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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
दुर्ग / शौर्यपथ लेख / कांग्रेस जो एक समय देश की सबसे बड़ी पार्टी हुआ करती थी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है देश में कांग्रेस की स्थिति क्या है ये किसी से छुपी नहीं है असंतोष और आपसी गुटबाजी की मार झेल रही राष्ट्रिय कांग्रेस अपने अस्तित्व को बचाने का निरंतर प्रयास कर रही है . छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के रास्ट्रीय नेत्रित्व की जीत के बजाये भूपेश नेत्रित्व की जीत ज्यादा रही प्रदेश में १५ साल की भाजपा सत्ता के खिलाफ मुखर हुए तो भूपेश बघेल ही हुए जिसका नतीजा रहा प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी . प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में सबसे ज्यादा अहम् भूमिका किसी की रही तो वो तात्कालिक प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और टी.एस.सिंहदेव की मेहनत और सक्रियता का परिणाम रहा सभी को लेकर आगे बढने की निति रही गुटबाजी खत्म करते हे सबके साथ चलने का परिणाम रहा प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का सत्ता में काबिज होना .
किन्तु अगर हम क्षेत्र की बात करे तो आज दुर्ग की ऐसी स्थिति है कि दुर्ग में कांग्रेस के कार्यकर्ताओ को महत्तव नहीं दिया जाता यहाँ महत्तव दिया जाता है वोरा के करीबी लोगो को . दुर्ग में आज भी सत्ता आने के बाद कांग्रेसी कार्यकर्त्ता कही ना कही उपेक्षित से है .दुर्ग कांग्रेस में ऐसे लोगो को ही महत्तव दिया जा रहा है जो कांग्रेस के नहीं वोरा के करीबी है . ऐसा नहीं है कि दुर्ग में कांग्रेस नेताओ की कमी है . लक्ष्मण चंद्राकर , प्रतिमा चंद्राकर , राजेन्द्र साहू ,मदन जैन जैसे नेता भी है जिन्होंने अपनी जिन्दगी कांग्रेस के लिए गुजार दी किन्तु आज सत्ता होने के बाद भी कही ना कही ऐसी स्थिति सामने आ ही जाती है जिससे ये आभास हो जाता है कि दुर्ग में कांग्रेस कार्यकर्ता होने से ज्यादा जरुरी है वोरा का करीबी होना . बस वोरा गुट के करीबी हो जाओ फिर पद,कार्य , महत्तव सब मिल जायेगा इसके लिए कांग्रेस का करीबी होना कोई महत्तव नहीं रखता अगर आप वोरा गुट के करीबी है तो आपकी बल्ले बल्ले अगर नहीं तो फिर सर रैली में भीड़ का हिस्सा ही बने रह सकते है . यह बात इस लिए कह सकते है कि पूर्व में ऐसे कई प्रकरण सामने आये है जिसमे कांग्रेस से बढ़कर वोरा गुट हावी रहा . आइये ऐसे कुछ घटनाक्रम देखते है जो पिछले दिनों दुर्ग में हुए जिससे अनुमान लगाना आसान होगा कि दुर्ग में कांग्रेस की भूपेश सरकार की नहीं वोरा गुट की मनमानी चलती है ..
निगम की सत्ता के कंधे में स्वर वोरा गुट
दुर्ग निगम में महापौर के चयन में वोरा गुट ने सभी अनुभवी लोगो को दरकिनार कर पहली बार सक्रीय राजनीती में आये धीरज बाकलीवाल को महापौर की खुर्सी दिला कर वोरा गुट ने निगम के रस्ते शहर में अपने अस्तत्व को बचा लिया आज दुर्ग निगम में नाली के उद्घाटन से लेकर सडक के उद्घाटन में विधायक का निर्देश अनुशंषा रहती है हर कार्य विधायक के निर्देश पर होता है यहाँ तक की कार्य के बंटवारा में भी वोरा बंगले का पूरा हस्तक्षेप रहता है अगर कांग्रेस का कार्यकर्त्ता वोरा बंगले से दूर है तो वो कोई काम का नहीं जिसका परिणाम आज यह है कि विधायक के बंगले के करीबी रहने वाले आज एल्डरमैन भी है , ठेकेदार भी है और निजी कार्यो में सर्वेसर्वा भी है ये अलग बात है कि उनका सक्रीय राजनीती से कोई लेना देना नहीं . वोरा बंगले के करीबी आज एमआईसी प्रभारी भी है ठेकेदारी भी कर रहे है साथ ही किसे कार्य देना है किसे नहीं ये भी निश्चित कर रहे है . आज निगम में सत्ता का यहाँ तक ईस्तमाल हो रहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी कई मामलो में दरकिनार करने की असफल कोशिश हो रही है जिसका एक छोटा सा उदाहरण २३ अगस्त को ही देखने को मिला . २३ अगस्त प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जन्मदिन इस दिन दुर्ग ही नहीं पुरे प्रदेश में मुख्यमंत्री के जन्मदिन के बधाई सन्देश लगे थे बड़े बड़े फ्लेक्स बेनर में जिसमे कार्यकर्ताओ ने लाखो खर्च किये किन्तु २४ अगस्त की सुबह शहर से ऐसे सारे पोस्टर बेनर गायब हो गए जिसमे विधायक वोरा के फोटो नहीं थे . तब ये चर्चा रही कि किसी ने होरी कर लिए होंगे अगर चोरी हुए तो ये गजब का ईतिफाक है कि शहर के ऐसे पोस्टर ही गायब हुए जिसमे विधायक के फोटो नहीं थे तो गजब का ईतिफाक है . क्योकि ऐसे ही ईतिफाक भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव के पोस्टर के साथ भी हुए वही विधायक वोरा के जन्मदिन के पोस्टर महीनो लगे रहे पर चोरी नहीं हुए लगता है चोर भी मुख्यमंत्री और दुसरे नेताओं से खफा है और विधायक का ख़ास समर्थक . खैर ये ईत्तिफाक कई बार हो चुके है . कई बार तो ऐसा ईतिफाक भी होता है कि निगम का अतिक्रमण दस्ता शहर की साफ़ सफाई और अवैध पोस्टर बैनर निकालने के नाम पर शहर में कार्यवाही करता है तब भी अतिक्रमण दस्ता को दुसरे सारे नेताओ के पोस्टर नजर आते है जिन्हें उतार लिया जाता है किन्तु अवैधानिक तरीके से लगे विधायक के पोस्टर का तेज ऐसा रहता है जो दिखाई नहीं देता .
अनुभवी जनप्रतिनिधि को दरकिनार - निगम की सत्ता की चाबी कहने को तो धीरज बाकलीवाल के हाँथ में है किन्तु सिर्फ नाम के महापौर बन कर रह गए धीरज बाकलीवाल क्योकि शहर के हर कार्य का निर्देश विधायक वोरा ही देते है . आज दुर्ग भी भिलाई की तरह हो गया है जैसे भिलाई में विधायक एवं महापौर देवेन्द्र यादव लिखा जाता है और हर कार्य की अनुशंषा या सोंच एक ही व्यक्ति की रहती है ठीक उसी तरह दुर्ग निगम का हाल है हर कार्य की अनुशंषा या सोंच विधायक वोरा की ही रहती है महापौर धीरज बाकलीवाल सिर्फ एक नाम है और कुछ भी नहीं ऐसा हम नहीं कहते ऐसा कहने वाले दुर्ग के कई कांग्रेसी है कई जनप्रतिनिधि है जो ये बात कहते आम देखे जा सकते है . धीरज बाकलीवाल जो महापौर बनने से पूर्व एक व्यापारी थे जिनका सक्रीय राजनीती से कम ही वास्ता रहा एक मिलनसार और हंसमुख व्यक्ति की छवि रही जो सालो से कांग्रेस के नहीं वोरा परिवार के करीबी रहे है आज वोरा बंगले के कारण ही प्रतम बार चुनावी रण में विजयी होकर महापौर की खुर्सी पर विराजित है ऐसे में स्वाभाविक है कि वोरा गुट को ज्यादा महत्तव देंगे .
दुर्ग का निष्क्रिय संगठन कार्यकर्ताओ की लगातार उपेक्षा - दुर्ग कांग्रेस में संगठन की बात करे तो संगठन के नाम पर कुछ नाम जरुर है किन्तु ये ऐसे नाम है जो कभी सक्रीय राजनीती में कोई अहम् भूमिका नहीं निभा पाए सिर्फ वोरा बंगले के करीबी होने का फायदा उठाये है अनुभवहीनता आज दुर्ग कांग्रेस संगठन में साफ देखि जा सकती है . संगठन की बात करे तो दुर्ग कांग्रेस में अध्यक्ष की खुर्सी ऐसे हाँथ में है जो सक्रीय राजनीती से दूर ही है बात गया पटेल की है जो आज दुर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष है किन्तु सिर्फ नाम के अध्यक्ष संगठन स्तर पर ऐसी कोई छाप नहीं छोड़ पाए है जैसी छाप पूर्व महापौर आर.एन.वर्मा ने छोड़ी थी . उसी कड़ी में आज एक ऐसे युवा कांग्रेस को अध्यक्ष बनाया गया है जिसे दुर्ग के कई कांग्रेसी जानते भी नहीं अगर पहचान है तो इतनी कि विधायक परिवार के करीबी के टूर पर महापौर बाकलीवाल के नजदीकी के टूर पर यहाँ बात हो रही है दुर्ग युवा कांग्रेस अध्यक्ष आयुष शर्मा कि जबकि दुर्ग युवा कांग्रेस की बात करे तो ऐसे कई चेहरे है जो सालो से सक्रीय राजनीती में है किन्तु दुर्ग में कांग्रेस अब बचा ही कहा यहाँ सिर्फ वोरा कांग्रेस की छाप ही है . अगर कांग्रेस का कोई अस्तित्व बचा होता तो दुर्ग के अनुभवी कांग्रेसियों के मन में असंतोष की जो धारा आज बह रही है वो नहीं बह रही होती . आज अनुभवी पार्षद जो सालो से कांग्रेस के साथ है न कि वोरा के सिर्फ पार्षद ही बनकर रह गए उनमे से मदन जैन , राजकुमार नारायणी वो मुख्य नाम है जो सिर्फ इसलिए दरकिनार है क्योकि वो कांग्रेसी है अगर वो वोरा गुट के कांग्रेसी होते तो आज कही और होते . कुछ ऐसी ही हालत सभापति राजेश यादव के साथ भी रही शुरू शुरू में सभापति को भी दरकिनार करने का कई बार असफल प्रयास हुआ किन्तु राजेश यादव के साथ सभापति का पद जुडा होने के कारण दरकिनार करना मुश्किल हो गया .
क्या वोरा कांग्रेस का ये अंतिम कार्यकाल - इन दिनों शहर में ऐसी चर्चा जोरो पर है कि जिस तरह से वोरा गुट शहर में मनमानी कर रहा है चाहे वो कार्य विभाजन की बात हो , चाहे वो चखना सेंटर आबंटन की बात हो , चाहे राशन दुकान वितरण की बात हो , चाहे वो सनागाथान के कार्यो की बात हो , चाहे शहर में विकास कार्यो के नाम पर दिखावा हो ऐसे कई कारण है जिससे शहर के आम जनता ही नहीं कई कांग्रेसी भी आतंरिक रुप से आक्रोशित है और ढाई साल बाद होने वाले चुनाव में मतदान के रूप में अपना फैसला सुनाने का इंतज़ार कर रहे है . वैसे अगर देखा जाए तो जिस तरह से वर्तमान हालत है चुनाव के बाद ऐसे कांग्रेसी कार्यकर्त्ता मिलना मुश्किल ही होगा जो समाज के बीच अपनी पैठ बनाकर वोट मांगने जा सकेगा .जिस तरह से आज कई कांग्रेसी कह रहे है कि इतनी उपेक्षा भाजपा शासन में नहीं हुई जितनी खुद की सरकार होते हुए हो रही कोई बड़ी बात नहीं कि भविष्य में एक बार फिर सालो दुर्ग में भाजपा का शासन रहेगा .
भ्रष्टाचारियो पर विभागीय कार्यवाही एवं पुलिस हस्तक्षेप कर दंडात्मक कार्यवाही हेतु 8 फ़रवरी दिन सोमवार को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी घेरेगी कलेक्टेड कार्यलय जिला कार्यलय बस्तर जगदलपुर
जगदलपुर / शौर्यपथ / बस्तर जिले के सरगीपाल पंचायत में हुए लाखो का घोटाला पूर्व सरपंच तात्कालीन सचिव एवं तात्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की मांग पे अब तक कार्यवाही नहीं होने को दुर्भाग्य पूर्ण बताते हुए जनता कांग्रेस मामले पर कार्यवाही हेतु कलेक्टेड कार्यालय का घेराव करने जा रही है जनता कांग्रेस द्वारा यह हल्ला बोल जो पूर्व में 6 फ़रवरी को सुनिश्चित था किन्तु समय परिवर्तन होने की वजह से अब सोमवार 8 फ़रवरी को यह घेराव तय किया गया है इसी दौरान दिनांक 29/01/2021 को ग्राम वासी एवं पंच सरपंच के उपस्थिति में दूसरा चरण का बैठक भी हुवा समाप्त सफल घेराव का आंदोलन हेतु मिल रहा है ग्राम वासियो का जोड़दार समर्थन ! बचा शेष 4 बैठक और उन बैठकों में भी मिलेगा ग्राम वासियो का समर्थन ऐसा विश्वास है ! उक्त बात की जानकरी नरेंद्र भवानी बस्तर जिलाध्यक्ष जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी ने दी है .
महामाया स्पोर्ट्स क्लब के तत्वावधान में आयोजित 12 दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन छत्तीसगढ़ी लोककला मंच मया के चिन्हारी दुर्ग जिला की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ।
12 दिन तक चले इस प्रतियोगिता में धमतरी जिले के साथ-साथ आसपास के जिले के 64 टीमों ने शिरकत किये ।
खिताबी मुकाबला क्रिकेट क्लब पंचघरिया और युवा शक्ति अमाली के बीच हुआ जिसमें शानदार तरीके से पंचघरिया की टीम ने मैच को जीता।
विजेता टीम को प्रथम पुरूस्कार 15000 और आकर्षक ट्रॉफी एवं उपविजेता टीम को 10000 और ट्रॉफी प्रदान किया गया।
पुरुषों की क्रिकेट प्रतियोगिता के साथ-साथ बालिकाओं के क्रिकेट का आयोजन किया गया जिसमें विजेता टीम जीनियस क्रिकेट क्लब नगरी तथा उपविजेता नवागांव की टीम रही।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि एल.एल.ध्रुव सदस्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी, अध्यक्षता सरपंच श्रीमती सुषमा तारम एवं विशेष अतिथि भूषण साहू,अमृतलाल नाग,खम्मन साहू,राजू सोम,शिवदयाल साहू,प्रदीप सोन थे।
मुख्य अतिथि ध्रुव जी ने अपने उदबोधन में महामाया स्पोर्ट्स क्लब को बधाई दिया जिसने लगातार 36 वर्षो से क्रिकेट का आयोजन करवाते आ रहे है।प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सरपंच श्रीमती सुषमा तारम,ग्राम के विभिन्न समिति व समूह के साथ-साथ ग्रामवासियों का सहयोग रहा।
इस अवसर पर ग्राम के रायसिंघ मरकाम,उदित नारायण सिन्हा,सुकलाल मरकाम,बिसंभर मरकाम,रितेश पारख,त्रिलोक सोन,रुद्रनारायण सिन्हा,शेषनारायण सिन्हा,हुलास सोन,भारत लाल साहू,खगेश सोन,दोलेश सोन,प्रदीप सोन,घनश्याम सोन,उमेश साहू,कुमार सेन,पुणेश्वर साहू,त्रिलोक सिन्हा,शोभाराम देवांगन,हरीश देवांगन व महामाया स्पोर्ट्स क्लब के पदाधिकारी अध्यक्ष राकेश कश्यप,उपाध्यक्ष रिखब पटेल,सचिव मनीष सिन्हा,सहसचिव अरूण प्रजापति,कोषाध्यक्ष युवराज निषाद तथा सदस्य गजेन्द्र निषाद,उपेंद्र तारम,यशवंत ध्रुव मनोज ध्रुव,पुनेंद्र नाग,डिगम्बर सोन,अजय सामरथ,करण देवांगन इत्यादि थे।कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षक कैलाश सोन द्वारा किया गया ।
मनोरंजन /शौर्यपथ / प्रियंका चोपड़ा की रिलीज हुई नई फिल्म 'द व्हाइट टाइगर' को दुनियाभर से खूब तरीफें मिल रही हैं। इस बीच प्रियंका की ही फिल्म अग्निपथ के को-स्टार रहे एक्टर रितिक रौशन ने भी रहीम बहरानी की इस फिल्म जमकर तारीफ की है।
रितिक ने फिल्म के बारे में अपने विचार एक ट्वीट के माध्यम से साझा किए। उन्होंने फिल्म के बारे में ट्वीट करते हुए लिखा, "यह शुक्रवार द व्हाइट टाइगर के साथ खत्म हुआ। मेरे दोस्तों प्रियंका चोपड़ा और राजकुमार राव आप दोनों ने शानदार काम किया है। गौरव आदर्श आपने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। यह इस साल की शानदार शुरुआत है। इतनी शानदार फिल्म बनाने के लिए रहीम बहरानी और पूरी टीम को शुभकामनाएं।"
इसके बाद प्रियंका चोपड़ा ने रितिक के इस फीडबैक के लिए शुक्रिया भी अदा किया। उन्होंने ट्विटर पर रिप्लाई देते हुए लिखा, "बहुत शुक्रिया दोस्त! बहुत खुशी हुई कि तुम्हे यह पसंद आया।"
प्रियंका की इस फिल्म ने न सिर्फ उनके बॉलीवुड के साथियों को प्रभावित किया है, बल्कि उनके हॉलीवुड के दोस्तों को भी प्रभावित किया है। इससे पहले कैरी वाशिंगटन ने भी ट्विटर पर फिल्म की तारीफ की थी।
वहीं कार्डी बी ने फिल्म पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा, "व्हाइट टाइगर इतनी बेहतरीन फिल्म है कि मैं इसे देखते हुए रो भी रहा था और गुस्से में भी था।" जब प्रियंका ने उन्हें इसके लिए धन्यवाद दिया, तो गायिका ने आगे कहा, "हां, आप इतने प्यारे और मनमोहक मुस्कुरान लिए हुए चेहरे के साथ शानदार लग रही थीं।"
प्रियंका के पति निक जोन्स और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने भी फिल्म में उनके प्रदर्शन की सराहना की थी। अपने प्रशंसकों को फिल्म देखने के लिए कहते हुए निक ने ट्वीट किया था, "द व्हाइट टाइगर अब नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है। इस फिल्म में एक अभिनेत्री और एक निर्माता दोनों के रूप में अपनी पत्नी प्रियंका के काम पर मुझे गर्व है। इस फिल्म को जरुर देखिए। पूरी कास्ट, क्रू और क्रिएटिव टीम को बधाई।"
खेल /शौर्यपथ /भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) ने घरेलू क्रिकेट पर बड़ा फैसला लेते अभी जारी सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बाद विजय हजारे ट्रॉफी आयोजित करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि 87 साल में पहली बार फर्स्ट क्लास घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी का आयोजन नहीं हो सकेगा। 50 ओवर की विजय हजारे ट्रॉफी और भारत-इंग्लैंड के बीच होने वाली सीरीज के आयोजन के साथ ही अब बीसीसीआई महिला सीनियर वनडे ट्रॉफी और अंडर-19 क्रिकेट में वीनू मांकड़ वनडे ट्रॉफी का आयोजन भी कराएगा। बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने राज्य संघों को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि यह फैसला राज्य संघों से मिले फीडबैक और कोरोना वायरस की वजह से लिया गया है।
इस मुद्दे पर पीटीआई से बात करते हुए शाह ने कहा कि, ''मुझे इस बात को बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हम इस बार विजय हजारे ट्रॉफी और अंडर-19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी के साथ-साथ सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंट का भी आयोजन कर रहे हैं।'' शाह ने इस दौरान बताया कि कोरोना काल में लंबे फॉर्मेट का रणजी ट्रॉफी का आयोजन करना काफी मुश्किल था। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक कोरोना महामारी की वजह से हमारा काफी समय बर्बाद हो चुका है।
बता दें कि भारत ने कोरोना काल में सैयद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट का सफलतापूर्वक आयोजन करवाया है। इसके लीग सहित सेमीफाइनल मैच खत्म हो चुके हैं और अब बस फाइनल मैच बचा है। यह कोरोना काल में भारत-इंग्लैंड के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले पॉजिटिव खबर है। दोनों देशों के बीच 5 फरवरी से टेस्ट सीरीज का आगाज हो रहा है। दोनों देशों के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज के बाद, पांच मैचों की टी-20 सीरीज और तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
