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February 24, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

   दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के समग्र और योजनाबद्ध विकास को गति देने के उद्देश्य से सर्किट हाउस दुर्ग में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में नगर निगम के सभी पार्षदों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, आयुक्त सुमित अग्रवाल सहित एमआईसी सदस्य, पार्षदगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में शहर के 60 वार्डों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक वार्ड में संबंधित पार्षदों से समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएं और दो दिनों के भीतर विस्तृत प्लान प्रस्तुत किया जाए।

कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य शासन द्वारा अधोसंरचना मद में 22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इस राशि से सभी वार्डों में आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे। विशेष रूप से प्रत्येक वार्ड में नाली निर्माण के लिए 10–10 लाख रुपये तक के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

बैठक में शहर के प्रमुख तालाबों के सौंदर्यीकरण, उनके आसपास गार्डन विकसित करने तथा मुक्तिधामों के जीर्णोद्धार को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पाइपलाइन विस्तार और नई पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्यों पर भी सुझाव आमंत्रित किए गए।

मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि दुर्ग शहर में विकास कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण, खेल मैदान, सर्वसुविधायुक्त मांगलिक भवन और महाराजा चौक से पुलगांव तक फोरलेन सड़क जैसे कार्य आने वाले समय में शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।

महापौर श्रीमती अल्का बाघमार ने बताया कि पहले ही अधोसंरचना मद से 16 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और अब अतिरिक्त 6 करोड़ रुपये मिलने से कुल राशि 22 करोड़ से अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस राशि से शहर में मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट कहा कि दुर्ग के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी और सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।

बैठक में बड़ी संख्या में पार्षदगण, एमआईसी सदस्य और निगम के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने वार्डों से संबंधित आवश्यकताओं और सुझावों को सामने रखा।

राजनांदगांव /शौर्यपथ /राजनांदगांव के समीप स्थित भिलाई कंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री के 54 वर्षीय कर्मचारी, अंजोरा निवासी तुकाराम साहू की ड्यूटी पीरियड के दौरान सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई। वे फैक्ट्री के कार्य से धर्मकांटा गए हुए थे, उसी दौरान यह हादसा हुआ। तुकाराम साहू फैक्ट्री के पुराने एवं समर्पित कर्मचारी थे। उनके आकस्मिक निधन से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। इसी दौरान कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का राजनांदगांव दौरा निर्धारित था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने तत्काल प्रदेश अध्यक्ष को मोबाइल के माध्यम से पूरी जानकारी दी। प्रदेश अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश पर जिलाध्यक्ष विपिन यादव कांग्रेसजनों के साथ पीड़ित परिवार के समर्थन में डटकर खड़े हुए और न्याय दिलाने का संकल्प लिया। मृत्यु के बाद परिजन एवं ग्रामीणजन फैक्ट्री प्रबंधन से उचित मुआवज़े की मांग कर रहे थे, किन्तु बात नहीं बनने पर वे मृतक का शव लेकर सोमनी थाने में बैठ गए।

सूचना मिलते ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन यादव अपने साथियों के साथ मौके पर पहुँचे। तहसीलदार एवं फैक्ट्री संचालक उदित राठी की उपस्थिति में चर्चा हुई, परंतु संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका। इसके पश्चात परिजन, ग्रामीणजन एवं कांग्रेसजनों ने अंजोरा बायपास स्थित फैक्ट्री के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। पूर्व जिलाध्यक्ष भागवत साहू, महामंत्री राहुल तिवारी, प्रवक्ता अनीस खान, चुम्मन साहू, रितेश जैन, अमित अग्रवाल, पूर्व एल्डरमैन हेमू सोनी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे। मौके पर एसडीएम राजनांदगांव एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दल-बल सहित पहुँचे और समझाइश का प्रयास किया, किन्तु सभी की एक ही मांग थी कि फैक्ट्री प्रबंधक को बुलाकर सम्मानजनक मुआवज़े पर सहमति बनाई जाए।

प्रशासन के प्रयासों के बाद फैक्ट्री प्रबंधक उदित राठी मौके पर पहुँचे। फैक्ट्री परिसर में प्रशासन की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल—जिसमें विपिन यादव, राहुल तिवारी, अनीस खान, चुम्मन साहू, अंगेश्वर देशमुख एवं परिवार के सदस्य शामिल थे—के साथ विस्तृत बैठक हुई। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने तत्काल 5 लाख रुपये की राहत राशि, लगभग 23 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवज़ा तथा मृतक की पत्नी को आजीवन पेंशन देने पर सहमति दी। सहमति बनने के बाद चक्काजाम समाप्त किया गया। परिजनों एवं ग्रामीणजनों ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव श्रमिकों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

राजनांदगांव। जिले के उभरते युवा मॉडल मास्टर आदर्श गुप्ता ने राजधानी दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित फैशन शो ग्लोरियस इंडियन रनवे फैशन वीक में शानदार प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। देश के प्रसिद्ध सेलिब्रिटी डिजाइनर द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में आदर्श ने आत्मविश्वास, आकर्षक व्यक्तित्व और पेशेवर अंदाज के साथ रैंप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसकी उपस्थित दर्शकों और फैशन विशेषज्ञों ने सराहना की। मास्टर आदर्श गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र गुप्ता के सुपुत्र हैं। उन्होंने कम उम्र में ही मॉडलिंग को अपने करियर के रूप में अपनाया और निरंतर परिश्रम व समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर के मंच तक अपनी पहचान बनाई है। दिल्ली में आयोजित इस बड़े फैशन समारोह में भागीदारी उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आदर्श इससे पूर्व भी देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों में आयोजित फैशन आयोजनों में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने नैनीताल, रांची, हैदराबाद तथा मुंबई जैसे शहरों में अपनी प्रस्तुति से विशेष पहचान बनाई है। उनकी मंच प्रस्तुति, चाल-ढाल और आत्मविश्वास ने फैशन जगत में उन्हें एक उभरते चेहरे के रूप में स्थापित किया है। दिल्ली में हुए इस फैशन वीक में उनके सफल प्रदर्शन से राजनांदगांव सहित पूरे छत्तीसगढ़ में गर्व का वातावरण है। परिवार के सदस्यों, मित्रों और शुभचिंतकों ने आदर्श को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। आदर्श ने अपने संदेश में कहा कि वे आगे भी बड़े मंचों पर निरंतर कार्य करते हुए अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

**एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


सरकारी मंच, निजी लापरवाही

सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
पर सवाल यह है कि—

  • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

  • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

“प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

  • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

  • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
समझ लिया गया।


एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

दुर्ग। शौर्यपथ।

शहर की राजनीति में कई बार छोटी दिखने वाली घटनाएँ भी बड़े सवाल खड़े कर जाती हैं। गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर हालिया घटनाक्रम ने यही साबित किया है। चौक का नाम “महेश चौक” घोषित होते ही शहर की फिजा में चर्चा का दौर तेज हो गया—क्या यह महज़ एक नामकरण है, या फिर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं का आईना?

लंबित आवेदन और अचानक निर्णय

पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में साहू समाज द्वारा “कर्मा माता चौक” और राजस्थानी ब्राह्मण समाज द्वारा “परशुराम चौक” नामकरण के लिए आवेदन दिए गए थे। दोनों प्रस्ताव एमआईसी में लंबित रहे। इसके अतिरिक्त, समीप निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर को देखते हुए “जगन्नाथ चौक” नाम की भी चर्चा थी।

लेकिन परिषद के औपचारिक निर्णय से पहले ही गंजपारा चौक को “महेश चौक” के रूप में संबोधित किए जाने की खबर सामने आई। कार्यक्रम में राम रसोई के संरक्षक चतुर्भुज राठी की उपस्थिति ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे दिया।

सवालों के घेरे में शहरी सरकार

वर्तमान महापौर अलका बाघमार ने पूर्व सरकार की त्रुटियों को सुधारने का संकल्प लेकर पदभार संभाला था। शपथ ग्रहण के समय निष्पक्षता और पारदर्शिता की जो बात कही गई थी, वह अब गंजपारा चौक के नामकरण प्रकरण में सवालों के घेरे में है।

यदि परिषद द्वारा अब तक औपचारिक निर्णय नहीं हुआ, तो “महेश चौक” नाम की घोषणा किस अधिकार से और किस प्रक्रिया के तहत हुई?

क्या यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरकर लिया गया, या फिर प्रभावशाली वर्गों के दबाव में जल्दबाजी में?

राम रसोई और दोहरे मापदंड का आरोप

बस स्टैंड स्थित राम रसोई के अनुबंध को लेकर भी पूर्व में अनियमितताओं की चर्चा रही है। स्वयं महापौर ने पूर्व सरकार की गलतियों का उल्लेख करते हुए दूरी बनाई थी। किंतु वर्तमान कार्यकाल में भी अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद संचालन जारी है और निगम की प्रेस विज्ञप्ति में संचालक को “समाजसेवी” के रूप में प्रस्तुत किया जाना विरोधाभास पैदा करता है।

यही कारण है कि गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर यह धारणा बल पकड़ रही है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली और संपन्न वर्ग की आवाज़ अन्य समाजों की अपेक्षा अधिक प्रभावी रही।

भावनाएँ बनाम राजनीति

साहू समाज, राजस्थानी ब्राह्मण समाज और उड़िया समाज की ओर से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार न करते हुए अचानक एक नाम को आगे बढ़ाना सामाजिक संतुलन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। शहर की विविध सामाजिक संरचना में संतुलन बनाए रखना शहरी सरकार की जिम्मेदारी है।

नामकरण मात्र औपचारिकता नहीं—यह भावनाओं, पहचान और सम्मान का विषय होता है। ऐसे में यदि प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो अविश्वास जन्म लेता है।

निष्पक्षता की कसौटी पर बाघमार सरकार

पिछले एक वर्ष में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें शहरी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आलोचना हुई है। गंजपारा चौक प्रकरण ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

क्या यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत हुआ?

क्या परिषद की सहमति ली गई?

क्या सभी समाजों की भावनाओं का सम्मान किया गया?

इन सवालों के जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

गंजपारा चौक का नाम चाहे जो भी हो, शहर की जनता निष्पक्ष और पारदर्शी शासन की अपेक्षा रखती है। यदि निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट और सर्वसम्मति से हो, तो विवाद की गुंजाइश कम होती है। लेकिन यदि जल्दबाजी और प्रभाव का आरोप लगे, तो चर्चा का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि शहरी सरकार इन उठते सवालों का जवाब कैसे देती है—और क्या निष्पक्षता की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध कर पाती है, या यह प्रकरण भी राजनीतिक गलियारों में एक और बहस बनकर रह जाएगा।

  दुर्ग, / छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्मार्ट मीटर जागरूकता पखवाड़ा के तहत दुर्ग शहर वृत्त के विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर संभाग पश्चिम भिलाई के वैशाली नगर जोन में एकता चौक, लोहिया रोड और कोहका जोन के तहत मंगल बाजार, पुरानी बस्ती में संपन्न हुए। कार्यक्रम के दौरान बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की उपयोगिता, सटीक बिलिंग प्रक्रिया और बिजली खपत में पारदर्शिता के बारे में विस्तार से बताया गया। दोनों ही स्थानों पर आकर्षक नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया, जिसके माध्यम से स्मार्ट मीटर के लाभों को सरल और मनोरंजक तरीके से आम जनता तक पहुँचाया गया। शिविर में उपभोक्ताओं को मोर बिजली ऐप डाउनलोड करवाया गया, ताकि वे अपने मोबाइल पर ही हर आधे घंटे की वास्तविक समय में बिजली खपत की निगरानी कर सकें। कार्यक्रम में उपभोक्ताओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वैशाली नगर जोन से 32 और कोहका जोन से 35 उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर अपना सकारात्मक फीडबैक दर्ज कराया।
इस अवसर पर नगर संभाग पश्चिम भिलाई के कार्यपालन अभियंता श्री नवीन राठी, कार्यपालन अभियंता स्काडा/डीएमएस सुश्री गीता ठाकुर, सहायक अभियंता श्रीमती सीमा बघेल, सुश्री माया भारती एवं अजय कुमार सिंह, कनिष्ठ अभियंता श्री सुरेश सोनी, श्री प्रकाश रामटेके, श्रीमती सोनम प्रजापति एवं श्री ललित पटेल के साथ जीनस पावर की टीम और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अभियान के तहत उपभोक्ताओं के अत्याधुनिक तकनीक से सशक्त बनाना और स्मार्ट मीटर के अद्वितीय लाभों से परिचित कराकर एवं स्मार्ट मीटर को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करते हुए, उन्हें निर्बाध बिजली सेवाओं और सटीक बिलिंग के नए दौर की ओर ले जाना है।

दुर्ग। थाना पाटन क्षेत्र में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़ी 1 करोड़ 19 लाख रुपये की बड़ी बीमा धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया कि आरोपीगणों ने जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, नकली आधार व अन्य केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर मृत्यु दावा प्रस्तुत किया और करोड़ों रुपये की निकासी कर ली। एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर भी मृत्यु दावा लगाया गया, जबकि वह जीवित पाया गया।

मामले में राजेश कनोजिया (44 वर्ष), निवासी पंचशील सेक्टर-01, बोरसी, दुर्ग को गिरफ्तार किया गया है। वह दुर्ग में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता था और एनपीएस निकासी के नाम पर लोगों से आधार, पैन और बैंक डिटेल लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। जांच में अमान्य क्यूआर कोड, समान पते और संदिग्ध बैंक खातों से लेन-देन जैसी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

प्रकरण में एचडीएफसी लाइफ के पूर्व कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसने कथित रूप से जाली दस्तावेज अपलोड कर सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार किया।

पुलिस ने आरोपी से ₹10,000 नगद एवं डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। एक आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

  दुर्ग। देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ा बेच रहे एक व्यापारी से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के मामले में थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी मोहम्मद इस्माइल (44 वर्ष), निवासी कैम्प-02 पावर हाउस भिलाई, थाना छावनी, जिला दुर्ग, घूम-घूमकर कपड़ा बेचने का कार्य करता है। 16 फरवरी को दोपहर करीब 2:30 बजे वह देव बलौदा मेला स्थल पर कपड़ों की दुकान लगाकर बिक्री कर रहा था।
इसी दौरान बजरंग दल के नेता प्रदीप सिन्हा एवं उनके साथियों ने कथित तौर पर मंदिर परिसर का हवाला देते हुए दुकान हटाने को कहा। इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया। प्रार्थी का आरोप है कि आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
व्यापारी ने पुलिस को बताया कि वह विवाद से दूर रहने वाला व्यक्ति है, लेकिन धमकी के बाद वह भयभीत हो गया। उसने घटना का वीडियो रिकॉर्ड होने की बात भी कही है, जिसे जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
थाना पुरानी भिलाई पुलिस ने प्रार्थी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी

छत्तीसगढ़ के अद्यतन सर्कुलरों संग ‘भू-अभिलेख नियमावली’ का विमोचन

  रायपुर / राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज निवास कार्यालय में भू-अभिलेख नियमावली भाग 1 से 4 पुस्तक का विमोचन किया।श्री उमेश पटेल और श्री श्रीकांत वर्मा द्वारा लिखित इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग के सर्कुलर और आदेशों का संकलन है। अभी तक मार्केट में जो पुस्तक थी, उसके लेखक और प्रकाशक मध्य प्रदेश के हैं। इसके कारण मध्यप्रदेश के सर्कुलर और आदेश उस पुस्तक में मिलते हैं, परंतु छत्तीसगढ़ के नहीं।
अब इस पुस्तक में, वर्ष 2000 के बाद मध्य प्रदेश शासन द्वारा जारी सर्कुलर जो छत्तीसगढ़ राज्य में लागू नहीं है, उन्हें नहीं दिया गया है। छत्तीसगढ़ द्वारा जारी अद्यतन सर्कुलर को अध्याय-वार दिया गया है। परिशिष्ट के रूप में सर्वे, राजस्व वन भूमि के अभिलेख, गिरदावरी, डिजिटल क्रॉप सर्वे आदि महत्वपूर्ण विषयों पर जारी लेटेस्ट सर्कुलर शामिल किए गए हैं। विषय से संबंधित प्रश्न, इकाई परिवर्तन, शब्दार्थ आदि का भी समावेश किया गया है।
छत्तीसगढ़ विशेष के लिए नियमावली की यह पुस्तक बाजार के साथ-साथ अमेजन और जेम पोर्टल पर उपलब्ध होगा

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल

रायपुर, 18 फरवरी 2026/ ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं। शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है

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