
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
मुंबई / शौर्यपथ / 100 से अधिक प्रमुख हस्तियों ने फ्रांस पर हमले की निंदा करते हुए इसे नृशंस हत्या करार दिया. इसके साथ इन हस्तियों ने कहा कि कोई भी धर्म या उसका संत या पैगंबर इंसान की हत्या को उचित ठहराए जाने की सीख नहीं देता है. इन 100 प्रमुख हस्तियों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, गीतकार जावेद अख्तर, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण, नृत्यांगना-कोरियोग्राफर मल्लिका साराभाई और प्रतिष्ठित पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो शामिल हैं. इन सभी ने एक संयुक्त बयान जारी कर फ्रांस में हालिया आतंकी हमलों और मुस्लिम धार्मिक और राजनीतिक नेताओं के "घृणत" बयानों की निंदा की है.
जारी किए बयान पर विभिन्न धर्मों, पृष्ठभूमि और व्यवसायों के लोगों ने हस्ताक्षर किए और भारतीय मुसलमानों के स्वयंभू अभिभावकों...पर इस नृशंस हत्या का समर्थन करने के लिए निशाना साधा और कहा, 'कोई भगवान, कोई देवता, पैगंबर और संत साथी इंसानों की हत्या को उचित ठहराने का आह्वान कर सकता है? '
बयान में कहा गया है, "हम अधोहस्ताक्षरी विश्वास के नाम पर दो कट्टरपंथियों द्वारा फ्रांस में हाल ही में की गई हत्याओं की असमान रूप से और बिना शर्त निंदा करते हैं. हम भारतीय मुसलमानों के कुछ स्वयंभू अभिभावकों के रूढ़िवादी तर्क से परेशान हैं, जो नृशंस हत्या को तर्कसंगत बता रहे हैं और कुछ नेताओं की अपमानजनक टिप्पणी को खारिज करते हैं."
बयान में आगे जोड़ा गया, "दूसरों द्वारा किए गए समान अपराधों की तुलना करके अपराधों को तर्कसंगत बनाना एक तर्कहीन और बेतुका तर्क है, क्योंकि दो गलतियां एक अधिकार नहीं बनाती हैं. हम धर्म, किसी भी धर्म के नाम पर जघन्य अपराधों के औचित्य में किसी भी इफ और बट को अस्वीकार करते हैं. किसी भी देवता, देवी, देवता, पैगम्बर या संत को हत्या और / या साथी मनुष्यों को आतंकित करने का औचित्य साबित करने के लिए नहीं बुलाया जा सकता है.
आगे लिखा है, 'यह बयान फ्रांस में मुसलमानों को "पीड़ितों और प्रियजनों के साथ शोक और एकजुटता के संकेत के रूप में पैगंबर के जन्मदिन के उत्सव को रद्द करने" का आह्वान करता है.'
बयान पर हस्ताक्षर करने वाले अन्य लोगों में अभिनेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शबाना आजमी, फिल्म निर्देशक कबीर खान, नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर, अभिनेता-कार्यकर्ता स्वरा भास्कर और कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ शामिल हैं.गुरुवार को चाकू से हमला करने वाले एक हमलावर ने "अल्लाहु अकबर" चिल्लाया और फ्रांसीसी शहर नीस के एक चर्च में तीन लोगों की हत्या कर दी. इससे पहले पेरिस में एक स्कूल शिक्षक को दिन के उजाले में गला काट दिया गया था क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी के एक पाठ के लिए अपने छात्रों को पैगंबर मोहम्मद के कार्टून दिखाया था.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में रविवार को भारतीय सुरक्षाबलों के हाथों बड़ी कामयाबी लगी. जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक श्रीनगर में हुई मुठभेड़ में कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर डॉ सैफुल्लाह को भारतीय सुरक्षाबलों ने ढ़ेर कर दिया गया. श्रीनगर के रंगरेथ इलाके में पुलिस को आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली. इसके तुरंत बाद पुलिस और सुरक्षाबलों ने संयुक्त आपरेशन चलाते हुए आतंकवादियों के छिपे हुए ठिकाने को घेरने का प्रयास किया.
सुरक्षाबलों से घिरा देख आतंकवादियों ने फायरिंग करना शुरू कर दी. सुरक्षाबलों ने पहले छिपे आतंकवादियों को सरेंडर करने को कहा, इसके बाद भी बार-बार आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई लेकिन आतंकवादियों ने इसे अनसुना कर सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर को मार गिराया. हालांकि पहले सुरक्षाबलों को सैफुल्लाह के बारे में खबर नही थी बाद में जाकर इसके मारे जाने की पुष्टि हुई .
इस साल मई महीने में हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर रियाज नाइकू की मौत के बाद डॉ सैफुल्लाह को हिजबुल ने अपना कमांडर बनाया था. तब से यह सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द इसलिए बना हुआ था.
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिस आतंकी को जिन्दा पकड़ा गया है वह आतंकवादी स्थानीय हैं या फिर विदेशी. हालांकि पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह का कहना था कि पकड़ा गया संदिग्ध है और उससे पूछताछ जारी है.
चंडीगढ़ / शौर्यपथ / दीवाली का त्योहार आने वाला है. ऐसे में एक बार फिर से पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी है. हर साल जगह-जगह पर दीवाली के बाद प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ता है. भारत में गाय के गोबर को धार्मिक रूप से पवित्र माना जाता है. पंजाब के मोहाली में एक गैर सरकारी संगठन गौरी शंकर सेवा दल की तरफ से दीवाली से पहले, गोबर से मूर्तियां और मिट्टी के दीपक बनाए जा रहे हैं. इसके निदेशक, रमेश शर्मा का कहना है कि अन्य प्रकार की मूर्तियों के विपरीत, ये विसर्जन के दौरान बेकार नहीं जाएंगे. पानी के साथ, वे खाद के रूप में कार्य कर सकते हैं.
साथ ही रमेश शर्मा का कहना है कि चंडीगढ़ और मोहाली में हमारी गौशालाओं में 1000 गाय हैं. हमने गाय के गोबर का उपयोग करने का फैसला किया और लाठी और फूलों के बर्तन बनाने के लिए इस्तेमाल किया।. इन मूर्तियों को बेचने का हमारा कोई इरादा नहीं है. लोग हमारे पास आते हैं और उन्हें ले जाते हैं. यदि वे भुगतान करना चाहते हैं तो हम उन्हें राशि के साथ गायों को खिलाने के लिए कहते हैं.
गौरतलब है कि हाल के दिनों में गाय के गोबर के कई तरह के उपयोग कर उसके महत्व को समझा जा रहा है. राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने सोमवार को गाय के गोबर से बना एक चिप (Cow Dung Chip) लॉन्च किया है और कहा है कि इससे मोबाइल हैंडसेट्स का रेडिएशन काफी हद तक कम हो जाता है. आयोग के अध्यक्ष वल्लभ भाई कथीरिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 'हमने देखा है कि मोबाइल के साथ रखते हैं तो रेडिएशन काफी हद तक कम हो जाता है. बीमारी से बचना है तो आगे आने वाले वक्त में यह भी काम आने वाला है.' इसके साथ ही कामधेनु आयोग ने गाय के गोबर से बने कई दूसरे प्रॉडक्ट भी लॉन्च किए, जिनका लक्ष्य इस दीवाली पर प्रदूषण कम करने का है.
नई दिल्ली / शौर्यपथ / दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक अगले साल की दूसरी तिमाही में कोरोना की वैक्सीन बाजार में पेश करने की तैयारी कर रही है. कंपनी के कार्यकारी निदेशक साई प्रसाद ने उम्मीद जताई कि टीके के लिए सभी नियामकीय मंजूरी उचित समय पर मिल जाएगी. हालांकि टीके कोवैक्सीन की कीमत अभी तय नहीं की गई है.
भारत बायोटेक फिलहाल देश के विभिन्न स्थानों पर वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण कर रही है. भारत बायोटेक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के सहयोग से टीके कोवैक्सीन का विकास कर रही है. साई प्रसाद ने रविवार को कहा कि अगर हम परीक्षण के अपने अंतिम चरण में सुरक्षा, टीके के प्रभाव के डेटा और मानकों का ध्यान रखते हुए सभी मंजूरी हासिल करते हैं तो 2021 की दूसरी तिमाही में इसे पेश किया जा सकता है.
तीसरे चरण के लिए परीक्षण स्थलों का चयन
कंपनी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से तीसरे चरण के परीक्षण के लिए अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ट्रायल के स्थानों पर जरूरी तैयारी शुरू की गई है. 13-14 राज्यों में 25 से 30 स्थलों पर इस चरण के परीक्षण में वैक्सीन और प्लेसबो प्राप्तकर्ताओं को दो खुराक दी जाएंगी. एक अस्पताल में लगभग 2,000 लोगों को पंजीकृत किया जा सकता है.
400 करोड़ रुपये का निवेश का लक्ष्य
भारत बायोटेक के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि वैक्सीन के विकास और विनिर्माण सुविधाओं के लिए करीब 350-400 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है. इसमें अगले तीन महीनों में चरण परीक्षण के संचालन के लिए आवश्यक निवेश शामिल है. भारत बायोटेक ने कहा कि वह सरकारी और निजी दोनों के लिए टीके की आपूर्ति करना चाहती है. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन की कीमत अभी निर्धारित नहीं की गई है, क्योंकि कंपनी अभी भी उत्पाद विकास की लागत देख रही है। अभी कंपनी का ध्यान तीसरे चरण के परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करना है.
धर्म संसार / शौर्यपथ / श्रीकृष्ण पहले ही बता चुके थे कि जयद्रथ को उसके पिता द्वारा वरदान मिला है कि जो भी उसका वध करेगा और जैसे ही उसका सिर भूमि पर गिरेगा तो वध करने वाले के सिर के 100 टुकड़े हो जाएंगे। तब श्रीकृष्ण अर्जुन को एक नई युक्ति बताते हैं उसी युक्ति और नीति के अनुसार अगले दिन का युद्ध प्रारंभ हो जाता है। चारों ओर शंख ध्वनि बजने लगती है। अर्जुन युद्ध भूमि पर तबाही मचा देता है। सभी कौरव सिंधु नरेश जयद्रथ की सुरक्षा की शपथ ले चुके होते हैं।
अर्जुन के रोद्र रूप को देखकर सिंधु नरेश जयद्रथ घबरा जाता है। कृपाचार्य कहते हैं कि तुम निश्चिंत हो जाओ तुम्हें कुछ नहीं होगा। शकुनि कहता है कि सिंधु नरेश क्या आप हम पर भरोसा नहीं करते हैं? यह सुनकर वह कहता है कि करता हूं परंतु आपसे ज्यादा मुझे अर्जुन के शौर्य और पराक्रम पर भरोसा है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अवश्य पूरी करेगा और उसकी प्रतिज्ञा पूरी होने का अर्थ है मेरा अस्तित्व ही मिट जाना। लगता है कि सूर्य को भी अस्त होने की कोई जल्दी नहीं है। इस तरह सिंधु नरेश बहुत ही घबरा जाता है।
उधर, श्रीकृष्ण कहते हैं कि सूर्य सर पर आ गया है। आधा दिन हाथ से निकल गया है और अब तक जयद्रथ हमें दिखाई नहीं दिया है। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि कब तक, कब तक छिपेगा अपनी मृत्यु से? आज में उसे जीवित नहीं छोड़ूंगा। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि पार्थ! ये तुम्हारी भावना बोल रही है। इस समय तुम भावनावश सच्चाई को भूल रहे हो। यह सुनकर अर्जुन पूछता है- कौनसी सचाई। तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि यही की द्रोणाचार्य ने कुशलतापूर्वक व्यूह के अंदर व्यूह की रचना की है। तुम कौरवों का जो व्यूह ध्वस्त करके जयद्रथ तक पहुंचना चाहता हो वह द्रोणाचार्य का रचा हुआ केवल बाहरी व्यूह है और उन्होंने जो आंतरिक व्यूह बनाया है उसमें जयद्रथ सुरक्षित है और इस व्यूह के मुख पर स्वयं द्रोणाचार्य खड़े हैं। अब तक हम इस बाहरी व्यूह का भेदन भी नहीं कर सके हैं जबकि हमें चाहिए कि हम इस बाहरी व्यूह को तोड़कर हम आगे बढ़ें और द्रोणाचार्य से युद्ध करके उन्हें पराजित करें। इसके बाद ही हम आंतरिक व्यूह में प्रवेश कर सकेंगे। जयद्रथ तक पहुंचना बहुत ही दुष्कर कार्य है। क्योंकि हमारे पास केवल सूर्यास्त तक का समय है और समय है कि हमारे हाथों से निकला जा रहा है।
यह सुनकर अर्जुन कहता है कि धन्यवाद केशव जो तुमने मुझे गुरु द्रोणाचार्य की चाल समझा दी। अब चलो गुरु द्रोणाचार्य और उस आंतरिक व्यूह की ओर चलो। यह देखकर दुर्योधन सेना को आदेश देता है कि अर्जुन को रोको और उसे आगे मत बढ़ने दो, उसे चारों ओर से घेर लो। परंतु अर्जुन अपने तीरों से कोहराम मचा देता है। अर्जुन को रोकने के लिए कर्ण आता है परंतु भीम बीच में ही कूदकर कहता है कि अर्जुन तुम जाओ, इस सूत पुत्र से तो मैं निपटता हूं।
उधर यह घटना संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि अर्जुन को रोकने के लिए कौरववीर एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं परंतु उसे रोकने में असफल हैं। महाराज अर्जुन ने मानो आज साक्षात यमराज का अवतार धारण कर लिया है। उसके सामने जो भी कोई आता है ढेर हो जाता है। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहते हैं कि संजय यह तो बताओ कि सिंधु नरेश जयद्रथ तो सुरक्षित है ना? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज परंतु वो अपना आत्मविश्वास खो चुके हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि तुम सबकुछ बता रहे हो संजय परंतु दिन कितना चढ़ चुका है ये नहीं बता रहे हो। तब संजय बताता है कि ऐसा लगता है कि सूर्य कुरुक्षेत्र के आकाश में ठहरकर अर्जुन का पराक्रम देख रहा है।
उधर अर्जुन लाशों के ढेर लगा देता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि वाह अर्जुन वाह। आड़े आने वाली हर बाधाओं को इसी प्रकार दूर करते जाओ। यह देखकर दुर्योधन अर्जुन को रोकने का प्रयास करता है परंतु अर्जुन के पराक्रम के आगे उसे हार मानना पड़ती है। श्रीकृष्ण कहते हैं- दुर्योधन पहले गुरु द्रोण से धनुर्विद्या की शिक्षा लेकर आना फिर अर्जुन से युद्ध करना। फिर अर्जुन कहता है कि चलो केशव, रथ द्रोणाचार्य के सामने ले चलो।
अर्जुन का द्रोणाचार्य से भयंकर युद्ध होता है। इस बीच सिंधु नरेश घबराता रहता है। कृपाचार्य और अश्वत्थामा उसे सांत्वना देते हैं परंतु सिंधु नरेश कहता है कि अरे! अर्जुन कर्ण और दुर्योधन सहित सभी सेना को परास्त करके यहां तक पहुंच गया है। अब मुझे कोई नहीं बचा सकता। तुम मानो या ना मानो मेरी रक्षा का वचन देकर कर्ण, दुर्योधन, शकुनि और तुम लोग अपने ही प्राणों की रक्षा करते रहे इसलिए अर्जुन यहां तक आ पहुंचा, नहीं तो वह यहां सूर्यास्त तो क्या प्रलय तक भी नहीं पहुंच सकता था। बस अब मुझे लगता है कि मेरा अंत किसी भी क्षण आ जाएगा।
उधर धृतराष्ट्र पूछता है कि संजय सूर्यास्त हुआ या नहीं? तब संजय कहता है कि सूर्यास्त होने में अभी समय है महाराज। यह सुनकर धृतराष्ट्र कहता है कि क्या यह सूर्य भी पांडवों का पक्षपाती बन गया है। शीघ्र बताओ संजय कि अर्जुन अब कहां तक पहुंच गया है। यह सुनकर संजय कहता है कि अर्जुन अब द्रोणाचार्य के रचे दूसरे व्यूह के पास पहुंच गया है।
अर्जुन और द्रोणाचार्य में भयंकर युद्ध चल रहा होता है। तभी श्रीकृष्ण सूर्य को देखकर कहते हैं कि पार्थ सूर्य पश्चिम दिशा की ओर झुक गया है पर हम व्यूह में अब तक प्रवेश भी नहीं कर सके। हमें व्यूह में शीघ्र ही प्रवेश करना चाहिए। यह सुनकर अर्जुन कहता है कि परंतु द्रोणाचार्य को परास्त किए बिना इस व्यूह में प्रवेश नहीं कर सकते। इस पर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और द्रोणाचार्य के हाथों में जब तक शस्त्र है उन्हें कोई भी परास्त नहीं कर सकता। चाहे वह कितना ही वीर क्यों ना हो। यदि तुम्हें जयद्रथ का वध करना है तो द्रोणाचार्य को टालकर व्यूह में प्रवेश करना होगा और वह भी अतिशीघ्र क्योंकि अब हमारे पास समय नहीं है। यह सुनकर अर्जुन अपने तीर से माया रचता है, द्रोणाचार्य को एक नहीं रथ पर बैठे कई अर्जुन और कृष्ण नजर आने लगते हैं। यह देखकर सभी घबरा जाते हैं।
उधर, धृतराष्ट्र कहते हैं कि क्या कह रहे हो तुम संजय, कुरुक्षेत्र में कई अर्जुन प्रकट हो गए हैं? इस पर संजय कहता है कि हां महाराज दुर्योधन और अन्य कौरव भ्रम में पड़ गए हैं। तब धृतराष्ट्र कहते हैं कि ये अर्जुन मायावी कब से बन गया? कहीं ये कृष्ण की माया तो नहीं?
फिर द्रोणाचार्य बताते हैं कि अर्जुन ने गांधर्वास्त्र फेंककर हमें भ्रमित कर दिया है। फिर दुर्योधन के कहने पर द्रोणाचार्य गांधर्वास्त का प्रत्युतर देते हैं और अर्जुन की माया को समाप्त कर देते हैं परंतु जब माया समाप्त होती है तो शकुनि कहता है आचार्य ये असली अर्जुन और कृष्ण कहां चले गए? दिखाई नहीं दे रहे। यह सुनकर सभी घबरा जाते हैं तभी दुर्योधन कहता है वो देखो आचार्य अर्जुन व्यूह में प्रवेश कर गया है। आचार्य अब क्या होगा? उधर, भीम के साथ युधिष्ठिर भी कहता है कि इसी व्यूह में जयद्रथ को छुपाया है।
द्रोणाचार्य कहते हैं कि तुम चिंता मत करो अर्जुन जयद्रथ के पास पहुंच ही नहीं पाएगा क्योंकि अर्जुन के पास उतना समय ही नहीं है। वो देखिये सूर्यास्त होने का समय आ चुका है। सभी सूर्य की ओर देखते हैं। सूर्य बस डूबने ही वाला रहता है। यह देखकर सभी खुश हो जाते हैं। उधर, धृतराष्ट्र भी यह सुनकर खुश हो जाता है।
उधर, अर्जुन व्यूह को तोड़ता हुआ आगे बढ़ता जाता है और इधर युधिष्ठिर सहित सभी पांडव सूर्य को देखकर चिंतित हो जाते हैं और खुद को कोसते रहते हैं।
दूसरी ओर सिंधु नरेश अश्वत्थामा और कृपाचार्य से कहता है कि इन धमाकों का अर्थ यह है कि अर्जुन ने ना केवल व्यूह में प्रवेश कर लिया है बल्कि वह मेरे निकट भी आ पहुंचा है। बस कुछ ही क्षणों में वह मेरे सर तक भी पहुंच जाएगा। तब अश्वत्थामा कहता है कि घबराइये नहीं सिंधु नरेश इसकी कोई संभावन दिखाई नहीं देती क्योंकि एक व्यहू को ध्वस्त करने के बाद इस दूसरे व्यूह को ध्वस्त करने में अर्जुन को सारा दिन लग जाएगा। परंतु इतना समय लाएगा कहां से वह?
तभी श्रीकृष्ण अपनी माया से सूर्य को अस्त कर देते हैं। सभी कौरव पक्ष में हर्ष व्याप्त हो जाता है। अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा अनुसार अग्नि में प्रवेश करने के लिए चिता तैयार करता है और चिता में अग्नि प्रज्वलित कर देता है। यह देखने के लिए सभी कौरव एकत्रित हो जाते हैं। उनके साथ जयद्रथ भी हंसता हुआ वहां आ खड़ा होता है। तभी श्रीकृष्ण अपनी माया दिखाते हैं और सूर्य फिर से निकल आता है।
तब श्रीकृष्ण कहते हैं कि अभी सूर्यास्त कहां हुआ है पार्थ, वो देखो। सभी आसमान में देखने लगते हैं। यह देखकर जयद्रथ घबराकर कहता है कि ये कैसे हो गया? फिर श्रीकृष्ण कहते हैं कि और जब सूर्यास्त नहीं हुआ है तो तुम्हें अग्नि में प्रवेश करने के बदले अपनी प्रतिज्ञा पूरी करनी चाहिए। पार्थ! वो देखो सूर्य और वो रहा जयद्रथ, तुम्हारा शत्रु। यह देख और सुनकर अर्जुन हर्षित हो जाता है और जयद्रथ कहता है बचाओ। परंतु तब तक अर्जुन अपने धनुष पर बाण का संधान करके छोड़ चुका होता है।
जयद्रथ का सिर कटकर धनुष पर सवार होकर आसमान में दूर निकल जाता है और सीधा जाकर उसके पिता की गोद में गिर जाता है। तपस्या कर रहे जयद्रथ के पिता चौंक जाते हैं और वह उसका सिर उठाकर भूमि पर रख देते हैं तभी उनके सिर के 100 टुकड़े हो जाते हैं। यह देखकर अर्जुन और श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं तभी आसमान में सूर्यास्त हो जाता है। जय श्रीकृष्णा।
शौर्यपथ /सामग्री : 1 किलो कद्दूकस की हुई लौकी, 50 ग्राम ताजा मावा (खोया), 2 बड़े चम्मच घी, 150 ग्राम शकर, पाव चम्मच इलायची पावडर और 2-3 केसर के लच्छे।
विधि :
सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर किसी हुई लौकी को हल्का भूनकर अलग रख लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा पानी डालें, फिर चीनी डालें। जब शकर पूरी तरह घुल जाए, तब इसमें भूनी हुई लौकी डालकर चलाएं।
जब शकर का पानी पूरी तरह खत्म हो जाए और चाशनी जैसा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब इसमें मावा डालकर हिलाएं। फिर इलायची पावडर डालें और अच्छी तरह चलाकर 2-3 मिनट तक चलाएं। अब केसर को हाथ से मसलकर ऊपर से बुरकाएं।
लीजिए आपके लिए तैयार है लौकी और खोया का जायकेदार हलवा। व्रत के दिनों में लाभदायी ये हलवा सेहत की दृष्टि से बहुत फायदेमंद है।
खाना खजाना / शौर्यपथ / 1/2-1/2 कटोरी उड़द मोगर-मूंग मोगर, मैदा 500 ग्राम, चुटकी भर हींग, 2 चम्मच दरदरी सौंफ, 2 चम्मच धनिया पावडर, 1 कटोरी दही, गरम मसाला 1/2 चम्मच, लाल मिर्च 1 चम्मच, तेल तलने के लिए।
विधि :
दोनों दालों को कचोरी बनाने के 3-4 घंटे पूर्व भिगो दें। कुछ दाल छोड़ कर बाकी को दरदरा पीस लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा तेल लेकर सौंफ का बघार व हींग डालें, दाल दरदरी एवं खड़ी दोनों को भूनें व सभी मसाले मिलाकर ठंडा कर लें।
मैदे में 1/2 टी स्पून नमक मिलाकर छान लें। डेढ़ बड़ा चम्मच मोयन डालकर रोटी जैसा गूंध लें, छोटी-छोटी लोई बना लें, हथेली को चिकना करके लोई फैलाएं, किनारे पतले करके मसाला भरें व बंद करके कचौरियां तैयार कर लें। तेल गर्म करें फिर गुनगुने तेल में कचौरियां डालें।
धीमी आंच पर कचौरियां सुनहरी होने तक तल लें। गर्मा-गर्म कचौरियों को रायते या हरी चटनी के साथ सर्व करें और पर्व का आनंद उठाएं।
शौर्यपथ / इन दिनों अधिकतर लोगों की पहली पसंद जींस ही है। ये एक ऐसा परिधान है जिसे हर कोई पहनना पसंद करता है। लेकिन कुछ लोग स्टाइलिश दिखने के लिए स्किन टाइट जींस
पहनना पसंद करते है। यदि आप भी टाइट जींस पहनते है, तो आपको इससे होने वाले नुकसान के बारे में जरूर जानना चाहिए।
सेहत को ये 4 नुकसान हो सकते हैं -
1 टाइट जींस पहनने की वजह से महिलाओं को कमर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अत्यधिक टाइट जींस पूरा दिन पहने रहने से कमर दर्द के अलावा धीरे-धीरे स्लिप डिस्क होने की आशंका भी बढ़ सकती है।
2 टाइट जींस पहनने से वेरिकोज वैन (Varicose Veins) बीमारी जिसमें बढ़ी हुई नसें, जो आमतौर पर पैरों और तलवों में दिखती हैं, होने की आशंका रहती है। इसके अलावा टाइट जींस के कारण पैरों में ऐंठ की समस्या भी बढ़ सकती है।
3 टाइट जींस पहनने से शरीर में खून का संचार बाधित हो सकता है, जिससे कई अन्य परेशानियां हो सकती है।
4 ऐसा भी माना जाता है कि टाइट जींस पहनने से गर्भाशय का संकुचन और बांझपन का खतरा भी बढ़ सकता है। साथ ही टाइट होने की वजह से
पेट पर काफी जोर पड़ता है जो आगे चलकर समस्या पैदा कर सकता है।
लाइफस्टाइल / शौर्यपथ / उत्तर मध्य रेलवे के तीनो मंडलों प्रयागराज, झांसी एवं आगरा में महिला यांत्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए “ मेरी सहेली” अभियान चलाया गया है।
आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस अभियान के अंतर्गत प्रारंभिक स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक ट्रेनों से यात्रा के दौरान महिला यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। रेल सुरक्षा बल उत्तर मध्य रेलवे (उमरे) की इस पहल के तहत, युवा महिला आरपीएफ कर्मियों की एक टीम द्वारा अकेले यात्रा कर रही महिला यात्रियों के साथ यात्रा के प्रारंभिक स्टेशनों पर वातार् की जाती है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यर्क्म के तहत 25 अक्टूबर से अबतक उमरे में संचालित होने वाली आठ प्रारंभिक ट्रेनों एवं 67 पासिंग ट्रेनों में सतत अभियान चलाया जा रहा है । इसके लिए 121 सुरक्षा कर्मियों की 27 टीमें गठित की गई हैं।गंतव्य स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल की टीमें चिन्हित महिला यात्रियों से फीडबैक भी एकत्र करती हैं और इन प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है। सूत्रों ने बताया कि इन महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सभी सावधानियों के बारे में बताया जाता है और कहा जाता है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सम्बंधित कोई समस्या होने पर वे 182 डायल करें। रेल सुरक्षा बल टीम महिला यात्रिओं की सीट संख्या नोट करती है और उन्हें मार्ग के स्टेशनों पर मॉनिटरिंग हेतु साझा करती हैं। मार्ग के ठहरावों के दौरान प्लेटफार्म ड्यूटी पर नियुक्त रेल सुरक्षा बल कमीर् संबंधित कोच और बर्थ पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर महिला यात्रियों से वातार् भी करते हैं।रेल सुरक्षा बल, रेल सुरक्षा विशेष बल के ऑनबोर्ड एस्कॉर्ट भी अपनी ड्यूटी अवधि के दौरान सभी चिन्हित कोच, पहचान वाले बर्थ को कवर करते हैं। उन्होंने बताया कि इन फीडबैक के विश्लेषण के आधार पर यदि कोई सुधार वांछित हो तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है। इसके अतिरिक्त यदि “मेरी सहेली” पहल के तहत कवर की गई ट्रेन से कोई डिस्ट्रेस कॉल आती है, तो कॉल के निरकारण की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर की जाती है। “मेरी सहेली” पहल को महिला यात्रियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में समाज के कमजोर लोगों, आदिवासियों, किसानों, श्रमिकों के कल्याण तथा उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है कि छत्तीसगढ़ में किसानों को आगे बढ़ाकर, मजबूत व आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर ही राज्य को खुशहाल बनाया जा सकता है। वे जानते हैं कि किसान विकास की पूंजी है। गांव की तरक्की में ही देश की तरक्की है। इसलिए 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही किसानों से 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के अपने वायदे को पूरा किया। वर्षों से लंबित 17 लाख 82 हजार किसानों का 8 हजार 755 करोड़ रू. का कृषि ऋण और 244 करोड़ रू. का सिंचाई कर माफ किया। ग्राम सुराजी योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ के माध्यम से गांवों की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को नया जीवन देने की पहल की। बस्तर के लोहंडीगुड़ा में 1700 से अधिक आदिवासी किसानों की 4200 एकड़ जमीन वापिस कर दी। तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 2500 रू. प्रति मानक बोरा से बढ़ा कर 4000 रू. प्रति मानक बोरा कर दिया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल ने जब प्रदेश के किसानों से 2500 रूपए प्रति क्ंिवटल में धान खरीदने में बाधा आई तो किसानों के हित में हरसंभव कदम उठाने का प्रण लिया। इस बीच अचानक कोरोना संक्रमण का खतरा और देशव्यापी लॉकडाउन से किसान भी अनेक मुसीबतों से घिर गए। इन विपरीत परिस्थितियों में मुख्यमंत्री ने किसानों से किया अपना वादा निभाया और 21 मई को राजीव गांधी जी के शहादत दिवस पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू कर किसानों के खातों में 1500 करोड़ रूपए की प्रथम किश्त की प्रोत्साहन राशि अंतरित। लॉक डाउन अवधि में किसानों को सीधे मदद पहुचाकर मुख्यमंत्री श्री बघेल ने देश को रास्ता दिखाने का काम किया कि किस तरह हम अपने देश के अन्नदाता को मुसीबत से उबार सकते हैं और नकदी देकर अर्थव्यवस्था को भी सुधार सकते हैं।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में 19 लाख से अधिक किसानों को 5750 करोड़ रू. की राशि का भुगतान 4 किस्तों में किया जा रहा है। पहली किस्त 1500 करोड़ रूपए 21 मई को किसानों की खाते में देने के बाद दूसरी किस्त 20 अगस्त को राजीव गांधी जी के जन्म दिन के अवसर पर किसानों के खाते में जमा की गई थी। आज एक नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर किसानों को तीसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ रूपए की राशि दी जाएगी। निश्चित ही यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए कोरोना संकट काल में एक वरदान साबित हुई है। इससे किसानों को खेती-किसानी के लिए संबल मिला है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गतिशील बनाने में जुटे हैं। अपनी दूरदर्शी सोच से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ का जो उन्होंने खाका बुना था अब वह धरातल पर सफलता पूर्वक साकार होता दिखाई देने लगा है। प्रदेश में 5600 गौठान स्वीकृत होने के साथ 5454 पूर्ण हो चुके हैं। इन गौठानों में रोजगार के अवसर तो बने ही, साथ ही यहां तैयार जैविक खाद और इसकी उपयोगिता ने गोबर की महत्ता को भी बढ़ाया है। देश में एक अलग तरह की योजना गोधन न्याय योजना की शुरूआत भी इन्हीं उपयोगिताओं और महत्व का परिणाम है। किसानों से 2 रुपए प्रति किलो गोबर खरीदकर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नये अध्याय की शुरूआत की है। गोधन न्याय योजना ने देश भर में प्रशंसा बटोरी है। इस योजना में गोबर बेचने वाले किसानों, पशुपालकों एवं ग्रामीणों अब तक 39 करोड़ रूपए का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा चुका है। निश्चित ही इन प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था संवरने के साथ पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के दौरान भी प्रदेश के मुख्यमंत्री गरीबों के मसीहा बने। उन्होंने इस संकटकाल में राशन कार्डधारियों सहित प्रवासी मजदूर परिवारों के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था कराई। जरूरतमंदों को निःशुल्क खाद्यान्न देने के साथ आंगनबाड़ी, स्कूल से जुड़े बच्चों को सूखा अनाज घर-घर तक देने का काम किया। मनरेगा के तहत काम और समय पर मजदूरी भुगतान, लघु वनोपज संग्रह के लिए पारिश्रमिक देने में भी छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है।
छत्तीसगढ़ की एक तिहाई जनसंख्या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की है। सरकार द्वार इन वर्गों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी को वन अधिकार मान्यता पत्र देकर आदिवासियों के सांस्कृति एवं पारम्परिक विरासतों को सहेजने और पर्यावरण संतुलन को स्थापित रखने में भी कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य सबसे अधिक वन अधिकार पत्र देने वाला राज्य भी बन गया है। प्रदेश में 12.50 लाख वन क्षेत्र के निवासी है, जो तेंदूपत्ता संग्रहण करते हैं। ऐसे संग्राहकों के लिए श्री शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना लागू कर सुरक्षा लागू की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार का समाज के सभी वर्गों के कल्याण एवं गांवों में खुशहाली लाने और लोगों को स्वावलंबी बनाने का प्रयास सराहनीय है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
