
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
सुबह की हिंसक झड़प पर नहीं हुई कड़ी कार्रवाई, शाम तक गैंगवार में गई लेखराम कोठारी की जान; पद्मनाभपुर टीआई प्रमोद रूसिया को कारण बताओ नोटिस
दुर्ग | शौर्यपथ
दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में 12 जुलाई को हुए खूनी गैंगवार और लेखराम कोठारी की हत्या मामले में पुलिस विभाग के भीतर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) हर्षित मेहर IPS ने मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते थाना प्रभारी ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन किया होता, तो संभवतः यह विवाद गैंगवार और हत्या तक नहीं पहुंचता।
सुबह 4 बजे मिला था विवाद का संकेत, लेकिन टीआई ने नहीं दिखाई गंभीरता
नोटिस के अनुसार, 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों पक्ष घायल अवस्था में पद्मनाभपुर थाने पहुंचे थे। यह गंभीर अपराध का मामला था, जिसमें तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन थाना प्रभारी ने केवल घायलों का मुलाहजा कराकर सामान्य प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तक ही मामला सीमित रखा। इस ढिलाई से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और देर रात खूनी गैंगवार में बदल गया, जिसमें लेखराम कोठारी की हत्या हो गई।
हत्या की सूचना भी वरिष्ठ अधिकारी से छिपाई
सीएसपी द्वारा जारी नोटिस में यह भी उल्लेख है कि हत्या जैसी गंभीर घटना होने के बाद भी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी CSP हर्षित मेहर IPS को तत्काल सूचना नहीं दी। कंट्रोल रूम और डायल-112 के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद स्वयं CSP को घटनास्थल पहुंचना पड़ा।
CSP ने संभाली कमान, खुद कराया शव मर्चुरी शिफ्ट
नोटिस में कहा गया है कि घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतक के शव को मर्चुरी भेजने और मौके को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की थी। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उन्होंने नहीं निभाई। अंततः स्वयं CSP हर्षित मेहर IPS ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, शव को मर्चुरी भिजवाया और घटनास्थल की निगरानी सुनिश्चित कराई।
पुलिस की ढिलाई से अस्पताल से फरार हुआ आरोपी
गैंगवार के बाद दोनों पक्षों के घायलों को अस्पताल भेजा गया था। इसी दौरान हत्या का आरोपी लक्ष्मी चेलक अस्पताल से फरार हो गया। नोटिस में इसे भी थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही बताया गया है। बाद में क्राइम ब्रांच/एसीसीयू टीम की सक्रियता से आरोपी को दोबारा गिरफ्तार किया गया। यदि आरोपी फरार रहते हुए कोई और वारदात कर देता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती—यह सवाल भी नोटिस में उठाया गया है।
चार गंभीर लापरवाहियां, जवाब मांगा
सीएसपी हर्षित मेहर IPS द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में थाना प्रभारी की चार प्रमुख चूकें दर्ज की गई हैं—
हत्या की सूचना वरिष्ठ अधिकारी को समय पर नहीं देना।
घटनास्थल का निरीक्षण एवं शव को मर्चुरी भेजने जैसी जिम्मेदारी नहीं निभाना।
आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी में विफल रहना, जिससे एक आरोपी अस्पताल से फरार हो गया।
सुबह हुई हिंसक झड़प के बाद समय रहते एफआईआर और प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं करना तथा वरिष्ठ अधिकारियों को सही रिपोर्टिंग नहीं करना।
सख्त पुलिसिंग का संदेश
इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि CSP हर्षित मेहर IPS कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने तथ्यों के आधार पर थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई पुलिस महकमे में जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब विभागीय कार्रवाई पर नजर
पद्मनाभपुर गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड में जारी इस कारण बताओ नोटिस के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि थाना प्रभारी के जवाब के आधार पर पुलिस विभाग क्या विभागीय कार्रवाई करता है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि समय पर प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं होने के संभावित परिणामों का भी गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम
यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित "AUAP - WURI इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल
कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।
इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।
समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम
बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।
इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन
AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।
WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी
ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचेगी एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा
एक वर्ष में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण: विज्ञान और नवाचार को मिलेगी नई उड़ान
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी। उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।
मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।
एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा
उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।
कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिला गुणवत्तायुक्त बीज, कृषि विभाग के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों ने प्रगतिशील किसान भानुप्रताप को बनाया नवाचार का प्रतीक
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास अब धरातल पर प्रेरणादायी परिणाम देने लगे हैं। किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की राज्य सरकार की पहल ने एक बार फिर नई मिसाल कायम की है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली के प्रगतिशील किसान एवं लोक कलाकार श्री भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से पारंपरिक कृषि उपकरण को कम लागत वाली सीड ड्रिल में बदलकर खेती में नवाचार का शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राज्य सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए उन्होंने लगभग दो एकड़ क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से बुवाई शुरू की है। स्वयं विकसित की गई सीड ड्रिल की मदद से कम समय में समान दूरी पर बीज की बुवाई संभव हुई, जिससे श्रम लागत घटी, बीज की बचत हुई और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ गई।
मुख्यमंत्री की सोच—किसान बने आत्मनिर्भर, खेती बने लाभ का माध्यम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की स्पष्ट मंशा है कि प्रदेश का किसान केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि तकनीक और नवाचार का नेतृत्वकर्ता बने। इसी सोच के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह और स्थानीय स्तर पर विकसित नवाचारों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
स्थानीय नवाचार बना पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा
उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती, वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है, ताकि सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के माध्यम से किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ रहा है और किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
सरकारी योजना और किसान की प्रतिभा का सफल संगम
जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब सरकार की दूरदर्शी नीतियां, विभागीय सहयोग और किसान की रचनात्मक सोच एक साथ मिलती हैं, तो खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और समृद्धि का आधार बन जाती है।
यह मॉडल आज न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के "समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़" के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।
कलेक्टर विजय दयाराम के. के सख्त निर्देश पर खनिज विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, शिकायत मिलते ही उड़नदस्ता सक्रिय; अवैध परिवहन करने वालों पर दर्ज हुए प्रकरण
रायपुर/शौर्यपथ। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का प्रभावी मंच भी बन रही है। इसका ताजा उदाहरण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में देखने को मिला, जहां सीएम हेल्पलाइन (1076) में दर्ज एक शिकायत पर जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर जिला खनिज विभाग के विशेष अभियान में अवैध रूप से रेत और गिट्टी का परिवहन कर रहे छह ट्रैक्टर जब्त किए गए।
शिकायत प्राप्त होते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान कोलबिर्रा और रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता और पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर बिना वैध दस्तावेजों के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
कानूनी शिकंजा, जुर्माना जमा होने के बाद ही मिलेगी रिहाई
खनिज विभाग ने सभी वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि जमा किए बिना किसी भी जब्त वाहन को मुक्त नहीं किया जाएगा।
हर शिकायत पर होगी समयबद्ध कार्रवाई : कलेक्टर
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध नियमित अभियान चलाने तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
जनभागीदारी से अवैध खनन पर लगेगी लगाम
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध रेत, गिट्टी अथवा अन्य खनिजों के उत्खनन या परिवहन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना सीएम हेल्पलाइन 1076 या संबंधित विभाग को दें। प्रशासन का कहना है कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक सतीश साहू की सक्रिय भूमिका रही। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
धमतरी / शौर्यपथ / जिले की नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय (भा.पु.से.) ने सोमवार को विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। निवर्तमान पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार (भा.पु.से.) ने विभागीय प्रक्रिया के तहत उन्हें कार्यभार सौंपते हुए जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जनसुरक्षा, संवेदनशील प्रकरणों और चल रहे विशेष अभियानों की विस्तृत जानकारी दी।
पदभार ग्रहण के बाद पुलिस कार्यालय में आयोजित परिचय कार्यक्रम में जिले के राजपत्रित अधिकारी, एसडीओपी, डीएसपी सहित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने नई एसपी का स्वागत किया। इस दौरान सभी अधिकारियों ने उनके नेतृत्व में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा तथा जनोन्मुखी पुलिसिंग को नई गति देने का भरोसा दिलाया।
नई पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आमजन की सुरक्षा, अपराधों पर त्वरित नियंत्रण, पीड़ितों को समयबद्ध न्याय और पुलिस-जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना धमतरी पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अनुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और सेवा भाव के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
कार्यालय की शाखाओं का किया निरीक्षण
पदभार संभालने के तुरंत बाद एसपी भावना पांडेय ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने शाखा प्रभारियों से लंबित प्रकरणों, अभिलेखों, कार्यालयीन व्यवस्था और कार्यप्रणाली की जानकारी ली। साथ ही लंबित मामलों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण और समयबद्ध कार्य निष्पादन के निर्देश दिए।
जनसुनवाई और संवेदनशील पुलिसिंग पर जोर
एसपी ने कहा कि आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने तथा नागरिकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, ईमानदारी और उत्तरदायित्व ही धमतरी पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है, जिसके बल पर जिले में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार पांडेय, नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक कुमार चतुर्वेदी, एसडीओपी कुरूद रागिनी मिश्रा, डीएसपी मोनिका मरावी, मीना साहू, रक्षित निरीक्षक दीपक शर्मा सहित पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाया गया। प्रश्न लगाने वाले विधायक लता उसेंडी ने विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय UGC मानकों से काफी पीछे है। जहां 223 शिक्षकों की जरूरत है, वहां केवल 29 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी कमी कब तक दूर की जाएगी और छात्रों की पढ़ाई का नुकसान कौन भरेगा।
उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि विश्वविद्यालय में सैकड़ों शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है। विधायक ने पूछा कि जब वित्त विभाग से स्वीकृति मिल चुकी है, तो नियुक्तियां अब तक क्यों नहीं की गईं।
सबसे अहम सवाल उन विषयों में भर्ती को लेकर उठाया गया, जिनमें फिलहाल एक भी छात्र पंजीकृत नहीं है। विधायक ने इसे संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में खाली पड़ी सीटों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि हजारों सीटें खाली होना इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है।
बस्तर जैसे आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र का जिक्र करते हुए विधायक लता उसेंडी ने कहा कि यहां उच्च शिक्षा की ऐसी स्थिति बेहद चिंताजनक है और यह क्षेत्र के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों और संसाधनों के इसे लागू करना संभव नहीं है।
निष्कर्ष:विधानसभा में उठे इन सवालों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, खासकर बस्तर क्षेत्र में, गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। अब निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा वर्ष 2019 से 2023 के बीच की गई भर्तियों में अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे को विधायक सुश्री लता उसेंडी ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सरकार ने जांच की स्थिति स्पष्ट की।
विधायक लता उसेंडी ने अपने प्रश्न में पूछा कि इस अवधि में राज्य सेवा परीक्षा, वन सेवा, सहायक प्राध्यापक सहित विभिन्न भर्तियों में कितने पदों पर चयन हुआ और क्या इन भर्तियों में किसी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक, मूल्यांकन में त्रुटि, इंटरव्यू अंक में हेरफेर या अन्य अनियमितताओं की शिकायतें सरकार को मिली हैं।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इन शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है और यदि हां, तो जांच किस एजेंसी—EOW, CBI या अन्य—द्वारा की जा रही है। साथ ही, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि चयनित अभ्यर्थियों में से कितने उम्मीदवार आयोग के पदाधिकारियों या अधिकारियों के रिश्तेदार हैं और क्या इस संबंध में कोई जांच हुई है।
इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जवाब में बताया कि CGPSC भर्तियों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है। विशेष रूप से राज्य सेवा परीक्षा 2021 की जांच CBI को सौंपी गई है और फिलहाल यह प्रक्रिया जारी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने की कोई निश्चित समय सीमा अभी तय नहीं है और आगे की कार्रवाई CBI की रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में उठे इस मुद्दे ने CGPSC की भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें CBI जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी।
निशांत ताम्रकर (क्राइम रिपोर्ट)
दुर्ग / शौर्यपथ / पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के कुंदरापारा में रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई सनसनीखेज हत्या ने एक ओर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, तो दूसरी ओर दुर्ग पुलिस ने दावा किया कि महज 12 घंटे के भीतर वारदात में शामिल एक ही परिवार के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, जैतखाम के पास करीब तीन वर्ष पुरानी रंजिश के चलते अक्षय कोठारी, उनके भाई लेखराम कोठारी, गोपा उर्फ सूर्यदेव कोठारी और उनके चाचा बल्ला उर्फ रोशन कोठारी पर लाठी, डंडे, ईंट और चाकू से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल लेखराम कोठारी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है।
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही एफएसएल टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और घेराबंदी कर लक्ष्मी चेलक, आकाश चेलक, सत्यम चेलक, खेलू चेलक, प्रकाश चेलक तथा देवचंद चेलक को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ईंट, डंडे, चाकू और वारदात के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या करना स्वीकार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया।
मृतक
स्मार्ट पुलिसिंग पर उठे सवाल
हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन वारदात ने शहर की तथाकथित "स्मार्ट पुलिसिंग" पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब साढ़े नौ बजे घनी आबादी वाले कुंदरापारा में दो पक्षों के बीच लंबे समय तक खूनी संघर्ष चलता रहा। स्थानीय लोगों के सामने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन इलाके में समय रहते पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखी।
इलाके के लोगों में भय का माहौल भी चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराधियों के डर से लोग पुलिस को सूचना देने से भी हिचकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और 12 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि केवल त्वरित गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराध पर पहले से प्रभावी नियंत्रण और लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी उतना ही जरूरी है।
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस के 'ऑपरेशन विश्वास' के तहत जिलेभर में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने, अड्डेबाजी और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। 10 से 12 जुलाई तक चले विशेष अभियान में 114 लोगों पर छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 36(च) के तहत कार्रवाई की गई।
इस अभियान में मोहन नगर थाना और दुर्ग कोतवाली थाना की कार्रवाई भी प्रमुख रही। मोहन नगर थाना क्षेत्र में 8 और कोतवाली (दुर्ग) थाना क्षेत्र में 7 लोगों के खिलाफ सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन और अड्डेबाजी के मामले में कार्रवाई की गई। दोनों थाना क्षेत्रों में कुल 15 लोगों पर वैधानिक कार्रवाई हुई।
जिले के सभी थाना एवं चौकी क्षेत्रों में बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क, तालाब और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सघन चेकिंग की गई। वहीं तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध शराब बिक्री के मामलों में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा उनके कब्जे से अवैध शराब और नकदी जब्त की गई।
दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन विश्वास के तहत ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अड्डेबाजी, सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन या अवैध शराब बिक्री की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि जिले में सुरक्षित और नशामुक्त वातावरण बनाए रखा जा सके।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
