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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
औचक निरीक्षण में दस्तावेज, स्टॉक एवं सप्लाई व्यवस्था सही मिली; मौके पर फैक्ट्री या री-पैकिंग सामग्री भी नहीं मिली*
बालोद। Shouryapath। ग्राम कलंगपुर स्थित खाद एवं कीटनाशक दवा गोदाम को लेकर सोशल मीडिया एवं कुछ समाचार माध्यमों में फर्जी दवा निर्माण और अवैध पैकिंग से संबंधित प्रसारित की जा रही खबरों के संबंध में कृषि विभाग द्वारा जांच की गई। जांच के दौरान मौके पर फर्जी दवा निर्माण, अवैध फैक्ट्री अथवा री-पैकिंग से संबंधित कोई प्रमाण नहीं पाया गया।
सोशल मीडिया पर प्रसारित शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए 11 सितंबर 2026 को एसडीओ कृषि, बालोद एवं वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, गुंडरदेही की संयुक्त टीम द्वारा कलंगपुर स्थित खाद एवं कीटनाशक दवा गोदाम का औचक निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने गोदाम में उपलब्ध दस्तावेजों, स्टॉक एवं कारोबार से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की जांच की।
*दस्तावेज एवं स्टॉक का किया गया सत्यापन*
निरीक्षण के दौरान खाद एवं कीटनाशक दवाओं के आवक-जावक रजिस्टर, बिल बुक, स्टॉक रजिस्टर सहित अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। उपलब्ध रिकॉर्ड एवं मौके पर मौजूद स्टॉक का मिलान किया गया तथा जांच में दस्तावेजों में कोई ऐसी अनियमितता सामने नहीं आई, जिससे फर्जी दवा निर्माण अथवा अवैध कारोबार की पुष्टि हो।
*अधिकृत कंपनियों से सप्लाई की भी हुई पुष्टि*
जांच टीम द्वारा गोदाम में उपलब्ध कृषि सामग्री की सप्लाई व्यवस्था की भी पड़ताल की गई। जिन कंपनियों से उर्वरक एवं कीटनाशक सामग्री की आपूर्ति होने की जानकारी दी गई, उनके संबंध में भी सत्यापन किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार गोदाम में कृषि सामग्री का कारोबार अधिकृत आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से संचालित होना पाया गया।
*मौके पर नहीं मिली अवैध फैक्ट्री या री-पैकिंग की सामग्री*
भौतिक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने गोदाम एवं परिसर का जायजा लिया। मौके पर किसी प्रकार की अवैध दवा निर्माण फैक्ट्री, दवा बनाने की मशीनरी अथवा फर्जी पैकिंग/री-पैकिंग से संबंधित उपकरण या सामग्री नहीं पाई गई।
इस प्रकार, जांच के दौरान सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों में लगाए गए फर्जी दवा निर्माण संबंधी आरोपों की मौके पर पुष्टि नहीं हुई।
*30 वर्षों से संचालित प्रतिष्ठान, सरपंच ने भी दी लिखित जानकारी*
गोदाम संचालक द्वारा बताया गया कि संबंधित प्रतिष्ठान पिछले लगभग 30 वर्षों से ग्राम कलंगपुर में संचालित हो रहा है। इस संबंध में ग्राम पंचायत कलंगपुर के सरपंच द्वारा भी लिखित रूप से जानकारी दी गई है कि प्रतिष्ठान लंबे समय से गांव में संचालित है तथा अब तक किसानों अथवा ग्रामीणों की ओर से इसकी गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई है।
प्रतिष्ठान संचालक का कहना है कि बिना पूर्ण तथ्यों एवं विभागीय जांच के सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई खबरों से उनकी वर्षों से अर्जित प्रतिष्ठा एवं व्यवसायिक छवि को नुकसान पहुंचा है।
*बिना सत्यापन के खबरों के प्रसार से बचने की अपील*
कृषि सामग्री से संबंधित किसी भी शिकायत या संदेह की स्थिति में संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है। बिना विभागीय पुष्टि, मौके की जांच अथवा संबंधित पक्ष का पक्ष जाने किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के विरुद्ध गंभीर आरोपों का प्रचार करना उचित नहीं है।
कृषि विभाग की अपील
कृषि विभाग ने आम जनता, किसानों एवं मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि—
कृषि उत्पादों, खाद एवं कीटनाशक दवाओं से संबंधित किसी भी शिकायत की पहले अधिकृत विभाग से पुष्टि करें।
बिना सत्यापन के सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी प्रसारित न करें।
कृषि सामग्री की गुणवत्ता अथवा बिक्री से संबंधित कोई शिकायत होने पर नजदीकी कृषि कार्यालय अथवा संबंधित अधिकारी से संपर्क करें।
किसी भी प्रतिष्ठान या व्यापारी के संबंध में तथ्यहीन जानकारी प्रसारित करने से बचें।
विभागीय जांच में फर्जी दवा निर्माण अथवा अवैध री-पैकिंग से संबंधित कोई प्रमाण सामने नहीं आने के बाद मामले को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट खबरों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
तेज बारिश ने नालों-नालियों से बहाया प्लास्टिक कचरा, अब प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर निर्णायक पहल कर सकती हैं आयुक्त
दुर्ग// पिछले शाम हुई तेज बारिश ने जहां दुर्ग शहर की जलनिकासी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने ला दी, वहीं इस बारिश ने नगर निगम प्रशासन को एक ऐसा अवसर भी दिया है, जिसे यदि समय रहते इस्तेमाल किया जाए तो शहर की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
तेज बारिश के कारण गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक जलभराव की स्थिति बनी और कई स्थानों पर सड़क, नाली और नाले एक समान दिखाई देने लगे। तेज बहाव के साथ नालों-नालियों में जमा प्लास्टिक कचरा भी काफी हद तक बहकर निकल गया। ऐसे में नवनियुक्त नगर निगम आयुक्त IAS लीना कोसाम के सामने अब दुर्ग को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक अभियान शुरू करने का एक बेहतरीन अवसर है।
बारिश से साफ हुए नाले, अब दोबारा प्लास्टिक से भरने से रोकना चुनौती
बारिश के तेज बहाव ने नालों और नालियों में लंबे समय से जमा कचरे को बहा दिया। लेकिन यदि शहर में प्लास्टिक के अनियंत्रित उपयोग और विक्रय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली बारिश में यही स्थिति दोबारा उत्पन्न होना तय है।
शहर के छोटे-बड़े बाजारों और गली-कूचों में प्लास्टिक गिलास, कप, पन्नियां तथा अन्य ऐसी प्लास्टिक सामग्री का उपयोग और विक्रय दिखाई देता है, जिनमें से कई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने की स्थिति में पर्यावरण और जलनिकासी व्यवस्था के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
यही प्लास्टिक जब कचरे के साथ नालियों तक पहुंचता है तो जलनिकासी अवरुद्ध होने का एक बड़ा कारण बनता है।
नए आयुक्त के लिए पहला बड़ा संदेश बन सकता है अभियान
नगर निगम की प्रशासनिक कमान संभालने वाली नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम के लिए यह अभियान उनके कार्यकाल की एक प्रभावी और जनहितकारी शुरुआत बन सकता है।
यदि आयुक्त अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नगर निगम के संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दें, बाजार क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कराएं, नियमों के विपरीत प्लास्टिक सामग्री के विक्रय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और कार्रवाई को केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रखने के बजाय थोक विक्रेताओं तथा आपूर्ति स्रोतों तक ले जाएं, तो इसका सीधा असर शहर की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
सिर्फ सफाई नहीं, प्लास्टिक के स्रोत पर कार्रवाई जरूरी
शहर को साफ रखने के लिए हर बारिश के बाद नालियों की सफाई करना स्थायी समाधान नहीं है। असली जरूरत यह सुनिश्चित करने की है कि प्लास्टिक कचरा नालियों और नालों तक पहुंचे ही नहीं।
इसके लिए नगर निगम को प्लास्टिक के खिलाफ लगातार अभियान चलाना होगा। दुकानों और बाजारों में जांच, नियमों के अनुरूप सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहन, प्रतिबंधित अथवा मानकों के विपरीत सामग्री पर नियमानुसार कार्रवाई और नागरिकों में जागरूकता—इन सभी कदमों को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
निष्क्रियता के दौर से निकलकर निर्णायक कार्रवाई का समय
सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नगर निगम प्रशासन को समय-समय पर सवालों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे माहौल में नए आयुक्त के पास केवल व्यवस्था संभालने का नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव का संदेश देने का भी अवसर है।
तेज बारिश ने जहां शहर के लिए असुविधा और जलभराव जैसी समस्या पैदा की, वहीं उसी बहाव ने नालियों से पुराने प्लास्टिक कचरे को बाहर निकाल दिया। अब यदि इसी स्थिति को आधार बनाकर नगर निगम प्लास्टिक के खिलाफ प्रभावी और निरंतर कार्रवाई शुरू करता है तो यह “आपदा में अवसर” का वास्तविक उदाहरण बन सकता है।
लीना कोसाम के लिए मौका—शहर की दशा और दिशा बदलने का
नवनियुक्त आयुक्त IAS लीना कोसाम के लिए यह सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं, बल्कि शहर की कार्यप्रणाली में अपनी प्रशासनिक प्राथमिकता स्पष्ट करने का अवसर हो सकता है।
यदि उनके कार्यकाल की शुरुआत ही “प्लास्टिक मुक्त दुर्ग” जैसे ठोस जनहित अभियान से होती है और इसके परिणाम जमीन पर दिखाई देते हैं, तो यह पहल लंबे समय तक शहर के लिए यादगार बन सकती है।
बारिश ने नालियों से प्लास्टिक बहा दिया है, अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन उसे दोबारा नालियों तक पहुंचने देगा?
जवाब और कार्रवाई—दोनों की उम्मीद अब नवनियुक्त आयुक्त लीना कोसाम से है।
रायपुर / छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन
वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था
कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।
नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।
रायपुर/ उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज दन्तेवाड़ा में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक स्वरूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान के अंतर्गत होने वाले कार्यक्रम केवल जिला मुख्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि जनपद, तहसील, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी रूप से आयोजित किए जाएं।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वसहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विभागवार तैयारियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध क्रियान्वयन और नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘सेवा की कहानी’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ ‘जल जन सेवा संकल्प’ और ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं, आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण जागरूकता कार्यक्रम तथा स्वच्छता एवं जनसेवा से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।
कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने जिले में अभियान की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि व्यापक जनभागीदारी के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर दिनवार एवं तिथिवार कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के साथ नियमित समीक्षा कर तैयारियों की सतत निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल शासकीय कार्यक्रमों की श्रृंखला न होकर सेवा, समर्पण और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत करने का अवसर बने। डीएफओ श्री रामाकृष्ण रंगानाथा वाय. और अपर कलेक्टर श्री राजेश पात्र सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
रायपुर / बस्तर अंचल के दूरस्थ क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को तराशने और उनके प्रशासनिक सेवाओं में जाने के सपनों को साकार करने के लिए नारायणपुर में एक बेहद सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) निधि से संचालित निःशुल्क पीएससी एवं व्यापम आवासीय कोचिंग सेंटर का विधिवत शुभारंभ किया।
जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के आर्थिक रूप से कमजोर और संसाधनों के अभाव से जूझ रहे मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक अनुकूल माहौल और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देना है। कोचिंग सेंटर के पहले बैच के लिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए 50 प्रतिभावान अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनमें 26 बालिकाएं और 24 बालक शामिल हैं।
शुभारंभ समारोह के दौरान मंत्रियों और अतिथियों ने सभी चयनित विद्यार्थियों को बैग, कॉपी, मानक पुस्तकें, पेन और आवश्यक स्टडी किट भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इन अभ्यर्थियों को न केवल सर्वसुविधायुक्त निःशुल्क आवास और भोजन की सुविधा मिलेगी, बल्कि विषय विशेषज्ञों द्वारा नियमित कक्षाओं के माध्यम से राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) और व्यापम जैसी कठिन परीक्षाओं की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।
आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को इस योजना की क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है, जो सेंटर की व्यवस्थाओं और गुणवत्ता पर सीधी नजर रखेगी। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, छोटेडोंगर सरपंच, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी और सहायक आयुक्त सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रायपुर / छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले क अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार नारायणपुर में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और नियमित शिक्षा की दिशा में एक नई और क्रांतिकारी शुरुआत हुई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के तहत जिले के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत 13 हजार से अधिक विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पौष्टिक नाश्ता योजना का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कुपोषण से पूरी तरह मुक्त करने के उद्देश्य से पौष्टिक लड्डू वितरण कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंक राम वर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने इस दूरगामी पहल का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया और स्वयं अपने हाथों से नन्हे-मुन्ने बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नाश्ता परोसकर उनका उत्साहवर्धन किया।
यह महत्वाकांक्षी पहल नारायणपुर और ओरछा (अबूझमाड़) विकासखंड के कुल 476 विद्यालयों में लागू की जा रही है, जिससे 13 हजार 15 स्कूली बच्चे सीधे लाभान्वित होंगे। योजना के तहत हर विद्यार्थी को प्रतिदिन 150 ग्राम ताजा और सेहतमंद नाश्ता दिया जाएगा। बच्चों के स्वाद और पोषण का विशेष ध्यान रखते हुए दिन के हिसाब से एक संतुलित मेन्यू तय किया गया है, जिसमें पोहा-फलीदाना, सूजी का उपमा, दलिया, चना, खड़ा मूंग और मूंगफली जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल हैं। भोजन तैयार करने वाली व्यवस्था को मजबूती देने के लिए जिले के 676 रसोइयों को 800 रुपये प्रतिमाह का अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।
यह कार्यक्रम न केवल नौनिहालों को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालेगा, बल्कि दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, ठहराव सुनिश्चित करने और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होगा। इस गरिमामय अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, ग्रामीण और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
अंतिम दिन हिंदी नाटक और लोकनाट्य की सशक्त प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कलाकारों ने अभिनय के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को दी जीवंत अभिव्यक्ति
रायपुर । संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग परब’ नाट्य श्रृंखला का अंतिम दिन हिंदी नाटक और छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के नाम रहा। मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित समापन दिवस में ‘टीस’ और ‘हण्डा’ नाटकों ने दर्शकों को भावनाओं, सामाजिक सरोकारों और लोक संस्कृति के विविध रंगों से जोड़ा। दोनों प्रस्तुतियों में कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से रंगमंच की विविधता और उसकी सामाजिक भूमिका को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
अंतिम दिन की पहली प्रस्तुति हिंदी नाटक ‘टीस’ की रही। आचार्य रंजन मोडक, लोकेश साहू एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रभावशाली ढंग से उकेरा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से पात्रों की भावनात्मक स्थितियों को जीवंत किया। प्रस्तुति में मानवीय भावनाओं के साथ सामाजिक परिस्थितियों और जीवन से जुड़े संवेदनशील पक्षों को इस तरह सामने रखा गया कि दर्शक नाटक से भावनात्मक रूप से जुड़ते चले गए।
‘टीस’ की प्रस्तुति की विशेषता कलाकारों की सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली रही। मंच पर पात्रों की भावनाओं, संवादों और घटनाक्रम के बीच बेहतर तालमेल ने नाटक को प्रभावशाली बनाया। प्रस्तुति ने यह रेखांकित किया कि रंगमंच केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को दर्शकों तक सीधे पहुंचाने वाली सशक्त कला विधा भी है।
‘हण्डा’ ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग
‘टीस’ के बाद लोकनाट्य ‘हण्डा’ की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन के रंगों से सराबोर कर दिया। श्री चंद्रशेखर चकोर, दल प्रमुख एवं निर्देशक, गुड़ी चऊंरा के दल द्वारा प्रस्तुत इस लोकनाट्य में लोक जीवन, परंपरा और ग्रामीण परिवेश की जीवंत झलक देखने को मिली। कलाकारों ने लोकभाषा, अभिनय और पारंपरिक रंगमंचीय शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को मंच पर जीवंत किया।
लोकनाट्य की प्रस्तुति के दौरान कलाकारों की ऊर्जा और पारंपरिक शैली ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। ‘हण्डा’ के माध्यम से लोक जीवन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक परंपराओं को सहज एवं प्रभावी अंदाज में प्रस्तुत किया गया। इससे दर्शकों को मनोरंजन के साथ अपनी मिट्टी, बोली और लोक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिला।
रंगमंच समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा : डॉ. संजय कनौजे
इस अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कनौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक तस्वीर सामने रखने वाली सशक्त विधा है। रंगमंच के माध्यम से कलाकार जीवन के विभिन्न पहलुओं, संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक दर्शकों को केवल किसी कथा या पात्र से जोड़ता ही नहीं, बल्कि उन्हें सोचने, समझने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित भी करता है।
डॉ. कनौजे ने कहा कि रंगमंच हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को जीवंत बनाए रखने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न रंग शैलियों और लोक परंपराओं को मंच मिलता है तथा कलाकारों को अपनी कला और सृजनात्मकता को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
एक मंच पर दिखे रंगमंच और लोक परंपरा के विविध रंग
रंग परब नाट्य श्रृंखला के अंतिम दिन की दोनों प्रस्तुतियों ने आयोजन को सार्थक समापन दिया। एक ओर ‘टीस’ ने हिंदी रंगमंच के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया, वहीं दूसरी ओर ‘हण्डा’ ने छत्तीसगढ़ की लोकनाट्य परंपरा, लोकभाषा और ग्रामीण जीवन के रंगों को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया।
इस तरह अंतिम दिन का मंचन आधुनिक रंगमंचीय अभिव्यक्ति और पारंपरिक लोकनाट्य के सुंदर संगम का साक्षी बना। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक चिंतन का अवसर दिया तथा ‘रंग परब’ की पूरी नाट्य श्रृंखला के उद्देश्य को प्रभावी रूप से सामने रखा।
कार्यक्रम में साहित्यकार एवं नाटककार श्री विजय मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, सामाजिक कार्यकर्ता श्री उदयभान चौहान, संस्कृति विभाग के भानु मरकाम एवं अजय चंद्राकर सहित अन्य गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम दुर्ग के वार्ड क्रमांक 54 पोटियाकला स्थित दशहरा मैदान में कर्मा भवन (सांस्कृतिक भवन) के प्रथम तल के निर्माण कार्य का भूमिपूजन महापौर अलका बाघमार द्वारा किया गया। लगभग 20 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस निर्माण कार्य से क्षेत्रवासियों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार के साथ आयुक्त लीना कोसम, लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, पार्षद हीरौंदी चंदानिया, सविता साहू, सजान जोसफ, मंडल अध्यक्ष कौशल साहू, लालेश्वरी साहू, कार्यपालन अभियंता विनीता वर्मा, सहायक अभियंता हरिशंकर साहू, करण यादव सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर महापौर अलका बाघमार ने कहा कि कर्मा भवन का प्रथम तल बनने से वार्डवासियों को विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक बेहतर और सुविधायुक्त स्थान मिलेगा। निगम क्षेत्र में नागरिकों की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय-सीमा में पूरा हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
-महापौर एवं आयुक्त ने वार्ड 13 एवं 25 में नाली निर्माण कार्य का किया निरीक्षण,
-खटाल संचालक को गंदगी फैलाने पर नोटिस,पालन नहीं करने पर होगी जुर्माने की कार्रवाई,
दुर्ग/ शौर्यपथ / नगर पालिक निगम। नगर पालिक निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत आज महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने वार्ड क्रमांक 13 एवं 25 में आईएएम चौक से अग्रसेन चौक की ओर जाने वाले मार्ग पर पीडब्ल्यूडी, दुर्ग द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान निर्माण कार्य की प्रगति एवं मौके पर आ रही समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त लीना कोसम ने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का तत्काल निराकरण कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर उसे लंबित न रखा जाए, बल्कि संबंधित विभागों से समन्वय कर तत्काल समाधान करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाए।
महापौर अलका बाघमार ने क्षेत्र में खटाल संचालक द्वारा आसपास गंदगी फैलाए जाने की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित संचालक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नोटिस के बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित के विरुद्ध जुर्माने की कार्रवाई की जाए।
महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नाली निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं का मौके पर ही संज्ञान लेकर उनका शीघ्र निराकरण करें, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ सके और नागरिकों को इसका लाभ जल्द मिल सके।
निरीक्षण के दौरान लोक कर्म प्रभारी देव नारायण चन्द्राकर, राजस्व एवं बाजार विभाग प्रभारी शेखर चन्द्राकर, पार्षद मनीषा सोनी, विद्यावती सिंह, रंजीता पाटिल, सावित्री दमाहे, अरुण सिंह, सहायक अभियंता संजय ठाकुर, करण यादव, विकास दमाहे सहित संबंधित अधिकारी एवं ठेकेदार उपस्थित रहे।
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा अभियान; सेवा सेतु शिविरों में योजनाओं का लाभ, युवाओं के लिए रोजगार मेले और व्यापक वृक्षारोपण पर जोर
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए तथा योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टरों को नियमित समीक्षा और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सेवा सेतु शिविरों में मौके पर होगा समाधान
चयनित गांवों में ‘सेवा सेतु’ शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई होगी। आवेदनों के लिए काउंटर बनाए जाएंगे और उनका डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से अनुश्रवण किया जाएगा। तत्काल निराकरण नहीं होने वाली समस्याओं की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी।
युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कौशल विकास विभाग के रोजगार मेलों को भी अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। युवाओं से आवेदन लेकर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान करने की योजना है।
पोषण, स्वच्छता और पर्यावरण बनेगा अभियान का हिस्सा
‘आंगन मिलन’ के तहत स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, पौष्टिक थाली, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज सहित विभिन्न गतिविधियां होंगी। वहीं ‘सेवा मेरा योगदान’ के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान और स्वच्छता सहित 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ से भी जोड़ा जाएगा। जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की सार्थकता तभी है, जब स्वास्थ्य शिविरों का लाभ जरूरतमंदों को मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़ें, युवाओं को रोजगार मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े।
70 से अधिक समितियों के साथ एसपी अंकिता शर्मा ने बनाई समन्वित कार्ययोजना, बड़े व संवेदनशील पंडालों में तैनात होंगे ‘पंडाल पुलिस मित्र’
राजनांदगांव । शौर्यपथ । आगामी गणेश उत्सव को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित बनाने के लिए राजनांदगांव पुलिस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने पुलिस कार्यालय में शहर की 70 से अधिक गणेश उत्सव समितियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में ‘One Cop–One Pandal’ पहल की जानकारी देते हुए बड़े, मध्यम एवं संवेदनशील गणेश पंडालों में ‘Pandal Police Mitra’ तैनात करने की बात कही गई। ये पुलिस और समितियों के बीच निरंतर समन्वय का कार्य करेंगे तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगे।
एसपी ने समितियों को पंडालों में प्रवेश-निकास, बैरिकेडिंग, दर्शन के लिए कतार, पार्किंग और यातायात की व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एंबुलेंस और फायर वाहन सहित आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग हमेशा खुला रखने पर विशेष जोर दिया गया।
पंडालों में CCTV, पर्याप्त प्रकाश, सुरक्षित विद्युत वायरिंग और अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था के साथ महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान नशे में उपद्रव, हथियारों का प्रदर्शन, जुआ-सट्टा और असामाजिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर अफवाह या भ्रामक जानकारी प्रसारित नहीं करने तथा संदिग्ध गतिविधि की तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई।
एसपी अंकिता शर्मा ने कहा कि गणेश उत्सव आस्था और उत्साह का पर्व है। पुलिस और उत्सव समितियां आपसी समन्वय से कार्य करेंगी, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में गणेश दर्शन कर सके और उत्सव शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो।
शासकीय बंगलों में कार्यालय या सत्ता का विशेषाधिकार? स्व. हेमचंद यादव के परिवार के कब्जे वाले आवास पर भी सवाल
दुर्ग// जिला मुख्यालय दुर्ग की सिविल लाइन और आसपास का इलाका अधिकारियों के लिए बनाए गए शासकीय आवासों के कारण जाना जाता है। दूसरे जिलों से पदस्थ होकर आने वाले अधिकारियों के लिए ये आवास प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन जब यही शासकीय आवास जनप्रतिनिधियों के कार्यालय अथवा ऐसे लोगों के कब्जे में दिखाई दें, जिनकी पात्रता पर सवाल उठ रहे हों, तो व्यवस्था और नियम दोनों पर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।
सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर को लेकर है। ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायक का कार्यालय जिला मुख्यालय की सिविल लाइन स्थित शासकीय आवासीय परिसर में संचालित होना अब ग्रामीण क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं में सवाल उठ रहा है कि जिस जनता ने ग्रामीण क्षेत्र से अपना प्रतिनिधि चुना, उसके बीच कार्यालय खोलने के बजाय शहरी क्षेत्र के शासकीय परिसर को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
बताया जा रहा है कि सिविल लाइन में लगभग तीन बंगलों के बड़े भूभाग को कार्यालय के रूप में उपयोग किए जाने की स्थिति बनी हुई है। यदि यह वास्तव में शासकीय आवासीय परिसरों का उपयोग है, तो बड़ा सवाल यह है कि क्या नियमों के तहत किसी विधायक को इस प्रकार शासकीय आवासीय संपत्ति का कार्यालय के लिए उपयोग करने की अनुमति है? यदि अनुमति है तो उसका आधार, अवधि और शर्तें क्या हैं? और यदि अनुमति नहीं है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
मामला केवल विधायक के कार्यालय तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय में वर्षों से कुछ शासकीय आवास ऐसे भी बताए जाते हैं, जिनका आवंटन स्थानांतरित हो चुके अधिकारियों के नाम पर बना हुआ है। सवाल यह है कि जब कोई अधिकारी दूसरे जिले में पदस्थ हो चुका है, तो उसके नाम पर दुर्ग का शासकीय आवास कितने समय तक रखा जा सकता है? ऐसे आवास खाली नहीं होने से नए पदस्थ होने वाले अधिकारियों को किराए के मकान में रहने की मजबूरी क्यों आती है?
इसका उदाहरण नगर निगम के पूर्व आयुक्त के मामले से भी जुड़ता है, जिन्हें पदभार ग्रहण करने के बाद शुरुआती दौर में किराए के आवास का सहारा लेना पड़ा और बाद में प्रयासों के बाद शासकीय आवास उपलब्ध हो सका। अब नए अधिकारियों की पदस्थापना के साथ फिर वही स्थिति सामने आने की आशंका प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
इसी कड़ी में स्वर्गीय हेमचंद यादव को आवंटित शासकीय आवास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्षों बाद भी उक्त आवास उनके परिवार के उपयोग में है। यदि वर्तमान में परिवार का कोई सदस्य शासकीय आवास की पात्रता रखने वाले संवैधानिक अथवा विभागीय पद पर नहीं है, तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि आवास किस नियम और किस आदेश के आधार पर अब तक आवंटित है।
चार आवास खाली हों तो कितने अधिकारियों को मिल सकती है सुविधा?
यदि सिविल लाइन के ऐसे शासकीय आवास, जिनका उपयोग वर्तमान पात्र अधिकारियों के बजाय अन्य प्रयोजनों के लिए हो रहा है, नियमानुसार मुक्त कराए जाएं तो जिला मुख्यालय में पदस्थ कई वरिष्ठ अधिकारियों को आवास की सुविधा मिल सकती है। इससे अधिकारियों को किराए के मकान की तलाश से राहत मिलेगी और शासन द्वारा निर्मित आवासों का वास्तविक उद्देश्य भी पूरा होगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि शासकीय आवास अधिकारियों के लिए हैं या सत्ता से जुड़े लोगों के प्रभाव के लिए?
चुनाव के दौरान जनता, व्यवस्था और सिद्धांतों की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि सत्ता में आने के बाद भी वे उन्हीं सिद्धांतों का पालन करें। ग्रामीण क्षेत्र से चुने गए प्रतिनिधि का जिला मुख्यालय के शासकीय परिसर में कार्यालय होना यदि नियमसम्मत है तो प्रशासन को आदेश सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि नियमसम्मत नहीं है तो कार्रवाई कौन करेगा?
ग्रामीण जनता के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है—विधायक ग्रामीण क्षेत्र से जीते हैं, लेकिन कार्यालय के लिए पसंद शहरी सिविल लाइन ही क्यों?
दुर्ग प्रशासन को अब शासकीय आवासों के आवंटन, कब्जे, पात्रता और वर्तमान उपयोग की निष्पक्ष समीक्षा कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शासकीय संपत्ति का उपयोग नियमों के अनुसार हो रहा है या फिर सत्ता और प्रभाव के चलते नियमों की परिभाषा बदल रही है।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने पांच जिलों की वर्चुअल बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की; ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ सहित होंगी विविध गतिविधियां
रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के साथ समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए वित्त मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की प्रशासनिक बैठक ली।
उन्होंने नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, कार्ययोजना, विभागीय दायित्वों तथा प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी लेते हुए सभी कार्यक्रमों का समयबद्ध और बेहतर विभागीय समन्वय के साथ क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम, वार्ड, विकासखंड एवं जिला स्तर पर अधिकतम जनभागीदारी हो तथा जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थाओं, स्व-सहायता समूहों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को अभियान से जोड़ा जाए।
17 सितंबर की शाम हर घर जलेगा ‘आशीर्वाद का दीया’
अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलन से जोड़ते हुए इसे 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक बनाया जाएगा। मैदानी टीमें घर-घर पहुंचकर नागरिकों को सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेंगी।
बच्चों के सपनों से सामने आएगा विकसित भारत का विजन
17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के तहत विकसित भारत और 25 वर्षों की सेवा यात्रा पर आधारित ड्राइंग एवं भाषण प्रतियोगिताएं होंगी। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा तथा बच्चों की कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
‘नमो सेवा गाथा’ बताएगी सेवा और बदलाव की कहानी
‘नमो सेवा गाथा’ के तहत 17 सितंबर से गांव-गांव नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 25 वर्षों की सेवा यात्रा, जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आए बदलाव की कहानियां प्रस्तुत की जाएंगी। 2 अक्टूबर को देश के 100 प्रमुख स्थलों पर विशेष मंचन प्रस्तावित है।
‘आंगन का उत्सव’ में माताओं से संवाद, कार्यकर्ताओं का सम्मान
25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनबाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित होगा। इसमें माताओं एवं बच्चों की सहभागिता के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
‘कहानी बदलाव की’ से सामने आएंगी सफलता की कहानियां
शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियां ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत संकलित की जाएंगी। इनका डिजिटल डेटा बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें हितग्राही, स्थान, जिला, संबंधित योजना और जीवन में आए बदलाव की जानकारी दर्ज होगी।
‘सेवा ज्योति यात्रा’ से जुड़ेगा जन-जन
25 वर्षों की सेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प को मजबूत करने के लिए गांव, जिला एवं राज्य स्तर पर ‘सेवा ज्योति यात्रा’ आयोजित की जाएगी। इसके साथ ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के तहत नागरिकों और संस्थाओं को स्वच्छता सहित विभिन्न सेवा गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलेगा।
‘सरकार आपके द्वार’ पहुंचाएगा योजनाओं का लाभ
‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के तहत विधानसभा एवं विकासखंड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता में पात्र नागरिकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी देने, उन्हें योजनाओं से जोड़ने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
विविध गतिविधियों से अभियान को मिलेगा जनआंदोलन का स्वरूप
अभियान में ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘जल जन सेवा संकल्प’, ‘रंगोली राष्ट्र/भारत मंडल’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ तथा ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’ जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ के अंतर्गत परिवर्तनकारी स्थलों का भ्रमण तथा 7 अक्टूबर को सेवा ज्योति यात्रा आयोजित करने की रूपरेखा है। बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
