Google Analytics —— Meta Pixel
February 22, 2026
Hindi Hindi
Uncategorised

Uncategorised (35233)

अन्य ख़बर

अन्य ख़बर (5913)

धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

 

 रायपुर / प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर आज 18 फरवरी को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन द्वारा जिला स्तरीय जांच दल से विस्तृत भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई तथ्य भ्रामक एवं अपूर्ण जानकारी पर आधारित पाए गए हैं। उपायुक्त, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश मामलों में भुगतान नियमानुसार हुआ है और निर्माण कार्य प्रगति पर है।

महासमुंद - 12 हजार से ज्यादा किश्त अटकी होने का दावा गलत

खबर में बागबाहरा जनपद में 12,366 हितग्राहियों की दूसरी किश्त अटकी होने और केवल 25 हजार रुपए पहली किश्त दिए जाने का उल्लेख किया गया है, जबकि जांच में सामने आया कि योजना शुरू होने से अब तक जनपद पंचायत बागबाहरा में 22,910 आवास स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 19,411 मकान पूर्ण हो चुके हैं। शेष 3,499 आवास निर्माणाधीन हैं। प्रशासन के मुताबिक किश्तों का भुगतान निर्माण कार्य की प्रगति के अनुसार किया जा रहा है।

गरियाबंद - जिन घरों को अधूरा बताया, वे निर्माणाधीन

ग्राम तुहामेटा में झुलवती के नाम पर प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत वर्ष 2023-24 में स्वीकृत आवास में दो किश्तों में एक लाख रुपए जारी किए जा चुके हैं। जांच में पाया गया कि छत ढलाई का कार्य पूरा है। हितग्राही श्रीमती झूलबती के निधन के बाद उनके पति श्री पीलाराम को उत्तराधिकारी के रूप में पोर्टल में दर्ज किया गया है, जो कि पीएफएमएस में लंबित है।

इसी तरह राजापड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत अडगडी में सुगारो के नाम से वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत है। 40 हजार रुपए की पहली किश्त जारी हो चुकी है। मकान प्लिंथ स्तर पर है और दूसरी किश्त के लिए जियो-टैगिंग पूरी कर ली गई है।

ग्राम पंचायत जाड़ापदर में हिरमनी बंजारा के पिता खेतुराम बंजारा के नाम से वर्ष 2024-25 में आवास स्वीकृत है। दो किश्तों में 95 हजार रुपए जमा किए जा चुके हैं। मकान चौखट स्तर तक बन चुका है। जांच में फर्जी भुगतान का आरोप सही नहीं पाया गया।

जांच रिपोर्ट में इस बात स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि लफंदी में मनरेगा मजदूरी में गड़बड़ी नहीं मिली है। फिंगेश्वर ब्लॉक के लफंदी गांव में मनरेगा मजदूरी में 4 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी की शिकायत की भी गहन जांच की गई। मस्टररोल, मांगपत्र और सहमति पत्रों का परीक्षण किया गया। प्रशासन के अनुसार श्रमिकों को नियमानुसार भुगतान हुआ है और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं मिला है।

सामूहिक गृह प्रवेश पर भी स्पष्टीकरण

गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद में 3817 घरों को कागजों में पूर्ण दिखाने और सामूहिक गृह प्रवेश कराने के आरोपों की भी जांच की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन आवासों को पूर्ण दर्शाया गया है, वे निर्धारित मानकों के अनुरूप विभिन्न स्तरों पर पूर्ण पाए गए। जियो-टैगिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग की प्रक्रिया अपनाई गई है।

उपायुक्त प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण छत्तीसगढ़ का कहना है कि योजना में भुगतान सीधे लाभार्थियों के खातों में ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है। निर्माण की प्रगति जियो-टैगिंग के जरिए मॉनिटर होती है। शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रकाशित समाचार के कई बिंदु अपूर्ण तथ्यों पर आधारित हैं और आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित पक्की छत उपलब्ध कराना है और इसके क्रियान्वयन में हर स्तर पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।

  दुर्ग। मोहन नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत शक्ति नगर में सोमवार रात्रि शिव बारात के दौरान पुरानी रंजिश को लेकर हुए विवाद ने गंभीर आपराधिक रूप ले लिया। घटना में 17 वर्षीय क्षय कुमार गोड उर्फ नानू की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में संलिप्त सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है तथा घटना में प्रयुक्त हथियार जप्त कर लिया गया है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 17 शांति नगर निवासी शिव कुमार गोड (51 वर्ष) द्वारा थाना मोहन नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि उनका पुत्र क्षय कुमार गोड शिव बारात देखने गया था। इसी दौरान कुछ युवकों के साथ पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हो गया। विवाद शीघ्र ही मारपीट में परिवर्तित हो गया और आरोपियों ने क्षय कुमार पर धारदार हथियार से प्राणघातक हमला कर दिया।

घायल अवस्था में परिजन उसे तत्काल उपचार हेतु सिकोला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के पश्चात क्षेत्र में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी, जिसे देखते हुए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई।

सीसीटीवी फुटेज एवं तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान

प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदेहियों की पहचान कर विभिन्न स्थानों पर दबिश दी गई। घेराबंदी कर सातों आरोपियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते घटना को अंजाम देना स्वीकार किया।

गिरफ्तार आरोपी

  1. करण उर्फ बाटा

  2. मनीष देशमुख उर्फ पाडू

  3. अश्वनीद चंद्राकर

  4. आशीष चतुर्वेदी उर्फ मोनू

  5. शुभम देवांगन उर्फ राजा

  6. जितेश वर्मा उर्फ पोगो

  7. आदित्य सेन उर्फ ब्राण्डेड
    (सभी निवासी शक्ति नगर, दुर्ग)  

पुलिस द्वारा सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। प्रकरण में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई प्रचलित है।

पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में कानून को हाथ में न लें तथा शांति एवं सद्भाव बनाए रखें।

नई दिल्ली / एजेंसी /
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 फरवरी, 2026) नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि संताल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। हालांकि, अपनी लिपि के अभाव में संताली भाषा को प्रारंभ में रोमन, देवनागरी, उड़िया और बंगाली लिपियों में लिखा जाता था। नेपाल, भूटान और मॉरीशस में रहने वाले संताल समुदाय के लोग भी वहाँ प्रचलित लिपियों का उपयोग करते थे। ये लिपियां संताली भाषा के मूल शब्दों का सही उच्चारण सही तरीके से नहीं कर पा रही थीं. साल 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। तब से यह संताली भाषा के लिए उपयोग में लाई जा रही है। आज यह लिपि विश्वभर में संताल पहचान का सशक्त प्रतीक बन चुकी है और समुदाय में एकता स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है।
राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि की शताब्दी समारोह इस लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर होना चाहिए। बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, बंगाली या किसी अन्य भाषा में शिक्षा मिल सकती है, लेकिन उन्हें अपनी मातृभाषा संताली भी अलचिकि लिपि में सीखनी चाहिए।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PRpic316022026EZ79.JPG

राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि अनेक लेखक अपने साहित्यिक कार्यों से संताली साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने की सलाह दी।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/PRpic416022026D4MF.JPG

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अनेक भाषाओं का उपवन है। भाषा और साहित्य समुदायों के भीतर एकता को बनाए रखने वाले सूत्र हैं। साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध होती हैं। संताली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक अनुवाद और लेखन के माध्यम से पहुंचाने तथा अन्य भाषाओं के साहित्य को संताली में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही, संताल समुदाय के 10 विशिष्ट व्यक्तियों को संताली लोगों के बीच अलचिकि लिपि के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की परती भूमि अब सोना उगलने लगी है। धान का कटोरा कहे जाने वाले इस राज्य में किसानों का रुझान राई-सरसों की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इससे न केवल किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलना शुरू हुई है, बल्कि देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की राह भी आसान होती नजर आ रही है। बता दें कि यहां के किसान धान कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ देते हैं, यानी रबी फसल की बुवाई नहीं करते हैं।
इस कारण उनकी आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। किसानों के इन हालातों को देखते हुए आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर ने ठोस रोडमैप के साथ प्रयास शुरू किए। परिणामस्वरूप परती भूमि पर अब सरसों की फसल लहलहाने लगी है। संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि राज्य की भूमि में खजाना छिपा हुआ है। यदि किसान धान कटाई के बाद देर से पकने वाली राई-सरसों किस्मों की बुवाई करें तो उनकी आर्थिक स्थिति में असम के किसानों के समान बदलाव देखने को मिल सकता है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में कुल कृषि क्षेत्र 4.78 मिलियन हेक्टेयर है। इसमें केवल 23 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित है। वार्षिक वर्षा लगभग 1190 मिमी है, जिसमें लगभग 88 प्रतिशत वर्षा मानसून (मध्य जून से सितंबर) के दौरान होती है। इस दौरान किसान धान का बड़े पैमाने पर उत्पादन लेते हैं। वहीं रबी में गेहूं और थोड़े क्षेत्रफल में दलहनों की बुवाई करते हैं, लेकिन राई-सरसों का उत्पादन हाशिए पर है। वैज्ञानिकों का कहना है कि परती भूमि, बस्तर के पठारी और उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में राई-सरसों की खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान का यह शुरुआती प्रयास है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि धान कटाई के बाद कृषि भूमि परती रह जाती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर सीमित हो जाते हैं। राई-सरसों की फसल परती भूमि को उत्पादक बनाने में मददगार बन सकती है।
परती भूमि की चुनौती
छत्तीसगढ़ में लगभग 3.9 मिलियन हेक्टेयर में धान की खेती होती है, जबकि धान उत्पादन लगभग 9.8 मिलियन टन है। खरीफ में अधिक वर्षा और चिकनी मिट्टी के कारण धान का उत्पादन भरपूर होता है, लेकिन रबी में यही खेती सीमित रह जाती है। धान के कुल क्षेत्र का लगभग 32 प्रतिशत भाग ही सिंचित है, जिससे कटाई के बाद पठारी और पहाड़ी क्षेत्रों के लगभग 40–60 प्रतिशत खेत परती रह जाते हैं। इस स्थिति में राई-सरसों का बुवाई क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।
31 हजार हेक्टेयर में खेती
संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि यहां की जलवायु रबी तिलहन के लिए अनुकूल है, बशर्ते खरीफ के बाद मृदा में नमी का संरक्षण और उचित कृषि तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाए। क्योंकि राई-सरसों को कम पानी में उगाया जा सकता है और यह कम समय में पक जाती है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में महज 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती होती है। करीब 17,260 टन उत्पादन और उत्पादकता 563 किग्रा प्रति हेक्टेयर है, जिसे वैज्ञानिक तकनीकों के समावेश से और बढ़ाया जा सकता है।
20 प्रतिशत ज्यादा उपज
उन्होंने बताया कि अनुसंधान परीक्षण के आधार पर धान के परती खेतों में राई-सरसों की अच्छी पैदावार मिलती है। इस फसल की लगभग 20 प्रतिशत अधिक पैदावार प्राप्त हुई है। प्रदर्शन के दौरान सरसों की किस्म डीआरएमआर-150-35 ने उत्साहजनक परिणाम दिए। यह किस्म 95–110 दिनों में पक जाती है, जिससे धान की कटाई के बाद मध्य नवंबर से दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक इसकी बुवाई सहजता से की जा सकती है। इसके अलावा किसान छत्तीसगढ़ सरसों, टीबीएम, एनआरसीएचबी-101 और बीबीएम-1 जैसी किस्मों का उपयोग कर सकते हैं।
किसानों को आजीविका सुरक्षा
धान परती क्षेत्रों में राई-सरसों को शामिल करने से किसानों की आय और आजीविका सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार संभव है। वर्षा आधारित धान पारिस्थितिकी तंत्र में किए गए प्रदर्शनों से यह सिद्ध हुआ है कि शून्य जुताई के तहत राई-सरसों से 8–14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इससे प्रति हेक्टेयर 27 हजार रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। साथ ही सरसों के साथ मधुमक्खी पालन करके किसान अपनी आमदनी को और भी बढ़ा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ में राई-सरसों की खेती किसानों को त्रिस्तरीय लाभ दे सकती है, जिसमें आय वृद्धि, परती भूमि का उपयोग और खाद्य तेल उत्पादन में बढ़ोतरी शामिल है। इस फसल से राज्य के कृषि परिदृश्य को बदला जा सकता है। इस फसल पर अनुसंधान के काफी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं।

डॉ. पी.के. राय, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद –राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान

14 मिलियन से अधिक डाउनलोड, 10 लाख लोगों ने घर बैठे अपडेट किया मोबाइल नंबर

नई दिल्ली /
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा विकसित नया आधार ऐप देश में डिजिटल पहचान प्रबंधन का एक सशक्त और भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। आम नागरिकों के बीच इसे जबरदस्त स्वीकार्यता मिल रही है, जो सुरक्षित, सरल और गोपनीयता-केंद्रित डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
यूआईडीएआई के इस नेक्स्ट-जेनरेशन मोबाइल ऐप को अब तक 14 मिलियन (1.4 करोड़) से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। 28 जनवरी 2026 को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद से यह ऐप औसतन प्रतिदिन एक लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज कर रहा है।

घर बैठे आधार सेवाएं, लाखों नागरिकों को राहत
आधार ऐप ने नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और सुलभ बना दिया है।
अब तक—
10 लाख से अधिक लोगों ने ऐप के माध्यम से अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया
3.57 लाख आधार धारकों ने बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक की सुविधा का उपयोग किया
लगभग 8 लाख लोगों ने ई-आधार डाउनलोड किया
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि आधार से जुड़ी सेवाएं अब बिना कतार और बिना कार्यालय गए, घर बैठे संभव हो रही हैं।

गोपनीयता और सुरक्षा पर विशेष जोर
यह ऐप डेटा मिनिमाइजेशन, कंसेंट कंट्रोल और सेलेक्टिव डेटा शेयरिंग जैसी आधुनिक अवधारणाओं को बढ़ावा देता है। फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से पहचान सत्यापन, सिंगल क्लिक में बायोमेट्रिक प्रबंधन और ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री देखने जैसी सुविधाएं इसे और अधिक सुरक्षित बनाती हैं।

QR आधारित वेरिफिकेशन से आसान हुआ दैनिक जीवन
आधार ऐप के जरिए अब—
होटल चेक-इन
अस्पतालों में भर्ती
कार्यक्रमों में प्रवेश
आयु सत्यापन
गिग वर्कर्स एवं सर्विस पार्टनर्स का सत्यापन
जैसे कार्य ऑफलाइन QR कोड वेरिफिकेशन के माध्यम से आसानी से किए जा सकते हैं। इसके लिए UIDAI एक मजबूत ऑफलाइन वेरिफिकेशन इकोसिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिससे संस्थाएं पंजीकरण कर इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

“वन फैमिली – वन ऐप” की अवधारणा
यह आधार ऐप एक ही मोबाइल डिवाइस पर पांच आधार प्रोफाइल प्रबंधित करने की सुविधा देता है, जिससे पूरे परिवार के लिए एक ही ऐप पर्याप्त हो जाता है। पता अपडेट के साथ-साथ अब पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट की सुविधा भी इसमें शामिल है। भविष्य में और भी सेवाओं को जोड़ने की योजना है।

डिजिटल भारत की दिशा में मजबूत कदम
आधार ऐप की यह व्यापक स्वीकार्यता सेवा वितरण में सुधार, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में UIDAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नियमित अपडेट, उन्नत सुरक्षा फीचर्स और सरल इंटरफेस के कारण यह ऐप सभी आयु वर्ग और क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
आधार ऐप आज केवल एक एप्लिकेशन नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल पहचान का नया चेहरा बन चुका है।

नई दिल्ली /
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया।
श्री मोदी ने कहा कि नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और प्रौद्योगिकी उत्साही लोगों के बीच उपस्थित होना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल देश के लिए बदलावकारी समाधान तैयार करेगी, बल्कि वैश्विक विकास में भी योगदान देगी।
एक्स पर अपनी पोस्ट में श्री मोदी ने कहा, “भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। यहां नवोन्मेषकों, शोधकर्ताओं और तकनीक प्रेमियों के बीच रहकर एआई, भारतीय प्रतिभा और नवाचार की असाधारण क्षमता की झलक मिलती है। हम मिलकर ऐसे समाधान तैयार करेंगे जो केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए होंगे!”

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से आदिवासी संस्कृति, परम्परा का होगा संरक्षण - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिए गए निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय संविधान की भावना, आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की संरक्षण तथा पेसा कानून के प्रावधानों की पुनः पुष्टि करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारी सरकार ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस प्रकरण में सशक्त पक्ष रखा और न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि परंपराओं एवं सामाजिक संरचना के संरक्षण हेतु ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों का प्रयोग कर सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को सुदृढ़ करने वाला है। राज्य सरकार ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और जनजातीय अस्मिता की रक्षा हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र हेतु पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कार्य भी कर रही है।
उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले के अनेक ग्राम पंचायतों ने गांवों में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड लगाए थे। उक्त निर्णय के विरुद्ध संबंधित पक्षों द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि परंपराओं के संरक्षण के लिए पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं ऐसे निर्णय लेने के अधिकार रखती हैं। हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। 16 फरवरी 2026 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करने के साथ स्पष्ट किया कि पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर निर्णय ले सकती हैं। यह निर्णय आदिवासी स्वशासन, ग्राम स्वायत्तता और परंपरागत अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कुपोषण दूर करने और महिला सशक्तिकरण के लिए रेडी-टू-ईट फूड निर्माण का काम महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपते हुए 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत रायगढ़, बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, और सूरजपुर जिलों में आंगनबाड़ियों के लिए पौष्टिक आहार निर्माण का कार्य महिला समूहों को मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) के निर्माण और वितरण का कार्य महिला स्वसहायता समूहों को सौंपने का फैसला किया। राज्य के 6 जिले के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी टू ईट के निर्माण और वितरण का कार्य सौंपा गया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति के इस मिशन को प्रथम चरण में प्रदेश के 6 जिलों - बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ एवं सूरजपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। वहीं रायगढ़ प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां महिला समूहों ने ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन प्रारंभ किया है। यह पहल महिलाओं की आर्थिक समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्यकृदोनों को नई दिशा प्रदान करेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबा-10 स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निमाण का कार्य सौंपा जा चुका है। इसी प्रकार रायगढ़-10 स्व-सहायता समूह, सूरजपुर और बलौदाबाजार-भाठापारा जिला में 7-7 स्व- सहायता समूह को, बस्तर जिले में 6 स्व-सहायता समूह और दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निमाण का कार्य सौंपा जा चुका है। इन स्व-सहायता समूहों के द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) का निर्माण और वितरण का कार्य किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि इन समूहों की बहनें अब आंगनबाड़ी के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस कार्य से अपनी आमदनी भी बढ़ाएंगी, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी। यह योजना महिलाओं को स्व-रोजगार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और परिणामोन्मुखी पहल है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से बच्चों को पोषण युक्त आहार प्रदान कर राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

नई दिल्ली / एजेंसी /
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में 17 फरवरी 2026 को गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों की उच्चस्तरीय मंथन बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह करेंगे। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र को अधिक सशक्त, पारदर्शी और सदस्य-केंद्रित बनाना है।
बैठक में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्री तथा सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों की समीक्षा, राज्यों के अनुभवों का आदान-प्रदान और भविष्य की साझा कार्ययोजना पर चर्चा होगी।
मंथन बैठक का प्रमुख फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर रहेगा। इसके तहत 2 लाख नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS), डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की प्रगति पर विचार किया जाएगा। साथ ही विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत आधुनिक गोदामों के विस्तार से किसानों को बेहतर भंडारण और बाज़ार तक सीधी पहुंच देने पर चर्चा होगी।
बैठक में नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड (NCEL), नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं में राज्यों की भागीदारी पर भी विमर्श होगा, जिससे निर्यात, जैविक खेती और बीज आपूर्ति के क्षेत्र में सहकारिता की भूमिका सुदृढ़ हो सके।
इसके अलावा सहकारिता कानूनों में सुधार, 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप मॉडल अधिनियम को अपनाने, सहकारी गन्ना मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने, डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी, सहकारी बैंकों की मजबूती, सदस्यता विस्तार, डिजिटलीकरण, मानव संसाधन विकास और प्रशिक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।
यह मंथन बैठक केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहकारिता को ग्रामीण समृद्धि, रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 वैश्विक एआई अग्रणी नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए एकत्रित हुए

नई दिल्ली / 
राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आज से इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भव्य शुभारंभ हो गया। यह शिखर सम्मेलन इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि पहली बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर इस स्तर का वैश्विक सम्मेलन ग्लोबल साउथ में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य समावेशी विकास, मजबूत सार्वजनिक प्रणालियों और सतत प्रगति के लिए एआई की भूमिका को वैश्विक दृष्टिकोण से परिभाषित करना है।
16 से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, 60 से अधिक मंत्री एवं उपमंत्री, तथा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही, विश्वभर से 500 से अधिक सीईओ, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, स्टार्टअप संस्थापक और परोपकारी संगठनों के प्रतिनिधि इस मंच पर एकत्रित हुए हैं।
19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन भाषण देंगे। उनका संबोधन वैश्विक सहयोग को सशक्त करने और जिम्मेदार, सुरक्षित एवं समावेशी एआई के लिए भारत के दृष्टिकोण को दिशा देने वाला होगा।
शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण तीन वैश्विक प्रभाव चुनौतियाँ — एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई हैं। इन पहलों के तहत दुनिया भर से 60 से अधिक देशों के 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो एआई नवाचार में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है। बहुस्तरीय मूल्यांकन के बाद 70 शीर्ष टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है, जो 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम एवं सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी।
18 फरवरी को आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से आयोजित एआई एवं इसके प्रभाव पर अनुसंधान संगोष्ठी शिखर सम्मेलन का प्रमुख अकादमिक मंच होगा। इसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से प्राप्त लगभग 250 शोध प्रस्तुतियों पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की उपस्थिति प्रस्तावित है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जन, ग्रह और प्रगति के तीन मूल स्तंभों पर आधारित है और सात विषयगत कार्य समूहों के माध्यम से आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण, सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई, मानव पूंजी और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर परिणाम-उन्मुख सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई सहयोग का प्रमुख केंद्र बनाने और जिम्मेदार नवाचार को जनहित से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Page 4 of 2517

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)