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आस्था / शौर्यपथ / श्रावण माह में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का खास महत्व है परंतु इस माह में भगवान श्रीकृष्ण, नागदेव और हनुमानजी की पूजा का भी खासा महत्व है। आओ जानते हैं कि सावन माह में हनुमानजी की पूजा का क्या है महत्व।
1. सोमवार जहां भगवान शंकर का दिन है वहीं मंगलवार माता पार्वती का दिन माना जाता है। इसीलिए श्रावण माह के मंगलवार को माता पार्वती का मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। वहीं, मंगलवार को हनुमानजी का दिन होने के कारण उनकी पूजा का भी महत्व है। साथ ही मंगलदेव और ब्रह्माजी की पूजा का भी महत्व है।
2. मंगलवार हनुमानजी का दिन भी है। अत: श्रावण मास में मंगलवार को हनुमानजी की पूजा इसीलिए महत्वपूर्ण मानी गई है क्योंकि हनुमानजी रुद्रावतार है। अर्थात श्री हनुमान शिव के रुद्र अवतारों में से एक हैं। हनुमानजी की पूजा करने से सभी तरह के संकट दूर हो जाते हैं।
3. मंगलवार धरती पुत्र मंगलदेव का भी वार है अत: इस दिन मंगलदोष से मुक्ति के उपाय भी किए जा सकते है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /लंबे बाल किसी भी लुक को क्रिएट करने में मदद करते हैं। हालांकि कई महिलाएं ऐसी हैं, जो अपने बालों की ठीक से केयर नहीं करती है, मसलन उनके बालों की ग्रोथ रुक जाती है। ऐसे में लंबे बालों को पाने का उनका ख्वाब अधूरा रह जाता है। ऐसे में अगर आप भी बालों के पतले होने, ग्रोथ न बढ़ने और झड़ने की समस्या से जूझ रही हैं को आप भी घर में चिया सीड्स हेयर जेल को बनाएं और इसका इस्तेमाल करें। तो जानते हैं इसे बनाने और लगाने का तरीका।
सामग्री
2 बड़े चम्मच चिया सीड्स
1 गिलास पानी
2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल
1 विटामिन ई कैप्सूल
विधि
रात में सोने से पहले चिया सीड्स को भिगो कर रख दें। सुबह चिया सीड्स फूल जाएंगे और जेल फॉर्म में नजर आने लगेंगे। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल और विटामिन ई का कैप्सूल मिक्स करें। इसे टाइट बॉक्स में स्टोर करें।
बालों में कैसे लगाएं
बालों में अगर आप किसी भी चीज का इस्तेमाल करते हैं, तो बालों का साफ होना बहुत जरूरी है। ऐसे में आप साफ बालों में इसे लगाएं। लगाने के बाद बहुत हल्के हाथों से मसाज करें। इसे लगाने का बेस्ट टाइम रात का माना जाता है। आप रात के समय में बालों में इसे लगाएं और कव कर के सो जाएं। सुबह उठने के बाद हेयर वॉश कर लें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /भारत की राजधानी दिल्ली में कई सारी घूमने की जगह हैं, लेकिन आज हम बात करने वाले है कुछ सिद्ध मंदिरों की। सावन का महीना है, तो ऐसे में दिल्ली के उन मंदिरों के बारे में जान लेते हैं, जहां लोग दूर दूर से दर्शन करने आते हैं।
1) श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर
दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित ये मंदिर खूब फेमस है। इस मंदिर को 17 वीं शताब्दी में बनाया गया था। यहां का आर्किट्क्चर काफी अलग है। इस मंदिर पर आप बड़े ही आसानी से पहुंत सकते हैं। यहां मेट्रो, बस और पर्सनल कार से आप जा सकते हैं। इस मंदिर में खास बात यह है कि यहां पशुओं का अस्पताल है, जहां आपको कई पशू-पक्षी देखने को मिल जाएंगे।
2)कालका जी मंदिर
इस मंदिर को सबसे पूराने मंदिरों की लिस्ट में गिना जाता है। नवरात्रि के दिनों में यहां लोगों की भीड़ जमा रहती थी। इस मंदिर के सबसे नजदीक कालका जी मेट्रो स्टेशन है। इस मेट्रो स्टेशन से मंदिर वॉकिंग डिस्टेंस पर है।
3)हनूमान मंदिर
दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस में स्थित ये प्राचीन मंदिर है। यहां दूर दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। कोरोना काल से पहले इस मंदिर में शनिवार और मंगलवार के दिन खूब भीड़ देखी जाती थी। यहां जाने के लिए आप राजीव चौक मेट्रो स्टेशन तक जाएं और बैटरी रिक्शा की मदद से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
4)इस्कॉन टेंपल
मंदिरों की बात हो और दिल्ली में स्थित राधा-कृष्ण के मंदिर इस्कॉन की बात न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। चारों और हरियाली से घिरा ये मंदिर खूबसूरत है। यहां आप कुछ देर बैठ कर ही शांत महसूस करने लगेंगे।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /मानसून में ब्रेकआउट, पिम्पल्स, धूल-मिट्टी के कारण पिगमेंटेशन, सब बहुत आम है, मगर ये आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस को प्रभावित कर सकते हैं। मानसून में आपकी त्वचा को एक्स्ट्रा केयर की ज़रुरत होती है, क्योंकि बरसात और वातावरण में नमी का त्वचा पर भारी प्रभाव पड़ता है।
ऐसे में न सिर्फ आपको अपनी त्वचा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, बल्कि डाइट में भी कुछ बदलाव करने की ज़रुरत है। आपकी इन्ही सब ज़रूरतों को पूरा करेगा पंपकिन.. जी हां कद्दू! यकीन नहीं होता न, मगर यह सच है! चलिए पता करते हैं कैसे -
त्वचा के लिए कैसे फायदेमंद है पंपकिन
1. मुहांसों से छुटकारा दिलाये
कद्दू में नियासिन, राइबोफ्लेविन, बी6 और फोलेट होता है, जो ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और मुंहासों के इलाज में भी मदद करता है। इसमें जिंक और पोटेशियम भी होता है, जो लालिमा से लड़ता है और त्वचा की सूजन को कम करता है।
2. त्वचा को टोन करे
कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाने में भी कद्दू मददगार है। जिससे त्वचा की टोन और लोच में और सुधार होता है। यह सब्जी विटामिन सी के साथ-साथ बीटा-कैरोटीन का भी एक समृद्ध स्रोत है जो यूवी डैमेज से निपटने में मदद करती है और त्वचा की बनावट में सुधार करती है।
3. दाग-धब्बों को दूर करे
कद्दू में मौजूद जिंक ऐसी महिलाओं के लिए फायदेमंद है, जो दाग-धब्बों के निशान को दूर करना चाहती हैं। यह हार्मोन के स्तर और तेल उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करता है, साथ ही त्वचा को ठीक करने में भी मदद करता है। पंपकिन में मौजूद, विटामिन A सामग्री मुँहासे के निशान को कम करने में मदद करता है।
4. त्वचा को अंदर से निखारे
इसमें एंजाइम और अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड होते हैं जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाते हैं। मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाकर, नई कोशिका बनने की गति तेज हो जाती है। इसका स्मूदनिंग और ब्राइटनिंग इफेक्ट होता है, जिससे त्वचा में निखार आता है।
5. झुर्रियों को दूर करे
पंपकिन में मौजूद विटामिन A और बीटा-कैरोटीन, झुर्रियों को कम करने में मदद करने के लिए कोलेजन उत्पादन को बढ़ाते हैं। बीटा-कैरोटीन यूवी डैमेज को दूर करने और पिगमेंटेशन में सुधार करने में भी मदद करते हैं। इसलिए, यदि आपके कोई काले धब्बे या झाइयां हैं, तो कद्दू आपके लिए सुपरफूड है।
यह भी ध्यान रखें
पंपकिन को अपने आहार में शामिल करने से भी आपको त्वचा संबंधी लाभ मिल सकते हैं, मगर आप इसे त्वचा पर भी लगा सकती हैं
ज़रुरत के अनुसार पंपकिन लें और इसे छीलकर, इसकी प्यूरी बना लें।
अब इसे आप दही या शहद के साथ मिलकर अपने चेहरे पर लगा सकती हैं।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /शायद ही आपने कभी दूध में दालचीनी मिलाकर पीने के बारे में सुना हो, लेकिन हम आपको बता रहे हैं इस तरह से दूध पीने के 5 अनमोल सेहत
फायदे -
1 गैस की समस्या से तो आजादी मिलेगी ही, पाचन भी बेहतर हो जाएगा। पाचनतंत्र को सुधारकर आपकी पाचन संबंधी समस्याओं पर रोक लगाएगा दूध के साथ दालचीनी का प्रयोग।
2 नींद नहीं आने की समस्या है, तब भी यह फॉर्मूला आपके लिए फायदेमंद होगा। बस रात को सोने से पहले दालचीनी वाला गर्म दूध पिएं और बेफिक्र होकर चैन की नींद लीजिए।
3 ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने के लिए तो दालचीनी जानी ही जाती है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए दूध के साथ इसका सेवन फायदे का सौदा है।
4 तनाव कम करने के साथ ही गठिया एवं हड्डियों की अन्य समस्याएं भी दूर हो सकती हैं, अगर आप दूध के साथ दालचीनी का सेवन करेंगे।
5 और सबसे बढ़िया फायदा आपकी त्वचा पर दिखाई देगा, बेदाग, ग्लोइंग स्किन के रूप में। तो फिर इंतजार किस बात का? आज ही शुरु कीजिए दालचीनी वाले दूध का सेवन।
लेकिन इसे लेने से पहले ये जरूर पता हो, कि दालचीनी आपकी तासीर के हिसाब से सही है या नहीं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रावण मास में 5 सोमवार होते हैं। पांचों सोमवार का महत्व अलग-अलग होता है। आओ जानते हैं इस संबंध में रोचक जानकारी।
1. श्रावण मास में महादेव के पांच मुख का महत्व है। पांच मुख पांच सोमवार का प्रतीक है महादेव के 5 मुख पंच महाभूतों के सूचक भी हैं। दस हाथ 10 दिशाओं के सूचक हैं। हाथों में विद्यमान अस्त्र-शस्त्र जगतरक्षक शक्तियों के सूचक हैं। अनेक विद्वान मानते हैं कि सृष्टि, स्थिति, लय, अनुग्रह एवं निग्रह- इन 5 कार्यों की निर्मात्री 5 शक्तियों के संकेत शिव के 5 मुख हैं। पूर्व मुख सृष्टि, दक्षिण मुख स्थिति, पश्चिम मुख प्रलय, उत्तर मुख अनुग्रह (कृपा) एवं ऊर्ध्व मुख निग्रह (ज्ञान) का सूचक है।
2. भगवान शंकर के पांच मुखों में ऊर्ध्व मुख ईशान दुग्ध जैसे रंग का, पूर्व मुख तत्पुरुष पीत वर्ण का, दक्षिण मुख अघोर नील वर्ण का, पश्चिम मुख सद्योजात श्वेत वर्ण का और उत्तर मुख वामदेव कृष्ण वर्ण का है। भगवान शिव के पांच मुख चारों दिशाओं में और पांचवा मध्य में है। भगवान शिव के पश्चिम दिशा का मुख सद्योजात बालक के समान स्वच्छ, शुद्ध व निर्विकार हैं। उत्तर दिशा का मुख वामदेव अर्थात् विकारों का नाश करने वाला। दक्षिण मुख अघोर अर्थात निन्दित कर्म करने वाला। निन्दित कर्म करने वाला भी शिव की कृपा से निन्दित कर्म को शुद्ध बना लेता हैं। शिव के पूर्व मुख का नाम तत्पुरुष अर्थात अपने आत्मा में स्थित रहना। ऊर्ध्व मुख का नाम ईशान अर्थात जगत का स्वामी।
3. शिवपुराण में भगवान शिव कहते हैं- सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह-मेरे ये पांच कृत्य (कार्य) मेरे पांचों मुखों द्वारा धारित हैं।
4. कथा अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने अत्यन्त मनोहर किशोर रूप धारण किया। उस मनोहर रूप को देखने के लिए चतुर्भुज ब्रह्मा, बहुमुख वाले शेष, सहस्त्राक्ष मुख धारण कर इन्द्र आदि देवता आए। सभी ने भगवान के इस रूप का आनंद लिया तो भगवान शिव सोचने लगे कि यदि मेरे भी अनेक मुख होते तो मैं भी अनेक नेत्रों से भगवान के इस किशोर रूप का सबसे अधिक दर्शन करता। कैलाशपति के मन में इस इच्छा के उत्पन्न होते ही वे पंचमुख हो गए।
5. भगवान शिव के पांच मुख-सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान हुए और प्रत्येक मुख में तीन-तीन नेत्र बन गए। तभी से वे 'पंचानन' या 'पंचवक्त्र' कहलाने लगे। भगवान शिव के इन पंचमुख के अवतार की कथा पढ़ने और सुनने का बहुत माहात्म्य है। यह प्रसंग मनुष्य के अंदर शिव-भक्ति जाग्रत करने के साथ उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूरी कर परम गति देने वाला है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / मैसूर पाक अधिकतर लोगों को पसंद है। ये फेमस मिठाई मैसूर की है, जो खाने में बेहद ही स्वादिष्ट लगती है। अगर घर में सभी सामान मौजूद हो तो इसे बनाना बेहद आसान है। ये आधा घंटे में बनकर तैयार हो जाती है। तो चलिए जानते हैं इसकी रेसिपी।
सामग्री
2 कप बेसन
1 कप देसी घी
1/2 कप चीनी
1/2 चम्मच इलायची पाउडर
1 चुटकी बेकिंग सोडा
विधि
इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में आधा कप घी को गरम करें और फिर इसमें बेसन और इलायची पाउडर को डालें। इसे मध्यम आंच पर अच्छे से पकाएं। पकाते समय ध्यान दें कि बेसन अच्छे से पक जाए और इसमें से कच्चेपन का स्वद चला जाए। अब दूसरे पैन में चीनी और पानी मिलाकर चाशनी तैयार करें। जब चाशनी तैयार हो जाए तो इसमें पके हुए बेसन को डालें और इसे गाढ़ा होने तक चलाएं। थोड़ी देर बाद बचे हुए आधे कप घी में बेकिंग सोड़ा डालें और इसे 4 से 5 मिनट तक चलाते रहें।
फिर इसे क बर्तन में निकालें और फैला लें। इसे अपने अनुसार शेप में काट लें। अब इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। चाहें तो इसे फ्रिज में रखें। मैसूर पाक बन कर तैयार है।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ / अधिकतर सब्जी में आलू का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में जब भी आलू को पहले से काट कर रखा जाता है, तो ये थोड़ी देर में ही काला पड़ जाता है। जिसकी वजह से सब्जी का टेस्ट भी कसैला लगने लगता है। ऐसे में महिलाओं की सारी मेहनत खराब हो जाती है। तो चलिए आज जानते हैं कि कैसे आलू को काटकर रखे जिससे वो काले न पड़ें। लेकिन उससे पहले ये जानते हैं कि क्यों रंग बदलता है आलू।
आलू में एक एंजाइम होता है, जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर एक्शन में आता है और आलू का रंग बदलने लगता है। वहीं आलू का छिलका जो होता है वो नेचुरल होता है, जिसकी वजह से ऑक्सीजन को एंजाइम से दूर रखने में मदद मिलती है।
आलू को काला पड़ने से कैसे बचाएं
1) अगर आप आलू को तुरंत इस्तेमाल नहीं कर रही हैं तो एक बर्तन में पानी भरें और उसमें नींबू के रस की कुछ बूंदे मिला दें। फिर इसमें नींबू के टूकड़े डूबोकर रखें। नींबू का रस आलू के रंग और स्वाद को बनाए रखता है और इन्हें काला पड़ने से भी बचाता है।
2) कोशिश करें की छिले हुए आलू को कांच के या फिर मिट्टी के बर्तन में रखें। आलू को यदि आप मेटल के बर्तन में रखते हैं तो ये हवा और मेटल के संपर्क में आकर काले पड़ने लगते हैं।
3) छिले हुए आलू को अगर बहुत देर बाद इस्तेमाल करना है तो इन्हें सिरके के पानी में रखें। इसके लिए इसे पानी में भरे भगोने में 1 ढक्कन सिरका डालें और उसमें आलू रखकर स्टोर करें।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /मॉर्डन युग में प्यार करना जितना मुश्किल नहीं है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है प्यार में बने रहना यानी प्यार को निभाना। ऐसे में कई बार कपल के मन में एक-दूसरे के लिए प्यार तो होता है लेकिन छोटी-छोटी बातों को लेकर तकरार होने लगती है। सात फेरों के बाद अगर रिश्ते में प्यार न रहे, तो स्थिति और भी बिगड़ जाती है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप आधुनिक समय के हिसाब से कुछ ऐसे वचन लें, जिससे आपके रिश्ते में आपसी समझ बढ़ सके। हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही 7 वचन –
‘मैं तुम्हारी प्राइवेसी/स्पेस का ख्याल रखूंगा/गी’
प्यार में ‘मैं’ और ‘तुम’ मिलकर ‘हम’ बन जाते हैं लेकिन हम बनने के बाद भी अपने पार्टनर को इतना स्पेस जरूर दें, जिसमें वो खुद को तलाश सके। पार्टनर के स्पेस की परवाह करते हुए हमेशा पार्टनर के साथ चिपके न रहें।
‘मैं तुम्हारे काम को इज्जत दूंगा/गी’
हम बचपन से सुनते-पढ़ते आ रहे हैं कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। ऐसे में आपका पार्टनर किसी भी प्रोफेशन में हो, आपको उनकी इज्जत करनी चाहिए। उनकी मेहनत को कभी भी कम न आंकें।
‘तुम्हारे सपने पूरा करने में मदद करता रहूंगा/गी’
प्रतिभा, मेहनत के साथ अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनों का साथ भी चाहिए होता है। ऐसे में पार्टनर के सपनों को पूरा करने में मदद करें। आपके हर छोटे-छोटे प्रयास आपके पार्टनर के सपने पूरे कर सकते हैं।
‘मैं हमेशा तुम्हारी बातों को ध्यान से सुनता/सुनती रहूंगा/गी’
अपनी बातें कहने के साथ अपने पार्टनर को सुनने की क्षमता भी रखें। हमेशा अपने मूड के हिसाब से न चलें। धैर्य रखते हुए अपने पार्टनर की बातें सुनकर उन्हें सजेशन भी दें।
मैं अपनी और परिवार की सोच तुम पर नहीं थोपूंगा/थोपूंगी
दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसके सभी से विचार मैच करते हो। ऐसे में विचार अलग होने को तकरार की वजह न बनने दें। साथ ही अपनी और अपने परिवार की सोच पार्टनर पर न थोपें।
मैं कभी भी तुम्हें धोखा नहीं दूंगा/दूंगी
किसी भी रिश्ते को एक पल में अलग कर देता है धोखा या विश्वास के साथ खिलवाड़ करना। ऐसे में किसी रिश्ते में रहते हुए कभी भी अपने पार्टनर को धोखा न दें। आप अगर किसी रिश्ते में खुश नहीं हैं, तो अलग होने के लिए बातचीत कर सकते हैं लेकिन रिश्ते में रहते हुए किसी तीसरे को बीच में न लाएं।
मैं तुमसे हमेशा सच बोलूंगा/बोलूंगी
विश्वास किसी भी रिश्ते की नींव होती है। विश्वास सच बोलने से बनता है इसलिए कभी भी अपने पार्टनर से झूठ न बोलें। किसी भी डर की वजह से पार्टनर से झूठ न बोलें बल्कि सच बोलकर उनका भरोसा बनाए रखें।
शौर्यपथ /रंग बिरंगे पक्षियों को देख कर हर किसी का मन खुश हो जाता है। साथ ही बचपन के दिन याद आने लगते हैं जब सड़कों पर यूंही तरह तरह के पक्षी देखने को मिल जाते थे। इन पक्षियों को देख कर लगता है कि मानों हमारे पास भी पंख होते और इन्ही की तरह हम भी ऊंची और लंबी उड़ान भरते। लेकिन जैसे जैसे शहर तरक्की की राह पर चले वैसे ही शहरों से पशु-पक्षी कम होते चले गये। आपको भी याद होंगे बचपन के दिन जब तितली देख मन उसे पकड़ने के लिए मचल जाता था, लेकिन अब वो तितलियां शहरों से कहीं गुम हो गई हैं। हालांकि अब भारत की कुछ जगहों पर तितली पार्क हैं, जहां आपको रंग बिरंगी तितलियां देखने को मिल जाएंगी। तो चलिए, जानते हैं कहां हैं वो पार्क।
तितली पार्क, लखनऊ
साल 2018 में इस पार्क को बनवाया गया था। ये पार्क कानपुर के चिड़िया घर के ठीक सामने है। वैसे तो प्रदूषण के मामले में ये शहर टॉप पर बना रहता है, जो कई पशू पक्षियों के लिए काफी घातक साबित हुआ है। लेकिन ये पार्क यहां के लोगों के लिए एक सौगात है।
बटरफ्लाई पार्क, बेंगलुरु
बन्नेरघाटा में तितली पार्क बनवाया गया था। अगर आपको तितलियां देखना पसंद है, तो ये पार्क आपको खूब लुभाएगा। इस पार्क को बनाने का लक्ष्य तितलियों पर संरक्षण करना, उनपर रिसर्च करना और उनके प्रजनन का ख्याल रखना था। बेंगलुरु का ये पार्क पर्यटकों के लिए प्रसिद्ध पर्यटक स्थल में से एक है।
तितली पार्क, शिमला
खूबसूरत वादियों को देखने के बाद आप तितली पार्क का रुख भी कर सकते हैं। शिमला शहर के किनारे बना ये पार्क आकर्षण का केंद्र है। अगर आप शिमला घूमने जाएं तो यहां की वादियों को निहारने के बाद इस पार्क की खूबसूरती को देखने भी जा सकते हैं।
बटरफ्लाई पार्क, ठाणे
70 से ज्यादा प्रजाति की तितलियों से भरपूर ये पार्क मुंबई के ठाणे में है। सपनों की नगरी घूमने आप जब भी जाएं तो इन रंग बिरंगी तितलियों को जरूर देखने जाएं।
खाना खजाना / शौर्यपथ /आलू के चिप्स तो आपने कई बार खाएं होंगे लेकिन क्या आपने होममेड केले के चिप्स ट्राई किए हैं? अगर नहीं, तो देर किस बात की है? आज हम आपको बनाना चिप्स की रेसिपी बता रहे हैं, इस डिश को आप सावन व्रत में भी खा सकते हैं-
सामग्री :
6 कच्चे केले
1 कप तेल
सेंधा नमक स्वादानुसार
काली मिर्च पाउडर
स्वादानुसार चाट मसाला
विधि :सबसे पहले कच्चे केले छील लें।
एक बॉउल में ठंडा पानी डालें और उसमें नमक मिलाएं।
अब उसमें छीले हुए केले 10-12 मिनट तक रख दें।
इसके बाद चिप्स कटर से केले काट लें।
कटे हुए इन टुकड़ों को पेपर या कपड़े पर 10 मिनट के लिए फैला कर छोड़ दें।
जब पानी सूख जाए तो इन्हें अलग रख दें।
कड़ाही में तेल गर्म करें और केले के चिप्स को हल्काे लाल होने तक फ्राई कर लें।
इसके बाद चिप्स पर काली मिर्च पाउडर, नमक और चाट मसाला छिड़ककर मिला लें।
टिप्स ट्रिक्स / शौर्यपथ /आप पूरे दिन जो कुछ भी खाते हैं, उसका असर आपके शरीर पर लम्बे समय तक के लिए बना रहता है। खासकर ब्रेकफास्ट दिन का सबसे जरूरी मील है इसलिए आपको नाश्ते में क्या खाना है इसका ख्याल रखना चाहिए। आप अगर नाश्ते में पोहा खाते हैं, तो इससे न सिर्फ आपका वेट कंट्रोल रहता है बल्कि आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
हीमोग्लोगबिन की मात्रा बढ़ती है
आपके शरीर में अगर आयन की कमी है, तो पोहा खाने से इसकी कमी भी दूर हो जाती है। पोहे में ढेर सारी मात्रा में आयरन पाया जाता है। इसे गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों जरूर खाना चाहिये, जिससे उनके शरीर में हीमोग्लोगबिन की मात्रा बढ़ सके।
ऊर्जावान बनाता है पोहा
सुबह नाश्तेर में शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स देने के लिये पोहे का सेवन किया जा सकता है। अगर शरीर को जरूरत भर का कार्बोहाइड्रेट्स नहीं प्राप्ते होगा, तो शरीर में थकान बनी रहेगी। कार्बोहाइड्रेट्स से शरीर में एनर्जी आती है इसलिए सुबह एक प्लेट पोहा जरूर खाएं।
मोटापा घटाए
पोहा खाने से कभी मोटापा नहीं बढ़ता क्योंसकि मात्र एक कटोरे पोहे में कम से कम 250 कैलोरीज होती हैं। इसमें साथ ही इसमें जरूरी विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सी डेंट भी पाए जाते हैं, अगर आप डाइट पर हैं, तो पोहे में मूंगफली न मिलाएं।
कब्ज को दूर करता है पोहा
आपको अगर पेट भारी-भारी लग रहा है और पाचन में दिक्कत आ रही है, तो आपको पोहा खाना चाहिए।पोहा आसानी से पच भी जाता है और आपके शरीर को पोषण भी मिलता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
अगर आप एक साथ कई सब्जियां नहीं खाते या बच्चों को सब्जियां खिलाना चाहते हैं, तो आप पोहे में कई सब्जियां डाल सकते हैं।इससे पोहे में खनिज, प्रोटीन, आयरन और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।
मुंगेली / शौर्यपथ/ जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पाण्डेय इन दिनों जिले के समस्त अधिकारी कर्मचारीयो को प्रशिक्षण के माध्यम से परिवर्तन की राह में चलने की दिशा में आगे बढ़ रहे है , प्रेरणा से परिवर्तन का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन एवं नैतिक विकास है इसके माध्यम से प्रत्येक अधिकारी कर्मचारियों का व्यक्तित्व एवं नेतृत्व क्षमता में विकास करना है जिससे कि वे शासन की योजनाओं को पूरी सक्षमता एवं तत्परता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित हों । जिम्मेदारियों को रेखांकित कर विभाग में आवश्यक परिवर्तन करने हेतु जिले के सभी विकास खंडो में अलग अलग बी. ई.ओ ,प्राचार्यो और ए. बी. ओ को एक प्रेरणा शेड्यूल के माध्यम से परिवर्तन करने की नैतिक जिम्मेदारी में लगे हुवे है.
उपरोक्त प्रशिक्षण 05/08/21 को विकास खण्ड पथरिया 06/08/21 लोरमी एवं 07/08/21 को मुंगेली रखा गया था पथरिया प्रशिक्षण की जिम्मेदारी अजय नाथ जिला परियोजना अधिकारी के मार्ग दर्शन में मास्टर ट्रेनर्स राजेन्द्र सिंह क्षत्रिय, शैलेन्द्र राठौर, विकास शर्मा एवं श्रीमती सृष्टि शर्मा के द्वारा कुल 44 जिसमे 40 संकुल प्राचार्य एक बी.ई.ओ.एवं 2 ए. बी.ओ.उपस्थित थे को प्रशिक्षण दी गई .
इसी प्रकार विकास खण्ड लोरमी का प्रशिक्षण आधिकारिक जिम्मेदारी वाचस्पति सिंह डी.एम.सी मुंगेली की थी आपके सुब्यवस्थित निर्देशन में मास्टर्स ट्रेनर्स श्री राघवेंद्र सोनी ,श्रीमती अपेक्षा पटेल और श्रीमती अंतरा मैत्री द्वारा सफलतापूर्वक प्रशिक्षण सम्पादित किया गया ,जहा कुल 44 प्राचार्य 1 बी.ई.ओ.और 2 ए. बी.ओ.को प्रशिक्षण दी गई | इसी प्रकार विकास खण्ड मुंगेली का प्रशिक्षण शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल करही आकाश परिहार सहायक परियोजना अधिकारी के उपस्थिति में आयोजित हुआ जहाँ मास्टर ट्रेनर्स मोहन उपध्याय,श्रीमती मोनिका ठाकुर, एकानंद तिवारी और श्रीमती शशि प्रभा सोनी के द्वारा दी गई उपरोक्त प्रशिक्षण की आधिकारिक जिम्मेदारी सहायक परियोजना अधिकारी परिहार जी पर थी जिसका निर्वहन आपने कुशलता पूर्वक पूर्ण किया, स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पाण्डेय उपस्थित रह कर प्रशिक्षण की किसी एक सेसशन को पूरा करते रहे ताकि आपकी परिवर्तन की अवधारणा सीधा कर्मचारियों तक पहुच पाये,प्रशिक्षण पस्चात प्रशिक्षार्थियों का फीडबैक काफी उत्साह जनक देखा गया जिसे परिवर्तन की उम्मीद की दृष्टि से देखा जा रहा है,उपरोक्त प्रशिक्षण ब्यापक रूप लेने जा रहा ऐसी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री सतीश पाण्डेय ने दी हम चाहते है सरकारी स्कूलों के प्रति और सरकारी गुरुओ का सम्मान समाज मे एक बार फिर स्थापित हो |
खेल /शौर्यपथ /टोक्यो में खेल जा रहे ओलंपिक खेलों का आज आखिरी दिन है। इन खेलों के खत्म होने से एक दिन पहले करोड़ों भारतीय फैन्स को खुश होने का मौका मिल गया, क्योंकि शनिवार को भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक इवेंट में गोल्ड पर निशाना साधकर 100 साल से ज्यादा समय का इंतजार खत्म कर दिया। खुश होने वालों में देश के पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल थे। अच्छी बात यह है कि यह खुशी क्रिकेट प्रेमियों के चेहरों पर भी देखने को मिली। शनिवार को जैसे ही नीरज ने गोल्ड कंफर्म किया, वैसे ही भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट के दौरान कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर आशीष नेहरा और सुनील गावस्कर खुशी से उछलने लग गए।
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को सोनी नेटवर्क ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें गावस्कर और आशीष नेहरा अपने साथियों संग नीरज के मैच का लुत्फ उठा रहे हैं। नीरज के गोल्ड जीतने के बाद गावस्कर 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती' गाना भी गाते नजर आते हैं। बता दें कि फाइनल के छठे राउंड में जैसे ही चेक गणराज्य के जाकुब वाडलेच ने अपना आखिरी थ्रो पूरा किया, नीरज जान गए थे कि उन्होंने गोल्ड मेडल जीत लिया है। वे सभी 12 प्रतिस्पर्धियों में पहले तीन प्रयासों में सर्वश्रेष्ठ थे, जिससे वे अगले तीन प्रयासों में थ्रो करने के लिए सबसे आखिर में आए।
इस गोल्ड के साथ नीरज अब भारत की तरफ से व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाले मात्र दूसरे खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता था। भारत ने ओलंपिक में पहली बार भाग लेने के बाद से लेकर रियो ओलंपिक 2016 तक कभी भी एथलेटिक्स में पदक नहीं जीता था। दिग्गज मिल्खा सिंह और पीटी ऊषा क्रमश 1960 और 1984 में मामूली अंतर से चूक गए थे। इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (आईओसी) अब भी नार्मन प्रिचार्ड के पेरिस ओलंपिक 1900 में 200 मीटर और 200 मीटर बाधा दौड़ में जीते गए पदकों को भारत के नाम पर दर्ज करता है, लेकिन विभिन्न शोध और इंटरनेशनल एथलेटिक्स महासंघ (अब विश्व एथलेटिक्स) के अनुसार उन्होंने तब ग्रेट ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व किया था।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
