताई गई।
शपथ ग्रहण समारोह में महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल श्री रमेश बैस, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी एवं श्री अनुज शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, न्यायिक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समारोह में उपस्थित अतिथियों ने श्री महापात्र को नए दायित्व के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’: बच्चों ने गुलदस्ता देकर किया स्वागत, प्रार्थना में नंगे पैर खड़े रहे; विभाग बोला—‘जूते मंगाए हैं, जल्द मिलेंगे’
शौर्यपथ संवाददाता कृष्णा मंडल
दंतेवाड़ा / तस्वीर कभी-कभी वह सच बोल देती है, जिसे फाइलों में दर्ज आंकड़े और सरकारी दावे भी नहीं बता पाते। दंतेवाड़ा में शिक्षा मंत्री के स्कूल-आश्रम निरीक्षण के दौरान सामने आई एक तस्वीर ने जिले की शिक्षा व्यवस्था के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए। मंत्री के स्वागत में बच्चों के हाथों में छिंद से बने खूबसूरत गुलदस्ते थे, चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन कई बच्चों के पैरों में जूते नहीं थे।
प्रार्थना सभा में मंत्री बच्चों के साथ खड़े होकर उनकी मधुर आवाज सुनते रहे। बच्चे अनुशासन के साथ प्रार्थना करते रहे, लेकिन नीचे नजर गई तो किसी के पैर खाली थे तो कोई हवाई चप्पल में खड़ा था। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरी वर्दी और चमचमाते जूतों में मंत्री को जिले की शिक्षा व्यवस्था का हाल बताते नजर आए।
यही दृश्य अब एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा है—क्या दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था की चमक बच्चों के चेहरों तक पहुंचने से पहले ही अफसरों के जूतों में सिमट गई?
बच्चों ने दिया गुलदस्ता, बदले में कब मिलेगा पूरा हक?
मंत्री के स्वागत के लिए बच्चों ने पूरी तैयारी की। हाथों में गुलदस्ते लेकर उन्होंने अतिथि का अभिनंदन किया। प्रार्थना सभा में भी उत्साह के साथ शामिल हुए। लेकिन सवाल यह है कि जिन बच्चों से व्यवस्था अनुशासन, उपस्थिति और बेहतर परिणाम की उम्मीद करती है, क्या उनकी बुनियादी जरूरतों की जिम्मेदारी भी उसी व्यवस्था की नहीं है?
बच्चों के हाथ में स्वागत का गुलदस्ता था, मगर पैरों में जूते नहीं। यह विरोधाभास सरकारी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
DMF-CSR के करोड़ों के बीच बच्चों के पैरों में चप्पल क्यों?
दंतेवाड़ा को DMF और CSR मद से मिलने वाले बड़े संसाधनों वाले जिलों में गिना जाता है। शिक्षा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं और बजट होने के बावजूद यदि स्कूल के बच्चों को अभी तक पूरी यूनिफॉर्म और जूते नहीं मिल पाए हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
आखिर बजट की फाइलों से जूते निकलकर बच्चों के पैरों तक पहुंचने में इतना समय क्यों लग रहा है?
अगर स्कूल की प्रार्थना सभा में ही बच्चे नंगे पैर खड़े दिखाई दें, तो शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बच्चों के पैरों से भी करनी पड़ेगी।
शिक्षा अधिकारी बोले—‘जूते मंगाए गए हैं, जल्द मिलेंगे’
मामले को लेकर जब हमारी टीम ने दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद ठाकुर से फोन पर जानकारी ली, तो उन्होंने बताया कि जूते मंगाए गए हैं और जल्द उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
हालांकि, शिक्षा सत्र शुरू हुए कई महीने गुजर चुके हैं और यदि अब तक विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म का पूरा सेट उपलब्ध नहीं हो पाया है, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
खास बात यह है कि शिक्षा मंत्री करीब दो-तीन माह पहले सार्वजनिक मंच से यह दावा कर चुके हैं कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार बच्चों को यूनिफॉर्म और पाठ्य सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। ऐसे में अलग-अलग स्थानों से पाठ्य सामग्री और अब यूनिफॉर्म के पूरे सेट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आना सरकारी दावे और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की ओर इशारा करता है।
मंत्री ने बच्चों की आवाज सुनी, अब पैरों की खामोशी भी सुनेंगे?
मंत्री ने बच्चों के साथ प्रार्थना की। बच्चों की मधुर आवाज सुनी और उनके उत्साह को करीब से देखा। लेकिन इस दौरान बच्चों के नंगे पैर भी शायद किसी सवाल की तरह सामने खड़े थे।
अब सवाल यह है कि क्या मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस खामोश सवाल को भी सुनेंगे?
क्योंकि बच्चे शिकायत नहीं कर रहे थे।
वे बस नंगे पैर प्रार्थना में खड़े थे।
100 प्रतिशत उपस्थिति, लेकिन 100 प्रतिशत सुविधा कब?
बच्चे तमाम परिस्थितियों के बावजूद स्कूल पहुंच रहे हैं। उनकी नियमित उपस्थिति, अनुशासन और पढ़ाई के प्रति लगन निश्चित रूप से सराहनीय है। मगर सरकार से सवाल है कि क्या बच्चों को सिर्फ स्कूल तक पहुंचा देना ही जिम्मेदारी है?
उनके पैरों में जूते, शरीर पर पूरी यूनिफॉर्म, हाथों में पाठ्य सामग्री और पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी तो व्यवस्था का दायित्व है।
दंतेवाड़ा का ‘जमीनी रिपोर्ट कार्ड’ आखिर क्या कह रहा है?
सरकार आदिवासी अंचलों में शिक्षा की तस्वीर बदलने, बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात करती है। दूसरी तरफ मंत्री के सामने ही बच्चों का नंगे पैर खड़ा होना इस दावे की जमीनी तस्वीर पर सवाल खड़ा कर रहा है।
फाइलों में यूनिफॉर्म पूरी हो सकती है, लेकिन बच्चों के शरीर पर भी पूरी है या नहीं—इसका जवाब तस्वीर दे रही है।
और तस्वीरों को किसी प्रेस नोट की जरूरत नहीं होती।
सवाल सिर्फ जूतों का नहीं... व्यवस्था की प्राथमिकता का है
मंत्री के स्वागत में बच्चों ने गुलदस्ता दिया। उन्होंने पूरे अनुशासन से प्रार्थना की और अपनी जिम्मेदारी निभाई। अब बारी व्यवस्था की है।
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बच्चों को जूते कब मिलेंगे। सवाल यह है कि जिस व्यवस्था के पास DMF-CSR जैसे संसाधन हैं, वहां बच्चों की इतनी छोटी-सी बुनियादी जरूरत पूरी करने में महीनों क्यों लग जाते हैं?
मंत्री और अधिकारी महंगे जूतों में खड़े होकर शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर समझाते रहें और बच्चे नंगे पैर भविष्य की प्रार्थना करते रहें—यह तस्वीर दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रशंसा से ज्यादा आत्ममंथन का विषय है।
अब देखना होगा कि यह तस्वीर सिर्फ एक निरीक्षण की तस्वीर बनकर रह जाती है या फिर दंतेवाड़ा के बच्चों के पैरों में जूते और उनके हाथों में बेहतर भविष्य पहुंचाने की शुरुआत बनती है।
NIA की जांच पर दंतेवाड़ा कांग्रेस ने उठाए सवाल, पूछा- गणपति और रमन्ना समेत 26 नाम चार्जशीट से क्यों हटाए गए? आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई?
शौर्यपथ संवाददाता-कृष्णा मंडल
दंतेवाड़ा । झीरम घाटी हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी दंतेवाड़ा ने जांच और कार्रवाई की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने फैसले को “आधा-अधूरा न्याय” बताते हुए आरोप लगाया कि झीरम नरसंहार के पीछे कथित रूप से मौजूद बड़े नक्सली नेताओं और राजनीतिक षड्यंत्र का सच अब तक सामने नहीं आया है।
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शकील रिज़वी ने कहा कि कांग्रेस अदालत के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन अदालत के सामने एनआईए ने जो तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए, फैसला उन्हीं के आधार पर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से ही दिशाहीन रही और घटना के राजनीतिक षड्यंत्र से जुड़े पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वारदात केवल छोटे स्तर के नक्सली कैडरों के भरोसे संभव नहीं थी। ऐसे में बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए थी।
गणपति और रमन्ना के नाम चार्जशीट से हटाने पर सवाल
कांग्रेस ने एनआईए की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि शुरुआती एफआईआर में जिन प्रमुख नक्सली नेताओं गणपति और रमन्ना के नाम शामिल थे, उनके नाम बाद की चार्जशीट से क्यों हटा दिए गए?
कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि एनआईए द्वारा वांछित और फरार घोषित किए गए कई नक्सली बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तो झीरम मामले में उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई? पार्टी ने मांग की कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली नेताओं से घटना के संबंध में पूछताछ कर उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
26 फरार आरोपियों के नाम हटने पर भी उठे सवाल
पीसीसी संयुक्त महामंत्री छविंद्र कर्मा ने कहा कि एनआईए की शुरुआती कार्रवाई और बाद में प्रस्तुत चार्जशीट के बीच कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है। उन्होंने सवाल किया कि गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद बाद की चार्जशीट से उनके नाम क्यों हटाए गए?
उन्होंने कहा कि झीरम मामले की जांच को केवल एक स्तर तक सीमित करने के बजाय घटना की पूरी साजिश और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की जरूरत है।
परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा और मार्ग बदलने पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई, यात्रा का मार्ग किसने और क्यों बदला, हमले की योजना किसने बनाई और सुरक्षा व्यवस्था में चूक कैसे हुई?
पार्टी ने आरोप लगाया कि हमले में घायल हुए और जीवित बचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच में अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
देवती कर्मा ने भाजपा पर साधा निशाना
पूर्व विधायक देवती महेंद्र कर्मा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की तत्कालीन सरकार से लेकर मौजूदा व्यवस्था तक झीरम के पूरे सच को सामने लाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच को भी आगे नहीं बढ़ाया गया।
देवती कर्मा ने आरोप लगाया कि बड़े नक्सली नेताओं को जांच के दायरे में नहीं लाया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘पूरा सच सामने आने तक जारी रहेगी न्याय की लड़ाई’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि झीरम केवल एक नक्सली हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के इतिहास का ऐसा गहरा जख्म है, जिसका पूरा सच अब भी सामने आना बाकी है। पार्टी का कहना है कि जब तक हमले के वास्तविक षड्यंत्रकारियों, कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक कांग्रेस न्याय की लड़ाई जारी रखेगी।
पत्रकार वार्ता में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव तूलिका कर्मा, जिला पंचायत सदस्य सुलोचना कर्मा, जिला महामंत्री मनीष भट्टाचार्य, प्रवीण राणा, मनोज मालवीय, महिला कांग्रेस अध्यक्ष इंद्रा शर्मा, दंतेवाड़ा ब्लॉक कांग्रेस शहर अध्यक्ष सुमित्रा शोरी, जिला सचिव जितेंद्र कश्यप और मनोज कौरव सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कबीरधाम / शौर्यपथ / उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा शनिवार को कवर्धा शहर के गांधी मैदान और भारत माता चौक में आयोजित भव्य दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने मंच से उपस्थित जनसमुदाय के साथ “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की” का जयघोष किया, जिससे पूरा वातावरण कृष्ण भक्ति और उत्साह से गूंज उठा।
ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर किया स्वागत
दही हांडी उत्सव की परंपरा के अनुरूप शर्मा ने सभी ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। यादव समाज के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक सम्मान के रूप में उन्हें खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सभापति रामकुमार भट्ट, नितेश अग्रवाल सहित समस्त पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, शहरवासी एवं यादव समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कृष्ण के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने शहरवासियों एवं प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गोविंदा उत्सव कवर्धा की गौरवशाली परंपरा है। यह आयोजन समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हम सभी को धर्म, कर्म और कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। कृष्ण लीला यह संदेश देती है कि अन्याय और अधर्म पर सदैव धर्म की विजय होती है।
श्री शर्मा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कृष्ण भक्ति में सराबोर हुआ कवर्धा
दही हांडी उत्सव में हजारों की संख्या में शहरवासी, समाजजन और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उत्सव के दौरान पूरा कवर्धा कृष्ण भक्ति, जयघोष और उल्लास से सराबोर नजर आया। गांधी मैदान से लेकर भारत माता चौक तक उत्सव का माहौल बना रहा और ‘जय कन्हैयालाल की’ के जयकारों से शहर गुंजायमान रहा।
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और नियंत्रण की कार्रवाई तेज कर दी है। 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक जिले में स्वाइन फ्लू के कुल 26 पॉजिटिव प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से वर्तमान में 10 मरीज एक्टिव हैं। सात मरीज अस्पताल में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं, जबकि तीन मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है।
कलेक्टर दुर्ग के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज वानी, जिला सर्वेलेंस अधिकारी (आईडीएसपी) डॉ. सी.बी.एस. बंजारे एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एनएचएम) सुश्री भूमिका वर्मा के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रमण की निगरानी और नियंत्रण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
पॉजिटिव मरीजों की कांटेक्ट ट्रेसिंग और मॉनिटरिंग
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में पॉजिटिव प्रकरण सामने आने के बाद मरीजों के संपर्क में आए लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। साथ ही संक्रमित मरीजों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी भी की जा रही है, ताकि संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ा संक्रमण है, जो Influenza A वायरस के कारण होता है। इसका सामान्य इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 2 दिन होता है। संक्रमित व्यक्ति में लक्षण शुरू होने के बाद लगभग 3 से 5 दिन तक संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। इसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने तथा ड्रॉपलेट संक्रमण के माध्यम से होता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में सर्दी, खांसी, बुखार और बदन दर्द शामिल हैं।
खांसते-छींकते समय बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल, टिश्यू या कोहनी से ढंकने, बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोने अथवा सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने की अपील की है। आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने तथा संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करने के साथ पर्याप्त आराम और नींद लेने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने तथा पौष्टिक भोजन करने की सलाह दी गई है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी करने और हालत बिगड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने को कहा गया है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बीमारी के लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय अथवा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। अभिवादन के दौरान हाथ मिलाने और गले मिलने से भी परहेज करें। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवा का सेवन न करें।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से कहा है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है। स्वच्छता का पालन करें, संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाएं और लक्षण दिखाई देने पर समय पर स्वास्थ्य संस्था से संपर्क करें। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आमजन से सहयोग की अपील की गई है।
बैंक में रकम जमा करने के बजाय रखता था अपने पास, फर्जी ई-मेल भेजकर अधिकारियों को देता था झूठी जानकारी; 1.50 लाख का मोबाइल जब्त
भिलाईनगर / शौर्यपथ / हाईटेक अस्पताल, भिलाई की नकद राशि में करीब 32 लाख रुपये के गबन के मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए अस्पताल के कैशियर को गिरफ्तार किया है। आरोपी कैशियर अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने पास रखता था और अधिकारियों को रकम बैंक में जमा किए जाने की फर्जी जानकारी ई-मेल के माध्यम से भेजकर गुमराह करता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गबन की रकम से खरीदा गया Samsung कंपनी का करीब 1.50 लाख रुपये कीमत का मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
पुलिस के अनुसार हाईटेक अस्पताल, भिलाई के संचालक मनोज अग्रवाल ने स्मृति नगर चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि अस्पताल में करीब छह वर्षों से कैशियर के पद पर कार्यरत जसविंदर सिंह (46), निवासी 122/डी, रुआबांधा सेक्टर, भिलाई, अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने पास रख रहा था।
दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया गबन
शिकायत प्राप्त होने के बाद स्मृति नगर चौकी पुलिस ने अस्पताल से संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन तथा बैंक में राशि जमा किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया करीब 32 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन सामने आया।
इसके बाद सुपेला थाना, स्मृति नगर चौकी में अपराध क्रमांक 1301/2026, धारा 316(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
फर्जी ई-मेल भेजकर छिपाता था रकम का हिसाब
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि आरोपी ने कैशियर के पद का फायदा उठाते हुए अस्पताल की नकद राशि बैंक में जमा करने के बजाय अपने कब्जे में रखी। इसके बाद वह अस्पताल के संबंधित अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से रकम बैंक में जमा किए जाने की फर्जी जानकारी भेजता था, जिससे वास्तविक वित्तीय स्थिति सामने न आ सके और लंबे समय तक गबन छिपा रहे।
पुलिस ने आरोपी से पूछताछ करने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गबन की रकम के इस्तेमाल के संबंध में जानकारी जुटाई। जांच के बाद पुलिस ने आरोपी जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
गबन की रकम से खरीदा 1.50 लाख का मोबाइल
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गबन की रकम से खरीदा गया Samsung कंपनी का मोबाइल फोन, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.50 लाख रुपये है, जब्त किया है। मामले में गबन की रकम के अन्य उपयोग और उससे जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड की कार्रवाई की जा रही है। मामले में पुलिस की विवेचना जारी है।
संस्थानों से नियमित वित्तीय सत्यापन की अपील
दुर्ग पुलिस ने व्यवसायिक एवं अन्य संस्थानों से अपील की है कि वे अपने वित्तीय लेन-देन का नियमित मिलान और सत्यापन करते रहें। नकद राशि के बैंक में जमा होने सहित सभी वित्तीय गतिविधियों का समय-समय पर रिकॉर्ड से मिलान किया जाए। किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी अथवा गबन की जानकारी सामने आने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
जांच रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल, विजय टांडे के साथ सुनील यादव की भूमिका की भी जांच की मांग; शिक्षा मंत्री से करीबी के दावों पर भी सवाल
बिलासपुर / शौर्यपथ / शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े विवाद की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला अब तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका तक सीमित नहीं रह गया है। जांच समिति ने जहां विजय टांडे की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका को लेकर भी शिकायतकर्ता ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
शिकायतकर्ता अंकित गौरहा का आरोप है कि जिन दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच समिति ने तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को जिम्मेदार माना, उन्हीं दस्तावेजों में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। गौरहा का कहना है कि उन्होंने जांच समिति से सुनील यादव की भूमिका की भी जांच करने की मांग की थी, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
जिस दस्तावेज के आधार पर टांडे दोषी, उसी में सुनील की भूमिका का दावा
अंकित गौरहा के मुताबिक उन्होंने जांच के दौरान समिति के समक्ष अपने पास उपलब्ध दस्तावेज और तथ्य प्रस्तुत किए थे। उनका दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तत्कालीन डीईओ विजय टांडे को दोषी माना गया।
गौरहा का कहना है कि रिकॉर्ड में स्थापना शाखा के प्रभारी क्लर्क सुनील यादव की भूमिका भी सामने आती है। उन्होंने समिति से इस भूमिका की अलग से जांच कराने की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मांग के बावजूद सुनील यादव की भूमिका पर कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया।
गौरहा का सवाल है कि यदि किसी दस्तावेज को एक अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया, तो उसी रिकॉर्ड में दूसरे संबंधित कर्मचारी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की गई?
हर जांच में अधिकारी जिम्मेदार, बाबू पर कार्रवाई क्यों नहीं?
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि यह पहला मामला नहीं है, जिसमें जांच की आंच अधिकारी तक पहुंची हो और सुनील यादव पर कार्रवाई नहीं हुई हो।
गौरहा के मुताबिक करीब तीन वर्ष पहले तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल के कार्यकाल में भी एक मामले की जांच हुई थी। उनका दावा है कि उस जांच में सुनील यादव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल सामने आए थे और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई, यहां तक कि निलंबन की सिफारिश किए जाने की बात कही गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसी मामले में तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी एमएल पटेल को निलंबित कर दिया गया, जबकि सुनील यादव के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। इसी पुराने घटनाक्रम को आधार बनाकर गौरहा मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि बार-बार जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों पर तय होती है, जबकि स्थापना शाखा में कार्यरत संबंधित कर्मचारी कार्रवाई से बच जाते हैं।
शिक्षा मंत्री से करीबी की चर्चा, रसूख पर भी सवाल
मामले में सुनील यादव के शिक्षा मंत्री से करीबी संबंध होने की चर्चा का दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। कुछ सूत्रों के हवाले से उनकी सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंच होने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन राजनीतिक संबंधों और किसी कार्रवाई को प्रभावित करने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अंकित गौरहा का आरोप है कि प्रभाव और पहुंच के कारण सुनील यादव अब तक कार्रवाई से बचते रहे हैं। हालांकि, यह आरोप भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि राजनीतिक प्रभाव की बात सही नहीं है, तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में सुनील यादव की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई।
150 से 200 शिकायतों का दावा, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
अंकित गौरहा ने दावा किया है कि सुनील यादव के खिलाफ अलग-अलग स्तरों पर करीब 150 से 200 शिकायतें की जा चुकी हैं। उनके मुताबिक इन शिकायतों में प्रतिनियुक्ति, ट्रांसफर-पोस्टिंग और वर्तमान में चल रहे विकल्प से जुड़े मामलों सहित कई आरोप शामिल हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायतें कमिश्नर, सचिव, कलेक्टर और मंत्री स्तर तक भी पहुंचाई गई हैं। गौरहा का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें अलग-अलग स्तरों पर पहुंचीं, तो प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।
इसी आधार पर वे सवाल उठा रहे हैं कि जांच की प्रक्रिया बार-बार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने तक ही क्यों सीमित रह जाती है और स्थापना शाखा के संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
कलेक्टर के जांच आदेश के बाद भी सवाल
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि हाल ही में कलेक्टर की ओर से सुनील यादव के खिलाफ जांच के निर्देश दिए गए थे। गौरहा का दावा है कि इसके बावजूद उन्होंने अपनी जगह एक चपरासी को बैठाकर स्थापना शाखा का काम करवाया।
इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि शिकायतकर्ता का यह दावा सही पाया जाता है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि किसी कर्मचारी को अपनी जगह किसी अन्य कर्मचारी से शाखा का कार्य कराने की अनुमति किस स्तर से दी गई थी।
जांच की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल
पूरे मामले में शिकायतकर्ता का मुख्य सवाल जांच की निष्पक्षता को लेकर है। उनका कहना है कि उन्होंने जांच समिति के समक्ष सभी संबंधित दस्तावेज और तथ्य उपलब्ध कराए थे। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विजय टांडे की भूमिका पर निष्कर्ष निकाला गया, लेकिन उन्हीं रिकॉर्ड में सुनील यादव की भूमिका होने के उनके दावे पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया।
अब सवाल यह है कि क्या जांच समिति संबंधित सभी कर्मचारियों की भूमिका की समान रूप से पड़ताल करेगी? क्या शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर सुनील यादव की भूमिका की भी अलग से जांच होगी? और यदि नहीं, तो इसका विभागीय आधार क्या है?
इन सवालों का जवाब अब शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।
सफाई, निर्माण और मूलभूत सुविधाओं का किया औचक निरीक्षण; अधिकारियों को समय-सीमा में काम पूरा करने के निर्देश
दुर्ग । नगर पालिक निगम दुर्ग की नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसम ने पदभार ग्रहण करते ही शहर की व्यवस्थाओं को लेकर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। शनिवार सुबह उन्होंने करीब चार घंटे तक मॉर्निंग विजिट कर शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान सफाई व्यवस्था, निर्माण कार्यों की प्रगति और वार्डों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों का औचक निरीक्षण कर अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर की व्यवस्थाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को नियमित रूप से मैदानी स्तर पर निरीक्षण कर कार्यों की वास्तविक स्थिति की निगरानी करनी होगी।
सड़क पर पड़ा C&D वेस्ट तीन दिन में हटाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने वार्ड क्रमांक 25 स्थित अग्रसेन चौक की सड़क पर पड़े बिल्डिंग मटेरियल और C&D वेस्ट का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क पर पड़े निर्माण अपशिष्ट को तीन दिनों के भीतर पूरी तरह हटाया जाए, ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो और क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनी रहे।
इसके अलावा वार्ड क्रमांक 13 की बैंक लेन में बेस तक बेहतर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वार्ड क्रमांक 12 और 13 में गीले एवं सूखे कचरे के पृथक संग्रहण की लगातार मॉनिटरिंग करने को भी कहा गया।
आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसके लिए मैदानी अमले की नियमित निगरानी और औचक निरीक्षण जरूरी है।
बिजली खंभों और भवन संबंधी मामलों की जांच के निर्देश
आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 12 में विद्युत खंभा क्रमांक 12 और 57 का तकनीकी परीक्षण तत्काल कराने के निर्देश दिए। वहीं गजानंद विहार स्थित प्लॉट के भवन संबंधी भौतिक परीक्षण और जांच की कार्रवाई जल्द पूरी करने को कहा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी संबंधित प्रकरणों में आवश्यक कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
मल्टी लेवल पार्किंग का काम तेज करने के निर्देश
इसके बाद आयुक्त ने इंदिरा मार्केट और पुराने बस स्टैंड स्थित मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण की प्रगति की जानकारी लेते हुए कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।
आयुक्त ने कहा कि मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण निर्धारित समय-सीमा में पूरा कर शहरवासियों को जल्द सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने पर भी जोर दिया।
पटेल प्रतिमा स्थापना और सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण
आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों के साथ सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्थापना एवं सौंदर्यीकरण कार्य का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि प्रतिमा तैयार हो चुकी है और अब स्थापना का कार्य शेष है।
इस परियोजना की कुल लागत 50 लाख रुपये है और कार्य लगभग 70 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। आयुक्त ने शेष कार्यों को जल्द पूरा करने और परियोजना को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन निर्माण कार्यों में किसी कारण से रुकावट आई है या जो कार्य अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए। केवल कागजों में कार्य की प्रगति दर्ज करने के बजाय मैदानी स्तर पर वास्तविक प्रगति और पूर्णता सुनिश्चित की जाए।
पुलगांव गोठान का भी लिया जायजा
मॉर्निंग विजिट के दौरान आयुक्त लीना कोसम ने पुलगांव स्थित गोठान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने गोठान में वर्तमान में मौजूद गायों की संख्या और समूह में कार्यरत सदस्यों की जानकारी संचालक से ली। इसके साथ ही उन्होंने गोठान की मौजूदा व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, भवन अधिकारी प्रकाश चंद थवानी, सहायक अभियंता गिरीश दीवान, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, उप अभियंता मोहित मरकाम, स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, शोएब अहमद सहित संबंधित अधिकारी और ठेकेदार मौजूद रहे।
रायपुर । छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत दुर्ग संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों एवं जिला मास्टर ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू तथा सह प्रभारी सचिव एस. संपत और विजय जांगिड़ की मौजूदगी में हुआ।
कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
संगठन को बूथ और ब्लॉक स्तर तक मजबूत करने पर जोर
प्रशिक्षण शिविर के दौरान कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं की भूमिका को प्रभावी करने और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने सहित विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर मार्गदर्शन एवं विचार-विमर्श किया गया।
प्रशिक्षण में ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों को संगठन की कार्यप्रणाली, कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय और जनता से जुड़े मुद्दों को संगठन के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाने को लेकर जानकारी दी जा रही है।
पहले दिन इन वक्ताओं ने दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रशिक्षण प्रभारी युगल पांडे तथा कनेक्ट सेंटर के को-चेयरमैन अशोक चतुर्वेदी ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया।
वक्ताओं ने संगठन को सक्रिय और मजबूत बनाने के लिए ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।
बस्तर के बाद अब अन्य संभागों की बारी
कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इससे पहले बस्तर संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो चुका है। दुर्ग संभाग के प्रशिक्षण के बाद अगले चरण में बिलासपुर, सरगुजा और रायपुर संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे।
संगठन सृजन अभियान के तहत चलाए जा रहे इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन को जिला, ब्लॉक और जमीनी स्तर तक अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाना है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
