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May 31, 2026
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खाना खजाना / शौर्यपथ / शाम के नाश्ते में अगर मीठा खाने का मन करें तो झटपट बना लें केसरिया जलेबी। ये जलेबी बनने में जितनी आसान है खाने में उतनी ही स्वादिष्ट भी होती हैं। तो देर किस बात की आइए जानतते हैं कैसे बनाई जाती है ये पारंपरिक स्वीट डिश गर्मागर्म केसरिया जलेबी।

जलेबी के लिए घोल बनाने की सामग्री-
-1/2 कप मैदा
-1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) या अरारूट पाउडर
-1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर
-पीला रंग या चुटकी भर हल्दी-
-1/4 कप दही
-1/4 कप पानी

चाशनी बनाने की सामग्री-
-1/2 कप शक्कर
-1/4 कप पानी
-1 टी स्पून नींबू का रस
-एक चुटकी इलायची पाउडर
-5-7 केसर

जलेबी बनाने का तरीका-
जलेबी बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में 1/2 कप मैदा छान लें। उसमें 1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च, 1/4 टी स्पून बेकिंग पाउडर, एक चुटकी हल्दी पाउडर या पीला रंग और 1/4 कप दही डालें। अब जरूरत के अनुसार पानी (लगभग 1/4 कप) डालकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। ध्यान रखें घोल बनाते समय घोल में कोई गांठ ना रहे।

अब घोल को एक प्लेट से ढककर 24 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर खमीर उठाने के लिए रख दें। 24 घंटे बाद घोल को एक चम्मच की मदद से अच्छी तरह फैंट लें। जलेबी बनाने के लिए एक खाली सॉस की बोतल या एक जिपलॉक बेग में घोल को डाल दें।

जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि-
एक गहरे पतीले में चीनी, केसर, इलायची पाउडर और पानी डालकर मध्यम आंच पर पकने के लिए रख दें। इस पानी को तब तक पकाएं जब तक उसकी हल्की 1-तार की चाशनी न बन जाए। चाशनी बन जाए तो उसमें नींबू का रस मिलकर गैस बंद कर दें। चाशनी ठंडी होने पर जलेबी बनाना शुरू कर दें।

जलेबी को तलने के लिए एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इसके बाद जिपलॉक बैग को दबाते हुए जलेबी को आकार देते हुए उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलकर तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। ध्यान रखें, चाशनी गर्म होनी चाहिए। जलेबी को लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखने के बाद एक मिनट बाद पलट दें। अब जलेबी खाने को तैयार है।

 

खाना खजाना / शौर्यपथ / आप अगर श्राद्ध पूजन के लिए मीठे में कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो मीठे के भोग के लिए एप्पल रबड़ी ट्राई कर सकते हैं। आइए, जानते हैं क्या है रेसिपी-

सामग्री :
3 मध्यम आकार के सेब
1 लीटर दूध
4 टेबल स्पून चीनी
1/4 टी स्पून हरी इलाइची
8-10 बादाम (स्लाइस्ड), हल्का उबला
8-10 पिस्ते (स्लाइस्ड), हल्का उबला


विधि :
एक बड़े बर्तन में दूध डालें और उसमें उबाल आने दें। इसे हल्के हाथ से तब तक चलाती रहें, जब तक दूध आधा न रह जाए। इसके बाद आंच धीमी कर दें और इसमें चीनी डालें। इसे धीमी आंच पर पकाते हुए लगातार चलाते रहें।
सेब को छीलकर कददूकस कर लें। जब दूध की मात्रा और कम हो जाए तो इसमें सेब डालकर अच्छे मिक्स करें। इसे 3 से 4 मिनट के लिए पकाएं। इसमें इलाइची पाउडर, बादाम और पिस्ते डालें। इसे सर्विंग डिश में निकाल लें। सेब के बचे हुए स्लाइस डिश के चारों तरफ लगाएं। इसे गर्म या ठंडा सर्व करें।

 

जिले का पहला स्मार्ट संकुल बना मोहला का कंदाड़ी संकुल
शत-प्रतिशत शालाओं में स्मार्ट एंड्रॉयड टीवी
लगाकर अध्यापन की तैयारी में लगे शिक्षक
कंदाड़ी संकुल के सभी 14 शालाओं में स्मार्ट क्लास से अध्यापन की तैयारी

राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले के सुदूर वनांचल मोहला ब्लॉक के संकुल केन्द्र कंदाड़ी में संकुल स्तरीय डिजीटल स्कूल का उद्घाटन संसदीय सचिव एवं विधायक मोहला-मानपुर श्री इन्द्रशाह मंडावी ने किया। संकुल केन्द्र कंदाड़ी के 14 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में स्मार्ट क्लास के लिए शिक्षकों ने आर्थिक सहयोग करके एंड्रॉइड स्मार्ट टीवी लगाया है। इस तरह संकुल केन्द्र कंदाड़ी जिले का पहला स्मार्ट संकुल बन गया है, जहां संकुल के शत-प्रतिशत शालाओं में स्मार्ट क्लास बनाया गया है। श्री मंडावी ने इस कार्य के लिए शिक्षकों को प्रेरित करने वाले संकुल समन्वयक श्री केवल राम साहू के कार्यों की सराहना करते हुए संकुल के शिक्षकों एवं समन्वयक की प्रशंसा की।
मंडावी ने विकासखंड स्तर पर डिजिटल एजुकेशन के लिए शिक्षकों को प्रेरित करने वाले मोहला एबीईओ राजेन्द्र कुमार देवांगन की दूरदर्शिता तथा समाजसेवी संजय जैन के सहयोग को समुदाय के अन्य लोगों के लिए शिक्षा दान का अनुकरणीय उदाहरण बताया। मोहला ब्लॉक की इस पहल में पढ़ई तुहर दुआर के जिला मीडिया प्रभारी श्री सतीश ब्यौहरे के सहयोग और मार्गदर्शन से भी शिक्षकों को लाभ मिल रहा है। एबीईओ देवांगन ने बताया कि शिक्षा विभाग मोहला के इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोडऩा तथा डिजिटल तरीके से अध्यापन कराना है। वे मोहला के शत-प्रतिशत प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में ऐसी ही व्यवस्था करवाना चाहते है, जिसमें संसदीय सचिव इंद्रशाह मंडावी एवं समाजसेवी संजय जैन सहयोग कर रहे है। इस अवसर पर जिला नोडल सतीश ब्यौहरे ने मोहला टीम को बधाई देकर इस नवाचार की सराहना की है और शिक्षकों के उत्साह को बढ़ाने के लिए अपनी तरह से एक स्मार्ट टीवी दान करने की पहल भी है। बेहतर कार्य के लिए कंदाडी संकुल समन्वयक केवल राम साहू को इस कार्यक्रम में संसदीय सचिव द्वारा सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर जनपद पंचायत मोहला अध्यक्ष लगनू राम चंद्रवंशी, जनपद पंचायत मोहला उपाध्यक्ष श्रीमती गमिता लोन्हारे, जनपद सदस्य श्री नोहरू राम कुमेटी, ग्राम कंदाड़ी सरपंच झम्मन पुसारे, ग्राम कनेरी सरपंच सरजूराम राणा, ग्राम रामगढ़ सरपंच अशोक कुमार मांझी,नारद कचलामे, मीना मांझी, निखिल देशमुख, अजय राजपूत, ऐश्वर्य साहू तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए ग्राम सुराजी योजना तथा गोधन न्याय योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी है कि स्थानीय संसाधन से जैविक खेती और जैविक खाद के निर्माण को बढ़ावा दिया जाए। रासायनिक खाद के बेतरतीब उपयोग से धरती की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। ऐसे में जैविक खाद के प्रचलन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मिशन में ग्रामीण महिलाए भी पीछे नहीं है। जनपद पंचायत छुरा की मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूचि शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत विकासखण्ड छुरा के ग्राम रानी परतेवा के तिग्गा क्लस्टर के ग्राम संगठन जय गंगा मैया के जय मां सरस्वती समूह की सक्रिय सदस्य श्रीमती गायत्री साहू द्वारा इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया जा रहा है। बिहान के सीएसएमएस परियोजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए एनपीएम शॉप के माध्यम से ग्राम स्तर पर विभिन्न जैविक दवाईयों तथा खाद का निर्माण और उपयोग किया जा रहा है। सदस्य गायत्री साहू द्वारा बताया गया कि वे नाडेप खाद, केचुआ खाद, घना जीवामृत, नीमास्त्र, अग्नास्त्र, बेसरम पत्री दवाई, डण्डी दवाई, अमृत पानी तथा अमृत खाद का निर्माण स्वयं कर रही है। निर्माण के साथ-साथ इन जैविक दवाईयों का उपयोग स्वयं के बाडी एवं खेत में लगे फसल के बीमारी एवं कीटो से बचाव हेतु कर रही है। गायत्री ने बताया कि इन दवाईयों का निर्माण स्थानीय संसाधनों से किया गया है तथा निर्माण लागत लगभग नहीं के बराबर है। दवाईयां बिहान के दुकान के माध्यम से विक्रय भी हो रहा है, जिससे यह अतिरिक्त आय का स्त्रोत बन गया है। इन दवाईयों की कीमत प्रति बोतल 50 से 80 रूपये तक है, यह कीमत बाजार में मिलने वाले रासायनिक दवाई से बहुत ही कम है। उन्होंने बताया कि इस एनपीएम शॉप के माध्यम से वे 5-6 हजार रूपये प्रत्येक सीजन में कमा लेती है। साथ ही साथ गायत्री द्वारा दूसरे ग्रामों, विकासखण्ड व जिले में इसके निर्माण हेतु प्रशिक्षण भी दे रही है।

रायपुर / शौर्यपथ / कुपोषण से मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर शुरूआत की गई मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान काफी सफल रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रथम चरण में बिलासपुर जिले के में चिन्हित 26 हजार 816 कुपोषित बच्चों में से लगभग 15 प्रतिशत बच्चे सुपोषित हो गए है। बिलासपुर जिले के महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने बताया कि कुपोषण मुक्ति के लिए संचालित पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, एवं मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के सफल क्रियान्यवन से विगत तीन वर्षाें के भीतर कुपेाषण दर में 4.59 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2018 में जिले में कुपोषण का प्रतिशत 26.67 था। जो 2020 में घटकर 16.08 प्रतिशत हो गया है।
इस योजना की शुरूआत 2 अक्टूबर 2019 को की गई थी। इसके अंतर्गत 06 माह से 05 वर्ष की आयु तक सभी कुपोषित बच्चों को पूरक पोषण के आहार के अतिरिक्त सप्ताह में 3 दिन पौष्टिक लड्डू और सभी शिशुवती माताओं को गरम भोजन आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्रदाय किया जाता है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के अतिरिक्त मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का संचालन भी किया जा रहा है। कोविड 19 महामारी के दौरान आंगनबाड़ी बंद होने से कुपोषित बच्चों को पौष्टिक लड्डू एवं शिशुवती माताओं को सूखा राशन घर-घर जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं द्वारा प्रदान किया जा रहा है।

पाठ्यक्रम में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कटौती कर उसका माहवार विभाजन
निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ऑनलाईन कक्षाओं का प्रसारण यू-ट्यूब चैनल पर
प्रत्येक माह के पाठ्यक्रम के लिए विषयवार असाइनमेंट
असाइनमेंट में प्राप्त अंक शैक्षणिक सत्र 2020-21 की मण्डल परीक्षा के लिए आंतरिक मूल्यांकन का आधार

रायपुर /शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम एवं मूल्यांकन संबंधी विशेष व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था से प्रत्येक विद्यार्थी की पढ़ाई का मूल्यांकन हो सकेगा और कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह व्यवस्था सितम्बर से लागू की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा इस संबंध में सभी मान्यता प्राप्त शालाओं के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

निर्देश में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक सत्र 15 जून प्रारंभ होता है, परन्तु केन्द्र सरकार के आदेशानुसार 30 सितम्बर तक सभी शैक्षणिक संस्थाएं बंद रहेगी। इन परिस्थितियों में कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसमें स्कूल खुलने में होने वाली देरी को दृष्टिगत रखते हुए पाठ्यक्रम में लगभग 30 से 40 प्रतिशत कटौती कर पाठ्यक्रम का माहवार विभाजन किया गया है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को यह स्पष्ट रहे कि किस माह में उन्हें पाठ्यक्रम का कितना हिस्सा पूर्ण करना है। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की वेबसाइट www.cgbse.nic.in पर दिनांक 3 सितम्बर 2020 तक उपलब्ध करा दिया जाएगा।

सभी प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं के प्रत्येक सेक्शन के लिए अलग-अलग क्लास टीचर नियुक्त करें और क्लास टीचर से यह अपेक्षा की गई है कि वे कक्षा के सभी विद्यार्थियों के साथ एक वाट्सअप ग्रुप का निर्माण कर कर लें और विद्यार्थियों एवं क्लास टीचर के बीच इस वाट्सअप ग्रुप के माध्यम से लगातार संपर्क रखें। क्लास टीचर अपने-अपने वाट्सअप ग्रुप के सभी विद्यार्थियों को विषय से संबंधित कठिन अवधारणाएं, वाट्सअप के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेषित करें तथा कठिनाईयों को दूर करेंगे।

कक्षा 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए मण्डल द्वारा घटे हुए निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार लगातार ऑनलाईन कक्षाएं आयोजित की जाएगी। जिनका प्रसारण यू-ट्यूब चैनल पर किया जाएगा। इन ऑनलाईन कक्षाओं में पूरे प्रदेश के विद्यार्थी एक साथ भाग ले सकेंगे। ऑनलाईन कक्षाओं को रिकार्ड करके मण्डल के यू-ट्यूब चैनल पर भी दिखाया जाएगा तथा स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाईट www.cgschool.in पर लिंक किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी यदि चाहें तो किसी भी समय इन कक्षाओं के रिकार्ड किए गए वीडियो दोबारा देख सकेगा। ऑनलाईन कक्षाओं का साप्ताहिक टाइम-टेबल मण्डल की वेबसाइट पर 5 सितम्बर तक उपलब्ध करा दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी टाइम-टेबल के अनुसार मण्डल की यू-ट्यूब चैनल पर जाकर ऑनलाईन कक्षाओं में भाग ले सके।

प्रत्येक महीने के पाठ्यक्रम के लिए मण्डल द्वारा विषयवार असाइनमेंट तैयार किया जाएगा और उसे मण्डल की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा और असाइनमेंट पीडीएफ के रूप में सभी स्कूलों को भेजा जाएगा। स्कूलों के प्राचार्य, क्लास टीचर के माध्यम से असाइनमेंट सभी विद्यार्थियों को अपने-अपने वाट्सअप ग्रुप तथा एसएमएस के माध्यम से भेजेंगे तथा विद्यार्थियों के द्वारा घर पर ही असाइनमेंट उत्तरपुस्तिका में हल करके प्रत्येक महीने के 15 तारीख को स्कूल में जमा किया जाएगा। संबंधित विषय के शिक्षक स्कूल कार्यालय में विद्यार्थियों द्वारा जमा किए गए असाइनमेंट का मूल्यांकन करेंगे। असाइनमेंट के मूल्यांकन के पश्चात् प्राप्त अंकों को मण्डल के पोर्टल पर ऑनलाईन प्रविष्टि करेंगे। यदि किसी विद्यार्थी को असाइनमेंट में कम अंक प्राप्त होते हैं तो उस विद्यार्थी को विशेष रूप से पढ़ाने की व्यवस्था स्कूल द्वारा की जाएगी। इस प्रकार असाइनमेंट में प्राप्त अंकों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 की मण्डल परीक्षा लिए आंतरिक मूल्यांकन का आधार बनाया जाएगा।

लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / हर कोई अपने घर को खूबसूरती से सजाना चाहता है। घर के कोने-कोने को सजाने के लिए हम तरह-तरह की पेटिंग्स से लेकर फूल-पौधे लगाते हैं। हालांकि कई बार वास्तु शास्त्र की जानकारी न होने पर हम कुछ ऐसा भी कर देते हैं, जिससे वास्तु दोष होता है। वास्तु शास्त्र में घर में सुख-शांति और खुशहाली के लिए कई तरह के उपाय भी बताए गए हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, इन उपायों से वास्तु दोष दूर होता है और घर में खुशहाली आती है।

1. अतिथियों के साथ मधुर रिश्तों के लिए उत्तर या पश्चिम दिशा में स्थान बनाना चाहिए।
2. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पैसों की बचत के लिए घर के दक्षिण-पूर्व दिशा में नीले रंग की बजाए गुलाबी रंग का इस्तेमाल करना चाहिए।
3. कहते हैं कि पार्किंग के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थान होना शुभ होता है।
4.घर के पौधों को रोजाना पानी देना चाहिए। अगर कोई पौधा सूख जाए तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए।
5. वास्तु शास्त्र के अनुसार, कभी भी व्यक्ति को दक्षिण दिशा में पांव करके नहीं सोने चाहिए। ऐसा करने से बैचेनी या घबराहट हो सकती है।
6. माना जाता है कि बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। इसके अलावा सोते समय शीशे को ढक देना चाहिए।
7. घर में उत्तर दिशा, पूर्व दिशा और वायव्य दिशा में सामान रखना शुभ होता है।
8. घर में नुकीले या कांटेदार पौधों को लगाने से बचना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ऐसा करने से धन की हानि होती है।
9. घर में अग्नि से संबंधित उपकरण दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है।
10. पूजा घर में नियमित तौर पर पूजा करनी चाहिए। पूजा घर कभी भी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए।

 

सेहत / शौर्यपथ / कद्दू की सब्जी तो आपने कई बार खाई होगी, कद्दू के सेहत फायदे भी जानते होंगे लेकिन हम आपको कद्दू के जो 4 नुस्खे बता रहे हैं वे आपको शर्तिया नहीं पता होंगे, बालों से लेकर त्वचा के लिए कद्दू के ये नुस्खे किसी चमत्कार से कम नहीं है -
1 बालों के लिए -
आपको जानकर हैरानी होगी कि कद्दू का तेल नारियल तेल के विकल्प के रूप में लगा सकते है, क्योंकि यह नारियल तेल के समान ही प्रभावी होता है। कद्दू के तेल में पोटेशियम, आयरन, मैंगनीज, मैग्नीशियम, विटामिन ए, के और ई भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने और बढ़ने में मदद करते हैं।
2 त्वचा के लचीलेपन के लिए -
कद्दू में मौजूद विटामिन ए, सी और ई कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है जिससे त्वचा का लचीलापन बरकरार रहता है। इसका असर ये होता है कि झुर्रियों का प्रभाव धीमा हो जाता है और खूबसूरती बनी रहती है।

3 ड्राय त्वचा और मुंहासों से छूटकारा -
कद्दू में मौजूद जिंक और विटामिन ई त्वचा की हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ाते हैं, मुंहासों से लड़ते हैं और त्वचा के दाग को हल्का करने में सहायक होते हैं।

4 ड्राय बालों के लिए असरदार -
ड्राय बालों से निजात पाने के लिए आपको 2 कप पके कद्दू में 1 चम्मच नारियल तेल, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच दही डालकर मिलाना है। अब शैंपू किए हुए बालों पर पेस्ट को लगभग 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। फिर बालों को अच्छी तरह से धोलें। हर हफ्ते इसे दौहराएं और बालों में
फर्क मेहसूस करें।

सेहत / शौर्यपथ / खुद को सेहतमंद बनाए रखने के लिए डॉक्टर हर व्यक्ति को मौसम के अनुसार अपनी डाइट रखने की सलाह देते हैं। मौसम और अपने क्षेत्र के अनुसार आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने की सबसे बड़ी कुंजी है। अगर आप भी सेहतमंद रहते हुए मानसून का मजा लेना चाहते हैं तो बदलते मौसम के साथ करें अपने आहार में भी ये जरूरी बदलाव।

सब्जियां-
बारिश के समय में हरी पत्तेदार सब्जियों को उगाने के लिए मिट्टी सही नहीं मानी जाती है। इस दौरान व्यक्ति को बेल पर लगने वाली सब्जियां जैसे लौकी, कद्दू, करेला, गिलका और जड़ वाली सब्जियां जैसे शकरकंद, सुरान, कोंफल, अरबी, आलू आदि सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

मोटे और छोटे अनाज-
मोटे और छोटे अनाज का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। बारिश के मौसम में आप दलिया, राजगीरा, मक्की,समा, कुट्टू या मंडुआ खा सकते हैं। हालांकि इस मौसम में मल्टीग्रेन ब्रेड या बिस्कुट का सेवन करने से बचें।

दालें-
इस मौसम में अक्सर लोग मांस-मछली का सेवन करने से परहेज करते हैं। ऐसे में प्रोटीन के साथ विटामिन, खनिज और फाइबर की कमी पूरी करने के लिए लोग दालों का सेवन कर सकते हैं। इस मौसम में व्यक्ति को डाइट में दो तरह की दालें जरूर शामिल करनी चाहिए- पहली, कुलिथ और दूसरी अल्साने । ये दोनों ही दालें त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं।

खास वस्तुएं-
हर मौसम का अपना एक खास फल होता है। गर्मियों में आम तो बारिश के मौसम में गहरी तली हुई भजिया। भजिया तलने के लिए फिल्टर्ड मूंगफली,सरसों, नारियल तेलों का प्रयोग करें। याद रखें भजिया फ्राई करने के बाद तेल का उपयोग दोबारा न करें। आहार में आवश्यक वसा के बिना, शरीर को विटामिन डी नहीं मिल सकता है। इसलिए बिना डरे और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पसंद के पकौड़े खाएं।

 

धर्म संसार /शौर्यपथ / पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है. माना जाता है कि यदि पितर नाराज हो जाएं तो व्यक्ति का जीवन भी परेशानियों और तरह-तरह की समस्याओं में पड़ जाता है और खुशहाल जीवन खत्म हो जाता है. साथ ही घर में भी अशांती फैलती है और व्यापार और गृहस्थी में भी हानी होती है. ऐसे में पितरों को तृप्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना बेहद आवश्यक माना जाता है.
श्राद्ध के जरिए पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान और तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है.
2020 में कब है पितृ पक्ष
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ते हैं. इनकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होती है और समापन अमावस्या पर होता है. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक हर साल सितंबर के महीने में पितृ पक्ष की शुरुआत होती है. आमतौर पर पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है. इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर से शुरू हो कर 17 सितंबर को खत्म होगा.
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- चतुर्दशी का श्राद्ध, 17 सितंबर- अमावस का श्राद्ध.
पितृ पक्ष का महत्व
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना जाता है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाना बेहत जरूरी माना जाता है. माना जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है. वहीं ये भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से वो प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है. ये भी माना जाता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरो को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं. इस दौरान अगर पितरों का श्राद्ध न किया जाए तो उनकी आत्मा दुखी व नाराज हो जाती है.
पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध
दरअसल, दिवंगत परिजन की मृत्यु की तिथि में ही श्राद्ध किया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि आपके किसी परिजन की मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही उनका श्राद्ध किया जाना चाहिए. आमतौर पर इसी तरह से पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियों का चयन किया जाता है:
- जिन परिजनों की अकाल मृत्यु या फिर किसी दुर्घटना या आत्महत्या का मामला है तो उनका श्राद्ध
चतुर्दशी के दिन किया जाता है.
- दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है.
- जिन पितरों के मरने की तिथि न मालूम हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन करना चाहिए.
- यदि कोई महिला सुहागिन मृत्यु को प्राप्त हुई तो उनका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए.
- सन्यासी का श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है.
श्राद्ध के नियम
- पितृ पक्ष के दौरान हर दिन तर्पण किया जाना चाहिए. पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है.
- इस दौरान पिंड दान भी करना चाहिए. श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं. पिंड को शरीर के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
- पितृ पक्ष में कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान नहीं करना चाहिए. हालांकि, देवताओं की नित्य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए.
- श्राद्ध के दौरान पाना खाने, तेल लगाने और संभोग की मनाही है.
- इस दौरान रंगीन फूलों का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है.
- इस दौरान नए वस्त्र, नया भवन, गहने या कीमती सामान को खरीदने से भी कई लोग परहेज करते हैं.
श्राद्ध कैसे करें?
- श्राद्ध की तिथि का चयन ऊपर दी गई जानकारी के मुताबिक करें.
- श्राद्ध करने के लिए आप अपने पुरोहित को बुला सकते हैं.
- श्राद्ध के दिन अच्छा खाना या फिर पितरों की पसंद का खाना बनाएं.
- खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करें.
- मान्यता के मुताबिक श्राद्ध के दिन स्मरण करने से पितर घर आते हैं और भोजन पाकर तृप्त हो जाते हैं.
- श्राद्ध के दिन पांच तरह की बलि बताई गई है: गौ (गाय) बलि, श्वान (कुत्ता) बलि, काक (कौवा) बलि, देवादि बलि, पिपीलिका (चींटी) बलि.
- बता दें, यहां बलि का मतलब किसी पशु या जीव की हत्या नहीं है बल्कि श्राद्ध के दिन इन सभी जानवरों को खाना खिलाया जाता है.
- तर्पण और पिंड दान के बाद पुरोहित या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.
- ब्राह्मण को सीधा या सीदा भी दिया जाता है. सीधा में चावल, दाल, चीनी, नमक, मसाले, कच्ची सब्जियां, तेल और मौसमी फल शामिल है.
- ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्यवाद दें और जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए माफी मांगे.
- इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठ कर भोजन करें.
- श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने और संभोग करने की मनाही होती है.
- इन दिनों में रंगीन फूलों का इस्तेमाल करना भी वर्जित होता है.
- पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्याज और काला नमक भी नहीं खाना चाहिए,
- इस समय में कई लोग नए वस्त्र या सामान आदि भी नहीं खरीदते हैं.

श्राद्ध की तिथियां
1 सितंबर- पूर्णिमा का श्राद्ध, 2 सितंबर- प्रतिपदा का श्राद्ध, 3 सितंबर- द्वितीया का श्राद्ध, 5 सितंबर- तृतीया का श्राद्ध, 6 सितंबर- चतुर्थी का श्राद्ध, 7 सितंबर- पंचमी का श्राद्ध, 8 सितंबर- षष्ठी का श्राद्ध, 9 सितंबर- सप्तमी का श्राद्ध, 10 सितंबर- अष्टमी का श्राद्ध, 11 सितंबर- नवमी का श्राद्ध, 12 सितंबर- दशमी का श्राद्ध, 13 सितंबर- एकादशी का श्राद्ध, 14 सितंबर- द्वादशी का श्राद्ध, 15 सितंबर- त्रयोदशी का श्राद्ध, 16 सितंबर- च
कैसे मिलता है पितरों का आशीर्वाद, पढ़िए पूरी कथा
पितृ कभी भी अपनी संतानों को परेशान नहीं करना चाहते हैं, वे बहुत दयालु होते हैं। लेकिन संतानों की उपेक्षा से दुखी हो जाते हैं, क्योंकि संतान के द्वारा श्राद्धकर्म और पिंडदान आदि करने पर उन्हें तृप्ति मिलती है, और वे अपनी संतानों को धन-धान्य और खुश रहने का आशीर्वाद देते हैं। पितृ ये नहीं चाहते कि उनकी संतानें उनको तृप्त करने के लिए बहुत कुछ करें, वे श्रद्धा भाव से किए गए श्राद्ध के खुशी के साथ स्वीकारते हैं। कहा भी गया है कि श्रद्धा के बिना श्राद्ध अधूरा होता है। इसी से जुड़ी है श्राद्ध पक्ष की पौराणिक कथा, जानते हैं कि कैसे श्रद्धा भाव से प्रसन्न होकर पितर देते हैं अपना आशीर्वाद...
पौराणिक कथा के अनुसार जोगे और भोगे नाम के दो भाई थे। दोनों अलग-अलग घरों में रहा करते थे। जोगे के पास धन की कोई कमी न थी, लेकिन भोगे निर्धन था। दोनों भाई एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। लेकिन जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, तो वहीं भोगे की पत्नी सुशील और शांत स्वाभाव की थी। जब पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की कोशिश की, लेकिन जोगे की पत्नी केवल अपनी शान दिखाने के लिए श्राद्ध का कार्यक्रम रखना चाहती थी। ताकि वह अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर दावत कर सके। जोगे की पत्नी से उसने कहा कि मुझे कोई परेशानी न हो इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं। लेकिन मैं सत्य कहती हूं, मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है, मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। हम दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगी।
दूसरे दिन भोगे की पत्नी सुबह आकर सारा कार्य करवाने लगी, उसने अनेक पकवान बनाए, फिर सभी काम निपटाने के बाद अपने घर वापस आ गई, क्योंकि उसे भी पितरों का तर्पण करना था। जब पितर भूमि पर उतरे जब वे जोगे के यहां गए तो देखा कि उसके ससुराल पक्ष के सभी लोग भोजन पर जुटे हुए हैं। वहां ये सब देखकर वे बहुत निराश हुए उसके बाद जोगे-भोगे के पितर भोगे के यहां गए, तो देखते हैं कि मात्र पितरों के नाम पर केवल 'अगियारी' दे दी गई है। पितर उसकी राख चाटते हैं, और भूखे ही नदी के तट पर पहुंच जाते हैं।
कुछ ही देर में सारे पितर अपने-अपने यहां का श्राद्ध ग्रहण करके इकट्ठे हो गए और बताने लगे कि उनकी संतानों ने किस-किस तरह से उनके लिए श्राद्धों के पकवान बनाए। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपना सारा कुछ बताया। उन्होंने सोचा कि अगर भोगे निर्धन न होता और श्राद्ध करने में समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा वापस नहीं आने पड़ता, क्योंकि भोगे के घर में तो खाने के लिए भी दो जून की रोटी नहीं थी। ये सारी बातें सोचकर पितरों को भोगे पर दया आ गई। अचानक से वे नाच-नाचकर गाने लगे कि भोगे के घर धन हो जाए, भोगे के घर धन हो जाए।
सांझ का समय हो चला था, लेकिन भोगे के घर में खाने को कुछ भी नहीं था। उसके बच्चे भूखे थे। बच्चों ने अपनी मां से कहा कि भूख लगी है। तब उन्हें टालने के लिए गुस्से से गरज कर भोगे की पत्नी ने कहा कि जाओ आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो उसमें जो भी मिल जाए आपस में  बांटकर खा लेना। बच्चे जब वहां जाकर हौदी देखते हैं, तो वे दौड़े-दौड़े मां के पास जाकर कहते हैं कि मां हौदी तो मोहरों से भरी पड़ी है। आंगन में आकर भोगे की पत्नी ने यह सब कुछ देखती है, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता है।
इस तरह पितरों के आशीर्वाद से भोगे भी धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है, लेकिन वह इस बात का बिल्कुल अंहकार नहीं करता है, और अगले बरस पूरी श्रद्धा के साथ भोगे एवं उसकी पत्नी अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। भोगे की पत्नी पितरों के लिए 56 प्रकार के व्यंजन तैयार करती है, वे दोनों ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, अपने जेठ-जेठानी को बुलाकर सम्मान के साथ सोने और चांदी के बर्तनों में भोजन कराते हैं। इससे उनके पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। 
सपने में पितरों को देखने का क्या होता है मतलब
श्राद्ध पक्ष आरंभ होने वाले हैं जो 2 सितंबर से शुरु होकर 17 सितंबर तक चलेंगे, ये पूरे 16 दिन पितरों को समर्पित होते हैं। इस समय पितरों का श्राद्ध, पितृ तर्पण करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। तो आज हम जानेगें कि स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है। हम सभी सोते समय अच्छे और बुरे दोनों तरह के सपने देखते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का अपना एक मतलब होता है। कभी-कभी जो हमारे मस्तिष्क में चल रहा होता है, वही हमें सपने में दिखाई देता है। लेकिन कुछ सपने हमारी जिंदगी की घटनाओं से जुड़े होते हैं। स्वप्न शास्त्र कहता है कि सपनों में पितरों को देखना आपकी जिंदगी से जुड़े कई तरह के संकेत देता है। इससे पता लगाया जा सकता है कि आपकी जिंदगी में क्या घटित होने वाला है, आइए जानते हैं कि सपने में पितरों को देखने का क्या मतलब होता है।
अगर कोई व्यक्ति सपने में अपने पितरों को हंसते-मुस्कुराते खुशहाल अवस्था में देखता है, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न हैं। ऐसे स्वप्न शुभफलदायक होते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने का अर्थ होता है कि व्यक्ति पर और परिवार पर पितरों की कृपा है। यह घर में सुख-समृद्धि आने के संकेत हैं।
अगर सपने में पितर खुशियां मनाते हुए मिठाई खा रहे हैं या फिर बांट रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आपके घर में खुशियां आने वाली हैं। इससे घर में मांगलिक कार्य होने के संकेत होते हैं। ऐसे सपने देखने का अर्थ होता है कि किसी के विवाह या फिर संतान के योग बन रहे हैं।
सपने में किसी के पितर दुखी या फिर नाराज दिखाई देते हैं, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पितर आपसे प्रसन्न नहीं हैं। ऐसे सपने शुभ नहीं होते हैं। ज्यादातर ऐसे सपने पितृदोष लगने पर आते हैं। ऐसे में आपको अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करने चाहिए। 
स्वप्न शास्त्र के अनुसार जब कोई व्यक्ति स्वप्न में देखता है कि उसके पितर उससे बातें कर रहें है, तो इसका अर्थ होता है, वे आपको कुछ बताना चाहते हैं या किसी आने वाली घटना से आपको आगाह कर रहे हैं।

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