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सुकमा / शौर्यपथ /
छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री कवासी लखमा का एक वीडियो सोशल मीडिया में काफी वायरल हो रहा है। दरशल वाइरल हो रहे वीडियो छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री लखमा धोती पहनकर सेवादारों और सिरहा-गुनिया के साथ पारंपरिक ढोल की थाप पर झूमते हुए नजर आ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार यह वीडियो सुकमा जिले के दोरनापाल का है। यहां मेले में शामिल होने के लिए मंत्री कवासी लखमा पहुंचे थे।
दरअसल, दोरनापाल में शीतला माता के मंदिर में तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जा है। इस मेले में शामिल होने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा भी पहुंचे थे। यहां देवी की पूजा-अर्चना के समय वे पारंपरिक वेशभूषा धोती पहने। फिर सिरहा-गुनिया के साथ उन्होंने देवी की आराधना की। यहां ढोल की थाप पर झूमने लगे। मंत्री कवासी लखमा की इस भक्ति-भावना को देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
रायपुर / शौर्यपथ /
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों के विकास के प्रचलित मापदंडों में सांस्कृतिक उत्थान के तत्वों को भी शामिल किए जाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रांसफार्मेशन ऑफ एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम (टीएडीपी) के मॉनिटरिंग इंडीकेटर में स्थानीय बोली में शिक्षा, मलेरिया व एनीमिया में कमी, वनोपज की समर्थन मूल्य में खरीदी, लोक कला, लोक नृत्य तथा पुरातत्व का संरक्षण-संवर्धन, जैविक खेती, वनाधिकार पट्टे आदि को शामिल किया जाना चाहिए।
बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कहा है-मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इन सभी मापदंडों पर छत्तीसगढ़ ने शानदार काम किया है। श्री बघेल ने लिखा है-हमारे राज्य में कुल 10 आकांक्षी जिले हैं, जिसमें पूर्णत: 8 जिले अनुसूचित क्षेत्र में हैं एवं 07 जिले बस्तर संभाग से हैं जो अनुसूचित जनजाति बहुल्य क्षेत्र भी है और वामपंथी उग्रवाद से ग्रसित हैं। इन आकांक्षी जिलों के विकास को लेकर नीति आयोग द्वारा समय-समय पर समीक्षा एवं मूल्यांकन करने हेतु विभिन्न मापदण्ड के आधार पर आकांक्षी जिलों के बीच श्रेणीकरण किया जाता है।
हमारे वनांचल तथा ग्राम्य जीवन में संस्कृति और परंपराओं का विशेष योगदान होता है, जिससे वहां के लोगों के जीवन में समरसता, उत्साह एवं स्वावलम्बन का भाव रहे, इसलिए आकांक्षी जिलों की अवधारणा में सांस्कृतिक उत्थान के बिन्दु को भी यथोचित महत्व एवं ध्यान दिया जाना चाहिए ।उपरोक्त इंडीकेटरों को भी जोड़े जाने पर मुझे विश्वास है कि आकांक्षी जिलों के बहुमुखी विकास में किये जा रहे सभी प्रयासों पर भी ध्यान रहेगा और जिस आशा के साथ यह आकांक्षी जिलों की पृथक मॉनीटरिंग व्यवस्था शुरू की गई है वह भी सफल होगी ।
रायपुर /शौर्यपथ/
छत्तीसगढ़ ने केंद्र सरकार से 2850 फुलवारी क्रेश केंद्रों और 400 आंगनबाड़ी सह-क्रेश केंद्रों को फिर से प्रारंभ करने का मुद्दा उठाया है। इसी प्रकार राज्य में पदस्थ 226 क्रेश कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय के साथ योजना को पुनः संचालित करने की स्वीकृति देने की मांग केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा भुवनेश्वर में आयोजित की गई क्षेत्रीय परामर्श सम्मेलन में की गई है। सम्मेलन में सम्पूर्ण देश मे सक्षम आंगनवाड़ी व मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति एवं मिशन वात्सल्य की शुरुआत करने के लिए विस्तृत विचार विमर्श किया गया।
सम्मेलन मेें छत्तीसगढ़ की महिला बाल विकास की संचालक श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने बताया कि राज्य में 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों को मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र बनाया जा रहा है। सक्षम आंगनबाड़ी के लक्ष्यों के अनुरूप यदि राज्य को राशि दी जाती है तो वर्ष 2022-23 में ही 10 हजार मॉडल आंगनबाड़ी केन्द्र बनाए जा सकंेगे। उन्होंने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के लिए पूर्वाेत्तर राज्यों की तरह वाहन व्यवस्था, सभी सखी सेन्टर के लिए वाहन व्यवस्था, स्वाधार एवं उज्ज्वला होम के किराया मद में वृद्धि आदि महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
मिश्रा ने राज्य में महिलाओं एवं बच्चों से जुडे़ कार्यक्रमों के बेहतर संचालन के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोत्तरी, पूरक पोषण आहार के वित्तीय मापदण्ड में वृद्धि, बच्चों के प्रभावी संरक्षण हेतु बाल संरक्षण योजना का ग्राम स्तर तक प्रभावी विस्तार एवं क्रियान्वयन हेतु अमला एवं अधोसंरचना, आंगनबाड़ी के हितग्राहियों के लिये पोषण दरों में मंहगाई अनुसार वृद्धि किए जाने के सुझाव दिए। इसके अलावा उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति एवं निर्माण दरों में वृद्धि, प्रत्येक केंद्रों हेतु बाउंड्रीवाल, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाआंे के सभी ज़िलों में विस्तार करने की आवश्यकता जताई।
रायपुर /शौर्यपथ/
राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का आयोजन राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ऑडिटोरियम में 19 अप्रैल से 21 अप्रैल तक किया जाएगा। राष्ट्रीय महोत्सव का उद्घाटन 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे तथा समापन 21 अप्रैल को राज्यपाल अनुसुईया उइके के मुख्य आतिथ्य में होगा। राष्ट्रीय स्तर के तीन दिवसीय आयोजन में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव, राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य प्रदर्शन और राज्य स्तरीय कला एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन होगा। यह आयोजन आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित किया गया है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज अपने निवास कार्यालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की तथा संबंधितों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंत्री डॉ.टेकाम ने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान राज्य के विभिन्न अंचलों के जनजातीय समुदाय के प्रबुद्ध व्यक्तियों, समाज प्रमुखों, साहित्यकारों एवं कला मर्मज्ञों को भी आमंत्रित किया जाए। महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में बस्तर बैंड का प्रदर्शन, बाल कलाकार सहदेव नेताम और जनजातीय नृत्य मुख्य आकर्षक होंगे। साहित्य सम्मेलन को पद्मश्री साहित्यकार श्री हलधर नाग भी सम्बोधित करेंगे। बैठक में सचिव आदिमजाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास श्री डी.डी.सिंह, आयुक्त श्रीमती शम्मी आबिदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
समकालीन साहित्य परिचर्चा
राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव की तैयारियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि समारोह आयोजन का मुख्य उद्देश्य देशभर में पारम्परिक एवं समकालीन साहित्य से परिचय तथा आधुनिक संदर्भ में उनके विकास की स्थिति ज्ञात करना है। साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य में जनजातीय साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे शोधार्थियों, साहित्यकारों, रचनाकारों को मंच प्रदान कर जनजातीय साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करना है।
राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव को दो भागों- शोधपत्र पठन और वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ परिचर्चा में विभाजित किया गया है। शोधपत्र पठन के अंतर्गत देशभर से जनजातीय साहित्य पर आधारित शोध पत्र राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों, विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के माध्यम से आमंत्रित किए गए हैं। इसी प्रकार वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ परिचर्चा में देशभर के जनजातीय साहित्य से संबंधित विभिन्न विषयों के स्थापित एवं नवोदित साहित्यकारों को आमंत्रित कर जनजातीय परम्परा में साहित्य तथा वर्तमान स्थिति, जनजातीय कथाएं, जनजातीय कविताएं, पुरखा साहित्य आदि पर परिचर्चा कराई जाएगी। इसके फलस्वरूप जनजातीय साहित्य की विभिन्न विधाओं की जानकारी के साथ ही इसमें विभिन्न रचनाकारों द्वारा किए जा रहे साहित्य सृजन के अभिनव प्रयासों से आम तथा सुधीजन परिचित हो सकेंगे, जो जनजातीय साहित्य के संरक्षण एवं विकास में उपयोगी होगा।
जनजातीय विषयों के लेखक और शोधार्थियों का संगम
साहित्य महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से जनजातीय विषयों पर लेखन कार्य करने वाले जनजातीय एवं गैरजनजातीय स्थापित एवं विख्यात साहित्यकारों, रचनाकारों, विश्वविद्यालयों के अध्येताओं, शोधार्थियों, विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। अब तक 80 शोधपत्र प्राप्त हो चुके हैं। शोध पत्रों के सारांश को पुस्तक आकार देने प्रकाशन की तैयारी चल रही है। शोधार्थियों को कार्यक्रम में शोध पढ़ने के लिए आमंत्रण भेजा जा चुका है। वरिष्ठ साहित्यकारों और विद्वानों के साथ परिचर्चा के लिए देश के विभिन्न जनजातीय राज्यों एवं विश्वविद्यालयों से लगभग 28 प्रोफेसरों एवं साहित्यकारों की सहमति प्राप्त हो चुकी है। छत्तीसगढ़ राज्य के भी विद्वान जो महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं जनजातीय क्षेत्रों में है, उनकों भी आमंत्रित किया गया है।
विविध कला प्रतियोगिता
साहित्य महोत्सव के अंतर्गत कला एवं चित्रकला प्रतियोगिता तीन आयु वर्गांे में चित्रकला प्रतियोगिता के लिए राज्यभर के प्रविष्टियां आमंत्रित हो गई हैं। अब तक तीनों आयु वर्गो में 100 प्रविष्टियां प्राप्त हो गई हैं। इसके अतिरिक्त हस्तकला के अंतर्गत माटी, बांस, बेलमेटल, काष्ठकला आदि का भी जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। इन कलाओं में अच्छे प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के विभिन्न नृत्य विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों में किए जाने वाले जनजातीय नृत्य शैला, सरहुल, करमा, सोन्दो, कुडुक, डुंडा, दशहरा करमा, विवाह नृत्य (हुल्की), मड़ई नृत्य, गवरसिंह, गेड़ी, करसाड़, मांदरी, डण्डार आदि नृत्यों का प्रदर्शन तीनों दिन संध्या काल में किया जाएगा।
पुस्तक मेला
महोत्सव में पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों जो जनजातीय विषयों पर विशेष रूप से प्रकाशन किया है, ऐसे 10 प्रकाशकों को आमंत्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के दो प्रकाशक, भोपाल से वन्या प्रकाशन की प्रदर्शनी एवं इन सभी से सहमति प्राप्त हो गई है। पुस्तक स्टालों के लिए ऑडिटोरियम की आंतरिक परिसर की गैलरी में व्यवस्था की गई है। इसके अलावा प्रदर्शन सह विक्रय के 30 स्टॉल लगाए जा रहे हैं। उनमें हस्तकलाओं से संबंधित स्टॉल के लिए हस्तकला बोर्ड एवं माटी कला बोर्ड से स्टॉल लगाए जाएंगे। वन विभाग का संजीवनी, वनोपज एवं वन औषधि, जनजातीय चित्रकला की प्रदर्शनी, गढ़कलेवा, बस्तरिहा व्यंजन, आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की प्रदर्शनी, अंत्याव्यवसायी निगम की विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनी, ट्राईफेड आदि के स्टॉल लगाए जाएंगे। इन सभी से भी सहमति प्राप्त हो गई है।
रायपुर /शौर्यपथ/
आजादी के अमृत उत्सव पर छत्तीसगढ़ के योगदान पर डाला प्रकाश
खाद्य और संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से प्रतिनिधि के रूप में आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में शामिल हुए। यह सम्मेलन केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया। मंत्री भगत ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में आज़ादी के अमृत महोत्सव की प्रगति की जानकारी दी। सम्मेलन का उद्घाटन केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने किया।
सम्मेलन का उद्देश्य आज़ादी का अमृत महोत्सव अभियान में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मंत्री भगत ने छत्तीसगढ़ के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा’, भगत सिंह की इन पंक्तियों के साथ संस्कृति मंत्री ने अपने वक्तव्य की शुरुआत की। अपने वक्तव्य में उन्होंने आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत छत्तीसगढ़ में हुए कार्यक्रम के बारे में विस्तार से अपनी बात रखी। आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत छत्तीसगढ़ में 12 मार्च 2021 से 15 अगस्त 2022 तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। आज़ादी का अमृत महोत्सव के तहत छत्तीसगढ़ के स्वाधीनता सेनानियों के योगदान से छत्तीसगढ़ वासियों को अवगत कराया गया।
संस्कृति मंत्री भगत ने कहा कि “आजादी का अमृत महोत्सव को भव्य और उचित तरीके से मनाने के लिए अपने राज्य की विकास यात्रा में देश की आजादी की यात्रा से संबंधित चार सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं- सन् 1921 का जिला राजनीतिक सम्मेलन, असहयोग आंदोलन, शहीद वीरनारायण सिंह का विद्रोह और जंगल सत्याग्रह का विवरण केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय को उपलब्ध कराया गया है।
मंत्री भगत ने भविष्य की योजनाओं से अवगत कराते हुए कहा कि सिरपुर व पुरखौती मुक्तांगन को फिल्म योजना के माध्यम से आज़ादी के अमृत महोत्सव में शामिल किये जाने की योजना है।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके से आज यहां राजभवन में श्री उदय शदाणी ने मुलाकात की। राज्यपाल उइके के जन्म दिवस के अवसर पर उदय शदाणी ने शदाणी दरबार के संत श्री युधिष्ठिर महाराज की ओेर से सुश्री उइके को जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी तथा उइके को शदाणी दरबार की ओर से सम्मान स्वरूप सरोपा एवं प्रसाद भेंट की। इस अवसर पर नंदलाल साहित्या, विशिष्ट चावला एवं विशाल चेलानी उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके से आज यहां राजभवन में वाराणासी के स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने मुलाकात की। राज्यपाल उइके ने स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी को सम्मान स्वरूप शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट की। इस अवसर पर रोहित कुमार सिंह एवं मनोज गोयल उपस्थित थे।
रायपुर /शौर्यपथ/
मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग के काम में महिलाओं के लिए खोला दरवाजा, घर-घर जाकर तैयार कर रही है बिजली बिल
कोरिया जिले की भारती ने मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग के क्षेत्र में भी महिलाओं के लिए रोजगार का दरवाजा खोल दिया है। अब तक पुरूषों के ही वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में वह कोरिया जिले की पहली महिला है जो यह काम कर रही है। इस काम में अब तक अधिकांशतः पुरूषों को ही देखा गया है। पर इस परिपाटी से अलग अब कोरिया जिले की महिलाएं मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग के काम में भी अपना कौशल आजमा रही हैं।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के बड़काबहरा में गठित जय लक्ष्मी महिला स्वसहायता समूह की सदस्य भारती विगत मार्च महीने से यह काम कर रही है। भारती अब तक करीब 700 घरों में बिजली के मीटर की रीडिंग कर स्पॉट बिलिंग कर चुकी है। अपने काम के शुरूआती मार्च महीने में ही उसने प्रथम बैच में 218 और दूसरे बैच में 200 बिल तैयार किए हैं। चालू अप्रैल माह में भी वह प्रथम बैच में अभी तक 270 घरों में मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग कर लोगों को बिजली बिल उपलब्ध करा चुकी है।
कोरिया जिला प्रशासन की पहल पर मीटर रीडर की जरूरत वाले गांवों में ‘बिहान’ की स्वसहायता समूहों की महिलाओं को इस काम से जोड़ा जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में अलग-अलग गांव की पांच महिलाओं का चयन इसके लिए किया गया है। बड़काबहरा की भारती भी इन्हीं महिलाओं में शामिल है। सीएसईबी से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वह अपने नए कार्यक्षेत्र में उतर चुकी है। उसे देखकर अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं। मीटर रीडर्स को ग्रामीण क्षेत्रों में सात रूपए प्रति रीडिंग और शहरी इलाकों में पांच रूपए प्रति रीडिंग की दर से भुगतान किया जाता है।
रायपुर /शौर्यपथ/
बेहतरी सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गाें की खुशहाली और बेहतरी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में महिलाओं और बच्चों के हितों के संरक्षण और उनकी बेहतरी के लिए कई अभिनव योजनाएं संचालित की जा रही है। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और उनके स्वास्थ्य के स्तर को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान सहित अन्य कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिससे राज्य में महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।
बेहतरी सरकार की प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ में एकीकृत बाल विकास सेवा मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, वजन त्यौहार तथा नवा जतन जैसी योजनाओं एवं मुख्यमंत्री पोषण अभियाान के समन्वित प्रयास से विगत तीन वर्षाें के दौरान कुपोषण में 8.7 प्रतिशत की कमी आई है। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं। कुपोषित बच्चों में अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचलों के थे। राज्य सरकार ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत 2 अक्टूबर 2019 से की। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने की रणनीति तैयार की गई है। योजना शुरू होने के समय वर्ष 2019 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 4 लाख 33 हजार 541 बच्चे कुपोषित थे।
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के चलते राज्य में अब तक 1,72,000 से अधिक बच्चे अब कुपोषण मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों की संख्या मे कुल 39 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य में 85 हजार महिलाएं एनीमिया से मुक्त हो चुकी हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के मुताबिक राज्य में कुपोषण का प्रतिशत 31.3 है जो कुपोषण के राष्ट्रीय औसत से 32.1 प्रतिशत से कम है।
राज्य में महिलाओं और बच्चों को पोषण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान कुपोषित महिलाओं, शिशुवती महिलाओं एवं शाला त्यागी किशोरियों एवं 51,455 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लगभग 27 लाख हितग्राहियों को भी घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट फूड वितरित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य में कौशल्या मातृत्व योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत महिलाओं के पोषण में सुधार के लिए द्वितीय संतान बालिका के जन्म पर राज्य द्वारा 5 हजार रूपये की एकमुश्त सहायता राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अब राशि को 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दिया गया है। बढ़ी हुई दर से जरूरतमंद परिवारों की लगभग 8 हजार कन्याओं का विवाह सम्पन्न कराया गया जा चुका है।
छत्तीसगढ़ में सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से प्रदेश में 27 जिलों में पीड़ित व संकटग्रस्त, जरूरतमंद महिलाओं को उनके आवश्यकतानुसार सुविधा और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन सेंटरों में विगत तीन वर्ष की अवधि में 8 हजार 826 प्रकरणों का निराकरण किया गया और 3 हजार 694 प्रकरणों में महिलाओं को आश्रय सुविधा प्रदान की
गई। महिला हेल्प लाईन 181 के माध्यम से 2 हजार 793 प्रकरणों का निराकरण किया गया है।
राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों को स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए 2 लाख रूपए का ऋण प्रदान करने की व्यवस्था सक्षम योजना के तहत की गई है। छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से ऋण लेने वाले महिला स्व-सहायता समूहों पर लगभग 13 करोड़ रूपए का ऋण लंबित होने के कारण इनके काम-काज ठप्प हो गए थे। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा वितरित महिला समूहों का 12 करोड़ 77 लाख का बकाया ऋण माफ करने के साथ ही इस योजना में दिए जाने वाले ऋण की सीमा को भी बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। छत्तीसगढ़ महिला कोष के लिए वर्ष 2018-19 की तुलना में इस साल बजट के प्रावधान में 30 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 5 करोड़ 20 लाख का प्रावधान किया गया है।
महिलाओं एवं बच्चों की सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय पर बढ़ोत्तरी की गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 6500 रूपए और सहायिकाओं का 2500 रूपए से बढ़ाकर 3250 रूपए कर दिया गया है। मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का 3250 रूपए से बढ़कर 4500 रूपए किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मृत्यु पर 10 हजार रूपए अनुग्रह राशि प्रदान की जाती थी, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने बढ़ाकर 50 हजार रूपए कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवानिवृत्ति पर किसी प्रकार की वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं था, अब कार्यकर्ताओं को सेवानिवृत्ति पर 50 हजार रूपए और सहायिकाओं को सेवानिवृत्ति पर 25 हजार रूपए देने का प्रावधान किया गया है।
रायपुर /शौर्यपथ/
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
राज्यपाल ने कहा कि भगवान महावीर ने विश्व कल्याण के लिए सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य का संदेश दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, आडम्बरों और कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। भगवान महावीर के सिद्धांत और उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं। उनके जीवन से हमें अनुशासन, तप और संयम की शिक्षा मिलती है। भगवान महावीर का अहिंसा का दर्शन विश्व से हिंसा व आतंकवाद समाप्त कर शांति और सद्भाव स्थापना का सन्देश देता है।
राज्यपाल उइके ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि भगवान महावीर के संदेशों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारें तथा शांति व सद्भाव के साथ अपने आपसी रिश्तों को मजबूत बनाएं।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
