September 04, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (5027)

     दुर्ग शौर्यपथ/ /

    भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्मिकों ने समय-समय पर अपनी सृजनशीलता का प्रदर्शन करते हुए उत्कृष्ट कार्य का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसी क्रम में नगर सेवाएं विभाग के तहत आने वाले टाउन इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट (टीईईडी) के सेक्टर-2 एलटी सेक्शन के इंचार्ज आर के प्रसाद एवं उनकी टीम ने अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए पुराने तथा बेकार हो चुके एयर सर्किट ब्रेकर (एसीबी) को नया जीवन देने में कामयाबी हासिल की।
    उल्लेखनीय है कि पिछले महीने ब्लास्ट फर्नेस के पीडीबी पैनल के रेनोवेशन के दौरान निकाले गये पुराने तथा बेकार हो चुके एयर सर्किट ब्रेकर को टाउन इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ने इसे संग्रहित कर पुन: उपयोगी बनाने की कवायद शुरू की। इस बेकार यूनिट को पुन: चालू करने की चुनौती सेक्टर-2 एलटी सेक्शन के इंचार्ज आर के प्रसाद एवं उनकी टीम ने वरिष्ठ प्रबंधक (एलटी ईस्ट) अजय साहू के मार्गदर्शन व सुपरविजन प्रारंभ किया। आर के प्रसाद एवं अजय साहू तथा संबंधित कार्मिकों की टीम ने इस यूनिट को पूरी तरह ओवरऑलिंग कर पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। इस हेतु रणनीतिक योजना बनाकर प्रत्येक काम करने वाले हिस्से के रखरखाव के बाद इसे पुर्नउपयोगी बनाया गया। इसके साथ ही इस यूनिट के विभिन्न कलपुजों को रिपेयर कर पुन: उपयोग करने योग्य बनाया गया। टीम के अथक प्रयास के बाद यह पूरी यूनिट को चालू कर दिया गया।

    इस यूनिट को तैयार करने के बाद जीएम (टीईईडी) दिनेश कुमार से स्वीकृति प्राप्त कर इसे सेक्टर-6 स्थित सब-स्टेशन नंबर 67 में स्थापित कर चालू किया गया। इस प्रकार इस एसीबी के प्रयोग से कार्मिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ ही महंगे ट्रांसफार्मर की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया गया।


    दुर्ग / शौर्यपथ /

    नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त प्रकाश सर्वे के निर्देश देने के बाद फौरन अवैध अतिक्रमण, अवैध कब्जा, अवैध निर्माण एवं अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई होना फिर प्रारंभ हो गया है। आज नेहरू नगर जोन क्रमांक 1 क्षेत्र अंतर्गत 33 स्थानों से कब्जे हटाए गए और यातायात को सुगम बनाया गया। इधर 12 लोगों से 10100 रुपए के दांडिक शुल्क का चालान भी काटा गया। भिलाई निगम ने नेहरू नगर चौक से घड़ी चौक सुपेला तथा सुपेला चौक से रेलवे फाटक तक लगे हुए ठेलो को हटाने की कार्यवाही की गई और नेहरू नगर अंडर ब्रिज के पास से लगे हुए ठेलो को भी जेसीबी और डंपर से ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई में सहायक राजस्व अधिकारी परमेश्वर चंद्राकर एवं राजेश गुप्ता सहित टीम मौजूद रही।
    अपर आयुक्त अशोक द्विवेदी कार्रवाई की मॉनिटरिंग करते रहे और जायजा लेते रहे। वहीं पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में निगम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रमुख चौक चौराहों के समीप जगह-जगह अवैध ठेला एवं दुकान होने के कारण लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है वही दुर्घटना की संभावना भी अधिक होती है। शहर की सुंदरता पर भी दाग लगता है। सड़क पर ही अवैध ठेले लगने से राहगीरों को आने-जाने में परेशानी होती है। वही खासकर मोड़ वाले जगह पर सामने से आने वाले वाहन तथा राहगीर भी दिखाई नहीं देते। इन सब कारणों से अवैध ठेले और दुकानों को हटाने की कार्यवाही निगम प्रशासन ने की है। आकाशगंगा मार्केट में ठीक मंदिर के समीप के दुकानों को भी हटाया गया। हटाने के बाद यहां का मार्ग सुगम हो गया। सड़क से सटे हुए ठेलो को भी हटाने की कार्यवाही की गई।

    जोन कार्यालय परिसर में महिलाओं ने फोड़े 44 मटके तो लड़के जोन ऑफिस में ही अद्र्धनग्र होकर शुरू कर दिये नहाना
    महिलाओं ने धोया एक हफ्त के कपड़े

    भिलाई / शौर्यपथ /

    नगर निगम भिलाई के खुर्सीपार जोन कार्यालय में वार्ड 44 खुर्सीपार के पार्षद दया सिंह के नेतृत्व में यहां के लोगों पानी को लेकर आज जमकर जमकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गेट के पास ही रोकने की कोशिश की तो जहां दया सिंह की खुर्सीपार थानेदार से जमकर बहस हुई वही लोगों की पुलिस से झूमाझटकी हुई। उसके बाद प्रदर्शनकारी जोन कार्यालय में घुसकर प्रदर्शन किये, वहां महिलाएं 44 मटका फोड़ी वही कई युवा अद्र्धनग्र होकर वही नहाने लगे तो महिलाएं कपड़ा धोने लगे। दया सिंह द्वारा पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज खुर्सीपार वार्ड 44 की जनता घरों में पानी नही आने से बेहद परेशान होकर बार बार निगम से पानी देने की विनती करती रही लेकिन निगम अधिकारियों द्वारा उसे अनदेखा करने पर वहां के लोग आक्रोशित हो गये और दया सिंह के नेतृत्व में शांतिपूर्ण तरीके से पूरे वार्डवासी पैदल मार्च करते हुए जोन ऑफिस पहुंचे। गेट पर पुलिस फोर्स द्वारा दया सिंह और वार्डवासियों को रोकने की कोशिश की गई। इस बीच दया सिंह और पुलिस कर्मियों के साथ में बहस हुई। वार्डवासियों और पुलिस कर्मियों के बीच में झूमाझटकी हुई। दया और खुर्सीपार टीआई के बीच में जमकर बहस हुई। मौके पर सीएसपी कौशलेंद्र पटेल भी मौजूद थे। उन्होंने जोन ऑफिस में प्रवेश करने की अनुमति दी। इसके बाद वार्डवासियों ने निगम के जोन ऑफिस में बैठकर नहाने लगे। महिलाएं अपने घर का कपड़ा लेकर पहुंची थी धोने के लिए। जोन ऑफिस में कपड़ा धोया इसके बाद सबने अपनी-अपनी परेशानी जोन आयुक्त को बताई। जोन आयुक्त ने आश्वास्त किया है कि वे जल्द ही इन समस्याओं का समाधान करेंगे। पानी की समस्या जहां-जहां हो रही है, उसका निराकरण किया जाएगा।
    पानी की समस्या का समाधान नही होगा तो मुख्य निगम का किया जायेगा घेराव-दया सिंह

    भाजपा पार्षद दया सिंह ने बताया कि, नगर निगम प्रशासन ने वार्ड में पाइप लाइन तो बिछाई है लेकिन उसमें पानी नहीं है। बोरवेल्स सूख गए हैं। वाटरलेवल डाउन हो गया है। लगातार बोलने के बावजूद निगम के अधिकारियों ने इस दिशा में पहल नहीं की है। बोरवेल्स के पानी से कैमिकल युक्त पानी आ रहा है। मुझे निगम से टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। ये पहला मौका नहीं है जब मैंने पानी खरीदकर मंगवाया हूं, लगातार पूरे गर्मी सीजन में पानी खरीदना पड़ रहा है। अगर वार्ड में पानी की समस्या का समाधान नहीं होता है तो आने वाले दिनों में मुख्य निगम का घेराव किया जाएगा। इसके लिए निगम के अधिकारी जिम्मेदार रहेंगे।

     दुर्ग / शौर्यपथ /

    08 वर्षीय सुरभि चंद्रवंशी प्रोफेसर बनने के सपने को लेकर जनदर्शन के दरवाजे पर पहुंची थी। उसने बताया कि वह नेत्रहीन है व सरस्वती नगर की निवासी है और उसने अपनी पहली से 12वीं तक की शिक्षा नेत्रहीनों के लिए बने विद्यालय और हॉस्टल में रहकर की है। उसने अपनी प्राथमिक शिक्षा नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड सेंटर (प्रेरणा भवन) रायपुर से और 12वीं तक की शिक्षा नयनदीप विद्या मंदिर सेक्टर 6 भिलाई से की है। सुरभि बहुत ही प्रतिभावान छात्र है कक्षा 12 वीं में भी उसने 61 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उसने बताया कि आट्र्स सब्जेक्ट लेकर कॉलेज की पढ़ाई करना चाहती है परंतु उसके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और परिवार में एक बहन व भाई भी हैं, इसके कारण उसकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में अड़चन आ रही है। उसके पास चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी किया हुआ नि:शक्तता प्रमाण पत्र भी है। इसलिए वह कलेक्टर के पास कॉलेज व छात्रावास में एडमिशन सहयोग के लिए पहुंची थी ताकि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर सके और उज्जवल भविष्य बना सके। कलेक्टर ने बालिका की वस्तुस्थिति संज्ञान लेते हुए तुरंत उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित अधिकारी को अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर बालिका की समस्या का निराकरण करने के लिए निर्देशित किया।

    धमधा नाका से उरला जाने वाली रोड पर पुलिया के ऊपर सीमेंट्रीकृत ढक्कन लगाने को लेकर एक आवेदक ने अपना आवेदन कलेक्टर को दिया। आवेदक ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम के पास की पुलिया के ऊपर सीमेंट्रीकृत ढक्कन ना होने से आए दिन लोगों को परेशानी से गुजरना पड़ता है। बच्चों और बड़े बुजुर्गों के लिए तो यह घातक है ही और मवेशी तो कई बार इस खुले गड्ढे में गिर चुके हैं। बरसात का मौसम निकट है ऐसे में यह गड्ढा पानी से भर जाता है ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना और भी बढ़ जाती है। इसलिए आवेदक का निवेदन है कि पुलिया के इस गड्ढे के ऊपर से शीघ्र से शीघ्र सीमेंट्रीकृत ढक्कन लगा दिया जाए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी के संबंधित अधिकारी को आवेदन प्रेषित किया।

    इसके अलावा सहस्त्र बाहु कल्याण समिति के सचिव ने भी सहस्त्र बाहु उद्यान के ठेकेदार को लेकर, अपना आवेदन कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया था। जिसमें उसका कथन था कि नेहरू नगर वार्ड क्रमांक 04 स्थित सहस्त्र बाहु कल्याण का सौंदर्यीकरण नगर पालिका निगम भिलाई के आदेशानुसार सितंबर 2021 को 10 लाख की राशि से ठेकेदार द्वारा होना सुनिश्चित था। पर्यावरण और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से ये उद्यान नागरिकों के लिए बहुत ही हितकर है। जिसके सौंदर्यीकरण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है, इसलिए सचिव का कलेक्टर से निवेदन था कि इस उद्यान के कार्य को जल्द से जल्द प्रारंभ कराया जाए ताकि वार्डवासीयों को मनोरंजन और स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से एक सुंदर और सुसज्जित उद्यान मिल सके। कलेक्टर ने मामले का सज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी को आवेदन प्रेषित किया। कलेक्टर जनदर्शन में आज 47 आवेदन प्राप्त हुए थे।

    भिलाई / शौर्यपथ/

    अवंति बाई चौक कोहका में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। यहां पर निगम की हाइवा की चपेट में आने से साइकिल सवार की मौत हो गई। निगम की कचरा उठाने वाली हाइवा की ठोकर से पहले साइकिल सवार नीचे गिरा और उसके बाद उसका सिर चक्के के नीचे आ गया। बुरी तरह कुचले जाने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद हाइवा चालक वहां से भाग गया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची स्मृति नगर पुलिस ने पहले शव को पीएम के लिए भेजा और हाइवा को जब्त कर लिया है।
    मिली जानकारी अनुसार रविवार सुबह अवंति बाई चौक के पास हादसा हो गया। यहां पर निगम की कचरा उठाने वाले हाइवा सीजी 07 सीबी 0745 ने अवंती बाई चौक पर टर्न लेकर सूर्या मॉल की ओर निकल रहे साइकिल सवार को चपेट में ले लिया।
    हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही युवक की मौत हो गई। युवक जब टर्निंग ले रहा था तब हाइवा चालक उसे देख नहीं पाया और उसे ठोकर मार दी। घटना में युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि युवक मछली विक्रेता है और सुबह मछली बेचने के लिए ही जा रहा था। हादसे के बाद मौके पर जमा लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। जब पुलिस पहुंची तो लोगों ने पुलिस को घेर लिया और यहां पर यातायात विभाग के कर्मचारी की ड्यूटी लगाने की मांग की। लोगों का कहना है कि व्यस्त चौराहा होने के कारण यहां हमेशा वाहनों की जमघट लगी रहती है। आसपास कॉलेज जाने वाले छात्रों की भीड़ व कोहका, कुरुद, सुपेला व जुनवानी की ओर जाने वाले इसी रास्ते का प्रयोग करते हैं। लंबे समय से यहां यातायात पुलिस की तैनाती की मांग की जा रही है लेकिन पुलिस विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का आरोप है कि आज का हादसा भी पुलिस प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। यहां यदि ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए जवान होता तो संभवत: यह हादसा टल जाता है।

     

    दुर्ग / शौर्यपथ /

    नगर के वरिष्ठ पत्रकार एचएमएस के नेता अशोक पंडा को बीती रात्रि रविवार को सुपेला रेलवे क्रासिंग के पास स्थित सोनी के टोपी चश्मा दुकान के पास रात्रि करीब सवा 9 बजे तीन चार असामाजिक तत्वों ने चाकू मार दिया। अशोक पंडा ने तत्काल इस मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने घटना स्थल पहुंचकर पत्रकार अशोक पंडा को शास्त्री अस्पताल पहुंचाकर वहां उपचार कराने के बाद श्री पंडा की शिकायत पर सुपेला थाना ने धारा धारा 294,323,34, के तहत एफआईआर दर्ज कर सुपेला थाना प्रभारी दुर्गेश शर्मा के निर्देश पर सुपेला थाना के टीम रात्रि से ही आरोपियों की खोजबीन शुरू कर दी और अंतत: सेामवार को श्री पण्डा को चाकू मारने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
    ज्ञातव्य हो कि अशोक पंडा को इन आसामाजिक तत्वों ने उस समय चाकू मारा जब वे सुपेला रेलवे क्रासिंग के पास सोनी के टोपी चश्मा दुकान से चाय पीकर घर जाने के लिए उठे, वैंसी ही चार असामजिकतत्व नशे की हालत में आये और चाकू लहराते हुए सोनी के यहां से टोपी चश्मा लूटने लगे और वहां खड़े हुए पत्रकार अशोक पंडा को चाकू मार दिये जिससे श्री पण्डा के बाई आंख के उपर चाकू लगा है। श्री पण्डा पर असामाजिकतत्वों द्वारा चाकू से वार करने पर प्रेस क्लब ने इसकी निंदा की है और कहा कि आजकल अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गये है कि चालू रास्ते में वह भी मात्र रात 9 बजे ही अपराधी लूटपाट करने लग रहे है और पत्रकारों पर भी वार करने लगे है। वही प्रेस क्लब के सदस्यों ने इन आरोपियों को गिरफ्तारी में शीघ्रता दिखाकर इनको पकडने के लिए सुपेला थानेदार दुर्गेश शर्मा को धन्यवाद दिया है।

     दुर्ग / शौर्यपथ /

    आज जनदर्शन में एक आवेदन विद्युत विभाग के लिए आया था जिसमें 02 बिजली खंभों के बीच में बिजली का तार जमीन से मात्र 05 से 06 फीट उपर है, ऐसा आवेदक का कथन था। प्रकरण ग्राम करेली का है जिसमें आवेदक ने बताया कि वह कृषक है और उसके खेत के पास लगे बिजली के खंभों से जाने वाले बिजली के तार की ऊंचाई मात्र 05-06 फीट है बिजली के तार के नीचे होने से वहां से गुजरने वालों के लिए हमेशा जान माल का खतरा बना रहता है। खेत के लिए इन तारों के नीचे से टेक्टर, बैल और खेतीहर मजदूर प्रतिदिन गुजरते हैं। इस बीच कोई भी अनहोनी घटना न घटित हो इसके लिए कृषक का कलेक्टर से निवेदन था कि बिजली के तारों की ऊंचाई को बढ़वा दिया जाए। कलेक्टर ने संबंधित मामले का संज्ञान लेते हुए सीएसपीडीसीएल के अभियंता को प्रेषित किया और शीघ्र निराकरण के लिए कहा।

    इसके अलावा आदर्श नवयुवक मंडल के सदस्य सागौन वृक्ष की अवैध कटाई का मामला लेकर कलेक्टर के समक्ष् प्रस्तुत हुए। जिसमें मंडल के सदस्यों ने बताया कि विगत कुछ वर्षों से ग्राम पोटिया के क्षेत्र में कुछ आसामाजिक तत्वों द्वारा सागौन वृक्ष की अवैध कटाई हो रही है। उन्होंने ये भी बताया कि शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंडल द्वारा 01 वर्ष पूर्व अनुविभागीय अधिकारी धमधा को विषय वस्तु पर आवेदन दिया गया था और मामला संज्ञान में लाया गया था। इस संदर्भ में उन्होंने आगे जानकारी दी कि काटे गए सागौन के वृक्ष, कृषक तिरथ राम देशमुख के खेत में पिछले 01 वर्ष से पड़े हैं। इसके चलते कृषक के खेत पहुंचने का मार्ग भी बाधित हो गया है, कटे हुए वृक्ष कृषि स्थल में होने के चलते कृषक अपने खेत में कोई फसल नहीं लगा पा रहा है और कई बार निवदेन करने के पश्चात् भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। कई बार हमने आस-पास के ग्रामीण युवाओं के सहयोग से होने वाले इस अवैध वृक्ष कटाई के विरूद्ध पर्याप्त साक्ष्य भी संबंधित विभाग को उपलब्ध कराया है परंतु निरंतर उनके अनदेखी के चलते आज ये मामला कलेक्टर जनदर्शन में रखा है। कलेक्टर ने पूरी स्थिति का संज्ञान लिया और संबंधित मामले को वन विभाग के डीएफओ को प्रेषित किया और विधिपूर्ण कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया।

    विद्युत विभाग से संबंधित एक और मामला बेलौदी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से आया था। जिसमें वहां के प्राचार्य ने स्कूल परिक्षेत्र के अंदर लगे विद्युत पोल को हटवाने के लिए यह आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इसके लिए पहले भी वो आवेदन कनिष्ठ यंत्री नगपुरा के पास लगा चुके थे। जिसमें विभाग से उन्हें पोल शिफ्टिंग के लिए प्रकलन राशि के तौर पर लगभग 20 हजार रूपए जमा करवाने के लिए कहा गया था। परंतु प्राचार्य ने बताया कि चूंकि विद्यालय शासकीय है और विद्युत पोल खेल मैदान में है इसलिए विद्यार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से पोल शिफ्टिंग जरूरी है। इसलिए उन्होंने निवेदन किया कि पोल को शीघ्र हटवा दिया जाए। कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए सीएसपीडीसीएल के अधिकारी को पत्र प्रेषित किया।

    प्रशासन के द्वारा जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के लगातार निराकरण से नागरिकों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। यही कारण है कि पिछले सप्ताह सोमवार व मंगलवार दोनों दिन जनदर्शन के स्थगित होने पर आज एक बड़ी संख्या में नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। आज जनदर्शन में 76 आवेदन प्राप्त हुए।

     दुर्ग / शौर्यपथ /

    दुर्ग शहर के लिए जीवनदायिनी के रूप में बसी शिवनाथ नदी में पानी की कोई कमी नहीं है .इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि भरपूर पानी होने के बाद भी दुर्ग की जनता प्यासी है . एक तरफ शिवनाथ नदी लबालब भरा हुआ है वही दूसरी ओर शहर की जनता प्यासी है . गर्मी का मौसम अब लगभग जाने को है और सप्ताह दो सप्ताह में मेघराज का आगमन हो जाएगा किन्तु लबालब पानी से भरी शिवनाथ से लगा हुआ दुर्ग शहर और दुर्ग की जनता इस गर्मी में पानी के लिए पीने के पानी के लिए तरसती रही खूब राजनीति भी हुई किन्तु समस्या का हल फिर भी ना हुआ .
    एक तरफ दुर्ग शहर पानी के लिए हाहाकार कर रहा है और नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी पीठ थपथपाते नहीं अघा रहे कि टैंकरों के सेंटर सिमट गए हैं। निगम के जिम्मेदार लोगों को आबादी के हिसाब से दूरदृष्टि का परिचय देना था, किन्तु विडंबना है कि पानी की टंकियां बढ़ाकर यह उम्मीद की जाती रही कि शहर की आबादी को समुचित पानी उपलब्ध हो पाएगा। जबकि पानी टंकियों की बजाए यदि पानी की क्षमता बढ़ाई जाती तो शहरवासियो को दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता। आज भी दशकों पुरानी व्यवस्था के तहत शहर के लोगों को जलापूर्ति की जा रही है। न पानी खींचने वाले पम्प की क्षमता बढ़ाई गई, न संख्या। जलाशयों से पानी लेने का भी कोई सिस्टम विकसित नहीं किया गया। हालात यह है कि जलापूर्ति व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।
    शहर में जलापूर्ति के लिए कुल मिलाकर 3 जलशोधन संयंत्र काम कर रहे हैं। इनमें से 11 एमएलडी और 24 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र तो बेहतर काम कर रहे हैं, किन्तु कुछ समय पहले बनाया गया 42 एमएलडी क्षमता वाला संयंत्र अपनी क्षमता का आधा पानी भी नहीं दे पा रहा है। 11 एमएलडी क्षमता वाला नलघर नया बस स्टैण्ड के सामने स्थित है, जो दशकों पुराना है। बावजूद इसके वह अब भी अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी दे रहा है। कमोबेश ऐसा ही साइंस कालेज के सामने स्थित पुराना 24 एमएलडी संयंत्र भी है। यह संयंत्र भी अपनी क्षमता का भरपूर दोहन कर रहा है। इन पुराने संयंत्रों से जब पूरी क्षमता से पानी मिल पा रहा है तो सवाल यह है कि आखिर नया बना 42 एमएलडी क्षमता वाला संयंत्र काम क्यों नहीं कर पा रहा है? इस नए संयंत्र से महज 12 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। जब किसी संयंत्र की क्षमताओं का पूरा-पूरा उपयोग नहीं होगा तो शहर में पानी की समस्या तो होगी ही। जानकारों के मुताबिक, साइंस कालेज के सामने बना 42 एमएलडी क्षमता वाला संयंत्र पीएचई ने बनाया था और उसे नगर निगम के हवाले भी किया जा चुका है। लेकिन इस संयंत्र में अब भी नगर निगम का स्टॉफ काम नहीं कर रहा है। यहां एजेंसी के लोग अपने हिसाब से तथाकथित सेवाएं दे रहे हैं।
    4 मोटरों पर 18 टंकियों की जिम्मेदारी
    जलगृह विभाग के पास नदी से पानी खींचने के लिए कुल मिलाकर 6 मोटर है। इनमें से सिर्फ 4 मोटरों के जरिए ही पानी खींचा जा रहा है। नगर निगम के अफसरों की मानें तो 2 मोटरों को बुरे हालातों के हिसाब से सुरक्षित रखा गया है। हालांकि निगम के ही सूत्रों का दावा है कि ये 2 मोटरें खराब पड़ी हुई है। इसे सुधरवाया भी नहीं जा रहा है। हालात यह है कि दुर्ग शहर में नई-पुरानी मिलाकर कुल 18 टंकियों को भरने का जिम्मा महज 4 मोटरों पर ही है। इनमें से यदि एक भी मोटर खराब होती है तो शहर के एक बड़े हिस्से में जलापूर्ति प्रभावित होती है। नगर निगम के जिम्मेदार ओहदों पर बैठे लोग इस सच्चाई को लगातार छिपाते रहे हैं।
    दरकार थी मोटर पम्प बढ़ाने की
    जानकारों की मानें तो शहर की बढ़ती आबादी के हिसाब से शिवनाथ नदी में मोटर पम्प बढ़ाने की जरूरत थी। लेकिन विगत करीब 15-20 वर्षों से इस दिशा में कोई काम ही नहीं हुआ। आज भी पुरानी व्यवस्था के तहत और सीमित संसाधनों से नदी से पानी लिया जा रहा है। ऐसे में बढ़ी हुई आबादी को पानी कैसे मिलेगा? नगर निगम के महानुभावों ने इस बात पर तो गम्भीर चिंतन किया कि आबादी के हिसाब से पानी की टंकियां बढ़ा दी जाए, लेकिन इस तथ्य पर किसी ने भी विचार नहीं किया कि नदी में पानी खींचने की सीमित क्षमता के साथ आखिर इन टंकियों को भरा कैसे जाएगा? टंकियों की संख्या बढ़ाने लेने का औचित्य क्या है, जब उसमें पानी ही नहीं भर पाएंगे?
    एक भी अतिरिक्त मोटर नहीं
    सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में नगर निगम के पास एक भी अतिरिक्त मोटर पम्प उपलब्ध नहीं है। इसे दूरदर्शी सोच का अभाव ही कहेंगे, क्योंकि इस भीषण गर्मी में यदि एक या दो मोटर भी जवाब दे गई तो भरपाई करने के लिए संसाधन नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, मोटर पम्प की आपूर्ति कोलकाता की एक कम्पनी करती है। यदि मोटर पम्प खराब हो जाए तो जाहिर है कि कोलकाता से ही नई मोटर मंगवानी पड़ेगी। इसमें रूपए, श्रम और समय व्यय होगा। लोगों को तकलीफ होगी, वह अलग। हालांकि गर्मियां अब खत्म होने को हैं और मानसून के आते ही शहर से पानी की समस्या भी लगभग खत्म हो जाएगी, किन्तु नगर निगम के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगो को अभी से विचार करना होगा कि जलशोधन संयंत्रों का भरपूर उपयोग कैसे हो और खाली पड़ी टंकियों को भरने के लिए क्या जुगत लगाई जाए।

    दुर्ग / शौर्यपथ /

    दुर्ग सहित छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठन का चुनाव इन दिनों चरम सीमा पर है पुरे प्रदेश के युवा कांग्रेसी प्रत्याशी अपने अपने चुनाव एवं अपने प्रिय प्रत्याशियों को जिताने में लगे हुए है और सभी ऐसे साधनों का उपयोग कर रहे है जिनसे प्रचार में मदद मिले किन्तु वही दुर्ग युवा कांग्रेस संगठन के प्रत्याशी की बात करे तो दुर्ग से दो प्रत्याशी संदीप वोरा और आयुष शर्मा के मैदान में उतरने एवं चुनाव लडऩे से दुर्ग की राजनीती फिजा में इन दिनों अजीब से कशमकश और उथल पुथल मची हुई है . एक ओर जहाँ संदीप वोरा प्रदेश महामंत्री पद के लिए युवा कांग्रेस से प्रत्याशी है वही दुर्ग जिला अध्यक्ष के लिए आयुष शर्मा भाग्य आजमा रहे है . कांग्रेस के सत्ता में आने के पहले दुर्ग विधायक अरुण वोरा की छवि एक मिलनसार सभी को साथ लेकर चलने वाले नेता के रूप में होती थी किन्तु वर्तमान में जब प्रदेश में 15 सालो बाद और निगम में 20 सालो बाद कांग्रेस के कब्ज़े के बाद स्थिति में बहुत परिवर्तन हो गया .
    कांग्रेस के ऐसे कार्यकर्ता जो सालो से विधायक वोरा का समर्थन करते आ रहे है उन्हें दरकिनार कर विधायक द्वारा ऐसे नए नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनका राजनितिक क्षेत्र में अस्तित्व शून्य के बराबर है जिनकी चर्चा दुर्ग कांग्रेसियों के बीच एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है . ऐसे में पुराने जमीनी कार्यकर्ताओ को उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है . कई कांग्रेसी पार्षद दबी जुबान में तो कई खुल कर विधायक की नीतियों का विरोध कर रहे है . पिछले दिनों राज्यसभा सांसद ने भी खुले रूप से एक पर एक फ्री महापौर की बात कहकर विधायक वोरा के निगम के कार्यो में जबरदस्त हस्तक्षेप की बात कह दी .

    बात हो रही कांग्रेस संगठन के चुनाव की तो इस बार वोटिंग द्वारा पदाधिकारियों के चयन के लिए ऑनलाइन की प्रक्रिया को कांग्रेस द्वारा अपनाया गया है किन्तु इस प्रक्रिया का अगर दूसरा रूप देखे तो दुर्ग कांग्रेस में संगठन और सत्ता पर अपनी मजऱ्ी चलाने का तमगा विधायक वोरा के ऊपर शुरू से ही लगता आ रहा है . दुर्ग कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष की निष्क्रियता की बात भी लगातार उठती रही है कार्यकर्ताओ की नाराजगी भी संगठन की निष्क्रियता पर हमेशा भारी पड़ी है किन्तु शायद दुर्ग विधायक को इन सब बातो से कोई मतलब नहीं नजर आता . प्रोटोकाल और विधायक होने के नाते भीड़ से घिरे रहने के कारण विधायक वोरा को अब भी ऐसा प्रतीत होता है कि वही दुर्ग के सर्वमान्य कांग्रेस नेता है किन्तु जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है . कांग्रेस के कई पार्षदों का खुले रूप से विरोध और कई पार्षदों का दोहरा चेहरा जो आने वाले समय में विधायक वोरा की राजनीती के लिए बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है .

    दुर्ग में जिस तरह युवा कांग्रेस के प्रत्याशी आयुष शर्मा और संदीप वोरा के लिए मतदान करवाने की जिम्मेदारी या यह कह सकते है टारगेट पार्षदों , एल्डरमैन , मंडल अध्यक्षों ,युवा कांग्रेसियों एवं वरिष्ठ कांग्रेसियों को दिया गया है वह कही ना कही आने वाले विधान सभा में विधायक प्रत्याशी के रूप में विधायक वोरा के लिए ही परेशानियों का सबब बनेगा . आज भले ही युवा संगठन के चुनाव में आयुष शर्मा और संदीप वोरा की जीत हो जाए क्योकि इस चुनावे में परिणाम कुछ भी हो विधायक वोरा की खुर्सी पर कोई असर नहीं पड़ेगा किन्तु आने वाले विधान सभा में कांग्रेस को विपक्ष पार्टी से ज्यादा कांग्रेसियों को ही साधने में बीत जाएगा . अब दुर्ग में वोरा बंगले के पास ऐसा कोई बड़ा नाम नहीं जिनके कारण मतदान की दिशा को बदलने वाले लोगो का समर्थन प्राप्त हो . वोरा बंगले की मजबूत दीवार के रूप में निर्विवाद राजनीती करने वाले और सहज सरल स्वभाव के एवं अपनी कही बातो को समय पर अमल करने के लिए पहचाने जाने वाले स्व. मोतीलाल वोरा जी के बिना दुर्ग कांग्रेस दिशाहीन हो चुकी है . जब तक स्व. मोतीलाल जी वोरा थे वोरा बंगले का हर फैसला पत्थर की लकीर माना जाता था किन्तु अब स्थिति वैसी नहीं रही कई कांग्रेसी मुखर विरोधी है तो कई कांग्रेसी परदे के पीछे विधान सभा चुनाव का इंतज़ार कर रहे है . ऐसे में स्थिति यह है कि आम जनता पर पकड़ बनाने की कला जानने वाले अब वोरा बंगले से दुरी बना चुके है और जो करीबी है वो वार्ड में भी पक्ष में मतदान करा सके ऐसी स्थिति में नहीं है वर्तमान में तो पद है इसलिए सभी आस पास नजर आ रहे है किन्तु सभी को सही समय का इंतज़ार है और ऐसे कांग्रेसियों की फेहरिस्त काफी लम्बी है जो चुनावी समर में आम जनता को काफी प्रभावित कर सकते है .
    वर्तमान में जिस तरह युवा संगठन चुनाव के लिए कांग्रेसियों पर प्रेशर डाल कर पक्ष में मतदान कराने का खेल चल रहा है यह प्रेशर आने वाले विधान सभा चुनाव में वोरा गुट के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकता है . युवा संगठन के चुनाव में अभी भी ऐसे कई युवा कांग्रेसी है जो खुले रूप से विधायक की पहली और एकमात्र पसंद युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आयुष शर्मा के होने के बावजूद भी कई युवा कांग्रेसियों का मैदान में उतरना ही यह इशारा करता है कि ऐसे भी कई लोग है जो विधायक के फैसले के खिलाफ है .

    परिणाम तो 12 जून के बाद आ ही जायेंगे किन्तु परिणाम आने के बाद संगठन अब विधान सभा चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हो जाएगा वही अगर राज्य सभा सांसद सरोज पाण्डेय अपनी पूरी शक्ति के साथ आने वाले चुनाव की तैयारी में मैदान में उतारी तो संगठन की अपनी मजबूत पकड़ और कट्टर समर्थको के समर्थन से दुर्ग की राजनितिक फिजा बदल सकती है . काफी सालो तक केंद्र की राजनीती करने के बाद एक बार फिर प्रदेश की राजनीती में केन्द्रीय भूमिका निभाने का मादा रखने वाली राज्यसभा संसद सरोज पाण्डेय की राजनितिक नीतियों का मुकाबला कर सके ऐसा कोई कांग्रेसी विधायक गुट से नजर नहीं आता किन्तु राजनीति है इसमें कब कौन आगे निकल जाए कोई भरोसा नहीं प्रतिभाये बहुत है किन्तु मौका हर किसी को नहीं मिलता वाली कहावत राजनीती में चरितार्थ है .दुर्ग कांग्रेस में भी ऐसे कई चेहरे हो सकते है जो कुशल राजनीतिज्ञ हो किन्तु सभी को तलाश है मौके का . युवा संगठन के चुनाव का परिणाम जो भी हो आने वाले विधान सभा चुनाव में विधायक प्रत्याशी के रूप में अरुण वोरा को कई मैदानों पर एक साथ जंग लडऩा होगा और सफलता प्राप्त कर ये साबित करना होगा कि स्व. मोतीलाल वोरा की तरह उनमे भी सक्षम राजनीतिज्ञ बनाने के सभी गुण मौजूद है . युवा संगठन का चुनाव तो आने वाले विधान सभा चुनाव का एक आगाज बस है .

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