August 02, 2026
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    भारत

    भारत (1077)

     

    नई दिल्ली ।
    देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।

    बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।

    “वन हेल्थ” मॉडल से एकीकृत स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर

    बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।

    एक वर्ष में कई बड़ी उपलब्धियां

    राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—

    • राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मॉडल शासन ढांचे का विकास,
    • जीनोमिक्स और मेटाजीनोमिक्स आधारित निगरानी नेटवर्क की शुरुआत,
    • चिड़ियाघरों, पक्षी अभयारण्यों और बूचड़खानों में निगरानी प्रणाली,
    • जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान शामिल हैं।

    बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।

    AI आधारित निगरानी और डेटा साझाकरण पर फोकस

    विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    मॉक ड्रिल और तैयारी तंत्र को मजबूत करने पर जोर

    समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।

    उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।

    केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान में अत्याधुनिक भूमिगत खनन और स्मेल्टिंग परियोजनाओं का किया निरीक्षण

    नई दिल्ली/राजस्थान, ।
    केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने राजस्थान स्थित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा-दरीबा परिसर का दौरा करते हुए कहा कि कंपनी का आधुनिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित परिचालन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” और “आत्मनिर्भर भारत” के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत उदाहरण है।

    दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक और तकनीकी रूप से उन्नत भूमिगत खानों में शामिल सिंदेसर खुर्द खदान तथा अत्याधुनिक दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भारत का खनन क्षेत्र अब पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर आधुनिक, सुरक्षित, जिम्मेदार और तकनीक-संचालित विकास इंजन में बदल रहा है।

    “खनिज सुरक्षा से मजबूत होगा विकसित भारत”

    श्री रेड्डी ने कहा कि जस्ता, सीसा और चांदी जैसे खनिज भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रक्षा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान जिंक जैसे बड़े और तकनीक आधारित उद्योग आयात निर्भरता कम करने और घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार खनन भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

    तकनीक और सुरक्षा का आधुनिक मॉडल

    केंद्रीय मंत्री ने भूमिगत खदान में जाकर टेली-रिमोट संचालन, पेस्ट फिलिंग, डिजिटल नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपायों का अवलोकन किया। उन्होंने भारत की पहली महिला खदान बचाव दल के लाइव प्रदर्शन की भी सराहना की और कहा कि यह खनन क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    हिंदुस्तान जिंक में वर्तमान में लगभग 26.3 प्रतिशत महिला कार्यबल कार्यरत है, जिसे मंत्री ने समावेशी कार्य संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    कर्मचारियों और महिला इंजीनियरों से संवाद

    दौरे के दौरान श्री रेड्डी ने खदान की कैंटीन में संविदा कर्मचारियों, महिला खनन इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के साथ भोजन कर संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों की मेहनत, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और भारत के खनन विकास में उनके योगदान की सराहना की।

    सतत विकास और हरित भविष्य पर जोर

    केंद्रीय मंत्री को कंपनी द्वारा जल संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, कम कार्बन उत्सर्जन, संसाधन दक्षता और सतत खनन से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में भारत की खनिज सुरक्षा, घरेलू विनिर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास में भारतीय खनन कंपनियों की भूमिका पर विशेष फोकस रहा।

    इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ श्री अरुण मिश्रा, खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विवेक बाजपेई और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    शिवराज सिंह चौहान का ऐलान — लाइसेंस, उर्वरक पंजीकरण और आयात प्रक्रियाएं होंगी आसान, किसानों को मिलेगा तकनीक का बड़ा सहारा

    नई दिल्ली, 18 मई 2026।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रही “रिफॉर्म एक्सप्रेस” को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों के लिए कई बड़े सुधारों का ऐलान किया है। नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्रालय ने लाइसेंसिंग, उर्वरक पंजीकरण, आयात-निर्यात प्रक्रिया और AI आधारित कृषि सेवाओं को सरल एवं डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसलों की समीक्षा की।

    बैठक में मंत्रालय के सचिव श्री अतीश चंद्रा ने बताया कि घरेलू उपयोग के कीटनाशकों की बिक्री एवं भंडारण हेतु लाइसेंस प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया गया है। अब आवेदन पत्र को तीन पन्नों से घटाकर केवल एक पृष्ठ का कर दिया गया है। साथ ही पारंपरिक फिजिकल लीफलेट की जगह अब उत्पादों पर सीधे QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। इस फैसले से देशभर के 40 लाख से अधिक खुदरा विक्रेताओं और किराना दुकानदारों को सीधा लाभ मिलेगा।

    नए उर्वरकों की मंजूरी प्रक्रिया होगी तेज

    सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 के तहत नए उर्वरकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी सरल बना दिया है। पहले जहां दो अलग-अलग समितियों की मंजूरी आवश्यक थी, अब केवल केंद्रीय उर्वरक समिति को अधिकृत किया गया है। इससे नई तकनीक वाले उर्वरकों को बाजार तक पहुंचाने में तेजी आएगी। सरकार भविष्य में गुणवत्ता मानकों को पूरा करने वाले अकार्बनिक उर्वरकों को अनिवार्य फील्ड ट्रायल से छूट देने पर भी विचार कर रही है।

    649 कस्टम पोर्ट्स का डिजिटल एकीकरण

    कृषि जिंसों के आयात को आसान बनाने के लिए देश के सभी 649 कस्टम पोर्ट्स को डिजिटल रूप से इंटीग्रेट कर दिया गया है। अब PQMS और ICEGATE के बीच एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी स्थापित हो चुकी है। इससे आयातकों को केवल एक बार आवेदन करना होगा और Import Release Order सीधे उनके लॉगिन पर उपलब्ध हो जाएगा।

    बीज आयात-निर्यात में भी बड़ी राहत

    सरकार ने बीज एवं रोपण सामग्री के आयात-निर्यात से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को खत्म करते हुए EXIM Committee को समाप्त कर दिया है। साथ ही “Prior Recommendation” की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है, जिससे व्यापार प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।

    किसानों के लिए AI आधारित ‘भारत-विस्तार’ प्लेटफॉर्म

    बैठक में “भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) – AI in Agriculture” प्लेटफॉर्म की भी समीक्षा की गई। यह AI आधारित डिजिटल मंच किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा रहा है। 17 फरवरी 2026 को लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 44 लाख से अधिक प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं।

    पहले किसानों को जानकारी के लिए अलग-अलग 15 प्लेटफॉर्म्स पर जाना पड़ता था, लेकिन अब वे एक ही स्थान पर 24x7 सभी जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    बैठक के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और सुशासन को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों, व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।

     

    नई दिल्ली, ।
    भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए.पी. शिंदे संगोष्ठी हॉल, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय “अखिल भारतीय राजभाषा समारोह-2026” का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में राजभाषा हिंदी के संवर्धन, प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों में उसके प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

    कार्यक्रम का उद्घाटन महानिदेशक (एनएसएस) सुश्री गीता सिंह राठौर ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि विचारों और भावनाओं की सहज एवं प्रभावी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से दैनिक शासकीय कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।

    समारोह में महानिदेशक (सीएस), अपर सचिव, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सहित मंत्रालय और क्षेत्र संकार्य प्रभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कनिष्ठ अनुवाद अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

    कार्यक्रम के दौरान आयोजित परिचर्चा सत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के निदेशक श्री श्याम सुंदर कथूरिया ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के सहज, सरल और प्रभावी उपयोग के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए। साथ ही देश के तीनों राजभाषा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे पैनल सदस्यों ने विभिन्न चुनौतियों और उनसे जुड़े समाधान प्रस्तुत किए।

    समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि राजभाषा हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं है, उन्हें हिंदी प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को अपने अधीनस्थ उप-क्षेत्रीय कार्यालयों में हिंदी में कार्य बढ़ाने तथा राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया गया।

     

    नई दिल्ली ।
    न्यायमूर्ति श्री यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच कर रही न्यायाधीश जांच समिति ने सोमवार को अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को सौंप दी। यह रिपोर्ट संसद भवन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत की गई। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए तैयार की गई इस रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाएगा।

    समिति के पीठासीन अधिकारी एवं सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने यह रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी। इस दौरान समिति के अन्य सदस्य — बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री बी.वी. आचार्य — भी उपस्थित रहे।

    गौरतलब है कि इस जांच समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा 12 अगस्त 2025 को किया गया था। समिति को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

    अब इस रिपोर्ट के संसद में पेश होने के बाद राजनीतिक और न्यायिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

     

    अहमदाबाद । केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (एनआईडी) में नवाचार एवं उद्यम संवर्धन केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल तथा कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

    अपने संबोधन में श्री अमित शाह ने कहा कि डिज़ाइन केवल एक विधा नहीं, बल्कि रचनात्मकता, कला और प्रस्तुति का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि एनआईडी का उद्देश्य देश में डिज़ाइन संस्कृति को बढ़ावा देना तथा इसकी व्यावसायिक संभावनाओं को शत-प्रतिशत विकसित करना है।

    गृह मंत्री ने कहा कि भारत में डिज़ाइन की परंपरा सदियों पुरानी है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और नए स्वरूप में विकसित करने की है। उन्होंने पाटन के प्रसिद्ध पटोला शिल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कला और डिज़ाइन में वैज्ञानिक सोच और बारीकी पहले से मौजूद है।

    श्री शाह ने कहा कि अब एनआईडी को अर्धचालक चिप, उच्च तकनीकी डिज़ाइन और आधुनिक औद्योगिक परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि नवाचार एवं उद्यम संवर्धन केंद्र युवाओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को करियर में बदलने का सशक्त मंच प्रदान करेगा।

    उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिज़ाइन से जुड़े युवाओं को केवल रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक समझ और बाज़ार से जोड़ने की दिशा में भी काम करना होगा, ताकि देश में डिज़ाइन क्षेत्र की पूरी क्षमता का लाभ मिल सके।

    गृह मंत्री ने कहा कि संगीत, कला, लेखन या डिज़ाइन— किसी भी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए उसे पेशे के रूप में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि एनआईडी आने वाले समय में भारत को वैश्विक डिज़ाइन और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।

    क्या 5 जजों की संविधान पीठ को सौंपा जाएगा मामला? केंद्र के हलफनामे पर भी होगी तीखी बहस

    नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में अब 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच — Justice Dipankar Datta और Justice Satish Chandra Sharma — मामले की अगली सुनवाई करेगी।

    यह मामला केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था Election Commission of India की निष्पक्षता, स्वायत्तता और लोकतंत्र की पारदर्शिता से भी सीधे जुड़ा माना जा रहा है।

    संविधान पीठ को भेजे जाने पर बड़ा फैसला संभव

    14 मई की सुनवाई के दौरान अदालत में तीखी बहस देखने को मिली थी। अब 19 मई को यह तय हो सकता है कि क्या इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ (Constitutional Bench) के पास भेजा जाएगा।

    यदि मामला संविधान पीठ को सौंपा जाता है, तो यह आने वाले समय में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर ऐतिहासिक संवैधानिक व्याख्या तय कर सकता है।

    केंद्र सरकार के हलफनामे पर उठेंगे सवाल

    केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करना कोई संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है।

    इसी बिंदु को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से कड़ी आपत्ति जताई जा रही है। विपक्षी पक्ष का तर्क है कि यदि चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भूमिका कम होती है, तो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

    अतिरिक्त दस्तावेज और दलीलें पेश होंगी

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे 19 मई को अपने अतिरिक्त दस्तावेज, लिखित तर्क और बची हुई दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े व्यापक सवालों को भी प्रभावित कर सकती है।

    लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा

    देशभर की निगाहें अब 19 मई की सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक कानून की वैधता का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के भरोसे का भी प्रतीक बन चुका है।

    यदि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर संविधान पीठ गठित करता है, तो यह भारतीय संवैधानिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में शामिल हो सकता है।

    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के निदेशक चयन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय चयन समिति में नए निदेशक के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के बाद केंद्र सरकार ने मौजूदा सीबीआई निदेशक Praveen Sood के कार्यकाल को एक वर्ष और बढ़ाने का फैसला लिया है। यह निर्णय अब राष्ट्रीय राजनीति और प्रशासनिक पारदर्शिता के बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।

    चयन समिति की बैठक में टकराव

    मई 2026 में आयोजित चयन समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi शामिल थे। बैठक के दौरान राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने उम्मीदवारों की “सेल्फ-अप्रेजल” और “360-डिग्री असेसमेंट रिपोर्ट” समिति के सामने प्रस्तुत नहीं की।

    राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया को “महज औपचारिकता” और “पक्षपातपूर्ण” बताते हुए असहमति नोट सौंपा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद सरकार के फैसलों पर केवल “रबर स्टैंप” लगाने के लिए नहीं है। नए नामों पर सहमति न बनने के बाद उन्होंने बैठक से खुद को अलग कर लिया।

    सरकार ने क्यों बढ़ाया कार्यकाल?

    चयन प्रक्रिया में गतिरोध के बीच केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (ACC) ने प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का हवाला देते हुए प्रवीण सूद को एक और सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया।

    1986 बैच के आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद को मई 2023 में पहली बार दो वर्ष के लिए सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था। मई 2025 में उन्हें पहला विस्तार मिला और अब उनका कार्यकाल मई 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

    नए दावेदारों की उम्मीदों पर विराम

    सीबीआई निदेशक पद की दौड़ में शामिल GP Singh और Shatrughan Singh Kapoor जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति फिलहाल टल गई है। राजनीतिक सहमति नहीं बनने के कारण अब यह मामला और अधिक संवेदनशील माना जा रहा है।

    लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

    विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को संवैधानिक संस्थाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है। ऐसे में सीबीआई प्रमुख के चयन को लेकर उठा यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

     

    चेन्नई/शौर्यपथ।
    तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के नेतृत्व वाली नवगठित तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार ने विधानसभा में भारी बहुमत के साथ विश्वास मत हासिल कर लिया।
    13 मई 2026 को आयोजित फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार के पक्ष में 144 विधायकों ने मतदान किया, जबकि विरोध में केवल 22 वोट पड़े। इस परिणाम ने न केवल नई सरकार की स्थिरता पर मुहर लगा दी, बल्कि राज्य की पारंपरिक राजनीतिक धुरी को भी पूरी तरह बदल दिया।

    तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बचाने के लिए साधारण बहुमत का आंकड़ा 118 था, जिसे विजय सरकार ने बेहद सहजता और प्रभावशाली राजनीतिक प्रबंधन के साथ पार कर लिया।

    TVK के पास अपने 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके, आईयूएमएल और एएमएमके जैसे सहयोगी दलों ने सरकार को खुला समर्थन देकर सत्ता पक्ष को और मजबूती प्रदान की।


    AIADMK में बगावत ने विपक्ष को किया कमजोर

    विश्वास मत के दौरान सबसे बड़ा राजनीतिक झटका विपक्षी दल AIADMK को लगा।
    सूत्रों और सदन की स्थिति के अनुसार, पार्टी के लगभग 25 बागी विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया।

    इस बगावत के चलते विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी का खेमाअसहज स्थिति में दिखाई दिया और उनके समर्थन में केवल 22 विधायक ही सरकार के खिलाफ मतदान कर सके।
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम AIADMK के भीतर गहरे नेतृत्व संकट और असंतोष का संकेत माना जा रहा है।


    DMK का वॉकआउट बना सरकार के लिए राहत

    सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
    हालांकि मतदान की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले मुख्य विपक्षी दल DMK के 59 विधायकों ने पूरी प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

    DMK के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे “जनादेश से पलायन” करार दिया।


    बीजेपी और PMK ने अपनाया तटस्थ रुख

    विश्वास मत के दौरान भाजपा के एकमात्र विधायक तथा पीएमके के 4 विधायकों ने मतदान से दूरी बनाते हुए तटस्थ रुख अपनाया।
    इस रणनीति को भविष्य की संभावित राजनीतिक संभावनाओं और गठबंधन समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।


    तमिलनाडु की राजनीति में नए युग की शुरुआत

    फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए थलापति विजय ने बेहद कम समय में जिस प्रकार राज्य की सत्ता तक पहुंच बनाई, वह दक्षिण भारतीय राजनीति के इतिहास में एक असाधारण राजनीतिक उभार माना जा रहा है।
    फ्लोर टेस्ट में मिली प्रचंड सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि TVK अब केवल एक उभरता हुआ दल नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता का नया केंद्र बन चुका है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस शक्ति परीक्षण के बाद विजय सरकार अब प्रशासनिक फैसलों और जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकेगी।

    तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को हुए इस विश्वास मत ने एक संदेश साफ कर दिया —
    राज्य की राजनीति अब नए नेतृत्व, नए गठबंधन और नए सत्ता समीकरणों के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

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