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April 02, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

रायपुर।

छत्तीसगढ़ में अंत्योदय की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जाने वाला है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बलौदाबाजार से प्रदेश के करीब 5 लाख भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि अंतरित करेंगे।

इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन श्रमिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनकी आजीविका को स्थिरता देना है। राज्य सरकार ने संकल्प बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है।

रायपुर जिला सबसे आगे

योजना के तहत सर्वाधिक लाभ रायपुर जिले को मिलने जा रहा है, जहां 53 हजार 338 भूमिहीन कृषि मजदूर परिवार इस योजना से लाभान्वित होंगे। इसके अलावा बिलासपुर जिले के 39 हजार 401 और महासमुंद जिले के 37 हजार 11 हितग्राहियों को भी योजना का लाभ मिलेगा। सभी लाभार्थियों का ई-केवाईसी पूर्ण किया जा चुका है।

पारंपरिक श्रमिक वर्ग भी शामिल

इस योजना का दायरा केवल कृषि मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के पारंपरिक श्रमिक वर्गों को भी इसमें शामिल किया गया है। वनोपज संग्राहक, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवारों के साथ-साथ अनुसूचित क्षेत्रों में बैगा, गुनिया, माँझी और देवस्थलों में पूजा करने वाले पुजारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। योजना में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार शामिल हैं।

बढ़ी हुई सहायता राशि

सरकार द्वारा पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की वार्षिक सहायता को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये कर दिया गया है, जो सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।

अंतिम पंक्ति तक पहुंचने का प्रयास

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी बुनियादी जरूरतों—शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन—को पूरा कर सकें।

निष्कर्षतः, दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना छत्तीसगढ़ में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका सीधा लाभ लाखों जरूरतमंद परिवारों को मिलने जा रहा है।

*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 गेम-चेंजर, खेलों में करियर बनाने का बड़ा मंच ओलंपियन*

*करीब 3,800 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा; छत्तीसगढ़ सहित चार राज्यों के 100 से अधिक खिलाड़ी*

*प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित होंगी*

 *कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर*

 

रायपुर, /बुधवार 25 मार्च से शुरू हो रहे पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह तैयार है और राज्य के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव का मानना है कि यह “राज्य के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बड़ा बढ़ावा देगा।” खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री साव ने मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स भारतीय खेल इतिहास में एक “मील का पत्थर” साबित होगा।

         श्री साव ने बताया कि, “हमने पहले सरगुजा ओलंपिक और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन छोटे स्तर पर किए हैं। अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी कर हम एक बड़े मंच पर कदम रख रहे हैं, जो हमारी क्षमताओं की परीक्षा भी लेगा और उन्हें नई ऊंचाई देगा।”उन्होंने कहा, “यह छत्तीसगढ़ के लिए निस्संदेह एक ऐतिहासिक और यादगार आयोजन है। यह हमारे खेल प्रतिभा और बुनियादी ढांचे को बड़ी मजबूती देगा। साथ ही, यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्रदान करेगा।”

      श्री साव ने बताया कि, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के साथ खेलने और उन्हें देखने का अनुभव छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के लिए बेहद समृद्ध करने वाला होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह आयोजन राज्य के खेल तंत्र और खिलाड़ियों दोनों के लिए बड़ी ताकत साबित होगा।”

         खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा लेंगे और कुल नौ खेलों का आयोजन होगा। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में पदक दिए जाएंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल होंगे।

करीब 3,800 प्रतिभागी इन खेलों में हिस्सा लेंगे, जो 3 अप्रैल तक चलेंगे। प्रतियोगिताएं रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित की जाएंगी। कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। एथलेटिक्स में सर्वाधिक 34 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे। तैराकी (24), कुश्ती (18), वेटलिफ्टिंग (16) और तीरंदाजी (10) में भी दो अंकों में स्वर्ण पदक होंगे। हॉकी और फुटबॉल टीम खेल हैं, जिनका आयोजन रायपुर में होगा। एथलेटिक्स जगदलपुर में और कुश्ती सरगुजा में आयोजित की जाएगी।

          भारत के शीर्ष खिलाड़ी, हॉकी ओलंपियन दिलीप तिर्की, सलीमा टेटे और शीर्ष धावक अनिमेष कुजूर ने कहा, “खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स खेलों में करियर बनाने और आदिवासी समुदाय से निकले दिग्गज खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने का एक शानदार मंच है।”

        हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व ओलंपियन दिलीप तिर्की ने साई मीडिया से कहा, “मेरे लिए और हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि देश में पहली बार इस तरह की चौंपियनशिप शुरू हो रही है। यह युवाओं और आदिवासी खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने और खेलों में आगे बढ़ने, तथा देश के लिए खेलने का एक बेहतरीन अवसर है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विज़न है कि भारत एक खेल राष्ट्र बने। वे चाहते हैं कि हर युवा किसी न किसी खेल से जुड़ा रहे।”

        मेजबान राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और असम से 100 से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। पुरुष और महिला खिलाड़ियों का अनुपात लगभग 50-50 रहेगा, जो ओलंपिक चार्टर में लैंगिक समानता के सिद्धांत के अनुरूप है। 

        दिलीप तिर्की ने बताया कि, “केन्द्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया भी चाहते हैं कि खेलों के माध्यम से हमारे खिलाड़ी, खासकर आदिवासी खिलाड़ी, बेहतर करियर बना सकें, अपने जीवन को सुधार सकें और देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैं स्वयं एक आदिवासी परिवार से आता हूं और खेलों, विशेषकर हॉकी के माध्यम से आज यहां तक पहुंचा हूं। मुझे विश्वास है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी आदिवासी बच्चों का भविष्य उज्ज्वल है। पहले भी कई आदिवासी खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है और वे हमारे समाज के प्रेरणास्रोत बने हैं।”

        राष्ट्रीय 100 मीटर और 200 मीटर रिकॉर्ड धावक और भारत के उभरते एथलेटिक्स स्टार अनिमेष कुजूर ने साई मीडिया से कहा, “भारत में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां खेल पूरी तरह नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन और भी खास बन जाता है। मैं सरकार के इस प्रयास की सराहना करता हूं, जिसने देशभर के आदिवासी युवाओं को एक मंच पर लाने का काम किया है।”

        खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस उद्घाटन संस्करण में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों का चयन राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित ट्रायल्स के माध्यम से किया गया है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भारतीय खेल प्राधिकरण (सांई) द्वारा नियुक्त कोच नजर रखेंगे। श्री तिर्की ने कहा, “हमारे सभी आदिवासी खिलाड़ी और बच्चे खेलों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाएं, देश के लिए खेलें और अपना करियर बनाएं। प्रधानमंत्री का 2036 ओलंपिक और विकसित भारत का विज़न है कि हमारा देश एक युवा और खेल राष्ट्र बने। मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन हमारा देश एक सशक्त खेल राष्ट्र के रूप में उभरेगा।”

रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महासमुंद जिले के खल्लारी माता मंदिर में हाल ही में हुई रोप-वे दुर्घटना में प्रभावित परिवारों के लिए सहायता राशि की घोषणा की है। उन्होंने दिवंगत श्रद्धालु के परिजन को 5 लाख रुपए एवं घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है, ताकि इस कठिन समय में उन्हें संबल मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

*नेशनल ट्राइबल गेम्स से अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी को मिलेगा बल : उप मुख्यमंत्री अरुण साव*

बिलासपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज राजा रघुराज सिंह स्टेडियम, बिलासपुर में स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी की स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय रात्रिकालीन ड्यूस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता में शामिल हुए। उन्होंने खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल जी का जीवन अनुशासन और समाजसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उनका कार्य के प्रति समर्पण और संगठन क्षमता सभी के लिए सीखने योग्य है। उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक श्री अमर अग्रवाल के प्रयासों से यह प्रतियोगिता आयोजित हो रही है, जिसमें 8 टीमों ने भाग लिया है। इससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है और बिलासपुर की पहचान भी बढ़ रही है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का माहौल तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य में खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का ऐतिहासिक आयोजन हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। यह आयोजन भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों और खेल मैदानों की कमी नहीं है, और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ खेलों का बड़ा केंद्र बनेगा।

श्री साव ने बताया कि बिलासपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में खेल सुविधाओं के विकास के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) से चर्चा हुई है। इससे खेल अधोसंरचना मजबूत होगी और बिलासपुर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

श्री साव ने यह भी कहा कि हाल ही में आयोजित युवा महोत्सव जैसे कार्यक्रमों से शहर में खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। भविष्य में इससे भी बड़े आयोजन किए जाएंगे।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष (शहर) श्री दीपक सिंह, जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) श्री मोहित जायसवाल जी, श्री आदित्य अग्रवाल जी, श्री प्रकाश यादव जी, श्री राजेश सिंह जी, श्री प्रकाश सर्वे जी, श्री प्रवीण दुबे जी , आयोजन समिति के साथी गण एवं खेल प्रेमी साथी उपस्थित रहे। 

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महेश्वर/खरगोन (मध्यप्रदेश)।

नर्मदा नदी के पावन तट पर बसा ऐतिहासिक नगर महेश्वर आज न केवल अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए महेश्वरी साड़ियों और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए भी जाना जाता है। 18वीं सदी में देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा संरक्षित और प्रोत्साहित यह कला आज भी उसी गौरव के साथ जीवित है और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ के मीडिया दल के सदस्यों ने महेश्वर स्थित हथकरघा संस्थानों का भ्रमण किया, जहां उन्होंने न केवल बुनाई की बारीक तकनीकों को करीब से देखा, बल्कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को मिल रहे लाभों की भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

हर घर में करघा, हर हाथ में हुनर

करीब 14-15 हजार की आबादी वाले महेश्वर में हथकरघा उद्योग जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर दूसरे घर में करघा संचालित होता है, जिससे यह शहर पूरी तरह “हैंडलूम हब” के रूप में विकसित हो चुका है। विशेष बात यह है कि यहां लगभग 4000 बाहरी कारीगर, विशेषकर लखनऊ क्षेत्र से आए बुनकर, इस उद्योग से जुड़े हुए हैं।

अहिल्याबाई की विरासत, आज की पहचान

इतिहासकार बताते हैं कि अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल मंदिरों और घाटों का निर्माण कराया, बल्कि बुनकरों को बसाकर इस कला को संरक्षित किया। उनके प्रयासों से महेश्वर बुनाई का प्रमुख केंद्र बना, जिसकी पहचान आज भी बरकरार है।

महेश्वरी साड़ियों की खासियत

महेश्वर में बनने वाली साड़ियां अपनी विशिष्टता के कारण देश-विदेश में अत्यधिक लोकप्रिय हैं—

पिटलूम तकनीक: पारंपरिक जमीन में गड़े करघों पर महीन बुनाई

डिजाइन: ज्यामितीय पैटर्न, धारियां और चेक्स, जिनमें ज़री का आकर्षक उपयोग

धागा: कॉटन और सिल्क का मिश्रण, साथ में सोने-चांदी की ज़री

हल्कापन और शालीनता: ये साड़ियां पहनने में हल्की और बेहद आकर्षक होती हैं

महिलाओं के सशक्तिकरण का केंद्र

महेश्वर का हथकरघा उद्योग महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का भी प्रमुख माध्यम बन चुका है। बड़ी संख्या में महिलाएं घर बैठे इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे परिवार की आय में वृद्धि हो रही है और सामाजिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।

केंद्र सरकार की योजनाओं से मिला संबल

मीडिया दल को जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा हैंडलूम क्लस्टर डेवलपमेंट, कौशल प्रशिक्षण, मार्केटिंग सपोर्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं के चलते उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, बाजार तक पहुंच और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पर्यटन और संस्कृति का संगम

हथकरघा उद्योग के साथ-साथ महेश्वर अपने अहिल्या किला, नर्मदा घाट और प्राचीन मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल ऐतिहासिक स्थलों का आनंद लेते हैं, बल्कि हथकरघा उद्योग को करीब से देखने का भी अवसर प्राप्त करते हैं।

वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर

आज महेश्वर की साड़ियां देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रही हैं। पारंपरिक कला और आधुनिक विपणन के मेल ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

निष्कर्षतः, महेश्वर का हथकरघा उद्योग केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण है—जहां अहिल्याबाई की विरासत आज भी हर करघे की आवाज में गूंजती है।

रायपुर / 

     खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों का छत्तीसगढ़ आगमन शुरू हो गया है, जिससे प्रदेश में खेल उत्सव का माहौल बन गया है। सोमवार शाम असम से तैराकी के 10 खिलाड़ी और तमिलनाडु से 17 फुटबॉल खिलाड़ियों का दल रायपुर पहुंचा।

       खिलाड़ियों के स्वागत में स्वामी विवेकानंद विमानतल पर पारंपरिक रंगारंग प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साह से भर दिया। खेल एवं युवा कल्याण विभाग और SAI के अधिकारियों ने गुलाब भेंटकर अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन किया।आयोजन के तहत 23 मार्च को देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। यह पहली बार है जब इस स्तर का आदिवासी खेल आयोजन छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहा है।

       यह भव्य प्रतियोगिता रायपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से लगभग 3,000 जनजातीय खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक चलने वाले इस आयोजन में हॉकी, फुटबॉल, कुश्ती, एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और वेटलिफ्टिंग जैसे सात खेलों में पुरुष और महिला वर्गों के बीच रोमांचक मुकाबले होंगे।

     छत्तीसगढ़वासियों के लिए यह आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को देखने का अवसर है, बल्कि जनजातीय संस्कृति और खेल भावना के अद्भुत संगम का भी प्रतीक बनेगा।

कोंडागांव। कलेक्टोरेट के सभा कक्ष में जिला स्तरीय परामर्शदात्री बैठक का आयोजन कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। बैठक में जिले भर के विभिन्न कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी-अपनी समस्याएं एवं मांगें कलेक्टर के समक्ष रखीं।

बैठक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना और उनके निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करना रहा। इस दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए।

बैठक में प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं:

• सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा में PPO जारी कर उनके स्वत्वों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

• अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए।

• स्वास्थ्य केंद्रों में डीएमएफ एवं जेडीएस मद से सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।

• डीएमएफ से पदस्थ स्वास्थ्य अधिकारियों को यथावत बनाए रखने की मांग रखी गई।

• जिले में पशु चिकित्सा केंद्र में लगभग 60 प्रतिशत रिक्त चतुर्थ श्रेणी पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।

• पशु चिकित्सा केंद्र एवं स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन कार्य कराए जाएं।

• जर्जर एवं भवनविहीन संस्थाओं के लिए भवन निर्माण की मांग की गई।

• कर्मचारियों के समयमान वेतनमान से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाए।

• लंबित पदोन्नतियों को शीघ्र पूर्ण किया जाए।

• राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत वाहन चालकों की भर्ती की जाए।

• स्वास्थ्य केंद्रों में महिला सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाने की मांग रखी गई।

इसके अतिरिक्त यह निर्णय लिया गया कि प्रत्येक माह के अंतिम सोमवार को जिला स्तरीय परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी।

साथ ही, राजपत्रित अधिकारी एवं शिक्षक संघ द्वारा एक व्याख्याता के गलत युक्तियुक्तकरण के संबंध में उचित निर्णय लेने हेतु अपील की गई, जिस पर कलेक्टर द्वारा आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया।

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर प्राथमिकता से विचार कर समाधान किया जाएगा।

बैठक के अंत में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई।

संवाददाता - अजय देशमुख 

गुण्डरदेही - जिले में अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ चलाए गए चार दिवसीय विशेष अभियान ने वन माफिया के नेटवर्क को झकझोर कर रख दिया है। वन, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त ने सटीक खुफिया सूचना, तेज़ कार्रवाई और मजबूत तालमेल के दम पर ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। यह अभियान अब अवैध कारोबार के खिलाफ निर्णायक मोड़ साबित हो रहा है

आरा मिल संचालक के द्वारा शासकीय कार्य में बाधाकर गतिरोध पैदा किया जा रहा था जिसके बाद पुलिस प्रशासन का बड़ा योगदान प्राप्त हुआ और कड़ी कार्रवाई की गई

22 मार्च 2026 को गुंडरदेही स्थित शेख फ़ीरोज़ा आरा मिल पर की गई कार्रवाई इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर आरा मिल को सीलबंद कर दिया।

निरीक्षण के दौरान यहां भारी मात्रा में अवैध काष्ठ के गोले पाए गए थे।

दस्तावेजों की जांच में चिरान और स्टॉक रजिस्टर में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं, वहीं बिजली खपत और उत्पादन के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर मिला। यह स्पष्ट संकेत था कि आरा मिल में लंबे समय से नियमों को दरकिनार कर अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

इससे पहले 19 से 21 मार्च के बीच संयुक्त विभाग लगातार दबिश देकर गुंडरदेही और ओटेबंद क्षेत्र में तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध काष्ठ भंडारण का भंडाफोड़ किया। चिन्हित किए गए ठिकानों में से दो स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा जब्ती की कार्रवाई पूर्ण की जा चुकी है, जिससे अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच भय का माहौल स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

कार्रवाई का सबसे तेज़ और असरदार चरण 19 मार्च को सामने आया, जब कटेंगा चौक, राजनांदगांव मुख्य मार्ग अंतर्गत लोहारा परिक्षेत्र में उड़न दस्ता टीम ने घेराबंदी कर दो ट्रकों को पकड़ा। इन ट्रकों में 57 वृक्षों के गोले अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे थे। मौके पर मौजूद व्यक्तियों के पास न तो कोई वैध अनुमति थी और न ही परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों ट्रकों को काष्ठ सहित जब्त कर आगे की वैधानिक प्रक्रिया प्रारंभ की।

पूरे ऑपरेशन में वन, पुलिस और राजस्व विभाग का अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। योजनाबद्ध रणनीति, त्वरित कार्रवाई और कानूनी मजबूती के साथ तीनों विभागों ने यह साबित कर दिया कि संयुक्त प्रयास से किसी भी संगठित अवैध नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सकता है।

जिला वन मंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि वन संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अवैध कटाई, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार अभियान जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जिला पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा इस पूरे अभियान में सक्रिय सहयोग दिया गया है। अवैध गतिविधियों में संलिप्त तत्वों पर सतत निगरानी रखी जा रही है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

जिला कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लगातार और सख्त हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि प्रशासन अब जमीनी स्तर पर पूरी गंभीरता के साथ सक्रिय है। वन संपदा की सुरक्षा को लेकर बढ़ी हुई सतर्कता और ठोस कार्रवाई यह दर्शाती है कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के लिए अब कोई गुंजाइश नहीं बची है। जिले में यह संदेश साफ हो चुका है कि कानून का शिकंजा लगातार कसता जाएगा और वन माफिया के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तीव्रता के साथ जारी रहेगा।

  भिलाई। शौर्यपथ । भिलाई बचाओ आंदोलन के दूसरे चरण में रविवार को जनआक्रोश सड़कों पर नजर आया। भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव के नेतृत्व में सैकड़ों परिवारों, व्यापारियों और बीएसपी से जुड़े लोगों ने सिविक सेंटर पार्किंग से सेक्टर-5 स्थित 25 मिलियन चौक तक लगभग 1000 कदम की मौन पदयात्रा निकालकर BSP (सेल) प्रबंधन के निर्णयों के खिलाफ विरोध जताया।
इस पदयात्रा में बीएसपी के सेवानिवृत्त कर्मचारी, लीजधारी, टाउनशिप के व्यापारी, रिटेंशनधारी परिवारों के सदस्य, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से एकजुटता दिखाते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की।
आंदोलन के दौरान विधायक देवेंद्र यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर बीएसपी प्रबंधन जनहित में निर्णय नहीं लेता है, तो इस्पात भवन का घेराव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को प्रबंधन के साथ हुई चर्चा के आधार पर कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया है।
पदयात्रा में महापौर नीरज पाल, पूर्व विधायक अरुण वोरा, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा सहित जनप्रतिनिधि, हाउस लीज संघर्ष समिति के सदस्य, विभिन्न श्रमिक संगठनों (सीटू, एटक, एक्टू, एचएमएस) के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भिलाई बचाओ आंदोलन के इस चरण ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

रायपुर । शौर्यपथ ।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कबीरधाम जिले के ग्राम सेमरिया में आयोजित वीरांगना अवंतीबाई लोधी के 168वें बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्प अर्पित करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत-महात्माओं की पुण्य भूमि और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है, जिसे विकसित और समृद्ध बनाना राज्य सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि शांति, सुरक्षा, खुशहाली और सुशासन के मूल मंत्र के साथ प्रदेशवासियों की समृद्धि सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री साय ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी के जीवन को साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल बताते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ वीरतापूर्वक संघर्ष कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रसेवा और समाजहित के मूल्यों को अपनाएं।
उन्होंने लोधी समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज ऐतिहासिक रूप से वीरता, नैतिकता और राष्ट्रसेवा के लिए जाना जाता है और आज भी देश-प्रदेश के विकास में सक्रिय योगदान दे रहा है।

विकास कार्यों की घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं—

कवर्धा के वार्ड क्रमांक 26 में सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये
सहसपुर-लोहारा में यज्ञशाला निर्माण के लिए 20 लाख रुपये
युवाओं को खेल के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मिनी स्टेडियम निर्माण

जनकल्याण योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों, गरीबों और महिलाओं के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है, जिसके अंतर्गत अब तक 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि ‘रामलला दर्शन योजना’ के माध्यम से 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या दर्शन कर चुके हैं, वहीं बस्तर और सरगुजा में ओलंपिक जैसे आयोजनों से ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच दिया जा रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी वीरांगना अवंतीबाई लोधी के बलिदान को स्मरण करते हुए समाज से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विधायक श्रीमती भावना बोहरा, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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