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February 28, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में राज्य प्रशासनिक सेवा तथा एलाइड सर्विस से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में नियुक्त अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारी मिलने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति न केवल गौरव का विषय है, बल्कि यह जनसेवा के व्यापक अवसरों और जिम्मेदारियों का भी प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि शासन की लोककल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिकारियों की सक्रिय भूमिका से प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में नियुक्त तीर्थराज अग्रवाल, सुश्री लीना कोसम, बीरेंद्र बहादुर पंचभाई, सुमित अग्रवाल, संदीप कुमार अग्रवाल, आशीष कुमार टिकरिहा, ऋषभ पाराशर एवं तरुण किरण उपस्थित थे।

   रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित समिति कक्ष में आयोजित की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी तथा कृषि मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित रहे। इसके साथ ही विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक अजय चंद्राकर सहित समिति के अन्य सदस्य भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में विधानसभा के आगामी कार्यों, कार्यसूची एवं सदन संचालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

   नई दिल्ली /  भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SEC) का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है, इससे पूर्व ऐसा सम्मेलन वर्ष 1999 में आयोजित हुआ था।
सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार करेंगे। इस अवसर पर निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहेंगे। देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी एवं तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भाग लेंगे, वहीं सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
समन्वय और सहकारी संघवाद पर जोर
इस राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं के संदर्भ में ईसीआई और राज्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच तालमेल को मजबूत करना है। सम्मेलन से निर्वाचन प्रबंधन में सहकारी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।
तकनीक, ईवीएम और मतदाता सूची पर मंथन
दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रियाओं को सशक्त बनाने,प्रौद्योगिकी के उपयोग,ईवीएम की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा,तथा मतदाता सूचियों को साझा करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में शुरू किए गए ईसीआईएनईटी (ECINET) डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुतियां देंगे और बताएंगे कि यह प्लेटफॉर्म निर्वाचन सेवाओं को किस प्रकार सरल और प्रभावी बना रहा है।
मतदाता पात्रता पर तुलनात्मक प्रस्तुति
सम्मेलन में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता पात्रता से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर एक तुलनात्मक प्रस्तुति भी दी जाएगी, जिससे मतदाता सूची निर्माण से जुड़े कानूनों पर सूचनात्मक चर्चा संभव हो सके।
संवैधानिक पृष्ठभूमि
राज्य निर्वाचन आयोगों का गठन 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के तहत संबंधित राज्य कानूनों द्वारा किया जाता है। अनुच्छेद 243के और 243जेडए के अंतर्गत पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनाव तथा मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयुक्तों को सौंपी गई है।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन देश की निर्वाचन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समन्वित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

  रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।

नई दिल्ली/ 
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

नई दिल्ली/ 
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।

क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।

पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।

पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।

व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।


मुख्यमंत्री साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।
अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गिरौदपुरी में संत समागम एवं गुरुदर्शन मेले में हुए शामिल
गुरूदर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि का लिया आशीर्वाद

रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्मभूमि एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित संत समागम एवं गुरुदर्शन मेला में शामिल हुए। उन्होंने पूज्य गुरुगद्दी का दर्शन एवं पूजा - अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिये कामना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास के मनखे- मनखे एक समान का सन्देश, मानव को मानव से जोड़ने वाला और सद्भाव व समरसता बढ़ाने वाला है। बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर हमारी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के द्वारा गिरौदपुरी का सतत् विकास किया जा रहा है। विशाल जैतखाम निर्माण से लेकर अनेक सुविधाओं का विस्तार यहां किया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किये गए जनसुविधा विस्तार कार्य की सराहना की और कहा कि वेबसाईट और मोबाइल एप्प से भी मेले में उपलब्ध सुविधा की जानकारी श्रद्धालु ले सकते हैं। उन्होंने इस दौरान वहां चस्पा किये गए क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन कर जानकारी ली।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर मुख्य मंदिर का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया। मुख्यमंत्री के हाथों स्थानीय श्रद्धालु एवं स्व सहायता समूह की महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर उत्साहित हुए। गौरतलब है कि गिरौदपुरी में तीन दिवसीय संत समागम एवं गुरू दर्शन मेला 22 फ़रवरी से प्रारंभ होकर 24 फरवरी 2026 तक चलेगा। प्रदेश सहित देश एवं विदेश से भी सतनाम पंथ के अनुयायी यहां मेले में आए हुए हैं।
इस अवसर पर धर्मगुरू गुरु बालदास साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, राजिम विधायक रोहित साहु, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक सुश्री भावना गुप्ता,डीएफओ गणवीर धम्मशील, पूर्व सांसद गुहा राम अजगले, पूर्व विधायक डॉ सनम जांगड़े सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि वरिष्ठ अधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

नई दिल्ली।
फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।

‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल

प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—

M – Moral (नैतिक मूल्य)
A – Accountable (जवाबदेही)
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
V – Valid (वैध और सुरक्षित)

पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।

एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।

दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।

समावेशी तकनीक की मिसाल
समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।

नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।

भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।

राजनीतिक संदेश
मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।

मुख्यमंत्री ने जनता का आभार जताया, प्रदेश के विकास में निरंतर समर्पण का संकल्प दोहराया

प्रोजेक्ट धड़कन, जिंदगी मुस्कुराएगी, दिव्य धुन बैंड और कलाकेंद्र के बच्चों संग मुख्यमंत्री ने बांटी खुशियां

रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जन्मदिन पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास देर रात तक उल्लास और स्नेह के वातावरण से भरा रहा। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों,समाजसेवियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री को जन्मदिवस के अवसर पर फलों से तौला गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी आगंतुकों से आत्मीयता से मुलाकात की और स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आप सभी के प्रेम और सहयोग से मैं अभिभूत हूँ। छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। आपका निरंतर समर्थन और आशीर्वाद इसी तरह बना रहे, यही मेरी कामना है।

प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री निवास में मंत्रीगण,विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को बधाई दी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह,खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, वन मंत्री श्री केदार कश्यप,महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं।
इसके साथ ही विधायकगण श्री धरमलाल कौशिक, श्री अजय चंद्राकर,श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, श्री दीपेश साहू और श्री ललित चन्द्राकर सहित विभिन्न आयोग एवं मंडल के अध्यक्षों, सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर जन्मदिन की बधाई दी।

प्रदेशभर से उमड़ा शुभकामनाओं का सैलाब
मुख्यमंत्री श्री साय को प्रदेश के उद्योगपतियों,व्यापारी संगठनों, खेल जगत के प्रतिनिधियों,समाजिक संगठन, दिव्यांग संगठन,अल्पसंख्यक समाज, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और मीडिया जगत के वरिष्ठ जनों ने भी शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और विकसित प्रदेश बनाने के लिए सरकार प्रत्येक वर्ग के हित में कार्य कर रही है, और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट धड़कन और जिंदगी मुस्कुराएगी के बच्चों संग बांटी खुशियां

जिला प्रशासन रायपुर एवं स्वास्थ्य विभाग की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत हृदय रोग की सर्जरी के बाद बच्चे पारुल, नमन शर्मा और हिमांशु ध्रुव और प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी के तहत नाक की सर्जरी के बाद नन्ही प्रेमिन साहू ने भी अपने प्रिय मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री बड़ी ही आत्मीयता से इन बच्चों से मिले और उन्हें दुलारते हुए नन्हे नमन शर्मा को अपनी गोद में उठा लिया। मुख्यमंत्री ने छोटी सी उम्र में गंभीर बीमारियों का मुकाबला कर रहे बहादुर बच्चों का खूब हौसला बढ़ाया और बच्चों को गिफ्ट में प्रेरक किताबें भेंट की।

प्रोजेक्ट दिव्य धुन और कला केंद्र के बच्चों ने बांधा समां

मुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर प्रोजेक्ट दिव्य धुन के तहत शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय मठपुरैना के बच्चों के बच्चों ने गीतों की मधुर प्रस्तुति दी। बच्चों ने बार बार दिन ये आए, अंगना म भारत माता के चिरैया सहित जसजीत, करमा और देवार गीत से समां बांध दिया। मुख्यमंत्री श्री साय बहुत प्रेम से बच्चों से मिले और उनकी कला को सराहा। उन्होंने बच्चों को ट्रैक सूट, लोवर टीशर्ट और प्रोत्साहन राशि भेंट की।

कला केंद्र रायपुर के बच्चे भी अपने चहेते मुख्यमंत्री को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे। कक्षा आठवीं के विद्यार्थी नन्हे आदित्य शर्मा ने अपने द्वारा बनाया मुख्यमंत्री का स्केच उन्हें भेंट किया। वायलिन वादक बच्चे आरीव झा और अमायरा अग्रवाल, तबला वादक योगेश सिंह सहित सभी बच्चों को मुख्यमंत्री ने खूब दुलारा और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

जन्मदिन की बधाई देने सामाजिक संगठनों और नागरिकों का लगा तांता

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को उनके जन्मदिवस पर बधाई देने बड़ी संख्या में सामाजिक संगठन और नागरिकगण पहुंचे। महिला अधिवक्ताओं ने पगड़ी पहनाकर मुख्यमंत्री का सम्मान किया। सिख समाज ने मुख्यमंत्री को पवित्र कृपाण भेंटकर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। शदाणी दरबार रायपुर द्वारा मुख्यमंत्री को पवित्र सरोपा भेंट किया गया।

छत्तीसगढ़ रामनामी राम राम भजन संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को रामनामी मुकुट और शॉल भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्विद्यालय की बहनों तथा रायपुर प्रेस क्लब, राज्य प्रशासनिक सेवा संघ और छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्यों ने भी जन्मदिन की बधाई की। हमर चिन्हारी साहित्य समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को उनका एक पोट्रेट भेंट किया।

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