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खाना खजाना /शौर्यपथ /सुबह नाश्ते में क्या बनाना है जो जल्दी बनने के साथ परिवार की सेहत के लिए सेहदमंद भी हो, यह सवाल सुबह उठते ही हर महिला के मन को परेशान करता है। आपके इसी सवाल का जवाब हो सकती है आज की यह रेसिपी, नाम है पनीर कुल्चा। पनीर कुल्चा एक शानदार हेल्दी स्नैक रेसिपी है, जिसे तैयार करना बेहद आसान है। खास बात यह है कि यह रेसिपी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद होती है। तो आइए देर किस बात की जान लेते हैं कैसे बनाएं पनीर कुल्चा।
पनीर कुल्चा बनाने के लिए सामग्री-
पनीर कुल्चा आटे के लिए
-मैदा- 2 कप
-बेकिंग पाउडर- 1/2 चम्मच
-बेकिंग सोडा- 1/4 चम्मच
-दूध- 1/2 कप
-दही- 1 बड़ा चम्मच
-तेल- आवश्यकतानुसार
-नमक- 1/2 चम्मच
-चीनी- 1 चम्मच
पनीर कुल्चा स्टफिंग तैयार करने के लिए-
-धनिया पत्ती- 1 चम्मच
-बारीक कटी हुई शिमला मिर्च- 1/4 कप
-कटी हुई हरी मिर्च- 2
-सरसों के बीज- 1 चम्मच
-चावल की भूसी का तेल- 1 बड़ा चम्मच
-पिसी हुई काली मिर्च- 1/2 चम्मच
-टोमैटो केचप- 2 बड़े चम्मच
-घी- 2 बड़ा चम्मच
-जीरा- 1 चम्मच
-चाट मसाला पाउडर- 1/2 चम्मच
-अमचूर पाउडर- 1/4 बड़ा चम्मच
-नमक- आवश्यकतानुसार
-हरी चटनी- 1 चम्मच
-कद्दूकस हुआ पनीर- 200 ग्राम
-कटा हुआ अदरक- 1 छोटा चम्मच
-कटा हुआ टमाटर- 1/4 कप
-कटा प्याज- 1/2 कप
पनीर कुल्चा बनाने की विधि-
पनीर कुल्चा बनाने के लिए सबसे पहले मैदे को एक बड़े बाउल में निकालकर इसमें बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, चीनी, दूध, दही डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर स्मूथ आटा गूंथ लें। अब एक पैन में तेल गरम करके सभी मसाले डालकर इसे ठंडा होने के लिए रख दें। मिश्रण ठंडा होने पर इसमें कद्दूकस किया हुआ पनीर, मसाला पाउडर और अमचूर पाउडर डालें। अब आटे की बॉल को छोटा-छोटा रोल करके इसमें पनीर का मिश्रण सेंटर में रखकर चारों तरफ से सभी किनारों को अच्छे से बंद करके बेलन की मदद से परांठे की तरह बेलें। अब परांठे पर थोड़ा सा घी लगाकर इसे गैस पर मीडियम आंच पर पकाएं। परांठे को दोनों तरफ से गोल्डन और कुरकुरा होने तक पकाएं। आप इस परांठे को हरी चटनी के साथ गर्मा-गर्म परोस सकते हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ / बृहस्पति ग्रह का वार गुरुवार है। हिन्दू धर्म में नवग्रह में बृहस्पति ग्रह और वारों में गुरुवार को श्रेष्ठ माना है। आखिर बृहस्पति ग्रह को नवग्रों में श्रेष्ठ क्यों माना जाता है। आओ जानते हैं इस संबंध में खास जानकारी।
1. सौरमंडल में सूर्य के आकार के बाद बृहस्पति का ही नम्बर आता है। इस ग्रह का व्यास लगभग डेढ़ लाख किलोमीटर और सूर्य से इसकी दूरी लगभग 778000000 किलोमीटर मानी गई है। यह 13 कि.मी. प्रति सेकंड की रफ्तार से सूर्य के गिर्द 11 वर्ष में एक चक्कर लगा लेता है। यह अपनी धूरी पर 10 घंटे में ही घूम जाता है। लगभग 1300 धरतियों को इस पर रखा जा सकता है।
2. जिस तरह सूर्य उदय और अस्त होता है, उसी तरह बृहस्पति जब भी अस्त होता है तो 30 दिन बाद पुन: उदित होता है। उदित होने के बाद 128 दिनों तक सीधे अपने पथ पर चलता है। सही रास्ते पर अर्थात मार्गी होने के बाद यह पुन: 128 दिनों तक परिक्रमा करता रहता है एवं इसके पश्चात्य पुन: अस्त हो जाता है। गुरुत्व शक्ति पृथ्वी से 318 गुना ज्यादा। इसकी गुरुत्व शक्ति के कारण ही यह धरती को सौर तूफान, बड़ी उल्कापिंड और अन्य अंतरिक्ष की आपदा से यह ग्रह बचा लेता है।>
3. धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु के सूर्य, मंगल, चंद्र मित्र ग्रह हैं, शुक्र और बुध शत्रु ग्रह और शनि और राहु सम ग्रह हैं। नवग्रहों में बृहस्पति को गुरु की उपाधि प्राप्त है। इनके शुत्र बुध, शुक्र और राहु है। कर्क में उच्च का और मकर में नीच का होता है गुरु। लाल किताब के अनुसार चंद्रमा का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति बढ़ जाती है। वहीं मंगल का साथ मिलने पर बृहस्पति की शक्ति दोगुना बढ़ जाती है। सूर्य ग्रह के साथ से बृहस्पति की मान-प्रतिष्ठा बढ़ती है।>
4. मानव जीवन पर बृहस्पति का महत्वपूर्ण स्थान है। यह हर तरह की आपदा-विपदाओं से धरती और मानव की रक्षा करने वाला ग्रह है। बृहस्पति का साथ छोड़ना अर्थात आत्मा का शरीर छोड़ जाना है। गुरु ग्रह के कारण ही धरती का अस्तित्व बचा हुआ है। सूर्य, चंद्र, शुक्र, मंगल के बाद धरती पर इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है। गुरु ग्रह के अस्त होने के साथ ही मांगलित कार्य भी बंद कर दिए जाते हैं क्योंकि गुरु से ही मंगल होता है।
5. गुरुवार की प्रकृति क्षिप्र है। यह दिन ब्रह्मा और बृहस्पति का दिन माना गया है। ज्योतिष के अनुसार गुरुवार या गुरु ग्रह का संबंध महर्षि बृहस्पति और भगवान दत्तात्रेय से है परंतु लाल किताब के अनुसार भगवान ब्रह्मा इसके देवता हैं और ब्राह्मण, दादा, परदादा को इससे संबंधित माना जाता है। पीपल, पीला रंग, सोना, हल्दी, चने की दाल, पीले फूल, केसर, गुरु, पिता, वृद्ध पुरोहित, विद्या और पूजा-पाठ यह सब बृहस्पति के प्रतीक माने गए हैं।
धर्म संसार /शौर्यपथ /ज्योतिष के अनुसार हर ग्रह की परिभाषा अलग है। भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में नौ ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है सूर्य के बारे में रोचक जानकारी...
जानिए भगवान सूर्य के बारे में 14 खास बातें
* सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया है।
* वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है
* सूर्य के बाल और हाथ सोने के हैं।
* सूर्यदेव के रथ को 7 घोड़े खींचते हैं, जो 7 चक्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
* सौर देवता, आदित्यों में से एक, कश्यप और उनकी पत्नियों में से एक अदिति के पुत्र।
* पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य की अधिक प्रसिद्ध संततियों में हैं शनि (सैटर्न), यम (मृत्यु के देवता) और कर्ण (महाभारत वाले) है।
* सूर्य 'रविÓ के रूप में 'रविवारÓ या 'इतवारÓ के स्वामी हैं।
* वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है।
* सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है।
* ज्योतिष शास्त्र में नव ग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है।
* सूर्य देव की प्रसन्नता के लिए इन्हें नित्य अघ्र्य देना चाहिए।
* मंत्र '? घृणि सूर्याय नम:Ó है।
* प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में सूर्य मंत्र का जप करना चाहिए।
* सृष्टि में सबसे पहले सूर्यस्वरूप प्रकट हुआ इसलिए इनका नाम आदित्य पड़ा। सूर्य का एक अन्य नाम सविता भी है।
सेहत /शौर्यपथ / हम सभी जानते हैं कि हाइट बढ़ने एक निश्चित उम्र तक बढ़ती है। वहीं, आनुवांशिक कारणों के साथ कई ऐसी बातें हैं जिससे किसी व्यक्ति की लंबाई कितनी बढ़ेगी, इसका पता चलता है। कई पहलुओं के साथ डाइट भी एक खास वजह है जिससे किसी बच्चे की लंबाई प्रभावित होती है। आज हम आपको ऐसी चीजें बता रहे जिन्हें खाने से लंबाई बढ़ती है।
बैरीज
ब्लूबैरी, स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी या रास्पबैरी भी कई प्रकार के न्यूट्रिशन से लैस होती हैं। इसमें मौजूद विटामिन-सी कोशिकाओं को बेहतर करता है और टिशू रिपेयर करने का काम करता है। विटामिन-सी कॉलेजन के सिंथेसिस को भी बढ़ाता है, एक ऐसा प्रोटीन जिसकी मात्रा आपके शरीर में सबसे ज्यादा होती है।
पत्तेदार सब्जियां
पालक, केल, अरुगुला, बंदगोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों में भी कई तरह के पोषक तत्व होते हैं। इन सब्जियों में विटामिन-सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम के अलावा विटामिन-के भी पाया जाता है जो हड्डियों के घनत्व को बढ़ाकर लंबाई बढ़ाने का काम करता है।
अंडा
अंडा न्यूट्रिशन का पावरहाउस है। इसमें प्रोटीन की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसमें हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। 874 बच्चों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से अंडा खाने वाले बच्चों की हाइट बढ़ती है। अंडे के पीले भाग (यॉक) में मौजूद हेल्दी फैट भी शरीर को फायदा दे सकता है।
बादाम
बादाम में मौजूद कई प्रकार के विटामिन और मिनरल भी लंबाई के लिए बेहद जरूरी हैं। इसमें हेल्दी फैट के अलावा, फाइबर, मैग्नीज और मैग्नीशियम भी पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन-ई भी होता है, जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में दोगुना हो जाता है। एक स्टडी के मुताबिक, बादाम हमारी हड्डियों के लिए भी फायदेमंद चीज है।
साल्मन फिश
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर साल्मन फिश भी सेहत के लिए बड़ी फायदेमंद है। ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सेहत को फायदा पहुंचाने वाला एक फैट है, जो शरीर की ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए भी अच्छा माना जाता है। कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि ओमेगा फैटी-3 एसिड हड्डियों की ग्रोथ को भी बढ़ावा दे सकता है। ये बच्चों में नींद की समस्या को भी दूर कर सकता है, जो कि उनकी ग्रोथ पर बुरा असर डालती है।
शकरकंद
विटामिन-ए से युक्त शकरकंद हड्डियों की सेहत को सुधारकर लंबाई बढ़ाने में मदद करती है। इसमें सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल दोनों प्रकार के तत्व होते हैं, जो आपकी डायजेस्टिव हेल्थ को प्रमोट करते औंर आंतों के लिए अच्छे बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देते हैं। यह विटामिन-सी के अलावा मैग्नीज, विटामिन बी6 और पोटेशियम का भी अच्छा स्रोत है।
सेहत /शौर्यपथ /कश्मीर के कहवा से लेकर मध्य भारत की मसाला चाय तक, देशभर में अलग-अलग चाय के फ्लेवर के लोग दीवाने हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं खाने-पीने की बाकी चीजों की ही तरह चाय पीने के भी कुछ खास नियम होते हैं। अगर आप भी चाय पीना पसंद करते हैं तो चाय का शौक रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम वरना हो सकते हैं कई गंभीर रोगों के शिकार।
भूलकर भी नजरअंदाज न करें चाय से जुड़े ये नियम-
खाली पेट न पिएं चाय-
कभी भी खाली पेट चाय पीने की गलती न करें। ऐसा करने से आप गंभीर रोगों की चपेट में आ सकते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को गैस और एसिडिटी की शिकायत हो सकती है।
चाय से पहले पिएं गुनगुना पानी-
खाली पेट चाय पीने से आंतों को नुकसान होता है। चाय पीने से पहले कुछ हल्का खाकर एक ग्लास गुनगुना पानी जरूर पी लें। ऐसा करने से व्यक्ति को गैस की शिकायत नहीं होती।
खाने के तुरंत बाद न पिएं चाय-
अक्सर लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद चाय पीने की आदत होती है। ऐसा करने से आपका शरीर खाने में मौजूद पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता है और शरीर को कई तरह के रोग घेरने लगते हैं। ध्यान रखें हमेशा भोजन और चाय के बीच में 1 घंटे का अंतर जरूर रखें।
सोते समय न करें चाय का सेवन-
रात को सोने से पहले जो लोग चाय पीते हैं, उन्हें नींद न आने की समस्या हो सकती है। ऐसा इसलिए चाय में मौजूद कैफीन नींद विरोधक होता है।
दिन में दो कप चाय पीना ही फायदेमंद-
पूरे दिन में दो कप चाय का सेवन सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता है। लेकिन इससे ज्यादा चाय का सेवन करने पर व्यक्ति की भूख मर जाती है और उसे नींद न आने की भी समस्या परेशान करने लगती है।
खाना खजाना /शौर्यपथ / मिस्सी रोटी खाने में काफी स्वाष्टिक होती है। मिस्सी रोटी लन्च या डिनर में कभी भी बनाई जा सकती है। इसे बनाना काफी आसान है। तो आइए जानते है कैसे बनाते है मिस्सी रोटी:
सामग्री :
गेहूं का आटा - 1 कप
बेसन - 1 कप
अजवायन - 1/4 छोटी चम्मच
हींग - 1-2 पिंच
हल्दी - 1/4 छोटी चम्मच
कसूरी मेथी - 1 टेबल स्पून
तेल - 2 छोटी चम्मच
नमक - स्वादानुसार
विधि:
आटे और बेसन को किसी बर्तन में निकाल लीजिए। अब इसमें नमक, अजवायन, हींग, हल्दी, कसूरी मेथी और तेल डालकर मिला लीजिए। पानी की सहायता से नरम आटा गूंथिए। इसे ढककर 15-20 मिनिट के लिये रख दीजिए। अब हाथ पर थोड़ा तेल लगाकर आटे को मल कर चिकना कीजिए।
आटे की लोई बना लें। अब इसे बेलकर रोटी बना लें। बेली गई रोटी को सेक लीजिए। सारी रोटी को इसी तरह बना कर तैयार कर लीजिए। मिस्सी रोटी तैयार हैं, गरमा गरम मिस्सी रोटी अपनी मन पसन्द सब्जी के साथ खाएं।
खाना खजाना /शौर्यपथ /1 कप चावल का आटा , 1/2 कप मैदा, 2 टी स्पून देशी घी, चुटकी भर नमक।
भरावन सामग्री :
2 कप किसा ताजा नारियल, पाव कप काजू दरदरा पिसा हुआ, पाव कप पिस्ता कतरन, 1 टी स्पून इलायची पावडर, 1/2 कप दूध, केसर 4-5 लच्छा, 1 कप शकर।
विधि :
एक कड़ाही में, नारियल, काजू, पिस्ता व शकर डालें तथा दूध डाल कर पकाते रहें। मावा जैसा गाढ़ा होने लगे तो आंच से उतारें व इलायची मिला लें। अब चावल के आटे में मैदा, घी व नमक मिलाकर गूंथ लें व पतली-पतली छोटी-छोटी पूरियां बेल लें।
भरावन सामग्री थोड़ी-थोड़ी भरकर मोदक तैयार कर लें। एक कड़ाही में घी गर्म करें व धीमी आंच पर मोदक सुनहरे होने तक लें। अब केसर को दूध में घोटें व मोदक पर बिंदी लगाकर सजाएं और पेश करें।
धर्म संसार /शौर्यपथ /वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। इस बार वसंत (बसंत) पंचमी का त्योहार 16 फरवरी 2021 को है।
वाणी, लेखनी, प्रेम, सौभाग्य, विद्या, कला, सृजन, संगीत और समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली देवी मां सरस्वती से शुभ आशीष प्राप्त करने का दिन है वसंत (बसंत) पंचमी। परिणय सूत्र में बंधने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है।
सरलतम विधि
प्रात: काल सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के उपरांत मां भगवती सरस्वती की आराधना का प्रण या कहें कि संकल्प लेना चाहिए।
स्नान के बाद भगवान गणेश जी का ध्यान करना चाहिए।
स्कंद पुराण के अनुसार सफेद पुष्प, चन्दन, श्वेत वस्त्रादि से देवी सरस्वती जी की पूजा करना चाहिए।
सरस्वती जी का पूजन करते समय सबसे पहले उनका स्नान कराना चाहिए इसके पश्चात माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
इसके बाद फूल माला चढ़ाएं।
संगीत के क्षेत्र में हैं तो वाद्य यंत्रों की पूजन करें और अध्ययन से नाता है तो समस्त विद्या सामग्री कलम, किताब, नोटबुक आदि का पूजन करें।
संभव हो सके तो मोर का पंख मां सरस्वती को चढ़ाएं।
आंगन में रंगोली सजाएं।
आम्र मंजरी भी देवी को अर्पित करें।
वासंती खीर या केशरिया भात का भोग लगाएं।
स्वयं भी केशरिया, पीले, वासंती या श्वेत परिधान पहनें।
फूलों से मां सरस्वती पूजन स्थल का श्रृंगार करें।
मां शारदा की आरती, सरस्वती मंत्र आदि से आराधना करें।
पीले चावल से ॐ लिखें और उसका भी पूजन करें।
देवी सरस्वती का मंत्र : श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा
सरल प्रार्थना :
शारदा माता ईश्वरी, मैं नित सुमरि तोहे, हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोहे
मिठाई से भोग लगाकर सरस्वती कवच का पाठ करें. मां सरस्वती जी के पूजा के वक्त इस मंत्र का जाप करने से असीम पुण्य मिलता है...
मां सरस्वती का श्लोक
मां सरस्वती की आराधना करते वक्त इस श्लोक का उच्चारण करना चाहिए:-
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्दे भक्तया वन्दिता च...
वसंत पंचमी 16 फरवरी को, जानिए 12 राशियों के सरस्वती मंत्र
वसंत-पंचमी यानी मां सरस्वती के जन्मदिन पर देवी को प्रसन्न करने के लिए राशि अनुसार वंदना करें। राशि के अनुसार मंत्र जपने से मां शारदा सुख, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, यश, कीर्ति, पराक्रम, प्रतिभा और विलक्षण वाणी का आशीष प्रदान करती है। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार सरस्वती मंत्र-
मेष- ॐ वाग्देवी वागीश्वरी नम:
वृषभ- ॐ कौमुदी ज्ञानदायनी नम:
मिथुन- ॐ मां भुवनेश्वरी सरस्वत्यै नम:
कर्क- ॐ मां चन्द्रिका दैव्यै नम:
सिंह- ॐ मां कमलहास विकासिनी नम:
कन्या- ॐ मां प्रणवनाद विकासिनी नम:
तुला- ॐ मां हंससुवाहिनी नम:
वृश्चिक- ॐ शारदै दैव्यै चंद्रकांति नम:
धनु- ॐ जगती वीणावादिनी नम:
मकर- ॐ बुद्धिदात्री सुधामूर्ति नम:
कुंभ- ॐ ज्ञानप्रकाशिनी ब्रह्मचारिणी नम:
मीन- ॐ वरदायिनी मां भारती नम:
धर्म संसार /शौर्यपथ / 31 जनवरी और 1 फरवरी को संकट चौथ का शुभ व्रत है। इस दिन विशेष रूप से 7 धान को तिल के साथ मिलाकर सवा किलो का लड्डू बनाया जाता है और उसे बलि की तरह काटा जाता है...कुछ जगहों पर थाली में तिल और गुड का कोई पशु बनाकर काटा जाता है...
इसके पीछे मान्यता है कि संकट चतुर्थी की कथा में जिस प्रकार ब्राहमणी का बालक बलि देने के बाद भी श्री गणेश जीकी अनुकम्पा से सुरक्षित बचा रहा वैसे ही हमारी संतान भी हर तरह के संकट से बची रहे...और उस कथा की स्मृति में बलि की परम्परा भी बनी रहे...
इसदिन तिल के दान से 7 शुभ फल मिलते हैं...
मान-सम्मान में वृद्धि होती है।
धन का आगमन होता है।
विकट समस्याओं का समाधान प्राप्त होता है।
सुख शांति का वातावरण होता है।
यश एवं बल की शक्ति प्राप्त होती है।
संकट में रक्षा होती है।
प्रगति के अवसर मिलते हैं।
संकष्टी चतुर्थी के दिन कैसे करें पूजन, पढ़ें आसान विधि एवं मुहूर्त
संकष्टी चतुर्थी, सकट चौथ, संकट चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी, माही और तिलकुटा चौथ के नाम से जाने जाने वाली इस चतुर्थी पर श्री गणेश का पूजन किया जाता है। आइए पढ़ें पूजन विधि-
गणेश चतुर्थी की पूजन विधि :-
* श्री चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर प्रतिदिन के कर्मों से निवृ होकर स्नान करें।
* फिर एक पटिए पर लाल कपड़ा बिछाकर गणपति की स्थापना के बाद इस तरह पूजन करें-
* सबसे पहले घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा का संकल्प लें।
* फिर गणेश जी का ध्यान करने के बाद उनका आह्वान करें।
* इसके बाद गणेश को स्नान कराएं। सबसे पहले जल से, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) और पुन: शुद्ध जल से स्नान कराएं।
* गणेश के मंत्र व चालीसा और स्तोत्र आदि का वाचन करें।
* अब गणेश जी को वस्त्र चढ़ाएं। अगर वस्त्र नहीं हैं तो आप उन्हें एक नाड़ा भी अर्पित कर सकते हैं।
* इसके बाद गणपति की प्रतिमा पर सिंदूर, चंदन, फूल और फूलों की माला अर्पित करें।
* अब बप्पा को मनमोहक सुगंध वाली धूप दिखाएं।
* अब एक दूसरा दीपक जलाकर गणपति की प्रतिमा को दिखाकर हाथ धो लें।
* हाथ पोंछने के लिए नए कपड़े का इस्तेमाल करें।
* अब नैवेद्य चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक, मिठाई, गुड़ और फल शामिल करें।
* इसके बाद गणपति को नारियल और दक्षिण प्रदान करें।
* सकंष्टी/ सकट चतुर्थी की कथा श्रवण करें अथवा पढ़ें।
* अब अपने परिवार के साथ गणपति की आरती करें। गणेश जी की आरती कपूर के साथ घी में डूबी हुई एक या तीन या इससे अधिक बत्तियां बनाकर की जाती है।
* इसके बाद हाथों में फूल लेकर गणपति के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करें।
* अब गणपति की परिक्रमा करें। ध्यान रहे कि गणपति की परिक्रमा एक बार ही की जाती है।
* इसके बाद गणपति से किसी भी तरह की भूल-चूक के लिए माफी मांगें।
* पूजा के अंत में साष्टांग प्रणाम करें।
* रात को चंद्रमा की पूजा और दर्शन करने के बाद व्रत खोलना चाहिए। {इस चतुर्थी पर चंद्रोदय रात्रि 08 बजकर 27 मिनट पर होगा।}
भविष्य पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत करने से हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। गणेश पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से सौभाग्य, समृद्धि और संतान सुख मिलता है। शाम को चंद्रमा निकलने से पहले गणपति जी की एक बार और पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का फिर से पाठ करें। अब व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय और पूजन का मुहूर्त :-
चतुर्थी तिथि 31 जनवरी 2021 को रात्रि 08.24 मिनट से आरंभ होगी और इस तिथि का समापन 1 फरवरी 2021 को शाम 06.24 मिनट पर होगा।
इस दिन चंद्रोदय का समय रात्रि 08.27 मिनट है।
आज इस मंत्र के जाप से प्रसन्न होंगे श्री गणेश, चढ़ाएं यह प्रसाद
प्रतिमाह कृष्ण पक्ष में श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश को अपनी राशिनुसार प्रसाद चढ़ाने से समस्त कष्ट दूर होकर जीवन अपार खुशियों से भर जाता है। आइए जानें संकष्टी चतुर्थी के दिन कौन-सा मंत्र जपें और क्या चढ़ाएं प्रसाद...
मेष : ॐ वक्रतुण्डाय हुं।
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
वृष- ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं।
प्रसाद : मिश्री, शक्कर, नारियल से बने लड्डू।
मिथुन-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतेय वर वरद् सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा।
प्रसाद : मूंग के लड्डू, हरे फल।
कर्क- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : मोदक के लड्डू, मक्खन, खीर।
सिंह-ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतेय वरवरदं सर्वजनं में वशमानयं स्वाहा।
प्रसाद : गुड़ से बने मोदक के लड्डू व लाल फल।
कन्या- ॐ गं गणपतयै नमः या ॐ श्रीं श्रियैः नमः॥
प्रसाद : हरे फल, मूंग की दाल के लड्डू व किशमिश।
तुला- ॐ ह्रीं, ग्रीं, ह्रीं गजाननाय नम:।
प्रसाद : मिश्री, लड्डू और केला।
वृश्चिक- ॐ वक्रतुण्डाय हुं॥
प्रसाद : छुआरा और गु़ड़ के लड्डू।
धनु- हुं गं ग्लौं हरिद्रागणपतयै वरवरद दुष्ट जनहृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा॥
प्रसाद : मोदक व केला।
मकर- ॐ लंबोदराय नमः
प्रसाद : मोदक के लड्डू, किशमिश, लड्डू।
कुंभ- ॐ सर्वेश्वराय नमः
प्रसाद : गुड़ लड्डू व मौसमी फल।
मीन- ॐ सिद्धि विनायकाय नमः
प्रसाद : बेसन के लड्डू, केला, बादाम।
उपरोक्त मंत्र जाप के द्वारा और श्री गणेश को अपनी राशिनुसार भोग लगाने से आप जीवन में संपन्नता पा सकते हैं।
खाना खजाना /शौर्यपथ /बेसन का हलवा ऐसी रेसिपी है जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है बल्कि सेहत के लिए लिहाज से भी यह काफी गुणकारी होता है। वहीं इसे बनाना भी बेहद आसान है।आइए, जानते हैं इसकी रेसिपी-
सामग्री :
बेसन - 1 छोटा बाउल घी - 1/2 छोटा बाउल चीनी - 1 छोटा बाउल पानी - 21/2 छोटा बाउल इलायची - 2-3 कटे हुए काजू - 1 टी स्पून किशमिश गार्निशिंग के लिए
विधि : सबसे पहले एक पैन में बेसन को हल्का भूरा होने तक भूनें। अब इसमें घी और चीनी मिलाकर अच्छे से हिलाएं। अब पानी डालकर अच्छे से मिक्स करें।
उबाली आने दे, एक बार यह मिक्सचर गाढ़ होने लगे तो लगातार हिलाते रहें।
पैन को गैस से उतार कर ठंडा होने दें।
इसी बीच इलायची को कूट लें।
अब इसे हलवे पर बुरके।
काजू और किशमिश से गार्निश करें।
सेहत /शौर्यपथ /ऐसे कई फूड है जिन्हें एक पूरी रात भिगोकर रखने के बाद, अगले दिन खाना अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद होता है। क्योंकि अंकुरित होने के बाद उनकी नुट्रिशन वैल्यू बढ़ जाती है, साथ ही ये आसानी से पच जाते है जो सेहत के लिए अच्छा है। हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही 8 चीजों के बारे में जिन्हें रातभर भिगोकर खाना आपकी इम्यूनिटी को मजबूत करने में सहायक होगा -
1 मेथीदाना -इनमें फाइबर्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो कब्ज को दूर कर आंतों को साफ रखने में मदद करते हैं। डायबिटीज के रोगियों के लिए भी मेथीदाने फायदेमंद हैं। साथ ही इनका सेवन महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता हैं।
2 खसखस -ये फोलेट, थियामिन और पैंटोथेनिक एसिड का अच्छा सोर्स होता हैं। इसमें मौजूद विटामिन बी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है जिससे वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
3 अलसी -अलसी या फ्लैक्स सीड्स ओमेगा-3 फैटी एसिड का एकमात्र शाकाहारी सोर्स माना जाता हैं। अलसी का सेवन बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाकर हमारे दिल को भी हेल्दी रखता हैं।
4 मुनक्का -इसमें मैग्नीशियम, पोटेशियम और आयरन काफी मात्रा में होते हैं। मुनक्के का नियमित सेवन कैंसर कोशिकाओं में बढ़ोतरी को रोकता है। इससे हमारी स्किन भी हेल्दी और चमकदार रहती है। एनीमिया और किडनी स्टोन के मरीजों के लिए भी मुनक्का फायदेमंद है।
5 खड़े मूंग -इनमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी भरपूर मात्रा में होता है। इनका नियमित सेवन कब्ज दूर करने में बहुत फायदेमंद होता है। इसमें पोटेशियम और मैग्नेशियम भी भरपूर मात्रा में होने की वजह से डॉक्टरस हाई बीपी के मरीजों को इसे रेगुलर खाने की सलाह देते है।
6 काले चने -इनमें फाइबर्स और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती हैं जो कब्ज दूर करने में सहायक होते है।
7 बादाम -इसमें मैग्नीशियम होता है जो हाई बीपी के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित रूप से भीगी हुई बादाम खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है।
8 किशमिश -किशमिश में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं। भीगी हुई किशमिश को नियमित रूप से खाने से स्किन हेल्दी और चमकदार बनती है। साथ ही शरीर में आयरन की कमी भी दूर होती है।
धर्म संसार /शौर्यपथ / कलिकाल में हनुमानजी की भक्ति ही कही गई है। हनुमानजी की निरंतर भक्ति करने से भूत पिशाच, शनि और ग्रह बाधा, रोग और शोक, कोर्ट-कचहरी-जेल बंधन से मुक्ति, मारण-सम्मोहन-उच्चाटन, घटना-दुर्घटना से बचना, मंगल दोष, कर्ज से मुक्ति, बेरोजगार और तनाव या चिंता से मुक्ति मिल जाती है। विशेष दिन और विशेष समय पर हनुमानजी की पूजा, साधना या आराधना करने से वे तुरंत ही प्रसन्न होते हैं।
1. शनिवार को हनुमानजी का सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा पाठ करने से शनि भगवान आपको लाभ देने लगेंगे। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को आटे के दीपक लगाएं।
2. मंगलवार को हनुमान पूजा, आराधान या हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी तरह के संकट दूर होकर मंगल दोष भी मिट जाता है। किसी भी मांगलिक कार्य कि सिद्ध के लिए या कर्ज से मुक्ति के लिए मंगलवार को उनकी आराधना करना चाहिए।
3. मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन व्रत करने से और इसी दिन हनुमान-पाठ, जप, अनुष्ठान आदि प्रारंभ करने से त्वरित फल प्राप्त होता है।
4. हनुमान जयंती के दिन विशेष आराधना करना चाहिए। पहली चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को और दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जयंती मनाई जाती है। दोनों ही दिन सर्वश्रेष्ठ है। पहली चैत्र माह की तिथि को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में जबकि दूसरी तिथि को जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। हली तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमानजी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया। इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी, जबकि दूसरी तिथि के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को उनका जन्म हुआ हुआ था। अत: इस दिन हनुमान पूजा करने से सभी तरह का संकट टल जाता है और निर्भिकता का जन्म होता है।
5. उपरोक्त के अलावा हनुमानजी की पूजा पूर्णिमा और अमावस्या को भी विशेष रूप से की जाती है। इस दिन की गई पूजा हर तरह के भय, चंद्रदोष, देवदोष, मानसिक अशांति, भूत-पिशाच और सभी तरह की घटना-दुर्घटना से बचाती है।
आस्था /शौर्यपथ / प्राचीनकाल से ही जप करना भारतीय पूजा-उपासना पद्धति का एक अभिन्न अंग रहा है। जप के लिए माला की जरूरत होती है, जो रुद्राक्ष, तुलसी, वैजयंती, स्फटिक, मोतियों या नगों से बनी हो सकती है। इनमें से रुद्राक्ष की माला को जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति के अलावा विद्युतीय और चुंबकीय शक्ति भी पाई जाती है।
अंगिरा स्मृति में माला का महत्त्व इस प्रकार बताया गया है-
विना दमैश्चयकृत्यं सच्चदानं विनोदकम्।
असंख्यता तु यजप्तं तत्सर्व निष्फल भवेत्।।
अर्थात बिना कुश के अनुष्ठान, बिना माला के संख्याहीन जप निष्फल होता है। माला में 108 ही दाने क्यों होते हैं, उस विषय में योगचूड़ामणि उपनिषद में कहा गया है-
पद्शतानि दिवारात्रि सहस्त्राण्येकं विंशति।
एतत् संख्यान्तिंत मंत्र जीवो जपति सर्वदा।।
हमारी सांसों की संख्या के आधार पर 108 दानों की माला स्वीकृत की गई है। 24 घंटों में एक व्यक्ति 21,600 बार सांस लेता है। चूंकि 12 घंटे दिनचर्या में निकल जाते हैं, तो शेष 12 घंटे देव-आराधना के लिए बचते हैं अर्थात 10,800 सांसों का उपयोग अपने ईष्टदेव को स्मरण करने में व्यतीत करना चाहिए, लेकिन इतना समय देना हर किसी के लिए संभव नहीं होता इसलिए इस संख्या में से अंतिम 2 शून्य हटाकर शेष 108 सांस में ही प्रभु-स्मरण की मान्यता प्रदान की गई।
दूसरी मान्यता भारतीय ऋषियों की कुल 27 नक्षत्रों की खोज पर आधारित है। चूंकि प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं अत: इनके गुणफल की संख्या 108 आती है, जो परम पवित्र मानी जाती है। इसमें श्री लगाकर ‘श्री 108’ हिन्दू धर्म में धर्माचार्यों, जगद्गुरुओं के नाम के आगे लगाना अति सम्मान प्रदान करने का सूचक माना जाता है।
माला के 108 दानों से यह पता चल जाता है कि जप कितनी संख्या में हुआ। दूसरे माला के ऊपरी भाग में एक बड़ा दाना होता है जिसे 'सुमेरु' कहते हैं। इसका विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि माला की गिनती सुमेरु से शुरू कर माला समाप्ति पर इसे उलटकर फिर शुरू से 108 का चक्र प्रारंभ किया जाने का विधान बनाया गया है इसलिए सुमेरु को लांघा नहीं जाता।
एक बार माला जब पूर्ण हो जाती है तो अपने ईष्टदेव का स्मरण करते हुए सुमेरु को मस्तक से स्पर्श किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड में सुमेरु की स्थिति सर्वोच्च होती है।
माला में दानों की संख्या के महत्व पर शिवपुराण में कहा गया है-
अष्टोत्तरशतं माला तत्र स्यावृत्तमोत्तमम्।
शतसंख्योत्तमा माला पञ्चाशद् मध्यमा।।
अर्थात 108 दानों की माला सर्वश्रेष्ठ, 100-100 की श्रेष्ठ तथा 50 दानों की मध्यम होती है।
शिवपुराण में ही इसके पूर्व श्लोक 28 में माला जप करने के संबंध में बताया गया है कि अंगूठे से जप करें तो मोक्ष, तर्जनी से शत्रुनाश, मध्यमा से धन प्राप्ति और अनामिका से शांति मिलती है।
तीसरी मान्यता ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समस्त ब्रह्मांड को 12 भागों में बांटने पर आधारित है। इन 12 भागों को ‘राशि’ की संख्या दी गई है। हमारे शास्त्रों में प्रमुख रूप से 9 ग्रह (नवग्रह) माने जाते हैं। इस तरह 12 राशियों और 9 ग्रहों का गुणनफल 108 आता है। यह संख्या संपूर्ण विश्व का प्रतिनिधित्व करने वाली सिद्ध हुई है।
चौथी मान्यता सूर्य पर आधारित है। 1 वर्ष में सूर्य 21,600 (2 लाख 12 हजार) कलाएं बदलता है। चूंकि सूर्य हर 6 महीने में उत्तरायण और दक्षिणायन रहता है, तो इस प्रकार 6 महीने में सूर्य की कुल कलाएं 1,08,000 (1 लाख 8 हजार) होती हैं। अंतिम 3 शून्य हटाने पर 108 अंकों की संख्या मिलती है इसलिए माला जप में 108 दाने सूर्य की 1-1 कलाओं के प्रतीक हैं।
धर्म संसार / शौर्यपथ / जिसे लगाता है कि उसको शनि या अन्य किसी ग्रह की बाधा है, साढ़े साती, अढ़ाय्या या राहु की महादशा चल रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं। जिन पर हनुमानजी की कृपा होती है, उसका शनि और यमराज भी बाल बांका नहीं कर सकते। आप प्रति मंगलवार हनुमान मंदिर जाएं और शराब व मांस के सेवन से दूर रहें। इसके अलावा शनिवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा पाठ करने से शनि भगवान आपको लाभ देने लगेंगे। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को आटे के दीपक लगाएं। अब जाने की क्या कारण है कि हनुमान भक्त और हनुमानजी की ओर शनिदेव देखते भी नहीं है।
1. एक बार रामजप में बाधा डालने के बारण शनिदेव को हनुमानजी ने अपनी पूंछ में लपेट लिया था और अपना रामकार्य करने लग गए थे। इस दौरान शनिदेव को कई चोटे आई। बाद में जब हनुमानजी को याद आया तो उन्होंने शनिदेव को मुक्त किया। तब शनिदेव को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने कहा कि आज के बाद में रामकार्य और आपके भक्तों भक्तों के कार्य में कोई बाधा नहीं डालूंगा।
2. एक बार हनुनामजनी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब शनि भगवान ने वचन दिया था कि मैं आपके किसी भी भक्त पर अपनी कृपा बनाए रखूंगा।
3. पराशर संहिता में हनुमानजी की शादी का उल्लेख है। माना जाता है कि हनुमानजी का सांकेतिक विवाह सूर्य की पुत्री सुवर्चला से हुआ था। आंध्रप्रदेश के खम्मम में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है जहां हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी की भी मूर्ति विराजमान है। शास्त्रों में शनि महाराज को सूर्य का पुत्र बताया गया है। इस नाते हनुमान जी की पत्नी सुवर्चला शनि महाराज की बहन हुई। और सबके संकट दूर करने वाले हनुमान जी भाग्य के देवता शनि महाराज के बहनोई हुए।
चंद्रमा को हनुमानजी ने शनि से बचाया था तो वे चंद्रशेखर कहलाए थे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
