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नई दिल्ली । शौर्यपथ । ऑनलाइन सेक्स रैकेट चलाने वाले तीन युवकों को कोतवाली पुलिस ने किदवईपुरी इलाके में स्थित होटल के समीप से गिरफ्तार कर लिया। वहीं दो कॉलगर्ल और एक महिला दलाल को भी पुलिस ने पकड़ा है। कॉलगर्ल कोलकाता की रहने वाली है। दरअसल कोतवाली थानेदार रामशंकर सिंह को यह खबर मिली थी कि जिस्मफरोशी के धंधे में शामिल कुछ लड़के किदवईपुरी इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने अपनी पहचान छिपाकर इसमें शामिल लड़कों को पकड़ा। सूत्रों की मानें तो इन्हीं युवकों की निशानदेही पर एक महिला दलाल व दो कॉलगर्ल को पकड़ा गया। पकड़े गये युवकों में बुद्धा कॉलोनी बांसघाट का रहने वाला आलोक रंजन, पूर्णिया के रौटा का रहने वाला मन्नौवर आलम और परसा के ब्रह्मस्थान का कुंदन कुमार शामिल है। पुलिस ने सभी से पूछताछ की है। काफी दिनों से ये लोग पटना के अलग-अलग इलाकों में सेक्स रैकेट चला रहे थे।
शौर्यपथ / अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूसी)- डेविस के वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में दावा किया है कि पशुओं की कई प्रजातियां कोरोना महामारी की चपेट में आ सकती हैं। अध्ययन के अनुसार कोविड-19 बीमारी का कारण बनने वाले कोरोना वायरस के संभावित खतरे का सामना करने वाली एकमात्र प्रजाति मनुष्य नहीं है। पशुओं की कई प्रजातियों को भी बड़ा खतरा है।
अध्ययन के अनुसार कई गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां जैसे कि पश्चिमी गोरिल्ला, ऑरंगुटन और गाल पर सफेद बाल वाले काले लंगूर आदि वायरस से संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हो सकते हैं। समुद्री स्तनधारियों जैसे ग्रे व्हेल और बॉटलनोज डॉल्फिन के साथ-साथ चीनी हैम्स्टर में भी वायरस के उच्च जोखिम में हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि घरेलू पशुओं में बिल्लियों, मवेशियों और भेड़ों में एक मध्यम जोखिम पाया गया, जबकि कुत्तों, घोड़ों और सूअरों के लिए कम जोखिम है। वैज्ञानिकों ने एसीई-2 रिसेप्टर प्रोटीन की संरचना की तुलना करने के लिए जीनोमिक विश्लेषण का उपयोग किया। जो कोरोना वायरस, मछली सहित उभयचर, सरीसृप और स्तनधारी कशेरुकी जीवों की 410 विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए उपयोग करता है।
पीएनएएस नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, एसीई-2 सामान्य रूप से कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं और ऊतकों में पाया जाता है, जिसमें नाक, मुंह और फेफड़ों की बाहरी परत को शामिल करने वाली कोशिकाएं शामिल हैं। अध्ययन के प्रमुख लेखक हैरिस लेविन ने कहा, हमें उम्मीद है कि यह उन प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करेगा, जो महामारी के दौरान पशु और मानव स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करती हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / अक्सर मन कुछ चटपटा खाने का करता है। ऐसे में बाहर से कुछ खाने की बजाय आप घर में ही भरवा चीज मिर्ची रेसिपी ट्राई कर सकते हैं। यह रेसिपी उन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी, जो तीखा या चटपटा खाने के शौकीन लोगों को खासतौर पर पसंद आएगी-
विधि:
5 हरी मिर्च
20 ग्राम पनीर
10 ग्राम जालपीनो
10 ग्राम अजवायन
10 ग्राम सफेद मिर्च पाउडर
आवश्यकतानुसार ब्रेड क्रम्ब्स
आवश्यकतानुसार पानी
20 ग्राम चेडर चीज़
10 ग्राम शिमला मिर्च (हरी मिर्च)
10 ग्राम मिर्च साबुत
10 ग्राम काली मिर्च
30 ग्राम बेसन (बेसन)
तलने के लिए तेल
विधि :
इस स्वादिष्ट रेसिपी को तैयार करने के लिए, मिर्च और शिमला मिर्च को पानी से धोएं फिर, हरी मिर्च को सेंटर से, लम्बाई में और शिमला मिर्च को डाइस करें। एक गहरी तली का पैन लें और मध्यम आंच पर रखकर उसमें पानी उबालें। अब मिर्च को इस खोलते हुए पानी में 1 मिनट के लिए डाल दें। एक मिनट बाद इन्हें बाहर निकालें और ठंडे पानी में धो लें।
एक बड़ा कटोरा लें और उसमें चीज़ और पनीर को पीस लें। अगर आपके पास चीज नहीं है, तो आप सिर्फ पनीर से भी काम चला सकते हैं
इस मिश्रण में सफेद काली मिर्च पाउडर, काली मिर्च और अजवायन के साथ घिसी हुई शिमला मिर्च, जालपैनो और चिली फ्लेक्स डालें। इस मिश्रण से मिर्च को स्टफ करें और एक तरफ रख दें।
एक बाउल लें और उसमें बेसन को पानी में मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ गाढ़ा बनाएं ताकि इसमें मिर्च डुबोने पर यह मिर्च को कवर करते हुए चिपक जाए। अब एक अलग बोल में ब्रेड का चूरा डालें और एक तरफ रख दें
एक कढ़ाही लें और उसे मध्यम आंच पर गर्म करें। अब उसमें तलने के लिए तेल गरम करें। इस बीच, भरवां मिर्च लें और उन्हें बैटर और फिर ब्रेड क्रम्ब्स में डिप करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए तो ध्यान से मिर्च को कढ़ाही में डालें और उन्हें सुनहरा भूरा होने तक तलें।
अच्छी तरह तल जाने पर इन्हें एक प्लेट में निकालें। इस प्लेट में पहले ही टिश्यू पेपर बिछाकर रख लें ताकि यह एक्स्ट्रा ऑइल सोख ले। अब इन्हें गर्मागर्म ही हरी और लाल चटनी के साथ सर्व करें।
सेहत / शौर्यपथ / काली मिर्च मसालों में एक ख़ास जगह रखता है। इसके इस्तेमाल से खाने का स्वाद बढ़ जाता है. आयुर्वेद में भी काली मिर्च को एक औषधि और जड़ी-बूटी माना जाता हैं। यही वजह है कि कोरोना वायरस महामारी से बचाव के लिए काली मिर्च को इम्युनिटी बूस्टर माना जाता है। काली मिर्च के कई फायदे हैं, जिनके बारे में जानकार आप इसका लाभ उठा सकते हैं।
काली मिर्च में पैपरीन नामक तत्व पाया जाता है। यह तत्व औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक, क्रोमियम, विटामिन ए और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
सर्दी-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।
100 ग्राम गुड़ पिघला कर 20 ग्राम काली मिर्च का पाउडर उसमंप मिलाएं। थोड़ा ठंडा होने पर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। खाना खाने के बाद 2-2 गोलियां खाने से खांसी में आराम मिलता है।
दो चम्मच दही, एक चम्मच चीनी और 6 ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटने से काली और सूखी खांसी में आराम मिलता है।
एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी मिलाकर खाने से जुकाम में बनने वाले कफ से राहत मिलेगी।
नाक में एलर्जी होने पर 10-10 ग्राम सोंठ, काली मिर्च, पिसी इलायची और मिश्री को पीस कर चूर्ण बना लें। इसमें बीज निकला 50 ग्राम मुनक्का और तुलसी के 10 पत्ते पीसकर डालें और अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण की 3-5 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। सुबह-शाम 2-2 गोलियां गर्म पानी के साथ लें।
पिसी काली मिर्च पुराने गुड़ के साथ खाने से नाक से बहता खून बंद हो जाता है।
गला बैठ गया है, तो 7 काली मिर्च और 7 बताशे रात को सोने से पहले चबाकर खाएं।
बुखार में तुलसी, काली मिर्च और गिलोय का काढ़ा पीना फायदेमंद होता है।
फेफड़े और सांस नली में संक्रमण होने पर काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन करें। इसके अलावा पिसी काली मिर्च, घी और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाएं। सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें, लाभ होगा।
काली मिर्च और काला नमक दही में मिलाकर खाने से पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। छाछ में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीटाणु मरते हैं और पेट की बीमारियां दूर होती हैं।
पेट में गैस की समस्या होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस, आधा चम्मच पिसी काली मिर्च और आधा चम्मच काला नमक मिला कर पिएं।
कब्ज होने पर 4-5 काली मिर्च के दाने दूध के साथ रात में लेने से आराम मिलता है।
बदहजमी होने पर कटे नीबू के आधे टुकड़े के बीज निकाल कर काली मिर्च और काला नमक भरें। इसे तवे पर थोड़ा गर्म करके चूसें।
20 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम जीरा और 15 ग्राम शक्कर या मिश्री पीस कर मिश्रण बना लें। इसे सुबह-शाम पानी के साथ फांक लें। बवासीर रोग में आराम मिलेगा।
काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च और चीनी मिला कर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम 5 चम्मच मिश्रण का सेवन करें।
नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर दांतों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है। दांतों में चमक और मजबूती बढ़ती है।
मुंह से बदबू आती है, तो दो काली मिर्च रात को ब्रश करने से पहले चबा लें।
ब्लड पे्रशर काबू करने के लिए दिन में 2-3 बार 5-5 दाने काली मिर्च के साथ 20-20 दाने किशमिश का सेवन करें।
हाई ब्लड प्रेशर में आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर घोल कर 2-2 घंटे
के अंतराल पर पीने से आराम मिलता है।
माइग्रेन होने पर एक कप दूध में एक चम्मच पिसी काली मिर्च और एक चुटकी हल्दी मिला कर उबाल कर पिएं।
काली मिर्च शहद में मिलाकर खाने से कमजोर याददाश्त में फायदा होता है।
चेहरे पर झाइयां होने पर एक गिलास गाजर के रस में नमक और पिसी काली मिर्च मिलाकर पीना फायदेमंद है।
चेहरे पर झाइयां होने पर काली मिर्च, जायफल और चंदन तीनों का पाउडर बराबर मात्रा में मिलाएं। 2-3 चुटकी पाउडर और थोड़ा पानी मिलाकर उबटन बनाएं। इसे चेहरे पर लगाएं। सूखने पर सादे पानी से चेहरा धो लें।
शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर काली मिर्च का लेप लगाएं, आराम मिलेगा।
खेल / शौर्यपथ / टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह का मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी में मैच को खत्म करने की जो स्किल्स थी, वो किसी और में नहीं है। इस मामले में उन्होंने धोनी को 'बीस्ट' बताया है। आरपी सिंह ने फिनिशर के तौर पर एक और खिलाड़ी का नाम लिया है, जिसने अपने देश को कई मैच जिताए और वो हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर माइकल बेवन, लेकिन साथ ही कहा कि धोनी जैसा कोई फिनिशर नहीं रहा है। अपने करियर में धोनी ने ज्यादातर नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी की है।
'खुद धोनी नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते थे'
आरपी सिंह का मानना है कि धोनी अगर बैटिंग ऑर्डर में ऊपर खेलने आते तो उनका रिकॉर्ड और भी बेहतर होता, लेकिन वो खुद लोअर ऑर्डर में खेले, जिससे वो दबाव में भी टीम को जीत दिला सकें। Cricket.com को दिए इंटरव्यू में आरपी सिंह ने कहा, 'अगर मैं गलत नहीं हूं तो धोनी ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि वो नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना चाहते हैं, लेकिन टीम ने सोचा था कि लोअर ऑर्डर में दबाव में उनसे बेहतर खेलने वाला और कोई नहीं है। अगर आप इस खेल के इतिहास के बारे में बात करें तो आपको कभी धोनी जैसा कोई खिलाड़ी नहीं मिलेगा, जिसने लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करके अपनी टीम को इतना सारे मैच जिताए हों।'
'अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं'
उन्होंने आगे कहा, 'हम माइकल बेवन के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन एमएस एकदम अलग तरह के 'बीस्ट' थे इस मामले में।' आरपी सिंह ने धोनी के ऑफ-फील्ड नेचर के बारे में भी बात की और कहा कि वो हमेशा से जमीन से जुड़े शख्स रहे हैं। उन्होंने कहा, 'वो हमेशा से जमीन से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। हम इसकी शिकायत करते रहते हैं कि वो हमारे फोन कॉल्स नहीं उठाते, एक बार उन्होंने मुनफ पटेल और मुझसे कहा था, जब मैं रिटायर हो जाऊंगा तो आधी रिंग में ही फोन उठा लूंगा, अब हम देखेंगे कि क्या वो सच में रिटायर हो गए हैं।'
धर्म संसार / शौर्यपथ / बलरामजी को विष्णुजी बताते हैं कि उसे शक्ति माता दुर्गा ने वर दिया है। यदि तुम वध करोगे तो ये अनुचित होगा। इसीलिए शिवजी के आशीर्वाद से कामदेव ने श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वीलोक पर संभरासुर का वध करने के लिए जन्म लिया है जो सर्वथा उचित है। मैं अलग-अलग माध्यमों से अधर्मियों का संहार करता हूं इस समय में प्रद्युम्न के माध्यम से संभरासुर का वध करूंगा। यही विधि का विधान है बलराम। यही भगवान शिवजी की इच्छा है। इसलिए प्रद्युम्न के लिए आतंकित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। बलराम वो सुरक्षित है बिल्कुल सुरक्षित। यह सुनकर बलरामजी प्रसन्न हो जाते हैं। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम श्रीकृष्ण वासुदेव का कहना मानो अत: तुम्हें पानी रोकने की आवश्यकता नहीं है। इस पर बलरामजी कहते हैं- जैसी आपकी आज्ञा भगवन। फिर विष्णुजी कहते हैं- बलराम अब तुम मेरा ये दर्शन भूल जाओगे और यह भी भूल जाओगे की तुम शेषनाग का अवतार हो।
फिर श्रीकृष्ण और बलराम खुद को उसी नदी के किनारे खड़ा पाते हैं तब बलरामजी कुछ समझ नहीं पाते हैं कि ये हुआ क्या। तभी श्रीकृष्ण कहते हैं- दाऊ भैया अब आप हल निकाल लीजिये। यह सुनकर बलरामजी कहते हैं- हल! इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं- हां दाऊ भैया हल निकाल लीजिये।..बलरामजी को कुछ समझ में नहीं आता है परंतु वे श्रीकृष्ण की आज्ञा मानकर हल निकाल लेते हैं तब सभी नदियों का प्रवाह पहले जैसा हो जाता है। फिर श्रीकृष्ण बलरामजी से कहते हैं- चलिये दाऊ भैया आइये। बलरामजी कुछ बोले बगैर ही उनके साथ हो लेते हैं।
उधर, संभरासुर जोर-जोर से हंसते हुए अपनी पत्नी से कहता है- और महारानी जिस कृष्ण ने हमसे हमारा पुत्र छीन लिया था हमने उससे उसका पुत्र छीन लिया है। काश आप देखती रानी कि कृष्ण की रानियां पुत्र शोक के कारण किस तरह से विलाप कर रही थीं। उन्हें शोकाकुल देखकर पुत्र वियोग के कारण मेरा शोकाकुल मन शांत हुआ था।
इधर, रुक्मिणी उदास बैठी रहती है अपने पुत्र वियोग में तो श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी अब ये भावुकता छोड़िये और इस नाटक से बाहर आइये। देखिये देवी हम जैसा चाहते थे वैसा ही हो गया। वाह देवी आपके अभिनय ने तो संभरासुर जैसे मायावी को भी धोखे में डाल दिया। यह सुनकर रुक्मिणी कहती हैं- वो अभिनय नहीं था भगवन, वो तो एक मां के दिल की वेदनाओं का प्रदर्शन था। मेरे आंसू झूठे नहीं थे। वह तो एक मां की आंखों में झलकने वाले ममता के मोती थे। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि देवी पृथ्वीलोक में निवास करने के बाद आप भी माया-मोह के चक्कर में उलझ गई।.. तब रुक्मिणी कहती हैं कि एक देवी के भीतर एक मां भी है। प्रद्युम्न और मेरा जब मिलन होगा तब वह बड़ा हो चुका होगा। उसका बचपन मेरे हाथ से फिसल गया है। जब वह पहली बार किसी को मां कहकर पुकारेगे तब मैं तो उसके पास भी नहीं होऊंगी भगवन।...इस तरह दोनों में वार्तालाप होता है।
बाद में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देखते हैं कि समुद्र में एक मछली के पेट के भीतर प्रद्युम्न है। यह देखकर रुक्मिणी कहती है वाह प्रभु! आपकी लीला अगाथ है। प्रद्युम्न को देखकर मेरा व्याकुल मन शांत हो गया। फिर यह बताया जाता है कि नाव में बैठे कुछ मछुआरे जाल डालकर उस मछली को पकड़ लेते हैं जिसने प्रद्युम्न को निगल लिया था।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देवी मायावी संभारासुर का वध करने के लिए प्रद्युम्न को भी मायावी विद्या की शिक्षा लेना जरूरी है। अब इन मछुआरों के माध्यम से प्रद्युम्न संभरासुर के साम्राज्य में प्रदेश करेगा और संभरासुर का काल बनेगा।
उधर, वो मुछआरे उस मछली को बड़ी मुश्किल से जल से बाहर निकालकर खुश हो जाते हैं। एक कहता है- बहुत बड़ी मछली फंसी आज। इतनी बड़ी मछली बेचेंगे कहां और खरीदेगा कौन? ऐसा लगता है कि मछली नहीं मजरमच्छ गले पड़ गया है। तब दूसरा कहता है यही तो समस्या है इसे हम कहां ले जाएंगे? तब तीसरा कहता है कि यदि हम इस मछली को महाराज संभरासुर को भेंट कर दें तो? इस पर एक कहता है वो क्यों? तब वह कहता है कि अरे! महाराज हमें इनाम देंगे तो हम वारे-न्यारे हो जाएंगे।
तब वे सभी उस मछली को ले जाकर महाराज संभरासुर को दे देते हैं। संभरासुर उस मछली को देखकर कहता है- वाह! महारानी हमारे इन शुभचिंतकों को इस अनुपम भेंट के लिए पुरुस्कार मिलना ही चाहिए। फिर उन मछु्आरों को महारानी मायावती सिक्कों की एक थैली दे देती हैं। वह थैली लेकर मछुआरे वहां से चले जाते हैं।
यह देखकर श्रीकृष्ण कहते हैं- देखा देवी! होनी जब होनी होने को आती है तो मनुष्य कैसा अंधा हो जाता है। इस समय संभरासुर के समक्ष यही समस्या है। उसे अपने समीप प्रद्युम्न के रूप में साक्षात मृत्यु दिखाई नहीं दे रही है। मूर्ख उस मछली को देखकर कितना प्रसन्न हो रहा है।
फिर उधर, संभरासुर अपने एक सेवक से कहता है- प्रतिहारी हमारे उस विशेष रसाइये भाणासुर को हमारा संदेश दो। कहो की महल में इसी समय उपस्थित हो। महाराज ने एक विशेष मछली का विशेष व्यंजन तैयार करने की आज्ञा दी है।..सेवक यह सुनकर कहता है- जो आज्ञा महाराज।
उधर, भाणासुर को बताया जाता है जो अपनी पत्नी के साथ भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष खड़ा होता है। उसकी पत्नी प्रार्थना करती है कि हे ईश्वर! तू ही जन्मदाता और तूही मृत्यु देने वाला, मेरी गोद कब से खाली है तू उसे भर दे प्रभु, जल्दी भर दे।....यह सुनकर भाणासुर कहता है तो तुम पहले से ही पूजा कर रही थी? यह सुनकर उसकी पत्नी कहती हैं- हां। तब वह कहता है तो अब तक क्यों नहीं सुनी तुम्हारे भगवान विष्णु ने तुम्हारी प्रार्थना? इस पर वह कहती है कि इसलिए की तुमने मेरे साथ प्रार्थना नहीं की। तुम केवल एक बार भगवान विष्णु की प्रार्थना करो। वो हमारी प्राथना अवश्य सुनेंगे। यह सुनकर भाणासुर कहता है- नहीं ये नहीं हो सकता।
तभी वहां पर संभरासुर का भेजा सेवक द्वार पर आवाज लगता है भाणासुर, ओ भाणासुर। ऐसा कहते हुए वह सेवक अंदर प्रवेश कर जाता है तो भाणासुर की पत्नी जल्दी से विष्णु की मूर्ति का परदा गिरा देती है।
फिर वह सैनिक कहता है- भाणासुर क्या कर रहे थे? यह सुनकर भाणासुर कहता है- कुछ नहीं परंतु तुम राजमहल छोड़कर इधर क्या कर रहे हो? तब वह सेवक कहता है कि असुरेश्वर ने तुम्हें तुरंत उपस्थित होने की आज्ञा दी है और तुम्हारी आज की छुट्टी रद्द की गई है। यह सुनकर वह कहता है कि परंतु महल में और भी तो दूसरे रसोईये हैं। तब वह सेवक कहता है- हैं पर असुरेश्वर को एक बहुत बड़ी मछली भेंट में मिली है और आप मछली के व्यंजन बनाने के विशेषज्ञ हैं। इसलिए महाराज ने आप दोनों को ये विशेष काम सौंपा है। चलिये, चलिये।
फिर भाणासुर और उसकी पत्नी दोनों ही राजमहल में जाकर देखते हैं वह विशालकाय मछली। यह देखकर उसकी पत्नी कहती हैं- इतनी बड़ी मछली इसे मैं काटूंगी कैसे? तब भाणासुर बड़ा छूरा देकर कहता है कि बड़ी मछली के लिए बड़ा छूरा। एक भाग तुम काटो और दूसरा भाग मैं काटता हूं। फिर भाणासुर मछली का पिछला हिस्सा और उसकी पत्नी अगला हिस्सा काटने लगते हैं तभी उसकी पत्नी को मछली के पेट में से छपाक-छपाक की आवाज सुनाई देती है तो वह कहती है स्वामी इसका पेट देख रहे हो कितना बड़ा है। ये अवश्य ही गर्भवती है, नहीं मैं इसे नहीं काटूंगी।
यह सुनकर उसका पति भाणासुर कहता है- अरी पगली! यदि ये मछली गर्भवती भी है तो इसके पेट से अंडा निकलेगा, बच्चा थोड़े ही निकलेगा। चलो काटो इसे जल्दी से, मुझे पहले से ही बहुत देर हो चुकी है। फिर भी उसकी पत्नी कहती है कि मैं इसे नहीं काटूंगी।... यह दृश्य देवर्षि नारद, देवी रति, रुक्मिणी और श्रीकृष्ण देख रहे होते हैं।
फिर भाणासुर की पत्नी मछली काटने लग जाती है और वे जैसे ही मछली का अगला हिस्सा काटकर अलग करती है तो उसकी पत्नी ये देखकर दंग रह जाते हैं कि उसके पेट में तो एक जिंदा बालक है। तभी प्रद्युम्न रोने लगता है। यह देखकर उसकी पत्नी आश्चर्य से कहती है- बालक! फिर वह उसे बाहर निकालकर कहती है- स्वामी स्वामी, ये देखिये ये बालक। भाणासुर भी उसे देखकर आश्चर्य करता है। उसकी पत्नी कहती है- स्वामी ये तो रो रहा है ये जीवित है स्वामी।...
उसकी पत्नी भगवान विष्णु का कोटि-कोटि धन्यवाद करती हैं। फिर वह अपने पति भाणासुर से कहती है कि अब तुम भी प्रार्थना करो। यह सुनकर उसका पति कहता है- अरे ये तुम क्या कह रही हो? पता नहीं किसका बच्चा है ये जिसे तुम अपना कह रही हो और इसका श्रेय भी तुम भगवान विष्णु को दे रही हो। तब उसकी पत्न कहती है कि कुछ भी हो ये भगवान विष्णु का ही उपहार है। तब उसका पति कहता है- इस झूठ को तुम भगवान विष्णु का उपहार कह रही हो। अपनी निराश ममता को इस झूठी आस से समझा रही हो। कितनी भोली हो तुम। आज तक तुम मुझसे छुपकर उस गुड़िया को सीने से लगाए मन को बहलाए करती थी अब तुम्हारे पागलपन को ये सचमुच की गुड़िया मिल गई है। मेरा मन तो यह नहीं मान सकता कि ये मेरा बच्चा है। तब उसकी पत्नी कहती है कि सबकुछ मानने से ही होता है स्वामी। मानो तो फूल है वर्ना माटी और धूल है।
यह सुनकर उसका पति कहता है- मानने के लिए कुछ तर्क तो होना चाहिए। ना तो तुमने इसे जन्मा है और ना तुमने इसे दूध पिलाया है फिर मां बेटे के संबंध को भला कोई क्यूं मानेगा? लाओ इस बच्चे को मुझे दे दो। महाराज के पास ले जाकर सब सच-सच बता दूंगा। यह सुनकर उसकी पत्नी कहती है कि नहीं नहीं मैं तुम्हें ऐसा अनर्थ नहीं करने दूंगी। ये बालक तो भगवान विष्णु का दिव्य उपहार है। उनकी पूजा से हमें ये मिला है। यह हमारे भाग्य से हमें ये मिला है। फिर ये बच्चा, इस बच्चे को तो मछली के पेट में ही समाप्त हो जाना चाहिए था। और, फिर ये मछली हमारे पास ही कटने के लिए क्यूं आती? दूसरे रसोइये के पास भी तो जा सकती थी। इधर हम बच्चे के लिए भगवान विष्णु की आराधना कर रहे थे और उधर वे हमारे लिए बच्चे का प्रबंध कर रहे थे। ये केवल बालक ही नहीं भगवान विष्णु की लीला है और आप इस लीला को नकार रहे हैं। उसे मुझसे छीन ले जाना चाहते हैं।
तब भाणासुर कहता है कि तुम्हारे भावुक होने से वास्तविकता तो नहीं बदल सकती। ना तो तुमने इसे जन्म दिया है और ना ही इसे दूध पिलाया है। लाओ ये बच्चा मुझे दे दो। ऐसा कहकर वह उसकी पत्नी से बच्चा छीनकर ले जाने लगता है तब उसकी पत्नी पीछे से उसका हाथ पकड़कर कहती है ये बच्चा मेरा है इसे मुझे दे दो।...तभी रुक्मिणी अपने चमत्कार से उसकी पत्नि के स्तन में दूधभर देती है और दूध बाहर झरने लगता है यह देखकर उसकी पत्नी कहती है- रुको स्वामी ये देखो। देखो ये क्या हो रहा है? ये देखो भगवान विष्णु की एक और लीला। उसका पति भी ये देखकर आश्चर्य करता है और कहता है ये तो सचमुच चमत्कार है।
फिर वह उस बच्चे को स्तनपान कराते हुए कहती है- स्वामी अब तो आपकी शिकायत दूर हो गई ना? अब ये बच्चा मेरा दूध पिकर मेरा हो गया है। अब ये मेरा बच्चा है और जब मैं इसकी मां बन गई हूं तो आप इसके पिता बन गए हैं ना? यह सुनकर भाणासुर कहता है- हां भानामति।.. तब भानामति कहती है कि तो फिर आप एक वचन दीजिये कि आप यह किसी को नहीं बताएंगे कि ये बच्चा मछली के पेट से मिला है। तब भाणासुर कहता है कि मैं वचन देता हूं। फिर भानामति कहती है कि आपका ये वचन मेरे माथे पर लगे बांछपन के कलंक को मिटा देगा।
फिर बाद में वे दोनों महाराज संभरासुर और रानी मायावती के पास जाकर उन्हें प्रणाम करते हैं और कहते हैं- महाराज ये हम दोनों का पहला पुत्र है। इसलिए हम दोनों आपसे आशीर्वाद लेने आएं हैं। यह सुनकर संभरासुर कहता है- लाओ हम भी देखें कि तुम्हारा पुत्र कैसा है।... यह सुनकर रति घबरा जाती है और नारदमुनि भी देखने लगते हैं। श्रीकृष्ण और रुक्मिणी भी इस घटना को देखते हैं।
फिर भाणासुर अपने पुत्र (प्रद्युम्न) को संभरासुर के हाथ में दे देता है। संभरासुर हंसते हुए उसे अपनी गोद में लेता है और तब फिर उस बालक को गौर से देखकर वह कुछ समझ नहीं पाता है तब फिर वह पूछता है ये तुम्हारा बालक है? यह सुनकर भाणासुर सकपका जाता तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- हां महाराज ये मेरा ही पुत्र है। फिर संभरासुर कहता है- ये बालक बड़ा ही शूरवीर लगता है। यह सुनकर भानापति कहती है- महाराज आप इसे लंबी आयु का आशीर्वाद दीजिये। यह सुनकर संभरासुर कहता है- आयुष्यमान भव:। ऐसा कहकर वह उस बालक को अपनी रानी मायावती के हाथ में देकर कहता है- लीजिये महारानी आप भी देखिये इस बालक को। महारानी हाथ में लेकर कहती है- बधाई हो भाणासुर, बधाई हो भानामति। तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हुई ये देखकर मुझे परम संतोष हुआ।
फिर संभरासुर अपने गले का एक हार निकालकर कहता है- ये लो भाणासुर हमारी तरफ से तुम्हारे पुत्र के लिए भेंट। क्या नामकरण किया है तुमने अपने पुत्र का? यह सुनकर भाणासुर कहता है- महाराज अभी तक नामकरण नहीं हुआ है। यह सुनकर रानी मायावती कहती है- क्यों भाणासुर? यह सुनकर भानामति कहती है यदि आप दोनों ही इसे आशीर्वाद देकर इसका नामकरण करेंगे तो हम धन्य हो जाएंगे महारानी। फिर भाणासुर कहता है कि महाराज संभरासुर जैसे परमप्रतापी, बलशाली, शौर्यशाली और महावीर का आशीर्वाद यदि हमारे पुत्र को प्राप्त हुआ तो भविष्य में हामारा पुत्र भी वीर बनकर दुष्टों को नष्ट करेगा। यह सुनकर गर्वित होकर संभरासुर कहता है- अवश्य करेगा। तुम्हारा पुत्र बड़ा होकर शत्रु का सर्वनाश करेगा।
फिर भाणासुर कहता है- महाराज इसका नामकरण तो कीजिये। यह सुनकर संभरासुर कुछ सोचने लग जाता है और फिर कहता है- हम इसका नाम प्रद्युम्न रखते हैं।... यह सुनकर देवर्षि और रति चौंक जाते हैं। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की ओर देखती है तो वे मुस्कुराने लगते हैं।
यह नाम सुनकर रानी मायावती संभरासुर की ओर देखकर कहती है- प्रद्युम्न! तब संभरासुर मुस्कुरा देता है। फिर भाणासुर और उसकी पत्नी कहती है- प्रद्युम्न अच्छा नाम है महाराज। अब आज्ञा दें महाराज। फिर वे दोनों वहां से चले जाते हैं तब मायावती पूछती है कि महाराज आपने ये कैसा नाम रखा है? तब संभरासुर कहता है क्यों मायावती आपको ये नाम पसंद नहीं आया? तब वह कहती हैं- परंतु प्रद्युम्न तो वासुदेव श्रीकृष्ण के पुत्र का नाम था। यह सुनकर संभरासुर कहता है कि तो क्या हुआ। भाणासुर और भानामति के पुत्र को देखकर न जाने क्यों मुझे कृष्ण का पुत्र याद आ गया। इसीलिए मैंने उसका नाम प्रद्युम्न रख दिया। यह सुनकर मायावती कहती है- परंतु शत्रु पुत्र का नाम अब इस महल में गुंजकर शत्रु की याद दिलाता रहेगा। यह सुनकर संभरासुर कहता है- नहीं मायावती नहीं, बल्कि शत्रु पर विजय की याद दिलाता रहेगा जिसके पुत्र का मैंने वध किया है।
फिर उधर रसोई घर में प्रद्युम्न रो रहा होता है तो उसकी पत्नी भानामति कहती है- आप ध्यान नहीं दे रहे इस पर। तब वह कहता है कि भानापति आज राजमहल में राजगुरु पधार रहे हैं उनके लिए भोजन बनाना है यदि देर हो गई तो महाराज क्रोधित हो जाएंगे। इसलिए तुम बालक को संभालो, मैं भोजन बनाता हूं। फिर भानामति बालक को चुप कराने लग जाती है।
उधर राजमहल के बाहर संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरते हैं।... उन्हें देखकर रति नारदमुनिक से कहती हैं- ये क्यों आए हैं? देवर्षि राजगुरु को देखकर मेरे मन में भय की आंधी क्यों उठ रही है। संभरासुर के राजगुरु का चेहरा बता रहा है कि वो ज्ञानी हैं, तपस्वी हैं।
संभरासुर के राजगुरु रथ से उतरकर राजमहल की छत पर देखते हैं तो उन्हें काला साया नजर आता है। तभी पास में खड़ा संभरासुर का पुत्र कुंभकेतु कहता है गुरुदेव आप रुक क्यों गए, क्या हुआ? तब वे कहते हैं कि मुझे राजमहल पर संकट की काली छाया दिखाई दे रही है। तब वह कुंभकेतु कहता है परंतु मुझे तो नहीं दिखाई दे रही गुरुदेव। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं तुम्हें वह काली छाया नहीं दिखाई देगी युवराज कुंभकेतु। तब कुंभकेतु कहता है यदि काली छाया है भी तो इसमें संकट की क्या बात है गुरुदेव? तब वे कहते हैं ये छाया घोर संकट का प्रतीक है कुंभकेतु। राजमहल पर अवश्य ही कोई विकट समय आने वाला है।
फिर गुरुदेव अपनी शक्ति से भगवान शंकर का नाम लेकर उस काली छाया से प्रकट होने का कहता है और पूछते हैं बताओ की तुम कौन हो तो वह काली छाया प्रकट होकर कहती है कि मैं काल हूं और संभरासुर का भक्षण करूंगा। यह सुनकर गुरुदेव कहते हैं- परंतु संभरासुर तो अजेय और अमर हैं। यह सुनकर काल कहता है कि केवल में ही अजर और अमर हूं और कोई नहीं। ये उसकी भूल है मैं संभरासुर का काल हूं। यह सुनकर गुरुदेव चौंक जाते हैं। जय श्रीकृष्णा।
शौर्यपथ / अधिकतर लोग हैं जिन्हें कि भूख नहीं लगती है, ऐसे में उन्हें कई तरह की सेहत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कमजोरी लगना, वेट लॉस जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यदि आप भी उन लोगों में शुमार हैं तो हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जिनके उपयोग से आप इन समस्याओं से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं-
कहते हैं कि जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें छोटी प्लेट में खाना खाना चाहिए, वहीं जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें बड़ी प्लेट में खाना खाना चाहिए। कम-कम लेकिन ज्यादा बार खाने से आपके शरीर में और खाना खाने की इच्छा पैदा होगी। छोटे-छोटे बैच में खाना खाने का एक लाभ यह भी होगा कि आपको एकदम पेट भरा हुआ नहीं लगेगा
स्वास्थ्य के लिए हेल्दी स्नैक्स लेते रहने से फायदा ये होगा कि लंच का समय या डिनर का समय आने तक आपको अच्छी भूख लगने लगेगी। घर के अलग-अलग हिस्से जैसे जहां आप काम करते है, किचन या आप जहां ज्यादा समय बिताते है।
हेल्दी स्नैक्स वहां रखें ऐसे में आपका मन होगा कुछ न कुछ खाने का लेकिन इस बात का भी ख्याल रखें कि ये स्नैक्स आप लंच या डिनर से ठीक पहले न खाएं।
मसालेदार खाने कि खूशबू अच्छी आती है और स्वादिष्ट भोजन कि खूशबू
का सीधा संबंध आपकी भूख से होता है। अच्छे खाने की सुगंध आपको भूख का एहसास कराती है। इसके अलावा खाने को हरा धनिया या दूसरी चीजों से सजाने से वह अच्छा दिखता है। इससे भी उसे खाने की इच्छा पैदा होती है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / पीरियड्स देरी से आने की समस्या कई महिलाओं व युवतियों को होती है। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे सामान्य कारण जो इस समस्या की वजह हो सकते है। अगर महिलाएं इन 5 कारणों की जानकारी रखें, तो अपने पीरियड्स को नियमित कर सकती है -
1 कम या अधिक उम्र में माहवारी की शरुआत होना कई बार माहवारी में अनियमिता पैदा करता है, जो कि सामान्य बात है। समय के साथ ये
नियमन हो हाती है, अत: चिंता की बात नहीं है।
2 वजन का अत्यधिक बढ़ना या मोटापा भी माहवारी में अनियमितता का एक प्रमुख कारण है। कई बार यह समस्या थायरॉइड के कारण होती है, अत: डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
3 हमारी दिनचर्या और खानपान में बदलाव के कारण भी कई बार माहवारी देरी से आने की समस्या होती है। ऐसे में अपनी जीवनशैली और डाइट को व्यवस्थित कर आप इसे नियमित कर सकते हैं।
4 माहवारी देरी से होने का एक गंभीर कारण पॉलिसिस्टिक ओवरी सिड्रोम हो सकता है, अत: ऊपर दिए गए कारणों के अलावा अगर ऐसा होता है तो इसकी जांच जरूर करवाएं।
5 तनाव एवं जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज भी माहवारी को प्रभावित करने वाला एक बड़ा कारण है। ओवरी यानि अंडाशय पर सिस्ट अर्थात आवरण बन जाने के कारण भी अक्सर ऐसा होता है।
सेहत / शौर्यपथ / आयुर्वेद में नीम को औषधि बताया गया है। सौंदर्य से लेकर सेहत तक सभी में नीम बेहद गुणकारी माना जाता है, वहीं चेहरे पर मुंहासे हो या पेट संबंधी कोई भी समस्या नीम की पत्तियों से कई फायदे होते हैं। वहीं संक्रमण से निजात दिलाने के लिए नीम की पत्तियां बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। तो आइए जानते हैं नीम के बेहतरीन सेहत और सौंदर्य लाभ के बारे में।
यदि चेहरे पर मुंहासे की समस्या है तो नीम आपके बहुत काम आ सकता है। इसके लिए आप नियमित रूप से नीम के जूस के सेवन से इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। आपको बस करना यह है कि नीम की पत्तियों को अच्छी तरह से धो व पीसकर इसका जूस तैयार कर लें और इसका नियमित सेवन करें। ऐसा करने से आपका खून साफ होगा तथा त्वचा में निखार आएगा, मुंहासे की समस्या खत्म हो जाएगी।
दांतों को मजबूत करने के लिए नीम की दातून खूब फायदेमंद होती है। इससे दांतदर्द से आराम भी मिलता है, साथ ही दांतों में चमक भी आती है।
रूखे व बेजान बालों से छुटकारा पाने के लिए आप नीम के पत्तों को उबालकर इसमें तेल मिलाएं। फिर इसे अपने बालों पर लगाएं। इससे बालों में चमक तो आएगी ही, साथ ही बाल झड़ने की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
मुंहासों के दाग-धब्बों से परेशान हैं तो नीम का फेसमास्क इसके लिए बहुत फायदेमंद है। फेसपैक के लिए आप नीम की पत्तियों को अच्छी तरह से पीसकर इसका पेस्ट बना लें और इसे नियमित रूप से अपने चेहरे पर लगाएं। इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर चमक आएगी, साथ ही मुंहासे के दाग भी हल्के होने लगेंगे।
सिरदर्द, दांत दर्द, हाथ-पैर दर्द और सीने में दर्द की समस्या होने पर नीम के तेल की मालिश से काफी लाभ मिलता है। इसके फल का उपयोग कफ और कृमिनाशक के रूप में किया जाता है।
नीम की पत्तियों को पीसकर जलने या घाव पर लगाने से दर्द और घाव जल्दी भर जाता है।
सेहत / शौर्यपथ / हम आपको बता रहे हैं ऐसी चीजों के बारे में जिनका सेवन यदि आप रात के समय करते हैं तो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जहां तक संभव हो इन 8 चीजों को रात के समय खाने से बचें -
1 स्नैक्स - रात के वक्त कुछ चीजें खाने से आप तौबा ही करें तो बेहतर होगा। इनमें स्नैक्स या चिप्स जैसी चीजें भी शामिल है। हालांकि इनका सेवन दिन के वक्त भी नुकसानदेह ही होता है। दरअसल इनमें अत्यधिक मात्रा में मोनोसोडियम ग्लूटामेट होता है, जो आपको नींद संबंधी समस्याएं देने के साथ ही, अन्य स्वास्थ्य परेशानियां भी दे सकता है।
2 एल्कोहल - रात को सोने से ठीक पहले किसी भी प्रकार का नशा या अल्कोहल का सेवन आपके लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। खास तौर से वाइन नींद की गुणवत्ता को खराब करती है नींद के समय को कम कर देती है। इसमें कैलोरी भी बहुत अधिक मात्रा में होती है।
3 पिज्जा - अक्सर रात के वक्त पार्टी या बाहर जाकर खाने में लोग पिज्जा पसंद करते हैं। लेकिन इसे पचाने में आपके पाचन तंत्र को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा पिज्जा में चिकनाई बहुत अधिक होती है और इसमें जो सॉस व अन्य मसाले प्रयोग किए जाते हैं, वे आपके लिए हार्टबर्न का खतरा बढ़ा देते हैं। इसलिए कोशिश करें कि रात के वक्त इसका प्रयोग बिल्कुल न करें।
4 बर्गर - सोने से पहले बर्गर खाना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है। बर्गर में चीज व सॉस का प्रयोग कर हम इसे भले ही इसका स्वाद बढ़ा लेते हैं, लेकिन यही चीजें पेट में प्राकृतिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाती हैं, जिससे हार्टबर्न की समस्या हो सकती है। इसलिए कोशिश करें की चीज और सॉस से युक्त बर्गर का सेवन न ही करें।
5 पास्ता - पास्ता कैलोरी से भरपूर होता है,और इसमें सबसे अधिक कैलोरी होती है। इसमें अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है जो वसा में बदल जाता है। इसके अलावा इसे चीज और अन्य फैटी चीजों के साथ बनाया जाता है जिससे इसका ग्लासिमिक सूचकांक बहुत अधिक होता है। रात के समय इसका प्रयोग हृदय और पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होता है।
6 ऐसी सब्जियां - कुछ सब्जियों में अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो लंबे समय तक आपका पेट भरा रखती है, और पाचन तंत्र धीमी गति से कार्य करने लगता है। ऐसे में आपको गैस या पाचन संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती है। ऐसी सब्जियों को रात के वक्त खाने से बचना चाहिए। प्याज, ब्रोकोली, पत्तागोभी आदि सब्जियां इनमें शामिल है।
7 रेड मीट - रेड मीट प्रोटीन और आयरन का स्रोत है। लेकिन इसका अधिक सेवन करने से आपको बेचैनी हो सकती है और यह आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकता है। तो अगर आप शांति से गहरी नींद लेना चाहते हैं, तो रात में रेड मीड को नजरअंदाज करें।
8 डॉर्क चॉकलेट - डार्क चॉकलेट में बहुत अधिक मात्रा में कैफीन व अन्य उत्तेजक पदार्थ होते हैं, जो हृदय को आराम देने के बजाए कार्यशील रखते हैं तथा मस्तिष्क को केंद्रित रखते हैं। इससे आपकी नींद बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।
धर्म संसार / शौर्यपथ / क्या है श्री गणेश और संगीत का रिश्ता
हिन्दू धर्म का नृत्य, कला, योग और संगीत से गहरा नाता रहा है। हिन्दू धर्म मानता है कि ध्वनि और शुद्ध प्रकाश से ही ब्रह्मांड की रचना हुई है। भारत में संगीत की परंपरा अनादिकाल से ही रही है।
हिन्दुओं के लगभग सभी देवी और देवताओं के पास अपना एक अलग वाद्य यंत्र है। विष्णु के पास शंख है तो शिव के पास डमरू, नारद मुनि और सरस्वती के पास वीणा है, तो भगवान श्रीकृष्ण के पास बांसुरी। देवर्षि नारद के हाथों में एकतारा हमेशा रहता है। खजुराहो के मंदिर हो या कोणार्क के मंदिर, प्राचीन मंदिरों की दीवारों में गंधर्वों की मूर्तियां आवेष्टित हैं। उन मूर्तियों में लगभग सभी तरह के वाद्य यंत्र को दर्शाया गया है। गंधर्वों और किन्नरों को संगीत का अच्छा जानकार माना जाता है।
सामवेद उन वैदिक ऋचाओं का संग्रह मात्र है, जो गेय हैं। संगीत का सर्वप्रथम ग्रंथ चार वेदों में से एक सामवेद ही है। इसी के आधार पर भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र लिखा और बाद में संगीत रत्नाकर, अभिनव राग मंजरी लिखा गया। दुनियाभर के संगीत के ग्रंथ सामवेद से प्रेरित हैं।
गणेशजी का वाद्ययंत्र ढोल : गणेशजी को मूर्ति और उनके चित्रों में वीणा, सितार और ढोल बाजाते हुए दर्शाया जाता है। कहीं कहीं पर उन्हें बांसुरी बजाते हुए भी चित्रित किया गया है। वैसे गणेशजी भी संगीत प्रेमी हैं। अक्सर तो उन्हें ढोल व मृदंग बजाते हुए ही चित्रित किया गया है। ढोल सागर ग्रंथ के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने ढोल का निर्माण किया था। कहते हैं कि विष्णुजी ने तांबा धातु को गलाया और ब्रह्माजी ने उस ढोल में ब्रह्म कनौटी लगाई और ढोल के दोनों ओर सूर्य और चंद्रमा के रूप में खालें लगाई गईं।
जब ढोल बन गया तो भगवान शंकर ने खुश होकर नृत्य किया तब उनके पसीने से एक कन्या 'औजी' पैदा हुई जिन्हें इस ढोल को बजाने की जिम्मेदारी दी गई। कहते हैं कि औजी ने ही इस ढोल को उलट-पलट कर चार शब्द- वेद, बेताल, बाहु और बाईल का निर्माण किया था।
श्री गणेश के ये 7 दुर्लभ धन मंत्र आपको कहीं नहीं मिलेंगे
श्रीगणेश के कई मंत्र हैं जो गणेशोत्सव के 10 दिनों में भक्तों द्वारा जपे जाते हैं... वेबदुनिया के पाठकों के लिए हम पुराणों से लाए हैं 7 दुर्लभ धन मंत्र... ये गणेश धन मंत्र निश्चित रुप से असरकारी हैं...
* श्रीपतये नमः,
* रत्नसिंहासनाय नमः
* मणिकुंडलमंडिताय नमः
* महालक्ष्मी प्रियतमाय नमः
* सिद्ध लक्ष्मी मनोरहप्रियाय नमः
* लक्षाधीश प्रियाय नमः
* कोटिधीश्वराय नमः
भगवान श्री गणेश इस समय घर-घर में विराजित हैं,आइए जानते हैं कि लम्बोदर विनायक को कौन से मंत्र से प्रसन्न करें....
1. ॐ सुमुखाय नम:,
2. ॐ एकदंताय नम:,
3. ॐ कपिलाय नम:,
4. ॐ गजकर्णाय नम:,
5. ॐ लंबोदराय नम:,
6. ॐ विकटाय नम:,
7. ॐ विघ्ननाशाय नम:,
8. ॐ विनायकाय नम:,
9. ॐ धूम्रकेतवे नम:,
10. ॐ गणाध्यक्षाय नम:,
11. ॐ भालचंद्राय नम:,
12. ॐ गजाननाय नम:।
श्रीगणेश को प्रिय है यह गणेश कुबेर मंत्र
मंत्र - 'ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा'।
गणेशोत्सव में प्रतिदिन इस मंत्र की एक माला (108 बार मंत्र जाप) करने से मनुष्य के धन संबंधी सारे संकट दूर होते हैं।
श्री गणेश के 108 नामों के हिन्दी अर्थ
भारतीय धर्म और संस्कृति में भगवान गणेशजी सर्वप्रथम पूजनीय और प्रार्थनीय हैं। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। उनकी पूजा के दौरान इन 108 नामों का जपने से सभी तरह के मांगलिक कार्य के विघ्न हट जाते हैं।
गणेश नामावली-108
1. बाल गणपति : सबसे प्रिय बालक।
2. भालचन्द्र : जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो।
3. बुद्धिनाथ : बुद्धि के भगवान।
4. धूम्रवर्ण : धुएं को उड़ाने वाला।
5. एकाक्षर : एकल अक्षर।
6. एकदन्त : एक दांत वाले।
7. गजकर्ण : हाथी की तरह कान वाला।
8. गजानन : हाथी के मुख वाले भगवान।
9. गजवक्र : हाथी की सूंड वाला।10. गजवक्त्र : जिसका हाथी की तरह मुंह है।
11. गणाध्यक्ष : सभी गणों का मालिक।
12. गणपति : सभी गणों के मालिक।
13. गौरीसुत : माता गौरी का बेटा।
14. लम्बकर्ण : बड़े कान वाले देव।
15. लम्बोदर : बड़े पेट वाले।
16. महाबल : अत्यधिक बलशाली वाले प्रभु।
17. महागणपति : देवातिदेव।18. महेश्वर : सारे ब्रह्मांड के भगवान।
19. मंगलमूर्ति : सभी शुभ कार्य के देव।
20. मूषक वाहन : जिसका सारथी मूषक है।
21. निदीश्वरम : धन और निधि के दाता।
22. प्रथमेश्वर : सबके बीच प्रथम आने वाला।
23. शूपकर्ण : बड़े कान वाले देव।
24. शुभम : सभी शुभ कार्यों के प्रभु।
25. सिद्धिदाता : इच्छाओं और अवसरों के स्वामी।
26. सिद्धिविनायक : सफलता के स्वामी।
27. सुरेश्वरम : देवों के देव।
28. वक्रतुण्ड : घुमावदार सूंड।
29. अखूरथ : जिसका सारथी मूषक है।
30. अलम्पता : अनन्त देव।
31. अमित : अतुलनीय प्रभु।
32. अनन्तचिदरुपम : अनंत और व्यक्ति चेतना।
33. अवनीश : पूरे विश्व के प्रभु।
34. अविघ्न : बाधाओं को हरने वाले।
35. भीम : विशाल।
36. भूपति : धरती के मालिक।
37. भुवनपति : देवों के देव।
38. बुद्धिप्रिय : ज्ञान के दाता।
39. बुद्धिविधाता : बुद्धि के मालिक।
40. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले।
41. देवादेव : सभी भगवान में सर्वोपरि।
42. देवांतकनाशकारी : बुराइयों और असुरों के विनाशक।
43. देवव्रत : सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले।
44. देवेन्द्राशिक : सभी देवताओं की रक्षा करने वाले।
45. धार्मिक : दान देने वाला।
46. दूर्जा : अपराजित देव।
47. द्वैमातुर : दो माताओं वाले।
48. एकदंष्ट्र : एक दांत वाले।
49. ईशानपुत्र : भगवान शिव के बेटे।
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50. गदाधर : जिसका हथियार गदा है।
51. गणाध्यक्षिण : सभी पिंडों के नेता।
52. यशस्कर : प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी।
53. गुणिन : जो सभी गुणों के ज्ञानी।
54. हरिद्र : स्वर्ण के रंग वाला।
55. हेरम्ब : मां का प्रिय पुत्र।
56. कपिल : पीले भूरे रंग वाला।
57. कवीश : कवियों के स्वामी।
58. कीर्ति : यश के स्वामी।
59. कृपाकर : कृपा करने वाले।
60. कृष्णपिंगाश : पीली भूरी आंख वाले।
61. क्षेमंकरी : माफी प्रदान करने वाला।
62. क्षिप्रा : आराधना के योग्य।
63. मनोमय : दिल जीतने वाले।
64. मृत्युंजय : मौत को हरने वाले।
65. मूढ़ाकरम : जिनमें खुशी का वास होता है।
66. मुक्तिदायी : शाश्वत आनंद के दाता।
67. नादप्रतिष्ठित : जिसे संगीत से प्यार हो।
68. नमस्थेतु : सभी बुराइयों और पापों पर विजय प्राप्त करने वाले।
69. नन्दन : भगवान शिव का बेटा।
70. सिद्धांथ : सफलता और उपलब्धियों के गुरु।
71. पीताम्बर : पीले वस्त्र धारण करने वाला।
72. प्रमोद : आनंद।
73. पुरुष : अद्भुत व्यक्तित्व।
74. रक्त : लाल रंग के शरीर वाला।
75. रुद्रप्रिय : भगवान शिव के चहेते।
76. सर्वदेवात्मन : सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकार्ता।
77. सर्वसिद्धांत : कौशल और बुद्धि के दाता।
78. सर्वात्मन : ब्रह्मांड की रक्षा करने वाला।
79. ओमकार : ओम के आकार वाला।
80. शशिवर्णम : जिसका रंग चंद्रमा को भाता हो।
81. शुभगुणकानन : जो सभी गुण के गुरु हैं।
82. श्वेता : जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध है।
83. सिद्धिप्रिय : इच्छापूर्ति वाले।
84. स्कन्दपूर्वज : भगवान कार्तिकेय के भाई।85. सुमुख : शुभ मुख वाले।
86. स्वरूप : सौंदर्य के प्रेमी।
87. तरुण : जिसकी कोई आयु न हो।
88. उद्दण्ड : शरारती।
89. उमापुत्र : पार्वती के बेटे।
90. वरगणपति : अवसरों के स्वामी।
91. वरप्रद : इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता।
92. वरदविनायक : सफलता के स्वामी।
93. वीर गणपति : वीर प्रभु।
94. विद्यावारिधि : बुद्धि के देव।
95. विघ्नहर : बाधाओं को दूर करने वाले।
96. विघ्नहर्ता : बुद्धि की देव।
97. विघ्नविनाशन : बाधाओं का अंत करने वाले।
98. विघ्नराज : सभी बाधाओं के मालिक।
99. विघ्नराजेन्द्र : सभी बाधाओं के भगवान।
100. विघ्नविनाशाय : सभी बाधाओं का नाश करने वाला।
101. विघ्नेश्वर : सभी बाधाओं के हरने वाले भगवान।
102. विकट : अत्यंत विशाल।
103. विनायक : सबका भगवान।
104. विश्वमुख : ब्रह्मांड के गुरु।
105. विश्वराजा : संसार के स्वामी।
105. यज्ञकाय : सभी पवित्र और बलि को स्वीकार करने वाला।
107. यशस्विन : सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव।
108. योगाधिप : ध्यान के प्रभु।
भगवान गणेश जी का संपूर्ण परिचय
भगवान गणेशजी को भारतीय धर्म और संस्कृति में प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। सभी मांगलिक कार्य में पहले गणेश जी की स्थापना और स्तुति की जाती है। आओ जानते हैं भगवान गणेशजी के संबंध में संपूर्ण परिचय।
गणेश जन्म : माता पार्वती द्वारा पुण्यक व्रत के फलस्वरूप गणेशजी का जन्म हुआ था। बाद के पुराणों में उनके जन्म के संबंध में कहा गया है माता ने अपनी सखी जया और विजया के कहने पर एक गण की उत्पति अपने मैल से की थी। जन्म समय माथुर ब्राह्मणों के इतिहास अनुसार अनुमानत: 9938 विक्रम संवत पूर्व भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। पौराणिक मत के अनुसार सतुयग में हुआ था।
गणेश जन्म स्थान : उत्तरकाशी जिले के डोडीताल को गणेशजी का जन्म स्थान माना जाता है। यहां पर माता अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर हैं जहां गणेशजी अपनी माता के साथ विराजमान हैं। डोडीताल, जोकि मूल रूप से बुग्याल के बीच में काफी लंबी-चौड़ी झील है, वहीं गणेश का जन्म हुआ था। यह भी कहा जाता है कि केलसू, जो मूल रूप से एक पट्टी है (पहाड़ों में गांवों के समूह को पट्टी के रूप में जाना जाता है) का मूल नाम कैलाशू है। इसे स्थानीय लोग शिव का कैलाश बताते हैं। केलसू क्षेत्र असी गंगा नदी घाटी के सात गांवों को मिलाकर बना है। गणेश भगवान को स्थानीय बोली में डोडी राजा कहा जाता हैं जो केदारखंड में गणेश के लिए प्रचलित नाम डुंडीसर का अपभ्रंश है। मान्यता अनुसार डोडीताल क्षेत्र मध्य कैलाश में आता था और डोडीताल गणेश की माता और शिव की पत्नी पार्वती का स्नान स्थल था। स्वामी चिद्मयानंद के गुरु रहे स्वामी तपोवन ने मुद्गल ऋषि की लिखी मुद्गल पुराण के हवाले से अपनी किताब हिमगिरी विहार में भी डोडीताल को गणेश का जन्मस्थल होने की बात लिखी है। वैसे कैलाश पर्वत तो यहां से सैंकड़ों मील दूर है परंतु स्थानीय लोग मानते हैं कि एक समय यहां माता पार्वती विहार पर थी तभी गणेशजी का जन्म हुआ था।
गणेश के नाम : कहते हैं कि गणेशजी का मूल नाम विनायक है। इसके बाद गणेश और गणों के ईश गणपति हुए। देव समुदाय ने उन्हें गांगेय कहकर सम्मान दिया और ब्रह्मा जी ने उन्हें गणों का आधिपत्य प्रदान करके गणेश नाम दिया। दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ ऋग्वेद में भी भगवान गणेशजी का जिक्र है। ऋग्वेद में 'गणपति' शब्द आया है। यजुर्वेद में भी ये उल्लेख है। बाद के नाम किसी न किसी कथा से जुड़े हैं। गणेशजी नाम : सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, विघ्नराज, द्वैमातुर, गणाधिप, हेरम्ब, गजानन, अरुणवर्ण, गजमुख, लम्बोदर, अरण-वस्त्र, त्रिपुण्ड्र-तिलक, मूषकवाहन। उन्हें एकदंत इसलिए कहा जाता है क्योंकि परशुरामजी ने उनका एक दांत तोड़ दिया था। उन्हें गजानन इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे गज (हाथी) के मुख के थे।
गणेश जी का मस्तक : उन्हें गजानन इसलिए कहा गया कि उनके सिर को भगवान शंकर ने काट दिया था। बाद में उनके धड़ पर हाथी का सिर लगा कर उन्हें पुन: जीवित किया गया। यह भी कहा जाता है कि शनिदेव जब बाल गणेश को देखने गए तो उनकी दृष्टि से उनका मस्तक भस्म हो गया था बाद में विष्णुजी ने एक हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर उन्हें पुनर्जिवित कर दिया था।
अग्रपूजक कैसे बने : एक बार देवताओं में धरती की परिक्रमा की प्रतियोगिता हुई जिसमें जो सबसे पहले परिक्रमा करके आ जाता उसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता। प्रतियोगिता प्रारंभ हुई परंतु गणेश जी का वाहन तो मूषक था तब उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और उन्होंने अपने माता पिता शिव एवं पार्वती की ही परिक्रमा कर ली। ऐसा करके उन्होंने संपूर्ण ब्रह्माण्ड की ही परिक्रमा कर ली। तब सभी देवों की सर्वसम्मति और ब्रह्माजी की अनुशंसा से उन्हें अग्रपूजक माना गया। इसके पीछे और भी कथाएं हैं। पंच देवोपासना में भगवान गणपति मुख्य हैं।
गणेश जी का परिवार : उनकी माता का नाम पार्वती और पिता का नाम शिव। भाई कार्तिकेय और बहन अशोक सुंदरी है। उनकी पत्नी प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि हैं। सिद्धि से 'क्षेम' और ऋद्धि से 'लाभ' नाम के दो पुत्र हुए। लोक-परंपरा में इन्हें ही शुभ-लाभ कहा जाता है। शुभ और लाभ के पुत्र आमोद और प्रमोद हैं।
गणेशजी की पसंद : उनका प्रिय भोग मोदक लड्डू, प्रिय पुष्प लाल रंग के फूल, प्रिय वस्तु दुर्वा (दूब), प्रिय वृक्ष शमी-पत्र, केल, केला आदि हैं। केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा और आरती की जाती है। उनको मोदक का लड्डू अर्पित किया जाता है। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं।
गणेशजी का स्वरूप : जल तत्व के अधिपति, बुधवार और चतुर्थी के स्वामी और केतु एवं बुध के ग्रहाधिपति गणेश जी के प्रभु अस्त्र पाश और अंकुश है। वे मूषक वाहन पर सवार रहते हैं। वे एकदन्त और चतुर्बाहु हैं। अपने चारों हाथों में वे क्रमश: पाश, अंकुश, मोदक पात्र तथा वरमुद्रा धारण करते हैं। वे रक्तवर्ण, लम्बोदर, शूर्पकर्ण तथा पीतवस्त्रधारी हैं। वे रक्त चंदन धारण करते हैं।
भगवान गणेशजी का सतयुग में वाहन सिंह है और उनकी भुजाएं 10 हैं तथा नाम विनायक। श्री गणेशजी का त्रेतायुग में वाहन मयूर है इसीलिए उनको मयूरेश्वर कहा गया है। उनकी भुजाएं 6 हैं और रंग श्वेत। द्वापरयुग में उनका वाहन मूषक है और उनकी भुजाएं 4 हैं। इस युग में वे गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं और उनका वर्ण लाल है।कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है और वर्ण धूम्रवर्ण है। इनकी 2 भुजाएं हैं और इस युग में उनका नाम धूम्रकेतु है।
गणेशजी के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग : मस्तक प्रसंग, पृथ्वी प्रदक्षिणा प्रसंग, मूषक (गजमुख) वाहन प्राप्ति प्रसंग, गणेश विवाह प्रसंग, संतोषी माता उत्पत्ति प्रसंग, विष्णु विवाह में उन्हें नहीं बुलाने का प्रसंग, असुर (देवतान्तक, सिंधु दैत्य, सिंदुरासुर, मत्सरासुर, मदासुर, मोहासुर, कामासुर, लोभासुर, क्रोधासुर, ममासुर, अहंतासुर) वध प्रसंग, महाभारत लेखन प्रसंग आदि। उन्होंने अपने भाई कार्तिकेय के साथ कई युद्धों में लड़ाई की थी।
गणेश ग्रंथ : गणेश का गाणपतेय संप्रदाय है। उनके ग्रंथों में गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेशजी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, गणेशकवच, संतान गणपति स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र आदि।
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सेक्स वर्कर्स को लेकर कोई ठोस रेगुलेशन न होने के बावजूद भारत में दुनिया के कई बड़े रेड लाइट एरिया हैं. आइए नजर डालते हैं इनमें से कुछ खास पर...
1. सोनागाछी, कोलकाता
इसे एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया भी कहा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां करीब 11 हजार सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. इनमें कम उम्र से लेकर 40 साल से अधिक उम्र की महिलाएं भी शामिल हैं. यहां सैकड़ों बहुमंजिला इमारते हैं जहां सेक्स वर्कर्स रहती हैं और ग्राहकों का इंतजार करती हैं. सोनागाछी रेड लाइट एरिया के ऊपर बनाई गई डॉक्युमेंट्री Born into Brothels को ऑस्कर अवॉर्ड भी मिल चुका है.

2. कमाठीपुरा, मुंबई
यह देश का दूसरे सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है. 25 साल पहले यहां करीब 50,000 सेक्स वर्कर्स हुआ करती थीं. लेकिन बाद के सालों में इनकी संख्या में कमी आई. जगह की कमी और रहने की दिक्कत की वजह से कई सेक्स वर्कर्स महाराष्ट्र के दूसरे जगहों पर चली गईं. 2005 में डांस बार पर बैन लगने के बाद काफी लड़कियां कोई और रोजगार नहीं मिलने पर सेक्स वर्कर के रूप में यहीं काम करने लगी थीं.

3. बुधवार पेठ, पुणे
यहां करीब 5 हजार सेक्स वर्कर काम कर रही हैं. बुधवार पेठ में करीब 400 कोठे हैं और 7 हजार सेक्स वर्कर्स काम कर रही हैं. यहां दिन में जहां बाजार पसरा होता है, दुकानों की रौनक होती है, उसी जगह पर शाम में सेक्स वर्कर अपने ग्राहकों की तलाश करती हैं.

4. मीरगंज, इलाहाबाद
इलीगल ट्रैफिकिंग के लिए इस रेडलाइट एरिया को अधिक बदनाम माना जाता है. कई बार पुलिस ने यहां कार्रवाई करके महिलाओं को छुड़ाया है. यहां 4 गलियां हैं जहां सेक्स वर्कर रहती हैं. शुरुआत में मीगरगंज में मुजरा का भी आयोजन होता था.
5. जीबी रोड
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास स्थित जीबी रोड रेड लाइट एरिया में करीब 1000 सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. दो से तीन मंजिली इमारतों में यहां महिलाएं रहती हैं. इन घरों के निचले फ्लोर में दुकानें हैं. रोड का नाम गार्स्टिन बैस्टन होने की वजह से इसे जीबी रोड कहा जाता है. हालांकि, बाद में सड़क का नाम बदलकर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग कर दिया गया, लेकिन लोग इसे जीबी रोड के नाम से ही याद रखे हैं.

6. चतुर्भुज स्थान, मुजफ्फरपुर, बिहार
यहां एक मशहूर मंदिर के पास रेड लाइट एरिया है. यहां सेक्स वर्कर्स प्राचीन काल से ही रह रही हैं. यहां भी काफी संख्या में सेक्स वर्कर्स काम करती हैं.
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / भागती दौड़ती जिंदगी में जीवनशैली अस्त-व्यस्त हो चुकी है, ऐसे में अक्सर हम सेहत से जुड़ी परेशानियों से जूझते रहते हैं। लेकिन फिर भी ऐसे कई तरीके हैं, जिससे हम स्वस्थ रह सकते हैं। आज हम आपको ऐसे डांस स्टाइल बताने जा रहे हैं, जिससे न सिर्फ आपका वजन भी कंट्रोल में रहेगा बल्कि आपको टेंशन से भी मुक्ति मिलेगी-
हिप हॉप डांस
हिप हॉप डांस एक तरह का स्ट्रीट डांस स्टाइल, जिसे हिप हॉप म्यूजिक पर परफॉर्म किया जाता है। इसमें पॉपिंग, लॉकिंग से लेकर ब्रेकिंग स्टाइल तक शामिल है। यह एक ऐसा डांस फॉर्म है जो वजन घटाने के लिए सबसे बेस्ट है क्योंकि इसमें सबसे ज्यादा कैलरी बर्न होती हैं। हिप हॉप स्टाइल को आमतौर पर क्लब में किया जाता है, लेकिन आप इसे घर पर भी आसानी से कर सकते हैं।
बेली डांस
हिप्स, बैक और ऐब्स को टोन करना चाहती हैं और कमर से चर्बी घटाना चाहती हैं तो फिर बेली डांस बेस्ट है। इसमें मूवमेंट एक नियंत्रित तरीके से और स्लो मोशन में की जाती हैं। फोकस कमर और हिप्स पर ही रहता है।
फ्री स्टाइल
यह डांस फॉर्म दुनिया के कई हिस्सों में पॉप्युलर है और वजन घटाने के लिए सही ऑप्शन हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि फ्री स्टाइल में आपको डांस स्टेप्स या बॉडी मूवमेंट्स पर खास ध्यान देने की जरूरत नहीं होती और आप जिस भी दिशा में चाहें और जैसे भी चाहें डांस कर सकते है।
जुंबा डांस
यह एक मिक्स्ड डांस फॉर्म है जिसमें सालसा, रुंबा और हिप हॉप भी शामिल है। इस डांस फॉर्म में बॉडी सबसे ज्यादा मूव होती है। यह एक तरह का कार्डियो वर्कआउट माना जा सकता है। यह डांस फंकी बीट्स पर किया जाता है, जिसमें ऐब्स से लेकर लेग्स और बाजुओं की भी एक्सर्साइज होती है। इस डांस फॉर्म को युवा काफी पसंद कर रहे हैं।
खाना खजाना / शौर्यपथ / समोसे किसे पसंद नहीं होते। आप चाय के साथ कितने ही स्नैक्स खा लीजिए लेकिन समोसे की बात ही कुछ और होती है। आइए, आज जानते हैं कैसे बनाएं मटर के समोसे-
साम्रगी
आलू- 2 उबले हुए
हरे मटर के दाने - 1/4 कप
पनीर - 1 1/2 इंच का चौकोर टुकड़ा
काजू - 4-5 ( छोटे छोटे कटे हुए)
किशमिश - 1 टेबल स्पून
अदरक की पेस्ट 1 छोटी चम्मच
धनिया पाउडर 1 छोटी चम्मच
हल्दी का पाउडर 1/2 छोटी चम्मच
जीरा पावडर 1 छोटी चम्मच
नमक स्वाद के लिए
चीनी 1 छोटी चम्मच
हरी मिर्च - 1 (बारीक कटी हुई)
लाल मिर्च पाउडर - 1/4 छोटी चम्मच से आधी
गरम मसाला - 1/4 छोटी चम्मच से आधा
हरा धनियां - 2 टेबल स्पून (बारीक कतरा हुआ)
विधि: पोटली समोसा बनाने के लिए पहले आप 2 कप मैदा में एक चुटकी नमक मिलाए और 1/2 टेबल स्पून तेल या घी के साथ गूंथ लें। गूंथे हुए आटे को कुछ देर के लिए रख दें। एक नॉन स्टिक पैन में एक बड़ा चम्मच तेल गरम करें। उसमें अदरक पेस्ट, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, जीरा पाउडर, नमक, चीनी, काजू और किशमिश को अच्छे से मिला कर 2 मिनट तक भूनें। फिर डालें हरे मटर, अच्छे से मिलायें और भूनें। गूंथे हुए आटे को फिर से मसल कर थोड़ा और चिकना कीजिये और गूंथे आटे से छोटी छोटी लोई बनाकर तैयार कर लीजिए। अगर आपको पोटली बनाना है तो इसे गोल रहने दें नहीं तो इसे समोसे की पट्टी में बदल सकते हैं। इन बेली गई पट्टियों में तैयार की गई स्टफिंग भरें और इसी प्रकार बाकी के समोसे बना लें। एक कढ़ाई में जरूरत के मुताबिक तेल गरम करें और इसमें समोसों के गोल्डन ब्राउन और करारे होने तक तलें।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
