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केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को दी बधाई
नई दिल्ली / एजेंसी (पीआईबी ) केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन “Crystal Fortress” के तहत मेगा ट्रांस-नेशनल मेथामफेटामाइन कार्टेल के भंडाफोड़ के लिए NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई दी। X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हमारी सरकार बहुत तेज़ी से ड्रग कार्टेल को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की जांच के लिए Top-to-bottom और bottom-to-top अप्रोच को सख्ती से अपनाते हुए, नई दिल्ली में ₹262 करोड़ कीमत का 328 kg मेथामफेटामाइन की ज़ब्ती और दो लोगों को गिरफ्तारी से एक बड़ी कामयाबी मिली।
श्री शाह ने कहा कि यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री मोदी के नशामुक्त भारत के विज़न की दिशा में कई एजेंसियों के बीच सीमलैस तालमेल का एक शानदार उदाहरण था। NCB और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम को बधाई।
एक बड़ी कामयाबी में, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (OPS ब्रांच) ने स्पेशल सेल (CI) दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर 20.11.2025 को ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस के तहत छतरपुर, दिल्ली के एक घर से करीब 328 किलोग्राम हाई-क्वालिटी मेथामफेटामाइन ज़ब्त कर एक ट्रांस-नेशनल ट्रैफिकिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन क्रिस्टल फोर्ट्रेस एक समन्वित और इंटेलिजेंस-ड्रिवन अभियान था जो सिंथेटिक ड्रग की अधिक मात्रा वाले नेटवर्क को टारगेट कर रहा था।
यह अहम कार्रवाई पिछले कुछ महीनों से खुफिया जानकारी और तकनीकी इंटरसेप्ट्स के आधार पर लगातार की जा रही जांच का नतीजा है, जिससे एक ट्रैफिकिंग चेन का पता चला और यह बड़ी कामयाबी मिली।
पकड़े गए दो लोगों, जिनमें नागालैंड की एक महिला भी शामिल है और जिसके घर से बड़ी मात्रा में ज़ब्ती की गई थी, को नागालैंड पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा, दूसरे लोगों की पहचान भी हो गई है। इनमें विदेश से काम करने वाला गिरोह का सरगना भी शामिल है। वह पिछले साल दिल्ली में NCB द्वारा 82.5 किलोग्राम हाई-ग्रेड कोकीन ज़ब्ती के मामले में भी वांछित है। इंटरनेशनल एनफोर्समेंट पार्टनर्स के साथ मिलकर, उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह दिल्ली में मेथमफेटामाइन की सबसे बड़ी ज़ब्ती में से एक है। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह कार्टेल कई कूरियर, सेफ-हाउस और लेयर्ड हैंडलर के ज़रिए काम कर रहा था और दिल्ली को भारत और विदेशी बाज़ार में इसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
ऑपरेशन “क्रिस्टल फोर्ट्रेस” सिंथेटिक ड्रग कार्टेल और उनके ट्रांस-नेशनल नेटवर्क को खत्म करने के प्रति NCB की प्रतिबद्धता को दिखाता है। ड्रग ट्रैफिकिंग से लड़ने के लिए, देशवासी NCB की मदद करें। कोई भी व्यक्ति MANAS- नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर-1933 पर कॉल कर नशीले पदार्थों की बिक्री से जुड़ी जानकारी शेयर कर सकता है।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
राष्ट्रपति ने जनजातीय संस्कृति व शिल्प को दर्शाते स्टॉलों का अवलोकन किया
पारंपरिक अखरा एवं देवगुड़ी के मॉडल में देवताओं की आराधना भी की
कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार श्री दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार श्री तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल में जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं शिल्प, आभूषण एवं वस्त्र, पूजा-पाठ, संस्कार, व्यंजन, वाद्ययंत्रों, जड़ी-बूटियों आदि को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शनियां लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
पारम्परिक अखरा स्थल एवं जनजातियों के धार्मिक आस्था के केंद्र देवगुड़ी में देवताओं की आराधना की
कार्यक्रम में सांकेतिक रूप से बनाए गए जनजातियों के पारंपरिक अखरा स्थल एवं जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी के मॉडल का अवलोकन कर यहां देवताओं की आराधना की।
अखरा छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा अंचल में निवासरत जनजातियों का सांस्कृतिक स्थल है, जो गाँवों के मध्य या चौराहे में स्थित होते हैं, जहाँ छायादार पेड़ों के झुण्ड भी होते हैं। ग्रामीणजन विभिन्न लोक पर्वों जैसे करमा, महादेव बायर, तीजा आठे, जीवतिया, सोहराई, दसई, फगवा के अवसरों में महिला एवं पुरूष सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर लोकगीत गाकर पारम्परिक वाद्ययंत्रों की थाप में लोकनृत्य करके उत्साह मनाते हैं। प्रदर्शनी में जनजातीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया। जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी को राज्य में क्षेत्रवार विभिन्न नामों जैसे देवाला देववल्ला, मन्दर, शीतला, सरना आदि नामों से भी जानते हैं। देवगुड़ी में ग्रामीण देवी-देवता जैसे बुढ़ादेव, बुढ़ीदाई, शीतला, सरनादेव, डीहवारीन, महादेव आदि विराजमान होते हैं। जनजातीय विभिन्न लोकपर्वों के अवसरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर ग्रामीण बैगा की अगुवाई में पूजा-पाठ कर ग्राम की सुख, शांति, समृद्धि हेतु कामना करते हैं।
मिट्टी, लकड़ी से बने आवास मॉडल का किया अवलोकन
कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों के पारंपरिक आवास का मॉडल बनाया गया था। राष्ट्रपति ने आवास मॉडल का भी अवलोकन किया। जनजातियों का आवास मिट्टी, लकड़ी से निर्मित होते हैं, जिसमें एक या दो कमरे व मुख्य कमरे के सामने की ओर परछी (बराम्दा) बने होते हैं। घर के छप्पर में ढालनुमा खपरैल लगे होते हैं। एक कमरे को रसोई कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं, जिसमें रसोई उपकरण व घरेलू सामान रखते हैं, दूसरे कक्ष को शयन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। परछी (बराम्दा) में अन्य घरेलू सामान जैसे ढ़ेकी, मूसल, सील-बट्टा, जांता आदि उपकरण होते हैं।
जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वों एवं आयोजनों में पहने जाने वाले आभूषणों की लगी प्रदर्शनी, कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा किया भेंट
इस दौरान राज्य के पारंपरिक आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आभूषणों के संबंध में जानकारी ली। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा भेंट किया, जिसे राष्ट्रपति ने आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को बताया कि पारम्परिक आभूषण गिलट, तांबे, चांदी, सोना आदि धातु से निर्मित हैं, जिसे विभिन्न लोकपर्वों के अवसर में धारण करते हैं। इस दौरान गले में पहने जाने वाले हसुली, बांह में बहुटा, कलाई में ऐंठी, गले में रूपया वाला चंदवा, कमर में कमरबंध, पैर में पैरी एवं पैर की अंगुलियों में बिछिया, कान में ठोठा तथा नाक में पहने जाने वाले छुछिया (फूली) का प्रदर्शन किया गया।
वाद्ययंत्रों की लगी प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में जनजातियों द्वारा लोकपर्वों में मनोरंजन के लिए बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रपति ने इन वाद्ययंत्रों को देखा। राज्य में निवासरत जनजातियां उत्साह के लिए तत, अवनद्ध, घन और सुषिर वाद्ययंत्रों का वादन करते हैं, जिनकी मधुर ध्वनियाँ उत्सव के अवसर में देखते ही बनते हैं। कई ऐसे वाद्ययंत्र है, जिनकी आवाजें मीलों दूर तक गुंजती है और लोगों को स्वतः नृत्य करने हेतु प्रेरित करती है। सरगुजा व बस्तर अंचल में तो कई महिनों तक निरंतर वाद्ययंत्र की आवाजें सुनाई पड़ती है। इन वाद्ययंत्रों के कारण ही जनजातियों के समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है। सरगुजा अंचल के जनजातियों द्वारा विभिन्न लोकपर्वां में वादन किया जाने वाले वाद्ययंत्र मांदर, ढोल, झांझ, मजीरा, तम्बूरा, सरंगी, खंजरी, बांसुरी, चौरासी, एवं पैजन आदि का प्रदर्शन किया गया है।
जनजातीय समुदायों द्वारा इलाज में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां की गई प्रदर्शित
कार्यक्रम स्थल में आयोजित प्रदर्शनी में राज्य में निवासरत जनजातियों द्वारा शारीरिक विकार के उपचार हेतु प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियां प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में अष्वगंधा, कुलंजन, मुलेठी, सफेद मूसली, गिलोय, लाल झीमटी, अर्जून छाल, पिसीया, भुईचम्पा, गोखरू, कुटज की छाल, गुडमान की पत्ति, विरैता, रोहिने की छाल, बालमखिरा, हर्रा एवं बेहड़ा बड़ी ईमली की बीज, हड़सिंगार, अकरकरा, चिरईगोड़ी, शिलाजीत एवं बलराज आदि रखे गए हैं। वनांचल, पहाड़ी, घाटी, तराई में निवास करती हैं। इनके निवास क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के औषधियाँ पेड़-पौधे कन्दमूल बेल, आदि पाए जाते हैं। जनजाति समाज के लोग शारीरिक विकार होने पर इन्हीं जंगली-जडी बूटियों से अपना उपचार कराते हैं। जनजाति समाज के वैद्य, बैगा, गुनिया, हथजोड़ वंशानुगत रूप से लोगों का उपचार करते हैं।
पारम्परिक व्यंजन एवं कंदमूल
तीज-त्यौहारों, अन्य अवसरों में जनजातीय समुदायों द्वारा बनाए जाने वाले व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। यहां विभिन्न प्रकार के रोटी, चटनी, कोहरी (बरी), लड्डू आदि रखे गए हैं। जनजातीय महिलाएं प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं से व्यंजन तैयार करते हैं तथा जंगलों से विभिन्न प्रकार के कंदमूल, फल-फूल आदि एकत्र कर खाद्य के रूप में उपयोग करते हैं। इस दौरान कांदा-पीठारू कांदा, डांग कांदा, नकवा (चूरका) कांदा, सखईन कांदा आदि प्रदर्शित किए गए हैं।
पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलकर जाना कुशलक्षेम, शॉल भेंट कर किया सम्मान
रायपुर / शौर्यपथ / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में राज्यपाल श्री रमेन डेका, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, राज्यमंत्री जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार श्री दुर्गा दास उईके, राज्यमंत्री आवास एवं शहरी मंत्रालय भारत सरकार श्री तोखन साहू, आदिम जाति विकास विभाग कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम, प्रभारी मंत्री जिला सरगुजा एवं वित्त वाणिज्यिक कर विभाग मंत्री श्री ओमप्रकाश चौधरी, पर्यटन संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन परिवहन सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण चिकित्सा शिक्षा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास 20 सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास समाज कल्याण विभाग मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सरगुजा सांसद श्री चिंतामणी महाराज, उत्तर रायपुर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, महापौर अम्बिकापुर श्रीमती मंजुषा भगत भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने जनजातीय समाज प्रमुखों, पीवीटीजी समुदाय के समाज प्रमुखों, जनजातीय समाज के उत्थान में विशेष योगदान देने वालों, जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम में सेनानियों के परिजनों से भेंट की। श्रीमती मुर्मू ने इन सभी के साथ समूह फोटो खिंचवाई।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय जननायकों एवं सेनानियों के परिजनों का सम्मान किया। राष्ट्रपति ने सोनाखान क्रांति के जननायक शहीद वीर नारायण सिंह एवं शहीद वीर नारायण सिंह के सेनापति, परलकोट क्रांति के जननायक शहीद गेंदसिंह, झण्डा सत्याग्रह के जननायक श्री सुकदेव पातर, भूमकाल क्रांति के जननायक श्री बन्टु धुरवा, जंगल सत्याग्रह के जननायक शहीद रामधीन गोड़, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री राजनाथ भगत एवं श्री माझी राम गोंड़ के परिजनों से भेंट की।
राष्ट्रपति ने बिरहोर जनजाति के श्री राजेश बिरहोर, अबुझमाड़िया जनजाति के श्री रामजी ध्रुव, बैगा जनजाति के श्री एतवारी राम मछिया एवं पहाड़ी कोरवा जनजाति के श्री जोगीराम से सौजन्य भेंट की और हाल-चाल पूछा। राष्ट्रपति ने इसी तरह उरांव जनजाति के श्री मंगल उरांव, नगेशिया जनजाति के श्री धनराम नागेश, खैरवार जनजाति के श्री वीर सिंह खैरवार, कंवर जनजाति के श्री संजय सिंह, नागवंशी जनजाति के श्री लक्कू राम नागवंशी, मुरिया जनजाति के श्री धनीराम शोरी, गोंड़ जनजाति के श्री मोहन सिंह, पंण्डो जनजाति के श्री विनोद कुमार पंण्डो एवं चेरवा जनजाति के श्री डी.एन. चेरवा से भी भेंट की।
पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलकर जाना कुशलक्षेम, शॉल भेंट कर किया सम्मान
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु कार्यक्रम के दौरान पण्डो जनजाति के बसन्त पण्डो से मिलीं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने उनका कुशल क्षेम जाना और उन्हें शॉल भेंट की। बसन्त पण्डो ने राष्ट्रपति को बताया कि भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद जब वर्ष 1952 में अंबिकापुर आए थे, तब वे 08 वर्ष के थे। राष्ट्रपति ने बसन्त पण्डो को गोद लिया और उनका नामकरण किया था। बसंत पण्डो को गोद लेने के बाद, पण्डो जनजाति को ’राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ कहलाने का दर्जा प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बसन्त पण्डो को कहा कि आप मेरे भी पुत्र की तरह हैं।
RAIPUR / SHOURYAPATH / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार 19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' समारोह में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों का योगदान भारत के इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है, जो लोकतंत्र की जननी है। इसके उदाहरण प्राचीन गणराज्यों के साथ-साथ कई जनजातीय परंपराओं में भी देखे जा सकते हैं, जैसे कि बस्तर में 'मुरिया दरबार' – जो आदिम लोगों की संसद है। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विरासत की जड़ें छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गहरी हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव पखवाड़े को बड़े स्तर पर मनाया।
राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में, जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएँ विकसित और कार्यान्वित की गई हैं। पिछले वर्ष, गांधी जयंती के अवसर पर ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया गया था। इस अभियान का लाभ देश भर के 5 करोड़ से अधिक जनजातीय भाई-बहनों तक पहुँचेगा। वर्ष 2023 में, 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन अभियान) शुरू किया गया। ये सभी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार जनजातीय समुदायों को कितनी प्राथमिकता देती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों के विकास प्रयासों को नई ऊर्जा देने के लिए, भारत सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के वर्ष के दौरान ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ शुरू किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस अभियान के तहत देश भर में लगभग 20 लाख स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर काम करके जनजातीय समुदायों का विकास सुनिश्चित करेंगे।
राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि छत्तीसगढ़ सहित देश भर में लोग वामपंथी उग्रवाद का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के सुविचारित और सुसंगठित प्रयासों से निकट भविष्य में वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन संभव हो पाएगा। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि हाल ही में आयोजित 'बस्तर ओलंपिक्स' में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय महापुरुषों के आदर्शों का पालन करते हुए, छत्तीसगढ़ के लोग एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।
नई दिल्ली / एजेंसी (पीआईबी)राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार और जल संचय–जनभागीदारी पुरस्कार प्रदान किए, जिसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रायपुर जिला और रायपुर नगर निगम को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ। रायपुर नगर निगम को पूरे देश में प्रथम स्थान, रायपुर जिले को ईस्टर्न जोन में तृतीय स्थान, तथा राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ को द्वितीय स्थान हासिल हुआ।
राष्ट्रपति मुर्मु ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव सभ्यता की कहानी सदैव नदियों और जल स्रोतों के इर्द-गिर्द विकसित हुई है। भारतीय परंपरा में जल पूजनीय माना जाता है और हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का पहला शब्द “सुजलम्” देश में जल की सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जल का कुशल उपयोग केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अनिवार्यता है, विशेषकर भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में जहाँ प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सीमित है। उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन जल चक्र को प्रभावित कर रहा है, इसलिए सरकार और जनता को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति ने बताया कि जल संचय–जनभागीदारी पहल के तहत देशभर में 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएं निर्मित की गई हैं। उन्होंने उद्योगों द्वारा चक्रीय जल अर्थव्यवस्था अपनाने, जल उपचार एवं पुनर्चक्रण बढ़ाने और कई इकाइयों द्वारा शून्य द्रव उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की सराहना की।
रायपुर की ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में रायपुर जिले ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया। पुरस्कार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह तथा नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने ग्रहण किया। रायपुर नगर निगम ने 33,082, रायपुर जिले ने 36,282 तथा छत्तीसगढ़ ने 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूर्ण किए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट्स, अमृत सरोवर, टॉप डैम, परकोलेशन टैंक तथा स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट के अंतर्गत डिजिटल भू-जल ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं। साथ ही रायपुर में 4 एसटीपी के माध्यम से 206 MLD क्षमता विकसित की गई और 9 औद्योगिक इकाइयों को 125.849 MLD शुद्ध जल उपलब्ध कराया गया।
राष्ट्रपति ने कहा कि जल का सम्मान और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने जल-जागरूकता को देश की जनचेतना का केंद्र बनाने का आह्वान किया।
शौर्यपथ दैनिक समाचार, 19 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री पद पर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हैं और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों के बारे में चर्चा जारी है, लेकिन अभी तक गठबंधन के भीतर से कोई स्पष्ट नाम सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा:
सरकार गठन की दिशा में पहला कदम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 नवंबर 2025 को बिहार के राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह कदम बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया के तहत उठाया गया है। नीतीश कुमार का इस्तीफा तकनीकी रूप से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद नई सरकार के गठन के लिए पहला कदम माना जा रहा है। इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल ने नीतीश कुमार से कहा है कि वे तब तक मुख्यमंत्री बने रहें, जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता।
राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को इस स्थिति में कार्य करते रहने की अनुमति दी है, ताकि राज्य में संवैधानिक संकट न उत्पन्न हो और सरकार के गठन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक राज्य में कोई अस्थिरता नहीं आनी चाहिए।
आगामी बैठकें: नई सरकार के
गठन के लिए महत्वपूर्ण संकेत**
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, भाजपा और जदयू सहित एनडीए के सहयोगी दल अब नए मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री पद के लिए बातचीत में जुटे हुए हैं। दोनों पार्टियाँ और उनके सहयोगी दलों के नेताओं के बीच रणनीतिक बैठकें चल रही हैं, जिनमें राज्य की नई सरकार की रूपरेखा और मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा।
इस सिलसिले में, 19 नवंबर 2025 को विधायकों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक में एनडीए के सभी विधायकों और पार्टी नेताओं को शामिल किया जाएगा, और यह बैठक राज्य के आगामी नेतृत्व के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।
इसके बाद, 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जा सकता है। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित एनडीए के शीर्ष नेता और अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियाँ भी उपस्थित हो सकती हैं। समारोह में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सभी सदस्य शपथ लेंगे, और नए नेतृत्व का आधिकारिक रूप से उद्घाटन होगा।
मुख्यमंत्री पद के लिए नामों की चचार्:
नीतीश कुमार का नाम सबसे प्रमुख
मुख्यमंत्री पद पर संभावनाओं को लेकर बिहार के राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। जदयू और भाजपा दोनों ही पार्टी के भीतर से मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर हो रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार का नाम मुख्यमंत्री के लिए सबसे प्रबल माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में ही एनडीए ने विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल की है और उनकी राजनीतिक स्थिरता के कारण ही गठबंधन की सहमति भी उन्हीं के पक्ष में देखी जा रही है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टों में मुख्यमंत्री पद के लिए अन्य नेताओं के नामों की भी चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी मुख्यमंत्री पद के लिए नीतीश कुमार के नाम पर अपनी सहमति दी है। हालांकि, फिलहाल तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
गठबंधन सहयोगियों की सहमति और
विधायकों की बैठक के बाद अंतिम निर्णय
मुख्यमंत्री पद के लिए अंतिम निर्णय विधायकों की बैठक और गठबंधन सहयोगियों की सहमति के बाद लिया जाएगा। जदयू और भाजपा के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसमें दोनों दलों के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन की सहमति प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में बिहार में विकास के कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाया गया है।
यह बैठक इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि इसमें मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंत्रिमंडल के गठन पर भी चर्चा की जाएगी। जिन मंत्रियों को नई सरकार में जगह दी जाएगी, उनका चयन गठबंधन के नेताओं के बीच हो सकता है, जो राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
नई सरकार का गठन और राजनीति में आगे का रुझान
19 और 20 नवंबर 2025 को होने वाली बैठकों और शपथ ग्रहण समारोह के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। बिहार की राजनीति में अब कई सवालों के जवाब मिलने वाले हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए इस राजनीतिक स्थिति को किस तरह से संभालता है। नई सरकार के गठन के बाद राज्य में विकास के कार्यों और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने की चुनौती मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी टीम के सामने होगी।
नई दिल्ली(पीआईबी)/ शौर्यपथ / किसानों से सीधे संवाद स्थापित करने और केंद्र सरकार की कृषि संबंधी पहलों की जमीनी प्रगति का आकलन करने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 19 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे का मुख्य आकर्षण धमतरी में आयोजित होने वाला कृषक सम्मेलन एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त वितरण कार्यक्रम से जुड़ना है।
दौरे की शुरुआत में श्री चौहान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट (ICAR–NIBSM), रायपुर पहुंचेंगे, जहां वे संस्थान की गतिविधियों का अवलोकन करेंगे, पौधारोपण करेंगे और वैज्ञानिकों एवं किसानों से चर्चा करेंगे। इसके पश्चात वे डॉ. शोभाराम देवांगन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में संस्कृति मंत्रालय एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त लाभार्थी सम्मेलन में भाग लेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान वे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशभर के करोड़ों किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त का वर्चुअल अंतरण देखेंगे। वर्ष 2019 में प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से तीन समान किश्तों में प्रदान की जाती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।
धमतरी के मुख्य समारोह के बाद, श्री चौहान का फोकस राज्य के किसान समुदाय से प्रत्यक्ष संवाद पर रहेगा। इस उद्देश्य से रायपुर के अग्रवाल बगीचा, भटगांव में व्यापक कृषक संवाद एवं किसान चौपाल का आयोजन किया गया है। इन सत्रों का उद्देश्य औपचारिकता से आगे बढ़कर किसानों की वास्तविक समस्याओं, चुनौतियों और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से सुनना तथा कृषि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों का गहन आकलन करना है। इन संवादों से केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने तथा भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए व्यवहारिक फीडबैक प्राप्त होगा। यह दौरा छत्तीसगढ़ सहित देशभर के किसानों के कल्याण, समृद्धि और सशक्तिकरण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करता है।
"पूर्व चुनाव आयुक्त कुरैशी ने पूछा—क्या आयोग ऐसे घर में ले जाएगा जिसका पता '00000' है?
पटना। शौर्यपथ।
बिहार चुनाव के बाद मतदाता सूची में मकान नंबर '00000' या '0' दर्ज होने की समस्या ने आयोग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने तीखे शब्दों में चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “क्या चुनाव आयोग हमें या आपको उस घर में ले चलेगा जिसका पता 00000 लिखा है? मजाक बना रखा है क्या!”
कुरैशी का कहना है कि आयोग को ऐसे वोटर डेटा की जिम्मेदारी संभालते समय पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए, नहीं तो शून्य मकान नंबर वाले ‘काल्पनिक पते’ पर पहुंचना सिर्फ लोकतंत्र का मजाक बन सकता है। उनका यह तंज सोशल मीडिया पर छाया हुआ है; बहुतों ने इसे चुनावी सिस्टम के प्रति जागरूकता और जवाबदेही बढ़ाने वाला बयान बताया।
हालांकि आयोग ने सफाई दी है कि कई बार स्थानीय प्रशासन द्वारा घर का नंबर नहीं दिया जाता, ऐसे में '00000' जैसे नंबर दर्ज करना केवल एक अनौपचारिक विकल्प या सिस्टम की मजबूरी है। लेकिन सवाल वही है—क्या लोकतंत्र में मतदाता का आसरा केवल शून्य में ही रहेगा?
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
