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लखनऊ | (शौर्यपथ समाचार)
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं, जहां वे 6 और 7 मई को आयोजित होने वाले “फ्रूट होराइज़न-2026” कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह आयोजन देश के बागवानी और फल उत्पादन क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसमें किसानों से लेकर वैज्ञानिकों और निर्यातकों तक सभी प्रमुख हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
पहले दिन 6 मई को गोमतीनगर स्थित होटल रेनेसां में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान निर्यातकों और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान फल निर्यात को बढ़ावा देने, वैश्विक बाजार की चुनौतियों, गुणवत्ता सुधार और प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होगी। शाम को प्रगतिशील निर्यातकों के साथ विशेष बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें निर्यात क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा।
दूसरे दिन 7 मई को मुख्य कार्यक्रम आईसीएआर के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा में आयोजित होगा। यहां श्री चौहान किसानों, पौधशाला संचालकों और प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ संवाद करेंगे। इसके पश्चात मुख्य सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही और श्री दिनेश प्रताप सिंह भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम के एजेंडे में फल उत्पादन की गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन, निर्यात बढ़ाने की रणनीति, “जीरो रिजेक्शन” नीति, एफपीओ (FPO), एफपीसी (FPC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से नई तकनीकों, आधुनिक प्रसंस्करण पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के अवसरों पर भी चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि “फ्रूट होराइज़न-2026” जैसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने, बागवानी क्षेत्र में नवाचार लाने और भारत को वैश्विक फल निर्यात के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे, जिससे नीति और तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
कोलकाता |
पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ लोकतांत्रिक परंपराएं और संवैधानिक नियम आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पद छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद राज्य में एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) की आहट सुनाई दे रही है। चुनावी नतीजों के बाद उभरी यह स्थिति अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजभवन की शक्तियों और संविधान के अनुच्छेदों के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
संवैधानिक मर्यादा और राज्यपाल की शक्तियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना किसी व्यक्तिगत इच्छा का नहीं, बल्कि विधायी संख्याबल का विषय है। इस स्थिति में निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
अनुच्छेद 164 और 'प्रसादपर्यंत' का सिद्धांत: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और सरकार राज्यपाल के "प्रसादपर्यंत" (Pleasure of the Governor) पद पर बनी रहती है। यदि विधानसभा में बहुमत खो जाता है, तो राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने की संवैधानिक शक्ति होती है।
फ्लोर टेस्ट (Floor Test): यदि बहुमत को लेकर कोई भी धुंधली तस्वीर सामने आती है, तो 'शक्ति परीक्षण' ही एकमात्र रास्ता है। राज्यपाल सदन में बहुमत साबित करने का आदेश दे सकते हैं। आंकड़े पक्ष में न होने पर इस्तीफा अनिवार्य हो जाता है।
अनुच्छेद 356 की संभावना: यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देतीं और नई सरकार के गठन में बाधा उत्पन्न होती है, तो इसे 'संवैधानिक तंत्र की विफलता' माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
ममता बनर्जी की रणनीति: 'फ्री बर्ड' बनाम कानूनी लड़ाई
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी भावी रणनीति के संकेत देते हुए स्पष्ट किया है कि वे इस लड़ाई को सड़क और अदालत दोनों जगह लड़ेंगी:
चुनावी नतीजों को चुनौती: मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए परिणामों को न्यायालय में चुनौती देने का मन बनाया है।
जनता के बीच संघर्ष: उन्होंने खुद को एक "फ्री बर्ड" की संज्ञा देते हुए कहा है कि वे अब आम नागरिक के रूप में जनता के बीच जाकर 'संघर्ष' करेंगी।
INDIA गठबंधन का साथ: राज्य की राजनीति से इतर, ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं।
निष्कर्ष: अंतिम निर्णय संख्याबल का
लोकतंत्र की बुनियादी शर्त 'बहुमत' है। यदि विपक्षी खेमे (भाजपा) के पास स्पष्ट बहुमत है, तो राजभवन को नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी मुख्यमंत्री बिना सदन के विश्वास के अनिश्चितकाल तक पद पर काबिज नहीं रह सकता।
आने वाले 48 घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक होने वाले हैं। क्या राज्य एक सुचारू सत्ता परिवर्तन देखेगा, या फिर यह विवाद देश के सबसे बड़े कानूनी और संवैधानिक मामलों में तब्दील हो जाएगा? पूरे देश की नजरें अब कोलकाता के राजभवन पर टिकी हैं।
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास में साल 2026 एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है, जिसने दशकों पुराने द्रविड़ियन किलों की दीवारों को हिलाकर रख दिया। अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे पर्दे के पीछे खड़े जिस शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह हैं— प्रशांत किशोर (PK)।
प्रशांत किशोर, जिन्होंने खुद को कभी औपचारिक रणनीतिकार नहीं बल्कि एक "शुभचिंतक" कहा, उन्होंने विजय की लोकप्रियता को एक ऐसी चुनावी मशीनरी में तब्दील कर दिया, जिसने DMK और AIADMK के पारंपरिक प्रभुत्व को ध्वस्त कर दिया।
1. अकेले लड़ने का साहसिक जुआ (The Solo Warrior Ethos)
पीके की सबसे महत्वपूर्ण सलाह थी— "गठबंधन के जाल से बाहर निकलना।" जहाँ नए दल अक्सर किसी बड़े खेमे का सहारा ढूंढते हैं, वहीं किशोर ने विजय को सभी 234 सीटों पर अकेले लड़ने का आत्मविश्वास दिया। उनका तर्क स्पष्ट था: यदि आप विकल्प बनना चाहते हैं, तो आपको पुराने विकल्पों से अलग दिखना होगा। इस रणनीति ने TVK को एक स्वतंत्र और स्वच्छ छवि प्रदान की।
2. फैन क्लब से कैडर तक का सफर
विजय के पास लाखों प्रशंसकों की फौज थी, लेकिन चुनाव रैलियों की भीड़ को वोटों में बदलना एक चुनौती थी। प्रशांत किशोर ने 'विजय मक्कल इयक्कम' (VMI) के उत्साही प्रशंसकों को अनुशासित बूथ-स्तरीय कैडर में बदल दिया। उन्होंने 'बूथ मैपिंग' और 'वोटर सेगमेंटेशन' जैसे आधुनिक औजारों का इस्तेमाल कर स्टारडम को एक जमीन पर काम करने वाली 'पॉलिटिकल मशीन' बना दिया।
3. 'द्रविड़ियन थकान' को भांपना और 'नया विकल्प' पेश करना
तमिलनाडु की जनता दशकों से दो दलों के बीच बारी-बारी से सत्ता का खेल देख रही थी। पीके ने इस "राजनीतिक थकान" को सही समय पर पहचाना। उन्होंने विजय को महज एक अभिनेता नहीं, बल्कि "तमिलनाडु की नई उम्मीद" के रूप में ब्रांड किया। रोजगार, शिक्षा और नशामुक्त तमिलनाडु जैसे ठोस मुद्दों पर आधारित रोडमैप ने युवाओं और तटस्थ मतदाताओं को टीवीके की ओर आकर्षित किया।
4. भविष्यवाणी जो हकीकत बनी
फरवरी 2025 में प्रशांत किशोर ने एक साहसी दावा किया था कि यदि विजय अकेले लड़ते हैं, तो वह तमिलनाडु जीत सकते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा था कि— "विजय को जिताने के बाद मैं तमिलनाडु में महेंद्र सिंह धोनी से भी ज्यादा लोकप्रिय बिहारी बन जाऊंगा।" आज, मई 2026 के चुनावी नतीजों ने इस भविष्यवाणी पर मुहर लगा दी है। भले ही पीके बिहार में अपनी पार्टी 'जन सुराज' में व्यस्त रहे, लेकिन उनके द्वारा खींची गई शुरुआती लकीर ही जीत का मार्ग बनी।
निष्कर्ष: एक नए युग का सूत्रपात
प्रशांत किशोर के रणनीतिक मार्गदर्शन और विजय के करिश्माई नेतृत्व के मेल ने यह साबित कर दिया कि सही माइक्रो-मोबिलाइजेशन और स्पष्ट नैरेटिव के साथ किसी भी राजनीतिक दुर्ग को जीता जा सकता है। 2026 की यह जीत केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'कल्ट' के उदय की कहानी है।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights):
रणनीति: सभी 234 सीटों पर बिना गठबंधन के चुनाव लड़ना।
बदलाव: फैन क्लब को बूथ-स्तर की चुनावी मशीनरी में तब्दील करना।
एजेंडा: शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार मुक्त शासन पर ध्यान।
परिणाम: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों बाद एक तीसरे ध्रुव का पूर्ण उदय।
चेन्नई /
तमिलनाडु की सियासत में आज एक ऐसा सूर्योदय हुआ है जिसने पिछले पांच दशकों से चले आ रहे 'द्रविड़ियन' समीकरणों को जड़ से हिला दिया है। सिल्वर स्क्रीन पर अपनी एक मुस्कान से करोड़ों दिलों को धड़कने वाले जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें दुनिया 'थलपति' के नाम से जानती है, अब रील लाइफ के 'कमांडर' से रियल लाइफ के 'किंग' बन चुके हैं। उनकी नवनिर्मित पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) ने 2026 के विधानसभा चुनावों में वह कर दिखाया है जिसे कल तक राजनीतिक पंडित 'असंभव' मान रहे थे।
चुनावी आँकड़े: 'विजयरथ' की अविश्वसनीय रफ्तार
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। ताजा परिणामों ने राज्य को चौंका दिया है:
TVK की सुनामी: विजय की पार्टी 108 (107-109) सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
दिग्गजों का पतन: सबसे बड़ा उलटफेर कोलथुर सीट पर हुआ, जहाँ TVK के नवागंतुक वी.एस. बाबू ने मौजूदा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को हराकर द्रविड़ राजनीति के सबसे बड़े स्तंभ को हिला दिया।
पेरम्बूर से विजय की हुंकार: स्वयं विजय ने पेरम्बूर सीट से DMK के कद्दावर नेता आर.डी. शेखर को भारी मतों के अंतर से शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता पर मुहर लगा दी है।
एक सितारे का 'राजनेता' में रूपांतरण
विजय का उदय कोई संयोग नहीं, बल्कि 15 वर्षों की सोची-समझी रणनीति का परिणाम है:
जमीनी नींव (2009-2021): विजय ने अपने प्रशंसक क्लबों (VMI) को केवल फिल्म प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जनकल्याण के औजार में बदला। 2021 के स्थानीय चुनावों में मिली जीत ने ही संकेत दे दिया था कि 'थलपति' की सेना तैयार है।
सिनेमा का त्याग: फरवरी 2024 में TVK की घोषणा के साथ विजय ने अपने करियर के चरम पर फिल्मों से संन्यास लेने का साहसी फैसला किया, जिसने जनता को संदेश दिया कि वे राजनीति में 'पार्ट-टाइम' नहीं बल्कि पूर्णतः समर्पित सेवक के रूप में आए हैं।
वैचारिक त्रिकोण: विजय ने अपनी राजनीति को अम्बेडकर, पेरियार और कामराज के सिद्धांतों पर टिकाया है। सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे ने युवाओं और महिलाओं को सबसे ज्यादा आकर्षित किया।
भविष्य की राह: क्या 'किंगमेकर' बनेंगे 'किंग'?
यद्यपि TVK बहुमत के आंकड़े (118) से मात्र 10 सीटें दूर है, लेकिन सबसे बड़ा दल होने के नाते सत्ता की चाबी विजय के हाथ में ही है।
विश्लेषकों का मानना है: "विजय अब राज्य के निर्विवाद केंद्र बिंदु हैं। कांग्रेस और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं के बीच, यह लगभग तय है कि तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ विजय चंद्रशेखर शपथ लेंगे।"
निष्कर्ष:
एम.जी. रामचंद्रन (MGR) और जयललिता के बाद, विजय तीसरे ऐसे अभिनेता बने हैं जिन्होंने तमिलनाडु की जनता के सर पर अपनी लोकप्रियता का जादू इस कदर चलाया है। यह जीत केवल एक पार्टी की जीत नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक नए 'तीसरे ध्रुव' का उदय है।
तमिलनाडु अब एक नए नेतृत्व की ओर देख रहा है। क्या थलपति अपनी फिल्मों की तरह राज्य की समस्याओं का 'क्लाइमेक्स' बदल पाएंगे? पूरी दुनिया की नजरें अब चेन्नई के 'विजय निवास' पर टिकी हैं।
नई दिल्ली | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में खेड़ा की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में फिलहाल हिरासत में पूछताछ की कोई ठोस आवश्यकता नहीं दिखती।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है। आरोप था कि पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक मंच से अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई। इसी आधार पर असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की प्रकृति पर गौर करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा:
"प्रथम दृष्टया यह मामला 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता' से प्रेरित प्रतीत होता है। कानून की प्रक्रियाओं का उपयोग राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के भागने या जांच से बचने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए जेल भेजना न्यायोचित नहीं होगा।
इन शर्तों पर मिली 'आजादी'
अदालत ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिनका उल्लंघन होने पर राहत रद्द की जा सकती है:
जांच में सहयोग: खेड़ा को असम पुलिस की जांच में पूरी तरह से शामिल होना होगा।
थाने में हाजिरी: पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें अनिवार्य रूप से पेश होना होगा।
विदेश यात्रा पर रोक: बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
सबूतों की सुरक्षा: वे गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेंगे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया है, जबकि असम सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। जानकारों का मानना है कि 2026 के राजनीतिक माहौल में यह फैसला विपक्षी नेताओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह दे
खा जा रहा है।
जबलपुर | संस्कारधानी जबलपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी बांध आज चीख-पुकार और मातम का केंद्र बन गया। गुरुवार शाम करीब 5:00 बजे आए एक भीषण चक्रवाती तूफान ने पर्यटकों से भरे क्रूज को जलसमाधि दे दी। तट से महज 300 मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे में अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि प्रशासन की मुस्तैदी से 16 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।
कुदरत का तांडव: 74 किमी/घंटा की रफ्तार और डूबता क्रूज
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते 74 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने लगी। लहरें इतनी ऊंची उठीं कि क्रूज अनियंत्रित होकर एक तरफ झुक गया और पलट गया। क्रूज पर सवार पर्यटक संभल पाते, उससे पहले ही सब कुछ पानी में समा गया।
भावुक कर देने वाली दास्तां: आखिरी सांस तक बेटे को बचाती रही मां
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। एक मां ने अपने 4 साल के मासूम बेटे को डूबने से बचाने के लिए आखिरी वक्त तक अपने हाथों में ऊपर उठाए रखा, लेकिन कुदरत के आगे ममता हार गई। दोनों के शव एक साथ बरामद हुए हैं। मृतकों में दिल्ली से घूमने आया एक परिवार भी शामिल है, जिनकी छुट्टियां मातम में बदल गईं।
लापरवाही की 'लहरें': उत्तरजीवियों के गंभीर आरोप
हादसे में सुरक्षित बचे पर्यटकों ने क्रूज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल पर्यटक ने बताया:
"जब मौसम खराब हो रहा था, हमने पायलट से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने चेतावनी को नजरअंदाज किया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि हमारे पास लाइफ जैकेट तक नहीं थे। अगर जैकेट समय पर मिल जाते, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं।"
प्रशासनिक एक्शन और मुआवजे का एलान
हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
उच्च स्तरीय जांच: घटना के कारणों और सुरक्षा खामियों की जांच के लिए कमेटी गठित।
आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की राहत राशि।
कठोर कार्रवाई: क्रूज के पायलट और जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।
पर्यटन पर उठते सवाल
यह हादसा एमपी टूरिज्म और निजी ऑपरेटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आखिर क्यों खराब मौसम के अलर्ट के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया? क्या लाइफ जैकेट की उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित है?
वर्तमान में बरगी बांध पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति लापता न हो। पूरा जबलपुर आज उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहा है जिन्होंने अपनों को खोया है।
नई दिल्ली /
राजधानी दिल्ली में 1 मई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम दरों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹993 की सीधी बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब इसकी कीमत बढ़कर ₹3,071.50 प्रति सिलेंडर हो गई है।
यह वृद्धि खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे व्यवसायियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि कमर्शियल गैस का सीधा असर खाद्य पदार्थों की लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह महंगाई की नई लहर को जन्म दे सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और परिवहन लागत में वृद्धि को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
? निष्कर्ष:
कमर्शियल LPG की इस बड़ी बढ़ोतरी ने व्यापारिक वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
नई दिल्ली/गुवाहाटी, । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ा है, जिससे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर विवाद गहरा गया है।
क्या है पूरा विवाद?
5 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने रिनिकी भुइयां शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें कथित तौर पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति रखने की बात शामिल थी। इन आरोपों को रिनिकी शर्मा ने पूरी तरह फर्जी बताते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी खेड़ा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को “नकली और मनगढ़ंत” बताया है।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
24 अप्रैल 2026 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक निजी व्यक्ति को इस तरह विवाद में घसीटना गंभीर मामला है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली अस्थायी राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी और खेड़ा को असम की अदालत जाने को कहा था। अब हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद खेड़ा ने गिरफ्तारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है।
आगे क्या?
अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि खेड़ा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं। यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर संवैधानिक और आपराधिक कानून की कसौटी पर आ चुका है।
पुणे–सतारा मार्ग पर आधुनिक 6-लेन सुरंग परियोजना से घटेगा यात्रा समय, बढ़ेगी सुरक्षा और पर्यटन-व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ
नई दिल्ली/महाराष्ट्र, ।
दशकों से चुनौतीपूर्ण और जोखिमभरे सफर के लिए पहचाने जाने वाले Khambatki Ghat में अब यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। National Highways Authority of India द्वारा NH-48 (पूर्व में NH-4) पर विकसित की जा रही ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना इस क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित राजमार्ग अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।
परियोजना का एक हिस्सा परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के तहत आम जनता के लिए खोला गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर का अनुभव मिल रहा है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और इसका उद्घाटन 2026 की पहली छमाही में होने की संभावना है।
पहले जहां खंबटकी घाट का सफर संकरी सड़कों, तीखे मोड़ों और लंबे ट्रैफिक जाम के कारण तनावपूर्ण रहता था, वहीं नई सुरंग के शुरू होने से यात्रा का समय काफी कम हो गया है।
यात्रियों के अनुसार:
नई सुरंग में आधुनिक रिफ्लेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन बिंदु और चौड़ी लेन जैसी सुविधाएं यात्रियों को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान कर रही हैं।
Khambatki Ghat मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रमुख शहरों और पर्यटन स्थलों को जोड़ती है, जैसे—
साथ ही यह मार्ग लोकप्रिय पर्यटन स्थलों—
नई छह-लेन ट्विन ट्यूब सुरंग परियोजना से कई स्तरों पर लाभ होने की उम्मीद है:
✔️ यात्रा समय में बड़ी कमी
✔️ दुर्घटनाओं के जोखिम में उल्लेखनीय गिरावट
✔️ ईंधन की बचत और वाहन रखरखाव लागत कम
✔️ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
✔️ दैनिक यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक सफर
पहले जहां एक दिशा में केवल 0.85 किमी की दो-लेन सुरंग और दूसरी दिशा में लगभग 8 किमी घाट सड़क थी, वहीं अब आधुनिक तकनीक से लैस नई सुरंग इन सभी समस्याओं का समाधान बनकर उभरी है।
नई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग केवल एक इंजीनियरिंग परियोजना नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का प्रतीक बनती जा रही है। यह परियोजना दिखाती है कि जब अवसंरचना को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है, तो यह न केवल दूरी कम करती है, बल्कि समय बचाती है, जानें सुरक्षित करती है और यात्रा को भरोसेमंद बनाती है। ??
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
