January 23, 2026
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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

रायपुर । शौर्यपथ
उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने आज रायपुर से बालोद प्रवास के दौरान पुरूर से झलमला–बालोद–मोहला–मानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर स्थित देवरानी-जेठानी नाले पर निर्माणाधीन 105 मीटर लंबे उच्च स्तरीय पुल के कार्य का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और उपयोग में लाई जा रही सामग्री की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की।
उप मुख्यमंत्री साव ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
श्री साव ने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पुल निर्माण कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए, ताकि क्षेत्रवासियों को शीघ्र ही सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही उन्होंने निर्माण स्थल के आसपास संकेतक बोर्ड और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा, जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निरीक्षण के बाद उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि नागरिकों को समय पर, टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाली आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश में चल रहे सभी निर्माण कार्यों की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक बिना विलंब पहुंचे।

अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के उद्घाटन के दौरान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भगवान हनुमान की तस्वीर वाली पतंग उड़ाए जाने को लेकर देश में सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष और कुछ वर्ग इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं समर्थक इसे सांस्कृतिक कूटनीति और परंपराओं के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।

क्या है पूरा मामला

12 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे पर अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया। इस मौके पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ भी मौजूद थे, जो दो दिवसीय भारत यात्रा पर आए थे। कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं ने एक बड़ी पतंग उड़ाई, जिस पर भगवान हनुमान का चित्र अंकित था। यह दृश्य सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आलोचना क्यों हो रही है

इस घटना को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि भगवान हनुमान करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और उनकी तस्वीर को पतंग के रूप में उड़ाना, फिर पतंगबाजी के बाद उसका क्या होता है, यह धार्मिक भावनाओं का अपमान है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस कदम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह सनातन धर्मियों की आस्था का अपमान है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

सोशल मीडिया पर बहस:
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या किसी पूजनीय देवता की तस्वीर को पतंग पर दर्शाना उचित है। कुछ ने यह भी तर्क दिया कि यदि यही कार्य किसी विपक्षी नेता द्वारा किया गया होता, तो भारतीय जनता पार्टी और दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आती।

समर्थन में क्या दलीलें दी जा रही हैं

विवाद के बीच बड़ी संख्या में लोग और विश्लेषक इस कदम का समर्थन भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि—

  • यह आयोजन सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का हिस्सा था, जिसके जरिए भारत ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।

  • हनुमान जी की आकृति वाली पतंग को भारत-जर्मनी के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • कुछ समर्थकों ने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि भगवान हनुमान पवन पुत्र हैं, ऐसे में उनका हवा में प्रतीकात्मक रूप से होना स्वाभाविक और सकारात्मक संदेश देता है।

कूटनीतिक संदर्भ भी अहम

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है। ऐसे में यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश देने वाला भी माना जा रहा है।

 अहमदाबाद पतंग महोत्सव की यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि भारत में संस्कृति, धर्म और राजनीति कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हैं। जहां एक पक्ष इसे आस्था का विषय मानकर आलोचना कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे परंपरा और कूटनीति के संगम के रूप में देख रहा है। फिलहाल यह मुद्दा सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

 
 
 

नई दिल्ली।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 का मूल उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक ठोस, अनुशासित और परिणामोन्मुख आर्थिक रोडमैप तैयार करना है। बजट में जहां एक ओर राजकोषीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक क्षेत्रों में संसाधनों के कुशल आवंटन पर विशेष जोर दिखाई देता है।

राजकोषीय सुदृढ़ीकरण: मजबूत अर्थव्यवस्था की बुनियाद
वित्त मंत्री और उनकी टीम ने बजट 2026 में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दोहराई है। सरकार का मानना है कि संतुलित घाटा ही निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है और महंगाई पर नियंत्रण में सहायक होता है। बजट से जुड़े आधिकारिक आंकड़े और नीति विवरण पीआईबी (PIB) के माध्यम से सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे नीतिगत पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

पूंजीगत व्यय पर जोर: इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ इंजन
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन माना गया है। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता देकर सरकार रोजगार सृजन, निजी निवेश को प्रोत्साहन और उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दृष्टिकोण मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को स्थायी गति देने में सहायक होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही: हर रुपये का डिजिटल हिसाब
डिजिटल गवर्नेंस को और मजबूत करते हुए बजट में ‘हर रुपये का हिसाब’ सुनिश्चित करने की नीति अपनाई गई है। सरकारी योजनाओं और खर्चों की विस्तृत जानकारी बजट इंडिया पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे नागरिकों को यह पता चल सके कि करदाताओं का पैसा कहां और कैसे खर्च हो रहा है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि योजनाओं का लाभ सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगा।

समावेशी विकास: मानव पूंजी पर निवेश
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट 2026 में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को केंद्र में रखा गया है। सरकार का फोकस ऐसी मानव पूंजी तैयार करने पर है जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को अग्रणी बना सके। ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की मंशा भी बजट की प्राथमिकताओं में स्पष्ट झलकती है।

2047 का रोडमैप
वित्त मंत्रालय की टीम का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन + पूंजी निवेश + पारदर्शी शासन + समावेशी विकास—इन चार स्तंभों पर आधारित यह बजट भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 केवल एक साल का आय-व्यय विवरण नहीं, बल्कि आने वाले दो दशकों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज़ बनकर सामने आया है।

जनसंपर्क अधिकारियों की राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर।
मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि बदलते दौर में जनसंपर्क अधिकारियों को एक्सक्लूजिव और प्रभावशाली स्टोरी तैयार कर उनके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों—प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया—का समन्वित उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा।

डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में “जनसंपर्क की नई चुनौतियाँ” विषय पर आयोजित जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सूचना संप्रेषण के माध्यम तेजी से बदल रहे हैं और नई-नई तकनीकों के आगमन से जनसंपर्क के दायरे का भी विस्तार हुआ है। ऐसे में जनसंपर्क अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने कार्य को अधिक प्रमाणिक, प्रभावी और समयबद्ध बनाना होगा।

आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि एआई टेक्नोलॉजी के उपयोग से कम प्रयास में अधिक कार्य संभव है। फोटो और वीडियो एडिटिंग, कंटेंट प्रेजेंटेशन और सोशल मीडिया प्रबंधन जैसे कार्यों में एआई टूल्स जनसंपर्क को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे तकनीकी रूप से स्वयं को निरंतर अपडेट रखें, ताकि शासन की नीतियों और निर्णयों को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके।
उन्होंने पत्रकारिता स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को जनसंपर्क विभाग में इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया।

उद्घाटन सत्र में अपर संचालक श्री जवाहरलाल दरियो, श्री संजीव तिवारी, श्री उमेश मिश्रा एवं श्री आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डाला। अधिकारियों ने कार्यशाला के उद्देश्य, दो दिवसीय सत्रों की रूपरेखा और प्रतिभागियों से अपेक्षाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को आधुनिक, सशक्त और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत “पाठक-अनुकूल लेखन: सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना” विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक श्री शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बातों की पहचान, सरल एवं सुबोध भाषा, प्रभावी हेडलाइन और सशक्त लीड पैराग्राफ लिखने के गुर बताए। साथ ही प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट की स्थिति में मीडिया से संतुलित एवं समयबद्ध संवाद पर विस्तार से चर्चा की।

द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक श्री विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट की भूमिका की जानकारी दी।

तीसरे सत्र में सोशल मीडिया एवं एआई टूल्स पर चर्चा हुई। डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ श्री राकेश साहू ने एआई आधारित डिजिटल टूल्स के माध्यम से फोटो और वीडियो एडिटिंग के व्यावहारिक उपयोग पर मार्गदर्शन दिया।

दिन के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक श्री लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन और आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपायों की जानकारी साझा की।

इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रदेशभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य अधिकारियों को बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप दक्ष बनाकर जनसंपर्क को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी बनाना है।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर बलौदाबाजार–भाटापारा में 900 से अधिक युवाओं से संवाद, देशभक्ति व नेतृत्व का हुआ संचार

रायपुर, ।
राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के माध्यम से बलौदाबाजार–भाटापारा जिले में जिला स्तरीय युवा संवाद एवं नेतृत्व विकास कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्र निर्माण की भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता को सशक्त करना रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। उनकी ऊर्जा, विचार और संकल्प ही एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की नींव रखते हैं।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, नवाचार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

श्री वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। मंत्री ने यह भी कहा कि शासन युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों, महाविद्यालयीन विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। आयोजन के दौरान युवा संवाद सत्र, प्रेरक व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक दायित्व, राष्ट्र निर्माण और समकालीन चुनौतियों से जुड़े विषयों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए।

जिला प्रशासन एवं उच्च शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से आए 900 से अधिक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा सभी युवाओं को राष्ट्र सेवा, सामाजिक कार्यों और सकारात्मक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दिलाया गया।

यह जिला स्तरीय युवा संवाद कार्यक्रम न केवल युवाओं के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

शांति, सुरक्षा और विकास शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता, बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने पर केंद्रित साय सरकार

रायपुर।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर अंचल के समग्र, संतुलित और सतत विकास को लेकर आज एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ले रहे है । बैठक में बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना, सुरक्षा सुदृढ़ीकरण तथा विकास कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बस्तर में स्थायी शांति और सर्वांगीण विकास राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बस्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ना, वहां के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, संचार, आवास और आजीविका जैसी मूलभूत सुविधाओं की त्वरित एवं प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार का संकल्प रहा है। ऐसे में यह बैठक बस्तर क्षेत्र के विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और जमीनी स्तर पर उनका वास्तविक प्रभाव दिखाई दे इस विषय पर साय सरकार और मजबूत कदम उठा सकती है ।
इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह सहित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित है । समाचार लिखे जाने तक मिली जानकारी अनुसार यह महत्तवपूर्ण बैठक जारी है .

राज्य के 8 युवाओं और एक संगठन को मिला छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने युवाओं को किया सम्मानित

रायपुर/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्य के आठ युवाओं तथा धमतरी जिले के युवा स्टार सेवा समिति खुरतुली को आज राष्ट्रीय युवा दिवस पर सम्मानित किया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आज रायपुर के नवीन विश्राम भवन में आयोजित युवा रत्न सम्मान समारोह में सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षणिक, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर रायपुर में उनके बिताए समय का स्मरण करते हुए समारोह में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मात्र 31 वर्ष की आयु में दुनिया में भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और सभ्यता का मान और सम्मान बढ़ाया। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य की उत्कृष्ट युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत युवाओं का देश है। हमारी युवा प्रतिभाओं को पोषित, पल्लवित और आगे बढ़ाने का काम हम कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए उन्हें दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम, समर्पण और संकल्प से अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने को कहा।

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का परचम पूरी दुनिया में फहराया था। आज करोड़ों युवा उनसे प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से युवा रत्न सम्मान के लिए आवेदन आए हैं, उससे पता चलता है कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सरकार ने इन प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने बड़ी पहल करते हुए आज राज्य में पहली बार व्यक्तिगत क्षमता में सुधार तथा समाज सेवा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने राज्य की प्रतिभाओं को "युवा रत्न सम्मान" से नवाजा है। राज्य के 15 वर्ष से 29 वर्ष की आयु के प्रतिभाओं के उत्कृष्ट कार्यों एवं उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत किया है।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि युवा रत्न सम्मान के लिए राज्य के बहुत से सक्षम युवाओं के आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से अलग-अलग क्षेत्रों से एक-एक नाम का चयन बहुत मुश्किल था। राज्य के युवा कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम कर रहे हैं। उनके कार्यों को सम्मानित और रेखांकित करने के लिए विभाग ने इस वर्ष से ये सम्मान शुरू किए हैं। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, रायपुर जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल और खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर सहित अनेक विभागीय अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

राज्य के इन युवाओं को मिला युवा रत्न सम्मान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित समारोह में बेमेतरा के एस्ट्रोफिजिक्स में सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक एवं पीएचडी छात्र तथा एनएएसओ (NASO) ओलंपियाड में स्वर्ण पदक से सम्मानित श्री पीयूष जायसवाल को छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया। उन्होंने सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कांकेर की सुश्री शिल्पा साहू, साहित्य के क्षेत्र से सरगुजा के श्री अमित यादव, नवाचार के लिए महासमुंद की सुश्री मृणाल विदानी तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए दुर्ग की सुश्री परिधि शर्मा को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी बिलासपुर की सुश्री संजू देवी को खेल, कवर्धा के श्री सचिन कुनहरे को कला एवं संस्कृति और सुश्री आरू साहू को लोककला में उत्कृष्ट कार्यों के लिए युवा रत्न सम्मान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य, पर्यावरण, स्वच्छता, साक्षरता, महिला उत्थान, सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति, मतदाता जागरूकता, जल स्रोतों के संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए धमतरी जिले के खुरतुली के युवा स्टार सेवा समिति को भी छत्तीसगढ़ युवा रत्न सम्मान प्रदान किया।

20 हजार लोगों की ऐतिहासिक शपथ से बालोद ने रचा विश्व कीर्तिमान
बालोद । शौर्यपथ
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए विश्व पटल पर अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई है। जिला मुख्यालय के समीप ग्राम दुधली में आयोजित देश के प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर एक साथ 20 हजार लोगों द्वारा बाल विवाह की रोकथाम हेतु शपथ लेकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त किया गया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में उपस्थित रोवर-रेंजरों, स्काउटर-गाइड्स, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों एवं विशाल जनसमुदाय को बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ सक्रिय सहभागिता निभाने की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलता है, बल्कि समाज की प्रगति में भी सबसे बड़ी बाधा है। इसे समाप्त करने के लिए सामूहिक जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बालोद जिला प्रशासन द्वारा बाल विवाह की रोकथाम हेतु किए जा रहे निरंतर, नवाचारी और प्रभावी प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बालोद आज केवल एक जिला नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा को बाल विवाह मुक्त अभियान में उल्लेखनीय नेतृत्व और सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र प्रदान किया तथा मेडल पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि बालोद शीघ्र ही पूरी तरह बाल विवाह मुक्त जिला बनेगा और अन्य जिलों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने घर, परिवार, रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के समाज में बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाएंगे तथा किसी भी स्थिति में बाल विवाह को होने से रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
समारोह में स्कूली शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कांकेर लोकसभा सांसद श्री भोजराज नाग, भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त श्री के.के. खंडेलवाल, राष्ट्रीय महासचिव श्री पी.जी.आर. सिंधिया, राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंह खालसा सहित अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही दुर्ग संभाग आयुक्त श्री सत्यनारायण राठौर, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश पटेल, जिला पंचायत सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी, अपर कलेक्टर श्री अजय किशोर लकरा, ग्राम पंचायत दुधली की सरपंच श्रीमती पिलेश्वरी नेताम, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, देशभर से आए रोवर-रेंजर, स्काउट-गाइड्स एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।
राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के माध्यम से बालोद जिले ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि जब समाज एकजुट होता है, तो सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। यह उपलब्धि न केवल बालोद बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

रायपुर/बालोद। बालोद में आयोजित राज्य स्तरीय जम्बूरी अब केवल एक शैक्षणिक-सांस्कृतिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की राजनीति में वरिष्ठ अनुभव और युवा नेतृत्व के टकराव का…

पत्रकार भवन के लिए 25 लाख की घोषणा, कहा—साहस, सत्य और जिम्मेदारी ही सच्ची पत्रकारिता की पहचान

 सारंगढ़। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा है। पत्रकारिता धर्म का जीवित रहना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। वे आज सारंगढ़ के गुरु घासीदास पुष्प वाटिका स्थित जैतखाम में पूजा-अर्चना के पश्चात आयोजित प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
कार्यशाला में समसामयिक विषयों, मीडिया की बदलती भूमिका, नई तकनीक और जिम्मेदार पत्रकारिता पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति द्वारा खेल, शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को “सारंगढ़ रत्न” सम्मान से नवाजा गया।
उप मुख्यमंत्री साव ने सारंगढ़ में पत्रकार भवन निर्माण के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं पत्रकारों को नई चुनौतियों से निपटने, सजगता और सावधानी के साथ कार्य करने की दिशा देती हैं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई सहज या आसान कार्य नहीं, बल्कि यह अत्यंत परिश्रम, साहस और जिम्मेदारी से जुड़ा दायित्व है। पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं। सवाल पूछने का अधिकार ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे पत्रकारिता जीवंत बनाए रखती है। हौसला और जज़्बा ही सच्चे पत्रकार की पहचान है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। विशेष रूप से प्रिंट मीडिया के लिए यह समय कठिन है। ऐसे में पत्रकारिता मूल्यों और चौथे स्तंभ का जीवित रहना लोकतंत्र के लिए और भी आवश्यक हो गया है।
उन्होंने सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों से आग्रह किया कि वे खबरों की होड़ से बचें और तथ्यों की पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही समाचार प्रसारित करें। बिना सत्यापन की सूचना किसी के मान-सम्मान और करियर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
श्री साव ने कहा कि भारत जैसे प्राचीन लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। इतिहास साक्षी है कि पत्रकारों ने अंग्रेजी हुकूमत और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया है, इसी कारण आज भी समाज में पत्रकारों को विशेष सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है।
कार्यशाला में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश प्रताप सिंह, नितिन सिन्हा, नरेश चौहान, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकार, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में पत्रकार साथी उपस्थित रहे।

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