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May 31, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ /वास्तुशिल्प के रचनाकार हैं विश्वकर्मा
वैदिक देवता के रूप में सर्वमान्य देव शिल्पी विश्वकर्मा अपने विशिष्ट ज्ञान-विज्ञान के कारण मानव ही नहीं, देवगणों द्वारा भी पूजित हैं। कहते हैं देव विश्वकर्मा के पूजन के बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं होता।
हर साल 17 सितंबर को तकनीकी ज्ञान के रचनाकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। इनको देवताओं के वास्तुशिल्प का जनक भी माना जाता है, इसलिए शिल्पकला से जुड़े लोग उनकी जयंती को विधि-विधान से मनाते हैं। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता। इसी कारण विभिन्न कार्यों में प्रयुक्त होने वाले औजारों, कल-कारखानों में लगी मशीनों की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। वराह पुराण के अनुसार ब्रह्माजी ने विश्वकर्मा को धरती पर उत्पन्न किया। वहीं विश्वकर्मा पुुराण के अनुसार, आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से भी जोड़ा जाता है।
इस तरह भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में जो कथाएं मिलती हैं, उससे ज्ञात होता है कि विश्वकर्मा एक नहीं कई हुए हैं और समय-समय पर अपने कार्यों और ज्ञान से वो सृष्टि के विकास में सहायक हुए हैं। शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा के इस वर्णन से यह संकेत मिलता है कि विश्वकर्मा एक प्रकार का पद और उपाधि है, जो शिल्पशास्त्र का श्रेष्ठ ज्ञान रखने वाले को कहा जाता था। सबसे पहले हुए विराट विश्वकर्मा, उसके बाद धर्मवंशी विश्वकर्मा, अंगिरावंशी, तब सुधान्वा विश्वकर्मा हुए। फिर शुक्राचार्य के पौत्र भृगुवंशी विश्वकर्मा हुए। मान्यता है कि देवताओं की विनती पर विश्वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से स्वर्गाधिपति इंद्र के लिए एक शक्तिशाली वज्र बनाया था।
प्राचीन काल में जितने भी सुप्रसिद्ध नगर और राजधानियां थीं, उनका सृजन भी विश्वकर्मा ने ही किया था, जैसे सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेतायुग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलियुग के हस्तिनापुर। महादेव का त्रिशूल, श्रीहरि का सुदर्शन चक्र, हनुमान जी की गदा, यमराज का कालदंड, कर्ण के कुंडल और कुबेर के पुष्पक विमान का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। वो शिल्पकला के इतने बड़े मर्मज्ञ थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ बनाने की सामथ्र्य रखते थे।
विश्वकर्मा के यथाविधि पूजन करने से घर और दुकान में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन अपने कामकाज में उपयोग में आने वाली मशीनों को साफ करें। फिर स्नान करके भगवान विष्णु के साथ विश्वकर्माजी की प्रतिमा की विधिवत पूजा करनी चाहिए। ऋतुफल, मिष्ठान्न, पंचमेवा, पंचामृत का भोग लगाएं। दीप-धूप आदि जलाकर दोनों देवताओं की आरती उतारें।

व्रत त्यौहार / शौर्यपथ / हर साल पितृ विसर्जनी अमावस्या के बाद नवरात्रि की तैयारी शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार नवरात्रि एक महीने बाद शुरू होगी। अधिकमास लगने के कारण नवरात्रि एक महीने आगे खिसक गए हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे। इससे पहले 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिकमास रहेगा। इस मास में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस साल165 साल के बाद ऐसा संयोग बन रहा है। अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसमास में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

17 अक्टूबर 2020: प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर 2020: द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर 2020: तृतीय मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर 2020 : चतुर्थी मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर 2020: पंचमी मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर 2020: षष्ठी मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर 2020: सप्तमी मां कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर 2020 :अष्टमी मां महागौरी दुर्गा महा नवमी पूजा दुर्गा महा अष्टमी पूजा
25 अक्टूबर 2020 : नवमी मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण विजय दशमी

मलमास खत्म होने के बाद नवरात्रि में मुंडन आदि शुभ कार्यों का शुरू हो सकेंगे। वहीं विवाह आदि देवउठनी एकादशी के बाद से ही शुरू होंगे। मलमाल के कारण आगे आने वाले सभी त्योहार विधि के अनुसार अपने नियत समय पर किए जाएंगे। नवरात्र में देरी के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को होगी, जबकि यह पिछले साल 27 अक्टूबर में थी। ज्योतिषियों के अनुसार तीज-त्योहारों की गणना हिन्दी पंचांगों के हिसाब से की जाती है। इसके लिए हिन्दी का माह और तिथि निर्धारित है।

क्या होता है मलमास
अधिकमास या मलमास हर दो से तीन साल के बीच में आता है। मलमास को आप इस तरह समझ सकते हैं। अंग्रेजी के कैलेंडर के अनुसार जिस तरह लीप इयर होता है उसी तरह हिन्दू पंचांग में अधिकमास, मलमास होते हैं। चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी और 48 पल छोटा होता है।

 

सेहत / शौर्यपथ / अक्सर नए कपड़े बाजार से खरीदने के बाद लोग उन्हें तुरंत बिना धोएं ही पहन लेते हैं। पर क्या आप जानते हैं आपकी यह आदत आपकी सेहत को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है? जी हां कपड़ों को शॉपिंग बैग से सीधे निकालकर पहन लेने से आपकी सेहत बिगड़ सकती है। आइए जानते हैं नए कपड़ों को पहनने से पहले हमें क्यों उन्हें धोकर पहनना चाहिए।

नए कपड़े लाते हैं कीटाणुओं को साथ-
विशेषज्ञों की मानें तो जो कपड़े आप बड़े शौक से शॉपिंग करके अपने घर लाते हैं, उनके साथ ढेरों कीटाणु भी कपड़े में चिपककर आपके घर तक पहुंच जाते हैं। शॉपिंग के समय कपड़ों को ट्रायल के दौरान हजारों बार पहना जाता है, जिससे लोगों के पसीने के साथ कीटाणु भी उन कपड़ों के साथ चिपक जाते हैं।

कपड़े पर लगे रसायन से दाद-खाज खुजली-
कपड़ों को पैक करते समय रसायन से कवर करके रखा जाता है, जो आपकी त्वचा के संपर्क में आकर बुरा असर डाल सकते हैं। कपड़ों की प्रोसेसिंग करते समय कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है, जिसे बिना धोए पहनने पर व्यक्ति को दाद, खाज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डाई कलर्स से एलर्जी -
प्राकृतिक धागों का अपना कोई रंग नहीं होता, इसलिए उन्हें सुंदर रंगों में रंगा जाता है। कपड़ों की रंगाई, छपाई और डाई जैसी प्रक्रियाओं में उसपर विभिन्न प्रकार के केमिकल्स लगाए जाते हैं। ज़्यादातर रंगीन कपड़ों में ऐजो डाईस का इस्तेमाल किया जाता है। कपड़ा जितना रंगीन और चटक होगा उसमें उतनी अधिक डाई का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐजो डाई के सीधे त्वचा के संपर्क में आने से त्वचा में बहुत अधिक जलन और परेशानी होती है, जिसकी वजह से एलर्जी हो सकती है।

त्वचा रोग को न्योता-
बाजार से कोई भी कपड़ा सीधा घर लाकर पहनने से पहले उस कपड़े को कई लोग पहले ही ट्राई करते समय पहन चुके होते हैं। ऐसे में उनके शरीर का पसीना, धूल-मिट्टी या कोई स्किन इंफेक्शन आपके लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने से लेकर डायबिटीज जैसे रोग में आंवला का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। आंवला अपने औषधीय गुणों की वजह से ही प्राचीन समय से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति का एक हिस्सा रहा है। आंवले में विटामिन और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। रोजाना आंवला का सेवन आपके कई रोगों को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। ऐसे में आंवला को डाइट का हिस्सा बनाने के लिए आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है गुड़-आंवला की चटनी।

आंवला गुड़ चटनी बनाने के लिए सामग्री-
-1 कप आंवला
-1 कप गुड़
-1 चम्मच तेल
-आधा चम्मच पंच फोर्न
-1 साबुत लाल मिर्च
-काला नमक स्वादानुसार
-1.5 चम्मच भुना जीरा पाउडर

आंवला-गुड़ चटनी बनाने का तरीका-
आंवला-गुड़ चटनी बनाने के लिए सबसे पहले आंवलों को तब तक उबाले जब तक वह नरम ना हो जाएं। अब मैश किए हुए आंवलों को उबलने के बाद ठंडा होने के लिए अलग रख दें। अब एक कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें लाल मिर्च और पंच फर्न डालकर मसालों को अच्छे से मिलाएं। काला नमक के साथ आंवला डालकर उन्हें एक मिनट के लिए पकने दें।

अब गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर आंवले में मिलाकर गुड़ के गलने तक धीमी आंच पर पकाएं। अब इसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक मिलाकर तब तक लगातार हिलाते रहें जब तक आपको गाढ़ापन ना दिखने लगें। अब इसमें लाल मिर्च और काली मिर्च पाउडर डाल दें। आपकी आंवला-गुड़ चटनी बनकर तैयार है।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ पनीर पसंद करने वाले लोगों को पनीर खाने का बहाना चाहिए होता है। अगर आप रेगुलर पनीर की डिश बनाकर खाते-खाते-बोर हो चुके हैं तो इस बार ट्राई करें पनीर की ये स्नैक्स रेसिपी पनीर अनारदाना कबाब। आइए जानते हैं कैसे बनाई जाती है ये टेस्टी रेसिपी।

पनीर अनारदाना कबाब के लिए सामग्री-
-500 ग्राम पनीर
-2 मीडियम हरी शिमला मिर्च चकोर टुकड़ों में कटी हुई
-2 मीडियम टमाटर चकोर टुकड़ों में कटी हुई
-3 टेबल स्पून तेल
-1 टी स्पून चाट मसाला

पनीर अनारदाना कबाब को मेरिनेट करने के लिए-
-हंग कर्ड
-1 टी स्पून अदरक का पेस्ट
-1 टी स्पून लहसुन का पेस्ट
-1/2 टी स्पून क​शमिरी लाल मिर्च पाउडर
-एक चुटकी हल्दी पाउडर
-1/2 टी स्पून गरम मसाला पाउडर
-2 टी स्पून अनारदाना पाउडर
-2-3 टेबल स्पून फ्रेश क्रीम
-1 टी स्पून नींबू का रस
-नमक

पनीर अनारदाना कबाब बनाने का तरीका-
पनीर अनारदाना कबाब बनाने के लिए सबसे पहले पनीर को टुकड़ों को एक इंच लम्बाई और मोटाई में काट लें। अब मेरिनेट करने वाली सारी सामग्री को मिलाकर पनीर के टुकड़ों को इसमें 15 मिनट के लिए मेरिनेट करने के लिए रख दें।

अब तवे पर तेल गर्म करके उसमें पनीर के टुकड़ों को डालकर गोल्डन ब्राउन क्रिस्पी होने तक फ्राई करें। फ्राई होने पर पनीर के इन टुकड़ों को एक पेपर टॉवल पर निकाल लें। अब शिमला मिर्च और टमाटर के टुकड़ों को बाकी बचे मेरिनेट के पेस्ट में लपेटकर तवे पर बचे हुए तेल में 2 से 3 मिनट के लिए भून लें।

अब शिमला मिर्च और टमाटर के टुकड़ों के साथ पनीर के टुकड़ों को टूथपिक में लगाकर ऊपर से उसमें चाट मसाला छिड़ककर गर्मागर्म सर्व करें।

 

सेहत / शौर्यपथ / अक्सर आपने सुना होगा कि स्ट्रेस लेने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है, उसका किसी से बात करने का मन नहीं करता, यहां तक कि वो अपने परिवार और दोस्तों से भी ढंग से बात नहीं करना चाहता। बावजूद इसके अगर हम कहें कि लाइफ में थोड़ा स्ट्रेस बेहद जरूरी है तो? सुनकर आप भी सोच में पड़ गए होंगे कि भला ये क्या बात हुई, पर ये सच हैं। आइए जानते हैं कैसे कुछ चीजों के लिए स्ट्रेस लेने से लाइफ बन सकती है कूल।

सुबह जल्दी उठना-
आमतौर पर लोगों को सुबह जल्दी उठना बेहद तनावपूर्ण लगता है। अगर आप भी इस लिस्ट में शामिल हैं तो ये तनाव लेने की आदत डाल लें। जरा सोचिए, सुबह जल्दी उठने से आप अपने पूरे दिन को अच्छे से व्यवस्थित कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके सभी जरूरी काम टाइम से पूरे होंगे और आप बिना बात का तनाव लेने से बच जाएंगे।

एक्सरसाइज करना न भूलें-
अगर आप सुबह जल्दी उठकर एक्सरससाइज या मेडिटेशन करते हैं तो आपका शरीरिक स्वास्थ्य तो ठीक रहता ही है बल्कि आप मानसिक रूप से भी अच्छा महसूस करते हैं। खुद को पॉजिटिव बनाए रखने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें।

सफाई करना-
खुद के साथ अपने आस-पास की जगह को भी साफ रखें। गंदा घर या अव्यवस्थित पड़ी चीजें व्यक्ति को डिप्रेशन में डाल सकती हैं। भले ही शुरूआत में आपको ये काम थोड़ा तनावपूर्ण लग सकता है लेकिन स्वच्छ वातावरण सकारात्मक सोच को जन्म देता है और आप तनाव से दूर रहते हैं।

पढ़ाई करना-
कहावत है कि किताबें आपकी सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। खुद को तनाव से दूर रखने के लिए अच्छी किताबें पढ़ने के लिए थोड़ा समय निकालें। भले ही आपको यह काम थोड़ा तनावपूर्ण लगे लेकिन यकीन मानिए किताबें पढ़ने का शौक हर किसी के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इस स्ट्रेस को लेने से न सिर्फ आपकी विभिन्न विषयों के प्रति आपकी जानकारी बढ़ती है बल्कि आपकी सोच का दायरा भी व्यापक होता है।

खाना बनाना-
एक अच्छा पौष्टिक भोजन न सिर्फ आपके स्वास्थ्य का ध्यान रखता है बल्कि आपके स्ट्रेस को भी दूर रखने में मदद करता है। इसलिए खाना बनाने के इस स्ट्रेस को रोजमर्रा के जीवन में शामिल करके इसे अपनी हॉबी बनाएं और खुद को स्ट्रेस और बीमारियों से दूर रखें ।

 

धर्म/ शौर्यपथ / न्याय के देवता शनि कर्म के ग्रह माने जाते हैं। इन की बुरी दृष्टि से बचने के लिए लोग क्या-क्या उपाय नहीं करते। शनि हमेशा मेहनती लोगों का साथ देते हैं। इनकी कृपा लोगों पर रहे तो ये रंक को राजा और राजा को रंक भी बना सकते हैं। गरीबों की सेवा करने वाले और कर्मठ लोगों पर इनकी हमेशा अच्छी दृष्टि रहती है। आपको बता दें कि शनि की कुछ राशियों पर हमेशा मेहरबान रहते हैं। कहा जाता है कि ये राशियां शनिदेव की पसंदीदा राशियां है। आइए जानें इन राशियों के बारे में:
तुला राशि के लोगों पर हमेशा शनि की अच्छी दृष्टि रहती है। तुला राशि के लोग विनम्र स्वभाव के होते हैं। ये लोग विवाद से दूर रहते हैं। तुला राशि के लोग मेहनत और ईमानदारी से जीवन निर्वाह करना पसंद करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस राशि के लोग मेहनती हों और गरीबों की सहायता करने वाले हों तो उनकों सफलता निश्चित ही मिलती है।
कुंभ राशि के लोगों पर भी शनि मेहरबान रहते हैं। शनि देव कुंभ राशि के स्वामी है। इस राशि के लोगों को शनि हमेशा मेहनत का फल देते हैं। इनके थोड़े से प्रयत्न से शनि देव प्रसन्न होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि कुंभ राशि के जातक बहुत सीधे और शांत होते हैं। ये किसी से धोखा आदि नहीं करते हैं। न्याय प्रिय देवता शनि इसी वजह से इस राशि के लोगों पर अपनी अच्छी दृष्टि रखते हैं।
कुंभ राशि के लोग मानवीय और परोपकारी होते हैं। ये लोग समाज की भलाई के लिए कुछ भी कर सकते हैं। यही वजह है कि शनिदेव को यह राशि पसंद है।
मकर राशि के लोगों पर भी शनिदेव की अच्छी नजर रहती है। शनिदेव इस राशि के लोगों को हमेशा उनके अच्छे कार्यों का फल समय पर देते हैं। इनके जीवन में खुशियां ही खुशियां रहती है। मकर राशि के लोग गंभीर और सहनशील होते है। ये लोग मन के विपरीत कभी कुछ नहीं करते। शनि अगर इनकी राशि में अच्छा होते तो वारे न्यारे कर सकता है।

सेहत / शौर्यपथ / पतझड़ में जन्मे बच्चों में अस्थमा, हे फीवर और खानपान से संबंधित एलर्जी होने का खतरा ज्यादा होता है। एक हालिया शोध में यह खुलासा हुआ है। ब्रिटेन में दुनिया में सबसे अधिक एलर्जी की दर है, यहां की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी कम से कम एक एलर्जी विकार से पीडि़त है।
कोलोराडो की नेशनल ज्यूइश हेल्थ की शोधकर्ता डॉक्टर जेसिका हुई ने कहा, हमने अपने क्लिनिक में इलाज किए गए प्रत्येक बच्चे को देखा और पाया कि जो बच्चे पतझड़ में पैदा हुए थे, उनमें एलर्जी से जुड़ी सभी स्थितियों का अनुभव करने की अधिक संभावना थी। अब हम इस बारे में अधिक अध्ययन कर रहे हैं कि ऐसा क्यों है और हम दृढ़ता से मानते हैं कि यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादातर एलर्जी बचपन में ही शुरू होती है जब एलर्जी फैलाने वाले रोगाणु सूखी हुई त्वचा से अंदर प्रवेश करते हैं। इससे एलर्जी की एक श्रृखंला की शुरुआत हो जाती है जिसे एटॉपिक मार्च कहते हैं।
ब्रिटेन में पांच में से एक बच्चे को एक्जीमा की शिकायत है। जिन्हें एक्जीमा की शिकायत होती है उनके शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया का स्तर ज्यादा होता है। इससे एलर्जी पैदा करने वाले रोगाणुओं को नष्ट करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि पतझड़ में पैदा होने वाले बच्चों की त्वचा बेहद कमजोर होती है और इसलिए ये बार-बार एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।

शिक्षा / शौर्यपथ / जीवन में हर कोई जीतना चाहता है लेकिन कभी-कभी काफी प्रयासों के बाद भी हम हार जाते हैं। जीवन के किसी पड़ाव पर हारना बुरा नहीं है लेकिन हारकर वापस न उठना या हारे हुए मन से जीते जाना बहुत बुरा है लेकिन कभी न कभी ऐसा होता है जब किसी हार से हम बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं और हमारी हिम्मत जवाब दे जाती है। ऐसे में खुद को फिर से खड़ा करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए-
अपनी जीत को याद करें
आपको जब भी लगे कि अब आप हारने के बाद फिर से खड़े नहीं हो सकते, तो आपको जरुरत है कि आप जीत को याद करते हुए सोचें कि एक दिन वो भी था, जब आपको जीत हासिल हुई थी। ऐसे में आप महसूस करेंगे कि आपके मन से नकारात्मकता जाने लगेगी।

जानवरों से सीखें
इंसान किताबों से सीखता है लेकिन जानवरों की प्रकृति से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। सभी जानवर भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमते हुए मेहनत करते हैं। वो रोजाना यही काम करते हैं लेकिन फिर भी कभी हार नहीं मानते और मेहनत करते रहते हैं।
अपने लक्ष्य को फिर से याद करें
आपकी हार ने अगर हौंसला तोड़ दिया है, तो अपने लक्ष्य को दुबारा याद करें। आप यह सोचें कि आपको अगर अपना लक्ष्य मिल जाता है, तो आपके जीवन में क्या बदलाव आता है। इससे आपका हौंसला बढ़ जाएगा।
अपने करीबियों को याद करें
आप दुबारा कोशिश करते हैं और लक्ष्य को पा लेते हैं, तो आपके करीबियों पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह सोचिए कि आप लक्ष्य को पाकर उनके जीवन में क्या बदलाव ला सकते हैं। ऐसा करने से आप निराशा को भूलकर आगे बढऩे का निर्णय लें पाएंगे।

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में व्यक्ति को सफल बनाने की बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षाविद और कुशल अर्थशास्त्री भी थे। चाणक्य की नीतियां आप भी लोगों को जीवन में सही रास्ता दिखा रही हैं। नीति शास्त्र में चाणक्य ने धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, मित्रता और दुश्मनी संबंधी समस्याओं का उपाय बताया है।

चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को जीवन में सफल होना है तो उसे नीति शास्त्र को जीवन में अपना लेना चाहिए। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति में कौन-से ऐसे दो गुण होने चाहिए, जो दुश्मनों को भी मित्र बना देता है।

1. विनम्रता-

चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा विनम्र होना चाहिए। विनम्रता से व्यक्ति लोगों के दिलों में राज करता है। विनम्र व्यक्ति क्रोध से मुक्त होता है और उसे समाज में भी मान-सम्मान मिलता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो काम व्यक्ति धैर्य के साथ करता है, उसे सफलता प्राप्त होती है। चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू पाने के लिए व्यक्ति को विनम्रता का गुण अपनाना चाहिए। इसके साथ ही कई बार दु्श्मन भी आपकी विनम्रता के सामने झुक जाता है और दोस्ती का हाथ खुद ही बढ़ा देता है।

2. सत्य बोलना-

चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में झूठ नहीं बोलना चाहिए। नीति शास्त्र के अनुसार, झूठ बोलने से व्यक्ति की प्रतिभा का नुकसान होता है। झूठ बोलने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान नहीं पाता है। ऐसे व्यक्ति से लोग दूरी बनाकर रखते हैं और कोई भरोसा नहीं करता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा झूठ से दूर रहना चाहिए।

 

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