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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
नई दिल्ली/
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।
क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।
पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।
व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
नई दिल्ली/
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (आशुतोष महाराज) द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों ने धार्मिक जगत के साथ-साथ राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। मामला सीधे नाबालिगों के कथित यौन शोषण जैसे अत्यंत संवेदनशील आरोपों से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया सक्रिय हो चुकी है।
क्या हैं आरोप और कोर्ट का रुख
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविरों तथा वाराणसी स्थित विद्यामठ में नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं होती रही हैं। याचिका के साथ प्रस्तुत कथित साक्ष्यों और दो नाबालिगों के बयानों के आधार पर अदालत ने 21 फरवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
कानूनी स्पष्टता: यह आदेश जांच शुरू करने से संबंधित है; दोष-निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अन्य आरोप: पद, संपत्ति और फंडिंग
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर ‘फर्जी शंकराचार्य’, अवैध संपत्ति और विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। इन दावों पर भी अलग-अलग स्तर पर जांच की मांग की गई है।
पलटवार: आरोपकर्ता की साख पर सवाल
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने आरोपों को निराधार बताते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार आशुतोष महाराज उत्तर प्रदेश के शामली (कांधला थाना) में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज बताए जाते हैं। समर्थकों का दावा है कि उन पर करीब 21 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें जबरन उगाही, धोखाधड़ी और गंभीर धाराएं शामिल बताई जाती हैं।
गैंगरेप के पुराने आरोप का उल्लेख भी किया जा रहा है, जिस पर आशुतोष महाराज ने पहले ही सफाई देते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और मेडिकल जांच का हवाला दिया था।
महत्वपूर्ण: ये सभी दावे/आरोप हैं; अंतिम सत्य का निर्धारण केवल अदालतें ही करेंगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं आशुतोष महाराज
सतनामी समाज विवाद (नवंबर 2025): बिलासपुर में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी, जिसने सामाजिक तनाव को जन्म दिया।
राजनीतिक संबंध: वे श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। उन पर राम मंदिर विरोधी दलों से नजदीकी जैसे आरोप भी लगते रहे हैं, जिनसे उनका सार्वजनिक प्रोफाइल विवादास्पद बना रहा है।
धार्मिक पृष्ठभूमि: आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं—इस कारण यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक प्रतिष्ठानों की साख से भी जुड़ गया है।
व्यापक असर: आस्था बनाम जवाबदेही
यह प्रकरण भारत में धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता, नैतिक जवाबदेही और कानून के समान अनुप्रयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक निष्पक्षता और निर्दोषता की धारणा भी उतनी ही आवश्यक है।
अब निगाहें पुलिस जांच, साक्ष्यों की पड़ताल और अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। सच चाहे जो हो, यह मामला तय करेगा कि आस्था के बड़े मंचों पर बैठे लोगों के लिए कानून की कसौटी कितनी कठोर और समान रूप से लागू होती है।
यह विवाद आरोपों और प्रत्यारोपों से आगे बढ़कर सत्य की न्यायिक खोज का विषय है। अंतिम फैसला अदालत का होगा—और वही तय करेगा कि यह प्रकरण आस्था पर कलंक है या आरोपों का राजनीतिक-व्यक्तिगत तानाबाना। तब तक, जिम्मेदार पत्रकारिता का धर्म है कि तथ्यों को दावे के रूप में, संतुलन और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।
अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गिरौदपुरी में संत समागम एवं गुरुदर्शन मेले में हुए शामिल
गुरूदर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि का लिया आशीर्वाद
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्मभूमि एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित संत समागम एवं गुरुदर्शन मेला में शामिल हुए। उन्होंने पूज्य गुरुगद्दी का दर्शन एवं पूजा - अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिये कामना की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बाबा गुरू घासीदास के मनखे- मनखे एक समान का सन्देश, मानव को मानव से जोड़ने वाला और सद्भाव व समरसता बढ़ाने वाला है। बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर हमारी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के द्वारा गिरौदपुरी का सतत् विकास किया जा रहा है। विशाल जैतखाम निर्माण से लेकर अनेक सुविधाओं का विस्तार यहां किया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किये गए जनसुविधा विस्तार कार्य की सराहना की और कहा कि वेबसाईट और मोबाइल एप्प से भी मेले में उपलब्ध सुविधा की जानकारी श्रद्धालु ले सकते हैं। उन्होंने इस दौरान वहां चस्पा किये गए क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन कर जानकारी ली।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर मुख्य मंदिर का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया। मुख्यमंत्री के हाथों स्थानीय श्रद्धालु एवं स्व सहायता समूह की महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर उत्साहित हुए। गौरतलब है कि गिरौदपुरी में तीन दिवसीय संत समागम एवं गुरू दर्शन मेला 22 फ़रवरी से प्रारंभ होकर 24 फरवरी 2026 तक चलेगा। प्रदेश सहित देश एवं विदेश से भी सतनाम पंथ के अनुयायी यहां मेले में आए हुए हैं।
इस अवसर पर धर्मगुरू गुरु बालदास साहेब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, राजिम विधायक रोहित साहु, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक सुश्री भावना गुप्ता,डीएफओ गणवीर धम्मशील, पूर्व सांसद गुहा राम अजगले, पूर्व विधायक डॉ सनम जांगड़े सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि वरिष्ठ अधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
नई दिल्ली।
फरवरी 2026 में दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समिट में एआई को लेकर भारत का स्पष्ट, नैतिक और मानव-केंद्रित विज़न दुनिया के सामने रखा। 22 फरवरी को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने समिट की उपलब्धियों और इसके वैश्विक प्रभाव का उल्लेख किया।
‘MANAV’ विज़न: एआई गवर्नेंस का भारतीय मॉडल
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जो तकनीक को मानवता से जोड़ने का भारतीय दृष्टिकोण है—
M – Moral (नैतिक मूल्य)
A – Accountable (जवाबदेही)
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)
A – Accessible (सभी के लिए सुलभ)
V – Valid (वैध और सुरक्षित)
पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एल्गोरिद्म और डेटा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मानव गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय की वाहक बने।
एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘ग्लोबल कॉमन गुड’ की अवधारणा
प्रधानमंत्री ने एआई को ‘Global Common Good’ के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लाभ कुछ चुनिंदा विकसित देशों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित पूरी दुनिया तक पहुंचे। भारत का अनुभव बताता है कि कम लागत, बड़े पैमाने और जनहित के साथ तकनीक कैसे परिवर्तन ला सकती है।
दैनिक जीवन में एआई: भारत के व्यावहारिक उदाहरण
पीएम मोदी ने भारत में एआई के वास्तविक उपयोगों को रेखांकित किया—अमूल के एआई असिस्टेंट द्वारा पशुओं के इलाज और डेयरी संचालन में 24x7 सहायता। किसानों को चौबीसों घंटे मार्गदर्शन देने वाले एआई समाधान। प्राचीन ग्रंथों, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एआई की भूमिका, जिससे इतिहास और ज्ञान अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।
समावेशी तकनीक की मिसाल
समिट के दौरान प्रधानमंत्री के भाषण का एआई-पावर्ड रियल-टाइम साइन लैंग्वेज अनुवाद किया गया। यह कदम दिव्यांगजनों के प्रति भारत की तकनीक-आधारित समावेशी सोच का सशक्त उदाहरण बना और वैश्विक मंच पर सराहा गया।
नैतिक और सुरक्षित एआई के लिए तीन वैश्विक सुझाव
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए तीन अहम सुझाव दिए—
विश्वसनीय वैश्विक डेटा फ्रेमवर्क
पारदर्शी ‘ग्लास बॉक्स’ सुरक्षा नियम
एआई में मानवीय मूल्यों का अनिवार्य समावेश
नई दिल्ली डिक्लेरेशन: वैश्विक सहमति की ऐतिहासिक पहल
समिट के अंतिम दिन 21 फरवरी 2026 को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया। इसके प्रमुख बिंदु रहे—एआई का लोकतंत्रीकरण और समान वैश्विक पहुंच।मानव-केंद्रित एआई, जो मानवीय गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।एआई इम्पैक्ट एक्सपो: नवाचार का भव्य प्रदर्शन .
समिट के साथ आयोजित एआई इम्पैक्ट एक्सपो (70,000 वर्ग मीटर) में भारत की तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ .अमूल का एआई समाधान, जिसने वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण की पहल।जिओ द्वारा विकसित किफायती स्मार्ट ग्लासेस जैसे हार्डवेयर, जो भारतीय जरूरतों के अनुरूप हैं।
भारत का तकनीकी आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम है। इंडिया एआई मिशन के तहत एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा लैब और स्किल डेवलपमेंट के लिए 10,300 करोड़ रुपये का प्रावधान।
मंत्र: “डिज़ाइन इन इंडिया, डेवलप फॉर द वर्ल्ड”, जिससे भारत एआई के क्षेत्र में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नियम-निर्धारक (Rule-maker) बने।
राजनीतिक संदेश
मेरठ में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री ने समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल भारत की वैश्विक सफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 केवल एक तकनीकी सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और नैतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरा। MANAV विज़न और नई दिल्ली डिक्लेरेशन के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की एआई मानवता के साथ, मानवता के लिए और मानवता के नेतृत्व में विकसित होगी—यही भारत का संदेश है, और यही देश का बढ़ता हुआ डिजिटल गौरव।
मुख्यमंत्री ने जनता का आभार जताया, प्रदेश के विकास में निरंतर समर्पण का संकल्प दोहराया
प्रोजेक्ट धड़कन, जिंदगी मुस्कुराएगी, दिव्य धुन बैंड और कलाकेंद्र के बच्चों संग मुख्यमंत्री ने बांटी खुशियां
रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जन्मदिन पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास देर रात तक उल्लास और स्नेह के वातावरण से भरा रहा। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों,समाजसेवियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री को जन्मदिवस के अवसर पर फलों से तौला गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी आगंतुकों से आत्मीयता से मुलाकात की और स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आप सभी के प्रेम और सहयोग से मैं अभिभूत हूँ। छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। आपका निरंतर समर्थन और आशीर्वाद इसी तरह बना रहे, यही मेरी कामना है।
प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री निवास में मंत्रीगण,विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को बधाई दी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह,खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, वन मंत्री श्री केदार कश्यप,महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं।
इसके साथ ही विधायकगण श्री धरमलाल कौशिक, श्री अजय चंद्राकर,श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, श्री दीपेश साहू और श्री ललित चन्द्राकर सहित विभिन्न आयोग एवं मंडल के अध्यक्षों, सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर जन्मदिन की बधाई दी।
प्रदेशभर से उमड़ा शुभकामनाओं का सैलाब
मुख्यमंत्री श्री साय को प्रदेश के उद्योगपतियों,व्यापारी संगठनों, खेल जगत के प्रतिनिधियों,समाजिक संगठन, दिव्यांग संगठन,अल्पसंख्यक समाज, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और मीडिया जगत के वरिष्ठ जनों ने भी शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और विकसित प्रदेश बनाने के लिए सरकार प्रत्येक वर्ग के हित में कार्य कर रही है, और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट धड़कन और जिंदगी मुस्कुराएगी के बच्चों संग बांटी खुशियां
जिला प्रशासन रायपुर एवं स्वास्थ्य विभाग की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत हृदय रोग की सर्जरी के बाद बच्चे पारुल, नमन शर्मा और हिमांशु ध्रुव और प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी के तहत नाक की सर्जरी के बाद नन्ही प्रेमिन साहू ने भी अपने प्रिय मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री बड़ी ही आत्मीयता से इन बच्चों से मिले और उन्हें दुलारते हुए नन्हे नमन शर्मा को अपनी गोद में उठा लिया। मुख्यमंत्री ने छोटी सी उम्र में गंभीर बीमारियों का मुकाबला कर रहे बहादुर बच्चों का खूब हौसला बढ़ाया और बच्चों को गिफ्ट में प्रेरक किताबें भेंट की।
प्रोजेक्ट दिव्य धुन और कला केंद्र के बच्चों ने बांधा समां
मुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर प्रोजेक्ट दिव्य धुन के तहत शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय मठपुरैना के बच्चों के बच्चों ने गीतों की मधुर प्रस्तुति दी। बच्चों ने बार बार दिन ये आए, अंगना म भारत माता के चिरैया सहित जसजीत, करमा और देवार गीत से समां बांध दिया। मुख्यमंत्री श्री साय बहुत प्रेम से बच्चों से मिले और उनकी कला को सराहा। उन्होंने बच्चों को ट्रैक सूट, लोवर टीशर्ट और प्रोत्साहन राशि भेंट की।
कला केंद्र रायपुर के बच्चे भी अपने चहेते मुख्यमंत्री को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे। कक्षा आठवीं के विद्यार्थी नन्हे आदित्य शर्मा ने अपने द्वारा बनाया मुख्यमंत्री का स्केच उन्हें भेंट किया। वायलिन वादक बच्चे आरीव झा और अमायरा अग्रवाल, तबला वादक योगेश सिंह सहित सभी बच्चों को मुख्यमंत्री ने खूब दुलारा और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
जन्मदिन की बधाई देने सामाजिक संगठनों और नागरिकों का लगा तांता
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को उनके जन्मदिवस पर बधाई देने बड़ी संख्या में सामाजिक संगठन और नागरिकगण पहुंचे। महिला अधिवक्ताओं ने पगड़ी पहनाकर मुख्यमंत्री का सम्मान किया। सिख समाज ने मुख्यमंत्री को पवित्र कृपाण भेंटकर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। शदाणी दरबार रायपुर द्वारा मुख्यमंत्री को पवित्र सरोपा भेंट किया गया।
छत्तीसगढ़ रामनामी राम राम भजन संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को रामनामी मुकुट और शॉल भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्विद्यालय की बहनों तथा रायपुर प्रेस क्लब, राज्य प्रशासनिक सेवा संघ और छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्यों ने भी जन्मदिन की बधाई की। हमर चिन्हारी साहित्य समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को उनका एक पोट्रेट भेंट किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का जन्मदिवस उनके गृहग्राम बगिया में धूमधाम, उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया
राम सदन में सत्यनारायण व्रत कथा श्रवण कार्यक्रम का किया गया आयोजन
बधाई और शुभकामनाएं देने वालों का लगा रहा तांता, मुख्यमंत्री ने सभी का किया आभार व्यक्त
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का 62वाँ जन्मदिवस उनके गृहग्राम बगिया में अत्यंत उत्साह, आत्मीयता और पारिवारिक स्नेह के वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने गृहग्राम बगिया स्थित अपने घर पहुंचते ही सबसे पहले अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा।जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी के स्नेह, शुभकामनाओं और आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनस्नेह ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने अपने जन्मदिवस को विशेष और यादगार बनाने के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस विशेष अवसर पर बगिया स्थित श्री राम सदन में सत्यनारायण व्रत कथा श्रवण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उनकी माताजी श्रीमती जसमनी देवी, धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरे श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ व्रत कथा का श्रवण किया तथा ईश्वर से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के आगमन से पूर्व ही उनके गृहग्राम बगिया स्थित गृहनिवास में उनसे मिलने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं आम नागरिकों में मुख्यमंत्री से भेंट करने और उन्हें शुभकामनाएं देने को लेकर विशेष उत्साह और उत्सुकता देखने को मिली।
क्रिकेट में जिले का नाम रोशन कर चुकी छात्राओं को मुख्यमंत्री ने प्रदान की क्रिकेट किट
क्रिकेट की दुनिया में जिले का नाम रोशन करने वाली शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास, इचकेला की प्रतिभाशाली छात्राओं को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रोत्साहित करते हुए 15 क्रिकेट किट प्रदान किया। छात्रावास की इन छात्राओं ने अपने उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर भी जिले को गौरवान्वित किया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप इसी लगन, अनुशासन और मेहनत के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहें तथा अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से राज्य और देश का नाम रोशन करें।
पारंपरिक परिधान में आए पहाड़ी कोरवा समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को दी जन्मदिवस की बधाई
बगीचा से आए विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय पहाड़ी कोरवा समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर पहाड़ी कोरवा समाज के सदस्य अपने पारम्परिक वेशभूषा एवं तीर-धनुष के साथ उपस्थित हुए, जिससे उनकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने उनसे आत्मीय संवाद करते हुए उनके क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली। इस पर पहाड़ी कोरवा समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान में उनके क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य संचालित हो रहे हैं तथा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से उनके गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और उनके क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय एवं श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत सदस्य श्री कृष्ण कुमार राय सहित जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के सदस्यगण, पंचायत प्रतिनिधि, नगरीय निकायों के प्रतिनिधिगण, जनप्रतिनिधि, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह तथा अन्य अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर खिल उठे बच्चों के चेहरे: जन्मदिन बना यादगार
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने 62वें जन्मदिवस को जशपुर के बगिया स्थित बालक आश्रम के बच्चों के बीच जिस आत्मीयता और स्नेह के साथ मनाया, उसने इस दिन को बच्चों के जीवन की एक अविस्मरणीय स्मृति बना दिया। जैसे ही मुख्यमंत्री आश्रम परिसर पहुँचे, बच्चों के चेहरों पर खुशी की चमक दौड़ गई। वे दौड़कर उनके पास आए और कुछ ही क्षणों में पूरा वातावरण एक पारिवारिक मिलन जैसा हो गया। उस पल मुख्यमंत्री किसी पद पर आसीन व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के अपने स्नेही अभिभावक की तरह उनके बीच दिखाई दे रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों के साथ केक काटा और उनके साथ बैठकर बातें कीं। उन्होंने बच्चों के नाम पूछे, पढ़ाई के बारे में जाना, उनके सपनों को सुना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जब मुख्यमंत्री बच्चों से बात कर रहे थे, तब उनके चेहरे पर झलकता स्नेह और अपनत्व बच्चों के मन में गहरा विश्वास जगा रहा था। बच्चे भी पूरी सहजता से उनसे बातें करते हुए खुशी से चहकते रहे।
आश्रम परिसर में उस समय जो दृश्य था, वह एक परिवार के बीच मनाए जा रहे उत्सव जैसा महसूस हो रहा था। मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों को अपने हाथों से केक और चॉकलेट खिलाया। उन्होंने बच्चों के सिर पर हाथ फेरते हुए आशीर्वाद दिया और कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें, बड़े सपने देखें और जीवन में आगे बढ़कर अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि आप सब बच्चों की मुस्कान मेरे जन्मदिन का सबसे बड़ा उपहार है। उनके इन स्नेहपूर्ण शब्दों ने बच्चों के मन को छू लिया। बच्चों की आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि यह पल उनके लिए कितना खास बन गया है।
मुख्यमंत्री के रूप में स्नेही अभिभावक को अपने बीच पाकर बच्चों ने जिस खुशी और अपनत्व का अनुभव किया, वह लंबे समय तक उनकी स्मृतियों में रहेगा।
उल्लेखनीय है कि बालक आश्रम बगिया में कक्षा पहली से पाँचवीं तक के छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे आदिवासी समुदाय से हैं। मुख्यमंत्री का उनके बीच पहुँचकर जन्मदिन मनाना बच्चों के लिए गर्व और प्रेरणा का विशेष क्षण बन गया।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण तथा आश्रम के शिक्षक एवं स्टाफ उपस्थित थे।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने 62वें जन्मदिवस के अवसर पर जशपुर जिले के दोकड़ा स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय तथा परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर परिसर में परिक्रमा कर भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की मंगलकामना की। उन्होंने प्रदेश में शांति, खुशहाली और निरंतर प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना करते हुए कहा कि जनकल्याण ही शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रदेश के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक श्रीमती गोमती साय, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने 62वें जन्मदिन के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की तथा रक्तदाताओं को सम्मानित कर उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री के 62वें जन्मदिन के अवसर पर अल्फा ग्लोब फाउंडेशन, रायपुर तथा शिवनाथ ब्लड सेंटर द्वारा 62 लोगों के रक्तदान की विशेष व्यवस्था की गई थी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान महादान है और यह मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं, प्रसव एवं गंभीर बीमारियों के दौरान जब मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है, ऐसे में रक्तदान मरीजों के जीवन में नई आशा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि शिविर में रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए हैं, जिससे आवश्यकता पड़ने पर वे या उनके परिजन निःशुल्क रक्त प्राप्त कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि संस्था द्वारा एक वर्ष में लगभग 11 हजार यूनिट रक्त संग्रह का संकल्प लिया गया है तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न ब्लड बैंकों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस अवसर पर सुरक्षित यातायात जागरूकता अभियान का भी आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से वर्ष में कम से कम एक बार रक्तदान करने तथा सड़क यातायात नियमों का हर समय पालन करते हुए जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने सभी रक्तदाताओं, आयोजकों, चिकित्सक दल एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए शिविर की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सीजीएमएससी के चेयरमैन श्री दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा सहित, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस सहित वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधिगण तथा अल्फा ग्लोब फाउंडेशन, रायपुर की संचालक डॉ. पूनम अग्रवाल, संस्थान के अन्य प्रतिनिधि और रक्तदाता उपस्थित थे।
राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा जिला राजनांदगांव की नई जिला कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। प्रदेश नेतृत्व की अनुशंसा पर जिला अध्यक्ष विजय राय ने शनिवार को अपनी नई टीम की घोषणा की।यह नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव , संगठन मंत्री पवन कुमार साय ,अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सनम जांगड़े एवं जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की अनुशंसा से की गई हैं।
घोषित कार्यकारिणी में दीपेश शेण्डे एवं योगेश बंजारे को भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा का जिला महामंत्री नियुक्त किया गया है। दोनों पदाधिकारियों को संगठनात्मक अनुभव और सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यकर्ताओं में इनकी नियुक्ति को लेकर उत्साह का माहौल है।
इसी प्रकार ललित रामटेके को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष पद पर मयंक डोंगरे, देश फिरंता कौशिक, श्रीमती अनिता इंदुकर, संकेत रामटेके, योगराज जगने, रतन कोसरे, कमलेश बंधे एवं श्रीमती पुष्पा बंजारे को नियुक्त किया गया है। अनुसूचित जाति मोर्चा की इस जिला कार्यकारिणी में पांच मंत्री सहित कुल 26 पदाधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 9 कार्यकारिणी सदस्य, 6 विशेष आमंत्रित सदस्य तथा 24 स्थायी आमंत्रित सदस्यों को भी जिम्मेदारी दी गई है। संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
(मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के जन्मदिवस विशेष)
लेखक : शरद पंसारी
संपादक – शौर्यपथ दैनिक समाचार
21 फरवरी—छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री माननीय विष्णु देव साय का जन्मदिन—सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्तित्व का जन्मदिवस नहीं, बल्कि उस नेतृत्व का उत्सव है जिसने बीते ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से परिभाषित किया है।
आज से लगभग ढाई वर्ष पूर्व जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की कमान संभाली, तब उनके सामने अनेक चुनौतियाँ थीं—किसानों की उम्मीदें, महिलाओं का सशक्तिकरण, आवासहीन गरीबों की पीड़ा और सबसे बड़ी चुनौती, वर्षों से नक्सलवाद की छाया में जी रहा बस्तर।
मुख्यमंत्री साय की सरकार ने सत्ता संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया कि यह सरकार केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की सरकार होगी।
किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर अन्नदाता के सम्मान को पुनर्स्थापित किया गया।
महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता देकर महिला सशक्तिकरण को जमीनी मजबूती दी गई।
प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को पक्की छत का सपना साकार हुआ।
ये सभी वादे केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि धरातल पर उतरते हुए सरकार की नीयत और नेतृत्व की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
परंतु इन उपलब्धियों के बीच एक ऐसा ऐतिहासिक कार्य है, जो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को अमर पहचान दिलाता है—
? छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में ठोस और निर्णायक पहल।
वर्षों तक छत्तीसगढ़ के नागरिकों को अन्य राज्यों में एक ही सवाल का सामना करना पड़ता था—
“आप छत्तीसगढ़ में कैसे रह लेते हैं? वह तो नक्सली क्षेत्र है।”
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने इस मानसिकता को जड़ से बदलने का काम किया। सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाना, विकास को सुरक्षा के साथ जोड़ना और संवाद व आत्मसमर्पण नीति को प्रभावी बनाना—इन सभी कदमों ने नक्सलवाद के मजबूत किले को कमजोर किया है।
जो बस्तर कभी “नक्सलगढ़” कहा जाता था, आज वही बस्तर विकास की नई कहानी लिख रहा है।
दूरदराज के गांवों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की योजनाएं पहुंच रही हैं।
बड़ी संख्या में नक्सलियों का आत्मसमर्पण, समाज की मुख्यधारा में लौटने की ऐतिहासिक प्रक्रिया का प्रमाण है।
सड़क, संचार, मोबाइल नेटवर्क और प्रशासनिक पहुंच ने दशकों पुरानी दूरी को समाप्त किया है।
यह सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उस सोच से, जिसमें सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों का संतुलन है।
आज बस्तर केवल शाही दशहरे तक सीमित नहीं रहा।
प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, जलप्रपात, वन संपदा और शांत वातावरण—बस्तर अब देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है।
यह बदलाव बताता है कि बस्तर अब बंदूक नहीं, भविष्य की संभावनाओं से पहचाना जाएगा।
निस्संदेह, भविष्य में जब छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के अंत की चर्चा होगी, तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा।
उन्होंने यह सिद्ध किया कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और विकासोन्मुख दृष्टि से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी संभव हो सकते हैं।
आज, मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर, बस्तर की धरती—जिसने सबसे अधिक दर्द सहा—उन्हें सबसे अधिक दुआएं दे रही है।
यह दुआ कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे,
यह दुआ कि विकास की यह यात्रा कभी न रुके,
और यह दुआ कि छत्तीसगढ़ हमेशा शांति, समृद्धि और सम्मान के मार्ग पर आगे बढ़ता रहे।
21 फरवरी केवल जन्मदिन नहीं,
यह उस नेतृत्व का उत्सव है जिसने छत्तीसगढ़ को नई पहचान दी।
बालोद / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार एवं भू-राजस्व संहिता अधिनियम 1959 में संशोधन उपरांत अविवादित नामांतरण एवं बंटवारों का निराकरण का अधिकार ग्राम पंचायतों को दिया गया है। जिसके तहत बालोद जिले के सभी ग्राम पंचायत सचिवों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि विकासखंड बालोद में 18 फरवरी एवं गुण्डरदेही विकासखण्ड में 19 फरवरी को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में भुईंया पोर्टल, सीजी रेवेन्यू पोर्टल के संचालन एवं भू- राजस्व संहिता अधिनियम 1959 के तहत कंडिका 5 में उल्लेखित संहिता की धारा 128 (2) एवं 130 तथा अविवादित मामलों के संबंध में धारा 110, 178, 178 (क) एवं 178 (ख) के अंतर्गत तहसीलदार की शक्तियों छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 के अधीन गठित पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार के भीतर होगी। उक्त कंडिका के माध्यम से अविवादित नामांतरण एवं बटवारा संबंधि अन्य राजस्व कार्यों हेतु ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार के भीतर अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त नागरिक पंजीयन पोर्टल के पंजीयन की प्रक्रिया एवं आवेदन प्रस्तुत करने की प्रकिया तथा आम नागरिकों को पोर्टल में हो रहे कार्यवाही की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही सचिवों के लॉगिन आईडी की उक्त प्रक्रिया के कियान्वयन संबंधी विस्तृत जानकारी पंचायत सचिवों को प्रशिक्षण के माध्यम के प्रदाय किया गया। राजस्व के संबंध में राजस्व विभाग से तहसीलदार गुण्डरदेही श्री कोमल सिंह धु्रव एवं तहसीलदार बालोद आशुतोष शर्मा ने राजस्व निरीक्षक तथा पटवारी द्वारा ऑनलाईन पोर्टल के संबंध में सचिवों को विशेष रूप से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण में संबधित जनपद पंचायत बालोद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री झुमुक सिंह राजपूत, गुण्डरदेही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती निखत सुल्ताना, श्री लोकेश सिन्हा, जिला समन्वयक एवं श्री विमल सोनकर, सहायक जिला समन्वयक वरिष्ठ करारोपन अधिकरी चम्पेश्वर यदु, सुरेन्द्र कुमार चन्द्राकर अधिकारीगण उपस्थित थे। प्रशिक्षण में सभी सचिवों को जल्द से जल्द पंचायत में अविवादित नामांतरण एवं बंटवारे का कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
