August 02, 2026
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    भारत

    भारत (1077)

    ‘विकसित भारत 2047’ से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक पर मंथन, मिडिल ईस्ट तनावों के बीच सरकार अलर्ट मोड में

    **नई दिल्ली / शौर्यपथ / **
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के महत्वपूर्ण विदेशी दौरे से स्वदेश लौटते ही केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और शीर्ष अधिकारियों के साथ लगभग चार घंटे तक चली एक उच्च स्तरीय मैराथन समीक्षा बैठक की, जिसमें ‘विकसित भारत 2047’, ऊर्जा सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार और पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनावों के भारत पर संभावित प्रभावों पर गहन चर्चा हुई।

    बैठक को केंद्र सरकार की आने वाली रणनीतिक दिशा तय करने वाला अहम कदम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “विकसित भारत 2047 केवल एक विजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता है।”

    ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर विशेष फोकस

    प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं और नीतियों का सीधा लाभ आम नागरिकों तक तेज़ी और पारदर्शिता के साथ पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल गवर्नेंस और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कार्यप्रणाली में गति और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।

    मिडिल ईस्ट संकट पर सरकार सतर्क

    बैठक में पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और उसके कारण संभावित वैश्विक ऊर्जा संकट पर भी गंभीर चर्चा हुई। तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और आम जनता पर न्यूनतम पड़े।

    सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने को लेकर विभिन्न मंत्रालयों को समन्वित रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नीति आयोग और मंत्रालयों ने दी प्रजेंटेशन

    इस उच्च स्तरीय बैठक में नीति आयोग सहित कई मंत्रालयों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट और आगामी योजनाओं का प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। तेज़ गति से कार्य पूर्ण करने वाले मंत्रालयों की प्रधानमंत्री द्वारा सराहना भी की गई।

    विदेश मंत्री जयशंकर ने साझा की दौरे की उपलब्धियां

    बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया पांच देशों के दौरे की उपलब्धियों और वहां हुए रणनीतिक समझौतों की जानकारी मंत्रिमंडल को दी। इन दौरों को भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करने वाला बताया गया।

    सरकार का संदेश स्पष्ट

    प्रधानमंत्री की इस मैराथन बैठक को सरकार के “मिशन मोड” में काम करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां देश को विकसित राष्ट्र बनाने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भी सरकार पूरी सतर्कता और रणनीतिक तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है।

    नई दिल्ली:भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव (Biennial Elections) कराने के कार्यक्रम का शंखनाद कर दिया है। इन सीटों पर आगामी 18 जून 2026 को मतदान प्रक्रिया संपन्न होगी। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह चुनाव उन माननीय सदस्यों का कार्यकाल जून और जुलाई 2026 में समाप्त होने के कारण कराया जा रहा है, जो सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे हैं।

    इसके साथ ही आयोग ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 1-1 सीट पर राज्यसभा उपचुनाव कराने का भी फैसला किया है। ये दोनों सीटें मौजूदा सांसदों के विधानसभा चुनाव में चुने जाने के बाद खाली हुई थीं।

    ? चुनाव का पूरा शेड्यूल (कार्यक्रम)

    राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया जून के पहले सप्ताह से शुरू होकर 18 जून को नतीजों के साथ ही संपन्न हो जाएगी। आयोग द्वारा जारी विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:

     1 जून 2026:चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी होगी।

     8 जून 2026:नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि।

     9 जून 2026:नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) की जाएगी।

     11 जून 2026:उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।

     18 जून 2026 (सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे): सीटों के लिए मतदान (Voting) होगा।

     18 जून 2026 (शाम 5:00 बजे):मतदान खत्म होने के ठीक एक घंटे बाद वोटों की गिनती शुरू होगी और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

     ?️ राज्यों के अनुसार खाली हो रही सीटों का गणित

    यह द्विवार्षिक चुनाव देश के कुल 10 राज्यों में फैली 24 सीटों पर होने जा रहा है। किस राज्य से कितनी सीटें खाली हो रही हैं, इसका पूरा विवरण नीचे तालिका में देखा जा सकता है:

    | खाली हो रही सीटें | राज्यों के नाम |

    4-4 सीटें- आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक |

    3-3 सीटें** मध्य प्रदेश और राजस्थान |

    2 सीटें** झारखंड |

    1-1 सीट** अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम |

    (विशेष नोट: इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 1-1 सीट पर उपचुनाव भी इसी दौरान कराया जाएगा।)

     ? इन प्रमुख दिग्गजों का कार्यकाल हो रहा है समाप्त

    जून और जुलाई के इस चुनावी चक्र में देश की राजनीति के कई बड़े और कद्दावर चेहरों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन खाली हो रही सीटों पर देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी। रिटायर होने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं:

    > * **मल्लिकार्जुन खड़गे** (कांग्रेस अध्यक्ष)

    > * **एच डी देवगौड़ा** (पूर्व प्रधानमंत्री)

    > * **दिग्विजय सिंह** (वरिष्ठ कांग्रेस नेता)

    > * **जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू** (केंद्रीय मंत्री)

    इन दिग्गजों के रिटायर होने से खाली हो रही सीटों के कारण संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) का समीकरण बेहद दिलचस्प होने वाला है। सभी राजनीतिक दलों ने अब अपनी-अपनी गोटियां बिछानी और गुणा-भाग करना शुरू कर दिया है।

    नई दिल्ली। रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की कथित फिल्म ‘धुरंधर 2’ को लेकर सामने आया विवाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम रचनात्मक स्वतंत्रता की बहस का विषय बनता जा रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) ने इस मामले को गंभीर कानूनी और संवैधानिक दायरे में ला दिया है।

    क्या है पूरा मामला?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान दीपक कुमार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि फिल्म में भारतीय खुफिया एजेंसियों और सैन्य अभियानों से जुड़ी ऐसी जानकारियां दिखाई गई हैं, जो अत्यधिक संवेदनशील हो सकती हैं।

    याचिका में मुख्य रूप से यह कहा गया है कि फिल्म में:

    अंडरकवर ऑपरेशन की कार्यप्रणाली,

    रणनीतिक सैन्य प्रोटोकॉल,

    संवेदनशील लोकेशन,

    इंटेलिजेंस नेटवर्क की तकनीकी जानकारी

    को अत्यधिक वास्तविक और विस्तृत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

    सुरक्षा को लेकर क्या चिंता?

    याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक रूप से दिखाई जाती है, तो:

    भारत के गुप्त एजेंटों की पहचान और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है,

    दुश्मन देश या आतंकी संगठन भारतीय ऑपरेशनल सिस्टम को समझ सकते हैं,

    यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

    याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह मामला Official Secrets Act और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रावधानों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश दिए हैं कि वे:

    फिल्म की सामग्री की जांच करें,

    राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करें,

    और आवश्यक होने पर उचित कार्रवाई करें।

    कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भले ही किसी फिल्म को “काल्पनिक” बताया जाए, लेकिन यदि उसमें वास्तविक सैन्य या खुफिया संरचना से मेल खाते तत्व हों, तो सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    बड़ा सवाल: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

    यह विवाद एक बार फिर उस संवेदनशील बहस को सामने लाता है, जहां:

    एक ओर फिल्मकार रचनात्मक स्वतंत्रता का अधिकार रखते हैं,

    वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और गोपनीय सूचनाओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मानी जाती है।

    भारत में पहले भी कई फिल्मों और वेब सीरीज पर सेना, RAW, IB और सुरक्षा अभियानों के चित्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अदालत द्वारा सीधे मंत्रालय और CBFC को जांच के निर्देश देना इस मामले को विशेष रूप से गंभीर बनाता है।

    फिलहाल फिल्म निर्माताओं या रणवीर सिंह की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ओबीसी आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए कुल आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। सरकार ने ओबीसी कैटेगरी-ए और कैटेगरी-बी की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर नई नीति लागू करने का निर्णय लिया है।

    अब तक राज्य में ओबीसी कैटेगरी-ए के तहत 10 प्रतिशत तथा ओबीसी कैटेगरी-बी के तहत 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था। नई व्यवस्था के अनुसार केवल 7 प्रतिशत आरक्षण ही प्रभावी रहेगा। सरकार का कहना है कि यह आरक्षण केवल “वास्तविक सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हिंदू समुदायों” को दिया जाएगा, जो एससी और एसटी श्रेणी में शामिल नहीं हैं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुस्लिम समुदायों को दिए जा रहे ओबीसी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएंगे। हालांकि संशोधित सूची में कुछ मुस्लिम समुदायों के बने रहने को लेकर भी चर्चा जारी है।

    राज्य सरकार ने अपने फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप बताया है। वहीं विपक्ष ने इस निर्णय को लेकर सरकार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि इस फैसले से हजारों पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

    राज्य की राजनीति में इस फैसले के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

    नई दिल्ली ।
    भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। वर्तमान में ये अधिकारी विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों, नैतिकता और जनसेवा के मूल्यों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में अखिल भारतीय सेवाओं, विशेषकर आईएएस अधिकारियों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ अब उनसे अपेक्षाएं भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

    “करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन जरूरी”

    राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक निर्णय लेते समय उन्हें करुणा और तर्कसंगतता का संतुलन बनाए रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—

    “भावुक हुए बिना संवेदनशील बनें। नियमों का पालन करें, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को कभी न भूलें।”

    उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की निष्पक्षता उसकी न्यायप्रियता को दर्शाती है, जबकि उसकी संवेदनशीलता समाज के हर वर्ग के प्रति उसकी समावेशी सोच का प्रमाण होती है।

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रशासनिक निर्णयों में देरी को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान मानी जाती है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णयों में अनावश्यक विलंब भी लोगों के वैध अधिकारों को प्रभावित करता है।

    उन्होंने कहा—

    “निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है। जनहित और व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही सच्ची नैतिकता है।”

    युवा अधिकारियों को सीखने और नेतृत्व की सलाह

    राष्ट्रपति ने कहा कि युवा अधिकारियों को विविध परिस्थितियों और क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा, जहां उन्हें विशेषज्ञ टीमों का नेतृत्व भी करना होगा। ऐसे में उनकी सीखने की क्षमता तेज और अनुकूलन क्षमता असाधारण होनी चाहिए।

    उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा और निरंतर कार्य निष्पादन को प्रशासनिक जीवन का आधार बनाने की सलाह दी।

    “जनता और वंचित वर्ग रहें केंद्र में”

    राष्ट्रपति मुर्मु ने लोकतंत्र की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता की आकांक्षाएं उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सामने आती हैं, इसलिए अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें।

    उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “विकसित भारत” का सपना आसान परिस्थितियों में नहीं, बल्कि चुनौतियों के बीच संघर्ष करते हुए पूरा होगा।

    अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को अपने विचार और कार्यों के केंद्र में रखने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि वे विकसित एवं समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

     जगदलपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर से मंगलवार को देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास को लेकर बड़ा राजनीतिक एवं प्रशासनिक संदेश सामने आया। Amit Shah की अध्यक्षता में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद (Central Zonal Council) की 26वीं बैठक में नक्सलवाद, आदिवासी विकास, साइबर सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और राज्यों के बीच समन्वय जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

    बैठक में Vishnu Deo Sai सहित Mohan Yadav, Pushkar Singh Dhami और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह बैठक केवल प्रशासनिक समन्वय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे “नए भारत की आंतरिक सुरक्षा और विकास मॉडल” के रूप में भी देखा जा रहा है।

    अमित शाह का बड़ा ऐलान — “भारत तय समय से पहले नक्सल मुक्त”

    बैठक का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का रहा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के साहस, रणनीतिक अभियान और जवानों के बलिदान के कारण भारत तय समय सीमा से पहले ही “नक्सल मुक्त” हो चुका है।

    उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्षों तक हिंसा और भय का प्रतीक रहे कई नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब विकास, शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। शाह ने सुरक्षा बलों के योगदान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश उनके बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।

    विकास और सुशासन पर विशेष फोकस

    बैठक में केवल सुरक्षा नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों पर भी विशेष जोर दिया गया। परिषद में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई उनमें शामिल रहे:

    कुपोषण समाप्त करने के लिए संयुक्त रणनीति

    स्कूल ड्रॉपआउट कम करने के उपाय

    महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों में शत-प्रतिशत सजा सुनिश्चित करने की कार्ययोजना

    राज्यों में आधुनिक साइबर हेल्पलाइन स्थापित करने की पहल

    केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर प्रशासनिक समन्वय

    बैठक में यह भी माना गया कि केवल सुरक्षा अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विकास और विश्वास निर्माण ही स्थायी समाधान का आधार बनेंगे।

    आदिवासी महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

    बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा हुई। आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें गाय और भैंस उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय रोजगार ही उग्रवाद के खिलाफ सबसे प्रभावी सामाजिक हथियार साबित हो सकते हैं।

    अमर वाटिका पहुंचकर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

    बैठक शुरू होने से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर शहीद सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सुरक्षा बलों के जवानों के प्रति सम्मान और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी दिया गया।

    बस्तर से राष्ट्रीय संदेश

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बस्तर में इस उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन अपने आप में एक प्रतीकात्मक संदेश है। कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में अब राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और निवेश को लेकर बड़ी बैठकों का आयोजन यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार बस्तर को “संघर्ष क्षेत्र” नहीं बल्कि “संभावनाओं के क्षेत्र” के रूप में स्थापित करना चाहती है।

    बैठक ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में केंद्र सरकार सुरक्षा और विकास—दोनों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ने की रणनीति पर काम करेगी।

     

    नई दिल्ली/ ।
    दुनियाभर में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बीच यौन उत्पीड़न, डीपफेक और ब्लैकमेल से जुड़े मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका के वित्तीय केंद्र वॉल स्ट्रीट से लेकर भारत के विभिन्न राज्यों तक हाल के महीनों में सामने आए सेक्स स्कैंडलों ने समाज, कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वॉल स्ट्रीट में JPMorgan से जुड़ा बड़ा विवाद

    अमेरिका की दिग्गज वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन (JPMorgan) में एक बड़े यौन उत्पीड़न विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक के एक वरिष्ठ बैंकर ने अपनी महिला बॉस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला तब और अधिक चर्चा में आया जब इससे जुड़े कथित AI-निर्मित डीपफेक चित्र और सोशल मीडिया मीम्स इंटरनेट पर वायरल होने लगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते दुरुपयोग ने निजी छवि, प्रतिष्ठा और मानसिक सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की नकली तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें वायरल करना अब वैश्विक साइबर अपराध का बड़ा रूप लेता जा रहा है।

    भारत में भी सामने आए बड़े सेक्स स्कैंडल

    भारत में भी हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामले सामने आए हैं।
    मई 2024 में कर्नाटक का चर्चित प्रज्वल रेवन्ना सेक्स स्कैंडल देश के सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल रहा। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक बहस को जन्म दिया था।

    इसके अलावा, अप्रैल 2026 में महाराष्ट्र के अमरावती में सामने आए एक बड़े सेक्स स्कैंडल ने लोगों को झकझोर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि 19-20 वर्ष के कुछ युवकों ने कई युवतियों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल और वसूली का कथित रैकेट चला रखा था।

    डिजिटल अपराध बन रहे नई चुनौती

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एआई टूल्स और डिजिटल तकनीकों का गलत इस्तेमाल अब साइबर अपराधों को और अधिक खतरनाक बना रहा है। निजी डेटा की चोरी, मॉर्फ्ड फोटो, डीपफेक वीडियो और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।

    कानून विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त साइबर कानून, तेज जांच और डिजिटल साक्ष्यों की निगरानी बेहद जरूरी हो गई है। साथ ही लोगों को सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करते समय अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

    समाज और तकनीक के बीच संतुलन की चुनौती

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि तकनीक जहां सुविधा और विकास का माध्यम बन रही है, वहीं उसका दुरुपयोग समाज के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर मजबूत नीतियों और जागरूकता की आवश्यकता है।

    सेंटीग्रेड पैमाने के आविष्कार से लेकर जमशेदजी टाटा और नीलम संजीव रेड्डी तक, इतिहास में दर्ज हैं कई महत्वपूर्ण पड़ाव

    नई दिल्ली, ।
    19 मई का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों और ऐतिहासिक उपलब्धियों के कारण विशेष महत्व रखता है। विज्ञान, उद्योग, राजनीति और सामाजिक इतिहास से जुड़े कई ऐसे प्रसंग आज के दिन दर्ज हैं जिन्होंने दुनिया और भारत की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

    ?️ सेंटीग्रेड पैमाने का विकास

    वर्ष 1743 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ज्यां पियरे क्रिस्टीन (Jean-Pierre Christin) ने तापमान मापने के लिए सेंटीग्रेड (सेल्सियस) पैमाना विकसित किया था। यह वैज्ञानिक उपलब्धि आज पूरी दुनिया में तापमान मापन की मानक प्रणाली के रूप में उपयोग की जाती है। मौसम विज्ञान, चिकित्सा, प्रयोगशालाओं और दैनिक जीवन में इसका व्यापक महत्व है।

    ? भारत के औद्योगिक युग के शिल्पकार: जमशेदजी टाटा

    भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शामिल टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा का निधन 19 मई 1904 को हुआ था। उन्होंने भारतीय उद्योग, शिक्षा और आधुनिक आर्थिक सोच की मजबूत नींव रखी। स्टील, ऊर्जा, होटल और शिक्षा क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी भारत के औद्योगिक विकास की आधारशिला माना जाता है।

    ?? भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म

    भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को हुआ था। वे भारतीय राजनीति के सरल, संतुलित और गरिमामय व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे देश के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे जिन्हें निर्विरोध चुना गया था। उनका राजनीतिक जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    ⚫ नाथूराम गोडसे का जन्म

    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का जन्म भी 19 मई 1910 को हुआ था। भारतीय इतिहास में यह नाम एक विवादास्पद और संवेदनशील अध्याय से जुड़ा रहा है। 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के बाद देशभर में गहरा आक्रोश फैल गया था और यह घटना भारतीय लोकतंत्र एवं सामाजिक समरसता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जाती है।

    ? इतिहास के पन्नों में दर्ज विशेष दिन

    19 मई केवल तिथियों का संयोग नहीं, बल्कि विज्ञान, राष्ट्रनिर्माण, लोकतंत्र और सामाजिक चेतना से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्यायों का प्रतीक है। यह दिन हमें उन व्यक्तित्वों और घटनाओं को याद करने का अवसर देता है जिन्होंने किसी न किसी रूप में भारत और विश्व के इतिहास को प्रभावित किया।

     

    नई दिल्ली, ।
    देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के साथ महत्वपूर्ण सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह पहल “विकसित भारत @2047” के विजन के अनुरूप ग्रामीण जल प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समुदाय आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

    नई दिल्ली में आयोजित बैठकों में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना, डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के.के. मीणा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

    ग्राम पंचायतों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

    नए समझौते के तहत जल प्रबंधन प्रणाली को ग्राम पंचायत आधारित और समुदाय-केंद्रित बनाया जाएगा। ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को गांव स्तर पर जल अवसंरचना के संचालन, रखरखाव और जल शुल्क संग्रह की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण जल योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

    “जल जीवन मिशन बना जनआंदोलन” — सी.आर. पाटिल

    केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में गरिमा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण का जनआंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि मिशन की मूल समयसीमा मई 2024 थी, जिसे अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है ताकि देश के हर ग्रामीण घर तक शत-प्रतिशत नल जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    अंडमान-निकोबार बना उदाहरण

    अंडमान और निकोबार प्रशासन ने वर्ष 2021 में ही सभी ग्रामीण घरों तक 100 प्रतिशत नल जल पहुंचाने की उपलब्धि हासिल कर ली थी। उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी ने बताया कि अब मिशन 2.0 के तहत समुदाय आधारित जल प्रबंधन और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणाली को लागू किया जा रहा है।

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि द्वीप समूह में स्थायी नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों की कमी के कारण यहां जल आपूर्ति मुख्य रूप से वर्षा जल संग्रहण पर निर्भर है, इसलिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है।

    पश्चिम बंगाल में जल परियोजनाओं को मिलेगी गति

    पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार “हर घर जल” के लक्ष्य को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा करेगी। उन्होंने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और पुरुलिया जैसे पिछड़े क्षेत्रों में जल परियोजनाओं को तेज करने का भरोसा दिया।

    केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन में तेजी लाने और जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

    जल प्रबंधन में तकनीक और पारदर्शिता पर जोर

    बैठक में जल योजनाओं के वित्तीय मिलान, नियमित पेयजल आपूर्ति, स्थानीय भागीदारी और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि गांवों में स्थायी और भरोसेमंद जल आपूर्ति व्यवस्था स्थापित करना है।

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