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June 08, 2026
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भारत

भारत (1069)

श्रीनगर, ।
भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का शुभारंभ किया। तीन दिवसीय चिंतन शिविर के समापन अवसर पर जारी इस दस्तावेज़ ने खिलाड़ी-केंद्रित, समन्वित और सहयोगात्मक खेल व्यवस्था के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की एकजुट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

खिलाड़ी केंद्र में, सरकार सहयोग में

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ का मूल फोकस एक ऐसे खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर है, जहां

  • खिलाड़ी विकास प्राथमिकता हो
  • केंद्र और राज्य मिलकर संसाधनों का समन्वय करें
  • खेल निकायों में पारदर्शिता और पेशेवर ढांचा विकसित हो

डॉ. मांडविया ने स्पष्ट किया कि खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और युवा सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

खेल संस्कृति से आर्थिक विकास तक

संकल्प में खेलों को बहुआयामी विकास के इंजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है:

  • खेल अवसंरचना का विस्तार
  • प्रतिभा पहचान और पोषण
  • क्षेत्रीय खेल क्लस्टर का विकास
  • खेल पर्यटन और रोजगार सृजन
  • भारत को वैश्विक खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार करना

यह दृष्टिकोण खेलों को स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे जोड़ता है।

विविधता ही ताकत: राज्यों को मिली भूमिका

संकल्प में भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को ताकत मानते हुए राज्यों को अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार खेल मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इससे स्थानीय प्रतिभाओं को उभरने का अवसर मिलेगा और ग्रासरूट स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी।

प्रशासनिक सुधार और ‘माय भारत’ से युवा सहभागिता

चिंतन शिविर के अंतिम दिन तीन प्रमुख बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई:

  • खेल प्रशासन में सुधार: पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर ढांचा
  • खेल सामग्री निर्माण: भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा
  • युवा सहभागिता: ‘माय भारत’ प्लेटफॉर्म के जरिए नेतृत्व और भागीदारी बढ़ाना

फिट इंडिया का संदेश

समापन दिवस की शुरुआत “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसमें डॉ. मांडविया और राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भाग लेकर फिटनेस और जनभागीदारी का संदेश दिया।

निष्कर्ष: एकीकृत प्रयास, वैश्विक लक्ष्य

‘श्रीनगर खेल संकल्प’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का खेल भविष्य खंडित प्रयासों से नहीं, बल्कि एकीकृत और समन्वित रणनीति से तय होगा।

यह पहल केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

चंडीगढ़, ।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर चंडीगढ़ में एक स्पष्ट संदेश के साथ संपन्न हुआ—अब सामाजिक न्याय केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध, मापनीय और जमीनी परिणामों के रूप में दिखाई देगा। “अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत@2047” थीम पर केंद्रित इस शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने व्यापक और कार्रवाई योग्य सिफारिशों पर सहमति दी।

नीतियों से आगे, व्यावहारिक समाधान पर फोकस

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिविर “इरादों से क्रियान्वयन” की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
उन्होंने कहा कि चर्चा केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि

  • छात्रवृत्ति वितरण
  • नशामुक्ति
  • वरिष्ठ नागरिक कल्याण
  • दिव्यांगजनों के प्रमाणन
  • ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास

जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान तलाशे गए।

पांच थीमेटिक समूहों में बना ठोस एक्शन प्लान

शिविर के दौरान पांच समूहों ने अलग-अलग आयामों पर गहन मंथन किया:

  • अंत्योदय से आत्मनिर्भरता: SC समुदायों के कौशल विकास, आजीविका और पीएम-अजय के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
  • समावेश, पहचान और एकीकरण: डीएनटी/एनटी/एसएनटी समुदायों के लिए SEED योजना और सटीक पहचान प्रणाली
  • आर्थिक सशक्तिकरण: SC, OBC और वंचित वर्गों के लिए ऋण और उद्यमिता तक आसान पहुंच
  • सुगमता (Accessibility): 2027-28 तक बाधा-मुक्त मानकों और सार्वजनिक ढांचे में सार्वभौमिक डिजाइन लागू करने की योजना
  • दिव्यांगजनों का प्रमाणन: तकनीक आधारित, तेज और पारदर्शी प्रमाणन प्रणाली

2027 जनगणना और ट्रांसजेंडर कल्याण पर विशेष ध्यान

शिविर में कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर सहमति बनी:

  • जनगणना-2027 में दिव्यांगजनों का समुचित समावेश
  • SEED योजना को और मजबूत करना
  • SC/OBC वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देना
  • SMILE योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास, गरिमा गृह और संरक्षण तंत्र को विस्तार

“जागरूकता से सुलभता” और प्रक्रिया सरलीकरण पर जोर

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने यह स्वीकार किया कि योजनाओं की सफलता का मूल आधार है:

  • जागरूकता बढ़ाना
  • प्रक्रियाओं को सरल बनाना
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग
  • स्पष्ट समयसीमा तय करना

इस दिशा में छात्रवृत्ति, पेंशन, पुनर्वास और अन्य लाभों को बिना देरी और बाधाओं के सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

टेक्नोलॉजी और समन्वय बनेगा गेमचेंजर

केंद्रीय मंत्री ने टेक्नोलॉजी-सक्षम सुशासन, बेहतर मॉनिटरिंग और केंद्र-राज्य समन्वय को सामाजिक न्याय के प्रभावी क्रियान्वयन की कुंजी बताया।

निष्कर्ष: इरादों से परिणाम की ओर

तीन दिवसीय यह चिंतन शिविर एक स्पष्ट दिशा देकर समाप्त हुआ—

सामाजिक न्याय को अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सबसे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक, मापनीय बदलाव लाने पर फोकस किया जाएगा।

इस साझा संकल्प के साथ देश ने 2047 तक एक समावेशी, सशक्त और न्यायसंगत विकसित भारत की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं।

नई दिल्ली / 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सुप्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें कला का एक ऐसा पर्याय बताया है जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। श्री मोदी ने कहा कि श्री रघु राय का कार्य गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता से परिपूर्ण था, जिसने भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को संजोया और उन्हें लोगों के करीब लाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया में उनका योगदान अद्वितीय है और उनका निधन कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:

“श्री रघु राय जी को कला के एक ऐसे पर्याय के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने लेंस के माध्यम से भारत की जीवंतता को अमर बना दिया। उनकी फोटोग्राफी में गहन संवेदनशीलता, गहराई और विविधता थी। इसने लोगों को भारत के जनजीवन के विभिन्न पहलुओं के और अधिक करीब लाया। उनका निधन फोटोग्राफी और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और फोटोग्राफी जगत के साथ हैं। ओम शांति।”

नई दिल्ली | 

भारतीय राजनीति के गलियारों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी। राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से 7 ने बागी रुख अख्तियार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े राजनीतिक उलटफेर का नेतृत्व पार्टी के कद्दावर नेता राघव चड्ढा कर रहे हैं।

दो-तिहाई का जादू: दलबदल कानून से बचाव

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ सांसदों का जाना नहीं, बल्कि विधिवत 'विलय' है।

संवैधानिक ढाल: चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या कुल संख्या (10) की दो-तिहाई (70%) है, इसलिए संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत इन सांसदों की सदस्यता पर खतरा कम रहने की संभावना है।

शक्ति प्रदर्शन: इस कदम से राज्यसभा में AAP की ताकत अब सिमट कर केवल 3 सांसदों तक रह गई है।

भाजपा का दामन थामने वाले दिग्गज चेहरे

भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों की सूची ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है:

राघव चड्ढा (नेतृत्वकर्ता)

संदीप पाठक (संगठन के रणनीतिकार)

अशोक मित्तल

स्वाति मालीवाल

हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)

विक्रमजीत सिंह साहनी

राजेंद्र गुप्ता

बगावत की पटकथा: आखिर क्यों टूटी पार्टी?

सूत्रों की मानें तो इस बड़े विद्रोह की नींव कुछ दिन पहले ही रखी गई थी। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त करना इस पूरे घटनाक्रम का तात्कालिक कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर पद और प्रतिष्ठा को लेकर पनपा यह असंतोष आज एक बड़े विभाजन के रूप में सामने आया।

AAP का पलटवार: 'पंजाब के साथ गद्दारी'

इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने हमलावर रुख अपना लिया है। पार्टी नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या और जनादेश का अपमान बताया है:

"यह पंजाब की जनता के पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जो लोग छोड़कर गए हैं, वे पंजाब के हितों के लिए 'गद्दार' साबित हुए हैं।" > — संजय सिंह, सांसद (AAP)

भगवंत मान: पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है।

अरविंद केजरीवाल: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ "धक्का" (अन्याय) किया है।

निष्कर्ष

2026 का यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्यसभा के समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सदन में इन सांसदों की सदस्यता बरकरार रहती है या कानूनी पेचीदगियां नया मोड़ लेकर आएंगी।

नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत के सबसे चर्चित हत्याकांडों में से एक, रामअवतार जग्गी मर्डर केस में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ—जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल हैं—ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

जेल जाने पर रोक: हाई कोर्ट द्वारा दिए गए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। जोगी को अभी जेल नहीं जाना होगा।

दोषसिद्धि (Conviction) पर स्टे: कोर्ट ने अमित जोगी की सजा के साथ-साथ उनकी दोषसिद्धि पर भी रोक लगा दी है।

CBI को नोटिस: शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा है।

दिग्गज वकीलों की दलीलें आई काम

अमित जोगी की ओर से देश के तीन दिग्गज वकीलों—कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा— ने पैरवी की। वकीलों ने हाई कोर्ट के फैसले की कानूनी बारीकियों और पूर्व में निचली अदालत से मिली रिहाई के तथ्यों को मजबूती से रखा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए राहत प्रदान की।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 23 साल पुराना है, जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया था:

जून 2003: रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामअवतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

साल 2007: निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था।

अप्रैल 2026: करीब 19 साल बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्या की साजिश रचने का दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस 'स्टे ऑर्डर' के बाद अमित जोगी के लिए कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक नई उम्मीद जगी है। फिलहाल यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत के अधीन है, जहाँ इसकी विस्तृत सुनवाई होगी।

देश में एक बार फिर लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व पूरे जोश के साथ शुरू हो चुका है। आज सुबह 7 बजे से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदान प्रारंभ हो गया है, जो शाम 6 बजे तक चलेगा। इसके साथ ही महाराष्ट्र की चर्चित बारामती सीट पर उपचुनाव भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

? बंगाल: TMC vs BJP, हाईटेक निगरानी में वोटिंग

पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो रहा है। यहां मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच है।

चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनिटरिंग) की व्यवस्था की गई है।

राज्य की शेष 142 सीटों पर दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।

? तमिलनाडु: सीधा मुकाबला, लेकिन तीसरा कोण भी मजबूत

तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। यहां मुख्य लड़ाई

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) + भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस गठबंधन

और

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम + BJP गठबंधन

के बीच है।

हालांकि, इस बार चुनाव में नया मोड़ तब आया जब फिल्म अभिनेता थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) मैदान में उतरी, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

? बारामती: सहानुभूति और सियासत का संगम

महाराष्ट्र की बारामती सीट पर उपचुनाव हो रहा है, जो उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद खाली हुई थी।

इस सीट से उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार चुनाव मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह है कि विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) ने यहां कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे यह चुनाव लगभग एकतरफा नजर आ रहा है।

? लोकतंत्र का उत्सव, जनता के हाथ में सत्ता की चाबी

तीनों राज्यों में मतदान को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मतदाताओं में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है।

अब सबकी नजर 4 मई पर टिकी है, जब ईवीएम में बंद जनता का फैसला सामने आएगा और तय करेगा कि किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज।

नई दिल्ली / एजेंसी / सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond - SGB) में निवेश करने वालों के लिए बड़ी राहत और अवसर की खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने SGB 2020-21 Series-VII के निवेशकों को समय से पहले निकासी (Premature Redemption) का विकल्प दिया है। मौजूदा कीमतों के आधार पर निवेशकों को 200% से ज्यादा का रिटर्न मिल रहा है।

₹5,051 से ₹15,254 तक—तीन गुना हुआ निवेश
RBI ने इस सीरीज के लिए रिडेम्पशन प्राइस 15,254 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। जब यह बॉन्ड अक्टूबर 2020 में जारी हुआ था, तब इसकी कीमत 5,051 रुपये प्रति यूनिट थी। इस हिसाब से निवेशकों को मूल निवेश पर करीब 202% का लाभ मिल रहा है।
ऑनलाइन खरीद पर ₹50 प्रति ग्राम की छूट लेने वालों का रिटर्न ब्याज को छोड़कर लगभग 205% तक पहुंच गया है।

20 अप्रैल से निकासी का मौका
यह सुविधा बॉन्ड जारी होने के लगभग 5.5 साल बाद उपलब्ध हुई है। निवेशक निर्धारित तिथि (20 अप्रैल) पर समय से पहले निकासी का विकल्प चुन सकते हैं।

सिर्फ गोल्ड प्राइस ही नहीं, 2.5% ब्याज भी
SGB की खासियत यह है कि इसमें सोने की कीमत बढ़ने के साथ-साथ 2.5% सालाना निश्चित ब्याज भी मिलता है, जो हर छह महीने में निवेशकों के खाते में जमा होता है।

कैसे करें निकासी?
निवेशकों को उसी बैंक, पोस्ट ऑफिस या SHCIL (Stock Holding Corporation of India) कार्यालय में आवेदन देना होगा, जहां से उन्होंने बॉन्ड खरीदा था। राशि सीधे उनके रजिस्टर्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

टैक्स नियम समझना जरूरी

8 साल की मैच्योरिटी पर: कैपिटल गेन टैक्स से छूट (अगर प्राथमिक निर्गम में खरीदा हो)
समय से पहले निकासी: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू (12 महीने से अधिक होल्डिंग पर)
सेकेंडरी मार्केट से खरीदे बॉन्ड: टैक्स छूट नहीं मिलेगी
ब्याज आय: टैक्स स्लैब के अनुसार करयोग्य

महत्वपूर्ण सलाह
RBI ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपनी बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट रखें, ताकि भुगतान में कोई देरी न हो।

आगे क्या?
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई SGB सीरीज का कैलेंडर अभी घोषित नहीं हुआ है, जिससे इस योजना के भविष्य को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।

निष्कर्ष:
जिन निवेशकों ने 2020 में SGB Series-VII में निवेश किया था, उनके लिए यह समय मुनाफा बुक करने का आकर्षक अवसर है—हालांकि टैक्स प्रभाव और भविष्य के सोने के दाम को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना समझदारी होगी।

  नई दिल्ली / एजेंसी / पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। सोमवार को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दूसरी बार मेंशनिंग की गई, लेकिन अदालत ने फिलहाल सुनवाई से इनकार कर दिया।

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाते हुए दावा किया कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल में 5 से 7 लाख नए मतदाताओं के नाम फॉर्म-6 के जरिए जोड़े गए हैं। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मेंशनिंग के आधार पर इस तरह के मामले में सुनवाई संभव नहीं है। पीठ ने कहा कि पहले इस संबंध में विधिवत याचिका दाखिल की जाए, उसके बाद ही मामले पर विचार किया जाएगा। CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि बिना औपचारिक याचिका के अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकती।

क्या है मामला?
फॉर्म-6 का उपयोग नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में नाम जोड़े जाने के दावे ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर देख रहा है, जबकि आधिकारिक स्तर पर इस संबंध में अभी विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।

आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मुद्दे पर औपचारिक याचिका दाखिल की जाती है और सुप्रीम कोर्ट इसमें हस्तक्षेप करता है या नहीं। फिलहाल अदालत के रुख से साफ है कि प्रक्रिया के तहत ही इस मामले को आगे बढ़ाया जाएगा।

  कोलकाता / एजेंसी / पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने राज्य में अपने सभी ऑपरेशन 20 दिनों के लिए रोक दिए हैं। इस फैसले की पुष्टि कंपनी के एक इंटरनल मेल से हुई है, जिसमें “कुछ कानूनी मुद्दों” का हवाला दिया गया है।

इंटरनल मेल में क्या कहा गया?
I-PAC की HR टीम द्वारा रविवार रात भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि मैनेजमेंट ने पश्चिम बंगाल में सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रही है और उम्मीद जताई है कि “न्याय अपना रास्ता खुद बनाएगा।”

कर्मचारियों को 20 दिन की छुट्टी का निर्देश
सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों और टीम के सदस्यों को 20 दिनों की छुट्टी लेने के लिए कहा गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि 11 मई के आसपास स्थिति की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह इंटरनल मेल सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिसकी प्रामाणिकता को कंपनी के अंदरूनी सूत्रों ने सही बताया है।

TMC के चुनाव अभियान पर पड़ सकता है असर
गौरतलब है कि I-PAC, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी अभियान का प्रमुख रणनीतिक साझेदार रहा है। ऐसे में मतदान (23 और 29 अप्रैल) से ठीक पहले ऑपरेशन रोकना TMC के प्रचार अभियान पर असर डाल सकता है और इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

ममता बनर्जी का बयान भी चर्चा में
इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने चुनावी सभा में I-PAC का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर कंपनी के कर्मचारियों पर किसी तरह का दबाव बनाया गया या उनकी नौकरी पर असर पड़ा, तो उनकी सरकार उन्हें रोजगार देने के लिए तैयार है। उन्होंने इसे “साजिश” करार देते हुए विरोधियों पर निशाना साधा था।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी हलचल
I-PAC के इस फैसले ने बंगाल की चुनावी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे TMC की चुनावी मशीनरी पर असर के रूप में देख सकता है, वहीं TMC इसे कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा अस्थायी कदम बताकर नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर सकती है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक प्रभाव चुनावी नतीजों पर कितना पड़ता है, यह देखना अहम होगा।

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