
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर / शौर्यपथ / कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर “जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत – ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष माननीय श्री विकास मरकाम थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति एवं संभागायुक्त श्री महादेव कांवरे ने की।
कुलपति श्री कांवरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि बिरसा मुंडा आधुनिक भारत का वह सपना देखते थे जिसमें विकास और शिक्षा जन-जन तक पहुँचे। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा संचालित जन-मन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना की जानकारी देते हुए कहा कि ये योजनाएँ जनजातीय अंचलों में विकास की नई राह बना रही हैं।
मुख्य अतिथि श्री विकास मरकाम ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास को याद करने का संकल्प है। उन्होंने बताया कि केवल 14 वर्ष की अल्प आयु में बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका और जल–जंगल–जमीन की रक्षा का नेतृत्व किया। उन्होंने परलकोट आंदोलन के गेंदसिंह, वीर नारायण सिंह, गुंडाधूर और लांगुर किसान जैसे जनजातीय नायकों के योगदान को भी स्मरण किया।
श्री मरकाम ने युवाओं से आह्वान किया कि शिक्षा लो, आगे बढ़ो, लेकिन अपनी संस्कृति, अपने त्योहार और अपनी जड़ों को कभी मत भूलो। कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता और बिरसा मुंडा जयंती के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और पुरस्कार वितरण
छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को जीवंत बना दिया। रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
निःशुल्क मेडिकल कैंप
एमबीए (एचए) विभाग द्वारा निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों व कर्मचारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। मेडिकल कैंप में डॉ. देवेंद्र कश्यप एवं उनकी टीम की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम संयोजक डॉ. आशुतोष मंडावी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और इतिहास से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं और विद्यार्थियों को जनजातीय समाज पर शोध के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
कार्यक्रम में उप कुलसचिव सौरभ शर्मा, विभागाध्यक्षगण, अग्रसेन महाविद्यालय की शिक्षिका सुश्री ऋतुलता तारक एवं सुश्री ईशा गोस्वामी सहित अनेक अतिथि, शोधार्थी व छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
नई दिल्ली / एजेंसी (पीआईबी)राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार और जल संचय–जनभागीदारी पुरस्कार प्रदान किए, जिसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रायपुर जिला और रायपुर नगर निगम को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ। रायपुर नगर निगम को पूरे देश में प्रथम स्थान, रायपुर जिले को ईस्टर्न जोन में तृतीय स्थान, तथा राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ को द्वितीय स्थान हासिल हुआ।
राष्ट्रपति मुर्मु ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव सभ्यता की कहानी सदैव नदियों और जल स्रोतों के इर्द-गिर्द विकसित हुई है। भारतीय परंपरा में जल पूजनीय माना जाता है और हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का पहला शब्द “सुजलम्” देश में जल की सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जल का कुशल उपयोग केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अनिवार्यता है, विशेषकर भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में जहाँ प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन जल चक्र को प्रभावित कर रहा है, इसलिए सरकार और जनता को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति ने बताया कि जल संचय–जनभागीदारी पहल के तहत देशभर में 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएं निर्मित की गई हैं। उन्होंने उद्योगों द्वारा चक्रीय जल अर्थव्यवस्था अपनाने, जल उपचार एवं पुनर्चक्रण बढ़ाने और कई इकाइयों द्वारा शून्य द्रव उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की सराहना की।
रायपुर की ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में रायपुर जिले ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया। पुरस्कार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह तथा नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने ग्रहण किया। रायपुर नगर निगम ने 33,082, रायपुर जिले ने 36,282 तथा छत्तीसगढ़ ने 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूर्ण किए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट्स, अमृत सरोवर, टॉप डैम, परकोलेशन टैंक तथा स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट के अंतर्गत डिजिटल भू-जल ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं। साथ ही रायपुर में 4 एसटीपी के माध्यम से 206 MLD क्षमता विकसित की गई और 9 औद्योगिक इकाइयों को 125.849 MLD शुद्ध जल उपलब्ध कराया गया।
राष्ट्रपति ने कहा कि जल का सम्मान और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने जल-जागरूकता को देश की जनचेतना का केंद्र बनाने का आह्वान किया।
शौर्यपथ दैनिक समाचार, 19 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों के बारे में चर्चा जारी है, लेकिन अभी तक गठबंधन के भीतर से कोई स्पष्ट नाम सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा:
सरकार गठन की दिशा में पहला कदम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 नवंबर 2025 को बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह कदम बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। नीतीश कुमार का इस्तीफा तकनीकी रूप से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद नई सरकार के गठन के लिए पहला कदम माना जा रहा है। इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल ने नीतीश कुमार से कहा है कि वे तब तक मुख्यमंत्री बने रहें, जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता।
राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को इस स्थिति में कार्य करते रहने की अनुमति दी है, ताकि राज्य में संवैधानिक संकट न उत्पन्न हो और सरकार के गठन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक राज्य में कोई अस्थिरता नहीं आनी चाहिए।
आगामी बैठकें: नई सरकार के
गठन के लिए महत्वपूर्ण संकेत**
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, भाजपा और जदयू सहित एनडीए के सहयोगी दल अब नए मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री पद के लिए बातचीत में जुटे हुए हैं। दोनों पार्टियाँ और उनके सहयोगी दलों के नेताओं के बीच रणनीतिक बैठकें चल रही हैं, जिनमें राज्य की नई सरकार की रूपरेखा और मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा।
इस सिलसिले में, 19 नवंबर 2025 को विधायकों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक में एनडीए के सभी विधायकों और पार्टी नेताओं को शामिल किया जाएगा, और यह बैठक राज्य के आगामी नेतृत्व के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।
इसके बाद, 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित एनडीए के शीर्ष नेता और अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियाँ भी उपस्थित हो सकती हैं। समारोह में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सभी सदस्य शपथ लेंगे, और नए नेतृत्व का आधिकारिक रूप से उद्घाटन होगा।
मुख्यमंत्री पद के लिए नामों की चचार्:
नीतीश कुमार का नाम सबसे प्रमुख
मुख्यमंत्री पद पर संभावनाओं को लेकर बिहार के राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। जदयू और भाजपा दोनों ही पार्टी के भीतर से मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार का नाम मुख्यमंत्री के लिए सबसे प्रबल माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में ही एनडीए ने विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल की है और उनकी राजनीतिक स्थिरता के कारण ही गठबंधन की सहमति भी उन्हीं के पक्ष में देखी जा रही है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में मुख्यमंत्री पद के लिए अन्य नेताओं के नामों की भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम पर अपनी सहमति दी है। हालांकि, फिलहाल तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
गठबंधन सहयोगियों की सहमति और
विधायकों की बैठक के बाद अंतिम निर्णय
मुख्यमंत्री पद के लिए अंतिम निर्णय विधायकों की बैठक और गठबंधन सहयोगियों की सहमति के बाद लिया जाएगा। जदयू और भाजपा के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें दोनों दलों के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन की सहमति प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में बिहार में विकास के कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाया गया है।
यह बैठक इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसमें मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंत्रिमंडल के गठन पर भी चर्चा की जाएगी। जिन मंत्रियों को नई सरकार में जगह दी जाएगी, उनका चयन गठबंधन के नेताओं के बीच हो सकता है, जो राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
नई सरकार का गठन और राजनीति में आगे का रुझान
19 और 20 नवंबर 2025 को होने वाली बैठकों और शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। बिहार की राजनीति में अब कई सवालों के जवाब मिलने वाले हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए इस राजनीतिक स्थिति को किस तरह से संभालता है। नई सरकार के गठन के बाद राज्य में विकास के कार्यों और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने की चुनौती मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी टीम के सामने होगी।
नई दिल्ली(पीआईबी)/ शौर्यपथ / किसानों से सीधे संवाद स्थापित करने और केंद्र सरकार की कृषि संबंधी पहलों की जमीनी प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे का मुख्य आकर्षण धमतरी में आयोजित होने वाला कृषक सम्मेलन एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त वितरण कार्यक्रम से जुड़ना है।
दौरे की शुरुआत में श्री चौहान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट (ICAR–NIBSM), रायपुर पहुंचेंगे, जहां वे संस्थान की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे, पौधारोपण करेंगे और वैज्ञानिकों एवं किसानों से चर्चा करेंगे। इसके पश्चात वे डॉ. शोभाराम देवांगन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृति मंत्रालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त लाभार्थी सम्मेलन में भाग लेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर के करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त का वर्चुअल अंतरण देखेंगे। वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से तीन समान किश्तों में प्रदान की जाती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।
धमतरी के मुख्य समारोह के बाद, श्री चौहान का फोकस राज्य के किसान समुदाय से प्रत्यक्ष संवाद पर रहेगा। इस उद्देश्य से रायपुर के अग्रवाल बगीचा, भटगांव में व्यापक कृषक संवाद एवं किसान चौपाल का आयोजन किया गया है। इन सत्रों का उद्देश्य औपचारिकता से आगे बढ़कर किसानों की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से सुनना तथा कृषि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों का गहन आकलन करना है। इन संवादों से केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने तथा भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए व्यवहारिक फीडबैक प्राप्त होगा। यह दौरा छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों के कल्याण, समृद्धि और सशक्तिकरण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।
रायपुर / शौर्यपथ /
नारायणपुर संभाग में सड़क बुनियादी ढांचे को नया रूप देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने काम की गति तेज कर दी है। गढ़बेंगाल से धौड़ाई मार्ग पर गिट्टी WMM से पेचिंग का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं पल्ली छोटेडोंगर–ओरछा मार्ग के 19 किमी हिस्से के लिए निविदा प्रक्रिया नवंबर अंत तक पूरी कर ली जाएगी।
वर्तमान में 12 किमी लंबे पल्ली छोटेडोंगर–ओरछा मार्ग पर सीमेंट-कांक्रीट सड़क चौड़ीकरण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। वर्षा समाप्त होते ही विभाग ने मशीनों और जनशक्ति की संख्या बढ़ाकर निर्माण की रफ्तार को दोगुना कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार,
“लक्ष्य है कि दोनों ही सड़कों को तय समय से पहले पूरा कर जनता को सुरक्षित, मजबूत और बारिश में भी टिकाऊ सड़क उपलब्ध कराई जाए।”
इन दोनों मार्गों के निर्माण से नारायणपुर, छोटेडोंगर, धौड़ाई, पल्ली और ओरछा के हजारों ग्रामीणों को तेजी से आवागमन का लाभ मिलेगा। साथ ही, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सुगम होगी।
रायपुर / शौर्यपथ /खेल प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है अब उनके खेल के मैदान का कायाकल्प होने जा रहा है नगरीय निकाय विभाग द्वारा मैदान के संधारण के लिए उपमुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन करने के बाद यह संभव हो गया . बता दे कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने रायगढ़ जिले के किरोड़ीमलनगर नगर पंचायत में उन्मुक्त खेल मैदान के निर्माण के लिए एक करोड़ 86 लाख 29 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने संचालनालय से इसकी मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं। श्री साव ने गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मुंगेली जिले के लोरमी में राजीव गांधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में विभिन्न कार्यों के लिए 72 लाख 80 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने संचालनालय से इसकी मंजूरी के आदेश जारी कर दिए हैं। श्री साव ने सभी कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने लोरमी के राजीव गांधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में चार कार्यों के लिए कुल 72 लाख 80 हजार रुपए की स्वीकृति दी है। इनमें बाउंड्री-वॉल निर्माण के लिए 21 लाख 54 हजार रुपए, पेवर ब्लॉक कार्य के लिए 19 लाख 54 हजार रुपए, हाईमास्ट लाइट के लिए 12 लाख 38 हजार रुपए तथा शेड निर्माण के लिए 19 लाख 34 हजार रुपए शामिल हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बरसात में शहरों में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए पहल करते हुए सभी नगरीय निकायों से प्रस्ताव मंगाए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक श्री आर. एक्का ने राज्य के सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर एक सप्ताह में इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।
संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा निकायों को जारी परिपत्र में कहा गया है कि शहरों में वर्षा ऋतु के समय अत्यधिक वर्षा होने से बाढ़ एवं कुछ क्षेत्रों में जलभराव होने के कारण नागरिकों को असुविधा होती है। शहरों के जिन-जिन क्षेत्रों में जलभराव होता है, वहां असुविधा से बचने तथा इसके स्थायी समाधान के लिए नाला/नाली निर्माण एवं कांक्रीटीकरण किया जाना आवश्यक होता है। विभाग ने जलभराव की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सभी नगरीय निकायों को प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर संचालनालय भेजने को कहा है।
127 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास:100 सीटर छात्रावास और पहुंच मार्ग की घोषणा
मुख्यमंत्री का पारम्परिक मोहरी वाद्ययंत्र के सामूहिक वादन से हुआ स्वागत
गाड़ा समाज बूढ़ादेव महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर में नक्सलवाद तेजी से समाप्ति की ओर अग्रसर है। ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों को शासन की मूलभूत योजनाओं से तेजी से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह बस्तर को भी विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुंचाना है। प्रदेश सरकार ने लगभग दो वर्षों की अल्पावधि में ही अधिकांश गारंटियों को पूरा कर लिया है तथा छत्तीसगढ़ को समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज कोण्डागांव में गाड़ा समाज द्वारा आयोजित बूढ़ादेव महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर 127 करोड़ रुपए के 61 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने कोनगुड़ से धनोरा मार्ग निर्माण हेतु 90 लाख रुपए, केशकाल से विश्रामपुरी मार्ग के लिए 39 करोड़ रुपए, तथा ग्राम कुधूर में अनुसूचित जनजाति बालिका 100 सीटर छात्रावास के लिए 2.71 करोड़ रुपए की घोषणा की। उन्होंने बहुउद्देशीय केंद्र, दिव्यांग सेंटर और कोचिंग सेंटर संचालित करने हेतु 1.5 करोड़ रुपए प्रदाय करने की बात कही।मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में कॉफी टेबल बुक (Journey of Dignity: Story of NRLM Kondagaon), प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल पुस्तिका, उच्च जोखिम गर्भावस्था हेतु हेल्पलाइन नंबर, हेलमेट बैंक तथा सुपोषित विकास चार्ट का भी विमोचन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेश भर में रजत महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है, यहां की मिट्टी अत्यंत उर्वरा है। प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं। किसानों से 15 नवम्बर से धान खरीदी शुरू कर दी गई है। महतारी वंदन योजना, तेंदूपत्ता संग्राहक कल्याण योजनाएँ और चरण पादुका योजना के तहत लगातार हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक अच्छा किसान, व्यवसायी, जनसेवक या राजनेता बनने के लिए उत्तम शिक्षा अनिवार्य है। इसलिए सभी लोग बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें।
विधायक सुश्री लता उसेंडी ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के आगमन पर पारम्परिक वाद्ययंत्र मोहरी का सामूहिक वादन कर आत्मीय स्वागत किया गया।मुख्यमंत्री श्री साय ने बूढ़ादेव की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना भी की।
कार्यक्रम में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, सांसद श्री महेश कश्यप, सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री नीलकंठ टेकाम, कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, श्री कमलचंद्र भंजदेव, पूर्व सांसद श्री मोहन मण्डावी, पूर्व विधायक श्री शिशुपाल शोरी तथा गांडा समाज के पदाधिकारी श्री प्रदीप कुलदीप, डॉ. किरण बघेल और श्री अशोक चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित थे।
शासकीय जगतु माहरा बस्तर हाईस्कूल के शताब्दी वर्ष समारोह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हुए शामिल
मुख्यमंत्री ने जगतु माहरा बस्तर हाईस्कूल के जीर्णोद्धार हेतु डेढ़ करोड़ रुपए सहित पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास भवन निर्माण की घोषणा की
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जगदलपुर में शासकीय जगतु माहरा बस्तर हाईस्कूल के शताब्दी वर्ष समारोह कार्यक्रम में आज शामिल हुए। बस्तर हाईस्कूल के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यालय परिवार को शताब्दी वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है, शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। भारत में प्राचीन काल से ही शिक्षा का अत्यधिक महत्व रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में विदेशों से विद्वान ज्ञानार्जन के लिए आते थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में बस्तर हाईस्कूल तथा कांकेर के नरहरदेव विद्यालय जैसे संस्थान शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1926 में जब इस विद्यालय का निर्माण हुआ होगा, तब संसाधनों का अत्यधिक अभाव रहा होगा, लेकिन पिछले सौ वर्षों की विकास यात्रा में इस विद्यालय ने अनगिनत होनहार छात्र-छात्राओं को तैयार किया है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर विद्यालय का नाम रोशन किया है। आज उनमें से अनेक पूर्व छात्र इस समारोह में सम्मिलित हुए हैं। उन्होंने संस्था के निरंतर प्रगति के लिए शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य गठन के पच्चीस वर्ष पूर्ण होने पर सभी को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने जगतु माहरा बस्तर हाईस्कूल के जीर्णोद्धार हेतु डेढ़ करोड़ रुपए तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास भवन निर्माण की घोषणा की। साथ ही विद्यालय की अन्य सभी आवश्यकताओं को प्राथमिकता से पूरा करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस कार्यक्रम में शैलेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा विद्यालय को प्रदान किए गए दो ड्रोन टोकन स्वरूप प्रदान किए, साथ ही शैलेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा विद्यालय को 50 ड्रोन उपलब्ध कराने की सहमति भी दी गई, जिससे तकनीकी शिक्षा को और प्रोत्साहन मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने जगतु माहरा शासकीय बहुउद्देश्यीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जगदलपुर में शताब्दी समारोह पट्टिका का अनावरण किया। उन्होंने स्वर्गीय ठाकुर देवेन्द्र सिंह और स्वर्गीय श्रीमती शारदा ठाकुर की स्मृति में निर्मित दो स्मार्ट क्लासों का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसर में 'एक पेड़ मां के नाम' अंतर्गत परिजात प्रजाति के पौधे का रोपण किया।
शताब्दी समारोह के ध्वजारोहण के साथ विद्या-दायिनी मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी के पिता की स्मृति में आयोजित न्योता भोज कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों को भोजन परोसा। इसके अलावा जगतु माहरा बस्तर हाईस्कूल के वे सात पूर्व छात्र, जो पुलिस और सुरक्षा बल में सेवा के दौरान शहीद हुए, उनके छायाचित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने विद्यालय के शताब्दी समारोह के लिए बधाई देते हुए कहा कि आजादी से पहले 1926 में आरंभ हुए इस ऐतिहासिक विद्यालय के लिए यह दिन अत्यंत गौरवशाली है। पूर्व शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा पूर्व छात्रों के लिए यह यादगार लम्हा है। उन्होंने कहा कि इस संस्था से शिक्षा पाकर अनेक छात्र-छात्राएँ विभिन्न सेवाओं के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों को वरिष्ठजनों से सीखने का आग्रह किया और विद्यालय की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने का भरोसा दिलाया।
विद्यालय के पूर्व छात्र और विधायक जगदलपुर श्री किरण देव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अविभाजित बस्तर जिले में बस्तर हाईस्कूल और कांकेर का नरहरदेव हाईस्कूल ही प्रमुख शिक्षा संस्थान थे, जहाँ समूचे अंचल के विद्यार्थी अध्ययन करते थे। उन्होंने बताया कि इस संस्था के पूर्व छात्र आज आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर, प्राध्यापक, सफल व्यवसायी और उद्यमी के रूप में समाज की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने पुराने शिक्षक-शिक्षिकाओं के योगदान को नमन किया और विद्यालय के जीर्णोद्धार तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति का अनुरोध किया। कार्यक्रम के आरंभ में विद्यालय के प्राचार्य श्री बी.एस. रामकुमार ने प्रतिवेदन के माध्यम से स्कूल के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराया।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद (बस्तर) श्री महेश कश्यप, विधायक (चित्रकोट) श्री विनायक गोयल, छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, महापौर श्री संजय पाण्डे, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर श्री हरिस एस., पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित विद्यालय के पूर्व तथा वर्तमान छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 'पंडुम कैफे' का किया शुभारंभ
रायपुर / शौर्यपथ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का शुभारंभ किया। यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और समर्पण कर चुके सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है।‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में स्थित है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘पंडुम कैफे’ में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और ‘पंडुम कैफ़े’ के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफ़े का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीड़ित तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति के पथ पर लौटे और कैफ़े में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि,“हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।”
एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि,“पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।”
एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि,“हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।”
उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहाँ हर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहाँ परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है।
इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्री श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर श्री संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, संभागायुक्त श्री डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पी., कलेक्टर श्री हरिस एस., पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण भी उपस्थित थे।
राजनांदगांव/शौर्यपथ/ सर्दियों के मौसम में दिल के मरीजों के लिए खतरा बढ़ जाता है।एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग डॉ. प्रकाश खूंटे बताते हैं कि ठंड के कारण शरीर की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल पर अचानक भार पड़ता है। इसी कारण इस मौसम में हार्ट अटैक की घटनाएँ अधिक देखी जाती हैं। सर्दियों में लोगों की गतिविधियाँ कम हो जाती हैं और तैलीय, भारी भोजन का सेवन बढ़ जाता है। इसके साथ ही फ्लू और सांस की समस्या भी दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, जिससे दिल की बीमारी का जोखिम और बढ़ जाता है।
डॉ. प्रकाश खूंटे का कहना है कि हार्ट अटैक के लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि सीने में दर्द या दबाव महसूस हो, दर्द हाथ, गर्दन या पीठ तक फैल जाए, सांस लेने में कठिनाई, ठंडा पसीना या चक्कर आए—तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बुजुर्ग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह व कोलेस्ट्रॉल के मरीज और पहले से हृदय रोग से पीड़ित लोग सर्दियों में विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं।
सावधानी जिन लोगों को रखनी चाहिए, उनमें डॉ. प्रकाश खूंटे खासतौर पर 50 वर्ष से ऊपर के लोगों, स्मोकिंग करने वालों और लंबे समय से दिल की बीमारी झेल रहे मरीजों को शामिल करते हैं। उनके अनुसार सर्दियों में दिल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाने चाहिए। सबसे पहले ठंड से बचाव जरूरी है—गर्म कपड़ों का सही उपयोग करें और अचानक ठंडी हवा में जाने से बचें। हल्का व संतुलित भोजन लें, दिन में थोड़ा-बहुत चलते-फिरते रहें और नियमित रूप से BP, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें। डॉ. प्रकाश खूंटे सलाह देते हैं कि धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन सर्दियों में दिल के लिए और भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए इन्हें सीमित करना आवश्यक है।
बहुत ठंड में भारी व्यायाम या अचानक जोरदार शारीरिक गतिविधि दिल पर अनावश्यक दबाव डाल सकती है, इसलिए हल्का और सुरक्षित व्यायाम ही उपयुक्त है। वे यह भी कहते हैं कि पर्याप्त पानी पिएँ, क्योंकि सर्दियों में शरीर अनजाने में डीहाइड्रेट हो जाता है, जिससे खून गाढ़ा होने का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ डॉ. खूंटे के अनुसार, शीत लहर के दिनों में दिल के मरीजों, बुजुर्गों और हाई BP/शुगर वाले मरीजों को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ठंड का सही प्रबंधन, तनाव से दूरी और समय पर जांच—ये तीन बातें सर्दियों में दिल की सुरक्षा की रीढ़ हैं।
आखिर में डॉ. प्रकाश खूंटे यह संदेश देते हैं कि सर्दियों में छोटे-छोटे पर सावधानीपूर्ण कदम दिल को गंभीर खतरे से बचा सकते हैं। किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर उपचार से हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
जांजगीर-चांपा / शौर्यपथ / कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल रावटे ने आज ग्राम पंचायत धुरकोट, मुनुंद एवं भड़ेसर स्थित धान उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र प्रभारी से पंजीकृत किसानों की संख्या, बारदाना उपलब्धता, मूलभूत सुविधाएँ एवं टोकन सहित अन्य बिंदुओं की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिला पंचायत सीईओ ने उपार्जन केंद्रों में मौजूद किसानों से भी बातचीत मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली। इस पर उन्होंने प्रभारियों को शासन के निर्देशों के अनुरूप धान खरीदी करने, किसानों की सुविधा के लिए समय पर तौल एवं बारदाना वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं होनी चाहिए और सभी किसानों को सुगमता के साथ सुिवधाए उपलब्ध हो। इस अवसर पर जनपद पंचायत नवागढ़ सीईओ श्री अनिल कुमार सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
राशन दुकान व आंगनबाड़ी तक पहुंचा कचरे का कहर, प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा गंदगी का कारोबार!
By - नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ । शहर में स्वच्छता का नारा बुलंद करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि अगर सच्चाई देखना चाहते हैं तो एक बार सिविल लाइन वार्ड क्रमांक 07 लालबाग स्थित SLRM सेंटर का हाल जरूर देखें। यहां शहर भर का कचरा लाकर डंप किया जाता है, जिसे महिला समूह के माध्यम से छांटा जाता है, लेकिन सफाई के नाम पर यह केंद्र अब दुर्गंध, मक्खियों और बीमारी का गढ़ बन चुका है।
बदबू से त्रस्त जनता, और वहीं पास में चल रहा राशन दुकान व बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्र, दोनों ही इस कचरे के दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। बच्चों को पोषण देने के बजाय यहां संक्रमण और प्रदूषण का ज़हर परोसा जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सेंटर से उठने वाली सड़ी दुर्गंध पूरे इलाके में फैल चुकी है। “सुबह से शाम तक बदबू से सांस लेना मुश्किल हो जाता है। बच्चों को बाहर खेलना तो दूर, आंगनबाड़ी भेजना भी खतरे से खाली नहीं,” लोगों ने नाराज़गी जताई।
शिकायतों के बावजूद नगर निगम और स्वच्छता मिशन अधिकारी बेखबर हैं, जैसे किसी को जनता की सेहत की कोई परवाह ही नहीं। हर साल “स्वच्छता रैंकिंग” में नंबर बढ़ाने की होड़ में लगे अधिकारी, ज़मीनी गंदगी और जनता की परेशानी को पूरी तरह अनदेखा कर रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन का असली चेहरा लालबाग में साफ दिखाई दे रहा है — जहां मिशन सिर्फ पोस्टर और भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में नागरिक बदबू, मच्छर और बीमारी के बीच जीने को मजबूर हैं।
वार्डवासियों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे या तो SLRM सेंटर को आबादी से दूर हटाया जाए, या फिर वहां दुर्गंध नियंत्रण, कीटाणुनाशक छिड़काव और सफाई की स्थायी व्यवस्था की जाए। अन्यथा वार्ड के लोग आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, क्योंकि अब यह मामला सिर्फ बदबू का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और प्रशासनिक लापरवाही का बन चुका है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
