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सेहत /शौर्यपथ /कोरोना संक्रमण होने पर अस्पताल में भर्ती लगभग 15 फीसदी मरीजों में मस्तिष्क से जुड़ी दिक्कते होती हैं। ऐसे गंभीर मरीजो में चेतना की अवस्था में नहीं होना, भ्रम की स्थिति और गुस्सा आने जैसे लक्षण पाए जाते हैं। हालांकि अभी तक मस्तिष्क पर कोरोना प्रभावों को ठीक से नहीं समझा जा सका है। लेकिन अब नए शोध में खुलासा हुआ है कि कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में छह महीने के भीतर गंभीर अक्षमता पैदा हो सकती है।
अटलांटा में जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है। शोधकर्ताओं ने इटली के ब्रेशिया शहर में एक विशेष अस्पताल में मस्तिष्क से जुड़ी दिक्कतों वाले मरीजों का सीटी स्कैन का विश्लेषण करने के बाद यह दावा किया है। इस दौरान शोध में पता चला कि कोरोना होने के दौरान जिन लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी उनके दिमाग के लालट वाले हिस्से में काफी बदलाव दिखा।
साथ ही ऐसे लोगों में ग्रे मैटर भी कम था। हालांकि जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी उनमें यह बदलाव नहीं देखा गया। गौरतलब है कि ग्रै मैटर में दिमागी तंत्रिकाएं होती हैं। इस दौरान शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्रै मैटर का कम होना गंभीर अक्षमता होने की ओर इशारा करता है। जोकि अस्पताल से छुट्टी मिलने के छह महीने बाद तक हो सकता है। वहीं जिन मरीजों को बुखार के लक्षण दिखे थे उनके मस्तिष्क के टेम्पोरल हिस्से में ग्रे मैटर कम पाया गया।
उग्र होने जैसे लक्षण देखने को मिले
अध्ययन में पाया गया कि मस्तिष्क के ललाट क्षेत्रों में ग्रे मैटर में कमी से ऐसे लोगों में उग्र होने जैसे लक्षण देखने को मिली। शोधकर्ताओं में शामिल और ट्राई-इंस्टीट्यूशनल सेंटर फॉर ट्रांशलेशनल रिसर्च इन न्यूरोइमैजिंग एंड डाटा साइंस और जॉर्जिया में मनोविज्ञान के प्रोफेसर विंस कैलहौन ने बताया कि कोरोना के रोगियों के लिए मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं का तेजी से दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य मनोदशा संबंधी विकारों में भी ग्रे मैटर की कमी देखी गई है, जैसे कि सिजोफ्रेनिया में होती है। उन्होंने आगे कहा कि संभावना है कि ग्रे मैटर न्यूरॉन फंक्शन को भी प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
सेहत / शौर्यपथ / तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने नई गाइडलाइन जारी की है। जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, तो उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए। जरूरत पड़े तो आईसीयू में शिफ्ट किया जाए। ऐसे बच्चों को निमोनिया, एक्यूट रिसपाइटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
गाइडलाइन के मुताबिक, बच्चों को इलाज में रेमडेसिविर और आइवरमेक्टिन व स्टेरॉयड नहीं दी जाएंगी। गम्भीर बच्चे ही अस्पताल में भर्ती होंगे। बाकी का इलाज होम आइसोलेशन में रखकर किया जा सकता है। सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह के मुताबिक ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन हो सकते हैं इसलिए उनका इलाज सावधानी से करने की जरूरत है। गाइडलाइन में बच्चों को स्टेरॉयड देने की मनाही की गई है। सिर्फ गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर यह दवा देने की अनुमति दी जाएगी।
घर में रखकर भी इलाज संभव है
गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि सिर्फ कोरोना ग्रस्त गंभीर बच्चों को भर्ती कराने की जरूरत होगी। बाकी का इलाज में घर में रहकर ही किया जा सकता है। बस उनकी नियमित मॉनिटरिंग होती रही। ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन हो सकते हैं इसलिए उनका इलाज सावधानी से करने की जरूरत है।
स्टूल की जांच से पता चलेगा संक्रमण
कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना चाहिए। उनका स्टूल टेस्ट कराने पर पुष्ट हो जाएगा कि उन्हें कोरोना है या नहीं। कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिन्ड्रोम भी हो सकता है जिसके लिए सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या हो सकते हैं लक्षण
-ज्यादातर बच्चे लक्षण विहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले होंगे
-बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, नाक बहना।
-सूंघने व स्वाद की क्षमता में कमी,मांसपेशियों में दर्द, खराश।
ये भी दिक्कत हो सकती है
-कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द।
-कुछ में मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम होगा।
-ऐसे बच्चों को बुखार 38 सेंटीग्रेड से अधिक होगा।
आस्था /शौर्यपथ / सीता नवमी इस साल 21 मई को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मां सीता प्रकट हुई थीं। इस दिन जानकी नवमी के नाम से भी जानते हैं। सीता नवमी के दिन सुहागिनें भगवान राम और माता-पिता की विधि-विधान से पूजा करती हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति और पति को लंबी आयु प्राप्त होती है।
सीता नवमी 2021 का शुभ मुहूर्त-
20 मई को 12 बजकर 25 मिनट पर नवमी तिथि प्रारंभ होगी जो कि 21 मई को 11 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी।
सीता नवमी के दिन बन रहे ये पूजा के शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त- 03:36 ए एम, मई 22 से 04:18 ए एम, मई 22 तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:18 ए एम से 12:12 पी एम तक।
विजय मुहूर्त- 01:59 पी एम से 02:53 पी एम तक।
गोधूलि मुहूर्त-06:15 पी एम से 06:39 पी एम तक।
अमृत काल- 09:08 ए एम से 10:42 ए एम तक।
निशिता मुहूर्त- 11:23 पी एम से 12:06 ए एम, मई 22 तक।
रवि योग- पूरे दिन
माता सीता की ऐसे करें पूजा-
सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
दीपक जलाने के बाद व्रत का संकल्प लें।
मंदिर में देवताओं को स्नान करवाएं।
भगवान राम और सीता का ध्यान लगाएं।
अब विधि-विधान से माता सीता और भगवान राम की पूजा करें।
माता सीता की आरती उतारें।
अब भगवान राम और माता सीता को भोग लगाएं।
ज्योतिष शास्त्र/शौर्यपथ / ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मफल दाता माना जाता है। अंक ज्योतिष में शनि का संबंध नंबर 8 से बताया गया है। जिन लोगों का जन्म की तारीख का मूलांक 8 होता है, उन पर शनि देव की कृपा दृष्टि होती है। 8, 17 और 26 तारीख का मूलांक 8 होता है। इस बर्थ डेट वाले जातक कर्म प्रधान होते हैं। जानिए मूलांक 8 वालों का स्वभाव व व्यक्तित्व-
अंक ज्योतिष के अनुसार, मूलांक 8 वाले लोग स्वभाव से गंभीर होते हैं। इन्हें हर विषय की जानकारी होती है। ये दिखावे में विश्वास नहीं करते हैं। ये अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल करते हैं। ये जिद्दी स्वभाव के होते हैं। एक बार जो ठान लेते हैं, वह करके ही दम लेते हैं। इन्हें चापलूसी पसंद नहीं होती है। मूलांक 8 वाले लोग ज्यादातर शनि ग्रह से जुड़े व्यापार करते हैं।
अंक ज्योतिष के मुताबिक, इस मूलांक के लोगों को इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, तेल और लोहे की वस्तुओं से जुड़े व्यापार करने पर अपार सफलता हासिल होती है। इस मूलांक के लोग कड़ी मेहनत करके सफलता हासिल करते हैं क्योंकि इन्हें भाग्य का साथ कम मिलता है।
मूलांक 8 वालों की लव लाइफ-
मूलांक 8 वालों की लव लाइफ में कई दिक्कतें आती हैं। इन्हें वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। यह जिद्दी स्वभाव के होने के कारण अपने रिश्ते खुद ही खराब कर लेते हैं। मूलांक 8 वालों की शादी में भी विलंब होता है। इस मूलांक के लोगों की मूलांक 3,4,5,7 और 8 वालों से ज्यादा बनती हैं।
मूलांक 8 वालों की आर्थिक स्थिति-
इस मूलांक के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। ये लोग बेवजह धन खर्च करना पसंद नहीं करते हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हाई स्कूल की मुख्य परीक्षा 2021 का परीक्षा परिणाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाईन जारी किया। परीक्षा में पंजीकृत 4 लाख 67 हजार 261 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 6 हजार 168 परीक्षार्थियों के परीक्षा फार्म अपात्र होने के कारण निरस्त किए गए। शेष 4 लाख 61 हजार 093 पात्र परीक्षार्थियों के परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। इनमें 2 लाख 24 हजार 112 बालक और 2 लाख 36 हजार 981 बालिकाओं के परीक्षा परिणाम शामिल हैं। सभी परीक्षार्थी परीक्षा में उत्तीर्ण किए गए, परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने परीक्षा में सफल सभी परीक्षार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के अध्यक्ष डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव प्रोफेसर व्ही.के.गोयल सहित मण्डल के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।
इस वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण 10वीं की परीक्षा निरस्त करते हुए आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। जो परीक्षार्थी आंतरिक मूल्यांकन में सम्मलित नहीं हुए उन्हें न्यूनतम उत्तीर्ण अंक देकर परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। सभी विद्यार्थी उत्तीर्ण हो गए हैं।
उत्तीर्ण परीक्षार्थियों में 4 लाख 46 हजार 393 छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए हैं। जो कुल घोषित परिणाम का 96.81 प्रतिशत है। द्वितीय श्रेणी में 9 हजार 24 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जो कुल शामिल परीक्षार्थियों का 1.96 प्रतिशत और तृतीय श्रेणी में 5 हजार 676 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जो कुल शामिल परीक्षार्थियों का 1.23 प्रतिशत है।
प्रथम श्रेणी में 95.66 प्रतिशत, द्वितीय श्रेणी में 2.65 प्रतिशत, तृतीय श्रेणी में 1.68 प्रतिशत बालक परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इसी प्रकार प्रथम श्रेणी में 97.90 प्रतिशत, द्वितीय श्रेणी में 1.30 प्रतिशत तथा तृतीय श्रेणी में 0.80 प्रतिशत बालिकाएं उत्तीर्ण हुए हैं।
इस वर्ष आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष प्रावीण्य सूची में जारी नहीं करने का निर्णय लिया गया है। अत: प्रावीण्य सूची जारी नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त पुनर्गणना एवं पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान भी इस परीक्षा में समाप्त किया गया है, जो परीक्षार्थी अपने परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नही हैं, उन्हें आगामी परीक्षा में श्रेणी सुधार के लिए सम्मलित होने की पात्रता होगी।
सेहत / शौर्यपथ / अक्सर हम घर में ऐसी चीजें खा लेते हैं, जिनसे न सिर्फ वजन बढ़ता है बल्कि इसका असर लीवर पर भी पड़ता है। लीवर आपके पूरे शरीर को डिटॉक्स करने का वाला अंग है। यह आपके शरीर से टॉक्सिक चीजों को बाहर निकालता है। जब लीवर बहुत अधिक विषाक्त पदार्थों से भर जाता है, तो आपका शरीर अक्सर सुस्त महसूस करता है, आपका इम्यून सिस्टम अधिक काम करता है, आपकी स्किन उतनी हेल्दी नहीं होती है। ऐसे में लीवर को डिटॉक्स करने के लिए कुछ चीजें डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए।
गहरी हरे पत्तेदार सब्जियां
गहरे हरे रंग की सब्जियों में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो शरीर में विषाक्त पदार्थों से लड़ने में मदद करते हैं। पत्तेदार साग और सब्जियां जो विशेष रूप से सहायक होती हैं उनमें केल, पालक और कोलार्ड साग शामिल हैं।
चुकंदर
चुकंदर में आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जिस कारण यह शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। चुकंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करता है।
नींबू के साथ गर्म पानी
पानी का सेवन शरीर से अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। जब आपका शरीर अच्छी तरह से हाइड्रेटेड होता है, तो यह न केवल लीवर को काम करने में मदद करता है, बल्कि यह आपके शरीर के सभी अंगों और कोशिकाओं की भी मदद करता है।
जामुन
ब्लूबेरी और शहतूत सहित कुछ जामुन अपने हाई लेवल के एंटीऑक्सिडेंट के कारण लीवर कैंसर से लड़ने में मदद कर सकते हैं। जामुन को नाश्ते के रूप में कच्चा खाया जा सकता है या उन्हें स्मूदी में ताजा या जमे हुए इस्तेमाल किया जा सकता है।
मिल्क थीस्ल
दूध थीस्ल एक जड़ी बूटी है, जो लीवर को मजबूत बनाती है। इसमें सिलीमारिन होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट दोनों है। दूध थीस्ल विभिन्न डिटॉक्स चाय के साथ-साथ टिंचर या कैप्सूल के रूप में पाया जा सकता है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /एडीएचडी एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जो व्यवहार में अति-सक्रियता पैदा कर सकता है। इससे ग्रस्त लोग एक कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने या लंबे समय तक एक जगह बैठने में परेशानी का सामना कर सकते हैं। एडीएचडी को अंग्रेजी में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर के नाम से पहचाना जाता है। ADHD की समस्या ऐसे परिवारों में अधिक देखी जाती है जिन घरों में तनाव का माहौल बना रहता है या फिर जहां बच्चों की पढ़ाई पर अधिक जोर देने की प्रवृत्ति होती है।
कब होता है ADHD-
एडीएचडी की समस्या ज्यादातर प्री-स्कूल या केजी तक के बच्चों में देखी जाती है। कुछ बच्चों में, किशोरावस्था की शुरुआत में स्थिति खराब हो सकती है। कई बार यह समस्या व्यस्कों को भी परेशान कर सकती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
लड़कियों की तुलना में लड़को में एडीएचडी की समस्या आम होती है। हालांकि इस समस्या का निदान स्कूल के शुरूआती वर्षों में ही हो जाता है, जब बच्चे को ध्यान केंद्रित की समस्या शुरू होने लगती है। एडीएचडी से पीड़ित कुछ बच्चों में बिहेवियरल प्रॉब्लम्स भी देखी जा सकती है। कई बार ऐसे बच्चों की देखभाल करना या उन्हें कुछ सिखाना अभिभावकों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे बच्चे स्कूल में भी दूसरे बच्चों के साथ जल्दी फिट नहीं हो पाते हैं और कोई न कोई शरारत करते रहते हैं।
एडीएचडी के लक्षण-
-ध्यान न देना
- जरूरत से अधिक सक्रियता
- असंतोष
-चीजें याद रखने में परेशानी
-अत्यधिक बातूनी होना
-अक्सर दिनमें सपने देखना
एडीएचडी का कारण-
-आनुवंशिकता
-दिमाग में परिवर्तन
-गर्भावस्था के दौरान खराब पोषण
-मस्तिष्क की चोट
एडीएचडी का उपाय-
एडीएचडी से पीड़ित बच्चों के वर्क स्टाइल में सुधार के उपाय खोजे जा सकते हैं। एडीएचडी का ट्रीटमेंट मेडिसिन, साइकोथेरेपी, एजुकेशन या ट्रेनिंग से भी किया जा सकता है।
एडीएचडी से पीड़ित बच्चों को ऐसे संभालें-
-अच्छे काम पर तारीफ करने या इनाम देने से बच्चे के व्यवहार को पॉजिटिव किया जा सकता है।
-यदि ऐसा दिखे कि बच्चा आपा खो रहा है, तो उस पर ध्यान दें और उसे किसी अन्य एक्टिविटी में बिजी कर दें।
-दोस्तों को घर बुलाएं। इससे बच्चे को मिलने-जुलने में आसानी होगी लेकिन यह सुनिश्चित करें कि बच्चा स्वयं पर नियंत्रण न खोएं।
-अपने बच्चे को अच्छी नींद सोने दें।
खाना खजाना / शौर्यपथ /आपको अगर कुछ स्पेशल खाने का मन कर रहा है, तो आपको चावल को कुछ स्पेशल तरीके से बना सकते हैं। लेमन टोमैटो राइस रेसिपी ऐसी है, जो टेस्टी होने के साथ हेल्दी भी है। आप चाहें, तो इस रेसिपी को बचे हुए चावलों के साथ भी बना सकते हैं-
सामग्री
1 कप बासमती चावल
2 कप टमाटर कटे हुए
2 प्याज (बारीक कटा हुआ)
1/4 कप मटर
कप स्वीट कॉर्न
1 टुकड़ा अदरक (कद्दुकस किया हुआ)
1 टीस्पून लाल मिर्च पाउडर
1 टीस्पून हल्दी पाउडर
1-2 लौंग
तेल जरूरत के अनुसार
नमक स्वादानुसार
विधि
सबसे पहले चावल को आधे घंटे के लिए पानी में भिगोकर रख दें।
मीडियम आंच में एक प्रेशर कूकर में तेल डालकर गरम करें।
तेल के गरम होते ही इसमें प्याज डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक भूनें।
इसके बाद लौंग, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, अदरक मसाले को डालकर चलाते हुए भूनें।
फिर गाजर, मटर और कॉर्न डालकर 2 मिनट तक पकाएं। तय समय के बाद इसमें कटे टमाटर डालकर भूनें।
इसके बाद चावल और पानी डालकर कूकर का ढक्कन बंद कर 1-2 सीटी आने तक पकाएं।
कूकर का प्रेशर खत्म होने पर ढक्कन खोलकर इसमें नींबू का रस मिलाएं।
तैयार है लेमन टोमैटो राइस। गरमागरम सर्व करें।
सेहत /शौर्यपथ / कोरोना वायरस वैक्सीन के बाद कई लोगों में बुखार और सिरदर्द की शिकायत देखी गई थी। इस कारण वैक्सीनेशन के बाद इन लक्षणों को देखकर लोगों के मन में कई सवाल और डर भी देखने को मिला। इस स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हेल्थ केयर वर्कर्स और वैक्सीन लेने वालों के लिए वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों से वैक्सीनेशन के 20 दिन के भीतर थ्रॉम्बोसिस (ब्लड क्लॉट्स) के लक्षणों को पहचान करने की अपील की गई है।
इन लक्षणों को न करें अनदेखा
-एडवाइजरी में लोगों को सलाह दी गई है कि कोई भी वैक्सीन लेने के बाद (खासकर कोविशील्ड) लेने के बाद यदि आपको तेज सिरदर्द, छाती में दर्द, शरीर में सूजन, उल्टी के बिना पेट में दर्द, दौरे या सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो इन्हें वैक्सीन सेंटर पर जरूर रिपोर्ट करवाएं।
-इसके अलावा यदि इंजेक्शन साइट के अलावा शरीर के किसी हिस्से पर लाल रंग के धब्बे नजर आ रहे हैं, तो भी सचेत रहिए। यदि आपको माइग्रेन की समस्या नहीं है और और उल्टी के साथ या उल्टी के बिना ही सिर में लगातार दर्द रहता है, तो वैक्सीनेशन सेंटर पर ये सब लक्षण रिपोर्ट करवाने जरूरी हैं।
-वैक्सीन लगने के बाद कमजोरी, शरीर के किसी अंग का काम करना बंद कर देना, बिना किसी कारण लगातार उल्टी होना, आंखों में दर्द या धुंधला दिखना, कन्फ्यूजन-डिप्रेशन या मूड स्विंग होना भी सामान्य बात नहीं है। इन सभी लक्षणों के बारे में वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद हेल्थ केयर वर्कर्स को बताएं।
आस्था /शौर्यपथ / अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कहा कि हनुमान आरोग्य के देवता हैं और जब कोई संकट आता है तो उसे हनुमान जी ही दूर करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से देश के मठों, मंदिरों, आश्रमों और हिंदू परिवारों में वैश्विक महामारी कोरोना के समूल विनाश के लिए हनुमान चालीसा पाठ का अभियान चलाया है। इसी क्रम में परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने भी
मठ बाघम्बरी गद्दी में अपने शिष्यों के साथ मंगलवार को यहां हनुमान चालीसा का पाठ किया। गिरी ने कहा कि हनुमान आरोग्य के देवता हैं और देश व परिवार में जब भी कोई संकट आता है तो उसे हनुमान जी ही दूर करते हैं। उन्होंने मठ मंदिरों में रहने वाले साधु, संतों और गृहस्थों से अपील की है कि आप जहां पर भी हैं, वहीं हनुमान चालीसा का पाठ करिए ताकि कोरोना महामारी देश और दुनिया से पूरी तरह से खत्म हो।
परिषद अध्यक्ष गिरि ने कहा कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है। इसलिए जब हम कोई प्रार्थना करते हैं तो देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण की कामना करते हैं। पूरी मानवता को कोरोना की महामारी से मुक्ति मिले इसके लिए पूरे देश में हनुमान चालीसा का जगह-जगह पाठ हो रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह अभियान स्वागत योग्य है। लोगों को इस अभियान से जुड़कर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए ताकि कोरोना वायरस से लोगों को मुक्ति मिल सके।
आस्था /शौर्यपथ / 27 नक्षत्रों में से आठवां पुष्य नक्षत्र सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इसे नक्षत्रों का राजा माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी शनि और गुरु बृहस्पति हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्मे जातक संपन्न और भाग्यशाली होते हैं। ये लोग नियमों का पालन करने वाले होते हैं। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक सुख-सुविधाओं का लाभ उठाने वाले होते हैं। इन्हें दूसरों की सेवा करना अच्छा लगता है।
जानिए पु्ष्य नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव और व्यक्तित्व-
पुष्य नक्षत्र के जातक मेहनती होते हैं। यह सफलता को अपनी कड़ी मेहनत से पाने में विश्वास रखते हैं। इन्हें अध्यात्म में गहरी रुचि होती है। ये लोग सोच-विचार कर पैसा खर्च करते हैं। इस नक्षत्र के लोग जल्दी दूसरों के साथ घुल-मिल जाते हैं। ये लोग दयालु, विविध कलाओं में निपुण और बलवान होते हैं।
साल का पहला चंद्र ग्रहण इन लोगों के जीवन में लाएगा खुशियां, क्या आप भी इस लिस्ट में हैं शामिल?
इस नक्षत्र के जातक व्यावहारिक, स्पष्टवादी और विश्वासपूर्ण होते हैं। ये माता-पिता भक्त और बुद्धिमान होते हैं। नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति की इन जातकों पर विशेष कृपा होती है। जिसके कारण इन्हें जीवन में मान-सम्मान के साथ प्रशंसा हासिल होती है। ये रिश्तों को निभाना जानते हैं।
ये 4 राशि वाले होते हैं गुस्सैल और जिद्दी, अपने आगे नहीं सुनते किसी की बात
यह स्वभाव से गंभीर व संवेदनशील होते हैं। इन्हें बीच में कोई काम छोड़ना पसंद नहीं होता है। ये अच्छे बिजनेसमैन भी साबित होते हैं। यह अपनी बातों से सभी के दिलों में जगह बना लेते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे लोग लेखक, कवि, साहित्यकार या भविष्यवक्ता भी हो सकते हैं।
शौर्यपथ / खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फाइजर-बायोएनटेक द्वारा बनाए गए कोविड-19 टीके का इस्तेमाल 12-15 साल के किशोरों पर करने के लिए इसके आपातकालीन प्रयोग का दायरा बढ़ा दिया है।
'रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने 12 मई को उनकी सलाहकार समूह की बैठक के बाद इस आयु समूह पर इस्तेमाल करने की सिफारिश का अनुसरण किया है। द अमेरिकन एकेडमी ऑफ पेडियर्टिक्स इस फैसला का समर्थन करती है। डॉ डेबी-एन शर्लेी वर्जीनिया विश्वविद्यालय में बाल चिकित्सा की एसोसिएट प्रोफेसर हैं और बाल संक्रमण रोग में विशेषज्ञ हैं। यहां वह बच्चों को कोविड-19 का टीका लगवाने को लेकर अभिभावकों की चिंताओं का जवाब दे रही हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 7 सवालों के जवाब।
1.क्या किशोरों में ये टीका काम करता है?
जवाब- बिल्कुल काम करता है। फाइजर-बायोएनटेक की ओर से हाल में जारी आंकड़ें दिखाते हैं कि कोविड-19 टीका इस आयु समूह में वाकई में अच्छी तरह से काम करता हुआ दिखता है।
कोविड-19 टीका अमेरिका में 12-15 साल के किशोरों पर चल रहे क्लीनिकल ट्रायल में कोविड-19 लक्षणों को रोकने में 100 फीसदी कारगर पाया गया है। किशोरों ने टीके की प्रतिक्रिया में बड़ी संख्या एंटी बॉडी बनाई और उनका रोग प्रतिरोधक उतना ही मजबूत था जिनता 16-25 साल के नौजवानों में देखा गया है।
2.मुझे कैसे पता चलेगा कि टीका मेरे बच्चे के लिए सुरक्षित है या नहीं?
जवाब- अब तक कोविड-19 टीका किशोरों में सुरक्षित प्रतीत हुआ है। अमेरिका में जितने टीकों को इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है, उनपर सब पर गहन अध्ययन किया गया है लेकिन हम यह मान लेना नहीं चाहते हैं कि बच्चे छोटे वयस्क होते हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा उपयोग की सिफारिश करने से पहले बच्चों में इन टीकों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना महत्वपूर्ण है। मौजूदा अध्ययन बच्चों पर टीकाकरण को लेकर बारीक नजर रखना जारी रखेंगे और मजबूत सुरक्षा निगरानी से दुर्लभ या अप्रत्याशित चिंताओं को उभरने पर उन्हें तेजी से पहचानने में मदद मिलेगी।
3. मुझे लगा था कि बच्चों को कम खतरा है- क्या उन्हें अब भी टीका लगवाने की जरूरत है?
जवाब- फिलहाल, अमेरिका में सामने आ रहे साप्ताहिक कोविड-19 मामलों में बच्चों की संख्या करीब एक चौथाई है। बच्चों में कोविड-19 के कारण गंभीर बीमारी होना दुलर्भ है पर यह होती है और हजारों बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है और अमेरिका में कम से कम 351 बच्चों की मौत हुई है। टीकाकरण बच्चों में संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोकेगा।
4. मेरे बच्चे को क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
जवाब- टीकाकरण के बाद मामूली दुष्प्रभाव हो सकते हैं। सबसे सामान्य दुष्प्रभाव इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द और सूजन हो सकती है। अन्य सामान्य दुष्प्रभाव में थकान और सिर में दर्द शामिल है। युवाओं की तरह ही, कुछ किशोरों को बुखार, सर्दी लगना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द हो सकता है और ये टीके की दूसरी खुराक के बाद बहुत सामान्य है। ये दुष्प्रभाव कम समय के लिए होते हैं और ज्यादातर लोगों में एक-दो दिन में चले जाते हैं।
5. क्या बच्चों में गंभीर प्रतिक्रिया हुई है?
जवाब- फाइजर-बायोएनटेक के क्लीनिकल ट्रायल में टीके से संबंधित कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव रिपोर्ट नहीं हुए हैं। बुजुर्गों में गंभीर एर्लेजिक प्रतिक्रिया दुलर्भ रूप से रिपोर्ट हुई है। अगर किसी को टीके से या टीके में शामिल किसी तत्व से एलर्जी के बारे में जानकारी है तो उसे टीका नहीं लेना चाहिए। अगर आपके बच्चे को ऐसा कुछ है तो आप टीका देने वाले शख्स को इस बारे में बताएं ताकि टीकाकरण के बाद आपके बच्चे को 30 मिनट तक निगरानी में रखा जा सके।
6. कोविड-19 टीका 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कब उपलब्ध होगा?
जवाब- कोविड-19 टीका निर्माताओं ने बच्चों पर टीके का परीक्षण शुरू कर दिया है या शुरू करने की योजना बना रहे हैं। जब और सूचना उपलब्ध होगी तो टीका उपयोग करने की सिफारिशें बदल सकती हैं। 2-11 साल उम्र के बच्चों को इस साल के अंत तक टीका लगवाने की इजाजत मिल सकती है।
7. अगर मैंने टीका लगवा लिया है और मेरे बच्चे का टीकाकरण नहीं हुआ है तो क्या उन्हें मुझसे वायरस लग सकता है?
जवाब- कोविड-19 टीके में कोविड-19 का जीवित वायरस नहीं होता है, लिहाजा इससे कोविड-19 नहीं हो सकता है। टीकाकरण आपको और आपके बच्चे, दोनों को कोविड-19 से बचाएगा। अध्ययन से पता चला है कि टीका लगवा चुकी गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली मांएं अपने नवजात को सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा दे सकती है। यह टीकाकरण का एक और फायदा है।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /बुजुर्गों को डिमेंशिया से बचाने में मददगार है वीडियो कॉल, शोध में दावा कोरोना महामारी की वजह से लोगों में बहुत ज्यादा दूरियां आ गई हैं। रिश्तों की इन दूरियों को कम करने में वीडियो कॉल मददगार साबित हो रही है। वृद्धों पर इसका बड़ा ही सकारात्मक असर पड़ा है। एक शोध में दावा किया गया है कि जूम एप पर हर रोज बात करने वाले डिमेंशिया से जूझ रहे बुजुर्गों की हालत में सुधार आया है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि नियमित संचार से वृद्धों की स्मृति को लंबा बनाए रखने में मददगार साबित होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट लंदन के गेलर इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग एंड मेमोरी द्वारा किए गए अध्ययन में 50 वर्ष से अधिक आयु के 11,418 पुरुषों और महिलाओं के संचार का अध्ययन किया गया। इस दौरान उनसे पूछा गया कि वो कैसे फोन पर और आमने-सामने कैसे अपने परिवार और दोस्तों से ऑनलाइन बातचीत करते हैं। इसके बाद इन लोगों का एक स्मृति टेस्ट भी किया गया।
इसमें एक लिस्ट थी जिसमें इन लोगों को दस शब्दों को याद करके लिखना था। ऐसे प्रतिभागी जो आमने-सामने ज्यादा रहने हैं उनकी स्मृति कमजोर पाई गई उनके तुलना में जो रोज तकनीक का इस्तेमाल कर अपने परिवार और दोस्तों से बातचीत किया करते थे।
शोध के प्रमुख स्नोरी रैफसन कहते हैं कि इस लॉकडाउन के दौरान ज्यादा से ज्यादा लोग तकनीक का इस्तेमाल कर एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। ये प्रमाणित करता है कि किस तरह से तकनीक रिश्तों को बनाए रखने में तथा सामाजिक अलगाव को दूर करने में मदद कर सकती है। ये हमारे मस्तिष्क की बीमारियों को भी दूर करने में लाभदायक है।
खाना खजाना / शौर्यपथ /कोरोनाकाल के चलते लोग बाजार से कुछ भी मंगवाने से डर रहे हैं। ऐसे में शाम को अगर आपका कुछ चटपटा खाने का मन करें तो आप घर पर ही ट्राई कर सकती हैं स्ट्रीट स्टाइल कटोरी चाट रेसिपी। यह रेसिपी न सिर्फ शाम को लगी छोटी-मोटी भूख को शांत करती हैं बल्कि आपकी चटपटा खाने की क्रेविंग भी पूरी हो जाती है। तो आइए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है स्ट्रीट स्टाइल कटोरी चाट।
कटोरी चाट बनाने के लिए समाग्री-
-250 ग्राम मैदा
-4 से 5 उबले आलू
-आधा कप सफेद मटर (उबली हुई)
-2 से 3 कप दही
-3 से 4 बड़े प्याज
-2 से 3 बारीक कटी हरी मिर्च
-बारीक कटी हरी धनिया
-15 से 20 पापड़ी (बारीक तोड़ लें)
-2 छोटे चम्मच लाल मिर्च
-1 इंच कद्दूकस किया अदरक का टुकड़ा
-1 छोटा चम्मच हल्दी
-3 से 4 चुटकी भुना-पिसा जीरा
-150 ग्राम इमली
-50 ग्राम गुड़
-500 ग्राम मोयन
-फ्राई के लिए तेल
-स्वादानुसार नमक
कटोरी चाट बनाने की विधि-
कटोरी चाट बनाने के लिए सबसे पहले मैदे की कटोरी बना लें। इसके लिए मैदे में तेल (मोयन) डालकर थोड़े-थोड़े पानी से आटे की तरह गूंद लें। फिर मैदे के आटे की लोई बनाकर बेल लें। अब बेली हुई मैदे की पूरियों को एक उल्टी कटोरी पर रखकर कटोरी का आकार दें। एक कढ़ाई में तेल गर्म करें, फिर पूरियों को कटोरी के साथ तेल में फ्राई कर लें, फ्राई होते समय पूरी कटोरी से अपने आप अलग हो जाएगी।
अब चटनी के लिए इमली और गुड़ को एक घंटे के लिए पानी में डाल दें और उसका अर्क निकालकर इमली और गुड़ में काला नमक, जीरा, लाल मिर्च अच्छे से मिलाकर खट्टी-मीठी चटनी बना लें। एक तरफ कढ़ाई में तेल गर्म करें उसमें अदरक, उबले आलुओं को मसलकर डालें, फिर आलुओं में बारीक कटी हरी मिर्च, हल्दी, उबली सफेद मटर, लाल मिर्च, नमक, भुना-पिसा जीरा डालकर अच्छी तरह भून लें। फिर आलू के मसाले को मैदे की कटोरियों में डालें ऊपर से पापड़ी, दही और इमली की चटनी डालकर एक प्लेट में रखकर सबके लिए परोसें और बारीक कटे प्याज, सेव नमकीन और धनिया की पत्तियों से चाट को सजाएं और फिर गर्मा गर्म ही खाएं और खिलाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
