July 28, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (4981)

      भिलाई / शौर्यपथ / शासकीय नर्सिंग कॉलेज, दुर्ग (स्व. चंदूलाल चंद्राकर शासकीय मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग) की ओर से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस (हाइब्रिड मोड) का आयोजन 14 फरवरी शनिवार को सुबह 11 बजे से कला मंदिर, सिविक सेंटर भिलाई में किया गया है। आयोजन की चेयरपर्सन और नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रीमा राजेश ने बताया कि दिन भर चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न विषयों पर चर्चा और प्रस्तुतिकरण के सत्र होंगे।
    आयोजन सचिव सपना ठाकुर एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग, समन्वयक डॉ. वंदना चौहान एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग,डॉ. ममता शशि साहू एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग,डॉ. कल्पना भूषण जोशी एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग दुर्ग तैयारियों में जुटे हैं।
    इस दौरान विभिन्न सत्रों में प्रमुख रूप से डॉ. नैन्सी फर्नांडीस परेरा एकेडमिक एडवाइजर, एसएस कॉलेज ऑफ नर्सिंग, वापी, पूर्व प्रिंसिपल, एलटी कॉलेज ऑफ नर्सिंग एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई,चेयरपर्सन डॉ. भावना चक्रवर्ती एसोसिएट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग, डॉ. विष्णु रंजीत और रंजुला यशोधरन, डॉ. जिबी जॉर्ज सीईओ आदेश्वर ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस, जगदलपुर और डॉ. कल्पना भूषण जोशी एसोसिएट प्रोफेसर, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, दुर्ग मार्गदर्शन देंगे। समापन समारोह में प्रमाणपत्र वितरण व अन्य आयोजन होंगे।

    भिलाई/शौर्यपथ। भिलाई स्थित डॉ. संतोष राय इंस्टीट्यूट ने CMA इंटर एवं फाइनल परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सफलता दर्ज करते हुए एक बार फिर शहर को गौरवान्वित किया है। हाल ही में घोषित परिणामों में संस्थान के 70 से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड उपलब्धि मानी जा रही है। इनमें से 14 विद्यार्थियों ने CMA फाइनल परीक्षा पास कर विधिवत कॉस्ट अकाउंटेंट (Cost Accountant) का दर्जा प्राप्त किया, जिससे संस्था और भिलाई का नाम प्रदेश स्तर पर रोशन हुआ है।

    संस्थान प्रबंधन के अनुसार यह सफलता विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और नियमित अध्ययन का परिणाम है, वहीं विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट सीरीज़ और सुनियोजित मार्गदर्शन को दिया। संस्था के डायरेक्टर डॉ. संतोष राय ने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट परिणाम देकर सफलता के नए आयाम स्थापित करता रहेगा।

    सेक्टर-10, जोनल मार्केट (196), भिलाई में स्थित यह संस्थान कॉमर्स शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यहां CMA फाउंडेशन, इंटर एवं फाइनल की नई कक्षाओं के लिए प्रवेश प्रारंभ हो चुके हैं और इच्छुक विद्यार्थियों से शीघ्र प्रवेश लेने की अपील की गई है।

    संस्थान में प्रोफेशनल शिक्षकों की सशक्त टीम कार्यरत है, जिसमें डॉ. संतोष राय (गिनीज बुक रिकॉर्ड होल्डर), डॉ. मिठू, सीए प्रवीण बाफना, सीए केतन ठक्कर, डॉ. पीयूष जोशी, मिस अविनाश कौर, इंजीनियर अमित बाफना, डॉ. अमित श्रीवास्तव, सीए विक्रांत रघुवंशी एवं सीए पल्लवी अग्रवाल शामिल हैं। यहां 11वीं-12वीं (CBSE), CA, CMA और CUET की कक्षाओं के साथ-साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट, ग्रुप डिस्कशन, पर्सनल इंटरव्यू और पब्लिक स्पीकिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाता है।

    दुर्ग /शौर्यपथ। नवदृष्टि फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य प्रभुदयाल उजाला के चाचा श्री जगदीश चंद्र उजाला के निधन के पश्चात उनके नेत्रदान की प्रेरक पहल ने दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी भर दी। संतराबाड़ी निवासी श्री उजाला के देहावसान के बाद उनकी पत्नी श्रीमती रामकुंवर उजाला, पुत्र रूपेश उजाला एवं खेमचंद उजाला तथा बहुएं सपना व गायत्री की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई गई।

    निधन का समाचार मिलते ही नवदृष्टि फाउंडेशन के सदस्य राज आढ़तिया, कुलवंत भाटिया, राजेश पारख और मंगल अग्रवाल मध्य रात्रि में उजाला भवन पहुंचे और नेत्रदान की संपूर्ण व्यवस्था संभाली। श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम—डॉ. संदीप बचकर, डॉ. लीजन एवं नेत्र प्रभारी विवेक कसार—ने बंसल निवास पहुंचकर कॉर्निया संग्रहित किए। विवेक कसार ने उजाला परिवार को इस मानवीय निर्णय के लिए साधुवाद दिया।

    प्रभुदयाल उजाला ने कहा कि संस्था से जुड़े होने के कारण वे प्रतिदिन लोगों की पीड़ा और अंधत्व का दर्द देखते हैं, इसलिए परिवार ने वही किया जिसके लिए वे समाज को प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाचाजी के नेत्रों से दो परिवारों को नई ज्योति मिलेगी। यह उनके परिवार का पहला नेत्रदान है और आगे इसे पारिवारिक परंपरा बनाने का संकल्प लिया गया है।

    पुत्र रूपेश उजाला ने भावुक स्वर में कहा कि पिता के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, किंतु इस कठिन घड़ी में नेत्रदान कर उन्होंने समाज के प्रति अपना कर्तव्य निभाया है। फाउंडेशन के सदस्य राजेश पारख ने कहा कि प्रभुदयाल उजाला सदैव सामाजिक दायित्व निभाते आए हैं और अपने परिवार से शुरुआत कर उन्होंने समाज को अनुकरणीय संदेश दिया है।

    नवदृष्टि फाउंडेशन की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभुदयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन एवं राकेश जैन ने स्व. जगदीश चंद्र उजाला को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उजाला परिवार को इस प्रेरणादायी निर्णय के लिए साधुवाद दिया।

    मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की यह मिसाल समाज को नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करती है।

    आयुक्त सुमित अग्रवाल ने किया निरीक्षण, महापौर ने की अधिकाधिक सहभागिता की अपील

    दुर्ग, ।
    नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा आयोजित होने वाला बहुप्रतीक्षित फ्लावर शो इस वर्ष और भी भव्य स्वरूप में 14 फरवरी को शहर के प्रमुख उद्यान राजेंद्र पार्क में आयोजित किया जाएगा। तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरा पार्क रंग-बिरंगे पुष्पों, सुसज्जित क्यारियों और आकर्षक सजावटी पौधों से सजकर मानो प्रकृति का उत्सव मनाने को तैयार है।

    नगर निगम प्रशासन आयोजन को सफल और यादगार बनाने के लिए पूरे उत्साह और तत्परता से जुटा हुआ है। पार्क में विशेष सजावट, आकर्षक फ्लोरल डिस्प्ले और प्रतियोगिताओं के लिए अलग-अलग श्रेणियों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे आगंतुकों को एक अनूठा अनुभव मिल सके।

    आयुक्त ने लिया तैयारियों का जायजा

    आयुक्त सुमित अग्रवाल ने पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आयोजन स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और आगंतुकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

    आयुक्त ने कहा कि फ्लावर शो नगरवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होगा, इसलिए आयोजन स्थल पर सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और दुरुस्त रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्धता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के निर्देश दिए।

    शहर में बढ़ा उत्साह, दूर-दूर से हो रहा पंजीयन

    फ्लावर शो को लेकर शहरवासियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए शहर के अंतिम छोर से भी नागरिक पंजीयन कराने पहुंच रहे हैं। घर-आंगन में उगाए गए आकर्षक फूलों और सजावटी पौधों को प्रदर्शित करने के लिए लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।

    आयोजन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।

    पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    महापौर अलका बाघमार ने कहा कि यह फ्लावर शो केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने शहरवासियों से अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने और अपने घरों में हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।

    पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे ने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने तथा स्वच्छ एवं हरित दुर्ग के निर्माण का संकल्प साकार करने का अवसर मिलेगा।

    अनुमान है कि बड़ी संख्या में नागरिक इस भव्य फ्लावर शो का आनंद लेने पहुंचेंगे और राजेंद्र पार्क एक दिन के लिए सचमुच फूलों की खुशबू से महक उठेगा।

    रसूख के दम पर कब्जे का आरोप: पुलगांव नाले से पचरी घाट तक भूमि विवाद, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

     दुर्ग। शौर्यपथ की विशेष रिपोर्ट
    शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में पहचाने जाने वाले ताराचंद रमेश कुमार जैन एक बार फिर भूमि विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि उन्होंने सरकारी नाले से सटी भूमि, समाज की जमीन, मंदिर परिसर और अब एक गरीब किसान की निजी भूमि तक पर कब्जा करने की कोशिश की है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
    किसान की जमीन पर फिर खड़ा हुआ विवाद
    किसान डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि के सीमांकन से पूर्व ही ताराचंद रमेश कुमार जैन द्वारा खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई।
    बताया जा रहा है कि पूर्व में समाचार प्रकाशित होने के बाद जैन ने बाउंड्री तोड़कर मेड़ के अनुरूप दीवार उठाने का आश्वासन दिया था। किसान के अनुसार, कुछ दिनों तक काम रुका रहा, लेकिन जब वह खेत की ओर नहीं गया तो दोबारा निर्माण शुरू कर दिया गया।
    डोमन सिन्हा का कहना है कि सीमांकन की मांग के बावजूद सुबह 6 बजे से देर रात तक मजदूर लगाकर विवादित हिस्से में दीवार निर्माण जारी है।
    नाले की सरकारी भूमि और मंदिर परिसर पर भी आरोप
    स्थानीय सूत्रों के अनुसार पुलगांव नाले से सटी सरकारी भूमि पर भी पहले विवाद खड़ा हुआ था। जांच प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान कथित रूप से बाउंड्री निर्माण कर लिया गया।
    इसी तरह समाज की जमीन पर बने मंदिर को "नए स्वरूप" देने के नाम पर बड़े भूभाग पर निर्माण का आरोप लगाया गया है।
    पचरी घाट का मुद्दा फिर गरमाया
    पूर्व मंत्री स्वर्गीय हेमचंद यादव द्वारा निर्मित पचरी घाट का हिस्सा भी कथित रूप से अतिक्रमण की जद में बताया जा रहा है। घाट के पास लगी शिलालेख आज भी मौजूद है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि घाट का एक बड़ा हिस्सा आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुका है।
    प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
    मामले की शिकायत थाना स्तर पर की जा चुकी है। किसान सीमांकन की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोप है कि प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार का लाभ उठाकर निर्माण कार्य पूरा किया जा रहा है।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष राजस्व सीमांकन और स्थलीय जांच नहीं हुई तो विवाद और गहरा सकता है।
    जनहित का सवाल
    भूमि विवाद केवल दो पक्षों का मामला नहीं रह जाता, जब उसमें सरकारी जमीन, सार्वजनिक घाट और समाज की संपत्ति शामिल हो। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, त्वरित सीमांकन और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय आवश्यक है, ताकि न तो किसी गरीब किसान के अधिकारों का हनन हो और न ही सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण हो।
    "शौर्यपथ" की ओर से यह स्पष्ट है कि कानून सबके लिए समान है—चाहे वह रसूखदार व्यापारी हो या साधारण किसान। यदि आरोपों में सच्चाई है तो संबंधित विभागों—राजस्व, नगर निगम और जिला प्रशासन—को तत्काल संयुक्त जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
    अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या सीमांकन कराकर विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी?
    या फिर जांच और कागजी प्रक्रिया के बीच निर्माण की दीवारें और ऊंची होती जाएंगी?
    आम जनता उम्मीद कर रही है कि सुशासन का दावा जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे और सार्वजनिक व निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

    ?? कॉलम बॉक्स: मामले की प्रमुख बातें
    ?? किसान की जमीन पर विवाद – डोमन सिन्हा ने आरोप लगाया कि खेत की मेड़ से लगभग 6 फीट बाहर बाउंड्री वॉल खड़ी की गई।
    ?? पूर्व में दिया गया आश्वासन – समाचार प्रकाशन के बाद दीवार तोड़कर मेड़ पर निर्माण का वादा, लेकिन दोबारा निर्माण शुरू होने का आरोप।
    ?? सीमांकन की मांग लंबित – किसान द्वारा राजस्व सीमांकन की मांग, निर्माण कार्य जारी रहने से विवाद गहराया।
    ?? सरकारी नाले की भूमि पर सवाल – पुलगांव नाले से सटी जमीन पर भी पहले कब्जे के आरोप और जांच प्रक्रिया जारी।
    ?? समाज की जमीन व मंदिर परिसर – "नए स्वरूप" के नाम पर बड़े हिस्से में निर्माण का आरोप।
    ?? स्व. हेमचंद यादव का पचरी घाट – पूर्व मंत्री द्वारा निर्मित घाट के हिस्से पर कथित अतिक्रमण, शिलालेख आज भी मौजूद।
    ?? प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल – शिकायत के बावजूद त्वरित कार्रवाई न होने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष।

    दुर्ग / शौर्यपथ।
    दुर्ग जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री बजरंग कुमार दुबे द्वारा 12 फरवरी 2026 को जिला पंचायत सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक अब प्रशासनिक निर्णय की संवेदनशीलता और व्यावहारिकता को लेकर चर्चा के केंद्र में है। बैठक का उद्देश्य मनरेगा निर्माण कार्य, समर्थ पोर्टल, संपदा पोर्टल, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं स्वच्छ भारत मिशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा था, किंतु इसके आयोजन की पद्धति ने कर्मचारियों के बीच असंतोष को जन्म दिया है।

    बैठक में धमधा जनपद से सचिव, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक सहित लगभग 160 से अधिक फील्ड स्तरीय कर्मचारियों को जिला मुख्यालय उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। समीक्षा का एजेंडा महत्वपूर्ण अवश्य था, परंतु प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस प्रकार की समीक्षा जनपद स्तर पर आयोजित नहीं की जा सकती थी?

    बैठक के उपरांत नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ कर्मचारियों ने बताया कि औसतन प्रत्येक कर्मचारी को लगभग ?300 या उससे अधिक का पेट्रोल/डीजल व्यय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ा। सामूहिक रूप से देखा जाए तो यह राशि ?50,000 से अधिक बैठती है। कर्मचारियों का मत है कि यदि जिला स्तरीय अधिकारी अपनी सीमित टीम के साथ जनपद स्तर पर बैठक आयोजित करते, तो ईंधन व्यय नगण्य रहता—अनुमानत: ?1,000 से भी कम में कार्य संपन्न हो सकता था।

    विकेंद्रीकरण बनाम केंद्रीकृत समीक्षा

    पंचायती राज अधिनियम एवं मनरेगा दिशा-निर्देशों में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण और स्थानीय स्तर पर निगरानी पर विशेष बल दिया गया है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब समीक्षा जनपद या वर्चुअल माध्यम से भी संभव थी, तब इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को जिला मुख्यालय बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

    कर्मचारियों का कहना है कि वे पहले से वेतन संबंधी अनिश्चितताओं और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में व्यक्तिगत व्यय पर जिला स्तर पर बुलाया जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ के समान है। इसे कुछ कर्मचारियों ने "नीतिगत संवेदनशीलता की कमी" और "मैदानी अमले की परिस्थितियों की अनदेखी" बताया।

    प्रशासनिक प्राथमिकताएं या प्रोटोकॉल का प्रदर्शन?

    प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि जिला स्तर की बैठकें आवश्यक अवश्य होती हैं, किंतु संसाधनों की मितव्ययिता, समय की बचत और मैदानी अमले की कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए आयोजन की पद्धति पर विचार अपेक्षित है। डिजिटल माध्यमों की उपलब्धता और स्थानीय समीक्षा तंत्र के रहते केंद्रीकृत बुलावे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी कुछ प्रशासनिक निर्णय—जैसे अल्प पारदर्शिता वाले व्यय, टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर उठी चर्चाएं—समीक्षा के दायरे में रहे हैं। हालांकि इन विषयों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है, किंतु कर्मचारियों के बीच असंतोष की पृष्ठभूमि में यह बैठक एक और उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।

    विकास समीक्षा या मनोबल पर प्रभाव?

    विकास योजनाओं की समीक्षा प्रशासनिक दायित्व है, इसमें कोई दो राय नहीं। किंतु जब समीक्षा की प्रक्रिया ही कर्मचारियों के मनोबल और संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगे, तब प्रशासनिक दृष्टिकोण पर पुनर्विचार अपेक्षित हो जाता है।

    जिला पंचायत के इस निर्णय ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा किया है—
    क्या प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बन पाना अब भी चुनौती बना हुआ है?

    दुर्ग जिला पंचायत की यह बैठक विकास योजनाओं की प्रगति के लिए आयोजित की गई थी, किंतु अब यह स्वयं प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर समीक्षा का विषय बन चुकी है।

      दुर्ग / शौर्यपथ / शहर में सामने आए कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण ने अब गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है। घटना को लेकर आमजन में आक्रोश है तो वहीं पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। छह आरोपियों के विरुद्ध दर्ज मामले में अब तक चार की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन दो आरोपी—भीम नारायण पाण्डेय और संजय पंडित—अब भी फरार हैं। लगातार हो रही देरी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।

    NSUI ने सौंपा ज्ञापन, 5 दिन का अल्टीमेटम
    भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जिला अध्यक्ष गुरलीन सिंह के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक दुर्ग को ज्ञापन सौंपते हुए फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि गिरफ्तारी में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
    NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।
    SIT गठन न होने पर भी सवाल
    घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद विशेष जांच दल (SIT) का गठन नहीं होना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन ने आशंका जताई है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या जनप्रतिनिधि का दबाव जांच को प्रभावित तो नहीं कर रहा। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
    सांसद विजय बघेल का नाम चर्चा में
    शहर के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि फरार आरोपी भीम नारायण पाण्डेय को पूर्व में सांसद विजय बघेल का करीबी बताया जाता रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। स्वयं सांसद विजय बघेल ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
    पुलिस का पक्ष
    पुलिस प्रशासन का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है और विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
    जनता की नजरें अगली कार्रवाई पर
    यह मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का विषय बन चुका है। एक ओर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग तेज है, तो दूसरी ओर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
    अब पूरे शहर की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। जल्द गिरफ्तारी ही इस मामले में कानून के प्रति जनता का भरोसा कायम रख पाएगी।

      दुर्ग / शौर्यपथ / श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था द्वारा समाज के बुजुर्ग माता-पिताओं के प्रति सम्मान, संवेदना और सेवा-भाव को समर्पित एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत संस्था द्वारा पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्ग माता-पिताओं को देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्म “बॉर्डर 2” दिखाने के लिए ले जाया गया।
    इस कार्यक्रम में बुजुर्गों एवं श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के सभी सदस्यों की फिल्म टिकट संस्था की ओर से पूर्णतः निःशुल्क रखी गई थी। फिल्म के दौरान बुजुर्गों के चेहरों पर दिखी मुस्कान और भावनाएं इस पहल की सार्थकता को दर्शा रही थीं।
    इस अवसर पर संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव जी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ को स्थापित हुए 8 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इन आठ वर्षों में संस्था द्वारा कई आयोजन किया गए पर यह संस्था का पहला ऐसा भावनात्मक कार्यक्रम रहा जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता सिर्फ महसूस किया जा सकता है।नीतू जी ने कहा कि
    इस पहल से संस्था को एक नया अनुभव प्राप्त हुआ है और बुजुर्ग माता-पिताओं के साथ इस प्रकार का कार्यक्रम कर अत्यंत खुशी महसूस हुई।
    नीतू श्रीवास्तव जी ने आगे कहा कि वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों को आप के प्रेम,साथ ओर सब से कीमती थोड़ा सा आप के समय की आवश्यकता है हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे सेवा और प्रेम से जुड़े कार्यों से प्रेरणा लेकर समाज के अन्य लोग भी आगे आएँ और बुजुर्गों, जरूरतमंदों एवं संवेदनशील विषयों पर कार्य करें, ताकि समाज को एक सकारात्मक, मानवीय और प्रेरक संदेश मिल सके।
    कार्यक्रम में श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था के सदस्य साधना चौधरी, रूपलता साहू, श्रुति श्रीवास्तव, मनीषा सोनी,सीमा गुप्ता, मनीषा सोनी, निष्ठा सोनी,सुरभि ठाकुर,रानी साहू,कविता विश्वास की सक्रिय उपस्थिति रही।नीतू जी ने कहा कि संस्था के सभी सदस्यों का पूर्ण रूप से साथ होने के कारण कोई भी कार्य संस्था के लिए आसान हो जाता है।
    बुजुर्गों ने संस्था के इस स्नेहपूर्ण प्रयास के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे उनके जीवन का सुखद और भावुक क्षण बताया। श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था भविष्य में भी इसी प्रकार समाजसेवा, मानवीय संवेदना और सकारात्मक सोच से जुड़े कार्यक्रम निरंतर आयोजित करती रहेगी।

    नगर के सभी देवी–देवताओं को मंदिर जाकर आमंत्रण, गुजरात से मंगवाया गया अलौकिक ध्वज, फूल–इत्र वर्षा के साथ निकलेगी ऐतिहासिक यात्रा

    दुर्ग / 

    छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी दुर्ग इस वर्ष फाल्गुन एकादशी के पावन अवसर पर भक्ति और श्रद्धा के एक अद्भुत दृश्य की साक्षी बनने जा रही है। पहली बार शहर में श्री श्याम बाबा की खाटू धाम की तर्ज पर विशाल और भव्य फाल्गुन निशान यात्रा निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और श्याम भक्ति का माहौल बन गया है।

    फाल्गुन मास की पावन ग्यारस पर आयोजित होने वाली श्री श्याम फाल्गुन निशान यात्रा 2026 की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य उन श्याम भक्तों को खाटू श्याम की अनुभूति कराना है, जो किसी कारणवश राजस्थान के सीकर स्थित खाटू धाम नहीं पहुंच पाते। अब दुर्ग में ही भक्तों को खाटू जैसी परंपरा, रीति-रिवाज और भव्यता के साथ बाबा श्याम के सजीव दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।

    खाटू की झलक दिखेगी दुर्ग की सड़कों पर
    निशान यात्रा आयोजक समिति के योगेन्द्र शर्मा ‘बंटी’ ने बताया कि फाल्गुन एकादशी के दिन दुर्ग की सड़कों पर खाटू धाम जैसा दिव्य वातावरण नजर आएगा। बाबा श्याम का रथ, घोड़े-बग्गी, मधुर भजनों की स्वर लहरियां, फूलों व इत्र की वर्षा और सैकड़ों श्रद्धालुओं के हाथों में श्याम बाबा का निशान—यह यात्रा श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम होगी।

    यात्रा की प्रमुख विशेषताएं
    निशान यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जहां जगह-जगह पुष्पवर्षा और इत्र वर्षा की विशेष व्यवस्था की जा रही है। सैकड़ों की संख्या में श्याम भक्त केसरिया, नारंगी और लाल रंग के पवित्र निशान लेकर बाबा के जयकारों के साथ पदयात्रा करेंगे।

    निशान का धार्मिक महत्व
    बंटी शर्मा ने बताया कि बाबा खाटू श्यामजी को चढ़ाया जाने वाला निशान (ध्वज) विजय, बलिदान और दान का प्रतीक है। मान्यता है कि बाबा ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर धर्म की विजय के लिए अपना शीश समर्पित किया था। इसी परंपरा के तहत भक्त मन्नत पूरी होने पर या मन्नत पूर्ण होने से पहले भी निशान चढ़ाते हैं। इस ध्वज पर श्रीकृष्ण व श्याम बाबा के चित्र, मंत्र, नारियल और मोरपंख अंकित होते हैं। मान्यता है कि निशान चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन मंगलमय होता है।

    नगर के देवी–देवताओं को दिया गया आमंत्रण
    भव्य आयोजन से पूर्व आयोजक समिति ने धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए नगर के प्रमुख मंदिरों में जाकर देवी–देवताओं का आह्वान किया और निशान यात्रा में आशीर्वाद देने हेतु आमंत्रण पत्र भेंट किया। सत्ती माता मंदिर, माँ दुर्गा मंदिर, लंगूरवीर मंदिर, श्याम मंदिर, राम मंदिर, सिद्धि विनायक गणेश मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, रामदेव बाबा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना कर यात्रा की विधिवत शुरुआत की गई।

    गुजरात से मंगवाया गया अलौकिक ध्वज
    आयोजकों ने बताया कि गुजरात से विशेष रूप से बाबा श्याम का आकर्षक और अलौकिक निशान मंगवाया गया है, जिसे श्री सत्तीचौरा माँ दुर्गा मंदिर में श्याम भक्तों द्वारा विधि-विधान से तैयार किया जाएगा।

    सर्वसमाज का सहयोग, शहर में भक्तिमय माहौल
    निशान यात्रा को लेकर दुर्ग शहर में उत्साह चरम पर है। सभी समाजों के लोग इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। फाल्गुन एकादशी पर दुर्ग नगरी श्याम भक्ति के रंग में रंगी नजर आएगी और यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक नई धार्मिक परंपरा की नींव रखेगा।

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