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' सेहत / शौर्यपथ /जब सब बैठे मिल यार, तब कैसा कंट्रोल खाने पर यार' ऐसा ही कुछ होता है जब दोस्त या परिवार एक साथ एक जगह पर मिलते हैं। भाई-बहन से त्योहार पर अक्सर मिलना हो जाता है। ऐसे वक्त में सभी लोग खूब जमकर खाते भी है। त्योहार पर मिलने के दौरान मिठाइयां खाते भी है और खिलाते भी। लेकिन अक्सर कई लोग खूब सारा खाने के बाद पछतावा भी करते हैं। क्योंकि उस एक दिन में भी वजन बढ़ जाता है। ऐसे में अगर आप त्योहार के मुकाबले अन्य दिन भी अपनी डाइट को फॉलो करते हैं तो जरूर वजन बढ़नें से कंट्रोल कर सकते हैं - तो आइए जानते हैं 10 आसान तरीके
1. अपनी सेहत को मेंटेन रखने के लिए रेग्यूलर एक्सरसाइज जरूर जारी रखें। खाने में अधिक कैलोरी नहीं लें। लो कैलोरी फूड का सेवन करें। लो फैट युक्त चीजे ही खाएं। लेकिन कम खाने के चक्कर में ऐसा नहीं हो कमजोरी महसूस होने लगे।
2.जंक फूड को गुड बाय कहें। इस जगह पर अधिक से अधिक फल और हरी सब्जियों को सेवन करें। इससे आपके शरीर को जरूरी पोषण भी मिलेगा और हानिकारक तत्व भी कम हो जाएंगे। साथ ही अधिक से अधिक पानी पिएं।
3.घी -तेल को कम कर दें। ध्यान रहे घी -तेल कभी भी खाना बंद नहीं करें। दरअसल, घी और तेल से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है। शरीर में चिकनाहट के लिए सेवन करना जरूरी है लेकिन कम मात्रा में।
4.गेहूं की रोटी, चावल और मिठाई का सेवन भरपूर तरह से बंद कर दें। इससे आपका वजन तेजी से कंट्रोल होगा। लेकिन गेहूं की रोटी जगह आप, बाजरा, मक्का, या ज्वार की रोटी आराम से खा सकते हैं। वहीं मिठाई में घर का मीठा थोड़ा बहुत खा सकते हैं।
5.वजन को नियंत्रित रखने के लिए फ्राइड आयटम से दूरी बनाकर रखें। डिप फ्राई आयटम बिल्कुल भी नहीं खाएं।
6.नियमित रूप से 3 लीटर पानी जरूर पिएं। इससे आपकी बॉडी में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे। अधिक पानी पीने से चेहरे पर ग्लो भी तेजी से आता है।
7.खाने का खास ख्याल रखें। जी हां, सुबह पौष्टिक नाश्ता पेटभर कर करें। इसके बाद लंच में एकदम हल्का खाना खाएं। और डिनर में एक प्लेट सलाद और दलिया या जावली आप खा सकते हैं।
8.सुबह उठकर रोज एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पिएं। आप सुबह दूध की चाय के बजाय ग्रीन टी का सेवन करें और दिन में एक बार। इससे वजन नियंत्रित रहेगा।
9.अगर आप काम के दौरान 8 घंटे लगातार बैठे रहते हैं तो ऐसा नहीं करें। थोड़ी-थोडी देर में उठकर घूमते रहे। एक जगह लगातार बैठने से वजन तेजी से बढ़ता है।
10. त्योहार के दिन भी लिमिट में ही मीठा और नमकीन का सेवन करें। इससे राखी के बाद आपको वजन कम करने में समस्या नहीं आएंगी।
पर्व त्यौहार / शौर्यपथ /इस बार ओणम शनिवार, 21 अगस्त 2021 को है। इस पर्व को दक्षिण भारत में खासतौर केरल में बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। मान्यता है, ओणम यानी थिरुओणम के दिन ही राजा महाबली अपनी समस्त प्रजा से मिलने के लिए आते हैं जिसकी खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है।
भारत विविध धर्मों, जातियों तथा संस्कृतियों का देश है। जहां हर तरह के त्योहार को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक केरल प्रांत का मलयाली पर्व 'ओणम' राजा बलि की आराधना का दिन, समाज में सामाजिक समरसता की भावना, प्रेम तथा भाईचारे का संदेश पूरे देश में पहुंचा कर देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
वैसे तो केरल में इसकी धूम होती है, लेकिन दुनिया भर में बसे मलयाली अपने-अपने तरीके से इसे मनाते हैं। इस संबंध में प्राचीन मान्यता है कि राजा बलि ओणम के दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं। उन्हें यह सौभाग्य भगवान विष्णु से मिला था। उसके चलते समाज के लोग विष्णु जी की आराधना और पूजा करने के साथ ही अपने राजा का स्वागत भी करते हैं।
ओणम पर्व का सबसे खास आकर्षण होता है साद्य। ओणम के दौरान खाए जाने वाले खाने को साद्य कहते हैं। कह सकते हैं कि साद्य के बिना ओणम अधूरा है। साद्य में विशेष और लजीज पकवानों से राजा बलि को प्रसन्न किया जाता है।
इस पर्व की मान्यता के अनुसार राजा बलि केरल के राजा थे, उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी, किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी, वे महादानी भी थे। उन्होंने अपने बल से तीनों लोकों को अपने कब्जे में ले लिया था। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया। माना जाता है कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। तब से केरल में हर साल राजा बलि के स्वागत में ओणम का पर्व मनाया जाता है।
ओणम पर्व का सबसे खास आकर्षण होता है साद्य। ओणम के दौरान खाए जाने वाले खाने को साद्य कहते हैं। कह सकते हैं कि साद्य के बिना ओणम अधूरा है। साद्य में विशेष और लजीज पकवानों से राजा बलि को प्रसन्न किया जाता है।
इस पर्व की मान्यता के अनुसार राजा बलि केरल के राजा थे, उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी, किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी, वे महादानी भी थे। उन्होंने अपने बल से तीनों लोकों को अपने कब्जे में ले लिया था। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया। माना जाता है कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। तब से केरल में हर साल राजा बलि के स्वागत में ओणम का पर्व मनाया जाता है।
ओणम पर्व का सबसे खास आकर्षण होता है साद्य। ओणम के दौरान खाए जाने वाले खाने को साद्य कहते हैं। कह सकते हैं कि साद्य के बिना ओणम अधूरा है। साद्य में विशेष और लजीज पकवानों से राजा बलि को प्रसन्न किया जाता है।
इस पर्व की मान्यता के अनुसार राजा बलि केरल के राजा थे, उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी व संपन्न थी, किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं थी, वे महादानी भी थे। उन्होंने अपने बल से तीनों लोकों को अपने कब्जे में ले लिया था। इसी दौरान भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर आए और तीन पग में उनका पूरा राज्य लेकर उनका उद्धार कर दिया। माना जाता है कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए आते हैं। तब से केरल में हर साल राजा बलि के स्वागत में ओणम का पर्व मनाया जाता है।
ओणम पर्व क्यों और कैसे है खास, जानिए...
* केरल में मनाया जाने वाला ओणम का 10 दिनी त्योहार हस्त नक्षत्र से शुरू होकर श्रवण नक्षत्र तक जारी रहता है।
* लोग घर के आंगन में महाबलि की मिट्टी की बनी त्रिकोणात्मक मूर्ति पर अलग-अलग फूलों से चित्र बनाते हैं, जितनी भी कलाकृतियां इन दिनों बनाई जाती हैं उसे महाबलि के चले के बाद ही हटाई जाती हैं।
* नई फसल के आने की खुशी में ओणम पर्व मनाया जाता है।
* ओणम पर्व पर राजा बलि के स्वागत के लिए घरों की आकर्षक साज-सज्जा के साथ फूलों की रंगोली और तरह-तरह के पकवान बनाकर उनको भोग अर्पित करते है।
* हर घर के सामने रंगोली सजाने और दीप जलाने की भी परंपरा हैं।
* इन दिन महिलाएं फूलों की रंगोली बनाती है, जिसे ओणमपुक्कलम कहते हैं।
* हर घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं। खास तौर पर चावल, गुड़ और नारियल के दूध को मिलाकर खीर बनाई जाती है।
* इसके साथ ही कई तरह की सब्जियां, सांभर आदि भी बनाया जाता है।
* इस अवसर पर मलयाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हैं। साथ ही परिवार के लोग और रिश्तेदार इस परंपरा को साथ मिलकर मनाते हैं।
* इन दिनों फूलों की रंगोली को दीये की रोशनी के साथ सजाया जाता है और खीर (आऊप्रथमन) पकाई जाती है।
* ओणम के दिन नारियल के दूध व गुड़ से पायसम, केले का हलवा, नारियल चटनी, चावल के आटे को भाप में पका कर और कई तरह की सब्जियां मिलाकर अवियल, आदि बनाकर 64 प्रकार के पकवान बनाने की परंपरा है।
* केरल के पारंपरिक भोज को ओनसद्या कहा जाता है, जिसे केले के पत्ते पर परोसना शुभ माना गया है।
केरल में 10 दिन तक चलने वाला ओणम उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / करेला यानी बिटर गॉर्ड बालों के लिए आश्चर्यजनक फायदे प्रदान करता है। यह सुनकर आप चौंक गई होंगी। क्योंकि करेला अपने कड़वे स्वाद की वजह से कम ही लोग खाना पसंद करते हैं। आयुर्वेद में करेले को एक बेहतरीन औषधि माना गया है। जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती है। लेकिन यदि हम कहें कि इस बार आपको इसको डाइट में शामिल नहीं करना, बल्कि इस के जूस को बालों में लगाना है, तो यकीनन आपको ज्यादा खुशी होगी।
जी हां करेले का जूस आपके बालों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह केवल आपके स्वास्थ्य व स्किन के लिए नहीं, आपके बालों के लिए भी एक बेहतरीन दवा है। एक अकेला करेला आपकी बालों से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है।
शोध अनुसार
फार्माकोग्नॉसी और फाइटोकेमिस्ट्री जर्नल के मुताबिक करेला विटामिन बी1, बी2, बी3 और सी के अपने समृद्ध स्रोत के लिए जाना जाता है। इसमें लोहा, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फोलेट, फास्फोरस, जस्ता और मैंगनीज भी शामिल हैं। स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के अलावा, यह बालों के विकास में सहायक है। तो, आपको बस अपने मन से कड़वे स्वाद को हटाकर उनके अंतहीन लाभों को याद रखना है।
आइए जानते हैं करेले के जूस से बालों को मिलने वाले फायदों के बारे में
1 बालों में चमक के लिए :
बालों को शाइनी बनाना किसे पसंद नहीं होता है। अगर आप भी अपने बालों को शाइनी बनाना चाहती हैं तो करेले का जूस निकाल लें और अपने बालों में लगा लें। जब आपका सिर सारे जूस को सोख लेता है तो उसे धो लें और इसके बाद अपने बालों में शाइन देखें। आपके बालों में पहले के मुकाबले बहुत चमक आएगी और यह नतीजे आपको एक बार प्रयोग में ही देखने को मिलने वाले हैं।
2 बालों का झड़ना रोकने के लिए :
जब करेले के जूस को सिर में चीनी के साथ मिला कर प्रयोग किया जाता है, तो यह हेयर फॉल की समस्या से बहुत हद तक आपको राहत प्रदान कर सकता है। करेले का जूस इस तरह प्रयोग करने से यह बालों की जड़ों को ही मजबूत करता है। इसलिए इस प्रकार एक बार करेले का प्रयोग बालों के लिए जरूर करें।
3 ऑयली बालों के लिए :
अगर आपके बालों में भी अधिक तेल प्रोड्यूस होता है, तो सिर काफी चिपचिपा महसूस हो सकता है। इस मौसम में यह समस्या काफी ज्यादा इरिटेट करती है। इसलिए आपको अपने बालों में करेले का जूस निकाल कर लगा लेना है और इसके साथ ही थोड़ा सा एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।
अगर आप इसका प्रयोग हफ्ते में दो बार करती हैं, तो इससे आपको एक्स्ट्रा ऑयल से राहत मिल
सकती है। जो कि डैंड्रफ और हेयर फॉल की भी एक बड़ी वजह होता है।
4 डैंड्रफ से राहत के लिए :
कुछ लोगों को सारा साल बालों में रूसी की समस्या रहती है। चाहे आप किसी भी प्रोडक्ट का प्रयोग क्यों न कर लें, यह समस्या आपका पीछा इतनी आसानी से नहीं छोड़ती। लेकिन करेले के पास इसका भी इलाज है।
अगर आपका सिर बहुत अधिक ड्राई और रफ है, तो आपको करेले की स्लाइस लेनी है और उसे बालों में रब करना है। इस मसाज को करने के बाद सिर में करेले का जूस लगा लें। इससे आपको डैंड्रफ से काफी हद तक राहत मिलेगी।
5 बालों को सफेद होने से बचाने के लिए :
ताजा करेले का जूस निकाल कर उसे अपने बालों पर लगा लें और अगर आप नियमित रूप से ऐसा करती हैं, तो आपके बाल सफेद होने से बच सकेंगे। जिन महिलाओं के समय से पहले बाल सफेद हो जाते हैं, उनको भी ऐसा करने पर मदद मिल सकती है। हफ्ते में एक बार इसका प्रयोग करने से आपके सफेद बाल बढ़ने से रुक जायेंगे।
तो इन सब लाभों को देख कर करेले को हम 5 प्रॉब्लम्स 1 सॉल्यूशन बोल सकते हैं। इसका प्रयोग आपकी सेहत, स्किन और बालों तीनों के लिए ही लाभदायक होगा।
ब्यूटी टिप्स / शौर्यपथ / कोकोनट ऑयल के ढरों फायदे हैं, त्वचा से लेकर बालों तक इसके ढरों फायदे हैं। नारियल तेल आपकी कई परेशानियों को दूर कर सकता है, लेकिन लोग इसके फायदे नहीं जानते हैं। यह बालों से लेकर त्वचा दोनों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। वहीं अगर इसे कपूर के साथ मिलाकर लगाया जाए, तो ये त्वचा और बालों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है। अगर आप भी खूबसूरत त्वचा और बाल चाहती हैं तो नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर इस्तेमाल करें। आइए, जानते हैं नारियल के तेल में कपूर को इस्तेमाल करने के फायदों के बारे में।
1) डैंड्रफ से छुटकारा
इन दिनों बालों में डैंड्रफ की समस्या आम बात है। अगर आप भी बालों में डैंड्रफ की समस्या से परेशान हैं तो नारियल तेल में कूपर को मिलाएं और अपने बालों की जड़ों में इसका इस्तेमाल करें।
2) त्वचा पर रिंकल
रिंकल की परेशानी होने पर नारियल तेल और कपूर के मिश्रण का इस्तेमाल करें। ये आपके चेहरे की खोई रौनक को वापस दिलाने में मदद करता है। त्वचा की समस्या के लिए ये बेहतरीन उपाए है।
3) पिंपल
अगर आपको भी पिंपल की समस्या है तो नारियल तेल और कपूर के मिश्रण से मसाज करें। कुछ ही दिनों में पिंपल ठीक हो जाएगा। साथ ही त्वचा की खोई खूबसूरत भी लौट आएगी ।
4) शाइनी बाल
खूबसूरत बाल हर किसी को पसंद होते हैं। ऐसे में शाइनी बालों के लिए नारियल तेल में कपूर मिक्स करकें हल्के हाथ से मसाज करें और एक घंटे बाद धो लें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें। आपको अपने बालों में फर्क दिखने लगेगा।
5) एलर्जी
कई बार किसी किड़े या मच्छर के काटने पर त्वचा में ललपन आ जाता है। अगर आपकी त्वचा पर किसी तरह की एलर्जी हो रही है तो आप इस मिश्रण को लगाएं। पहले इस्तेमाल पर ही आपको फर्क दिखने लगेगा।
आस्था / शौर्यपथ /हिंदू धर्म में सावन मास और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। सावन महीने के प्रदोष व्रत अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। सावन मास भगवान शिव को प्रिय है। मान्यता है कि इस महीने भगवान शंकर और माता पार्वती पृथ्वी पर विचरण करते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
सावन का अंतिम प्रदोष व्रत-
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का अंतिम प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 20 अगस्त 2021, दिन शुक्रवार को है।
आयुष्मान और सौभाग्य योग में रखा जाएगा व्रत-
20 अगस्त को रात 08 बजकर 50 मिनट तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी लग जाएगी। सावन 2021 के दूसरे प्रदोष व्रत के दिन आयुष्मान और सौभाग्य योग का शुभ संयोग बन रहा है। आयुष्मान योग 20 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग लगेगा।
प्रदोष व्रत नियम-
प्रदोष व्रत यूं तो निर्जला रखा जाता है इसलिए इस व्रत में फलाहार का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत को पूरे दिन रखा जाता है। सुबह नित्य कर्म के बाद स्नान करें। व्रत संकल्प लें। फिर दूध का सेवन करें और पूरे दिन उपवास धारण करें।
सावन मास कब से हो रहा समाप्त-
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 22 अगस्त को है। इस दिन से ही सावन मास का समापन हो रहा है।
शौर्यपथ /एक नए अध्ययन में सामने आया है कि एक वर्ष की उम्र का बच्चा अपने शरीर के अनुरूप एक वयस्क व्यक्ति की तुलना में लगभग 50 फीसदी ज्यादा तेजी से कैलोरी बर्न करता है।
ड्यूक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि समय के साथ हमारे शरीर की कैलोरी को बर्न करने की क्षमता में गिरावट आती जाती है। निष्कर्षों से पता चलता है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में हमारे शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है, जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ गिरती जाती है।
प्रमुख लेखक हरमन पोंटजर ने बताया कि हम जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं हमारे शरीर में बहुत सारे परिवर्तन सामने आते हैं। हैरानी वाली बात यह है हमारे मेटाबॉलिज्म और उसके चरणों का समय बदलावों से मेल नहीं खाता है।
29 देशों के लोगों पर किया गया अध्ययन
पोंटजर और उनकी टीम ने दुनिया भर के 29 देशों के करीब 6,600 लोगों पर अध्ययन किया है, जिसमें एक सप्ताह से लेकर 95 वर्ष की आयु के वृद्ध शामिल थे। शोधकर्ताओं ने इनके द्वारा बर्न की गई औसत कैलोरी का गहराई से विश्लेषण किया। इससे पहले बड़े पैमाने पर किए अधिकांश अध्ययनों से पता चला है कि हर दिन हमारा शरीर सांस लेने, भोजन पचाने, रक्त पंप करने जैसे बुनियादी कार्यों जो किसी इंसान के जीवित रहने के लिए जरुरी हैं।
उनके लिए हर दिन अपनी 50 से 70 फीसदी कैलोरी बर्न करता है। ऐसा कहा जाता है कि किशोरावस्था या 20 की उम्र में इंसान सबसे ज्यादा कैलोरी बर्न करता है, लेकिन नए अध्ययन के अनुसार ऐसा नहीं है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यदि वजन के लिहाज से देखें तो शिशुओं में मेटाबॉलिस्म की दर सबसे ज्यादा होती है।
जर्नल साइंस में प्रकाशित हुए अध्ययन के परिणाम
शिशुओं में जीवन के शुरुवाती 12 महीनों में ऊर्जा की जरुरत काफी बढ़ जाती है। पोंटज़र ने बताया कि ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं है, कि अपने शुरुवाती वर्ष में शिशु अपने जन्म के समय के वजन को तीन गुना करने में व्यस्त होते हैं। बेशक वे बढ़ रहे होते हैं, लेकिन एक बार जब आप उस पर नियंत्रण कर लेते हैं, तब भी उनका ऊर्जा व्यय उनके शरीर के आकार और संरचना की अपेक्षा कहीं अधिक तेजी से बढ़ता है। इस अध्ययन के परिणाम जर्नल साइंस में प्रकाशित हुए हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / चीनी का इस्तेमाल हर घर में होता है। चाय, कॉफी और मिठाईयों के अलावा रोजमर्रा की ऐसी कई चीजें हैं, जिनमें शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती हैं। ऐसे में चीनी का सेवन कम से कम करना चाहिए क्योंकि चीनी का सेवन ज्यादा करने से आपका वजन तेजी से बढ़ता है। आइए, जानते हैं कि चीनी कैसे बढ़ाती है आपका वजन-
फ्रक्टोज इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बनता है
चीनी का अधिक मात्रा में सेवन करना आपके ब्लड में इन्सुलिन के स्तर को बढ़ा देता है, जो आपके खाद्य पदार्थो से एनर्जी को कम करता है और उसे फैट सेल्स में परिवर्तित करता है और जब शरीर में फैट की मात्रा अधिक हो जाती है, जो आपका शरीर आपके मष्तिष्क को भूख लगने का संकेत पहुंचाता है।
फ्रक्टोज लेप्टीन हार्मोन के प्रतिरोध का कारण
फ्रक्टोज लेप्टिन हार्मोन के प्रभाव से वजन बढ़ने की समस्या होती है। लेप्टीन वसा कोशिकाओं द्वारा उत्पादित होता है। वसा कोशिका जितनी बड़ी होगी, उतना अधिक लेप्टिन का उत्पादन होगा। इस वजह से शरीर में अधिक वसा जमा हो जाती है और साथ ही वजन भी बढ़ता है।
फ्रक्टोज ग्लूकोज की तरह काम नहीं करता
ग्लूकोज आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, लेकिन फ्रक्टोज के सेवन से ऐसा कुछ महसूस नहीं होता है, बल्कि फ्रक्टोज के सेवन से आपको अधिक भूख महसूस होती है और इस वजह से आप कैलोरी और फैट का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं।
फ्रक्टोज आपकी भूख को बढ़ाता है
फ्रक्टोज आपके हंगर हॉर्मोन को नियंत्रित करने में मदद नहीं करता है और इस वजह से खाने के बाद भी आपको अधिक भूख लगती है। ऐसे में कैलोरी का सेवन करते हैं जो आपके शरीर में एक्सट्रा फैट को बढ़ाता है जिसकी वजह से आपका वजन भी बढ़ता है।
टिप्स ट्रिक्स /शौर्यपथ / टैटू बनावान से पहले यकीनन आपने खूब मेहनत की होगी। पहले खुद को समझाया होगा और फिर परिवार को भी समझाया होगा। अक्सर भारतीय परिवार में बच्चों को टैटू बनवाने से रोका जाता है। ऐसा शायद इसलिए होता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर आए दिन टैटू से जुड़ी तरह-तरह की बातें वायरल होती रहती हैं। ऐसे में आज हम बात करने वाले हैं कुछ ऐसी ही टिप्स के बारे में जिन्हें टैटू बनवाने से पहले आप भी फॉलो कर सकते हैं। ये स्किन केयर टिप्स टैटू बनवाने से पहले और बाद में फॉलो करना जरूरी है, ये आपको कंफर्टेबल टैटू एक्सपीरियंस में मदद करेंगे।
टैटू बनवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
1) टैटू बनवाने से 48 घंटे पहले तक सुनिश्चित करें कि आप शराब या कैफीन का सेवन ना करें। ये दोनों चीजें खून पतला करने में मदद करती हैं, ऐसे में टैटू बनवाते समय ये दोनों चीजे ज्यादा खून निकाल सकती हैं।
2) टैटू बनवाने से एक हफ्ते पहले इस बात को सुनिश्चित करें कि आप रोजाना कम से कम 3 लीटर पानी पीए और खुद को हाइड्रेटेड रखें। अगर आपका शरीर हाइड्रेट रहेता है तो त्वचा सोफ्ट और लचिली होती है। ऐसे में टैटू बनवाते समय सुई के दबाव से कम दर्द होने की संभावना होती है।
3) जिस दिन टैटू बनवाना हो उस दिन पूरी तरह से खाना खाकर जाएं। कम खाना खाने से चक्कर और शुगर लेवल कम हो सकता है। जिसकी वजह से इसे बनवाते समय ज्यादा दर्द हो सकता है।
4) टैटू करवाने से पहले 24 से 48 घंटे तक एस्पिरिन जैसी कोई भी गोली लेने से बचें। ऐसी गोली में भी खून को पतला करने और रक्त स्त्राव को आसान बनाने की क्षमता होती है। इसलिए जब तक जब बिल्कुल आवश्यक ना हो, टैटू बनावाने से पहले इनसे बचना ही सबसे अच्छा है।
5) इस बात का ध्यान रखें कि आप ढ़ीले और डार्क रंग के कपड़े पहन कर टैटू बनवाने जाएं।
टैटू बनवाने के बाद इन बातों का रखें ध्यान
1) टैटू आपकी त्वचा में एक इंडेंटेशन है और इसलिए, संक्रमण के लिए अत्यधिक प्रवण होता है। सुनिश्चित करें कि आप इसे साफ रखें। अपने टैटू आर्टिस्ट से पूने के बाद बैंडेज या क्लिंग रैप से ढककर रखें। कुछ घंटों के बाद, एंटी-बैक्टिरियल साबुन और पानी से धो लें।
2) टैटू आर्टिस्ट की सलाह पर लोशन, क्रीम, तेल या पेट्रोलियम जैली लगाएं। इसे ठीक होने में कुछ हफ्ते लगते ही हैं। इसलिए इस दौरान स्किन को नमी और सुरक्षा की जरूरत होती है।
3) वैसे तो टैटू वाले एरिया को सफाई की जरूरत होती है, लेकिन इसे पूरी तरह से पानी में नहीं डूबोना चाहिए। ऐसे में नहाते तो शॉवर का इस्तेमाल करें और नहाते समय इसे तौलिया से कवर कर सकते हैं। हालांकि टैटू आर्टिस्ट आपको नहाते समय अगर कवर नहीं करने की सलाह दें, तो इसी बात का पालन करें।
4) टैटू बनवाने के बाद कंफर्टेबल कपड़े पहनें। कई बार कपड़े टैटू पर रगड़ते हैं, जो अच्छा नहीं है।
ध्यान दें
अगर टैटू बनवाने के बाद आपको किसी भी तरह का स्किन इंफेक्शन दिखाई दे, तो अपने टैटू आर्टिस्ट या फिर स्किन डॉक्टर से संपर्क करें।
सेहत / शौर्यपथ /कैंसर की तरह ब्रेन ट्यूमर भी जीवन घातक बीमारी है। समय रहते इस बीमारी का इलाज कराने पर जीवन को बचाया जा सकता है। लेकिन गंभीर बीमारी के लक्षण पता नहीं होने पर समय हाथ से निकल जाता है। आम जानकारी के तौर पर ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ संकेत हैं जिन्हें पहचान कर समय पर इलाज संभव हो सकता है। आइए जानते हैं क्या है 10 लक्षण -
क्या होता है ब्रेन ट्यूमर?
दिमाग में करीब 100,000,000,000 ब्रेन सेल्स होती है। जिसकी मदद से मस्तिष्क काम करता है। लेकिन कोशिकाओं का नियंत्रण बिगड़ने से दिमाग के सेल्स नष्ट होने लगते हैं और वह एक कैंसर के रूप में फैलने लगती है। इससे ब्रेन ट्यूमर हो जाता है।
ब्रेन ट्यूमर के 10 लक्षण -
1. बहुत अधिक सिरदर्द होने पर दवा लेना, लेकिन इसके बाद भी आराम नहीं मिलने पर डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
2. जब दिमाग को आराम नहीं मिलता है तो वह सुन्न पड़ने लगता है। यह सुन्नपन चेहरे से भी हो सकता है। थोड़ी देर में आराम नहीं मिलने पर डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
3. ब्रेन ट्यूमर होने के कई तरह के संकेत है। अगर बॉडी में किसी प्रकार के झटके महसूस होते हैं, चक्कर आना, बिना किसी कारण के कंपन होना भी इस बीमारी के संकेत है।
4. कई बार लोग चीजें रखकर भूल जाते हैं लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है। अगर आपके साथ बार-बार ऐसा हो रहा है, छोटी-छोटी चीजें रखकर भूलने लग जाते हैं। साथ ही नींद से जुड़ी परेशानी भी होने लगती है।
5. कई बार आंखों से संबंधित परेशानी होने लगती है उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार धुंधलापन दिखना, रंगों को समझने में परेशानी होना, आंखों का कमजोर होना।
6. ब्रेन ट्यूमर दिमाग में होता है और बॉडी पूरी तरह से दिमाग के कंट्रोल में रहती है। लेकिन ब्लैडर पर कंट्रोल नहीं होने पर उल्टी, मितली, बेहोशी जैसी समस्या होने लगती है।
7. ब्रेन ट्यूमर के सांकेतिक लक्षण में चेहरे का रंग भी बदलने लगता है। कभी पर्पल, सफेद, ब्लू, ग्रीन रंग में त्वचा दिखने लगती है। ऐसे लक्षण दिखने पर हल्के में नहीं लें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
8. अगर आपको लगता है कि बोलने या सुनने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। इस तरह के लक्षण को नजरअंदाज नहीं करें।
9. गले में अकड़न होने के साथ ही आपका वजन लगातार बढ़ता जाएं तो आपको सावधान होने की जरूरत है।
10. कई बार नसों में खिंचाव और तेज दर्द होने पर इंसान खुद को कंट्रोल नहीं कर पाता है। कुछ लोगों को ट्यूमर के कारण दौरे भी पड़ने लगते हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / नमक वह चीज है जो खाने में असली स्वाद बढ़ाता है। इसके अधिक होने पर यह खाने का टेस्ट भी बिगाड़ देता है और कम होने पर भी टेस्ट अच्छा नहीं लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं सफेद नमक अगर आप स्वादनुसार भी डालते हैं वह तब भी आपकी बॉडी के लिए नुकसानदायक ही है। हम हर दिन सफेद नमक का इस्तेमाल करते हैं लेकिन यह शरीर के लिए थोड़ा सा भी लाभदायक नहीं है। इसकी जगह आप सेंधा नमक यूज कर सकते हैं। यह शरीर के लिए भी अच्छा है और किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है।
बता दें कि सेंधा नमक को हिमालयन सॉल्ट, लाहौरी नमक और हैलाइड क्लोराइड भी कहते हैं। इस नमक में दूसरे नमक के मुकाबले आयरन की मात्रा सबसे कम होती है। इस नमक में करीब 90 फीसदी मिनरल्स मौजूद होते हैं। इस नमक में कैल्शियम, पोटैशियम, और जिंक जैसे तत्व मौजूद होते हैं। जो शरीर के लिए बेहतर माने जाते हैं।
1. ब्लड प्रेशर- बीपी कम होने पर हम नींबू पानी और नमक का घोल पीते हैं। लेकिन यह साधा नमक आपके शरीर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। इस जगह पर आप सेंधा नमक का इस्तेमाल कीजिए। इससे आपका बीपी कंट्रोल में रहेगा, हार्ट की समस्या नहीं होगी और कोलेस्ट्रॉल की समस्या भी नहीं बढ़ेगी।
2. स्ट्रेस लेवल- इसके सेवन से आपका स्ट्रेस लेवल कम होगा। इसमें मौजूद तत्व सेरोटोनिन और मेलाटोनिन केमिकल्स को बैलेंस करके रखता है। जो आपको खासकर डिप्रेशन जैसी समस्या से लड़ने में मदद करेंगे।
3. वजन- आज के वक्त में हर कोई मोटापे का शिकार हो रहा हैं। इसे कम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे भी अपनाएं जा रहे हैं। लेकिन अगर आप सफेद नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करेंगे यह आपका वजन कम करने में कारगर होगा। इसमें मौजूद तत्व एक्स्ट्रा फैट को कम करने में मददगार होते हैं।
4. बीमारियों से छुटकारा- इसका सेवन अनिद्रा, अस्थमा, डायबिटिज, पथरी जैसी समस्या के लिए सबसे अधिक कारगर है।
5. साइनस- साइनस की बीमारी बच्चों को सबसे अधिक होती है। इसलिए सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए। इसके सेवन से सांस की बीमारी का खतरा भी टल जाता है।
सेहत / शौर्यपथ / मानसून के सीजन में पाचन प्रक्रिया बहुत हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसे में आप जल्द ही बीमारियों की जद में आ जाते हैं,इसलिए मानसून सीजन में खानपान का ध्यान रखना जरूरी होता है। इस सीजन में भूलकर भी अनहाइजेनिक या बाजार में बिक रही खुली चीजें बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। घर पर भी हैवी फूड आइटम्स
खाने से बचना चाहिए क्योंकि इस सीजन में आप वॉक भी नहीं कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं मानसून में किन 7 चीजों का सेवन जरूर करें ताकि आपकी पाचन शक्ति मजबूत रहें।
1.तुलसी- तुलसी में कई प्रकार के एंटी बैक्टीरियल,एंटी वायरल और औषधीय गुण मौजूद होते हैं। यह
आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं।
इससे पाचन प्रक्रिया भी बेहतर होती है। साथ ही बीमारियों के चपेट में आने से बचते हैं।
2.अदरक –अदरक में इम्यूनिटी बूस्ट करने की ताकत होती है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स,
एंटीवायरस तत्व मौजूद होते हैं जिससे पाचन शक्ति मजबूत होती है। आप चाय के साथ सब्जियों में भी इसका हल्का सा उपयोग कर सकते हैं।
3. लेमन ग्रास –सुबह –सुबह इसकी एक कप चाय आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करेगी। इसके सेवन से सर्दी,
खांसी और अन्य सीजनल बीमारियों से दूरी बनी रहेगी।
4.हल्दी – हल्दी में मौजूद एंटी-वायरल और औषधीय गुण होता है। इसका दूध पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सर्दी,जुकाम या खांसी होने पर हल्दी के दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।
5. लहसुन – लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट,एंटी-बैक्टीरियल और औषधीय गुण मुख्य रूप से मौजूद होते हैं। जिससे इम्यूनिटी बूस्ट होती है। साथ ही वायरल होने पर यह बीमारी से बचाव में काफी मददगार है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर लहसुन को घी में फ्राई कर दिया जाता है।
6. नींबू–नींबू में मौजूद विटामिन – सी,
और अन्य मिनरल्स मौजूद होने से यह काफी गुणकारी होता है। इसके सेवन से आप,सर्दी,
खांसी और वायरल की चपेट में आने से बच सकते हैं। आप इसका सबसे सही इस्तेमाल सब्जियों में डालकर कर सकते हैं। जी हां,जब भी आप कोई सब्जी खाते हैं तो उसमें थोड़ा सा नींबू डाल लें।
7.हर्बल टी – ये सही है कि चाय पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हर्बल चाय में किसी भी प्रकार से कोई मिलावट नहीं होती है। इसलिए इसके सेवन से शरीर में बेहतर विकास होता है।
शौर्यपथ /आज सुभाषचंद्र बोस की पुण्यतिथि है। राजनीति के अद्भुत खिलाड़ी नेताजी सुभाषचंद्र बोस एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जिनके आदर्शों को जो मान लेगा उसका जीवन सफल हो जाएगा। वे जो चाहते थे वह करते थे।
भारत के इतिहास में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के समान कोई व्यक्तित्व दूसरा नहीं हुआ, जो एक महान सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति के अद्भुत खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नेताओं के समकक्ष बैठकर कूटनीति तथा चर्चा करने वाला हो। आइए जानें नेताजी के बारे में 28 खास बातें-
1.1897- नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को जानकी नाथ बोस और श्रीमती प्रभावती देवी के घर में हुआ था।
2.1913- उन्होंने 1913 में अपनी कॉलेज शिक्षा की शुरुआत की और कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया।
3.1915- सन् 1915 में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
4.1916- ब्रिटिश प्रोफेसर के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया।
5.1917- सुभाषचंद्र ने 1917 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज में फिलॉसफी ऑनर्स में प्रवेश लिया।
6.1919- फिलॉसफी ऑनर्स में प्रथम स्थान अर्जित करने के साथ आईसीएस परीक्षा देने के लिए इंग्लैंड रवाना हो गए।
7.1920- सुभाषचंद्र बोस ने अंग्रेजी में सबसे अधिक अंक के साथ आईसीएस की परीक्षा न केवल उत्तीर्ण की, बल्कि चौथा स्थान भी प्राप्त किया।
8.1920- उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठित डिग्री प्राप्त हुई।
9.1921- अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
10.1922- 1 अगस्त, 1922 को वे जेल से बाहर आए और देशबंधु चितरंजनदास की अगुवाई में गया कांग्रेस अधिवेशन में स्वराज दल में शामिल हो गए।
11.1923- सन् 1923 में वे भारतीय युवक कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। इसके साथ ही बंगाल कांग्रेस के सचिव भी चुने गए। उन्होंने देशबंधु की स्थापित पत्रिका ‘फॉरवर्ड’ का संपादन करना शुरू किया।
12.1924- स्वराज दल को कोलकाता म्युनिसिपल चुनाव में भारी सफलता मिली। देशबंधु मेयर बने और सुभाषचंद्र बोस को मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोनीत किया गया। सुभाष के बढ़ते प्रभाव को अंग्रेज सरकार बरदाश्त नहीं कर सकी और अक्टूबर में ब्रिटिश सरकार ने एक बार फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
13.1925- देशबंधु का निधन हो गया।
14.1927- नेताजी, जवाहरलाल नेहरू के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के साधारण सचिव चुने गए।
15.1928- स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने के लिए उन्होंने भारतीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दौरान स्वैच्छिक संगठन गठित किया। नेताजी इस संगठन के जनरल ऑफिसर-इन-कमांड चुने गए।
16.1930- उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल में रहने के दौरान ही उन्होंने कलकत्ता के मेयर का चुनाव जीता।
17.1931- 23 मार्च, 1931 को भगतसिंह को फांसी दे दी गई, जो कि नेताजी और महात्मा गांधी में मतभेद का कारण बनी।
18.1932.1936- नेताजी ने भारत की आजादी के लिए विदेशी नेताओं से दबाव डलवाने के लिए इटली में मुसोलिनी, जर्मनी में फेल्डर, आयरलैंड में वालेरा और फ्रांस में रोमा रोनांड से मुलाकात की।
19.1936.13 अप्रैल, 1936 को भारत आने पर उन्हें बंबई में गिरफ्तार कर लिया गया।
20.1936.37- रिहा होने के बाद उन्होंने यूरोप में ‘इंडियन स्ट्रगल’प्रकाशित करना शुरू किया।
21.1938- हरिपुर अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए। इस बीच शांति निकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें सम्मानित किया।
22.1939- महात्मा गांधी के उम्मीदवार सीतारमैया को हराकर एक बार फिर कांग्रेस के अध्यक्ष बने। बाद में उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
23.1940- उन्हें नजरबंद कर दिया गया। इस बीच उपवास के कारण उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
24.1941- एक नाटकीय घटनाक्रम में वे 7 जनवरी, 1941 को गायब हो गए और अफगानिस्तान और रूस होते हुए जर्मनी पहुंचे।
25.1941- 9 अप्रैल, 1941 को उन्होंने जर्मन सरकार को एक मेमोरेंडम सौंपा जिसमें एक्सिस पॉवर और भारत के बीच परस्पर सहयोग को संदर्भित किया गया था। सुभाषचंद्र बोस ने इसी साल नवंबर में स्वतंत्र भारत केंद्र और स्वतंत्र भारत रेडियो की स्थापना की।
26.1943- वे नौसेना की मदद से जापान पहुंचे और वहां पहुंचकर उन्होंने टोकियो रेडियो से भारतवासियों को संबोधित किया। 21 अक्टूबर, 1943 को उन्होंने आजाद हिन्द सरकार की स्थापना की और इसकी स्थापना अंडमान और निकोबार में की गई, जहां इसका 'शहीद और स्वराज' नाम रखा गया।
27.1944- आजाद हिन्द फौज अराकान पहुंची और इम्फाल के पास जंग छिड़ी। फौज ने कोहिमा (इम्फाल) को अपने कब्जे में ले लिया।
28.1945- दूसरे विश्वयुद्ध में जापान ने परमाणु हमले के बाद हथियार डाल दिए। इसके कुछ दिनों बाद 18 अगस्त 1945 को नेताजी की हवाई दुर्घटना में मारे जाने की खबर आई और स्वतंत्र भारत की अमरता का जयघोष करने वाले नेताजी राष्ट्रप्रेम की दिव्य ज्योति जलाकर अमर हो गए।
आस्था / शौर्यपथ /अध्यात्म जगत में 14 विद्याएं और 64 कलाएं होती हैं जिसमें श्रीकृण पारंगत हैं। विद्या दो प्रकार की होती है परा और अपरा विद्या। इसी तरह कलाएं भी दो प्रकार की होती है। पहली सांसारिक कलाएं और दूसरी आध्यात्मिक कलाएं। भगवान श्रीकृष्ण सांसारिक और अध्यात्मिक दोनों ही तरह की विद्या और कलाओं में पारंगत थे।
1. श्रीकृष्ण के गुरु मानते थे उन्हें अपना गुरु : भगवान श्रीकृष्ण के सबसे पहले गुरु सांदीपनी थे। उनका आश्रम अवंतिका (उज्जैन) में था। देवताओं के ऋषि को सांदीपनि कहा जाता है। वे भगवान कृष्ण, बलराम और सुदामा के गुरु थे। उन्हीं के आश्रम में श्रीकृष्ण ने वेद और योग की शिक्षा और दीक्षा के साथ ही 64 कलाओं की शिक्षा ली थी। गुरु ने श्रीकृष्ण से दक्षिणा के रूप में अपने पुत्र को मांगा, जो शंखासुर राक्षस के कब्जे में था। भगवान ने उसे मुक्त कराकर गुरु को दक्षिणा भेंट की। इसके अलावा श्रीकृष्ण के गुरु नेमिनाथ, वेदव्यास, घोर अंगिरस, गर्ग मुनि और परशुराम भी थे। परंतु ये सभी श्रीकृष्ण को ही अपना गुरु मानते थे। भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य भी उनकी पूजा करते थे।
2. पूर्णावतार : भगवान श्रीकृष्ण का भगवान होना ही उनकी शक्ति का स्रोत है। वे विष्णु के 10 अवतारों में से एक आठवें अवतार थे, जबकि 24 अवतारों में उनका नंबर 22वां था। उन्हें अपने अगले पिछले सभी जन्मों की याद थी। सभी अवतारों में उन्हें पूर्णावतार माना जाता है।
3. श्रीकृष्ण के शिष्य : अर्जुन सहित पांचों पांडवों को श्रीकृष्ण ने समय समय पर शिक्षा दी है। उन्होंने अर्जुन और उद्धव को गीता का ज्ञान दिया था। महाभारत में श्रीमद्भगवद गीता, अनु गीता और उद्धव गीता नाम से प्रसिद्ध गीताएं श्रीकृष्ण के ही प्रवचन हैं।
4. क्यों माना जाता पूर्णावतार : 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्वरतुल्य होता है या कहें कि स्वयं ईश्वर ही होता है। पत्थर और पेड़ 1 से 2 कला के प्राणी हैं। पशु और पक्षी में 2 से 4 कलाएं होती हैं। साधारण मानव में 5 कला और स्कृति युक्त समाज वाले मानव में 6 कला होती है। इसी प्रकार विशिष्ठ पुरुष में 7 और ऋषियों या महापुरुषों में 8 कला होती है। 9 कलाओं से युक्त सप्तर्षिगण, मनु, देवता, प्रजापति, लोकपाल आदि होते हैं। इसके बाद 10 और 10 से अधिक कलाओं की अभिव्यक्ति केवल भगवान के अवतारों में ही अभिव्यक्त होती है। जैसे वराह, नृसिंह, कूर्म, मत्स्य और वामन अवतार। उनको आवेशावतार भी कहते हैं। उनमें प्राय: 10 से 11 कलाओं का आविर्भाव होता है। परशुराम को भी भगवान का आवेशावतार कहा गया है। भगवान राम 12 कलाओं से तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं से युक्त हैं। यह चेतना का सर्वोच्च स्तर होता है। इसीलिए प्रभु श्रीकृष्ण जग के नाथ जगन्नाथ और जग के गुरु जगदगुरु कहलाते हैं।
5. गोपियों को दिया ज्ञान : कहते हैं कि श्रीकृष्ण के माध्मम से हजारों गोपियों ने ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष की प्राप्ती की। वृंदावन में ऐसी भी गोपियां थीं जो पिछले जन्म में ऋषि थे। उन्होंने श्रीकृष्ण से भक्तियोग सीखने के लिए ही गोपी रूप में जन्म लिया था।
6. सभी तरह का दिया ज्ञान : श्रीकृष्ण ने संसार को सभी तरह का ज्ञान दिया। उन्होंने कर्मयोग, ज्ञानयोग, तंत्रयोग के साथ ही भक्ति योग की शिक्षा भी दी। उन्होंने संसार में जीवन और संन्यास में धर्म की शिक्षा भी दी।
7. सखा भी और गुरु भी : श्रीकृष्ण अपने भक्तों के सखा भी और गुरु भी हैं। वे सखा बनकर गुर ज्ञान देते हैं। उनके हजारों सखाओं की कहानियों को जानने से यह भेद खुल जाता है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / आप कितने ही चाइनीज फूड्स खा लें लेकिन जो बात देसी स्नैक्स में है, वो किसी और में नहीं हो सकती। आलू चाट भी एक ऐसा देसी स्नैक्स है जिसे ज्यादातर लोग पसंद करते हैं। खासतौर पर शाम को चाय के साथ इस स्नैक्स की अलग ही बात है। आइए, जानते हैं कैसे बनाएं आलू चाट-
सामग्री :
चटनी बनाने के लिए:
1 कप हरा धनिया
1 हरी मिर्च
1/2 टी स्पून काला नमक
1/2 नींबू का रस
चाट बनाने के लिए:
2-3 उबले आलू
एक चुटकी काला नमक
एक चुटकी काली मिर्च
एक चुटकी जीरा पाउडर
1/2 टी स्पून चाट मसाला
1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर
1 प्याज , टुकड़ों में कटा हुआ
1/2 नींबू का रस
1 टी स्पून इमली की चटनी
चाट बनाने के लिए :
1।उबले हुए आलू के टुकड़ों को गर्म तेल में डालकर फ्राई कर लें।
आलू को गोल्डन ब्राउल होने तक फ्राई करें।
आलू को एक बाउल में निकाल लें।
अब इसमें काला नमक, काली मिर्च, जीरा पाउडर, चाट मसाला और लाल मिर्च पाउडर डालें।
इसके ऊपर कटा प्याज और आधा नींबू का रस डालें।
इसमें अब इमली की चटनी और हरी चटनी डालें।
इन सभी चीजों को आलू के साथ अच्छे से मिलाएं।
चाट को प्लास्टिक के बाउल में निकाल लें, प्याज से गार्निश करके सर्व करें।
चटनी बनाने का तरीका :
एक जार में हरा धनिया लें।
इसमें हरी मिर्च और काला नमक डालें।
सभी सामग्री को एक साथ पीस लें।
तैयार की गई चटनी में खट्टा स्वाद देने के लिए नींबू का रस डालें।
इसे अच्छे से मिलाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
