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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
सड़क किनारे कचरा डालने पर सत्यम बेकरी पर लगाया गया 5000 रु0 जुर्माना......
कार्रवाही के दौरान दुकान के बाहर सीसी टीवी कैमरा लगाने के लिए दिए निर्देश......
दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन ने आज सुबह साइकिल से वार्ड में साफ सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुचे,सड़क किनारे कचरा डालते देखे जाने पर स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता को जुर्माना के लिए दिए सख्त निर्देश,स्वास्थ्य अधिकारी एव स्वच्छता निरीक्षक राजेन्द्र सर्राटे द्वारा वार्ड 23 सिंधी कालोनी वार्ड में सड़क किनारे कचरा व गंदगी फैलाने वाले सत्यम बेकरी के संचालक मुरली खेदपाल के ऊपर कार्यवाही कर 5000 रु0 का जुर्माना लगाया गया।वार्ड 23 सिंधी कालोनी में मुरली खेदपाल पिता श्रीमाल का सत्यम बेकरी है जिसके द्वारा निरंतर सड़क किनारे कचरा व गंदगी फैलाने पर आज कार्यवाही कर बेकरी संचालक मुरली खेदपाल को चेतावनी दी गई है कि दोबारा दुकान के बाहर सड़क पर कचरा फेकने व गंदगी पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। सत्यम बेकरी के संचालक को स्वस्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता के द्वारा निर्देश दिया गया है कि अपने दुकान में सीसी टीवी अवश्य लगवाए, पता लगाया जा सके,सड़क किनारे कचरा किस व्यक्ति द्वारा फेका जा रहा।
संचालक द्वारा जल्द अपने दुकान के बाहर जल्द सीसी टीवी लगवाने की बात कही।इस दौरान दरोगा राजू सिंग, व अन्य उपस्थित थे ।
आयुक्त इन्द्रजीत बर्मन द्वारा दुर्ग शहर वासियों से अपील शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 लागू है अतः किसी भी प्रकार से घर और दुकान का कचरा सड़क और नाली में फेक कर गंदगी न करें। चेतावनी के बाद भी यदि किसी के द्वारा कचरा फेका जाता तो इसकी सूचना शिकायत नगर निगम कार्यलय में अवश्य देवें ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
जांजगीर चांपा । शौर्यपथ । अश्विन महीने की दशमी तिथि को विजयदशमी पर्व मनाया जाता है।इसे दशहरा भी कहते हैं।भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था।तब से हर विजयदशमी पर रावण का पुतला जलाया जाता है और राम की विजय को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक समझा जाता है। भगवान राम जया और विजया नाम की देवियों की पूजा करके युद्ध के लिए निकले थे, इसलिए दशहरे पर भगवान राम के साथ इन देवियों की भी पूजा होती है।शस्त्रों, यानी हथियारों की पूजा करना ही इनकी पूजा का एक हिस्सा है।दशहरा मूल रूप से शक्ति का उत्सव है।शक्ति के प्रतीक हथियार हमारी रक्षा करते हैं, इसलिए इनकी पूजा की जाती है।भारतवर्ष में दशहरे के दिन घरों,प्रतिष्ठानों में हथियारों की विधिवत् पूजा करने का चलन है।हम अपनी रक्षा के लिए शस्त्रों का प्रयोग करते हैं।देश की बाह्य और आंतरिक सीमा की सुरक्षा इन्ही शस्त्रों से की जाती है।दशहरा के दिन इन्ही अस्त्रों में जया और विजया देवी का वास मानकर इनकी पूजा की जाती है। रामायण काल के हथियार आज के उन्नत परमाणु हथियारों से भी अधिक शक्तिशाली और विनाशकारी थे।उन हथियारों से पूरे विश्व का विनाश किया जा सकता था। दैवीय एवम् मायावी शक्तियों से युक्त ये अस्त्र-शस्त्र आज भी काफी प्रासंगिक हैं। रामायण काल के कुछ प्रमुख हथियार इस प्रकार थे:- (1) ब्रह्मास्त्र:- जगत्पिता ब्रह्मा ने दैत्यों के नाश हेतु ब्रह्मास्त्र की उत्पत्ति की थी।यह बहुत घातक,अचूक और सर्वश्रेष्ठ हथियारों में से एक माना जाता था।इस हथियार का जीवन काल में केवल एक बार इस्तेमाल किया जा सकता था।यह इतना शक्तिशाली था कि इसके चलने मात्र से ही पृथ्वी और तमाम ग्रहों पर भूकंप -सा आ जाता था।यह शस्त्र खुद ही अपनी ऊर्जा प्रकट करता था और उस ऊर्जा से विनाश करता था।ब्रह्मास्त्र को ब्रह्मास्त्र से ही काटा जा सकता था।रामायण काल में युद्ध में जब लक्ष्मण जी इंद्रजीत पर भारी हो गए तब इंद्रजीत ने लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था। लेकिन ब्रह्मास्त्र लक्ष्मण जी के सामने निस्तेज होकर वापस लौट आया था। (2) ब्रह्मशिरा अस्त्र:- ब्रह्मशिरा का अर्थ होता है ब्रह्मा जी का सिर ।परमपिता ब्रह्मा जी ने ब्रह्मास्त्र से भी अधिक शक्तिशाली ब्रह्मशिरा अस्त्र बनाया था।इसमें ब्रह्मास्त्र की तुलना में चार गुना अधिक शक्ति थी।ब्रह्मशिरा अत्यंत विनाशक बाण होते थे।ये मंत्रों से चलाए जाते थे।मेघनाद को ब्रह्मा के वरदान से ब्रह्मशिरा नामक अस्त्र प्राप्त हुआ था।रामायण काल में मेघनाद ने वानर सैनिकों का नाश करने के लिए इसका प्रयोग किया था।इससे लगभग 67 करोड़ वानर सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे । (3) वैष्णव अस्त्र:- यह नारायणास्त्र वैष्णव या विष्णु अस्त्र के नाम से भी जाना जाता है।एक बार इसे चलाने के बाद दूसरा कोई अस्त्र इसे काट नहीं सकता था। इससे बचने का सिर्फ एक उपाय था कि शत्रु हथियार डालकर स्वयं को समर्पित कर दे। रामायण काल में वानर वंश को समाप्त करने के लिए जब मेघनाद ने ब्रह्मशिरा अस्त्र का प्रयोग किया तो वानर तेजी से वीरगति को प्राप्त होने लगे यह देखकर हनुमान जी वानरों को बचाने दौड़ पड़े। यह देखकर मेघनाद ने हनुमान जी पर वैष्णव अस्त्र का प्रयोग किया लेकिन ब्रम्हा जी के वरदान के कारण हनुमान पर इस अस्त्र का कोई प्रभाव नहीं हुआ। (4) दारू पंच अस्त्र:- इसका अविष्कार दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य भार्गव ने किया था। इसका दूसरा नाम " रुद्र कीर्तिमुख " भी था। इस यंत्र में शत्रु की गतिविधि का चित्र उभर आता था। फिर यंत्र के मुख से अग्नि गोला निकलता और शत्रु का संहार करता था। यह यंत्र लंका के द्वार पर लगाया गया था। लंका की रक्षा में इसका अहम् योगदान था। श्री राम ने लंका के द्वार पर लगे 'दारू पच अस्त्र' को प्रक्षेपास्त्र छोड़कर नष्ट कर दिया था। (5) सूर्यहास खड्ग:- इसका आविष्कार तपस्वी शूद्र ऋषि शंबूक ने अपनी वेधशाला में किया था। इसमें सौर ऊर्जा के संग्रहण की क्षमता थी। शत्रु दल पर इसका प्रयोग करते ही वे इसमें चिपक जाते थे। यह शत्रु का रक्त खींच लेता था और शत्रु को मृत्यु लोक पहुँचा देता था। तत्पश्चात चुम्बकीय शक्ति से धारक के पास वापस आ जाता था। (6) प्रसवापन अस्त्र:- रावण की नाभि में था और अमृत के कारण वह मर नहीं रहा था। राम ने उसकी नाभि में स्थित अमृत को सुखाने के लिए ' प्रसवापन अस्त्र ' का प्रयोग किया।अमृत के सूखते ही रावण का अमरत्व समाप्त हो गया।भगवान राम ने तुरंत ही रावण का वध कर दिया।रामायण काल में विभीषण ने प्रसवापन अस्त्र के बारे में श्री राम को जानकारी दी थी। (7) चंद्रहास अस्त्र:- चंद्रहास अस्त्र चंद्रहास नामक तलवार है। वह सच में तलवार नहीं, बल्कि एक खड्ग था जो बहुत भारी था।यह प्रकाश की दिशा को मोड़ सकता था। इसे भगवान शिव ने रावण पर प्रसन्न होकर उसे वरदान स्वरूप दिया था ।रामायण काल में सीताजी के अपहरण के समय रावण ने चंद्रहास तलवार का प्रयोग करके सीताजी को बचाने आए गिद्धराज जटायु के पंख काट दिए थे। (8) नागपाश अस्त्र:- नागपाश अर्थात् शत्रु को बांँधने के लिए एक प्रकार का बंधन या फंदा। यह ढाई फेरे का बंधन होता था। यह एक प्रकार का रासायनिक अस्त्र था।इस अस्त्र का प्रयोग करके शत्रु के शरीर में जहरीले सर्पों के विष का प्रवेश कराया जाता था ।मेघनाद ने इसे इंद्र से प्राप्त किया था। रामायण काल में मेघनाद ने भगवान राम और लक्ष्मण को नागपाश के प्रभाव से मूर्छित कर दिया था। तब सर्पभक्षी पक्षीराज गरुड़ ने नागपाश के समस्त नागों को प्रताड़ित कर राम,लक्ष्मण को नागपाश के बंधन से छुड़ाया था। (9) गंधर्व अस्त्र:- चित्रकूट में दैत्य वंशीय खर और दूषण का शासन था।वे रावण के रिश्ते के भाई थे।जब लक्ष्मण ने सूर्पणखा के नाक- काट दिए तो वह उन्ही दैत्यों के पास मदद के लिए गई थी। वे दोनों राम -लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए चौदह सहस्त्र सेना लेकर आये। असुर सेना मायावी थी।श्री राम ने 14000 असुरों का संहार करने के लिए गंधर्व अस्त्र का प्रयोग किया था। इस हथियार के इस्तेमाल के बाद असुरों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और उन्हें अपने आस-पास का हर असुर राम नजर आने लगा। इस प्रकार वे एक -दूसरे को ही मारने लगे और स्वयं ही उन्होनें अपना अंत कर लिया। (10) पुष्पक विमान:- रामायण काल में रावण के पास कई लड़ाकू विमान थे। पुष्पक विमान उनमें से एक था।पुष्पक विमान के निर्माता ब्रह्मा जी थे। ब्रह्मा ने यह विमान धन के देव कुबेर को दिया था। कुबेर से इसे रावण ने छीन लिया था । पुष्पक विमान मोर जैसी आकृति का विमान था। यह अग्नि और वायु की उर्जा से चलता था। इसकी गति तीव्र थी और चालक की इच्छानुसार इसे किसी भी दिशा में गतिशील रखा जा सकता था।यह सभी ऋतुओं ,दिन और रात दोनों समय में गतिमान रहने में समर्थ था। यह अंतरिक्ष यान की क्षमताओं एवम् उन्नत प्रौद्योगिकी से भी युक्त था। इसमें लंका का राजा रावण आवागमन करता था। ----------------×------------------- संकलन डॉ. सुरेश यादव जांजगीर ( छ. ग.)
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ मूल के वरिष्ठ आईएएस अफसर अमिताभ जैन राज्य के नए मुख्य सचिव होंगे। वे नवंबर में रिटायर हो रहे आरपी मंडल की जगह लेंगे। जैन फिलहाल अपर मुख्य सचिव वित्त और जल संसाधन के पद पर पदस्थ हैं। वे छत्तीसगढ़ मूल के चौथे आईएएस हैं, जो मुख्य सचिव बनेंगे। इससे पहले विवेक ढांढ, अजय सिंह और मंडल मुख्य सचिव बने हैं।
जैन का मुख्य सचिव का कार्यकाल तकरीबन पांच साल का हो सकता है। वे जून 2025 में रिटायर होंगे। राज्य सरकार ने वर्तमान मुख्य सचिव आरपी मंडल को 6 माह की सेवावृद्धि देने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। अब तक केंद्र सरकार की ओर से जवाब नहीं आया है। केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकार होने और पूर्व के अनुभव के आधार पर यह माना जा रहा है कि मंडल की सेवावृद्धि के प्रस्ताव को मोदी सरकार से मंजूरी मिलने की संभावना कम ही है। इस कारण राज्य सरकार ने मंडल के बाद के नए विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है।
दावा तो यह भी किया जा रहा है कि जैन को सरकार की महत्वपूर्ण बैठकों में अभी से शामिल किया जा रहा है। जैन भूपेश सरकार की पहली पसंद के तौर पर इसलिए भी सामने हैं क्योंकि उनमें काम के प्रति लगन काफी अच्छी है। इसके अलावा सौम्य स्वभाव होने के कारण वे सभी को स्वीकार्य हैं। अपर मुख्य सचिव वित्त के तौर पर काम करते हुए उनका मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ तालमेल अच्छा बना हुआ है। इसी वजह से शासन की महत्वपूर्ण बैठकों में जैन की मौजूदगी को नए मुखिया के तौर पर देखा जा रहा है। जैन की नियुक्ति के साथ ही वरिष्ठ आईएएस सीके खेतान के राजस्व मंडल से मंत्रालय लौटने की भी संभावना कम हो जाएगी। खेतान अक्टूबर-19 से पदस्थ हैं। राजस्व मंडल में उनकी नियुक्ति मंडल को मुख्य सचिव बनाने के साथ ही की गई थी। लिहाजा खेतान जुलाई-21 में रिटायर होने वाले हैं। खेतान के अलावा इस समय जैन से वरिष्ठ आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम भी छत्तीसगढ़ कैडर के हैं। पर उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापसी की भी संभावना नहीं के बराबर है। केंद्र की मोदी सरकार से बेहतर संबंधों को देखते हुए जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव के पद से ही सुब्रमण्यम रिटायर हो सकते हैं। उनका रिटायरमेंट सितंबर 2022 है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपनी पसंद से उन्हें जम्मू कश्मीर लेकर गए हैं। इसलिए अब जैन की नियुक्ति तय मानी जा रही है। वैसे जैन ने छत्तीसगढ़ के दल्लीराजहरा से स्कूली शिक्षा पूरी की है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले जैन एमटेक हैं। जैन 11वीं बोर्ड में अविभाजित मध्यप्रदेश के टॉपर थे।
दुर्ग / शौर्यपथ / स्वामी आत्मानंद जी ने अपने जीवनकाल में रामकथा के विभिन्न प्रसंगों पर सुंदर व्याख्यान दिए थे। रामायण के चरित्रों की उनकी सुंदर व्याख्या अनेक स्रोतों में बिखरी हैं। इन्हें संकलित करने का महती कार्य किया डॉ. राजलक्ष्मी वर्मा ने और इसे रामरस पुस्तक का स्वरूप दिया। इस पुस्तक का विमोचन आज मुख्यमंत्री ने अपने भिलाई- 3 स्थित कैम्प निवास में किया। वेबिनार के माध्यम से हुए इस इस कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी जी के इस अतुलनीय कार्य को सहेजा जाना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है। यह पुस्तक सुधि पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी होगी। उन्होंने संकलन कार्य के लिए डॉ. राजलक्ष्मी वर्मा को भी बधाई दी एवं शुभकामनाएं व्यक्त की।
इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल, संभागायुक्त टीसी महावर, आईजी विवेकानंद सिन्हा, कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, एसपी प्रशांत ठाकुर एवं अन्य गणमान्य अतिथि तथा अधिकारी उपस्थित थे।
-प्रशासन की इस पहल से लोगों को मिल रही सही जानकारी अफवाहों की जगह सकारात्मक संदेश देने में मिल रही मदद
दुर्ग / शौर्यपथ / जिले में सोशल मीडिया के माध्यम से कोविड-19 से बचाव की जानकारी साझा करने की जिम्मेदारी, युवा इनफ्लुएंसर, समाज सेवी संगठन निभा रहे हैं। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने भी युवाओं के इस कदम की सराहना की है। पिछले माह युवाओं की टीम से मिलकर उनसे जागरूकता अभियान में जिला प्रशासन का सहयोग करने की अपील की थी। जिस पर करीब करीब 30 से अधिक अपने अपने सोशल मीडिया पेज के माध्यम से जरूरी जानकारियां साझा करते हैं। युवाओं का मानना है सोशल मीडिया के माध्यम से काफी अच्छे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। सभी युवाओं ने अपना अनुभव बताया कि वे जब से दुर्ग जिले में होम आइसोलेशन के कंट्रोल रूम के नंबर आपातकालीन नंबर फीवर क्लीनिक की जानकारी लगातार साझा कर रहे हैं, अब पेज से जुड़े सभी लोग उनसे आधिकारिक जानकारी के लिए संपर्क करते हैं और उनकी पोस्ट पर भरोसा करते हैं। कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे ने भी इन युवाओं द्वारा किए जा रहे प्रयास की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से ये युवा इंफ्लुएंसर कोरोना के प्रति जागरूकता की मुहिम में सहयोग कर रहे हैं। सबके प्रयास से ही हम सफलता अर्जित कर सकते हैं। अभी बहुत अधिक जागरूकता की जरूरत है क्योंकि आने वाले 100 दिनों तक सावधानी बहुत जरूरी है।
फॉलोवर्स को जो भी जानकारी चाहिए होती सीधे दुर्ग भिलाई रायपुर पेज के एडमिन से पूछते हैं, इस अभियान से जुड़कर उनके फॉलोवर्स भी बढ़ गए हैं- कनक अग्रवाल बताते हैं कि उनके दो पेज हैं, दुर्ग-भिलाई-रायपुर में 16 हजार से अधिक और अपना छत्तीसगढ़ पेज में 11 हजार लोग जुड़े हैं। जब से उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में जानकारी शेयर करना शुरू किया है तब उनके दोस्त, परिचित, फालोअर्ज को जब भी कोई जानकारी चाहिए होती है तो सबसे पहले उनसे ही पूछते हैं। कहते हैं भाई वो पोस्ट फिर से भेजना जिसमें फीवर क्लिनिक की लिस्ट है। कोविड टेस्ट रिपोर्ट की लिंक भेजना ,ये सब साझा करके काफी अच्छा लगता है। लोगों का भरोसा जीतने के साथ ही उनके पेज के फॉलोवर्स भी बढ़े हैं।
जिला प्रशासन की इस पहल से आई है पारदर्शिता ,सही जानकारियाँ लोगों तक पहुंच रहीं अफवाहों से निजात मिली - ये कहना है मिनेन्द्र चन्द्राकर का, वे बताते हैं आम नागरिक कोविड के इलाज हेतु, चिकित्सकीय संस्थाओं को दिए गए प्रोटोकॉल से अनभिज्ञ थे, जो यह कहता है कि चिकित्सक 24 घण्टे कोविड वार्ड में नही रह सकते हैं, अपितु आवश्यकता होने पर, सीसीटीवी की ओर अभिवादन कर उन्हें बुलाया जा सकता है। ऐसी जानकारियां इस समूह के गठन से, सीधे नागरिकों तक पहुंची है, जिससे प्रशासन और जनता के मध्य पारदर्शिता बढ़ी है, और निश्चित ही प्रशासन और कोरोना वारियर्स के प्रति विश्वास और सम्मान में वृद्धि हुई है। पिछले कुछ दिनों में भिलाई में कोविड के मरीजों हेतु बेड ना होने की बात सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही थी। ऐसी स्थिति में, यह आवश्यक था कि जिला प्रशासन द्वारा कोविड बेड की जानकारी नियमित रूप से,जो वेबसाइट पर सूचीबद्ध की जा रही है, का लोगों को ज्ञान हो। जिला प्रशासन द्वारा जारी वेबसाइट का पता होने से, हम व्यक्तिगत स्तर पर लोगों तक ये बात पहुंचा पाए,कि ऐसे आधे अधूरे खबरों का अवलोकन न कर, सटीक व त्रुटिरहित जानकारी हेतु, वे सीधे आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें। मिनेन्द्र कहते हैं उन्हें निश्चित रूप से लगता है कि ना केवल लोगों में बल्कि हम सभी मे, प्रशासन और व्यवस्थाओं को लेकर जो भ्रांतियां थी, वह दूर हुई है और निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन आए हैं।
भ्रम दूर हुए और सही जानकारी लोगों तक पहुँची- स्टार लाइट फाउंडेशन के प्रतीक ठाकरे कहते हैं कि जिला प्रशासन द्वारा एनजीओ, समाज सेवियों और सोशल मीडिया के युवा इंफ्लुएंसर्स को कोरोना जागरूकता अभियान में जोड़ने की पहल काफी सार्थक साबित हुई है। उनके पेज के माध्यम से लोगों को जानकारी मिल रही जिसको वो आगे साझा कर रहे हैं। सही जानकारी समय पर मिल जाने से अफवाह फैलने का खतरा दूर हुआ है जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती। युवाओं को भी जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मिल रही है है साझा कर रहे हैं एक विश्वास का वातावरण निर्मित हुआ है जो कि सबके हित में अच्छा है।
लोगों को जागरुक करने में मिल रही है मदद- हमर छत्तीसगढ़ पेज के नारायण राव बताते हैं कि यह बहुत पुराना पेज है इसमें 30 हजार से अधिक लोग जुड़े हैं। इस पेज में लोग अधिकतर सभी जिले की जानकारी पूछते है यहाँ तक कि उनको कॉल करके भी कोरोना हेल्प लाइन नंबर और होम क्वारंटाइन, लाकडाउन के बारे में पूछते है। उन्होंने बताया कि दुर्ग जिला प्रशासन के अभियान से जुड़ने के बाद जानकारी आसानी से मिलने लगी और लोगो को इससे फायदा हुआ। लोगो का रिस्पांस भी बहुत अच्छा मिलने लगा और मदद के बाद लोग उनको धन्यवाद भी बोलते हैं । सोशल डिस्टनसिंग और मास्क पहनने के लिए लोगो तक हम इस माध्यम से जागरूकता फैलाने के अभी तक कामयाब रहे है। उनका मानना है कि जरूरी जानकारियां सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो को पहुंचाना चाहिए ।
इम्यूनिटी बढ़ाने के तरीके, हॉस्पिटल का प्रोसीजर, होम क्वारेन्टीन की देते हैं जानकारी अब लोग कोरोना को मजाक में नहीं लेते-सी जी के टुरा पेज के प्रतीक साहू बताते हैं उनके अधिकतर कॉन्टैक्ट इंस्टा में ही है तो वे वहां ज्यादा से ज्यादा जानकारियां शेयर करते हैं। पिछले कुछ दिनों से लोग कोरोना को सिर्फ मजाक न समझ कर उसकी जानकारी शेयर कर रहे है और मुझसे भी इन्फॉर्मेशन की मांग करते है। जैसे इम्यूनिटी कैसे बढ़ाएं, हॉस्पिटल का प्रोसीजर क्या है, होम क्वरेंटाइन की जानकारी, काढ़ा बनाने की विधि आदि। कहते हैं उन्हें गर्व है कि मैं इस ग्रुप से जुड़ कर लोगो की मदद कर पा रहे हैं।
दुर्ग जिले में कोरोना संक्रमण से बचाव की जानकारी करती हैं साझा काफी लोगों को हो रहा फायदा- अंकिता आहूजा बताती हैं वो अपने पेज रायपुर भिलाई दुर्ग के माध्यम से दुर्ग जिले में बचाव और जागरूकता से जुड़ी सारी जानकारी साझा करती हैं जिससे काफी लोगों को फायदा हो रहा है। इस प्रकार आई एम फ्रॉम छत्तीसगढ़ से जिज्ञासा गुप्ता दे रहीं है कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां। वो बताती हैं उनके पेज से मिल रही जानकारी को काफी सराहना मिल रही है।
इंस्टा पेज सी जी अपडेट के माध्यम से शेख जुबैर दे रहे कोविड 19 से जुड़ी जरूरी जानकारियां- रायपुर के रहने वाले और इंस्टाग्राम में सीजी अपडेट नामक पेज की पेज की एडमिन शेख जुबैर बताते हैं कि वह लगभग 6 महीने से कोविड-19 से जुड़ी जरूरी जानकारियां दे रहे हैं। इससे सिर्फ दुर्ग ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लोगों को फायदा हुआ है। वे अपने पेज से सभी तरह के अपडेट देते रहते थे परन्तु जब से जिला दुर्ग के साथ जुड़कर काम करना शुरू किया है लोगों का भरोसा बढ़ा है। बहुत अच्छा लगता है जब लोग खुद मुझ पर भरोसा करके टेस्ट सेंटर, फीवर क्लिनिक, कंट्रोल रूम के नंबर पूछते हैं उनकी मदद हो जाती है और इस संकट के समय अपना छोटा सा योगदान देकर काफी अच्छा महसूस होता है। जुबैर बताते हैं पहले उन्हें जानकारी जुटाने में समय लगता था लेकिन अब जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी तुरंत मिल जाती है।
-दीपावली में नागरिकों की सुविधा के लिए स्थानीय उत्पाद बिहान बाजार में उपलब्ध होंगे
-आकर्षक डिजाइनर दीयों से लेकर हवन सामग्री, भगवान के वस्त्र आदि कई रेंज की वैरायटी उपलब्ध
दुर्ग / शौर्यपथ / बिहान के अंतर्गत काम कर रहे स्वसहायता समूहों ने अपने उत्पादों की रेंज का काफी विस्तार किया है। इसके लिए जिला प्रशासन ने एक कैटलाग तैयार किया है ताकि बिहान बाजार के माध्यम से उत्पाद खरीदने वाले लोगों को उत्पादों की जानकारी एक ही नजर में मिल सकें। इन 67 प्रकार के उत्पादों में दीवाली की पूजा सामग्री जैसे दीये, डिजाइनर दीये, हवन सामग्री, धूप और भगवान के वस्त्र आदि तो हैं ही, दीवाली के अवसर पर परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजन भी शामिल किये गए हैं। जिला पंचायत सीईओ श्री सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने इस संबंध में निर्देश दिये हैं कि स्वसहायता समूहों के उत्पादों को उचित प्लेटफार्म दिया जाए। बाजार तक इनकी ज्यादा से ज्यादा पहुंच हो। जहां बल्क खरीदी हो रही है उन संस्थानों से भी इनका सीधा संपर्क स्थापित किया जाए। इस दिशा में कार्य किया जा रहा है और दीवाली में यह समूह अच्छी खासी आय हासिल करेंगे। उल्लेखनीय है कि दीवाली के अवसर पर श्रृंगार वगैरह की भी पूरी तैयारी बिहान समूहों द्वारा की गई है। इसके लिए परंपरागत ज्वैलरी सेट भी बनाये गए हैं जिसमें छत्तीसगढ़ी में आभूषण की डिजाइन की कला की झलक मिलती है। डेकोरेशन के लिए सजावटी सामान भी तैयार किये जा रहे हैं। पेंटिंग्स एवं गिफ्ट आइटम भी तैयार किये गए हैं जो खासे आकर्षक हैं। दीवाली में जमकर साफसफाई भी होती है। इसके लिए बिहान बाजार में मुकम्मल व्यवस्था है। विभिन्न फ्लेवर वाले ग्लिसरीन सोप, मिल्क सोप आदि उपलब्ध हैं। टायलेट क्लिनर, हर्बल फिनाइल तथा डिशवाश भी इन समूहों ने बनाये हैं, कोरोना काल में इनके द्वारा बनाये गए हर्बल हैंडवाश की माँग अच्छी बढ़ी है। दीवाली में इसकी बिक्री और बढ़ने की उम्मीद है। बांस की सामग्री की भी बाजार में अच्छी माँग होती है। कैटलाग में विभिन्न बांस से बनी सामग्री भी शामिल की गई है। कैटलाग में कृषि आधारित उत्पाद भी शामिल किये गए हैं जिनके अंतर्गत कीटनाशक नीमास्त्र शामिल हैं। खासा लोकप्रिय पिंक आयस्टर मशरूम भी कैटलाग में शामिल है, जिसके कारण से स्वसहायता समूहों को अच्छा खासा लाभ अर्जित हो रहा है। इसके अलावा पोल्ट्री उत्पाद एवं अन्य कृषि उत्पाद भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि बिहान के समूहों द्वारा बनाये डिजाइनर दीयों एवं अन्य प्रोडक्ट्स की माँग विदेशों में भी हो रही है। इनकी सुंदर डिजाइनिंग के चलते बड़ा बाजार तैयार हुआ है। कलेक्टर ने निर्देश दिये हैं कि इसके डिस्प्ले के लिए अच्छा लोकेशन इन्हें एलाट किया जाए। साथ ही इन उत्पादों के लिए अमेजन तथा फ्लिपकार्ट आदि में भी प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाए ताकि इन्हें बड़ा ग्राहक वर्ग मिल सके।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक ने बालिका गृह एवं बालक संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती रेणु प्रकाश एवं अन्य स्टाफ उपस्थित थे।
रायपुर / शौर्यपथ / पंचायतएवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव रेडियो पर 25 अक्टूबर को प्रसारित होने वाले 'हमर ग्रामसभा' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देंगे। वे 25 अक्टूबर को शाम साढ़े सात बजे से आठ बजे तक आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित इस विशेष कार्यक्रम में पत्र, एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देंगे। मंत्री सिंहदेव कार्यक्रम में राज्य शासन की नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में श्रोताओं की जिज्ञासाओं का भी समाधान करेंगे। कार्यक्रम को मीडियम वेब 981 किलोहर्ट्ज पर सुना जा सकता है। प्रदेश में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्र एक साथ इस कार्यक्रम को रिले करेंगे।
उल्लेखनीय है कि विभागीय योजनाओं की जानकारी देने और इनका लाभ उठाने लोगों को प्रेरित करने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा द्वारा तैयार साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ का आकाशवाणी रायपुर द्वारा हर रविवार शाम साढ़े सात बजे से आठ बजे तक प्रसारण किया जाता है।
कवर्धा / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल के मंशानुरूप व वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने निर्देश पर वन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के भोरमदेव वन्य प्राणी अभ्यारण और मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्य प्राणी बारहसिंघा के लिए उपयुक्त आवास और नैसर्गिक प्रजनन क्षेत्र की संभावना की दृष्टि से खरपतवार उन्मूलन, स्थाई घास मैदान और पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस तारतम्य में वन मंत्री श्री अकबर के निर्देशानुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) पी.वी. नरसिंगराव ने कबीरधाम जिले के भोरमदेव वन्य प्राणी अभ्यारण का कार्य प्रगति का जायजा लेने निरीक्षण किया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक नरसिंगराव ने निरीक्षण के दौरान भोरमदेव अभ्यारण की तरफ से सीमावर्ती क्षेत्र में स्पष्ट रूप से मुनारा से 10 मीटर अग्नि सुरक्षा रेखा के साथ-साथ सीमांकन का सुझाव वन मंडलाधिकारी को दिया गया। क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान उन्होने स्थाई संपत्तियों के रखरखाव और शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिए अभ्यारण में स्थाई घास के मैदान विकसित करने संबंधी मार्गदर्शन दिया। वर्तमान में अभ्यारण में उपलब्ध विभिन्न घास प्रजातियों के बीज इकट्ठा कर उनको नर्सरी के माध्यम से या सीधे तौर पर घास मैदानों में लगाने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों के अंतर्गत बनाए गए रपटा, साल्ट लिक, स्टॉप डैम, मिट्टी और मुरुम के बने वन मार्गों का भी निरीक्षण किया।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
