August 12, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    दुर्ग / शौर्यपथ / महापौर धीरज बाकलीवाल के प्रयास और सक्रियता से जी ई रोड मुख्य मार्ग की बंद लाईटों में सुधार कार्य कर प्रकाश व्यवस्था ठीक किया गया। इसके लिए भिलाई निगम से स्काई लिफ्ट मंगवायी गई और तत्काल बंद लाईटों को चालू किया गया ।
    उल्लेखनीय है कि जी ई रोड मुख्य मार्ग में लगभग 40 से 50 लाईटें बंद होने के कारण रात्रि मे ंअंधेरा रहता था। इसकी सूचना शिकायत आम जनता ने महापौर बाकलीवाल से किये है उन्होनें मुख्यमार्ग में बंद लाईटों को ठीक करने निगम अधिकारियों को निर्देश दिये। निगम अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग निगम का स्काई लिफ्ट खराब होने के कारण लाईटों को ठीक नही ंकर पा रहे हैं। महापौर बाकलीवाल ने जिला कलेक्टर को समस्या से अवगत कराते हुये भिलाई निगम के आयुक्त से बात कर स्काई लिफ्ट की व्यवस्था की । विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने आज जी ई रोड मुख्य मार्ग में अब तक 20 खराब लाईटों को बदलकर प्रकाश की व्यवस्था की है वहीं बंद 9 लाईटों के वायरिंग में फ्ाल्ट होने से उसमें सुधार कार्य किया गया।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / संभागायुक्त टीसी महावर ने आज जिला मुख्यालय राजनांदगांव से दूर आरोहण बीपीओ ग्राम टेड़ेसरा में कलेक्टर्स, एसपी, डीएफओ एवं जिला पंचायत सीईओ के कार्यों की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक ली और इसके साथ पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था एवं अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा, सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) श्रीमती शालिनी रैना, कलेक्टर राजनांदगांव टोपेश्वर वर्मा, कलेक्टर दुर्ग सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे, कलेक्टर कबीरधाम रमेश कुमार शर्मा, कलेक्टर बालोद जन्मेजय महोबे, कलेक्टर बेमेतरा शिव अनंत तायल, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
    संभागायुक्त महावर ने कहा कि सभी अधिकारी समन्वय एवं सहयोग के साथ बेहतरीन कार्य करें। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता की योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दें और कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी समन्वय के साथ कार्य करें। राजस्व के लंबित प्रकरणों के निराकरण के कार्य में विशेष ध्यान दें। पुलिस महानिरीक्षक श्री विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि संभाग में कानून एवं शांति व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भी कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारियों के बेहतर तालमेल का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि दोनों अधिकारी साथ मिलकर कार्य करते हैं तो समस्या का निपटारा तुरंत हो जाता है। उन्होंने समस्या के तत्काल निराकरण के लिए कहा।
    संभागायुक्त ने कहा कि अविवादित नामांतरण, विवादित नामांतरण, अविवादित खाता विभाजन, विवादित खाता विभाजन का समय-सीमा में निराकरण करें। सीमांकन का कार्य महत्वपूर्ण है जहां ज्यादा प्रकरण लंबित है वहां शीघ्र निराकरण करें। उन्होंने जिलावार राजस्व विभाग के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि तहसीलवार समीक्षा करने पर यह देखा जा सकता है कि किस तहसील से ज्यादा प्रकरण लंबित है। निराकृत प्रकरणों का राजस्व अभिलेखागार में भेजा जाना महत्वपूर्ण कार्य है। केस के डिस्पोजल के बाद उसे रिकार्ड रूम में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस कार्य के लिए डिप्टी कलेक्टर की ड्यूटी लगाएं।
    संभागायुक्त टीसी महावर ने कहा कि नक्शा नवीनीकरण का कार्य करें। उन्होंने कलेक्टर्स से कहा कि लैण्ड रिकार्ड, डायवर्सन, भू-भाटक वसूली, नजूल की समीक्षा अलग से करें। जिससे राजस्व अमले के कार्य में तेजी आएगी। उन्होंने गिरदावरी कार्य की भुईयां साफ्टवेयर में एन्ट्री की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने अधीनस्थ कार्यालयों का निरीक्षण करें। एसडीएम एवं तहसीलदार निरीक्षण के दौरान दायरा पंजी, डिस्पोजल पंजी का निरीक्षण करें जिससे उन पर नियंत्रण रखा जा सके। भू-अर्जन प्रकरण तथा मुआवजा वितरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि अवितरित अवार्ड की राशि कितनी लंबित है इस पर ध्यान रखते हुए कार्य करें। भू-अर्जन के कितने प्रकरण नये हैं इसके साथ ही योजनाओं में भू-अर्जन के प्रकरण, जो समय-सीमा समाप्त होने पर निरस्त कर दिए गए है उन पर भी ध्यान दें। धान खरीदी, मक्का खरीदी एवं किसान पंजीयन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि समिति की सीमा देख लें एवं डिफाल्टर समिति पर निगरानी रखें। धान खरीदी के दौरान बार्डर स्थित जिले राजनांदगांव एवं कबीरधाम में राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग के अधिकारी समन्वित तरीके से कार्य करेंगे। उन्होंने व्यक्तिगत, सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के वितरण की जानकारी ली। नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना के तहत गौठान के फेस-2 का निर्माण एवं वर्मी बेड निर्माण, चारागाह, नरवा की नियमित मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि नरवा शासन की महत्वपूर्ण योजना है जिसमें राजनांदगांव और बालोद जिले में अच्छा कार्य हुआ है। चबूतरा निर्माण का कार्य 15 नवम्बर तक पूर्ण हो जाना चाहिए। वर्मी बेड के निर्माण पर जिला पंचायत सीईओ विशेष ध्यान दें। डीएमएफ एवं समग्र ग्रामीण विकास के तहत अप्रारंभ कार्यों पर ध्यान देते हुए कार्य करें। गोधन न्याय योजना शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। गोबर एकत्रित होने पर डीकम्पोजर का उपयोग करते हुए वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कराएं। वर्मी कम्पोस्ट निर्माण चक्रशील बना रहे। संभागायुक्त ने सभी जिला पंचायत सीईओ से वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के संबंध में जानकारी ली। परिवीक्षाधीन अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण एवं उनके कार्यों की मॉनिटरिंग करें।
    संभागायुक्त महावर ने कहा कि जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने समन्वय करते हुए अच्छा कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। कानून व्यवस्था के निरीक्षण के दौरान दोनों अधिकारी साथ में रहेंगे और जरूरी बातों के संबंध में जिला मजिस्टे्रट को अवगत कराएंगे। उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट को प्रतिबंधात्मक धाराओं से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि निकट समय में ईद एवं दीपावली का पर्व आ रहा है और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना होने से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति निर्मित होती है। खतरनाक सड़कों का चिन्हांकन कर पीडब्ल्यूडी से समन्वय कर इसे दूर कराएं। कोविड-19 के संकट की चुनौती का सामना करते हुए हमें कार्य करना है। पुलिस महानिरीक्षक के निर्देश पर कोविड-19 के कठिन समय में शासन के निर्देशों का पालन किया गया और त्वरित गति से क्रियान्वयन भी हुआ। संभागायुक्त ने सभी पुलिस अधीक्षकों से उनके जिले की कानून व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली।
    पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा ने कहा कि राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग शासन के महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। एकता एवं समन्वय के साथ इनका कार्य होना चाहिए। कानून व्यवस्था एवं शांति बनाए रखने में जिला मजिस्टे्रट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। समाज के हित के लिए सभी को मिलकर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में राजनांदगांव जिले के बागनदी बार्डर में बड़ी संख्या में श्रमिकों के आने पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने आपसी समन्वय से बेहतरीन कार्य किया। सड़क चिरचारी के राहत कैम्प में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने श्रमिकों के लिए सराहनीय कार्य किए, जिससे जिला एवं पुलिस प्रशासन की नई छवि निर्मित हुई। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में भूमि संबंधी एवं वन संबंधी विवादों का निराकरण आपसी समन्वय से किया जा सकता है। महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं एवं बातों को ध्यान में रखते हुए कार्य करें।
    मुख्य वन संरक्षक श्रीमती शालिनी रैना ने बताया कि वनधन केन्द्र एवं हाट बाजार स्वीकृत हो गए है। इस कार्य को प्राथमिकता से करते हुए गति लाने की जरूरत है। खैरागढ़ एवं कबीरधाम में लघु वनोपज संग्रहण का कार्य आरंभ हो गया है। लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं लघु वनोपज केन्द्र पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।
    इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव डी श्रवण, पुलिस अधीक्षक दुर्ग प्रशांत ठाकुर, पुलिस अधीक्षक बालोद जितेन्द्र सिंह मीणा, पुलिस अधीक्षक कबीरधाम शलभ कुमार सिन्हा, पुलिस अधीक्षक बेमेतरा दिव्यांग कुमार पटेल, वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव बीपी सिंह, वनमंडलाधिकारी खैरागढ़ रामावतार दुबे, जिला पंचायत राजनांदगांव श्रीमती तनुजा सलाम एवं दुर्ग संभाग के सभी जिला पंचायत सीईओ तथा एसडीएम राजनांदगांव मुकेश रावटे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / स्ट्रोक दिवस हर वर्ष 29 अक्टूबर को मनाया जाता है। स्ट्रोक ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को स्ट्रोक से होने वाले खतरों के प्रति आगाह करने के साथ-साथ ही उनको इससे बचाव के उपाय भी सुझाना है। विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार स्ट्रोक का खतरा हर चार व्यक्तियों में से एक को होता है, इसलिए इस बार की थीम वह एक न बनें रखी गयी है।
    इस बारे में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया आज-कल लोग काफी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण किसी की नौकरी छूट गयी है तो किसी का व्यापार बंद हो गया है। ऐसे में उनको स्ट्रोक होने का जोखिम और अधिक है। इसलिए स्ट्रोक के प्रति अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
    विश्व स्ट्रोक संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में हर वर्ष लगभग 1.70 करोड़ लोग स्ट्रोक्स की समस्या का सामना करते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग तो मर जाते हैं, जबकि 50 लाख लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है, जबकि विकलांगता होने का यह तीसरा प्रमुख कारण है। इतना गंभीर होने के बाबजूद भी कम से कम आधे से अधिक स्ट्रोक्स को लोगों में पर्याप्त जागरूकता पैदा कर रोका जा सकता है द्य
    क्या है स्ट्रोक?
    जब रक्त वाहिका नलिकायें किसी रुकावट या रिसाव के कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं तो ऐसी स्थिति को स्ट्रोक कहते है। इसको ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाता है।
    स्ट्रोक्स के लक्षणों को स्न्रस्भ् रणनीति के माध्यम से आसानी से पहचाना जा सकता हैः-
    स्न- फेस : किसी व्यक्ति के मुस्कुराने पर उसका चेहरा एक तरफ लटक रहा है तो उसे स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
    ्र-आर्म : किसी व्यक्ति द्वारा दोनों हाथों को उठाने पर एक हाथ का न उठ पाना या गिर जाना।
    स्- स्पीच : यदि किसी व्यक्ति द्वारा साधारण शब्द बोलने पर उसकी आवाज में लडख़ड़ाहट होना।
    भ्- टाइम टू एक्शन : यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण है तो एम्बुलेंस के लिए आपातकालीन नंबर पर कॉल करें।

    कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल के जनहितैषी योजनाओं से जुड़ना चाहती है मरवाही की जनता
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने जन सम्पर्क के दौरान नाप डाला मरवाही का एक एक कोना
    भाजपा मरवाही चुनाव से नदारद है,हार के भय से मुँह छुपा रहे है भाजपा के शीर्ष नेता
    मोहन मरकाम के सघन दौरे के आगे फिके पड़े प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय
    भाजपा की गुटबाजी और असंतोष के कारण सैकड़ो भाजपा कार्यकर्ताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं सचिव विकास तिवारी ने मरवाही उपचुनाव पर बयान जारी करते हुए कहा कि जहां एक ओर मरवाही की जनता कांग्रेस सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन हितैषी योजनाओं और निर्णयो के साथ अपने आप को जोड़ना चाह रही है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम के द्वारा लगातार सघन जनसंपर्क और प्रचार के दौरान मरवाही विधानसभा का एक-एक कोना नाप लिया गया है जिसका की बेहतर प्रतिसाद भी मिल रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम का मरवाही विधानसभा उपचुनाव में जनसंपर्क कार्यक्रम जो कि दिनांक 17 अक्टूबर 2020 शनिवार को ग्राम पंचायत लोहारी, कटरा, बेलझिरिया, उषाढ़, गुम्माटोला, बरौर, टिकठी, बगडार, तेन्दुमुड़, कछार एवं दिनांक 18 अक्टूबर 2020 रविवार को ग्राम पंचायत वनाडोंगरी, गनैया, झिरियाटोला, परासी, चंगेरी, करहनी, डड़िया, पोंडी, घिनौची, मालाडाड।तथा दिनांक 19 अक्टूबर 2020 सोमवार को ग्राम पंचायत बचरवार, बंधी, अड़भार, कुड़कई, सेंवरा, कुदरी, पिपलामार, अण्डी, मनगवां।और दिनांक 20 अक्टूबर 2020 मंगलवार को ग्राम पंचायत मटियाडांडड, रूमगा, कोलविरा, पथर्रा, सेखवा, सकोला, कोटमी, दमदम, मड़ई। तथा दिनांक 21 अक्टूबर 2020 बुधवार को ग्राम पंचायत पतगवां, झाबर, नवागांव, टंगियामार, बारीउमराव, गाजन, कंचनडीह, पंडरिया, अमारू।और दिनांक 22 अक्टूबर 2020 गुरूवार को ग्राम पंचायत महौरा, बगड़ी, डोंगरिया, मसुरीखार, तौली, पिपरिया, झिरनापोंडी, बधौरी, दरमोहली। अमरपुर, लटकोनी, गिरारी, सरखोर, पनकोटा, बसंतपुर, सोनबचरवार, लाटा, जमड़ी।
    तत्पश्चात दिनांक 23 अक्टूबर 2020 शुक्रवार को ग्राम पंचायत धनौरा, मनौरा, मरवाही(बाजार), कुम्हारी, पीपरडोल, गुल्लीडांड़, करगीकला, दानीकुण्डी(बाजार), सेमरदर्री। और दिनांक 24 अक्टूबर 2020 शनिवार को ग्राम पंचायत सिलपहरी, लटकोनी, धनपुर, धोबहर, लरकेनी(बाजार), नरौर, निमधा, खुरपा, धरहर।
    एवं दिनांक 25 अक्टूबर 2020 रविवार को ग्राम पंचायत अमेराटिकरा, बरगंवा, भर्रीडांड, रटगा(बाजार), घुसरिया, मडवाही, चिचगोहना, पथर्री में नुक्कड़ सभा एवं जनसंपर्क के बाद सम्पन्न हुवा। एवं दिनांक 29 एवं 30 को भी प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम मरवाही में लगातार सभा एवं जनसंपर्क करेंगे।
    कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि जहां एक ओर मरवाही उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी का चेहरा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल है और कांग्रेस सरकार की किसान हितैषी, आदिवासी हितैषी, जनहितैषी योजनाओं को घर-घर जाकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम द्वारा बताया जा रहा है जिससे कि कांग्रेस पार्टी की प्रचंड वोटों से जीत सुनिश्चित दिख रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई जो गुटबाजी के चरम में है और भाजपा के शीर्ष नेता मरवाही उपचुनाव से दूरी बना लिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक सहित तमाम बड़े नेता केवल खानापूर्ति के लिए मरवाही जाते हैं और उसी क्षण वापस लौट जाते हैं जबकि कांग्रेस पार्टी द्वारा नियुक्त प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल सहित विधायक गण संसदीय सचिव मंत्री गण द्वारा द्वारा किया जा रहा है और प्रत्येक बूथ में प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा तैनात किए गए पदाधिकारी गण पूरे जोर-शोर के साथ कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं प्रचार प्रसार को देखकर ऐसा लगता है कि प्रदेश भाजपा द्वारा मरवाही उपचुनाव में घुटने टेक दिए गए हैं और अपनी होने वाली प्रचंड हार को स्वीकार भी कर लिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने पूछा कि मरवाही उपचुनाव में हार का ठीकरा भारतीय जनता पार्टी किसके सिर पर पड़ेगी या प्रदेश की जनता जानना चाहती है। भाजपा की आपसी गुटबाजी और खींचतान के कारण भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ता हताश है और लगातार प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम एवं प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल के समक्ष सैकड़ों की संख्या में भाजपा के कार्यकर्ता कांग्रेस का हाथ थाम रहे हैं जिसके कारण भाजपा के शीर्ष नेताओं के माथे में चिंता की लकीर साफ साफ दिखाई दे रही है। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की नाकामी है वह अपना घर नहीं संभाल पा रहे हैं और लगातार भाजपा के कर्मठ नेता इस्तीफा देकर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रहे हैं।

    शौर्यपथ / स्कूल खोलने से सामुदायिक संक्रमण नहीं फैलता है। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में यह दावा किया है। शोधकर्ता दल ने अमेरिका और ब्रिटेन के स्कूलों में संक्रमण की स्थिति का आकलन करने पर पाया कि बच्चों से संक्रमण तो फैल रहा है पर वे कम्युनिटी संक्रमण नहीं फैला रहे।
    अमेरिका और ब्रिटेन में स्कूल खुले लगभग तीन महीने हो चुके हैं। इन दोनों देशों के स्कूलों में हुई सैंडम टेस्टिंग के डाटा का शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। इसके आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में तुलनात्मक रूप से कम संक्रमण फैला और इन स्कूलों के कारण बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
    यानी बच्चों में संक्रमण का डर तो है पर इससे बहुत बड़ा खतरा पैदा नहीं होता। बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ब्रूक निकोलस का कहना है कि हम स्कूल से जुड़े जितने ज्यादा डाटा का अध्ययन कर रहे हैं, उतने ज्यादा निश्चिंत हो रहे हैं कि बच्चे वायरस के संक्रमण को नहीं फैलाते। विशेषकर स्कूल में मौजूदगी के दौरान बच्चों के जरिए संक्रमण नहीं फैल रहा।
    बच्चों से बड़े संक्रमण का खतरा नहीं
    सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. माइकल ब्रीच ने कहा कि बच्चों से बहुत बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने या कम्युनिटी संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक के तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे संक्रमित होते हैं और वे संक्रमण फैलाते भी हैं पर यह संक्रमण बहुत बड़े स्तर पर नहीं फैलता। उन्होंने कहा कि यही बच्चों और स्कूल खोलने से जुड़ी वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता थी।
    स्कूल बंद करना समाधान नहीं
    पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के बाल रोग व संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. डेविड रुबिन का कहना है कि संक्रमण के डर से स्कूल बंद कर देना समाधान नहीं है। कम से कम प्राथमिक स्कूलों में कक्षाएं (इन-पर्सन) शुरू कर देनी चाहिए। साथ ही अगर बड़े बच्चों की कक्षाएं चलाने के लिए स्कूल पर्याप्त बचाव के इंतजाम करें तो ज्यादा बड़े खतरे के उन्हें शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में पढ़ाई जारी रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।
    बार-रेस्तरां बंद हों, स्कूल नहीं
    शोधकर्ताओं का कहना है कि छोटी कक्षाओं के बच्चों की पढ़ाई चलती रहती चाहिए। अगर सरकारें किसी हॉटस्पॉट क्षेत्र में संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकना चाहती हैं तो उन्हें बार और रेस्टोरेंट जैसे सार्वजनिक स्थानों को बंद करना चाहिए क्योंकि यहां युवा बचाव के तरीकों को अपनाए बिना मिलते हैं, जिससे संक्रमण फैलता है।
    नीदरलैंड बना उदाहरण
    नीदरलैंड में इन दिनों एक बार फिर संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यहां सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए बार और रेस्टोरेंट को बंद किया है, जबकि स्कूल लगातार संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, ब्रिटेन में भी अभी कुछ प्रतिबंधों के साथ स्कूल खुल रहे हैं जबकि वहां संक्रमण बढ़ गया है।
    स्पेन में आज तक स्कूल बंद नहीं हुए
    दुनिया में स्पेन उन कुछ देशों में से एक है, जहां संक्रमण फैलने के बावजूद कभी स्कूलों को बंद नहीं किया गया। यहां 16 साल से छोटे बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं, वहीं बड़े बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं।

    शौर्यपथ / केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि एकल अभिभावक वाले पुरुष सरकारी कर्मचारी अब चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं। उन्होंने कहा,‘‘ एकल पुरुष अभिभावक में ऐसे कर्मचारी शामिल हैं जो अविवाहित या विधुर या तलाकशुदा हैं और इसलिए बच्चे की देखभाल करने की जिम्मेदारी लेने की उम्मीद की जा सकती है।’’
    सरकारी सेवकों के जिंदगी आसान करने के लिए पथ-प्रदर्शक और प्रगतिशील सुधार बताते हुए, सिंह ने कहा कि निर्णय के संबंध में आदेश कुछ समय पहले जारी किए गए थे, लेकिन किसी भी तरह से सार्वजनिक डोमेन में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
    कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा कि बाल देखभाल अवकाश पर एक कर्मचारी अब सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के साथ मुख्यालय छोड़ सकता है। इसके अलावा, कर्मचारी को लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) का लाभ मिल सकता है, भले ही वह चाइल्ड केयर लीव पर हो।
    सिंह ने कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा कि पहले 365 दिनों के लिए चाइल्ड केयर लीव 100 प्रतिशत पर दी जा सकती है और अगले 365 दिनों के लिए 80 प्रतिशत लीव सेलरी दी जा सकती है।

    शौर्यपथ / पंजाब इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल साइंसिज (पिम्स) के चिकित्सकों ने लेज़र तकनीक से 26 और 28 सप्ताह के प्रीमेच्योर बच्चों की आंखों के आप्रेशन कर पदोर्ं को ठीक करने में सफलता पाई है।
    शिशु विशेषज्ञ प्रोफेसर डा. जतिंदर सिंह ने मंगलवार को बताया कि कोरोना काल के दौरान अगस्त महीने में जालंधर और होशियारपुर के दो परिवारों के 28 और 26 हफ्तों के प्रीमेच्योर बच्चों को अत्यंत गंभीर हालात में अथक प्रयास से बचाने में कामयाबी हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में जालंधर निवासी अंजू के घर 28 सप्ताह की दो प्रीमेच्योर बच्चियों ने जन्म लिया।
    जन्म के समय यह बच्चे 68० ग्राम और 89० ग्राम के थे जबकि समान्य नवजात बच्चे का भार ढाई से चार किलो होता है। इसी प्रकार होशियारपुर निवासी रशपाल कौर के घर में भी 26 हफ्तों की एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। जिसका उस समय भार 63० ग्राम था। इस तीनो बच्चों के फेफड़े तक नहीं बने हुए थे। बहुत ही गंभीर हालत में इन तीन बच्चियों को पिम्स के निकू वार्ड में दखिल किया गया।
    डॉ सिंह ने बताया कि अंजु की बच्चियों को सांस नहीं ले पाने के कारण नौ दिन तक वेंटलेटर पर रखा गया उसके बाद उसे 5 दिन सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। सात ग्राम खून होने कारण बच्चे बहुत ही कमजोर थे। इन बच्चों को तीन बार खून चढ़ाया गया और काफी समय तक आक्सीजन पर भी रहे। इसके अलावा थायरेड नहीं बन रहा था और बच्चे दूध भी नहीं पचा रहे थे। इसके बाद इस बच्चियों की आंख के पीछे वाला पदार् भी नहीं बन रहा था। लेजर तकनीक के द्वारा इनकी आंख का आप्रेशन किया गया।
    इसके अलावा होशियारपुर की रशपाल कौर के घर 18 साल बाद एक प्रीमेच्योर बच्ची ने जन्म लिया। लेकिन जन्म के समय उसकी हालत भी काफी गंभीर थी। बच्ची को पिम्स में इलाज के लिए भतीर् किया गया। निकू में दाखिल करने के बाद इसका भी इलाज शुरू किया गया।
    इस बच्ची को एक महीने तक सीपेप स्पोर्ट पर रखा गया। बच्ची को इंफेक्शन काफी ज्यादा थी। इसका भी खून सात ग्राम था। खून नहीं बन रहा था। सांस रुक-रुक कर आ रही थी। डा. जतिंदर ने कहा कि इन तीनो बच्चों का तुरंत इलाज किया गया। इलाज के बाद इन बच्चों के फेफड़े भी बनने शुरु हो गये हैं। तीनों अब पूरे तरह स्वस्थ्य हैं। तीनो को जल्द ही पिम्स से छुट्टी देकर घर भेज दिया जाएगा।

    शौर्यपथ / कोविड-19 वायरस को लेकर दुनियाभर में नए-नए शोध हो रहे हैं। इसी कड़ी में प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भी कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए नया शोध हो रहा है। इस शोध में यूरिन जांच के जरिए कोरोना संक्रमण के पता लगाने की संभावना तलाशी जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द चौंकाने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं।
    मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलोजी विभाग में कोरोना संक्रमित के यूरिन को शोध की जांच प्रक्रिया में रखा गया है। इसके लिए करीब 50 संक्रमितों के यूरिन सैंपल को लिए गए हैं। शोध कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लक्षण में यह संभव होता दिख रहा है।
    एसआरएन के कोरोना नोडल अफसर डॉ सुजीत राय के अनुसार, यूरिन के जरिए कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए शोध किया जा रहा है। इसके लिए संक्रमितों के यूरिन सैंपल को शोध में शामिल किया गया है। यूरिन से कोरोना का पता चलेगा या नहीं, फिलहाल इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
    मुंह व नाक का ही लेते हैं सैंपल :
    कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए अबतक एक ही जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है। संबंधित व्यक्ति के मुंह व नाक से ही सैंपल लिया जाता है। इसके आधार पर आई रिपोर्ट पर ही संक्रमण होने या न होने के बारे में बताया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह व नाक से ठीक से सैंपल न लेने के कारण रिपोर्ट भी रुक जाती है।
    तो खुद जाना जरूरी नहीं होगा :
    यूरिन की जांच से अगर कोरोना संक्रमितों के बारे में पता लगेगा तो पीड़ित को काफी आसानी होगी। अबतक मुंह व नाक से सैंपल लेने के कारण खुद जाना जरूरी होता था। अगर यूरिन से यह संभव हुआ तो जरूरी नहीं है कि संबंधित व्यक्ति खुद जांच कराने पहुंचे।
    आंखों से भी संक्रमण का जताया था खतरा :
    मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में आंखों से कोरोना संक्रमण होने पर भी शोध किया जा रहा है। माना गया था कि आंखों से निकलने वाला तरल पदार्थ व आंसुओं में कोरोना संक्रमण का आरएनए पाया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना था कि संक्रमित की आंखों से निकलने वाला तरल पदार्थ व आंसू नाक की नली व मुंह तक पहुंच जाते हैं। नाक व मुंह के जरिए वह दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है।

    धर्म संसार / शौर्यपथ / आज बुधवार है। शास्त्रों में यह दिन भगवान शिवजी के पुत्र प्रभु गणेश को समर्पित है। भगवान गणेश के बुध ग्रह का कारक देव होने के कारण बुधवार को बुध देव की पूजा का भी विधान है। कहते हैं कि बुध ग्रह का शुभ फल पाने के लिए श्रीगणेश के कुछ उपाय करने चाहिए। हिंदू शास्त्रों में श्रीगणेश को मां लक्ष्मी का मानस पुत्र बताया गया है। ऐसे में मान्यता है कि मां लक्ष्मी अपने पुत्र के भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के साथ ही धन प्राप्ति के योग भी बनाती हैं। जानिए बुधवार के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के ये सरल उपाय-
    1. मान्यता है कि बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाने से जीवन की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और धन-धान्य में कोई कमी नहीं रहती है।
    2. कहते हैं कि बुधवार के दिन सुबह स्नान आदि के बाद एक कांस की थाली में चंदन से ऊँ गं गणपतयै नम: लिखकर पांच बूंदी के लड्डू के रखकर पास के मंदिर में दान करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
    3. बुधवार के दिन श्रीगणेश को सुबह शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाना उत्तम माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है और बिगड़े काम भी बन जाते हैं।
    4. शास्त्रों में बुधवार के दिन भगवान गणेश के अभिषेक का विधान बताया गया है। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।
    5. बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में जाकर दर्शन करना शुभ होता है। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान गणेश और मां लक्ष्मी भक्त के मन की मुरादें पूरी करती हैं।
    6. बुधवार के दिन घर में गंगा जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर आती हैं।
    7. बुधवार के दिन घर के मंदिर में भगवान गणपति को 8 अर्क के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर में स्थायी बसेरा बनाती हैं।

    शिक्षा /शौर्यपथ /आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में तरक्की, धन, बिजनेस, वैवाहिक जीवन, परिवार, नौकरी आदि से जुड़े सवालों का सरलता से जवाब दिया है। कहते हैं कि आचार्य चाणक्य की नीतियों को अपनाना कठिन होता है, लेकिन जिस व्यक्ति ने अपना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। नीति शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की कुछ आदतें ही उसके धनवान बनने के रास्ते का रोड़ा होती हैं। इन आदतों के कारण व्यक्ति का जीवन मुश्किलों से भर जाता है। जानिए उन आदतों के बारे में-
    चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति चाहे जितना गरीब हो, उसे साफ-सुथरा होना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि गंदे या मैले कपड़े पहनने वाले व्यक्ति के पास मां लक्ष्मी का वास कभी नहीं होता है। ऐसे लोग अपमानित होते हैं।
    नीति शास्त्र में चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति दांतों को गंदा रखता है और उनकी सफाई नहीं करता है। उसे गरीबी का सामना करना पड़ता है। वहीं दांत साफ रखने वाला व्यक्ति खुशहाल रहता है।
    चाणक्य कहते हैं कि ज्यादा खाने वाला व्यक्ति कभी धनवान नहीं बन पाता है। चाणक्य कहते हैं कि ज्यादा खाने वाले व्यक्ति की सेहत भी खराब रहती है।
    नीति शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा मीठा बोलना चाहिए। कड़वा बोलने वाले व्यक्ति को लोग पसंद नहीं करते हैं और उसके दुश्मनों की संख्या भी बढ़ती जाती है।
    चाणक्य का मानना है कि अच्छे तरीके से कमाया गया धन ज्यादा दिनों तक टिकता है। वहीं गलत तरीके से कमाया गया धन व्यक्ति को हमेशा परेशान रखता है। चाणक्य कहते हैं कि धूर्त और चालाक व्यक्ति ज्यादा दिनों तक खुशहाल नहीं रह पाते हैं।

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