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मुरिया दरबार में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं
टेम्पल कमेटी के लिए लिपिक और भृत्य की होगी भर्ती
वीर झाड़ा सिरहा के नाम पर होगा जगदलपुर का शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय
दंतेश्वरी मंदिर में बनेगा आधुनिक ज्योति कक्ष
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुरिया दरबार को विश्वसनीय दरबार बताते हुए कहा कि इस दरबार में की गई मांगे पूरी होती हैं। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के तहत सिरहासार में आज आयोजित मुरिया दरबार में मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई मांग को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री ने टेम्पल कमेटी के लिए एक लिपिक और एक भृत्य की भर्ती की घोषणा करने के साथ ही यहां स्थित शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय का नामकरण वीर झाड़ा सिरहा के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने दंतेश्वरी मंदिर में आधुनिक ज्योति कक्ष के निर्माण की घोषणा भी की।
मुरिया दरबार में शामिल हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
आज मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए सिरहासार पहुंचने पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल का स्वागत मांझी-चालकियों द्वारा पारंपरिक पगड़ी पहनाकर किया गया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी, कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम, चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम, दंतेवाड़ा विधायक श्रीमती देवती कर्मा, बस्तर के माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव, क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एमआर निषाद, महापौर श्रीमती सफीरा साहू, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारीगण, मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरिन, नाईक-पाईक, जोगी-पुजारी सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्य उपस्थित थे।
सिरहासार पहुंचने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का स्वागत
मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर विश्व में सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाले बस्तर के दशहरे का इस साल भी मिलकर किए गए संचालन को बहुत सुंदर बताते हुए इसके लिए बस्तर दशहरा समिति के सभी सदस्यों और प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरे की कई विशेषताएं हैं, जिसके कारण देश-विदेश के लोग हर साल इसमें शामिल होने के लिए बस्तर आते हैं। शासन-प्रशासन और पूरे बस्तर संभाग के लोग जिस तरह एकजुटता और आपसी सहयोग के साथ 75 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को सफल बनाते हैं, वह भी बस्तर दशहरे की विशेषता है। उन्होंने लोगों को एकजूट रखने के लिए इस संस्कृति और परंपराओं को आवश्यक बताते हुए इसे सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पीछे अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाए रखने की चिंता भी एक बड़ा कारण थी। आज हम लोग इसी दिशा में प्राथमिकता के साथ काम कर रहे हैं।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि मिलेगी राज्य स्थापना दिवस पर
बस्तर के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजने के लिए बीते तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पहले तीजा-पोरा, कर्मा जयंती, विश्व आदिवासी दिवस, छठ पर्व जैसे लोक त्यौहारों में सरकारी छुट्टी नहीं मिलती थी। हमारी सरकार ने छुट्टियां शुरु की, ताकि छत्तीसगढ़ के लोग अपने त्यौहारों का ठीक तरह से आनंद ले सकें। इन्हीं त्यौहारों के माध्यम से हमारे संस्कार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचते है। बस्तर में देवी-देवताओं को मानने की संस्कृति को विशिष्ट बताते हुए कहा कि बस्तर इकलौता स्थान है, जहां देवी-देवताओं की आराधना करने के साथ ही उनके साथ अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। वे अपने देवताओं के साथ खाते हैं, गाते हैं, नाचते हैं और देवताओं से रुष्ट भी होते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की इस संस्कृति के बारे में देश-दुनिया को जानने और समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए ही बस्तर संभाग में देवगुड़ियों और गोटुलों का संरक्षण किया जा रहा है। देवगुड़ियों के विकास और सौंदर्यीकरण के काम में पैसों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। बस्तर और बस्तर की आदिम संस्कृति की चर्चा तो पूरी दुनिया में होती है, लेकिन लोग आज भी इसके बारे में अच्छी तरह नहीं जानते हैं। यहां की आदिवासी संस्कृति से पूरी दुनिया को परिचित कराने के लिए ही हम लोगों ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन शुरु किया है। सन् 2019 में रायपुर में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था। इसमें देश के 25 राज्यों के 2500 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। साथ ही साथ बांग्लादेश, श्रीलंकाए बेलारूस, मालदीव, थाईलैंड और युगांडा के कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया था। यह आयोजन तीन दिनों तक चला था। सन् 2020 में कोरोना.संकट के कारण यह आयोजन नहीं हो पाया था। लेकिन अब स्थिति बेहतर है, इसलिए इस साल भी राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के भव्य आयोजन की तैयारी है। हमारे जनप्रतिनिधि पूरे देश में यात्रा करके न्योता बांट रहे हैं। इस बार राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव 28 से 30 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित होगा। देशभर के आदिवासी कलाकार इस बार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने इस अवसर सभी को आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने का न्यौता भी दिया।
श्री बघेल ने कहा कि मुरिया दरबार का अपना शानदार इतिहास रहा है। इसमें शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। यह मुरिया दरबार हमारी संस्कृति की लोकतांत्रिक परंपराओं का सुंदर उदाहरण है। इस मुरिया दरबार में राजाए प्रजाए अधिकारी-कर्मचारी सब मिल-बैठकर बात करते हैं। गांव-समाज की समस्याओं पर बात करते हैं। अब तक जो विकास हुआ है, उस पर बात करते हैं और भविष्य में किस तरह विकास करना है इसकी योजना भी बनाते हैं। आज मैं इस दरबार में आप लोगों को विश्वास दिलाता हूंए विकास, विश्वास और सुरक्षा की नीति पर चलते हुए हमने जिस सुंदर, सुखद और समृद्ध बस्तर के निर्माण का वादा आपसे किया हैं, उस दिशा में इसी तरह ईमानदारी से काम करते रहेंगे।
इस अवसर पर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री दीपक बैज ने कहा कि पहले बस्तर दशहरा समिति से जुड़े सदस्यों के मानदेय नहीं मिलने या कम मिलने जैसी समस्याएं थीं, जिसे वर्तमान सरकार ने दूर किया है। इससे सदस्यों में खुशी है। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा के लिए रथ निर्माण हेतु होने वाली पेड़ों की कटाई की भरपाई नए पौधे लगाने की परंपरा की शुरुआत हो गई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रथ निर्माण के लिए 53 वृक्ष काटे गए थे, जिसके एवज में साल के 500 पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि मांझी चालकी भवन के लिए भी 15 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। संसदीय सचिव श्री रेखचंद जैन और कलेक्टर श्री रजत बंसल ने इस अवसर पर संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मांझी-चालकी, कार्यकारिणी सदस्यों को मानदेय राशि का वितरण भी किया।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तीसरी किश्त की राशि मिलेगी राज्य स्थापना दिवस पर
मुख्यमंत्री ने मुरिया दरबार में बताया कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत तीसरी किश्त की राशि का भुगतान राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर एक नवंबर को किया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को राज्य स्थापना दिवस में आमंत्रित भी किया।
बस्तर / शौर्यपथ / बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए यहां तीन दिवसीय प्रवास पर बस्तर पहुंची राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज माई दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर माई जी का दर्शन किया और माई दंतेश्वरी का विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही इस अवसर पर वे राजमहल परिसर में आयोजित अश्वपूजा कार्यक्रम में भी माटी पुजारी श्री कमलचंद भंजदेव के साथ शामिल हुईं। इस अवसर पर कमिश्नर श्री जी आर चुरेंद्र, आईजी सुंदरराज पी,कलेक्टर श्री रजत बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र मीना, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी, उपस्थित थीं।
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय बस्तर प्रवास पर आज जगदलपुर पहुंची राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके का मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट जगदलपुर में आत्मीय स्वागत किया गया। जगदलपुर एयरपोर्ट में महापौर श्रीमती सफीरा साहू, संभाग आयुक्त श्री जीआर चुरेन्द्र, आईजी श्री सुंदरराज पी, कलेक्टर श्री रजत बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र मीणा, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी, अपर कलेक्टर श्री अरविंद एक्का ने राज्यपाल सुश्री उइके की अगवानी की। इस दौरान अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ ही वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
उत्तर बस्तर कांकेर /शौर्यपथ / ‘‘लोकवाणी‘‘ की 22वीं कड़ी का आयोजन कांकेर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत भैराडीह में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि ‘‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘‘ भाग-दो विषय पर विभिन्न जिलों से हमें इतनी तथ्यात्मक जानकारी मिल रही है कि एक ही विषय पर दो कड़ियों का प्रसारण करने की योजना बनाई गई। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समस्याओं को चिन्हित करना, उनके समाधान की तलाश करना, उन्हें लागू करना और जनता को राहत दिलाना, इन सब कामों में जिला प्रशासन की केन्द्रीय भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों से चर्चा करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर ले नवरात्र श्ुरू हो गे हे, जम्मो मन देवी दाई के पूजापाठ म लगे हें, हमन अब्बड़ भाग मानी हरन के प्रदेश के चारो कोती देवी-दाई के बड़े-बड़े मंदिर हवय, अउ एकर आसीरवाद प्रदेस ल मिलत हे। दंतेवाड़ा म दंतेश्वरी दाई, डोंगरगढ़ म बम्लेश्वरी दाई, रतनपुर म महामाया दाई, चन्द्रपुर म चन्द्रहासिनी दाई बिराजे हे। चन्दखुरी रायपुर म कौशल्या दाई के प्राचीन मंदिर हे, जेखर पुनरोद्धार अउ विकास के काम करे गे हे। गांव-गांव, सहर-सहर म सीतला दाई अउ देवी के हर स्वरूप के मंदिर हवय। नवरात्रि म जंवारा बोय गे हे। जोत जलाए गे हे। नारी सक्ति के रूप म हमन बेटी मन के पूजा करथन अउ कन्या भोज कराए के घलो हमर परंपरा हे। ये अवसर म मोर अपील हे के बेटी मनके, नारी मनके सम्मान के भाव, बछर म दू बार नवरात्र म रखे के साथ ही, येला पूरा साल अउ पूरा जिनगी भर निभाना हे। इही सही मायने म छत्तीसगढ़ महतारी के सेवा हरे। हमर परंपरा अउ संस्कृति के सिक्षा ल सब्बो मन ल, अपन जिनगी म उतारना हे। दाई-दीदी के अधिकार अउ मान-सम्मान दे बर, समाज के बेवस्था ल हमर सरकार ह अउ मजबूत करे हे। नवरात्रि के बाद दसहरा तिहार आही। भगवान राम के जीत के तिहार। सत्य के जीत, न्याय के जीत के तिहार हे। अहंकार के प्रतीक रावण के अंत के तिहार हे। करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, भाई दूज, जम्मो तिहार के आप मन ल बधाई, अउ सुभकामना देवत हंव। मोर एकठन निवेदन हे, के आप मन सावधानी के साथ, कोरोना ले बचे के जम्मो सुरक्षा उपाय के साथ, मास्क पहिन के नाक, मुंह ढांक के, तिहार मनावव।
अबूझमाड़ का मतलब था, ऐसा स्थान, ऐसा वन क्षेत्र, जिसे बूझा नहीं जा सका है। जब हम सरकार में आए तो मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए। जहां की आशाओं, आकांक्षाओं को समझने, जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो। राज्य के किसी अंचल के बारे में राज्य सरकार यह कहे कि वह क्षेत्र तो बूझा ही नहीं गया, इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती थी?मैंने जांच कराई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के कुल 237 ग्राम तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्राम अभी भी असर्वेक्षित हैं। सर्वेक्षण नहीं होने के कारण यहां के किसानों सहित विभिन्न वर्ग के लोगों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने मसाहती सर्वे कार्य को प्राथमिकता से कराने का निर्णय लिया है। अब तक ओरछा विकासखण्ड के 4 ग्रामों तथा नारायणपुर विकासखण्ड के 9 ग्रामों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर, उन्हें भुईंयां सॉफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया तथा 6 अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आई.आई.टी. रुड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है। हमने निर्णय लिया है कि राज्य शासन के निर्णय के अनुसार सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रारंभिक अभिलेख अथवा मसाहती खसरा को आधार मानकर कब्जेदार को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाए। इसी कड़ी में जिला प्रशासन द्वारा विशेष शिविर लगाकर मनरेगा के तहत भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण, कृषि विभाग की राजीव गांधी किसान न्याय योजना, किसान सम्मान योजना, किसान क्रेडिट कार्ड योजना आदि का लाभ दिया जाएगा। उद्यानिकी विभाग के द्वारा मिनी बीज किट, नलकूप खनन, ड्रिप सिंचाई योजना, शेड नेट योजना आदि के प्रकरण भी तैयार किए जा रहे हैं। इन ग्रामों के हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवेदन लिया गया है। ओरछा विकासखण्ड से 1 हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से 1 हजार 842 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है। मैं कहना चाहता हूं कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्यवाही शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। हम यह कहकर अबूझमाड़ के लोगों को उनके वाजिब अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते कि अबूझमाड़ का सर्वेक्षण नहीं हुआ। जो काम इतने वर्षों तक नहीं हुआ, वह हम जल्दी से जल्दी कराके, वहां की जनता की सुख-सुविधा में भरपूर बढ़ोत्तरी करना चाहते हैं, जिसकी शुरुआत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हमने तरह-तरह के उपाय किए हैं। खेती-किसानी और परंपरागत रोजगार के अवसरों को मजबूत करने के साथ ही, हमने ऐसे अनेक उपाय किए हैं, जिससे आप लोगों को ऐसी आर्थिक मदद मिले, जो पहले नहीं मिलती थी। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, लघु धान्य फसलें-जिन्हें मिलेट्स कहा जाता है, उनके उत्पादन और प्रसंस्करण की व्यवस्था, सिंचाई के लिए निःशुल्क पानी की व्यवस्था, कृषि ऋण माफी, सिंचाई कर माफी, पौनी-पसारी योजना जैसे अनेक कामों से गांवों वालों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लेकिन हम हर समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। जैसे ही यह बात ध्यान में आई कि बीजापुर जिले के चंदूर, तारलागुड़ा और कोत्तूर गांव के लोग मिर्ची तोड़ने और मिर्ची की खेती का काम बहुत अच्छे से करते हैं और इसमें रोजगार के लिए वे नदी पार करके दूसरे राज्य चले जाते हैं। तो बीजापुर जिला प्रशासन ने यह अध्ययन कराया कि मिर्ची की खेती हम छत्तीसगढ़ में, बस्तर में, बीजापुर में ही क्यों नहीं करा सकते ? क्योंकि मिर्ची की खेती के लिए जो जलवायु चाहिए वह तो यहां भी है। इस तरह इन तीन गांवों में 155 एकड़ जमीन के स्वामी 78 किसान परिवारों को तैयार किया गया। डीएमएफ एवं मनरेगा के माध्यम से खेतों की फेंसिंग, बीज, खाद, बोर, ड्रिप इरिगेशन, मलिं्चग एवं विद्युत आदि प्रारंभिक व्यवस्था करके नर्सरी तैयार कर ली गई है। इस तरह जो लोग पहले मूंग की खेती करके प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपए कमाते थे, वे मिर्ची की खेती करके, एक से डेढ़ लाख रुपए तक प्रति एकड़ कमाएंगे। इसके अलावा मिर्ची तोड़ने के काम में स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार, बेहतर रोजी और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे वे अपने गांव, अपने घर और अपने परिवार में रहते हुए काफी राशि बचा सकेंगे। मैं बार-बार कहता हूं कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डीएमएफ एवं मनरेगा से इसमें काफी मदद की जा सकती है। स्थानीय मौसम, मिट्टी और विशेषता को देखते हुए जिस तरह बीजापुर में मिर्ची की खेती का सपना साकार हो रहा है। वैसे ही अन्य जिलों में भी वहां की विशेषता के अनुसार बहुत से काम हो रहे हैं और इसमें बहुत बढ़ोत्तरी करने की संभावना है। मैं चाहता हूं कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार दें। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा।
भैराडीह के लोकवाणी कार्यक्रम में सरपंच कृष्णा मण्डावी, उप सरपंच मनराखन पटेल, ग्राम पटेल ठाकुर राम नेताम, सचिव कनेसिंह दर्रो, सियाराम कोरेटी, रामजी पटेल, कुंवर कोमरा, सगन यादव, धनसिंह यादव, जगदीश पटेल, मुकेश नाग, धनश्याम, कैलाश, रमेश, रामप्रसाद, वेदप्रकाश, मन्नूराम, लल्लूराम, आशाराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
लोकवाणी का आगामी प्रसारण 14 नवम्बर, 2021 को होगा, जिसमें मुख्यमंत्री ‘उद्यमिता और जनसशक्तीकरण का छत्तीसगढ़ मॉडल’ विषय पर चर्चा करेंगे। आप इस विषय पर अपने विचार सुझाव और सवाल दिनांक 27, 28 और 29 अक्टूबर, 2021 को दिन में 3 बजे से 4 बजे के बीच फोन नम्बर 0771-2430501, 2430502, 2430503 में रिकार्ड करा सकते हैं।
उत्तर बस्तर कांकेर /शौर्यपथ/शासकीय पॉलीटेक्निक कांकेर में डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्स में प्रथम वर्ष में प्रवेश सीजी पीपीटी 10वीं के आधार पर राज्य स्तरीय आनलाइन कांउसलिंग प्रक्रिया द्वारा 11 से 14 अक्टूबर 2021 तक रजिस्ट्रेशन एवं डीवीसी होगा। सीटो का आबंटन 17 अक्टूबर को किया जायेगा। आबंटित सीटो पर 18 से 20 अक्टूबर तक प्रवेश लिया जायेगा। वर्तमान में शासकीय पॉलीटेक्निक कांकेर में मेकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग एंव इलेक्ट्रानिक्स एण्ड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के डिप्लोमा कोर्स संचालित है। अधिक जानकारी के लिए संचालनालय तकनीकी शिक्षा रायपुर छत्तीसगढ़ के वेबसाइट www.cgdteraipur.cgstate.gov.in का अवलोकन किया जा सकता है।
नारायणपुर/शौर्यपथ/नारायणपुर जिले में संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय नारायणपुर में कक्षा छठवीं के लिए वर्ष 2022 में प्रवेश हेतु ऑनलाईन आवेदन 30 नवम्बर तक आमंत्रित किये गये है। इच्छुक छात्र वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटनवोदयडॉटजीओव्हीडॉटइन के माध्यम से आगामी 30 नवंबर 2021 तक आवेदन कर सकते है। ऑनलाईन आवेदन करने वाले पात्र आवेदकों की प्रवेष परीक्षा 30 अप्रैल 2022 को निर्धारित केन्द्र पर आयोजित की जायेगी। अधिक जानकारी के लिए वेबसाईट का अवलोकन किया जा सकता है।
नारायणपुर/शौर्यपथ/छत्तीसगढ़ .शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा 01 नवंबर राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर विभाग द्वारा राज्य के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को दिये जाने वाले गुण्डाधूर सम्मान व महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान वर्ष 2021-22 हेतु 15 अक्टूबर 2021 तक निर्धारित प्रारूप में आवेदन आमंत्रित किया गया है। खेल अधिकारी ने बताया कि विभाग से जानकारी के अनुसार गुण्डाधूर सम्मान एवं महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान से अलंकृत खिलाड़ियों को एक लाख रूपये नकद, अलंकरण फलक एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जायेगा। गुण्डाधूर सम्मान ऐसे पात्र खिलाडियों को दिये जायेंगे, जिन्होनंे वर्ष 2020-21 में ऐसे खेल जिन्हें भारत सरकार युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा सीनियर वर्ग की राष्ट्रीय चौम्पियनशीप या राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुये स्वर्ण या रजत या कांस्य पदक प्राप्त किया हो या अंतराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया हो। इसी प्रकार महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान हेतु 2020-21 में तीरंदाजी के राष्ट्रीय चौम्पियनशिप के सीनियर वर्ग में या राष्ट्रीय खेलो में छत्तीसगढ़ की ओर से भाग लेते हुये स्वर्ण या रजत या कांस्य पदक प्राप्त किया हो या तीरंदाजी अंतराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया हो। यदि तीरंदाजी में उपरोक्त उपलब्धि वाले खिलाडी नही मिले तो विगत तीन वर्षाे तक तीरंदाजी की राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता या राष्ट्रीय अंतर विश्वविद्यालयीन प्रतियोगिता में पदक प्राप्त खिलाड़ी हेतु विचार किया जायेगा।
गुण्डाधूर सम्मान व महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान हेतु वर्ष की गणना 01 अप्रेल से 31 मार्च तक होगी। उक्त सम्मान हेतु नियमों व आवेदन आमंत्रित करने हेतु खेल विभाग के अधिकारिक वेबसाईट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटस्पोर्ट्सएसवायडब्ल्यूडॉटसीजीडॉटजीओव्हीडॉटइन पर प्रारूप प्राप्त किया जा सकता है। इस अवधि मेे अनुशंसा पत्र संचालनालय खेल एवं युवा कल्याण, अंर्तराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम, जी.ई.रोड़ रायपुर अथवा खेल एवं युवा कल्याण विभाग नारायणपुर में कार्यालयीन दिवस एवं समय पर प्रस्तुत व संपर्क किया जा सकता है।
नारायणपुर/शौर्यपथ/डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार के लिए जिले के कृषकों से 15 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित किया गया है। आवेदन पत्र उप संचालक कृषि कार्यालय नारायणपुर से निःशुल्क प्राप्त कर निर्धारित प्रपत्र मे भरकर जमा किया जा सकता है। अंतिम तिथि के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा। डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार में चयनित कृषक को 2 लाख रूपये एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जायेगा। केवल एसे कृषक ही सम्मिलित होने के पात्र होंगे, जो विगत दस वर्षाे से कृषि का कार्य छत्तीसगढ़ में कर रहे हो, छत्तीसगढ़ राज्य के मूल निवासी हो, कुल वार्षिक आमदनी मे से न्यूनतम 75 प्रतिशत आय कृषि से हो एवं तकाबी सिंचाई शुल्क सहकारी बैंको का कालातीत ऋण न हो।
कृषक का चयन एवं मूल्यांकन फसल विविधीकरण एवं उत्पादकता वृद्धि हेतु नवीन कृषि तकनीकी अपनाने का स्तर तथा उन्नत कृषि तकनीकी के प्रचार-प्रसार एवं अन्य कृषकों द्वारा अपनाने के लिऐ प्रेरित करने हेतु प्रयास, विगत तीन वर्षाे में विभिन्न फसलों की उत्पादकता का स्तर तथा कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में कृषक द्वारा किये गये उल्लेखनीय एवं नवोन्मेषी कार्य के आधार पर किया जायेगा। कृषि क्षेत्र में सर्वाेतम कार्य करने वाले किसानों को यह पुरस्कार दिया जायेगा। ऐसा कृषक जो खेती में नवीन तकनीकी को अपनाता हो, जिसकी फसल सघनता अच्छी हो, समन्वित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधीकरण अपनाता हो, कृषि संसाधनों का श्रेष्ठतम उपयोग करता हो तथा कृषि विपणन में जिसका योगदान हो, उसे उसे यह पुरस्कार दिया जायेगा। पुरस्कार हेतु कृषकों के आवेदन पत्र मे उल्लेखित तथ्यों का सत्यापन विकासखण्ड स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा। कृषकों का चयन जिला स्तरीय छानबीन समिति एवं राज्य स्तरीय जूरी के द्वारा किया जायेगा और उनके द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होगा।
नारायणपुर / शौर्यपथ / कलेक्टर धर्मेष कुमार साहू की अध्यक्षता में 11 अक्टूबर 2021 को दोपहर 3 बजे से जिला कार्यालय के सभाकक्ष में राजस्व अधिकारियों की मासिक बैठक आयोजित की गई है। मासिक बैठक में प्रभारी अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अधीक्षक भू अभिलेख, तहसीलदार नारायणपुर, ओरछा, नायब तहसीलदार छोटेडोंगर, बेनूर राजस्व निरीक्षकों को निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थिति सुनिष्चित करने के निर्देष दिये गये हैं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
