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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
Rajshekhar Nair/Dhamtri Shorypath
छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अभिनव पहल के रूप में जनहित में संयुक्त प्रयास के तौर पर ई-मेगा कैंप आज आयोजित किया गया है। आज सुबह 10.30 बजे इस शिविर का विधिवत उद्घाटन बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय से न्यायाधीश और कार्यपालक अध्यक्ष राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्री प्रशांत कुमार मिश्र द्वारा किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक साथ राज्य के 23 जिले और 64 तहसील इस शिविर से जुड़े रहे। इस मौके पर न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि कोविड 19 के संकटकाल में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंच, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का प्रयास है। परिणामस्वरूप आज की तिथि में राज्य भर के 4,40,337 लाभार्थियों को विभिन्न विभागीय योजान्तर्गत 111 करोड़ रुपए का लाभ इस शिविर के जरिए पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि पूरे नवंबर माह में यह अभियान चलाया जाएगा, जिससे कि अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच कर उन्हें लाभ पहुंचाया जा सके। इस मौके पर उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को विभागीय योजनाओं सम्बन्धी कोई शिकायत है, तो राज्य विधिक सेवा के टोल फ्री नंबर 15100 में शिकायत कर सकता है। प्रयास रहेगा कि उनकी शिकायत को जल्द से जल्द जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सम्बन्धित विभाग तक पहुंचा कर हितग्राही को लाभान्वित किया जाए।
उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए न्यायाधीश श्री प्रशांत कुमार मिश्रा ने यह भी बताया कि आज राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जनचेतना यू-ट्यूब चैनल पर मूक-बधिर हितग्राहियों के लिए सद्भावना जागरूकता श्रृंखला लाॅंच की गई है। उम्मीद है कि इससे मूक-बधिर हितग्राहियों को विधिक सेवा सम्बन्धी जानकारी मिलने में आसानी होगी। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि न्याय की परिभाषा केवल न्यायालय में मिलने वाले न्याय तक सीमित नहीं, वरन् आर्थिक सामाजिक न्याय भी इसमें समाहित है। इसके मद्देनजर न्यायाधीश श्री मिश्रा ने उम्मीद की कि संविधान की मूल भावना को जिंदा रख हर व्यक्ति को लाभ पहुंचाने सभी मिलजुलकर कार्य करेंगे।
उद्घाटन सत्र के मौके पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, उच्च न्यायालय कम्प्यूटराईजेशन कमेटी श्री मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड 19 संक्रमणकाल में अंतिम छोर के व्यक्ति तक विधिक सेवा तथा विभागीय जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने यह ई-मेगा शिविर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब जनसेवक हैं, जिनका मूल कार्य जनता की सेवा है, अतः सामूहिक प्रयास से लोगों को लाभ पहुंचाने का उद्देश्य है। उन्होंने अपने वक्तव्य में न्याय की परिभाषा से सबको अवगत कराया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति श्री गौतम भादुड़ी ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री प्रशांत कुमार मिश्रा का साधुवाद करते हुए कहा कि कोविड 19 के संक्रमणकाल में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए राज्य में एक साथ ई मेगा कैंप के जरिए शासन की कल्याणकारी योजनाओं तथा विधिक सेवाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने सबका आह्वाहन किया कि अंतिम छोर के व्यक्ति तक शिविर का लाभ पहुंचे, इसके लिए सभी प्रभावी तरीके से काम करें। ज्ञात हो कि उद्घाटन सत्र के मौके पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जनचेतना यूट्यूब चैनल पर सदभावना विधिक जागरूकता श्रृंखला को अतिथियों द्वारा लाॅंच किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार विजिलेंस/इन्चार्ज रजिस्ट्रार जनरल श्री दीपक कुमार तिवारी ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सिद्धार्थ अग्रवाल द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र के बाद जिला स्तर पर ई मेगा कैंप को संबोधित करते हुए जिला और सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुधीर कुमार ने एन.आई.सी. के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल से ई मेगा कैंप में ब्लॉक से जुड़े अधिकारी और हितग्राहियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देश में जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा प्रशासन के संयुक्त प्रयास से यह ई मेगा शिविर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इस मौके पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी वीसी के माध्यम से दी।
कलेक्टर श्री जय प्रकाश मौर्य ने इस मौके पर अपने उद्बोधन में बताया कि न्याय की अवधारणा वृहद है, केवल न्यायालय से मिले न्याय तक यह सीमित नहीं है। न्यायालय के अलावा विभागीय जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभ पहुंचाना भी सम्मिलित है। विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत अगले एक माह तक लगातार लोगों को जागरूक करते हुए विभागीय योजनाओं के प्रति ना केवल जागरूक किया जाए, बल्कि उन्हें अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने ब्लॉक से जुड़े सभी अधिकारियों को इसके लिए काम करते रहने कहा है। उन्होंने बताया कि वे हर समय-सीमा की बैठक में इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक श्री बी.पी. राजभानू ने आश्वस्त किया कि पुलिस प्रशासन विधिक सेवा तथा जनकल्याणकारी सम्बन्धी योजनाओं के क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करेगा।
इस मौके पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्रीमती नम्रता गांधी, वनमण्डलाधिकारी श्री अमिताभ बाजपेई ने भी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में वीडियो काॅन्फ्रेंस में ई-मेगा कैम्प से जुड़े नगर निगम आयुक्त, श्रम, आदिवासी विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग ने भी विभागीय योजनाओं से शिविर में लोगों को अवगत कराया। इस मौके पर सभी ब्लॉक से जुड़े 25-25 हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से लाभान्वित किया गया। कलेक्टर श्री मौर्य ने धमतरी ब्लॉक, जिला एवं सत्र न्यायधीश ने कुरूद, पुलिस अधीक्षक ने नगरी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने मगरलोड के हितग्राहियों के नाम का वाचन किया। ज्ञात हो कि आज इस ई-मेगा शिविर में जिले के चार हजार से अधिक हितग्राहियों को एक करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक का आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा आय, जाति, निवास, जन्म, मृत्यु पंजीयन, भवन अनुज्ञा, सम्पत्ति कर प्रमाण पत्र, सम्पत्ति नामांतरण, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन, राशनकार्ड इत्यादि का भी वितरण किया गया। जिला स्तर पर आयोजित ई-मेगा कैम्प के कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सतीश कुमार खाखा ने किया। इस मौके पर अपर कलेक्टर श्री दिलीप कुमार अग्रवाल भी मौजूद रहे।
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में समाज के कमजोर लोगों, आदिवासियों, किसानों, श्रमिकों के कल्याण तथा उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मानना है कि छत्तीसगढ़ में किसानों को आगे बढ़ाकर, मजबूत व आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर ही राज्य को खुशहाल बनाया जा सकता है। वे जानते हैं कि किसान विकास की पूंजी है। गांव की तरक्की में ही देश की तरक्की है। इसलिए 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही किसानों से 2500 रू. प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के अपने वायदे को पूरा किया। वर्षों से लंबित 17 लाख 82 हजार किसानों का 8 हजार 755 करोड़ रू. का कृषि ऋण और 244 करोड़ रू. का सिंचाई कर माफ किया। ग्राम सुराजी योजना के तहत नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ के माध्यम से गांवों की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को नया जीवन देने की पहल की। बस्तर के लोहंडीगुड़ा में 1700 से अधिक आदिवासी किसानों की 4200 एकड़ जमीन वापिस कर दी। तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 2500 रू. प्रति मानक बोरा से बढ़ा कर 4000 रू. प्रति मानक बोरा कर दिया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री बघेल ने जब प्रदेश के किसानों से 2500 रूपए प्रति क्ंिवटल में धान खरीदने में बाधा आई तो किसानों के हित में हरसंभव कदम उठाने का प्रण लिया। इस बीच अचानक कोरोना संक्रमण का खतरा और देशव्यापी लॉकडाउन से किसान भी अनेक मुसीबतों से घिर गए। इन विपरीत परिस्थितियों में मुख्यमंत्री ने किसानों से किया अपना वादा निभाया और 21 मई को राजीव गांधी जी के शहादत दिवस पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू कर किसानों के खातों में 1500 करोड़ रूपए की प्रथम किश्त की प्रोत्साहन राशि अंतरित। लॉक डाउन अवधि में किसानों को सीधे मदद पहुचाकर मुख्यमंत्री श्री बघेल ने देश को रास्ता दिखाने का काम किया कि किस तरह हम अपने देश के अन्नदाता को मुसीबत से उबार सकते हैं और नकदी देकर अर्थव्यवस्था को भी सुधार सकते हैं।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में 19 लाख से अधिक किसानों को 5750 करोड़ रू. की राशि का भुगतान 4 किस्तों में किया जा रहा है। पहली किस्त 1500 करोड़ रूपए 21 मई को किसानों की खाते में देने के बाद दूसरी किस्त 20 अगस्त को राजीव गांधी जी के जन्म दिन के अवसर पर किसानों के खाते में जमा की गई थी। आज एक नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर किसानों को तीसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ रूपए की राशि दी जाएगी। निश्चित ही यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए कोरोना संकट काल में एक वरदान साबित हुई है। इससे किसानों को खेती-किसानी के लिए संबल मिला है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गतिशील बनाने में जुटे हैं। अपनी दूरदर्शी सोच से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ का जो उन्होंने खाका बुना था अब वह धरातल पर सफलता पूर्वक साकार होता दिखाई देने लगा है। प्रदेश में 5600 गौठान स्वीकृत होने के साथ 5454 पूर्ण हो चुके हैं। इन गौठानों में रोजगार के अवसर तो बने ही, साथ ही यहां तैयार जैविक खाद और इसकी उपयोगिता ने गोबर की महत्ता को भी बढ़ाया है। देश में एक अलग तरह की योजना गोधन न्याय योजना की शुरूआत भी इन्हीं उपयोगिताओं और महत्व का परिणाम है। किसानों से 2 रुपए प्रति किलो गोबर खरीदकर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नये अध्याय की शुरूआत की है। गोधन न्याय योजना ने देश भर में प्रशंसा बटोरी है। इस योजना में गोबर बेचने वाले किसानों, पशुपालकों एवं ग्रामीणों अब तक 39 करोड़ रूपए का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा चुका है। निश्चित ही इन प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था संवरने के साथ पर्यावरण संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
कोरोना संक्रमण काल में लॉकडाउन के दौरान भी प्रदेश के मुख्यमंत्री गरीबों के मसीहा बने। उन्होंने इस संकटकाल में राशन कार्डधारियों सहित प्रवासी मजदूर परिवारों के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था कराई। जरूरतमंदों को निःशुल्क खाद्यान्न देने के साथ आंगनबाड़ी, स्कूल से जुड़े बच्चों को सूखा अनाज घर-घर तक देने का काम किया। मनरेगा के तहत काम और समय पर मजदूरी भुगतान, लघु वनोपज संग्रह के लिए पारिश्रमिक देने में भी छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है।
छत्तीसगढ़ की एक तिहाई जनसंख्या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की है। सरकार द्वार इन वर्गों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी को वन अधिकार मान्यता पत्र देकर आदिवासियों के सांस्कृति एवं पारम्परिक विरासतों को सहेजने और पर्यावरण संतुलन को स्थापित रखने में भी कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य सबसे अधिक वन अधिकार पत्र देने वाला राज्य भी बन गया है। प्रदेश में 12.50 लाख वन क्षेत्र के निवासी है, जो तेंदूपत्ता संग्रहण करते हैं। ऐसे संग्राहकों के लिए श्री शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना लागू कर सुरक्षा लागू की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार का समाज के सभी वर्गों के कल्याण एवं गांवों में खुशहाली लाने और लोगों को स्वावलंबी बनाने का प्रयास सराहनीय है।
रायपुर / शौर्यपथ /मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्योत्सव पर एक नवम्बर को प्रदेश में स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना का शुभारंभ करेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए इस योजना के तहत अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में राज्य में 52 इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू किए जा रहे हैं। उत्कृष्ट शिक्षा का संकल्प लिए अंग्रेजी माध्यम के इन स्कूलों में अध्ययन-अध्यापन की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। इन स्कूलों में अत्याधुनिक लाइब्रेरी एवं लैब, कम्प्यूटर और साइंस लैब के साथ ही ऑनलाईन शिक्षा की भी पूरी सुविधा उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इन स्कूलों को विकसित करने हेतु 130 करोड़ रूपए प्रदान किए गए हैं।
शिक्षा हर समाज और देश की प्रगति का प्रतिबिम्ब है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सकारात्मक सोच से छत्तीसगढ़ सरकार ने उन परिवारों के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया है जो कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से अपने बच्चों को महंगे अंग्रेजी निजी स्कूलों में शिक्षा दिलाने में समर्थ नहीं थे। छत्तीसगढ़ शासन ने गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों के बेहतर शिक्षा के प्रबंध में एक और कड़ी को शामिल कर लिया है। यह कड़ी अंग्रेजी मीडियम के सरकारी स्कूल हैं, जहां बच्चों को मुफ्त में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से दिए जाने की पहल शुरू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ जैसे हिन्दी भाषी राज्य के छात्रों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की सभी प्रकार की प्रतियोगिताओं के काबिल बनाने के उद्देश्य से अंग्रेजी मीडियम में अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्वामी आत्मानंद के नाम से इंग्लिश मीडियम के स्कूल की शुरूआत की गई है। प्रथम चरण राज्य में 52 इंग्लिश मीडियम स्कूल राज्य में शुरू किए जा रहे हैं। आगामी शिक्षा सत्र से 100 और नये इंग्लिश मीडियम स्कूल ब्लॉक मुख्यालयों में खोले जाएंगे।
यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में जन्मे स्वामी आत्मानंद की स्मृति को अक्षुण्य बनाए रखने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके नाम से इंग्लिश मीडियम में राज्य के बच्चों को सहजता से शिक्षा उपलब्ध कराने की सराहनीय पहल की है। स्वामी आत्मानंद जी ने अपनी प्रतिभा एवं शिक्षा की बदौलत आईएएस के रूप में चयनित होकर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया था। स्वामी आत्मानंद आजीवन जनकल्याण के कार्यों में लगे रहे और पीड़ित मानवता की सेवा का संदेश दिया। उनके सपनों को साकार करने छत्तीसगढ़ सरकार ने गुणवत्ता युक्त शिक्षा की अलख जगाकर ‘नवा छत्तीसगढ़’ गढ़ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना के माध्यम से प्रदेश के 52 शासकीय विद्यालयों को सर्व सुविधायुक्त अंग्रेजी स्कूलों में उन्नत किया है।
वर्तमान शैक्षणिक सत्र से अंग्रेजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों और उनके पालकों के चेहरों पर मुस्कान है। अब उनकी आर्थिक मजबूरियां शिक्षा में अवरोध नहीं बनेगी, यह आत्मविश्वास और सुकून उन्हें है। इन स्कूलों की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं की वजह से निम्न आय वर्ग के साथ ही चिकित्सक, शासकीय सेवाओं में संलग्न अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षक, व्यवसायी सभी अपने बच्चों का भविष्य संवारने इन स्कूलों में दाखिला करवा रहे हैं।
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उच्च शैक्षणिक वातावरण में खेल एवं कलात्मक गतिविधियों से बच्चों में उनकी रचनात्मकता-भौतिकता को नया आयाम देने सुविधायुक्त खेल मैदान, एम्फीथिएटर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। खूबसूरत डिजाइन में तैयार विद्यालय भवन भी बच्चों को प्रेरित कर आत्म सम्मान का भाव विकसित करे, इसके लिए भवन की डिजाइन भी आकर्षक है। ऐसे प्राचार्यों का चयन किया है जो न केवल पढ़ाई और प्रबंधन में विशेष योग्यता हासिल किए है बल्कि उनमें अपनी संस्था को सर्वोत्तम बनाने का जज्बा भी है।
इन उत्कृष्ट स्कूलों में गुणवत्ता हेतु जिलों को स्वायत्तता प्रदान की गई है जिससे स्कूल के प्रबंधन और शिक्षकों का चयन सावधानी पूर्वक किया जा सके। उन्हें ऑनलाईन उत्कृष्ट प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। कोविड-19 के चलते जहां शासन द्वारा सभी स्कूल बंद है। वहीं इन स्कूलों में ऑनलाईन कक्षाओं के साथ ही खेल, कला, सांस्कृतिक सहित अन्य गतिविधियां भी संचालित की जा रही है। गुणवत्तायुक्त अध्ययन और स्कूल प्रबंधन को अनुशासित स्वरूप देने उत्कृष्ट शिक्षक चयनित किए गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए इन उत्कृष्ट विद्यालयों के बारे में पालकों, शिक्षकों और बच्चों की राय है कि छत्तीसगढ़ सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से अब समाज का हर वर्ग, पूर्ण समानता के साथ अपने सपनों को साकार करेगा और बच्चों का भविष्य स्वर्णिम होगा।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
