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पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर 60.25% मतदान; युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी से बढ़ी उम्मीदें, नीतीश-तेजस्वी दोनों खेमे में बढ़ा आत्मविश्वास
पटना / शौर्यपथ /
लोकतंत्र की भूमि बिहार ने गुरुवार को एक बार फिर अपनी राजनीतिक जागरूकता और जनभागीदारी से पूरे देश को संदेश दिया। विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर औसतन 60.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया — जो पिछले 25 वर्षों में सर्वाधिक है।
यह आँकड़ा केवल वोटिंग प्रतिशत का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास और युवा मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक है।
ऐतिहासिक मतदान, नए बिहार की झलक
शाम पाँच बजे तक प्राप्त आँकड़ों के अनुसार बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में उत्साहपूर्ण मतदान देखने को मिला। 1990 के दशक के बाद यह पहला मौका है जब मतदान का प्रतिशत 60 के पार पहुँचा।
2020 के विधानसभा चुनाव में जहाँ 57.29% मतदान हुआ था, वहीं इस बार 3 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
सबसे अधिक वोटिंग बेगूसराय में 67.32% और समस्तीपुर में 66.65% रही, जबकि पटना जिले में 55.02% मतदान हुआ।
मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और लखीसराय जैसे जिलों में मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस पर्व को उत्सव की तरह मनाया।
सियासत की परीक्षा – 16 मंत्रियों और कई दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में बंद
पहले चरण में नीतीश सरकार के 16 मंत्रियों समेत तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, अनंत सिंह, मैथिली ठाकुर, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे दिग्गज उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई।कुल 1,314 उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा दाँव पर है।45,341 मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हुआ, जिन पर चार लाख से अधिक मतदानकर्मी और 65,000 से अधिक पोलिंग एजेंट तैनात रहे।
एनडीए का दावा – विकास पर मुहर, महागठबंधन का पलटवार – वोट चोरी का डर
पहले चरण की वोटिंग समाप्त होते ही सियासी दावे भी तेज हो गए।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि “बिहार के जागरूक मतदाताओं ने नीतीश कुमार के विकास और सुशासन पर मुहर लगा दी है, एनडीए दोबारा सत्ता में आएगा।”
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दावा किया – “पहले चरण में ही एनडीए 100 सीटें जीत रहा है। ज्यादा वोटिंग का फायदा हमें मिलेगा।”
वहीं, महागठबंधन की ओर से राहुल गांधी ने पूर्णिया की सभा में आरोप लगाया कि “बिहार में लाखों नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। भाजपा चुनाव चोरी की कोशिश कर रही है, लेकिन युवाओं और जेन-जी को संविधान की रक्षा करनी है।”
युवा वोटरों की एंट्री – ‘Gen-Z’ बना बिहार चुनाव का गेम चेंजर
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार राज्य के कुल मतदाताओं में 25% हिस्सा 18-29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं का है।
हर चौथा वोटर युवा है — यानी भविष्य का बिहार खुद अपने मत से गढ़ रहा है।
बेगूसराय में 25.16%, मधेपुरा में 24.66% और खगड़िया में 24.29% जेन-जी वोटर हैं।
यह नई पीढ़ी जाति या धर्म की राजनीति से परे रोजगार, पारदर्शिता, शिक्षा और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर वोट डाल रही है।
विश्वविद्यालय परिसरों से लेकर सोशल मीडिया तक, इन युवाओं की सक्रियता ने इस चुनाव को विचार और विज़न की जंग में बदल दिया है।
चुनाव आयोग की सख्त निगरानी – हर बूथ पर CCTV की नजर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने दिल्ली स्थित नियंत्रण कक्ष से पूरे बिहार की वोटिंग प्रक्रिया पर नज़र रखी।
राज्य के 45,000 से अधिक मतदान केंद्रों से लाइव फीड मंगवाए जा रहे थे।
इस बार पहली बार सभी बूथों पर CCTV कैमरे लगाए गए, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सके।
दूसरा चरण 11 नवंबर को, नतीजे 14 नवंबर को
पहले चरण की शांतिपूर्ण और रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने अब दूसरे चरण की जंग को और रोचक बना दिया है।
11 नवंबर को शेष जिलों में मतदान होगा और 14 नवंबर को मतगणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को फिर मौका दिया या तेजस्वी यादव को सत्ता की कुर्सी सौंपी।
“लोकतंत्र की असली जीत जनता की भागीदारी से होती है”
चुनाव विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार मतदान दर में वृद्धि का सीधा संबंध युवाओं और महिलाओं की बढ़ती जागरूकता से है।
महिलाओं ने गाँव-गाँव में लंबी कतारों में खड़े होकर मतदान किया, जबकि पहली बार वोट डालने वाले युवाओं ने इसे “अपना पहला राजनीतिक वक्तव्य” बताया।
समापन टिप्पणी:
बिहार का यह पहला चरण सिर्फ राजनीतिक दलों की परीक्षा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परिपक्वता और जनसक्रियता का उत्सव भी है।
25 साल बाद जब मतदान का प्रतिशत 60 के पार पहुँचा, तो यह केवल आँकड़ा नहीं रहा — यह बिहार की जनता की परिपक्व सोच, लोकतंत्र के प्रति आस्था और परिवर्तन की पुकार बन गया।
नई दिल्ली / एजेंसी /
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रथम चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जिसमें 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर करीब 3 करोड़ 75 लाख मतदाता अपनी भागीदारी से लोकतंत्र की मजबूत पड़ताल करेंगे। यह चुनाव बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है, जहां हर वर्ग की उम्मीदें जुड़ी हैं और राजनीतिक दलों के माथे चिन्हित मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर जटिलता बनी हुई है।
एनडीए गठबंधन ने इस चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने से परहेज किया है, और मुख्यमंत्री पद को चुनाव के बाद गठबंधन के बीच विचार-विमर्श के बाद तय करने का सस्पेंस बरकरार रखा है। इसके पीछे भाजपा और जदयू सहित सहयोगी दलों के मतभेद और गठबंधन की रणनीतिक विवेकशीलता संकेतित होती है। इसके बावजूद नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा और नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेता प्रचार में सक्रिय हैं, यह संदेश फैलाने के लिए कि विकास और स्थिरता एनडीए का मूल मंत्र है। भाजपा और जदयू की सीटों का बंटवारा पहले ही तय हो चुका है, और 121 सीटों के लिए एनडीए अपना पूर्ण जोर लगा रही है।
वहीं, इंडिया गठबंधन ने मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में तेजस्वी यादव को स्पष्ट रूप से घोषित किया है। राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव ने अपने दमदार प्रचार अभियान से बिहार के युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई है। कांग्रेस, सीपीआई तथा अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से महागठबंधन ने अपना चेहरा साफ करते हुए चुनावी मैदान पर पैर जमा लिए हैं। तेजस्वी यादव की छवि युवा, सशक्त और बदलाव के लिए तैयार नेतृत्व की है, जो महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं।
तीसरे मोर्चे के रूप में उभर रही जनसुराज पार्टी ने भी इस चुनाव में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। खास तौर पर युवाओं और नए मतदाताओं के बीच यह पार्टी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जो परंपरागत राजनीति में बदलाव की उम्मीद रखती है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि जनसुराज पार्टी का उदय दोनों बड़े गठबंधनों को उनकी पुराने वोट बैंक में सेंध लगाने की चुनौती दे रहा है।
यह चुनाव एक ऐसे दौर में हो रहा है जहां मतदाता अधिक जागरूक और समझदार बन चुके हैं, और मतदाताओं की भागीदारी इस बात की मिसाल होगी कि किस प्रकार लोकतंत्र की आस्था समूचे समाज को जोड़े रखती है।
संक्षिप्त तथ्य:
प्रथम चरण के 3.75 करोड़ मतदाता न केवल बिहार के भविष्य का फैसला करेंगे, बल्कि देश के लोकतंत्र की ताकत और उसकी बहुलतावादी संस्कृति को भी एक जीता-जागता संदेश देंगे। चुनाव आयोग ने भी स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
चुनाव आयोग ने कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण मतदान लोकतंत्र की जीवंतता और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सशक्त उदाहरण होगा, जहां मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले हर मतदाता की भूमिका निर्णायक होगी। मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सस्पेंस तथा दो गठबंधनों का पूर्ण तैयारी में होना इस चुनाव को और भी नाटकीय और महत्वाकांक्षी बनाता है, जिससे बिहार एवं पूरी देश की निगाहें इस महायुद्ध पर टिकी हैं।
यह चुनाव बिहार के जन-जीवन, सामाजिक गतिशीलता और आर्थिक विकास के लिए न केवल एक चुनाव है, बल्कि एक नई उम्मीद और नए भारत का संदेश भी है।
पिछले विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को 125 सीटें मिली थीं, जिसमें भाजपा ने 74 और जदयू ने 43 सीटें जीतीं। महागठबंधन को 110 सीटों का साथ मिला था, जिसमें राजद के हिस्सेदारी 75 सीटों की थी। इस बार विधानसभा चुनाव में मुख्य मुद्दे विकास, रोजगार, महंगाई, जातीय समीकरण और धर्म के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक स्थिरता हैं। मतदाता इन विषयों पर गहराई से विचार कर अपने मत का प्रयोग करेंगे।
"पिता की हत्या कर शव दफनाने का आरोप, बेटे ने 30 साल बाद डीएम से की शिकायत; गांव में फैली सनसनी"
हाथरस। शौर्यपथ। मुरसान क्षेत्र के गांव गिंलोदपुर निवासी पंजाबी सिंह ने अपने पिता बुद्ध सिंह की हत्या के 30 साल पुराने रहस्य को उजागर किया है। आरोप है कि उसकी मां उर्मिला देवी, दो भाई प्रदीप और मुकेश ने गांव के ही धनी व्यक्ति राजवीर के साथ मिलकर कपड़ा ठूंसकर और गला दबाकर हत्या की थी।
उस वक्त पंजाबी सिंह सिर्फ 9 साल का था और उसे चुप रहने की धमकी दी गई। कई वर्षों तक वह वारदात को लगभग भूल चुका था, लेकिन हाल ही में उसके भाई ने शराब के नशे में घटना का जिक्र किया, जिससे उसकी यादें ताजा हो गईं।
प्रशासनिक कार्रवाई : शिकायतकर्ता ने जिला मजिस्ट्रेट और उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर नरकंकाल की तलाश में खुदाई कराने की मांग की। डीएम के आदेश पर सदर एसडीएम, मुरसान थाने की पुलिस और बल के साथ मकान में करीब 15 फीट तक खुदाई शुरू की गई। खुदाई के बाद नरकंकाल बरामद कर लिया गया, जिसे डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया है।
गांव में सनसनी और प्रतिक्रियाशव बरामद होने के बाद गांव में दहशत और चर्चा का माहौल है। पुलिस ने फिलहाल जांच और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।
यह मामला न केवल कानून की जटिलता बल्कि पारिवारिक संबंधों में छुपे दर्द और रहस्य को भी उजागर करता है; डीएनए टेस्ट और उच्च स्तर की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
सेमीफाइनल में पांच विकेट से दर्ज की अद्भुत जीत, हरमनप्रीत और जेमिमा ने रचा इतिहास
नई दिल्ली। शौर्यपथ। लौह संकल्प, दमदार प्रदर्शन और अटूट जज़्बे ने भारत के तिरंगे को एक बार फिर ऊंचा कर दिया। महिला विश्वकप 2025 के सेमीफाइनल मुकाबले में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं की शक्ति और आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक बनी।जेमिमा रोड्रिगेज ने अपनी सधी हुई पारी से मुश्किल हालातों में टीम को संभाला, वहीं कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और जीत को सुनिश्चित किया।
गेंदबाजों ने disciplined spell डालते हुए ऑस्ट्रेलिया को बड़े स्कोर से रोका और मैदान पर भारत का वर्चस्व स्थापित किया।इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ टीम इंडिया अब विश्व क्रिकेट के शिखर की ओर कदम बढ़ा चुकी है। यह जीत बताती है कि भारतीय बेटियां खेल के हर मैदान में दुनिया को मात देने का जज्बा रखती हैं। पूरा देश इस गौरव के क्षण पर गर्वित है।
प्रमुख — राजनाथ सिंह: “विपक्ष वक्फ बोर्ड को लेकर झूठ बोलता है; संसद में बना कानून कोई नहीं हटा सकता” | अमित शाह: “बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली नहीं” | NDA ने मैथिली को आधिकारिक दर्जा दिलाया — रैलियों में विकास का वादा और परिवारवाद पर हमला
पटना / एजेंसी / बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के समीकरण तेज होते जा रहे हैं और भाजपा ने मोर्चा संभालते हुए केन्द्र के बड़े नेताओं — रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह — को दरभंगा और पटना में रैलियों के लिए उतार दिया है। भाजपा नेताओं ने रैली-सभाओं में विपक्ष पर तीखे प्रहार किए और विकास व सामान्य न्यायकथा पर जोर देते हुए मतदाताओं से समर्थन मांगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दरभंगा के हायाघाट में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष लगातार वक्फ बोर्ड को लेकर भ्रम फैला रहा है। उनके शब्दों में, “जो कानून संसद में बना है, वो बना रहेगा। संसद में बना कानून कोई नहीं हटा सकता।” राजनाथ ने यह भी कहा कि भाजपा धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करती और अफवाहों से जनता को गुमराह नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने RJD और कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान विकास पर लगी ‘ब्रेक’ की बात कर के NDA की विकास-क्षमता को उभारने की कोशिश की — “अगर विकास को रोकना था तो केवल NDA ही उसे तोड़ सकता है,” उनके शब्द रहे।
रक्षा मंत्री ने पटना में कहा कि पहले ‘ना खाता न बही, जो लालू कहे वही सही’ जैसा नारा चलता था, पर अब वह दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कानून-व्यवस्था और अपराध के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का आश्वासन भी दिया: “अगर एक भी बच्चे का अपहरण हो जाए तो हम उसको उल्टा कर देंगे।”
दो दिन पूर्व तेजस्वी यादव द्वारा कथित तौर पर वक्फ बिल फाड़ने की धमकी के राजनीतिक संकेतों के मद्देनजर राजनाथ के ये बयान खास संदेश दे रहे हैं — भाजपा चाहती है कि वक्फ से जुड़ी किसी भी अफवाह को चुनावी बहस नहीं बनने दिया जाए।
अमित शाह ने दरभंगा के अलीनगर में आयोजित रैली में आरोपों का पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और RJD परिवारवाद पर आधारित हैं। शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि 25 वर्षीय संगीतकार मैथिली ठाकुर को बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के भाजपा ने टिकट दिया — और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस या RJD में ऐसा संभव है। शाह ने निशाना साधते हुए कहा, “सोनिया जी राहुल को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। लालू जी अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। मैं बताना चाहता हूँ — दिल्ली में नरेंद्र मोदी और बिहार में नीतीश कुमार के रहते अभी कोई वैकेंसी खाली नहीं है।”
शाह ने अपने भाषण में NDA सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया — मैथिली भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलवाना, संविधान का भाषा में अनुवाद, तथा मिथिला क्षेत्र में देवी सीता के मंदिर निर्माण की पहल — और जो स्थान उन्होंने दौरे पर देखे, उन्हें राम सर्किट से जोड़ने की बात कही।
राजनीतिक समीकरणों पर कटाक्ष के साथ, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने यह संदेश भी दिया कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और नेतृत्व स्थिर हैं — मतदाताओं के सामने ‘स्थिरता और विकास’ की डोर रखना पार्टी का उद्देश्य दिखा।
इसी सिलसिले में झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पटना में कहा कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देते फिर भी केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सबको बिना भेदभाव पहुँचा दिया गया है। मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के तहत योजनाओं के सार्वभौमिक वितरण की बात कह कर भाजपा की सामाजिक समावेशन छवि को रेखांकित किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में रैली की जहां RJD और शहाबुद्दीन परिवार पर निशाना साधा गया। योगी ने कहा कि RJD प्रत्याशी ‘ओसामा’ के नाम के हिसाब से ही उनके कृत्य हैं और मतदाताओं से NDA उम्मीदवारों को समर्थन देने का आग्रह किया।
सागर। शौर्यपथ । जनपद पंचायत सागर कार्यालय में सोमवार को उस समय अफरातफरी मच गई जब सड़ेरी निवासी एक महिला ने कार्यालय परिसर में खड़ी जनपद सदस्य की कार में तोड़फोड़ कर दी। महिला का आरोप है कि पंचायत सदस्य के परिवार ने उसकी पैतृक जमीन पर कब्जा कर रखा है, जिसकी शिकायत वह महीनों से कर रही थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की।
महिला ने कहा कि उसने कई बार जनपद से लेकर जिला प्रशासन तक आवेदन दिए, मगर कार्रवाई न होने से नाराज होकर उसने यह कदम उठाया। घटना की जानकारी मिलते ही जनपद कार्यालय के कर्मचारी और पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए वाहन का पंचनामा तैयार किया और महिला से पूछताछ शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, विवादित जमीन गांव सड़ेरी में ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर स्थित है और इस मामले को पहले भी ग्रामीण सभा में उठाया जा चुका है। जनपद सदस्य के परिजन अपनी ओर से कब्जे के आरोपों से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जमीन पर उनका वैध हक है, जिसके दस्तावेज मौजूद हैं।
फिलहाल पुलिस ने महिला के खिलाफ तोड़फोड़ की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी इस विवाद की तहकीकात के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की सुरक्षा, विकास और पुनर्वास आधारित एकीकृत रणनीति से देश नक्सल-मुक्ति के लक्ष्य की ओर — मार्च 2026 तक नक्सलवाद का सम्पूर्ण उन्मूलन केंद्र का लक्ष्य।
नई दिल्ली,/ shouryapath news /
भारत में वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के विरुद्ध केंद्र सरकार की सशक्त रणनीति अब निर्णायक परिणाम दे रही है। 2014 से 2024 के बीच नक्सली हिंसा की घटनाओं में 53% की कमी आई है, जबकि नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर केवल 18 रह गई है।
पिछले एक दशक में 576 किले सदृश पुलिस थाने, 336 नए सुरक्षा कैंप, 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड, और सैकड़ों किलोमीटर सड़क व संचार नेटवर्क तैयार हुए हैं — जिससे नक्सल प्रभावित इलाकों में शासन, सुरक्षा और विकास का नया युग शुरू हुआ है।
2014–2024 के बीच नक्सली घटनाएं 16,463 से घटकर 7,744 रह गईं।
मुठभेड़ों में मारे गए सुरक्षा कर्मियों की संख्या 1,851 से घटकर 509 और आम नागरिकों की मौतें 4,766 से घटकर 1,495 हो गईं — यानी क्रमशः 73% और 70% की गिरावट।
केवल वर्ष 2025 में ही 270 नक्सली मारे गए, 680 गिरफ्तार हुए और 1,225 ने आत्मसमर्पण किया। ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ जैसे अभियानों ने बीजापुर, सुकमा और महाराष्ट्र में उग्रवादियों को मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
पिछले दस वर्षों में केंद्र ने नक्सली क्षेत्रों में 576 सशक्त पुलिस स्टेशन और 336 सुरक्षा कैंप स्थापित किए।
ड्रोन सर्विलांस, सैटेलाइट इमेजिंग, एआई-बेस्ड डेटा एनालिटिक्स और साइबर ट्रैकिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से अब सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ी है।
इससे नक्सली ठिकानों की पहचान, मूवमेंट ट्रैकिंग और सटीक कार्रवाई संभव हुई है।
एनआईए और ईडी ने नक्सलियों की ₹52 करोड़ से अधिक की संपत्ति ज़ब्त की है।
राज्यों ने भी ₹40 करोड़ की अतिरिक्त संपत्ति जब्त कर दी है। इससे शहरी नक्सली तंत्र और उनके सूचना युद्ध की क्षमता को गहरा झटका लगा है।
‘सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर योजना’ के तहत पिछले 11 वर्षों में राज्यों को ₹3,331 करोड़ मिले — जो पिछले दशक की तुलना में 155% अधिक है।
‘स्पेशल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्कीम’ के अंतर्गत ₹991 करोड़ की स्वीकृति, और विकास के लिए ‘स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस’ से ₹3,769 करोड़ के प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हुए हैं।
सड़क संपर्क: 17,589 किमी सड़कों के निर्माण हेतु ₹20,815 करोड़ स्वीकृत; जिनमें से 12,000 किमी सड़कों का कार्य पूरा।
मोबाइल कनेक्टिविटी: ₹6,290 करोड़ से अधिक लागत के 4जी टावर — 8,527 में से 2,602 चालू।
वित्तीय पहुंच: 1,007 बैंक शाखाएं, 937 एटीएम और 37,850 बैंकिंग संवाददाता कार्यरत; 5,899 डाकघर 90 जिलों में सेवा दे रहे हैं।
शिक्षा व कौशल: 46 आईटीआई और 49 कौशल विकास केंद्र संचालित, 48 जिलों में रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जारी।
स्थानीय सहभागिता: 2018 में गठित बस्तरिया बटालियन में 1,143 रंगरूट — जिनमें 400 स्थानीय युवा, सुरक्षा अभियानों का प्रतीक।
सरकार की “ट्रेस–टारगेट–न्यूट्रलाइज” नीति से प्रमुख नक्सली गढ़ जैसे बुध पहाड़, पारसनाथ, बरमशिया और चक्रबंधा लगभग मुक्त हुए।
2024 में सुरक्षा बलों ने 26 बड़ी मुठभेड़ों में शीर्ष नक्सली कैडरों को ढेर किया —
1 ज़ोनल समिति सदस्य, 5 उप-ज़ोनल, 2 राज्य समिति सदस्य, 31 डिविजनल और 59 एरिया समिति सदस्य मारे गए।
सुरक्षा बल अबूझमाड़ जैसे दुर्गम गढ़ों तक पहुँचने में सफल हुए हैं।
2024–2025 में छत्तीसगढ़ सहित देशभर में 1,574 नक्सलियों ने हथियार छोड़े।
सरकार पुनर्वासित कैडरों को ₹5 लाख (उच्च रैंक), ₹2.5 लाख (मध्यम/निम्न रैंक) और ₹10,000 मासिक वजीफा (36 माह) के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रही है।
इस नीति ने संघर्षरत युवाओं को सम्मानजनक जीवन की नई राह दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध भारत की रणनीति सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का त्रिवेणी संगम बन चुकी है।
सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक भारत को पूर्णत: नक्सल-मुक्त बनाना है।
एक दशक की निर्णायक नीति ने उन इलाकों को, जो कभी भय के प्रतीक थे, अब अवसर और प्रगति के केंद्रों में बदल दिया है।
— रिपोर्ट: शौर्यपथ डिजिटल / शरद पंसारी
स्रोत: गृह मंत्रालय, भारत सरकार (प्रशासनिक प्रेस विज्ञप्ति 25 अक्टूबर 2025)
नई दिल्ली /शौर्यपथ / लखनऊ के आलमबाग इलाके में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम इंजीनियर 30 वर्षीय आकाशदीप गुप्ता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हाल ही में शादी हुए आकाशदीप दिवाली मनाने परिवार के साथ लखनऊ आए थे। मंगलवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लोकबंधु अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृत्यु की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। शुरुआती जांच में हार्ट अटैक की संभावना जताई गई है, लेकिन पुलिस को स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए रिपोर्ट का इंतजार है।
आकाशदीप गुप्ता ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे, और उनकी इस मौत से परिवार एवं रक्षा विभाग में शोक की लहर है। मामले की तहकीकात में सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध पहलू का पता लगाया जा सके।यह खबर सोशल मीडिया में फैल रही भावनाओं को लेकर संवेदनशीलता से लिखी गई है, और सही जानकारी के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार जारी है।
पटना | ब्यूरो रिपोर्ट, शौर्यपथ न्यूज़ नेटवर्क
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, सियासी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोपों का दौर तेज़ हो गया है।
महागठबंधन जहां 28 अक्तूबर को अपना संयुक्त घोषणा पत्र जारी करने और राहुल गांधी-तेजस्वी यादव की साझा रैली के ज़रिए विपक्षी अभियान की शुरुआत करने जा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ एनडीए ने विपक्ष पर तीखा पलटवार शुरू कर दिया है।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने पटना में आयोजित जनसभा में नीतीश कुमार सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा —
“यह सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। अब बिहार को नई दिशा और नई सोच की ज़रूरत है। नीतीश सरकार अब चलाने लायक नहीं रही।”
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा से राज्य फिर पीछे जा रहा है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का आगामी घोषणा पत्र युवाओं के भविष्य और आर्थिक न्याय पर केंद्रित होगा।
राजद के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक चुनावी सभा में कहा —
“बिहार के लोग लालू-राबड़ी के उस दौर को भूले नहीं हैं, जब अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर था। अगर वह सरकार फिर आई, तो बिहार फिर से जंगलराज में लौट जाएगा।”
शाह ने कहा कि भाजपा-जदयू सरकार ने बिहार को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है और अब कोई पीछे नहीं धकेल सकता।
इधर, जन अधिकार पार्टी (JAP) के प्रमुख पप्पू यादव को आयकर विभाग (IT) द्वारा नोटिस भेजे जाने की खबर ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
पप्पू यादव ने इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बताते हुए कहा है कि वे जनता की आवाज़ उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान की घोषणा कर दी है, जिसमें 121 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होगी।
पटना जिला प्रशासन ने मई 2025 में मतदान केंद्रों और परिवहन व्यवस्था के लिए निविदा सूचना जारी की थी।
28 अक्तूबर को महागठबंधन पटना में विशाल रैली के माध्यम से संयुक्त घोषणा पत्र जारी करेगा। इसमें राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एक साथ मंच पर रहेंगे।
यह कार्यक्रम न केवल बिहार, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता का प्रतीक माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति में अब स्पष्ट दो ध्रुव बन चुके हैं —
एक ओर एनडीए “विकास और स्थिरता” की बात कर रहा है,
दूसरी ओर महागठबंधन “बदलाव और सामाजिक न्याय” का नारा दे रहा है।
पप्पू यादव का मामला, अमित शाह के बयान और तेजस्वी के तीखे आरोपों के बीच अब बिहार का चुनाव पूरी तरह सियासी टकराव के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
28 अक्तूबर को महागठबंधन का घोषणा पत्र और राहुल-तेजस्वी की रैली
तेजस्वी बोले – “नीतीश सरकार चलाने लायक नहीं”
अमित शाह ने चेताया – “लालू-राबड़ी की सरकार आई तो लौटेगा जंगलराज”
पप्पू यादव को IT विभाग का नोटिस
पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान की अधिसूचना जारी
? रिपोर्ट: शौर्यपथ संवाददाता
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
