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May 31, 2026
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सेहत टिप्स /शौर्यपथ / सर्दियों के मौसम में मूंगफली खाना भला किसे पसंद नहीं है. गर्मागरम मूंगफली को कोई नमक के साथ खाना पसंद करता है तो कोई गुड़ के साथ. मूंगफली एक बहुत ही पौष्टिक और फायदेमंद फूड है. ये सिर्फ स्वाद को बढ़ाने ही नहीं सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है. आपको बता दें कि मूंगफली में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मददगार हैं. अगर आप मसल्स को बढ़ाना चाहते हैं तो मूंगफली प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स बन सकता है. तो चलिए जानते हैं किन लोगों को और क्यों करना चाहिए मूंगफली का सेवन.
इन लोगों को जरूर खाना चाहिए मूंगफली-
1. प्रोटीन-
मूंगफली में प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जो मांसपेशियों के विकास और मरम्मत के लिए आवश्यक है.
2. दिल-
मूंगफली में मोनोसैचुरेटेड फैट और पॉलीसैचुरेटेड फैट होते हैं, जो दिल के लिए अच्छे होते हैं.
3. वजन घटाने-
मूंगफली में फाइबर और प्रोटीन होते हैं, जो भूख को कंट्रोल करते हैं और लंबे समय तक पेट को भरा रखने का एहसास कराते हैं.
4. मस्तिष्क-
मूंगफली में विटामिन बी3 (नियासिन) और रेस्वेराट्रोल होता है, जो मस्तिष्क के कार्यों को बढ़ावा दे सकते हैं.
5. एनर्जी-
मूंगफली में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को क्विक एनर्जी देने में मददगार हैं.
6. पाचन-
मूंगफली में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार है.
7. हड्डियों-
मूंगफली में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे खनिज होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / करवाचौथ व्रत विवाहित स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है. यह उपवास प्रेम और समर्पण का प्रतीक है. इस दिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रदर्शन करके पति के हाथों पानी पीकर व्रत का पारण करती हैं. इस साल यह व्रत 20 अक्तूबर को है. करवा चौथ का त्योहार सामूहिक रूप से मनाने की परंपरा है. इस दिन महिलाएं एक-दूसरे के घर इकट्ठा होती हैं, फिर विधि-विधान के साथ करवा माता की पूजा करती हैं. आपको बता दें कि करवाचौथ के व्रत में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व होता है जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हैं.
करवाचौथ पर सोलह सिंगार का महत्व
बिंदी- सुहागिन महिलाओं के लिए कुमकुम का विशेष महत्व होता है. यह गुरु के बल को बढ़ाती है.
सिंदूर - सिंदूर से मांग भरने से पति की आयु लंबी होती है. इसलिए महिलाएं पूरी मांग भरती हैं.
काजल- वहीं, आंखों में काजल लगाने से मंगलदोष दूर होता है.
मेहंदी - इसके अलावा मेहंदी हाथों की सुंदरता को बढ़ाती है. कहते हैं जितनी चटक मेहंदी चढ़ती है पति उतना प्यार करता है.
चूड़ियां - यह भी सुहाग का प्रतीक होती है. लाल और हरे रंग की चूड़ी पहनने से सुख समृद्धि आती है.
मंगलसूत्र - मंगलसूत्र भी सुहाग का प्रतीक माना जाता है. इसके काले मोती बुरी नजरों से दूर रखते हैं.
नथ - वहीं, सोलह श्रृंगार में नथ का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है. इससे सुंदरता में चार चांद लग जाता है और बुझ दोष दूर होता है.
गजरा- इसके अलावा गजरा आपकी सुंदरता को बढ़ाता है और इसकी सुगंध जीवन में सकारात्मकता लाती है.
मांग टीका - यह माथे के बीचो-बीच पहना जाता है. यह सादगी से जीवन बिताने का प्रतीक होता है.
झुमके - वहीं, कान में बालियां टॉप्स राहु और केतु का दोष दूर करती हैं.
बाजूबंद - इसका भी विशेष महत्व होता है. इससे परिवार धन समृद्धि की रक्षा होती है.
कमरबंद - यह इसबात का प्रतीक होता है कि अब आप ही घर की मालकिन हैं. यह साड़ी को भी संभालकर रखता है.
बिछिया - वहीं, यह पहनने से शनि और सूर्य का दोष दूर होता है.
पायल - पायल चांदी की ही पहनी जाती है.
अंगूठी - यह विवाह सूत्र में बंधने की निशानी होती है.
स्नान - आपको बता दें कि सिंगार का पहला चऱण स्नान होता है. नहाने के पानी में शिकाकाई, भृंगराज, आवंला, उबटन जैसी सामग्रियों को मिलाते हैं.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ  हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक दीपावली पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है. इसकी तैयार महीने भर पहले से शुरू हो जाती है. साफ-सफाई से लेकर कपड़े और लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों की शॉपिंग शुरू हो जाती है. लेकिन इस साल कार्तिक माह के अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाले इस पर्व की तारीख को लेकर लोग बहुत कंफ्यूज हैं. कोई 31 अक्तूबर को मनाने की बात कह रहा है, तो कुछ 1 नवंबर को. ऐसे में पूरे देश में दीपों के पर्व दीवाली को किस दिन मनाया जाएगा, एक मत नहीं बन पा रही है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल दीपावली की सही तारीख और लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
दीपावली 2024 कब है -
दीपावली का महापर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर, गुरुवार को दोपहर 03 बजकर 52 मिनट पर होगी और समापन अगले दिन यानी  1 नवंबर, शुक्रवार को शाम 06 बजकर 16 मिनट पर होगा.  
आपको बता दें कि दीपावली रात को मनाई जाती है और लक्ष्मी पूजन भी सूर्यास्त के बाद किया जाता है. इस लिहाज से 31 अक्टूबर 2024 को दिवाली मनाई जाएगी.
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त -
पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 12 मिनट से 07 बजकर 43 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. ऐसे में लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 05 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा.

खाना खजाना /शौर्यपथ / मीठा खाने के शौकीन को आप किसी भी समय मीठा दे वो मना नहीं करेंगे. भारत में हर राज्य में आपको एक अलग स्वाद वाली मिठाई की मिठास मिलेगी. क्योंकि भारत में कोई भी सेलिब्रेशन मीठे के बिना अधूरा है. आज हम आपको साउथ की एक ऐसी ही मिठाई को बनाने का प्रोसेस दिखा रहे हैं. साउथ इंडियन फूड दुनिया भर में फेमस हैं ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन, क्या आप यहां की फेमस मैसूर पाक को ट्राई किया है. साउथ की सबसे फेमस मिठाइयों में से एक है मैसूर पाक. बेसन और ढेर सारे घी से बनी यह मिठाई आपके मुंह में घुल जाने वाली स्वादिष्ट मिठाई है. हाल ही में एक फूड व्लॉगर  ने इस मिठाई को बनाने की प्रक्रिया इंस्टाग्राम पर शेयर की. यह वीडियो कर्नाटक में एक दुकान का था और वायरल होने के बाद इसे 8 मिलियन से अधिक बार देखा गया है.
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क्लिप में कुक को मथनी मशीन में बेसन और घी डालते हुए दिखाया गया है. जैसे-जैसे मशीन मिक्स करना जारी रखती है, वे धीरे-धीरे अधिक घी मिलाते हैं. फिर बैटर में चीनी मिलाई जाती है, उसके बाद अतिरिक्त घी मिलाया जाता है. एक बार जब मिश्रण गाढ़ा हो जाता है, तो इसे फूड ट्रे पर डाला जाता जाता है और रोलिंग पिन का उपयोग करके चपटा किया जाता है. इसे जमने देने के बाद, कुक मिठाई को छोटे-छोटे पीसेस में काटता है, जिन्हें पैक करके बेचा जाता है.
"मुझे लगता है कि यह आश्चर्यजनक है," एक फूडी ने कहा. इस प्रोसेस की प्रशंसा करते हुए एक व्यक्ति ने कहा, “मैं पहली बार मैसूर पाक बनाने की प्रोसेस देख रहा हूं. बहुत साफ़ और सुंदर.” एक अन्य ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा, "जिस साफ-सफाई और हाइजीन से इसे बनाया गया वो सराहनीय है." कुछ लोगों ने दावा किया कि यह उनकी "फेवरेट" मिठाई है.
इसे नापसंद करने वालों ने मैसूर पाक बनाने में उपयोग की जाने वाली भारी मात्रा में चीनी के बारे में चिंता व्यक्त की, कुछ ने यह भी दावा किया कि यह मिठाई "बहुत महंगी" है. एक यूजर ने कहा, "इसका अपना कोई फ्लेवर नहीं है, बस इसका टेस्ट घी जैसा है." एक अन्य कमेंट में लिखा था, "वे असली घी का उपयोग भी नहीं कर रहे हैं."

ब्यूटी टिप्स /शौर्यपथ /ऐसे अनेक लोग हैं जो बालों के झड़ने की दिक्कत से परेशान रहते हैं. बाल एकबार झड़ना शुरू होते हैं तो रुकने का नाम नहीं लेते. फिर बालों पर महंगे से महंगा तेल लगाया जाए या ट्रीटमेंट्स लिए जाएं, बालों का झड़ना कम नहीं होता. ऐसे में नेचुरल चीजों को आजमाकर देखा जा सकता है. घर की एक नहीं बल्कि ऐसी कई चीजें हैं जो बालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. यहां भी ऐसी ही 3 चीजों का जिक्र किया जा रहा है जिन्हें नारियल तेल  के साथ मिलाकर बालों पर लगाया जाए तो बालों का झड़ना कम होता है, बालों को बढ़ने में मदद मिलती है, बाल मोटे होते हैं, बालों की लंबाई बढ़ती है और बाल घने नजर आने लगते हैं. यहां जानिए कौनसी हैं ये चीजें और किस तरह इन्हें बालों पर लगाया जा सकता है.
बाल बढ़ाने के घरेलू उपाय | Home Remedies For Thick Hair
प्याज का रस और नारियल का तेल
प्याज में मौजूद सल्फर और एंटी-ऑक्सीडेंट्स बालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं. यह बालों को जड़ों से पोषण देते हैं जिससे बालों का झड़ना कम होता है. एक कटोरी में नारियल का तेल लें और इसमें 2 प्याज का रस मिलाकर आंच पर रखें. जब यह तेल पक जाए तो इसे आंच से उतारकर अलग रख लें. ठंडा होने के बाद इस तेल को शीशी में भरें. तैयार प्याज का तेल  बालों की जड़ों से सिरों पर लगाकर मालिश करें और एक घंटा लगाए रखने के बाद धोकर हटा लें. बालों को बढ़ने में मदद मिलती है.
करी पत्ते और नारियल का तेल
प्रोटीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर करी पत्ते  बालों को बढ़ाने के साथ-साथ बालों का झड़ना रोकते हैं और इन पत्तों को सिर पर लगाने से वक्त से पहले बाल सफेद नहीं होते हैं. एक कटोरी नारियल के तेल में मुट्ठीभर करी पत्ते डालें और पकाएं. जब पत्ते पककर काले हो जाएं तो आंच बंद कर दें. इस तैयार तेल से बालों की मालिश की जा सकती है.
आंवला और नारियल का तेल
आंवला विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्त्रोत होता है. वहीं, नारियल के तेल से फैटी एसिड्स, विटामिन ए और विटामिन के मिलता है. नारियल के तेल में कच्चा या फिर सूखा हुआ आंवला  डालकर पकाएं. जब यह तेल पक जाए तो ठंडा होने रख दें. इस तेल से सिर की मालिश करने पर हेयर फॉलिकल्स को फायदा मिलता है, हेयर ग्रोथ बेहतर होती है, बालों को मजबूती मिलती है और बालों का झड़ना रुकता है सो अलग.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / करवाचौथ का पावन पर्व हर महिला के लिए बहुत खास होता है, इस दिन वह अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले सरगी  की जाती है. इसके बाद व्रत का संकल्प और बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त कर पति की लंबी उम्र के लिए व्रत किया जाता है. पूरे दिन व्रत रखने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर छलनी से पति का चेहरा देखा जाता है. उसके बाद व्रत का पारण किया जाता है. लेकिन, अगर आपको करवाचौथ की सरगी खाने के समय के बारे में नहीं पता है तो यहां जानिए किस वक्त खाई जा सकती है सरगी.
करवा चौथ 2024 सरगी का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवाचौथ मनाया जाता है. इस बार करवाचौथ 20 अक्टूबर को सुबह 6:40 पर शुरू होगा और अगले दिन 21 अक्टूबर को सुबह 4:16 पर खत्म हो जाएगा. ऐसे में करवाचौथ का व्रत  20 अक्टूबर को ही रखा जाएगा और सरगी का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से 2 घंटे पहले होता है. करवाचौथ पर सूर्योदय का समय 6:25 होगा. ऐसे में 2 घंटे पहले 4:25 से 5:00 बजे तक महिलाएं सरगी खा सकती हैं. वहीं, पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 5:46 से लेकर 7:02 तक रहेगा और चंद्रोदय का समय 7:54 के आसपास रहेगा.
सरगी का है विशेष महत्व
अक्सर लोगों को लगता है कि सुबह के समय सरगी खाना मतलब अपना पेट भरना है, ताकि दिन भर हम एनर्जी से भरपूर रहें और हमें थकावट नहीं हो. जबकि, सरगी की विशेष मान्यता होती है. दरअसल घर की बड़ी महिलाएं या सास व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को सेहत से भरपूर कुछ चीजें सरगी के लिए देती हैं जिन्हें व्रत करने से पहले वे खाती हैं. इस सरगी में बहू के लिए फल, मिठाई, ड्राई फ्रूट्स, खीर, मट्ठी जैसी कई चीजें होती हैं. जिन महिलाओं की सास नहीं होती वे अपनी जेठानी या घर की किसी बड़ी महिला से भी सरगी ले सकती हैं और उन्हें भी भेंट स्वरूप कुछ दे सकती हैं.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है. इस दिन माएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए व्रत करती हैं और अहोई माता की पूजा करती हैं. करवाचौथ के चार दिन बाद पड़ने वाला अहोई अष्टमी के व्रत का पारण तारों को देखकर किया जाता है. चलिए जानते हैं कि इस साल अहोई अष्टमी का व्रत किस दिन पड़ रहा है और इसका महत्व और पूजा का शुभ समय क्या है.
कब है अहोई अष्टमी |
इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा. कार्तिक माह की कृष्ण अष्टमी तिथि 24 अक्टूबर 2024 को सुबह 01:18 मिनट पर शुरु हो रही है. अष्टमी की तिथि अगले दिन यानी 25 अक्तूबर को सुबह 1 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो रही है. इस तरह अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखा जाएगा. अहोई अष्टमी की पूजा  का शुभ समय सायंकाल को 5 बजकर 42 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. इस तरह महिलाओं के पास पूजा के लिए 1 घंटा 17 मिनट का समय रहेगा. इस दिन तारों को देखकर व्रत खोला जाता है, इसलिए तारों को देखने का समय 6 बजकर 6 मिनट से आरंभ हो रहा है. कुछ महिलाएं इस दिन चंद्रमा के दर्शन करके भी व्रत का पारण करती हैं.
अहोई अष्टमी का महत्व |
अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुख-समृद्धि का परिचायक है. अहोई माता को संतान की रक्षा करने वाली माता के रूप में इस दिन पूजा जाता है. दीपावली से आठ दिन पहले इस दिन माएं अपने बच्चों की सलामती के लिए कठोर उपवास करती हैं. इस दिन अहोई अष्टमी की पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है. अहोई की पूजा में दीवार पर आठ कोष्टक वाली अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है. उनके पास साही और उसके बच्चों की तस्वीर बनाई जाती है. इसके बाद महिलाएं कलश में जल भरकर और हाथ में चावल लेकर अहोई मां की कथा सुनती हैं. इसके बाद अहोई माता को दूध और चावल का भोग लगाया जाता है.

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ / कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. अक्टूबर के महीने में आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश  का पूजन होता है. माना जाता है कि जो भक्त भगवान गणेश की पूरे मनोभाव से पूजा-आराधना करते हैं उन्हें लंबी उम्र और अच्छी सेहत का वरदान मिलता है. मान्यतानुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र देव का भी पूजन किया जाता है. जानिए इस महीने कब रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी का व्रत और किस मुहूर्त में पूजा की जा सकती है संपन्न.
संकष्टी चतुर्थी कब है |
इस साल संकष्टी चतुर्थी की तिथि 20 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 46 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 21 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 16 मिनट पर हो जाएगा. उदया तिथि के अनुसार, 21 अक्टूबर के दिन ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 7 बजकर 54 मिनट बताया जा रहा है.
संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा करने के लिए सुबह उठकर स्नान पश्चात व्रत का संकल्प लिया जाता है. इसके बाद भगवान गणेश का जलाभिषेक करते हैं. फिर भगवान गणेश को पुष्प चढ़ाए जाते हैं और पीला चंदन लगाते हैं. भोग में तिल के लड्डू और मोदक को गणपति बप्पा के समक्ष अर्पित करते हैं. पूजा में वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ी जाती है, भगवान गणेश के मंत्र और आरती के बाद पूजा का समापन होता है. शाम के समय चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत को संपन्न माना जाता है.
भगवान गणेश के मंत्र
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥
गणेश मंत्र
ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥
शुभ लाभ गणेश मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

व्रत त्यौहार /शौर्यपथ /

  करवाचौथ ऐसा दिन है जब महिलाएं सौलह श्रृंगार करती हैं और इसी चलते एक रात पहले हाथों पर मेहंदी लगाई जाती है. कहते हैं मेहंदी जितनी गहरी रचती है पति अपनी पत्नी से प्यार भी उतना ही करते हैं. लेकिन, कई बार काम की व्यसतता के कारण समय से मेहंदी नहीं लगाई जाती या फिर मेहंदी अच्छी नहीं होती जिससे हाथों पर गाढ़ी महरून दिखने के बजाय मेहंदी संतरी नजर आने लगती है. ऐसे में भला रिस्क क्यों लेना. करवाचौथ की मेहंदी लगाने वाली हैं तो पहले ही जान लें कुछ ऐसे हैक्स जिनसे मेहंदी बेहद गाढ़ी रचती है. गाढ़ी मेहंदी रचे हाथ खूबसूरती में चार-चांद लगा देते हैं.
मेहंदी गाढ़ी करने के टिप्स |
चीनी और नींबू का पानी
यह दादी-नानी के समय से चला आ रहा नुस्खा है जिसे औरतें मेहंदी को गाढ़ा करने के लिए आजमाती हैं. आपको करना बस इतना है कि थोड़े पानी में नींबू का रस और हल्की सी चीनी (Sugar) मिलाकर घोल बना लेना है. इस घोल को मेहंदी सूख जाने के बाद रूई की मदद से मेहंदी पर लगाएं. इसके बाद जब मेहंदी खुद ही छूटकर निकलने लगेगी तो आप देख सकेंगी कि मेहंदी बेहद गाढ़ी रची है. अगर नींबू ना हो तो सिर्फ चीनी के रस को भी मेहंदी पर लगा सकते हैं.
लौंग की भाप
मेहंदी वाले हाथों पर लौंग की भाप लगाने से भी मेहंदी का रंग गहरा रचता है. इसके लिए तवा लें और कुछ लौंग  उसके ऊपर डालें. जब लौंग पकने लगेगी तो उससे भाप उठने लगेगी. इस भाप के ऊपर अपने मेहंदी लगे हाथों को रखें. मेहंदी सूखने के बाद भाप लगाएं. इससे मेहंदी का रंग गहरा रचता है.
सरसों का तेल
अगर मेहंदी हटाने के बाद उसका रंग पीला या संतरी नजर आए तो सरसों का तेल (Mustard Oil) लगाया जा सकता है. हाथों पर अच्छे से सरसों के तेल को मलें. इसके बाद कुछ घंटों तक हाथों को पानी से दूर रखें. हाथों पर गहरा रंग चढ़ता नजर आने लगता है. सरसों के तेल के अलावा नारियल के तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. आप चाहे तो मेहंदी के लिए अलग से आने वाले तेल को भी लगा सकती हैं.

खाना खजाना /शौर्यपथ /चाट का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है. छोटे से लेकर बड़े सभी को चाट खाना पसंद है. भारत में आपको चाट की कई वैराइटी मिल जाएंगी. अगर आपने उत्तर भारत की यात्रा की यह तो आपको जरूर मालूम होगा कि यहां आप कई तरह की चाट रेसिपीज का लुत्फ उठा सकते हैं. समोसा चाट, पापड़ी चाट और पालक पत्ता चाट तक. स्ट्रीट से लेकर रेस्टोरेंट तक में भी आपको ये चाट के आइटम मिल जाएंगे. चाट एक ऐसी डिश है जो डिनर पार्टी से लेकर शादी के अलावा त्योहारों के सेलिब्रेशन तक में खूब पसंद की जाती है. अगर आप भी प्रोटीन से भरपूर चाट की तलाश कर रहे हैं तो आप इस छोले टिक्की चाट को ट्राई कर सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के रेसिपी पर चलते हैं.
     सर्दियों के मौसम में चाट खाने का मजा ही अलग होता है. चाट एक पॉपुलर रेसिपी है. आलू टिक्की का स्वाद तो आपने कई बार चखा होगा, मगर पंजाब में मिलने वाली यह छोले टिक्की का स्वाद क्या आपने चखा है. इस चाट रेसिपी में दही या मीठी चटनी की जगह टिक्की को छोले के साथ सर्व किया जाता है.
कैसे बनाएं छोले टिक्की |
छोले टिक्की चाट बनाने के लिए काबुली चने को पूरी रात भिगोए. फिर प्रेशर कुकर में छोले लें, इसमें बड़ी इलाइची, छोटी इलाइची, दालचीनी, हल्दी और नमक डालकर 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं. एक पैन में देसी घी गरम करें, इसमें जीरा, हींग, दालचीनी और साबुत धनिया डालकर चटकने दें. इसमें कश्मीरी लाल मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, छोले मसाला और जीरा पाउडर डालकर कुछ देर पकाएं. तैयार मसाले को उबले हुए छोले में डालकर मिक्स करके पकाएं. इसमें अनारदाना, आमचूर पाउडर डालकर मिला लें. टिक्की बनाने के लिए उबले हुए आलू लें, उसमें कॉर्नफलोर या अरारोट डालें. आप चाहे तो इसमें ब्रेड भी शामिल कर सकते हैं, इससे मिश्रण को अच्छी बाइंडिंग मिलती है. बारीक कटी हुई मिर्च, जीरा पाउडर, कालीमिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर ​अच्छी तरह मिला लें. तैयार मिश्रण से गोलाकार की टिक्की बना लें और एक पैन में घी गरम करके इन्हें शैलों फ्राई करें. चाट को असेंबल करने के लिए एक प्लेट में टिक्की लगाएं छोले डालें, इस पर हरी चटनी, इमली की चटनी, प्याज, सेव और अनार के दाने डालकर सर्व करें.

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