Google Analytics —— Meta Pixel
April 10, 2026
Hindi Hindi
शौर्यपथ

शौर्यपथ

किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं

किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत

रायपुर / जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।

24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।

हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।

किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।

किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।” यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”

इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।

वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”

किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।

किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”

किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।

वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”

भिलाई / शौर्यपथ
दुर्ग जिले में हनुमान जन्मोत्सव इस वर्ष आस्था, ऊर्जा और सामाजिक जागरूकता के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। जिले के कोने-कोने में “जय श्री राम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ बजरंगबली को सिंदूर का चोला अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
इसी क्रम में भिलाई के कोहका स्थित “बीरा के अंगना” में समाजसेवी इंद्रजीत सिंह के नेतृत्व में भव्य, अनुशासित और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना रहा।
कार्यक्रम की सबसे विशेष झलक 51 पंडितों के सानिध्य में हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ रहा, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मंत्रों की गूंज और भक्ति की लहर ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। बच्चों के लिए कराटे डेमो क्लास का आयोजन किया गया, वहीं बच्चियों को विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर समाजसेवी इंद्रजीत सिंह ने सभी के सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने कहा कि हनुमान जी के साहस, सेवा और समर्पण के भाव को अपने जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है।
पूरे जिले में निकली भव्य शोभायात्राएं, भंडारे और सामूहिक आयोजन इस पर्व को जन-जन का उत्सव बना रहे हैं। खासकर युवाओं और महिलाओं की बढ़ती सहभागिता ने धार्मिक आयोजनों को एक नई सकारात्मक दिशा दी है, जिससे समाज में ऊर्जा और एकता का संदेश प्रसारित हो रहा है।
? कोहका का यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को सशक्त और जागरूक बनाने का प्रेरणास्रोत भी साबित हुआ।

? धमतरी / शौर्यपथ
✍️ संभाग प्रमुख: कुमार नायर

धमतरी पुलिस द्वारा अवैध जुआ-सट्टा के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत सिटी कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बनियापारा क्षेत्र में सट्टा खिलाने वाले खाईवाल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट्रोलिंग के दौरान कोतवाली पुलिस टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि बनियापारा में एक व्यक्ति अवैध रूप से सट्टा संचालित कर रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर बताए गए स्थान पर घेराबंदी कर दबिश दी।

कार्रवाई के दौरान आरोपी दिनेश ढीमर उर्फ चिकु (40 वर्ष) को लोगों से पैसे लेकर सट्टा लगवाते और अंकों वाली सट्टा पट्टी लिखते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गवाहों की उपस्थिति में 1000 रुपये नगद, तीन सट्टा पट्टी एवं एक डॉट पेन जब्त किया। जब्त सट्टा पट्टियों में विभिन्न नामों के सामने अंकों में रकम दर्ज पाई गई, जो अवैध सट्टा संचालन की पुष्टि करती है।

इस कृत्य को छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 6(क) के तहत अपराध पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

? आरोपी का विवरण:
दिनेश ढीमर उर्फ चिकु
पिता – लक्ष्मीनारायण
उम्र – 40 वर्ष
निवासी – बनियापारा, धमतरी
थाना – सिटी कोतवाली, जिला धमतरी

? धमतरी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में जुआ, सट्टा एवं अन्य अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सख्त और निरंतर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

? धमतरी / शौर्यपथ
✍️ संभाग प्रमुख: कुमार नायर

धमतरी जिले के मगरलोड थाना अंतर्गत चौकी करेलीबड़ी क्षेत्र के ग्राम हरदी में नवविवाहिता की संदिग्ध मृत्यु का मामला अब सनसनीखेज हत्या में बदल गया है। पुलिस की गहन विवेचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महिला की हत्या उसके ही पति ने गला घोंटकर की, जबकि सास ने सच्चाई छुपाने का प्रयास किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को ग्राम हरदी में नवविवाहिता की मृत्यु की सूचना मिलते ही करेलीबड़ी पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर मर्ग कायम कर गंभीरता से जांच शुरू की गई। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्रण और गवाहों के बयान के आधार पर पुलिस ने हर पहलू की सूक्ष्म जांच की।

शव परीक्षण रिपोर्ट ने पूरे मामले का रुख बदल दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि महिला की मृत्यु श्वास अवरुद्ध (गला घोंटने) से हुई है और इसकी प्रकृति हॉमीसाइडल यानी हत्या है। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा और तेज कर दिया।

विवेचना के दौरान एफएसएल टीम की तकनीकी जांच और लगातार पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि मृतिका और उसके पति चन्द्रशेखर यादव के बीच संतान को लेकर अक्सर विवाद होता था। घटना वाले दिन भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई, जो हिंसक रूप ले बैठी। गुस्से में आकर आरोपी पति ने रस्सी से गला दबाकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी।

पुलिस की सख्त पूछताछ और निगरानी के चलते आरोपी चन्द्रशेखर यादव (26 वर्ष) ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त काले रंग की नोई रस्सी भी बरामद कर ली गई। आरोपी को 1 अप्रैल 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां रिना बाई यादव (46 वर्ष) ने घटना को छुपाने के लिए मृतिका की मौत को सीने में दर्द से होना बताया और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। साक्ष्य छुपाने के इस प्रयास के चलते पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 51/2026 के तहत धारा 103(1) और 238(क) भारतीय न्याय संहिता में मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

? आरोपीगण:

  1. चन्द्रशेखर यादव, पिता एवन लाल यादव, उम्र 26 वर्ष
  2. रिना बाई यादव, पति एवन लाल यादव, उम्र 46 वर्ष
    निवासी: ग्राम हरदी, चौकी करेलीबड़ी, थाना मगरलोड, जिला धमतरी (छत्तीसगढ़)

? यह घटना एक बार फिर पारिवारिक विवादों के भयावह परिणाम को उजागर करती है, जहां रिश्तों की नींव ही हिंसा में बदल गई।

रामावतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा मोड़: बिलासपुर हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी ठहराया, 3 सप्ताह में सरेंडर के निर्देश

? दुर्ग/बिलासपुर | शौर्यपथ समाचार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज एक अहम न्यायिक मोड़ सामने आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अमित जोगी को दोषी करार देते हुए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति और न्यायिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

? क्या है पूरा मामला?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में कुल 31 आरोपियों को शामिल किया गया था।

इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे।

निचली अदालत के फैसले में अमित जोगी को दोषमुक्त कर दिया गया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।

सीबीआई द्वारा इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिस पर अब यह महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है।

? हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए अमित जोगी को दोषी माना और उन्हें 3 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है।

यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में निर्णायक माना जा रहा है।

? अमित जोगी की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा—

“माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, बिना मुझे सुनवाई का अवसर दिए।

जिस व्यक्ति को पहले दोषमुक्त किया गया था, उसे बिना सुनवाई के दोषी ठहराया जाना अत्यंत अप्रत्याशित है।”

उन्होंने आगे कहा—

उन्हें 3 सप्ताह में सरेंडर करने का समय दिया गया है

वे इस निर्णय को ‘गंभीर अन्याय’ मानते हैं

उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय मिलने का पूर्ण विश्वास है

वे शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ेंगे

अंत में उन्होंने समर्थकों से प्रार्थना और आशीर्वाद की अपील करते हुए “सत्य की जीत अवश्य होगी” का विश्वास जताया।

? राजनीतिक और कानूनी महत्व

यह फैसला न केवल एक पुराने आपराधिक मामले में बड़ा मोड़ है, बल्कि इसका राजनीतिक असर भी व्यापक हो सकता है।

जहां एक ओर यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की दिशा को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर अब सभी की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या मामला सुप्रीम कोर्ट में नई दिशा लेगा।

? सार 

करीब दो दशक पुराने इस हत्याकांड में आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के एक अहम पड़ाव को दर्शाता है। अब आगे की कानूनी लड़ाई और संभावित अपील पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।

दुर्ग / शौर्यपथ

दुर्ग शहर, जो कभी निष्पक्ष पत्रकारिता और मजबूत संवाद परंपरा के लिए जाना जाता था, इन दिनों एक अजीब विडंबना का गवाह बन रहा है। यहां अब सिर्फ राजनेता ही राजनीति नहीं कर रहे—बल्कि पत्रकारों के बीच भी सियासत अपने चरम पर है। और इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस ‘कलम की लड़ाई’ में अब राजनीतिक दलों के मीडिया प्रभारी भी खुलकर भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।

? प्रेस क्लब की दीवारों के भीतर ‘दो खेमों’ की कहानी

वरिष्ठ पत्रकारों के पुराने प्रेस क्लब में लंबे समय से चल रहे आंतरिक मतभेद ने आखिरकार एक नए प्रेस क्लब के जन्म को जन्म दिया। सामान्यतः इसे लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखा जा सकता था, लेकिन यहां कहानी कुछ और ही है।

नए प्रेस क्लब के अस्तित्व में आते ही पुराने क्लब के कुछ सदस्यों की सक्रियता संगठन मजबूती की दिशा में नहीं, बल्कि नए मंच को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति में बदलती दिखी।

परिणाम—पत्रकारों के बीच संवाद की जगह अब अविश्वास और आरोपों की दीवार खड़ी हो गई है।

? भाजपा कार्यालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस: ‘मीडिया मैनेजमेंट’ या ‘मीडिया विभाजन’?

हाल ही में भाजपा कार्यालय में मंत्री गजेंद्र यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इस अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।

बताया जाता है कि भाजपा की मीडिया टीम ने बिना स्पष्ट सूचना के पत्रकारों को दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दी।

यह कोई तकनीकी चूक नहीं लगती—क्योंकि प्रेस विज्ञप्तियां तो सभी पत्रकारों तक नियमित रूप से पहुंचती हैं।

सवाल यह है कि जब सूचना भेजी जा सकती है, तो समान मंच क्यों नहीं दिया गया?

इस घटना के बाद जो बहस और विवाद सामने आए, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सिर्फ ‘समन्वय की कमी’ नहीं, बल्कि सुनियोजित विभाजन भी हो सकता है।

? कांग्रेस भी पीछे नहीं: ‘भेदभाव की नीति’ सर्वदलीय?

यदि यह माना जाए कि यह समस्या केवल भाजपा तक सीमित है, तो यह अधूरी सच्चाई होगी।

कांग्रेस के मीडिया प्रबंधन पर भी ऐसे ही आरोप लगते रहे हैं—जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में चयनात्मक आमंत्रण और ‘पसंदीदा पत्रकारों’ को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति खुलकर सामने आती है।

इससे यह संकेत मिलता है कि पत्रकारों के बीच की दरार को राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से साधने में लगे हैं।

? ‘पत्रकार’ की परिभाषा भी विवाद में

स्थिति का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि प्रेस क्लब की सदस्यता और ‘पत्रकार’ की पहचान भी सवालों के घेरे में है।

ऐसे कई नाम सामने आते हैं जो नियमित प्रकाशन भी नहीं कर पाते, लेकिन किसी अन्य पत्र की एजेंसी लेकर ‘पत्रकार’ कहलाने की होड़ में शामिल हैं।

इस प्रवृत्ति का असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं—यह वरिष्ठ और गंभीर पत्रकारों की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

? ‘3-4 एकड़ जमीन’ का शिगूफा: हकीकत या हास्य?

इसी बीच एक कथित दावे ने पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया—कि शासन द्वारा प्रेस क्लब के लिए 3-4 एकड़ जमीन मुफ्त में दी गई है, जहां पत्रकारों की कॉलोनी बनाई जाएगी।

हालांकि, यह दावा अब तक किसी ठोस आधार पर खरा नहीं उतरा और शहर में इसे अधिकतर लोग मजाक या ‘राजनीतिक गुब्बारा’ ही मान रहे हैं।

ऐसे बयानों ने गंभीर मुद्दों को भी हल्का बना दिया है।

? बड़े आयोजन, छोटी सोच: सरोज पांडे कार्यक्रम भी विवादों में

देश-प्रदेश की वरिष्ठ नेता सरोज पांडे के हालिया कार्यक्रम में भी यही तस्वीर दोहराई गई।

इतने बड़े आयोजन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का दो हिस्सों में बंट जाना न केवल मीडिया प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि क्या जानबूझकर ऐसा किया गया?

परिणाम—कार्यक्रम को वह व्यापक प्रचार नहीं मिल सका, जिसका वह हकदार था।

?  ‘कलम’ अगर बंट गई, तो सवाल कौन पूछेगा?

दुर्ग में पत्रकारों के बीच बढ़ती यह खाई केवल व्यक्तिगत या संगठनात्मक विवाद नहीं है—यह लोकतांत्रिक संवाद के लिए खतरे की घंटी है।

जब पत्रकार ही आपसी खेमेबाजी में उलझ जाएंगे,

जब राजनीतिक दल उन्हें अपने हिसाब से ‘मैनेज’ करने लगेंगे,

और जब मंच संवाद का नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का बन जाएगा—

तब सबसे बड़ा नुकसान होगा सच्चाई और जनता के अधिकार का।

दुर्ग को यह तय करना होगा—

पत्रकारिता ‘प्रतिस्पर्धा’ रहेगी या ‘प्रतिशोध’?

 

  रायपुर / राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम, कोटा में खेले गए पुरुष फुटबॉल के सेमीफाइनल मुकाबलों में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया।

खेले गए एक रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया। मैच की शुरुआत से ही छत्तीसगढ़ टीम ने आक्रामक खेल दिखाया और पहले हाफ की समाप्ति तक 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे हाफ में अरुणाचल प्रदेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन छत्तीसगढ़ ने बढ़त कायम रखते हुए मैच 3-2 से अपने नाम किया।
इसी प्रकार पहले खेले गए सेमीफाइनल मैच में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।

इस अवसर पर केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, खेल विभाग के अधिकारी, आयोजन समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में खिलाड़ी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

 

श्रीमती खडसे ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के दौरान जगदलपुर का दौरा किया और 2500 से अधिक आदिवासी एथलीटों को 'भविष्य का ओलंपियन' बताया

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अस्मिता लीग के पूर्व छात्रों ने हॉकी, वेटलिफ्टिंग, फुटबॉल और तैराकी में पदकों पर अपना दबदबा बनाया

रायपुर / युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026' के दौरान बुधवार को रायपुर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यहां के माहौल को ऊर्जा, आशा और बदलाव से भरपूर बताया। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि एथलीटों, स्थानीय समुदाय और इस क्षेत्र के लोगों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है।

देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 2,500 से ज्यादा एथलीट अलग-अलग खेलों में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे हैं। श्रीमती खडसे ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026, केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत आदिवासी युवाओं को अपना भविष्य बनाने के लिए एक मंच दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह खेल एक नई उम्मीद हैं और यह संकेत कि उनकी काबिलियत को पहचाना जा रहा है और उस पर सबसे ऊंचे स्तर पर निवेश किया जा रहा है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री ने कहा, '' एक समय था जब छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, और यहां के लोगों को एक पिछड़ा समुदाय माना जाता था। आज, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र के लिए एक नई दिशा खुल रही है। नक्सलवाद का खात्मा हो चुका है और खेल के माध्यम से, इस धरती के युवा अब अपनी ऊर्जा और क्षमता को सामने ला सकते हैं और देश के लिए खेल सकते हैं।''

खेल राज्य मंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 को एक ऐतिहासिक पहल बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन, गृह मंत्री श्री अमित शाह (जिन्होंने पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है), कैबिनेट मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया और पूरी साई टीम को दिया। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि इन खेलों में हिस्सा लेने वाले कई एथलीट आगे चलकर ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और पदक जीतेंगे।

युवा मामले और खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने 'अस्मिता लीग' के परिवर्तनकारी प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। इस लीग को 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के उस विज़न के तहत शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को प्रतिस्पर्धी खेलों में लाना और उन्हें एक पहचान व अवसर प्रदान करना है।

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री, श्रीमती रक्षा खडसे ने कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में, नतीजे ज़बरदस्त रहे हैं। हॉकी, वेटलिफ्टिंग और फुटबॉल में हिस्सा लेने वाली लगभग 60 से 70 प्रतिशत लड़कियां ‘अस्मिता लीग’ खेल चुकी हैं और पदक जीत चुकी हैं। इनमें अंजली मुंडा जैसी बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल हैं। तैराकी में जीते गए सभी पांचों स्वर्ण पदक भी ‘अस्मिता लीग’ की खिलाड़ियों ने ही हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, '' हमारा प्रयास जारी है कि हम ‘अस्मिता लीग’ को और भी निचले स्तर तक यानी के गांवों तक ले जाएं ताकि खेलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती रहे।''

मुख्यमंत्री से केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री रक्षा खडसे की सौजन्य मुलाकात, खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच देने पर जोर

बस्तर और सरगुजा ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को मिल रही है देश भर में सराहना


रायपुर // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री सुश्री रक्षा निखिल खडसे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, भारतीय खेल प्राधिकरण के उप महानिदेशक श्री मयंक श्रीवास्तव एवं खेल विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने सुश्री खडसे का शॉल, बस्तर आर्ट से निर्मित आकर्षक प्रतिकृति तथा बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर, संसाधन और सशक्त मंच उपलब्ध कराने की है। राज्य सरकार खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक ने प्रदेश को नई पहचान दिलाई है। इन आयोजनों के जरिए अनेक छिपी हुई प्रतिभाएं सामने आई हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सरकार द्वारा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनके कौशल को और निखारने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी करना प्रदेश के लिए गर्व की बात है और हमारे आदिवासी अंचल के युवाओं में यह नई ऊर्जा का संचार करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर आज जब मुख्यधारा से जुड़ रहा है और वहां शांति स्थापित हुई है तो निश्चित ही आने वाले समय में खेलों में युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने ‘बस्तर पंडुम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक खेल, गायन, वादन, वेशभूषा एवं व्यंजन सहित 12 विधाओं में लगभग 54 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खेल विरासत का सशक्त उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय राज्य मंत्री सुश्री खडसे ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। जगदलपुर में आयोजित इस आयोजन को उन्होंने आदिवासी सशक्तिकरण, जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।

 

  रायपुर / संचालनालय कोष एवं लेखा ने राज्य में वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत की है। इन पहलों का लक्ष्य आम नागरिकों, शासकीय विभागों एवं अन्य हितधारकों को सरल, सुलभ और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

इसी क्रम में, ई-चालान के तहत OTC प्रणाली को 01 अप्रैल 2026 से लागू किया गया है। अब सभी प्रकार की शासकीय प्राप्तियों का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकेगा। नागरिक और संस्थाएं आसानी से चालान तैयार कर राजस्व जमा कर सकेंगे, जिससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज, समयबद्ध और पारदर्शी होगी।

इसके साथ ही कोषालयों में ऑनलाइन बीटीआर सुविधा भी शुरू कर दी गई है, जिससे लेखांकन कार्यों में गति और सटीकता आएगी। राज्य में एक केंद्रीय कोषालय का भी शुभारंभ किया गया है। इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार से प्राप्त राशि के भुगतान SNA SPARSH प्रणाली के माध्यम से अब अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और केंद्रीकृत तरीके से किए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में दक्षता सुनिश्चित होगी।

संचालनालय कोष एवं लेखा की नई वेबसाइट (dta.cg.gov.in) भी लॉन्च की गई है, जहां उपयोगकर्ताओं को विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारी, विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं और जरूरी सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध होंगी। यह पहल राज्य में वित्तीय प्रशासन को आधुनिक स्वरूप देने और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Page 5 of 3107

हमारा शौर्य

हमारे बारे मे

whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
 
CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
CONTECT NO.  -  8962936808
EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)