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March 10, 2026
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भारत

भारत (964)

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में ठंड, घने कोहरे और गंभीर प्रदूषण ने स्थिति बेहद चिंताजनक बना दी है। कई इलाकों में सोमवार सुबह AQI 400 के पार दर्ज हुआ—बवाना 408, नरेला 418, आनंद विहार 404 और अक्षरधाम 438 तक पहुंच गया। राजधानी के ऊपर जहरीली स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जबकि AIIMS क्षेत्र में AQI 363 रिकॉर्ड किया गया।
हालात बिगड़ने पर CAQM ने GRAP स्टेज-IV के तहत सभी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। प्रशासन ने दिल्ली में 50% कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम का आदेश दिया है और कक्षा 5 तक के स्कूल ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं।
नोएडा व गाज़ियाबाद में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है—नोएडा सेक्टर-1 में AQI 381 और वसुंधरा में 394 दर्ज हुआ।
मौसम विभाग के अनुसार 23 व 24 दिसंबर को कोहरे में कमी की उम्मीद नहीं है। अधिकतम तापमान 19–22°C और न्यूनतम 9–10°C के आसपास रहेगा। ठंडी हवाओं की कमी और उच्च आर्द्रता के चलते फिलहाल राहत की संभावना नहीं है।

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या के विरोध में वीएचपी और बजरंग दल के संभावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर क्षेत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इससे पहले बांग्लादेशी मीडिया ने दावा किया था कि दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान उच्चायोग की सुरक्षा भेदने की कोशिश की गई, हालांकि भारत ने इन दावों को भ्रामक बताया है।

उधर, बांग्लादेश में हिंसा का दौर जारी है। खुलना में छात्र आंदोलन से जुड़े नेता मोतालेब सिकदर की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो कुछ दिन पहले युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद हुई दूसरी बड़ी वारदात है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इन मामलों में त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

मयमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या के मामले में बांग्लादेश पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया है, जिसके बाद पूरे देश में तनाव व्याप्त है।
भारत में भी इसका प्रभाव दिखा—जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में कई हिंदू संगठनों और भाजपा ने विरोध प्रदर्शन करते हुए बंद का आह्वान किया, जिसके चलते बाजार और प्रतिष्ठान बंद रहे।

यह घटनाक्रम अगस्त में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में बढ़ रही अल्पसंख्यक विरोधी घटनाओं को और उजागर करता है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विलुप्ति की कगार पर खड़े ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक आदेश देते हुए राजस्थान और गुजरात के 14,753 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बड़े सोलर पार्क, पवन ऊर्जा परियोजनाओं और हाईटेंशन ओवरहेड बिजली लाइनों पर रोक लगा दी है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा—“गोडावण राजस्थान की आत्मा है, और ऊर्जा कंपनियां इस रेगिस्तान की मालिक नहीं, बल्कि मेहमान हैं।”

अदालत ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राजस्थान में 14,013 किमी² और गुजरात में 740 किमी² क्षेत्र को संशोधित प्राथमिक संरक्षण क्षेत्र घोषित किया। इन इलाकों में इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण उपायों को तुरंत लागू करने तथा प्रजाति की निगरानी शुरू करने के निर्देश दिए गए।

जैसलमेर-बाड़मेर सबसे अधिक प्रभावित होंगे, क्योंकि ये जिले बड़े सौर और पवन ऊर्जा केंद्र बन चुके हैं। कोर्ट ने 33 केवी से 400 केवी तक की मौजूदा बिजली लाइनों को भूमिगत करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया है, क्योंकि गोडावण की मौतों का सबसे बड़ा कारण बिजली तारों से टकराव है। लगभग 250 किमी बिजली लाइनों को दो वर्षों में भूमिगत करना होगा। अब संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनें केवल निर्धारित पावर कॉरिडोर से ही गुजरेंगी।

पीठ ने बिश्नोई समुदाय और ‘गोडावण मैन’ स्व. राधेश्याम बिश्नोई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजस्थान में सिर्फ 150–175 गोडावण ही बचे हैं, जो मुख्य रूप से जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में पाए जाते हैं। IUCN पहले ही इसे अति संकटग्रस्त श्रेणी में रख चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने CSR फंड को भी संरक्षण कार्यों में लगाने का निर्देश दिया, साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में कोई ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।

नई दिल्ली। एजेंसी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए साफ कहा कि संघ को राजनीतिक संगठन या भाजपा से जोड़कर समझना मूलभूत भूल है। कोलकाता में आयोजित ‘आरएसएस 100 व्याख्यान माला’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस का नजरिया न तो राजनीतिक है और न ही किसी दल विशेष से संचालित।

“संघ को संकीर्ण नजरिए से न देखें”

भागवत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आरएसएस को सिर्फ भाजपा या किसी अन्य संगठन के संदर्भ में समझने की कोशिश करता है, तो वह संघ की वास्तविकता से भटक जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तुलना, पूर्वाग्रह और दूसरे स्रोतों की जानकारी पर आधारित धारणाएँ केवल गलतफहमी पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा—

“संघ का कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं।आरएसएस को केवल भाजपा से जोड़कर देखना बहुत बड़ी गलती है।संघ को सेवा संगठन भर मानना भी अधूरा दृष्टिकोण है।

हिंदू समाज की भलाई, ‘सज्जन’ निर्माण ही मूल ध्येय

एक अन्य कार्यक्रम में भागवत ने दोहराया कि आरएसएस का उद्देश्य हिंदू समाज की भलाई, सुरक्षा और नैतिक रूप से सुदृढ़ व्यक्तियों (‘सज्जनों’) का निर्माण है। उनका कहना था कि समाज में ऐसे मूल्यनिष्ठ, सेवाभावी और राष्ट्रहित प्रेरित लोग ही देश के गौरव और विकास को गति देते हैं।

“विश्वगुरु बनने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा”

भागवत ने विश्वास जताया कि भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा, और इसके लिए समाज को तैयार करना संघ का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आरएसएस किसी को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन संगठन के बढ़ते प्रभाव से “कुछ लोगों के संकीर्ण स्वार्थ अवश्य प्रभावित होते हैं।”

“मनगढ़ंत कहानियों पर नहीं, तथ्यों पर करें राय आधारित”

उन्होंने अपील की कि लोग संघ के बारे में राय बनाएं तो वह तथ्यों पर आधारित हो, न कि अफवाहों, गढ़ी गई कहानियों या पूर्वधारणाओं पर। आरएसएस प्रमुख भागवत का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीति, विचारधारा और संघ-भाजपा संबंधों पर लगातार चर्चाएँ तेज रहती हैं। उनका यह संदेश राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

नई दिल्ली/शौर्यपथ / भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीबी जी राम जी विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी को बढ़ाकर प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन कर दिया गया है। पहले यह 100 दिनों का था। यह बिल सशक्तिकरण, समावेशी विकास को व्यापक स्तर पर वितरण को बढ़ावा देता है। वीबी जी राम जी बिल का मतलब है विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी वाला बिल।

मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी किया गया
'विकसित भारत-जी राम जी' 2005 ( g ram g bill 2025) बिल चले आ रहे मनरेगा कानून की जगह लेगा। सरकार ने इसे लेकर कहा है कि पिछले दो दशकों में ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति, डिजिटलीकरण और कनेक्टिविटी में भारी बदलाव आया है। ऐसे में पुराने ढांचे में सुधार के बजाय एक नया वैधानिक ढांचा जरूरी था। यह नया बिल ग्रामीण रोजगार को 'विकसित भारत 2047' के विजन से जोड़ता है। इसका उद्देश्य केवल गड्ढे खोदना नहीं बल्कि टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।

   भोपाल / एजेंसी / भोपाल में एक बार फिर साबित हो गया कि घोटालों के मामले में नगर निगम की रचनात्मकता अद्वितीय है। राजधानी के वार्ड 53 में मात्र 240 मीटर लंबी और 3 फीट चौड़ी नाली को ढंकने के लिए रिकॉर्डतोड़ 16,139 किलोग्राम (16 टन) लोहे का उपयोग दिखाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इतना लोहा तो बड़े पुलों में भी नहीं लगता, परंतु यहाँ एक ‘छोटी सी नाली’ ने ही निगम के ख़जाने को भारी-भरकम झटका दे दिया।
कागजों पर सब कुछ इतना शानदार है कि बिना साइट देखे ही इंजीनियरों ने 13 लाख रुपये का बिल पास कर दिया। नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर निशांत तिवारी द्वारा मंजूर यह बिल अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।
उधर, प्रभारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर बृजेश कौशल पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आरोप है कि उन्होंने निर्माण के दौरान एक बार भी साइट का दौरा नहीं किया। सबसे रोचक मोड़ तो तब आया जब 5 दिसंबर को नोटिस, और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण के बावजूद न तो रिपोर्ट पेश की गई और न ही काम की वास्तविकता जाँची गई—लेकिन बिल पास कराने में किसी ने देर नहीं की!
अब मामले की गर्माहट बढ़ने के बाद निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने नाली की कोर-कटिंग के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि कागजों की दुनिया में बिछाए गए लोहे के पुल की सच्चाई जमीन पर उतर सके।भेल संगम कॉलोनी की यह नाली अब सिर्फ सीमेंट-सरिया की नहीं, बल्कि निगम की लापरवाही, इंजीनियरों की भूमिका और भ्रष्टाचार के लोहे जैसे ठोस सवालों की नाली बन चुकी है।

 

180 देशों के प्रतिनिधियों ने किया छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अभिवादन

 

रायपुर/ शौर्यपथ / 
छत्तीसगढ राज्य के बिलासपुर जिले की सांस्कृतिक संस्था ‘लोक श्रृंगार भारती’ के गेड़ी लोक नृत्य दल द्वारा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) व संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के आमंत्रण पर नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला प्रांगण में गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 7 से 13 दिसम्बर तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समारोह में 180 देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहीं। समारोह में बिलासपुर के गेड़ी नर्तक दल ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति को काफी सराहा गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गेडी नर्तक दल को बधाई और शुभकामनाएं दीं है l

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का नारा दिया

समारोह का ऐतिहासिक क्षण तब आया जब भारत के महापर्व दीपावली को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। इस उपलब्धि में छत्तीसगढ़ के गेड़ी लोक नृत्य दल की प्रस्तुति को विशेष सराहना मिली गेड़ी नृत्य की भावपूर्ण और साहसिक प्रस्तुति से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत प्रभावित हुए। उन्होंने “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” कहकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

गेड़ी नृत्य दल ने अपने रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया

मुख्य गायक एवं नृत्य निर्देशक अनिल गढ़ेवाल के कुशल नेतृत्व में गेड़ी नृत्य दल ने अपने सशक्त, ऊर्जावान एवं रोमांचक प्रदर्शन से अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, विभिन्न राज्यों के कलाकारों सहित 180 देशों के डेलिगेट्स उपस्थित रहे।

यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित 180 देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिए

मुख्य गायक अनिल गढ़ेवाल द्वारा प्रस्तुत “काट ले हरियर बांसे” गीत ने विदेशी प्रतिनिधियों के मन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा उत्पन्न की। वहीं मुख्य मांदल वादक मोहन डोंगरे द्वारा एक ही स्थान पर घूमते हुए मांदल वादन किया। हारमोनियम वादक सौखी लाल कोसले एवं बांसुरी वादक महेश नवरंग की स्वर लहरियों पर विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधि झूम उठे। गेड़ी नर्तकों प्रभात बंजारे, सूरज खांडे, शुभम भार्गव, लक्ष्मी नारायण माण्डले, फूलचंद ओगरे एवं मनोज माण्डले ने साहसिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित किया। विशेष रूप से तब, जब एक गेड़ी पर संतुलन बनाते हुए कलाकारों ने मानवीय संरचनाएं बनाईं, पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।

गेड़ी नृत्य दल ने छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाई

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, कौड़ियों व चीनी मिट्टी की मालाएं, पटसन वस्त्र, सिकबंध एवं मयूर पंख धारण कर प्रस्तुत भाव नृत्य ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया। यूनेस्को के महानिदेशक डॉ. खालिद एन. एनानी सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने गेड़ी नृत्य दल के साथ स्मृति चित्र लिया व छत्तीसगढ़ राज्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए शुभकामनाएं दी।

भारत और दुनियाभर के उन समुदायों के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है, जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं : केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

   नई दिल्ली(शौर्यपथ) भारत में व्यापक रूप से मनाई जाने वाली जीवंत परंपराओं में से एक दीपावली को आज नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया है।
इस शिलालेख को केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अपनाया गया।
श्री शेखावत ने अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत और विश्वभर के उन समुदायों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं। उन्‍होंने कहा कि यह त्योहार ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की भावना को दर्शाता है और आशा, नवजीवन तथा सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है।
केंद्रीय मंत्री ने त्योहार की जीवंतता और जन-केंद्रित प्रकृति का उल्‍लेख करते हुए इस बात पर बल दिया कि दीपावली उत्‍सव के पीछे लाखों लोगों का योगदान होता है, जिनमें दीये बनाने वाले कुम्हार, उत्सव की सजावट करने वाले कारीगर, किसान, मिठाई बनाने वाले, पुजारी और सदियों पुरानी परंपराओं को निभाने वाले परिवार शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह मान्यता उस सामूहिक श्रम को श्रद्धांजलि है जो इस परंपरा को कायम रखता है। केंद्रीय मंत्री ने प्रवासी भारतीयों की जीवंत भूमिका को भी स्वीकार किया, जिनके दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, खाड़ी देशों, यूरोप और कैरेबियन में मनाए जाने वाले दीपावली समारोहों ने दीपावली के संदेश को महाद्वीपों में फैलाया है और सांस्कृतिक सेतुओं को मजबूत किया है।
इस शिलालेख के साथ ही इस विरासत की रक्षा करने और इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की नई जिम्मेदारी भी आती है। केंद्रीय मंत्री ने नागरिकों से दीपावली की एकता की भावना को अपनाने और भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं का समर्थन जारी रखने का आग्रह किया। दीपावली को इसकी गहरी सांस्कृतिक महत्ता और विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों तथा वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय में मनाए जाने वाले जन त्योहार के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह एकता, नवीनीकरण और सामाजिक सामंजस्य के सिद्धांतों का प्रतीक है। दीये जलाना, रंगोली बनाना, पारंपरिक शिल्पकला, अनुष्ठान, सामुदायिक समारोह और पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का हस्तांतरण जैसी इसकी विविध प्रथाएं त्योहार की शाश्वत जीवंतता और भौगोलिकता की सीमाओं के भीतर अनुकूलन करने की क्षमता को दर्शाती हैं।
संगीत नाटक अकादमी के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस नामांकन में भारतभर के कलाकारों, शिल्पकारों, कृषि समुदायों, प्रवासी समूहों, विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर समुदायों, सांस्कृतिक संगठनों और परंपरा के वाहकों के साथ व्यापक राष्ट्रव्यापी परामर्श किया गया। उनके सामूहिक अनुभवों ने दीपावली के समावेशी स्वरूप, समुदाय-आधारित निरंतरता और कुम्हारों और रंगोली कलाकारों से लेकर मिठाई बनाने वालों, फूल विक्रेताओं और शिल्पकारों तक आजीविका के व्यापक इकोसिस्‍टम को उजागर किया।
यूनेस्को के शिलालेख में दीपावली को एक जीवंत विरासत के रूप में मान्यता दी गई है जो सामाजिक आपसदारी को मजबूत करती है। यह त्‍योहार पारंपरिक शिल्प कौशल का समर्थन करता है, उदारता और कल्याण के मूल्यों को सुदृढ़ करता है तथा आजीविका संवर्धन, लैंगिक समानता, सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक कल्याण सहित कई सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान देता है। संस्कृति मंत्रालय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता को बढ़ावा देगा तथा भावी पीढ़ियों के लिए समुदाय-आधारित परंपराओं की रक्षा के प्रयासों को सुदृढ़ करेगा।

  नई दिल्ली / रायपुर (शौर्यपथ) रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोक सभा में बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल अवसंरचना को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व वित्तीय आवंटन किया है। 2009-2014 के दौरान ₹311 करोड़ वार्षिक परिव्यय से बढ़कर 2025-26 के लिए यह राशि ₹6,925 करोड़ हो गई है, जो 22 गुना से अधिक वृद्धि दर्शाती है।
इस निवेश के तहत कई अहम परियोजनाएं तेजी से प्रगति पर हैं। इनमें खरसिया-नया रायपुर-परमालकसा नई लाइन (278 कि.मी., ₹7,854 करोड़), बस्तर क्षेत्र में रावघाट-जगदलपुर नई लाइन (140 कि.मी., ₹3,513 करोड़), और कोयला व खनिज परिवहन के लिए गेवरा रोड-पेंड्रा रोड नई लाइन (157 कि.मी., ₹3,923 करोड़) शामिल हैं। इसके साथ ही खरसिया-परमालकसा के 5वीं एवं 6वीं लाइन, बोरीडांड-अम्बिकापुर दोहरीकरण (80 कि.मी.) और बिलासपुर-झारसुगुड़ा चौथी लाइन (206 कि.मी.) परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।
रेल मंत्री की जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लिए दीर्घकालिक रोडमैप के तहत 2022-25 और वर्तमान वित्त वर्ष में 61 सर्वेक्षण कार्य शुरू किए गए हैं, जिनमें 26 नई लाइनें और 35 दोहरीकरण शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 5,755 कि.मी. है। ये कार्य रेल नेटवर्क के सघन विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की योजना को दर्शाते हैं।
सभी परियोजनाओं के चयन में यातायात अनुमान, लाभप्रदता, सामाजिक-आर्थिक महत्व, तथा प्रथम और अंतिम छोर संपर्कता जैसे कारकों का व्यावहारिक विश्लेषण शामिल है। केंद्र सरकार इन परियोजनाओं को छत्तीसगढ़ के त्वरित विकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है।
इस व्यापक रेल नेटवर्क विस्तार से न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को बेहतर यात्री और माल ढुलाई सुविधाएं मिलेंगी, जिससे छत्तीसगढ़ का कनेक्टिविटी और आर्थिक परिदृश्य मजबूत होगा।

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