January 23, 2026
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन 28 अक्तूबर को संयुक्त घोषणा पत्र जारी करेगा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पटना रैली से चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे। पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करने की बात कही।


बिहार चुनाव 2025: 28 अक्तूबर को महागठबंधन का घोषणा पत्र, राहुल-तेजस्वी की रैली से बढ़ेगा सियासी तापमान

पटना | ब्यूरो रिपोर्ट, शौर्यपथ न्यूज़ नेटवर्क

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच चुकी है। निर्वाचन आयोग ने पहले चरण के मतदान की घोषणा करते हुए बताया कि 121 विधानसभा क्षेत्रों में वोटिंग होगी। इसी बीच महागठबंधन ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए 28 अक्तूबर को अपना संयुक्त घोषणा पत्र जारी करने और राहुल गांधी व तेजस्वी यादव की साझा रैली आयोजित करने की घोषणा की है।


“बदलाव बनाम विकास” की जंग

महागठबंधन के घटक दल — राजद, कांग्रेस, वामदल और अन्य सहयोगी संगठन — ने साझा एजेंडा तय कर लिया है। घोषणा पत्र में रोजगार, शिक्षा, महंगाई, किसानों की आय, और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्रमुख मुद्दे होंगे।
राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यह साझा उपस्थिति विपक्षी एकता की नई तस्वीर पेश करेगी।

?️ “यह चुनाव बिहार के भविष्य और देश की दिशा तय करेगा।”
— राहुल गांधी, कांग्रेस नेता


एनडीए का पलटवार: सुरक्षा और विकास पर जोर

वहीं एनडीए खेमे ने भी प्रचार तेज कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा —

“घुसपैठियों को चुन-चुनकर बिहार से बाहर करेंगे। देश की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।”

यह बयान भाजपा की चुनावी रणनीति को रेखांकित करता है, जिसमें सुरक्षा और राष्ट्रहित प्रमुख विषय बन गए हैं।


चुनाव आयोग की अधिसूचना और प्रशासनिक तैयारियाँ

भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की अधिसूचना जारी करते हुए पहले चरण के मतदान की तारीखें तय की हैं।
पटना जिला प्रशासन ने 7 मई 2025 को निविदा सूचना जारी की थी, जिसके अंतर्गत मतदान केंद्रों, परिवहन व्यवस्था, और सुरक्षा प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी गई थी।


राजनीतिक अर्थ और विश्लेषण

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 28 अक्तूबर की राहुल-तेजस्वी रैली बिहार में विपक्षी एकता की परख होगी। यह केवल राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की रणनीतिक एकजुटता का संदेश भी है।
बिहार का यह चुनाव सत्ता परिवर्तन से अधिक, आने वाले 2029 लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।


मुख्य बिंदु संक्षेप में

  • 28 अक्तूबर को महागठबंधन का संयुक्त घोषणा पत्र जारी होगा

  • राहुल गांधी और तेजस्वी यादव करेंगे पटना में साझा रैली

  • पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान की घोषणा

  • अमित शाह बोले — “घुसपैठियों को चुन-चुनकर बिहार से बाहर करेंगे”

  • पटना जिला प्रशासन ने मई 2025 में निविदा सूचना जारी की थी


? रिपोर्ट: शौर्यपथ संवाददाता

पटना। शौर्यपथ । 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन, यानी महागठबंधन—दोनों में कई प्रमुख और क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं। यहां दोनों गठबंधनों की पार्टियों का हाल का ब्यौरा प्रस्तुत है:

 

एनडीए (NDA) गठबंधन में शामिल पार्टियां

भारतीय जनता पार्टी (BJP)

जनता दल (यूनाइटेड) [JDU]

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) – जीतन राम मांझी की पार्टी

लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) [LJP (RV)] – चिराग पासवान की पार्टी

राष्ट्रीय लोक जनतांत्रिक मोर्चा (रालोमो) – उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी

वर्तमान चुनाव में एनडीए में कुल 5 प्रमुख पार्टियां शामिल हैं।

इंडिया (I.N.D.I.A.)/महागठबंधन में शामिल पार्टियां

राष्ट्रीय जनता दल (RJD)

कांग्रेस (INC)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) [CPI (ML)]

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) – मुकेश सहनी की पार्टी

महागठबंधन/इंडिया में फिलहाल 4 मुख्य पार्टियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें वीआईपी की भी हाल ही में आमद हुई है।

अतिरिक्त जानकारी

दोनों गठबंधनों में क्षेत्रों के अनुसार कुछ छोटी पार्टियां और वैकल्पिक गठबंधन, सीटों के बंटवारे व स्थानीय समीकरण से भी जुड़ सकते हैं।

हालिया चुनावी समझौतों के कारण गठबंधनों में आंशिक बदलाव संभावित रहते हैं, किंतु ऊपर दी गई सूची वर्तमान हालत पर आधारित है।

पटना। शौर्यपथ । 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीतिक लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। इंडिया गठबंधन (महागठबंधन) ने पहली बार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री के रूप में पेश करते हुए चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। कांग्रेस के दिग्गज अशोक गहलोत की मौजूदगी में सार्वजनिक मंच पर गठबंधन के सभी दल—आरजेडी, कांग्रेस, वामदलों और वीआईपी के नेताओं—ने महागठबंधन की एकजुटता पर मुहर लगाई।

इस बार महागठबंधन ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए EBC, यादव, मुस्लिम और निषाद-मल्लाह वर्गों को जोड़ने का रणनीतिक दांव चला है। टिकट बंटवारे में कांग्रेस, आरजेडी, वाम दल और वीआईपी के उम्मीदवारों ने अपने-अपने परंपरागत आधार के साथ नई जातीय परतें जोड़ दी हैं, जिससे गठबंधन की ताकत कई गुना हो गई है। दूसरी ओर एनडीए पर आरोप लगे हैं कि वह महाराष्ट्र की तर्ज पर चुनाव जीतते ही मुख्यमंत्री बदलने की योजना बना रही है। विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार का यह ‘आखिरी चुनाव’ होगा और उन्हें चुनाव बाद दरकिनार किया जा सकता है।

महागठबंधन ने महिलाओं की स्थिति, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और गरीब वर्ग की चिंता को चुनावी नरेटिव का हिस्सा बनाया। इंडिया गठबंधन के संदेश में साफ तौर पर यह झलक रहा है कि बिहार को एक नई शुरुआत की जरूरत है, और जनता को मुख्यमंत्रियों के चेहरों... और वादों के बीच धोखे में नहीं रहना चाहिए।

यह चुनाव अब केवल वोटों की नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरण, असली मुद्दों और नेतृत्व की प्रामाणिकता की लड़ाई बन गया है। सभी दल अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं, लेकिन महागठबंधन की सामूहिक घोषणा और लक्ष्य अब बिहार की जनता को बदलाव की उम्मीद दे रही है।

पटना। शौर्यपथ। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का एक नया और दिलचस्प चेहरा अब सामने आ रहा है—जहां छत्तीसगढ़ के दो यादव नेता अलग-अलग खेमों से बिहार की सियासत में मोर्चा संभाले हुए हैं। भाजपा से छत्तीसगढ़ के मंत्री गजेंद्र यादव और कांग्रेस से विधायक देवेंद्र यादव दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के लिए बिहार के यादव वोट बैंक को साधने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

यादव समुदाय, जो कि बिहार की कुल आबादी का लगभग 14.26 प्रतिशत हिस्सा है, हर चुनाव में सत्ता की कुंजी साबित होता है। इसलिए इस बार दोनों राष्ट्रीय दलों ने अपने यादव नेताओं को बिहार के मैदान में उतारकर एक तरह से ‘यादव बनाम यादव’ सियासी संघर्ष की नींव रख दी है ।

गजेंद्र यादव को भाजपा नेतृत्व ने बिहार में एनडीए के पक्ष में यादव वोटों को आकर्षित करने की प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। वे न केवल प्रदेश के एकमात्र यादव मंत्री हैं, बल्कि संगठन और प्रचार की कमान भी संभाले हुए हैं। वहीँ कांग्रेस के लिए देवेंद्र यादव, जो दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और बिहार चुनाव के सह प्रभारी भी हैं, लगातार बिहार में महागठबंधन को धार देने के लिए सक्रिय हैं। देवेंद्र यादव पर पार्टी में टिकट वितरण को लेकर विवादों के बावजूद कांग्रेस का विश्वास बरकरार है ।

छत्तीसगढ़ का ये यादव समीकरण बिहार में सिर्फ यादव वोट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों की सियासत पर असर डालने लगा है। भाजपा की तरफ से गजेंद्र यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति का "संगठनिक स्तंभ" माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस में देवेंद्र यादव की भूमिका “भूपेश बघेल टीम” के हिस्से के रूप में देखी जा रही है—जो संगठन पुनर्जीवन का प्रयास कर रही है।

राजनीतिक रणनीतिकारों के अनुसार, बिहार की इस ‘यादव बनाम यादव’ जंग का असर ना केवल नीतीश-तेजस्वी समीकरण पर पड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के राजनीतिक शक्ति-संतुलन को भी नया आयाम देगा। गजेंद्र यादव जहां भाजपा के लिए “यादव समुदाय का सेतु” बनना चाहते हैं, वहीं देवेंद्र यादव कांग्रेस के लिए “वोटर पुनःसंयोजन का प्रतीक” बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।

बिहार चुनाव 2025 न केवल प्रदेश की सत्ता का फैसला करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि यादव राजनीति की आवाज किस खेमे से अधिक गूंजेगी—गजेंद्र या देवेंद्र?

पटना। शौर्यपथ। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चुनावी समीकरणों में अप्रत्याशित बदलाव दिखाई देने लगे हैं। नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के पर्चे निरस्त कर दिए गए हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, पहले चरण में 121 सीटों पर कुल 1314 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था, जिनमें से 315 नामांकन रद्द कर दिए गए। वहीं दूसरे चरण की 122 सीटों के लिए हुई जांच में 519 उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हुए हैं ।

प्रमुख उम्मीदवार जिनके पर्चे रद्द हुए

मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में सबसे बड़ा झटका राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को लगा है। कैमूर जिले की मोहनिया सीट से आरजेडी प्रत्याशी श्वेता सुमन का नामांकन निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दिया है। आयोग ने पाया कि श्वेता सुमन उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की मूल निवासी हैं और बिहार निर्वाचन सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था। इस वजह से उनका नामांकन अमान्य करार दिया गया ।

सुगौली विधानसभा (मोतिहारी) से विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रत्याशी शशि भूषण सिंह का नामांकन अधूरी दस्तावेज़ी प्रक्रिया के चलते निरस्त हुआ है। वहीं मढ़ौरा (सारण) सीट से एनडीए घटक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार सीमा सिंह का पर्चा भी तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया ।

इसके अलावा वाल्मीकिनगर (पश्चिमी चंपारण) से जनसुराज पार्टी के दीर्घ नारायण प्रसाद, लालगंज (वैशाली) से राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी की सीमा सुंदरी देवी, डेहरी (रोहतास) से बसपा के धनजी कुमार, और चिरैया (पूर्वी चंपारण) से आरएलजेपी के सलाउद्दीन समेत कई प्रत्याशियों के नामांकन भी खारिज हुए हैं ।

सियासी असर और दलों की रणनीति

आरजेडी और वीआईपी दोनों के लिए यह स्थिति झटका साबित हो रही है क्योंकि तीनों प्रभावित सीटें पहले से ही उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थीं। अब महागठबंधन को इन सीटों पर नए चेहरों की तलाश करनी होगी जबकि एनडीए की ओर से एलजेपी(आर) को भी मढ़ौरा सीट पर नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ रही है ।

निष्कर्ष

6 और 11 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को मतगणना से पहले नामांकन निरस्त होने की इस स्थिति ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पर्चे रद्द होना अभूतपूर्व है और इसका असर कई सीटों पर मुकाबले की दिशा तय कर सकता है 

SHOURYAPATH. मुंबई की एक सर्द होती दीवाली की शाम... जब पूरा देश दीपों के उजाले में रमा था, उसी क्षण भारतीय सिनेमा ने अपनी सबसे बड़ी मुस्कराहट खो दी। हास्य के सम्राट, शोले के अमर किरदार ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ असरानी अब नहीं रहे। सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 की दोपहर 3:30 बजे उन्होंने जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में अंतिम सांस ली। 84 वर्ष की आयु में वह हमें हमेशा के लिए छोड़ गए ।

   उनके भतीजे अशोक असरानी और मैनेजर बाबू भाई ने पुष्टि की कि उन्हें फेफड़ों में पानी भरने की समस्या थी। वे पिछले चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। विडंबना यह रही कि अपनी अंतिम सांस लेने से कुछ घंटे पहले ही असरानी ने इंस्टाग्राम पर अपने चाहने वालों को 'हैप्पी दीवाली' की शुभकामनाएं दी थीं — यह उनके प्रशंसकों के लिए अब हमेशा की तरह यादों में दर्ज आखरी संदेश बन गया ।

   परिवार की शांति की इच्छा, शांत अंतिम विदाईउनकी पत्नी मंजू असरानी ने पति की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए किसी सार्वजनिक कार्यक्रम से बचने का निर्णय लिया। इसलिए उन्हीं की इच्छा अनुसार सांताक्रूज़ श्मशान घाट में रात आठ बजे बेहद सादगी और निःशब्द वातावरण में अंतिम संस्कार किया गया। न दीप जलाए गए, न पुष्पवर्षा हुई — बस रौशनी के बीच एक रूहानी सन्नाटा था, जैसे हँसी का कोई गीत अधूरा रह गया हो ।

   अभिनय की विरासत, हँसी का इतिहास1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में जन्मे गोवर्धन असरानी ने वर्षों तक हिंदी सिनेमा को अपनी अनोखी टाइमिंग, भोलेपन और व्यंग्य की छौंक से सजाया। चुपके चुपके, रफू चक्कर, बावर्ची, चल मुरारी हीरो बनने, मेरे अपने जैसी फिल्मों से उन्होंने हँसी को नया अर्थ दिया। पर 1975 की शोले में उनका संवाद — “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं…” — भारतीय सिनेमा की स्मृतियों में अमर हो गया ।

  उनका अभिनय केवल कॉमेडी नहीं था; वह मानवता का अनुवाद था — एक ऐसी हँसी जो लोगों के दुख भुला देती थी। उनके अंदर का कलाकार हमेशा एक शरारती बच्चे की तरह जीता रहा — जो हर दृश्य में सादगी, व्यथा और करुणा के रंग बिखेर देता था।बॉलीवुड में शोक की लहरअसरानी के निधन की खबर से फिल्म जगत में गहरा सन्नाटा फैल गया। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अनीस बज्मी, जॉनी लीवर, शत्रुघ्न सिन्हा, परेश रावल और अन्य सितारों ने सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अक्षय कुमार ने लिखा — “आपने हमें हँसना सिखाया सर, आज आँखें नम हैं पर दिल आभारी है।”

  एक युग का अंत -गोवर्धन असरानी वह अभिनेता थे जिन्होंने ‘कॉमेडी’ को एक कला बनाया। आज जब उनके संवादों की गूँज सिनेमा के गलियारों में सुनाई देगी — तो वह हँसी की गूँज होगी जिसमें छिपा है सिनेमा का सबसे सच्चा भाव: इंसानियत।वो चले गए, पर उनके शब्द अब भी गूंजते हैं —

“हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं”…

और अब शायद ऊपर स्वर्ग में भी कोई हँसी रोक नहीं पा रहा होगा।” ???

राष्ट्रीय मंत्री अरविंद मेनन और छत्तीसगढ़ प्रतिनिधिमंडल के साथ बूथ स्तर तक जीत सुनिश्चित करने की बनी रणनीति

पटना/छपरा / शौर्यपथ /
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का शंखनाद होते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी अभियान में संगठन और समन्वय की शक्ति को एकजुट कर दिया है।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री एवं दुर्ग विधायक श्री गजेन्द्र यादव ने बिहार के सारण-छपरा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार की कमान संभाली।

मंत्री यादव ने बिहार में चुनावी अभियान को गति देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश के पूर्व संगठन महामंत्री अरविंद मेनन की उपस्थिति में आयोजित महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में भाग लिया।
इस बैठक में प्रत्येक बूथ पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

“भाजपा की ताकत कार्यकर्ताओं में है। जब प्रत्येक बूथ सशक्त होगा, तभी बिहार में पुनः डबल इंजन की सरकार बनेगी।”
गजेन्द्र यादव, मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

बैठक में महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिगरीवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, तथा सभी विधानसभा प्रभारी, संयोजक और विस्तारक उपस्थित रहे।
सभी ने बिहार में पुनः एनडीए की प्रचंड जीत सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

श्रद्धांजलि और संगठन भावना

प्रचार के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सारण पश्चिम भाजपा जिलाध्यक्ष स्व. बृजमोहन सिंह के निवास पर पहुँचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मंत्री यादव ने कहा —

“भाजपा संगठन को सशक्त बनाने में स्व. बृजमोहन सिंह जी का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और परिवार को शक्ति दें।”

बनियापुर और छपरा में जनसंवाद और कार्यकर्ता बैठकें

मंत्री यादव ने बनियापुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी श्री केदारनाथ सिंह एवं समर्पित कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की।
उन्होंने संगठन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि जनता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों को पहुँचाना ही विजय की कुंजी है।

छपरा विधानसभा क्षेत्र में मंत्री यादव ने भाजपा प्रत्याशी श्रीमती छोटी कुमारी के समर्थन में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और भव्य नामांकन रैली में सम्मिलित हुए।
रैली में जनता से अपील की गई कि वे विकास, विश्वास और सेवा की डबल इंजन सरकार को पुनः अवसर दें।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री सी.एन. गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।

“बिहार की जनता का उत्साह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस बार भी भाजपा की प्रचंड सरकार बनने जा रही है।”
गजेन्द्र यादव

आईएमए दिवाली मिलन समारोह में चिकित्सकों से संवाद

छपरा में आयोजित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) दिवाली मिलन समारोह में मंत्री यादव ने चिकित्सकों से आत्मीय संवाद किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की स्वास्थ्य सेवाओं में आए परिवर्तनकारी सुधारों की जानकारी साझा की और भाजपा प्रत्याशी श्रीमती छोटी कुमारी के पक्ष में समर्थन की अपील की।

छत्तीसगढ़ से बिहार तक एकजुट भाजपा परिवार

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में छत्तीसगढ़ भाजपा की उपस्थिति ने अभियान में नई ऊर्जा भर दी है।
18 अक्टूबर की नामांकन रैली के बाद से छत्तीसगढ़ के विधायक और मंत्री लगातार बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिनमें कैबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव की भूमिका सबसे प्रभावशाली रही है।

“एक राष्ट्र, एक संगठन, एक लक्ष्य — यही भाजपा की ताकत है।”

बिहार की धरती पर अब स्पष्ट दिख रहा है —
“डबल इंजन का इंजन फिर गरजने को तैयार है।”

 बिहार चुनाव 2025: नामांकन ड्रामे में उलझे दांव

मढ़ौरा और कुशेश्वरस्थान की सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं, पर क्या आयोग देगा 'दूसरा मौका'?

पटना | विशेष रिपोर्ट —
बिहार चुनाव 2025 में जहां नेता जनसमर्थन के लिए पसीना बहा रहे हैं, वहीं दो उम्मीदवारों की राजनीति तकनीकी गलती के जाल में फंस गई है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सीमा सिंह (मढ़ौरा) और वीआईपी पार्टी के गणेश भारती (कुशेश्वरस्थान) का नामांकन रद्द हो गया है — एक फॉर्म-B की गड़बड़ी में तो दूसरा सिंबल सिग्नेचर की कमी में।

अब सवाल यह है कि —
? क्या ये दोनों उम्मीदवार अब भी मैदान में उतर सकते हैं?
? या फिर यह चुनाव ‘तकनीकी गलती बनाम राजनीतिक किस्मत’ की कहानी बन जाएगा?

? मढ़ौरा में सीमा सिंह का नामांकन रद्द — फॉर्म-B बना मुश्किल का सबब

एलजेपी (रामविलास) की प्रत्याशी सीमा सिंह का नामांकन इसलिए रद्द हुआ क्योंकि उनके फॉर्म B — यानी पार्टी की आधिकारिक अनुमति पत्र — में त्रुटि पाई गई।
निर्वाचन अधिकारी ने सुधार का मौका दिया, लेकिन वे निर्धारित समय में संशोधित दस्तावेज़ नहीं जमा कर सकीं।

चिराग पासवान ने इस पर नाराज़गी जताते हुए कहा —

“यह एक मामूली तकनीकी गलती है, हमने चुनाव आयोग से पुनर्विचार का आग्रह किया है।”

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, सीमा सिंह के पर्चा रद्द होने से मढ़ौरा सीट पर एनडीए की स्थिति कमजोर हुई है और आरजेडी गठबंधन को अप्रत्यक्ष बढ़त मिल सकती है।

? कुशेश्वरस्थान में VIP उम्मीदवार गणेश भारती का नामांकन भी अमान्य

दरभंगा जिले की कुशेश्वरस्थान सीट से गणेश भारती का नामांकन इसलिए रद्द हुआ क्योंकि पार्टी सिंबल पत्र पर वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी के हस्ताक्षर मौजूद नहीं थे।
हालांकि गणेश भारती ने दो सेट नामांकन किए थे — एक पार्टी प्रत्याशी के रूप में और दूसरा निर्दलीय रूप में।
पहला नामांकन रद्द होने के बावजूद अब वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में रहेंगे।

यह फैसला महागठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है, क्योंकि वीआईपी पार्टी आरजेडी गठबंधन की सहयोगी है।

⚖️ क्या रद्द नामांकन बहाल हो सकता है? — जानिए कानूनी स्थिति

चुनाव आयोग के नियम साफ़ कहते हैं —

“नामांकन रद्द होने के बाद उम्मीदवारी सीधे तौर पर बहाल नहीं की जा सकती।”

हालाँकि दो रास्ते हैं—

  1. पुनर्विचार याचिका:
    उम्मीदवार यह साबित कर सकता है कि नामांकन रद्द करने में प्रक्रिया संबंधी गलती हुई।
    आयोग चाहे तो समीक्षा कर सकता है, लेकिन आम तौर पर यह दुर्लभ होता है।

  2. हाई कोर्ट में रिट याचिका:
    उम्मीदवार न्यायिक हस्तक्षेप मांग सकता है, पर यह लंबी प्रक्रिया होती है और चुनावी शेड्यूल में बाधा नहीं डालती।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है —

“अगर त्रुटि तकनीकी है और सुधार का अवसर दिया गया था, तो नामांकन दोबारा बहाल होने की संभावना बेहद कम होती है।”

? राजनीतिक असर: दो सीटें, दो झटके

  • मढ़ौरा (सरन) — एनडीए के लिए बड़ा नुकसान

  • कुशेश्वरस्थान (दरभंगा) — महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं

दोनों सीटें रणनीतिक रूप से अहम हैं —
मढ़ौरा पटना-बिहारशरीफ बेल्ट के समीकरण तय करती है,
तो कुशेश्वरस्थान मिथिलांचल का वोट पैटर्न प्रभावित करती है।


?️‍♂️ विश्लेषण: “तकनीकी गलती” या “राजनीतिक नियति”?

इन दोनों मामलों ने बिहार चुनाव 2025 में एक नया शब्द जोड़ा है —

‘टेक्निकल टर्निंग पॉइंट’
जहाँ एक हस्ताक्षर या एक फॉर्म की ग़लती पूरे राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।


निष्कर्ष:
सीमा सिंह और गणेश भारती की उम्मीदवारी अब आयोग या अदालत के निर्णय पर टिकी है।
पर मौजूदा संकेत यही कहते हैं — अब मैदान में वापसी आसान नहीं होगी।
तकनीकी गलती अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित ‘फैक्टर’ बन चुकी है।

? देश का स्वर्ण भंडार रिकॉर्ड स्तर पर — लेकिन सरकारी कर्ज भी GDP के 60% तक पहुंचा

रिपोर्ट: शौर्यपथ डिजिटल /संपादक: शरद पंसारी

?? 10 वर्षों में अर्थव्यवस्था बढ़ी, पर कर्ज भी तीन गुना हुआ

भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है, लेकिन इस विकास की रफ्तार के साथ-साथ कर्ज का पहाड़ भी खड़ा हो गया है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं —

मार्च 2014: केंद्र सरकार का बकाया कर्ज ₹55.87 लाख करोड़

मार्च 2024: यह बढ़कर ₹171.78 लाख करोड़ हो गया

मार्च 2025 (अनुमान): केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर्ज ₹181.68 लाख करोड़

राज्यों का कर्ज भी तेजी से बढ़ा है — 2013-14 से 2022-23 के बीच यह 3.39 गुना बढ़कर ₹59.60 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

? क्यों बढ़ा इतना कर्ज?

अर्थशास्त्रियों के अनुसार इस वृद्धि के तीन प्रमुख कारण हैं —

1️⃣ विकास परियोजनाओं का वित्तपोषण:
सरकार ने अवसंरचना, रक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर उधारी की।

2️⃣ राजकोषीय घाटे की भरपाई:
खर्च और आय के अंतर को पाटने के लिए लगातार कर्ज लिया गया।

3️⃣ कोविड-19 का असर:
महामारी से निपटने के लिए राहत पैकेज, स्वास्थ्य ढांचे और टीकाकरण में भारी उधारी की आवश्यकता हुई।

? भारत का स्वर्ण भंडार: दुनिया में आठवां स्थान

भारत न केवल सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, बल्कि उसका सरकारी और निजी स्वर्ण भंडार अब अभूतपूर्व स्तर पर है।

श्रेणी    सोने का भंडार (टन में)    अनुमानित मूल्य (₹ में)
भारतीय रिजर्व बैंक (मई 2025)    880 टन    ₹4.32 लाख करोड़
भारतीय परिवार (मॉर्गन स्टेनली रिपोर्ट)    34,600 टन    ₹317 लाख करोड़
कुल मिलाकर (RBI + निजी)    लगभग 35,480 टन    ₹321 लाख करोड़ से अधिक

? “भारत के पास अब दुनिया का आठवां सबसे बड़ा आधिकारिक स्वर्ण भंडार है — और पिछले 10 वर्षों में इसमें लगभग 300 टन की बढ़ोतरी हुई है।”

? विश्व स्वर्ण भंडार में भारत की स्थिति
रैंक    देश    सोने का भंडार (टन)
1️⃣    अमेरिका    8133.46
2️⃣    जर्मनी    3351.53
3️⃣    इटली    2451.84
4️⃣    फ्रांस    2436.97
5️⃣    रूस    2335.85
6️⃣    चीन    2264.32
7️⃣    जापान    845.97
**8️⃣    भारत    876.18**

? GDP और कर्ज का अनुपात: सतर्क संकेत

भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2024-25 में लगभग ₹300 लाख करोड़ आंका गया है।
वर्तमान में केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर्ज GDP के लगभग 60% तक पहुंच चुका है।

?️ “यह अनुपात अभी नियंत्रण में है, लेकिन अगर विकास दर 7% से नीचे गई तो कर्ज की सेवा लागत सरकार के राजकोष पर भारी दबाव डाल सकती है।” — आर्थिक विश्लेषक

⚖️ “सोना बढ़ा, पर कर्ज भी बढ़ा — दो विपरीत सच”

सोशल मीडिया पर भारत के स्वर्ण भंडार में हुई बढ़ोतरी को राष्ट्र की ‘आर्थिक ताकत’ बताया जा रहा है,
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज का समानांतर बढ़ना चिंता का संकेत है।

? “सोने की चमक तभी स्थायी है, जब वित्तीय अनुशासन समान गति से बढ़े।”

? निष्कर्ष

भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में है।
सोने की बढ़ती चमक और कर्ज का बढ़ता साया — दोनों भारत की आर्थिक यात्रा की सच्ची तस्वीर हैं।
एक ओर यह आत्मनिर्भरता और पूंजी संचय का प्रतीक है,
तो दूसरी ओर यह याद दिलाता है कि विकास को टिकाऊ बनाने के लिए वित्तीय संतुलन आवश्यक है।

✒️ “निष्पक्ष पत्रकारिता के दीप से जनविश्वास का आलोक”

— शरद पंसारी
(संपादक, शौर्यपथ दैनिक समाचार एवं www.shouryapathnews.in

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