
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जिला स्तरीय बाल हृदय रोग स्वास्थ्य जांच शिविर में हुए शामिल
- शिविर में नन्हें बच्चों की जांच हो जाने से सर्जरी होने के बाद बच्चे होंगे स्वस्थ : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह
- चिन्हांकित लगभग 45 बच्चों का होगा नि:शुल्क उपचार
- श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर में 22 देशों के लगभग 21 हजार से अधिक मरीजों का किया गया नि:शुल्क इलाज
- चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान एवं तकनीक से गंभीर बीमारियों का उपचार हो रहा संभव
- प्रोजेक्ट निरामया नव्या के वेबसाईट से किशोरी बालिकाओं को मिलेगी स्वास्थ्य संबंधी सलाह एवं परामर्श
- जनमानस के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मजबूती से करें कार्य
राजनांदगांव / शौर्यपथ / भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर सुशासन दिवस अंतर्गत विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबंद्ध चिकित्सालय राजनांदगांव में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के सहयोग से आयोजित जिला स्तरीय बाल हृदय रोग स्वास्थ्य जांच शिविर में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी जयंती पर स्मरण किया। उन्होंने कहा कि श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा शिविर में नन्हें बच्चों के हार्ट की स्क्रीनिंग की जा रही है। इको एवं ईसीजी के माध्यम से जांच करने पर यह पता चला है कि लगभग 45 बच्चों को सर्जरी करना जरूरी है। यह स्क्रीनिंग होने से यह पता चल पाया कि उन्हें जन्मजात हृदय की बीमारी है, जिससे बच्चों का विकास बाधित होता। शिविर में नन्हें बच्चों की जांच हो जाने से सर्जरी होने के बाद बच्चे स्वस्थ हो जाएंगे। प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की बीमारी का पता चलने पर शत-प्रतिशत इलाज होगा तथा कोई दिक्कत नहीं आएगी। उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से कहा कि बच्चों के उपचार में मदद मिलेगी तथा उनके इलाज का लगातार फॉलोअप लिया जाएगा। चिन्हांकित लगभग 45 बच्चों का नि:शुल्क उपचार होगा। उन्होंने कहा कि श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर ने 22 देशों के लगभग 21 हजार से अधिक मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया है। यह रायपुर में एक ऐसा अस्पताल है, जो ऐसे गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के लिए भूमि प्रदान की गई थी तथा एक वर्ष में यह हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा ऐसे आपरेशन किए जा रहे हैं, जो दिल्ली, चेन्नई जैसे महानगरों में होते है। देश-विदेश के मरीज दूर-दूर से यहां इलाज कराने आते हंै तथा कुछ माह रहकर स्वस्थ होकर चले जाते है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रोजेक्ट निरामया नव्या का शुभारंभ किया गया है। किशोरी बालिकाओं को इस वेबसाईट के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सलाह एवं परामर्श मिलेगा। किशोरी बालिकाएं माहवारी, हार्मोंस में आने वाले परिवर्तन, एनीमिया सहित विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को बिना किसी संकोच के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले सकेंगी और उनकी काउंसलिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह एक बेहतरीन प्रोजेक्ट है, इसके लिए किशोरी बालिकाओं को अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करें। उन्होंने श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. योगेश साठी, डीन मेडीकल कालेज डॉ. पंकज लुका एवं पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए दी। उन्होंने कहा कि सभी स्वयं सेवी संस्थाएं स्वास्थ्य के दृष्टिगत जनमानस के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मजबूती से कार्य करें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान एवं तकनीक से गंभीर बीमारियों का उपचार संभव हो सका है। इस अवसर पर उन्होंने हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड वितरण किया।
सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी केवल राजनेता ही नहीं थे वह एक लेखक, साहित्यकार, संपादक एवं कुशल वक्ता भी थे। उन्होंने उत्कृष्ट कविताओं की रचना की है। उनके कार्यकाल मेें पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया। गांव-गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों का निर्माण कराया गया तथा गांवों को शहरों से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि इस शिविर में गरीब एवं जरूरतमंद परिवार से अपने नन्हें बच्चों को लेकर जनसामान्य आए हैं। उन्होंने कहा कि हृदय रोग के ईलाज के लिए नया रायपुर में श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल स्थापित किया गया है। यहां कई देशों से ईलाज कराने के लिए लोग आते हैं। छत्तीसगढ़ में एम्स की स्थापना हुई है और स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। विकसित भारत 2047 का संकल्प सभी के सहयोग से पूरा होगा। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाएं तभी फलीभूत होगी जब हम सभी मिलकर अन्त्योदय तक पहुंचाएंगे।
उल्लेखनीय है कि शिविर में चिरायु टीम द्वारा कुल 126 संभावित बच्चों का पंजीयन किया गया। जिसमें सभी बच्चों का नि:शुल्क ईसीजी एवं ईको टेस्ट किया गया। नन्हे बच्चों का ऑपरेशन चिरायु कार्यक्रम अंतर्गत श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर में किया जाएगा। इस दौरान श्री सत्य सांई संजीवनी अस्पताल नवा रायपुर के मुख्य ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश साठे, शिशु ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीनदयाल नागर, ट्रस्ट ऑफिसर श्री एस जगदीश राव वेंकट कोमपेला, कॉडिनेटर मेंडिकल सर्विसेस डॉ. निखिल शुक्ला सहित अन्य स्टॉफ उपस्थित थे। इस अवसर पर महापौर श्री मधुसूदन यादव, अध्यक्ष जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक श्री सचिन बघेल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती किरण साहू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनिता मंडावी, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री रमेश पटेल, श्री भरत वर्मा, श्री कोमल जंघेल, श्री संतोष अग्रवाल, श्री राजेन्द्र गोलछा, श्री सौरभ कोठारी, श्री तरूण लहरवानी, श्री गोलू गुप्ता, श्री सुमित भाटिया, श्री मोनू बहादुर, श्री प्रखर श्रीवास्तव, पद्मश्री डॉ. पुखराज बाफना, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, पुलिस अधीक्षक श्रीमती अंकिता शर्मा, वन मंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अधिष्ठाता मेडिकल कालेज डॉ. पीएम लुका, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन, संयुक्त संचालक सह अधीक्षक डॉ. अतुल देशकर, डॉ. पवन जेठानी, डॉ. मीना आरमो, श्री संदीप ताम्रकार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
दुर्ग । शौर्यपथ । न्यायपालिका की भाषा में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का अपना संवैधानिक और कानूनी महत्व होता है। इनमें से दो शब्द—“आरोपी” और “दोषी”—ऐसे हैं, जो किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा, कानूनी स्थिति और पूरे जीवन की दिशा बदल सकते हैं। अक्सर सार्वजनिक विमर्श, मीडिया रिपोर्टिंग और राजनीतिक बयानबाज़ी में इन शब्दों का गलत या लापरवाह प्रयोग देखा जाता है, जो न केवल व्यक्ति के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि संविधान की मूल भावना के भी विरुद्ध जाता है।
आरोपी कौन होता है?
किसी व्यक्ति के विरुद्ध जब पुलिस या जांच एजेंसी किसी मामले में उसका नाम दर्ज करती है, तब वह व्यक्ति आरोपी कहलाता है। इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ है कि वह व्यक्ति जांच की प्रक्रिया में है। आरोपी होने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि उसने अपराध किया ही है।
संविधान और कानून की दृष्टि में आरोपी के संबंध में यह मान्यता सर्वोपरि है कि—जब तक माननीय न्यायालय द्वारा सभी तथ्यों, साक्ष्यों और दलीलों की जांच के बाद कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक उस व्यक्ति को दोषी नहीं कहा जा सकता। यही कारण है कि संविधान की भाषा में उसे केवल और केवल आरोपी कहा जाता है।
दोषी कब कहलाता है व्यक्ति?
दोषी शब्द का प्रयोग तब होता है, जब न्यायपालिका यह तय कर देती है कि संबंधित व्यक्ति ने भारत के संविधान और कानून व्यवस्था की अवहेलना की है और वह कानून के विरुद्ध अपराध का दोषी पाया गया है।
दोषी करार दिए जाने से पहले न्यायालय:
उपलब्ध सभी साक्ष्यों की गहन जांच करता है,अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनता है,कानून की कसौटी पर तथ्यों को परखता है। इन सभी प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद यदि न्यायालय सजा देता है, तभी व्यक्ति दोषी कहलाता है। यदि सजा नहीं दी जाती, तो वही व्यक्ति निर्दोष माना जाता है।
निर्दोषता की संवैधानिक धारणा
भारतीय संविधान और न्यायिक प्रणाली का एक मूल सिद्धांत है—निर्दोषता की धारणा (Presumption of Innocence)। इसका अर्थ है कि जब तक अपराध सिद्ध न हो जाए, तब तक प्रत्येक व्यक्ति निर्दोष माना जाता है। यह सिद्धांत नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है और किसी भी व्यक्ति को जल्दबाज़ी में अपराधी ठहराए जाने से रोकता है।
शब्दों की लापरवाही और उसके दुष्परिणाम
आरोपी को दोषी कह देना केवल शब्दों की गलती नहीं, बल्कि यह व्यक्ति की सामाजिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है,निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकता है,न्यायालयीन प्रक्रिया पर दबाव बना सकता है और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।
इसीलिए मीडिया, राजनेताओं और सार्वजनिक मंचों पर बोलने वालों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायपालिका की भाषा का सम्मान करें और निर्णय आने से पहले किसी को दोषी घोषित न करें।
हाल ही देखा गया है कि बलोदा बाजार आगजनी की घटना जो अभी माननीय न्यायालय में विचाराधीन है इस पर माननीय न्यायालय का कोई फैसला नहीं आया है ऐसे में मिडिया संस्था/ संस्थाओ द्वारा विधायक देवेन्द्र यादव को दोषी करार देना कही ना कही संविधान से प्राप्त अधिकारों का हनन माना जा सकता है
न्याय, भाषा और जिम्मेदारी
आरोपी और दोषी के बीच का अंतर केवल कानूनी नहीं, बल्कि संवैधानिक, नैतिक और मानवीय भी है। आरोपी वह है, जिस पर अभी निर्णय आना बाकी है; दोषी वह है, जिसे न्यायपालिका ने अपराध सिद्ध होने के बाद सजा दी है। एक जिम्मेदार समाज वही होता है, जो न्यायालय के फैसले का इंतजार करता है, कानून की प्रक्रिया में विश्वास रखता है और शब्दों के प्रयोग में संयम बरतता है। यही लोकतंत्र की मजबूती और संविधान के सम्मान की सच्ची पहचान है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्रिसमस पर्व की प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई दी हैं। उन्होंने कहा कि क्रिसमस का पर्व प्रेम, करुणा, त्याग और सेवा की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कामना की कि क्रिसमस का यह पर्व प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति लेकर आए तथा सभी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शैलेन्द्र नगर स्थित वरिष्ठ साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्वर्गीय श्री विनोद कुमार शुक्ल के निवास पहुँचे और उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के पार्थिव शरीर को कंधा देकर उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं तथा असंख्य पाठकों और साहित्य-प्रेमियों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी से उपजे महान साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुँची है। उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता, मानवीय सरोकारों और सरल किंतु गहन अभिव्यक्ति की अनुपम मिसाल हैं।उन्होंने कहा कि श्री शुक्ल की लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की। उनका साहित्य न केवल पाठकों को गहराई से स्पर्श करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा। साहित्य जगत में उनका अवदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व की अंतिम यात्रा थी, जिन्होंने साहित्य जगत को ऐसी अनमोल कृतियाँ दीं, जो साहित्य संसार की थाती है। साहित्यकार और कवि के विचार सदैव जीवित रहते हैं, उनकी कलम की स्याही, शब्दों में अमर हो जाती है। विनोदजी का साहित्य हमारी सांस्कृतिक चेतना को दिशा देता रहेगा, उनकी स्मृतियाँ सदैव हमारे बीच जीवंत रहेंगी।
श्री शुक्ल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।इस अवसर पर कवि डॉ. कुमार विश्वास, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी अलोक सिंह, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार, जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी गण उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का नया युग,आगामी वर्ष ‘महतारी गौरव वर्ष’ घोषित
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार नित-नये फैसले ले रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के लिए छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 तैयार किया गया है। विकसित छत्तीसगढ़ में महिलाओं की सशक्त भागीदारी को देखते हुए राज्य में आगामी वर्ष को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘महतारी गौरव वर्ष’ में महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गरिमा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का सशक्त संकल्प सिद्ध होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वर्ष छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति के नेतृत्व, सहभागिता और सम्मान का एक नया अध्याय लिखेगा, जो विकसित, समरस और सशक्त छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार को सबसे बड़ा आशीर्वाद माताओं और बहनों से प्राप्त होता है। उनके विश्वास, समर्थन और आशीष से ही जनसेवा के कार्यों को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। इसी भावनात्मक और सामाजिक दायित्वबोध से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का पहला वर्ष ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में समर्पित रहा, जिसमें शासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना हुई। दूसरा वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को समर्पित ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसके दौरान आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, सामाजिक विकास और जनकल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य पूरे हुए। अब सेवा का आगामी वर्ष मातृशक्ति को समर्पित ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें राज्य की सभी प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों का केंद्रबिंदु माताएँ और बहनें होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर किए गए कार्यों ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और निर्णय क्षमता को अपनी नीतियों का मूल आधार बनाते हुए सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई दिशा तय की है।
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूती देने वाली महतारी वंदन योजना के अंतर्गत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 22 किश्तों में 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। महिला कल्याण के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य की विकास यात्रा के केंद्र में महिलाएँ हैं।
महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाने के उद्देश्य से रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट, 368 महतारी सदनों का निर्माण, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय का ऑनलाइन भुगतान जैसे निर्णयों ने सुशासन और पारदर्शिता को और सुदृढ़ किया है। स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 42,878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। वहीं, बस्तर सहित छह जिलों में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है।
महिला आजीविका के नए अवसर सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नवाबिहान योजना, डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा योजना, सिलाई मशीन सहायता, तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना जैसी पहलें लागू की गई हैं। कन्याओं के विवाह में सहयोग हेतु मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सहायता राशि का बड़ा हिस्सा सीधे कन्या के बैंक खाते में जमा किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता दोनों को बल मिला है।
महिला सुरक्षा के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक पहल की है। वन-स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन ने संकट की घड़ी में त्वरित और प्रभावी सहायता सुनिश्चित की है। सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है।
किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए शुचिता योजना, साइकिल वितरण योजना, तथा नवा रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण तैयार करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, नवाबिहान, लखपति दीदी, शुचिता और महतारी सदन जैसी पहलें महिलाओं के समग्र विकास का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।
वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपये का बजट आवंटित कर राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिला कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई दिशा, नई उम्मीद और नए परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
शौर्यपथ महासमुन्द ब्यूरो संतराम कुर्रे
पिथौरा:- छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी निती में अधिकारियों की ऐसी मनमानी की आज किसानों को धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।पिथौरा तहसील कार्यालय में रोजाना किसान आकर आन लाईन पंजीकरण को लेकर वारिसान पंजीकरण को लेकर एग्रीस्टेक को लेकर सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक डटे रहते हैं।और शासकीय कंम्पयूटर आपरेटर सिर्फ एक जवाब देता है सर्ववर डाऊन लिंक फेल आई डी ब्लाक की बात करता है।पिथौरा तहसीलदार कार्यालय मे 30/40 किलोमीटर दूर के किसान टिफिन लेकर आते हैं परन्तु कोई काम नहीं हो रहा है।अमर सिंह गोपालपुर,खिरसाखर खैरझुड़ी, जय कुमार पिपरौद,लेखराम साहू डोगाझर,विक्रम दीवान,बिजरापाली दिगंबर भुरकोनी बुंदेली सेवाती कोलदा सुखीपाली आदि गांवों के किसान तहसीलदार कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं।डिधेपुर और बरेकेल के दो चार किसान कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई पर शिकायत सिर्फ शिकायत बन कर रह गई कलेक्टर साहब कहते हैं हमे ऊपर से आदेश नही है।पिथौरा क्षेत्र के किसान कांग्रेस के प्रदेश सचिव संजय सिन्हा ने किसानों को हो रही धान पंजीकरण में परेशानी को लेकर कलेक्टर को लेटर लिख कर लिखित शिकायत किया है, समास्या का निराकरण करने की मांग की और कहा जिस राज्य में अन्न दाता किसान परेशान होगा वहां सरकार की सफालता नहीं विफालता की पहचान है।।पिथौरा क्षेत्र में धान खरीदी का हाल बेहाल है जहां किसान पंजीकरण कराने को लेकर परेशान हैं।वहीं तहसीलदार स्वयं होकर भी कार्यालय में किसानों की समास्या को हल करने में ध्यान नहीं दें रहे सिर्फ और सिर्फ बैठक की बातें कह कर बातों को टाल देते हैं व किसानों का मेहनत से कमाया गया खेती का धान को फर्जी बता कर पकड़ा जा रहा है ये उचित नही है।।।धान पंजीकरण को लेकर किसान 1/1माह से तहसीलदार कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। तहसीलदार कार्यालय में जब किसान नेता संजय सिन्हा ने अधिकारी से पक्ष लेना चाहा तो तहसीलदार कार्यालय के बाबू ने कहा तहसीलदार साहब बैठक में व्यस्त हैं।जबकि बैठक हाल जनपद के बगल में है वहां सिर्फ चपरासी ही था। चपरासी से पुछा की अंदर बैठक चल रही है तो चपरासी ने बताया की कोई बैठक नहीं चल रही है। तहसीलदार कार्यालय में अधिकारी की गाड़ी खड़ी थी। कोई बैठक नहीं चल रही थी । अधिकारी किसानों की समास्या से दूरी बना कर चल रहे हैं।। शासन की धान खरीदी की निती में अधिकारियों की मनमानी सरकार के लिए भविष्य में नुकसान दायक साबित हो सकती है।।
रायपुर / शौर्यपथ /
ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और 'विकसित भारत ञ्च2047Ó के राष्ट्रीय विजन को साकार करने की दिशा में भारत सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक पहल के तहत 'विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) (व्हीबी जी राम जी) अधिनियम 2025Ó लागू किया गया है। इस नए अधिनियम के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए प्रदेशभर में विशेष ग्राम सभाओं के आयोजन के निर्देश जारी किए गए हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिनियम के लिए जिला एवं जनपद स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं एवं ग्राम सभा में चर्चा के बिंदु हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
विशेष ग्राम सभा के आयोजन के दौरान ग्राम पंचायतों में गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाएगा तथा ग्राम सभा की तिथि व समय का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। ग्रामीणों, श्रमिकों, महिलाओं, अनुसूचित जाति - जनजाति परिवारों एवं अन्य कमजोर वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। ग्राम सभा में व्हीबी जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों, बढ़ी हुई रोजगार गारंटी तथा विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा और मार्गदर्शन दिया जाएगा। अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं की मुद्रित प्रतियां भी वितरित की जाएंगी एवं विस्तार पूर्वक जानकारी दी जाएगी।
24 और 26 दिसंबर को विशेष ग्राम पंचायतों का होगा आयोजन
निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर 24 दिसंबर 2025 को विशेष ग्राम सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें व्हीबी जी राम जी योजना को एजेंडा में शामिल किया जाएगा। अनूसूचित क्षेत्रों को छोड़कर शेष ग्राम पंचायतों में 26 दिसंबर 2025 को 'विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)Ó के प्रति जनजागरूकता हेतु विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा।
संपूर्ण कार्यवाही पंचायत निर्णय एप पर होगी अपलोड
विशेष ग्राम सभा की संपूर्ण कार्यवाही, फोटो एवं वीडियो को वास्तविक समय में 'पंचायत निर्णयÓ मोबाइल ऐप में अपलोड किया जाएगा। साथ ही वाइब्रेंट ग्राम सभा पोर्टल एवं जीपीडीपी पोर्टल में शत-प्रतिशत प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
125 दिनों के मजदूरी-रोजगार की मिलेगी वैधानिक गारंटी
यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अधिकार को और मजबूत करता है। इसके अंतर्गत अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी-रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यदि मांग के बावजूद समय पर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता देना राज्य सरकार की बाध्यता होगी। मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा भी दिया जाएगा। कार्य योजनाएं ग्राम सभा के माध्यम से तैयार होंगी, जिससे ग्राम स्तर पर निर्णय और पारदर्शिता बढ़ेगी। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशासनिक मद की सीमा बढ़ाकर की गई 9 प्रतिशत
प्रशासनिक मद की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत की गई है, जिससे फील्ड स्तर के कर्मचारियों की सेवाएं सुदृढ़ होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और नए अधिनियम के लागू होने से रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे। राज्य शासन इस अधिनियम के द्वारा ग्रामीण रोजगार, आजीविका, पारदर्शिता और पंचायत सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है जिससे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनेंगे।
मुंगेली / शौर्यपथ / जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के पूर्ण उन्मूलन की दिशा में प्रशासन ने ठोस पहल करते हुए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत आगामी 100 दिनों तक विशेष जागरूकता एवं गतिविधि आधारित कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान 08 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती संजुला शर्मा के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्रीमती अंजुबाला शुक्ला के नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
भारत सरकार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 27 नवंबर 2024 को प्रारंभ किए गए बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने पर इसे दूसरे चरण के रूप में व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता एवं सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्रों में सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है। प्रशासन द्वारा नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति समाज को जागरूक किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 10 मार्च 2024 को बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का शुभारंभ किया गया था। इसी क्रम में जिला मुंगेली वर्ष 2025-26 में 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। वर्तमान में 50 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों द्वारा बाल विवाह मुक्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है, जो जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप 31 मार्च 2029 तक पूरे राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर जिला प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला स्तरीय टीम द्वारा निर्धारित समय-सीमा से पूर्व लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत जिले की शैक्षणिक संस्थाओं, धार्मिक स्थलों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों, डीजे एवं बैंड संचालकों से संवाद कर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही शिविरों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह रोकथाम की शपथ दिलाकर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया जा रहा है।
मोहला / शौर्यपथ /
श्रम विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक दीर्घायु सहायता योजना निर्माण श्रमिकों के लिए दुर्घटना एवं गंभीर बीमारियों की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योजना का उद्देश्य पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को दुर्घटना, स्वास्थ्य उपचार एवं गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत दुर्घटना की स्थिति में चिकित्सा कराने पर वास्तविक व्यय अथवा अधिकतम 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
इसके साथ ही पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य सहायक उपकरणों हेतु भी सहायता का प्रावधान किया गया है। दृष्टिबाधित श्रमिकों को चश्मा हेतु 1 हजार रुपए, कृत्रिम दंत हेतु 5 हजार रुपये तथा श्रवण बाधित यंत्र हेतु 6 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। यदि कोई श्रमिक 15 दिवस से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहता है, तो उस अवधि में घोषित न्यूनतम वेतन के मान से 15 दिवस के बराबर वेतन की प्रतिपूर्ति मंडल द्वारा की जाएगी। योजना के अंतर्गत मंडल में निरंतर तीन वर्ष तक पंजीकृत श्रमिक यदि हृदय शल्य क्रिया, गुर्दा या लीवर प्रत्यारोपण, मस्तिष्क अथवा रीढ़ की हड्डी की शल्य क्रिया, घुटना प्रत्यारोपण, कैंसर उपचार या लकवा जैसी गंभीर बीमारियों से पीडि़त होते हैं, तो उनके बेहतर इलाज, दवा एवं चिकित्सा हेतु वास्तविक व्यय अथवा अधिकतम 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता राशि प्रदेश में संचालित आयुष्मान भारत योजना एवं खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के अतिरिक्त होगी।
पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया
योजना के लिए 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के पंजीकृत निर्माण श्रमिक पात्र होंगे। श्रमिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से विभागीय वेब पोर्टल, श्रमेव जयते मोबाइल ऐप, किसी भी चॉइस सेंटर, संबंधित श्रम कार्यालय अथवा मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ श्रमिक पंजीयन परिचय पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, अस्पताल द्वारा जारी उपचार संबंधी प्रमाण पत्र तथा दुर्घटना की स्थिति में एफआईआर रिपोर्ट की स्कैन प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन की जांच उपरांत पात्रता अनुसार सहायता राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से हितग्राही के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी।
मुंगेली / शौर्यपथ / ग्रामीण क्षेत्रों में हितग्राहियों की आय बढ़ाने और स्थायी आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 600 आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह योजना विभिन्न विभागों के समन्वय (कन्वर्जेन्स) से संचालित की जा रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे।
आजीविका डबरी के निर्माण से वर्षा जल संचयन, भू-जल रिचार्ज तथा खेतों में आवश्यक सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित होगी। इससे खरीफ एवं रबी दोनों फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी। साथ ही, पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर पात्र हितग्राहियों का चयन कर कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। आजीविका डबरी ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन, रोजगार सृजन और आय संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाएगी।
कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ श्री प्रभाकर पाण्डेय ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि आजीविका डबरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी मॉडल है। विभिन्न विभागों के कन्वर्जेन्स से यह योजना लोगों को बहुआयामी लाभ प्रदान करेगी। जिले में 600 आजीविका डबरी के निर्माण से बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और साथ ही जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे मनरेगा योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक आजीविका डबरी निर्माण के लिए आगे आएँ और इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएँ।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
