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February 25, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

महानाट्य 'जाणता राजाÓ के माध्यम से जीवंत हुई शिवाजी महाराज की गौरवगाथा
छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवगाथा से आलोकित हुआ रायपुर:'जाणता राजाÓ का मंचन शुरू

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, धैर्य, रणनीति और आदर्श नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है, इसलिए हम सभी को अपने जीवन में शिवाजी जैसा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अद्भुत साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया। अफजल खाँ के साथ हुई घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी ने संकट को भांपकर धैर्य और रणनीति से निर्णय लिया और विजय प्राप्त की। इसी प्रकार शाइस्ता खान के विरुद्ध उनकी युक्तिपूर्ण रणनीति यह सिखाती है कि बड़े से बड़े शत्रु को भी सूझबूझ और साहस से पराजित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने साइंस कॉलेज मैदान पहुंचकर ऐतिहासिक महानाट्य 'जाणता राजाÓ के मंचन के दौरान संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल महान योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों वाले शासक भी थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों की आस्था का सम्मान किया और महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। माता जीजाबाई के संस्कारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज का चरित्र हमें मर्यादा, नैतिकता और सम्मानजनक आचरण का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए महाकवि भूषण की पंक्तियों का उल्लेख किया, जिनमें शिवाजी महाराज के पराक्रम और वीरता का अद्भुत वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।
राजधानी रायपुर में प्रारंभ हुआ ऐतिहासिक महानाट्य 'जाणता राजाÓ का यह विशेष मंचन 22 फरवरी तक प्रतिदिन शाम को साइंस कॉलेज मैदान में प्रस्तुत किया जाएगा। लगभग तीन घंटे की यह भव्य प्रस्तुति छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की गाथा पर आधारित है, जिसमें सजीव दृश्य, विशाल मंच सज्जा और तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से दर्शकों को ऐतिहासिक काल का जीवंत अनुभव कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के तत्वाधान में आयोजित इस महानाट्य के लिए महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में ऑडिशन आयोजित किए गए थे, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लगभग 40 स्थानीय कलाकारों का चयन किया गया। चयनित कलाकारों ने निर्देशक श्री योगेश शिरोले के मार्गदर्शन में गहन अभ्यास किया। स्थानीय कलाकारों में प्रांजल बक्षी, वर्तिका क्षीरसागर, कृति लाड, आकांक्षा और आस्था काले सहित अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।

मंचन के दौरान घोड़ों के साथ सैनिकों की टुकड़ी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही, वहीं ऊंटों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया। पुणे से आए तकनीकी विशेषज्ञ श्री कौशिक नाईक एवं श्री वैभव जोशी मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पारंपरिक प्रस्तुतियों में कोली गीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक आयामों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, महानाट्य 'जाणता राजाÓ के श्री अजीत राव आप्टे सहित महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

प्रदेश को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से प्रयास

   रायपुर / शौर्यपथ / ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने आज नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में पत्रकारों से संवाद करते हुए ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य को देश की ऊर्जा राजधानी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
डॉ. यादव ने बताया कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 30,671.7 मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत, जल विद्युत और सौर व अन्य नवीकरणीय स्रोत शामिल हैं। राज्य में ताप विद्युत के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सके और नेट जीरो कार्बन लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा जरूरत नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ में पंप स्टोरेज और जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य की पंप स्टोरेज नीति 2023 के तहत 8,300 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, वहीं निजी क्षेत्र में भी 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।
ऊर्जा सचिव ने बताया कि प्रदेश में 32,100 मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं, जिनसे लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इसके अंतर्गत ताप, न्यूक्लियर, फ्लोटिंग सोलर और पंप स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं।
पारेषण और वितरण क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उपकेन्द्रों की संख्या बढ़ी है, ट्रांसफार्मर क्षमता में विस्तार हुआ है और डिजिटल संचार नेटवर्क को मजबूत किया गया है। वहीं वितरण क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या 65 लाख के पार पहुंच चुकी है।
डॉ. यादव ने जनहितकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, पीएम कुसुम, किसान विद्युत सहायता योजना और बीपीएल परिवारों को मुफ्त बिजली योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी तेजी से विद्युतीकरण किया गया है।
इस अवसर पर सीएसपीडीसीएल, सीएसपीजीसीएल और सीएसपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पत्रकारों के सवालों का उत्तर देते हुए ऊर्जा सचिव ने विभाग की आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना भी साझा की।

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 5000 पदों पर
भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा

  रायपुर / शौर्यपथ / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के कुल 5000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन शीघ्र ही जारी किया जा रहा है। शासन ने परीक्षा आयोजन के लिये छत्तीसगढ़ व्यापम को अधिकृत किया है एवं विभाग द्वारा विज्ञापन जारी करने संबंधी सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर आवश्यक प्रपत्र व्यापम को उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही सीधी भर्ती 2023 की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल शिक्षा विभाग में 5,000 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया फरवरी 2026 में शुरू करने जा रही है। इन पदों के लिए चयन व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, यह भर्ती राज्य के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए की जा रही है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से राज्य भर के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी । भर्ती प्रक्रिया के बारे में डिटेल्ड गाइडलाइंस आने वाले दिनों में जारी की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के माध्यम से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। खास बात यह है कि इसमें व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक और प्रयोगशाला सहायक जैसे कई पद शामिल किए जा रहे हैं, जिससे अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा।
ज्ञातव्य है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक सीधी भर्ती 2023 अंतर्गत सहायक शिक्षक पद के पांचवें चरण की भर्ती प्रक्रिया में माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार सेवा समाप्त किये गये 2621 बी.एड. अर्हताधारियों के स्थापन पर डी.एड. अर्हताधारियों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया गया है।

  रिसाली / महापौर शशि सिन्हा विकास कार्य और व्यवस्थाओं का फीडबैक लेने वार्डो तक पहुंच रही है। वे अल सुबह वार्ड 15 मौहारी मरोदा पहुंची। रिसाली महापौर नागरिकों से बातचीत करते नाली पर हुए अतिक्रमण को हटाने निर्देश दिए।
मौहारी मरोदा क्षेत्र का भ्रमण करते महापौर और एमआईसी सद्स्यों ने साफ सफाई समेत व्यवस्थाओं पर नागरिकों से चर्चा की। उनका कहना था कि फीडबैक के आधार पर ही वे कार्य योजना तैयार कर विकास को गति देंगे। नागरिकों से मिले सुझाव को वे प्राथमिकता भी देंगे। इस दौरान उनकी नजर प्रजापति किराना स्टोर्स के पास नाली पर हुए अतिक्रमण पर टीकी। उन्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए। निरीक्षण के दौरान महापौर परिषद के सद्स्य अनिल देशमुख, संजू नेताम समेत प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी अमित चंद्राकर, राजस्व विभाग के प्रभारी अधिकारी योगेश सुरे, जलकार्य विभाग के गोपाल सिन्हा आदि मौजूद थे।
सफाई व्यवस्था पर दे ध्यान
निरीक्षण के दौरान महापौर शशि सिन्हा सफाई व्यवस्था को भी देखी। उन्होंने प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जाम नाली की सफाई सबसे पहले काराएं। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कहीं गंदा पानी का जमावड़ा तो नहीं हो रहा है।
नागरिकों ने की मांग

इस दौरान नागरिकों ने कुछ खंभों में लाइट नहीं जलने की शिकायत की। नागरिकों का कहना था कि गली में अंधेरा रहता है। महापौर ने नागरिकों को खंभे पर लाइट लगवाए जाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने रास्ते के बीच लगे बिजली खंभा को हटाकर अन्य स्थान पर शिफ्ट कराने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं

  रायपुर / शौर्यपथ / नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित प्रतिष्ठित "्रAI इंपैक्ट समिट" में छत्तीसगढ़ के युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर के प्रतिभाशाली सिबलिंग अनुराग मानिक और आस्था मानिक को इंडिया AI इंपैक्ट बिल्डथॉन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि 40,000 से अधिक प्रतिभागियों के बीच तीन कठिन चरणों को सफलतापूर्वक पार करते हुए शीर्ष स्थान हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार क्षमता का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सफलता छत्तीसगढ़ के युवाओं की क्षमता, आत्मविश्वास और उभरती तकनीकी शक्ति का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता में प्रस्तुत उनका "कर्तव्य" AI ऐप विशेष रूप से सराहना का केंद्र रहा। यह एप्लिकेशन AI-जनित आवाज और वास्तविक आवाज में अंतर पहचानकर लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने में सहायक होगा। तकनीक को सामाजिक सरोकारों से जोडऩे का यह प्रयास आज के डिजिटल युग में अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा अपनी परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह उपलब्धि प्रदेश में शिक्षा, नवाचार और अवसरों के विस्तार की दिशा में हो रहे समग्र विकास का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के युवा इसी प्रकार नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करते हुए छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रोत्साहन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

   दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग शहर के समग्र और योजनाबद्ध विकास को गति देने के उद्देश्य से सर्किट हाउस दुर्ग में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में नगर निगम के सभी पार्षदों एवं अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में महापौर श्रीमती अल्का बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, आयुक्त सुमित अग्रवाल सहित एमआईसी सदस्य, पार्षदगण एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में शहर के 60 वार्डों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री गजेंद्र यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक वार्ड में संबंधित पार्षदों से समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएं और दो दिनों के भीतर विस्तृत प्लान प्रस्तुत किया जाए।

कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य शासन द्वारा अधोसंरचना मद में 22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इस राशि से सभी वार्डों में आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे। विशेष रूप से प्रत्येक वार्ड में नाली निर्माण के लिए 10–10 लाख रुपये तक के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

बैठक में शहर के प्रमुख तालाबों के सौंदर्यीकरण, उनके आसपास गार्डन विकसित करने तथा मुक्तिधामों के जीर्णोद्धार को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पाइपलाइन विस्तार और नई पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्यों पर भी सुझाव आमंत्रित किए गए।

मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि दुर्ग शहर में विकास कार्य तीव्र गति से चल रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण, खेल मैदान, सर्वसुविधायुक्त मांगलिक भवन और महाराजा चौक से पुलगांव तक फोरलेन सड़क जैसे कार्य आने वाले समय में शहर के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।

महापौर श्रीमती अल्का बाघमार ने बताया कि पहले ही अधोसंरचना मद से 16 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और अब अतिरिक्त 6 करोड़ रुपये मिलने से कुल राशि 22 करोड़ से अधिक हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस राशि से शहर में मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा। महापौर ने स्पष्ट कहा कि दुर्ग के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी और सभी आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।

बैठक में बड़ी संख्या में पार्षदगण, एमआईसी सदस्य और निगम के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने वार्डों से संबंधित आवश्यकताओं और सुझावों को सामने रखा।

राजनांदगांव /शौर्यपथ /राजनांदगांव के समीप स्थित भिलाई कंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री के 54 वर्षीय कर्मचारी, अंजोरा निवासी तुकाराम साहू की ड्यूटी पीरियड के दौरान सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु हो गई। वे फैक्ट्री के कार्य से धर्मकांटा गए हुए थे, उसी दौरान यह हादसा हुआ। तुकाराम साहू फैक्ट्री के पुराने एवं समर्पित कर्मचारी थे। उनके आकस्मिक निधन से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। इसी दौरान कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का राजनांदगांव दौरा निर्धारित था।

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने तत्काल प्रदेश अध्यक्ष को मोबाइल के माध्यम से पूरी जानकारी दी। प्रदेश अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश पर जिलाध्यक्ष विपिन यादव कांग्रेसजनों के साथ पीड़ित परिवार के समर्थन में डटकर खड़े हुए और न्याय दिलाने का संकल्प लिया। मृत्यु के बाद परिजन एवं ग्रामीणजन फैक्ट्री प्रबंधन से उचित मुआवज़े की मांग कर रहे थे, किन्तु बात नहीं बनने पर वे मृतक का शव लेकर सोमनी थाने में बैठ गए।

सूचना मिलते ही कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन यादव अपने साथियों के साथ मौके पर पहुँचे। तहसीलदार एवं फैक्ट्री संचालक उदित राठी की उपस्थिति में चर्चा हुई, परंतु संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका। इसके पश्चात परिजन, ग्रामीणजन एवं कांग्रेसजनों ने अंजोरा बायपास स्थित फैक्ट्री के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। पूर्व जिलाध्यक्ष भागवत साहू, महामंत्री राहुल तिवारी, प्रवक्ता अनीस खान, चुम्मन साहू, रितेश जैन, अमित अग्रवाल, पूर्व एल्डरमैन हेमू सोनी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे। मौके पर एसडीएम राजनांदगांव एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दल-बल सहित पहुँचे और समझाइश का प्रयास किया, किन्तु सभी की एक ही मांग थी कि फैक्ट्री प्रबंधक को बुलाकर सम्मानजनक मुआवज़े पर सहमति बनाई जाए।

प्रशासन के प्रयासों के बाद फैक्ट्री प्रबंधक उदित राठी मौके पर पहुँचे। फैक्ट्री परिसर में प्रशासन की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल—जिसमें विपिन यादव, राहुल तिवारी, अनीस खान, चुम्मन साहू, अंगेश्वर देशमुख एवं परिवार के सदस्य शामिल थे—के साथ विस्तृत बैठक हुई। लंबी चर्चा के बाद प्रबंधन ने तत्काल 5 लाख रुपये की राहत राशि, लगभग 23 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवज़ा तथा मृतक की पत्नी को आजीवन पेंशन देने पर सहमति दी। सहमति बनने के बाद चक्काजाम समाप्त किया गया। परिजनों एवं ग्रामीणजनों ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सदैव श्रमिकों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

राजनांदगांव। जिले के उभरते युवा मॉडल मास्टर आदर्श गुप्ता ने राजधानी दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित फैशन शो ग्लोरियस इंडियन रनवे फैशन वीक में शानदार प्रस्तुति देकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। देश के प्रसिद्ध सेलिब्रिटी डिजाइनर द्वारा आयोजित इस भव्य आयोजन में आदर्श ने आत्मविश्वास, आकर्षक व्यक्तित्व और पेशेवर अंदाज के साथ रैंप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसकी उपस्थित दर्शकों और फैशन विशेषज्ञों ने सराहना की। मास्टर आदर्श गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र गुप्ता के सुपुत्र हैं। उन्होंने कम उम्र में ही मॉडलिंग को अपने करियर के रूप में अपनाया और निरंतर परिश्रम व समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर के मंच तक अपनी पहचान बनाई है। दिल्ली में आयोजित इस बड़े फैशन समारोह में भागीदारी उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। आदर्श इससे पूर्व भी देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों में आयोजित फैशन आयोजनों में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने नैनीताल, रांची, हैदराबाद तथा मुंबई जैसे शहरों में अपनी प्रस्तुति से विशेष पहचान बनाई है। उनकी मंच प्रस्तुति, चाल-ढाल और आत्मविश्वास ने फैशन जगत में उन्हें एक उभरते चेहरे के रूप में स्थापित किया है। दिल्ली में हुए इस फैशन वीक में उनके सफल प्रदर्शन से राजनांदगांव सहित पूरे छत्तीसगढ़ में गर्व का वातावरण है। परिवार के सदस्यों, मित्रों और शुभचिंतकों ने आदर्श को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। आदर्श ने अपने संदेश में कहा कि वे आगे भी बड़े मंचों पर निरंतर कार्य करते हुए अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

**एआई नहीं, एरोगेंस ऑफ इग्नोरेंस!

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ‘मेड इन इंडिया’ को बनाया ‘मेड इन इल्यूजन’**

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट

जिस मंच से भारत को विश्व को यह संदेश देना था कि वह अब एआई का उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है, उसी मंच को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसे कृत्य से शर्मसार कर दिया, जिसे भ्रम, अज्ञान और अकादमिक लापरवाही का संयुक्त प्रदर्शन कहना गलत नहीं होगा।

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026, भारत मंडपम—जहाँ नीति, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव का संगम होना था—वहाँ गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने चीनी रोबोट को भारतीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताकर पेश कर दिया


जब ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बना ‘सेंटर ऑफ एक्सक्यूज़’

जिस रोबोटिक डॉग को मंच से ‘ओरियन’ कहकर स्वदेशी नवाचार बताया गया, वह असल में चीन की यूनिट्री कंपनी का ‘Unitree Go2’ मॉडल निकला—जो न तो गुप्त है, न दुर्लभ, और न ही शोध का चमत्कार।
विडंबना यह रही कि 2–3 लाख रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध इस उत्पाद को यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने कैम्पस में विकसित शोध का नाम दे दिया।


वीडियो ने किया वह काम, जो विवेक नहीं कर सका

यदि सोशल मीडिया पर प्रोफेसर का दावा करता हुआ वीडियो वायरल न हुआ होता, तो शायद यह ‘स्वदेशी झूठ’ सरकारी मंच पर यूँ ही तालियाँ बटोरता रहता।
विडंबना यह है कि जिस विश्वविद्यालय से ज्ञान और सत्यनिष्ठा की अपेक्षा होती है, वहीं से गलत जानकारी आत्मविश्वास के साथ परोसी गई


सरकारी मंच, निजी लापरवाही

सरकार ने स्पष्ट कहा—दूसरे देश की तकनीक को अपनी बताने की अनुमति नहीं दी जा सकती
पर सवाल यह है कि—

  • क्या गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक बार भी तकनीकी सत्यापन की ज़रूरत समझी?

  • क्या ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ़ स्टॉल सजाने का नारा बनकर रह गया?


माफी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए

घटना के बाद आई माफी और सफाई यह बताने के लिए पर्याप्त है कि—

“प्रतिनिधि को जानकारी नहीं थी, उत्साह में गलत कहा गया।”

लेकिन यह वही उत्साह है, जिसने—

  • राष्ट्रीय मंच की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाई

  • और भारत के एआई प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया


गलगोटिया इफेक्ट: मेहनत दूसरों की, श्रेय हमारा?

यह घटना केवल एक विश्वविद्यालय की भूल नहीं, बल्कि उस मानसिकता का उदाहरण है, जहाँ
खरीदी गई मशीन को ‘खोज’ और
ब्रांडिंग को ‘ब्रेकथ्रू’
समझ लिया गया।


एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मौजूदगी नवाचार की नहीं, बल्कि नासमझी की पहचान बन गई।
यदि भारत को सच में एआई महाशक्ति बनना है, तो उसे ऐसे ‘स्वदेशी दिखावे’ से नहीं, बल्कि ईमानदार शोध से आगे बढ़ना होगा।

दुर्ग। शौर्यपथ।

शहर की राजनीति में कई बार छोटी दिखने वाली घटनाएँ भी बड़े सवाल खड़े कर जाती हैं। गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर हालिया घटनाक्रम ने यही साबित किया है। चौक का नाम “महेश चौक” घोषित होते ही शहर की फिजा में चर्चा का दौर तेज हो गया—क्या यह महज़ एक नामकरण है, या फिर शहरी सरकार की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं का आईना?

लंबित आवेदन और अचानक निर्णय

पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्यकाल में साहू समाज द्वारा “कर्मा माता चौक” और राजस्थानी ब्राह्मण समाज द्वारा “परशुराम चौक” नामकरण के लिए आवेदन दिए गए थे। दोनों प्रस्ताव एमआईसी में लंबित रहे। इसके अतिरिक्त, समीप निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर को देखते हुए “जगन्नाथ चौक” नाम की भी चर्चा थी।

लेकिन परिषद के औपचारिक निर्णय से पहले ही गंजपारा चौक को “महेश चौक” के रूप में संबोधित किए जाने की खबर सामने आई। कार्यक्रम में राम रसोई के संरक्षक चतुर्भुज राठी की उपस्थिति ने इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे दिया।

सवालों के घेरे में शहरी सरकार

वर्तमान महापौर अलका बाघमार ने पूर्व सरकार की त्रुटियों को सुधारने का संकल्प लेकर पदभार संभाला था। शपथ ग्रहण के समय निष्पक्षता और पारदर्शिता की जो बात कही गई थी, वह अब गंजपारा चौक के नामकरण प्रकरण में सवालों के घेरे में है।

यदि परिषद द्वारा अब तक औपचारिक निर्णय नहीं हुआ, तो “महेश चौक” नाम की घोषणा किस अधिकार से और किस प्रक्रिया के तहत हुई?

क्या यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरकर लिया गया, या फिर प्रभावशाली वर्गों के दबाव में जल्दबाजी में?

राम रसोई और दोहरे मापदंड का आरोप

बस स्टैंड स्थित राम रसोई के अनुबंध को लेकर भी पूर्व में अनियमितताओं की चर्चा रही है। स्वयं महापौर ने पूर्व सरकार की गलतियों का उल्लेख करते हुए दूरी बनाई थी। किंतु वर्तमान कार्यकाल में भी अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद संचालन जारी है और निगम की प्रेस विज्ञप्ति में संचालक को “समाजसेवी” के रूप में प्रस्तुत किया जाना विरोधाभास पैदा करता है।

यही कारण है कि गंजपारा चौक के नामकरण को लेकर यह धारणा बल पकड़ रही है कि कहीं न कहीं प्रभावशाली और संपन्न वर्ग की आवाज़ अन्य समाजों की अपेक्षा अधिक प्रभावी रही।

भावनाएँ बनाम राजनीति

साहू समाज, राजस्थानी ब्राह्मण समाज और उड़िया समाज की ओर से लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार न करते हुए अचानक एक नाम को आगे बढ़ाना सामाजिक संतुलन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। शहर की विविध सामाजिक संरचना में संतुलन बनाए रखना शहरी सरकार की जिम्मेदारी है।

नामकरण मात्र औपचारिकता नहीं—यह भावनाओं, पहचान और सम्मान का विषय होता है। ऐसे में यदि प्रक्रिया पारदर्शी न हो, तो अविश्वास जन्म लेता है।

निष्पक्षता की कसौटी पर बाघमार सरकार

पिछले एक वर्ष में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें शहरी सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आलोचना हुई है। गंजपारा चौक प्रकरण ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

क्या यह निर्णय प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत हुआ?

क्या परिषद की सहमति ली गई?

क्या सभी समाजों की भावनाओं का सम्मान किया गया?

इन सवालों के जवाब अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

गंजपारा चौक का नाम चाहे जो भी हो, शहर की जनता निष्पक्ष और पारदर्शी शासन की अपेक्षा रखती है। यदि निर्णय प्रक्रिया स्पष्ट और सर्वसम्मति से हो, तो विवाद की गुंजाइश कम होती है। लेकिन यदि जल्दबाजी और प्रभाव का आरोप लगे, तो चर्चा का बाजार गर्म होना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि शहरी सरकार इन उठते सवालों का जवाब कैसे देती है—और क्या निष्पक्षता की कसौटी पर स्वयं को सिद्ध कर पाती है, या यह प्रकरण भी राजनीतिक गलियारों में एक और बहस बनकर रह जाएगा।

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