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April 26, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

नई दिल्ली/दोहा / शौर्यपथ /
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9 से 10 अप्रैल 2026 तक कतर की राजधानी दोहा के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रहे। दौरे के दौरान उन्होंने कतर के ऊर्जा कार्य राज्य मंत्री एवं कतर एनर्जी के अध्यक्ष व सीईओ साद शेरिदा अल-काबी से महत्वपूर्ण मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कतर के आमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी को शुभकामनाएं और सहयोग का संदेश प्रेषित किया।

चर्चा में हालिया वैश्विक परिस्थितियों का भी उल्लेख हुआ। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और कतर के आमीर के बीच हुई टेलीफोन वार्ताओं को याद करते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही, कतर में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रति वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया गया।

दोनों पक्षों ने भारत-कतर रणनीतिक संबंधों के विभिन्न आयामों—व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संस्कृति और जन-से-जन संपर्क—पर व्यापक चर्चा की। कतर ने भारत के लिए एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई।

बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का भी स्वागत किया गया। दोनों नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बहाल करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू बनाए रखने और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दौरे के अंत में हरदीप सिंह पुरी ने कतर सरकार के आतिथ्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। दोनों देशों ने आने वाले समय में नियमित संवाद बनाए रखने और आपसी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।

दुर्ग  / शौर्यपथ /
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने अनुरक्षण कार्यों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सिंटर संयंत्र–3 में 8.4 मेगावाट क्षमता वाले वेस्ट गैस फैन (WGF) मोटर की डीप क्लीनिंग के लिए पहली बार ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक का सफल उपयोग किया गया है। यह पहल पारंपरिक सफाई पद्धतियों से आगे बढ़ते हुए सुरक्षित, उन्नत और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

यह कार्य प्लेट मिल में वेस्ट गैस फैन मोटर के इन-हाउस रिपेयर के दौरान प्लेट मिल टीम के सहयोग से पूरा किया गया। वेस्ट गैस फैन मोटर सिंटर उत्पादन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसकी सुचारू कार्यप्रणाली उत्पादन की निरंतरता सुनिश्चित करती है।

ड्राई आइस ब्लास्टिंग तकनीक के माध्यम से मोटर के स्टेटर और रोटर में जमी धूल, गंदगी और सूक्ष्म कणों को बिना किसी यांत्रिक क्षति के प्रभावी रूप से हटाया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें न पानी का उपयोग होता है और न ही किसी रासायनिक पदार्थ का, जिससे यह संवेदनशील विद्युत उपकरणों के लिए पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल साबित होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस आधुनिक तकनीक के उपयोग से मोटर के प्रदर्शन में सुधार, आयु में वृद्धि और विश्वसनीयता में मजबूती आएगी, जिससे दीर्घकालिक परिचालन दक्षता सुनिश्चित होगी।

इस कार्य का सफल क्रियान्वयन मुख्य महाप्रबंधक (ओएचपी एवं सिंटर संयंत्र–3) सजीव वर्गीस और विभागाध्यक्ष (सिंटर संयंत्र–3) राहुल बिजुरकर के नेतृत्व में सिंटर संयंत्र–3 की विद्युत टीम द्वारा किया गया। इस दौरान मुख्य महाप्रबंधक (मेंटेनेंस एवं यूटिलिटीज) बी. के. बेहरा, मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत) टी. के. कृष्णा कुमार और मुख्य महाप्रबंधक (प्लेट मिल) कार्तिकेय बेहरा ने मार्गदर्शन प्रदान किया।

इस उपलब्धि में भदेव टुडू, विवेक श्रीवास्तव, दीपक गुप्ता, राजेश साहू, एस. सी. साहू और अरुणेश शर्मा सहित अन्य कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। संपूर्ण कार्य की निगरानी एचएमई, ईआरएस और ए एंड डी टीम द्वारा ए. के. डे, पी. के. पाढ़ी, के. बघेल, यू. एस. बरवाल और धीरेंद्र के नेतृत्व में की गई, जिसमें संतोष कुमार साहू, नरेंद्र राव और अतुल भादे का भी अहम सहयोग रहा।

रायपुर / शौर्यपथ /
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) अभियान के तहत आयोजित ‘बजट क्वेस्ट 2026’ का दो दिवसीय राष्ट्रीय फिनाले 12 और 13 अप्रैल को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ उप-मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
यह आयोजन रायपुर के राजीव गांधी राष्ट्रीय भूजल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा ट्रिपल आईटी नया रायपुर परिसर में आयोजित होगा, जहां देशभर से चयनित युवा प्रतिभागी केंद्रीय बजट 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

देशभर के युवाओं का होगा संगम
इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के 17 स्थानों से 15,000 से अधिक युवाओं ने विभिन्न चरणों में भाग लिया है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ है। छत्तीसगढ़ से लगभग 30,000 युवाओं की भागीदारी में से चयनित 471 प्रतिभागी रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

विचार-मंथन के प्रमुख विषय
कार्यक्रम के दौरान ‘मानव पूंजी: शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार’ तथा ‘विकसित कृषि: कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षाविदों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों और युवाओं के बीच गहन चर्चा होगी। यह मंच युवाओं को नीति-निर्माण प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा।

महिला युवा संसद का विशेष आयोजन
12 अप्रैल को प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ ही “नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज़” विषय पर ‘महिला युवा संसद’ का आयोजन किया जाएगा। इस सत्र में महिला प्रतिभागी महिला आरक्षण विधेयक पर संसदीय शैली में चर्चा करेंगी और एक सामूहिक प्रस्ताव के साथ सत्र का समापन होगा, जो नारी सशक्तिकरण की मजबूत अभिव्यक्ति बनेगा।

अमृत पीढ़ी की भागीदारी का उदाहरण
2 फरवरी 2026 को केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा शुरू किए गए इस अभियान में देशभर से 12 लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। ‘बजट क्वेस्ट 2026’ का उद्देश्य यूनियन बजट को आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं के लिए अधिक समझने योग्य, प्रासंगिक और सहभागी बनाना है।
यह आयोजन ‘अमृत पीढ़ी’ की उस सोच को दर्शाता है, जो न केवल देश की विरासत को आगे बढ़ा रही है, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी भी निभा रही है।

लेख - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (भारत गणराज्य )

शौर्यपथ लेख / आज 11 अप्रैल हम सभी के लिए बहुत विशेष दिन है। आज भारत के महान समाज सुधारकों में से एक और पीढ़ियों को दिशा दिखाने वाले महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती है। इस वर्ष यह अवसर और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ भी हो रहा है।
महान समाज सुधारक महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। महात्मा फुले को केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव हम आज भी महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।
महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ। लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं। उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उन्हें अनदेखा करना चाहिए। बचपन से ही महात्मा फुले बहुत जिज्ञासु थे और अपनी उम्र के अन्य बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक पुस्तकें पढ़ते थे। वो कहते भी थे, “हम जितना ज्यादा सवाल करते हैं, उनसे उतना ही अधिक ज्ञान निकलता है।” साफ है कि बचपन से मिली जिज्ञासा उनकी पूरी यात्रा में बनी रही।
महात्मा फुले के जीवन में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण मिशन बनी। उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है, जिसे सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए। जब समाज के बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब उन्होंने लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले। वे कहते थे, “बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं।” उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।
शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी बहुत प्रेरित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए रिसर्च और इनोवेशन को बहुत प्राथमिकता दी है। एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और इनोवेशन के लिए प्रेरित हों। ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत अपने युवाओं को देश की प्रगति का आधारस्तंभ बना रहा है।
अपने शैक्षिक ज्ञान और बौद्धिकता से महात्मा फुले ने कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की गहरी जानकारी हासिल की। वे कहते थे कि किसानों और मजदूरों के साथ अन्याय समाज को कमजोर करता है। उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए।
महात्मा फुले ने कहा था, “"जोपर्यंत समाजातील सर्वांना समान अधिकार मिळत नाहीत, तोपर्यंत खरे स्वातंत्र्य मिळत नाही” यानी जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती। इसी विचार को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने कई संस्थाओं की स्थापना की। उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह आंदोलन सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना। यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है।
उनका व्यक्तिगत जीवन भी साहस की मिसाल रहा। लगातार लोगों के बीच रहकर काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। लेकिन गंभीर बीमारी भी उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकी। एक गंभीर स्ट्रोक के बाद भी उन्होंने अपना काम और समाज के लिए संघर्ष जारी रखा। उनका शरीर कमजोर हुआ, लेकिन समाज के प्रति उनका समर्पण कभी नहीं डगमगाया। आज भी करोड़ों लोग उनके जीवन के इस पहलू से प्रेरणा लेते हैं।
महात्मा फुले का स्मरण, सावित्रीबाई फुले के सम्मानजनक उल्लेख के बिना अधूरा है। वह स्वयं भारत की महान समाज सुधारकों में से एक थीं। भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल सावित्रीबाई ने लड़कियों की शिक्षा को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाई। महात्मा फुले के निधन के बाद भी उन्होंने इस कार्य को जारी रखा। 1897 में प्लेग महामारी के दौरान उन्होंने मरीजों की इतनी सेवा की कि वह स्वयं भी इस बीमारी की शिकार हो गईं और उनका निधन हो गया।
भारतभूमि बार-बार ऐसी महान विभूतियों से धन्य होती रही है, जिन्होंने अपने विचार, त्याग और कर्म से समाज को मजबूत बनाया है। उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि स्वयं बदलाव का माध्यम बने। सदियों से हमारे देश में समाज सुधार की आवाज उन्हीं लोगों से उठी है, जिन्होंने पीड़ा को भाग्य नहीं माना, बल्कि उसे खत्म करने के प्रयासों में जुटे रहे। महात्मा ज्योतिराव फुले भी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे।
मुझे 2022 में पुणे की अपनी यात्रा याद है, जब मैंने शहर में महात्मा फुले की भव्य प्रतिमा पर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। उनके 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। हमें शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को मजबूत करना होगा। अन्याय के प्रति संवेदनशील बनना होगा और यह विश्वास रखना होगा कि समाज अपने प्रयासों से ही खुद को बेहतर बना सकता है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज की शक्ति को जनहित और नैतिक मूल्यों से जोड़कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।

संवाददाता - अजय देशमुख 

मामला गुंडरदेही थाना का है जहाँ पर गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक न्यायिक मजिस्ट्रेट को जान से मारने की धमकी दी गई है मजिस्ट्रेट को उनके कार्यालय में एक बंद लिफाफे के जरिए धमकी भरा पत्र मिला है जिसमें 3 करोड रुपए की फिरौती की मांग की गई है पत्र में साफ लिखा गया है कि अगर नहीं दी गई तो मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन और उनके परिवार को जान से मार दिया जाएगा जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला गुंडरदेही थाना क्षेत्र का है जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार देवांगन को उनके दफ्तर में एक संदेश लिफाफा मिला है और लिखा गया है इसके साथ ही पत्र में मजिस्ट्रेट पर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं जैसे कि ऑफिस में फाइलें गायब करना गरीबों को परेशान करना हाई कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करना इतना ही नहीं पत्र में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए यह भी लिखा गया है कि हम देश को बचाने के लिए तुम्हारे जैसे लोगों को खत्म करेंगे थाने में शिकायत दर्ज कराई जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर ली गई है कि क्या वाकई इसके पीछे कोई नक्सली संगठन है या फिर यहां कोई सामाजिक तत्व की साजिश है

  रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक के बड़े भाई स्वर्गीय श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बिलासपुर के परसदा स्थित विधायक निवास में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचकर स्व. श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि स्वर्गीय श्री भुलऊ प्रसाद कौशिक का स्नेह, संस्कार और त्याग परिवार की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि उनका सरल, स्नेहमयी और विनम्र व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल दें।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, मरवाही विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा प्रवास के दौरान अंबिकापुर के आकाशवाणी चौक पर माँ भारती के वीर सपूत, अमर क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस, त्याग और बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद का जीवन हर भारतीय के लिए राष्ट्रभक्ति, साहस और अदम्य वीरता की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद जी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा का अमूल्य संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज़ाद जी के आदर्श हमें यह सिखाते हैं कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए ही हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं। यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि नई पीढ़ी महान स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

रायपुर, /छत्तीसगढ़ में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन में व्यय पूर्णतः टेंडर के अनुसार अनुबंधित दर पर तथा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के पश्चात किया गया है। इस कार्यक्रम में मनमाना व्यय व वित्तीय अनियमितता का आरोप निराधार है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव ने बताया कि बिना निविदा प्रक्रिया के कुर्सी और नाश्ते पर मनमाने खर्च का आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक है।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव श्री गिरीश रामटेके ने बताया कि विभागीय जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को विश्वकर्मा जयंती और छत्तीसगढ़ श्रम दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में बड़े स्तर पर श्रमिक महासम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे।

श्रम विभाग ने बताया कि कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे मंच, बैठक व्यवस्था, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य शिविर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत पूर्व से अनुबंधित संस्था के माध्यम से स्वीकृत दरों पर कराई गईं। विभाग के अनुसार कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में बदलाव और समयाभाव के कारण निविदा प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था, ऐसे में पूर्व अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से कार्य कराना प्रशासनिक दृष्टि से उचित निर्णय था। आयोजन के बाद सभी व्ययों का परीक्षण एवं सत्यापन कर का भुगतान अनुबंधित एजेंसी को नियमों के तहत किया गया।

रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिला प्रवास के दौरान अम्बिकापुर में पीडब्ल्यूडी ऑफिस के पास पंडित रविशंकर त्रिपाठी चौक में भटगांव विधानसभा के पूर्व विधायक पंडित रविशंकर त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि पंडित रविशंकर त्रिपाठी जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि उनके विचारों और कर्मठता की जीवंत प्रेरणा है, जो आने वाली पीढ़ियों को समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने की दिशा दिखाती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों का योगदान हमें यह सिखाता है कि जनसेवा ही सच्चा राष्ट्रधर्म है और इसी मार्ग पर चलकर हम एक सशक्त और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण कर सकते हैं।

इस दौरान कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

विशेषज्ञों द्वारा स्टेट कॉमन्स कन्विनिंग चर्चा के बाद जो तथ्य निकल कर आएंगे वे राज्य के नीति निर्माण में होंगे सहायक

जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका-श्री बोरा

दो दिवसीय छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग कार्यशाला का शुभारंभ

 रायपुर, / आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री बोरा ने कहा कि कॉमन्स पर जनजातिय समुदायों के अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण, विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका है। उन्होंने न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की बात करें तो स्थानीय लोग नीति-कार्यान्वयन में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत बदलाव के लिए सरकार एक समर्पित टास्क फोर्स बनाने की प्रक्रिया में है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य पूरे राज्य में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के मध्य संतुलित समन्वय सुनिश्चित करना है। कॉमन्स सम्मेलन संवाद में सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया था, जिसकी शुरुआत पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव और श्री पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुश्री लक्ष्मी सोरी जैसे सम्मानित अतिथियों के प्रारंभिक उद्बोधनों से हुई।

साझा प्राकृतिक संसाधनों (कॉमन्स) के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर केंद्रित दो दिवसीय “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कंवीनिंग” का शुभारंभ आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने किया। कार्यशाला नवा रायपुर ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सेक्टर-24, में आयोजित हो रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है। कल 10 अप्रैल को मुख्य सचिव श्री विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे। वहीं समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम शामिल होंगे।

जल जंगल, जमीन, संस्कृति और पर्यावरण विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की प्रभावी भूमिका

श्री बोरा ने कहा कि इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को पहचानते हुए, एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यह प्रोजेक्ट सामने आएगा और यह स्टूडियो पारंपरिक लोक गीतों और स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुन, दस्तावेज़ीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा। इन साझा संसाधनों के संरक्षण के संबंध में, श्री बोरा ने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवन शैली जैसे चुनौतियों के बीच संतुलित तरीका अपनाते हुए, साझा ज्ञान का विकास कैसे करें और अपनी आकांक्षाओं, विरासत और भविष्य को कैसे बेहतर बनाएँ।

राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका

आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद के लिए एक विशाल मंच साबित हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न संगठनों के नीति विशेषज्ञ, पंचायतों के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के समर्पित सदस्य शामिल हैं। यह विविध समूह छत्तीसगढ़ में कॉमन्स (साझा संसाधन) के रूप में वर्गीकृत 70 लाख एकड़ ज़मीन पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। इस ज़मीन में जंगल, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं, जो ग्रामीण और जनजातीय आबादी के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। कॉमन्स कन्विनिंग के पहले दिन, विशेषज्ञों ने राज्य के विशाल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामुहिक देखरेख की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया गया।

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