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राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले में धान फसल की कटाई प्रारंभ हो चुकी है, जिन क्षेत्रों में धान के बाद रबी फसल लिया जाता है वहाँ किसान धान कटाई के बाद खेत में पड़े पराली को जला देते है। इसके संबंध में किसानों को भ्रम है कि पराली जलाने के बाद अवशेष (राख) से खेत को खाद मिलेगा तथा खेत साफ हो जाएगा, लेकिन यह सोचना गलत है, क्योंकि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता तथा लाभदायक कीट भी खत्म हो जाती है। साथ ही वायु प्रदुषण का कारण बनती है जिससे मनुष्य, पशु पंक्षी सभी को विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी होती है जिसका उदाहरण -दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे शहरों में कुछ वर्षो से देखने को मिल रहा है।
धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान -
एक टन धान पराली जलाने से हवा में 3 किलो ग्राम कार्बन, 513 किलो ग्राम कार्बन डाई-आक्साईड, 92 किलो ग्राम कार्बन मोनो आक्साईड तथा 250 किलो ग्राम राख घुल जाती है। धान पराली जलाने से वायु प्रदुषित होने से आँखो में जलन एवं सांस संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है इस कारण भूमि में 80 प्रतिशत तक नाईट्रोजन, सल्फर एवं 20 प्रतिशत अन्य पोषक तत्व की कमी आ रही है। मित्र कीट की मृत्यु होने से नई-नई बीमारियाँ उत्पन्न होती है। एक टन धान पराली जले से 5.5 किलो ग्राम नाईट्रोजन, 2 किलो ग्राम फास्फोरस और 1.2 किलो ग्राम सल्फर जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। पशुओं के लिए वर्ष भर चारा आपूर्ति की समस्या बन जाती है।
फसल अवशेष/पराली/नरवाई जलाने पर आर्थिक दंड -
आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा वायु (प्रदुषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19(5) के अंतर्गत फसल अपशिष्ट को जलाया जाना प्रतिबंधित किया गया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के तहत खेती में कृषि अवशेषों को जलाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है जिसके तहत पराली जलाने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक दंड के रूप में 2 एकड़ से कम खेत पर 2500 रूपए, 2 से 5 एकड़ खेत पर 5000 रूपए तथा 5 एकड़ से अधिक पर 15000 रूपए जुर्माना लगाया जाएगा।
पराली का निर्मित गौठान में दान -
जिले में सुराजी गांव योजना के तहत गौठान निर्मित किए गए है जिसमें धान पराली का दान करें, ताकि गौठान में वर्षभर पशुओं के लिए चारा आपूर्ति बनी रहें। पैरादान करने के लिए संबंधित गौठान समिति/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।
पराली का प्रबंधन -
स्टा मल्चर मशीन की सहायता से पराली को गठ्ठे में एक कर उपयोग कर सकते है। वेस्ट डी-कम्पोजर के 200 लीटर प्रति एकड़ घोल को फसल कटाई उपरांत खेतो में पड़े अवशेषों के उपर छिड़काव कर सड़ा सकते है। जिससे खेतों में ही पोषक तत्व प्रबंधन किया जा सकता है। वेस्ट डी-कम्पोजर बनाने के लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो ग्राम गुड़ मिलाकर वेस्ट डी-कम्पोजर का 20 ग्राम का घोल डालकर 6 से 7 दिन के लिए ढककर रख देते है। प्रतिदिन दो बार डंडे से उसे अच्छी तरह मिलाना चाहिए। धान के पराली का यूरिया से उपचार करके पशु चारे के रूप में उपयोग कर सकते है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / बड़े शहरों के शिक्षण विधि के तर्ज पर विद्यार्थियों को डिजिटल एजुकेशन देने के लिए राजनांदगांव जिला के मोहला ब्लॉक के स्मार्ट टीवी से अध्यापन के नवाचार को विभाग द्वारा काफी सराहना मिलने के बाद अब छत्तीसगढ़ राज्य स्तर पर प्रकाशित होने वाले ई पत्रिका शिक्षा के गोठ में भी इसको विशेष रूप से प्रकाशित किया गया है। स्मार्ट क्लास द्वारा अध्यापन को बढ़ावा देने वाले सोमाटोला के शिक्षक श्री राजकुमार यादव के बारे में पत्रिका ने विशेष लेख प्रकाशित किया है। उल्लेखनीय है कि मोहला के शिक्षक श्री राजकुमार यादव जो शिक्षा के क्षेत्र में नये-नये नवाचार करने के लिए जाने जातेे है, वो इस नवाचार के प्रथम प्रेरणास्रोत है।
मोहला एबीईओ राजेन्द्र कुमार देवांगन ने जानकारी दिया कि शिक्षा के गोठ विभाग की एक राज्यस्तरीय ऑनलाइन ई पत्रिका है। जिसमें पढ़ाई में नवाचार करने वाले व बेहतर शिक्षण देने वाले शिक्षकों व स्कूलों के बारे में लेख प्रकाशित किया जाता है। यह पत्रिका पढ़ई तुहर दुआर पोर्टल में उपलब्ध है। इस ई पत्रिका के प्रथम संस्करण अक्टूबर 2020 के अंक में मोहला के शिक्षकों के नवाचार को प्रकाशित किया गया है। मोहला ब्लाक के शिक्षकों ने राज्य स्तरीय ई पत्रिका में उनके नवाचारी प्रयास को स्थान देने के लिए राज्य स्तर के विभागीय अधिकारीगण एवं संपादक मंडल के सदस्यगण श्री आरएन सिंह, डॉ. योगेश शिवहरे, एके सोमशेखर, प्रशांत कुमार पांडेय, डॉ. एम सुदीश, डॉ. विद्यावती चंद्राकर, सत्यराज अय्यर, डॉ. जयाभारती चंद्राकर सहित उप संचालक जनसंपर्क राजनांदगांव डॉ. उषा किरण बड़ाईक का आभार प्रदर्शित किया है। उल्लेखनीय है कि मोहला ब्लाक के कुल 272 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालााओं में स्मार्ट टीवी के जरिये अध्यापन का नवाचारी प्रयास शिक्षकों द्वारा स्वप्रेरणा से प्रेरित होकर किया जा रहा है, जिसमें 224 स्कूलों में स्मार्ट टीवी लगाने का कार्य शिक्षकों द्वारा स्वयं के व्यय एवं जनसहयोग से पूर्ण किया जा चुका है। ऐसे नवाचार के संबंध में विभागीय ई पत्रिका में लेख प्रकाशित होने से मोहला ब्लॉक के शिक्षकों का उत्साह और बढ़ा है तथा अन्य ब्लॉक के शिक्षक भी प्रेरित होकर इसका अनुसरण कर रहे है।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / ऊर्जा मंत्रालय, भारत शासन के अतिरिक्त सचिव एवं केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी आशीष उपाध्याय ने आज आकांक्षी जिला राजनांदगांव में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती तनुजा सलाम एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं केन्द्रीय प्रभारी अधिकारी आशीष उपाध्याय ने कहा कि आकांक्षी जिला राजनांदगांव में नीति आयोग द्वारा निर्धारित सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं अन्य संकेतको पर अच्छा कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुपोषण दर में कमी आई है। उन्होंने संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए भी साफ्टवेयर के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को ट्रेक करने के लिए कहा। ताकि इसके आधार पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों में दी जा रही सुविधाओं एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने जिले में मृदा परीक्षण की संख्या बढ़ाने के लिए भी कहा।
कलेक्टर वर्मा ने उन्हें बताया कि स्वास्थ्य, पोषण, अधोसंरचना, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेश एवं कौशल विकास के महत्वपूर्ण संकेतक पर जिले में अच्छा कार्य किया जा रहा है। कोविड-19 के दौरान टेक होम राशन भी हितग्राहियों के घरों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जो रोड स्वीकृत हुए हैं उनमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रोड निर्माण में कुछ दिक्कते हुई है। कोरोना की वजह से भी कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन अब कार्यों में गति लाते हुए निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। इसके लिए फेस-3 की राशि भी स्वीकृत हुई है। जिले में 1698 ग्राम है। जिनमें से अधिकांश ग्राम पंचायतों में कनेक्टीविटी है। मानपुर, मोहला के दूरस्थ ग्रामों में कुछ स्थानों में कनेक्टीविटी के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि संस्थागत प्रसव में बढ़ोत्तरी के लिए कार्य किया जा रहा है। कोविड-19 की रोकथाम के लिए भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार कार्य किए जा रहे हैं। कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती रेणु प्रकाश ने कहा कि कुपोषण दर में कमी आई है। सुपोषण को बढ़ावा देने के लिए समाज से सहयोग लेते हुए सुपोषण पात्र जैसी योजना आरंभ कर सकते हैं। लीड बैंक प्रबंधक श्री अजय त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्याति योजना के तहत दिए गए लक्ष्य 9669 के विरूद्ध 10 हजार हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इस अवसर पर नीति आयोग के फेलो सुश्री ज्योति सिंह ने प्रजेन्टेशन के माध्यम से नीति आयोग के संकेतक पर जिले की प्रगति की जानकारी दी। इस अवसर पर उप संचालक कृषि जीएस धु्रर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी एचआर सोम, सहायक संचालक कौशल विकास नितिन हिरवानी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुंबई / एजेंसी / कोरोना वायरस संक्रमण महामारी ने जहां लोगों की रोजी-रोटी पर असर डाला है, वहीं बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाला है. छोटे बच्चे भीड़ या अंजान से डरने वाले फोबिया यानी भय का शिकार हो रहे हैं तो बड़े बच्चों में तनाव, चिंता और घबराहट की शिकायतें देखने को मिल रही हैं. ये चिंता की बात इसलिए है क्यूँकि इनमें से कई बच्चों को अस्पतालों में डॉक्टर, काउंसलर और दवा की ज़रूरत पड़ रही है.
मुंबई निवासी नायोमी कोठारी स्पीच एंड लैंग्विज थेरपिस्ट हैं. इनका बेटा एक साल का हो चुका है लेकिन पिछले पांच-छह महीने से घर से बाहर ना निकलने के कारण अनजान चेहरे या भीड़ से डर रहा है. इस डर या फोबिया को ‘आगोराफोबिया'(Agoraphobia) कहते हैं. कोठारी कहती हैं, "हम घर के अंदर पाँच महीने से बंद थे. बाबा कहीं नहीं गया था, गार्डन पब्लिक स्पेसेस भी बंद थे, पाँच महीने के बाद जब हम वैक्सिनेशन के लिए डॉक्टर वोरा के पास गए तो बाबा इतना रोया कि आँख बड़े-बड़े हो गए. लेफ़्ट राइट देखने लगा बाहर क्या है? क्या होता है?"
इस परेशानी को देखकर डॉक्टर परेशान थे कि आखिर एक साल का बच्चा इतना क्यों रो रहा है? SRCC चिल्ड्रन हॉस्पिटल के पीडीट्यट्रिशन डॉ. अमीश वोरा ने कहा, "हमें लगा बारह महीने का बच्चा इतना क्यूँ डर रहा है? मैंने बोला 15 दिन बाद फिर आएँ. 15 दिन के बाद भी वही हालत थी...फिर समझ आया कि ये बच्चा सोशल सोशल आयसोलेशन की वजह से रो रहा है. पिछले छह महीने में वो किसी को मिला नहीं और घर से बाहर कभी निकला नहीं है. छह महीने में बच्चों में जो ग्रोथ होना चाहिए, वो नहीं हो सका लेकिन इस बच्चे को आगोराफोबिया हुआ था. माँ भी थेरपिस्ट हैं तो बच्चे का पूरा ट्रीटमेंट तुरंत मिल गया."
बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, NIMHANS में रोज़ाना क़रीब 40 बच्चे मानसिक इलाज के लिए आ रहे हैं. इनके अलावा 35 बच्चों की फ़ोन पर काउन्सलिंग हो रही है. NIMHANS में डिपार्टमेंन्ट ऑफ चाइल्ड एंड एडोलोसेन्ट सायकिट्रिक के हेड डॉ. जॉन विजय सागर ने बताया, "हमारे अस्पताल में रोज़ाना 35-40 बच्चे जो 6 साल से लेकर 16-17 साल के हैं, वो आ रहे हैं और क़रीब 30-35 बच्चों की टेलीफोनिक काउन्सलिंग हो रही है. पेरेंट्स को देखना पड़ेगा कि बच्चों के लिए रूटीन अच्छा प्लान करें...टाइम टाइम पर कुछ ऐक्टिविटीज़ करवाएँ, और बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करें."
कोरोना काल में हमारे बच्चे घरों में क़ैद महसूस कर रहे हैं और कम बोलचाल के साथ-साथ उनके खेलकूद का दायरा भी सिमट चुका है. इस वजह से कई बच्चे मानसिक रूप से बीमार हुए हैं. कई बच्चे तो घरों में क़ैदियों जैसा महसूस कर रहे हैं. घर से बाहर जाने नहीं मिलता..थोड़ा सा बाहर निकले तो मास्क ग्लव्ज़ की कैद में रहना पड़ता है. ये बच्चे अपने फ़्रेंड्स से भी नहीं मिल पा रहे हैं. उनकी पढ़ाई भी ऑनलाइन चल रही है. काउंसलिंग के लिए कई बच्चों ने कहा कि उन्हें घर में अच्छा नहीं लगता, वो बोर फ़ील करते हैं.
डॉक्टर बताते हैं प्री-कोविड की तुलना में बच्चों में मानसिक तनाव के मामले दोगुने हुए हैं. मुंबई के फोर्टिस हॉस्पिटल के कंसल्टेंट साइकिट्रिस्ट डॉ. केदार तिलवे कहते हैं, "प्री कोविड से तुलना करें तो अभी बच्चों में तनाव के मामले दोगुने हुए हैं. शिकाएतें भी अलग देखी जा रही हैं, पहले Attention deficit hyperactivity disorder , Scholastic backwardness, बिहेव्यरल इशू की वजह से बच्चे आते थे पर अभी ज़्यादा करके, उदासी, घबराहट, तनाव, चिंता, शारीरिक लक्षण के कारण स्ट्रेस ये कम्प्लेंट की संख्या बढ़ गयी है."
वॉकहार्ट हॉस्पिटल के कंसल्टेंट नियोनैटोलॉजी डॉ. समीर शेख कहते हैं, "अभिभावकों का जॉब लॉस, पेरेंट्स का स्ट्रेस, फ़ाइनैन्स का स्ट्रेस, के देखकर बच्चे भी समझ रहे हैं कि घर के हालात पहले जैसे नहीं हैं. ये सब उनपर भी इम्पैक्ट करता है, उनको समझ आ रहा है कि घर के हालात पहले जैसे नहीं हैं. और फिर बच्चों पर स्ट्रेस बढ़ता है, इस वजह से हमारे पास अलग-अलग तरह की बीमारी का रूप लेकर आते हैं."
बच्चों में मानसिक बीमारी के मामले मेट्रो शहरों के अलावा छोटे शहरों से भी रिपोर्ट हो रहे हैं. एक्स्पर्ट्स के मुताबिक़ फ़्रंटलाइन वर्कर्स जैसे कि पुलिस, डॉक्टर,नर्स, सफ़ाईकर्मी के बच्चों में ज़्यादातर ऐसी मानसिक तनाव की शिकायत देखी जा रही हैं.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / भीमा कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से वरवर राव की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर जल्द विचार करने के लिए कहा है. SC ने कहा कि उनकी जमानत याचिका पर 17 सितंबर से सुनवाई नहीं हुई है. इसके साथ की शीर्ष अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के CJ से अनुरोध किया है कि वह उचित पीठ के समक्ष अपील को सूचीबद्ध करे. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की चिकित्सा स्थिति किसी विशेष चरित्र और समय की ओर ध्यान देने की मांग करती है. यह मामला एक कैदी/दोषी/अभियुक्त के मानवाधिकारों के बारे में सवाल उठाता है.
दरअसल, याचिकाकर्ता की ओर से इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वरवर राव को कई बीमारियां है और उनको कोरोना होने के बाद तलोजा जेल से अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था. इसके बाद फिर उनको वापस जेल भेज दिया गया है. वरवर की मेडिकल स्थिति देखते हुए जमानत दी जाए क्योंकि हाईकोर्ट में सितंबर के बाद सुनवाई नहीं हुई है.
पी वरवर राव की पत्नी ने जमानत पर रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में उनकी पत्नी ने इस आधार पर तत्काल रिहाई की मांगी है कि उनकी लगातार हिरासत क्रूरता और अमानवीय व्यवहार होगी. इसके साथ ही भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन और उनकी गरिमा का उल्लंघन होगा.याचिका में कहा गया है कि वरवर को कई बीमारियां हैं और कोविड -19 महामारी के समय उनको जेल में रखना ठीक नहीं है.
नई दिल्ली /शौर्यपथ / बेगूसराय बिहार के लेनिनग्राद कहे जाने वाले बेगूसराय में वामपंथ की सियासी लड़ाई बेहद रोचक है. बीजेपी-JDU जहां अपने बागी उम्मीदवारों से परेशान है वहीं बेगूसराय की 7 विधानसभा में से 4 सीट को वाम दलों को देने से महागठबंधन में भी भितरघात की आशंका है. दूसरे शब्दों में कहें तो बेगूसराय की सियासी जमीन पर वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच सीधा मुकाबला चल रहा है..दोनों ही दलों ने अपना प्रचार तेज कर दिया है, लेकिन NDA के सामने बड़ी चुनौती LJP के अलावा BJP और JDU के बागी हैं जो बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह के खिलाफ यहां खुली बगावत कर रहे हैं.
निर्दलीय उम्मीदवार आशुतोष पोद्दार कहते हैं, 'यहां पिछडे वर्ग का नेता होना चाहिए लेकिन सांसद ने अपनी जाति को यहां ज्यादा तवज्जो दी है. इस बार 10 तारीख को पता चल जाएगा. ग्रैंड सेकुलर फ्रंट के AIMIM उम्मीदवारके चलते मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकना महागठबंधन के सामने बड़ी चुनौती है.इसी के चलते महागठबंधन की उम्मीदवार अनीता भूषण गांव-गांव की खाक छान रही हैं. महागठबंधन की ओर से कांग्रेस की प्रत्याशी अनिता भूषण कहती हैं, 'कब तक 15 साल दिखाकर लोगों को डराते रहेंगे. मुजफ्फरनगर में बालिकाओं का शोषण किसके राज में हुआ था.'
बेगूसराय के भूमि संघर्ष में वाम दलों के 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनकी याद में जगह जगह आपको इस तरह के तोरणद्वार दिख जाएंगे. अब इसी भूमि संघर्ष के दम पर 75 साल के पूर्व सांसद जगन्नाथ प्रसाद सिंह 7 में से 4 सीटों पर वामदलों को जिताने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं. पूर्व सीपीआई सांसद जगन्नाथ प्रसाद सिंह ने कहा, 'हमने भूमि संघर्ष किया.135 से ज्यादा नौजवानों का खून देकर सामंतों की तीन हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पर लाल झंडा लगाकर लोगों को बसाया.'2015 में बेगूसराय की सात सीटों में से एक सीट पर बीजेपी और दो पर JDU ने जीत हासिल की थी. राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी जीती हुई सीट छोड़कर वाम दलों पर दांव लगाया है. अब चुनावी परिणाम बताएंगे कि वोटर किसके साथ हैं.
शौर्यपथ / अच्छी सेहत के लिए हम क्या कुछ नहीं करते है, लेकिन सही खान-पान के साथ कुछ ऐसी बातें भी हमें ध्यान रखनी चाहिए जिसका सीधा असर हमारी हेल्थ पर पड़ता है। दरअसल हममें से ऐसे कई लोग है। जो दोपहर के खाने के बाद कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो उनकी सेहत के लिए हानिकारक होता है। वो क्या गलतियां है आइए जानते हैं...
1 आपने सुना होगा कि खाने के एकदम बाद पानी नहीं पीना चाहिए? अगर आप इसका पालन करते हैं तो ठी है, लेकिन अगर नहीं करते और पानी पी लेते हैं तो ध्यान रखें कि कभी ठंडा पानी न पिएं। खाना खाने के बाद यह पाचन बिगाड़ सकता है। अगर आपको पीना ही है तो गुनगुना पानी पिएं, यह पाचन को और बेहतर करेगा।
2 खाना खाने के बाद चाय या कॉफी पीना अगर आपको पसंद है, तो अफसोस कि यह आपकी बड़ी गलती है। इससे शरीर आहार में मौजूद आयरन को अवशोषित नहीं कर पाता और न ही प्रोटीन को पचा पाता है।
3 दोपहर का खाना खत्म करने के बाद अगर आप तुरंत अपने काम पर लौट जाते हैं और तेज चलना या अन्य गतिविधि करते हैं, तो यह भी गलती है। खाने के बाद कुछ देर रेस्ट करें उसके बाद ही एक्टिव हों, वह भी धीरे।
4 खाने के बाद कुछ घंटों तक फल, जूस या अन्य खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें। ये आपके पाचन की प्रक्रिया को बाधित कर देता है।
5 खाने के बाद लेटना ठीक नहीं है, ना ही धूम्रपान का सेवन ठीक है। यह तेजी से आपके पाचन तंत्र और शरीर को हानि पहुंचा सकता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / अधिकतर लोग कहते हैं कि age is just a number। जी हां, उम्र सिर्फ एक नंबर ही तो है। किसी भी सच्चे रिश्ते में उम्र का फर्क कितना मायने रखता है? ज्यादातर लोग मानते हैं कि लड़के की उम्र लड़की से बड़ी होनी चाहिए ताकि दोनों के बीच आपसी समझ और तालमेल बना रहे। आपको क्या लगता है? क्या ये भ्रम नहीं है? बदलते वक्त के साथ अब लड़का, लड़की से बड़ा हो या लड़की, लड़के से उम्र में बड़ी हो ये मायने नहीं रखता। मायने ये रखता है कि दोनों की आपसी समझ कैसी है? वे दोनों एक-दूसरे से कितना प्यार करते हैं? एक-दूसरे के साथ कितने खुश हैं? ऐसे कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज कपल हैं जिसमें लड़की, लड़के से बड़ी है और उनका रिश्ता काफी मजबूत भी है। वैसे भी कहते हैं कि प्यार में उम्र की सीमा नहीं होती है। यदि आप दोनों एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं, एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझते हैं तो बाकी चीजें मायने नहीं रखतीं। बस आपको अपने रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना जरूरी है। वो क्या है, आइए जानते हैं...।
कभी भी अपने पार्टनर को इस बात का एहसास न दिलाएं कि वे आपसे बड़ी हैं। शायद कभी उनको आपकी ये बात हर्ट भी कर जाए। आपके रिश्ते में उम्र नहीं, आप दोनों की आपसी समझ मायने रखती है, इस बात का ख्याल रखें। रिश्ते समझ और प्यार से मजबूत होते हैं।
महिलाएं हमेशा अपने पति से छोटी बने रहना चाहती हैं। वे हमेशा इस बात को लेकर कॉन्शियस रहती हैं और ये सब वे आपके लिए करती हैं।
अपनी पार्टनर को हमेशा स्पेशल होने का अहसास करवाएं। उन्हें इस बात का एहसास करवाएं कि वे आपके लिए बहुत खास हैं। इससे आप दोनों के बीच प्रेम और बढ़ेगा।
आपकी पार्टनर आपसे उम्र में बड़ी हैं, आप ये कहने में संकोच न करें। यदि आप अपने परिचित से ये बात छुपाते हैं, तो इसका यह मतलब है कि आप इस बात को लेकर कहीं-न-कहीं सोचते हैं। ये बात आपकी पार्टनर को बुरी भी लग सकती है इसलिए इसे बिलकुल नॉर्मल लें कि ये आपके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। आप दोनों के बीच प्यार और समझदारी मायने रखती है, जो शायद ऐसे कपल के बीच भी न हो जो सेम एज के हों...।
सरप्राइज गिफ्ट आपके रिश्तों में और मधुरता लेकर आएगा। ऐसा करके आप अपने पार्टनर को खुश रख सकते हैं। आप चाहे तो सरप्राइज डिनर भी प्लान कर सकते हैं।
सेहत / शौर्यपथ /विटामिन-सी से भरपूर आंवला, हर मौसम में लाभदायक होता है। यह आंखों, बालों और त्वचा के लिए तो फायदेमंद है ही, साथ ही इसके और भी कई फायदे हैं, जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। आमतौर पर आंवले का प्रयोग अचार, मुरब्बा या चटनी के रूप में किया जाता है,लेकिन इसका अलग-अलग तरह से सेवन आपके लिए बेहद उपयोगी है। अगर आप नहीं जानते इस अनमोल फल के बारे में तो जरूर पढ़िए -
1 डायबिटीज के मरीजों के लिए आंवला बहुत काम की चीज है। पीड़ित व्यक्ति अगर आंवले के रस का प्रतिदिन शहद के साथ सेवन करे तो बीमारी से राहत मिलती है।
2 एसिडिटी की समस्या होने पर आंवला बेहद फायदेमंद होता है। आंवला का पाउडर, चीनी के साथ मिलाकर खाने या पानी में डालकर पीने से एसिडिटी से राहत मिलती है। इसके अलावा आंवले का जूस पीने से पेट की सारी समस्याओं से निजात मिलती है।
3 पथरी की समस्या में भी आंवला कारगर उपाय साबित होता है। पथरी होने पर 40 दिन तक आंवले को सुखाकर उसका पाउडर बना लें, और उस पाउडर को प्रतिदिन मूली के रस में मिलाकर खाएं। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में पथरी गल जाएगी।
4 रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर, प्रतिदिन आंवले के रस का सेवन करना काफी लाभप्रद होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, और खून की कमी नहीं होने देता।
5 आंखों के लिए आंवला अमृत समान है, यह आंखों की रौशनी को बढ़ाने में सहायक होता है। इसके लिए रोजाना एक चम्मच आंवला के पाउडर को शहद के साथ लेने से लाभ मिलता है और मोतियाबिंद की समस्या भी खत्म हो जाती है।
6 बुखार से छुटकारा पाने के लिए आंवले के रस में छौंक लगाकर इसका सेवन करना चाहिए, इसके अलावा दांतों में दर्द और कैविटी होने पर आंवले के रस में थोड़ा सा कपूर मिला कर मसूड़ों पर लगाने से आराम मिलता है।
7 शरीर में गर्मी बढ़ जाने पर आंवल सबसे बेहतर उपाय है। आंवले के रस का सेवन या आंवले को किसी भी रूप में खाने पर यह ठंडक प्रदान करता है। हिचकी तथा उल्टी होने की पर आंवले के रस को मिश्री के साथ दिन में दो-तीन बार सेवन करने से काफी राहत मिलेगी।
8 याददाश्त बढ़ाने में आंवला काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए सुबह के समय आंवला के मुरब्बा गाय के दूध के साथ लेने से लाभ होता है,
इसके अलावा आप प्रतिदिन आंवले के रस का प्रयोग भी कर सकते हैं।
9 चेहरे के दाग-धब्बे हटाकर उसे खूबसूरत बनाने के लिए भी आंवला आपके लिए उपयोगी होता है। इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ, चमकदार होती है और झुर्रियां भी कम हो जाती हैं।
10 बालों को काला, घना और चमकदार बनाने के लिए आंवले का प्रयोग होता है, इसके पाउडर से बाल धोने या फिर इसका सेवन करने से बालों की समस्याओं से निजात मिलती है
सेहत /शौर्यपथ / मूंग की दाल अधिकांश घरों में बनाई जाती है और काफी पसंद भी की जाती है। वैसे तो सभी तरह की दालों में पौष्टिक तत्व होते हैं, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि मूंग की दाल खाने से आपको कौन से फायदे मिलेंगे -
1 मूंग की दाल में भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है। साथ ही इसे खाने से विटमिन-सी, कार्ब्स, प्रोटीन और डायटरी फाइबर भी मिलता है।
2 मूंग की दाल खाने से एनीमिया की समस्या में राहत मिलती है और वजन कम करने में भी ये सहायक होती है।
3 मूंग की दाल का पानी पिने से फाफी देर तक पेट भरा रहता है और आप एनर्जेटिक भी फील करते हैं।
4 मूंग की दाल का पानी छोटे बच्चों के लिए भी फायदेमंद होता है, बच्चे इसे आसानी से पचा पाते हैं। ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कतती है।
5 अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो गई हो, तो उन्हें 1 कटोरी मूंग दाल पिलाएं। इससे उनके शरीर में पानी की कमी पूरी होगी साथ ही दस्त रूकने में मदद मिलेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
