August 05, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन
    राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक में 88.57 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की बड़ी उपलब्धि गुणवत्तापूर्ण एवं जनकेंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं का बना उत्कृष्ट मॉडल

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास कर रही है। राज्य शासन की इसी जनकल्याणकारी सोच और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सतत सुधार के परिणामस्वरूप गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के अंतर्गत 88.57 प्रतिशत अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल किया है। यह उपलब्धि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, बेहतर प्रबंधन तथा जनकेंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
    राष्ट्रीय स्तर की मूल्यांकन टीम द्वारा स्वास्थ्य संस्थान का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, रिकॉर्ड संधारण, दवाओं की उपलब्धता, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन तथा सामुदायिक सहभागिता सहित विभिन्न मानकों पर संस्थान का मूल्यांकन किया गया। सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी ने 88.57 प्रतिशत अंक अर्जित कर राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त किया।
    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी में ग्रामीणों को नियमित रूप से व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां प्रतिदिन बाह्य रोगी सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन सेवाएं, गैर-संचारी रोगों की जांच एवं परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, टेलीमेडिसिन सुविधा, स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श, निःशुल्क औषधि वितरण तथा आवश्यक जांच सेवाएं प्रभावी ढंग से संचालित की जा रही हैं। इन सुविधाओं के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और उन्हें स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है। गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अब तक चनाडोंगरी सहित 14 स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) से प्रमाणित हो चुकी हैं। शेष स्वास्थ्य संस्थानों को भी राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन दिलाने के लिए आवश्यक सुधार एवं तैयारियां निरंतर जारी हैं।
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास, प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों को सशक्त बनाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में प्रभावी प्रगति हो रही है।
    आयुष्मान आरोग्य मंदिर चनाडोंगरी को प्राप्त यह राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्टता, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित हो रही सशक्त एवं जनोन्मुखी स्वास्थ्य व्यवस्था का भी सशक्त उदाहरण है।

    युवाओं से नशामुक्त, संस्कारवान और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित जीवन अपनाने का किया आह्वान

    रायपुर / शौर्यपथ / ब्रह्माकुमारीज़, अंबिकापुर द्वारा आयोजित ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान’ कार्यक्रम में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सहभागिता करते हुए युवाओं से नशामुक्त, अनुशासित और संस्कारयुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का सबसे मजबूत आधार स्वस्थ, जागरूक, चरित्रवान और आत्मविश्वासी युवा है। जब युवा सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान’ केवल नशे के विरुद्ध जनजागरण का अभियान नहीं, बल्कि देश के भविष्य को सशक्त बनाने का राष्ट्रीय आंदोलन है। यह अभियान युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली, आत्मअनुशासन, सकारात्मक विचार और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रेरित कर राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का माध्यम बन रहा है।
    उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि ऐसे समाज के निर्माण की है, जहां युवा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त हों। नशा व्यक्ति की प्रतिभा, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति तीनों को प्रभावित करता है। इसलिए प्रत्येक युवा का यह दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करे।
    श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की युवा शक्ति विश्व की सबसे बड़ी ताकत है। यदि यह शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ेगी तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, कौशल, अनुशासन, सेवा और संस्कार को अपने जीवन का आधार बनाने का आग्रह करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की सहभागिता से ही संभव है।
    उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लंबे समय से आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक जीवनशैली तथा नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रही है। ऐसे अभियान समाज में नई चेतना का संचार करते हैं और युवाओं को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
    श्री अग्रवाल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, कौशल संवर्धन, रोजगार, शिक्षा, खेल, संस्कृति तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में कर सकें।
    कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं एवं नागरिकों ने ’नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ का संकल्प लेते हुए समाज में जनजागरण फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा।
    इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के सदस्य, पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में युवा, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने नशामुक्त, स्वस्थ, संस्कारित और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लिया।

    पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया उद्घाटन
    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की दीदियों द्वारा बनाए गए सामग्रियां मिल रही है बहुत ही कम दरों पर

    कबीरधाम / शौर्यपथ / कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। इस दौरान स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला से ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को एक नई दिशा मिलती है तथा यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होता है।
    सरस मेला में स्वदेशी, प्राकृतिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी सह विक्रय हेतु संभागीय सरस मेला समूह की दीदियों के लिए सफलता के द्वार खोलेगा। संभागीय सरस मेला के उद्घाटन के दौरान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग बिसेसर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, वीरेंद्र साहू, लोकचंद साहू, संतोष पटेल, विदेशी राम धुर्वे, कलेक्टर गोपाल वर्मा, सीईओ जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक जिले के अधिकारी गण, स्व सहायता समूह की दीदियों सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।
    मेले में लगे स्टालों का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अवलोकन किया तथा महिला समूह से उनके उत्पादन के विषय में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान स्टॉल से खरीदी कर महिला समूह का हौसला बढ़ाया तथा उन्हें सफल व्यवसाय की शुभकामनाएं दी।
    संभागीय सरस मेला के संबंध में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि मेले का आयोजन सावन माह में किया गया है जो 06 अगस्त की शाम तक चलेगा। विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की पावन एवं ऐतिहासिक धरा पर आयोजित यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 50 से अधिक स्टॉलों के द्वारा एक ही छत के नीचे ताज़े एवं पौष्टिक मिलेट उत्पाद, स्वादिष्ट घरेलू खाद्य सामग्री, वनोपज आधारित अन्य स्थानीय उत्पादन मिल रहा है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा सामग्री बाँस एवं बेंत से बने आकर्षक उत्पाद,घरेलू सजावटी वस्तुएँ, पारंपरिक परिधान तथा अनेक प्रकार के अन्य उपयोगी स्वदेशी सामग्रियों का विशाल भंडार विक्रय के लिए उपलब्ध होगा।
    मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभिषेक अग्रवाल ने बताया की समूह की दीदियों द्वारा निर्मित सामग्रियों को बाजार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से संभागीय सरस मेला का आयोजन हो रहा है। प्रत्येक खरीदी पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वदेशी भारत का संकल्प होगा। जैविक खाद्य सामग्री, आकर्षक सजावट के सामान सहित अन्य उपयोगी वस्तु कम दर पर उपलब्ध है। सभी जिलेवासियों से अपील की जाती है कि वह सावन के इस पवित्र महीने में बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ ही संभागीय सरस मेला का लाभ उठाए।
    प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तरुणा साहू और स्कूली बच्चों के शिव तांडव की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया
    छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तरुणा साहू के पंडवानी गायन ने सभी का मन मोह लिया। द्रोपदी चीर हरण सहित अन्य प्रसंगो की मार्मिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को उस काल खण्ड की याद दिला दी। इसी तरह स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बोड़ला के बच्चों द्वारा शिव तांडव का नृत्य प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सरस मेला में उपस्थित सभी लोगों का खूब मनोरंजन किया।
    उल्लेखनीय है कि संभागीय सरस मेला में दुर्ग संभाग के कबीरधाम सहित जिला दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला- मानपुर- अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़- छुईखदान- गंडई के अतिरिक्त अन्य ज़िलों की महिला स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा उत्पादित आकर्षक सामग्रियों की प्रदर्शनी सह विक्रय के लिए 50 स्टॉल गए हैं। इन स्टॉलों में विभिन्न जैविक खाद्य सामग्री जैसे हल्दी, मिर्ची, धनिया, कोदो- कुटकी, कटहल, आम, नीबू महुआ के आचार, पापड़, ब्लैक राइस के साथ अगरबत्ती, दोना-पत्तल,बैग, सिंगार के सामान, हैंड बैग सहित अनेको आकर्षक सामग्री महिला समूह द्वारा बनाये गए है।

    गांव के पास खुला फड़, 365 संग्राहकों को मिला सीधा आर्थिक लाभ

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया माध्यम बन गई है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली।

    पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। अब गांव के पास फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च बचा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनकी आय बढ़ी है और काम करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

    राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। इससे ग्रामीणों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रति उत्साह बढ़ा। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।

    इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इन फड़ों के माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।

    संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।

    इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।

    छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल केवल तेन्दूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है।

    वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जान

    रायपुर / शौर्यपथ / वन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।

    रविवार को ग्राम कुंजंटोला निवासी जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

    वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर श्री महेंद्र बघेल और श्री शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।

    वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

    उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहत

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

    यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।

    इन पीड़ितों को मिलेगा लाभ

    स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।

    डीबीटी के माध्यम से शीघ्र होगा भुगतान

    कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

    राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    पिता के सपने ने दी आगे बढ़ने की प्रेरणा, कॉमनवेल्थ गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट ज्ञानेश्वरी यादव ने साझा की अपने संघर्ष और सफलता की कहानी
    उप मुख्यमंत्री ने ज्ञानेश्वरी और उनके माता-पिता का किया सम्मान

    रायपुर / शौर्यपथ / उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में देश के लिए रजत पदक जीतने वाली राजनांदगांव की युवा खिलाड़ी सुश्री ज्ञानेश्वरी यादव को सम्मानित किया। उन्होंने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में उनके माता-पिता को भी सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री श्री साव और ज्ञानेश्वरी ने इस दौरान प्रेस-कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, संयुक्त संचालक श्री प्रभाकर पाण्डेय और उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर सहित भारोत्तोलन संघ के पदाधिकारी एवं विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी भी इस दौरान मौजूद थे।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज ऐतिहासिक और गौरव का पल है। हम छत्तीसगढ़ और भारत की बेटी ज्ञानेश्वरी का अभिनंदन कर रहे हैं, जिन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन किया है। ज्ञानेश्वरी की इस उपलब्धि से खेलों के लिए एक नए वातावरण की शुरुआत छत्तीसगढ़ में होगी। मैं उनके पिता श्री दीपक यादव और माता श्रीमती दुर्गा यादव का भी हार्दिक अभिनंदन करता हूं, जिन्होंने ऐसी होनहार बेटी को जन्म दिया जिन्होंने दुनिया में भारत और छत्तीसगढ़ को प्रतिष्ठा दिलाई। छत्तीसगढ़ के युवा ज्ञानेश्वरी से प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, ऐसी उम्मीद है।

    उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि राज्य में हमारी सरकार बनने के बाद से हम लगातार खेल और खिलाड़ियों की तरक्की एवं बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने हम बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक, स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव जैसे आयोजन लगातार कर रहे हैं। खेल अलंकरण और उत्कृष्ट खिलाड़ियों की घोषणा को हमने पुनः शुरू किया है। छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी लगातार काम हो रहे हैं। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें अच्छा प्रशिक्षण दिलाने, उन्हें तराशने का और संवारने की जरूरत है। आने वाले समय में और भी प्रतियोगिताओं में भारत को पदक मिले, इसकी तैयारी हमने प्रारंभ कर दी है।

    चुनौतियों ने बनाया और मजबूत - सुश्री ज्ञानेश्वरी यादव

    ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता राजनांदगांव की वेटलिफ्टर सुश्री ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ समय पहले विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंच पर पहली बार उतरते समय वह काफी दबाव और घबराहट महसूस कर रही थीं। उस समय ऐसा लग रहा था कि यह एक ऐसा मुकाबला है, जिसका अनुभव पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि उसी अनुभव ने उन्हें सिखाया कि बड़ी प्रतियोगिताओं का सामना कैसे करना है और मानसिक रूप से स्वयं को किस तरह तैयार करना है।

    ज्ञानेश्वरी ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप से मिले अनुभव के बाद उन्होंने हर प्रतियोगिता के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार करना सीखा। किसी भी बड़े मंच पर पहुंचकर उनका लक्ष्य अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना रहता है और यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

    उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके पिता का सपना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। शुरुआती दिनों में उनके पिता साइकिल से उन्हें जिम तक लेकर जाते थे। उसी दौरान उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह स्वयं कभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते हैं कि उनकी बेटी भारत का प्रतिनिधित्व करे और तिरंगा ऊंचा लहराए।

    भावुक होते हुए ज्ञानेश्वरी ने कहा कि उनके पिता ने उनके लिए अथक मेहनत की है। उन्होंने बताया कि उनके खान-पान से लेकर प्रशिक्षण तक हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान उनके पिता ने रखा। परिवार के बेहतर भविष्य और उनकी तैयारी के लिए उनके पिता रात-रात भर मेहनत करते थे। आज उनकी हर उपलब्धि के पीछे उनके पिता का त्याग, समर्पण और संघर्ष ही सबसे बड़ी प्रेरणा है।

    ज्ञानेश्वरी ने कहा कि जीवन में आने वाली हर चुनौती ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया है। कठिन परिस्थितियों से मिले अनुभवों ने उन्हें न केवल बेहतर खिलाड़ी बनाया, बल्कि बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का हौसला भी दिया।

      रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य में किफायती परिवहन की दिशा में सतत् विकल्प योजना (एस.ए.टी.ए.टी.) के क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु गठित समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ऊर्जा विभाग एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में कचरे और बायोगैस से संपीड़ित जैव गैस (CBG) के उत्पादन को ईंधन के रूप में उपयोग करने के संबंध में व्यापक चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया की सी.बी.जी. प्लांटों के लिए जिलों में भूमि चिन्हित कर प्लांट लगाने के लिए सभी जरूरी कार्य किए जा रहें हैं। राज्य में छत्तीसगढ़ सी.बी.जी. पॉलिसी 2026 नीति का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके लिए राज्य शासन के विभिन्न विभागों की भूमिका एवं जिम्मेदारियां निर्धारित की गई है।

    बैठक में सी.बी.जी. प्लांट की स्थापना तथा इसमें निवेश करने वाले उद्यमियों और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के बारे में चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियो ने बताया कि किफायती परिवहन की दिशा में सतत् विकल्प (SATAT) योजना भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृति गैस मंत्रालय की पहल है। अधिकारियों नें बताया कि यह योजना पूरे देश में लागू है, तथा छत्तीसगढ़ में भी लागू है। योजना के तहत तेल विपणन कंपनियाँ (ओ.एम.सी. व ओ.एन.जी.सी.)जैसे इंडियन ऑईल बी.पी.सी.एल. और पी.सी.एल. इन प्लांटों से उत्पादित सी.बी.जी. को खुद खरीदने का अनुबंध किया जाता है। सी.बी.जी. प्लांटस लगाने से खेता की पराली, धान का पैरा और कचरा सड़ने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। इसमें किसानों को उनके कृषि अवशेषों और पशु अपशिष्ट के एवज में अतिरिक्त आय होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढाया जायेगा। बैठक में राज्य के विभिन्न नगर पालिका, निगमों में सी.बी.जी. संयंत्रों की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

    बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी सतत् ऊर्जा उत्पादक और नगरीय निकायों में कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए योजना के तहत नये प्रयास किये जा रहें हैं। राज्य के भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, कोरबा, अंबिकापुर, रायगढ़ नगरीय निकायो में सी.बी.जी. संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    बैठक में परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह और नगरीय प्रशासन एवं विकास, पशुधन विकास, पर्यावरण संरक्षण मंडल, कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण, सी.एस.आई.डी.सी. और ऑईल मार्केटिंग कम्पनी के अधिकारी शामिल हुए।

    महिला कर्मचारी के वेतन से PhonePe-Paytm के जरिए कराते रहे ट्रांसफर, पुलिस ने पद के दुरुपयोग और गबन के आरोप में किया गिरफ्तार
    दुर्ग।
    शिक्षा के मंदिर में एक ऐसे मामले ने सनसनी फैला दी है जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेन्द्र कुमार कुलदीप को दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन से ₹1,49,384 की कथित हेराफेरी करने के आरोप में दुर्ग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला थाना मोहन नगर में दर्ज किया गया है।
    पुलिस के अनुसार पीड़िता श्रीमती शुभांगी मराठे विश्वविद्यालय में अर्धकुशल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। वह आरोपी कुलसचिव के निवास पर भोजन बनाने का कार्य भी करती थीं। शिकायत और विश्वविद्यालय की जांच समिति की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि उनका मासिक वेतन ₹11,515 निर्धारित था, लेकिन उन्हें केवल ₹2,200 ही दिए जाते थे। शेष राशि आरोपी द्वारा दबाव बनाकर PhonePe और Paytm के माध्यम से अपने परिचित उदय कुलदीप के खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी।
    जांच में सामने आया कि यह कथित गबन 6 फरवरी 2025 से 4 जुलाई 2026 के बीच लगातार किया गया, जिसमें कुल ₹1,49,384 की राशि की हेराफेरी हुई।
    विश्वविद्यालय की जांच समिति की रिपोर्ट, बैंक अभिलेखों और यूपीआई लेन-देन के साक्ष्यों के आधार पर थाना मोहन नगर में अपराध क्रमांक 550/2026 दर्ज किया गया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(4) के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने 51 वर्षीय भूपेन्द्र कुमार कुलदीप, निवासी विश्वविद्यालय परिसर, को गिरफ्तार कर लिया। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।
    थाना प्रभारी निरीक्षक केशव राम कोशले के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया। दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर आर्थिक शोषण, अवैध वसूली या वित्तीय अनियमितता करता है तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम थाने को दें। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    शौर्यपथ विशेष:
    यह मामला केवल आर्थिक गड़बड़ी का नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा कथित रूप से अपने अधिकारों के दुरुपयोग का भी है। यदि जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो यह विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

    बिजली बिल में राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा को मिल रहा बढ़ावा

       रायपुर / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक राहत और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। इस योजना के माध्यम से लोग अपने घरों की छतों पर सौर ऊर्जा आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित कर न केवल बिजली के बढ़ते खर्च से राहत पा रहे हैं, बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
    सोलर सिस्टम से घटी बिजली की लागत
    मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मोहला निवासी हेमंत कुमार साहू इस योजना के सफल लाभार्थियों में शामिल हैं। उन्होंने अपने घर में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत प्रणाली स्थापित कर बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई है। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके घर की अधिकांश विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति अब सौर ऊर्जा से हो रही है, जिससे बिजली बिल में भारी कमी आई है और परिवार को हर महीने आर्थिक राहत मिल रही है।
    10 हजार रुपए तक के बिजली बिल से मिली राहत
    हेमंत कुमार साहू बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल लगभग 10 हजार रूपए तक आता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे न केवल घरेलू खर्च कम हुआ है, बल्कि परिवार स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सका है।
    आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी माध्यम
    श्री साहू का कहना है कि सोलर प्रणाली स्थापित होने से घरेलू विद्युत आवश्यकताओं की निर्बाध पूर्ति हो रही है, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हुई है और बिजली खर्च में लगातार बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से लाभदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्रभावी पहल है, क्योंकि इससे स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।
    योजना का लाभ उठाने की अपील
    हेमंत कुमार साहू ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को आम नागरिकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसका लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाकर प्रत्येक नागरिक अपने बिजली खर्च में कमी ला सकता है और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा सकता है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए शासन एवं प्रशासन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

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