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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने राज्य की बिजली कंपनियों द्वारा दायर याचिकाओं पर जन-सुनवाई का कार्यक्रम जारी किया है। आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ राज्य भार पोषण केंद्र द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के ट्रूअप, वर्ष 2026-27 से 2029-30 तक वार्षिक राजस्व आवश्यकता (्रक्रक्र), टैरिफ निर्धारण तथा पूंजीगत निवेश योजना के अनुमोदन से संबंधित याचिकाओं पर क्षेत्रीय स्तर पर ऑनलाइन जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी।
आयोग ने बताया कि याचिकाओं का सारांश पूर्व में समाचार पत्रों और आयोग की वेबसाइट www.cserc.gov. in पर प्रकाशित किया जा चुका है तथा इच्छुक उपभोक्ता और हितधारक निर्धारित तिथियों पर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकते हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 17 फरवरी 2026 को दुर्ग (प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक), बिलासपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और राजनांदगांव (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई होगी।
जबकि 18 फरवरी 2026 को अंबिकापुर (प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक), जगदलपुर (दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक) और रायगढ़ (दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक) में जन-सुनवाई आयोजित की जाएगी। आयोग ने उपभोक्ताओं, जन-प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से जन-सुनवाई में सक्रिय भागीदारी की अपील की है, ताकि टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
राजनांदगांव/शौर्यपथ / जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस चौकी चिखली एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध हथियारों के साथ 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 02 पिस्टल, 02 देशी कट्टा एवं 01 जिंदा कारतूस बरामद किया गया है।
12 फरवरी 2026 को शंकरपुर क्षेत्र के नागरिकों द्वारा सूचना दी गई कि कुछ युवक डब्बा मैदान कब्रिस्तान के पास पिस्टल एवं कट्टा लहराकर लोगों को डरा-धमका रहे हैं। सूचना मिलते ही चौकी चिखली प्रभारी द्वारा टीम गठित कर मौके पर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर चार युवक भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपने नाम शिवम सिन्हा उर्फ चार्ली (26 वर्ष, निवासी शंकरपुर), डिगम्बर साहू उर्फ छोटू (27 वर्ष, निवासी पेण्ड्री), सेवक कश्यप उर्फ डाला (22 वर्ष, निवासी शंकरपुर) एवं गुंजेश वर्मा उर्फ शिवा (26 वर्ष, निवासी शंकरपुर) बताए। गवाहों की उपस्थिति में तलाशी लेने पर शिवम के कब्जे से एक पिस्टल एवं जिंदा कारतूस तथा डिगम्बर के पास से एक देशी कट्टा बरामद हुआ।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि अवैध हथियार मध्यप्रदेश के धार-बड़वानी क्षेत्र से खरीदकर लाए गए थे, जिनका उपयोग क्षेत्र में रौब जमाने एवं अवैध बिक्री के लिए किया जाना था। आरोपियों की निशानदेही पर दुर्ग में दबिश देकर विक्की देशमुख उर्फ मोनू (25 वर्ष, निवासी चन्द्रखुरी, दुर्ग) के कब्जे से एक देशी कट्टा जब्त किया गया। वहीं सूचना के आधार पर मोहारा पुल के पास घेराबंदी कर उमेश साहू उर्फ बठालू (26 वर्ष, निवासी गोकुलपुर, धमतरी) एवं जतीनदास मानिकपुरी (27 वर्ष, निवासी धमतरी) को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से एक पिस्टल बरामद हुआ। प्रकरण में कुल सात आरोपियों द्वारा संगठित होकर अवैध रूप से पिस्टल एवं कट्टा रखने पाए जाने पर धारा 111 बीएनएस तथा 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत विधिवत कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध पूर्व में भी कई गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती वैशाली जैन (भापुसे) के पर्यवेक्षण में की गई। चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक कैलाश चन्द्र मरई सहित चिखली पुलिस व सायबर सेल टीम की भूमिका सराहनीय रही। जिले में अवैध हथियार रखने एवं असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।
रसूख के दम पर कब्जे का आरोप: पुलगांव नाले से पचरी घाट तक भूमि विवाद, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में पहचाने जाने वाले ताराचंद रमेश कुमार जैन एक बार फिर भूमि विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नाले से सटी भूमि, समाज की जमीन, मंदिर परिसर और अब एक गरीब किसान की निजी भूमि तक पर कब्जा करने की कोशिश की है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
किसान की जमीन पर फिर खड़ा हुआ विवाद
किसान डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के सीमांकन से पूर्व ही ताराचंद रमेश कुमार जैन द्वारा खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई।
बताया जा रहा है कि पूर्व में समाचार प्रकाशित होने के बाद जैन ने बाउंड्री तोड़कर मेड़ के अनुरूप दीवार उठाने का आश्वासन दिया था। किसान के अनुसार, कुछ दिनों तक काम रुका रहा, लेकिन जब वह खेत की ओर नहीं गया तो दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
डोमन सिन्हा का कहना है कि सीमांकन की मांग के बावजूद सुबह 6 बजे से देर रात तक मजदूर लगाकर विवादित हिस्से में दीवार निर्माण जारी है।
नाले की सरकारी भूमि और मंदिर परिसर पर भी आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलगांव नाले से सटी सरकारी भूमि पर भी पहले विवाद खड़ा हुआ था। जांच प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान कथित रूप से बाउंड्री निर्माण कर लिया गया।
इसी तरह समाज की जमीन पर बने मंदिर को "नए स्वरूप" देने के नाम पर बड़े भूभाग पर निर्माण का आरोप लगाया गया है।
पचरी घाट का मुद्दा फिर गरमाया
पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव द्वारा निर्मित पचरी घाट का हिस्सा भी कथित रूप से अतिक्रमण की जद में बताया जा रहा है। घाट के पास लगी शिलालेख आज भी मौजूद है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाट का एक बड़ा हिस्सा आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
मामले की शिकायत थाना स्तर पर की जा चुकी है। किसान सीमांकन की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार का लाभ उठाकर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष राजस्व सीमांकन और स्थलीय जांच नहीं हुई तो विवाद और गहरा सकता है।
जनहित का सवाल
भूमि विवाद केवल दो पक्षों का मामला नहीं रह जाता, जब उसमें सरकारी जमीन, सार्वजनिक घाट और समाज की संपत्ति शामिल हो। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, त्वरित सीमांकन और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय आवश्यक है, ताकि न तो किसी गरीब किसान के अधिकारों का हनन हो और न ही सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण हो।
"शौर्यपथ" की ओर से यह स्पष्ट है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह रसूखदार व्यापारी हो या साधारण किसान। यदि आरोपों में सच्चाई है तो संबंधित विभागों—राजस्व, नगर निगम और जिला प्रशासन—को तत्काल संयुक्त जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या सीमांकन कराकर विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?
या फिर जांच और कागजी प्रक्रिया के बीच निर्माण की दीवारें और ऊंची होती जाएंगी?
आम जनता उम्मीद कर रही है कि सुशासन का दावा जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे और सार्वजनिक व निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
?? कॉलम बॉक्स: मामले की प्रमुख बातें
?? किसान की जमीन पर विवाद – डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया कि खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी की गई।
?? पूर्व में दिया गया आश्वासन – समाचार प्रकाशन के बाद दीवार तोड़कर मेड़ पर निर्माण का वादा, लेकिन दोबारा निर्माण शुरू होने का आरोप।
?? सीमांकन की मांग लंबित – किसान द्वारा राजस्व सीमांकन की मांग, निर्माण कार्य जारी रहने से विवाद गहराया।
?? सरकारी नाले की भूमि पर सवाल – पुलगांव नाले से सटी जमीन पर भी पहले कब्जे के आरोप और जांच प्रक्रिया जारी।
?? समाज की जमीन व मंदिर परिसर – "नए स्वरूप" के नाम पर बड़े हिस्से में निर्माण का आरोप।
?? स्व. हेमचंद यादव का पचरी घाट – पूर्व मंत्री द्वारा निर्मित घाट के हिस्से पर कथित अतिक्रमण, शिलालेख आज भी मौजूद।
?? प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल – शिकायत के बावजूद त्वरित कार्रवाई न होने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष।
दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा 12 फरवरी 2026 को जिला पंचायत सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक अब प्रशासनिक निर्णय की संवेदनशीलता और व्यावहारिकता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। बैठक का उद्देश्य मनरेगा निर्माण कार्य, समर्थ पोर्टल, संपदा पोर्टल, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा था, किंतु इसके आयोजन की पद्धति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष को जन्म दिया है।
बैठक में धमधा जनपद से सचिव, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक सहित लगभग 160 से अधिक फील्ड स्तरीय कर्मचारियों को जिला मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। समीक्षा का एजेंडा महत्वपूर्ण अवश्य था, परंतु प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की समीक्षा जनपद स्तर पर आयोजित नहीं की जा सकती थी?
बैठक के उपरांत नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि औसतन प्रत्येक कर्मचारी को लगभग ?300 या उससे अधिक का पेट्रोल/डीजल व्यय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा। सामूहिक रूप से देखा जाए तो यह राशि ?50,000 से अधिक बैठती है। कर्मचारियों का मत है कि यदि जिला स्तरीय अधिकारी अपनी सीमित टीम के साथ जनपद स्तर पर बैठक आयोजित करते, तो ईंधन व्यय नगण्य रहता—अनुमानत: ?1,000 से भी कम में कार्य संपन्न हो सकता था।
विकेंद्रीकरण बनाम केंद्रीकृत समीक्षा
पंचायती राज अधिनियम एवं मनरेगा दिशा-निर्देशों में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर विशेष बल दिया गया है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब समीक्षा जनपद या वर्चुअल माध्यम से भी संभव थी, तब इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को जिला मुख्यालय बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
कर्मचारियों का कहना है कि वे पहले से वेतन संबंधी अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में व्यक्तिगत व्यय पर जिला स्तर पर बुलाया जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ के समान है। इसे कुछ कर्मचारियों ने "नीतिगत संवेदनशीलता की कमी" और "मैदानी अमले की परिस्थितियों की अनदेखी" बताया।
प्रशासनिक प्राथमिकताएं या प्रोटोकॉल का प्रदर्शन?
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जिला स्तर की बैठकें आवश्यक अवश्य होती हैं, किंतु संसाधनों की मितव्ययिता, समय की बचत और मैदानी अमले की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए आयोजन की पद्धति पर विचार अपेक्षित है। डिजिटल माध्यमों की उपलब्धता और स्थानीय समीक्षा तंत्र के रहते केंद्रीकृत बुलावे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कुछ प्रशासनिक निर्णय—जैसे अल्प पारदर्शिता वाले व्यय, टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर उठी चर्चाएं—समीक्षा के दायरे में रहे हैं। हालांकि इन विषयों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, किंतु कर्मचारियों के बीच असंतोष की पृष्ठभूमि में यह बैठक एक और उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
विकास समीक्षा या मनोबल पर प्रभाव?
विकास योजनाओं की समीक्षा प्रशासनिक दायित्व है, इसमें कोई दो राय नहीं। किंतु जब समीक्षा की प्रक्रिया ही कर्मचारियों के मनोबल और संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगे, तब प्रशासनिक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार अपेक्षित हो जाता है।
जिला पंचायत के इस निर्णय ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है—
क्या प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन पाना अब भी चुनौती बना हुआ है?
दुर्ग जिला पंचायत की यह बैठक विकास योजनाओं की प्रगति के लिए आयोजित की गई थी, किंतु अब यह स्वयं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर समीक्षा का विषय बन चुकी है।
दुर्ग। शौर्यपथ।
दुर्ग कांग्रेस की राजनीति आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहाँ सवाल सिर्फ नेतृत्व का नहीं, बल्कि विपक्ष की भूमिका, उसकी धार और उसकी ईमानदारी पर भी खड़े हो रहे हैं। लगभग पाँच दशक तक दुर्ग कांग्रेस पर एक ही परिवार का वर्चस्व रहा। वोरा परिवार की राजनीति के साये में न जाने कितने कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता उभरने से पहले ही हाशिये पर धकेल दिए गए। प्रदेश स्तर तक पहुंचने की उम्मीद लिए बैठे कार्यकर्ताओं के सपने इसी वर्चस्व में दबकर रह गए।
करीब 50 वर्षों बाद जब प्रदेश कांग्रेस ने दुर्ग कांग्रेस की कमान वोरा बंगले से बाहर निकालकर धीरज बाकलीवाल को सौंपी, तब यह निर्णय सिर्फ एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्जागरण के संकेत के रूप में देखा गया। उम्मीद थी कि दुर्ग कांग्रेस में नई ऊर्जा आएगी, जमीनी स्तर पर संघर्ष दिखेगा और भाजपा शासित नगर निगम के खिलाफ आक्रामक विपक्ष खड़ा होगा। लेकिन दुर्भाग्यवश, चेहरा बदलाज् व्यवस्था नहीं।
विपक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी, जो निभाई नहीं गई
वर्तमान समय में दुर्ग शहर और दुर्ग नगर निगम लगभग समान राजनीतिक और प्रशासनिक दायरे में आते हैं। ऐसे में नगर निगम की बदहाल कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज बुलंद करना कांग्रेस की प्राथमिक जिम्मेदारी थी।
शहर अतिक्रमण से जूझ रहा है,अवैध बाजार फल-फूल रहे हैं,जल संकट आमजन को परेशान कर रहा है,अंधेरे और गड्ढों से भरी सड़कें हादसों को न्योता दे रही हैं,गंदगी और दुर्गंध शहर की पहचान बनती जा रही है।
इन तमाम मुद्दों पर विपक्ष को सड़क से सदन तक संघर्ष करते दिखना चाहिए था। लेकिन दुर्ग कांग्रेस की चुप्पी, उसकी निष्क्रियता और नेतृत्व की कमजोरी ने आम जनता में यह धारणा बना दी है कि विपक्ष केवल नाम का रह गया है।
अध्यक्ष की कमजोरी और नेता प्रतिपक्ष की निष्क्रियता
शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल से यह अपेक्षा थी कि वे संगठन को एकजुट कर आक्रामक रणनीति अपनाएंगे। मगर उनकी कार्यप्रणाली शुरुआती दौर से ही सवालों के घेरे में है। संगठनात्मक कमजोरी, आंदोलन की कमी और मुद्दों पर स्पष्ट स्टैंड का अभाव उनकी सबसे बड़ी विफलता बनता जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले की भूमिका भी गंभीर सवाल खड़े करती है। वार्ड स्तर पर लोकप्रियता अलग विषय हो सकता है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के रूप में बीते एक वर्ष में उनकी भूमिका लगभग निष्क्रिय रही है। जिस तरह से अपने कक्ष और प्रोटोकॉल को लेकर आवाज बुलंद की गई, उससे यह संदेश गया कि पद की चिंता ज्यादा है, जनता की पीड़ा कम।
आज दुर्ग की राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि "विपक्ष भी सत्ता पक्ष की कठपुतली बन चुका है।"परदे के पीछे किसी तरह की 'सेटिंगÓ की आशंका इसलिए भी गहराती है क्योंकि शहर की बदहाली पर नेता प्रतिपक्ष का मौन रहना स्वाभाविक नहीं माना जा सकता।
क्या यह नेतृत्व परिवर्तन एक भूल साबित हो रहा है?
धीरज बाकलीवाल की संगठनात्मक कमजोरी और संजय कोहले की निष्क्रियता ने दुर्ग कांग्रेस को एक बार फिर अस्तित्व की लड़ाई में ला खड़ा किया है। जिन कार्यकर्ताओं ने नए नेतृत्व से उम्मीदें लगाई थीं, आज वही निराश और हताश नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
// क्या प्रदेश कांग्रेस ने दुर्ग की कमान सौंपते समय जमीनी हकीकत का सही आकलन किया था?
// क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पसंद एक बार फिर दुर्ग कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है?
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई क्यों कमजोर पड़ गई?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस हमेशा खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्षरत पार्टी बताती रही है। लेकिन जब प्रमुख शहरों में ही विपक्ष कमजोर, मौन और निष्क्रिय हो जाए, तो यह दावा खोखला नजर आने लगता है।
अगर विपक्ष ही मजबूत नहीं होगा, तो सत्ता से सवाल कौन पूछेगा?
अगर विपक्ष ही संघर्ष नहीं करेगा, तो जनता की आवाज कौन बनेगा?
दुर्ग कांग्रेस के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि अपनी ही निष्क्रियता है। नेतृत्व में बदलाव केवल नाम बदलने से नहीं होता, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, संघर्ष और सड़क पर उतरने की हिम्मत से होता है।
यदि समय रहते प्रदेश कांग्रेस ने दुर्ग की स्थिति पर गंभीर मंथन नहीं किया, तो यह तय है कि दुर्ग कांग्रेस का पतन और गहराएगा—और इसका खामियाजा सीधे-सीधे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
नई दिल्ली ।
भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की प्रतिष्ठित हस्ती और दूरदर्शन की जानी-मानी वरिष्ठ न्यूज़ एंकर सरला माहेश्वरी का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे पार्किंसन (Parkinson’s) जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रही थीं। उनका अंतिम संस्कार 12 फरवरी को शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर संपन्न हुआ।
उनके निधन पर प्रसार भारती और दूरदर्शन नेशनल ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके समकालीन और प्रसिद्ध न्यूज़ एंकर शम्मी नारंग सहित कई पूर्व सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय प्रसारण जगत की एक बड़ी क्षति बताया।
सरला माहेश्वरी 1980 और 90 के दशक में दूरदर्शन का एक प्रतिष्ठित चेहरा थीं। उन्होंने वर्ष 1976 में दूरदर्शन ज्वाइन किया और लगभग तीन दशकों तक (1976–2005) समाचार वाचन से जुड़ी रहीं। वे उन अग्रणी एंकर्स में शामिल थीं जिन्होंने देश में लाइव न्यूज़ बुलेटिन पढ़ने की परंपरा को मजबूत किया।
उनकी पहचान केवल एक समाचार वाचक के रूप में नहीं, बल्कि भाषा की शुद्धता, सटीक उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और शालीन व्यक्तित्व के कारण भी थी।
जन्म: 21 जुलाई 1954 (दिल्ली में जन्म; मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर से संबंध)
विवाह से पूर्व उनका नाम सरला जरीवाला/भदानी रहा।
वे दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी और गुजराती साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में पीएचडी थीं।
पत्रकारिता के साथ-साथ वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी की लेक्चरर भी रहीं। उल्लेखनीय है कि उसी दौरान अभिनेता शाहरुख खान वहां छात्र थे।
1984 में वे इंग्लैंड गईं, जहां उन्होंने BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) में समाचार वाचक के रूप में कार्य किया। 1988 में भारत लौटकर वे पुनः दूरदर्शन से जुड़ गईं और अपने संयमित वाचन से दर्शकों का विश्वास अर्जित किया।
सरला माहेश्वरी ने कई ऐतिहासिक और भावनात्मक घटनाओं की खबरें देश तक पहुंचाईं—
1982 के एशियाई खेलों के रंगीन प्रसारण का दौर
इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से जुड़ी खबरें
1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की दुखद सूचना
1997 में मदर टेरेसा के अंतिम संस्कार का प्रसारण
इन क्षणों में उनकी आवाज़ देश के करोड़ों घरों तक पहुंची और वे विश्वसनीयता का प्रतीक बन गईं।
वे अपने सीधे पल्ले की साड़ी और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। गुजराती शैली में पहनी गई उनकी साड़ियां उस दौर में महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थीं। दर्शक उनके समाचारों के साथ-साथ उनके सौम्य व्यक्तित्व और मर्यादित प्रस्तुति से भी जुड़ाव महसूस करते थे।
उनके पति डॉ. पवन माहेश्वरी, एक प्रख्यात गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
उस दौर में समाचार वाचन गरिमा, तटस्थता और भाषा की शुद्धता का प्रतीक था। उनके प्रमुख समकालीनों में शामिल रहे—
शम्मी नारंग – अपनी गहरी और प्रभावशाली आवाज़ के लिए प्रसिद्ध
सलमा सुल्तान – बालों में गुलाब लगाने की सिग्नेचर शैली
गीतांजलि अय्यर – लोकप्रिय अंग्रेज़ी समाचार वाचिका
रीनी साइमन खन्ना
नीति रवींद्रन
1980 और 90 का दशक भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का स्वर्ण काल माना जाता है। उस समय ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की होड़ नहीं, बल्कि संतुलित, संयमित और तथ्यपरक प्रस्तुति पर जोर था। सरला माहेश्वरी उसी परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि थीं।
उनका निधन केवल एक व्यक्तित्व का अवसान नहीं, बल्कि उस दौर की गरिमा, भाषा-संस्कृति और प्रसारण परंपरा की स्मृतियों को भी भावुक कर गया है।
भारतीय पत्रकारिता जगत उन्हें सदैव एक विश्वसनीय, शालीन और प्रेरणादायी आवाज़ के रूप में याद करेगा।
श्रद्धांजलि।
व्यक्तिगत दुर्घटना पर 1.25 करोड़ रूपए का बीमा कवर
हवाई दुर्घटना बीमा एक करोड़ रूपए
बिटिया की शादी और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए भी लाभ
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार के नियमित कर्मचारियों को आकर्षक एवं व्यापक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बैंक ऑफ महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ शासन के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत बैंक में वेतन खाता संचालित करने वाले राज्य सरकार के सभी नियमित कर्मचारियों को ‘गवर्नमेंट प्राइड सैलरी सेविंग स्कीम’ के अंतर्गत उन्नत निःशुल्क सुविधाएं एवं बीमा कवर प्रदान किए जाएंगे।
समझौते के अनुसार बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा खाताधारक कर्मचारियों को व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा एक करोड़ 25 लाख रूपए तक, हवाई दुर्घटना बीमा एक करोड़ रूपए तक, स्थायी पूर्ण विकलांगता कवर एक करोड़ 25 लाख रूपए तक तथा टर्म इंश्योरेंस 10 लाख रूपए प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही गोल्डन आवर के अंतर्गत 1 लाख रूपए तक कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध होगी। कर्मचारियों को बालिका विवाह लाभ 10 लाख रूपए तक एवं बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु 10 लाख रूपए तक का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त खाताधारकों को अन्य आकर्षक बैंकिंग लाभ उपलब्ध कराए जाएंगे तथा स्वास्थ्य बीमा पर टॉप-अप जैसी वैकल्पिक सुविधाएं रियायती दरों पर प्रदान की जाएंगी। यह समझौता ज्ञापन 10 फरवरी 2026 को श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा, विशेष सचिव, वित्त विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा श्री वी. वेंकटेश, अंचल प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, रायपुर अंचल की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह पहल राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक एवं लाभप्रद बैंकिंग सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली /
बजट सत्र के 12वें दिन 12 फरवरी 2026 को लोकसभा में विधायी कार्यवाही और राजनीतिक टकराव का तीखा संगम देखने को मिला। एक ओर सदन ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित किया, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लाए गए ‘सब्सटैंटिव मोशन’ के नोटिस ने सियासी तापमान बढ़ा दिया।
? इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (संशोधन) विधेयक पारित
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने सदन में स्पष्ट किया कि यह संशोधन पुराने श्रम कानूनों—जैसे ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926—के निरसन से उत्पन्न संभावित कानूनी अस्पष्टताओं को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है।
विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान ‘फ्लोर वेज’ (न्यूनतम वेतन की आधार सीमा) को वैधानिक समर्थन देना है। इसके तहत कोई भी राज्य केंद्र द्वारा निर्धारित आधार सीमा से कम न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकेगा। सरकार ने इसे श्रमिकों के हित में एक संरचनात्मक सुधार बताया, जबकि विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर और व्यापक चर्चा की आवश्यकता जताई।
? राहुल गांधी के खिलाफ ‘सब्सटैंटिव मोशन’
दिन का सबसे चर्चित घटनाक्रम भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और उन पर चुनाव लड़ने का आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए ‘सब्सटैंटिव मोशन’ का नोटिस देना रहा।
दुबे ने स्पष्ट किया कि यह विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र प्रस्ताव (Substantive Motion) है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। विवाद की पृष्ठभूमि राहुल गांधी के उस भाषण से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और केंद्रीय बजट को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि फिलहाल विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की कोई योजना नहीं है। अब यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर निर्भर करेगा कि वे इस नोटिस को स्वीकार करते हैं या नहीं। स्वीकार होने की स्थिति में सदन में इस पर बहस और मतदान संभव है।
राहुल गांधी ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसानों और देश के हितों के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे, चाहे उनके खिलाफ कोई भी प्रस्ताव लाया जाए।
? नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ₹3,500 करोड़ का निवेश
सदन में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जानकारी दी कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने वर्ष 2026-2028 के दौरान हवाई नेविगेशन बुनियादी ढांचे और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट (ATM) प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग ₹3,500 करोड़ का पूंजीगत परिव्यय निर्धारित किया है। सरकार ने इसे विमानन क्षेत्र की क्षमता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
? विपक्ष का प्रदर्शन और अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस
विपक्षी सांसदों ने कथित “जनविरोधी” व्यापार समझौतों और किसानों के मुद्दों को लेकर सदन के भीतर और मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया। इसी बीच लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने से कार्यवाही का माहौल और अधिक तनावपूर्ण रहा।
? अब 9 मार्च को फिर गूंजेगा सदन
सदन की कार्यवाही 13 फरवरी 2026 से अवकाश (recess) पर स्थगित कर दी गई है। लोकसभा की बैठक अब 9 मार्च 2026 को पुनः प्रारंभ होगी, जहां इन राजनीतिक और विधायी मुद्दों की गूंज दोबारा सुनाई देने की संभावना है।
बजट सत्र के इस दिन ने स्पष्ट कर दिया कि जहां एक ओर सरकार श्रम सुधार और अवसंरचना निवेश जैसे विधायी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है। आगामी सत्र में यह टकराव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
दुर्ग / शौर्यपथ / शहर में सामने आए कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण ने अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है। घटना को लेकर आमजन में आक्रोश है तो वहीं पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। छह आरोपियों के विरुद्ध दर्ज मामले में अब तक चार की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन दो आरोपी—भीम नारायण पाण्डेय और संजय पंडित—अब भी फरार हैं। लगातार हो रही देरी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।
NSUI ने सौंपा ज्ञापन, 5 दिन का अल्टीमेटम
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक दुर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि गिरफ्तारी में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।
SIT गठन न होने पर भी सवाल
घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद विशेष जांच दल (SIT) का गठन नहीं होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन ने आशंका जताई है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि का दबाव जांच को प्रभावित तो नहीं कर रहा। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सांसद विजय बघेल का नाम चर्चा में
शहर के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि फरार आरोपी भीम नारायण पाण्डेय को पूर्व में सांसद विजय बघेल का करीबी बताया जाता रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। स्वयं सांसद विजय बघेल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष
पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है और विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जनता की नजरें अगली कार्रवाई पर
यह मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का विषय बन चुका है। एक ओर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग तेज है, तो दूसरी ओर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
अब पूरे शहर की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जल्द गिरफ्तारी ही इस मामले में कानून के प्रति जनता का भरोसा कायम रख पाएगी।
केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की मंजूरी, जिला प्रस्तावों पर विस्तृत समीक्षा के बाद निर्णय
रायपुर / शौर्यपथ।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संपत्ति पंजीयन से संबंधित गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तहत बिलासपुर, कोरिया एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की संशोधित गाइडलाइन दरों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। ये नई दरें 13 फरवरी 2026 से प्रभावशील होंगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य में 20 नवम्बर 2025 से नवीन गाइडलाइन दरें लागू की गई थीं। इसके साथ ही राज्य शासन ने सभी जिला मूल्यांकन समितियों को आवश्यकता के अनुसार दरों के पुनरीक्षण हेतु प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को प्रेषित करने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में बिलासपुर, कोरिया एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों से संशोधित गाइडलाइन दरों के प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों पर विचार के लिए उप महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्राप्त प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण एवं समग्र समीक्षा की गई।
गहन विचार-विमर्श के उपरांत केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने तीनों जिलों के प्रस्तावों को अनुमोदित कर दिया। बोर्ड द्वारा स्वीकृत संशोधित दरें 13 फरवरी 2026 से संबंधित जिलों में लागू होंगी, जिससे संपत्ति पंजीयन, क्रय-विक्रय एवं राजस्व निर्धारण की प्रक्रिया अद्यतन दरों के आधार पर संचालित की जाएगी।
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिक एवं संबंधित हितधारक नवीन गाइडलाइन दरों की जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों तथा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही अन्य जिलों से प्राप्त होने वाले संशोधित प्रस्तावों का परीक्षण उपरांत गाइडलाइन दरें चरणबद्ध रूप से जारी की जाएंगी।
यह निर्णय पारदर्शिता, राजस्व संतुलन एवं बाजार दरों के अनुरूप मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़, कहा - छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम से अध्ययन भ्रमण पर आए पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसान हितैषी योजनाओं, उद्योग नीति तथा नक्सल पुनर्वास नीति को मिली सराहना
रायपुर / छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रदेश है और धन-धान्य से पुष्पित-पल्लवित इस धरा को हमारी सरकार सुंदर, समृद्ध, सुरक्षित और विकसित बनाने के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में सिक्किम राज्य से अध्ययन भ्रमण पर पहुंचे पत्रकारों के दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया और उनसे छत्तीसगढ़ को लेकर ढेर सारी बातें साझा की। उन्होंने सभी अतिथियों को राजकीय गमछा भेंट कर छत्तीसगढ़ में स्वागत और अभिवादन किया। मुख्यमंत्री की सहृदयता और आतिथ्य पाकर सभी पत्रकार अभिभूत हुए और उन्हें सिक्किम आने का निमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ 44 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है तथा यहां 31 प्रतिशत आदिवासी समुदाय निवासरत है। वनोपज संग्रहण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से जनजातीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। जशपुर जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाएं ‘जशप्योर’ ब्रांड के अंतर्गत उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सरकार द्वारा 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है तथा चरण पादुका योजना के तहत निःशुल्क चप्पल प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह की चिंता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2005 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। हाल ही छह हजार से अधिक जोड़े इस योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधे, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नवदंपतियों को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता एवं 15 हजार रुपये का सामग्री सहयोग प्रदान किया जाता है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के सफल नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते प्रदेश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की सहायता तथा तीन वर्षों तक प्रति माह 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अब तक 2,500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। श्री साय ने बताया कि जगदलपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा ‘बस्तर पंडुम’ कैफे का सफल संचालन इसका सशक्त उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के अंतर्गत 17 शासकीय योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया गया है, जिससे सड़क, बिजली, पानी, राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं। पर्यटन की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुम्बसर गुफाएं, अबूझमाड़ के वन और धुड़मारास जैसे स्थल प्रदेश की पहचान हैं। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु होम स्टे को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसके तहत ग्रामीणों को पांच कमरों तक निर्माण के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य एवं औद्योगिक विकास के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि नवा रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है, जहां निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने प्रदेश की आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसके तहत राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। साथ ही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना से प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
“छत्तीसगढ़ ने भारतीय होने का गर्व कराया” – सुश्री अर्चना प्रधान
सिक्किम की पत्रकार सुश्री अर्चना प्रधान ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभावी स्वरूप देखने को मिला। भिलाई स्टील प्लांट में रेल पटरियों सहित विभिन्न इस्पात उत्पादों का निर्माण प्रदेश के औद्योगिक सामर्थ्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इकाइयों को हमें करीब से देखने का मौका मिला और हम जान पाए है कि इस प्रदेश का देश के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान है।
सिक्किम के पत्रकारों को भाया छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री से भ्रमण उपरांत मिलने पहुंचे पत्रकारों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और लोगों का आत्मीय व्यवहार अत्यंत प्रभावित करने वाला है। उन्होंने भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए स्थानीय खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की सराहना की। सिक्किम से आए पत्रकारों ने अपने पांच दिवसीय भ्रमण के दौरान भिलाई स्टील प्लांट, गेवरा ओपन माइंस, नवा रायपुर तथा जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। पत्रकारों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भ्रमण की सुंदर स्मृतियों को अपने साथ लेकर जा रहे हैं, जो उन्हें आजीवन याद रहेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, किसानों के हित में की गई घोषणाओं, स्वच्छ वातावरण तथा पुनर्वास नीति की सराहना की।
मुख्यमंत्री को भेंट किया सिक्किम का स्मृति चिन्ह ‘थांका’
पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को सिक्किम की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘थांका’ पेंटिंग भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस उपहार के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे स्नेह और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बताया।
पत्रकारों ने बताया कि सिक्किम का थांका पेंटिंग एक पवित्र स्मृति चिन्ह है, जो सूती या रेशमी कपड़े पर बौद्ध देवताओं, मंडलों और बुद्ध के जीवन दृश्यों को दर्शाता है। यह हस्तनिर्मित कला सिक्किम की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे अक्सर घर की सजावट और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाया जाता है। इन्हें रोल करके आसानी से ले जाया जा सकता है, जो यात्रियों के लिए एक बेहतरीन सोवेनियर है। यह पारंपरिक कलाकृति सिक्किम के निवासियों के लिए धार्मिक विश्वास और आस्था का प्रतीक है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, पीआईबी गंगटोक के सहायक निदेशक श्री मानस प्रतिम शर्मा, पीआईबी रायपुर के सहायक निदेशक श्री सुदीप्तो कर, श्री पुरुषोत्तम झा और श्री सरद बसनेत,
पत्रकार श्री बेनु प्रकाश तिवारी, श्री विकास क्षेत्री, श्री होमनाथ दाबरी, श्री ईश्वर, सुश्री अर्चना प्रधान, सुश्री अनुशीला शर्मा, श्री प्रकाश अधिकारी, श्री ललित दहल, श्री विनोद तमंग, श्री मोहन कुमार कार्की, श्री नार बहादुर क्षेत्री उपस्थित थे।
By – नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। आड़ावाल से कुरंदी जाने वाले मुख्य मार्ग पर शासकीय विद्युत लाइट खंभों पर पेंट के माध्यम से निजी प्रचार लिखे जाने का मामला सामने आया है। सड़क के दोनों ओर लगे कई सरकारी पोलों पर वाइल्ड वादी का नाम स्थायी रूप से अंकित देखा गया, जिससे शासकीय संपत्ति के उपयोग को लेकर नियमों के पालन पर प्रश्न उठ रहे हैं।
यह प्रचार किसी अस्थायी बैनर या पोस्टर के रूप में नहीं, बल्कि सीधे पेंट के माध्यम से किया गया है। जानकारों के अनुसार शासकीय परिसंपत्तियों पर बिना सक्षम अनुमति किसी भी प्रकार का लेखन या विज्ञापन नियमों के अनुरूप नहीं माना जाता। पेंट से लिखे गए ऐसे प्रचार को हटाने में समय और संसाधन दोनों की आवश्यकता पड़ सकती है।
उक्त मार्ग यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विद्युत खंभों की मूल पहचान प्रभावित होने से संधारण, तकनीकी कार्यों अथवा आपात स्थिति में कठिनाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामला सार्वजनिक मार्ग से जुड़ा होने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस संबंध में सहायक अभियंता, जगदलपुर ग्रामीण, श्री खोबरागड़े ने बताया कि विद्युत खंभों पर किसी भी प्रकार के निजी प्रचार-प्रसार की अनुमति नहीं दी जाती, क्योंकि यह सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जा रही है तथा नियमानुसार नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित विभाग जांच कर आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि शासकीय संपत्ति का उपयोग निर्धारित उद्देश्य तक ही सीमित रहे और भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।
रॉयल एकेडेमी पाउवारा स्कूल के एनुअल फंक्शन में 3 महीने पुराना एक्सपायर्ड जंक फूड बेचा गया, अभिभावकों का फूटा गुस्सा, पुलिस मौके पर पहुंची
दुर्ग / शौर्यपथ/
दुर्ग जिला, जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कार्यक्षेत्र है और जहां पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू का मूल प्रभाव वाला पाउवारा गांव क्षेत्र आता है, वहीं एक निजी स्कूल में बच्चों की सेहत से जुड़ा बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पाउवारा स्थित रॉयल एकेडेमी पब्लिक स्कूल के वार्षिक समारोह (एनुअल फंक्शन) के दौरान स्कूल परिसर में लगाए गए जंक फूड स्टॉल पर करीब तीन महीने पहले एक्सपायर हो चुकी खाद्य सामग्री बच्चों को बेची जा रही थी।
जैसे ही कुछ सतर्क अभिभावकों ने बच्चों द्वारा खरीदे गए चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट और अन्य पैकेज्ड स्नैक्स के पैकेट चेक किए, तो उनकी एक्सपायरी डेट तीन महीने पुरानी पाई गई। इसके बाद पूरे समारोह स्थल पर हड़कंप मच गया। नाराज अभिभावकों ने स्टॉल को घेर लिया और स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की सुरक्षा के साथ घोर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।
दुकानदार के बहाने, गुस्सा और भड़का
मामला उजागर होने पर स्टॉल संचालक ने खुद को बचाने के लिए अजीब दलीलें दीं। उसने दावा किया कि "सामान खराब नहीं है, सिर्फ पैकेट पर डेट गलत छप गई है।" इस गैर-जिम्मेदार बयान ने अभिभावकों के गुस्से को और भड़का दिया। सवाल उठने लगे कि स्कूल प्रबंधन ने बिना किसी जांच-पड़ताल के ऐसे दुकानदार को स्टॉल लगाने की अनुमति कैसे दे दी?
स्थिति बिगड़ी, पुलिस को बुलाना पड़ा
शाम होते-होते माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस प्रशासन को मौके पर बुलाना पड़ा। पुलिस ने स्थिति को संभाला और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की। गनीमत यह रही कि समय रहते मामला पकड़ में आ गया, वरना एक्सपायर्ड जंक फूड से बच्चों को फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त या गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती थी।
स्कूल प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
घटना के बाद जब स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा गया तो केवल औपचारिक और गोलमोल बयान सामने आए—
"मामले की जांच की जा रही है" और "उचित कार्रवाई होगी।"
लेकिन न तो कोई स्पष्ट माफी सामने आई और न ही यह बताया गया कि स्टॉल की अनुमति किस आधार पर दी गई थी। इससे अभिभावकों का आक्रोश और गहरा गया।
राजनीतिक संदर्भ में मामला और संवेदनशील
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब दुर्ग जिला शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की जिम्मेदारी में है और यह क्षेत्र पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के प्रभाव वाले इलाके से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि
– क्या स्कूलों की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है?
– क्या निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक लापरवाही बरती जा रही है?
अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
– क्या रॉयल एकेडेमी पाउवारा स्कूल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होगी?
– क्या एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदार पर स्नस्स््रढ्ढ नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
– क्या इस घटना के बाद दुर्ग जिले के सभी स्कूलों में फूड स्टॉल, खाद्य गुणवत्ता और एक्सपायरी जांच को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी होंगे?
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है। यह मामला साफ तौर पर चेतावनी देता है कि उत्सव और कार्यक्रमों के नाम पर बच्चों की सेहत से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता, खासकर ऐसे जिले में जहां शिक्षा और प्रशासन से जुड़े शीर्ष नेता सक्रिय भूमिका में हैं।
'मोर गांव मोर पानीÓ महाअभियान के तहत मनरेगा में ऐतिहासिक पहल
बारिश से पहले 10 हजार से अधिक आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य
निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'मोर गांव मोर पानीÓ महाअभियान के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत आजीविका डबरी (फार्म पोंड) निर्माण का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत प्रदेशभर में 10,000 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह कार्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग के हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जा रहा है, जिससे एक ओर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालीन एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
अभियान के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि जल संसाधन और आवास आधारित आजीविका को एकीकृत रूप में मजबूत किया जा सके।
इस योजना के माध्यम से जहां मनरेगा के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है, वहीं वर्षा जल संचयन को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिल रहा है। आजीविका डबरी के माध्यम से अंतर्विभागीय अभिसरण के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य जल आधारित गतिविधियों की योजनाबद्ध रूप से रूपरेखा तैयार कर उनका क्रियान्वयन किया जाएगा।
प्रत्येक आजीविका डबरी का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप 20 मीटर म 20 मीटर म 3 मीटर आकार में किया जा रहा है। जल की गुणवत्ता और दीर्घकालीन टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए इनलेट-आउटलेट व्यवस्था तथा सिल्ट अरेस्टिंग चैंबर की अनिवार्य व्यवस्था की गई है।इस अभियान में पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डबरी निर्माण कार्य का शुभारंभ पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर विषय पर विस्तृत चर्चा कर हितग्राहियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही हितग्राहियों से आवश्यक अंशदान भी लिया जा रहा है, ताकि स्वामित्व और सहभागिता की भावना मजबूत हो।
आजीविका डबरी का निर्माण सैटेलाइट आधारित क्लार्ट ऐप के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से 'रिज-टू-वैली एप्रोचÓ पर किया जा रहा है। यह कार्य विभिन्न विभागों के अभिसरण के साथ कन्वर्जेन्स पैकेज के रूप में लागू किया जा रहा है। पंचायतों के साथ-साथ प्रदान, ट्राइफ, एफईएस सहित अन्य सिविल सोसायटी संगठनों का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
सभी निर्माण कार्यों को बारिश से पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति आजीविका डबरी अधिकतम लागत तीन लाख रुपये तय की गई है। जल संरक्षण के साथ-साथ निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से यह पहल ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, अभिनव और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
