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दुर्ग / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह जानकारी दिया कि छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के द्वार उच्च न्यायालय के 1040/2020 दिनांक 9 जुलाई 2020 का गलतढंग से परिभाषित कर तिथि निर्धारित कर बच्चों को ऑनलाईन क्लासेस से वंचित कर देने की धमकी देकर दबावपूर्वक फीस वसूलने का प्रयास किया जा रहा है। कई बड़े दैनिक अखबारों में 6 सिंतबर 2020 को विज्ञप्ति जारी कर 9 सिंतबर तक फीस जमा कर देने और फीस नहीं जमा करने की स्थिति में ऑनलाईन क्लासेस से वंचित करने की बात प्रकाशित किया गया है, जो उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय दिनांक 9 जुलाई 2020 और नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 का स्पष्ट उल्लघंन है।
श्री पॉल का कहना छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के इस प्रकार की धमकी-चमकी से जिले में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, जिसको लेकर दिनांक 7 सिंतबर को एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल डीईओ कार्यालय पहुंचा था, लेकिन डीईओ कार्यालय में नहीं मिले तो प्रतिनिधि मंडल ने बाल आयोग पहुंचकर छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पुलिस अधिक्षक को निर्देशित करने की मांग की गई और फिर प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस अधिक्षक को भी छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसियेशन, रायपुर के अध्यक्ष और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग किया गया।
एसोसियेशन के रायपुर जिला सचिव पनेश त्रिवेदी ने बताया कि मा. उच्च न्यायालय बिलासपुर के निर्णय 1040/2020 दिनांक 9 जुलाई 2020 में यह उल्लेख नहीं है कि यदि पालक ट्यूशन फीस जमा नहीं करता है तो उसके बच्चे को ऑनलाईन क्लासेस से वंचित कर दिया जाएगा। एसोसियेशन के रायपुर जिला अध्यक्ष उमेश साहू का कहना है कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, कोई भी प्रायवेट स्कूल किसी भी प्रवेशित बच्चे को किसी भी परिस्थिति में शिक्षा से वंचित नहीं कर सकता है। यदि कोई भी प्रायवेट स्कूल बच्चों को किसी भी प्रकार से जान-बुझकर प्रताडि़त करता है, जान-बुझकर अनावश्यक मानसिक कष्ट देता है, किसी प्रकार से जान-बुझकर उसकी उपेक्षा करता है तो यह किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 (अधिनियम क्रमांक 2 सन् 2016) की धारा 75 और 86 के अंतर्गत गंभीर प्रवृति का अपराध है।
दुर्ग । शौर्यपथ । एनएसयूआई के जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष सोनू साहू ने माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छ:ग में स्कूल फीस नियामक आयोग बनाए जाने पर आभार व्यक्त किया में जिसकी पूर्णकालिक सरकार बीजेपी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था यहां तक कि स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि निजी स्कूल हमारे नियत्रन में नहीं है दिल्ली में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवम् मानव संसाधन मंत्री को भी सिबिएसई स्कूलों की फीस तय करने ग्रेडिंग करने ज्ञापन दिया गया था।जिस पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को नियामक आयोग गठन एवं सिबिएसई स्कूलों की ग्रेडिंग करने आदेश में तब्दील कर निजी स्कूल को संरक्षण दिया फीस विनियामक समिति का गठन पूर्व भाजपा सरकार व उसके सभी शिक्षा मंत्री के मुंह में करारा तमाचा है। जिन्होंने पुर 10 साल पलको के शोसान व उत्पीड़न की अनदेखी और बढ़ावा दिया है। कांग्रेस ने समस्या को गंभीरता पूर्वक लिया और अपने घोषणा पत्र में शामिल किया और प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी एक साल में ही वादा पुर किया फीस विनियामक समिति बनाकर पालकों को बहुत बड़ी राहत दी है। भिलाई विधानसभा के विधायक को श्री देवेन्द्र यादव जी ने फीस विनियामक आयोग बनने के लिए समर्थन देते हुए अपने छात्र जीवन में एनएसयूआई की ओर से पूर्व के भाजपा सरकार को समिति गठित करने के लिए सड़कों की लड़ाई लड़े और आज जब फीस विनियामक आयोग का समिति का गठन होने जा रहा है उसमे विधानसभा में वह एक सदस्य के रूप में सरकार के अहम हिस्से में सामिल है जिस पर सदन के और भी विधायकों ने श्री यादव का बात सुनकर गदगद हो गए इस प्रदेश में फीस विनियामक बनने से प्रदेश के स्कूल पल संघ और राज्य की आम जनता राहत महसूस कर रहे है जिससे अब प्रबन्धक एवम् संचालकों के उपर नकेल कसना शुरू हो गया है।यह सभी छात्र संगठन और पालकों के लिए बड़ी जीत है खास कर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI की ओर से राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेमसाय सिंग जी का बहुत- बहुत धन्यवाद आप ने जन हित और छात्र हित में एक सार्थक निर्णय लिए है
0 ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित करने की मिल रही है धमकी पालक संघ ने की अपराध दर्ज करने की मांग
0 पालकों को देख प्राचार्य ने स्कूल में लगवाया ताला
0 बच्चों का पिछले साल का रिजल्ट रोका प्रबन्धन ने
दुर्ग / शौर्यपथ / फीस के मामले को लेकर आज राजधानी में छत्तीसगढ़ छात्र पालक संघ के नेतृत्व में सैकड़ो पालकों ने बाल संरक्षण आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवाकर कार्यवाही की मांग की। इस मौके पर आयोग अध्यक्ष प्रभा दुबे ने पालक संघ को कार्रवाई का आश्वासन दिया। इससे पूर्व पालकों ने एक स्कूल में जाकर फीस को लेकर दी जा रही धमकी का विरोध किया। यहां पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
कोरोना काल मे स्कूल फीस को लेकर पालकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्कूल संचालकों के अल्टीमेटम के बाद तो पालक और भी गुस्साए हुए हैं। अनेक स्कूलों में तो बच्चों के अभिभावकों को मैसेज भेजकर फीस नहीं जमा करने पर टी सी देने तक की चेतावनी दी जा रही है। इससे गुस्साए लोग सबसे पहले जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर के कार्यालय पहुंचे, मगर वे नहीं मिले। अपनी रणनीति के तहत सभी अभिभावक छात्र-पालक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नज़रुल खान की अगुवाई में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कार्यालय भी गए। यहां अध्यक्ष प्रभा दुबे को ज्ञापन सौंपते हुए पालकों ने बताया कि स्कूल संचालकों ने अखबारों और न्यूज़ पोर्टल में विज्ञापन छपवा कर फीस पटाने के लिए दबाव बनाया, साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि अगर फीस नहीं जमा किया तो उनके बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद की जा सकती है। इसके अलावा प्रबंधक किसी को टी सी देने की धमकी दे रहे हैं तो किसी को बच्चों का रिजल्ट रोकने के लिए कह रहे हैं।
बाल आयोग अध्यक्ष ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही है, साथ ही उन्होंने पालकों से यह भी कहा कि वे शिक्षा का अधिकार कानून के तहत अपनी शिकायत व्यक्तिगत रूप से पुलिस के समक्ष रखें, और अगर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रकरण की शिकायत प्रशासन के साथ ही बाल आयोग के पास प्रस्तुत करें।
रिजल्ट रोका स्कूल प्रबंधन ने, ऑनलाइन पढ़ाई से भी किया वंचित
इससे पूर्व अभिभावक शैलेंद्र नगर स्थित होलीक्रास प्राइमरी स्कूल भी गए। यहां के पालकों की शिकायत थी कि स्कूल प्रबंधन ने अब तक बच्चों का पिछले साल का रिजल्ट नहीं दिया है। वहीं फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को स्कूल से बाहर निकालने की धमकी दी जा रही है। यहां पालकों की भीड़ को देखते हुए प्राचार्य ने गेट पर ताला लगवा दिया और पुलिस को सूचना देकर बुलवा लिया। यहां पहुंचे टी आई विनय दुबे ने मामले को समझा और प्राचार्य को चर्चा के लिए बुलाया, मगर प्राचार्य ने खुद को कॉरेन्टीन बताते हुए शिक्षकों को चर्चा के लिए भेज दिया। इस दौरान छात्र-पालक संघ के अध्यक्ष नजरुल खान ने फीस के लिए दबाव बनाने पर विरोध जाताया और कहा कि प्रबंधन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अधिसूचित फीस दिखाए तभी पालक फीस जमा करेंगे। रिजल्ट को लेकर शिक्षकों ने सफाई दी कि परीक्षा के बाद कोरोना की महामारी आ जाने के चलते प्रबंधन ने रिजल्ट जारी नहीं किया। फिलहाल बच्चों को उनके व्हाट्सएप पर रिजल्ट भेजने की बात कही गई है। प्रबंधन ने इस बात के लिए भी आश्वस्त किया है कि किसी भी बच्चे की ऑनलाइन पढ़ाई रोकी नहीं जाएगी। यहां पुलिस ने पालकों और शिक्षकों के बीच मध्यस्थता करके प्रबन्धन को चर्चा के लिए 24 घंटे का समय दिया है।
दुर्ग / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के एप की लॉन्चिंग की। इस अवसर पर उन्होंने पाटन के ग्राम सिकोला के ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले सरपंच श्रीमती उषा निषाद से गौठान की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही गोबर खरीदी की व्यवस्था की जानकारी भी ली। सरपंच ने बताया कि गोबर खरीदी बहुत अच्छी हो रही है गोधन न्याय योजना से लोगों में काफी उत्साह का वातावरण है। लोग इससे काफी लाभ कमा रहे हैं। ग्रामीण इससे काफी खुश हैं अब इसके दूसरे चरण में वर्मी कंपोस्ट से भी आय होगी। मुख्यमंत्री ने उप सरपंच पुरुषोत्तम यादव से गांव के चारागाह बाड़ी आदि के बारे में जानकारी ली। श्री यादव ने बताया कि नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के माध्यम से हम लोग अपने गांव को संवार रहे हैं। बाड़ी का विकास कर रहे हैं। बाड़ी के माध्यम से सब्जियां उगा रहे हैं जिससे हमारे बच्चों को भी पर्याप्त पोषण मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने पशु पालकों से भी चर्चा की। पशुपालक श्रीमती कविता ने बताया कि वह 35 क्विंटल गोबर बेच चुकी है जिससे उन्हें 7000 रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है। गोधन न्याय योजना पशु पालकों के लिए बहुत अच्छी है। साथ ही इससे जैविक खेती करने के लिए भी रास्ता मिलेगा। ग्रामीणों को वर्मी कंपोस्ट से भी आय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर गौठान अध्यक्ष श्री गोकरण यादव से भी बातचीत की। श्री यादव ने बताया कि गांव में हम लोगों ने दो चरवाहे रखे हैं । एक चरवाहा समिति की ओर से रखा है और एक चरवाहा गांव की ओर से रखा गया है जो आवारा पशुओं की भी देखभाल करता है। मुख्यमंत्री ने ग्राम सचिव श्री बिहारी लाल साहू से कहा कि ऐप के बारे में प्रचार प्रसार करें साथ ही गोधन योजना के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार करें ताकि ग्रामीणों को इस महत्वपूर्ण योजना के माध्यम से आर्थिक लाभ हासिल हो सके। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने इस मौके पर ग्रामीणों से गांव की समस्या एवं गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी भी ली तथा उन्हें सामूहिक रूप से काम कर इस योजना का लाभ उठाने की अपील भी की। जिला पंचायत सीइओ एस. आलोक ने बताया कि जिले की 216 गौठान में नोडल अधिकारी नियुक्ति किए गए है। जो शासन की महत्वकांक्षी योजना एनजीजीबी के तहत बनाए गए गौठान में सतत् गतिविधियां एवं गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन निरीक्षण करेंगे।
गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं के द्वारा बेचे गए गोबर का खरीदी विक्रय का विवरण रखने के लिए एप तैयार किया गया जिसके माध्यम पंजीकृत हितग्राही अपने सभी विवरण इसमें देख सकेगे । इस संबंध में नोडल अधिकारियों को एप से संबंधित जानकार को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक ने बताया कि गोबर खरीदी के लिए शासन के द्वारा चिप्स के माध्यम से एप तैयार कराया गया है। जिले में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंन्द्र भुरे के मार्ग दर्शन में गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। एस. आलोक बताया कि अब एप के माध्यम से गोधन न्याय योजना का संचालन किया जाएगा। जिस तरह से धान खरीदी में किसानों का पंजीयन किया जाता है। उसी तरह गोधन न्याय योजना में गोबर विक्रता का पंजीयन कृषि सहकारी समिति द्वारा किया जाना है। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है क्योकि गोबर खरीदी के समय विक्रताओं की जानकारी भरने की आवश्यकता न रहे। केवल क्रय किए गए गोबर की मात्रा ही भरना पड़े। उन्होंने बताया कि जिन हितग्राहियों ने गोबर की विक्रय किया है। उनकी जानकारी एनआईसी में एकत्रित हो गई है। उनका पंजीयन दुबारा करने आवश्यक नही होगा। सिर्फ जिन्होने अब तक गोबर नहीं बेचा है, उनका ही पंजीयन कराये जाने को कहा है। उन्होने गौठान नोडल अधिकारियों को अभियान चलाकर शेष सभी गोबर विके्रता का पंजीयन कराने कहा है। एप के संबंध में सभी नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके बाद भी अगर कही पर भी कोई कठिनाई आती है, तो जिलास्तरिय अधिकारी या फिर चिप्स के हेल्पलाईन नम्बर पर कॉल करके समस्या का समाधन कर सकते है। उन्होने कहा कि इस एप को सहायता से पंजीकृत हिजग्राही अपने पंजीयन की जानकारी जैसे व्यक्तिगत विवरण, बैक विवरण एवं संबंधित गौठान का नाम देख पाएगें। इसमें हितग्राही द्वारा बेचे गए गोबर की तिथिवार जानकारी एवं विक्रय से प्राप्त राशि को जानकारी आसानी से देख सकेगें।
शौर्यपथ / किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए व्यवहार प्रमुख आधार होता है। कद-काठी या रंग-रूप का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन एक हालिया अध्ययन की मानें तो थोड़ी मोटी काया वाले पुरुष बेहतर पिता साबित होते हैं। उन्हें बेहतर अभिभावकीय क्षमता वाला आंका जाता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक अभिभावक के तौर ऐसे पुरुष बच्चों से दुबली कद-काठी वाले पिताओं की तुलना में बेहतर रूप से पेश आते हैं। वहीं अध्ययन में गठीले बदन वाले पिताओं की अभिभावकीय क्षमताओं को नकारात्मक तौर पर आंका गया। द टाइम्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक लोग पुरुषों की अभिभावकीय क्षमताओं का आकलन उनके शरीर के अनुसार करते हैं।
प्रतिभागियों को दिखाई तस्वीरें -
-अध्ययन में शामिल 800 से अधिक प्रतिभागियों को दुबले, सामान्य, थोड़े मोटे और अधिक वजन वाले पुरुषों की तस्वीरें दिखाई गईं। फिर उनसे इसके आधार पर बेहतर पिता की छवि के बारे में पूछा गया। दुबली काया वाले पुरुषों को लेकर प्रतिभागियों ने उनके अभिभावक वाले गुणों को नकारात्मक आंका। वहीं, थोड़े ज्यादा वजन वाले पिताओं को बेहतर पिता माना।
बच्चों पर विचार नहीं थोपते-
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न मिसिसिपी के शोधकर्ताओं ने बताया कि ज्यादा वजन वाले पिताओं को लेकर हम मानते हैं कि वह बच्चों पर जल्दी अपने विचार नहीं थोपते हैं। इसलिए बच्चों से उनके रिश्ते कीफी मजबू होते हैं। लोग अक्सर इसकी मिसालें भी दिया करते हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी कहा गया कि बहुत अधिक वजन होना भी ठीक नहीं। इससे भी पिता के तौर पर नकारात्मक छवि ही बनती है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / भिंडी की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी लेकिन इसका अचार भी खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है। खास बात यह है कि इसे पकने में सिर्फ 5 मिनट का ही समय लगता है और यह अचार बाकी अचारों के मुकाबले थोड़ा हेल्दी होता है। तो अगली बार जब कभी आपके घर लंच या डिनर पर कोई मेहमान आएं तो उन्हें भी खाने के साथ जरूर परोसे यह टेस्टी अचार।
भिंडी का अचार बनाने के लिए सामग्री-
-250 ग्राम भिंडी
-2 चम्मच मेथी दाना
-1 चम्मच हल्दी पाउडर
-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
-2 चम्मच सरसों पाउडर
-2 चम्मच रोस्टेड तिल
-10-12 करी पत्ते
-चुटकी भर हींग
-1 कप नींबू का रस
-नमक स्वादानुसार
-2 छोटे चम्मच तेल
भिंडी का अचार बनाने का तरीका-
भिंडी का अचार बनाने के लिए सबसे पहले भिंडी को धोकर सुखा लें। भिंडी सुखाने के बाद उसे बीच से चीरा लगाकर काट लें। अब एक कटोरी में लाल मिर्च पाउडर, नमक, हल्दी पाउडर, सरसों पाउडर, हींग और दो चम्मच नींबू का रस एक साथ मिलाएं।अब इस मसाले को भिंडी में भर लें।
एक पैन में तेल गर्म करके उसमें करी पत्ते डालने के बाद भिंडी भी डालकर भून लें। भिंडी को ज्यादा नहीं भूनना है वरना भिंडी का मसाला जलने लगेगा। गैस बंद करके बचा हुआ नींबू का रस और भुने हुए तिल को भी इसमें अच्छे से मिलाएं।
आपका टेस्टी इंस्टेंट भिंडी का अचार बनकर तैयार है। आप इसे तुरंत ही खा सकते हैं, अगर आप इस अचार को 3-4 दिन के लिए स्टोर करना चाहते हैं तो उसके लिए एयर टाइट कंटेनर का ही इस्तेमाल करें।
धर्म संसार / शौर्यपथ / विकटासुर पुतले से पैदा किए अपने असुर अचंभासुर को भानामति और प्रद्युम्न का वध करने के लिए गंधमादन पर्वत पर भेजता है। उधर भानामति से मायावी विद्या सिखने के बाद प्रद्युम्न दक्षिणा देने के बाद करते हो तो भानामति कहती है कि तुम मुझे गुरु दक्षिणा देना चाहते हो ना? तब प्रद्युम्न कहता है- हां गुरुदेव। फिर भानामति कहती है- तो उठो वत्स और देखो आसमान में संभुरासुर का भेजा हुआ राक्षस हमें ढूंढता हुआ आ रहा है। तुम मेरी दी हुई शिक्षा से उस राक्षस का वध कर दो यही मेरी गुरु दक्षिणा होगी। तभी वह राक्षस अचंभासुर जिसे विकटासुर ने भेजा था उन दोनों को देख लेता है।
अचंभासुर उन्हें देखकर कहता है- अच्छा तो तुम यहां हो। अब मैं तुम्हें असुरेश्वर के पास ले जाऊंगा। यह देखकर प्रद्युम्न अपनी माया से एक धनुष और बाण प्राप्त करता है और फिर उसे बाण मारने का प्रयास करता है तो वह असुर अपनी माया से अदृश्य होकर जोर-जोर से हंसने लगता है। वह असुर भी अदृश्य होकर अस्त्र-शस्त्र चलाता है। अंत में भानामति कहती है कि किसी मायावी से मायावी युद्ध ही करना चाहिए तुम उसकी माया नष्ट कर दो। फिर वह तुम्हारे सामने आ जाएगा। फिर जैसे ही वह दिखाई देने लगता है तो भानामति कहती है- अब समय मत गवांओ और इसी समय इसका वध कर दो वर्ना संभरासुर के कई मायावी यहां आ जाएंगे।
तब प्रद्युम्न अपने तीर से अचंभासुर का एक हाथ काट देता है परंतु वह फिर जुड़ जाता है। फिर वह गर्दन काट देता है तो गर्दन भी फिर से जुड़ जाती है। फिर तलवार से दो टूकड़े कर देता है तो वह असुर कहता है कि मैंने कहा था न कि मेरा कोई वध नहीं कर सकता। मुझे कोई मिटा नहीं सकता। यह कहकर वह दानव अदृश्य हो जाता है तो भानामति घबराकर श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती है कि हे प्रभु! इस संकट में मेरे प्रद्युम्न की रक्षा करो।
तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि भानामति विकटासुर ने अचंभासुर का निर्माण किया है। उसने एक मिट्टी की मूरत बनाकर उस मूरत से अचंभासुर के प्राणों की स्थापना की है। तुम्हें उस मूर्ति को नष्ट करना होगा। जिस पल तुम उस मूर्ति को नष्ट कर दोगी उसी पल प्रद्युम्न अचंभासुर का वध करने में सफल हो जाएगा। यह सुनकर भानामति अपने सूक्ष्म शरीर से वहां से चली जाती है और इधर प्रद्युम्न अचंभासुर से लड़ता और बचता रहता है।
उधर, भानामति विकटासुर के द्वारा स्थापित पुतले को ढूंढते हुए उसके पास पहुंच जाती है और फिर अपनी माया से उस पुतले को नष्ट कर देती है। जैसे ही वह पुतला नष्ट होता है उधर प्रद्युम्न भी अचंभासुर का वध कर देता है। फिर भानामति पुन: अपने स्थान पर लौट आती है। जब यह घटना विकटासुर को पता चलती है तो वह कहता है- भानामति मैं तुमसे बदला लूंगा। मैं किसी भी प्रकार तुम्हारा वध करूंगा। ऐसा कहकर विकटासुर भी गंधमादन पर्वत की ओर उड़ चलता है।
उधर, भानमति कहती है कि इन आयुधों को देखकर लगता है कि तुम्हें विकटासुर का विस्मरण हो गया है। यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है- नहीं माताश्री। तब वह कहती है कि तो फिर तुमने इन आयुधों को नीचे क्यों रख दिया है? अभी तक तो युद्ध का प्रारंभ ही नहीं हुआ पुत्र प्रद्युम्न और तुमने इन आयुधों को नीचे रख दिया। तुमने जिस अचंभासुर का वध किया था उसका निर्माण विकटासुर ने किया था और वह बदला लेने यहां अवश्य ही आएगा। इसके बाद तो तुम्हें हर पल सावधान रहना चाहिए। अचंभासुर की तरह विकटासुर का भी वध कर दिया तो समझ लो कि युद्ध प्रारंभ होने के पहले ही संभरासुर का आत्मविश्वास डगमगा गया।..
यह सारी बातें विकटासुर सुन लेता है और अपनी माया से एक सुंदर हिरण बनाकर उस उपवन में छोड़ देता है। उसे देखकर भानामति और प्रद्युम्न दोनों ही प्रफुल्लित हो जाते हैं। तब प्रद्युम्न उस हिरण को अपने तीर से मार देता है तो भानामति कहती है कि ठहरों इसे मैं लेकर आती हूं। जब मायावती वहां से चली जाती है तो विकटासुर अपनी माया से भानामति बनकर हाथ में मृत हिरण लेकर प्रद्युम्न के पास पहुंच जाता है। तब प्रद्युम्न कहता है- माताश्री आप अतिशीघ्र आ गई? तब भानामति बना विकटासुर कहता है कि हां पुत्र प्रद्युम्न कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो अतिशीघ्र पूरे किए जाते हैं। यदि मैं इस हिरण को अतिशीघ्र उठाकर नहीं लाती तो अन्य वनपशु इसे ले जाते। अब मैं इसका स्वादिष्ट भोजन बनाकर तुम्हें खिलाऊंगी, लो इसे जाकर रख दो।
प्रदयुम्न वह हिरण हाथ में से ले लेता है तभी वहां पीछे से असली भानामति हिरण लेकर आती है तो वह यह दृश्य देखकर अचंभित हो जाती है। वह जोर से चीखती है- प्रद्युम्न। यह देखकर प्रद्युम्न भी अचंभित हो जाता तभी नकली भानामति असली भानामति पर अपने मायावी अस्त्र का प्रहार करती है। तत्काल भानामति भी अस्त्र का प्रहार करके उसे विफल कर देती है। प्रद्युम्न को समझ में नहीं आता कि कौन असली है। तभी विकटासुर अपने असली रूप में आकर वहां से भागकर आकाश में स्थित हो जाता है। प्रद्युम्न के हाथ में रखा मायावी हिरण सर्प में बदलकर प्रद्युम्न को जकड़ लेता है। यह देखकर भानामति घबरा जाती है।
फिर विकटासुर अपनी माया से सर्प में जकड़े प्रद्युम्न को आसमान में खींच लेता है। तब भानामति कहती है- प्रद्युम्न! अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करके विकटासुर का प्रतिकार करो। फिर प्रद्युम्न मंत्र पढ़कर नागपाश से मुक्ति होकर विकटासुर से मायावी युद्ध करने लगता है। फिर दोनों अग्निरूप धारण करके नीचे उतरकर मल्ल युद्ध करने लगते हैं। फिर वह संभरासुर को आसमान में फेंक देता है जहां पर वह अपने असली रूप में आ जाता है तब प्रद्युम्न कहता है कि विकटासुर जब तक तुम मेरी जीत का कथन संभरासुर को नहीं कर देते तब तक तुम्हारे प्राण तुम्हारे मुंड में अटके रहेंगे। ऐसा कहकर प्रद्युम्न एक दिव्य त्रिशूल छोड़ता है जिससे उसका सिर धड़ से अलग हो जाता है। धड़ भूमि पर गिर पड़ता है और सिर आसमान में दूर चला जाता है।..यह देखकर भानमति हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण का धन्यावाद करती है। प्रद्युम्न अपनी माता भानामति को प्रणाम करता है।
उधर, कुंभकेतु अपने पिता संभुरासुर से कहता है कि पिताश्री अब आप विश्राम कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि विश्राम कैसे करूं। उधर विकटासुर प्रद्युम्न के साथ युद्ध कर रहा है फिर मैं विश्राम कैसे कर सकता हूं। यह सुनकर मायावती कहती है कि परंतु विकटासुर अभी तक आया कैसे नहीं?
इस पर संभरासुर कहता है कि अवश्य आएगा महारानी अवश्य। वह किसी भी पल आएगा और बताएगा कि स्वामी मैंने प्रद्युम्न का वध कर दिया है। कदाचित वह प्रद्युम्न का सिर भी प्रमाणित करने के लिए साथ लेकर आएगा। ऐसा कहकर संभरासुर जोर-जोर से हंसने लगता है।
तभी वहां पर प्रद्युम्न द्वारा त्रिशूल से फेंका गया विकटासुर का अकेला मुंड आकर कहता है- स्वामी, स्वामी।.. यह देखकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेत अचंभित हो जाते हैं। तब वह मुंड कहता है- स्वामी प्रद्युम्न अजेय है, प्रद्युम्न तुम्हारा काल है। प्रद्युम्न के हाथों तुम्हारी मृत्यु निश्चित है। विकटासुर ही क्या बल्कि आप भी प्रद्युम्न का बाल भी बांका नहीं कर सकते स्वामी।
यह सुनकर संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- विकटासुर तुमने मेरा और मेरी मायावी शक्तियों का अपमान किया है। तब विकटासुर का मुंड कहता है- क्षमा करें महाराज। मैं आपको वास्तविकता बताना चहता था। मुझे खेद है कि मैं आपकी आज्ञा का पालन नहीं कर सका। मुझे दुख है महाराज कि मैं आपकी सेवा पूरी तरह से नहीं कर सका।..
यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम मुझे अपना मुंह दिखाने का साहस कर रहे हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है- क्षमा कीजिये स्वामी मैं यहां आना नहीं चाहता था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि फिर भी तुम अपनी हार की कहानी मुझे सुनाने चले आए हो। यह सुनकर विकटासुर कहता है कि मुझे प्रद्युम्न ने विवश किया स्वामी प्रद्युम्न ने। यह सुनकर संभरासुर कहता है फिर से तुम मेरे सामने शत्रु की प्रशंसा कर रहे हो।
इस पर विकटासुर कहता है कि क्षमा करें स्वामी मैं आपको वास्तविकता बताना चाहता हूं कि प्रद्युम्न ने मेरा वध करके मेरा सिर आपके पास भेज दिया है।....यह सुनकर संभरासुर अचंभित रह जाता है तब विकटासुर कहता है ये उसकी माया है माया। जब तक मैं प्रद्युम्न की जीत का समाचार आप तक नहीं पहुंचाता तब तक मेरे प्राण मेरे मुंड में अटके रहेंगे, स्वामी अटके रहेंगे। स्वामी मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार करें। ऐसा कहते हैं कि विकटासुर का मुंड भस्म हो जाता है। यह देखकर संभरासुर अचंभित और भयभित हो जाता है।
उधर, भानामति अपने पुत्र प्रद्युम्न की आरती उतारती है और तिलक लगाती है तब प्रद्युम्न कहता है कि माताश्री मैं धर्मयुद्ध आरंभ करने जा रहा हूं। आप मुझे आशीर्वाद दीजिये। भानामति उसे विजयीभव: पुत्र कहकर आशीर्वाद देती है और फिर युद्ध का उपदेश देकर कहती है कि शत्रु के घर में आचानक घुसकर उसे आश्चर्य चकित करो पुत्र। धर्मयुद्ध में जीत हमेशा धर्म की ही होती है। फिर भानामति कहती है कि संभरासुर के घमंड का प्रतीक है उसका विजय स्तंभ। तुम अपने अंतरचक्षुओं से देखो तो तुम्हें अवश्य नजर आएगा।
फिर उधर, संभरासुर को अपने विजयी स्तंभ के पास खड़ा हुआ बताया जाता है जहां पर वह खड़ा होकर अपने सभी पुत्रों को युद्ध के लिए एक-एक करके तलवार भेंट कर रहा होता। तलवार भेंट करते वक्त वह विजयी स्तंभ की ओर देखकर ही तलवार भेंट करता है।.. प्रद्युम्न अपने अंतरचक्षु से यह सब देख रहा होता है।
तब संभरासुर कहता है मेरे वीर पुत्रों हमारा ये विजय ध्वज और ये विजय स्तंभ हमारे लिए हमारे प्रणों से भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारी विजय और हमारी सत्ता का प्रतीक है। इसलिए हम इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा दिन-रात करते रहते हैं। परंतु अब मैं चाहता हूं कि इस विजयी स्तंभ की सुरक्षा का मेरे चारों वीर पुत्र अपने सर लें। चारों पुत्र कहते हैं- अवश्य पिताश्री। तब संभरासुर कहता है कि तुम लोग ये बात भलिभांति समझ लो की चाहे महाप्रलय आ जाए परंतु इस विजय स्तंभ पर तनीक भी खरोच नहीं आनी चाहिये।
फिर इधर, भानामति कहती है- पुत्र तुमने त्रिलोक के सांप और उसके चारों सपोलों के साथ विजयी स्तंभ को भी देख लिया है। तुम्हें इस विजय स्तंभ को तोड़ना है परंतु उससे पहले तुम्हें संभरासुर का घमंड तोड़ना है। इसके लिए तुम्हें उसके घर में जाकर उसे भयभित करना है और उसे युद्ध के लिए ललकारना है। इस पर प्रद्युम्न कहता है- अवश्य माताश्री। अब मुझे आज्ञा दीजिये। मैं शत्रु के घर में घुसकर उसे ललकारने जा रहा हूं।
फिर उधर, राजदरबार में अपने सभी पुत्रों और दरबारियों से संभरसुर कहता है कि मेरा एक शत्रु चूहे की भांति बिल में छुपा बैठा है। फिर संभरासुर बताता कि प्रद्युम्न रसायन विद्या से युवा बन बैठा है और छल से उसने मेरे असुरों का वध कर दिया है। त्रिलोक पर आक्रमण करने से पहले हमें उसका वध करना अति आवश्यक है। इसलिए यदि वो पातल में भी छुपा बैठा हो तो उसे ढूंढ निकालो क्योंकि वह कायर कभी भी सामने से आक्रमण करने वाला नहीं है।
तभी वहां पर कुछ सैनिक गिर पड़ते हैं तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है सैनिकों ये क्या कर रहे हो। तभी वहां पर द्वार के बाहर से कुछ और सैनिक फेंके जाने लगते हैं। संभरासुर कहता है ये सब क्या हो रहा है? किसने सैनिकों को फेंककर हमारा अपमान किया है, हमारे दरबार का अपमान किया है? यह सुनकर एक सैनिक कहता है- क्षमा करें महाराज! कोई सिरफिरा युवक है जो अंदर आना चाहता था जब हमने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने हमें उठाकर यहां फेंक दिया है। यह सुनकर संभारासुर कहता है कि अवश्य ही उसकी मृत्यु उसे यहां खींच लाई है जाओ उसे इसी क्षण बंदी बनाकर हमारे सामने प्रस्तुत करो।
तभी वहां पर प्रद्युम्न खुद ही द्वार पर आ धमकता है और कहता है- हे दैत्यराज।....सभी उसकी ओर देखने लगते हैं। फिर प्रद्युम्न चलकर सभा के बीच में उपस्थित हो जाता है तो संभरासुर उसे उपर से नीचे तक देखता है तब प्रद्युम्न कहता है- मुझे कहीं भी जाने से और कहीं भी आने से कोई भी रोक नहीं सकता।
यह सुनकर संभरासुर कहता है- अच्छा तो बड़ा गुमान है तुम्हें अपने बाहुबल पर। सैनिकों ले जाओ इसे और डाल तो कारागार में। चार सैनिक प्रद्युम्न का हाथ पकड़ लेते हैं परंतु वह उसे खींच नहीं पाते हैं। प्रद्युम्न एक ही जगह खड़ा-खड़ा मुस्कुराता रहता है और फिर वह चरों सैनिकों को जब उठाकर फेंक देता है तो संभरासुर के चार पुत्र तलवार निकालकर उसके पास पहुंचते हैं तो संभरासुर कहता है- रुको। चारों पुत्र पुन: अपने सिंहासन पर बैठ जाते हैं।
तब संभरासुर कहता है- हे युवक मेरे पुत्र तुम पर मृत्यु बनकर टूट पड़े थे फिर भी तुम्हें भय नहीं लगा। तब प्रद्युम्न कहता है कि मृत्यु से भय कैसा, अपनी मृत्यु से तो कायर डरते हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- वाह तुम्हारी बहादुरी ने तो हमारा दिल जीत लिया। तब प्रद्युम्न कहता है- जीत तो मेरा भाग्य है असुरेश्वर, जिसे कोई बदल नहीं सकता। तब संभरासुर कहता है- हे तेजस्वी वत्स! अपना परिचय नहीं दोगे हमें? कौन हो तुम और हमारी इस सभा में क्यूं आए हो? इससे पहले तो हमने अपने साम्राज्य में तुम्हें पहले कभी नहीं देखा।
इस पर प्रद्युम्न कहता है कि मैं एक योद्धा हूं और आप ही के साम्राज्य में रहता हूं। मेरा नाम, मेरी पहचान मेरी शक्ति और विद्याएं हैं। मैंने सभी विद्याएं ग्रहण की है और उनका प्रदर्शन करने के लिए ही मैं आपकी सभा में उपस्थित हुआ हूं। यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं उनका प्रदर्शन करूं। यह सुनकर संभरासुर मायावती की ओर देखता है तो महाराजी मायावती कहती है- आज्ञा है।
फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां पर बादल पैदा कर देता है और उन बादलों में बिजली भर देता है। भयानक बिजलियां कड़कने लगती है। ये देखकर सभी घबरा जाते हैं। फिर प्रद्युम्न भूमि पर आग का गोला प्रकट कर देता है तो सभी अपने-अपने सिंहासन से उठकर दूर खड़े हो जाते हैं। सभी में भय व्याप्त हो जाता है। संभरासुर और मायावती ये देखकर भयभित और अचंभित रह जाते हैं। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से वहां वर्षा उत्पन्न कर देता है। उस वर्षा से आग बुझ जाती है और फिर सबकुछ पहले जैसा हो जाता है। संभरासुर ये देखकर अवाक् रह जाता है। फिर प्रद्युम्न अपनी माया से अदृश्य हो जाता है।
फिर वहां पर अपनी माया से वह भानमति और उसके हाथ में छोटा-सा बालक सभा में उपस्थित कर देता है। बालक हाथ में लेकर भानामति कहती है- महाराज महाराज।.. ये देखकर संभरासुर और मायावती अचंभित हो जाते हैं। भानामति रोते हुए अपने बालक को अपने हाथ में लेकर संभरासुर के पास पहुंचती है और कहती है- महाराज..महाराज मेरे बच्चे की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे पुत्र की रक्षा कीजिये महाराज। मेरे प्रद्युम्न की रक्षा कीजिये।...यह देखकर संभरासुर को कुछ समझ में नहीं आता कि ये हो क्या रहा है तभी वहां पर भानामति अदृश्य हो जाती है और विशाल काया में प्रद्युम्न प्रकट होकर जोर-जोर से हंसता और फिर कहता है और माया दिखाऊं असुररेश्वर?
भयभित खड़ा असुरेश्वर संभरासुर पूछता है- कौन हो तुम? यह सुनकर प्रद्युम्न जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर क्रोधित होकर कहता है- कौन हो तुम बताते क्यों नहीं? यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसने लगता है तो संभरासुर कहता है कि तुम मेरा उपहास कर रहे हो। जानते हो संभरासुर ऐसे लोगों को मृत्युदंड देता है मृत्युदंड। यदि तुम समझते हो कि संभरासुर तुम्हारी माया के प्रभाव में आ गया होगा तो ये तुम्हारी भूल है। मैं स्वयं महान मायावी हूं। यदि मैं चाहूं तो तुम्हें इसी पल मृत्यु के हवाले कर सकता हूं।
यह सुनकर प्रद्युम्न पुन: जोर-जोर से हंसते हुए कहता है परंतु आप ऐसा नहीं कर सकते असुरेश्वर। यह सुनकर संभरासुर कहता है- क्यों, क्यों नहीं कर सकता? तब प्रद्युम्न कहता है- क्योंकि आप ही ने तो मुझे अभय दिया है। इस पर संभरासुर कहता है- मैंने अभय दिया है तुम्हें! कब अभय दिया है तुम्हें? तुम्हें तो आज मैं पहली बार देख रहा हूं। हे मायावी युवक तुम मुझे भ्रमित करने का प्रयास मत करो।
यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि मैं आपको भ्रमित नहीं कर रहा हूं असुरेश्वर बल्कि आपका भ्रम तोड़ने का प्रायास कर रहा हूं। मैं आपको स्मरण करा देना चाहता हूं कि मेरी और आपकी भेंट पहले भी हो चुकी है। आप ही ने तो मुझे अपने हाथों में लेकर मुझे सीने से लगाया था और आपने ही मेरा नामकरण भी किया है। यह सुनकर संभरासुर और मायावती चौंक जाते हैं। फिर भी संभुरासुर आश्चर्य से पूछता है- मैंने तुम्हारा नामकरण किया है? यह सुनकर प्रद्युम्न कहता है कि हां असुरेश्वर और जब युवराज कुंभकेतु जब मेरा वध करने आया था तब आप ही ने मुझे अभय दिया था। यह सुनकर संभरासुर, मायावती और कुंभकेतु आश्चर्य चकित और भयभित हो जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / एक कहावत सुनी होगी कि मिल-बांटकर खाने से प्यार बढ़ता है। यह बात सच है। वैज्ञानिकों की मानें तो मिलजुलकर खाने से सिर्फ प्यार ही नहीं बढ़ता, बल्कि खुशियां भी बढ़ती हैं और तनाव घटता है। और अगर खाने की टेबल पर साथ देने वाली दोस्तों की टोली है तब तो कहने ही क्या।
खासतौर से बढ़ती उम्र में दोस्तों के साथ फास्टफूड रेस्तरां में वक्त बिताने के ढेरों फायदे हैं। एक हालिया अध्ययन कुछ यही इशारा करता है। अध्ययन करने वाले मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि समय-समय पर फास्टफूड रेस्तरां में जाने से तनाव संबंधी हार्मोन का स्त्राव घटता है और फील गुड हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है। इससे ढलती उम्र में याददाश्त-तर्क शक्ति में कमी की समस्या नहीं होती।
125 लोगों पर हुआ अध्ययन-
शोधकर्ताओं ने मध्यम आयु वर्ग से लेकर बुजुर्ग वयस्कों समेत 125 लोगों का अध्ययन किया और उनके साथ उनके स्थानीय भोजनालय गए। अध्ययन में पाया कि बुजुर्ग वयस्कों के लिए इन जगहों पर मिलने से उनका सामाजिक दायरा बढ़ता है। अध्ययन के मुताबिक फास्टफूड रेस्तरां में मिलने-जुलने से बुजुर्ग लोगों के मस्तिष्क को कई फायदे हैं।
पिछले कई अध्ययन भी यह साबित कर चुके हैं कि सामाजिक मेल-मिलाप बुजुर्गों में सांज्ञानात्मक विकार से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मगर नए अध्ययन के मुताबिक फास्टफूड कॉर्नर और रेस्तरां आदि जगहों पर बुजुर्गों के उठने-बैठने से उनमें संबंधी मस्तिष्क रोग, डिमेंशिया, सांज्ञानात्क विकार आदि से बचाव होगा। अध्ययन में पाया गया कि रिटेल फूड प्रतिष्ठानों वाले क्षेत्र में रहने वाले प्रतिभागियों का संज्ञानात्मक स्कोर उन लोगों के मुकाबले अधिक था, जो कम फूड रिटेल प्रतिष्ठानों वाले इलाके में रहते हैं।
फास्टफूड का सेवन नुकसानदेह-
हालांकि, शोधकर्ताओं ने आगाह किया कि बुजुर्गावस्था में फास्टफूड रेस्तरां में बैठना जितना लाभकारी है, वहां फास्टफूड का सेवन करना उतना ही घातक है। फास्ट फूड जैसे कि चीजबर्गर फ्रेंच फ्राईज आदि खाने से संज्ञानात्मक गिरावट में इजाफा ही होगा। इसलिए वहां जाकर बैठना सही है, लेकिन वहां फास्टफूड का सेवन न करने की सलाह भी वैज्ञानिकों ने दी है।
प्रमुख शोधकर्ता डॉ जेसिका फिनले के मुताबिक पारंपरिक तौर पर फास्ट फूड का संज्ञानात्मकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फैट कैलेस्ट्रॉल मस्तिष्क विकारों में इजाफा करते हैं। यह अध्ययन सिर्फ यह दर्शाता है कि फास्टफूड प्रतिष्ठान बुजुर्गों के लिए बैठने की अच्छी जगह साबित हो सकते हैं, जहां वह अपने दोस्तों के साथ वक्त बिताएं। लेकिन वहां फास्टफूड का सेवन न करें।
लाइफस्टाइल /शौर्यपथ / अगर घर या ऑफिस में कोई अल्कोहल यानी शराब पीकर आता है तो उसके प्रवेश करते ही अलार्म बज उठेगा। यदि वह वापस नहीं जाता है तो कुछ ही देर बाद एक एलईडी भी जल जाएगी जो बता देगी कि वह व्यक्ति वापस नहीं गया है। खास बात यह है कि यह केवल 200 रुपए में तैयार किया गया है।
जय नारायण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की अटल टिंकरिंग लैब में प्रयोग कर कक्षा 12 में ही 'इंजीनियर' बन गए शिवा पटेल अब तक ऐसी आधा दर्जन खोज कर चुके हैं। अल्कोहल डिटेक्टर भी इसमें एक है। शिवा गरीब परिवार से हैं और घर में एक छोटी सी टेबल को ही उन्होंने पूरी लैब बना रखा है। उनका कहना है कि वह ऐसे प्रयोग करते हैं जो सामाजिक सरोकारों से जुड़े हों और सभी के काम आएं।
ऐसे बनाया अल्कोहल डिटेक्टर-
टिंकर इंडिया से जुड़े शिवा बताते हैं कि अक्सर लोग शराब पीकर ऑफिसों और घरों में चले जाते हैं और लोग परेशान हो जाते हैं। इसके लिए उन्होंने अल्कोहल डिटेक्टर तैयार किया है। इसमें एक सेंसर का उपयोग किया है जिसके बारे में वह पेटेंट प्रक्रिया के कारण नहीं बताना चाहते हैं। एक बजर और एलईडी का उपयोग किया है। इसमें 06 से 09 वोल्ट की बैट्री का उपयोग किया जा सकता है। अभी जो प्रोटोटाइप तैयार किया है, उसमें 06 वोल्ट की बैट्री का इस्तेमाल किया है।
सेंसेटिव है डिटेक्टर-
यदि कोई अल्कोहलयुक्त सेनेटाइजर लगाकर आता है, तो भी यह बजर बजने लगता है लेकिन कुछ ही समय में शांत हो जाता है। पर अगर कोई शराब पीकर आता है तो बजर देर तक बजता है।
कैसे काम करती है डिवाइस-
अल्कोहल जैसे ही सेंसर के टच में आता है तो वह बर्न करने लगता है। इसकी बर्निंग से कनेक्शन जुड़ जाता है और सर्किट पूरा होने से बजर बजने लगता है।
बहुत सस्ती है डिवाइस-
शिवा पटेल बताते हैं कि इस डिवाइस की सबसे खास बात यह है कि यह केवल 200 रुपए में तैयार हुई है। इसे अगर बल्क में तैयार किया जाए तो और भी सस्ती हो सकती है। इसका उपयोग वाहनों में भी किया जा सकता है। यदि वाहन के अंदर कोई शराब पीकर बैठेगा तो भी यह डिवाइस सचेत कर देगी। टिंकर इंडिया के संस्थापक कौस्तुभ ओमर ने बताया कि टिंकर इंडिया इसका पेटेंट कराएगा और प्रोडक्ट को बाजार में लाने में शिवा की पूरी मदद करेगा। शिवा का एक प्रोडक्ट पहले से ही बाजार में है।
भिलाई / शौर्यपथ / आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम बढ़ाते हुए भिलाई इस्पात संयंत्र के सिंटर प्लांट-3 (एसपी-3) के मेन एग्जास्टर के पीएलसी सिस्टम का आंतरिक संसाधनों से उन्नयन कर कमीशनिंग किया गया। इस महती परियोजना में एसपी-3 बिरादरी और संयंत्र के इंकास विभाग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस परियोजना का स पूर्ण डिजाइन व क्रियान्वयन आंतरिक संसाधनों से स पन्न किया गया। एसपी-3 एवं इंकास विभाग की समर्पित टीम ने आंतरिक संसाधनों से इसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम की डिजाइन, क पोनेंट के चयन, हार्डवेयर की आकृति और सॉ टवेयर के विकास के साथ ही इसकी टेस्टिंग कार्य को बखूबी अंजाम दिया।
इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन सेल के निदेशक प्रोजेक्ट्स एवं बिजनेस प्लानिंग) एवं बीएसपी के सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता ने शुक्रवार को किया। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक वक्र्स राजीव सहगल, मु य महाप्रबंधक प्रभारी एम एंड यू अरविंद कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (आई एंड ए) असित साहा, मुख्य महाप्रबंधक वी के श्रीवास्तव सहित संयंत्र के अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
इस अवसर पर सीईओअनिर्बान दासगुप्ता ने एसपी-3 व इंकास की टीम द्वारा की गई कड़ी मेहनत और लागत बचत के उपायों की सराहना करते हुए उन्हें इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने और संस्थान को लाभान्वित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने एसपी-3 और इंकास टीम को आंतरिक संसाधनों का समुचित उपयोग करने और इस परियोजना को बेहतर ढंग से निष्पादित करने के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा की।
ईडी वक्र्स राजीव सहगल ने इस उपलब्धि के लिए टीम की सराहना की और उन्हें भविष्य में इस तरह के अभिनव और लागत बचत कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित किया।
विदित हो कि एसपी-3 और इंकास विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से इस आधुनिक रॉकवेल पीएलसी सिस्टम को अपग्रेड करने की चुनौती को स्वीकार की। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को महाप्रबंधक प्रभारी (एसपी-3) एस व्ही नंदनवार एवं महाप्रबंधक प्रभारी इंकास अजय बाबू एवं महाप्रबंधक इंकास उदय भकत के दिशा-निर्देश व मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपादित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्य में इंकास विभाग से सहायक महाप्रबंधक श्री अमित कुमार, वरिष्ठ प्रबंधक द्वय जे एस राठौर व सरोज कुमार, प्रबंधक अमित बोकाड़े एवं उप प्रबंधक अंशुल गंगवार तथा एसपी-3 के टीम में शामिल महाप्रबंधक इलेक्ट्रिकल एवं ऑटोमेशन एच के कनकने एवं एस वाष्र्णेय, दीपक गुप्ता, एस सी साहूू, के के वर्मा, अनिल खापेकर, राजेश साहू, अरूणेश शर्मा, आकाश कौशल, एम के श्रीवास्तव, के एन बालपांडे, वाई बी राव एवं बी मीणा ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
ईएसपी परियोजना के उन्नयन हेतु एग्जास्टर को 60 दिनों की अवधि के लिए बंद कर शटडाउन लिया गया था, इस शटडाउन अवधि को टीम ने एक अवसर के रूप में लिया और इस अवधि का सदुपयोग एग्जास्टर-1 के पीएलसी प्रणाली को अपग्रेड करने के लिए किया गया। विभिन्न विकल्पों की खोज की गई थी और यह पता चला था कि ब्लास्ट फर्नेस-2 का जीसीपी प्रणाली अब उपयोगी नहीं है क्योंकि ब्लास्ट फर्नेस-2 को स्थायी रूप से बंद रखा गया है। इस जीसीपी-2 में रॉकवेल मेक पीएलसी सिस्टम स्थापित था जिसका उपयोग एग्जास्टर में कुछ सुधार कार्य के बाद किया जा सकता था। इस कार्यक्रम का संचालन अरूणेश शर्मा ने और धन्यवाद ज्ञापन अमित कुमार ने किया।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र ने सदैव ही सामाजिक कार्यों व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर योगदान दिया है। सेल-बीएसपी ने अपने निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व सीएसआर गतिविधियों के तहत पर्यावरण संरक्षण के अनेक कार्यों को अंजाम दिया है। भिलाई टाउनशिप, संयंत्र परिसर तथा माइंस क्षेत्रों और सड़क के किनारे किए गए वृक्षारोपण का सुपरिणाम है हरा-भरा भिलाई। अपने इसी प्रतिबद्धता के चलते आज इस शुक्रवार को सीएसआर गतिविधियों के तहत वन संरक्षण कार्य हेतु 177 मेट्रिक टन 50 बाई 50 बाई 6 के एंगल की आपूर्ति की है। यह आपूर्ति आदेश छत्तीसगढ़ वन विभाग, दुर्ग को वन संरक्षण हेतु प्रदान किया गया। इस एंगल का प्रयोग पाटन विधानसभा क्षेत्र में वृक्षों के संरक्षण हेतु किया जायेगा।
संयंत्र के सीएसआर विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक माइंस एवं रावघाट मानस बिस्वास ने एंगल के आपूर्ति आदेश की प्रति दुर्ग वन विभाग के सुयश धर दीवान, रेंज ऑफिसर को सौंपी। इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक परियाजनाएँ ए के भट्टा भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में दुर्ग वन विभाग के अब्दुल वाहीद खान, रेंज ऑफिसर, बीएसपी के सीएसआर विभाग के महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष सी बी श्रीवास्तव एवं महाप्रबंधक अरूण तोपनो, सहायक महाप्रबंधक सुनिल चौरसिया, सहायक प्रबंधक विवेक मिश्र सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज 5 सितंबर 2020 पहली बार वर्चुअल तरीके से आयोजित पुरस्कार समारोह में देश भर के 47 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने अपने भाषण में पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और स्कूली शिक्षा में गुणात्मक रूप से सुधार लाने के लिए शिक्षकों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं है। उन्होंने शिक्षक के रूप में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा सिरसा दुर्ग की फिजिक्स की व्याख्याता सुश्री सपना सोनी इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित होने वाली राज्य से एकमात्र शिक्षक है तथा पूरे देश से केवल 47 शिक्षक की सूची में शामिल हुई हैं । उनका चयन विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन एवं अध्यापन कार्य में लगातार किए गए नवाचार के कारण हुआ है। उनके प्रयास से विगत 12 वर्षों से जेवरा सिरसा स्कूल के बच्चों का परीक्षा परिणाम बोर्ड परीक्षा में 93 से 100प्रतिशत तक रहा है।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने सुश्री सपना को दी बधाई
सुश्री सपना सोनी को एनएटी2020 जीतने के लिए बधाई। नवीन मॉडल और आईसीटी.आधारित शिक्षण सामग्री के आपके उपयोग ने छात्रों को एक वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने में मदद की है।
भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र के शिक्षा विभाग द्वारा 05 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर बीएसपी एवं गैर-बीएसपी स्कूलों के शिक्षकों एवं स्टॉफ को सम्मानित किया जायेगा। शिक्षक दिवस पुरस्कार-2020 के लिए बीएसपी के शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 33 शिक्षकों/गैर-शिक्षकीय स्टॉफ सहित शामिल डीएव्ही इस्पात स्कूल के 3 शिक्षक एवं डीपीएस, रिसाली से 1 शिक्षक को चयनित किया गया है।
विदित हो कि इस वर्ष, भारत के पूर्व राष्ट्रपति के निधन के कारण 7 दिवसीय राष्ट्रीय शोक के अनुपालन और महामारी कोविड-19 के मद्देनजर औपचारिक रूप से पुरस्कार प्रदान करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जायेगा। पुरस्कार पाने वालों को संयंत्र के शिक्षा विभाग के कार्यालय से छोटे-छोटे समूहों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पुरस्कार प्राप्त किए जायेंगे। ज्ञातव्य हो कि महान दार्शनिक एवं शिक्षाविद् डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन् के जन्म दिवस 5 सित बर को प्रतिवर्ष देश भर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / विकासखण्ड खैरागढ़ के ग्राम धनगांव, मड़ौदा एपरसूली में डॉ. सुश्री विनीता सिंह के प्रयास से पारा मोहल्ला में समूह बनाकर वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों के नाम से मोहल्ला क्लास संचालित की जा रही है और मोहल्ला क्लास की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। पीएलसी गु्रप मड़ौदा की हेड डॉ. विनीता सिंह के मार्गदर्शन में मड़ौदा में खुशबू की पाठशाला, मनीषा की मोहल्ला पाठशाला, हिर्दय वर्मा की पाठशाला, मुनिया की मोहल्ला शाला, ग्राम धनगांव में पूर्व मध्यमिक शाला के बच्चों हेतु सामुदायिक भवन एवं शीतला मंदिर में शिवम् की पाठशाला, सपना की पाठशालाएं, प्राथमिक शाला के बच्चों की कक्षा निर्मला की पाठशाला एवं ममता की पाठशाला में संचालित हो रही है । ग्राम परसूली में भी मोहल्ला शाला संचालित है।
कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम के लिए तयशुदा मानकों का पालन करते हुए खैरागढ़ विकासखंड में विभिन्न स्थानों पर मोहल्ला शाला संचालित करने पर विकासखण्ड नोडल अधिकारी अरविंद भारद्वाज, सहायक नोडल कमलेश्वर सिंह, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी महेश भुआर्य, सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी डालेंद्र देवांगन ने मोहल्ला पाठशाला संचालित करने वाले पीएलसी हेड डॉ. विनता सिंह एवं शिक्षकों को बधाई दी एवं प्रेरित किया।
इसी प्रकार विकासखण्ड खैरागढ़ के एक अन्य पीएलसी हेड डॉ. भावना बैरगी व्यख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जालबंाधा के अथक प्रयासों से पीएलसी गु्रप के शाला ग्रामों में मोहल्ला क्लास की शुरूवात की गई है, जिसमें दिन प्रतिदिन बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। डॉ. भावना बैरागी स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण कार्यक्रम पढ़ाई तुंहर दुआर योजना अंतर्गत पारा मोहल्ला सामुदायिक शाला संचालित करने के राज्य शासन के महत्वपूर्ण कदम को सफल बनाने के लिए अपने क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में मोहल्ला क्लास प्रारम्भ करवा रही है।
उनके द्वारा कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम हेतु भारत सरकार स्वास्थ विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करवाते हुए सोशल डिस्टेंसिंग, सेनेटाइजर का उपयोग, मास्क कवर लगाने, समय-समय पर साबुन से हाथ धोने के विषय पर लोगों को जागरूक एवं प्रेरित करने का कार्य भी किया जा रहा है। ग्राम जालबंाधा में शिक्षक हेमन्त साहू एवं शिक्षिका गायकवाड़ के मार्गदर्शन में शिक्षा सारथी चंचल बंजारे की मोहल्ला क्लास, सोनम यादव की मोहल्ला क्लास संचालित हो रही है।
इसी प्रकार ग्राम रंगकठेरा में ललिता साहू एवं लिखन साहू द्वारा मोहल्ला क्लास प्रारम्भ किया गया है। ग्राम पंचायत जालबांधा में मोहल्ला क्लास के शुभारंभ के दौरान उपसरपंच दीनदयाल सिन्हा ने पंचायती राज के संबंध में छात्रों को आवश्यक जानकारी प्रदान की। वही व्यख्याता डॉ. भावना बैरागी ने मोहल्ला क्लास के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब तक भारत सरकार एवं राज्य सरकार की ओर से स्कूल खोलने का आदेश नहीं आता तब तक बच्चों की सुचारू शिक्षा व्यवस्था हेतु मोहल्ला क्लास संचालित होता रहेगा ।
मोहल्ला क्लास का संचालन सामुदायिक सहभागिता से बहुकक्षा शिक्षण पद्धति से किया जाएगा एवं बच्चों को बलकेन्द्रित पद्धति से खेल-खेल में शिक्षा दी जाएगी। विकासखण्ड नोडल अरविंद भरतद्वाज, सहायक नोडल एवं व्यख्याता कमलेश्वर सिंह, किसोरी लाल आमेला, सुश्री अमरीका देवांगन एवं प्रभारी प्रचार्य हेमचंद वर्मा ने पीएलसी हेड के प्रयास की सराहनीय करते हुए कहा कि विकासखंड के सभी हेड पारा मोहल्ला क्लास को अधिक से अधिक संचालित करवाने का विशेष प्रयास करें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
